सीड्स ऑफ़ लस्ट (Seeds Of Lust) – New Episode
Update 9:
अगलेदिन, हमनेऐसा दिखावा किया जैसेकुछ हुआ हि नहि, अपने जिंदगी कि गतिविधियों सें गुज़रते हुएऐसे व्यवहार कररहे थें जैसे कि वासना केँ भूकंप नें हमेंकभी हिलाया हि नहि। मगरजब भि हमारी नज़रें मिलीं, हम् दोनों हि घबराये हुए थें। हम् दोनों जानते थें कि हम् एक् खतरनाक खेलखेल रहे हें, अपनेमन केँ अंदरचल रहेपाप पुण्य केँ भूचाल सें हम् दोनों हि गुज़ररहे थें। खासकर मुझे किसी भि निर्णय पर्र पहुँचने सें पहले बहोत सोचना समझना थां, हालाँकि रोमा कों पाने कि चाहतें मेरेमन मे बगावत कर चुकीथीं।
मम्मी एक् लंबे अंतराल केँ बाद अपने दफ़्तर चलीं गई थीं, जिससे हम् एक् बारफिन घऱ मे अकेले रहगए थें। सन्नाटा बहराकर देने वाला थां, पिछली साम कि अराजकता सें एकदम विपरीत। घऱ कां खालीपन हमारे बीच छुपे रहस्य कि किस्सा बांया कररहा थां, जोँ हमारी अनकही चाहत कि गूंज सें भराहुआ थां।
मे खाने कि मेज पऱ बैठा थां औऱ चम्मच सें अपनी प्लेट मे खानां रखरहा थां, मेरीभूख गायब थि। करी औऱ चावल कि सुगंध मेरीजीभ पऱ चढ़े अपराध बोध केँ कड़वे स्वाद कों छिपाने मे कुछ नहि करपाई। हर ग्रास झूठ जैसा महसूस हुआ, हमने एक्-दूसरे सें, भइया बेहन केँ पवित्र सम्बन्ध कों निभाने कि जोँ कसमें खाई थि, उनमें धोखा थां।
रोमा किचन मे चारों ओर घूमती रही, कुछ काम नाँ होतेहुए भि वोँ बसकाम करने कां दिखावा कररही थि। उसे इतने लगभग सें छूकर फिरसे इतनादूर होँ जानां एक् पीड़ा कां अनुभव करारहा थां। Maroon रंग केँ टाइट फिटिंग सलवार कुर्ते मे, हरकदम केँ संग उसकी गांड आहिस्ता हिलरही थि, न् चाहते हुए भि जिसने मेरेदिल मे बैठेडर केँ बावजूद मेरी पैंट मे कठोरता पैदाकर दि थि।
मेरे सोचने समझने कि शक्तियां जवाबदे चुकीं थि, उस वक़्त मुझे एक् आशा कि किरण मात्र वाणी मे दिखाई दि। एक् बसवही थि जोँ मुझेइस पशोपेश सें बहार निकाल सकती थि। मैंने जल्द सें अपना खानां ख़त्म किया औऱ बाइकउठा करघऱ सें बहार निकलआया। घऱ सें निकलते वक़्त मैंने दूर सें हि रोमा कों बोला थां "कुछकाम हैं थोड़ीदेर मे आता हूं", उसने बिना मेरीतरफ देखाबस इतना हि कहा"ठीक हैं"।
उस वक़्त दोपहर केँ २बजे केँ आसपास कां वक्त थां औऱ अक्टूबर कां महीना भि कुछ ज़ादा हि गरम प्रतीत हौ रहा थां, अबयहपता नहि केँ मौसम वाकई ज़ादागरम थां याँ मेरे विचारों सें मेरेबदन कि गर्माहट बड़ी हुईँ थि।
मैंने एक् बड़े सें आम केँ बाग़ केँ पास अपनी बाइक रोकी, वंहादूर दूर तक कोई नहि थां। बाइक कों एक् पेड़ केँ नीचेखड़ा कर केँ मैंने अपनीजेब सें फोन निकला औऱ वाणी कों फोन किया। उसने पहली रिंग मे हि मेराफ़ोन उठा लिया, थोड़ी सि औपचारिकता केँ बाद मैंने उसे मेरे औऱ रोमा केँ बीच मे घटी घटना विस्तार सें बता दि, वोँ बहुतखुश थि "वाओ, दोस्त तुमने तौ किला फ़तेहकर लिया लगता हैं" उसने उत्सुकता सें कहा। "पता नहि दोस्त, पऱ मेरीअब फटीपड़ी हैं उसका सामना नहि करपारहा हूं" मैंने झुंझलाते हुएकहा।
"तुम् टेंशन मतलो, मे कल आँ रही हूं तुम्हारे घऱ, कुछ नं कुछ सोचेंगे" उसने एक् नया खुलासा करतेहुए कहा
"पऱ तूँ तौ दोदिन बाद अपने ससुराल जाने वाली थि" मैंने उत्सुकता सें पूछा
"हम्म, जाने वाली तौ थि पऱ पतिदेव कों फिन सें दफ़्तर कां कुछकाम आँ गय़ा इसीलिए कुछदिन बाद जाउंगी" उसनेवजह बताते हुएकहा
"यह तौ अच्छा हैं दोस्त, पऱ अकेली केसे आएगी?" मैंने चिंता व्यक्त करतेहुए पूछा
""अरे! अकेली नहि माँ भि आँ रही हें उन्हें मौसी सें मिलना हैं, मां तोँ कल हि वापस आँ जाएँगी पऱ मे कोशिश करुँगी रात कों रुकने कि" उसने अपना प्लान बताते हुए मुझे सहजता सें बताया
"तुम्हे रोमा नें नहि बताया थां क्याँ? हमारे आने केँ बारे मे?" उसने मुझसे पलट केँ प्रश्न किया
"नहि दोस्त, होँ सकता हैं वोँ भूल गयीँ, होँ" मैंने अनुमान लगतेहुए कहा
"याँ हौ सकता हैं वोँ अभि भि प्यारे भाई केँ लन्ड कि गर्मी मे खोयी हौ" उसने हँसते हुए मुझे छेड़ा
मुझेसमझ नहि आया केँ उसकीबात कां क्याँ जवाबदूँ, मे बस "हूं" कर केँ रह गय़ा।
"चलो अभि बापूघऱ पे हें रात कों बात करुँगी" उसनेकहा औऱ फिन हमने एक् दूसरे कों "बाई"बोल करकॉल आईकटकर दि.
वाणी केँ आने कि खबर सें मुझेकुछ तसल्ली सि मिली, मुझे वाणी सें उम्मीद थि केँ वोँ शायद मेरे औऱ रोमा केँ बीच मे जमी बर्फ कों कुछहद तक पिघलाने मे मददगार साबित होगी। मे कल कों लेकर आशावान थां औऱ यह भि उम्मीद पाले बैठा थां केँ अगरकुछ भि नां हुआ तौ वाणी कि बुर तौ मिल हि जाएगी जिससे मेरे उफनते हुए जज़्बातों कों थोड़ीरहत मिलेगी।
मे घऱ आँ गय़ा। उसदिन मेरे औऱ रोमा केँ बीच मे ख़ामोशी किसी बर्फ कि चादर केँ सामन थि जिसेकोई भि हटाने कि हिम्मत नहि जुटापा रहा थां।
मैंने रात कों बहुतदेर तक वाणी कि कॉलआई कां इंतज़ार किया पऱ वोँ शायद औऱ हि कामो मे व्यस्त रही होगी, उसकीकॉल आई तौ नहि आयीबस एक् मैसेज आया बहुतलेट "सि यू टुमारो (See you Tomorrow )। मे फिन अपनी भावनाओं कों दबाये करवटें बदलते हुएसो गय़ा।
अगलेदिन सुभह११ बजे केँ लगभग मौसी औऱ वाणी हमारे घऱ आँ गए। मां कों उनकेआने केँ बारे मे रोमा नें पहले हि बता दिया थां इसीलिए मां भि उसदिन दफ़्तर नहि गयीँ, थीं। साम तक मे औऱ रोमाकुछ ज़रूरी बातचीत केँ संग उनकी सेवा मे लगेरहे पर्र हम् दोनों नें हि एक् दूसरे कि नज़र सें नज़र मिलाने सें बचतेरहे। साम६बजे केँ लगभग मौसी वाणी कों हमारे पास छोड़कर चली गई, औऱ अगलेदिन मुझसे वाणी कों घऱ छोड़ने कां बोल गयीं जिसे मैंने स्वीकार किया।
रात कों खाने कि टेबल पऱ हम् चारों (मे, वाणी, रोमा औऱ मां) संग मे खानां खारहे थें केँ तभी वाणी नें मुस्कुरा केँ मम्मी सें कहा "मौसी अब आप् भि भईया कि विवाह करदो, घऱ मे बहु आएगी तौ आपको भि आराम होँ जायेगा" वाणी केँ प्रश्न नें मुझे औऱ रोमा दोनों कों चौंका दिया जबकि मां नें मुस्कुरा केँ वाणी कि तरफ देखते हुए जवाब दिया"कह तोँ ठीकरही हैं बेटा पर्र ऐसीकोई लड़की भि तौ मिले?"
