❤️🔥❤️🔥बेटे केँ बच्चे कि मम्मी बनी पार्ट 2❤️🔥❤️🔥 - Latest Update 1
दोस्तो यह किस्सा मेरी पहली कहानी कां दूसरा पार्ट हैं। पहली किस्सा मे बहोत सि कमियां थि जिसकी वजह सें मुझेउस कहानी कों बीच मे हि रोककर दूसरा पार्ट शुरुआत कररहा हु। इस कहानी मे उनसब कमियों कों पूरा करने कि कोशिश करूंगा।
Update 01
सोनपुर देहात
सुभह सें 9 बजरहे थें सूरजसिर पऱ चढ़ चुका थां। लोग खेतों मे जा चुके थें कुछलोग जारहे थें। गर्मी कां मौसम मे सूरजआग उगलरहा थां। आसमान मे बादलों कां कोईनाम निसान नहि। लोग उम्मीद भरी नजरों सें आसमान कि ओरदेख रहे थें।
यह हैं सोनपुर देहात जहां नं जायदा लोगओर नं जायदा जमीन। यह देहात एक् ऐसी स्थान बसा हैं जहांलोग अधिकतर खेती करते हैं। यह देहात शहर सें थोड़ी दूरी पऱ हैं जिसके कारणयाह केँ लोगआज भि खेती पऱ हि अपना जिंदगी जीते हैं।
इसी देहात मे एक् घऱ मे एक् लड़का आहिस्ता सोरहा थां। हसीन लड़कियों केँ ख्वाब मे खोया थां नींद मे भि हंसरहा थां कि अचानक उसकेऊपर किसी नें पानी डाला। किसके कारण वोँ हड़बड़ा कर उठता हैं
लड़का - कौन, कौन किसने पानी साला मुझेमुझ पऱ।
ओरजब अपनी अपनी आंखेखोल कर देखता हैं तोँ सामने उसकी माँ उसको गुस्से सें देखरही थि जिसके कारण उसकीफट जाती हैं।
स्त्री - ओरकौन होगी मे हु तेरी माँ सूरजसर पर्र आँ चुका हैं ओरयहलाड साब आहिस्ता सोरहे हैं।
लड़काजब अपनी माँ कों इतने गुस्से मे देखता हैं तौ उसकीफट केँ हाथ मे आँ जाती हि।
लड़का जल्द सें उठता हैं ओर खेतों कि ओर भागता हैं।
लड़का जल्द सें खेतों मे पहुंच कर अपनीकर जोरजोर सें सांसे लेँ रहा थां। घऱ सें लेकरखेत तक भागता जौ आया थां।
महिला - आजफिन बच गय़ा। सूरजसिर पर्र आँ चुका हैं ओरयह महाराज धीरे-धीरे सोए हैं नां कोईकाम नं धंधाअरे क्याँ पड़ा हैं इस खेती मे गुजारा भि मुश्किल सें होता हैं। मगर मेरी सुनता कौन हैं बाप कों तौ कुछ लेना देना हैं नहि पीकर पड़ा होगाकही नाली मे।
लड़का अपनी सांसे सहीकर रहा थां कि पीछे सें - लगता हैं आजफिन सें लेटउठा हैं तुँ
लड़का - तेरी केसेपता चला।
लड़के कां साथी - अरे दोस्त पूरे रास्ते तूँ दौड़ता हुआआया हैं। ओर तूँ जब भि ऐसा दौड़ता हैं हैं तौ मुझे क्याँ पूरे देहात कों पता हैं कि आज तुँ लेटउठा हैं।
लड़का - दोस्त दौड़ता नहि तोँ आज मेरी मम्मी मेरी मुझे डंडे सें मारती।
लड़के कां साथी - हंसकर दोस्त वैसे तुँ आंटी सें डरता बहोत हैं। आज तक उन्होंने तुम्हे कभी मारा हैं।
लड़का - दोस्त मारा तोँ नहि हैं मगरजब मे मम्मी कों गुस्से मे देखता हु तौ मेरीफट जाती हैं
लड़के कां साथी - देख राजू आंटी जितना तुझ पऱ क्रोध करती हैं उतना तुम्हें प्रेम भि तोँ करती हैं।
लड़का - दोस्त प्रेम कां तोँ पता नहि मगर भइया कि सादी केँ बाद मेरी क्लास हररोज लगती हैं।
