सीड्स ऑफ़ लस्ट (Seeds Of Lust) – New Episode
UPDATE 7:
अगलेदिन, रोमा प्रस्ताव लेकर माँ केँ पास पहुंची। मुझे आश्चर्य हुआ, मम्मी बिना किसी विशेष विरोध केँ रोमा कों मेरेसंग विवाह मे भेजने केँ लिए सहमत होँ गई। मां रोमा कों मेरेसंग भेजने सें चिंतामुक्त थि औऱ हमारे लिएखुश थि।
उस दोपहर, मे रोमा केँ खायलों सें बैचेन सां अपना कमरे मे टहलरहा थां, मुझे रोमा केँ संग बाइक सें करीब२० किलोमीटर कां सफरतय करतेहुए विवाह मे जानां थां जौ मेरेलिए बहोत हि रोमांचकारी होने वाला थां, रोमा पहले भि कईबार मेरेसंग बाइक पर्र बैठ चुकी थि पर्र इसबार बातकुछ औऱ थि जोँ मेरी धड़कने बड़ारही थि। आख़िरकार, मैंने अपना फ़ोन उठाया औऱ वाणी कां नंबर डायल किया। जैसे हि उसने उठाया, मुझे उसकी उत्साह सें भरी आवाज़ सुनाई दि "हेलो, केसे हौ?"।
मैंने अपने दौड़ते दिल कों स्थिर करने कि कोशिश करतेहुए एक् गहरी साँसली। "मे तुम्हें कुछ बताना चाहता थां, " मैंने कहना शुरुआत किया, शब्द तेजी सें फूटरहे थें। "रोमा औऱ मे एक् संगपास केँ शहर मे एक् विवाह मे जारहे हें। "
दूसरे छोर पऱ एक् विराम थां, औऱ फिन वाणी कि आवाज़, संतुष्टि सें भरी हुईँ, "ये तौ बहोत बढ़िया खबर हैं, दोस्त"
मे अपने चेहरे पऱ फैली मुस्कुराहट कों रोक नहि सका। "बढ़िया तोँ हैं lekin दोस्त बहोत घबराहट होँ रही हैं, " मैंने अपनी आवाज़ सें उत्साह कों दूर रखने कि कोशिश करतेहुए कहा।
वाणी कि हंसी मोबाइल लाइन पर्र गर्मजोशी सें गले मिलने जैसी थि। "अरे इसमें घबराना कैसा?मज़े सें जाओ औऱ अच्छे सें समय स्पेंड करो एक् दूसरे केँ संग, " उसनेकहा, उसकी आवाज़ सें संतुष्टि कां पुट थां।
उसके शब्दों नें मुझे थोड़ीरहत पहुंचाई, "वाणी, " मैंने अपनी आवाज़ कों संतुलित रखने कि कोशिश करतेहुए कहा। "दोस्त मुझे हेल्प करती रहना मेरीफटी पड़ी हैं। "
"अरेयह भि कोई पूछने कि बात हैं, बस इतनायाद रखना, " उसनेकहा, उसकी आवाज़ साजिशपूर्ण फुसफुसाहट कि तरह थि, "थोड़ा धीरज सें काम लेना। किसी भि तरह कि कोई जल्दबाज़ी नहि औऱ मुझे बताते रहना ताकि मे अगला स्टेप प्लान कर सकूँ"
मे ये सोचकर रोमांचित हुए बिना नहि रहसका कि वाणीहमे मिलाने केँ लिए स्वयं भि कितनी आतुर हैं। "sure, जान मे फोन करता रहूँगा" मैंने वादा किया।
फिन हमने एकदूसरे कों बाईबोल केँ कॉलआई कटकर दि.
फिन मे जल्द सें अपने कमरे सें निकलकर नीचेआया औऱ साम कि तैयारी मे जुट गय़ा। रोमा केँ संगसफर औऱ कुछ नज़दीक क्षणों कां उत्साह दिल मे पहले सें हि उमड़रहा थां। मैंने अपनी पुरानी रॉयल एनफील्ड बाइकघऱ सें बहार निकाली जिसपर धूलजमी पड़ी थि। जैसे हि मैंने उसे बाहर् निकाला औऱ अच्छी तरह सें धोना शुरुआत किया, वो दिन कि रोशनी मे चमकने लगी, कपड़े केँ हर घिस्से सें मुझे अपने दोस्तों केँ संग साझा कि गई अनगिनत मस्ती भरे पलों कि यादआने लगी। मगरइस बारये अलग थां। इसबार, मे रोमा कि बांहों कों मेरीकमर केँ ओर लपेटे हुए, उसकी मोटी भारी चूचियों कि छुअन कों अपनीकमर पऱ दबने कि कल्पना कररहा थां
जैसे-जैसे साम होती गई, घऱ मे तेज़ दौड़ते कदमो कि आहटें गूंजने लगी। रोमा एक् कमरे सें दूसरे कमरे मे घूमरही थि, उसकी आँखें उत्साह सें चमकरही थीं क्योंकि वो अपनी पोशाक सें मेल खाने केँ लिएसही गहनों कि तलाशकर रही थि। उसने एक् शानदार लाल साड़ी चुनी थि जौ उसके उभारों कों सबसही जगहों पर्र केसेहुए थि, मुझे वोँ किसी स्वर्ग सें उत्तरी अप्सरा केँ सामान सुन्दर नज़र आँ रही थि। मैंने अपनी आँखों केँ किनारे सें उसे देखा, उसकी सुंदरता देखकर मेरादिल तेजी सें धड़कने लगा।
जब वो अपने कमरे सें बाहर् आई तौ उसने मेरी सांसे रोकदीं। उसके काले ब्लाउज खुलेगले सें उसके बड़े क्लीवेज कि आकर्षक झलकमिल रही थि, जौ उसकी साड़ी कि तहों सें कलात्मक रूप सें छिपाहुआ थां। ब्लाउज कां कपड़ा किसी दूसरी त्वचा कि तरह उसके उरोजों सें चिपका हुआ थां, उसकी साडी उसके जिस्म केँ हर घुमाव औऱ आकृति कों निखार रही थि। उसने लंबे, काले बालों कों पीछे कि तरफ बाँध केँ स्टाइल किया थां जोँ उसकीपीठ सें होकर उसकी रीढ़ कि हड्डी केँ आधार तक पहुंच रहे थें। साड़ी केँ लालरंग नें उसकी त्वचा कों औऱ भि ज़्यादा चमकदार बना दिया, उसकेकान मे सोने कि बालियाँ औऱ गले मे लटकता हुआहार आकर्षक लगरहा थां।
मे बसउसे देखता हि रह गय़ा, मेरेमन मे उसेज़ोर सें चूमने कि ख़्वाहिश हुईँ पऱ मैंने उसे ज़ोर सें दबा लिया। ये मेरी बेहन थि, एक् हि मम्मी कि कोख सें जन्मे हम् दोनों, एक् हि खून थां दोनों मे औऱ फिन भि, जिसतरह सें उसने मेरीओर देखा, उसकी आंखों मे जिज्ञासा औऱ उत्साह कां संकेत थां, मुझेऐसा लगा जैसे वो उन रहस्यों कों जानती हैं जौ मे छिपारहा हूं। हम् साम कों 7.30 बजेघऱ सें बाहर् निकले, जब हम् शादी स्थल कि ओर बढ़े तोँ उमसभरी हवा कां गरम आलिंगन हमारे चारों ओर थां।
बाइक कां इंजन हमारे नीचे जीवंत हौ उठा, शक्तिशाली मशीन केँ कंपन मेरे जिस्म मे गूंजरहे थें औऱ मेरी रीढ़ मे रोमांच पैदाकर रहे थें।
जैसे हि हम् शांत सड़कों सें गुज़रे, हवा रोमा केँ बालों औऱ उसकी साड़ी केँ कपड़े सें खेलरही थि, मे प्रसन्नता कि भावना महसूस करने केँ अलावा कुछ नहि करसका। जैसे-जैसे हम् बाहरी इलाकों कि ओरबढ़ रहे थें, शहर कि रोशनी धुंधली हौ गई थि, रात कां अंधेरा गुमनामी कि चादरओढ़ रहा थां। हर गुजरते समय केँ संग, हमारे बीच तनाव बढ़ता गय़ा, अनकही इच्छाएँ घने कोहरे कि तरहहवा कों गाढ़ा करतीगईं।
रोमा कि बाहें मेरेपेट केँ चारों ओर लिपटी हुइ थीं, उसकेहाथ धीरे-धीरे सें मेरेपेट पऱ टिकेहुए थें। उसकी गर्माहट मेरी शर्ट सें होकर मेरे जिस्म मे चाहत कि लहरें दौड़ा रही थि। उसके परफ्यूम कि गंध मेरे साँसों मे घुलरही थि। जिसतरह सें उसके बूब्ज़ मेरीपीठ पर्र दबरहे थें, स्पंजी औऱ भरेहुए, उससे मेरा लन्ड मेरी पैंट केँ अंदर अकड़ने लगा थां। मैंने हैंडलबार कों कसकर पकड़ लिया, आगे कि मार्ग पर्र ध्यान केंद्रित करने कि कोशिश कररहा थां, मगर मेरेमन मे कामुकता कां बवंडर चलरहा थां।
उसकी उँगलियाँ मेरेपेट पऱ थोड़ा सां घूमी, जिससे रोंगटे खड़े होँ गए। "क्याँ अभि भि exercise करते होँ?, " उसने मेरेकान मे बुदबुदाया, उसकी सांसें मेरी गर्दन पऱ गुदगुदी कररही थीं।
मे उसकी बातों कां अर्थ समझते हुए हँसा। "हां, हर सुभह, छत पऱ एक् घंटा करता हूं, " मैंने अपनी आवाज़ कों स्थिर रखने कि कोशिश करतेहुए जवाब दिया। उसका स्पर्श मुझे पागलकर रहा थां, औऱ मे प्रतिक्रिया मे अपने लन्ड कों हिलते हुए महसूस कर सकता थां।
उसकी पकड़ मेरीकमर पर्र मजबूत हौ गई औऱ वो मेरे लगभगझुक गई, उसकीगरम सांसें मेरी गर्दन पऱ टिकगईं। "शायद मुझे भि तुम्हारे संग थोड़ी exercise करनी चाहिए, " वो फुसफुसा कर बोलीं, "मेरावजन बहोत बढ़ गय़ा हैं, "
मुझेउसे आश्वस्त करने कि ज़रूरत महसूस हुईँ, उसेये बताने कि कि वो जैसी हैं, एक् दम स्लिम औऱ कमाल हैं "एक् दम स्लिम तोँ हैं तूँ, " मैंने उसकीओर देखते हुएकहा। "तेरी कँहा सें लगता हैं केँ तेरावजन बढ़ गय़ा हैं?" मैंने बातचीत केँ संग-संग अपनी आवाज़ मे कंपन कों छुपाने कि कोशिश करतेहुए पूछा।
स्ट्रीट लैंप कि धीमी रोशनी मे उसकेगाल हल्के गुलाबी रंग मे चमकरहे थें। "हर स्थान सें, " उसनेकहा, उस साड़ी केँ नीचे उसके आकर्षक उभारों कां विचार मुझे पागलकर रहा थां।