"अरे! मौसी लड़की कां आप् मुझपर छोड़दो एक् बहोत प्यारी लड़की हैं आप् बोलो तौ मे बात चलाऊं?" उसनेबड़ी धूर्तता केँ संग रोमा कि तरफ देखते हुए मम्मी कों जवाब दिया। रोमा केँ चेहरे पऱ एक् लम्हा केँ लिए हवाइयां सि उड़ने लगीं, मे खानां खातेहुए बहोत गौर सें वाणी औऱ रोमा केँ चेहरों कि तरफदेख रहा थां।
"हाँहाँ, क्यूं नहि अगर लड़की अच्छी हैं औऱ हमारी बिरादरी कि हैं तौ क्याँ प्रॉब्लम हैं" मम्मी नें मासूमियत सें जवाब दिया
पऱ वाणी कां शरारती मन वंही नहि रुकने वाला थां "बिलकुल मौसी बिरादरी कि भि हैं औऱ आपकी जानी पहचानी भि, हैं न् रोमा?" उसने रोमा कि तरफआँख मारते हुएकहा
"अच्छा! ऐसाकौन हैं? तुम् जानती होँ रोमा?" मम्मी इसबार रोमा कों देखते हुए पूछा
रोमा कों अचानक सें फंदालगा औऱ वोँ खांसते हुए बोलि "पपपता नहि मम्मी यहकिस कि बातकर रही हैं" बोलते हुए उसके माथे पर्र पसीना उभरआया
"अरे!भूल गयीँ, वोँ जौ तेरी सहेली थि कॉलेज मे, नेहा"अब वाणी कों भि लगा शायद वोँ कुछ ज़ादा हि आगे कां बोल गई, औऱ उसने अपनीकही बात कों बदलते हुएकहा
"तुँ पागल हैं क्याँ? उसकी विवाह हौ गई, " रोमा नें वाणी कों डांटते हुए पानीपी कर गिलास साइड मे रखतेहुए कहा, रोमा कां चेहरा अब सामान्य प्रतीत होँ रहा थां
"पर्र वोँ हमारी बिरादरी कि नहि थि बेटा, हाँ पर्र लड़की अच्छी थि" मम्मी नें वाणी कि तरफ देखते हुएकहा,
"कोईबात नहि मौसी, भईया केँ लिएकोई औऱ लड़की ढूंढ लेंगे" वाणी नें मम्मी कि तरफ देखते हुए अपनीबात कों विराम दिया।
वाणी कि बातों सें मेरे भीतरउथल पुथलमची थि औऱ विवाह केँ ज़िक्र पर्र रोमा केँ चेहरे केँ भावों नें मुझेदूर कां सोचने पर्र मजबूर कर दिया थां।
हमने खानां ख़त्म किया औऱ मां अपनी दवाइयां लेकर सोनेचली गयीँ, औऱ हम् तीनोहॉल मे सोफे पऱ बैठे टेलीविज़न देखने लगे।
मे औऱ वाणी सोफे पऱ बैठे टेलीविज़न देखरहे थें औऱ रोमा रसोई केँ काम मे व्यस्त थ। हम् दोनों टेलीविज़न सें नज़रें बचाकर एक् दूसरे कों देखरहे थें पऱ रोमा केँ नज़दीक होने कि वजह सें कुछकर नहि पारहे थें, हम् दोनों उचित दुरी पऱ रखेअलग अलग सोफे पऱ बैठे थें। वाणी एक् सफ़ेदटॉप औऱ प्रिंटेड लॉन्ग स्कर्ट पहने बैठी थि जिसकी लम्बाई उसके टखनों तक थि। उसकीबड़ी बड़ी चूचियां उस सफ़ेदटॉप मे कसी हुई थि, उसने मेरीतरफ देखाफिन अपनी एक् टांगउठा कर दूसरी टांग पऱ रखली औऱ फिन धीरे-धीरे सें रसोई कि तरफ देखते हुए उसने अपनी स्कर्ट कों ऊपर उठाया, उसकीदूध जैसी चिकनी टांगो कि पिंडलियाँ रौशनी मे चमकने लगी। मेरा लन्ड जल्दी मेरे लोअर मे हरकत करनेलगा, उसने धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनी स्कर्ट औऱ ऊपर उठायी औऱ मुझे उसके घुटनो सें नीचे कि उसकी नंगी टांगो केँ दर्शन होनेलगे, मे उन्हें छूने कों तड़पने लगा।
तभी शायद रोमा नें पलटकर उसकीतरफ देखा होगा क्यूंकि जंहा मे बैठा थां वंहा सें रोमानज़र नहि आँ रही थि। वाणी नें जल्दी अपनी स्कर्ट नीचेकर ली। फिन जैसे हि रोमा कि नज़रें दूसरी तरफ हुइ वाणी नें एक् झटके मे अपनी स्कर्ट अपनेपेट तक उठा मुझे अपनी बुर केँ दर्शन करवादिए, उसने नीचे पैंटी नहि पहनी थि औऱ उसकी बुर पर्र बालों कां नामोनिशान नहि थां। मेरी कनपटी गर्म होँ गयीँ, औऱ मेरेबदन मे खून कां प्रवाह तेज़ी सें मेरे लन्ड कि तरफ दौड़ने लगा, औऱ एक् सेकंड सें भि काम टाइम मे मेरा लन्ड अकड़ केँ खड़ा हौ गय़ा।
तभी रसोई सें कुछआहट हुईँ औऱ वाणी नें स्वयं कों दुरुस्त किया, रोमा रसोई सें निकलकर अपने कमरे कि तरफ जाती हुईँ वाणी कि तरफदेख केँ बोलि "सोना नहि हैं क्याँ?" औऱ पलट केँ अपने कमरे मे चली गई,।
वाणी सोफे सें उठी औऱ मेरी औऱ देख केँ बोलि "सोनामत मेरे मैसेज कां इंतज़ार करना"
मैंने सहमति मे सर हिलाया "ठीक हैं", वाणीमुड़ कर अपनी गांड बलखाती हुईँ रोमा केँ कमरे मे चली गयीँ,।
थोड़ीदेर टेलीविज़न देखने केँ बाद मे भि उठकरऊपर अपने कमरे मे आकेलेट गय़ा औऱ वाणी केँ मैसेज कां बेसब्री सें इंतज़ार करनेलगा। वाणी कि चिकनी टांगों औऱ चिकनी बुर नें मेरे अंतर्मन मे हलचलमचा रखी थि।
मैंने अपने लन्ड कों लोअर सें बहार निकला औऱ उसे सहलाने लगा, तभी मुझे एहसास हुआ केँ मेरे नीचे केँ बाल बहुतबढ़ गए हें। मे जल्दी खाट सें उठा औऱ बाथरूम कि तरफबढ़ गय़ा।
अपने नीचे केँ बालसाफ़ कर केँ जब मे बाथरूम सें निकला तब दीवार पर्र टंगीघडी रात केँ ११बजा रही थि।
मे बेचैन होनेलगा औऱ वक्त काटने केँ लिए अपनेफोन पर्र पोर्न वीडियोस देखने लगा पर्र उनमे भि मुझेकुछ ख़ासमज़ा नहि आँ रहा थां, मे एक् केँ बाद एक् वीडियोस प्ले करता गय़ा पर्र मेरी बेचैनी बढ़तीजा रही थि, १२:३०बज चुके थें औऱ वाणी कां मैसेज अभि तक नहि आया थां। पोर्न देखने केँ कारण लन्ड अलग सें अकड़ केँ मुझे परेशान कररहा थां।
मैंने आँखें बंद कि औऱ रोमा कि सुंदरता औऱ उसकेबदन कि सुडौलता कि मन मे कल्पना करनेलगा। मैंने यूँ तौ बहोत सि कहानियां औऱ वीडियो भइया बेहन केँ अंतरंग सम्बन्धो पर्र देखे थें पऱ हकीकत मे उन्हें चरितार्थ होतेहुए पहलीबार महसूस कररहा थां।
लगभग२ बजे मेरेफ़ोन नें बीप किया, मैंने एक् लम्हा भि गवाए बिना मैसेज चेक किया। मैसेज वाणी नें हि भेजा थां "रोमा केँ कमरे मे आओ जल्द", मुझे पहले तौ कुछसमझ नहि आया औऱ मैंने असमंजस मे रिप्लाई किया "क्यूं ?"
उसने जवाब दिया"अरे! मजे करेंगे, जल्दआओ"
मैंने भि जल्दी लिखा "तूँ यंहाऊपर आजा न्?'
