सीड्स ऑफ़ लस्ट (Seeds Of Lust) – New Episode
UPDATE 4:
सुभह कों मे जल्द सें सजधजकर हुआ औऱ अपनाबैग पैककर हि रहा थां केँ मेरी छोटी बेहन रोमा मेरे कमरे मे गरमचाय लेकरआयी औऱ उसने मुझसे पूछा "सुभह सुभह कँहा कि तयारी हौ रही हैं भैया ?"
मैंने एक् नज़र रोमा पऱ डाली औऱ उसकेहाथ सें गरमचाय कां कप लेतेहुए जवाब दिया"कुछ इम्पोर्टेन्ट काम आँ गय़ा हैं, मेरठ तक जारहा हूं, साम तक वापस आँ जाऊंगा"। उसने मुझे थोड़ा असमंजस सें देखा औऱ फिन पूछा "मेरठ तक जारहे होँ तोँ वाणी केँ यंहा भि होँ आनां", मैंने गरमचाय कि चुस्की लेतेहुए उसे जवाब दिया "क्याँ करूँगा वंहा जाकेआज तक मौसा मौसी नें कभी हमारी खबर तक नहि ली"। मेरे जवाब सें वोँ थोड़ा संतुष्ट सि दिखाई दि फिन उसनेकहा "पऱ वाणी तोँ लगातार टच मे रहती हैं नं"। मैंने अपनीगरम चाय ख़त्मकर केँ कप कों ट्रे मे रखा औऱ अपनाबैग कंधे पर्र डालते हुएउस सें कहा "हम्म, वाणी कि बात औऱ हैं, चल देखूंगा अगरसमय मिला तोँ चला जाऊंगा" कहकर हम् दोनों हि संग मे नीचे आँ गए।
मैंने मां कों बताने केँ लिए उनके कमरे मे झाँका, रोमा नें पीछे सें मुझे टोका "मम्मी नहाने गयीँ, हैं, तुम् जाओ मे बता दूंगी"। मैंने रोमा कों मुस्कुरा केँ देखा औऱ बहार केँ तरफ जातेहुए पूछा "तेरेलिए कुछ लाना हैं तौ बतादे", रोमा नें मुस्कुराते हुएकहा "हाँ एक् स्मार्ट वाच महंगी वाली", मैंने गेट पऱ पहुँच केँ गेट खोलते हुएउसे जवाब दिया "महंगी वाली, चाहे मेरेपास पैसे न् होँ ?"
"दोसाल सें कोई उपहार नहि दिया तुमने, राखी पऱ भि ११०० रूपये पकड़ादिए थें" उसने मेरेपास आके नाराज़ होतेहुए कहा। "अच्छा ठीक हैं, क्रोध क्यूं होती हैं लेँ आऊंगा बताकौन सि लानी हैं" मैंने मैनगेट सें बहारकदम रखतेहुए पूछा। "मे तुम्हे व्हाट्सप्प कर दूंगी" उसने मेरे पीछेगेट पर्र खड़ेहुए जवाब दिया।
"ओके, चलबाई साम कों मिलते हें, डिनर मे शाही पनीरबना लेना " मैनें मुस्कुराते हुएकहा। "अगर उपहार लिए बिनाआये तोँ करेला खानां पड़ेगा" उसने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "लेँ आऊंगा मेरी मां, ज़रूर लेँ आऊंगा, चल bye" वोँ ज़ोर सें हंसी औऱ उसने हँसते हुए मुझे bye बोलकर दरवाज़ा बंदकर लिया।
३ घंटेबस मे सफर करने केँ बाद मे होटलआया, यह होटलशहर सें बहार थां औऱ चारों तरफ हरयाली सें घिरा थां। वाणी मुझसे पहले हि वंहा पहुँच चुकी थि उसनेफोन कर केँ मुझेबता दिया थां।
जैसे हि मे रिसेप्शन पर्र पहुँचा वाणी एक् साइडलॉन मे बैठी बेसब्री सें मेरा इंतज़ार कररही थि, मुझे देखते हि वोँ उठकर मेरीतरफ आयी, पीले औऱ ऑरेंज कलर कि Silk साडी पहने वोँ एकदम कमाललग रही थि, make-up केँ नाम पर्र उसके माथे पऱ एक् बिंदी औऱ होठों पऱ लाल लिपिस्टिक थि। कानो मे छोटे सोने केँ झुमके औऱ हाथों मे पीलेरंग कि चूड़ियां उसकेरूप कों किसीनयी नवेली दुल्हन कि तरह निखार रही थि।
हमने जल्द सें अपनी डिटेल्स काउंटर पऱ दि औऱ रूम मे चेकइन किया। उसनेइस होटल कों सावधानी सें चुना थां, ये एक् ऐसी स्थान थि जहां हम् पहचाने जाने केँ डर केँ बिना एक् संगकुछ लम्हा गुज़ार सकते थें। वाणी कों देखते हि मेरे अतीत कां सारा तनावदूर हौ गय़ा।
वाणी बहोत जल्दबाज़ी मे थि उसने कमरे मे दाखिल होते हि दरवाज़ा अंदर सें लॉक किया औऱ मेरे सीने सें लिपट गयीँ,। हमारे होंठ एक् दूसरे केँ होंठों कां रसपान करनेलगे, वोँ किसी भूखी बिल्ली कि तरह मेरे होंठों कों चबा जानां चाहती थि, मैनें अपनाबैग साइड मे फेंका औऱ उसकी गांड कों अपने हाथों मे भरकरज़ोर सें भींचने लगा, हमारे होंठ एक् दूसरे केँ मुंह कि लार सें सनेहुए थें औऱ हमारी जीभ एक् दूसरे केँ मुंह कों टटोलरही थीं।
तभी वोँ अचानक सें मुझे धक्का देतेहुए पीछेहटी औऱ उलटे पाऊँ चलतेहुए Bed केँ पास पहुँच गई,, उसकी आँखों मे एक् नशा थां औऱ होंठों पर्र एक् कातिलाना मुस्कान। उसने मेरी आँखों मे देखते हुए एक् एक् कर केँ अपने अपने सारे कपडे उतार फेंके, उसके सुडोल जिस्म पऱ बस एक् लालरंग कि ब्रा औऱ लालरंग कि पैंटी हि शेषबचे थें। कमरे मे पर्दों केँ बीच सें आती रौशनी मे उसकेबदन कि सुडौलता कों मे एकटक देखता रह गय़ा।
वो बहोत सुन्दर औऱ सेक्सी लगरही थि, उसकी आँखें वासना सें चमकरही थीं, औऱ उसनेवही पैंटी पहनी हुईँ थीं जिसका ज़िक्र उसने मुझे मोबाइल पर्र चैट मे किया थां।
मैनें बिनाकुछ बोले उसकी आँखों मे झांकते हुए अपनेसब कपडेउतर फेंके मेरा लन्ड लोहे कि तरह सख्त होकरहवा मे झूलरहा थां, मैनें आगे बढ़करउसे अपनी बांहो मे कस लिया। हमारे होंठ एक् संगआपस मे जुड़गए औऱ मे उसके होठों कों बरीबरी सें चूसने लगा। मे उसकेदिल कि धड़कनो कों अपने सीने पऱ महसूस कर सकता थां, हमारी उत्तेजना कि महकहवा मे भर गई। मैनें उसके नंगे शरीर कि गर्मी कों महसूस करने केँ लिए उत्सुक होकर उसकी ब्रा केँ कप कों उसकी मोटी मांसल चूचियों केँ नीचे फंसा दिया। उसकी भारी चूचियां उसकी ब्रा सें आज़ाद होकरऊपर कों उठ गयीँ,, औऱ मैंने उसकी मम्मों केँ एक् निप्पल कों अपने मुँह मे लें लिया, औऱ उसपर अपनीजीभ गोलगोल घूमने लगा। उसकी दूसरी मम्मों कों अपनेहाथ मे पूरा भरकरज़ोर सें दबाने लगा। मैनें महसूस किया कि उसका निपल मेरीजीभ केँ नीचे सख्त होँ गय़ा हैं। वो हांफने लगी, मेरे निप्पल चूसने औऱ छेड़ने केँ कारण उसके नाखून मेरीपीठ मे गड़रहे थें, पैंटी मे कसी उसकीरान मेरे लन्ड सें टकरारही थीं।
वाणी नें मुझेखाट पर्र धकेल दिया, उसकी आँखें मेरी आँखों सें हट हि नहि रहीथीं। उसके चिकने औऱ कोमल हाथों नें मेरे लन्ड कों अपने सीधेहाथ कि मुट्ठी मे भींच लिया। उसकी नज़रे मेरे लन्ड कि लम्बाई औऱ मोटाई पर्र कुछसमय केँ लिएठहर सि गयीँ,।
उसने मेरे लन्ड कों मुट्ठी मे भींचे हुए लन्ड कि ऊपरीखाल कों नीचे सरकाया, मेरे लन्ड कां चिकना मोटा सूपड़ा कमरे कि धीमी रौशनी मे चमकने लगा, अत्यधिक उत्तेजना औऱ खुशी केँ कारण मेरे मुंह सें कराहफुट गई, "अहह!"।
उसने अपनेहाथ सें मेरे लन्ड कों कुछसमय केँ लिएऊपर नीचे कियाफिन मेरे लन्ड कों छोड़ते हुए बैठे बैठे हि उसने अपनी पैंटी एक् हि झटके मे निकल केँ साइड मे फेंक दि, जैसे वो इसेअब कभी पहनना हि नहि चाहती होँ।
