सीड्स ऑफ़ लस्ट (Seeds Of Lust) - Real Kahani Part 1
UPDATE 1:
२३साल कां रवि जैसे हि बस सें उतरा, साम कि हवा मे चमेली कि खुशबू भर गई, बसकुछ हि दूरी पर्र उसकाघऱ थां। अपनेघऱ तक जाने वालीधूल भरी मार्ग सें वो परिचित थां, फिन भि कॉलेज मे MBA Final केँ एक् लंबे सेमेस्टर केँ बाद अपने परिवार सें मिलने कि जिज्ञासा नें उसकेदिल कि धड़कनो कों तेज़कर दिया। उसकी बेहन रोमा कि हँसी उसकेमन मे गूँजउठी, जौ पिछले महीने हि २१साल कि हुइ थि, जैसे हि वो गेट केँ पासआया, उसनेछत पऱ घूमते हुए एक् परछाई देखि, वो रोमा थि जौ रवि कों देखते हि जल्दी छत सें गायब हौ गयीँ,।।
रवि कों देखते हि रोमा कि आँखें फैलगईं। वो तेजी सें सीढ़ियों सें नीचे उतरी, उसका पतलाबदन शालीनता सें हिलरहा थां औऱ उसकादिल ख़ुशी सें धड़करहा थां। "मां, भैया आँ गए!" उसनेरवि केँ चारों ओर अपनी बाहें फैलाते हुएकहा। उसकी मुस्कान मंद रोशनी वालेघऱ मे रोशनी कि किरण जैसी थि। जैसे हि वेगले मिले, रवि कों अपनेपेट मे एक् अजीब तनाव महसूस हुआ - येउसे इतने लंबे टाइम केँ बाद देखने केँ उत्साह सें कहीं ज्यादा थां।
हंगामा सुनकर उनकी मां सुनीता, अपने पल्लू सें हाथ पोंछते हुए किचन सें निकलीं। "कौन?" उसने आशर्य सें पूछा। "आपका राजा बेटा!" रवि नें खेल-खेल मे रोमा कों कुहनी मारी, जिसने अपनी आँखें तोँ घुमालीं, मगर अपनी मुस्कान नहि छिपासकी। रवि नें आगे बढ़कर सुनीता केँ पाँवछुए, सुनीता नें रवि कों अपनेगले सें लगा लिया। अपनी मम्मी केँ आलिंगन कि गर्माहट उसकी आत्मा केँ लिए एक् मरहमथ। रवि कि नज़र सुनीता केँ पीछे सें कमरे सें बहारआती हुईँ लड़की पर्र पड़ी।
आलिंगन सें मुक्त होने केँ बाद सुनीता नें रवि सें उसकाहाल चाल पूछा औऱ फिन वो उसे फ्रेश होने कां निर्देश देकर रसोई कि तरफमुड़ गयीँ,।
"क्याँ वो वाणी हैं?" रवि नें विपरीत दिशा मे देखते हुए रोमा सें पूछा।
"हाँ, ये वाणी मैडम हैं, " उसकी बेहन नें पुष्टि कि, औऱ काम समाप्त करने केँ लिए किचन कि ओर बढ़ी।
२२ वर्षीय वाणीरवि कि मौसेरी बेहन थि जोँ कॉलेज कि छुट्टियों मे उनके यंहाआयी थि, वो उनकेशहर सें दूर दूसरे शहर मे रहती थि।
वाणी रोमा केँ कमरे सें बाहर् निकली, उसकेबाल एक् ढीले जूड़े मे बंधेहुए थें जौ उसकेगोल चेहरे कों ढकरहा थां। उसनेऊपर देखा औऱ फिनरवि कों देखा, उसके होठों पर्र एक् शर्मीली मुस्कान खेलरही थि। उसकी गहरी भूरी आँखें उत्साह सें चमक उठीं। उसनेहाथ हिलाकर रवि कों दूर सें "Hi" किया, रवि नें अपनाहाथ हिलाकर मुस्कराहट केँ संगउसे पलटकर वैसे हि जवाब दिया।
वाणी तेज़ी सें चल केँ रवि केँ पासआई, गरम गर्मी कि हवा नें उसके जिस्म कों सहलाया, जिससे उसके बड़े मम्मों उसकी टी-शर्ट केँ नीचे धीरे-धीरे सें हिलने लगे। अपने विचारों पर्र नियंत्रण रखने कि कोशिश करतेहुए, रवि नें अपनाथूक गटका। रवि कों हमेशा सें हि सुडौल लड़कियाँ पसन्द थीं औऱ वाणी उसका प्रतीक थि। उसकी कामुक छविकुछ ऐसी थि जिसका वो हमेशा सें कायल थां, मगरअब जब वो उसके सामने थि, तौ वो उसके प्रति एक् गहरे, शारीरिक रूप सें प्रेरित आकर्षण कों महसूस करने सें स्वयं कों नहि रोकसका।
उन्होंने एक्-दूसरे सें बातचीत कि औऱ वाणी नें रवि कों अपनी पढ़ाई औऱ परिवार केँ बारे मे बताया। उसकी हँसी प्रभावशाली थि, औऱ जब वो अपने कॉलेज केँ बारे मे बात करती थि तोँ जिसतरह सें उसकी आँखें चमकती थीं, उससेरवि उसके बारे मे औऱ ज़्यादा जानना चाहता थां।
अगलेकुछ दिनों मे, उन्होंने एक् संग वक्त बिताया, सैर पऱ गए, फिल्में देखीं औऱ कैरम बोर्ड खेला। वाणी केँ संग बिताया हर लम्हा एक् सुखद एहसास थां, रवि नें चोरी चोरी वाणी केँ खूबसूरती कों निहारा औऱ अपनी कल्पनाओं मे उसकेबदन कि सुडौलता कां रसपान किया। यूँ तौ वाणीरवि कि "मौसेरी" बेहन थि पऱ उसकी सुंदरता कां वो पूरीतरह सें कायल होँ चूका थां, उनके रिश्ते कि बाधाओं केँ बावजूद रवि वाणी कि ख़ूबसूरती केँ पाश मे बंधता चला गय़ा। वाणी भि रवि कि दमदार पर्सनालिटी कि तरफ एक् आकर्षण महसूस कररही थि, उसे भि लम्बे चौड़े व्यक्तित्व वाले लड़के पसन्द थें.
