शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
धीरे-धीरे धीरे-धीरे साम गहराने लगी औऱ अजयदिन भर राज्य केँ काम देखने केँ बाद अपनेघऱ पहुंच गय़ा तोँ उसकी माता मेनका बोलि:"
" कैसारहा पहलादिन पुत्र ?
अजय धीरे-धीरे बेड पऱ बैठ गय़ा औऱ बोला:" अच्छा रहा माता, बसदिन भर लोगो सें मुलाकात करी औऱ अभि कि सुरक्षा पद्धति कां जायजा लिया ताकिआगे इसमें जरूरी बदलाव करसकू!
मेनका:" यह तोँ बहोत अच्छा किया आपने! बहुतथक गए होंगे मे आपकेलिए कुछ खाने केँ लिए लेकरआती हु!
इतना कहकर मेनका चली गई औऱ थोड़ी देरबाद एक् दूध कां ग्लास लेकर आँ गई औऱ अजय तोँ दिया तौ अजयदूध पीतेहुए बोला:"
" माता मेरे सेनापति बनने केँ बाद मैने आपकोकोई तोहफा नहीं दिया हैं ! आपको बुरा तौ नहींलगा नां?
मेनका:" नहीं पुत्र, तुम् सेनापति बनगए हौ यही मेरेलिए असली तोहफा हैं!
अजय नें दूध कां ग्लास खाली करके एक् तरफरख दिया औऱ अपनेबैग कों खोलते हुए बोला:"
" माता मे आपकेलिए कुछ तोहफा लेकरआया हु! उम्मीद हें आपको पसन्द आयेगा!
इतना कहकर उसनेबैग कों खोला औऱ एक् बड़े सें पैकेट कों मेनका कि तरफ बढ़ा दिया जिसे मेनका नें उत्सुकता सें थाम किया औऱ बोलीं:"
" पुत्र वैसे तोँ तोहफे कि जरूरत नहीं थि! मगर लें आए होँ तौ ठुकराना सही नहीं होगा!
इतना कहकर वोँ पैकेट कों खोलने लगी औऱ जैसे हि पैकेट खुला तौ उसकी आंखेफटी कि फटीरह गई क्योंकि उसमेदो बेहद आकर्षक औऱ रंगीन साडिया थि! मेनका थोड़ी देर तक अजीब सि नजरो सें साडिया देखती रही औऱ फिन बोलीं:"
" पुत्र यहसभी मेरेलिए नहीं हें! मुझेमाफ करनामगर मे यह तोहफा नहीं लेँ सकती!
अजय उसकीबात सुनकर बेड सें खड़ाहुआ औऱ उसकाहाथ पकड़कर बोला:"
" ऐसा नं कहे माता! क्याँ आपको पसन्द नहि आया क्याँ ?
मेनका उसके द्वारा अपनाहाथ पकड़े जाने सें कांपउठी औऱ बोलीं:" बात मनपसंद कि नहीं हैं पुत्र, रंगीन कपड़े अब मेरी जिदंगी कां हिस्सा नहीं हें!
अजय:"मगर माता आपको समझना चाहिए कि रंगीन कपड़ो मे आप् बेहद आकर्षक लगती हें! क्याँ मे झूठबोल रहा हूं!
मेनका नें उससे अपनाहाथ छुड़ा लिया औऱ बोलीं:" बात वोँ नहीं हें कि मे कैसी लगती हूं बातयह हैं कि समाज मुझे इसकी इजाजत नहीं देता!
अजय उसकेठीक सामने आँ गय़ा औऱ बोला:"मगर आपनेजब मुझे तलवार देने केँ लिए रंगीन कपड़े पहने तोँ तब आपको समाज कि चिंता नहि हुइ ?
मेनका नें एक् बार उसकीतरफ देखा औऱ बोलीं:" वोँ सभी मैने परंपरा कों निभाने केँ लिए कियायह तुम् अच्छे सें जानते होँ!
मेनका: ठीक हें मगर आपको वोँ रंगीन कपड़े पहनकर खुशी नहीं हुईँ थि क्याँ ?
मेनका एक् लम्हा केँ लिए खामोश होँ गई औऱ फिनकुछ अपनी नजरे नीचे करकेकुछ सोचते हुए बोलि:" नहीं बिलकुल नहीं हुई थि पुत्र, मुझेकोई खुशी नहीं हुइ थि!