"तुँ हरतरफ सें बिल्कुल परफेक्ट हैं, बिल्ली" मैंने उत्तर दिया, यह शब्द मेरी योजना सें कहीं ज्यादा गंभीरता सें निकलरहे थें पऱ मे उन्हें मज़ाकिया रखने कि कोशिश कररहा थां। "तुम कोकुछ भि बदलने कि ज़रूरत नहि हैं। "
रोमा खिलखिला उठी, उसकी आवाज़ मेरीपीठ सें टकरारही थि। "यह तोँ आपकी कृपा हैं महाराज, " उसने कहा, "औऱ बिल्ली किस कों बोला?" उसने धीरे-धीरे सें मेरेपेट पऱ नोचा। "आई क्याँ कररही हैं पागल, बाइकगिर जाएगी" मैंने बनावटी दर्द औऱ थोड़ी सि एक्टिंग करतेहुए कहा। उसकी आवाज़ रात मे एक् मधुरधुन थि। "मगर मे आपकीतरह स्लिम रहना चाहती हूं। " "अरे दोस्त तूँ स्लिम सें भि ऊपर हैं, इतनामत सोच" मैंने उसे फिरसे थोड़ा समझाया। थोड़ीदेर बाद हम् अपनी मज़िल पर्र पहुँच गए।
शादी स्थल एक् भव्य आयोजन थां, शहर सें बहार एक् विशाल हवेली थि जिसे रोशनी औऱ फूलों कि मालाओं सें सजाया गय़ा थां।
हवा चमेली औऱ चंदन कि मेरी पसंदीदा खुशबू सें भरी हुई थि, औऱ हँसी औऱ म्यूज़िक कि आवाज़ हवा मे रही थि। जैसे हि हम् अंदरगए, लोगों केँ सिरघूम गए औऱ फुसफुसाहटें हमारा पीछा करने लगीं। मुझे रोमा केँ संग चलने मे गर्व कि अनुभूति हुइ, उसे अपनेपास पाकर, वो मानवरूप मे एक् देवी कि तरहलग रही थि।
मे चोरी छिपे रोमा केँ खूबसूरती कों निहार रहा थां, मेरामन बार-बार उन अंतरंग पलों कि ओरभटक रहा थां जौ हमने बाइक पर्र साझाकिए थें। उसका स्पर्श विद्युतीय थां, औऱ जिसतरह सें वो मेरीओर झुकी थि वो बहोत मज़ेदार, बहोत हि मस्ती भरा थां। मुझे अपने आप् कों याद दिलाते रहना पड़ा कि वो मेरी बेहन हैं, येसभी वाणी केँ मोहक शब्दों द्वारा बोयेगए वासना केँ बीजों कां असर थां।
मगर जैसे-जैसे रात बढ़ती गई औऱ म्यूज़िक तेज़ होता गय़ा, मे बेचैनी महसूस किए बिना नहि रहसका। मैंने रेखा आंटी कों हॉल मे खड़े देखा, उनकी आँखें उत्साह सें चमकरही थीं औऱ वो महिलाओं केँ एक् समूह सें बातें कररही थीं। हमे देखते हि, वो समूह सें अलग होँ गई औऱ सीधे हमारी ओर बढ़ी, उन्होंने गले लगाने केँ लिए अपनी बाँहें फैलाई।
"रोमा, मेरी बच्ची, " उन्होंने धीरे-धीरे सें रोमा कों गले लगतेहुए कहा, उनके मोटेगाल खुशी सें चमकरहे थें। "तुम् तौ बहोत हसीन हौ गई हौ!"
रेखा आंटी कां गर्मजोशी भरा आलिंगन हमारे चारों ओरफूट रहे यथार्थ केँ बुलबुले कि तरह थां औऱ एक् लम्हा केँ लिए मुझेऐसा लगा जैसे मे उस दृश्य मे घुसपैठिया हूं जौ मेरा नहि हैं। वो मेरीओर मुड़ी, उनकी आँखें स्नेह सें चमकरही थीं। “औऱ तुम् केसे होँ रवि?”
"मे अच्छा हूं, आंटी, " मे कहने मे कामयाब रहा।
रोमा कां हाथ पकड़ते हि रेखा आंटी कि आँखों मे अपनापन झलकपड़ा। "माँ कैसी हें?" उन्होंने पूछा"अब ठीक हें आंटी" रोमा नें जवाब दिया"चलो सभीठीक होँ जायेगा" उन्होंने सान्तवना दि "आओ मेरेसंग, तुम् कुछखा लोरवि, " उन्होंने रोमा कों अपनेसंग खींचते हुएकहा।
रोमा नें मेरीओर देखा जोँ उत्साह औऱ अनिश्चितता कां मिश्रण थां, मगर मैंने आश्वस्त होकर मुस्कुराते हुएसिर हिलाया। जैसे हि वे साड़ियों औऱ हँसी केँ झुण्ड मे गायबहुए, मुझे अकेला सां महसूस होनेलगा। मे जानता थां कि ये अतार्किक हैं - आख़िरकार, हम् एक् विवाह मे थें, परिचित लोगों सें घिरेहुए थें - मगर उसका मुझसे अलग होना मेरेदिल कों तेज़कर गय़ा।
जल्द हि, आंखों मे चमक औऱ हाथ मे व्हिस्की कां गिलास लिए एक् अंकल मेरेपास आए। "अरे रवि, " वो चिल्लाये औऱ मेरीपीठ पर्र थप्पड़ मारा। "केसे हौ तुम्? बढ़िया दिखरहे होँ!"
मैंने सिर हिलाया, मेरी घबराहट केँ बावजूद मेरे होठों पर्र मुस्कुराहट तैर गई। "बढ़िया हूं अंकल, " मैंने अपनी आवाज़ कों स्थिर रखने कि कोशिश करतेहुए कहा।
"यंहा अकेले क्यूं खड़े होँ, चलो मेरेसंग" कहकरवे मुझेहॉल केँ अंत मे बने एक् कमरे मे लें गए जंहा पहले सें हि कुछलोग मौजूद थें।
कमरे केँ अंदर एक् बड़ी सि मेज पऱ विभिन्न प्रकार केँ पेय औऱ स्नैक्स सजेहुए थें, हवा मे व्हिस्की औऱ मसालों कि महक घुली हुइ थि।
जैसे हि हम् बैठे, बातचीत शुरुआत होँ गई, उनकी मेहमान नवाज़ी कि गर्मजोशी नें रोमा केँ उथल-पुथल भरे विचारों सें मेरा ध्यान भटका दिया।
जाम सें जाम टकराने लगे औऱ किस्सों औऱ हँसी-मजाक केँ उसदौर मे एक् घंटाबीत गय़ा औऱ मैंने पाया कि तीनपेग केँ बाद मुझपर हल्का सां सुरूर चढ़नेलगा थां। एक् गर्माहट सि मेरेबदन मे फैल गई थि, मे हलकेनशे मे उन पलों कों एन्जॉय कररहा थां।
तभी रोमा केँ विचारों नें मेरे दिमाग़ कों घेर लिया, पता नहि वोँ कैसी हौ, उसने खानां खाया याँ नहि, कंही मुझे ढूंढ न् रही हौ जैसे प्रश्न मेरेज़हन मे उठनेलग।
मैंने उनसभी सें इजाज़त ली, औऱ रोमा कों ढूंढ़ने बहार कि तरफचल दिया।
जैसे-जैसे मे मेहमानों कि भीड़ केँ बीच सें गुजरा, हवाधूप कि सुगंध औऱ पुराना मंत्रों कि ध्वनि सें घनी होँ गई। विवाह कि रस्में पूरे जोरों पऱ थीं, रंगों औऱ भावनाओं कां संगम डीजे द्वारा बजाएगए हल्के म्यूज़िक केँ संग खुशनुमा होँ रहा थां। मैंने कमरे कों छान मारा, उसकी एक् झलक ढूँढने लगा, उसे कंही नं पाकर मेरादिल धड़कने लगा।
फिन जैसे हि मैंने मंच कि तरफ देखा, वो वहांमंच केँ किनारे खड़ी थि औऱ उसकीनजर बीच मे बैठे जोड़े पर्र टिकी थि। दूल्हा औऱ दुल्हन पारंपरिक सुंदरता कि तस्वीर थें, जोँ रोशनी औऱ कैमरों कि फ़्लैश सें घिरेहुए थें। मगर रोमा सबसेअलग थि जिसने नं जाने कितने दिलों कों आज घायल किया थां, उसका फिगर अन्य महिलाओं कि शोभा बढ़ाने वाली नाजुक साड़ियों औऱ आकर्षक गहनों सें बिल्कुल अलग थां। उसके उभार मुझे बुलाते हुए प्रतीत होँ रहे थें औऱ मैंने उसकीतरफ पहुँचने केँ लिए उत्सुक होकर अपनी स्पीड बड़ा दि।
जैसे हि मे पासआया, मेहमानों कि भीड़ केँ बीच सें होतेहुए गुज़रा, मैंने कुछ सुना - पास मे खड़ेदो लड़कों कि अश्लील फुसफुसाहट। उनकी अश्लील बातचीत सुनकर मेरेकान खड़े हौ गए। वे धीमे स्वर मे बातकर रहे थें, मगर उनकी कामुक निगाहें रोमा पर्र टिकी हुईँ थीं, उनकी आँखें रोमा केँ अंगों कों खा जाने वाली नज़रों सें ताड़रही थीं। मेराखून खौलउठा औऱ मैंने अपनी मुट्ठियाँ भींचलीं।
"कितनी चौड़ी गांड हैं दोस्त, " उनमें सें एक् नें धीरे-धीरे सें कहा, उसकी आँखें वासना सें चमक उठीं। "इसे तोँ मे पूरीरात चोद सकता हूं। "
जैसे-जैसे मे लगभगआता गय़ा, मेरादिल मेरे सीने मे धड़कने लगा, उनकी असभ्य बातचीत स्पष्ट होती गई। "एकदमकड़क माल हैं, भइया, " दूसरा बोला, उसकी आवाज़ नशे सें लड़खड़ा रही थि। "चौड़े, मोटे, औऱ गद्देदार, एक् बार मे दो लन्ड तौ आहिस्ता लेँ लेगी। "
मेरे भीतर क्रोध बढ़ गय़ा, मेरे अंदर कां उग्र जानवर आज़ाद होने कि मांगकर रहा थां। मगर जैसे-जैसे मे पासआया, मेरे दिमाग़ नें मुझे रोका। ये मम्मी कि बहोत ख़ास सहेली कां फंक्शन थां, जिन्हे हम् बरसों सें जानते थें। मेरेमन नें मुझे किसी भि तरह कां सीन क्रिएट करने सें रोका, यहां नहि, अभि नहि।
मैंने अपने गुस्से कों निगल लिया औऱ इसके बजाय, एक् धीमीचाल केँ संग भीड़ केँ बीच सें गुजरते हुए, सीधे रोमाक़े पीछे जाकेखड़ा हौ गय़ा, मेरे लम्बे चौड़ेबदन नें उन हरामी लड़कों कां व्यूबंद कर दिया, उन्हें रोमानज़र आनीबंद होँ गई,। वे तिरछी नज़र सें मेरे चारों ओरझुक गए, भीड़ केँ बीच सें झाँकने कि कोशिश करनेलगे, मगर मेरी उपस्थिति एक् स्पष्ट मेसेज थि, क़े बहोत हुआ।
