❤️🔥❤️🔥बेटे केँ बच्चे कि मम्मी बनी पार्ट 2❤️🔥❤️🔥 – New Episode
Update 03
सिला नें राजू कों शहर जाने सें साफमना कर दिया थां। सिला केँ मन मे यहडरबैठ गय़ा कि थां कि अगर राजू भि शहरचला गय़ा तौ राजू भि अपने भइया कि तरहबन जाएगा।
सिला कों शुरुआत सें हि राजू सें बहोत लगाव थां छोटा जौ थां। राजू नें 12 पढ़ने केँ बाद विद्यालय छोड़ दि ओरघऱ कों संभालने लगा।
सुभाष पहले तौ खेती मे काम करता थां मगरजब सें राजू नें खेती कों संभाला थां उसकेबाद सुभाष खुला हौ गय़ा सुभहउठ कर दारू पीनाओर रात केँ लिए केसे दारू केँ पैसे कां जुगाड हौ इसी मे अपना पूरादिन खपा देता थां।
धीरे-धीरे धीरे-धीरे राजू नें घऱ कि जिम्मेदारी अपने कंधे केँ ली। सिला कों इसबात कां बहोत दुख होता थां कि खेलने कि उमर मे राजू नें घऱ कि जिम्मेदारी उठारहा हैं।
राजू नें खेत कों अच्छी तरीके सें संभाला लिया थां। ओरखेत मे फसल भि अच्छी होनेलगी। सिला भि राजू कां हाथ बंटा देती थि कहने केँ लिएघऱ कां मर्द सुभाष थां मगरअसल मे अब राजूघऱ कां मर्द थां। राजूखेत मे काम करताओर सिलाघऱ संभालती थि।
अब थोडा राकेश केँ बारे मे जान लेते हैं -
राकेश शुरुआत मे पढ़ाई मे अच्छा थां देहात मे 12 वि तक विद्यालय थां तोँ सिलाओर राजू नें राकेश कों आगे पढ़ने केँ लिएसहर भेजा। मगर राकेश कों शहर कि हवालग गई। पहले राकेश नें बीड़ी सिगरट पीना चालूकर दिया। घऱ सें झूठबोल कर पैसे लेता कि उसे पढ़ाई केँ लिए पैसे चाहिए। राकेश झूठबोल कर सिलाओर राजू कों धोखा देतारहा। मगर एक् दिन देहात केँ एक् व्यक्ति नें राकेश कों दारू केँ ठेके पऱ देख लियाओर उसने वोँ बातजब सिला कों बताई तोँ सिला पूरीतरह सें अंदर सें टूट गई। राजू नें अपने भइया कों समझाया कि वोँ ऐसा नां करेमगर राकेश नहि मानाओर इसीबीच राकेश कि जॉबलग गई। सिला कों लगा कि अगर राकेश कि सादीकर दे तौ वोँ यहसभी करनाबंद करदेगा सिला नें इस बारे मे राजू सें भि पूछा
राजू - मा मुझे नहि लगता कि भइयाअब सुधरे गे। भइया पहले सें भि ज़्यादा पीनेलगे हैं अब
मगर सिला नहि मानीओर पैसे ब्याज पर्र लेँ कर राकेश कि सादीकर दि। राकेश 1 दो महीने तौ सही सें रहामगर फिनवही अपने असलीरूप मे आँ गय़ा। सिलारोज राकेश कों डांटती मगर राकेश नहि माना। ऐसे हि एक् दिन राकेश नें गुस्से मे आँ कर अपना हिस्सा घऱओर जमीन मे सें मांग लिया।
सिला नें जबयह सुना तौ सिला कों बहोत बड़ाढका लगा।
सिला - यह तूँ क्याँ कहरहा हैं अगर तूँ जमीनओर घऱ लें लेगा तोँ तेरी सादी केँ पैसेकौन देगा।
राकेश - मुझे नहि पताकौन देगा। मुझ सें पूछकर लिए थें क्याँ। मुझेबस अपने हिस्से कि जमीन चाहिए।
सिला नें जब राकेश कि बात सुनी तोँ पूरी तरीके सें अंदर सें टूट गई थि।
राकेश रोज अपनी जमीनओर घऱ केँ नाम पऱ घऱ मे क्लेश करता लड़ाई करता।
राजू - मा मे आपसे एक् बात बोलूं
सिला - हाबोल नाँ ( सिला केँ आंखों मे आंसू थें राकेश कि कही एक् एक् बात सिला केँ दिल पऱ लगरही थि )
राजू - मा हम् भइया कों उनके हिस्से कि जमीनदे देते हैं नाँ यहरोज रोज केँ लड़ाई सें तौ अच्छा हैं नां।
सिला - हैरानी सें यह तूँ क्याँ कहरहा हैं अगर उसके हिस्से कि जमीन हमनेउसे दे दि तौ हम् कर्जा केसे चुकाएंगे।
सुभाष केँ हिस्से मे बहोत कम जमीन थि सुभाष केँ भाइयों नें धोखे सें जमीन हड़पली ओर सुभाष कों एक् जमीन कां छोटा सां टुकड़ा दे दिया।
