बहू के साथ शारीरिक सम्बन्ध - hind sex story - Complete Kahani All Parts
#1
आप् सब कां हृदय सें आभार प्रकट करतेहुए एक् नयीकथा आपके समक्ष प्रस्तुत करता हूं। स्टोरी कों कल्पनिक हि मानकर पढ़ियेगा क्योंकि मेरीये कथा मेरी कल्पना कि उड़ान कि एक् पराकाष्ठा हैं औऱ एक् ऐसे सम्बन्ध पऱ आधारित हैं, जिसको कथा मे उकेरने केँ लिये मुझे बहुत सोचना पड़ा.
फिन भि आप् लोगों केँ मनोरंजन केँ लियेइस स्टोरी कों लिखने बैठ गय़ा हूं। आशा करता हूं कि आप् सब कों कथा मनपसंद आयेगी औऱ मेरी गलती केँ लिये मुझेमाफ करेंगे औऱ संग हि मुझेये बताना कि इस स्टोरी केँ पात्र नें जौ कुछ कियासही थां याँ नहि।
दोस्तो, मेरानाम साहिल हैं औऱ मेरी उम्र लगभग 50 पारकर चुकी हैं। मेरेघऱ मे मेरे बेटे सोनू केँ अलावा औऱ कोई नहि हैं। उसकी मम्मी कों गुजरे लगभग 8 साल हौ चुके हें औऱ अभि दोसाल पहले मेरे माँ-बाप कां भि देहांत हौ चुका थां।
अब मेरेघऱ मे मे औऱ मेरा बेटा सोनू हि हैं, जिसकी उम्र लगभग 26 साल कि हैं।
देखने मे सोनू ठीक-ठाक हैं औऱ एक् मल्टीनेशनल कम्पनी मे कार्यरत हैं। मे अपने बेटे कि विवाह करना चाहता थां मगर वोँ विवाह करने केँ लिएमान हि नहि रहा थां.
तब भि परिवार केँ लोगों केँ दबाव केँ कारण मुझे सोनू कि विवाह एक् बहोत हि सुंदर औऱ घरेलू लड़की सें करनीपड़ी।
हांलाँकि सोनू विवाह केँ पक्ष मे नहि थां।
विवाह होँ गई,, मेहमान भि अपनेघऱ चलेगये।
एक् दिन मेरीबहू सायरा नें मुझसे अपने मायके जाने केँ लिये अनुमति मांगी। मैंने भि खुशी-खुशी इस शर्त केँ संग सायरा कों उसकेघऱ भेज दिया कि वोँ जल्द वापिस लौटकर आयेगी.
पऱ 10 दिनबीत गये, वोँ नहि आयी। मैंने सोनू कों उसे लाने केँ लिये भेजा, पर्र वोँ उसकेसंग भि नहि आयी औऱ बहाने बना दिया कि उसकी तबीयत ठीक नहि हैं।
इसतरह एक् महीना बीत गय़ा।
इसबीच मैंने मेरे बेटे कों 2-3 बार सायरा कों बुलाने केँ लियेकहा मगर जैसे वोँ आनां नहि चाहरही थि।
इधर मेरेयार दोस्त जोँ मेरेघऱ अक्सर आँ जाया करते थें, बहू केँ बारे मे पूछते थें। मगरअब मेरे लिये उन्हें भि टालने मुश्किल होनेलगा थां।
इसके अलावा मुझे भि बात कों जानना थां कि ऐसा क्याँ होँ गय़ा जिसके वजह सें बहू अपने ससुराल मे आने केँ लियेमना कररही थि औऱ सोनू केँ सासू माँ ससुरजी भि सायरा कों वापस भेजने केँ लिये रेडी नहि होँ रहे थें।
इसलिये हारकर एक् दिन मे सोनू केँ ससुराल पहुँच गय़ा।
मेरी आवभगत तौ बहोत अच्छे सें हुइ औऱ मेरेवहा जाने सें घऱ केँ सबलोग बहोत खुश थें।
बातों बातों मे मे जानना चाहरहा थां कि आखिर सायरा क्यूं नहि वापस अपने ससुराल नहि आनांचाह रही हैं।
सोनू केँ ससुरजी नें बस इतना हि कहा कि जब भि वोँ लोग सायरा कों बोलते तोँ सायरा बस इतना कहती कि बस थोड़ेदिन वोँ उन लोगों केँ संगरह लेँ, फिनचली जाऊंगी, क्योंकि मेरे यहांउसे अपनेघऱ दोबारा जल्दआने कां मौका नहि मिलेगा।
मैंने सायरा सें भि बात कि मगर उसने भि मुझेवही रटा रटाया जवाब दिया।
अब मेरा अनुभव जौ मुझसे कहरहा थां कि जरूर मेरे सोनू केँ नाकाबिलयत केँ वजह सें येसभी होँ रहा हैं।
पऱ तुरन्त हि मैंने अपनेकान कों पकड़े औऱ बोला-हे प्रभु, ऐसाकुछ भि न् होँ, जैसा मे सोचरहा हूं।
फिन भि मे उन बातों कों जानना चाहरहा थां जिसके कारण सायरा नहि आँ रही थि.
औऱ ऐसीबात सायरा सें घऱ पऱ नहि हौ सकती थि।
इसलिये मैंने सायरा सें कहा- बेटा, तुम्हारे शहरआया हूं, मुझे अपनाशहर नहि घुमाओगी?
सायरा खुशी-खुशी सजधजकर होँ गयीँ,। मे सायरा केँ माँ बापू सें इजाजत लेकर सायरा केँ संग घूमने केँ बहाने घऱ आँ गय़ा। सायरा अपनी स्कूटी मे मुझे बैठाकर मेरेसंग चल दि।
थोड़ीदेर तक मे उसकेसंग इधर-उधर कि बातें करतेहुए घूमता रहा। फिन मैंने सायरा कों ऐसी स्थान पर्र लें चलने केँ लियेकहा, जहाँ पऱ मे उससे अकेले मे बातें कर सकूं।
पहले तोँ सायरा नें मुझे टालने कि कोशिश कि मगर मेरीजिद केँ कारण वोँ मुझे एक् रेस्टोरेंट मे लें आयी।
रेस्टोरेंट मे भीड़ बहोत थि तोँ हम् लोग वहां सें वापिस चलने कों हुए.
