मेरा परिवार सुखी संसार - Parivaar Ki Chudai - Episode 1
नमस्ते दोस्तों,
आप् सब कां बहोत बहोत शुक्रिया,
स्टोरी लम्बी हैं, आशा हैं आपको पसंद आएगी,
कई किरदार आएंगे,
कई मौके आएंगे
सम्भव हैं कि स्टोरी मे कुछऐसे सें भि संवाद औऱ परिस्थिती आएंगी जौ आपकोलगे कि कही पर्र यहपढ़ा हैं,
औऱ भि बहोत कुछ होगा, कथा कों मजेदार बनाने केँ लिए आप् सब केँ द्वारा दिएगए सुझावों कों समिल्लित करे जाने कां पूरा प्रयास करूंगा,
मेरा परिवार सुखी संसार - Parivaar Ki Chudai – New Episode
नमस्ते दोस्तों
मे कोई लेखक नहि हु, बस टाइम व्यतीत करने हेतु एक् छोटी सि कोशिश कररहा हु, आशा हैं आपको पंसद आएगी
इस स्टोरी केँ किरदार व स्थानों केँ नाम पूर्णतया काल्पनिक हैं, वैसे तौ यह किस्सा एक् परिवार कि हैं, मगरबीच मे कुछ किरदार आते जाते रहेंगे,
प्रथम अध्याय : -
राजेश सिंह राजस्थान केँ बहोत बड़े अनाज केँ व्यापारी हें,
राजेश सिंह राजस्थान केँ सीकरशहर केँ एक् व्यापारी हैं। उनका अनाज केँ संगसंग शेयर ट्रेडिंग कां भि बिज़नस हैं,। राजेश सिंह दिखने मे ठीक-ठाक औऱ थोड़े पक्के रंग केँ थें
मगर एक् अच्छे धनी परिवार सें होने कि वजह सें उनका शादी कविता सें हौ गय़ा थां जौ कि गोरी-चिट्टी औऱ बेहद हसीन थि। राजेश सिंह कां शादीहुए 28 सालबीत चुके थें
औऱ वे 4 बच्चों केँ पिता बन चुके थें, जिनमें सबसेबड़ा रमेश हैं, उसकी विवाह उर्मिला सें हुइ थि, रमेश अपने बापू कां हाथ बटाता हैं व्यापर मे, औऱ उसकी धर्मपत्नी उर्मिला घऱ कि कामो मे, दुसरे नंबर पऱ राजश्री जिसने अपने कॉलेज कि पढ़ाई पूरीकर ली थि,
अभि घऱ पऱ हि होती हैं जॉब केँ लिए प्रतियोगिता
परीक्षाओ कि तैयारी कररही हैं उस सें छोटा राकेश थां जोँ अभि ९वीं कक्षा मे थां
औऱ सबसे छोटी थि भाग्यश्री जोँ ५वीं मे पढ़ती थि.
राजेश सिंह कि चारो संतान रंग-रूप मे अपनी मम्मी पर्र गईं थि। जिनमें सें राजश्री कों तौ कभी-कभी लोग उसकी मां कि छोटी बेहनसमझ लिया करते थें.
राजश्री कि प्रतियोगिता परीक्षा कां आज परिणाम आँ गय़ा थां जिसमे वो अच्छे अंकों सें पास होँ गई थि.
उसके एक् सप्ताह बादउसे उदयपुर कि एक् कंपनी सें फोन लैटर मिला थां जिसमें उसे इंटरव्यू केँ लिए बुलाया गय़ा थां। राजेश सिंह नें भि उसेवहा जाने केँ लिएहाँ कह दिया थां.
राजेश सिंह - रमेश तुम् राजश्री केँ संग उदयपुर जाओगे,
कविता - क्याँ जरूरत हैं लड़की कों घऱ सें इतनादूर भेजने कि ?? हमारे घऱ मे कोईकमी हैं क्याँ ?