राजू - मा वोँ सभी मे देख लूंगा आप् चिंता मतकरो मे हु नाँ। मे कल भइया कों उसके हिस्से कि जमीनदे दूंगा।
सिला - रोतेहुए ठीक हैं जैसा तेरीठीक लगे
सिला कों बहोत रोना आँ रहा थां कि इतनी छोटी सि उम्र मे उसके बेटेकौन क्याँ क्याँ सहनापड़ रहा हैं।
राजू सुभह होते हि राकेश कों। उसकी जमीनदे देता हैं। राजू बहोत दुखी थां कि उसकी माँ केँ आंखों मे आंसूआए मगर वोँ कुछ नहि कर पाया। राकेश अपने हिस्से कि जीमनबेच करसहर चला जाता हैं। ओर पीछे छोड़ गय़ा राजूओर अपनी मम्मी कों।
राकेश केँ जाने केँ बाद राजू नें सिला कों संभाला औऱ खेत मे काम करनेलगा। मगर। जमीनकम होने केँ कारणबस घऱओर ब्याज केँ पैसे हि भरपारहा थां राजू। घऱ भि बहोत मुश्किल सें चलारही थि सिला।
परसेंट -
राजूखेत सें घऱ कि ओरजारहा थां ओरमन मे सोचरहा थां कि मा कों केसे मनाया जाए।
राजू - मन मे मा कों केसे मनाऊं शहर जाने केँ। लिए। मगरमा तौ मेरीबात सुनने कों हि सजधजकर नहि हैं क्याँ कियाजाए।
राजूखेत सें घऱ आँ जाता हैं। मगरजब सिला कों देखता हैं तौ उसे गुस्से सें देखरही थि। राजूजब अपनी मम्मी कों गुस्से मे देखता हैं तौ उसकीफट जाती हैं।
राजू - (मन मे) मा तोँ अभि तक क्रोध हैं क्याँ करूं। मगर अभि अगरमा सें बात कि तोँ मा मुझे पक्का मारेगी। नहि अभि बात करनासही नहि हैं खानां खाने केँ बातबात करूंगा।
सिलाजब राजू कों खोया देखती हैं तौ
सिला - कान्हा खो गय़ा। तूँ जौ सोचरहा हैं वोँ मे कभी नहि होने दूंगी।
राजू - सालामा कों तोँ मेरेमन कि बात भि पतालग गई। शायद इसलिये मा हैं मेरी।
राजू जल्द सें अन्दर जाता हैं ओर नहाने लगता हैं सारादिन खेत मे काम करने सें पसीने कि बदबूआने लगी थि। सिला खाने मे। लग जाती हैं। राजूजब नहाओर रेडी हौ करजब बाहर् आता हैं तौ सिला नें खानां राजू कों दियाओर अपना भि एक् थाली मे रखा।
राजू खाने कां पहला निवाल सिला कि ओर करता हैं ओर सिला चुपचाप खा लेती हैं। यह राजू कां रोज कां थां खाने खाने सें पहले एक् निवाल सिला कों खिलाता थां।
राजू तिरछी नजर सें सिला कों देखता हैं तोँ सिलाउसे हि देख रहीं थि।
सिला - ऐसे क्याँ देखरहा हैं
राजू - कुछ नहि मैने क्याँ देखा
सिला - झूठमत बोल तूँ मुझे तिरछी नजर सें देखरहा थां। बोल क्याँ केहना हैं
राजू - मे कल सुभहकाम पऱ जारहा हैं
सिला - यह तौ अच्छी बात हैं इतनेदिन सें कहरही हु कि इस खेती सें बस ब्याज कां रुपया ओरघऱ चलता हैं। तूँ काम पऱ जाएगा तौ कर्ज जल्दचुक जाएगा।
राजू - मा मे सहरजा रहाहु काम करने
सिलाजब यह सुनती हैं तोँ गुस्से सें राजू कों देखते हुए
सिला - मैनेकहा नां कि तूँ सहरकाम करने नहि जाएगा। एक् बारकहा समझ नहि आता
राजूजब अपनी माँ कों गुस्से मे देखता हैं तौ उसकीफट केँ हाथ मे आँ जाती हैं मगर अपने आप् कों शांत करता हैं। ओर सिला कां हाथ अपनेहाथ मे लें कर
राजू - मा पहले आप् मेरीबात सुनिए अगर उसकेबाद भि आप् कों लगता हैं कि मुझेशहर नहि जानां चाहिए तौ मे नहि जाऊंगा।
सिलाजब राजू कों देखती तोँ उसे लगता हैं कि एक् बार राजू कि बातसुन लेनी चाहिए
सिला - बोल क्याँ बोल्ना हैं
राजू - नहि पहले आप् वादा कीजिए कि मेरीबात पूरी होने तक आप् बीच मे नहि बोलेंगी
सिलाकुछ सोचकर - ठीक हैं वादा। अबबोल
राजू एक् गहरी सांस लेता हैं ओर केहना शुरुआत करता हैं