"नहि, तुम्हे हि आनां होगा औऱ जल्दआओ दरवाज़ा खुला हैं" उसने मुझे आर्डर सां देतेहुए जवाब दिया.
वाणी कि चुदाई कों लेकर एक् तरह सें मेरेमन मे लड्डू फुटरहे थें पर्र रोमा केँ कमरे मे क्यूं बुलारही हैं, इसबात पर्र दिल आशंकित भि थां।
मैंने अपनेसर कों झटका दिया औऱ वासना केँ उमड़ते ज्वर केँ वशीभूत होकर मैंने मन मे सोचा "जौ होगा देखा जायेगा" औऱ फिन मे नीचे रोमा केँ कमरे कि तरफबढ़ गय़ा।
मे आहिस्ता आहिस्ता बिना हंगामा किये नीचे सीढ़ियां उतरने लगा, मेरी चप्पल कुछ ज़ादा हि आवाज़कर रही थि इसलिये मैंने उन्हें बीच सीढ़ियों पर्र हि उतार दिया औऱ नंगे पांवआगे बढ़चला। चारों तरफ सन्नाटा थां औऱ घऱ केँ बहार सें झींगुरों केँ टर्राने कि धीमी आवाज़ें आँ रही थि।
जैसे हि मैंने रोमा केँ कमरे कां दरवाज़ा अंदर धकेला वो खुल गय़ा अंदर एकदमघुप अँधेरा थां, दरवाज़े केँ खुलते हि बहारहाल मे जलरही एक् led लाइट कि रौशनी सें कमरे मे कुछ देखने लायक स्थिति बनी।
कमरे केँ अंदरदो आकृतियां खाट पर्र सोई हुइ थि। उनमे सें दरवाज़े कि तरफसो रही आकृति मे कुछ हलचल हुई, औऱ वो उठकरबैड पर्र बैठ गयीँ,। मुझे समझते देर न् लगी कि वो वाणी हैं, मैंने अंदर दाखिल होते हि कमरे कां दरवाज़ा वापसबंद किया औऱ रूम एक् बारफिन सें अँधेरे कि गोद मे समां गय़ा।
मे धीरे-धीरे सें वाणी कि तरफबड़ा, नज़दीक पहुँचते हि वाणी नें मेराहाथ पकड़ केँ मुझे Bed केँ पास खींच लिया। मे उसकेपास जाकेबैठ गय़ा, वोँ मेरीतरफ झुकी, हमारे चेहरे इतने लगभग थें कि एक् दूसरे कि साँसों कि गर्मी कों महसूस कर सकते थें।
"कुछ केहना मत, " वाणी मेरेखान मे फुसफुसाई, फिन उसने अपने होंठ मेरे होंठो पर्र रखदिए औऱ हम् आहिस्ता आहिस्ता सें एक् दूसरे केँ होंठो कां रसपान करनेलगे। मे बहुतदेर सें वासना कि आग मे जलरहा थां, मुझसे स्वयं पऱ काबू नहि हुआ औऱ मैंने वाणी केँ होंठ चूसते हुए उसकी मम्मों कों अपनी मुट्ठी मे भरकर भींच लिया। वाणी केँ मुंह सें अहह निकलते निकलते रह गयीँ,। जवाब मे उसने भि मेरे लोअर केँ ऊपर सें मेरे सख्त लन्ड कों सख्ती सें दबोचा, मुझे एक् रोमांचकारी समय कि अनुभूति हुइ।
मेरे मुँह सें अपने होठों कों आज़ाद करतेहुए वो मेरेकान मे फुसफुसाई "मेरे पीछेलेट जानां, " कहकर वो रोमा कि तरफ करवट लेकरलेट गयीँ,।
कमरे मे उस वक़्त बसफुल स्पीड पऱ घूमरहे पंखे कां हि हंगामा सुनाई देरहा थां, मे भि वाणी केँ पीछे करवट लेकरलेट गय़ा औऱ स्वयं कों ढकने केँ लिए उसकी चादर कां सहारा लिया। जैसे हि मेरेहाथ चादर उठाते हुए वाणी केँ बदन सें टकराये मुझे समझते देर न् लगी केँ वो नीचे सें पूरी नंगी हैं। वोँ पहले सें हि सभी तैयारी कर केँ बैठी थि।
मैंने चादर अपनीकमर तक ढकी औऱ अपना लोअर अंडरवियर सहित सरका केँ नीचे घुटनो तक कर दिया, मेरा फनफनाता हुआ लन्ड वाणी कि गांड सें सट गय़ा।
वाणी नें अपना एक् हाथ पीछेकर केँ मेरे लन्ड कों अपने पंजे मे जकड़ लिया औऱ उसकीखाल कों ऊपर नीचे सरकाने लगी। मे वाणी कि मोटी गांड कों अपने पंजे मे भरकरज़ोर ज़ोर सें दबाने लगा, मेरे आँखें वासना औऱ उत्तेजना केँ कारणबंद होनेलगी थीं। मैंने अपने सीधेहाथ कों उसकी गांड कि दरार मे डाल केँ उसकी बुर कि पंखड़ियों कों छेड़ा, वाणी कि बुर केँ गीलेपन नें मेरी उँगलियों कों भिगो दिया।
हमारे बदन वासना केँ वशीभूत चाहत केँ मूक नृत्य मे एक् संगआगे बढ़रहे थें, हम् बहोत सावधानी बरतरहे थें, कंही किसीतरह कि कोई आवाज़ नं हौ जिससे रोमा कि नींद मे खललपड़े, जोँ हमसे 1 फीट कि दूरी पऱ लेटी हुइ थि।
वाणी नें अपनाटॉप ऊपर सरकाकर, मेरेहाथ कों पकड़ केँ अपनी नंगी छाती पऱ रख दिया, मैंने उसकी भारी चूचियों कों बारी बारी सें मसला जिससे उसके जिस्म मे खुशी कि लहरें दौड़ने लगीं। मैंने उसकेकान कि लौ कों अपने होंठों मे भर लिया औऱ चूसने लगा, न् चाहते हुए भि वाणी धीरे-धीरे सें सीत्कार उठी।
रोमा पऱ एक् सरसरी नज़र डालकर, वाणी नें सुनिश्चित किया कि वोँ अभि भि गहरी नींद मे सोरही हैं, फिन उसने अपनाहाथ पीछे लाकर मेरे खड़े लन्ड कों पकड़ा औऱ उसे अपनी गीली चिकनी बुर कि तरफ खींचने लगी। जैसे हि मेरे लुंड केँ सुपाड़े नें उसकी बुर केँ छेद कों छुआ, मुझे उसकी बुर कां गीलापन महसूस हुआ, जौ हमारे जिस्मों मे उमड़ती वासना कि तीव्रता कां प्रमाण थां। वाणी नें एक् गहरी सांसली, औऱ अपना ऊपरी पांवहवा मे उठा लिया, जिससे मेरे लन्ड कों उसकी बुर मे घुसने केँ लिए एक् सहीकोण मिल गय़ा।
मैंने हमारे शरीरों केँ जुड़कर एक् हौ जाने केँ एहसास कां स्वाद लेतेहुए, इंचदर इंच अपने लन्ड कों उसकी बुर केँ अंदर धकेलने लगा। वाणी नें अपनी कराह कों दबाने केँ लिए अपने होंठों कों भींच लिया, उसकी आँखें रोमा सें नहि हटरही थीं। हमारे वजन औऱ हिलने सें नीचेदबा गद्दा चरमराने लगा, गद्दे कि चरमराहट औऱ हमारे जिस्मों केँ घर्षण कों नियंत्रण मे रखना हमारे बस केँ बहार थां। मे धीरे धीरे, लयबद्ध तरीके सें अपनीकमर हिलाने लगा, मेरा लन्ड वाणी कि बुर कि गहराइयाँ नापने लगा।
वाणी कि सांसें भारी हौ गईं क्योंकि उसने मेरे धक्के कां सामना करने केँ लिए अपने कूल्हों कों पीछे कि ओर हिलाया, उसका एक् हाथ मेरे कूल्हों कों पकड़ने केँ लिए पीछेआया। मे एक् हाथ सें उसकी ऊपरी मम्मों कों ज़ोर सें दबाता हुआ उसकी बुर मे लन्ड कों पेलरहा थां। वाणी मेरे कूल्हे कों औऱ अपनी गांड कि तरफ खींचरही थि। थोड़ीदेर केँ समागम सें हि उसकी त्वचा पसीने कि हल्की चमक सें चमकने लगी। अपनीसगी बेहन केँ बगल मे लेटा मे अपनी मौसेरी बेहन कि चुदाई कररहा थां औऱ इस विचार नें मेरे अंदर एक् नयी उत्तेजना कां संचार किया। मेरीनज़र रोमा कि हर सांस केँ संग उठती गिरती छातियों पर्र टिकी थि। हमारे जिस्म ख़ामोशी सें लयबद्ध तरीके मे एक् संगहिल रहे थें।