रोमा कों हवा मे अचानक बदलाव औऱ एक् परिचित उपस्थिति कि गर्माहट महसूस हुइ। वो मुड़ी औऱ मुझेवहा खड़ा पाया, उसकी आँखें राहत औऱ कृतज्ञता सें चौड़ी हौ रहीथीं। कुछदेर पहले उसके चेहरे पऱ छायाहुआ डर पिघल गय़ा, उसकी स्थान एक् हल्की मुस्कान नें लें ली जिसने मेरेदिल कों चैन सें भर दिया।
उसने अपनाहाथ मेरेहाथ मे डाल दिया औऱ जब उसने मुझे कसकर पकड़ लिया तोँ मुझे उसकी उंगलियों कि कंपन महसूस हुई। मे बिनाकुछ कहेउसे आश्वस्त करतेहुए पीछेहट गय़ा।
उसकी आँखें मंच पऱ टिकी रहीं, मगर मे उसके जिस्म मे तनाव कों महसूस कर सकता थां, जिसतरह सें वो मेरीओर थोडा झुकी थि मानो हमारे आस-पास केँ पुरुषों कि भद्दी निगाहों सें छुटकारा चाहरही हौ। स्टेज पऱ विवाह कि रस्में चल रहीं थें, हंसी ठाहकों कि आवाज़ें चारों औऱ गूंजरही थि, मगर मे मात्र अपनेहाथ मे उसकेहाथ केँ अहसास औऱ मेरेबगल मे उसकेबदन सें उठरही गर्मी कों हि महसूस करपारहा थां।
मैंने उसकेहाथ कों हल्के सें दबाया, मेरी आँखें उसकी आँखों मे किसी संकेत कि तलाश मे थीं कि वो क्याँ महसूस कररही होगी। "तुँ ठीक हैं?, " मैंने पूछा, शब्द मेरी अपेक्षा सें ज़्यादा कोमलता सें निकलरहे थें।
उसने धीमी मुस्कान केँ संग हामी मे अपनी गर्दन हिला केँ अपना जवाब दिया।
फुसफुसाहटें तेज़ होँ गईं, औऱ मे हम् पर्र उन हरामी लड़कों कि निगाहों अभि भि तिकी हुईँ थीं। "देखा भइया, " पहले लड़के नें कहा। "उसका बॉयफ्रेंड होगा दोस्त। " दूसरे नें जवाब दिया, "पति भि तोँ होँ सकता हैं?" पहले लड़के नें फिन सवाल किया, "शादीशुदा तोँ नहि लगती" दूसरे नें स्पष्ट किया। उनकी बातें मेरे औऱ रोमा दोनों केँ कानो तक पहुँच रहीथीं, नशे केँ कारण उन्हें अपनी आवाज़ कि तीव्रता कां अंदाज़ा नहि थां।
उसके मुंह सें 'पति' शब्द सुनते हि मेरादिल तेजी सें धड़कने लगा, रोमा केँ प्रति मेरी कल्पनाओं कों नएपंख सें मिलगए, मेरी वर्जित भावनाएं उमड़ने लगीं। मैंने महसूस किया कि रोमा कि पकड़ मेरेहाथ केँ चारों ओर मजबूत हौ गई थि, उसकाबदन थोडा अकड़रहा थां। उसने मेरीओर देखा, उसकी आँखों मे एक् डर सां झलकरहा थां।
"कितना लकी व्यक्ति हैं, " इसबार तीसरे शख्स नें हँसते हुएकहा, उसकी नज़र हमारी ओर थि। "भइया शर्तलगा सकता हूं दिन मे तीनबार तोँ यह उसकी लेता हि होगा, हे हे। "
मेराखून खौल गय़ा औऱ मे अपनी रगों मे गुस्से कों बहताहुआ महसूस कररहा थां। मैंने अपनासिर उनकीतरफ घुमाया, मेरी आँखें गुस्सा सें जलरही थीं। मैंने अपना एक् कदम उनकीतरफ बढ़ाया हि थां कि रोमा कि पकड़ मेरेहाथ पर्र मजबूत हौ गई औऱ वो मेरीओर झुक गई, उसकी आँखों मे याचना थि। उसने मेरेकान मे फुसफुसाया, "तुम्हे मेरीशपथ कुछ नहि करना, प्लीज। " उसने घबराते हुएकहा।
मगर वोँ तीनो मेरा क्रोध पहचान चुके थें, वोँ थोड़ा सहमे औऱ चुप होँ गए। उनके चेहरे सें व्यंगात्मक मुस्कराहट मिट गई थि। उन्होंने एक्-दूसरे कि ओर देखा, उन्हें अपनी गलती कां एहसास हुआ। एक्-एक् करके, वे वंहा सें हटगए औऱ मेहमानों कि भीड़ मे खोतेचले गए।
रोमा नें उन्हें जातेहुए देखा, उसकी पकड़ मेरे बाइसेप्स पऱ मजबूत होँ गई। "गज़ब, भईयाआज भि जलवा हैं तुम्हारा" उसने बुदबुदाते हुए मेरेकान मे कहा, फिन उसने अपनासिर मेरे कंधे पऱ झुका लिया औऱ मुझे उसकी सांसों कि गर्माहट अपनी गर्दन पऱ महसूस होनेलगी।
जैसे हि स्टेज पऱ चलरही रस्मे संपन्न हुईँ, हम् भव्य भोजन कक्ष कि ओर बढ़े। रूम रोशनी सें जगमगा रहा थां, मेज़ें खाने केँ बोझ सें कराहरही थीं। प्लेटों औऱ कटलरी कि खड़खड़ाहट बातचीत कि गड़गड़ाहट केँ संगघुल मिल गई, जब हम् भोजन सें भरी अपनी प्लेटों केँ संग एक् मेज पऱ बैठे तोँ रोमा नें अपनी आँखों मे एक् शरारती चमक केँ संग मेरीओर देखा। " बेटा पुरेमज़े लिए हें तुमने यंहा" उसने मेरी साँसों सें उठरही व्हिस्की कि गंध सूंघली थि। मुझे थोड़ी शर्मिंदगी सि हुई "ज़ादा नहि बस थोड़े सें" मैंने सच्चाई कबूलते हुएकहा।
"पऱ मुझे बिलकुल भि अच्छा नहि लगरहा। " उसने दुःखी होतेहुए कहा, मैंने अपनाहाथ बड़ा केँ उसकाहाथ अपनेहाथ मे लेँ लिया औऱ धीरे-धीरे सें दबाया। "क्याँ हुआ?"
उसकी आँखें मेरी आँखों कों खोजरही थीं, मानोये जानने कि कोशिश कररही हों कि क्याँ वो अपनी तकलीफ़ कों लेकरमुझ पऱ भरोसा कर सकती हैं। आख़िरकार, उसने एक् गहरी साँसली औऱ अपने होंठखोल दिए"पता नहि भईया.वोँ लोग बहुतदेर सें उलटी सीढ़ी बातें कररहे थें, " उसनेकहा, उसकी आवाज़ फुसफुसाहट सें थोड़ी हि ऊपर थि। "मुझे बहोत बुराफील होँ रहा थां। "
मुझे उसकी सुरक्षा कों लेकर चिंता हुइ। "छोड़ न् उन छिछोरों कों औऱ खानां खा, दुनिया ऐसे हरामियों सें भरीपड़ी हैं" मैंने उसे थोड़ा रिलैक्स कराने केँ लिए बोला।
मेरे जवाब सें वोँ थोड़ा आश्वस्त देखि। "वोँ तौ तूनेरोक दिया नहि तौ मुंहतोड़ देता सालों कां, " मैंने कहा, मेरी आवाज़ मे क्रोध थां।
उसके चेहरे पऱ मुस्कराहट फ़ैल गई, "बसबस, तुम् दूसरे कि विवाह मे नया बखेड़ा खड़ाकर देते" उसने अपनी चिंता ज़ाहिर कि। फिन थोड़ीदेर हमारे बीच ख़ामोशी रही औऱ हम् अपनी प्लेट सें खानां खानेलगे।
रोमा नें अपना खानां निगलते हुए पूछा "भईया, क्याँ लड़कियां सिर्फ जिस्म होती हें" "कईबार ऐसा लगता हैं.जैसे मे उनकेलिए अदृश्य हूं, " वो फुसफुसाई, उसकी आंखें आंसुओं सें भारी हौ गई,, "जैसे कि मे कोई खाने कि चीज़ हूं, जिसेलोग लार टपका केँ घूरते हें। "
उसके शब्द मेरे अंतर्मन कों छलनी सां करगए, "तूँ महज़ एक् बदन नहि हैं, रोमा, " मैंने अपनी आवाज़ धीमी औऱ तीव्र करतेहुए कहा। "तूँ भि एक् इंसान हें, एक् खूबसूरत, सुशिल, बुद्धिमान, दयालु लड़की हैं। किसी केँ भि घूरने याँ बोलने कां तुझपर असर नहि होना चाहिए, तूँ बिंदास तरीके सें अपनी ज़िंदगी जी" मैंने विराम लिया औऱ उसकीतरफ देखा वोँ बड़ीगौर सें मेरीबात सुनरही थि "औऱ एक् लिस्ट बना लें, कौनकौन हैं जोँ तुम्हारी तरफ परेशां करता हैं मे सबकोठीक करता हूं" मैंने थोड़ा क्रोध दिखाते हुएकहा। "किसकिस सें लड़ोगे, भईया?" वोँ दुःखी होतेहुए फुसफुसाई "सभी सें, " मैंने मुस्कुरा केँ जवाब दिया।
मेरी मुस्कराहट केँ संग उसने भि अपनी मुस्कान जोड़ दि "खानां खालो, ठंडा हैं रहा हैं बड़ेआये सभी सें लड़ने वाले" उसने इतराते हुएकहा।
तभी एक् चटकदार पीली साड़ी मे गोल-मटोल आंटी डोलती हुइ हमारी टेबल केँ नज़दीक आयी। उनके चेहरे पऱ एक् मुस्कराहट थि जोँ उनकेगोल चेहरे केँ मुकाबले कुछ ज़्यादा हि चौड़ी लगरही थि, उनकी आँखें उत्सुकता सें हमेदेख रहीथीं। "रोमा, बेटा, तुम्हारी मम्मी कैसी हें?" उन्होंने पूछताछ कि, उनकी आवाज़ ऊँची औऱ नाक सें निकलरही थि।
"नमस्कार आंटी, वो ठीक हें, " रोमा नें अपनाहाथ नमस्कार कि मुद्रा मे जोड़ते हुए उत्तर दिया।
आंटी हमारे बगल वाली खालीसीट पऱ बैठ गयीं, उनकी आँखें उत्सुकता सें चमकरही थीं। वो मां कि पूर्व सहकर्मी, श्रीमती शर्मा थीं। "बहोत वक़्त होँ गय़ा तुम्हारी मां सें मिलेहुए, " उन्होंने कहा, उनकी आवाज़ मे चिंता थि। "तुम् दोनों उनका ध्यान तौ रखरहे हैं नं?" उन्होंने पूछा, "बिलकुल आंटी, वोँ अबठीक हें जल्द हि दफ़्तर जाने लगेंगी" रोमा नें सहजता सें उत्तर दिया।
मां कां जिक्र आते हि मिसेज शर्मा कि आंखें चमक उठीं। "तुम्हारी मां, " उन्होंने कहा, उनकी नज़रमुझ पऱ टिकी हुई थि। "एक् मजबूत औरत हैं, तुम्हारे पिता केँ निधन केँ बाद तुम् दोनों कों अकेले पाला। औऱ अब, तुम् दोनों जवान हैं गए होँ, उसकी बहोत अच्छी तरह सें देखभाल करना ?"