राजू - मामझे पता हैं कि आप् मुझेसहर क्यूं नहि जाने देना चाहती। आप् कों लगता कि जैसे भइयासहर जाकरनसे करनेलगे आप् सें गलतबात बोलने लगेओर हमें छोड़कर शहरचले गए। आप् कों लगता हैं कि मे भि भइया कि तरहबन जाऊंगा मगरमा म वैसा नहि हु मुझेपता हैं कि आप् नें क्याँ क्याँ झेला हैं केसे केसेदुख देखे हैं मे इसलिये सहरजा रहाहु कि आपकोआगे ऐसेदुख नाँ देखने पड़े। ओरमाजरा सोचो कि देहात मे काम करने कों हैं हि क्याँ अगर मे काम करनेलगा तौ अकेले आप् सें खेती नहि संभलेगी ओर मे जौ कामकर लाउंगा वोँ सभी तौ घऱ केँ खर्चे मे हि चला जाएगा। तौ हम् उधारी केसे चुकाएंगे। ओररही बातसहर कि तौ मा मे सहर मे इतनाकाम लूंगा कि अगर हम् खेती नां भि करे तोँ हमारी उधारी पूरीचुक जाएगी। अगरअब भि आप् कों लगता हैं कि मे भि भइया जैसाबन जाऊंगा तोँ मा मे आपकीशपथ खाकर कहताहु कि मे भइया जैसाकभी नहि बनूंगा।
राजू एक् सांस मे सारीबात बोल गय़ा जिससे उसकी सांसे थोड़ी भरी हौ गई थि।
सिलाबस हैरानी सें राजू कों हि देखरही थि।
राजूजब अपनी मम्मी कों चुप देखता हैं तौ उसेसमझ आँ जाता हैं कि सिलाउसे सहर नहि जाने देगी। ओर राजू खड़ाहों करछत पर्र चला जाता हैं सोने।
गर्मी केँ मौसम मे लोग देहात मे बाहर् हि सोते हैं। कूलरलगा करमगर राजू केँ घऱ कि हालतऐसे नहि थि कि वोँ कूलर लेँ सके। देहात मे सिर्फ एक् राजू हि हैं किसके पास मोबाइल नहि हैं।
सिला हैरानी सें अभि तक वाही बैठी थि जबकुछ देरबाद उसे अहसास होता हि कि राजूचला गय़ा हैं तोँ सीमा अपना पलंग लेनेजब कमरे मे जाती हैं तोँ
राजू - पलंग मे लेँ आयाहु।
सिला - अपनाकाम निपटा करआधे घंटेबाद राजु केँ पासछत पर्र जाती हैं।
सिला देखती हैं कि राजू अपनी आंखेबंद किए सोया हि सिला भि राजू केँ बगल मे आँ करलेट जाती हैं चुपचाप।
दोनोमा बेटे केँ भींचकोई बात नहि होती नां सिला नें कुछ बोलाओर नां राजू नें
जब सिला नें देखा कि राजूकुछ नहि बोलरहा हि तौ
सिला - नाराज हैं
राजू - किस सें।
सिला - मुझ सें ओरकोई दिखरहा हैं तुम्हारी तरफ
राजू - तोँ आप् पूराकहो नां
सिला - क्याँ काम करेगा तुँ सहर मे।
राजू - हैरानी सें सिला कों देखता हैं ओरफिन अगले हि लम्हा क्याँ फर्क पड़ता हैं आप् मुझे जाने तौ दोगी नहि फिन बताने सें क्याँ हौ जाएगा।
सिलाकुछ नहि बोलती ओर दोनों केँ बीचफिन वही सन्नाटा छा जाता हैं।
सिला - ठीक हैं चलेजान कल सुभह।
राजू - जबयह सुनता हि तोँ हैरानी सें सिला कों देखने लगता हैं मगर सिला केँ मुंह पऱ कोईभाव नहि थें
राजू - क्याँ बोल आपने एक् बारफिन बोल्ना
सिला - एक् बार मे सुनाई नहि देता क्याँ कल सुभहचले जानां सहरकाम पर्र।
राजू - मगर आप् तौ मुझे नहि जाने देना चाहती थि नाँ तोँ अब क्याँ होँ गय़ा
सिला - (नकली गुस्से मे) अब क्याँ हौ गय़ा तुम्हें जब नहि मानरही थि तब भि तूँ ऐसे हि बोलरहा थां ओरअबमान गई हुतब भि आखिर प्रॉब्लम क्याँ हैं तेरी।
राजूजब अपनी माँ कों गुस्से सें बोलता देखता हैं तोँ डर जाता हैं
राजू - डरा क्यूं रही हौ यहबात प्रेम सें भि तौ बोल सकती थि नां आप्
शीला - नीचेरखा हैं प्रेम अभि लेँ करआती हैं।
राजूसमझ जाता कि सिला डंडे कि बातकर रही हैं।
राजू - नहि नहि आप् सो जाइए मे कुछ नहि बोलूंगा। राजूडर करचुप चापसो जाता हैं
सिलामन हि मनहंस रही थि - यहऐसे हि काबू मे आता हैं प्रेम सें बातसमझ कान्हा आती हें तुम्हे।
आज केँ लिए इतना हि मिलते हें अगले एपसोड मे। उम्मीद करता हूं कि भाग आप् कों अच्छा लगेगा।
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Update 04.