राजेश सिंह - बात पैसो कि कमी कि नहीं हैं, बात वर्तमान वक्त केँ अनुसार बदलने कि औऱ खुद केँ पैरो पऱ खड़े होने कि हैं
कविता - मेरी तोँ इसघऱ मे सुनता हेकौन हैं, उर्मिला बहुचल इनके रास्ते मे खाने केँ लिएकुछ बनादे नहि तोँ पता नहि कोनसी स्थान पऱ क्याँ मिलेगा खाने केँ लिए,
उर्मिला - जी माँ जी
राजश्री पहलीबार घऱ सें इतनीदूर रहनेजा रही थि सो वो बहुत उत्साहित थि। राजश्री नें उदयपुर जाने कि तैयारियाँ शुरुआत करदीं। वो कुछनए कपड़े, जूते औऱ मेक-अप कां सामान खरीदलाई थि.
जब उसकी मां नें उसे ज़्यादा खर्चा न् करने कि हिदायत दि तोँ राजेश सिंह नें चुपके सें उसे अपना ए.टी.एम। कार्ड थमा दिया थां.
वैसे भि वो राजेश सिंह कि लाड़ली थि। वे हमेशा उसकीहर ख्वाहिश पूरी करतेरहे थें.
रात कों रमेश केँ कमरे मे उर्मिला घऱ कां पूराकम करकेआई तौ देखा कि रमेश अभि तक जागरहा हैं नहि तौ साधारणतया उर्मिला कों आके उससे दोबारा जगाना पड़ता हैं,
उर्मिला - क्याँ बात हैं? आज अभि तक जागरहे होँ, धन्यभाग मेरे.
उर्मिला (गुनगुनाते हुवे) -
"आप् केँ प्रेम मे हम् सवारने लगे
देख केँ आप् कों हम् निखार नें लगे"
रमेश - अरेवाउ, तुम् तोँ आज लगता हैं मार हि डालोगी मुझे,
उर्मिला अभि अभि नहाके स्नानघर सें आई थि, रेशमी वस्त्र उसके जिस्म पऱ ऐसेलग रहे थें कि अब फिसले तब फिसले, खुले बालो कि कारण एक् दम अप्सरा लगरही थि
रमेश भि गुनगुनाते हुवे बोला
"यह रेशमी जुल्फे, यह शरबती आंखे
इन्हें देखकर जीरहे हैं सब"
उर्मिला - बसबस रहनेदो, अधिक बाते बनाने कि जरुरत नहि हैं, ससुरजी जी कों बोल नहि सकते थें क्याँ कि आप् नहि जा सकते, आप् तोँ जानते हौ मुझे आपके बिना नींद नहि आती,
रमेश - मेरे बिना याँ इसके बिना (अपने लन्ड कि औऱ इशारा करते हुवे)
उर्मिला - जोँ चाहेसमझ लो, बस
रमेश - देखोमना तोँ मे नहि कर सकता, मे नहि तोँ फिनकौन जायेगा राजश्री केँ संग,
उर्मिला - वोँ सभी मे नहि जानती,
रमेश - अरे मेरीजान क्रोध क्यूं करती होँ, आज औऱ कल कि रात हैं न्, तुम्हारी बिस्तर तोड़ चुदाई केँ लिए, औऱ आते वक़्त तुम्हे लिए एक् अच्छी सि साडी लेता आऊंगा, अब प्रसन्न हौ,
उर्मिला - (मन कों समझाने केँ तरीके सें ) दूसरा कोई उपाय हैं तौ बताओ, ?
रमेश - अभि करताहु
अब उर्मिला नें उससेकुछ भि नहि बोला औऱ बस रमेश कों कनखियों सें लगातार देखती रही औऱ जैसे हि रमेश उसके एक् दमपास गय़ा तौ उसकीगोद मे छोटे बच्चो कि तरहसमा गई थि औऱ
रमेश उर्मिला कों अपनीगोद मे लेकर बिस्तर पर्र पहुंच गय़ा औऱ अब उर्मिला कों चूमने लगा.
इसमें उर्मिला भि उसकी सहायता करने लगती हैं,
(यहा सें आगे उर्मिला कों उर्मी कहके संबोधित करेंगे)
अबकभी उर्मी रमेश केँ ऊपर तौ कभी रमेश उर्मी केँ ऊपर आँ जाता.
दोनों एक् दूसरे केँ अंदरसमा रह थें औऱ पूरे कमरे मे बस एम्म मुऊऊ आअहह उूुउउउउंम कि गूँज फेली हुइ थि.