अचानक वाणी नें मेराहाथ अपनी मम्मों सें उठाकर रोमा कि छाती पर्र रख दिया। मेरी हथेली पर्र कड़क, कठोर औऱ भारी मांस केँ एहसास नें मेरीकमर हिलाने कि गति कों एकदम सें रोक दिया। मैंने अपनाहाथ रोमा कि चूचियों सें हटाने कि कोशिश कि मगर वाणी कि पकड़ मजबूत थि उसकाहाथ मेरेहाथ केँ ऊपर थां, वाणी मेरीमनो स्थिति समझकर मेरेकान मे फुसफुसाई "डरोमत, कुछ नहि होगा"। उसकी आवाज़ मे एक् विश्वास साफ़झलक रहा थां। मैंने अपने अंदर कि वासनाओं औऱ दबी हुइ इच्छाओं केँ आगे समर्पण कर दिया। मैंने धीरे-धीरे सें रोमा कि चूचियों कों दबाया, उसने अंदरकोई ब्रा नहि पहनी थि।
उसके निप्पल मुझे उसकी टी-शर्ट केँ कपडे पऱ साफ़साफ़ महसूस हौ रहे थें। अपनीसगी बेहन कि चूचियों कां एहसास, उनकी गर्माहट नें मुझे एक् नयी ऊर्जा सें भर दिया। मैंने महसूस किया कि अचानक, रोमा केँ शरीर केँ वर्जित संपर्क सें मेरे लन्ड मे औऱ भि ज़ादा सख्ती आँ गई, थि औऱ वोँ वाणी कि बुर केँ अंदरहिल रहा थां, औऱ मेरेलिए अब स्थिर रहना मुमकिन नहि थां।
मैंने धीरे धीरे रोमा कि चूचियों कि मालिश करना शुरुआत कर दिया, मेरा अंगूठा रोमा केँ उभरेहुए निपल पर्र घूमरहा थां, औऱ उसके स्पर्श सें उसकी सांसों कि स्थिर लय महसूस होँ रही थि। मे वाणी कि गांड पर्र तेज़तेज़ प्रहार करतेहुए उसे चोदने लगा, वाणी नें अपनाहाथ मेरेहाथ केँ ऊपर सें हटा लिया थां पऱ मे अब स्वयं कों रोमा कि चूचियों केँ आकर्षण सें नहि रोकसका। मेरे जिस्म मे उत्तेजना इतनी प्रबल थि कि उसका विरोध नहि कियाजा सकता थां। मैंने महसूस किया कि वाणी कां बदन अकड़ने लगा हैं, उसकी साँसें औऱ भि तेज़ होँ गई थीं, उसकाबदन एक् सगे भइया केँ द्वारा दबाईजा रही एक् बेहन कि चूचियों पर्र प्रतिक्रिया कररहा थां। ऐसालग रहा थां मानो वो किसी भि समयझड़ जाएगी।
रोमा कि छातीहर सांस केँ संग ऊपर-नीचे होँ रही थि, उसकाबदन उसके इतने लगभग सें हौ रही अंतरंग चुदाई सें अनजान थां। रोमा केँ निप्पल कों छेड़ते हुए मुझे अपनेबदन मे रोमांच कि लहरें महसूस हौ रहींथीं, मेरामन इसबात कि संभावनाओं सें दौड़रहा थां कि अगर वो जाग गई तौ क्याँ हौ सकता हैं। फिन भि, उस लम्हा केँ डर नें मुझे औऱ ज्यादा उत्तेजित कर दिया, औऱ मैंने स्वयं कों वाणी कि बुर मे गहराई तक धकेल दिया, ठीक तभी वाणी नें एक् झटका सां खाया औऱ उसने अपनेहाथ सें अपने मुंह कों दबा लिया, उसका शरीरकुछ लम्हा केँ लिए बिलकुल स्थिर होँ गय़ा।
वाणी कि आँखें बंद होँ गईं, मैंने नें उसके झड़ने कि लहरें महसूस कीं, उसकी बुर कि दीवारें मेरे लन्ड केँ चारों ओर सिकुड़ गईं, जिससे उसके जिस्म मे खुशी कि लहरें दौड़ने लगीं।
मुझसे भि अब औऱ बर्दाश्त नहि हौ रहा थां मैंने एक् बार फिरसे रोमा कि चूचियों कों धीरे-धीरे सें पकड़ लिया, उसके मांस कि कोमलता मेरे हाथों मे समां गई औऱ मैंने करीब हिंसक गति सें वाणी कि बुर मे धक्के लगाना शुरुआत कर दिया। मेरी हथेलियों केँ नीचे मेरीसगी बेहन केँ जिस्म कां अहसास जबरदस्त थां, औऱ मे स्वयं कों अपनेचरम केँ कगार पऱ लड़खड़ाता हुआ महसूस कररहा थां।
अपनी बेहन केँ मजबूत छातियों कों पकड़ने कि अनुभूति, वाणी केँ झड़ते हि उसकी बुर कि गर्मी कों अपने लन्ड केँ चारों ओर कसतेहुए महसूस करना मेरेलिए बहोत अधिक थां। मेरा वीर्य मेरे अंडकोषों सें एक् तीव्र गति सें निकलता हुआ वाणी कि बुर कि गहराईयों कों भर गय़ा। मेरा लन्ड वाणी कि बुर मे हर एक् सेकंड केँ अंतराल पर्र पिचकारियां मारता रहा, मेरे लन्ड नें इतना पानी पहलेकभी नहि छोड़ा थां। मैंने एक् बार रोमा कि तरफ देखा सोती हुईँ वोँ बहोत मासूम प्रतीत होँ रही थि, एक् बार केँ लिए मुझे स्वयं पऱ बहोत ग्लानि हुई। मैंने अपनाहाथ उसकी चूचियों सें खींचा, वाणी नें पलटकर मुझेहग किया औऱ मेरेकान मे फुसफुसाई "कैसालगा?"
"बहोत ज़बरदस्त दोस्त" मैंने फुसफुसाहट सें हि उसके प्रश्न कां जवाब दिया।
कमरे कि हवा मे गहरा तनाव पसराहुआ थां, हमारे जिस्मों कां पसीना पंखे कि ठंडीहवा सें मिलकर हमारे बदन मे कम्पन पैदाकर रहा थां। हम् बहुतदेर वंही एक् दूसरे कों बाँहों मे लिएपड़े रहे औऱ रोमा कों सोतेहुए देखते रहे।
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bhut badiya or madmast walla update. pr bhut aajeeb h kee ek ldki apni chuchi pr kee k hath pakadne pr bi kuch react naheen kia. Ladkiyon or aurton mein ek bhaut badi khoobi hoty h wo bhut juldi accche or pure ko pehchan leti h
सीड्स ऑफ़ लस्ट (Seeds Of Lust) – New Episode
वाणी औऱ रवि नें रोमा कि मौजूदगी मे बल्कि यूं कहें रोमा केँ निद्रित अवस्था मे रहने केँ बाद अपने जिस्म कि जौ गर्मी मिटाई, जोँ सेक्सुअल एडवेंचर्स प्राप्त किया वो उन दोनो केँ लिएभय, रोमांच, कामोत्तेजना, सरम औऱ भि नां जाने कितने तरह केँ भावों कां सम्मिश्रण रहा होगा।
इस पुरे प्रकरण कों अत्यंत हि इरोटिक तरीके सें दर्शाया गय़ा हैं।
मगर वाणी मैडम कों रवि कों आमंत्रित करने केँ लिएरात केँ दो क्यूं बजगए ? ज़रूर वो रोमा कों सेक्सुअली सेड्यूश कररही होगी। वो ज़रूर आग मे घी डालने कां प्रयत्न कररही होगी।
ये भि देख्ना हैं कि सेक्सुअल एनकाउंटर केँ दरम्यान रोमा मैडम वास्तव मे निद्रित अवस्था मे थि याँ सोने कां आडंबर कररही थि !
बेहतरीन भाग भइया।
इरोटिक, आउटस्टैंडिंग एंड हाॅट एपसोड।
सीड्स ऑफ़ लस्ट (Seeds Of Lust) – New Episode
UPDATE 10:
अगलेदिन मे वाणी कों छोड़ने उसकेघऱ मेरठचल दिया, हम् सुभह९ बजेघऱ सें निकले थें। रोमा नें अच्छे सें वाणी कों विदा किया थां, रोमा कों देखने सें कंही भि ऐसा प्रतीत नहि होँ रहा थां केँ वोँ रात कि घटना सें परिचित हैं। पर्र मेरेमन मे उथल पुथलमची थि, उसके नाज़ुक अंगों कां स्पर्श मेरी हथेलियों पर्र एक् यादगार समय केँ रूप मे अंकित थां।
रात कि घटना कों लेकर, बस मे संगसफर करतेहुए मैंने वाणी सें पूछा "क्याँ वोँ रात केँ बारे मे जानती हैं?" मेरी आवाज़ मे फुसफुसाहट थि।
वाणी नें मेरेहाथ मे अपनी उंगलियां फंसा दि औऱ मेरेकान केँ पास अपना मुंह झुका केँ उसने जवाब दिया "नहि, उसे लगता हैं मे उसकी चूचियां दबारही थि ?"