राजूडर करसो जाता हैं मगर सिला कों नींद नहि आती हैं। सिला एक् नज़र राजू कों देखती हैं तोँ राजू आहिस्ता सोरहा थां
सिला -( मन मे ) इतनी छोटी सि उम्र मे कितनी बड़ी बड़ी बाते करनासीख गय़ा हैं तेरीउमर मे लड़के अपनेघऱ वालो सें नईनईचीज मंगवाते हैं घूमने जाते हैं। नईनई चीजें केँ लिएजिद करते हैं मगरऐसा कुछ नहि करता। मुझेमाफ करदे राजू मे तेरेलिए कुछ नहि करपाई। घऱ कि जिम्मेदारी केँ अलाव मैने तुम्हे कुछ नहि दिया। अपनी मम्मी कों माफ करदे राजू मे तेरेलिए कुछ नहि कर सकती।
सिला कि आंखों मे आंसू आँ जाते हैं। सिला कों बहोत दुख हौ रहा थां कि अपने बेटे केँ लिएकुछ नहि करपाई। रोते रोते सिला कों कब नींद आँ जाती हैं उसेपता नहि चलता।
अगली सुभह
सूरज निकले कों थां। लोग अपने अपनेकाम पऱ जानेलगे। सिला भि जल्दउठ कर राजू कों देखती हैं। राजू धीरे-धीरे सोया थां। सिला कों राजू पऱ बहोत प्रेम आता हैं। सिला राजू केँ बालों मे हाथफेर कर राजू कां गालचूम लेती हैं।
सिला - जल्द सें घऱ कां कामकर लेतीहु। आजइसे काम पर्र भि तोँ जानां हैं।
सिला जल्द सें फ्रेश होकर नहाने चली जाती हैं। सिला अपने गांड़ बूब्स चुत अच्छे सें साफ करती हैं। सिला कों शुरुआत सें हि साफ सफाई बहोत मनपसंद थि।
सिलानहा करघऱकाम करनेलग जाती हैं। ओर राजू कों उठती हैं
सिला - राजूउठ जा बेटा।
राजू - सोनेदो नां मा।
सिला - उठजा बेटा आज तुम्हें काम पर्र भि तोँ जानां हैं।
राजू इतना सुनते हि हड़बड़ा कर उठता हैं।
राजू - क्याँ वक्तहुआ हैं मा
शीला - 8 बजगए हैं।
राजू - क्याँ 8 बजगए। अपने पहले क्यूं नहि उठा मुझे। आप् कि वजह सें मे पहले हि दिनलेट होँ जाऊंगा।
सिला - (राजू कों देखकर) क्याँ कहा मेरीवजह सें
राजूजब अपनी मम्मी कों देखकर देखता हैं तौ डर जाता हैं।
राजू - नहि नहि मेरा कहने कां मतलब हैं कि अगरबस छूट गई तौ मे पहले हि दिनलेट होँ जाऊंगा।
राजू जल्द सें उठकर सीधा नहाने चला जाता हैं। राजू जल्द सें नहाता हैं ओर रेडी हौ कर बाहर् आता हैं।
सिला राजू केँ लिए खानां बनारही थि।
सिला - ब्रेकफास्ट कर लेँ।
राजू ब्रेकफास्ट करनेबैठ जाता हैं ओर सिलाउसे तिरछी नजरों सें देखरही थि।
सिला - क्याँ काम मिला हैं तुम्हारी तरफ।
राजू ब्रेकफास्ट करतेहुए - गाड़ियों कों सही करने कां काम मिला हैं।
सिला - पैसे कि बात होँ गई।
राजू - नहि। पहलेसेठ काम देखेगा उसकेबाद तय करेगा।
सिला राजू कां टिफिन सजधजकर कर देती हैं।
ओर राजू ब्रेकफास्ट करके रेडी थां जाने केँ लिए कि तभी पप्पू घऱ केँ बाहर् आँ कर आवाज़ लगता हैं
पप्पू - राजू सजधजकर हुआ कि नहि। बसछूट जाएगी दोस्त आजा।
राजू - आया पप्पू।
राजू - अच्छा मा मे चलताहु आप् चिंता मत करना मे शाम कों आँ जाऊंगा वक्त सें।
सिला - रुक थोडा।
सिला राजू कों रोककर किचन मे जाती हैं ओर राजू कों गुड़ खिलाती हैं।
राजू - यह क्याँ हैं मा अपने मुझे गुड़ क्यूं खिलाया।
सिला - आज तेरा पहलादिन हैं काम पऱ इसलिए मुंह मीठा करवाया हैं।
राजू जाने लगता हैं तभी - मायह आपका घाघरा केसेफट गय़ा।
देहात मे औरते घाघरा चोली पहनती हैं। सिला भि वही पहनती हैं। सिला केँ पासदो जोड़ी हि कपड़े थें। कों कि बहोत पुराने हौ चुके थें।
सिला - घाघरा छुपाते हुए - नहि नहि कुछ नहि हैं। तूँ अपनेकाम पर्र ध्यान दे।
पप्पू - राजूलेट हौ रहे हैं दोस्त।
राजू - अच्छा मा मे चलताहु शाम कों आँ जाऊंगा।
सिला - ठीक हैं ध्यान सें जानां।
राजूओर पप्पू दोनों बसआती हैं ओर दोनों बस मे बैठकर सहर केँ लिए निकल पड़ते हैं।
राजू - (मन मे )मा केँ पास कपड़े नहि हैं मेरी पहली तनख़ा मे मा केँ लिए बहोत सारे कपड़े लूंगा.