उनके शब्दों सें मुझे अपनी मां केँ लिए गर्व महसूस हुआ। "हाँ, वोँ बहोत स्ट्रांग हें हम् जानते हें आंटी, " "हम् उनकी देखभाल मे कोईकसर नहि छोड़ेंगे" मैंने सच्चे दिल सें मुस्कुराते हुएकहा।
आंटी मेरे लगभग झुकीं, उनकी आँखों मे जिज्ञासा चमकरही थि। "औऱ तुम् केसे होँ, रवि?" उसने पूछा, उसकी आवाज़ एक् षडयंत्रकारी फुसफुसाहट कि तरह थि। "दिल्ली मे नौकरी कैसीचल रही हैं तुम्हारी?"
मैंने एक् गहरी साँसली, व्हिस्की कि गर्माहट सें मेरेगाल लाल हौ रहे थें। "सभी बढ़िया चलरहा हैं, आंटी, " मैंने अपनी आवाज़ कों स्थिर रखने कि कोशिश करतेहुए कहा।
अपनी साड़ी कों एडजस्ट करती हुईँ, वो खड़ी होँ गई, "चलो तुम् दोनों खानां खाओ, " उन्होंने कहा, इससे पहले कि वो मुड़जाए। "रोमा, अपना खानां ख़त्म करके लेडीज म्यूज़िक मे मिलना, ठीक हैं " रोमा नें पुष्टि मे सिर हिलाया।
जैसे हि मिसेज शर्मा मुड़ीं, उनकी पीली साड़ी केँ कपड़े पर्र मेरी नज़र पड़ी। वो उनके चौड़े भारी कूल्हों केँ बीच अच्छी तरह सें फंसाहुआ थां, जिससे उसकी गांड कि दरार कि स्पष्ट रूपरेखा बनरही थि। ये एक् अप्रत्याशित दृश्य थां जिसने तनाव सें भरीसाम मे थोड़ी देर केँ लिए हल्कापन ला दिया थां। मैंने अपनी हंसीरोक ली, रोमा कि ओर देखा औऱ पाया कि उसकी आंखें भि उसीजगह पर्र टिकी हुईँ थीं। हमारी नज़रें मिलीं, औऱ हम् दोनों हि मुस्कुरा दिए, हमारे बीच कां तनावकुछ लम्हा केँ लिए खत्म हौ गय़ा।
उसके गालों पर्र हल्का गुलाबी रंगचमक रहा थां, औऱ उसने अधिक मुस्कुराने सें बचने केँ लिए अपने होंठ भींचलिए। "उधर देखने कि ज़रूरत नहि हैं?" वो फुसफुसाई, उसकी आँखें शरारत सें चमकरही थीं।
"कभी कभी तौ ऐसे नज़ारे देखने कों मिलते हें, " मैंने सीधा चेहरा बनाए रखने कि कोशिश करतेहुए उत्तर दिया। मेरी हँसी तेज़ होँ गई।
रोमा कि आँखें शरारत सें चमक उठीं औऱ उसने धीरे-धीरे सें मेरेहाथ पऱ थप्पड़ मारा। "चुप रहो, " वो फुसफुसाई,
उसकेगाल अब गहरेलाल रंग केँ हौ गए थें। "मगर तुम्हे किसी औऱ कों पता चलने सें पहले आंटी कों बताना चाहिए। "
रोमा नें मेरीओर देखा, उसकी आँखें मनोरंजन औऱ भय केँ मिश्रण सें चौड़ी थीं। "पऱ उन्हें बताऊँ क्याँ?" उसने जवाब मे फुसफुसाया, मेरे दिमाग़ मे घूमरही व्हिस्की नें मुझे एक् नई हिम्मत दि, मे झुक गय़ा औऱ उसकेकान मे फुसफुसाया, "यही केँ आंटी, आपकी साड़ी आपके पिछवाड़े मे दबी हैं। " मेरे शब्द बहोत स्पष्ट थें, मुझे स्वयं भि इसकी उम्मीद नहि थि।
रोमा कि आँखें झटके सें फैलगईं, उसकाहाथ उसके मुँह कों ढकने केँ लिएऊपर उठा। "हे ईश्वर, " उसने हाँफते हुएकहा, दबी हुई हँसी सें उसकी आँखों मे पानी आँ गय़ा। "येकुछ ज़ादा नहि होँ गय़ा!" उसने मुझे चेतावनी दि पर्र उसकी आँखें कुछ औऱ कहरही थीं।
"तुम् बहोत नॉटी हौ गए हौ, " उसनेकहा, उसकी आवाज़ एक् धीमी फुसफुसाहट थि जोँ हलचलभरे कमरे मे फैलती हुई प्रतीत होती थि। "अगर मैंने ऐसाकहा तोँ पक्का आंटी मारेंगी मुझे। "
"अरे दोस्त, मे तौ बस मज़ाक कररहा थां, " मैंने उत्तर दिया, उसकी आँखों मे चंचलता लौटते देख मेरी मुस्कान औऱ चौड़ी होँ गई। "मगर तुम्हे उन्हें बताना चाहिए, " मैंने इशारा किया, औऱ इस विचार केवल सें वो जिसतरह सें शरमा गई, उसका खुशी लें रहा थां।
"चिंता मतकरो, " उसनेकहा, उसकी आवाज़ धीमी औऱ साजिशपूर्ण थि। "कोई औऱ बता देगा नहि तौ चलते चलते स्वयं निकल जाएगी। " इसकेसंग हि, उसने अपना खानां ख़त्म किया.
जैसे हि मैंने अपना खानां ख़त्मकर केँ पानी पिया, म्यूज़िक कि आवाज़ तेज़ हौ गई औऱ भीड़ डांस फ्लोर कि ओर बढ़ने लगी। रोशनी मंद होँ गई, औऱ रात केँ दूसरे कार्यक्रम शुरुआत होँ गए। मैंने देखा कि रोमा शालीनता सें खड़ी थि, उसकी साड़ी दूसरी त्वचा कि तरह उसके उभारों सें चिपकी हुई थि। वो मेरीओर मुड़ी, उसकेगाल लज्जा सें लाल थें। "तौ, तुमने अपने पसंदीदा दृश्य कां मज़ा लिया?" उसने अपनी खाली प्लेट एक् तरफ धकेलते हुएकहा।
मे उसकी ताने पर्र हंसे बिना नहि रहसका, व्हिस्की मुझे निर्भीक महसूस करारही थि। "ये मेरा पसंदीदा दृश्य नहि थां, " मैंने खड़े होकर औऱ रूमाल सें अपना मुँह पोंछते हुए उत्तर दिया। हमारी नजरें मिलीं औऱ एक् समय केँ लिएऐसा लगा जैसे हमारे बीचकोई अनकही समझ आँ गई हैं।
रोमा एक् कदम औऱ लगभगआई, उसकीगरम सांसें मेरेकान कों गुदगुदा रहीथीं औऱ वो फुसफुसाई, "तोँ औऱ क्याँ हैं?" उसका सवालहवा मे लटक गय़ा।
मे झुक गय़ा, मेरादिल तेजी सें धड़करहा थां, औऱ फुसफुसाकर बोला, "ये एक् भइया अपनी बेहन कों नहि बता सकता। " इससे पहले कि मे अपने शब्दों पऱ लगाम लगता, शब्द मेरे मुंह सें फिसलगए, रोमा मेरी बातों कां अर्थ अच्छे सें समझ गई,।
वोँ पीछेहट गई, उसकी मुस्कान थोड़ी लड़खड़ा रही थि, उसने एक् समय केँ लिए मेरीओर देखा, उसकी आँखें मेरीओर देखरही थीं, मानोये अनुमान लगाने कि कोशिश कररही हौ कि मे वास्तव मे क्याँ सोचरहा थां। फिन वो मुड़ गई, उसकी साड़ी उसके चारों ओरघूम रही थि औऱ वो उस कमरे कि ओर बढ़ी जहां स्त्री म्यूज़िक कां आयोजन हौ रहा थां, मे वंहीखड़ा उसे जातेहुए देखता रहा, मेरी नज़रें उसकी थिरकती चाल पऱ मोहित थीं, कमरे केँ दरवाज़े पऱ पहुँच कर उसनेपलट केँ एक् बारफिन सें मेरीतरफ देखा औऱ फिन अंदर दाखिल होँ गयीँ,।
बाकीरात मेहमानो केँ हंगामा गुल औऱ म्यूज़िक केँ धुंधलेपन मे बीत गई, जैसे हि सुभह कि पहली किरणें आसमान मे रोशनी बिखेरने लगीं, विवाह कां उत्सव फीका होँ गय़ा।
जैसे हि लड़की कि विदाई हुईँ, मेहमानों नें भि विदाई लेनी शुरुआत कर दि, मेरी आँखें थकावट औऱ नींद सें बोझिल होने लगींथीं। व्हिस्की कां नशाउतर चूका थां औऱ मेरेसर मे भारीपन महसूस होँ रहा थां। रोमा भि उतनी हि थकी हुइ लगरही थि, उसकी आँखें नींद कि कमी सें भारीथीं, मगर मेराहाथ थामते हि वो हल्की सि मुस्कान बिखेरने मे कामयाब रही "चलें मैडम याँ औऱ भि कुछ बाकी हैं?" मैंने उसे छेड़ते हुए पूछा, "नहि, सभी होँ गय़ा चलो" वोँ धीमे सें फुसफुसाई।
घऱ वापसआने कि यात्रा शांत थि, वोँ मुझे पकडे मेरे कंधे पर्र अपनासर टिकाये सोती हुईँ आयी थि, उसकीबड़ी चूचियां मेरीकमर सें कभीकभी घिसने लगती तोँ पुरेबदन मे एक् रोमांच सां पैदा होँ जाता, हमारे बीच नमात्र कि हि बातचीत हुई थि। मे उसकीबदन कि गर्मी कों महसूस करतेहुए घऱ आँ गय़ा।
bahut beautiful yar jab isne Veena ko hotel mai bjaya too muze meri girlfriend kee yaad aa gyi shaadi baad kisi girlfriend kee baat hi alag hain
bhut hi salin or romantic update. thora sa or majak ched chad hu sakti thi. Wishky k asar say. Kuch or baat phusphusat say batayi jati or fir kuch wo anmol yaade ban jati.