तोँ मैनेजर नें रोककर जाने कां कारण पूछा.
मेरे द्वारा कारण बताने पऱ वोँ मुझे एक् केबिन कि तरफ इशारा करतेहुए बोला-सर, इस वक़्त वोँ केबिन खाली हैं, अगर आप् लोग चाहें तोँ उसमें बैठ जायें।
मुझे भि यही चाहिये थां कि मुझे औऱ सायरा कों कोई डिस्टर्ब नहि करे। तोँ मैंने मैनेजर कों कुछ सनैक वगैरह भिजवाने कों कहा औऱ मे सायरा केँ संगउस केबिन केँ अन्दर आँ गय़ा।
कुर्सी पऱ बैठते हि मैंने सायरा पर्र पहलावही प्रश्न दागा कि वोँ वापस क्यूं नहि जानां चाहती.
पऱ उसने भि वहीरटा रटाया जवाब दिया।
तभी मैंने सायरा केँ हाथ कों अपनेहाथ मे लेतेहुए कहा- देखो बेटी, मे हि सोनू कि मां औऱ बाप हूं। अबअगर सोनू कि मम्मी होती तोँ वोँ तुमसे पूछकर समस्या कां समाधान निकालती।
फिन मैंने अपनीबात कों आगे बढ़ाते हुएकहा- देखो बेटा, मे जानता हूं कि जरूरऐसी कोईबात तुम् दोनों केँ बीच हुयी हैं जोँ मुझे बताने केँ काबिल तौ नहि हैं औऱ जिसके वजह सें तुम् वापस भि नहि आँ रही हौ।
मगर सायरा नें मेरीबात कों काटते हुएकहा- नहि पिताजी, ऐसीकोई बात नहि हैं।
“नहि बेटा, बात तौ कुछ न् कुछ जरूर हैं। नहि तौ मुझे बताओ, नयी ब्याही लड़की भला अपने ससुराल सें दूररह सकती हैं?” इतना कहकर एक् बारफिन मैंने उसके हाथों कों अपने हाथों मे लिया औऱ बोला- देखो सायरा, चाहे तुम् मुझे अपनी सासू माँ समझो, याँ ससुरजी समझो, याँ यार, जौ कुछ भि समझना हैं समझो, मगर आज अपनी समस्या मुझसे शेयरकरो। क्योंकि मे अपने दोस्तों औऱ रिश्तेदारों कों तुम्हारे न् आने कां कारण नहि बतापा रहा हूं।
इतना कहतेहुए मे उसकीतरफ देखने लगा औऱ सायरा भि मुझे टकटकी लगाकर देखने लगी।
उसकी आंखों केँ कोने सें आंसू कि एक् बूंद मुझेदिख गयीँ,। मैंने उसके आंसू कों अपनी उंगली मे लेतेहुए कहा- सायरा, देखोयह तुम्हारे आंसू केँ बूंदबता रहे हें कि कुछ न् कुछऐसा जरूरहुआ हैं कि तुम् सोनू सें दूर हौ गयीँ, हौ।
अभि भि बिना बोले सायरा मुझे टकटकी लगाकर देखती रही।
मैंने फिन उसकेहाथ कों सहलाते हुएकहा- सायरा, तुम् बस इतनामान लो कि तुम् अपनी सहेली सें बातकर रही हौ। औऱ जोँ कुछ भि तुम्हारे अंदर हैं उसको मुझे बताओ ताकि मे उस समस्या कों दूरकर संकू।
“मुझे तलाक चाहिये। ” उसनेइस शब्द कों अपने रूँधे हुएगले सें कहा।
मे एकदमधक सें रह गय़ा- तलाक!!!ये क्याँ कहरही होँ?
मेरा अनुमान सही दिशा मे जानेलगा मगर मे सायरा केँ मुंह सें सुनना चाहता थां।
“हाँ पिताजी, मुझे तलाक चाहिये। ”
“बेटा तलाक?मगर क्यूं?”
“बापू, मे कारण नहि बता सकती, मगर मे सोनू सें तलाक चाहती हूं। ”
“बेटा, न्यायालय मे भि तलाक कां कारण तौ बताना पड़ेगा। औऱ इससे मुझे औऱ तुम्हारे बापू दोनों कों हि शर्मिन्दगी उठानी पड़ेगी। इतनीदेर मे मे येसमझ गय़ा हूं कि तुम्हारे औऱ सोनू केँ बीच जौ समस्या हैं उसको अभि तक तुमने अपने मां औऱ बापू कों नहि बताया हैं। ”
मेरीबात सुनकर सायरा नें अपनी नजरें झुकाली औऱ हम् दोनों केँ बीच एक् अजीब सि शान्ति छा गई,।
थोड़ीदेर बाद मैंने बातआगे बढ़ाई औऱ सायरा सें बोला- देखो बेटा, मैंने बड़ी उम्मीद सें सोनू कि विवाह करवायी थि कि मेरे यहां स्त्री नाम पर्र कोई नहि हैं औऱ तुम्हारे आने सें येकमी पूरी होँ जायेगी। मगर तुम् बिनाकोई वजह बताये तलाक कि बातकर रही हौ। थोड़ादेर केँ लिये सोचो, मे लोगों सें क्याँ बताऊंगा कि मेरे बेटे औऱ बहू केँ बीचऐसा क्याँ हुआ कि इतनी जल्द तलाक कि नौबत आँ गयीँ,।
“तोँ बापू, मे क्याँ करूँ इसके अलावा कोई मार्ग नहि हैं। ”
“मार्ग नहि हैं! मार्ग नहि हैं! कहरही होँ मगर समस्या नहि बतारही होँ?” इस टाइम मे भि थोड़ा झल्ला कर सायरा सें बोल बैठा।
सायरा नें मेरीतरफ देखा, उसकी पलकें भीगी हुयी थि, रूँधे हुए आवाज़ केँ संग बोलि- पिताजी, सोनू सें विवाह करने सें अच्छा थां कि आप् जैसे किसी अधेड़ सें मे विवाह कर लेती।
अपनीबहू सायरा कि इसबात सें मे बिल्कुल समझ गय़ा कि सोनू नें मेरेनाम कों मिट्टी मे मिला दिया। अब मे चाहकर भि सायरा सें बातेआगे नहि बढ़ा सकता।
तभी सायरा बोलि- बापूजी, एक् बात आपसे पूछनी हैं।
“हाँहाँ पूछो बेटा?”