फिन उसने अपनी ब्रा कि तनी कों अपने कंधो सें नीचे सरकाकर उन्हें अपने हाथों सें बहारकर दिया, उसने अपनी ब्रा कों पकड़ केँ घुमाया तोँ उसकेहुक उसकेपेट पर्र आँ गए, मेरीतरफ एक् धीमी मुस्कान सें देखते हुए अपनी ब्रा केँ हुक खोले औऱ ब्रा कों साइड मे Bed पर्र फेंक दिया।
वो मेरे लगभगआयी औऱ अपनी टाँगे खोलकर मेरे जांघो पऱ बैठ गई,, मुझे उसकी चिकनी बुर केँ दर्शन हुए जिनपर बालों कां कोई नामो निशान नहि थां, उसकी बुर कों देखने सें लगरहा थां जैसे इसके बालों कों आज हि साफ़ किया गय़ा होँ। उसकी नंगी बुर कि गर्माहट मुझे अपनी जांघो पऱ महसूस हौ रही थि। उसने अपनी उंगलियों कों मेरे लन्ड केँ चारों ओर लपेट दिया। वो मेरे लन्ड कों धीरे धीरेऊपर नीचे करनेलगी, उसकी आँखें मेरी आँखों सें नहि हटरही थीं, जैसे कि वो मेरे चेहरे पर्र खुशी केँ भावों कों पड़रही हौ। उसके हाथों केँ स्पर्श औऱ मेरे लन्ड पऱ उसकी कारीगिरी नें मेरी रीढ़ कि हड्डी मे सिहरन पैदाकर दि, औऱ मे अपने मुंह सें मजा कि हल्की सि कराह"अहह ! वाणी " निकलने सें स्वयं कों नहि रोकसका।
रूम हमारी चाहत कि खुशबू सें भर गय़ा थां, जिसमें उसके परफ्यूम कि हल्की खुशबू भि शामिल थि। उसकी साँसों कि आवाज़ मेरे लन्ड कों मुट्ठियाने केँ संगसंग भरी होती गई,। अचानक सें वो मेरे लन्ड कों ज़ोर सें ऊपर नीचे करनेलगी, उसकी३४" कि बड़ीबड़ी चूचियां हिलने लगी।
एक् झटके केँ संग उसने अपनी गांड मेरी जाँघों सें उठायी औऱ अपनी बुर कों मेरे लन्ड केँ ऊपर लें आयी, उसने अपनेहाथ सें मेरे लन्ड केँ सुपाड़े कों अपनी बुर केँ छेद पऱ सेट किया। फिन अपनी गांड सें दबाव डालती हुइ वो मेरे लन्ड पर्र बैठती चली गयीँ,, उसकी बुर केँ गीलेपन औऱ गर्माहट कों मैंने अपने लन्ड पर्र जब महसूस किया मुझे असीम खुशी केँ झोकों नें घेर लिया। मे तब तक धीमे धीमेमजा सें करहाता रहाजब तक उसने पूरा लन्ड अपनी बुर कि गहराई मे समेट नहि लिया। वो एक् ज़बरदस्त अनुभूति थि, उसकी बुर कि जकड़न नें मुझेऐसे जकड़ लिया थां जैसे मे उसकी गिरफ्त मे हूं।
एक् लय मे उसका जिस्म हिलने लगा, उसकी गीली बुर कि फांके मेरे अंडकोषों सें रगड़ खानेलगी। हमारे जिस्मो केँ एक् संग टकराने कि आवाज़ शांत कमरे मे गूँजरही थि।
"मुझे चोदो, रवि, " वो फुसफुसाई, उसकी आवाज़ मे जोश औऱ हताशा कां मिश्रण थां। "मुझे वैसे हि चोदो जैसे तुम् चाहते होँ। " उसने अपने दोनों हाथों सें अपनी चूचियों कों दबाते हुएकहा।
उसकी बातों नें मेरे अंदर एक् अलग हि उत्तेजना कां संचार किया, मे उसके नीचे लेटा अपने कूल्हे तेजी सें ऊपर नीचे करनेलगा, मेरा लन्ड जुनून कि हद तक तेजी सें उसके अंदर औऱ बाहर् फिसलरहा थां। उसकी बुर इतनी गीली थि, मेरे लन्ड केँ लिए इतनी सजधजकर थि, केँ मेरे बर्दाश्त केँ बाहर् थां। मेरेहाथ उसकी चौड़ी गांड पर्र चलेगए औऱ उसके मांसल कूल्हों कों दबाने लगे, हमारे शरीर पूरीतरह सें लयबद्ध होकर उछालरहे थें। मेरेऊपर नंगी बैठी वाणी केँ बदन कां दृश्य कुछऐसा थां केँ हर धक्के केँ संग उसकी मोटीभरी चूचियां उछलरही थि, जिन्हे संभालना करीब-करीब असंभव थां। मैंने महसूस किया कि मेरी कामोत्तेजना बढ़ती जारही हैं, मेरी रीढ़ कि हड्डी मे आनंदित करने वाली तरंगे तैररही थि।
मगरफिन उसनेकुछ ऐसाकहा जिससे मे रुक गय़ा। "तुम्हें पता हैं, रवि, " उसने हांफते हुएकहा, उसकी आवाज़ अतृप्त कामना सें भरी हुई थि, "तुम्हारे शहर मे एक् औऱ लड़की हैं जौ मुझसे भि ज़ादाहॉट औऱ सेक्सी हैं। " वो झुकी, उसकीगरम साँसें मेरेकान सें टकराईं। “उसकी बुर मारोगे?”
उसकीबात सुनकर मेरे लन्ड नें एक् झटका खाया औऱ मैंने अपनी आँखेखोल कर उसकीतरफ देखा “क्याँ कहरही हैं जान? तुझसे बढ़करभला ऐसाकौन हैं? ” मैंने उसकी बुर मे अपने कूल्हे उठाकर लन्ड कों अंदर पेलते हुए पूछा।
उसकी आँखें शरारत सें चमक उठीं। "ओह रवि! तुम् मेरेइस बदन केँ मालिक नं बनसके तोँ क्याँ हुआ, " उसने अपने नंगे कामुक शरीर कि ओर इशारा करतेहुए कहा, "तुम्हे इससे बेहतर कुछ मिलना चाहिए.। "
मेरादिल उसकीबात सुनकर उछलपड़ा "तुझसे बेहतर? सच मे?" मैंने अपनी आवाज़ मे उत्साह बनाए रखने कि कोशिश करतेहुए पूछा।
वाणी मेरेऊपर लेट गई, उसकी चूचियां मेरे सीने मे दब गई,। "हाँ मेरीजान, कोई हैं जोँ तुम्हें मुझसे भि ज़ादा ख़ुशीदे सकता हैं" वो मेरेकान मे फुसफुसाई, उसकी आँखें एक् मोहक मुस्कान केँ संगचमक रहीथीं। "कोई हैं जौ ठीक सें जानता हैं कि तुम्हारे जैसे मर्द कों केसेखुश रखना हैं। "
मेरा लन्ड अभि भि वाणी कि बुर केँ अंदर पूरा समाया हुआ थां औऱ वाणी धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनीकमर हिलाकर मुझेमज़े देरही थि। वाणी कि बातों सें मेरी उत्सुकता औऱ जिज्ञासा दोनों बढ़ गयीँ,।
मेरामन अजीब कल्पनाएं कररहा थां, उसकी बातों नें मेरे लन्ड कों औऱ भि ज्यादा सख्त होने पर्र मजबूर कर दिया। "ऐसा कौन हैं?" मे पूछने मे कामयाब रहा, मेरी आवाज़ थोड़ी सि काँपी।
वाणी कि मुस्कान बढ़ गई, उसकी आँखें उत्तेजना सें एक् समय केँ लिएबंद हैं गई,। "हैं कोई तुम्हारा बहोत ख़ास, " उसने चिढ़ाया, उसके कूल्हे अभि भि मेरे लन्ड केँ ऊपर नीचे हौ रहे थें। "कोईऐसा जिसे तुम् लंबे टाइम सें जानते हों। "
उसके पहेली नुमा जवाब नें मेरे दिमाग़ कि परते हिला दि थि। "पर्र कौन?" मैंने दोहराया, पूर्वानुमान नें मुझे चक्कर मे डाल दिया।
वाणीफिन मेरी गर्दन तक झुक गई, उसकी सांसें मेरे कानो पर्र गरम होँ गईं। "कोई हैं जौ तुम्हारी नाक केँ ठीक नीचे हैं, " वो फुसफुसाई, उसकी आँखें शरारत सें चमकरही थीं। "कोई हैं जौ मुझसे भि ज़ादा सुडौल औऱ हसीनमाल हैं। "
मेरा दिमाग़ संभावनाओं सें चकराने लगा, "अब उसकानाम भि बतादे?" आख़िरकार मैंने थोड़ा झुंझला कर पूछा।
पऱ वाणी किसीअलग हि दुनिया मे थि वो पीछेझुक गई, उसके होठों पऱ एक् जानी-पहचानी मुस्कान खेलरही थि। "कोई हैं जौ बचपन सें तुम्हारे संग हैं" उसनेकहा, फिन थोड़ा सां अपने पंजो पर्र ऊपरउठी मेरा लन्ड उसकी बुर सें बाहर् निकलने कों थां केँ वोँ फिन सें बैठ गयीँ, औऱ लन्ड फिन सें उसकी बुर कि गहराई मे खो गय़ा "अहह!रवि मेरीजान, वही जिसका औऱ तुम्हारा खून एक् हैं, " उसने खुशी औऱ उत्तेजना मे कराहते हुएकहा।
उसकी बातों कां अर्थ समझते हि मुझे एक् धक्का सां लगा औऱ मेरेमन नें झटका खाया। "रोमा?" मैंने पूछा, वो जोँ सुझाव देरही थि उस पर्र विश्वास नहि होँ रहा थां। "मेरी बेहन?"