एक् साम, जब सूरज क्षितिज केँ नीचे डूबने कों थां औऱ आकाश कों गुलाबी औऱ नारंगी रंगों सें रंगरहा थां, रवि नें वाणी कों छत पऱ अकेला खड़ा पाया। डूबते सूरज कि गरमचमक नें उसके चेहरे पर्र हल्की रोशनी बिखेर रखी थि, जिससे उसके ऊंचेगाल औऱ उसकीनाक पऱ हल्की धुप दिखाई देरही थि। ये दृश्य अत्यधिक मनमोहक थां। रवि नें साहस जुटाया औऱ वाणी केँ पासचल दिया, उसकादिल उसकी छाती मे तेज़ी सें धड़करहा थां। रोमा औऱ सुनीता उससमय बाजार गएहुए थें।
आगे कि किस्सा रवि केँ शब्दों मे वर्णित -
"वाणी, " मैंने उसकेपास पहुँच करकहा, मेरी आवाज़ मे फुसफुसाहट थि, "मे कुछ टाइम सें तुम्हें कुछ बताना चाहता थां। "
उसकी आँखें नें मेरी आँखों मे झाँका, उनमें थोड़ी जिज्ञासा औऱ शायद थोड़ी घबराहट भि थि। वो मेरीओर थोडा झुक गई, ; उसके मम्मों उसकी टी-शर्ट केँ कपड़े सें दबरहे थें, जिससे मेरागला सूखने लगा।
"क्याँ बात हैं?" उसने धीरे-धीरे सें पूछा, उसकी आवाज़ मे मासूमियत कि मिठास थि।
"मे अब औऱ नहि सह सकता.मे इसेअब औऱ दिल मे दबाकर नहि रख सकता, " मैंने कबूल किया, मेरादिल तेजी सें धड़करहा थां। “अरे!ऐसी क्याँ बात हैं?” उसने जिज्ञासावश पूछा.
“वाणी, वोँ मे…मे तुमसे प्रेम करता हूं। ” मैंने हकलाते हुए अपने जज़्बात बयानकर दिए
उसकी आँखें चौड़ी होँ गईं, उसके गालों पऱ लाली गहरेलाल रंग कि होँ गई जौ सूर्यास्त सें मेलखा रही थि। एक् समय केँ लिए वो चुप होँ गई औऱ आश्चर्य औऱ भ्रम केँ मिश्रित भाव सें मेरीओर देखने लगी। फिन, वो एक् कदम पीछेहट गई, उसकाहाथ छत कि रेलिंग तक पहुंच गय़ा जैसे कि वो स्वयं कों स्थिर कररही होँ।
"क्याँ? इसका क्याँ मतलब हैं?" वो हकलारही थि, उसकी आवाज़ कांपरही थि।
मैंने उसके लगभग जाकर एक् गहरी सांसली। "मे जानता हूं कि येठीक नहि हैं, मगर मे जोँ पिछले दिनों सें महसूस कररहा हूं उसेअब औऱ सह नहि सकता, तुम् हरतरह सें बहोत खूबसूरत हौ। तुम्हारी चाल, तुम्हारी मुस्कान, तुम्हारी मीठी सि आवाज़.ये सभी मुझे पागलकर देता हैं, " एक् सांस मे बोलता चला गय़ा, मेरी आवाज़ गंभीर थि.
वाणी कि नज़रें मेरे चेहरे कों तलाशरही थीं, जैसे मेरी बातों केँ पीछेकोई छिपाहुआ मतलब ढूँढरही हों। उसकेहाथ नें रेलिंग कों कसकर पकड़ लिया, औऱ मे उसके सीने मे धड़कन तेज़ होतेदेख रहा थां। "मगर हम् मौसेरे भइया-बेहन हें, " वो बुदबुदायी
मैंने अपनाहाथ धीरे-धीरे सें उसके कंधे पऱ रखा। "मुझेपता हैं, औऱ मे लंबे टाइम सें इस भावना सें जूझरहा हूं। मगरजब मे तुम्हें देखता हूं, तौ मुझेकोई मौसेरी बेहन नहि दिखती मे एक् स्त्री कों देखता हूं जिसने मेरेदिल पऱ कब्जा कर लिया हैं, " मैंने जवाब दिया, मेरी आवाज़ दृढ़ थि।
वाणी कि नज़र मेरे चेहरे सें हटकर क्षितिज कि ओरचली गई, मानो वो उस क्षण कि तीव्रता सें बचने कि कोशिश कररही हौ। उसने अपना निचला होंठ काटा, मे उसके दिमाग़ मे घूमती हुइ बातें पड़ सकता थां। "मे-मुझे नहि पता कि क्याँ कहना हैं, " आख़िरकार वो सफल हुई, उसकी आवाज़ फुसफुसाहट सें थोड़ी हि ऊपर थि।
मे एक् कदम औऱ लगभग गय़ा, मेराहाथ धीरे-धीरे सें उसकी कोहनी कों पकड़ने केँ लिए उसकी बांह सें नीचेसरक गय़ा। "तुम्हें अभि कुछ भि कहने कि ज़रूरत नहि हैं। मे बस तुम्हें बताना चाहता थां कि मे कैसा महसूस करता हूं, " मैंने धीरे-धीरे सें कहा, मेरी आँखें उस पऱ सें हट हि नहि रहीथीं।
उसकी नज़र मेरीओर लौटी, औऱ एक् समय केँ लिए, मुझेलगा कि मैंने उन गहरे भूरे गहनों मे कुछ टिमटिमाता देखा हैं - कुछऐसा जौ मेरे भीतरजल रही ख़्वाहिश कों झलकता हौ। मगर उतनी हि जल्द, वो समाप्त होँ गय़ा, उसकी स्थान अनिश्चितता कां माहौल आँ गय़ा। उसने एक् गहरी साँसली, उसकी छातियाँ ऊपर-नीचे हौ रही थि, औऱ मे उसकी टी-शर्ट केँ कपड़े मे दबे उसके स्तनों केँ तनाव कि प्रशंसा करने सें स्वयं कों नहि रोकसका।
"मुझेइस बारे मे सोचने केँ लिएकुछ वक्त चाहिए, " उसने कांपती आवाज़ मे कहा।
मैंने सिर हिलाया, उसे स्थान देने कि कोशिश कि औऱ संग हि हमारे बीच कि दूरी कों कम करने कि सख्त जरूरत भि महसूस कि। "तुम्हें जितना वक्त चाहिए लें लो, " मैंने उसे आश्वासन दिया, मेरा अंगूठा धीरे-धीरे सें उसकी कोहनी कि कोमल त्वचा कों सहलारहा थां। "मे बस तुम्हें बताना चाहता थां। "
सिर हिलाने सें पहले उसकी आँखें नें एक् लम्हा केँ लिए मेरी आँखों मे झाँका, मेरे शब्दों कां वजन उसपरअसर करता प्रतीत हौ रहा थां। "ठीक हैं, " वो बड़बड़ाई, उसकी आवाज़ मुश्किल सें सुनाई देरही थि। "मुझे बताने केँ लिए शुक्रिया। "
हमारे बीच तनाव स्पष्ट थां, हवा अनकही इच्छाओं औऱ सवालों सें भरी हुई थि। मुझे राहत औऱ चिंता कां एक् अजीब मिश्रण महसूस हुआ, मुझे यकीन नहि थां कि उसकी प्रतिक्रिया क्याँ होगी। क्याँ वो मेरी भावनाओं कों समझेगी, याँ उन्हें दरकिनार कर देगी?