लड़के कां साथीजोर जोर सें हंसने लगता हैं
लड़का - दोस्त तुम्हें हंसी आँ रही हैं ओर मेरी यहां गाड़फट रही हैं।
लड़के कां मित्र - दोस्त हँसू नाँ तौ क्याँ करूं सादी तौ तेरी भइया कि हुई मजे वोँ कररहा हैं ओर तूँ यहां खेतों मे पानीदे रहा हैं। वैसे दोस्त एक् बातबता आंटीतुझ पऱ इतना क्रोध क्यूं करती हैं। पहले तोँ तुझ पऱ इतना क्रोध नहि करती थि अबऐसा क्याँ होँ गय़ा।
लड़का - दोस्त क्याँ बताऊं तुम्हें तोँ पता कि भइया कि सादी हमने कितनी मुश्किल सें कि थि। भइयाजब शहर मे जॉब करनेलगे तौ मा कों लगा कि सादी केँ पैसे भइया अपनी तनख़ा सें पैसे चुका देंगे औऱ हमने पैसेउधर लें कर भइया कि सादीकर दि ओर भइया सादी होने केँ बादअलग होँ गएओरअब वोँ सभी पैसे मुझे देनेपड़ रहे हैं।
लड़के कां मित्र - हुयहबात हैं वैसे तेरे भइया नें किया तोँ बहोत गलत।
लड़का - अब क्याँ कर सकते हैं दोस्त वैसेकोई कामबता नां दोस्त शहर मे।
लड़के कां मित्र - शहर मे आंटी जाने देंगी तुझेही
लड़का - मा कों मैमना लूंगा। तुँ बसकाम बताकोई हैं तौ।
लड़के कां साथी - हाकाम तोँ हैं गैरिज मे एक् घंटे केँ 300 रुपए देगा। अगरकाम अच्छा लगा तोँ 500 रुपए भि दे सकता हैं। अब तेरेऊपर हैं कि तूँ काम कैसा करता हैं
लड़का - नहि दोस्त काम मे अच्छा हि करूंगा तेरी तौ पता हैं कि मुझे मशीनों कों सही करने मे मज़ाआता हैं।
लड़के कां मित्र - हायहबात तोँ हैं। चल तूँ खेतों मे पानीदे मै तुम्हें कल लेँ चलूंगा काम पर्र।
Family Introduction
घऱ मे कुलतीन लोग रहते हैं
Father - subhas (52)
सारादिन दारूपी कर देहात मे पड़े रहते हैं। कोईकाम धंधा नहि करते। बाद इतना कमाते हैं कि रात कों पीने कां जुगाड होँ जाए।
मा - सिला (43 )
बहोत हि सुन्दर हैं ओर गांड़ कां तोँ कहना हि क्याँ जब चलती हैं तोँ लोगों केँ मुंह मे पानी आँ जाता हैं।
राकेश - यह हैं हमारे हीरो कां बड़ा भि दारू पीना रण्डी खाने जानेसभी करते हैं सादी होँ केँ बाद भि। जब सिला नें बहोत रोका तौ गुस्से मे आँ करअलग होँ गय़ा।
राकेश कि पत्नि - मधु (27 )
अपनी सासू कि तरह बहोत हि सेक्सी हि गांड़ बूब्स ओरकमर कां तोँ कहना हि क्याँ।
ओर आखिर मे आता हैं हमारा।
राजू - 20
रंग गोरा हैं अपनी मम्मी कि तरह जिस्म एक् दम मजबूत हैं। खेतों मे सारादिन काम करता हैं। मशीनों सें बहोत लगाव हैं खराब चीजों कों सही करने मे इसकोइस अलग हि आनंदआता हैं
सिला - जल्द जल्द खेतों कि ओर आँ रही थि। आज बहोत देर होँ गई मेरा राजू भूखा होगा। सुभह मैने हि उसे डांटा थां। मगर क्याँ करूंउधर भि तोँ चुकाना हि। सिला अपने आप् सें हि बोलती खेतों मे पहुंच जाती हैं ओर राजू कों देखती हैं कि पानीदे रहा हि।
खेत मे काम करने कि वजह सें राजू पसीने सें भीग चुका थां।