वाणी कि मुस्कान चौड़ी हौ गई, उसकी आँखें उत्साह सें चमकने लगीं। "हाँ तुम्हारी सगी बेहन, " उसने पुष्टि कि, उसकी आवाज़ मे मोहक आकर्षण टपकरहा थां। "इसके बारे मे सोचो, रवि। तुम्हे हमेशा सें हि भरी भरकम सुडोल मांसल लड़कियां मनपसंद हें औऱ रोमाउन सबमे सें बेस्ट हैं, औऱ तुम्हारे लिए एकदम परफेक्ट" उसने अपनी गीली बुर कों मेरे लन्ड कि जड़ सें रगड़ते हुएकहा.
वाणी कां ये विचार मेरेमन मे बम फटने जैसा थां। मे जौ सुनरहा थां उस पऱ मुझे विश्वास नहि हौ रहा थां, मगर जितना ज्यादा मैंने इस पर्र विचार किया, ये विचार उतना हि ज़्यादा आकर्षक होता गय़ा। "मगर वो मेरी बेहन हैं, " मैंने कमजोर तरीके सें विरोध किया, फिर भी मेराबदन पहले सें हि मेरे दिमाग़ मे उमड़रही रोमा केँ शरीर औऱ उसकी ख़ूबसूरती कि झलक पऱ रोमांचित थां।
वाणी कि आँखों नें मेरी आँखों कों खोजा, उसकी आँखों मे एक् जानने वालीचमक थि। "तुम् मुझे सालों सें चोदरहे होँ, " उसने धीमी औऱ कामुक आवाज़ मे इशारा किया। "सगी बेहन औऱ मौसेरी बेहन कों चोदने मे ज़ादा अंतर नहि हैं, जान"
रूम गरम होँ गय़ा, हवा हमारी उत्तेजना कि महक सें घनी हौ गई। "दोनों मे बहोत अंतर हैं, " मैंने विरोध किया, जबकि रोमा केँ सुडौल बदन कि छवि मेरेमन मे भर गई थि। "हम् ऐसा नहि कर सकते."
वाणी नें मुझेचुप कराते हुए मेरे होठों पर्र उंगली रख दि। "अधिकमत सोचो, " वो फुसफुसाई, उसकी आँखें मेरी आँखों सें हट हि नहि रहीथीं। "मात्र महसूस करो। " औऱ उसने अपने कूल्हों कों मेरे लन्ड पर्र बिल्कुल नीचेकर दिया। मुझे अपनी रीढ़ मे उत्तेजना औऱ मजा कां झटका महसूस हुआ।
उसके शब्द एक् चमत्कार कि तरह थें, जोँ मेरे अंतिम प्रतिरोध कों भि तोड़रहे थें। मे उस गर्मी कों नजरअंदाज नहि करसका जोँ मेरीसगी बेहन केँ आकर्षक उभारों केँ बारे मे सोचकर मेरे जिस्म मे किसी करंट कि तरहफैल गई थि। ये विचार आकर्षक औऱ वर्जित दोनों थां, एक् ऐसी खतरनाक कॉकटेल जिसने मेरे लन्ड कों लोहे सें भि ज़्यादा सख्तकर दिया थां। इतनीअकड़, खुशी औऱ सख्ती मैंने शायद हि पहलेकभी महसूस कि थि। मैंने हामी मे सिर हिलाया, मेरा फैसला हौ गय़ा औऱ वाणी कि मुस्कान औऱ भि मोहक हौ गई।
"गुड, " वो मुझेफिन सें चूमने केँ लिए झुकते हुए बोलीं। उसके होंठ मखमल कि तरह थें, उसकीजीभ मेरीजीभ केँ संगनाच रही थि औऱ वो मेरेकान मे फुसफुसाई, "अब, मुझेऐसे चोदो जैसे तुम् उसेचोद रहे होँ। "
रोमा कि लजीज मख़मली बुर कों चोदने केँ ख्याल सें हि मेरी रीढ़ मे सिहरन दौड़ गई। मेरा लन्ड एक् नई उत्तेजना सें फूल गय़ा थां, औऱ मे अपनीइस वर्जित चाहत कों हर गुज़रते लम्हा केँ संग बढ़ताहुआ महसूस कररहा थां।
जैसे हि मैंने वाणी कि बुर पऱ एक् तेज़ धक्का मारा, उसकेकहे शब्द मेरे दिमाग़ मे किसीलूप मे घूमने लगे, रोमा कों चोदने कि कल्पना मेरे उत्साह कों बढ़ारही थि।
वाणी मुझमें बदलाव महसूस कररही थि, मेरे जिस्म मे उत्तेजना कां अचानक सें नया संचार सां हुआ थां। मेरेहर धक्के केँ संग उसकी कराहें तेज़ हौ गईं"अहह! हम्म, ओह!", वोँ भि अपनी गांड हिलाकर मेरा सहयोग कररही थि औऱ मुझेआगे बढ़ने केँ लिए उकसारही थि।
वो जानती थि कि उसने एक् बेहद नाज़ुक औऱ अत्यधिक कामुक नब्ज़ कों छेड़ दिया हैं, उसने एक् वर्जित कल्पना कां दरवाज़ा खोल दिया हैं जिसकी खोज करने कां मैंने कभी साहस नहि किया थां। सच तौ यह थां केँ वाणी नें वाकई मे रोमा कां नाम लेकर मेरा एक् नयी ऊर्जा औऱ अनुभूति सें परिचय कराया थां।
रोमा केँ बारे मे सोचकर मेरा लन्ड औऱ भि फूल गय़ा, उसका सुडौल बदन औऱ मासूम आँखें मेरे दिमाग़ मे घूमरही थीं। मैंने पहलेकभी उसेउस रोशनी मे नहि देखा थां, मगरअब, जब मे वाणी कि बुर कि गहराई अपने लन्ड सें नापरहा थां वासना औऱ उत्तेजना मे दोनों महिलाओं केँ बीच कि रेखाएँ धुंधली होनेलगी थीं। मैंने वाणी कों पीछे धकेला वोँ पीठ केँ बल पलंग पर्र लुढ़क गयीँ,, मे बिना देरी किये उसकेऊपर आया औऱ अपना अकड़ाहुआ सख्त लन्ड वाणी कि बुर मे एक् हि बार मे पूरा अंदर तक ठेल दिया। वाणी नें अपनी टांगें फैलाकर मुझे पूरा अपने अंदर समेट लिया, वाणी मेरे अंदरजगी इसनयी ऊर्जा पऱ हतप्रभ थि। मेरा लन्ड वाणी कि बुर पर्र ठोकरें माररहा थां औऱ मेरे दिमाग़ मे मौसेरी बेहन केँ बादसगी बेहन कों चोदने कि इच्छाएं जन्म लेँ चुकी थि।
वाणी नें मेरीपीठ पऱ अपनी पकड़ मजबूत करली, जैसे हि उसने मुझमें बदलाव महसूस किया, उसके नाखून मेरीपीठ मे गड़रहे थें। उसकी आँखों मे एक् जंगलीपन थां, उसका जिस्म मुझसे चिपका हुआ थां, उसकी चूचियां मेरे सीने सें दबीपीस रहीथीं, वो फुसफुसाई, "चोदो, रवि। सोचो मे वही हूं, तुम्हारी लाडली बेहन रोमा। "
कमरे मे संवेदनाओं कां बवंडर सां उमड़पड़ा थां, मेराबदन हर धक्के सें उसके शब्दों केँ वर्जित रोमांच कां जवाबदे रहा थां। मेरा लन्ड एक् नई तीव्रता केँ संग फड़कने लगा औऱ मैंने स्वयं कों उसके द्वारा प्रकट कि गई काली कल्पना केँ आगे झुकते हुए पाया। मे करीब-करीब अपने नीचे रोमा केँ कोमल कमसिन उभारों कों महसूस कररहा थां, जैसे हि मैंने अपने धक्कों कि गति बड़ाई कमरे मे "थपथप" कि आवाज़ें गूंजने लगी, वाणी कि आँखें मेरे झटकों सें मिलरहे मज़े सें चौड़ी होँ गईं।
जैसे हि मुझे अपने अंदर सें कुछ फूटने कां एहसास हुआ मेरी आँखें उत्तेजना औऱ खुशी केँ उस लम्हा मे बंद हौ गयीँ, औऱ वाणी कि बुर पर्र कुछतेज़ धक्के मारते हुए मे धीमे सें गुर्राया "ओह, रोमा!" मेरे लन्ड सें निकली वीर्य कि बौछार नें वाणी कि बुर कि गहराईयों कों भर दिया,, अत्यधिक कामोत्तेजना केँ बल नें मुझे कांपने पर्र मजबूर कर दिया। वाणी केँ नाखून मेरीपीठ मे गहराई तक गड़गए, उसका जिस्म खाट सें ऊपर किसी कमान कि तरहउठ गय़ा औऱ उसकी टांगें मेरीकमर केँ इर्द गिर्द ज़ोर सें लिपट गयीँ,।
कुछसमय केँ लिए, हम् एक् दूसरे कों बाँहों मे कसे लेटेरहे, हमारी तेज़ साँसें कमरे कि भारी खामोशी मे घुलमिल गईं। फिन, कुछदेर बाद मे उसकेऊपर सें उठकर उसकीबगल मे लेट गय़ा, उसने गर्दन घुमाकर मेरीतरफ देखा "कैसालगा?" उसने पूछा, उसकी आँखों मे उत्सुकता थि।
"बहोत हि अद्भुत औऱ मज़ेदार, " मैंने अपनी साँसों कों नियंत्रित करतेहुए जवाब दिया। " इससे ज़ादामज़ा पहलेकभी नहि आया, " मैंने इतनी ईमानदारी सें कहा कि मुझे भि आश्चर्य हुआ।
वाणी नें एक् समय केँ लिए मेरा अध्ययन किया, उसके चेहरे पऱ एक् हलकी मुस्कान थि। "विश्वास करो, " उसने धीरे-धीरे सें कहा, उसकी आँखें शरारत सें चमकरही थीं, "रोमा केँ संगइस सें भि मज़ेदार हौ सकता हैं। "
उसकीबात सुनकर मेराफिन सें मन चकरा गय़ा। " ये संभव नहि?" मैंने विरोध किया, जबकि मेरी बेहन केँ कामुक जिस्म कि छवि मेरेमन मे घूमरही थि। "ये तोँ.गलत हैं। "
वाणी सिरहाने कि ओरपीठ करकेझुक गई, उसके होठों पर्र एक् जानी-पहचानी मुस्कान खेलरही थि। "सच मे?" उसने मुझे चुनौती दि, उसकाहाथ अभि भि मेरे लन्ड कों सहलारहा थां, जोँ अबआधा ढीलापड़ चूका थां मगर अभि भि बची हुइ ख़्वाहिश सें हिलरहा थां। "अच्छा यह बताओ, रवि, जब तुम् परफेक्ट बॉडी, परफेक्ट फिगर औऱ ख़ूबसूरत चेहरे केँ बारे मे सोचते हौ, तौ क्याँ तुमने उसके जैसी किसी कि कल्पना नहि कि?"
