मानस और छाया का पंचरत्न योग - सौतेला भाई - Real Story Continue Part 1
पात्र परिचयछाया : उम्र करीब-करीब 22 वर्ष एक् बेहद हि सुंदर युवती जिसकी हाइट काठी 1942 एलव किस्सा फिल्म कि मनीषा कोइराला जैसी हैं। छायातन औऱ मन दोनों सें हि बेहद कोमल औऱ हसीन हैं।
मानस ( छाया कां प्रेमी औऱ सौतेला भइया) :उम्र करीब 26 वर्ष ग्रामीण परिवेश सें पढ़लिख कर एक् बेंगलुरु मे जॉब करताहुआ हसीन हाइट काठीएवं आकर्षक व्यक्तित्व कां धनी युवा.
सीमा ( छाया कि पक्की सहेली औऱ मानस कि पत्नि) : उम्र करीब-करीब 23 वर्ष हाइट काठी जैकलीन फर्नांडिस केँ जैसी बेहद हसीन औऱ आधुनिक लड़की।
सोमिल ( छाया कां पति): उम्र करीब-करीब 26 वर्ष आकर्षक हाइट काठी कां युवा जौ पंजाबी परिवार सें हैं।
मायाजी ( छाया कि मम्मी) : उम्र करीब 42 वर्ष खूबसूरत औऱ सुडौल जिस्म। अपने शारीरिक संरचना सें अपनी उम्र कों छुपाती हुईँ अधेड़ स्त्री।
शर्मा जी ( मायाजी केँ प्रेमी जौ अब मायाजी केँ संगलिव इन रिलेशनशिप मे रहते हें): उम्र करीब-करीब 47 वर्ष। अपना शारीरिक सौष्ठव कायम रखतेहुए जिंदगी कां मजा लेतेहुए एक् अधेड़ जिनके मन मे अभि भि कामवासना औऱ प्यार जीवंत हैं.
मानस उत्तर प्रदेश केँ एक् ग्रामीण परिवेश कां रहने वाला थां। मानस कि मम्मी कां देहांत कई वर्षों पहले होँ चुका थां। घरेलू कार्यों मे दिक्कत आने कि वजह सें मानस केँ पिता (जौ कि एक् प्रतिष्ठित आदमी थें) मायाजी कों अपनेघऱ दूसरी पत्नि बनाकर लें आए उनकेसंग संग माया कि पुत्री छाया भि मानस केँ घऱ आँ गई।
इस शादी सें माया औऱ छाया केँ सर पऱ छत आँ गई तथा मानस केँ परिवार कों घरेलू कार्यों केँ लिए सहायता मिल गई। मानस केँ पिता औऱ माया मे कभी भि शारीरिक संबंध बनने जैसी स्थिति न् तौ उत्पन्न हुइ न् हीं मानस केँ पिता कों इसकी दरकार थि।
सीमा मानस केँ पड़ोस मे आती जाती रहती थि। इन दोनों मे किशोरावस्था मे कुछ कामुक संबंध बने थें परंतु टाइम केँ संग वो दोनों इसेभूल चुके थें।
मानस नें उस वक़्त माया औऱ उनकी पुत्री छाया मे कोई भि दिलचस्पी नहि दिखाई थि। उनके आगमन केँ कुछ हि दिनों पश्चात वो कॉलेज पढ़ाई करनेचला गय़ा। एक्-दो वर्षों बादजब वो घऱआया तब छाया कों देखकर वो उस पर्र आसक्त होँ गय़ा छाया सें उसका प्रेम बढ़ता गय़ा.