“चलिये मे अपने बापू औऱ आपकी इज्जत केँ खातिर अपने अन्दर केँ महिला कों भूल जाऊँ.मगर जोँ गलती सोनू कि हैं, उसका इल्जाम मे अपनेऊपर क्यूं लूँ?”
“मे समझा नहि?”
“मे माफ़ चाहते हुएबोल रही हूं, आप् बुरामत मानियेगा। ”
“नहि बेटा, मे बुरा नहि मानूंगा। ”
“पापाजी, मे अपनी जिस्मानी भावना कों अगरमार भि दूं पर्र कल कों हमारा बच्चा नहि हुआ तोँ आपके औऱ हमारे यार औऱ रिश्तेदार हि मुझे बांझ बोलेंगे। जबकि मेरी गलती भि नहि होगी औऱ अपराधी भि मे हूंगी। ”
“हाँये बात तोँ हैं सायरा! पऱ एक् मार्ग ये भि तोँ हैं कि तुम् दोनों एक् बेबी कों एडाप्ट करलो तोँ जमाने वाले नहि कहेंगे। ”
“तब मे अपने माँ-बाप कों क्याँ जवाब दूंगी। वोँ अगर पूछें कि तुमने बच्चा गोद क्यूं लिया?”अगर मैंने सारा किस्सा बताया तौ बोलेंगे कि मैंने उन्हें पहले क्यूं नहि बताया। औऱ नहि बताती तौ फिन सोनू कि गलती औऱ सजा मुझे?”
“हम्म!” मे कहकरचुप होँ गय़ा।
तभी सायरा नें मेरे हाथों कों अपने हाथों मे लेँ लिया औऱ सहलाने लगी।
“सायरा, मे कल सुभह वापसजा रहा हूं। अगर तुमको मुझ पर्र विश्वास होँ तोँ तुम् मम्मी भि बनोगी औऱ औऱ जब तक मे इस दुनिया मे जीवित हूं तुम्हें महिला होने कां अहसास भि मिलेगा। औऱ किसी कों कुछ भि कहने कां मौका भि नहि मिलेगा। ”
सायरा मेरीतरफ टकटकी लगाकर देखने लगी, शायदइस वक़्त मे कुछ जरूरत सें ज़्यादा स्वार्थी होँ गय़ा थां, मे सायरा सें नजर नहि मिलापा रहा थां.
बहुतदेर तक हम् दोनों केँ बीच खामोशी छायीरही औऱ सायरा कि तरफ सें कोई उत्तर न् आने पर्र मुझे अपने हि ऊपर क्रोध आनेलगा।
जब बातों कां सिलसिला दोबारा शुरुआत नहि हुआ तौ मे औऱ सायरा वापिस चल दिये।
रास्ते मे मैंने उसे उसकी पसन्द केँ कुछ कपड़े खरीदकर ये कहकर दिये- बेटा, ये छोटा सां उपहार तुम्हारे पिताजी कि तरफ सें हैं।
जब तक घऱ नहि आँ गय़ा, मे रास्ते भरयही सोचता रहा कि सायरा मेरी बातों कों किस अर्थ मे लेगी।
घऱ पहुँचने केँ बाद मेरा औऱ सायरा सें कोई आमना-सामना नहि हुआ औऱ मे भि इसी उधेड़बुन मे रहा कि सायरा मेरी बातों कों बुरामान गयीँ, हैं।
रात केँ खाने केँ टाइम भि सायरा मेरे सामने नहि आयी।
खानां खाते वक़्त हि मैंने सायरा केँ माँ-बापू कों सुभह होते हि जाने केँ लियेबोल दिया।
किस्सा जारी रहेगी।
बहू के साथ शारीरिक सम्बन्ध - hind sex story – New Episode
#2
दूसरे दिन मे सातबजे अपना सामान लेकर बाहर् आया तोँ देखा एक् बैग औऱ भि हैं औऱ सायरा केँ बापूऑटो लेकर आँ चुके थें। उधर सायरा भि नारी सुलभ परिधान मे रेडी होकर आँ चुकी थि औऱ अपने माँ-बाप सें विदाई लेकर मेरेसंग होँ ली।
हमने अपनेशहर केँ लियेबस पकड़ी। हम् दोनों केँ बीचइस बीचकोई बातचीत नहि हुयी।
बस चल चुकी थि औऱ हम् दोनों केँ हाथआपस मे टकरारहे थें। कई किलोमीटर तक हम् लोग बिना बातचीत केँ यात्रा करतेरहे। मगर मेरे शब्दों कों सायरा नें पकड़ा याँ नहि … ये मुझे जानना थां.
इसलिये मैंने सायरा कां हाथ लिया औऱ उसको सहलाते हुए पूछा- सायरा थैंक्स, तुम्हारे इस अहसान कां बदला नहि चुका पाऊंगा। मगर एक् बात जाननी हैं मुझे कि जोँ कुछ मैंने कहा, उसकाआशय हि समझकर मेरेसंग आयी होँ नाँ?