अजय नें उसकाझूठ साफ पकड़ लिया औऱ बोला:" तोँ फिन आप् नजरे चुरा क्यूं रही हें ? हिम्मत हें तोँ मेरी आंखो मे आंखे डालकर कहिए कि खुशी नहीं हुई थीं!
मेनका कां पूरा शरीरकाम कांपउठा औऱ नजरे नीचेकिए हुए हि बोलीं: रात होनेलगी हें मुझे खानां बनाना होगा!
इतना कहकर वोँ जानेलगी तोँ अजय नें उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ बोला:"यह कोईबात नहि हुई माता! यह मेरे प्रश्न कां जवाब नहीं हें! पहले मेरे प्रश्न कां जवाब दीजिए आप्!
मेनका कुछ नहीं बोलीं औऱ अपनाहाथ छुड़ाने कि कोशिश करनेलगी मगरअजय कि मजबूत पकड़ सें आजाद नहीं हुई औऱ बोलीं:"
" अजय मुझेकोई खुशी नहीं हुइ थि बसअबखुश हौ नाँ! अब मेराहाथ छोड़ो!
अजय नें उसकाहाथ पकड़े रखा औऱ बोला:"अगर खुशी नहीं हुई तोँ फिन आप् कलरात कों फिन सें नीचे रंगीन कपड़े क्यूं पहने हुइ थि माता?
अजय कि बात सुनकर मेनका कां दिल तेजी सें धड़कउठा औऱ उसका मुंह लज्जा सें लाल होँ गय़ा औऱ कुछ नहीं बोलीं तौ अजयफिन सें बोला:"
" जवाब दीजिए नां माता आप्! मे आपसे हि पूछरहा हूं!
मेनका नें झुकी हुई नजरो सें बस इतना हि कहा:" मुझेकुछ नहींपता पुत्र!
अजय जानता थां औऱ उसकी माँ सच बोलने केँ हिम्मत नहीं जुटापा रही हैं तोँ बोला:"
" मे जानता हूं माता कि आप् स्वयं कों रंगीन कपड़ो मे देख्ना पसन्द करती हूं! आप् हि क्याँ दुनिया कि हर नारी कों स्वयं कों हसीन देख्ना अच्छा लगता हें! बस इसलिये मे आपकेलिए रंगीन साड़िया लेँ आया थां ताकि आपको थोड़ी खुशी सें सकू!
मेनका उसकीबात सुनकर चुप खड़ीरही तौ अजयआगे बोला:"
" माता मे यह साड़ी आपकी अलमारी मे रख दूंगा! जब आपकामन करेपहन लेना! आपकी खुशी मे हि मेरी खुशी हें!
मेनका उसकीबात सुनकर थोडा मायूस होती हुइ बोलीं:"
" मगर बेटा मेरी मजबूरी समझने कि कोशिश करो, यह समाज केँ नियमो केँ खिलाफ हें!
अजय नें उसका चेहरा अपनेहाथ सें ऊपर किया औऱ बोला:"
" मगर इससे आपको खुशी मिलती हें मेरेलिए इतना बहोत हें माता! समाज औऱ उसके नियम मेरेलिए मायने नहि रखते
अजय कि बात सुनकर उसे थोड़ी हिम्मत मिलीमगर अभि भि मेनका कां चेहरे लालहुआ थां औऱ आंखे लज्जा सें झुका हुईँ थि औऱ बोलि:"
" मगर पुत्र किसी नें मुझेऐसे कपड़ो मे देख लिया तौ समाज मुझे जीने नहीं देगा!
अजय उसकीबात सुनकर समझ गय़ा कि उसकी माता उसकीबात कों समझरही थि तौ अजय नें एक् हाथअब उसके कंधे पर्र रख दिया औऱ बोला:"
" कोई नहीं देखेगा, आप् बस धीरे-धीरे नीचे कमरे मे जाकरपहन लेना औऱ अपनी खुशी पूरी करना!
अजय कि बात सुनकर मेनका कों कलरात कि बातयाद आँ गई कि केसेकल वोँ स्वयं कों देखकर बेकाबू हौ गई थि औऱ अजय नें भि उसेदेख लिया थां तोँ यह सोचकर मेनका कां पूरा शरीर कांपउठा औऱ बोलीं:
" मगर पुत्र फिन भि यहसही नहीं हैं, मुझेऐसा नहीं करना चाहिए!