दोस्तो आज केँ लिए इतना हि। बताना कि भाग कैसालगा। इसमें वोँ गलतियां नहि होगी। जोँ पहली वाली किस्सा मे हुइ मे हुई थि। होँ सकता हैं कि एपसोड छोटालगे मगरकाम सें थोडा बाहर् हु अगलीबार सही बड़ाभाग आएगा
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Update 02
सीमा राजू कां कहना लें करखेत मे बनी कुटिया केँ अंदर आँ जाती हैं। सीमा खानां निकाल कर राजू केँ लिए रखती हैं।
सीमा राजू कां प्रतीक्षा करनेलगी। आज सीमा हमेशा सभीलेट थि। आज सीमा कों खानां बनाने बहुत वक्तलग गय़ा थां। सीमा राजू कि इंजतार करती रहती हें मगर राजूआया नहि।
सीमा - यह राजू अभि तक आया क्यूं नहि रोजाना तौ आँ जाता हैं। बाहर् जाकर देखती हु।
सीमाजब बाहर् आँ कर देखती हैं तोँ राजू पानी कि नाली जोँ कि टूट चुकी थि उसेसही कररहा थां। राजू तेजी सें पानी कि नाली कों सही करता हैं ओर नाली सें बाहर् आँ कर देखता हैं तोँ पानी खेतों मे सही सें लगरहा थां
जब सिला अपने बेटे कों इतनी मेहनत करती देखती हैं तोँ उसे राजू पर्र बहोत प्रेम आता हैं सिला राजू कों खाने केँ लिए आवाज़ लगाती हैं।
सिला - राजू खानेखा लेँ।
सिला नें बहोत तेज आवाज़ लगाई थि क्योंकि राजू कुटिया सें बहुतदूर थां।
राजू - आयामा।
राजू कुदाल कों साइड मे रखकर अपनेहाथ पऱ धोकर कुटिया मे आँ जाता हैं।
सिला राजू कों खाने कि थाली देती हैं।
राजू अपना पहला निवाला सिला कि तरफ करता हैं।
सिला - यह क्याँ कररहा हैं।
राजू - खानां खिलारहा हु।
सिला - मे खाकरआई हु तुँ खा लेँ।
राजू - मुझेपता हें आप् खानां खाकरआई होँ। मगरयह आप् कों खानां पड़ेगा।
राजू कों पता थां कि सिला उसके खाने केँ बाद खानां खाती हैं ओरआज सिला खानां लेट लें करआई थि।
सिला राजी कां दिया निवाला खा लेती हैं।
ओर राजू खानां खाने लगता हैं
सिला - ऐसाकब तक चलेगा( सिला कड़क आवाज़ मे कहती हैं। )
राजू - क्याँ कब तक चलेगा।
सिला - तुम को अच्छी तरह सें पता हैं कि मे किस बारे मे बातकर रहीहु।
राजू - हा जनताहु। मगर जैसा आप् कहरही हैं वैसा नहि होँ सकता।
सिला - क्याँ नहि होँ सकता।
राजू - यही कि देहात मे दिहाड़ी मजदूरी कर केँ हम् भइया कि सादी कां कर्ज नहि चुका सकते।
सिला - तोँ ओर क्याँ काम करेगा तुँ
राजू - मे कल पप्पू केँ संगजा रहाहु शहरकाम करने।
सिला - गुस्से सें तुझेही कितनी बारकहा हैं कि तूँ सहर नहि जाएगा। शहरजा कर तुँ भि उसके जैसा होँ जाएगा। नहि। नहि तूँ शहर नहि जाएगा।
राजू - मा। मा शांत हौ जाओ जैसा आप् सोचरही हैं मे वैसाकुछ नहि करूंगा। मुझेपता हैं कि आप् मुझेसहर क्यूं नहि। जाने सें रही हौ मगरमा मै वैसा नहि हु।
सिला - मैनेकह दिया नाँ तूँ सहर नहि जाएगा बस। इससे अच्छा कि तुँ खेतीकर लेँ।
इतनाकह कर सिला खाने कां सामान लेँ करघऱ कि ओर जाने लगती हैं