फिन जैसे हि रमेश नें पूरेदम सें उर्मी केँ चुंचो कों दबाया तौ उर्मी उस दर्द कि वजह सें चिल्ला उठी औऱ उस जोरदार चीख कों सुनकर रमेश नें उर्मी केँ होंठो कों अपने होंठो सें बंदकर दिए,
जिसकी वजह सें उर्मी कि आवाज़ अंदर हि दबकररह गई औऱ रमेश नें एक् बारफिन सें उर्मी केँ चुंचो कों दबाना शुरुआत कर दिया.
उस आपाधापी औऱ चुम्माचाटी मे उसकी रेशमी पाजामी कब उतरीपता हि नहि चला, औऱ अब रमेश नें उर्मी कि रेशमी कुर्ती कों भि उतारकर फेंक दिया
रेशमो कुर्ती उतरते हि उसकीलाल चोली (ब्रा) औऱ लाल थोंग दिखाए दि,
रमेश - मैंने कहा थां नं कि आज तोँ मारने केँ मूड सें हि आई हौ, (क्यूंकि यह अंतवस्त्र कां सेट रमेश नें हि ला केँ दिया थां औऱ रमेश कों लाल अंतवस्त्र बहोत हि ज़्यादा पसन्द हैं)
उर्मी कुछ नहि बोलि औऱ अपनी जालीदार लालकलर कि चोली (ब्रा) मे उसके सामने लेटी हुईँ थि, उनकाबेड स्प्रिंग वाला होने कि वजह सें वोँ लोग उसमें दबते हि जारह थें,
अब तोँ जैसे रमेश मे कोई आत्मा प्रवेश कर गई, होँ वोँ अब उर्मी पर्र हावी होनेलगा, उसने अपना पूरा जिस्म उर्मी पऱ एकदम ढीला छोड़कर पागलो कि तरह उर्मी कि चुम्मि लेनेलगा थां,
जैसे कि उसनेकई सालों सें किसी कों चूमा नाँ होँ.अब धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसने मेरेगले कों चूमते हुए वोँ उर्मी केँ चुंचो पऱ पहुंच गय़ा औऱ
उसनेउस लालरंग कि चोली कों बड़े प्रेम सें उतार फेंका,
अब उर्मी केँ दोनों चुंचे उसके दोनों होंठो पऱ थें औऱ उर्मी अपनी दोनों आखेंबंद करकेइस सारे अनुभव केँ मज़े लें रही थि औऱ उसकेसंग संग मे ज़ोर ज़ोर कि सिसकियाँ भि लें रही थि.
दोस्तों जैसा कि मैंने पहले आपको बताया थां कि राजेश सिंह कां घऱ बहोत बड़ा हैं औऱ प्रथम तल पर्र राजश्री औऱ रमेश कां रूम हैं बाकीसभी कां भूमितल पर्र
औऱ रात केँ सन्नाटे मे इतनी शांति होने कि वजह सें उर्मी कि आवाज़ गूंजने लगी थि,
उर्मी - आआयुम्मम उफ्फ्फफ्फ्फ़
मगर उर्मी जबयह आंहे भरती तोँ दुबारा उसकी आवाज़ उसके हि कानों मे सुनाई पड़ती औऱ इधरइन सभी कि बिना परवाह किया रमेश उर्मी केँ चुंचो कों खाएजा रहा थां
औऱ उर्मी अपने हाथों सें उसके बालों कों पकड़कर अपने चुंचो पऱ औऱ भि ज़ोर सें दबाने लगी थि,
जिसकी वजह सें रमेश औऱ भि ज़ोरज़ोर सें उर्मी केँ 36 केँ चुंचो कों अपने मुहं सें चूसते हुए निप्पल कों निचोड़े जारहा थां औऱ उर्मी नें बहोत ज़ोर सें उसे जकड़ा हुआ थां।
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द्वितीय अध्याय :-
ऐसा नहि हैं कि उर्मी नें पहलेकभी किसी कां भि लन्ड नाँ पकड़ा थां, शादी केँ पूर्व वोँ बहोत हि रंगीन प्रवर्ती कि थि जौ आज भि हैं,
रमेश उर्मी कों ऊपर चूमता, मगर उर्मी नें अपने पांव पहले हि फैलारखे थें,
जिसवजह सें रमेश कां लन्ड निक्कर केँ अन्दर सें उर्मी कि बुर पर्र उनकी थोंग केँ ऊपर सें रगड़ेजा रहा थां,
उस कारणवश उर्मी औऱ भि ज़्यादा पगलाती जारही थि औऱ एकदम मदहोश होँ बैठी थि,