सीड्स ऑफ़ लस्ट (Seeds Of Lust) – New Episode
विद्युतीय हि नहीं चुम्बकीय स्टोरी भि लिखी हैं आपने।
बहोत हि उम्दा लिखरहे हैं आप्। वाणी नें जोँ चिन्गारी लगाई, जोँ इन्सेस्ट कि बीजबोई उसमेरवि केँ प्रारब्ध मे झुलसना हि लिखा हैं, इन्सेस्ट केँ ट्रेन मे सफर करना हि हैं।
इस किस्सा कि खुबसूरती हैं कि इसमे प्यार भि हैं, भइया-बेहन कां स्नेह भि हैं, भइया-बेहन कि शरारतें भि हैं औऱ इरोटिका भि हैं।
एक् जिज्ञासा रहेगी कि रोमा औऱ रवि कां रिलेशनशिप क्याँ वाणी कि तरह मात्र हवस कां एक् फसाना बनकररह जायेगा याँ फिनकोई दाम्पत्य जिंदगी कि सिचुएशन भि जन्म लेगी !
बहोत हि बेहतरीन औऱ लाजवाब लेखनी स्किल हैं आपकी। औऱ आउटस्टैंडिंग आपकेहर भाग भि।
bhut beautiful start. Cousins(Mama, Mausi Bua, chacha kee betiyan) k sath aksar attraction hotha h specially teenage mai. mene bi apni cousins k sath kaafi kuchh kia school vacations k waqt ya koy family function k waqt.
सीड्स ऑफ़ लस्ट (Seeds Of Lust) – New Episode
UPDATE 8:
रातभर जागने कि थकन केँ कारण हम् दोनों हि देर तक अपने अपनेरूम मे सोयेरहे औऱ साम कों बाहर् आये, मेरी आँखों मे अभि भि नींद कि खुमारी थि। हम् dinning टेबल पऱ मिले, जहांगरम गरमचाय हमारा प्रतीक्षा कररही थि, इलायची औऱ अदरक कि सुगंध हवा मे फैलरही थि। हमारी मम्मी मेज केँ बीच मे बैठीथीं औऱ हमसे विवाह केँ बारे मे पूछने लगीं। हमने एक्-दूसरे पऱ सरसरी नज़र डाली, पिछली रात कां तनाव अभि भि हमारे बीच स्पष्ट रूप सें मौजूद थां।
रोमा नें चहकते हुए जवाब दिया, उसकी आवाज़ थोड़ी तेज़ थि क्योंकि उसने विवाह कि मुख्य बातें, हँसी-मजाक, खानां, खुशी केँ पलों केँ बारे मे बताया। रोमा वंहा मौजूद मेहमानों औऱ दूल्हा दुल्हन, उनकी ज्वेलरी औऱ कपड़ों केँ बारे मे मां कों विस्तार सें बताने लगी। उसने मम्मी कों सभी बताया पर्र मेरी दारु वालीबात छुपा गयीँ,।
मे बससर हिलाकर उसकीहाँ मे हाँ मिलारहा थां, जब वोँ बातकर रही थि, मेरी नज़र उसके मुँह पर्र थि, मेरेमन मे पिछली रात कि घटनाएं घूमरही थि। कभी-कभार, वो मेरीओर देखती, उसकी निगाहें मेरे चेहरे पऱ बहोत देर तक टिकी रहती, उसकी आँखों मे एक् प्रश्न थां। क्याँ उसेयाद हैं कि मैंने क्याँ कहा थां? क्याँ उसे भि ऐसा हि महसूस हुआ? अजीब सें सवाल मेरेज़हन मे उठरहे थें।
जैसे-जैसे मेरे विचार तेज़ होतेगए, हमारी मम्मी कि आवाज़ धीमी होती गई। मे सिर्फ रोमा केँ वोँ भरेहुए, नम नाज़ुक होंठदेख रहा थां। वे बहोत परिपूर्ण लगरहे थें, चूमने औऱ चूसने केँ लिए बहोत परिपक्व थें, मुझसे चूमने, चखने औऱ उनकारास निचोड़ने कां आग्रह करते सें प्रतीत हौ रहे थें। मैंने कल्पना कि कि वे मेरे होंठों केँ बीच कैसा महसूस करेंगे, वे मेरे मुंह केँ दबाव मे केसे कांपेंगे, जब हम् कभी अपने मिलन केँ उन अंतरंग पलों मे होंगे तोँ उसकी सांसों कि गर्मी मेरी सांसों केँ संग केसेमिल जाएगी।
अचानक, मेरे कंधे पऱ एक् हाथ नें मुझे वास्तविकता मे वापसला दिया। “अरे, कहां खोगये?” मेरी मां कि आवाज़ मेरी कल्पना केँ कोहरे कों भेद गई, औऱ मुझे एहसास हुआ कि वो मुझसे बातकर रही थि। मैंने तेजी सें अपनी पलकें झपकाईं, उनकी चिंतित नज़रों सें नज़र मिलते हि मेरेगाल लाल होँ गए। "मे ठीक हूं, माँ, " मैंने झूठ बोला, उम्मीद करतेहुए कि वो मेरी आंखों मे तैरते अपराधबोध औऱ वासना कों वोँ नहि देख पाएंगी।
रोमा मेरी व्याकुल स्थिति पऱ खिलखिला उठी, उसके होठों पर्र एक् जानी-पहचानी मुस्कान खेलरही थि। "मां, " मैंने शांति सें कहा, "डॉक्टर नें कहा हैं कि आप् सोमवार सें दफ़्तर जानां शुरुआत कर सकती हें, मगर मुझे लगता हैं कि आपको अभि औऱ आराम करना चाहिए। "
मेरीओर मुड़ते हि मां कि आँखों मे स्नेह छलकआया। "मगर बेटा, " उन्होंने अपनाहाथ मेरे कंधे पर्र हल्का सां रखतेहुए कहा, "मे बहुत आरामकर चुकी हूं। मुझेकाम पर्र वापस जाने कि जरूरत हैं, तुम् चिंता मतकरो मे अब बिलकुल ठीक हूं। "
रोमा नें सहमति मे सिर हिलाया, उसकी हंसी शांत हौ गई। "भईयासही कहरहे हें, मां, " उसनेकहा, "अभि कुछदिन औऱ आरामकर सकती होँ आप्"
मम्मी नें अहहभरी, मगर उनकी आँखों मे जिद नें मुझे बताया कि वो आसानी सें पीछे हटने वाली नहि थि। "उसे छोड़ो, " उन्होंने अपनी आवाज़ मे दृढ़ स्वर मे कहा। "मगर अभि, तुम् दोनों केँ लिएकुछ काम हैं। "
रोमा केँ चेहरे पऱ शिकन आँ गई औऱ उसने मेरीओर प्रश्नवाचक दृष्टि सें देखा। “कौन सां काम?” उसने भौंहें चढ़ाते हुए पूछा।
मां कि आवाज़ गंभीर हौ गई। "अरे दिवाली आँ रही हैं घऱ कि सफाई करनी हैं केँ नहि?" उन्होंने ताना देतेहुए पूछा, उनकी आँखें मुझ सें हटकर रोमा कि ओरघूम गई,। घऱ कि सफाई कां सुनते हि रोमा नें सड़ा सां मुंहबना लिया"अरे ज़ादाकुछ करने कि ज़रूरत नहि बस तुम् दोनों ऊपरबने स्टोर रूम कि सफाईकर दो, जौ चीज़काम कि लगेउसे एक् तरफरख देना औऱ बाकी कां सारा कचरा बहार छत्त पर्र फेंक देना मे कबाड़ी कों दे दूंगी " मां नें अपनीबात विस्तार सें कही।
रोमा कि आँखें थोड़ी चौड़ी होँ गईं औऱ उसनेमुझ पऱ नज़र डाली"मगर वंहा बहोत अंधेरा हैं, " उसने विरोध किया, उसकी आवाज़ पहले सें थोड़ी ऊँची थि।
"ऐसी डरपोक बिल्ली मतबन, " उन्होंने हँसते हुएकहा। "तुँ अबबड़ी हौ गयीँ, हैं। वंहा बल्बलगा हैं अगर वो ख़राब होँ तौ टोर्च use करना। " मां नें डांटते हुएकहा
रोमा नें अपनी आँखें घुमाईं मगरआगे कोईबहस नहि कि। "ठीक हैं, " उसनेकहा।
रोमा कों डांट पड़तेदेख मेरे चेहरे पर्र हंसी आँ गयीँ,, रोमा नें बुरा सां मुंहबना केँ मुझे देखा औऱ अपनीनाक सिकोड़ ली।
स्टोर रूम कि सफाई कां सुनकर मुझे भि बुरा सां लगरहा थां, मे स्वयं उससे बचनाचाह रहा थां। धूल औऱ भूली-बिसरी यादों सें भरे स्टोर रूम कों साफ करना हमेशा एक् डरावना कामरहा हैं। मगरअब, रोमा केँ संग अकेले मे कुछ औऱ समय साझा करने केँ प्रलोभन सें मे स्वयं कि नहि रोकसका।
उसरात, मुझे नींद नहि आँ रही थि, मैंने अपना मोबाइल उठाया औऱ वाणी केँ लिए एक् "Hi" कां मैसेज टाइप किया, पऱ बहोत देर तक वोँ अनदेखा हि रहा। मैंने अनुमान लगाया, वोँ याँ तोँ अपने पति केँ संग बिजी थि याँ फिनसो चुकी थि.