मे उसके शब्दों कि सच्चाई कों नकारने मे असमर्थ थां, वाणी बिलकुल सहीकह रही थि। रोमा पहले वैसी नहि थि पर्र पिछले कुछ सालों सें उसमेगज़ब कां निखार आया थां औऱ उसकेअंग अभूतपूर्व ढंग सें विकसित हुए थें। रोमा मेरे जिंदगी कां एक् ऐसा हिस्सा थि जिसे मैंने कभीहवस कि नज़र सें नहि देखा थां। मगरअब, उसे पाने कां विचार, उसकी वाणी सें भि बड़ी चूचियों केँ उभारों कों अपने हाथों केँ नीचे महसूस करने कां विचार, एक् ऐसी ख़्वाहिश कि तरह थां जिसे मे नजरअंदाज नहि कर सकता थां। "मुझे नहि पता, " मैंने वाणी कों टालने केँ लिएकहा।
वाणी कि मुस्कान बढ़ गई, उसकी आँखें जीत सें चमक उठीं। "बस मुझेयह बताओ कि क्याँ तुम् उसे चोदने कों सजधजकर हौ याँ नहि? बाकीसभी छोड़ो, " उसनेकहा, औऱ खाट केँ किनारे पऱ अपने पैरों कों लटकाकर बैठ गई।
मैंने उसे घूरकर देखा, मेरामन तेजी सें दौड़रहा थां। "मगर केसे? औऱ अगर किसी कों पताचल गय़ा तोँ क्याँ होगा?"
वाणी धीरे-धीरे सें मुस्कुराई, जिसकी आवाज़ सें मुझमें रोमांच पैदा होँ गय़ा। "पकड़ेगा कौन?" उसने पूछा, उसकी आवाज़ धीमी औऱ सुखदायक थि। "तुम्हारी मां दफ़्तर मे अपनेकाम मे व्यस्त रहती हैं, तुम् दोनों केँ अलावा घऱ मे हैं हि कौन ?"
उसके शब्द मेरेमन मे उठरही बेचैनी औऱ डर पर्र मरहम कां कामकर रहे थें। उसका सुझाव अपने हि घऱ कि चार दीवारी मे अपनीकाम वासनाओ कि तृप्ति कां थां, जंहा किसी प्रकार कां कोईडर नं होँ।
“मे केवलये जानना चाहती हूं कि तुम् सजधजकर हौ याँ नहि?” उसनेफिन सें मेरे लन्ड कों अपनी मुट्ठी मे भींचा औऱ उसकी चमड़ी कों नीचे सरका केँ सुपाड़े कों आज़ादकर दिया।
"रेडी किसलिए?" मैंने अनजान बनतेहुए पूछा, अपनी आवाज़ मे उमड़े कंपन कों दूर रखने कि कोशिश करतेहुए क्योंकि उसने मेरे लन्ड केँ संग जौ हरकत कि थि उससे मुझेअलग हि मजा मिला थां जिससे मेरे जिस्म मे उत्तेजना कां संचार फिन सें होनेलगा थां।
वाणी कि मुस्कान चौड़ी हौ गई, उसकी आँखों मे एक् गहरीचमक आँ गई। "अरे भइया, रोमा कों चोदने केँ लिए औऱ उसे अपनी रातों कि रानी बनाने केँ लिए, " उसने शरारती जवाब दिया, उसकी आवाज़ मे एक् मादकता थि जिसने मेरी रीढ़ मे सिहरन पैदाकर दि।
मे अभि भि उलझन मे थां, मेरा दिमाग़ उसकी बातों सें भटकरहा थां। रोमा कों एक् प्रेमिका कि तरह पाने केँ विचार सें मेरे लन्ड मे फिन सें अकड़ आँ गयीँ, औऱ वोँ पूरी सख्ती केँ संगखड़ा हौ गय़ा, रोमा कों इसरूप मे भोगना बहोत हि आकर्षक औऱ वर्जित थां। मे जानता थां कि येगलत हैं, इससे हमारे पारिवारिक रिश्ते ख़त्म हौ जायेंगे। मगर रोमा कों पाने कि ख़्वाहिश भि उतनी हि प्रबल होनेलगी थि, सिर्फ कल्पना मे हि इतना आकर्षण थां तोँ वास्तविकता मे कैसाहाल होगा मेरीसोच सें परे थां।
वाणी नें मेरी आंखों मे संघर्ष देखा, वो मेरे नंगे सीने पर्र झुक गई,, उसकाहाथ अभि भि मेरे लन्ड कों सहलारहा थां, उसकीगरम सांसें मेरेकान कों गुदगुदी कररही थीं औऱ वो फुसफुसाई, "मेरा विश्वास करो, जान, अपनीसगी बेहन कों चोदना तुम्हारे लिएअब तक कां सबसे मज़ेदार अनुभव होगा। " उसने मेरे निपल कों धीरे-धीरे सें काटा, जिससे मेरे जिस्म मे मस्ती कि लहरदौड़ गई,। "तुम् मुझेबाद मे थैंक्स कहोगे, " वो बुदबुदायी, उसकी आवाज़ बहोत मोहक थि जौ मेरी आत्मा मे गूंजती हुइ प्रतीत होँ रही थि.
रोमा कों चोदने कां विचार एक् ऐसी शराब कि तरह थां जिसे पीने कि मेरी लालसा तौ थि पऱ उसके दुष्प्रभाव औऱ नशे सें मे अनिभिज्ञ थां। हकीकत तोँ ये थि कि मुझे नहि पता थां कि मे अपने रिश्ते कि उस रेखा कों पारकर पाऊंगा याँ नहि। "मुझे नहि पता वाणी, मे अगर चाहूँ भि तोँ यह पॉसिबल नहि" मैंने अपने जज़्बातों पर्र काबू रखतेहुए कहा.
वाणीउठी, औऱ मेरेऊपर झुक गई, मेरेऊपर झुकते हि उसकीबड़ी सि चूचियां हिलने लगी। "वोँ तुम् मुझ पऱ छोड़दो, " उसनेकहा, उसकी आवाज़ मे एक् मोहक वादा थां। "इसमें मे तुम्हारी थोड़ी सहायता करुँगी। "
स्वयं केँ ऊपर उसके आत्मविश्वास कों देखकर नं चाहते हुए भि मैंने अपनी गार्डन सहमति मे हिला दि। "ठीक हैं, " मैंने कहा, मेरे निर्णय कां भार मेरे कंधों पऱ बहोत ज़्यादा थां। "पर्र यहसभी होगा केसे?"