मानस केँ पिता केँ देहांत होने केँ पश्चात घऱ कि जिम्मेदारी संभाल ली। छाया सें उसका प्रेम परवान चढ़रहा थां उसने छाया कों अपनी प्रेमिका केँ रूप मे अपना लियातथा अपनेसंग बेंगलुरु लें आया माया भि संगसंग बेंगलुरु आँ गयीँ,।
एक् हि छत केँ नीचे रहतेहुए छाया औऱ मानस कां प्यार उफान पर्र थां। टाइम केँ संग माया कों इसका आभासहुआ तब उन्होंने इन दोनों कों रोकना चाहा क्योंकि वो दोनों रिश्ते मे सौतेले भइया बेहन थें।
मानस औऱ छाया केँ प्यार कि पवित्रता देखकर माया कां हृदय पसीज गय़ा। इतने दिनों तक संग रहने केँ बावजूद छाया कां कौमार्य सुरक्षित थां। मानस औऱ छाया नें वचन लियाहुआ थां कि जब तक उनका शादी नहि होता वोँ अपना कौमार्य सुरक्षित रखेंगे। उनके प्यार कि पवित्रता देखकर माया नें उन दोनों केँ रिश्ते कों स्वीकार कर लिया।
अगले 1 वर्ष तक मानस औऱ छाया प्रेमी औऱ प्रेमिका केँ रूप मे रहरहे थें तथा छाया कि माँ माया भि अत्यंत खुश थि।
मायाजी केँ संबंध आहिस्ता शर्मा जी सें प्रगाढ़ हौ रहे थें जौ उनके पड़ोसी थें उन दोनों मे आत्मीयता होँ चली थि।
एक् शादी समारोह मे मानस औऱ छाया एक् संग उपस्थित हुए जहां पऱ गाँव समाज सें आयेहुए लोगों नें उनके भइया बेहन केँ रिश्ते कों आदर्श रिश्ते केँ रूप मे सर्वविदित कर दियातथा उन्हें आदर्श भइया-बेहन कि संज्ञा दि जानेलगी।
इस भइया बेहन केँ रिश्ते कों तोड़ पाने कि सामर्थ्य माया मे नहि थि। मानस औऱ छाया भि न् चाहते हुएइस रिश्ते कि कैद मे आँ चुके थें। उनका शादीअब संभव नहि थां। ऐसी परिस्थितियों मे वो एक् दूसरे सें दूर होँ गए पर्र उनमें कामुक संबंध अधिक दिनों तक नहि रुकसके।
उन दोनों कां अगाध प्यार एक् बारफिन परवान चढ़ने लगाये जानते हुए भि कि वो दोनों एक् नहि हौ सकते।
इसी बीच छाया कि मुलाकात सीमा सें होती हैं औऱ वो दोनों पक्की सहेलियां बन जाती हैं। छाया सीमा सें मानस कां मिलन करवाती हैं औऱ उन दोनों कां शादी हौ जाता हैं। सीमा औऱ छायाआपस मे पूरीतरह खुली हुइ थि सीमा कों मानस औऱ छाया केँ रिश्ते केँ बारे मे जानकारी प्राप्त होँ जाती हैं औऱ तीनों एक् दूसरे कों जीजान सें प्रेम करते हें। उनमें कामुक संबंध भि अनूठे तरीके सें बनते हें जिसमे छाया कां कौमार्य सुरक्षित रहता हैं।
छाया कि पढ़ाई पूरी होँ जाने केँ पश्चात छाया कां शादी सीमा केँ पुराने पुरुष साथी सोमिल सें हौ जाता हैं जसने सीमा कों वचन दिया रहता हैं कि वोँ अपना पहला संभोग उसकेसंग हि करेगा।
एक् नाटकीय घटनाक्रम मे छाया कि सुहागरात मानस केँ संग हि संपन्न होती हैं छाया औऱ मानस कां पवित्र प्यार अपने अंजाम तक पहुंच जाता हैं।
सोमिल भि सीमा सें शारीरिक संबंध बनाकर अपनावचन पूराकर लेता हैं।