राजू - अरेमा सुनो तोँ। मे वैसा नहि करूंगा जैसा आप् सोचरही हैं।
सिला राजू कि बातसुन कर भि अनसुनी कर देसी हैं। ओर राजूखेत मे काम करने लगता हैं ओर सोचने लगता हैं कि मा केँ केसे मनाया जाएशहर मे काम करने केँ लिए।
राजू - मन मे मा जैसा आप् सोचरही हैं वैसामै कुछ नहि करना चाहता मुझेपता भइया केँ दिए दुःख आप् आज भि झेलरही हैं मगर मे अबओरऐसा नहि होने दूंगा। मे आप् कों रानीबना कर रखूंगा।
राजू अपने भइयाओर मा केँ बीच केँ रिश्ते कों लें कर दुखी थां। जब राकेश कि सहर मे जॉबलगी तौ सिला बहोत खुश थि मगर राकेश देहात कां लड़का थां सहर कि चका चोंद मे इतनाखो गय़ा कि अपने परिवार कों हि भूल गय़ा रात कों दारूपी कर आनां रण्डी केँ पास जानां यहसभी जब सिला कों पताचला तोँ सिला कों बहोत दुखहुआ। मगर राजू नें किसीतरह सें अपनी मम्मी कों संभाला औऱ राकेश कि सादीकर दि। सादी हाने सें पहले राकेश नें कहा थां कि वोँ सादी कां सारा खर्चा देगामगर सादी होने केँ बाद राकेश अपनी पत्नि केँ संगसहर चला गय़ा ओर अपने हिस्से कि जमीन जायदात बेच दि। सिलाओर राजी केँ ऊपर तोँ मानो मुसीबतों कां पहाड़ हि टूट पड़ा थां। मगर किसी तरीके सें राजू नें खेती मे मेहनत कर केँ बसघऱचल रहा हैं। सिला कों डर हैं कि राजू भि सहरजा कर राकेश जैसाबन जाएगा। इसीलिए सिला राजू कों शहर भेजना नहि चाहती।
आज केँ लिए इतना हि उम्मीद करताहु कि कहानी अच्छी लगेगी आप् कों
Good start lekin one suggestion dont use ai images if there iss real images available of many womens , when there iss need use AI images like want too describe any scene so
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Take this suggestion from your fan.Earlier 90 percent of kahani iss based on cheap old same crap of incest/mummi son kahani। I would suggest you too go different and stand out from crowd। Write different kahani such as betrayal, humiliation, cuckold, cuckson topics, they are rare
Remember losing mummi too strong bull hits different and mummi marrying bull starting new blood line। Sometime betrayal iss sexy
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Bro tumne joo kahani strt kee h whi continue kro aur usko mai aram say romance feeling jgana sima k undr aur yeh bhay k liy bhoott si kahani hain Platform mai
Behtareen shuruat.lagta h kee story bejad mazedaar honewali h .mummy kee mamta or bete kee kamukta kaa achchhe say milan karwana bhay. Eagerly waiting for the naughty and kinky mega updates.
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