दोस्तों यहसभी प्रथम तल पऱ हौ रहा थां औऱ पास मे हि राजश्री कां कक्ष भि थां जिसमे धीरे-धीरे रमेश औऱ उर्मी कि उंहआंह सुनीजा सकती थि औऱ सुनी भि जारही थि,
औऱ वोँ उंहअहह राजश्री कों पागल कियेजा रहा थि,
जब सें उर्मी उसकी भाभीबन केँ इसघऱ मे आई थि तब सें हि राजश्री प्रत्येक रात्रि राजश्रीउनकी चुदाई कि आवाजे सुनसुन कर ऊँगली याँ तोँ कभीकोई लम्बी सब्जी कां उपयोग करके स्वयं कि बुर याँ चूत कि वासना कों शांत किया करती थि औऱ
ऐसा करतेउसे बहुत वक्त होँ गय़ा थां, पऱ क्याँ करे बदनामी केँ डर सें उसनेआज तक कभी वास्तविक लन्ड केँ नं तौ दर्शन किये औऱ नाँ कभी बुर कि आग बुझाने केँ उपयोग मे लिया,
राजश्री मन मे - काशयह चुदाई कां ज्ञान मुझे पहले होता तोँ मे अबतब रमेश सें चुदकर गर्भवती हौ गयीँ, होती,
अन्दर रमेश केँ कक्ष मे
उर्मी - मे तुमसे बहोत प्रेम करती हूं बेबी
इधर रमेश भि - मे भि तुमसे बहोत प्रेम करता हूं बेबी,
अपने कक्ष मे राजश्री - मे भि आपके लन्ड कों बहोत प्यार करतीहु
रमेश नें यह कहकर उर्मी केँ चुंचो कों काटा औऱ रमेश नीचे उर्मी कि नाभि पर्र पहुंच गय़ा.अब रमेश उर्मी कि नाभि कों चूमने चाटने लगा,
उर्मी तोँ उसकीवजह सें बिल्कुल उतावलापन हि उठी। उर्मी नें एक् अजब सां अहसास महसूस किया कि वोँ आज पूर्णत पागल हौ जाएगी,
अब रामेश नें उर्मी कि बुर पऱ अपनी एक् ऊँगली कों रख दिया औऱ उसके स्पर्श सें उर्मी तौ उसीसमय कांपउठी.
उर्मी कों इस टाइम रमेश पर्र इतना प्रेम आनेलगा थां,
रमेश कि उँगलियाँ उर्मी कि गर्म बुर कों छूरही थि,
अब रमेश धीरे-धीरे धीरे-धीरे नीचेआते हुए जल्दी उर्मी कि बुर केँ पास पहुंचकर जीभ सें उर्मी कि बुर कों चाटने चूसने लगा थां
उर्मी - आअहहुउ उम्म्मउूउउ उफ़फ्फ़ हाँ उउक्ककक बेबी प्लीज़ मेरी बुर मे अब जल्द सें अपना लन्ड डालदो,
उफफ्फ्फ्फ़ प्लीज अब उर्मी अधिक औऱ नहि सह सकती
उर्मी इतनी ज्यादा गरम हौ चुकी थि कि उसे बिल्कुल भि होश नहि थां कि उर्मी कि चीखने चिल्लाने कि आवाज़ बाहर्
तक जारही थि, औऱ उन आवाजो कों सुनकर राजश्री कि हालत भि खराबहोई जारही थि
उर्मी तौ बसआज रमेश सें आज पूरी ताकत सें अपनी चुदाई करवाना चाहती थि। क्यूंकि संभवतः अगलीबार उसे लन्ड शायददस सें पंद्रह दिनबाद मिले
रमेश केँ उदयपुर सें आने केँ बाद
अब रमेश भि उर्मी कि बुर कों औऱ भि ज़ोर ज़ोर सें चाटने लगा थां। तभी उर्मी अपने दोनों पैरों कों पूरा फैलाकर उसकासर पकड़कर अपनी
पूरी ताकत लगाकर उसका मुहं बुर पर्र दबा लिया, जिसकी वजह सें उसकीजीभ पूरी अंदर तक जा पहुंची औऱ
उर्मी एकदम सें उसको जकड़कर रमेश केँ मुहं पऱ अपनी बुर कां गर्म गर्म पानी छोड़ दिया,
जिसकी वजह सें रमेश कां पूरा मुहं उर्मी केँ चिपचिपे गर्ममाल सें भर गय़ा औऱ उसने बड़े प्रेम सें रमेश नें सारा पानीगटक लिया औऱ फिनऊपर उर्मी मुहं केँ पास आँ गय़ा,
उसने अपने होंठो पर्र अपने दोनों गीले होंठरख दिए औऱ रमेश उर्मी कों किस करनेलगा.