"क्याँ सच मे?" मैंने हैरत सें पूछा, मेरी आवाज़ बहोत धीमी थि हमारे आगे पीछे बैठेलोग हमे नहि सुन सकते थें।
"हम्म, तुम्हारे आने सें पहले हमने बहोत मस्ती कि थि" उसने एक् प्यारी सि मुस्कान केँ संग जवाब दिया।
"कैसी मस्ती?" मैंने फुसफुसाते हुए पूछा, "वैसी हि जैसी तुम् उसकेसंग कररहे थें" वोँ मुस्कुरायी, मे समझ गय़ा केँ दोनों महिलाएं एक् दूसरे केँ जिस्मो सें खेल रहीं थि, वाणी नें मुझे पहले भि बताया थां केँ वोँ पहले भि ऐसाकर चुकी हें।
"एक् बात बताऊँ, रातजिस तरह सें तुम् उसकेमजे लें रहे थें उसे सोचकर मेरी अभि भि गीली हौ रही हैं" वोँ मेरेकान मे फुसफुसा केँ बोलीं औऱ मेरी जांघ पऱ अपनाहाथ रख दिया। "श…श वाणीठीक सें बैठ दोस्त, आसपास तोँ देख लेँ?" मैंने थोड़ा झेंपते हुएउसे सतर्क किया।
उसने अपनाहाथ मेरी जांघ सें वापस खींच लिया। थोड़ीदेर हमारे बीच ख़ामोशी छाईरही, मुझे रोमा कि मदहोश कर देने वाली यादों नें फिरसे घेर लिया। तेज़ गति सें दौड़ती बस मे मे खिड़की सें बहार झांकते हुए, हरे भरे खेतों कों पीछे छूटते देखरहा थां।
"क्याँ हुआ ज़ादायाद आँ रही अपनी प्यारी बेहन कि?" वाणी नें धीमे सें मेरेकान मे बोलते हुए मुझे छेड़ा, "पता नहि दोस्त बस उलझाहुआ हूं, अंजाम कों सोचकर" मैंने अपनी चिंता ज़ाहिर करतेहुए कहा।
"ओह हौ! इतनामत सोचो, बस मज़ेकरो दोस्त, थोड़ी सि हिम्मत औऱ दिखानी हैं तुम्हे" उसने मुझे दिलासा सि दि। "ऐसा मे औऱ तूँ सोचरहे हें, मुझेडर हैं केँ कंही वोँ बुरामान गयीँ, तौ मुसीबत आँ जाएगी" मैंने गंभीर होतेहुए उससेकहा।
"ऐसाकुछ नहि होगा, मेरी गारंटी हैं" वाणी नें स्पष्ट किया उसकी आवाज़ मे विश्वास थां।
"तुम् बसउसे एक् लड़की कि तरह सोचो औऱ उसे रिझाने केँ लिए जोँ कर सकते हौ वोँ करो" उसने मुझे समझया "बाकी सारी चिंताए भूलजाओ", मैंने गर्दन हिला केँ अपनी सहमति जताई।
वोँ पूरादिन मेरासफर मे हि गुज़र गय़ा औऱ मे वाणी कों उसकेघऱ छोड़कर रात९बजे अपनेघऱ लौटआया।
रात कों खाने कि टेबल पऱ मेरी नज़रें रोमा सें मिली पऱ उसने अपनी नज़रें फेरली, हमारे बीच एक् खामोशी सि छाईरही। मां नें हमारी खामोशी कों शायद महसूस कर लिया थां "क्याँ हुआ? तुम् दोनों मे झगड़ाहुआ हैं क्याँ?" मां नें पहले मेरीतरफ औऱ फिन रोमा कि तरफ देखकर पूछा। "नहि तौ!" हम् दोनों एक् संग बोले औऱ फिन एक् दूसरे कों देखने लगे। "तौ फिन इतनी ख़ामोशी क्यूं हैं?" मां नें अपना प्रश्न दोहराया। "कुछ नहि मम्मी मे बस थोड़ाथका हुआ हूं औऱ एक् काली बिल्ली मेरा मार्ग काट गई, थि" मैंने मुस्कुरा केँ रोमा कि तरफ देखते हुएकहा, मम्मी मेरीबात सुनकर मुस्कुरा दि। जैसे हि रोमा कों समझआया केँ बिल्ली कां शब्द उसकेलिए थां उसने अपनी आँखें बड़ी करके मुझे घूरते हुएकहा "अच्छा हुआ मां, बिल्ली नें भईया कां मार्ग हि काटा, कंही इन्हे काट लेती तौ मुश्किल हौ जाती"कह कर रोमा मम्मी कि तरफ देखते हुए मुस्कुराने लगी।
"हम्म, अब आयी नं घऱ मे रौनक" मां नें हँसते हुएकहा, "मे तोँ कहता हूं मां हमे एक् कटोरे मे दूधभर केँ रोज़ बहाररख देना चाहिए, बेचारी बिल्लियां भूखी रहती हें" मैंने बहोत गंभीर स्वर मे मम्मी सें कहा, मम्मी मेरीबात सुनकर मुस्कुराने लगी।
रोमा केँ चेहरे पऱ बनावटी क्रोध उभरआया "मां समझालो अपने लाडले कों वर्ना बिल्ली नें अगर पंजामार दिया तौ गंजाकर देगी" उसने मेरीतरफ देखते हुए गुस्से मे कहा हालाँकि वोँ सभी बनावटी थां।
"देखा मम्मी, मैंने इसकानाम भि नहि लिया औऱ बेचारी अपनी बिरादरी केँ लोगों केँ लिए कितना फील करती हैं, " मैंने मुस्कुराते हुए रोमा कों फिन सें छेड़ते हुएकहा, रोमा नें चिढ़कर अपना गिलास पकड़ा औऱ मेरीतरफ उसका पानी उछाला मे पानी सें बचने केँ लिए पीछे कों झुका औऱ अपनी कुर्सी सें गिरते गिरते बचा। वोँ खिलखिला केँ हंसने लगी क्यूंकि गिलास खाली थां औऱ उसनेमहज़ दिखावा किया थां।
"अरे! पागल अभि गिर जाता मे" मैंने स्वयं कों सम्हालते हुएकहा, "तभी तोँ मज़ाआता" उसने हँसते हुए जवाब दिया
"अच्छा अच्छा बहोत हुआ तुम् दोनों कां, जल्द खानां ख़त्मकरो" मां नें हस्तक्षेप करतेहुए हमे डांटा।
हमने जल्द सें अपना खानां ख़त्म किया, मुझे ख़ुशी थि कि अभि भि हमारा भइया बेहन वाला प्यार बरकरार थां, ऊपरीतौर पऱ हि सही। हम् दोनों हि अपने रिश्ते कि मर्यादा औऱ अपनी अनअपेक्षित भावनाओं सें झूझरहे थें।
अगलेदिन सुभह केँ १०बज चुके थें औऱ मे आजकुछ ज़ादा हि देर सें सो केँ उठा थां, आमतौर पऱ रोमा मुझेजगा देती थि पर्र आज उसने भि मुझे जगाने कि कोशिश नहि कि थि। मे जल्द सें फ्रेश होकर नीचे रसोई मे आया औऱ कुछ खाने केँ लिए ढूंढ़ने लगा, रोमाउस समय शायद अपनेरूम मे थि। बर्तनो केँ खड़कने कि आवाज़ सुनकर वोँ अपने कमरे सें बहारआयी औऱ मेरेहाथ सें प्लेट छींटे हुए बोलि "तुम् बैठो मे ब्रेकफास्ट लगाती हूं "
मे बिनाकुछ बोले टेबल पऱ आकरबैठ गय़ा, थोड़ी हि देर मे वोँ मुझेकुछ ब्रेड टोस्ट औऱ गरमचाय दे गई, औऱ फिन रसोई मे जाके अपना अधूरा काम निपटाने लगी।
मे ब्रेकफास्ट करतेहुए रोमा कों हि देखरहा थां, वोँ हरेरंग कि एक् शर्ट औऱ सफ़ेद लॉन्ग स्कर्ट मे बहोत हि सुन्दर औऱ शालीन लगरही थि, उसके जिस्म केँ हिलने सें उसकी भारी गांड मे कम्पन होता औऱ उसकी ढीली स्कर्ट थिरकने लगती, मुझेयह दृश्य बहोत हि मोहकलग रहा थां।
तभी मेरे फ़ोन कि तीव्र घंटीहवा मे गूंजउठी, ध्वनि नें मुझे मेरे विचारों सें झकझोर दिया। मे कुर्सी सें उछल पड़ा, रोमा नें पलटकर मेरीतरफ देखा। जैसे हि मैंने टेबल सें मोबाइल उठाया, मेरादिल जोरों सें धड़क गय़ा। स्क्रीन पर्र लिखा थां 'अलाया होटल्स एंड रिसॉर्ट्स'।
"हैल्लो?" मैंने तनाव सें कर्कश स्वर मे उत्तर दिया।
"रवि, मे अलाया होटल्स सें प्रीती गौरबोल रही हूं, " दूसरी ओर सें आवाज़ आई, "मे ये जानना चाहती हूं केँ क्याँ आप् हमे ज्वाइन कररहे हें याँ नहि?"