मेरी पुत्रवधू मे मेरीतरफ देखा औऱ कहा- कहते हें नाँ कि व्यक्ति हौ याँ स्त्री … अपना क़िस्मत स्वयं बनाती हैं। औऱ आज मे भि अपना किस्मत स्वयं बनाने आपकेसंग चलरही हूं। याँ फिन मे अपने माँ-बाप पऱ दुबारा वोँ बोझ नहि डालना चाहती।
“नहि सायरा, अगरऐसी बात होँ तौ तुम् मेरे बेटे सें तलाक लेँ सकती होँ औऱ तुम् अपने मम्मी-बाप पर्र बोझा भि नहि डालोगी, मे तुम्हारा पूरा खर्च उठाऊंगा। ”
“तबफिन आपनेऐसा क्याँ पापकर दिया कि आप् हर स्थान रुपया भि खर्च करें औऱ हाथ भि आपका खालीरहे औऱ बदनामी भि आपको हि मिले?”
“तोँ फिन मे समझूँ कि तुम्हारे मन मे किसी प्रकार कां बोझ नहि हैं?”
उसने मेरीतरफ देखा, फिन बस मे चारों ओर देखा औऱ मेरेहाथ कों चूमते हुए बोलि- बापू, ये सबूत हैं कि मुझेकोई अफसोस नहि हैं।
तब मैंने भि सायरा केँ हाथ कों चूमते हुएकहा- सायरा, समाज केँ सामने हमारे रिश्ते जोँ भि होंमगर आज सें हम् एक्-दूसरे केँ दिल मे रहेंगे, बस तुम्हें धैर्य रखना होगा। क्योंकि मे चाहता हूं कि जैसा तुमने अपनी सुहागरात केँ सपना देखा होगा, उससे अधिक सुखद तुम्हारी सुहागरात हौ।
फिन पूरे रास्ते हम् दोनों केँ हाथ एक्-दूसरे सें अलग नहि हुए।
हम् दोनों घऱ पहुंचे, दरवाजा सोनू नें खोला। मेरेसंग सायरा कों देखकर बहोत खुशहुआ। खुशी मे उसने सायरा कों कसकर अपनी बांहों मे भर लिया। थोड़ीदेर तक दोनों एक् दूसरे सें चिपके रहे औऱ फिन सायरा अलग होतेहुए मेरे सीने सें चिपक गयीँ,।
सायरा केँ देखा-देखी सोनू भि मेरे सीने सें चिपक गय़ा।
मेरा एक् हाथ सोनू केँ सिर कों सहलारहा थां जबकि दूसरा हाथ सायरा केँ पीठ सें लेकर चूतड़ तक सहलारहा थां।
थोड़ीदेर तक हम् लोग बातें करतेरहे। फिन सोनू कों होटल सें खानां लाने केँ लियेभेज दिया।
सोनू केँ जाते हि मैंने सायरा कों पैसे निकाल कर देतेहुए कहा- तुम् अपने हिसाब सें अपनी सुहागरात कि तैयारी करो, जिस रात कों मौका मिलेगा, उसरात तुम्हारे जिंदगी कां सबसे सुखददिन होगा।
धीरे धीरे सायरा कों आये 15-20 दिनबीत गयेमगर कोई मौकाहाथ नहि लगरहा थां। बसरोज सुभहसाम सायरा कि नजरें मुझसे प्रश्न करती रहती थि।
इसबीच हनीमून केँ बहाने सायरा औऱ सोनू घूमने भि चलेगये।
मगरसाम कों मोबाइल पऱ नमस्कार पिताजी कि एक् धीमी आवाज़ मेरेदिल मे नश्तर कि तरह चुभती थि। इसबीच मैंने न् तोँ सायरा कों छुआ औऱ न् हि सायरा नें मुझे छूने कि कोशिश कि.
इसतरह सें दिनबीत रहे थें कि तभी एक् दिन सोनू नें आकर बताया कि उसे उसकेबॉस केँ संग दूसरे दिन सुभह जानां हैं औऱ दूसरी रात कों वोँ वापिस आयेगा।
मेरेमन कों सोनू कि इसबात सें बहोत खुशी मिली।
मैंने सायरा कि तरफ देखा तौ वोँ अपनी नजरें नीचे कि हुयी अपने पैरों केँ नाखून सें जैसे जमीन कों खोदरही थि।
दूसरे दिन सोनू लगभग 10 बजेघऱ सें निकला। उसके जाते हि सायरा मुझसे चिपक गयीँ, औऱ बोलि- बापू, आज कि रात केँ लिये मे न् जाने कितनी रातों सें बैचेनी सें प्रतीक्षा कररही थि।
“जाओ सायरा, तुम् अपनी तैयारी करो औऱ मे अपना बेडरूम सजवाता हूं। ”
फिन मैंने सायरा सें उसके पैन्टी औऱ ब्रा कि साईज पूछी। सायरा नें बड़े हि सहजता सें कहा- 80 साइज कि ब्रा हैं औऱ 85 साईज कि पैन्टी हैं।
मे घऱ केँ बाहर् आँ गय़ा औऱ सायरा कों उपहार करने केँ लिये एक् सुन्दर सोने कां हार खरीदा, उसके साईज कि पैन्टी-ब्रा लिया औऱ संग हि ढेर सारेफूल लेकर मे घऱ पहुँचा।
ब्रा, पैन्टी औऱ फूल मैंने सायरा कों दे दिया। फूल देखकर सायरा बहोत खुश हुयी।
फिन मैंने सायरा कों ब्यूटी-पार्लर जाने केँ लियेकहा।
बाहर् जातेहुए सायरा बोलि- बापू, आज आपको एक् दुल्हन हि मिलेगी!