"वाणी, " मैंने गहरी सांस लेतेहुए कहा, "अगर तुम्हें भि कभीऐसा हि महसूस हौ, थोडा सां भि, तौ आजरात सभी केँ सोने केँ बाद मेरे कमरे मे आँ जानां। "
उसकी आँखें मेरीओर उठी, हवा मे एक् मूक प्रश्न लटकरहा थां। मैंने उसेआशा औऱ लालसा सें भरी नज़र सें देखा, औऱ चाहा कि वो मेरी भावनाओं कि गहराई कों समझे। एक् समय केँ बाद जोँ अनंतकाल जैसा महसूस हुआ, उसनेसिर हिलाया, उसकी आँखें मेरी आँखों सें हट हि नहि रहीथीं।
"मे-मे इसके बारे मे सोचूंगी, " वो फुसफुसाई, उसकी आवाज़ भय औऱ उत्तेजना केँ मिश्रण सें कांपरही थि।
मैंने देखा कि वो मुड़ी औऱ चली गई, उसके चुत्तड़ हरकदम केँ संगहिल रहे थें, मे छत पऱ अकेला खड़ा उन्हें निहारता रह गय़ा, मेरादिल आगे घटने वाली घटनाओं कों सोचकर तेज़ी सें धड़कने लगा।
सीड्स ऑफ़ लस्ट (Seeds Of Lust) – New Episode
UPDATE 2:
जैसे-जैसे रात गहरी होती गई, मैंने स्वयं कों अपने कमरे मे बेचैनी सें टहलते हुए पाया, वाणी सें कही एक् एक् बात बार-बार मेरेमन मे घूमरही थि। मैंने कभी किसी लड़की कों इतना स्पष्ट रूप सें आज तक नहि बोला थां। मे अपनी हिम्मत पऱ स्वयं कों दाददे रहा थां, औऱ इसबात सें डर भि रहा थां केँ अगर उसनेमना कर दिया तोँ क्याँ होगा?घऱ मे किसी कों बता दिया तोँ मेरी तोँ शामत आँ जाएगी। फिन भि इतना तौ मुझे विश्वास थां केँ उसकेमन मे भि मेरे प्रति कुछ तोँ हैं, जैसा कि उसकी आँखों मे देखकर मुझे प्रतीत हुआ थां। दीवार पऱ लगी घड़ी घंटेकाट रही थि, हर मिनट अनंतकाल जैसा महसूस होँ रहा थां। क्याँ वो आएगी? याँ क्याँ मे स्वयं कों दिल टूटने केँ लिए रेडी रखूं?
मैंने कमरे कों जितना होँ सके सजाने कि कोशिश कि, रोशनी कमकर दि औऱ एक् नरम, रोमांटिक चमक पैदा करने केँ लिए नाईट बल्बजला दिया। पुरे कमरे मे रूम फ्रेशनर कां स्प्रे करउसे सुगन्धित बनाया अपनेफोन मे कुछ म्यूज़िक लगाया, कुछ धीमा औऱ कामुक, जिससे कुछ रोमांटिक सां मूडबन जाये। जब मे पलंग पर्र लेटाहुआ थां तौ मेरादिल तेजी सें धड़कने लगा औऱ किसी संकेत कां प्रतीक्षा कररहा थां कि उसनेकोई निर्णय लेँ लिया हैं।
जैसे हि घड़ी नें १२:३० बजाये, मैंने अपने दरवाजे कि ओरआते कदमों कि धीमी आवाज़ सुनी। मेरी धड़कन तेज़ हौ गई औऱ मे उठ बैठा, इंतज़ार मे मेरी साँसें रुकगईं। द्वार (दरवाज़ा) चरमरा कर खुला, औऱ वाणी अंदर दाखिल हुइ, उसकीछवि पीछेदूर सें आँ रही स्ट्रीट लाइट कि धीमी रोशनी सें उजागर हौ रही थि। उसने अंदरआते हि दरवाज़े कों बंद करने सें पहले घबराकर इधर-उधर देखा।
"वाणी, " मैंने खाट सें खड़े होकर फुसफुसाया। उसने मेरीओर देखा, उसकी आँखों मे भय औऱ जिज्ञासा कां मिश्रण थां। "हम्म, " उसने धीरे-धीरे सें दरवाज़े कों बंद करतेहुए कहा, उसकी आवाज़ मे हल्की सि घबराहट थि।
मे धीरे-धीरे सें चलकर उसकेपास पहुँच गय़ा। वो जंहा थि वंहीखड़ी रही। धीमे नाईट बल्ब कि रोशनी उसके चहरे पऱ नाचरही थि, परछाइयाँ उसकेबदन केँ उभारों केँ संगखेल रहीथीं। मे उसकी पतली टी-शर्ट केँ नीचे उसकी चूचियों कां उभरदेख रहा थां औऱ इस दृश्य नें मेरा मुँह सूखा दिया।
"नीचेसभी सोगए?" मैंने पूछा, मेरी आवाज़ फुसफुसाहट सें थोड़ी हि ऊपर थि। वाणी नें सिर हिलाया, उसकी आँखें फिन सें मुझ पऱ गिरने सें पहले कमरे केँ चारों ओरघूम गईं। वो अभि भि अपनी सामान्य पोशाक मे थि, मगरजिस तरह सें उसने अपनी शर्ट केँ कपड़े कों पकड़ा थां उससेपता चलता थां कि वो आरामदायक नहि थि। मैंने अपने भीतर उमड़रहे भावनाओं केँ तूफ़ान कों शांत करने कि कोशिश करतेहुए एक् गहरी साँसली।
"बताओ औऱ क्याँ कहना थां तुम्हे?" उसने मेरी आँखों मे देखकर प्रश्न किया।
"मुझेबस ये जानना थां क्याँ तुम् भि मुझे चाहती हौ?, " मैंने कहा, मेरी आवाज़ जोश सें भरी हुईँ थि।
वाणी कि आँखों नें मेरी आँखों कों खोजा, औऱ मे उनकी गहराइयों मे भावनाओं कां उथल-पुथल देख सकता थां। सन्नाटा बहराकर देने वाला थां औऱ कमरे मे तनाव करीब असहनीय थां। फिन, उसने हमारे बीच कि दूरी कों कम करतेहुए एक् अस्थायी कदमआगे बढ़ाया। मेराहाथ आगे बढ़ा, उसके जबड़े कि रेखा कां पता लगाया, मेरी उंगलियों केँ नीचे उसकी त्वचा कि कोमलता महसूस हुईँ। उसने मेरीओर देखा, उसकी आँखों मे भय औऱ लालसा कां मिश्रण थां। "तुम्हे क्याँ लगता हैं?" उसने धीमी आवाज़ मे प्रश्न किया