मेराहाथ फ़ोन केँ चारों ओरकस गय़ा, दबाव केँ कारण प्लास्टिक चरमराने लगा। "मुझे.मैम मुझेकुछ औऱ दिन चाहिए, " मैंने हकलाते हुएकहा, मेरामन तेजी सें दौड़रहा थां। "कुछ फॅमिली मे इमरजेंसी हैं। "
मगर दूसरी तरफ सें मेरी याचना कों अनसुना कर दिया गय़ा। "देखो, रवि, हम् अब औऱ नहि रुक सकते हमारी भि अपनी मजबूरियां हें। यदि आप् कल तक ज्वाइन नहि कर सकते तौ हमेफिन किसी औऱ कों आपकी स्थान कंसीडर करना पड़ेगा। "
उसके शब्दों नें मेरे माथे पऱ पसीना ला दिया, मेरा वास्तविकता सें फिरसे परिचय हुआ। मसूरी मे वो जॉब जिसका हिस्सा बनने केँ लिए मे उत्सुक थां, जिसने घटनाओं कि इस पूरी श्रृंखला कों गति दि थि, अब वो मुझे रोमा सें दूर होने कों विवशकर रही थि। मुझे अपने सीने मे एक् घबराहट महसूस हुइ, "कल तक केसे होगामैम, मे परसों तक कोशिश करूँगा ज्वाइन करने कि" मैंने हड़बड़ाहट मे कहा।
रोमा स्लैब कि सफ़ाई करतेहुए रुक गई, उसकी आँखें चिंता औऱ जिज्ञासा केँ मिश्रण सें मेरीओर देखरही थीं। वो जानती थि कि मेरीजॉब मेरेलिए महत्वपूर्ण थि, यह मेरे बेहतर जिंदगी केँ लिए औऱ मेरे करियर कि सफलता कां टिकट थां। मगर वो ये भि जानती थि कि मेरेदूर होँ जाने सें मे संभवतः उस उग्र जुनून कों भूल सकता थां जौ हमारे बीचपनप रहा थां।
"ओके, परसों आपका इंतज़ार रहेगा पर्र अगर आप् नहि ज्वाइन करपाए तौ हम् माफ़ चाहेंगे" उसऔरत केँ शब्द थोड़े कठोर थें पर्र लहज़ासहज थां। "नहि मैम, परसों पक्का मे ज्वाइन कर लूंगा" मैंने एक् बार फिरसे उसे भरोसा दिलाया, "OK Then, we will meet you day after tomorrow, बाई"कह कर उसनेकॉल आईकटकर दि।
मैंने फ़ोन साइड मे रखा औऱ कुर्सी पर्र गिर पड़ा, मेरामन तेजी सें दौड़रहा थां। मैंने उदास होकर अपना दोपहर कां भोजन ख़त्म किया औऱ ऊपर अपने कमरे मे आँ गय़ा।
जैसे हि मे अपने विचारों केँ कोलाहल मे खो जाने वाला थां, मेरे कमरे कां द्वार (दरवाज़ा) चरमरा कर खुला। मैंने सरउठा करऊपर देखा तौ रोमावहा खड़ी थि, उसकेहाथ मे पानी कां गिलास थां। उसकी आँखें मेरे चेहरे पर्र नज़रें गड़ाए हुएथीं, हवा मे छाए अचानक तनाव कां स्पष्टीकरण ढूँढ़ रहीथीं।
"सभीठीक तोँ हैं?" उसने धीरे-धीरे सें पूछा, उसकी आवाज़ मे एक् सौम्य दुलार थां जिसने मेरी रीढ़ मे सिहरन पैदाकर दि।
मैंने सिर हिलाया, उससे पानी लिया औऱ एक् घूंट मे पी लिया। "तुझेही बताया थां नं नएऑफर केँ बारे मे, " मैंने गिलास कों साइड टेबल पर्र खनकते हुएरख दिया। "वे चाहते हें कि मे परसों तक ज्वाइन करूँ। "
रोमा केँ चेहरे केँ भावबदल गए, उसके गालों कि लाली फीकी पड़नेलगी। "तोँ इसमें प्रॉब्लम क्याँ हैं? मम्मी भि अबठीक हें, तुम्हें भि आगे बढ़ना चाहिए" उसने विस्तार सें समझाकर मुझे सांत्वना देने कि कोशिश कि।
उसके शब्द मेरी आत्मा पर्र चाकू कि तरह थें। मे जानता थां कि वो सही थि, मगरउसे छोड़ने कां, उससेअलग होने कां विचार असहनीय थां। "मे बस जानां नहि चाहता, " मैंने कबूल किया, कमरे मे मेरे शब्दों कां बोझ भारी थां।
रोमा नें मेरीओर एक् कदम बढ़ाया, उसकी आँखें मेरी आँखों मे कुछ तलाशरही थीं। "तुम्हें जानां चाहिए, " उसने धीरे-धीरे सें कहा, "ये तुम्हारे अच्छे केँ लिए हैं। "
उसके शब्द मुझे वास्तविकता मे खींचरहे थें औऱ उन वर्जित भावनाओ कों नज़रअंदाज करने कि कोशिश कररहे थें। वोँ समझरही थि, हमारे बीच कां रहस्य, हमारी इच्छाएँ, वेकभी भि मेरे करियर सें बड़ी नहि हौ सकतीं। मैंने सिर हिलाया, मेरे निर्णय कां भार मेरे कंधों पर्र थां। "मे जनता हूं, " मे बुदबुदाया, यह शब्द मेरेगले मे फंसरहे थें।
रोमा नें एक् गहरी साँसली, उसकी आँखें मेरी आँखों सें हट हि नहि रहीथीं। फिन वो पीछेहट गई, उसकाहाथ मेरे कंधे सें हट गय़ा। "तोँ फिन जाने कि तैयारी करो, " उसने मुस्कुराहट केँ संगकहा जौ एकदम बनावटी थि। "तुम्हारे पास मात्र एक् दिन हैं। "
मैंने सिर हिलाया, हर गुजरते लम्हा केँ संग मेरे सीने मे भारीपन बढ़ता जारहा थां। उसने जोँ शब्दकहे थें वे एक् आदेश औऱ एक् सांत्वना थें जौ सब एक् मे समाहित होँ गए थें। मे जानता थां कि वो सही थि; मुझे अपनेकाम औऱ करियर कों गंभीरता सें लेना थां। ये मेरे जिंदगी कों पटरी पऱ रखने कां एकमात्र तरीका थां।
रोमा दरवाजे सें मुझे अंतिम बार देखती हुइ चली गई, उसकी आँखों मे मेरी आँखों जैसा दुःखझलक रहा थां। जैसे हि द्वार (दरवाज़ा) बंदहुआ, उस क्षण कि आखिरी घड़ीमुझ पऱ टनों ईंटों कि तरह गिरी। ऐसा लगरहा थां मानो हमारे बीच एक् दीवार खड़ी हौ गई हौ, जोँ उसीधूल सें बनी हौ जिसने हमें स्टोर रूम मे घेररखा थां। ये अंतर असहनीय लगरहा थां, सन्नाटा बहराकर देने वाला थां।
कांपते हाथों सें, मैंने अपना लैपटॉप खोला, मैंने एक् गहरी सांसली औऱ रोमा कि गांड केँ उभार कां मेरे लन्ड पऱ रोमांचकारी दबाव, मेरी हथेलियों केँ नीचे उसकीनरम सुडोल चूचियों केँ एहसास कों दूर करने कि कोशिश कि। मुझे ध्यान केंद्रित करने कि ज़रूरत थि, मुझे एक् झूठा इस्तफ़ा टाइप करना थां जौ मुझे मेरी वर्तमान कंपनी कों भेजना थां।
मैंने अपना इस्तीफा टाइप किया, एक् पारिवारिक आपातकाल कि किस्सा गढ़ते हुएजिस पऱ मुझे जल्दी ध्यान देने कि ज़रूरत थि औऱ मैंने ईमेल सेंडकर दिया।
मेरा पूरादिन नईजॉब औऱ नयी स्थान केँ लिए जरूरी चीजें पैक करने मे बीता।
जैसे हि मैंने अपना सूटकेस पैक किया, मेरे विचार अव्यवस्थित होँ गए। मसूरी मे एक् नया अध्याय शुरुआत करने कां उत्साह रोमा कों पीछे छोड़ने केँ दुःख सें धूमिल हौ गय़ा थां। मे इस अहसास कों भुला नहि सका कि मे अपनी भावनाओं कां एक् हिस्सा अपने हि घऱ मे छोड़कर जारहा हूं।