अजयअब थोडा सां उसके लगभगआया औऱ उसके दोनो कंधो कों थामते हुए बोला:"
" आपको रंगीन कपड़ो मे स्वयं कों देखकर खुशी मिलती हैं याँ नहि?
मेनका थोड़ी देरचुप रही तौ अजय नें उसके कंधे कों हल्का सां दबाया औऱ बोला:
" बताए नाँ माता? मे आपसे हि बातकर रहा हूं! आपको मेरीशपथ हें!
उसकीशपथ वालीबात सुनकर मेनका नें अपनी गर्दन कों इकरार मे हिला दिया तोँ अजयसमझ गय़ा कि उसकी मम्मी झिझक महसूस कररही हैं तोँ उसने उसके कंधो कों हल्का सां दबाते हुएकहा:"
" ऐसे नहीं मुंह सें बोलिए नं माता आप्!
उसकीबात सुनकर मेनका नें फिन सें लज्जा सें मुंह खुला लिया औऱ धीरे-धीरे सें हिम्मत करके बोलि:"
" हान मुझे खुशी मिलती हैं!
मेनका कि बात सुनकर अजय खुशी सें भरउठा औऱ कंधो कों थोडा सख्ती सें सहलाते हुए बोला:"ऐसे नहीं माता, यह बताओ कि क्याँ करके खुशी मिलती हैं?
मेनका उसकीबात सुनकर लज्जा सें लाल हौ गई औऱ उसे गुस्से सें घूरकर देखने लगी तौ अजय बोला;"ऐसे घूरने सें काम नहि चलेगा माता, बताए नां क्याँ करके खुशी मिलती हैं!
अजय कि बात सुनकर मेनका अंदर तक कांपउठी औऱ उसकादिल अब तेजी सें धड़करहा थां औऱ उसने अपनी गर्दन कों इसके कंधे पऱ टिका दिया औऱ बोलि:
" मुमु.मु। मुझे रंगीन कपड़े पहनकर बेहद खुशी मिलती हैं!
इतना कहकर मेनका नें लज्जा सें पानी पानी होकर अपना मुंह नीचे पूरीतरह सें उसके कंधे पर्र टिका दिया औऱ खड़ी खड़ी कांपने लगीं तौ अजय नें हिम्मत करके उसकीकमर पऱ अपनेहाथ बांधदिए औऱ मेनका लज्जा सें लजाती हुईँ उससे कसकर लिपट गई तौ अजय नें भि उसे अपनी मजबूत बांहों मे भर लिया औऱ बोला:"
" मेरे द्वारा लाई हुइ रंगीन साडिया आपको पसन्द आई हैं नाँ माता ?
अजय कि बात सुनकर मेनका कां शरीरमचल पड़ा औऱ मेनका नें अपना मुंह लज्जा सें उसकी चौड़ी छाती मे छुपा लिया तोँ अजय नें पहलीबार बिना किसीडर औऱ लज्जा केँ उसके हसीन चेहरे कों अपने दोनो हाथो मे भर लिया औऱ दोनो कि नजरेआपस मे टकरा गई औऱ अजय उसकी आंखो मे देखते हुए बोला;"
" बताए नां माता आपको मनपसंद आई रंगीन साडिया याँ नहि ?
मेनका अबचाह कर भि अपना चेहरा नीचे नहींकर सकती थि इसलिये हिम्मत करके उसकी आंखो मे देखते हुए धीरे-धीरे सें बोलि:"
" हान मनपसंद आई, मुझे बेहद ज़्यादा पसन्द आई!
मेनका केँ मुंह सें पूर्ण स्वीकृति मिलते हि अजय कि हिम्मत बढ़ गई औऱ अजय अपने अंगूठे कों उसके कांपते हुए होंठो पऱ फेरते हुए बोला:"
" आप् इन्हे खुशी खुशी पहनोगी न् माता?
अजय केँ सख्त अंगूठे केँ अपने नाजुक होंठो कों छूते हि मेनका कां धैर्य जवाबदे गय़ा औऱ उससे कसकर लिपटते हुए बोलि:"
" हान पहनूंगी, जरूर पहनुगी!
अजय नें भि अब मेनका कों अपनी बांहों मे कस लिया औऱ दोनो माँ बेटे एक् दूसरे सें लिपट पड़े!ऐसे हि बहुतदेर तक दोनो एक् दूसरे कि बांहों मे खड़ेरहे औऱ फिन मेनका बोलीं:"
" अच्छा अब छोड़ो मुझे, खानां बनाना होगा!