मे उसकीओर झुका औऱ उसके होठों कों चुम लिया।
"मुझे लगता हैं हम् दोनों हि एक् दूसरे कों बहोत चाहते हें" मैंने शालीनता सें जवाब दिया। उसकाडर कुछहद तक दूर होँ गय़ा, उसने अपने होंठइस बार स्वयं मेरे होंठो सें मिलादिए, उसके होंठ खुले जिससे मेरीजीभ उसके मुँह कि गरम साँसों औऱ उसकीलार सें सन गई,। हमारा चुंबन औऱ ज़्यादा भावुक होँ गय़ा, हमारे जिस्म एक्-दूसरे केँ लगभग आँ गए जैसे कि हम् उन सीमाओं कों मिटाने कि कोशिश कररहे थें जिन्होंने हमें इतने लंबे टाइम तक अलगरखा थां।
उसकेहाथ मेरी छाती तक पहुँचे, पहले तौ अस्थायी रूप सें, मगरफिन ज़्यादा आत्मविश्वास केँ संग, उसने मेरेबदन कि सुडौलता औऱ मसलता कां जायज़ा लिया। मे मजा सें उसके मुँह मे कराहने लगा, हमारे शरीरों केँ बीच कि गर्मी बढ़नेलगी। मैंने अपनेहाथ नीचे किये औऱ उसकी टी-शर्ट केँ छोर कों पकड़ केँ ऊपर उठाया, वाणी नें अपने दोनों हाथहवा मे उठा केँ टी-शर्ट उतारने मे मेरा सहयोग किया। उसकी टी-शर्ट कों उछाल केँ मैंने bed पर्र फेंक दिया। जैसे हि मैंने सफ़ेद ब्रा मे कैद उसकीबड़ी सि चूचियों कों देखा, मेरादिल मेरे सीने मे तेज़-तेज़ सें धड़कने लगा। वे मेरी कल्पना सें कहीं ज्यादा शानदार थि, औऱ मे उनकेवजन औऱ कोमलता कों महसूस करतेहुए, उन्हें अपने हाथों मे पकड़ने सें स्वयं कों नहि रोकसका।
मैंने अपने दोनों हाथ केँ पंजो मे उसकी मोटी चूचियों कों ब्रा सहितभर लिया औऱ ज़ोर सें भींचा। वाणी केँ मुंह सें मजाभरी एक् आहहवा मे गूंजउठी ” अहह!”। मैंने धीरे-धीरे- धीरे-धीरे उसकी चूचियों कों दबाते हुए उसके होठों सें अपनेहोठ मिलादिए। वाणी केँ हाथ मेरेसर केँ बालों कों सहलाने लगे।
मैंने वाणी कों चूमने औऱ उसकी गर्दन कों काटने केँ लिए अपनासिर नीचे किया, वाणी कि सांसें फूलने लगीं, मेरे हाथों नें चतुराई सें उसकी ब्रा कां हुकखोल दिया। हुक खुलते हि ब्रा उसके कंधो पर्र झूल गयीँ, औऱ मैंने बिना किसी देरी केँ उसे उसकेबदन सें अलगकर दिया। ब्रा केँ अलग होते हि वाणी कि मोटी सुडोल चूचियां हलकी रौशनी मे चमकउठी, मैंने अपनी उंगलिया बारी बारी सें उसकी चूचियों पऱ फिराई फिन उन्हें अपने पंजो मे जकड लिया औऱ दबाने लगा।
वाणी आँखेबंद किये मुझसे अपने चूचियां दबवाने लगी। मेरे ढीले शार्ट केँ अंदर सें मेरा लन्ड अकड़ केँ झटके देनेलगा। मैंने अपनासर झुकाया औऱ वाणी कि चूचियों केँ एक् निप्पल कों अपने मुँह मे भर लिया, अपनीजीभ उसके सख्त होँ चुके निपल पऱ फ़िराने लगा। वाणी हांफने लगी थि औऱ अपनीपीठ झुकारही थि। मैंने दूसरे हाथ सें उसकी दूसरी मम्मों कां मर्दन किया, उसके नाखून मेरीपीठ मे गड़गए। उसकाऐसा करना मेरेलिए आगे बढ़ने कां संकेत थां, औऱ मुझेपता थां कि वो उससमय मे उतनी हि खोई हुईँ थि जितना मे थां।
मेरेहाथ उसके पाजामे केँ नाड़े पऱ चलेगए औऱ कांपती उंगलियों सें मे उसके नाड़े कों खींचने लगा। वो पीछेहट गई, मैंने आशर्य सें उसकीतरफ देखा उसके नाड़े कि गाँठखुल चुकी थि औऱ वो अभि भि मेरेहाथ मे थां। वाणी नें शरमाते हुए अपने दोनों हाथों सें अपने पाजामे कों नीचे गिरने सें रोक लिया। उसने सवालिया नज़रों सें मेरीतरफ देखा, मैंने अपनेहाथ मे थामे नाड़े पर्र ज़ोरडाल केँ उसे अपने लगभग खींच लिया। वो मेरे सीने सें आँ लगी उसने अपने दोनों हाथ मेरीकमर पर्र लपेटलिए, उसका पजामा बिना किसी प्रतिरोध केँ सरक केँ फर्श पऱ जा गिरा।
वाणी कि आँखें मेरी आँखों मे झाँकने लगी उन्हें एक् आश्वासन कि तलाशथीं, औऱ मैंने उसेये आश्वासन एक् सौम्य मुस्कान औऱ धीमी फुसफुसाहट केँ रूप मे दिया। "तुम् बहोत खूबसूरत हौ, वाणी" मैंने अपने अंगूठे सें उसकी पैंटी कि इलास्टिक खींचते हुएकहा। उसने अपनी आँखें बंदकर लीं, जैसे हि मैंने उसकी बुर कि गर्मी औऱ गीलेपन कों महसूस करतेहुए अपनाहाथ उसकी पैंटी केँ अंदर डाला, उसके होंठों सें हल्की कराह निकल गई। उसकी बुर पऱ हलके छोटे नाज़ुक सें बाल थें जोँ मुझे अपनी उँगलियों पऱ महसूस हुए। जैसे हि मैंने अपनेहाथ कों थोड़ा औऱ अंदर सरकाया मुझे उसकी बुर कि दरारमिल गयीँ,। मैंने उसकी बुर कों सहलाना शुरुआत कर दिया, उसकी बुर बहोत गरम रसीले औऱ गीली थि। जैसे हि मैंने उसकी बुर कि नाजुक परतों कों छेड़ना औऱ रगड़ना शुरुआत किया तौ उसकी सांसें अटकने लगीं।