मां पूरीसाम मेरे कमरे मे आती-जाती रही, उसकी आँखों मे गर्व औऱ चिंता कां मिश्रण भराहुआ थां। उन्होंने रोमा सें येखबर पहले हि सुनली थि, औऱ हालाँकि उन्होंने सीधेतौर पऱ नहि कहा थां, मे उनके चेहरे पर्र चिंता कि लकीरें देख सकता थां। वो मंडराई, मुझे सामान पैक करने मे सहायता करने कि पेशकश कि, पूछा कि क्याँ मेरेपास पर्याप्त गरम कपड़े हें, मुझे अच्छा खाने औऱ बहोत ज्यादा मेहनत न् करने कि याद दिलाती रही। उनका प्रेम मन कों भर देने वाला थां, रोमा केँ उस स्पर्श सें एकदम विपरीत, जिसमे वासना औऱ दबी हुईँ इच्छाएं शामिल थीं।
रात मे 11 बजे, मैंने स्वयं कों अपनी मम्मी केँ पलंग केँ पास बैठा पाया, बेडसाइड लैंप कि हल्की चमक उनके चिंतित चेहरे पऱ छायाडाल रही थि। उन्होंने आगे कि यात्रा, मसूरी मे जॉब केँ महत्व औऱ घऱ कां बड़ा जिम्मेदार व्यक्ति होने केँ संगआने वाली जिम्मेदारियों केँ बारे मे बात कि। उनके शब्द एक् मरहम कि तरह थें, जोँ मेरे अपराध औऱ भय केँ कच्चे किनारों कों शांतकर रहे थें।
"अब तुम् जाओ बेटा, " उन्होंने कहा, उनकी आवाज़ चिंता सें भरी हुइ थि। "तुम् हमारी बिलकुल भि चिंता मतकरो, यंहा मे सभी सम्हाल लुंगी" उनकी आँखें बंद होँ गईं, उनके चेहरे पर्र उम्र औऱ थकान कि रेखाएँ गहरी होँ गईंथीं। "अबजाओ, थोडा आरामकरो। तुम्हे कल बहोत लम्बा सफरतय करना हैं। "
मैंने सिर हिलाया, उनके शब्दों कां बोझमुझ पर्र पड़रहा थां। रूम दमघोंटू थां, हवा अनकहे सच औऱ उसकीदवा कि महक सें भरी हुई थि। मे झुका, उनके माथे कों धीरे-धीरे सें चूमा, उनकी त्वचा कि गर्माहट महसूस कि। "ठीक हैं मां, गुड़ नाईट" मैंने फुसफुसाया, मेरी आवाज़ मुश्किल सें सुनाई देरही थि।
मे मम्मी केँ कमरे सें बहारआया औऱ उनका दरवाज़ा बंदकर दिया। बहारहाल मे हलकी सि रौशनी थि जोँ एक् छोटे Led बल्ब सें आँ रही थि। मैंने एक् गहरी साँसली औऱ रोमा कों देखने केँ लिए उसके कमरे कि ओरचल दिया।
उसका द्वार (दरवाज़ा) खुला थां, हॉल केँ बल्ब कि रौशनी उसके कमरे केँ अंदर धीरे-धीरे सें झाँकरही थि। मैंने उसके दरवाज़े कों धीरे-धीरे सें पीछे धकेला, औऱ अंदरकदम रखा। रोमा अपनेबैड पऱ दूसरी तरफ मुंह करके लेटी थि, उसकी द्वारा ओडी हुई चादर उसकेबदन कि सुडौलता कों रेखांकित कररही थि।
वो गहरी नींद मे सोरही थि, उसकीपीठ मेरीतरफ थि, कमर तक चादर केँ नीचे छुपी हुइ थि। मे उसकी छाती केँ हल्के उभार औऱ गिरावट कों देख सकता थां, उसकी सांसों कि धीमी आवाज़ कमरे मे लोरी कि तरह गूंजरही थि। उसकेबाल तकिये केँ ऊपर फैलेहुए थें। उसे देखकर मुझमें इतनी तीव्र लालसा भर गई कि ये करीब-करीब असहनीय थि।
उसकी सफेद ढीली टी-शर्ट उसके जिस्म सें चिपकी हुइ थि, जोँ नीचे छिपेहुए उभारों कां संकेत देरही थि। उसकेबदन पर्र ब्रा कां कोई स्पष्ट संकेत नहि थां, उसका सौम्य चेहरा मासूमियत कि मिसाल थां। मेरेमन मे पिछली रात कि घटना किसी चलचित्र कि भाँती चलनेलगी जब मैंने उसकेनरम उभारों कां जायज़ा लिया थां।
मे उसकेबैड केँ किनारे पर्र बैठ गय़ा, मेरादिल मेरे सीने मे धड़करहा थां। गद्दा मेरेवजन केँ नीचे थोडा सां दब गय़ा, औऱ मे उसके जिस्म कि गर्मी कों कपड़े केँ माध्यम सें फैलते हुए महसूस कर सकता थां। उसकी खुशबू - ताज़ी औऱ मीठी, नशीली थि, जिससे मेरा सीधे सोचना मुश्किल होँ रहा थां।
उसकानाम, 'रोमा', एक् गुप्त मंत्र कि तरह मेरीजीभ फिसला, कमरे कां अँधेरा एक् कंबल कि तरह हमारे चारों ओर लिपटा हुआलग रहा थां, जोँ हमें दुनिया कि चुभती नज़रों सें छिपारहा थां, हमेंउस वास्तविकता सें थोड़ी राहतदे रहा थां जोँ सुभह होने पर्र हमारा प्रतीक्षा कररही थि।
मैंने थोडा सां हाथ बढ़ाया, मेरी उंगलियाँ उसकी टी-शर्ट केँ कपड़े कों छूरही थीं। रुई कि कोमलता मेरी ज़रूरत कि कठोरता सें बिल्कुल विपरीत थि, मेरी अशुद्ध भावनाओं कि गर्मी उसकी त्वचा कि ठंडक सें बिल्कुल विपरीत थि। उसनेकोई जवाब नहि दिया, मगर मे खामोशी मे उसकी सांसें सुन सकता थां, उथली औऱ तेज, जौ उसके भीतर उमड़रही भावनाओं केँ कोलाहल कों जाहिर कररही थीं।
"रोमा?" मैंने फिन सें पुकारा, मेरी आवाज़ पहले सें थोड़ी तेज़ थि।
फिन भि वो नहि हिली। कमरे मे एकमात्र आवाज़ छत्त केँ पंखे औऱ मेरे अपने दौड़ते दिल कि लयबद्ध धड़कन थि। अँधेरा एक् लबादे कि तरह महसूस हौ रहा थां जौ हमारे ऊपर फेंक दिया गय़ा थां, जौ हमें दुनिया सें छिपारहा थां, मगरये एक् जेल कि तरह भि महसूस हौ रहा थां जोँ हर गुजरते लम्हा केँ संग मेरादम घोंटरहा थां।
एक् गहरी साँस केँ संग, मैंने कुछ साहस जुटाया औऱ खाट सें उठ गय़ा, गद्दा एक् शांत विरोध केँ संग अपनी स्थान पऱ वापस आँ गय़ा। मे दबे पाँव दरवाजे कि ओर बढ़ा। मेराहाथ दरवाज़े केँ हैंडल पर्र मंडरा रहा थां, मेरादिल मेरेगले मे थां, मैंने उसके हैंडल कों पकड़ केँ धकेला औऱ ऊपरी कुण्डी लगा दि।
कुण्डी कि क्लिक मेरे दूषित इरादों कि घोषणा थि, उन नियमों केँ खिलाफ विद्रोह कां आगाज़ थां, जिन्होंने इतने लंबे वक्त तक हमारे जिंदगी कों नियंत्रित किया थां।
रूम शांत थां, हमारे दिलों केँ संघर्ष औऱ हमारे दिमागों कि लड़ाई कां एक् प्रमाण। अँधेरा जीवित महसूस हुआ, एक् संवेदनशील प्राणी जौ हमारे रहस्यों कों जानता थां औऱ रात केँ शांत क्षणों मे मेरा होंसला बड़ारहा थां।
जब मे उसकेखाट पऱ वापस गय़ा तौ मेरादिल मेरे सीने मे ढोल कि तरहबज रहा थां, उसकी धड़कन मेरे कानों मे गूँजरही थि। वही स्थान जहां मे कुछदेर पहले बैठा थां, उसकेबदन कि गर्माहट अभि भि किसी छाया केँ आलिंगन कि तरह महसूस हौ रही हैं।