“औऱ तुम्हें एक् दूल्हा, जोँ तुम्हें आजरात एक् कली सें फूल औऱ एक् लड़की सें महिला बनायेगा। ”
सायरा मेरीबात कों सुनकर शर्माते हुए नजरें झुकाकर बाहर् निकल गई,।
इधर मैंने अपनेबैड पऱ सफेद चादर बिछाया औऱ उस पर्र तीनचार प्रकार केँ फूल सें ढक दिया। दो-तीन घंटे केँ बाद सायरा वापिस ब्यूटी पार्लर सें आयी, उसके चेहरे पर्र चमक थि। अभि साम कों सातबजे थें। हम् दोनों केँ मन मे हि जिस्मानी मिलन कि एक् उत्सुकता थि।
इसलिये हम् दोनों नें खानां खाया औऱ खानां खाने केँ बाद मैंने सायरा सें कहा कि वो दुल्हन कि पोशाक पहनकर मेरे कमरे मे मेरा प्रतीक्षा करे।
लगभग साढ़ेआठ बजे केँ बाद मे वापिस आया औऱ शेरवानी पहनकर मैंने भि एक् दूल्हे केँ गेटअप लिया। औऱ अपने कमरे केँ दरवाजे कों हल्के सें खोलते हुए अन्दर आया.
दरवाजा बन्द करके अपने बिस्तर कि ओर देखा, सायरा दुल्हन केँ वेश मे अपने कों सिकोड़ कर बैठी हुयी थि। कमरे कि खुशबू आजठीक वैसी हि थि जैसे मेरी सुहागरात केँ वक्त कि थि।
मे बिस्तर पऱ सायरा केँ पासबैठ गय़ा औऱ उसके हाथों पऱ अपनेहाथ रख दिये। सायरा केँ लिये शायदइस तरह सें मेरा उसकेहाथ कों छूने कां पहला मौका थां इसलिये उसने अपने आपको औऱ समेट लिया।
एक् बारफिन मैंने उसकेहाथ कों पकड़ा एक् बार वोँ फिन पीछे हुयी। मैंने उसका घूंघट उठाते हुए उसकी ठुड्डी कों उठाया, पलकें अभि भि सायरा नें झुकारखी थि।
मैंने सायरा सें कहा- सायरा तुम् बहोत सुन्दर लगरही होँ।
मेरा इतना बोल्ना थां कि सायरा कि नजरें मेरीतरफ उठी.
ठीक उसी टाइम मैंने सायरा कों उस सोने केँ हार कां सेट देतेहुए कहा-इस हसीन दुल्हन कां उपहार।
अब सायरा कि नजरउस हार पर्र हि थि.
मैंने पूछा- कैसालगा?
बोलीं- बहोत सुंदर।
इसकेबाद मे सायरा केँ सीने पर्र अपनेसिर टिकाकर उसकेदिल कि धड़कन सुनने लगा। उसकादिल बहोत हि तेजधड़क रहा थां औऱ सांसें भि बहुततेज चलरही थि।
उसकेबाद मैंने उसकेसर सें पल्लू हटाते हुए उसकीनथ उतारी औऱ आरामसे उसके जिस्म सें सारे गहने उतारकर किनारे रखकर सायरा कों अपनी बाहों मे भर लिया। सायरा नें भि मुझेकस कर अपनी बांहों सें जकड़ लिया।
मैंने सायरा सें पूछा- सायरा, तुम् सजधजकर होँ?
“हूम्म!” मेरी पुत्रवधू नें एक् संक्षिप्त उत्तर दिया।
मैंने आरामसे सायरा कों बैड पऱ लेटाया औऱ उसके सीने सें साड़ी हटाते हुए उसके सीने कों चूमते हुए पेटीकोट मे फंसी साड़ी कों हटाया औऱ पेटीकोट कां नाड़ा खोलकर अपनाहाथ उसके अन्दर डालते हुए उसकी बुर पऱ फिराने लगा.
सायरा कि बुर गीली हौ चुकी थि। मैंने उसकेकान कों दांतों केँ बीच फंसाते हुएकहा- सायरा तुमने तोँ पानीछोड़ दिया।
सायरा बोलीं- आज सुभह सें मात्र आपके बारे मे सोचरही थि। मे कितना बर्दाश्त करती, जैसे हि आपने मुझेछुआ, मे गीली हौ गई,। प्लीज आप् ऐसा करते रहिये, आपकाइस तरह सहलाना मुझेबड़ा अच्छा लगरहा हैं.
इतना कहकर सायरा नें अपने पैरों कों सिकोड़ते हुए अपनी टांगों केँ बीच थोड़ागैप बना दिया।
सायरा कि बुर गीली हुयी तौ क्याँ हुआ, मेरेहाथ अभि भि उसके अनारदाने कों मसलरहे थें औऱ उंगली कों अन्दर डालने कां प्रयास कररहे थें।
फिन मैंने उसके ब्लाउज केँ ऊपर सें हि उसके खरबूजे कों बारी-बारी मे अपने मुंह मे लेता औऱ मसलता। फिन मैंने सायरा केँ ब्लाउज औऱ ब्रा कों उसके शरीर सें अलग किया औऱ उसके छोटे-छोटे दानो पर्र अपनीजीभ चलाते हुए उसके खरबूजे कों मसलता थां औऱ बीच-बीच मे दानों कों काट लेता थां। वोँ सीईईई करकेरह जाती थि। मे उसकी नाभि उसकेपेट पर्र जीभ फिराता।
मे अभि भि यहीकर रहा थां कि सायरा बोलि- बापू, चुनचुनाहट होँ रही हैं, प्लीज कुछ करिये नां!
बस इतना कहना थां कि मैंने सबसे पहले अपने आपको नंगा किया औऱ फिन अपनीबहू सायरा केँ बचे-खुचे कपड़े हटाकर उसको नंगी किया औऱ उसकी टांगों केँ बीचआकर बैठ गय़ा।
बहू कि बुर बहुत चिकनी थि मगर मे इस टाइम सायरा सें कुछ पूछना नहि चाहता थां। बस मैंने इतना किया कि दो तकिये लिये औऱ सायरा कि कमर केँ नीचेलगा कर उसकीकमर कों अपनीकमर कि ऊंचाई तक उठाया औऱ उसके बुर केँ मुहाने कों लन्ड सें सहलाते हुएकहा- सायरा, आज थोड़ा तुम्हें दर्द, जलन होगा, सजधजकर हौ नाँ?
“पिताजी, आप् करो, जोँ भि होगा, मे बर्दाश्त करूँगी। ” मेरीबहू नें कहा.