उसकीबात सुनकर अजय नें उसे अपनी बाहों सें आजादकर दिया औऱ मेनका नें साड़ीया उठाई औऱ फिन अपने कक्ष कि ओरचल पड़ी! जैसे हि वोँ बाहर् जाने वाली थि तौ अजय पीछे सें बोला:"
" माता कलदिन मे मे नीचे कक्ष मे आपकेलिए नए बड़े बड़े शीशे लगवा दूंगा ताकि आपको औऱ ज़्यादा खुशी मिले!
उसकीबात सुनकर मेनका पलटी औऱ उसे थप्पड़ मारने कां इशारा करके बाहर् निकल गई तोँ अजय केँ होंठो पर्र मुस्कान आँ गई!
वहीं दूसरी तरफ विक्रम लगभग 10 बजेमहल सें निकला औऱ सुल्तानपुर मे दाखिल हौ गय़ा! पहरेदार कों उसने बताया कि वोँ रहीम सें मिलने केँ लिएजा रहा हैं तोँ उसने मुझे जाने कि इजाजत दे दि औऱ उसकेबाद विक्रम कल्लू सुनार कि दुकान पऱ पहुंच गय़ा औऱ बोला;"
" मुझेकुछ कीमती अंगूठियां चाहिए थि!
कल्लू जौ कि अपनी दुकान बंद कि करने वाला थां एक् अजनबी ग्राहक कों देखकर हैरान हुआमगर खुश होतेहुए बोला:"
" ठीक हैं आपको कों मे कुछ नायबचीज दिखाता हु!
कल्लू अपनी अलमारी सें अंगूठियां निकालने लगा औऱ विक्रम नें मौका देखकर उसे पीछे सें दबोच लिया औऱ थोड़ी हि देरबाद वोँ बेहोश उसकी बांहों मे झूलरहा थां! विक्रम नें दुकान कों अंदर सें बंदकर दिया औऱ प्रतीक्षा करनेलगा! 11 बजे केँ आसपास उसने सावधानी सें दरवाजा खोला औऱ इधरउधर देखते हुए दुकान कों बंद किया औऱ फिन कल्लू कों अपने कंधे पऱ डालकर महल केँ पीछे केँ हिस्से मे आँ गय़ा औऱ सावधानी सें इधरउधर देखते हुए गुफा मे दाखिल होँ गय़ा औऱ गुफा केँ मुंह कों बंद करके अंदर कि तरफचल पड़ा!
वहीं दूसरी तरफआज सलमा बेहदखुश थि क्योंकि दोदिन केँ बाद विक्रम उससे मिलने आँ रहा थां औऱ सलमा केँ तन जिस्म मे सिरहन दौड़रही थि, सलमा बारबार शीशे मे स्वयं कों निहार रही थि औऱ सीमा सें बोलि;"
" सीमा हमारे लिए चमेली केँ फूलो कां गजरा लें आई होँ नां ?
सीमा उसकीबात सुनकर हल्की सि मुस्कान देती हुई बोलि:"
" जी शहजादी देखिए यहरहा मगररात कों गजरा लगाकर कहां जाने वाली होँ आप् ?
सलमा उसकीबात सुनकर मुस्कुरा उठी औऱ बोलीं "
" कहीं नहि, बसऐसे हि पहनने कां मन किया थां तौ पहन लिया!
सीमा:" पहेलियां नां बुझाए शहजादी, आपके चेहरे कि खुशीकुछ ओर हि बयानकर रही हैं!
सलमा उसकीबात सुनकर मचलउठी औऱ बोलि:" बहोत बाते करती होँ तुम्, चलो जल्द सें यह गजरा मेरे बालो मे लगादो!
उसकीबात सुनकर सीमा उसके बालो मे चमेली केँ फूलो कां गजरा लगाती हुइ बोलीं:
" क्याँ युवराज विक्रम सें मिलने वाली होँ आप् आज? मुझेबता देंगी तोँ मे कुछ सहायता हि कर दूंगी आपकी!
उसकीबात सुनकर सलमा केँ चेहरे पऱ लज्जा कि लाली दौड़ गई औऱ बोलि:" नहीं नहीं, ऐसा कुछ नहीं हैं सीमा!
सीमा उसके बालो मे गजरा लगाकर बोलीं:" मगर आपकी आंखों कि चमक, चेहरे कि खुशी, होंठो कि कंपकपाहट औऱ बढ़ती हुईँ दिल कि धड़कन कुछ औऱ हि कहरही हैं शहजादी!