जब मे वाणी कि प्रतिक्रिया कां प्रतीक्षा कररहा थां तौ सन्नाटा बहराकर देने वाला थां, मेरे कमरे कां अंधेरा मेरे चारों ओर छायाहुआ थां। मैंने अपनी चादर अपनेऊपर सें उतारकर फेंक दि, मेरे पलंग केँ ऊपरफुल स्पीड सें घूमता पंखा भि मेरे जिस्म पर्र आये पसीने कों नहि सूखापा रहा थां। मे बेचैन होकर करवटें बदलरहा थां, वाणी सें उस टाइमबात होँ जाती तौ शायदकुछ चैन मिलता।
जब मे विवाह कि घटनाओं कों अपने दिमाग़ मे बार-बार दोहरा रहा थां तौ मेरे विचार घूमने लगे। रोमा कां कोमल स्पर्श, जिसतरह सें वो मेरीओर झुकी थि, जिसतरह सें उसने मेरीओर देखा थां जब मैंने उसकेकान मे वोँ शब्द फुसफुसाए थें। क्याँ मे बहोत दूर कि सोचरहा थां? क्याँ मैंने स्थिति कों गलतपढ़ लिया थां?
ऐसे हि अनेकों विचारों केँ संगपता नहि मेरीकब आँखलग गयीँ,।
अगलेदिन सुभह मैंने अपने दरवाजे पऱ जोरदार दस्तक सुनी। दस्तक तेज़, औऱ ज़्यादा तीव्र होँ गई। मैंने अहहभरी औऱ पलंगछोड़ करउठा, ठंडी फर्श नें मेरे नंगे पैरों कों झटका दिया। जैसे हि मैंने द्वार (दरवाज़ा) खोला, रोमाकुछ स्नैक्स केँ संग एक् ट्रे लेकर खड़ी थि।
उसकी आँखों नें एक् समय केँ लिए मेरी आँखों कों खोजा, "पता भि हैं, वक्त क्याँ हुआ हैं?" वो ट्रे कों मेरी छाती मे धकेलते हुए बोलीं।
मैंने नाँ मे सिर हिलाया, "पता नहि, " मे उससे ट्रे लेतेहुए बड़बड़ाया, मे शायद ज़ादा हि देर सें उठा थां।
"मां नें घऱ कां कुछ सामान मंगाया हैं औऱ उनकी दवाइयां भि लानी हें औऱ अभि १०बज चुके हें, जल्द सें जाओ औऱ लेकेआओ उसकेबाद बाकी केँ काम भि करने हें?" उसने मुझे एक् लिस्ट औऱ मम्मी कि दवाई कां पेपर थमाते हुएकहा, मैंने गरमचाय कि ट्रे साइड मे टेबल पऱ रखी औऱ उसकेहाथ सें वोँ पेपर लेतेहुए पूछा "बाकी कां कौन सां काम?"
उसने मुझे ताड़ केँ देखा औऱ अपने दोनों हाथों कि मुट्ठियां बना केँ अपनीकमर पऱ रखतेहुए बोलि "भूलगए? कल दाँत तोँ बहोत दिखारहे थें तुम्"
मैंने मुस्कुरा केँ उसकीतरफ देखा "अच्छा वोँ, स्टोर रूम कि सफाई, कर देंगे, कर देंगे" "पऱ बिल्लियों कों अँधेरे सें डर लगता हैं" मैंने उसे छेड़ते हुएकहा
उसने अपनेहाथ सें मुक्का बना केँ हवा मे मुझे दिखाया, मेरी हंसीतेज़ हौ गयीँ,।
जैसे हि वो जाने केँ लिए मुड़ी, उसने एक् सरसरी नज़र मेरे पुरे शरीर पऱ डाली, मे उस वक़्त बस एक् सफ़ेद बनियान औऱ बॉक्सर शार्ट पहने थां। मेरे बॉक्सर केँ माध्यम सें मेरे लन्ड कि रूपरेखा स्पष्ट रूप सें दिखाई देरही थि। उसकी निगाहों कि गर्मी नें मेरी रीढ़ मे सिहरन पैदाकर दि औऱ एक् समय केँ लिए मुझेऐसा महसूस हुआ कि मे दुनिया कां सबसे wanted व्यक्ति हूं। मगर जितनी तेजी सें यहमन मे आया थां, उतनी हि तेजी सें येचला गय़ा, औऱ वो मुझसे दूर जानेलगी, उसकी चौड़ी गांड उसके चलने कि लय मे थिरकरही थि।
मे जल्द सें रेडी होके बाजार गय़ा औऱ घऱ कां सामान औऱ मां कि दवाइयां लेँ आया, इस सभीकाम मे दोपहर कां १बज गय़ा। लंच खातेहुए मेरे औऱ रोमा केँ बीच decide हुआ केँ, थोड़ा आराम करने केँ बाद हम् सफाई शुरुआत करेंगे।
३बजे केँ आसपास रोमा नें मेरे कमरे केँ दरवाज़े पऱ दस्तक दि, मैंने दरवाज़ा खोला, वोँ हाथ मे एक् झाड़ूलिए खड़ी थि, मेरीतरफ मुस्कुरा केँ देखि औऱ बोलीं "चलें महाराज"
"बिलकुल महारानी, चलो" वोँ हंसी औऱ बिना मेरीबात कां अर्थ समझेऊपर कि तरफ जीना चढ़नेलगी।
जैसे हि हम् दूसरी मंजिल पऱ पहुँचे, मैंने रौशनी केँ लिए छत्त कां दरवाज़ा खोल दिया। स्टोर रूम औऱ छत्त पर्र जाने केँ दरवाज़े पास मे हि थें। स्टोर रूम जीना ख़त्म होने पऱ बायीं तरफ थां जबकि छत्त कां दरवाज़ा जीने कि सीध मे थां। जैसे हि रोमा नें घुंडी घुमाई, औऱ लोहे केँ उस दरवाज़े कों धकेला, जंगलगे कब्जे विरोध मे चीख़ने लगे।
रूम भूली-बिसरी यादों कां एक् मकबरा थां, पुराने, टूटेहुए फर्नीचर, धूलभरी किताबें औऱ फेंके हुए कपड़ों कां ढेर थां। गीले कार्डबोर्ड औऱ बासी कपड़े कि महकहवा मे भर गई, जिससे मुझे छींकआने लगी। रूम जितना मुझेयाद थां, उससे छोटा थां, दीवारें सीमेंटेड शेल्फ सें भरींथीं जिनमे बेतरतीब सामान फैलाहुआ थां।
मैंने अपनेफोन कि टॉर्च जलाई, प्रकाश कि किरण अंधेरे कों चीरती हुई रोमा कि पीठ पर्र गिरी। उसने एक् साधारण काली टी-शर्ट पहनी हुई थि जोँ उसके उभारों कों छूरही थि, कपड़ा उसकेगोल कंधों पऱ तनकर फैलाहुआ थां। उसकी काली कैपरी पैंट मे उसके सुडौल पेर दिखाई देरहे थें, जैसे हि उसने कमरे मे कदमरखा, काप्री कां कपडा उसकी गांड केँ संग थिरकने लगा। मे उसकेठीक पीछे चलतेहुए अंदर दाखिल हुआ मेरे शॉर्ट्स मे मेरे लन्ड नें हलचल कि, मेरी ग्रे टी-शर्ट कां पतला कपड़ा मेरी बढ़ती उत्तेजना कों छिपाने मे बहोत कम सहायता कररहा थां।
रूम वास्तव मे एक् आपदा थां, जिसमें गत्ते केँ बक्से बेतरतीब ढंग सें रखेहुए थें, जरा सां छूने पर्र उनके गिरने कां खतरा थां। फोन टोर्च कि रोशनी धूलभरी सतहों पर्र खेलरही थि, जिससे अजीब आकृतियां बनरही थीं। वोँ चारों औऱ बिखरा सामान गुज़रे वक़्त कि याद दिलारहा थां।
"ऐसा लगता हैं कि सालों सें यंहाकोई नहि आया हैं, " मैंने बड़बड़ाया, मेरी आवाज़ उस छोटी सि स्थान मे गूँजरही थि।
रोमा नें सिर हिलाया, उसकी आँखें अव्यवस्थित कमरे पर्र नज़रडाल रहीथीं। "हमें निचली शेल्फ सें शुरुआत करनी होगी, " उसनेकहा, उसकी आवाज़ बमुश्किल सुनाई देरही थि। वो एक् कदमआगे बढ़ी, औऱ उसकाहाथ मेरेहाथ सें टकराया, जिससे मेरे जिस्म मे बिजली कां झटकालगा।
अलमारियाँ सामान सें कसकरभरी हुइ थि। फर्श पर्र भि कुछ सामान फैलाहुआ थां। "ये एक् दिन कां काम नहि, " मैंने उदास होतेहुए कहा।
रोमा नें सिर हिलाया, "अबपता चलरहा हैं न् मे क्यूं बचरही थि?" उसने बिना मेरीतरफ देखेकहा फिन वो नीचे झुकी, उसकी टी-शर्ट ऊपरउठी हुई थि औऱ उसकीपीठ केँ निचले हिस्से कि चिकनी, पीली त्वचा उजागर हौ रही थि। मे घूरे बिना नहि रहसका, मेरे विचार उसकी नंगीपीठ कां स्पर्श करने कों उतावले हौ रहे थें। "तुम् उधर सें पकड़ो, " उसने एक् गट्टे केँ बॉक्स कों उठाते हुएकहा, मैंने दूसरी तरफ सें हाथ लगाया औऱ उस बॉक्स कों उठा केँ बहाररख दिया।
एक् गहरी सांस केँ संग, उसने अलमारियों केँ बीच कि तंग स्थान मे कदमरखा, अव्यवस्था केँ बीच सें अपना मार्ग बनाते हुए उसकाबदन बक्सों सें टकरारहा थां। मैंने भि उसके पीछे गय़ा, जैसे हि मे उसके लगभग गय़ा, टॉर्च कि रोशनी बुझने लगी, मेरेदिल कि धड़कन तेज होँ गई क्योंकि उसकेबदन कि गर्माहट मुझेघेर रही थि। धूल उड़ने केँ कारण हम् तेज़तेज़ साँसे लें रहे थें।
शेल्फ मेरी अपेक्षा सें ज़्यादा नीची थि, औऱ ऊपर सीमेंट कि स्लैब पऱ अपनासिर टकराने सें बचने केँ लिए मुझे नीचे झुकना पड़ा। मेरीनाक रोमा कि गांड केँ उभार केँ बराबर थि, उसकी कैप्री कां कपड़ा उसकेगोल मटोल चूतड़ों पऱ कसकर फैलाहुआ थां। उसके शरीर सें आती भीनी सि डिओडरंट कि महक मेरी वासना कों औऱ भड़कारही थि। "संभलकर, " उसनेकहा, जब वो धूलभरी किताबों कां बॉक्स उठाने केँ लिए नीचे झुकी।