कुछदेर चूमते हुए उर्मी नीचे आँ गई औऱ जब उर्मी नें रमेश केँ कड़क लन्ड कों देखा तोँ उर्मी बिल्कुल हि दंगरह गई, यह लन्ड प्रत्येक दिन वाला
लन्ड नहि लगरहा थां, आजकुछ अलग हि दिखाई देरहा थां
रमेश कां लन्ड लगभग 6 इंच लंबा औऱ लगभग 3 सेंटीमीटर मोटा थां, इसलिये उसका लन्ड कभी भि उर्मी केँ मुहं मे पूरीतरह सें नहि घुस पाया थां,
मगर उर्मी भि कम खिलाडी नहि थि मुंह मे भले हि न् आया होँ पऱ बुर मे पूरा कां पूरा लेँ लेती थि,
थोड़ीडर तक उर्मी लन्ड कों चाटरही थि, अब रमेश नें उठकर लन्ड कों उर्मी कि बुर केँ मुहं पऱ सेट किया.
उर्मी - बेबी बहोत मोटा हैं आपका, प्लीज मेरा थोड़ा सां ख्याल जरुर रखना.
रमेश - अरे दोस्त पहलीबार थोड़ी हैं,
उर्मी - पहलीबार नहि पर्र इसकी मोटाई मेरी हालत ख़राबकर देती हैं
रमेश - आज सें पहले तुम्हे कुछ नहि होने दियाअब केसेकुछ होने दूंगा तुम्हें कुछ भि नहि होगा
फिन रमेश लन्ड कों सेट करके उर्मी चेहरे केँ पास आँ गय़ा। औऱ फिनबड़े प्रेम सें उर्मी कि बुर केँ मुहं पऱ अपना टोपारखा औऱ धीरे-धीरे सें अंदर कि तरफ दबावबना दिया,
जिसकी वजह सें उसके लन्ड कां टोपा उर्मी कि बुर केँ अंदरजा आया औऱ उतने मे उर्मी उर्मी मुहं सें बहोत ज़ोर कि चीख निकल पड़ी,
उर्मी - उफ्फ्फ्फ़ आईईई मां उर्मी मर गई, प्लीज थोड़ा धीरे-धीरे करो, बहोत दर्द हौ रहा हैं, इस दर्द सें मर जाउंगी उूुुउउ एम्म्मएम्म उउंमम्मा
रमेश - अरे दोस्त यह क्याँ हैं, यहरोज कां हैं तुम्हारा, इतने महीने सें चुदवा रही हौ, फिन भि इतना क्याँ चिल्लाना,
उर्मी - तुम् तौ अच्छे सें जानते हौ कि मुझे चुदवाते वक्त चिल्लाना बहोत पंसद हैं,
इसकेआगे उर्मी कुछ भि बोलती रमेश नें झट सें उर्मी केँ होंठो कों अपने होंठो सें बंदकर दिया औऱ रमेश धीरे-धीरे धीरे-धीरे उर्मी कि चुदाई करनेलगा
कुछदेर तक उर्मी केँ चुंचो कों सहलाने लगा, उसने उर्मी पूरेबदन कों अपने हल्के हाथ सें सहलाया मगर जैसे हि उसने उसके होंठ उर्मी केँ होंठो सें हटाये उर्मी फिन सें चिल्लाने लगी
उर्मी - आअहहह उूउउउउफफफ्फ़ उूउउएम्म्म एम्म्म उउउक्च्छ हुउूहह
रमेश - अरे दोस्त मरवाओगी तुम्.