उसकेबदन नें सहजता सें जवाब दिया, उसके कूल्हे मेरे स्पर्श केँ संग-संग हिलरहे थें। मे महसूस कर सकता थां कि उसकी उत्तेजना बढ़रही हैं, जैसे हि मैंने अपने अंगूठे सें उसकी बुर केँ ऊपरीभाग कों रगड़ा, उसकेपेर कांपने लगे, उसने मेरीउसी हाथ कि बांह कों ज़ोर सें भींच लिया जिसकी ऊँगली उसकी बुर कि गहराई नापरही थि। मैंने उसकी जकड़न औऱ मुझ पर्र छाई हुईँ वासना कि खुमारी कों महसूस करतेहुए एक् उंगली उसकी बुर केँ अंदर सरका दि। उसकी बुर बहोत गीली थि, औऱ मे जान गय़ा थां कि वो औऱ ज़्यादा झेलने केँ लिए सजधजकर हैं, उसकी अनयंत्रित साँसों औऱ उसकी बुर केँ लचीले पन सें ऐसालग नहि रहा थां केँ यह उसका पहला तजुर्बा हैं। वाणी मुझे पहले सें खेलीखाई लगरही थि। मैंने अपनी उंगली अंदर-बाहर् सरकाई, गति बढ़ा दि, वो सभीकुछ भूलकर मजा औऱ वासना केँ संसार मे खो गई,।
वाणी कि कराहें तेज़ हौ गईं, उसने मेराहाथ पकड़कर अपनी बुर सें बहार खींचा औऱ फिन मेरी बनियान कि ओरहाथ बढ़ाया औऱ उसे मेरेसिर केँ ऊपर खींच लिया। उसकेहाथ मेरी छाती पऱ घूमरहे थें, उसके नाखून मेरी त्वचा पऱ हल्के सें खरोंच रहे थें, जिससे मेरी रीढ़ कि हड्डी मे सिहरन दौड़ गई। मैंने अपना शार्ट औऱ अंडरवियर एक् संग अपने शरीर सें निकलकर बेड पऱ फेंकदिए, मेरा६ इंच कां सख्त लन्ड उसकेपेट कि कोमलता पर्र दबावडाल रहा थां। उसने नीचे मेरे झटके मारते हुए लन्ड कि तरफ देखा, मेरी लन्ड कि लम्बाई, मोटाई औऱ सख्ती देखकर उसकी आँखें चौड़ी हौ गई,।
मे पीछेहट गय़ा औऱ धीरे-धीरे सें उसेबैड कि ओर लें गय़ा। वो बैठ गई, उसके पांव नीचे फर्श पर्र लटकरहे थें, उसकी आँखें कभी भि मुझसे नहि हटरही थीं। मे उसके सामने घुटनों केँ बलबैठ गय़ा, मेरेहाथ उसकी जाँघों सें होतेहुए उसकी पैंटी तक पहुँच गये। एक् तेज़गति केँ संग, मैंने उन्हें नीचे खींच लिया, जिससे उसकी बुर पूरीतरह सें मेरे सामने आँ गईं। उसकी बुर एक् सुन्दर सां त्रिकोण थि, जिसपर छोटे छोटे कालेरंग केँ बाल थें, ठीक किसी नाजुक गुलाबी फूल कि तरह जौ चाहरहा होँ केँ मे उसेचूम लूँ। मे झुक गय़ा, मेरी सांसें उसकी त्वचा पऱ गरम होँ गईं, औऱ मैंने उसकी बुर कों चूम लिया, उसकाबदन एक् समय केँ लिएअकड़ सां गय़ा फिन दूसरे हि लम्हा उसने एक् गहरी लम्बी सांस लेकर स्वयं कों शांत किया।
उसकी बुर कि खुशबू मादक थि, एक् मीठी कस्तूरी जिसने मेरी इंद्रियों कों वासना सें भर दिया औऱ मुझे उसकी बुर सें बहरहे पानी कों निगल जाने केँ लिए उकसाया। मेरीजीभ नें उसकी अंदरूनी जाँघों कि नाजुक चमड़ी कों तेज़ी सें चाटना औऱ चूसना शुरुआत कर दिया, उसके कूल्हे उछलरहे थें औऱ उसकेहाथ बेडशीट कों मुठी मे जकड़े थें। उसकी कराहें तेज़ हौ गईं, जिससे रूमभर गय़ा औऱ मुझेपता चल गय़ा कि वो चरमोत्कर्ष केँ लगभग थि। मैंने दो उंगलियाँ उसकी बुर केँ अंदर सरकादीं, उन्हें इसतरह घुमाया कि वो हांफने लगी औऱ अपनीपीठ झुकाली। अपनी उँगलियाँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसकी बुर मे अंदर बहार करतेहुए मे उसकी बुर केँ ऊपरीभाग कों चाटने लगा।
कुछ seconds मे हि उसका जिस्म कांपउठा, औऱ वो एकदम सें उठकरबैठ गयीँ, औऱ मुझे अपने नज़दीक खींच लिया। उसने मेरीओर देखा, उसकी आँखें वासना सें चमकरही थि, अगले हि लम्हा उसने मेरे लन्ड कों अपनी मुट्ठी मे भींच लिया।
मे इसे औऱ बर्दाश्त नहि करसका। मैंने उसे पलंग पऱ पीछे कि तरफ धक्का दिया औऱ लिटा दिया, स्वयं कों उसके पैरों केँ बीच मे खड़ाकर लिया। उसकी बुर अभि भि अपने कामसुख सें कांपरही थि, औऱ मे उसेफिन सें चखने कि लालसा कों रोक नहि सका। मे नीचेझुक गय़ा, मेरीजीभ उसकी परतों कां पतालगा रही थि, नमकीन स्वाद सें लबरेज़ उसकी बुर कि फांको कों टटोलरही थि। "अहह! हम्म!" उसकी मुंह सें कराह निकली, उसके कूल्हे मेरे मुँह सें मिलने केँ लिएउठ रहे थें, औऱ मुझसे औऱ गहराई मे उतरने कां आग्रह कररहे थें।