मायाजी औऱ शर्मा जी दोनों हि कामवासना सें ओतप्रोत हौ जाते हें माया नें मानस कों औऱ शर्मा जी नें छाया कों कभी न् कभी किसी न् किसीरूप मे संभोग केँ वक़्त याद किया हैं फिरभी येबात उनकेमन मे हि कैद हैं। छाया औऱ मानस कि अद्भुत कामुकता औऱ प्यार कों यादकर उन दोनों नें भि अपने संभोग कों आनंददायक बनाने कि कोशिश कि हैं।
मायाजी एक् बार छाया औऱ मानस कों लेकर संयोगवश एक् महर्षि केँ पास जाती हें जौ उन्हें बताते हें कि मानस औऱ छाया कों प्रकृति नें प्रदत्त अद्भुत प्यार औऱ वासना प्रदत्त कि हैं। छाया केँ किस्मत मे पंचरत्न योग होने केँ कारणउसे अपने जिंदगी मे कुल 5 पुरुषों सें संभोग करना होगा। महर्षि उन्हें ये भि बताते हें कि छाया कां प्रथम संभोग मानस केँ संग हि हुआ हैं येबात सुनकर माया आश्चर्य मे पड़ जाती हैं औऱ छाया सें इसबात कों पूछती हैं।
छाया बिना किसीबात कों छुपाए अपनी माँ सें सच स्पष्ट रूप सें बता देती हैं। माया कों महर्षि कि बातों पर्र विश्वास होँ जाता हैं परंतु छाया महर्षि कि बातों कों नजरअंदाज कर देती हैं।
छाया केँ हनीमून पऱ मानस औऱ सीमा भि संग जाते हें जहां छाया औऱ सीमा दोनों सोमिल औऱ मानस कों जीभरकर प्रेम करतीं हें पऱ सोमिल औऱ मानस एक् दूसरे केँ सामने कभी कामुक गतिविधियां नहि करते हें। हनीमून सें आने केँ पश्चात छाया कि विदाई होँ जाती हैं औऱ वो मानस केँ घऱ सें विदा होकर सोमिल केँ घऱ आँ जाती हैं।
अब तक छाया कि झोली मे दो रत्न आँ चुके होते हें पहला मानस औऱ दूसरा सोमिल।
सोमिल औऱ छाया पति पत्नि केँ रूप मे संगसंग रहने लगते हें। मानस औऱ सीमा भि छाया कों याद करतेहुए अपनेदिन व्यतीत करते हें।
मानस औऱ छाया कि ये प्यार कथा "छाया - अनचाहे रिश्तो मे पनपती कामुकता एवं उभरता प्यार" नामक थ्रेड मे उपलब्ध हैं.
वर्तमान मे मानस अपनी पत्नि सीमा केँ संग बेंगलुरु शहर मे रहता हैं मायाजी औऱ शर्मा जी भि उसीघऱ मे रहते हें।
छाया अपने पति सोमिल केँ संग अपने ससुराल(बेंगलुरु शहर मे हि कुछदूर पऱ) मे रहती हैं। छाया केँ शादी कों पांच 6 महीने बीत चुके हें उन दोनों कों पुनः मिलन कां प्रतीक्षा हैं.
अबआगे.
Dhanyavaad. कथानक कां बदलना वक़्त कि मांग हैं। अब तौ कथा केँ पात्र युवाहुए हैं सबके अपने अरमान हैं .
मानस और छाया का पंचरत्न योग - सौतेला भाई – New Episode
Hello Everyone
We are Happy too present too you The annual kahani contest of Xforum "The Ultimate kahani Contest" (USC).
Jaisa की ap sabko maalum h abi pichle hafte he humne USC की announcement की h aur abi कुछ waqt pahle Rules and Queries thread bi open किया h aur Chit chat thread तो pahle से he Hind section में khulla h.