बस इतना हि कहना थां, मे सायरा केँ ऊपर झुका, अपने लन्ड कों पकड़कर सायरा कि बुर मे ताकत केँ संग अन्दर डालने लगा.
जैसे-जैसे सायरा कि बुर मेरे लन्ड कों अन्दर लेने केँ लिये स्थान बनारही थि, वैसे-वैसे सायरा कां चिल्लाना शुरुआत होँ चुका थां। वोँ मुझेनोच खसोटरही थि औऱ मुझे धक्का देकर अपनेऊपर सें हटाने कि कोशिश कररही थि, पर्र मे उसकीसब बातों कों अनसुना करतेहुए लन्ड कों धीरे धीरे उसकी बुर केँ अन्दर डालता हि जारहा थां।
तभी सायरा कि रूंधी हुयी आवाज़ आयी- पिताजी, रहनेदो, बहोत दर्द होँ रहा हैं। मे बर्दाश्त नहि करपारही हूं, मे मर जाऊंगी, प्लीज छोड़ दो-प्लीज छोड़दो।
मगर मैंने उसकी किसी बातों पऱ ध्यान नहि दिया औऱ लन्ड कों पूरा बुर केँ अन्दर डाल दिया।
उसकीसील टूट चुकी थि क्योंकि मेरा लन्ड चिपचिपाने लगा थां।
फिन मैंने रूककर उसके आंसू कों, उसके होंठों कों, उसकी छोटे-छोटे निप्पल पऱ बारी-बारी जीभ चलाता।
कुछ हि देर केँ बाद सायरा नें अपनीकमर उठानी शुरुआत कि औऱ अपनीकमर कों हिला-डुला कर लन्ड कों सेट करतेहुए बोलि- पिताजी, एक् बारफिन चुनचुनाहट हौ रही हैं।
अब तक सायरा दो-तीन बार अपनीकमर उचका चुकी थि।
मे उसकी ख़्वाहिश कों देखते हुए मे आरामसे लन्ड कों अन्दर बाहर् करनेलगा। अब उसकी बुर कि सिकुड़न कम होनेलगी औऱ फैलाव आनेलगा। जैसे-जैसे उसकी बुर मे संकुचन मे कमी औऱ फैलाव मे अधिकता होतीजा रही थि, मेरी स्पीड भि बढ़तीजा रही थि।
उसकेबाद रफ्तार नें जोर पकड़ा औऱ सायरा कि आवाज़ आनेलगी- हाँ पापाजी, बहोत अच्छा लगरहा हैं, बसऐसे हि कीजिए।
मेरी स्पीड बढ़तीजा रही थि। लन्ड औऱ बुर केँ मिलन केँ थप-थप कि आवाजों केँ गवाह मेरारूम बनाजा रहा थां।
सोनू केँ माँ केँ जाने केँ कईसाल बाद बुर चोदने कों मिलरही थि, वोँ भि सोनू कि नाकामी कि वजह सें!
मगरअब मे थकनेलगा थां औऱ सांस भि फूलने लगी थि इसलिये मैंने सायरा केँ ऊपर अपनावजन डाला औऱ उसके खरबूजों कों बारी-बारी चूसता, उसके होंठों कों चूसता, उसकेकान काटता, सायरा भि मेरासंग देरही थि।
जब मे अपने स्टेमिना पऱ काबूपा लेता तौ फिन धकापेल शुरुआत होँ जाता।
इस बीचदो बार मेरा लन्ड अच्छे सें गीला होँ चुका थां, पऱ पता नहि क्याँ बात थि कि लन्ड मुझसे धक्के पर्र धक्के लगवाये जारहा थां। जब-जबलगा कि अब मेरामाल निकलने वाला हैं, तब-तब लन्ड मुझे धोखादे जाता, मुझे औऱ कसरत करनीपड़ जाती।
खैर बकरे कि अम्मा कब तक खैर मनाती … मेरे लन्ड नें पानी छोड़ना शुरुआत कर दिया। मुझेपता नहि लगा कि कितना वीर्य निकला … मगरहुआ मजे कां थां। कई सालों सें टट्टों मे कैद थां।
मे हाँफते काँपते अपनीबहू सायरा केँ नंगे शरीर केँ ऊपरगिर गय़ा औऱ जब तक मेरे महाराज उसछेद सें बाहर् नहि निकले, मे तब तक सायरा केँ ऊपर हि रहा.
फिन मे उसकेबगल मे आकरलेट गय़ा।
किस्सा जारी रहेगी।
बहू के साथ शारीरिक सम्बन्ध - hind sex story – New Episode
#3
जिस्म मे थोड़ी ताकतआने केँ बाद मैंने सायरा कों एक् बारफिन सें अपनी बांहों मे कसकरजकड़ लिया, ताकि मुझे उसकेगरम शरीर सें गर्मी मिलसके। थोड़ीदेर तक वोँ मुझसे चिपकी रही, मगर फिन वोँ कसमसाने लगी औऱ अपने आपको मुझसे छुड़ाने कि कोशिश करतीरही.
मगर वोँ जितना मुझसे अपने कों छुड़ाती, उतना हि मे सायरा कों जकड़ लेता।
मेरीबहू कसमसाते हुए बोलीं- बापूजी, प्लीज अबछोड़ दीजिए नाँ!
“क्याँ हुआ? मनपसंद नहि आँ रहा हैं क्याँ?”
“नहि येबात नहि हैं, मगर …”
“मगर क्याँ?”
“जी पेशाब आँ रही हैं। ”
बस इतना सुनना थां कि मैंने सायरा कों औऱ जकड़ लिया।
“बापू, प्लीज छोड़ दीजिए … नहि तोँ बैड पऱ हि निकल जायेगी। ”
मैंने सायरा कों छोड़ दिया, वोँ चादर सें अपने नंगेबदन कों ढकनेलगी, मैंने तुरन्त चादरपकड़ ली औऱ बोला-इसे क्यूं ओढ़रही होँ?