उसकी चौड़ी गोल गांड उभरी हुईँ थि, वोँ मेरे चेहरे सें बसकुछ इंच कि दूरी पर्र थि औऱ मे उसकी हुस्न मे खो गय़ा थां। मे नीचे बिखरे हुए सामान कों एक् बॉक्स मे भररहा थां पऱ मेरी नज़रें रोमा कि गांड पऱ हि टिकीथीं। जिसतरह सें कपड़े केँ नीचे उसकी मांसपेशियां हिलती थीं, वो धीरे धीरे हिलती थि क्योंकि वो अपनावजन एक् पांव सें दूसरे पांव पऱ स्थानांतरित कररही थि। मे उसकी पैंटी लाइन कि रूपरेखा देख सकता थां, उसकी नंगी गांड केँ दर्शन कि मेरी ख़्वाहिश औऱ प्रबल होँ गई,।
मेरेहाथ हवा मे हि ठिठकगए, मे अपनाकाम करनाभूल गय़ा। मे बस एक् टक उसकी गांड कों मंत्रमुग्ध होकेदेख रहा थां, हर गुजरते सेकंड केँ संग मेरी साँसें धीमी होतीजा रहीथीं।
उसने अचानक मुड़के मेरीतरफ देखा, मेरी सांसें रुकगईं, जब उसने मुझे घूरते हुए पाया तौ उसकी आंखें थोड़ी सिकुड़ गईं। "कोई प्रॉब्लम हैं?" उसने पूछा, उसकी आवाज़ धीमी थि।
मैंने अपने मुँह मे जमा हुई लार कों निगलते हुएकहा, "नां, नाँ, " मे हकलाते हुए, सामान्य लगने कि कोशिश कररहा थां। "कोईबात नहि। "
"तोँ फिनइस बॉक्स कों उठाकर ऊपर स्लैब पे रखदो" उसने सीधेखड़े होतेहुए मुझे आदेश सां दिया। मैंने उसके आदेश कां पालन किया।
अगले 2 घंटे तक हमने ज़ादा बातचीत किये बिना शांति सें काम किया, मेरे दिमाग़ मे उमड़रहे ख्यालों कों मैंने कुछदेर केँ लिए विराम दिया। सिर्फ बक्सों केँ इधर-उधर होने औऱ कभी-कभार छींकने कि आवाजें आँ रहीथीं क्योंकि हम् वर्षों सें जमीधूल कों हटारहे थें। हवागरम हौ गई, औऱ पसीना मेरे माथे पर्र, गर्दन औऱ पीठ पर्र बहनेलगा।
औऱ फिन, जब हम् अपनाकाम ख़त्म करने केँ करीब लगभग थें, मेरीनजर किसीचीज़ पऱ पड़ी - ये एक् पुरानां पारिवारिक फोटो एलबम थि, जोँ फेंकी हुईँ स्टेशनरी केँ ढेर केँ नीचेदबी हुईँ थि। कवरटूट गय़ा थां औऱ घिस गय़ा थां, मगरउसे देखते हि पुरानी यादें ताजा होँ गईं। मैंने उसे धीरे-धीरे सें उठाया, उसमें मौजूद यादों कां वजन हमारे आस-पास मौजूद किसी भि बक्से सें ज़्यादा भारी थां।
"देखो मुझे क्याँ मिला, " मैंने रोमा कों पुकारा, मेरी आवाज़ छोटी सि स्थान मे गूँजरही थि। वो पीछे मुड़ी, जैसे हि उसकीनजर एल्बम पऱ पड़ी तौ उसकी आँखें चमक उठीं। "मुझे देखने दो, " उसने अपनाहाथ बढ़ाते हुएकहा।
मैंने एल्बम कों उसे सौंप दिया। उसनेबड़े उत्साह सें एल्बम कां पन्ना पलटा, पन्ने उम्र केँ संग चिपचिपे होँ गए थें, प्लास्टिक कि आस्तीनें पीली औऱ भंगुर होँ गई थीं। मगर अंदर कि तस्वीरें आश्चर्यजनक रूप सें जीवंत रहीं, जिसमें उस टाइम केँ मजा औऱ हंसी केँ क्षणकैद थें जब हम् दोनों बच्चे थें। हमारी मां कि मुस्कान गहरी औऱ सच्ची थि, उनकी बाँहें हम् दोनों केँ चारों ओरथीं, हमारे गाल एक् मज़बूत आलिंगन मे एक् संग चिपके हुए थें।
वोँ मेरेहाथ सें एल्बम लेते हि रौशनी केँ लिए दरवाज़े कि तरफपलट गई,, जिससे मे ठीक उसके पीछे आँ गय़ा थां, उसके भारी कूल्हे एक् लम्हा केँ लिए मेरेपेट केँ निचले हिस्से कों छूगए औऱ मे धीमी कराह निकालने केँ अलावा कुछ नहि करसका। उसके जिस्म कि गर्मी मेरी त्वचा पर्र एक् दाग कि तरह थि, जिससे मुझमें खुशी कि लहरें दौड़रही थीं। उसकाबदन एक् लम्हा केँ लिए कठोर होँ गय़ा, पर्र जल्द हि उसने स्वयं कों सामान्य किया। उसकी आवाज़ थोड़ी कांपरही थि औऱ उसने लंबे वक़्त सें भूलेहुए रिश्तेदारों औऱ दोस्तों कि ओर इशारा किया।
जब मे तस्वीरें देखने केँ लिए लगभग झुका तोँ उसकेबाल उसके कंधे पर्र रेशम केँ धागों कि तरह बिखरे थें, जिससे मेरीनाक मे गुदगुदी हौ रही थि। प्रत्येक पृष्ठ नें हमारे साझा इतिहास कों औऱ ज़्यादा उजागर किया, प्रत्येक मुस्कान औऱ हंसी नें वक्त केँ संग हमारी मासूमियत कि एक् मार्मिक याद दिला दि। मैंने महसूस किया कि मेरा लन्ड उसकी गांड पर्र दबावबना रहा थां, उसकी कैप्री कां कपड़ा उसकी गांड केँ उभार कों मेरे लन्ड कि चुभन सें बचाने मे असमर्थ थां।
बहार सें आँ रही रौशनी भि साम होने केँ संगमंद पड़ चुकी थि। मैंने अपनेफोन कि टोर्च जलाई औऱ फोटो एल्बम केँ पन्नो पऱ उसकी रौशनी डालने लगा।
अपनी गांड पऱ मेरे सख्त होँ चुके लन्ड कों महसूस करते हि रोमा कां जिस्म अकड़ने लगा, मेरे लन्ड कां दबाव महसूस करते हि उसकी सांसें अटकने लगीं।
"ये अंकल अजीत हें, " उसनेघनी मूंछों औऱ हल्की मुस्कान वाले एक् व्यक्ति कि ओर इशारा करतेहुए अपनी आवाज़ थोड़ी ऊंची करतेहुए कहा। "याद हैं, हम् इनके खेतों मे केसे घूमने जाते थें?" उसने अपनी आवाज़ कों सामान्य रखने कि कोशिश करतेहुए कहा।
माहौल कों हल्का रखने कि उसकी कोशिश डूबते हुए व्यक्ति केँ लिए फेंकी गई जिंदगी रेखा कि तरह थि। मैंने भि भरपूर कोशिश कि केँ मेरा ध्यान फोटो पर्र रहे नां कि रोमा कि नरम रसीले गांड केँ मांस पर्र। "हाँ, " मैंने हंसने कि कोशिश करतेहुए कहा, "कितना अच्छा वक़्त थां। "
मगरहर गुजरते सेकंड केँ संगरूम छोटा औऱ हवा भारी होतीजा रही थि। उसकी खुशबू मेरीनाक मे भर्ती चली गई, डिओडरंट कि खुशबु औऱ रोमा केँ शरीर कि नेचुरल गंध एक् मादक मिश्रण थां। मेरा लन्ड मेरीहर धड़कन केँ संगफड़क रहा थां, औऱ मे अपने शार्ट केँ कपडे पर्र Pre-cum सें फैलते गीलेपन कों महसूस कर सकता थां।
रोमा नें अपनी नज़रें एल्बम पर्र रखीं, उसकी आवाज़ स्थिर रही औऱ उसने रिश्तेदारों केँ बारे मे बताया औऱ हमारे बचपन कि कहानियाँ साझाकीं। वो यादों पर्र हँसी, मगर उसकी हँसी ज़बरदस्ती लगरही थि, उसकेबदन कां तनावउसे धोखादे रहा थां। वो मेरे लगभग आँ गई, हर पन्ने पलटने केँ संग उसकी गांड मेरी जांघों सें टकरारही थि।
मे इसे औऱ बर्दाश्त नहि करसका। मेराहाथ, अपने आप् हि, आगे बढ़ा औऱ हल्के सें उसके कूल्हे पऱ टिक गय़ा, उसकी त्वचा कि गर्मी उसकी कैप्री केँ कपड़े केँ माध्यम सें मुझेजला रही थि। वो हाँफने लगीमगर हटी नहि। इसके बजाय, वो थोड़ा सां आगे कि ओरझुक गई, उसकी गद्देदार गांड मेरे कठोर लन्ड पर्र औऱ दबाव बनाने लगी।
मेरादिल मेरी छाती मे धड़करहा थां, खून मेरीकमर तक दौड़रहा थां। ऐसालग रहा थां जैसे स्टोर रूम कि दीवारें हमेदेख रहीहों, उससमय मे, मे अपनेबदन केँ विरुद्ध उसके जिस्म कि गर्मी कों महसूस कररहा थां। वर्जित संबंधों कां रोमांच, मेरी उत्तेजना कों एक् अनछुए पहलु सें रूबरू करारहा थां।
मे अपने आप् कों रोक नहि सका। मेराहाथ उसके कूल्हे सें उसकीकमर तक फिसल गय़ा, मेरा अंगूठा उसकी पैंटी लाइन केँ ऊपर कि रसीले त्वचा कों छूरहा थां। फिन, उत्तेजना कि एक् लहर केँ संग, मैंने अपने लन्ड कों हल्के सें उसकी गांड पऱ दबाया औऱ एक् छोटा, बमुश्किल ध्यान देने योग्य धक्का दिया। वो हांफने लगी, धूल भरीहवा केँ कारण आवाज़ धीमी हौ गई, मगर वो वहां सें नहि हटी। इसके बजाय, वो पीछेझुक गई, उसका जिस्म थोडा झुक गय़ा, उसकी सांसें तेज हौ गईं।