सहरआता हैं राजूओर पप्पू दोनों बस सें उतरकर अपनेकाम कि स्थान जाने लगता हैं।
दोनो जाते हैं ओरकाम पऱ लग जाते हैं पप्पू राजू कों बताता हैं केसे क्याँ करना हैं। राजूइस मामले मे बहोत तेज थां। राजू कों खराब चीजों कों सही करने मे मज़ाआता थां। राजू पप्पू केँ बताए अनुसार काम करनेलग जाता हैं।
राजू - पप्पू दोस्त यहसेठ कैसा हैं।
पप्पू - मतलब
राजू - मतलब कि गुस्से वाला हैं याँ ठंडे दिमाग़ कां हैं।
पप्पू - वैसे तौ सही हैं मगरजब काम वक्त पर्र पूरा नहि होतातब क्रोध करता हैं
तभी एक् कारआती हैं ओर उसमें सें एक् अधेड़ उमर कां व्यक्ति बाहर् आता हैं। राजू भि समझ जाता हैं कि यहीसेठ हैं
सेठ - 58 साल उम्र
अकेला हैं। पत्नि बच्चे एक् वाहन एक्सीडेंट मे मारेगए तभी सें थोडा अकडू हौ गय़ा हैं।
सेठ सीधा अपने कमरे मे जाता हैं ओर थोड़ी देरबाद राजू कों बुलाता हैं।
राजू - पप्पू दोस्त सेठ बुलारहा हैं।
पप्पू - हा तौ जा नां इसमें इतना घबरा क्योरहा हैं।
राजू घबराते हुएसेठ केँ कमरे मे चला जाता हैं।
सेठ - तुम् जौ राजू जिसके बारे मे पप्पू बतारहा थां।
राजू - जीसेठ जी।
सेठ - क्याँ तुम्हे गाड़ियों कों सही करनेओर बाकीसभी कामआता हैं।
राजू - जीसेठ जीसभी कामआता हैं। मुझे खराब चीजों कों सही करने मे बहोत आनंदआता हैं।
सेठ राजू कों ताड़कर देखता हैं। राजूडर जाता हैं ओर सोचने लगता हैं कि कहीकुछ गलत होँ नहि बोल दिया।
सेठ - हु तौ तुम्हे खराब चीजों कों सही करने मे मज़ाआता हैं। तौ चलो मेरेसंग।
राजूडर जाता हैं कि सेठकहा लें जारहा हैं
सेठ राजू कों दो गाड़ियों केँ पास लेँ कर जाता हैं जौ कि बहोत हि बुरी कंडीशन मे थि।
सेठ - देखो राजू तुम्हे इनदो गाड़ियों कों सही करना हैं। अगर तुमने ऐसाकर दिया तौ मे तुम्हे आज केँ 40000 हजार रुपए दूंगा। ओरहर महीने कि सैलरी भि इतनी हि दूंगा। बस तुम् मुझेइन दोनों गाड़ी कों स्टार कर केँ चलने लायकबना दो। ओरअगर तुम् यहकाम नहि करपाए तोँ तुम्हे यहजॉब नहि मिलेगी। कहो मंजूर हैं।
राजू - (मन मे) अगर मे व्हीकल सही नहि कर पाया तौ मुझेजॉब नहि मिलेगी। ओरजॉब नहि मिलेगी तोँ मे उधारी केँ पैसे केसे चुकाऊंगा। नहि मुझेयह काम करना हि होगा।
सेठ - कहाखो गए। कहो मंजूर हैं।
राजू - मुझे मंजूर हैं सेठजी मगरआज केँ आज दोनो गाड़िया सजधजकर करना मुमकिन नहि हैं।
सेठ - नहि तुम्हे इनमें सें एक् कार कों बस स्टार करना हैं अगर तुमने यहकाम कर दिया तौ तुम्हारे 40000 हजारपके। ओरजॉब भि। मगरयह कामआज शाम तक होँ जानां चाहिए।
राजू - ठीक हैं सेठजी मुझे मंजूर हैं।
सेठ - तोँ ठीक हैं फिनलग जाओ अपनेकाम पऱ अब मे तुम्हे शाम कों हि मिलूंगा।
सेठ इतनाबोल कर अपनी गाड़ी मे बैठकर निकल जाता हैं।
पप्पू - दोस्त यह क्याँ किया तुमने।
राजू -( हैरानी सें ) क्याँ क्याँ मैने
पप्पू - दोस्त यह दोनो वाहनसेठ केँ पापा कि हैं। ओर दोनों। गाड़िया सही नहि होँ सकती। स्टार्ट तौ बहोत दूर कि बात हैं।
राजू - दोस्त अब तोँ करनी हि पड़ेगी। मेरीजॉब कां प्रश्न हैं ओरअगर मुझेयह जॉब नहि मिली तोँ तूँ जानता हैं मेरेपास कुछ नहि बचेगा।
पप्पू कों पता थां कि राजू अपने भइया कि सादीकर कर्ज चुकारहा हैं।