सलमा उसकीबात सुनकर बुरीतरह सें लज्जा गई औऱ बोलि:"
" बाते बनाना तोँ कोई तुमसे सीखे!
इतना कहकर सलमा शीशे केँ सामने अपने बालो मे लगे गजरे कों देखते लगी औऱ सीमा उसके लगभगआकर खड़ी होँ गई औऱ बोलि:" आपके गजरे केँ फूलो कि गंध बेहद सुगंधित हें शहजादी! विक्रम तौ आजगएकाम सें !
सलमा उसकीबात सुनकर फिन सें शर्मा गई औऱ उसे थप्पड़ दिखाती हुई बोलीं:
" बेशर्म कहीं कि, कुछ भि बोलती रहती हौ!
सीमा नें उसके कंधे पर्र अपनाहाथ रख दिया औऱ उसे छेड़ते हुए बोलि:" अरे देखो तौ केसे लज्जा आँ रही हैं हमारी शहजादी कों औऱ जब विक्रम आयेंगे तौ उनकेगले लग जाओगी!
सलमा कों उसकी बाते सुनकर मस्ती आँ रहीथीं औऱ उसकाबदन अंदर हि अंदरमचल रहा थां, उछलरहा थां मगर वोँ दिखावे केँ संग सीमा कों डांटती हुई उसकेकान खींचती हुइ बोलि:" तेरे जैसी बेशर्म मैनेआज तक नहीं देखी!
सीमाउसे तिरछी नजरों सें देखते हुए मुस्कुरा कर बोलि:"
" थोड़ी देरबाद जब विक्रम कि गोद मे बैठी हुई होगीतब सोचना कौन अधिक बेशर्म हें!
उसकीबात सुनकर सलमा कां मुंह बेहद लज्जा सें लाल होँ गय़ा औऱ वोँ पानी पानी होँ गई जिससे उसकी सांसे बेहदतेज हौ गई थि फिन उसने सीमा कों घसीटकर बेड पर्र गिरा दिया औऱ उसकेऊपर चढ़कर उसके दोनो कों पकड़ते हुए बोलीं:"
" कितनी बार कहूं कि कोई नहीं आँ रहा हैं! मेरा यकीनकरो सीमा!
सीमा उसके नीचेदबी हुइ हंसती हुइ उसकी चुचियों कि तरफ देखते हुए बोलि:"
" ठीक हैं शहजादी, मगर आप् कि यह बेकरारी औऱ बढ़ी हुई सांसे कुछ औऱ हि बयानकर रही हैं मानो किसी केँ आने कां बेताबी सें प्रतीक्षा कररही हैं!
सलमा उसकीबात सुनकर हल्की सि शर्मा गई औऱ फिनजोर सें उसकेहाथ मोड़ते हुए बोलीं:"
" लगता हें तुम् ऐसे नहीं मानोगी! अभि ठीक करतीहू तुम्हे!
सलमा कि ताकत केँ आगे सीमा मजबूर होँ गई औऱ चाहकर भि अपनेहाथ नहीं छुड़ा सकी तौ फिन सें सलमा कों छेड़ते हुए बोलीं:" लगता हें हमारे शहजादी भि खूब ताकत वाली हें मतलब विक्रम कों आसानी सें कुछ भि मिलने वाला नहीं हें!
सलमा उसकीबात सुनकर फिन सें लज्जा गई औऱ तभी उसकी नज़र घड़ी पर्र पड़ी तोँ उसकेहाथ छोड़कर बोलीं:"
" चल बहोत होँ गय़ा मजाक, अब रात बहोत हौ गई हैं तौ मुझे सोनेदो!
सीमा जानती थि कि आज जरूरकोई नं कोईबात तौ हें मगर वोँ जानती थि कि सलमाउसे स्वयं हि बाद मे सभीबता देगी तोँ खड़ी हुइ औऱ बोलीं:"
" अच्छा शहजादी मे चलतीहु अपना ध्यान रखना!
इतना कहकर सीमाचल पड़ी औऱ सलमा भि कक्ष केँ दरवाजे तक उसकेसंग आई औऱ सीमाउसे शरारती मुस्कान देकरचली गई औऱ उसके जाने केँ बाद सलमा नें दरवाजे कों बंद किया औऱ अपने कपड़े ठीक करनेलगी ! उसने एक् बार स्वयं कों शीशे मे देखा औऱ फिन धड़कते हुएदिल केँ संग विक्रम कां प्रतीक्षा करनेलगी!!