धीरे-धीरे सें, मैंने उसकेसिर कों सहलाना शुरुआत कर दिया, मेरी उंगलियाँ उसके रेशमी बालों मे फैलगईं। उसके बालों कां एक् एक् कतरा बेहतरीन रेशम केँ टुकड़े कि तरह महसूस हुआ, जौ सरसराता हुआ मेरी उँगलियों सें फिसलरहा थां। मेराइस तरह सें उसे दुलारना सुखद थां, यह मेरेमन कि उथल-पुथल कों शांतकर रहा थां। ऐसालग रहा थां मानोउसे छूकर मे किसीतरह अपना प्रेम औऱ भावनाएं ट्रांसफर कर सकता हूं, भले हि वो सोतीरहे।
पर्र मेरे अंदर बैठे वासना रूपीउस शैतान कों यह मंज़ूर नहि हुआ औऱ उसने मुझेआगे बढ़कर उसके उभारों कों सहलाने केँ लिए प्रेरित किया। मन मे चलरही कश्मकश सें जूझते हुए मैंने अपनाहाथ उसके बालों सें हटा केँ उसकी उभरी हुइ गांड पऱ रख दिया। मेरे लन्ड मे एक् हि बार मे हज़ारों तरंगें सि प्रवाहित होने लगीं, मेरा एक् दिमाग़ अभि भि मुझे रोकने कि चेष्टा कररहा थां पऱ वासना कां वोँ प्रेत मुझपर हावी थां।
मैंने धीरे-धीरे सें उसकी गांड कों सहलाया, मेरे शरीर मे हज़ारों चींटियों केँ एक् संग रेंगने कां एहसास हुआ।
मैंने एक् नज़र रोमा केँ चेहरे पऱ डाली वोँ मुझे सोती हुईँ किसी अप्सरा सि नज़रआने लगी। उसकी मासूमियत पऱ जैसे मे दिलहार गय़ा औऱ मैंने अपनाहाथ उसकी गांड सें खींच लिया। पहलीबार ऐसालगा जैसे वासना केँ इसखेल मे एक् भइयाजीत गय़ा औऱ वोँ सब अशुद्ध वर्जित इच्छाएं हार गयीं।
मेराहाथ उसकी टी-शर्ट केँ कपड़े केँ ऊपर सें उसके कंधे तक पहुंच गय़ा। उसकेबदन कि गर्मी मेरी हथेली मे समारही थि। मैंने अपनी उँगलियाँ उसकी बाँह पर्र फिराईं, किसी पंछी केँ पंख जैसा हल्का स्पर्श, करीब-करीब ऐसा जैसे मे कोई चमत्कार कररहा हूं।
मुझे नहि पता कि मुझमें साहस केसेआया, मगर मैंने साहस पाया। मे झुक गय़ा, मेरादिल भागती हुइ ट्रेन सें भि तेज़ दौड़रहा थां। मेरा चेहरा उसके चेहरे पऱ मंडरा रहा थां, औऱ मे उसकी सांसों कि गर्मी कों अपनी सांसों केँ संग घुलते हुए महसूस कर सकता थां। उसके बालों कि खुशबू मेरीनाक मे भर गई.
एक् तेज़गति केँ संग, मैंने अपने होंठ उसकेगाल पर्र रखदिए औऱ एक् गहरा चुम्बन लिया जिसमे वासना सें ज़्यादा प्यार कां मिश्रण थां, मेरे जिस्म मे बिजली सि कोंध गयीँ, क्यूंकि मे उसकी प्रतिक्रिया सें डर गय़ा थां, मुझे लगनेलगा केँ किसी भि लम्हा वोँ बस मुझे स्वयं सें दूर धकेल देगी, मगर वो शांतरही, अपनी गहरी नींद मे खोईरही।
मेरे दिमाग़ मे विचारों कां बवंडर उमड़रहा थां, हर एक् पिछले सें भि ज़्यादा विकृत वासनाओं सें भराहुआ थां, मगर मेरादिल स्थिर थां, उस स्त्री केँ लिए प्रेम औऱ करुणा केँ अलावा कुछ भि नहि थां जौ मेरी दुनिया कां केंद्र बन गई थि, भले हि वोँ मेरीसगी बेहन थि।
एक् कोमल स्पर्श सें, मैंने रोमा केँ नंगे कंधे कों सहलाया, मेरी उँगलियाँ उसकी टी-शर्ट कि नेकलाइन तक जाने वाली चिकनी त्वचा कां पतालगा रहीथीं। कपड़ा पतला थां, जिससे मुझे उसके जिस्म कि गर्मी महसूस हौ रही थि। मेरादिल तेजी सें धड़करहा थां, हर धड़कन मेरे कानों मे ढोल कि तरह गूँजरही थि, औऱ मुझेडर थां कि वो किसी भि वक़्त जाग सकती हैं। मगर वो शांत लेटीरही, नींद केँ आगोश मे खोई हुई। मे उसे मात्र दुलार रहा थां, उस सें जुदा होने सें पहले एक् आखरीबार।
रात केँ सन्नाटे मे, मेरामन मेरे अंदर केँ मानव औऱ दानव केँ लिए युद्ध कां मैदान थां। मानव नें कर्तव्य औऱ पारिवारिक बंधनों केँ बारे मे फुसफुसाया, मुझेउस पवित्र विश्वास कि याद दिलाई जोँ भइया होने केँ संगआता हैं। मगर दानव नें जुनून औऱ मेरी आत्मा मे जलने वालीउस दबी हुईँ ख़्वाहिश कि बात कि, जोँ मुझे रोमा केँ जिस्म कों पाने केँ लिए प्रेरित कररही थि जोँ मे हमेशा सें चाहता थां।
मैंने एक् गहरी साँसली, अपने आप् कों भीतर केँ उग्र तूफ़ान केँ ख़िलाफ़ मज़बूत करतेहुए। आरामसे, मैंने अपनाहाथ रोमा केँ गरम कंधे सें हटा लिया। मेरी आँखें एक् अंतिम बार उसकी गर्दन कि कोमल ढलान, उसके कंधे केँ नरम मोड़ औऱ पतले कपडे केँ नीचे उसकी भारी मांसल चूचियों केँ उभारों पऱ टिकगईं।
कांपती उंगलियों केँ संग, मे आगे बढ़ा औऱ उसके चेहरे सें बिखरे बालों कों हटा दिया। वो नींद मे इतनी शांत, इतनी शांतलग रही थि, मानोउसे खुद देवताओं नें गढ़ा होँ। मेरादिल प्रेम औऱ लालसा केँ मिश्रण सें दुख गय़ा जोँ जितना शक्तिशाली थां उतना हि गलत भि थां। मगर मुझेपता थां कि समाज नें हमारे लिए जोँ सीमाएं खींची हें, उनका सम्मान करने केँ लिए मुझेउसे छोड़ना होगा, भले हि मेरी आत्मा विरोध मे चिल्लाती रहे।
मे झुक गय़ा, मेरी साँसें गले मे फंसरही थीं, औऱ मैंने उसके माथे पऱ एक् नरम, लंबे वक्त तक चलने वाला चुंबन दिया। " आईलवयू, रोमी" मैंने फुसफुसा केँ उसकेकान मे कहा। मेरे शब्द मेरी आत्मा कि आवाज़ थें जोँ बड़ी हि मुश्किल सें मेरे होंठों सें फूटे थें।
मुझेउस टाइमयह परवाह नहि थि केँ उसने सुना याँ नहि सुना, मैंने बस अपनेदिल कां एक् बोझ सें हल्का कर लिया थां।
ये मेरे प्रेम कि घोषणा थि, उस प्रेम कि जिसे अलविदा कहना थां जोँ चाहकर भि शायद मुझेउस रूप मे नसीब नहि हौ सकता थां जिसमे मे चाहता थां।
अपने आप् कों खड़े होने केँ लिए मजबूर करतेहुए, मैंने रोमा पऱ एक् अंतिम नज़र डाली, उसकारूप उस अँधेरे कमरे मे भि जगमगा रहा थां। उसकी छातियां एक् स्थिर लय मे उठ औऱ गिर रहीं थि। मैंने महसूस किया कि मेरीआँख केँ एक् छोर सें एक् आंसू कां कतरा फिसलकर मेरेगाल कों भिगो गय़ा।
भारीमन सें, मे उसके कमरे सें बहार आँ गय़ा। उससेहर कदमदूर होने पर्र ऐसालग रहा थां जैसे मेरेबदन कां एक् हिस्सा मुझसे किसी नें छीन लिया हैं औऱ उसकी स्थान पर्र एक् खालीपन छोड़ दिया हैं।
सीड्स ऑफ़ लस्ट (Seeds Of Lust) - Next part mein bada twist
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