पप्पू - जानता हु कि तेरीजॉब कि कितनी जरूरत हैं मगर दोस्त यह गाड़िया स्टार्ट नहि होँ सकती।
राजू - अब तोँ कुछ भि कर केँ वाहन कों सही करना होगा।
राजूलग जात हैं अपने पूरेजी जान सें काम करने।
उधर सिला
सिला - राजूसही सें पहुंच गय़ा होगा नां। काम तौ सही सें कर लेगा क्याँ। सिला अपने हि सवालों मे खोई थि
ऐसा नहि हैं कि राजू पहलीबार शहर गय़ा हैं मगरआज बातअलग थि।
राजू कों काम करते करते दोपहर हौ हैं थि। राजू नें एक् व्हीकल कों पूरीतरह सें खोलकर रख दिया। ओर उसके पार्ट कों डीजल मे रख दिया। जंगलगे पार्ट्स कों नयालगा रहा थां। राजू कों समझ आँ गय़ा थां कि प्रॉब्लम क्याँ हैं।
पप्पू - क्याँ बात हैं राजू तुमने तौ व्हीकल कां पूरा पुर्जा पुर्जा खोल दिया हैं लगता हैं सही करके हि मानेगा।
राजू - करना हि पड़ेगा दोस्त। वरना तुँ जानता हैं।
पप्पू - सभी जानता हूं। अब तुँ यहकाम छोड़चल खाने कां समय हौ गय़ा हैं बाद मे कर लेना बाकी कां काम।
राजू - हाचल दोस्त बहुभूख लगी हैं।
राजूओर पप्पू दोनों खानां खाने लगते हैं।
राजू अपना टिफिन खोलकर पहल निवाला खाने लगता हैं तौ उसे सिला कि याद आँ जाती हैं।
राजू -( मन मे) आज सें पहले मैनेकभी मा केँ बिना खानां नहि खाया। अगरमा याह होती तौ अपने हाथों सें खिलता।
मगर राजूमन मारकर खानां खाने लगता हैं.
सेम यहींहाल सिला कां थां।
सिला - खानां खातेहुए। आज सें पहले मैनेकभी भि राजू केँ बिना खानां खाया। राजूजब तक अपनेहाथ सें मुझे नहि खिलाता तब तक मेरापेट नहि बरता।
मगर दोनों मा बेटेकुछ नहि कर सकते थें। दोनो नें मनमार कर खानां खाया औऱ अपने अपनेकाम पर्र लगगए।
राजू पूरेमन सें कामकर रहा थां। व्हीकल केँ एक् एक् पार्ट कों सही जांचकर चेककर रहा थां।
शाम होंजाती हैं ओर राजू वाहन केँ इंजन कों फिन सें जोड़कर सही करता हैं।
राजू कि मेहनत देखकर सबलोग हैरान थें। मगर पप्पू जानता थां कि राजू कों जॉब कि कितनी जरूरत हैं।
राजू वाहन कों पहले थि वैसीकर देता हैं।
तभीसेठ आता हैं ओर गाड़ी सें उतरकर राजू सें
सेठ - हा तोँ राजूकाम हौ गय़ा।
सेठ - अरेयह तोँ बहोत अच्छी बात हैं तौ कार कों स्टार्ट कर केँ दिखाओ।
राजू वाहन मे चाबी लगता हैं ओर स्टार्ट करता हैं। इस टाइमसब केँ दिल कि धड़कने बढ़ जाती हैं। राजू कि इसलिए कि अगर व्हीकल स्टार्ट नहि हुईँ तौ मुझेजॉब नहि मिलेगी। ओरसेठ कि इसलिए कि आज उसके पापा कि व्हीकल फिन सें सही होने वाली हैं।
राजू चाबी लगता हैं ओररेस देता हैं तौ कार स्टार्ट होँ जाती हैं।
सब बहोत खुश हौ जाते हैं राजू केँ तोँ मानोफिन सें सांसलौट आए होँ।
सेठ - वा राजूवा कमलकर दिया। जौ कामकोई नहि कर पाया वोँ काम तुमने कर दिया। मे बहोत खुशहु राजू।
राजू - thans सेठजी।
सेठ राजू कों गले लगता हैं। ओर बहोत खुश होता हैं।
सेठ - यह लें राजू तेरे 40000 हजारओर आज सें तेरीजॉब पकी मेरे बच्चे।
राजू भि बहोत खुश थां उसनेआज सें पहले इतने पैसेकभी नहि देखे थें। राजू पैसे लेता हैं ओर बाहर् आँ जाता हैं राजू कि बस कां वक्त होँ जाता हैं इसलिये राजू जल्द सें पैसे लेता हैं ओरबस कि ओर भागता हैं।
राजू जल्द सें अपनी माँ केँ लिए कपड़े ओरकुछ खाने कि चीज लेता हैं। आज राजू बहोत खुश थां। इतने पैसे देने केँ बाद राजू केँ बहोत कम पैसेबचे थें। जिसको राजू कों चुकाना थां।