विक्रम गुफा मे घुस गय़ा थां औऱ कल्लू कों अपने कंधे पऱ डालेआगे बढ़रहा थां! जैसे हि वोँ गुफा केँ अंत मे पहुँचा तौ उसने कल्लू कों नीचे फेंक दिया औऱ उसकेहाथ पेर बांधकर जैसे हि गुफा केँ बाहर् सावधानी सें कदमरखा तोँ उसे सामने हि सलमा खड़ीनजर आई! अंधेरा बहुत थां क्योंकि जान बूझकर सलमा नें सब मशाल बुझादिए थें ताकि विक्रम कों कों देख न् सके!
सलमा धीरे-धीरे धीरे-धीरे आगे बढ़ती हुईँ औऱ उसके लगभगआई औऱ देखते हि देखते उसकी बांहों मे समा गई औऱ दोनो नें एक् दूसरे कों पूरी ताकत सें अपनी बांहों मे कस लिया औऱ सलमा बोलि:"
" आपकोआने मे कोई दिक्कत तोँ नहीं हुइ नं युवराज!
विक्रम नें उसका माथाचूम लिया औऱ बोला:"कोई दिक्कत नहि हुईँ शहजादी! वैसे भि आपका चेहरा देखकर मेरीहर दिक्कत अपने आप् दूर हौ जाती हें!
उसकीबात सुनकर सलमा शर्मा गई औऱ उसकाहाथ पकड़कर अपनीसंग आने कां इशारा किया तौ विक्रम नें शहजादी कां हाथ पकड़कर उसेरोक दिया औऱ बोला:"
" आपकेलिए एक् तोहफा लेकरआया हु! पहले आप् देख लीजिए एक् बार!
सलमा उसकीबात सुनकर हैरान होँ गई औऱ विक्रम उसकाहाथ पकड़कर गुफा मे फिन सें वापिस घुस गय़ा औऱ हल्के अंधेरे मे भि कल्लू सुनार कों देखते हि सलमा हैरान हौ गई औऱ बोलीं:"
" आप् इसे कहां सें उठालाए युवराज? आपको किसी नें देखा तोँ नहीं!
विक्रम:" नहीं किसी नें नहि देखा! मौका देखकर इसकी दुकान सें हि उठा लिया!अब यह सारी सच्चाई आपके सामने बोल देगा!
विक्रम नें कल्लू सुनार केँ मुंह पर्र पानी कि कुछ बूंदे डाली तोँ उसेहोश आँ गय़ा औऱ अपने आपको अनजान गुफा मे पाकरइधर उधर देखने लगा औऱ जैसे हि उसकीनजर सलमा पऱ पड़ी तोँ उसकेपेर पकड़लिए औऱ बोला:"
" मुझेमाफ कर दीजिए शहजादी! मुझे बहोत बड़ी गलती होँ गई हैं!
सलमा नें उसकीतरफ नफरत सें देखा औऱ बोलि:" किसके कहने पऱ तुमने सीमा कों फंसाया थां ?
कल्लू सुनार कों काटो तौ खून नहि, उसे समझा नहींआया कि क्याँ कहे तोँ वोँ सलमा केँ पेर पकड़कर रोनेलगा औऱ बोला:"
" वोँ मुझेमार डालेगा शहजादी! मुझेमाफ कर दीजिए औऱ जाने दीजिए!
सलमा उसकीबात समझ गई औऱ बोलि:" ठीक हें अगर तुम् नहीं बताओगे तोँ मे तुम्हे मार डालूंगी! मगरअगर बता दोगे तोँ सहायता करूंगी औऱ कुछ नहीं होने दूंगी!
कल्लू जानता थां कि सलमा अपने वादे कि पक्की हें तौ वोँ थोडा चैन महसूस करतेहुए बोला:" मेरेपास जब्बार कां भइया जुबेर आया थां औऱ उनकेसंग मंत्री प्रकाश भि थां! मैनेमना किया तौ मेरे परिवार कों मारने कि धमकी देनेलगे जिस कारण मुझे मजबूरी मे यहसभी करना पड़ा! मुझेमाफ कर दीजिए!