Iske baare main थोड़ा aapko btaadun yeh एक short kahani contest h jisme ap kissi bi prefix की short kahani post krr shaktey hu joo minimum 700 words and maximum 7000 words takk hu taqat h। iss liye mein aapko invitation deta hoon की ap is contest main apne khayaalon ko shabdon ka Rupp देकर ismein apni kahaniyan daalein jisko poora Xforum dekhega yeh एक bohot accha kadam hoga aapke aur aapki kahaniyan ke liye क्योंकि USC kee kahaniyan ko pure Xforum ke readers read kartey haen। aur joo readers likhna नहीं caahtey wo bi is contest main participate krr shaktey haen "Best Readers Award" ke liye aapko bas krna yeh hoga की contest main posted kahaniyan ko read karke unke Uppar apne views dene honge.
Winning Writer's ko well deserved Awards milenge, उसके aalwa aapko अपना thread apne section में sticky karne ka mouka bi milega Taaki aapka thread top पर rahe uss dauraan। iss liye aapsab ke liye yeh एक behtareen mouka h Xforum ke sabhi readers ke Uppar apni chaap chhodne kaa aur apni reach badhaane ka.
Entry thread 7th February ko open hoga matlab ap 7 February से kahani daalna suru krr shaktey haen aur wo thread 21st February takk open rahega is dauraan ap apni kahani daal shakte haen। iss liye ap abi से apni kahani likhna suru kardein तो aapke liye better rahega.
koy bi issue hu तो ap kissi bi staff member ko Message krr shaktey haen.
Regards : XForum Staff.
मानस और छाया का पंचरत्न योग - सौतेला भाई – New Episode
भाग 4
छाया कि नयी ख़्वाहिश.
(मे छाया)
सीमा केँ बर्थडे केँ बाद मे अपने ससुराल आँ चुकी थि इसबार मानस भैया केँ संग गुजारे गयेसमय नें मेरे जिंदगी मे हलचलमचा दि थि। इसबार उनकेसंग किएगए संभोग मे मैंने अलग किस्म कि कामुकता महसूस कि थि। सुहागरात औऱ हनीमून केँ दौरान मानस भैया केँ संगकिए गए संभोग सें ये बिल्कुल अलग थां इसमें खुशी कां अतिरेक थां। उनके प्रेम कि तोँ मे पिछले चार-पांच वर्षों सें आदी थि पऱ उनकाये कामुक स्वरूप मुझे अत्यधिक प्रिय लगरहा थां। मुझे कामुक शब्दों ( जैसे चो.नां, बू., लं.) कां ज्ञान तोँ थां पऱ वो मेरी जुबान पऱ कभी नहि आते थें मे औऱ मानस कभी-कभी उत्तेजना मे राजकुमार औऱ राजकुमारी शब्द कां प्रयोग जरूर करते पऱ इसतरह कि कामुक शब्दों कां प्रयोग हमनेकभी नहि किया थां। वो एक् सभ्य औऱ सुसंस्कृत पुरुष थें औऱ मे उनकी शिष्या। हमारे लिएये कहीं सें उचित नहि थां पर्र इसबार संभोग केँ दौरान मुझेइन कामुक शब्दों कि अहमियत समझ आँ रही थि। निश्चय हि यह शब्द उन्हीं उत्तेजक संभोग कों दर्शाते होंगे।
मैने भि उसरात खुद कों मानस भैया सें चु.तेहुए महसूस किया थां औऱ इसचु.ई कां जीभरकर मजा लिया थां।
कुछ दिनों बाद मुझेफिन वहीसुख लेने केँ लिए ख़्वाहिश जागृत हुईँ। सोमिल केँ दफ़्तर जाने केँ बाद मैंने मानस भैया कों मोबाइल किया "मुझे आपसे मिलना हैं"
"क्यूं क्याँ होँ गय़ा?"