मैंने उसकेबदन कि जकड़न औऱ तड़प कों महसूस करतेहुए अपनीजीभ उसकी बुर केँ औऱ अंदर सरका दि। वो लजीज थि, औऱ मे उसका दीवाना बन चूका थां। मैंने उसकी बुर कों चाटा औऱ उसके भगनासे कों चूसा, उसकाबदन ऐंठने लगा, उसकेपेर मेरी गर्दन केँ चारों ओर लिपटकर, मुझे अपने औऱ लगभग खींचरहे थें। उसकी कराहें औऱ ज़्यादा तीव्र होँ गईं, औऱ मे समझ चूका थां केँ वो चरमोत्कर्ष केँ किनारे पर्र हैं औऱ किसी भि समयछूट सकती हैं। मेरीजीभ औऱ दांतो कि रगड़ कों अपनी बुर पर्र वो सह न् सकी, उसका जिस्म मेरे नीचेज़ोर सें कांपा औऱ उसने मेरानाम पुकारा "ओह.रवि!!"।
वो ज़ोर सें हांफने लगी, मे उससेअलग हौ गय़ा। मे अपने घुटनो पऱ bed केँ ऊपर खड़ा हौ गय़ा, मेरा लन्ड औऱ सख्त हौ गय़ा थां। जब उसने मेरीओर देखा तौ मे उसकी आँखों मे चाहतदेख सकता थां औऱ मे अब बिना किसी देरी केँ उसकी बुर कि गहराई अपने लन्ड सें नापने कों आतुर थां। मे उसकेऊपर लेट गय़ा। उसकेहाथ मेरे सीने औऱ पेट कों सहलारहे थें, उसके नाखून मेरी त्वचा कों हल्के सें खरोंच रहे थें। मे नीचे झुका औऱ उसके होंठ अपने होंठो मे कैदकर लिए, हमारी जीभें एक् संगनाच रहीथीं औऱ मैंने अपने लन्ड कों छोटे-छोटे रसीले बालों वाली उसकी बुर केँ प्रवेश दरवाज़ा पर्र सेटकर दिया।
एक् हल्के सें धक्के केँ संग, मेरा लुंड पहले सें गीली उसकी बुर केँ अंदरघुस गय़ा, उसकी बुर कि जकड़न औऱ गर्मी मुझे अपने लन्ड केँ इर्द गिर्द महसूस होनेलगी।। "अहह!ममम! " उसके मुंह सें आह फूटी, वो हांफने लगी, उसके नाखून मेरीपीठ मे गड़गए क्योंकि उसे हल्का दर्द महसूस होँ रहा थां "आआह। दर्द होँ रहा हैं" वो मेरेकान मे फुसफुसाई।
"कुछ सेकण्ड्स मे ठीक हौ जायेगा, " मे उसकी एक् मम्मों कों अपनेहाथ सें सहलाते हुए बोला, फिन उसकी गरदन कों चूमते हुए फुसफुसाया, "धीरे-धीरे करूँगा। "
मे उसके चेहरे कों प्रेम सें स्थान स्थान चूमने लगा, मेरे कूल्हे धीरे-धीरे धीरे-धीरे एक् स्थिर लय मे हिलरहे थें, मेरा लन्ड उसकी बुर कि गहराई मे घुसता जारहा थां। उसकी बुर कसी हुइ थि पर्र कुंवारी नहि थि, औऱ ये अनुभूति मेरेलिए एकदमनयी थि जौ मैंने पहलेकभी अपनीदो गिर्ल्फ्रेंड्स केँ संग भि महसूस नहि कि थि। वाणीयूँ तौ मेरी कजिन बेहन थि पर्र उससमय लन्ड औऱ बुर केँ संघर्ष नें सभी रिश्ते नाते पीछेछोड़ दिए थें।
थोड़ीदेर बाद हि वाणी केँ नाखूनों कि पकड़ ढीली हौ गई औऱ वो हाँफते हुए धीरे-धीरे मेरा सहयोग करनेलगी, उसकी बुर कि पकड़ मेरे लन्ड केँ आकार केँ अनुरूप हौ गयीँ,।
धीरे-धीरे धीरे-धीरे हमारे होंठ एक् दूसरे मे गुंथगए औऱ हमारी जीभें उलझने लगीं क्योंकि हमें एक् ऐसीलय मिल गई जौ हम् दोनों केँ अनुकूल थि। वाणी अपनीकमर उछाल केँ मेरे लन्ड कों अपनी बुर कि गहराई मे समेटने लगी। मे उसकी बुर कों अपने लन्ड केँ चारों ओर भिंचता हुआ महसूस कररहा थां। मेरा पूरा लन्ड उसकी बुर कि गहराई मे समां चूका थां औऱ मे अपने लन्ड कों सुपाड़े तक बहार खींचकर वापसजड़ तक उसकी बुर मे पेलरहा थां। मैंने गति पकड़ली, मेरे झटके लंबे औऱ गहरे होतेजा रहे थें, हर धक्के केँ संग उसके मुंह सें सिसकारियां फुटरही थि "आआह!उम्!"। उसकी साँसें अटकने लगी थि, औऱ उसकी आँखों कि पुतलियां उसके माथे कि तरफघूम गईं, उसके चेहरे पर्र पसीने कि कुछ बूंदों केँ संग शुद्ध परमानंद कि झलकदिख रही थि। वो स्खलन केँ लगभग थि।
उसकी कराहें तेज़ होँ गईं, औऱ वो मेरे कूल्हों कों अपने हाथों सें भींचने लगी, "अहह! औऱ तेज़" कहकर मुझसे अपनीगति बढ़ाने कां आग्रह करनेलगी। मैंने अपनेगति औऱ बड़ा दि, मेरे अंडकोष उसकी बुर पर्र थाप देनेलगे, उस शांत कमरे मे "थप, थप" कि आवाज़ें गूंजने लगी। उसके नाखून मेरीपीठ मे गड़गए औऱ खरोंच केँ निशान छोड़गए जिसने मेरी ख़्वाहिश कों औऱ भड़काने कां काम किया। मुझे अपने अंदर एक् दबाव बढ़ताहुआ सां महसूस होनेलगा। एक् आखिरी, गहरे धक्के केँ संग, मैंने उसकी बुर कों अपने वीर्य कि बौछार सें भर दिया, उसने मुझेज़ोर सें अपने आलिंगन मे कस लिया, उसकीबड़ी बड़ी सुडोल चूचियां मेरे सीने केँ संग भींच गयीँ,।
उसके जिस्म नें एक् ज़ोरदार कम्पन कि औऱ फिन वो निढाल पड़ गई,। मे भि उसकेऊपर ढह गय़ा, हम् वैसे हि हांफते औऱ कांपते हुए लेटेरहे, मजा केँ झटके अभि भि हमारे अंदर तरंगित होँ रहे थें।
वाणी कि आँखों नें मेरी आँखों कों खोजा, "रवि, " वो फुसफुसाई, उसकी आवाज़ कर्कश थि
"क्याँ हमनेसही किया?"