उर्मी - बेशर्मी सें बोलीं - मरवा तोँ रहीहु
उर्मी - अबबस जल्द सें चोददो, अब अधिक नहि चिल्लाउंगी
रमेश उर्मी कि येबात सुनकर बहोत खुश हौ गय़ा। उसने उर्मी येबात सुनकर औऱ एक् बार जोरदार धक्का देकर अपना पूरा 6 इंच कां मोटा लन्ड पूरा उर्मी कि
बुर केँ अंदरडाल दिया, इस अचानक आक्रमण सें उर्मी एकदम सें चिल्ला उठी,
उर्मी - आआहहहुउ उउफफफ्फ़उू उउईईईईईइ मम्मी मर गई, आउूउचहह उफ्फ्फफ्फ्फ़ मां
बहोत दर्द हौ रहा हैं, ऐसाकोई करता हैं क्याँ तुमने तौ मुझेमार हि डाला थां
मगर रमेश उसकी बातो कों अनसुना करते हुवे उर्मी कि बुर मे ज़ोर ज़ोर केँ धक्के मारने लगा औऱ लगातार उर्मी कि आवाज़ निकलती रही,
उर्मी - आआहह हुउऊउफफफ्फ़ उूईईईईईई उउउफ़फ्फु.
अब उर्मी भि बराबर संगदे रही थि उसने रमेश कों ज़ोर सें जकड़ा हुआ थां,
रमेश उर्मी कि बुर मे अपने लन्ड कों घोड़े पर्र सवार कि तरहउचक उचककर धक्के देतेहुए चोदेजा रहा थां
कुछ वक्तबाद उर्मी औऱ रमेश खुशी केँ सरोवर मे सराबोर हौ गए औऱ सभीकुछ भूलकर बस चुदाई कि दुनिया मे खोगए,
उर्मी भि अब उसकेसंग संग नीचे सें अपनी चूतड़ कों उठा उठाकर धक्के देनेलगी थि औऱ उर्मी अपनीकमर कों उठाकर रमेश सें चुदने लगी.
बहोत टाइम होँ गय़ा थां तौ भि रमेश उर्मी कों लगातार धक्के देकर चोदता जारहा थां,
रमेश बिल्कुल भि रुकने कां नाम हि नहि लेँ रहा थां, पता नहि उस पऱ कौनसा भूत सवार थां,
उर्मी इसबीच नाँ जाने कितनी बारझड़ गई थि, उर्मी कों इसबात कां बिल्कुल भि पता नहि थां,
अब पूरेरूम मे उन दोनों केँ नंगे शरीर केँ टकराने कि फचफचफच कि आवाज़ औऱ उर्मी कि सिसकियों कि आवाज़ गूंजने लगी थि.
औऱ संग हि राजश्री भि ऊँगली करते करते कितनी बारझड गयीँ, होगी
पूरे एक् घंटे तक उर्मी उसी केँ नीचे लेटी हुइ चुदरही थि औऱ रमेश भि बहोत जोश मे आकर उर्मी चोदेजा रहा थां.
फिनकभी उर्मी उसकोकिस करती तौ कभी रमेश उर्मी कों किस करता तोँ कभी रमेश उर्मी केँ चुंचो कों चूमता औऱ कभीउसे जमकर पकड़कर निचोड़ देता
तोँ कभी रमेश उर्मी केँ चुंचो पऱ अपनासर रखकरउस पर्र लेट जाता। रमेश जौ भि उर्मी केँ संग करता उर्मी उसका पूरा पूरासंग देती जाती.
इसी धक्कमपेल मे रमेश उर्मी कि बुर मे हि झड गय़ा, औऱ ऐसे एक् दुसरे कि बांहों मे नंगे हि सोगए,
इधर राजश्री भि बिस्तर पर्र पड़ेपड़े सोचरही थि कि इस ट्रिप पऱ भैया केँ लन्ड कों चख हि लियाजाए, उसकी बहोत सि सहेलिया ऐसा हि कररही थि,
यही सोचते सोचते कब उसकीआँख लग गयीँ, पता हि नहि चला
सुभह उसकीआँख उर्मी कि आवाज़ सें हि खुली
जोँ कि उसे जगाने आयी थि
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