"कुछ नहि मुझे आपकीयाद आँ रही हैं"
"अरे औऱ आज तौ दफ़्तर भि जानां हैं"
"कोईबात नहि आप् लञ्च मे मुझेमिल सकते हैं। मुझे आपसेकुछ बातें करनी हैं"
"ठीक हैं 1:00 बजे रेडिएंट होटल मे मिलते हें"
ये होटल हम् दोनों केँ दफ़्तर ठीकबीच मे पड़ता थां मैंने अपनी सुंदर ब्लैक स्कर्ट औऱ दफ़्तर कोट पहनी अपनेबाल संवारे बदन पर्र मानस भैया कां पसंदीदा परफ्यूम लगाया औऱ चल पड़ी अपनीचु। चु.नें। (मुझेइन शब्दों कों लिखते हुए हंसी आँ रही थि) दफ़्तर पहुंचने पर्र सभी मुझेदेख रहे थें मे आज जितनी हसीन शायद उन्हें पहलेकभी नहि लगी थि। मेरी सहेली पल्लवी नें आखिरटोक हि दिया
"आज मानस सें मिलने कां प्लान हैं क्याँ?" उसे हमारी हकीकत मालूम चल चुकी थि। मैंने मुस्कुरा करबात टाल दि। दफ़्तर मे दीवारों केँ भि कान होते हें ये बातें कभी भि लीक होँ सकती थि।
मे दोपहर कां प्रतीक्षा करतीरही मेरी रानी भि प्यार रस बहाते हुएइस मिलन केँ लिए सजधजकर होँ चुकी थि। मे टाइम सें 10 मिनट पहले हि होटल पहुंच चुकी थि। मैंने रिसेप्शन पर्र जाकर शॉर्ट पीरियड केँ लिए एक् रूमबुक कर लिया औऱ खुद डाइनिंग हॉल मे आकर मानस कां प्रतीक्षा करनेलगी। मैंने मानस केँ लिए एक् खूबसूरत गुलदस्ता भि लेँ लिया थां। आजये पहलीबार होँ रहा थां जबकोई हसीन नवयुवती खुद चु.नें केँ लिए सारी तैयारी खुदकर केँ आई थि औऱ उसके प्रेमी कों इसबात कां आभास भि नहि थां। कामुकता औऱ रचनात्मकता कां मिलन एक् अद्भुत अहसास देता हैं।
आज क्याँ होगाये मुझे नहि पता थां पऱ मे पूरीतरह सजधजकर थि। मानस कों आते देखकर मे खुश हि गई,। वो हमेशा कि तरह मुस्कुराते हुए मेरेपास आये औऱ मेरे हाथों कों चूम लिया। इससे अधिक डाइनिंग हॉल मे करना उनकेलिए संभव नहि थां। हमारे होंठ मिलने केँ लिए फड़फड़ा रहे थें पर्र हम् दोनों नें उन्हें काबू मे कर लिया थां। गुलदस्ता देखकर वोँ खुश होँ गए औऱ मुझसे पूछा
"छाया क्याँ बात हौ गई?"
"आपसे मिलने कों मनकररहा थां"
"ओहोये बात हैं वैसेआज तुम् कयामत लगरही हौ" मे शरमा गई। मैंने वेटर कों बुलाया औऱ फटाफट कुछ खाने कां आर्डर कर दिया। आज संयोग सें होटल केँ डाइनिंग हॉल मे औऱ कोई ग्राहक नहि थां। वोँ मुझे लगातार एक् टक देखेजा रहे थें। स्तनों कां उभार औऱ बीच कां क्लीवेज कुछ अधिक हि दिखाई देरहा थां। वोँ उनके आकर्षण कां केंद्र बनाहुआ थां जिन स्तनों कों उन्होंने अपने हाथों सें जवान किया थां वो आज उनसे मिलने केँ लिए अपना चेहरा दिखारहे थें परंतु मेरेटॉप नें उन्हें काबू मे रखाहुआ थां। राजकुमारी अपना प्यार रस एक् बारफिन छोड़रही थि। जब तक खानां ख़त्म होता हमारी सोसाइटी कि एक् औरत अपने पति केँ संग अकस्मात डाइनिंग हॉल मे आँ गयीँ,। उन्होंने हमें पहचान लिया औऱ पासआकर कहा
"अरे वाउ दोनों भइया बेहन कि जोड़ी एक् संग"