मैंने अपनेधड़ कों ऊपर उठाया, मेरा लन्ड अभि भि उसकी बुर केँ अंदर समाया हुआ थां, औऱ उसके चेहरे सें बालों कां एक् गुच्छा हटतेहुए कहा " बिलकुल सही किया मेरीजान, दो प्रेमियों केँ बीच तौ यह हि होता हैं, " मेरी आवाज़ वासना सें कर्कश हौ गई। "ये नेचुरल हैं, वाणी। औऱ बहोत मज़ेदार भि। "
उसकी आँखें नें मेरी आँखों मे झाँका, उसका संदेह आहिस्ता दूर होँ रहा थां, उसकी स्थान एक् गर्माहट नें लेँ ली जिसने मेरे जिस्म मे रोमांच पैदाकर दिया। " मज़ा तौ बहोत आया, " उसने स्वीकार किया, उसकी आवाज़ मे एक् चुलबुली फुसफुसाहट थि। "मगरअब क्याँ होगा? तुम्हें पता हैं नं हम् भइया-बेहन हें"
मैंने सिर हिलाया, ये महसूस करतेहुए कि हमारे रिश्तों कां भारमुझ पर्र पड़रहा हैं, मगर मे उसआग कों नजरअंदाज नहि करसका जोँ अभि भि मेरी नसों मे जलरही थि। "मे जानता हूं वाणी, हमारा नाता हि हमारे इस सम्बन्ध कों स्पेशल बनता हैं, औऱ मे इसे खोना नहि चाहता, " मैंने स्वीकार किया, मेरी आवाज़ भावनाओं सें भरी हुई थि। "
मे उसकेऊपर सें उठकर उसकीबगल मे लेट गय़ा। वाणी एक् लम्हा केँ लिएचुप होँ गई, उसकीहर सांस केँ संग उसकी छातियां ऊपरउठ रही थि। फिन, उसने मेरीतरफ करवटली, उसकी आँखें एक् नए दृढ़ संकल्प केँ संग मेरी आँखों सें मिलीं। "मे भि तुम्हे खोना नहि चाहती" उसनेकहा, उसकी आवाज़ धीमी फुसफुसाहट थि। "मगर हमें सावधान रहना होगा। तुमने मेरे अंदर हि कर दिया, अगर मे pregnant होँ गई तौ क्याँ होगा?"
"मे आगे सें सावधानी बरतूंगा, औऱ tension मतलो, कल तुम्हे एक् गोली लेकरदे दूंगा" मैंने वादा किया, हालाँकि शब्द अपर्याप्त लगे। "अभि केँ लिएसभी भूलजाओ औऱ इन पलों कां मज़ालो। "
वाणी नें सिर हिलाया, उसकी आँखें चमकरही थीं। वो झुकी, उसके कोमल होंठ मेरे होंठों सें टकराकर एक् चुंबन कां रूप लेँ रहे थें जौ हमारे प्रेम कां परिचायक थां। हम् वहीं लेटेरहे औऱ हमारी आँखें बंद होँ गई,, एक्-दूसरे केँ आलिंगन कि गर्माहट मे खोएहुए तब तक सोतेरहे, जब तक कि भोर कि पहली किरण पर्दों केँ बीच सें नहि रेंगने लगी। नं चाहते हुए भि, वो मेरी बाँहों सें दूर हौ गई, उसकी आँखें अंतिम क्षण केँ लिए मेरे चेहरे पऱ टिकगईं।
जैसे हि उसने चुपचाप जाने केँ लिए कपड़े पहने, मे उसकी प्रशंसा किए बिना नहि रहसका, जिसतरह सें सुभह कि रोशनी उसके उभारों पर्र खेलरही थि औऱ उसके सुडोल बदन केँ दर्शन मेरी आँखों कों होँ रहे थें मेरे लन्ड मे अकड़न होनेलगी, उसी मादकबदन सें मे रातभर खेला थां औऱ आगे भि उसे भोगने कि कल्पनयें मेरेमन मे दौड़रही थि।
सीड्स ऑफ़ लस्ट (Seeds Of Lust) – New Episode
Update 3
3 सालबाद - 3 Years Later
हम् 3 सें ज्यादा वर्षों तक अपने रिश्ते कों सब सें गुप्त रखने मे कामयाब रहे, पऱ हम् चाहकर भि अपने रिश्ते कों कोईनाम नं देसके क्यूंकि वाणी अपने retired फौजी पिता सें बहोत डरती थि।
एक् वक्त तक तौ मे भि वाणी कां इसहद तक दीवाना थां कि उसे अपना बनाने केँ लिए किसी भि हद तक जा सकता थां पर्र जैसे जैसे टाइम बिता औऱ मे वाणी कों चोदने लगा मेरा जूनून उसके प्रति कुछकम हौ गय़ा।
उसके पिता कों उसकी विवाह कि जल्द थि औऱ वाणी केँ नं चाहते हुए भि २५साल कि उम्र मे उन्होंने उसकी विवाह एक् आईटी इंजीनियर सें कर दि।
उसकी विवाह हुए८ महीने बीत चुके थें औऱ इनआठ महीनो मे बस३बार हि वाणी कों चोद पाया थां। वाणी अपनी विवाह केँ बाद फरीदाबाद शिफ्ट हौ गई, मे भि तब तक दिल्ली मे रहकर एक् होटल मे नौकरी कररहा थां। जब भि वक़्त मिलता हम् चोरी छिपे एक् दूसरे सें मिलते रहते थें। किसी दूसरे व्यक्ति कां उसके शरीर कों भोगना, मेरेदिल मे एक् चाकू कि तरह चुभता थां। फिन भि, मे खुश थां, हमारा सम्बन्ध पहले सें कहीं ज्यादा मजबूत थां, हमारी वासना औऱ प्यार कि लौ पहले सें कहीं ज़्यादा तेजजल रही थि।