वोँ अपने पैरों कों चिपका कर उछलते हुए बोलीं- लज्जा आँ रही हैं।
“अब क्याँ शर्माना … अब हम् तुम् पति-पत्नि भि हें। औऱ तुमको पेशाब करने जानां हैं तोँ नंगी हि जाओ!” कहकर मैंने चादर खींचली।
वोँ चादरछोड़ कर लंगड़ाती हुए बाथरूम कि तरफ भागी। भागते वक़्त सायरा केँ कूल्हे ऊपर नीचे हौ रहे थें।
बहुतदेर बाद सायरा पेशाब करके बाहर् आयी तौ मैंने पूछा- अन्दर देर क्यूं लगा दि?
तौ वोँ बोलीं- पिताजी, पेशाब करते वक्त मुझेजलन महसूस हुयी तौ मैंने देखा तोँ पेशाब केँ संग-संग हल्का-हल्का खून भि आँ रहा थां.
वोँ अपनी ताजी चुदी बुर कि तरफ इशारा करतेहुए बोलि- मे बसइसे साफकर रही थि।
अपनीबात ख़त्म करने केँ बाद सायरा मेरेपास आकर मेरे सीने मे मुक्के बरसाते हुए बोलि- पिताजी, आप् बड़े वोँ हें।
मैंने उसकेहाथ पकड़कर चिपका लिया औऱ बोला-अगर मे बड़ा वोँ नहि होता तौ तुमको आनंद नहि आता।
मेरीबात सुनकर वोँ चुप होँ गई, औऱ फिन बोलि- बापू, अन्दर अब भि बड़ीजलन हौ रही हैं।
मुझे इसका अंदाजा पहले सें हि थां, मैंने क्रीम लाकररखी हुईँ थि, उसे निकाली औऱ उंगली मे लेकर सायरा कि बुर केँ अन्दर अच्छे सें लगा दिया।
ये सभी करने केँ बाद मैंने सायरा सें पूछा- कैसालगा बेटी?
“बापू बहोत अच्छा लगा, मे जिस उम्मीद सें आपकेसंग आयी थि, वोँ पूरी हुयी। औऱ आपने तोँ कमाल हि कर दिया। मे आपको बताऊं … मेरा पानीदो बार निकल चुका थां मगर आप् तौ मुझे छोड़ने कां नाम हि नहि लेँ रहे थें। ”
“चलो अच्छा हैं। अब हमारी सुहागरात हौ चुकी हैं, इसलिये आज केँ बादजब भि तुम् चाहोगी, मे तुम्हें सुखदे दिया करूँगा। ”
“थैक्यूं बापू। ”
“अब यह बताओ कि सुहागरात केँ वक्त सोनू नें क्याँ किया थां?”
“कुछ नहि, कमरे मे आने केँ तुरन्त बाद उसने जल्द-जल्द मेरे औऱ अपने कपड़े उतारे औऱ मुझे यहां वहां चूमने चाटने लगा, इससे पहले मे कुछसमझ पाती, मुझे अपने नीचेकुछ गीलालगा, मेरा ध्यान जब तक वहां सें हटता, तब तक सोनूबगल मे लेटकर सो चुका थां, मे अपनी उंगलियों केँ बीच सोनू केँ पानी कों मलरही थि औऱ सोतेहुए सोनू कों देखरही थि, पूरीरात मेरी रोते रोते बीती।
“चलो कोईबात नहि, आज भि तुम्हारी पूरीरात रोते रोते हि बीतेगी मगर तुम्हें उसका सुखद एहसास होगा। ”
“अच्छा जरा नीचे उतरकर कमरे कि पूरी लाईटजला कर मेरेपास आओ। ”
मेरीबहू लाईट जलाकर मेरेपास आयी, हम् दोनों कि नजरखून सें सनी हुई चादर पऱ पड़ी तौ सायरा नें शर्माकर अपनी नजरें झुकाली।
मे उसकेपास खड़ा होकर उसकीपीठ कों सहलाते हुए बोला- चादर पऱ येखून बतारहा हैं कि तुम्हारी सीलटूट गयीँ, हैं।
तभी सायरा मेरे लन्ड कि तरफ उंगली सें इशारा करतेहुए बोलीं- बापूजी, मेराखून इस पऱ भि लग गय़ा हैं।
“कोईबात नहि। ” कहकर मे बाथरूम मे घुसा औऱ अपने लन्ड कों साफ किया.
इधर सायरा नें भि बिस्तर कां चादरबदल कर, उस चादर कों लाकर बाल्टी मे डालकर उसे गीलाकर दिया।
उसकेबाद मे औऱ सायरा वापिस बिस्तर पऱ आकरबैठ गये।
थोड़ीदेर बाद मैंने सायरा कों पलंग पऱ हि खड़े होने केँ लियेकहा। मेरीबात कों मानते हुए सायरा पलंग पर्र खड़ी हौ गयीँ,। सायरा कां बदनदूध जैसा थां। जांघ केँ पास एक् तिल थां।
मे सायरा कों लगातार घूरेजा रहा थां, मुझेइस तरह घूरते देखकर बोलीं- बापू, आप् मुझेइस तरह क्यूं देखरहे हैं?
“कुछखास नहि, तुम्हारे दूध जैसे उजलेबदन कों देखरहा हूं। ऊपर वाले नें तुम्हारे बदन कों बहोत हि फुरसत सें ढाला हैं। ”
“नहि पिताजी, अभि अभि आपकीवजह सें मेराबदन सुंदर हुआ हैं, नहि तोँ मुझे मेराये शरीरबोझ हि लगरहा थां। ” सायरा केँ चेहरे पर्र सकून केँ संग-संग एक् अलग सि खुशी थि।
एक् बारफिन मैंने सायरा केँ हाथों कों पकड़कर औऱ उसकी नाभि केँ पास एक् हल्का सां चुंबन दिया औऱ बोला- मुझेमाफ करना सायरा जौ मेरेवजह सें तुम्हें सोनू जैसा पति मिला।
“आप् जैसा ससुरजी भि तौ मिला जिसने मेरेसब दुखों कों एक् बार मे हि दूरकर दिया। ” इतना कहते हि सायरा मेरी गोदी मे बैठ गयीँ, औऱ एक् बारफिन मेरेहाथ धीरे धीरे उसकी बुर पऱ चलनेलगे.