उसनेअपने पति सें एक् बारफिन हमारा परिचय करवाया। हमारा खानां समाप्त हौ चुका थां। इस भइया-बेहन केँ शब्द नें मेरेमन मे एक् बारफिन बगावत पैदाकर दि। हमनेबिल पे किया। इसके पहले कि मे मानस सें मे कुछबोल पाती वोँ बाथरूम कि तरफचल पड़े औऱ उनके पीछे पीछे मे भि।
मैंने मानस सें अपनी तैयारी केँ बारे मे कुछ भि नहि बताया थां बाथरूम केँ दरवाजे पऱ पहुंचते हि मानस नें मुझे देखा औऱ मुझे जेंट्स बाथरूम कि तरफ खींच लिया। मे हड़बड़ा गई मुझे उनसेये उम्मीद नहि थि। उन्होंने मुझे अपने आगोश मे लिया औऱ मुझे उठाएहुए अंदर लेँ आये। इस दौरान वो मेरे होठों कों लगातार चूसरहे थें मे चाहकर भि कुछ नहि बोलपा रही थि उनकी उत्तेजना मुझे भि उत्तेजित कर चुकी थि। बेसिन केँ प्लेटफार्म कि ठंडक कां एहसास जब मेरे नितंबों कों हुआतब मुझे एहसास हुआ कि मैंने पेंटी नहि पहनी थि। मैंने ये जानबूझकर किया थां पर्र मे खुदभूल चुकी थि।
मानस भैया कां राजकुमार जानेकब बाहर् आँ चुका थां। वो मुझेचूम रहे थें औऱ राजकुमार अपनी रानी कों तलाशरहा थां। रानी केँ प्यार रस मे उसे जल्दी हि सही स्थान तक पहुँचा दिया। मैने मानस भैया केँ मुख सें छाया ….कि कामुक आवाज़ सुनी। इसी आवाज़ केँ संग उनका राजकुमार रानी मे प्रविष्ट हौ रहा थां। आवाज़ इतनी मादक थि कि मेरी रानी नें अपनामुख स्वतः खोल दिया थां।
उनकीकमर हिलने लगी। हमारी नजरें मिलते हि मेरीनजर लज्जा सें झुक गई। वो अपने होंठ मेरे होंठों सें हटा चुके थें। औऱ उन्होंने मेरेकान मे कहा क्याँ सच मे हम् आदर्श भइया बेहन हें। उनकेकमर कि रफ्तार बढ़ती जारही थि। मैंने भि प्रत्युत्तर मे जवाब दियायदि लोगों कों लगता हैं तोँ ऐसा हि सही। मैने उन्हें चूम लिया औऱ अपनीकमर भि उनकीगति सें मिलाली।
कुछ हि देर मे उन्होंने मुझे प्लेटफॉर्म सें नीचे उतारा। अब मे अपने दोनों हाथ प्लेटफॉर्म पऱ रखकर अपनीकमर कों पीछेकर चुकी थि। मेरे दोनों नितम्ब खुलीहवा मे मानस भैया कों निमंत्रण देरहे थें। मेरीकमर झुकी हुईँ थि औऱ बूब्ज़ लटकेहुए थें। मे पूरे कपड़ों मे सुसज्जित थि। पऱ मेरी स्कर्ट केँ ऊपर उठते हि राजकुमारी होठों सें लार टपकाते अपने राजकुमार कां प्रतीक्षा कररही थि। मैंने जानबूझकर अपना चेहरा मानस भैया सें दूरकर लिया। मुझे उनसेउसी चु***यी कि उम्मीद थि जौ मे सोचकर आई थि। मानस भैया नें मेरेमन कि बातपढ़ ली थि उन्होंने अपने राजकुमार कों रानी मे प्रवेश कराया औऱ तेजी सें उसेआगे पीछे करनेलगे। बीच-बीच मे वो मेरे नितंबों कों सहलाते कभीजोर सें दबा देते मुझेपता थां कि मेरे नितंबों पर्र दागपड़ रहे होंगे पर्र उत्तेजना मे मे सभीकुछ भूलकर अपनीचु.ई कां खुशी लें रही थि। उनकीकमर कि रफ्तार बहुततेज थि। राजकुमार पूरी गहराइयों तक उतरकर गर्भाशय कों चुमने कि कोशिश कररहा थां। मेरा चेहरा लाल हौ चुका थां इस अद्भुत मजा कि अनुभूति मुझे पहलेकभी नहि हुइ थि.