उसकाहाथ उस पन्ने पऱ रुक गय़ा जिसे उसने पकड़रखा थां, वो एल्बम केवल एक् जरिया बन केँ रह गय़ा थां, उन अद्भुत बिजली कि तरंगो कां जौ हमारे बीचबह रही थि।
मैंने एक् गहरी साँसली, अंधेरा हमें किसी प्रेमी केँ आलिंगन कि तरहघेर रहा थां। रूम हमारी उथली साँसों सें गूंजने लगा थां। मेराहाथ उसकीकमर पऱ कस गय़ा, मेरा अंगूठा अब उसकी पैंटी केँ इलास्टिक बैंड पऱ टिकाहुआ थां।
उसका जिस्म थोडा कांपरहा थां, औऱ मुझेपता थां कि वो भि मेरीतरह उस लम्हा मे खोई हुईँ थि। एक् हल्के धक्के केँ संग, मैंने उसेआगे कि ओर धकेला, उसकी गांडअब मेरे लिंग केँ उभार पर्र औऱ ज़्यादा मजबूती सें दबावडाल रही थि। मेरे लन्ड कां सिर प्री-कम सें चिकना होँ गय़ा थां, मेरे बॉक्सर शार्ट कां कपड़ा मेरी त्वचा सें चिपक गय़ा थां। मे झुक गय़ा, मेरे होंठों कों उसकेकान केँ ठीक नीचे संवेदनशील स्थान मिल गयीँ,।
मैंने उसकी गर्दन कों कासकर चुम लिया, मेरी चूमते हि उसके मुंह सें एक् आह सि फुटपड़ी "अहह!", उसकी सांसें सि उखाड़ने लगीं उसने अपने होंठ भींचकर उन्हें रोका।
मेराहाथ उसकीकमर सें पेट कि ओर बढ़ने लगा, मे उसकी एक् बड़ी मम्मों कों अपनी हथेली मे भरने केँ लिए पहुंचने हि वाला थां कि हमने बहार सीढ़ियों पऱ कदमों कि आवाज़ सुनी।
हम् स्तब्ध होँ गए, आवाज़ हमारे कानों मे गड़गड़ाहट कि तरह गूंजउठी। आनन फानन मे हम् एक्-दूसरे सें दूर हौ गए, हमारी स्थिति कि वास्तविकता किसी भारी पत्थर कि तरह हमारे सर पऱ आँ गिरी थि। एक् मौनसमझ केँ संग, हम् हरकत मे आँ गए औऱ इसतरह सें अलगहुए जैसे कि हम् कभी लगभग नहि थें।
रोमा केँ गाललाल होँ गए, उसकी आँखें भय औऱ उत्तेजना केँ मिश्रण सें चौड़ी होँ गईं। उसने फोटो एलबम कों अपनी छाती सें कसकर पकड़रखा थां, उसकी सांसें अनियमित होँ रहीथीं। मैंने स्वयं कों सँभालने कि भरसक कोशिश कि, उसकी गर्दन कां स्वाद अभि भि मेरीजीभ पर्र बनाहुआ थां जिसे मैंने चूमा थां।
रोमा नें सावधानी सें एल्बम कों एक् तरफरख दिया। उसने एक् गहरी साँसली, उसकी भारी छातियां ऊपर-नीचे हौ रही थि, औऱ फिन वो अपने पैरों केँ पासरखे एक् बक्से कों उठाने केँ लिए नीचे झुकी। उसकी टी-शर्ट नें उसकी चूचियों कों कसकर पकड़ाहुआ थां। मुझे भि काम कां दिखावा करने केँ लिए मजबूर होना पड़ा। हम् पकड़े जाने कां जोखिम नहि उठा सकते थें।
जैसे-जैसे क़दमों कि आहट नज़दीआती गयीँ,, हम् दोनों नें अपनेकाम मे तल्लीन होने कां नाटक किया, पुरानी वस्तुओं कों एक् बॉक्स मे भर दिया जिसेहमे कबाड़ी कों देना थां। "क्याँ सबकुछ ठीक हैं?" मम्मी कि आवाज़ केँ वोँ शब्द, तनाव कों चाकू कि तरहकाट रहे थें।
"हाँ, मम्मी, " मैंने उत्तर दिया, मेरी आवाज़ थोड़ी ऊँची थि। "हौ गय़ा बस थोड़ा सां औऱ बचा हैं। "
रोमा नें भि मेरे शब्दों कों दोहराया, उसकी आवाज़ मेरी तुलना मे थोड़ी कांपरही थि। "बस झाड़ू मारना रह गय़ा हैं, " उसने पुकारा, उसकी आँखें मेरी आँखों सें हट हि नहि रहीथीं। हमने एक् नज़र साझा कि जोँ अनकही इच्छाओं औऱ वासना केँ ज्वर सें उमड़ी भावनाओ कां सूचक थि।
हम् दोनों सीधे हौ गए, अपने हाथों सें धूल पोंछते हुए, एल्बम दृश्य सें दूर एक् शेल्फ पर्र रखाहुआ थां। "ठीक हैं, जौ कुछ भि काम कां लगेउसे नीचे लेँ आनां, " उन्होंने हमें आदेश देतेहुए कहा।
रोमा कि नज़रें कमरे मे चारों तरफ घूमी, औऱ फिन शेल्फ पर्र रखी एल्बम केँ ऊपरटिक गयीँ,। "ऐसा यंहाकुछ नहि हैं, " उसने धीमे स्वर मे कहा "सिवाय इस पुराने एल्बम केँ" उसने अपनेहाथ मे एल्बम कों उठाते हुएकहा।
"ओह!ये तोँ मे कब सें ढूंढरही थि, पता नहि येयहा केसे आँ गय़ा? लाओ, इसे मुझेदे दो, मे इसे संभाल केँ रख दूंगी औऱ तुम् जल्द हि काम समाप्त करकेआओ मैंने ब्रेकफास्ट बना केँ रखा हैं" उन्होंने कहा औऱ वो रोमा केँ हाथ सें एल्बम लेकरमुड़ गई।
धीरे-धीरे धीरे-धीरे मां वापस सीढ़ियां उतरने लगीं, सीढ़ियों सें नीचे उनकी चप्पलों कि आवाज़ धीमी होँ गई। हम् फिन अकेले थें, कमरे मे धूल कि तरहघनी खामोशी छाई हुइ थि। हवा मे एक् तनाव सां पसराहुआ थां, हमारी आँखें एक्-दूसरे सें कुछसमय केँ लिए मिली, जोँ कुछ भि घटितहुआ थां उसकी अनकही स्वीकृति हमारे बीचअधर मे लटकरही थि।
रोमा सबसे पहलेआगे बढ़ी औऱ उसने बहारपड़ी झाड़ूउठा ली, चलतेहुए उसकेपेर लड़खड़ा रहे थें। उसने मेरीओर देखने सें परहेज किया, उसकेगाल अभि भि हमारे निकट-प्यार कि गर्मी सें लाल हौ रहे थें। हमने चुपचाप काम किया, दोनों मे सें किसी कि भि हिम्मत नहि हुई केँ जौ हुआ थां उसपर चर्चा करे। जोँ काम एक् वक़्त इतना कठिनलग रहा थां, अब वो हमारी भावनाओं केँ उमड़ते बादलों केँ कारण ध्यान भटकाने जैसालग रहा थां।
वोँ कमरे मे झाड़ू मारने लगी औऱ मे ऊपरी स्लैब कों कपडे सें झाड़ने लगा। हमारी आँखें थोड़ी देर केँ लिए मिलीं, औऱ उससमय मे, मैंने उसके भीतर एक् युद्ध छिड़ते हुए देखा - इच्छाएं डर सें जूझ रहींथीं, चाहत अपराध बोध सें टकरारही थि। हम् आग सें खेलरहे थें, औऱ हम् दोनों जानते थें कि अगर हम् सावधानी सें नहि चलेंगे तोँ ये हमें भस्मकर सकती हैं, हमेहर कदम फूँक फूँक केँ रखना थां।
काम ख़त्म करने केँ बाद, जैसे हि हम् सीढ़ियाँ उतरे, स्टोर रूम केँ बाहर् कि हवा ठंडी, साफ़ महसूस हौ रही थि। मानो हमारी वासना औऱ प्यार भरी कामनाओं कां साझा अनुभव उस स्टोर रूम केँ अँधेरे मे छूट गय़ा होँ। हम् संग-संग नीचे उतरने लगे, हमारे कदम एक् संगचल रहे थें, हमारे बीच कि खामोशी उतनी हि स्पष्ट थि जितनी वो गर्मी, जोँ कुछ क्षण पहले कमरे मे हमारे जिस्मों मे भर गई थि।
जब मे पहली मंजिल पर्र बने अपने कमरे कां द्वार (दरवाज़ा) खोलरहा थां तोँ मेरी नज़रें रोमा कि गांड पर्र टिकी हुइ थीं, जब वो नीचे ग्राउंड फ्लोर कि ओरजारही थि, उसके भारी कूल्हों कि हल्की-हल्की थिरकन बहोत सुंदर लगरही थि। उसकी कैप्री कां तंग कपड़ा उसकी गांड केँ उभारों सें चिपक गय़ा थां औऱ उसकी टी-शर्ट सें आधा छिपाहुआ थां। उसने मेरी निगाहों कों महसूस किया होगा क्योंकि उसने पीछे देखा, उसकी आँखें मेरी आँखों सें टकरायीं।
एक् क्षणभर केँ लिए, हमारे चारों ओर कि दुनिया रुक गई।
उसकेगाल अभि भि लाल थें, औऱ जिसतरह सें उसने मेरीओर देखा, उससे उसके भीतर कि उथल-पुथल कां पताचल रहा थां। उसके चेहरे पऱ एक् उदासी सि छाई थि, जिसने मुझे अंदर तक हिला केँ रख दिया।
वोँ बेमन सें सीढ़ियां उतरती चली गई,।
रात मे मे अपनेखाट पर्र लेटाहुआ सोने कि कोशिश कररहा थां मगर नींद कोसों दूर थि। रोमा केँ ख्यालों सें मे फिन सें बेचैन थां।
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सीड्स ऑफ़ लस्ट (Seeds Of Lust) - Continue reading for full story
Superb update. Kitna erotic mahal kia h. jb school k vacation mai sab cousins milte the rath mai sote waqt aesa hi mast scene hotha thaa. chudayi k alawa sab kuchh hotha thaa bina ek shabd bole hue.
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