वाणी नें मेरे सख्त हौ चुके लन्ड कों तेज़ी अपनी मुट्ठी मे भींचते हुएऊपर नीचे कियाफिन अपने घुटनो औऱ कोहनी केँ सहारे Bed पऱ Doggy पोजीशन मे आतेहुए बोलीं, "वो मुझ पर्र छोड़दो, " उसकी आँखें उत्साह सें चमकरही थीं। उसने दोहराया, उसके होठों पऱ एक् दुष्ट मुस्कान तैररही थि। "मेरेपास प्लान हैं। "
उसने मेरे लन्ड कों पकड़ केँ खींचा "एक् बार औऱ रोमा कों चोदने कां मज़ा लोगे?"। उसकी मंशा समझते हि हैं मे Bed सें उठकर फर्श पर्र खड़ा हौ गय़ा औऱ स्वयं कों उसकी गांड केँ पीछेसेट कर लिया, फिन अपने सख्त फनफनाते हुए लन्ड कों पीछे सें उसकी बुर केँ छेद पऱ सेट करतेहुए बोला "क्यूं नहि ? मेरी प्यारी बेहन" औऱ अगलेसमय एक् हि झटके मे पूरा लन्ड उसकी बुर केँ अंदरपेल दिया। वाणी नें एक् गहरी सिसकी ली"अहह! जानमज़ा आँ गय़ा", वाणी केँ कामुक शब्दों नें मेरेऊपर गहराअसर किया औऱ मे उसकी मोटी गांड पऱ तेज़तेज़ धक्के मारते हुए उसकी बुर मारने लगा।
आवेश औऱ उत्तेजना केँ कारण मेरी आँखें बंद हौ चली थि, मेरेजहन मे बस रोमा कि हि सूरत औऱ उसका गदराया शरीर समाया हुआ थां औऱ उसपरआग मे घी डालने कां काम वाणी नें किया"अहह! भैया ज़ोर सें चोदो अपनी रोमा कों, अहह!" उसने कराहते हुएकहा।
मैंने असीममजा केँ सागर मे गोते लगतेहुए उसकी बातों कां जवाब दिया"ओह रोमा!, तेरी बुर कितनी प्यारी हैं", वाणी नें मेराफिन सें प्रोत्साहन किया"अहह! भैया तुम्हारा लन्ड बहोत गरम औऱ सख्त हैं, ज़ोर सें चोदो भईया", मे भि अबउसी रौ मे बहरहा थां "ओह मेरी बेहन, मेरी रंडी हैं तुँ, अहह!अब सें तुम्हें तेरा भइयारोज़ चोदेगा", वाणी कि सांसें औऱ सिसकारियां कमरे मे तेज़ी सें गूंजने लगी"अहह! हाँ बहनचोद रोज़ चोदना" मैंने अपने दोनों हाथों मे वाणी कि चूचियां पकड़ली उसकाधड़ आगे सें उठ गय़ा औऱ उसकावजन अब मेरे हाथों मे थां, मेरेतेज़ धक्के उसके मोटे चूतड़ों पर्र ऐसीथाप देरहे थें जैसेकोई संगीतकार तबलाबजा रहा हौ, मे उसकीबड़ी सि चूचियों कों अपने पंजो सें मसलते हुएज़ोर सें अपने लन्ड कों उसकी बुर मे पेलने लगा"अहह! रोमा मेरी बेहन क्याँ मस्त चूचियां औऱ गांड हैं तेरी" मैंने अपनी स्पीड बढ़ाते हुए औऱ उसकी चूचियों कां मर्दन करतेहुए कहा,
वाणी कां जिस्म कांपने लगा, उसने मेरे हाथों पऱ अपनेहाथ रखदिए औऱ वोँ फंसफंस केँ सांसें लेनेलगी उसके कूल्हों मे मुझे एक् कम्पन सां महसूस हुआ, वोँ झड़ चुकी थि पऱ मैंने अपने धक्के चालूरखे औऱ कुछदेर बाद हि मेरे जिस्म मे एक् खींचाव सां महसूस हुआ औऱ मैंने वाणी कि बुर कों अपने गाड़े सफ़ेद पानी सें भर दिया"ओह! अहह!" मेरे लन्ड कि पिचकारियां वाणी कि बुर मे गहराई तक उतर गयीँ,।
Welcome back bhay. randeep apni pichli story k prakaar hi iski bi bhut dhamakedar shuruwat le h Just loved it. Vani jaisi behna sab ko milini chaiye
सीड्स ऑफ़ लस्ट (Seeds Of Lust) – New Episode
UPDATE 5:
थोड़ीदेर बाद हमने अपने कपडे पहने, वाणी आईने मे अपना मेक-उप करनेलगी मे Bed पर्र बैठा अपनीसोच मे गुम थां, वाणी नें आईने मे मुझे देखते हुए अपने होंठों पर्र लिपिस्टिक लगतेहुए पूछा "अभि भि उसी बारे मे सोचरहे होँ?" उसके प्रश्न सें मेरी तन्द्रा भंग हुई औऱ मैंने झुठलाते हुआ जवाब दिया "नहि नहि, ऐसीकोई बात नहि हैं।
वोँ अपनी साडी कां पल्लू सँभालते हुए मेरेपास आकेबैठ गई, औऱ मेरेहाथ कों अपनेहाथ मे लेतेहुए बोलीं "मे समझती हूं दोस्त, इतना आसान नहि हैं, पर्र तुम्हारे लिए इतना मुश्किल भि नहि हैं", मैंने असमंजस सें उसकीतरफ देखा "मतलब?" उसने दोहराया "देखो इसकीकई वजह हें, जितना लगभग सें रोमा कों मे जानती हूं उतना अभि तुम् नहि जानते"।
मे ध्यान सें उसकी बातों कों सुनने लगा, वोँ आगे बोलीं "पहलीबात, वोँ उम्र केँ जिस पड़ाव पर्र हैं उसे एक् मित्र कि सख्त ज़रूरत हैं, तुम्हे तोँ पता भि नहि केँ मैडम एक् साल तक किसी लड़के कों डेट करती रहीं औऱ जब मैडम नें अपनी विर्जिनिटी उस लड़के कों सौंपने कि सोची तौ वोँ लड़का उसके बूब्स कों दबाते हुए हि पैंट मे झड़ गय़ा"
मुझे वाणी कि बातों सें एक् झटका सां लगा औऱ मे सच मे उसकी बातों कों कबूल नहि कर पाया "क्याँ बकरही हैं दोस्त" मैंने झुंझलाते हुएकहा। "बक नहि रही हूं सचबता रही हूं, हम् आपस मे सभीकुछ शेयर करते हें" उसनेबड़े हि आत्मविश्वास केँ संगकहा। मुझे अपने कानो पर्र यकीन नहि हुआ, मे असमंजस सें उसकीतरफ देखने लगा। "अब आगे सुनो, वोँ तुम्हे बहोत लाइक करती हैं औऱ तुम्हारे जैसे लड़के कों हि पाना चाहती हैं" उसने अपनीबात जारी रखतेहुए कहा, मैंने गौर सें उसके चेहरे कि तरफ देखा उसकी बातों मे एक् सच्चाई सि प्रतीत हुईँ।
"यही नहि, वोँ तुम्हारे संग स्वयं कों बहोत सेफ औऱ सुरक्षित महसूस करती हैं, याद हैं नं तुमने विद्यालय सें लेकर कॉलेज तक कितने लड़कों कों उसकेलिए पीटा थां" उसने मेरीतरफ एक् मुस्कान केँ संग देखते हुए पूछा, "हम्म, याद हैं दोस्त पऱ वोँ सभी मैंने एक् भइया होने केँ नाते किया थां" मैंने उसकी बातों कां खंडन किया।
"बिलकुल तुमने किया होगा पर्र उसकीवजह सें तुम् उसकेदिल कि गहराई मे बसे होँ, उसके प्यारे भईया बनकरअब तुम् अगर थोड़ी हि हिम्मत औऱ कोशिश करो तौ तुम्हे भईया सें सैयां बनने मे ज़ादादेर नहि लगेगी" वाणी नें मेरेगाल खींचते हुए अपनीबात पूरी कि।
"यहसभी इतना आसान नहि हैं दोस्त?" मैंने अपनी शंका ज़ाहिर करतेहुए कहा, वाणी नें मेरे होंठों कों चूमा "मुझेपता हैं जान, यह सभी इतना आसान नहि हैं पर्र मे हूं नं आसान बनाने केँ लिए" उसनेफिन सें मेरे होंठों पर्र किश करतेहुए जवाब दिया।
थोड़ीदेर केँ लिए मे खामोश रहाफिन जैसे हि मुझेकुछ यादआया मैंने पूछा "एक् मिनट तूनेकहा थां केँ तुम् दोनों सभीकुछ शेयर करते हौ, इसका मतलबउसे हमारे बारे मे भि बतारखा हैं तुमने?", वाणी मुस्कुरायी "हम्म, उसे सभीपता हैं आखिर हम् बेस्ट फ्रेंड्स हें" उसने मेरेऊपर एक् औऱ बम सां फोड़ते हुए जवाब दिया।
मेरे ज़ेहनउस वक़्त अनेक प्रकार केँ विचार तेज़ी सें घूमने लगे औऱ मे अपनेमन कों काबू करने मे असमर्थ सां होँ गय़ा। वाणी नें मेरी स्थिति समझते हुए मेरेहाथ कों धीरे-धीरे सें दबाया "रिलैक्स दोस्त, इतनी टेंशन मतलो औऱ अपने टास्क पे फोकसकरो", "हम्म, देखता हूं दोस्त क्याँ होता हैं मुझसे" मैंने थोड़ा मायूसी सें जवाब दिया।
"तुम् बस उसकेसंग ज़ादा सें ज़ादा टाइम बिताने कि कोशिश करो, बाकी कां आगे सोचेंगे" उसने मुझे समझते हुएकहा "औऱ सुनो, उसकी चूचियां बहोत कठोर हें, मेरी सें भि कड़क" उसने मुझेआँख मारते हुएकहा।
उसकीबात सुनके मेरे होंठों पऱ एक् मुस्कान सि आयी औऱ मैंने उसे छेड़ते हुए पूछा "तुम्हारी तरफ केसेपता?", वाणी नें बड़ी हि मोहकअदा केँ संग जवाब दिया "मैंने चूसी हें"।
"क्याँ?" मैंने आश्चर्य सें चिल्लाते हुए पूछा, "हाँ दोस्त, हम् जब मिलते थें तोँ रात कों सोतेहुए यहीसभी करते थें, वोँ मेरी चूचियों केँ संग खेलती औऱ मे उसकी, बस साली अपनी बुर पर्र हाथ नहि लगाने देती थि" वाणी नें थोड़ा बेशर्मी सें एक् औऱ रहस्य सें पर्दा उठाया।
वाणी केँ रहस्योद्घाटन नें रोमा कि छवि मेरेमन मे बिलकुल उलट केँ रख दि थि, अब वोँ मुझे एक् बेहन सें ज़ादा प्यासी अतृप्त स्त्री केँ रूप मे नज़र आँ रही थि।
"क्याँ मज़ाककर रही हैं?" मैंने उसकी बातों कि पुष्टि केँ लिएफिन सें पूछा, "मज़ाक नहि मेरीजान, सभीसच हैं यकीन नं हौ तौ जाकेचेक कर लेना उसकी दायीं मम्मों केँ नीचे एक् कालातिल हैं" उसने हँसते हुए मुझे उकसाया।
मे थोड़ा शर्मिंदा सां हुआ, "एक् औऱ ख़ासबात बताऊँ ?" उसने मेरीतरफ देखते हुएकहा, मैंने सवालिया नज़रों सें उसे देखा "क्याँ?"।
"उसे लन्ड चूसना बहोत पसन्द हैं" उसने मेरेकान मे फुसफुसा केँ बड़ी हि मादक आवाज़ मे मुझे बताया
"सच मे?" मैंने आश्चर्य सें पूछा "तुम्हारी तरफ केसेपता?"