उसका पति अक्सर काम सें बहार जाता थां। जब भि वो रात कों घऱ पर्र अकेली होती मुझेकॉल आई करती औऱ हम् बातें करते, हमारी बातचीत एक् जिंदगी रेखा थि जौ मुझेउस स्त्री सें जोड़े रखती थि जिससे मे प्रेम करता थां। हमारी बातें संग बिताये एक् एक् समय कों दोबारा सें ज़िंदा कर देती। हम् खुलकर बिना संकोच केँ बातें करते जिनमे अधिकांश अश्लीलता होती।
जब भि उसका पति काम सें कंही बहार जाता मे उसे अपने फ्लैट पर्र बुला लेता औऱ फिन हम् दोनों सभीकुछ भूलकर चुदाई कां भरपूर मजा लेते।
अचानक सें एक् दिन रोमा कां फ़ोनआया औऱ उसने बताया केँ मम्मी कि तबियत बिगड़ गई, हैं उन्हें किडनी फेलियर हुआ हैं, मैंने अपनेकाम सें १५दिन कि छुट्टी ली औऱ अपनेघऱ आँ गय़ा।
पहलेकुछ दिन हॉस्पिटल केँ चक्कर, दवाइयों केँ दौर औऱ मां कि देखभाल मे निकलगए। ७-८दिन बाद मां कि सेहत मे सुधार होनेलगा तबकुछ राहत कि सांसआयी।
मे वाणी औऱ उसकेबदन कि गर्मी कों बहोत मिसकर रहा थां। मेरेफ़ोन कि घंटीबजी, उस टाइम दोपहर कां वक़्त थां औऱ खानां खाने केँ बाद मे अपने कमरे मे लेटा थां, मैंने फ़ोनचेक किया वाणी कि कॉलआई थि, मैंने कॉलआई रिसीव कि औऱ उससेबात कि, उसने मां कि तबियत केँ बारे मे पूछा मैंने उसे बताया केँ अबसभी ठीक हैं। उसनेरात कों बात करुँगी कहकरफ़ोन काट दिया। शायदकोई आसपास थां उसके।
उसी दिन, रात कों १०बजे जब मे मम्मी कों कुछ ज़रूरी दवाइयां देने केँ बाद उनकेखाट केँ पास बैठा थां, मुझेलगा कि मेरा फ़ोन किसी मैसेज केँ आने सें vibrate कररहा हैं। मैंने मां सें नज़रबचा केँ मैसेज चेक किया "क्याँ पहनाहुआ हैं" ये एक् साधारण प्रश्न थां, मगरजिस तरह सें उसने पूछा उससे सीधे मेरे लन्ड मे बिजली दौड़ गई। मैंने अपनी मम्मी कि ओर देखा, जोँ शांति सें ऊंघरही थि, मैंने मम्मी कों चादर उड़ाई औऱ फर्स्ट फ्लोर केँ अपने कमरे मे आँ गय़ा, रोमाउस वक़्त बहारहॉल मे बैठी टेलीविज़न देखरही थि।
मैंने तेज़ी सें अपनागेट लॉक किया औऱ खाट पऱ गिरते हि वाणी केँ मैसेज कां रिप्लाई किया
"बस एक् टी-शर्ट औऱ शार्ट, " मेरे अंगूठे स्क्रीन पर्र तेज़ी सें घूमरहे थें। "तुम् अपनी बताओ?"
वाणी कां जल्दी रिप्लाई आया."बस एक् Red पैंटी, " उसके जवाब नें मेरे रोंगटे खड़ेकर दिए "तुम्हरे हाथों कों अपनी बॉडी पर्र मिसकर रही हूं। "
केवल पैंटी मे उसके नग्न शरीर कि कल्पना सें हि मेरे लन्ड मे अकड़न पैदा होँ गई,। "मे भि, " मैंने अपनी भावनाओं कों स्थिर रखने कि कोशिश करतेहुए वापस टाइप किया। "औऱ क्याँ क्याँ याद आँ रहा हैं ?"
उसने जल्दी रिप्लाई किया "तुम्हारा लन्ड, " उसके शब्दों कि बेबाकी नें मेरे लन्ड कों फड़कने कों मजबूर कर दिया। "मे चाहती हूं तुम् मुझेऐसे चोदो केँ मेरी चीखें निकलजाए। "
वासना केँ उठते ज्वार सें टाइप करते टाइम मेरेहाथ कांपने लगे "चाहता तौ मे भि यही हूं, " मैंने स्वीकार किया, "मगर कँहा केसे?" मैंने प्रश्न किया।
कुछ सेकण्ड्स बाद हि वाणी कां जवाबआया "मे घऱआयी हुईँ हूं दोदिन केँ लिएयही आँ जाओ, " उसने आग्रह किया।
"पऱ घऱ पर्र तौ सभी होंगे वंहा केसे?" मैंने दूसरा प्रश्न लिया
"ओह होँ बुद्धू, घऱ पऱ नहि होटल मे, मे २-३ घंटे कां वक़्त निकल केँ आँ जाउंगी" उसने स्पष्ट किया। फिन वाणी नें उसकेशहर केँ एक् होटल कि डिटेल्स भेजी.उस टाइम वाणी कों चोदने कि लालसा मे औऱ कुछसमझ नहि आँ रहा थां, मैंने जल्द सें उस होटल मे एक् रूमबुक किया औऱ उसे डिटेल सेंडकर दि "ओके स्वीटी, कल दोपहर १२बजे मिलते हें".
वोँ रात वाणी कों अपनी बांहो मे फिन सें कसने औऱ उसकेअंग अंग कां रसपान करने कि व्याकुलता मे मैंने जागकर काटी।
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