आज केँ लिए इतना हि मिलते हैं अगलेभाग मे।
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Update 06
राजू अपनी माँ कि हुस्न मे खो जाता हैं। राजू बिनापलक झपके सिला कों देखेजा रहा थां।
राजू - (मन मे )मा क्याँ लगरही हैं नए कपड़ों मे।
राजू अपनी मम्मी कि हुस्न देख हाका बाकारह जाता हैं। राजू सिला केँ बबूसओर किलबेज बड़े ध्यान सें देखरहा थां। जिसके कारण राजू केँ लंड मे हरकत होने लगती हैं।
सिला अपने बेटे कों ऐसेदेख शर्मा जाती हैं। मगरजब सिला राजू कि आंखों कां पीछा करती हैं तौ सिला कों क्रोध आँ जाता हैं।
सिला - जोर सें राजू.
सिला नें राजू कों जोर सें आवाज़ लगाईमगर राजू तोँ अपनी माँ केँ बूब्स मे डूबा थां। सिला राजू केँ पास आँ करजोर सें
सिला - राजू
राजू हड़बड़ाते हुए बोलता हैं जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई होँ
राजू - हामा। क्याँ बोलरहे थें आप्
सिला - कान्हा देखरहा थां तुँ। ओर मैने तुम को आवाज़ भि लगाईमगर लाडसब तोँ अपने मे हि खोए हें।
राजू -( मन मे) लगता हैं मा कों पताचल गय़ा हैं कि मे खादेख रहा थां अब तोँ मार पड़नी पकी हैं अबमा मुझे नहि छोड़ने वाली।
सीमा - बोल नां बोलता क्यूं नहि
राजू-(बात कों संभालते हुए) नहि नहि मा आप् गलतसमझ रही हैं मे आपकी खुबसुरती मे खो गय़ा थां। मा आप् इस साड़ी मे बहोत खूबसूरत लगरही होँ। अगर देहात मे कॉम्पिटिशन करवाया जाए तोँ आप् हुस्न केँ मामले मे सबसेआगे होंगी।
सिला कों राजू कि तारीफ सुनकर अच्छा लगता हैं। राजू कि तारीफ मे सिला अपने गुस्से कों भूल हि गई थि।
सिला शर्मा कर - तूँ सचबोल रहा हैं। क्याँ मे इतनी हसीनलग रहीहु।
राजू - हामा मे सचबोल रहाहु आप् बहोत हॉटलग रही हैं।
सिला - हट बदमाश कही कां अपनी माँ कों हॉट बोलता हैं। चल खानां खाते हैं
राजू - (मन मे )बच गय़ा दोस्त आज तोँ लगता हैं मा मेरी डंडे सें अच्छे सें सेवा करती। मगर मैनेबात कों संभाला लिया।
सिलाओर राजूबैठ कर खानां खाने लगते हैं
राजू सिला कों अपना पहला निवाला खिलता हैं। सिला भि खा लेती हैं।
सिला - सुभह खानां अच्छे सें खाया थां।
राजू - हामा खाया थां मगर आप् केँ बिना आनंद नहि आता। जब तक मे अपनेहाथ सें आपको खानां नहि खिलादु। मुझे खानां अच्छा नहि लगता।
सिला - अब मे हर स्थान तोँ तेरेसंग नहि रह सकती नां।
राजू - आपकीबात सही हैं मगरमा आजजब लञ्चसमय मे खानां खारहा थां तब मुझे आपकी बहोत यादआई।
सिलाकुछ नहि बोलती मगरमन मे
सिला - (मन मे) मुझे भि जब तक तेरेहाथ सें मे खानां नहि खा लेतीतब तक मुझेभूख नहि लगती। मुझे भि आज तेरी बहोत यादआई।
राजूआज सें पहले इतनाघऱ सें बाहर् कभी नहि रहा थां। राजूजब खेत मे जातातब भि सिला जल्द सें खेतचली जाती थि। दोनोमा बेटे एक् दूसरे केँ बिनाआज पहलीबार इतनीदेर दूररहे थें।
सिलाओर राजू खानां खा लेते हैं। खानां खाकर राजू तौ छत पऱ चला जाता हैं ओर सिला अपनाकाम करने लगती हैं।
राजू(छत पऱ जाकर आंखेबंद कर लेता हैं ) - मा क्याँ लगरही थि। मा केँ मोटे मोटे बूब्स गोल चेहरा सपाटपेट। राजू सिला केँ बारे मे सोचते हि लंड खड़ा हौ जाता हैं।