"अरे मैंने बताया तौ थां केँ हमारे बीचकुछ भि छुपा नहि हैं, वोँ जौ लड़का उसके बूब्स दबाते हुएझड़ गय़ा थां, बेचारी नें बहोत देर तक उसका लन्ड चूसा थां पर्र साले कां दोबारा खड़ा हि नहि हुआ हि हि हि " उसने हँसते हुएकहा
इतने सालों केँ मेरे औऱ वाणी केँ संबंधों मे वाणी नें कभी भि मेरा लन्ड नहि चूसा थां, मेरा बहोत आग्रह करने पऱ उसने एक् दोबार कोशिश कि थि पर्र उसे अच्छा नहि लगा। रोमा कों लन्ड चूसना पसन्द होने कि बात नें मेरे पुरेबदन मे एक् सिरहन सि पैदाकर दि थि।
वाणी कि बातों सें यहतय हौ गय़ा थां केँ रोमा केँ अंदर कि औरत अपनी कामनाओं पऱ नियंत्रण रखने कि भरपूर कोशिश मे थि बस उन्हें भड़काने केँ लिए एक् चिंगारी कि ज़रूरत थि।
औऱ वो चिंगारी वाणी मुझसे लगवाना चाहरही थि जिसके लिए मे भि कंही न् कंही रेडी सां होँ चला थां।
मुझे उसकी बातों पऱ यकीन हौ चला थां, मे दूसरी तरफ देखने लगा, दिमाग़ मे हज़ारों विचार एक् संग कोंधरहे थें। "अरे दोस्त इसीलिए तोँ कहरही हूं केँ तुम्हे ज़ादा मुश्किल नहि होगी औऱ फिन मे तौ हूं नं, ऐसासमझ लो कि मेरीतरफ सें तुम्हे यह उपहार रहा" उसने मुझे परेशां होतेहुए देख केँ थोड़ा रिलैक्स करने कों कहा।
कुछ देर औऱ होटल मे वाणी केँ संग बिताने केँ बाद मे वापस अपनेघऱ केँ लिए निकलपड़ा, वाणी सें मैंने उसके प्लान केँ बारे मे पूछा थां पर्र उसनेकहा केँ अभि तुम् कुछ टाइम उसकेसंग अकेले मे बिताओ फिनआगे कां कुछ सोचते हें वोँ रोमा कों पटाने मे मेरीहर तरह सें सहायता करेगी।
.Continued।
सीड्स ऑफ़ लस्ट (Seeds Of Lust) – New Episode
UPDATE 6:
वाणी सें मिलकर वापसी मे मैंने रोमा द्वारा फरमाइश कि गयीँ, स्मार्ट वाच खरीदली थि। जोँ बीज वाणी नें मेरेज़हन मे बोया थां उसे देखते हुएअब मे रोमा कों किसी भि तरीके सें नाराज़ नहि कर सकता थां। रोमा कों पटाना औऱ उसे अपनी प्रेमिका बनाना एक् असंभव सां कार्य थां जिसके बारे मे पुरेसफर सोचता हुआआया थां। रोमा कों देखने कां मेरा नजरिया अब पूरीतरह सें बदल चूका थां अब मुझे वोँ बेहन सें ज़ादा एक् कामुक प्रेयसी नज़रआने लगी थि।
मेरी छुट्टी केँ कुछ हि दिन औऱ शेषबचे थें औऱ मुझे रोमा केँ संगकुछ समय तौ ऐसे गुज़ारने थें जिसमे केवल वोँ औऱ मे हूं औऱ हमारी बातें हौ।
मैंने जबरात कों 8 बजेघऱ कि bell बजायी तोँ थोड़ीदेर बाद रोमा नें दरवाज़ा खोला, वोँ पीलेरंग कां सलवार कुरता पहनेगज़ब कि सुन्दर औऱ कामुक प्रतीत होँ रही थि, मेरीनज़र उसके सुन्दर चेहरे सें होती हुई उसकीबड़ी बड़ी टाइट चूचियों पऱ टिक गई, जोँ उसके कुर्ते कों फाड़ केँ बहार आनांचाह रही थि।
मैंने पहलेकभी भि उसेइस नज़र सें नहि देखा थां, रोमा केँ शब्दों नें मेरीभाव भंगिमा कों तोड़ा"ओ, हेलो!अब बहार हि खड़े रहोगे?" मैंने सकपकाते हुए स्वयं केँ जज़्बातों पऱ काबू पाया"अरे सामने सें तोँ हट", मेरीबात सुनकर वोँ थोड़ा मुस्कुराई औऱ एक् साइड होँ गई,, मे घऱ केँ अंदर दाखिल हौ गय़ा। "ऐसे क्याँ देखरहे थें ? सभीठीक तोँ हैं?" उसने मेरे पीछेआते हुए प्रश्न किया। "देख रहा थां तुँ कितनी सुन्दर होँ गई, हैं पहले कितनी कल्लो थि" मैंने उसे चिढ़ाते हुए अपनाबैग टेबल पऱ रखतेहुए कहा, "जी नहि, मे पहले सि हि सुन्दर थि" उसने तपाक सें जवाब दिया। "मेरा तोहफा लाये हौ?" उसनेखुश होतेहुए पूछा। "हाँ लाया हूं, पहलेयह बता मां कों दवाई दि ?" मैंने उसके चेहरे कों निहारते हुएकहा।
"अभि नहि दि, अभि खानां खा केँ लेटी हें" उसने मेरे प्रश्न कां जवाब दिया, उसकी आँखों मे एक् ख़ुशी कि चमक थि "मेरा उपहार निकालो?" उसनेहाथ आगेबड़ा केँ पूछा। "पहले शाही पनीर ?" मैंने उसे छेड़ा।
"अरे दोस्त बनाया हैं, तुम् उपहार नहि भि लातेतब भि बनाती" उसनेबड़ी मासूमियत सें जवाब दिया, मैंने एक् मुस्कान केँ संग अपनेबैग कि ज़िपखोल कर एक् डब्बी निकाली औऱ उसकेहाथ पऱ रख दि "लेँ अपना तोहफा", रोमा ख़ुशी केँ मारे उछालपड़ी "ओह! भईया, थैंक्यू, थैंक्यू" अपने एक् हाथ मे डब्बी पकडे वोँ इतनेज़ोर सें मेरेगले लगी केँ उसकी 36 inch कि चूचियाँ मेरे सीने मे दबकरपीस गई,, उसकी चूचियों कि मांसलता औऱ कठोरता केँ एहसास सें हि मेरा लन्ड पैंट मे तम्बू बनाने लगा। बस कुछ लम्हा कों हि वोँ मेरेगले लगी औऱ उन पलों मे हि मुझे उसकी जवानी औऱ बदन कि सुडौलता कां एहसास हौ गय़ा।
सफर औऱ वाणी कि दोबार चुदाई सें मे थकाहुआ तौ थां हि ऊपर सें रोमा केँ खूबसूरती नें मेरी सोचने समझने कि शक्ति क्षीण कर दि, मैंने खानां खाया औऱ मां कों दवाई देने केँ बाद अपने कमरे मे आकरसो गय़ा।
अगलादिन मेरेलिए सामान्य दिनों जैसा नहि थां जब भि मेरीनज़र रोमा पऱ पड़ती मे उसके खूबसूरती औऱ गदरायी जवानी मे खो सां जाता औऱ उसे टकटकी बाँध केँ निहारता रहताकई बार तोँ रोमा नें मुझे स्वयं कों ताड़ते हुएपकड़ भि लिया पर्र हरबार मे उससे अपनी नज़रें चुरा जाता। साम केँ टाइम मे घऱ कि छत्त पऱ खड़ा रोमा केँ हि विचारों मे व्यस्त थां जोँ मुझे उत्साहित भि कररहे थें औऱ परेशान भि। मैंने अपनी घड़ी कि ओर देखा, ७ बजने कों थें औऱ इस टाइम हम् दोनों भइया बेहनघऱ केँ पास एक् पार्क मे टहलने जाते थें, यह हमारा रोज़ कि दिनचर्या कां हिस्सा थां। पर्र आजबात कुछ औऱ थि मेरे भीतर एक् अजीब सि ख्वाहिश पैदा होनेलगी, एक् ऐसी भावना जौ पूरीतरह सें नई थि औऱ फिन भि बेहद जानी पहचानी प्रतीत होती थि।