इतना कहकर वोँ सलमा केँ पेर पकड़कर फूटफूट कां रो पड़ा तौ सलमा नें उसे उठाया औऱ विक्रम सें बोलीं:"
" युवराज इस सारे मामले कि असलीजड़ जब्बार हि हें! इस बेचारे कां कोईदोष नहीं हें! आप् इसे जाने दीजिए!
विक्रम नें हैरानी सें शहजादी कि तरफ देखा औऱ सलमा केँ संगउसे गुफा केँ बाहर् तक छोड़ने केँ लिएचल पड़ा! विक्रम नें सलमा कों कुछ इशारों मे समझाया तौ सलमा खामोश होँ गई! चलतेहुए कल्लू बोला:"
" आप् कौन हें ? आपको पहलीबार देखा हें यहां!
विक्रम नें एक् बार सलमा कि तरफ देखा औऱ बोला:" मे उदयगढ़ कां युवराज विक्रम हु औऱ शहजादी सलमा सें प्यार करताहु! शहजादी कि तरफ उठने वालीहर आंख कों मे फोड़ दूंगा!
सलमा कों हैरानी हुईँ कि विक्रम नें कल्लू केँ सामने सभीसच क्यूं बता दिया क्योंकि कल्लू उनकेलिए बड़ा खतराबन सकता थां मगरचुप रही! जैसे हि दोनो गुफा केँ अंत मे पहुंचे तौ विक्रम नें कल्लू कां मुंहफिन सें बांध दिया औऱ उसकाहाथ पकड़कर सावधानी सें आगेबढ़ गय़ा औऱ सलमा उन्हे जातेहुए देखरही थि मगरउसे समझ नहीं आँ रहा थां कि विक्रम उसकेसंग बाहर् क्यूं जारहा हैं औऱ शहजादी कि आंखेफटी कि फटीरह गई क्योंकि अचानक सें विक्रम नें कल्लू कों उठाकर दलदल केँ अंदर फेंक दिया औऱ मुंह बंधा होने केँ कारण कल्लू चीख भि नहींसका औऱ देखते हि देखते दलदल केँ अंदरसमा गय़ा!
विक्रम फिन सें वापिस गुफा केँ अंदर आँ गय़ा औऱ सलमाउसे हैरानी सें देखते हुए बोलि:"
" यह आपने क्याँ गजबकर दिया युवराज? हमनेउसे वादा किया थां कि उसकी सहायता करेंगे!
विक्रम नें आगे बढ़कर उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ अंदर चलतेहुए बोला:"
" आप् बहोत भोली हौ सलमा, यह सभीकुछ जाकर जब्बार कों बता देता औऱ उसकेबाद आप् समझ सकती हौ कि क्याँ हौ सकता थां!
सलमा उसकीबात सुनकर सभी समझा गई औऱ चलती हुइ बोलीं:" यह तोँ मैने सोचा हि नहीं थां! अच्छा किया आपने जोँ उसेमार दिया, बाद मे इसकेघऱ वालो कों मे सहायता कर दूंगी!
दोनो उसकेबाद एक् दूसरे कां हाथ थामे अंदर कि तरफचल पड़े औऱ अचानक सलमा किसीचीज सें टकराकर गिरने कों हुईँ तौ विक्रम नें उसे अपनी बांहों मे थाम लिया तौ सलमा स्वयं कों उसकी बांहों मे सुरक्षित पाकरखुश हौ गई औऱ बोलीं:"
" आपनेहमे बचा लिया युवराज! हल्के अंधेरे मे हम् शायद पत्थर सें टकरागए थें!
सलमा कि बात सुनकर विक्रम नें उसे अपनीगोद मे उठा लिया तोँ सलमा हैरान होतेहुए बोलि:"
" अरे आपनेहमे गोद मे क्यूं उठा लिया युवराज! हम् कोई छोटी बच्ची नहीं हें!
विक्रम नें अपने दोनो हाथो कों उसकी भारी भरकम गांड़ केँ नीचे लगाकर उसे अच्छे सें संभाल लिया औऱ बोला:"
" आप् अंधेरे मे गिर गई तौ चोट आयेगी औऱ मेरे होते आपकोचोट आएयह मे बर्दाश्त नहि कर सकता सलमा!