मे बार-बार उसकी गर्दन कों चूमता औऱ कानों केँ चबा लेता याँ फिनजीभ सें गीली करता।
मेरे द्वारा उसकी बुर मे इसतरह सहलाने केँ कारण सायरा कों भि अपनी टांगों कों फैलाने मे मजबूर कर दिया। मेरेहाथ अभि तक सायरा केँ बुर कों ऊपर हि ऊपर सहलारहे थें, सायरा केँ टांगों कों फैलाने केँ कारणअब उंगली भि अन्दर जानेलगी।
सायरा नें मेरे दूसरे हाथ कों पकड़ा औऱ अपने मम्मों पऱ रख दि। अब मेरे दोनों हाथ व्यस्त होँ चुके थें। एक् हाथ बुर कि सेवाकर रहा थां तौ दूसरा हाथ उसकी मम्मों कि! इसके अलावा मेरे होंठ औऱ दांत उसकी गर्दन औऱ कान कि सेवाकर रहे थें।
सायरा नें भि मेरे हाथों कों पकड़रखा थां।
कुछदेर बाद सायरा बोलि- बापू, एक् बारफिन खुजली शुरुआत होँ चुकी हैं।
मैंने सायरा कों लेटाया औऱ लन्ड बुर केँ अन्दर पेवस्त कर दिया। हालाँकि इसबार भि थोड़ा ताकत लगानी पड़ी, पर्र पहले सें अराम सें मेरा लौड़ा अन्दर जा चुका थां।
सायरा नें अपनी टांगें औऱ चौड़ीकर ली। मे पोजिशन लेकर बुर चोदरहा थां औऱ सायरा कां बदनहिल रहा थां।
इसबार मे सायरा कों औऱ आनंद देना चाहता थां, इसलिये मैंने अपने लन्ड कों बाहर् निकाला, सायरा कि टांगें हवा मे उठायी औऱ फिन लन्ड कों बुर केँ मुहाने मे रखकर अन्दर डालामगर इस पोजिशन सें उसकी बुर थोड़ी औऱ टाईट होँ गई, औऱ सायरा कों एक् बारफिन दर्द कां अहसास हुआ।
इस पोजिशन कि चुदाई सें मुझे भि बहोत मज़ा आँ रहा थां मगर एक् बारफिन मे थकनेलगा। इसबार मैंने नीचे होकर सायरा कों अपनेऊपर लेँ लिया औऱ लन्ड कों सायरा कि बुर केँ अन्दर पेल दिया।
थोड़ीदेर तक मे अपनीकमर कों उठा-उठाकर सायरा कों चोदरहा थां, फिन सायरा स्वयं हि वोँ सीधी होकर उछालें माररही थि।
बहुतदेर हौ चुकी थि औऱ अब मेरा निकलने वाला थां। इधर मेरीबहू मेरे लन्ड पऱ बैठकर लगातार उछाले मारेजा रही थि, बीच-बीच मे अपनीकमर कों गोल-गोल घुमाते हुए मुझेचोद रही थि।
तभी सायरा चीखी- बापू, मेरा दूसरी बार निकलने वाला हैं!
“मुझे चोदती रहो सायरा बेटी … मेरा लन्ड भि पिचकारी छोड़ने वाला हैं। ”
मेरे कहते हि दूसरे लम्हा मेरी पिचकारी छुट गयीँ, औऱ संग हि सायरा भि मेरेऊपर धड़ाम सें गिरपड़ी। फिन अपनी सांसों पर्र काबू पाने केँ बाद मुझसे अलग हुईँ।
“सायरा, इसबार भि आनंदआया न्?”
“हाँ पिताजी, आपनेइस बार भि मेरीभूख कों शांतकर दिया। ”
थोड़ीदेर तक तौ हम् दोनों केँ बीच खामोशी रही।
फिन कुछदेर बाद मे बोला- सायरा!
“हाँ बापू?”
“सारी मर्यादा हम् दोनों केँ बीच कि टूट चुकी हैं। ”
“हाँ पिताजी! मगर पिताजी, जोँ भि मर्यादा, सीमाएँ हें वोँ हमारे औऱ आपकेबदन जब पलंग पऱ मिलेंगे तब हि टूटेंगी, बाकीकभी भि आपकीइस बहू बेटी सें आपकोकभी भि कोई शिकायत नहि होगी। ”
मुझे नींदआने लगी थि, मैंने ऊंघते हुएकहा- सायरा बेटी, मुझे नींद आँ रही हैं।
“पिताजी, आप् सो जाइए!”
मैंने करवट बदली औऱ अपनी आंखें बन्दकर ली। सायरा नें भि तुरन्त करवट बदली औऱ अपने चूतड़ों कों मेरी जांघों केँ बीच फंसाकर मेरेहाथ कों अपने रसीले उरोज पऱ रख दिया।
अभि मैंने अपनी आँखें सोने केँ लिये बन्द कि थि, वोँ सायरा कि गांड कि गर्मी औऱ उसके नर्मगरम मम्मों कि वजह सें खुल गयीँ,।
फिन भि मैंने अपनी आँखें सोने केँ लिये जबरदस्ती बन्द कि, मगरअब आँखों सें एक् बारफिन नींद गायब होँ गयीँ,।
किसीतरह मैंने थोड़ा टाइम बिताया मगरजब मे हार गय़ा तौ स्वयं कों सायरा सें अलग किया औऱ सीधा होकरलेट कर अपनी आँखें बन्दकर ली। सायरा केँ गरमबदन कां अहसास अभि भि मेरेमन मे चलरहा थां।
किस्सा जारी रहेगी।
बहू के साथ शारीरिक सम्बन्ध - hind sex story - Kahani ab aur interesting hogi
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