जैसे हि मे लिविंग रूम मे गय़ा, मैंने पाया कि रोमा पहले सें हि इंतजार कररही थि, उसकी आँखें टेलीविज़न पऱ टिकी हुइ थीं, उसे मेरेआने कां पता नहि चला। लैम्पलाइट कि धीमी रोशनी उसके सुन्दर चेहरे पऱ एक् छठा सि बिखेर रही थि, उसके लंबे, कालेबाल उसकीपीठ पऱ लटकरहे थें, जिससे उसका चेहरा किसी गढ़ी हुई मोहक मूर्ति कि तरहलग रहा थां। उसकेबदन कां आकार उसकी टाइट-फिटिंग कुर्ते सें उजागर होँ रहा थां, जौ उससेइस तरह चिपकी हुई थि जैसे कैसी भि समय उसकी चूचियाँ उसके कुर्ते केँ कपडे कों फाड़ केँ बहारझलक पड़ेंगी। मेरी सांसें मेरेगले मे फंसगईं। एक् समय केँ लिए, मे एक् भइया केँ प्रेम औऱ एक् व्यक्ति कि इच्छाओं केँ बीचफंस गय़ा थां।
उसने मेरीआहट पर्र पलट केँ मेरीतरफ देखा, उसकी आँखें मेरीओर चमक उठीं, उसकी निगाहों मे जिज्ञासा कि झलकझलक रही थि। "चलें?" उसने पूछा, उसकी आवाज़ मे उत्साह कां संकेत थां। मैंने स्वयं कों संभालने कि कोशिश करतेहुए सिर हिलाया औऱ उसके पीछेसाम कि ठंडीहवा मे चला गय़ा। पड़ोस शांत थां, मात्र दूर तक यातायात कि गड़गड़ाहट औऱ कुछ लोगों कां उसी रास्ते सें आनां जानां लगा थां।
हम् परिचित सड़कों पऱ टहलरहे थें, हमारी बातचीत मे छोटी-मोटी बातें औऱ साझा यादें शामिल थीं। फिन भि, हमारे हरकदम केँ संग, वाणी केँ शब्द मेरे दिमाग़ मे गूंजते रहे, जौ मुझे बहकारहे थें। मैंने चोरी सें रोमा केँ हिलते हुए कूल्हों पऱ नज़रें दौड़ाई, उसकेहर कदम केँ संग उसकी गांड थोड़ी-थोड़ी हिलरही थि। उसके कुर्ते कां सूती कपड़ा उसके चूतड़ों पऱ कसकर फैलाहुआ थां, जिससे उसकी पैंटी कि रूपरेखा कां पताचल रहा थां। मे अपनी पैंट मे अपने लन्ड कों हिलते हुए महसूस कर सकता थां, औऱ मुझे आश्चर्य होँ रहा थां कि क्याँ उसेइस बात कां अंदाज़ा थां कि मेरेमन मे क्याँ चलरहा हैं।
जैसे हि हम् पार्क केँ पास पहुँचे, बच्चों केँ खेलने कां मैदान सुनसान थां, खली झूलेहवा मे आहिस्ता झूलरहे थें। आकाश मे चंद्रमा खाली बेंचों औऱ छायादार रास्तों पऱ चांदी कि चमक बिखेर रहा थां। रोमा कों छूने, अपनी उंगलियों केँ नीचे उसके शरीर कि गर्माहट महसूस करने कि ख़्वाहिश अचानक मुझ पर्र हावी होँ गई। मे आगे बढ़ा औऱ उसकेहाथ कों कोहनी केँ पास सें पकड़ लिया। उसने प्रश्न करतेहुए ऊपर मेरीतरफ देखा औऱ एक् समय केँ लिए मुझेलगा कि वो दूरचली जाएगी। मगर उसनेऐसा नहि किया। इसके बजाय, उसने मुझे एक् हल्की सि मुस्कान दि औऱ मेरे स्पर्श कों सहजता सें स्वीकार कर लिया।
हम् एक् बेंच पऱ बैठगए, बेंच कां ठंडा लोहा मेरे भीतरजल रही गर्मी सें बिल्कुल विपरीत थां। हमारे बीच थोड़ीदेर ख़ामोशी छायीरही फिन रोमा मेरे लगभगझुक गई, उसकी सांसें मेरेगाल पर्र हल्की सि फुसफुसाहट केँ संग गूंजीं। "कब तक रुकोगे भईया?" उसने पूछा, उसकी आवाज़ धीमी औऱ अंतरंग थि।
मैंने अपनासर उसकेसर कि तरफ झुकाया, उसकेबदन सें आँ रही musk perfume कि धीमी खुशबु मादक थि, जौ मुझे औऱ ज़्यादा मदहोश कररही थि। "जब तक मम्मी ठीक नहि हौ जाती औऱ दफ़्तर नहि जाने लगती, पता नहि दोस्त…कुछ समझ नहि आँ रहा। "
रोमा नें अहहभरी औऱ दूसरी ओर देखा, उसकी आँखों मे हमारी मां कि हालत पऱ दुखझलक रहा थां। उसकाहाथ अभि भि मेरेहाथ मे थां, औऱ मुझेउसे अपने लगभग खींचने, उसे चूमने, उस पर्र अपनादवा ठोकने कि ख़्वाहिश महसूस हुई। मैंने अपने जज़्बातों पऱ काबू पाया, मुझेकोई भि ऐसी हरकत नहि करनी थि जिससे वोँ नाराज़ होँ जाये औऱ मुझे सर्मसार होनापड़े।
"मुझे तुम्हारी याद आएगी, " उसनेकहा, उसकी आवाज़ फुसफुसाहट सें थोड़ी हि ऊपर थि। "मगर मुझे ख़ुशी हैं कि तुम् मां कि खबर सुनते हि भागेचले आये। "
उसके शब्दों नें मुझे झकझोर कररख दिया औऱ मुझे अपने अंदर अचानक सें साहस कां संचार महसूस हुआ। मैंने उसकेहाथ कों धीरे-धीरे सें दबाया, उसकीहाथ कि कोमल त्वचा केँ नीचे उसकेखून कि धड़कन कों महसूस किया। "तुम्हारे अलावा मेरा हैं हि कौन?, " मैंने उसके लगभग झुकते हुएकहा।
उसने मेरीओर देखा, उसकी आँखें मेरी आँखों मे देखरही थीं, उसके होठों पर्र एक् प्रश्न घूमरहा थां। "तुम् Delhi मे अपनी Job कों मिसकर रहे होँ, " उसने बातचीत कों हल्का रखने कि कोशिश करतेहुए पूछा।
"अरे! नहि, " मैंने उत्तर दिया, "ढाई साल सें वही नौकरी करकेतंग आँ गय़ा हूं, मुझे भि एक् ब्रेक चाहिए थां। " सच तौ ये थां कि मेरेकाम कि एकरसता सें मेरादम घुटरहा थां, मगर मां कि बीमारी नें मेरेघऱ आने केँ निर्णय कों आसानबना दिया थां।
उसकी निगाहें मेरे चेहरे पर्र तकलीफ़ कि वजह तलाशरही थि। "तौ यहबात हैं, " उसने धीरे-धीरे सें कहा, औऱ मे उसकेहाथ कि गर्माहट अपनेहाथ मे महसूस कर सकता थां, जिससे मेरी रीढ़ मे रोमांच पैदा हौ गय़ा। "तौ नौकरी चेंजकर लो। "
"हम्म, मेरेपास एक् औऱ नौकरी कां ऑफर हैं, मगर मे उलझन मे हूं, " मैंने उसे बताया। मुझेबड़े ग्रुप सें एक् अच्छी नौकरी कां ऑफर थां पऱ मां औऱ रोमा सें ज़ादादूर होने कि वजह सें अभि तक मैंने उसऑफर कों हाँ नहि कहा थां। "नयी कंपनी चाहती हैं कि मे उनके एक् नए प्रोजेक्ट कों लीड करूं, मगर ये पहाड़ों मे बहोत दूर हैं। "
"पहाड़ो मे कहां?" उसने उत्सुकता सें पूछा, उसकी आँखें चमक उठीं। "ये तौ बढ़िया लगता हैं। “प्रोजेक्ट किस बारे मे हैं?"
"ये मसूरी मे ऊंचाई पऱ बनरहा एक् नए होटल औऱ रिसॉर्ट हैं, " मैंने उसकीओर देखते हुए उत्तर दिया। मसूरी कां जिक्र आते हि मेरी आवाज़ मे उत्साह कां संचार हौ गय़ा।
रोमा कि आँखें फैलगईं। "वाउ, मसूरी तौ बहोत सुंदर स्थान हैं, " वो बुदबुदायी, उसकी आवाज़ मे ईर्ष्या कां भावभर गय़ा। "मगर हमारा क्याँ? मम्मी कि देखभाल कौन करेगा?"