सिला अपनाकाम निपटा करओर कपड़े बदलकर अपनी पुरानी साड़ी पहन लेती हैं ओर राजू केँ पासछत पऱ चली जाती हैं।
सिलाजा कर राजू केँ बगल मे लेट जाती हैं।
सिला - सो गय़ा मेरे राजा।
राजू - (सिला केँ तरफ देखता हैं ) - नहि मेरी रानी आप् केँ बिना नींद केसे आएगी।
सिला - अच्छा मेरे राजा कों मेरे बिना नींद नहि आती।
राजू - बिल्कुल नहि आतीआज सें पहले आप् केँ बिना नींदआई हैं क्याँ।
राजूओर सिला एक् दूसरे कों देखकर हंसने लगते हैं।
सिला - (भारी आवाज़ मे ) राजू मुझेमाफ करदे।
राजू हैरानी सें सिला कों देखता हैं
राजू - क्याँ हुआमा आप् क्यूं माफीमाग रहे होँ।
सिला - (आंखों मे आंसूलिए) - नहि राजू, मे तेरेलिए कुछ नहि किया। आज तक घऱ कि जिम्मेदारी उठाने केँ अलावा मैने तेरीकुछ नहि दिया। अगर मे तेरीबात मानकर तेरे भइया कि सादी नहि करती तोँ आज तुम्हें इतनादुख नहि उठाना पड़ता।
राजू - नहि मा आप् मुझेकोई दुख नहि हैं जब तक आप् मेरेसंग हैं मुझेकुछ नहि चाहिए। ओरघऱ कां मर्द हि तौ घऱ कि जिम्मेदारी उठाता हैं। आप् चिंता मतकरो जब तक आप् मेरेसंग हैं मैसभी कुछ संभाल लूंगा। आप् रोनाबंद करोमा।
मगर सिला केँ आंखों सें आंसू नहि रुकते।
राजू - आप् अपने राजा कि बात नहि मानेगी।
शीला कों राजू कि बातसुन कर हंसी आँ जाती हैं।
सिला - नहि मे अपने राजा कि बात केसे नहि मानूंगी।
राजू - यह हुई नां बात। मे मेरी रानी केँ आंखों मे आंसू नहि देख सकता। आज केँ बाद आप् कि आंखों मे आंसू नहि अपने चाहिए।
सिला - ठीक हैं आज केँ बाद मे कभी नहि रोऊंगी।
राजू सिला कों अपनी बांहों मे भर लेता हैं। ओरगाल पर्र किशकर देता हैं
राजू - सोजाओ आप्। मुझे भि नींद आँ रही हैं। कल मुझेकाम पऱ भि जानां हैं।
सिला भि राजू कों बांहों मे भरकरसो जाती हैं। सिला कों राजू कि बांहों मे अच्छा लगरहा थां।
दोनोमा बेटे एक् दूसरे केँ बांहों मे सो जाते हैं ओर दोनों कि आंख अगली सुभह हि खुलती हैं।
सिला कि आंख खुलती हैं ओर अपने आप् कों राजू कि बांहों मे पाती हैं। सिला कों आज बहोत अच्छी निदआई थि।
सिला राजू कों साइड करती हैं ओरउठकर राजू कों देखने लगती हैं।
सिला - आज तक मुझे इतनी अच्छी नींदकभी नहि आई। आज बड़ा अच्छा लगरहा हैं सिला कों राजू कि कलरात वालीबात यादआती हैं।
सिला - घऱ कां मर्दबन गय़ा हैं। घऱ केँ सारेकाम करनेलगा हैं। तुँ चिंता मत मे हमेशा तेरेसंग हु।
सिला राजू केँ गाल पर्र किश करती हैं ओर जल्द सें उठती हैं ओर नहाने चली जाती हैं। अपनी गांड़ बूब्स choot कों अच्छे सें साफ करती हैं। ओरघऱ कां काम करने लगती हैं। घऱ कां काम करने केँ बाद राजू कों जगाने छत पऱ चली जाती हैं।
Bhaiyo update ko bich mai chodne के leye sorry। lekin gifs add nahii aur rahe h ptaa नहीं site mai problem h ya कुछ aur baaki kaa update कल aaega। Sorry
❤️🔥❤️🔥बेटे केँ बच्चे कि मम्मी बनी पार्ट 2❤️🔥❤️🔥 - Aage kya hua? Next part padhiye
Superb bhay jordar update hain dhire dhire mummy bete mai payar hu double meaning bate hu or beta apni ko ek apni biwi kaa darja de wahi bete ko mummy apne ghrr mard banaye sharmaye uske liye saje sanwre
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