मानस भैया केँ हाथ अचानक मेरे स्तनों पर्र आए औऱ उनकी उंगलियों कां तेज दबाव मेरे निप्पल ऊपर महसूस हुआ। मुझसे बर्दाश्त नहि हुआ औऱ मे कांपते हुए स्खलित होनेलगी। मानस भैया नें मेरा स्खलन पहचान लिया थां वो मेरीनस नस सें परिचित थें। इन्होंने अपनीकमर कि गति औऱ बढ़ा दि। उनकेमुख सें मेरी प्यारी ब**नं….मेरी प्यारी छाया….कि अत्यंत कामुक कराह मेरे कानों कों महसूस हौ रही थि। मानस भैया केँ राजकुमार कां अंदर उछलते हुए वीर्य प्रवाह करना मुझे महसूस हौ रहा थां। आज मैंने पहलीबार स्खलित होते वक़्त उनकी आवाज़ सुनी थि। तूफान केँ थमने केँ बाद मानस भैया नें अपनीजेब सें रुमाल निकाली औऱ मेरी राजकुमारी केँ मुख पऱ रखतेहुए अपने राजकुमार कों बाहर् निकाल लिया मे भि उठ खड़ी हुइ औऱ अपनी जांघों केँ दबाव रुमाल कों रानी केँ मुख पर्र व्यवस्थित किएरखा मानस भैया मुझे एक् बारफिन चूमरहे थें। औऱ मेरेबाल ठीककर रहे थें। मेरे कपड़ों मे कई सिलवटें आँ चुकी थि.
मानस भैया नें कहा मेरी एक् मीटिंग हैं मुझे जानां होगा मेरी प्यास बुझ चुकी थि मैंने उन्हें विदाकर दिया। होटल कां रूम मेरीराह देखरहा थां मेरे कपड़ों मे सलवटे थि मे होटल केँ कमरे मे जाकर आराम करनेलगी। मैंने अपने कपड़े प्रेस करवही टांगदिए थें होटल केँ हसीनबैड पऱ नग्न होकर लेटे रहने सें मेरी कामुकता एक् बारफिन जाग गयीँ,। मे मानस कों तोँ मोबाइल नहि कर सकती थि पऱ मेरे पति कों भि इसतरह सजेधजे कमरे मे सेक्स करना पसन्द थां। मैंने उन्हें मोबाइल कर दिया वो एक्-दो घंटेबाद होटल मे आँ गए औऱ हमनेजी भरकर सेक्स कां खुशी लिया। मेरी रानीआज खुश थि उसने अपनेकरण अर्जुन दोनों सें मुलाकात करली थि औऱ दोनो कों जी भरकर प्रेम किया थां.
मे थकी हुइ थि पऱ खुश थि। सोमिल केँ संगआते वक़्त मे अपनी खुशकिस्मती पर्र ईश्वर केँ प्रति कृतज्ञ होँ रही थि औऱ मानस भैया औऱ सोमिल कि खुशी केँ लिए प्रार्थना कररही थि। हम् घऱ पहुंच चुके थें। अपने कपड़े उतारते टाइम मैंने मानस भैया कां रुमाल अपनीजेब मे पाया जोँ हमारे प्रेमरस सें तृप्त थां। मैंने उसे सहेजकर अपनी अलमारी मे रख लियाये एक् अद्भुत मिलन कि निशानी बन चुका थां।
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