अपराधबोध नें मेरेदिल पऱ वारकर दिया। "इसीलिए तोँ अभि तक हाँ नहि किया हैं दोस्त, " मैंने अपनी आवाज़ कों स्थिर रखने कि कोशिश करतेहुए कहा। "इसलिये तौ मे असमंजस मे हूं कि ऑफर स्वीकार करूं याँ छोड़दूं। "
रोमा एक् समय केँ लिएसोच मे पड़ गई, फिन वो अपनी आँखों मे दृढ़ निश्चय केँ संग मेरीओर मुड़ी। "तुम् ऑफर एक्सेप्ट करो भईया" उसने सुझाव दिया। "तुम् हमेशा सें पहाड़ों मे रहना चाहते थें औऱ यह तुम्हारी ड्रीम नौकरी होँ सकती हैं, मां औऱ मे जैसे भि होगा मैनेज कर लेंगे। "
उसने बोलते हुए बहोत हि maturity दिखाई थि पऱ फिन भि मेरेमन मे अभि भि शंका थि। "मुझेपता हैं दोस्त, तुम् दोनों पहल भि मेरे बिना संभलरहे थें औऱ आगे भि संभाल लोगेमगर मुझे हमेशा तुम्हारी चिंता लगी रहती हैं" मैंने कहा, मेरी आवाज़ मे चिंता स्पष्ट थि। "मे तुम् लोगों कों औऱ अकेला नहि छोड़ सकता, मम्मी कि बीमारी कि बाद तोँ बिलकुल भि नहि"
रोमा नें अपनासिर मेरे कंधे पर्र झुका लिया, उसके शरीर कि गर्माहट सें मुझमें चाहत कि लहरें दौड़रही थीं। "चिंता मतकरो सभीठीक हौ जायेगा, मम्मी भि अबठीक हें" उसने मुझे आश्वासन दिया, उसकी आवाज़ मेरे उग्र विचारों पऱ एक् सुखद मरहम थि। "ज़ादा नहि तौ कुछ टाइम कि लिए अपनी दिल्ली कि नौकरी सें ब्रेक समझकर ज्वाइन करलो, साल २साल तौ हम् स्वयं कों संभाल हि लेंगे"
उसके शब्द मेरे भीतर गूंजगए, उसकी बातों मे मेरी समस्या कां हल थां। मैंने एक् गहरी साँसली औऱ अपने भीतर उमड़ती भावनाओं कों शांत करने कि कोशिश कि। "मगर तेरा क्याँ?" मैंने पूछा, उसकी सुरक्षा कि जरूरत सबसे ज़ादा थि। "तूने अपनी पढ़ाई पूरीकर ली हैं, जब मां दफ़्तर जाती हैं तौ तूँ बिल्कुल अकेले रहती हैं। "
"कँहा सें बड़ी होँ गई, तुँ? अभि भि निरि बुद्धू हैं" मैंने हँसते हुएउस छेड़ा
"अच्छा मे बुद्धू, अभि बताती हूं" कहकर उसने मेरेहाथ कों ज़ोर सें मोड़ दिया। "अहह! मर गय़ा" मैंने बनावटी दर्द औऱ चिल्ला क़ेकहा, "ओह! सॉरी सॉरी ज़ादाज़ोर सें कर दिया" उसने जल्दी मेराहाथ छोड़क़े मुझसे माफ़ी मांगी।
"जा तुम कोमाफ़ किया जंगली बिल्ली, यहबता तुम्हारी तरफ वोँ वाच कैसीलगी?" मैंने मुस्कुराते हुए उससेकहा। "यह देखो मैंने पहनी हैं, प्यारी लगरही हैं नं?" उसने मासूमियत सें मुझे अपनी कलाई दिखते हुए जवाब दिया। "हम्म, प्यारी तौ हैं पर्र तुझसे ज़ादा नहि" मैंने भावनाओं मे बहकरकह दिया, "अच्छा, अभि तौ मुझे जंगली बिल्ली बोलरहे थें अब मे प्यारी हौ गई, " उसने अपनी भौंहे सिकोड़ते हुए पूछा, "तोँ, जंगली बिल्लियां भि तोँ प्यारी होती हें" मैंने उससे मुस्कुरा क़ेकहा।
"बच केँ रहना बेटा, जंगली बिल्लियां पंजा भि मार देती हें" उसने अपनेहाथ सें बिल्ली कि तरह पंजा बनाते हुएकहा, "हाँसच मे उनके नाख़ून भि तेरीतरह बड़े होते हें हाहाहा" मैंने हँसते हुएउसे फिन छेड़ा। मेरीबात सुनकर वोँ हंसने लगी औऱ अपनेबड़े नाख़ून देखते हुए बोलि "सब लड़कियों केँ होते हें" उसने सफाई दि।
"चलेंअब, मां इंतज़ार कररही होगी" मैंने बेंच सें उसकाहाथ पकड़ केँ उठाते हुएकहा, वोँ उठी औऱ मेराहाथ थामेसंग संग चलनेलगी, मैंने प्रेम औऱ कामनाओं कां एक् अजीब मिश्रण अपने अंदर महसूस करतेहुए उसकाहाथ दबाया। "मे साम केँ इस टाइम कों बहोत मिस करूँगा, रोमी" मैंने कहा, मेरी आवाज़ भर्राई हुईँ थि, मात्र मे हि उसे प्रेम सें रोमी बुलाता थां औऱ उसेयह मनपसंद थां।।
रोमा नें मेरीओर देखा, उसकी आँखों मे गर्माहट भरी हुईँ थि जौ अंधेरे कों चीरती हुई लगरही थि। "मे भि, " उसनेकहा, उसकी आवाज़ मे हल्का दुलार थां। "मगर प्रॉमिस करो मुझेकॉल आई करते रहोगे। "
उसके शब्दों नें मेरी रीढ़ मे सिहरन पैदाकर दि। उसकी आवाज़ सुनने कां, उसकेसंग अपना दिनचर्या साझा करने कां विचार, भले हि वो मोबाइल पर्र हि क्यूं न् होँ, मेरीसहन शक्ति सें कहीं ज्यादा थां। "बिलकुल, यह भि कोई प्रॉमिस करने वालीबात हैं" मे बुदबुदाया, भावना सें मेरागला रुँध गय़ा। "रोज़, सोने सें पहले, तुम्हें फोन करूँगा। "
हमारे बीचफिन एक् ख़ामोशी सि छा गयीँ,, अनकहे वादों औऱ इच्छाओं सें भर हुईँ। मे उसकी सांसों कि गर्माहट महसूस कर सकता थां, उसकाबदन धीरे-धीरे सें मेरेबदन सें चिपककर चलरहा थां। उसके परफ्यूम कि खुशबू इतनी मादक थि कि सीधेतौर पऱ सोचना मुश्किल हौ जाता थां। कांपते हाथ सें, मे आगे बढ़ा औऱ उसके चेहरे सें बिखरे बालों कों हटाकर उसकेकान केँ पीछेकर दिया। उसने सवालिया नज़रों सें मुझे देखा।
"तुम्हारी तरफपता हैं, रेखा आंटी कि बेटी कि विवाह हैं कल, " मैंने माहौल कों हल्का करने कि कोशिश करतेहुए कहा। "मम्मी मुझे वंहा जाने कों बोलरही हैं, मगर मेरामूड मे नहि हैं। "
विवाह कां जिक्र होते हि रोमा कि आंखें चमक उठीं। "ओह, हाँ मुझेपता हैं!" उसने चिल्लाकर कहा। "नेहा कि विवाह हैं, वो मेरेसंग कॉलेज मे थि। वैसे मेरी मानो तौ चलेजाओ, क्याँ पता, तुम्हें वहाकोई मिलजाए, " उसने मुझे चिढ़ाते हुए चंचलता सें धक्का दिया।
मे किसी औऱ लड़की सें मिलने केँ विचार सें ईर्ष्या कि भावना महसूस करने सें स्वयं कों नहि रोकसका। "मुझे किसी मे कोई दिलचस्पी नहि हैं, " मैंने दृढ़ता सें कहा, मेरी आवाज़ मेरे भीतर उमड़रही उथल-पुथल भरी भावनाओं कों उजागर नहि कररही थि। "मगर मे मम्मी कि ज़िद कि वजह सें जाऊँगा। "
रोमा कि आँखें मेरी आँखों कों खोजरही थीं, मानो किसी गहरी चीज़ कि तलाशकर रहीहों। "मुझे भि अपनेसंग लेँ चलो नं, प्लीज?" उसने अचानक ज़िद सि कि, उसकी आवाज़ उत्साह सें भरी थि। "फिन तोँ तुम् चले हि जाओगे, पता नहि फिनकब समय मिलेगा"
उसकोसंग लेँ जाने कां विचार लुभावना थां, उसकेसंग कुछ औऱ समय साझा करने कि मेरी लालसा कों मे दबा नहि सका। "आईडिया तौ अच्छा हैं, मुझे बोरियत औऱ अकेलापन महसूस नहि होगा पर्र मम्मी सें पूछना पड़ेगा" मैंने कहा, मेरी आवाज़ मे झिझक औऱ आशा कां मिश्रण थां।
रोमा कि मुस्कान औऱ चौड़ी हौ गई। "मे मां सें पूछ लुंगी, " उसने पेशकश कि, उसकी आँखें शरारत सें चमकरही थीं। "वोँ मान जाएँगी। " औऱ फिन हम् अपनेघऱ केँ अंदर Enter होँ गए।
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सीड्स ऑफ़ लस्ट (Seeds Of Lust) - Next part mein bada twist
Shaandar update bhay bus Roma k sath thora slow chalna sex juldi mat Kara Dena pahle thodi chhed chhad aur phir double meaning baatein phir ek doosre ko touching kissing aur phir ek doosre ko apne ang dikha krr uttejit krna phir hard-core sex hnaa chahiye
एक् दम अद्भुत लिखरहे हौ दोस्त! बहोत हि सुन्दर एपसोड भावनाओं कां जबरदस्त संकलन किया हैं ….
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