विक्रम कि बात सुनकर सलमा नें उसकागाल चूम लिया औऱ अपनी दोनो बांहों कां हार उसकेगले मे पहना दिया औऱ विक्रम उसे लेकरआगे बढ़ गय़ा! गुफा सें बाहर् निकलकर विक्रम उसेगोद मे लिएहुए हि उसके कक्ष तक पहुंच गय़ा औऱ कक्ष मे पहुंचते हि रोशनी मे उसने सलमा कों देखा औऱ उसकागाल चूम लिया तौ सलमा लज्जा गई औऱ उसकीगोद सें उतरकर अपने कक्ष कां दरवाजा अच्छे सें बंद किया औऱ फिन विक्रम कि तरफपलट कर मुस्कुराने लगी!
सलमा औऱ विक्रम दोनो हि एक् दूसरे कि तरफ धीरे-धीरे धीरे-धीरे बढ़ने लगे औऱ दोनो कि बांहे अपने आप् खुल गई औऱ एक् दूसरे कि बाहों मे समागए औऱ कसकर लिपटगए! विक्रम नें अपने दोनो हाथों कों उसकीकमर मे लपेट लिया औऱ बोला:"
" अह्ह्ह सलमा मेरी शहजादी! अब जाकरदिल कों चैन मिला! आपकोबता नहीं सकता कि मे कितना बेचैन थां आपको देखने केँ लिए सलमा!
सलमा भि उससे कसकर लिपटी हुई थि औऱ उसके हाथो कों अपनीकमर पऱ महसूस करके उसके कानो मे मिश्री सि घोलती हुई बोलीं:
" हमे भि युवराज! आपके बिनाहमे भि कुछ अच्छा नहीं लगता! आप् आँ गए हौ तौ लगता हें सभीकुछ मिल गय़ा!
विक्रम उसकीकमर हल्के हल्के सहलाते हुए बोला:"
" क्याँ कहूं शहजादी आप् मेरी बांहों मे होँ तौ लगता हें सारी दुनिया मेरी बांहों मे सिमटआई हें
सलमा उसकीबात सुनकर खुश होँ गई औऱ उसकी गर्दन पऱ अपने हाथो कि पकड़ मजबूत करतेहुए बोलि:"
" ओह मेरे युवराज! सच मे इतना अधिक प्रेम करते हौ मुझसे?
विक्रम उसकी आंखो मे देखते हुए प्रेम सें विश्वास केँ संग बोला:"
" इससे भि कहीं अधिक सलमा! चाहो तोँ मुझे आजमाकर जान मांगलो मेरी!
सलमा नें उसकीबात सुनकर प्रेम सें अपनी उंगली कों उसके होंठो पऱ रख दिया तौ विक्रम नें उसकी उंगली कों चूम लिया तौ सलमा बोलीं:"
" जान नहीं चाहिए क्योंकि मेरीजान तोँ आप् हौ युवराज! उसदिन जब आपने सैनिकों केँ सामने तलवार छोड़ दि थि तभी मे समझ गई थि कि आप् मुझसे कितना प्रेम करते होँ! क्याँ आप् मुझे मेरीउस गलती केँ लिएदिल सें माफकर दोगे युवराज?
इतना कहकर सलमा कि आंखेभर आई तौ विक्रम नें उसे अपनी बांहों मे पूरी ताकत सें समेट लिया औऱ बोला:"
" खुदा केँ लिएउस बात कों भूलजाए शहजादी! आओ जौ लम्हा हमे मिले हें बस इनमे अपनी खुशी ढूंढते हें!
सलमा नें उसकीबात सुनकर उसकागाल चूम लिया औऱ विक्रम नें एक् केँ बाद एक् चुंबन कि उसके गालों पर्र झड़ी सि लगा दि औऱ सलमा लज्जा सें उसकी छाती मे सिमट गई! विक्रम नें दोनो हाथों सें उसका सुंदर चेहरा अपने हाथों मे भर लिया औऱ उसकी आंखो मे देखते हुए मुस्कुरा दिया तोँ सलमा भि उसकी आंखो मे आंखे डालकर मुस्कुरा उठी औऱ दोनो बिना पलके झुकाए ऐसे हि एक् दूसरे कि आंखो मे देखते रहे औऱ आखिर गाड़ी सलमा कि आंखे लज्जा सें झुक गई तोँ विक्रम नें उसेफिन सें अपनी बांहों मे कस लिया औऱ उसकेसिर पर्र बंधे हिजाब सें उसकी उंगलियां टकरा गई तौ सलमा कि सांसे तेज हौ गई औऱ विक्रम कि बांहों मे स्वयं कों ढीला छोड़ दिया तौ विक्रम नें उसका इशारा समझते हुए उसकी हिजाब कों खोल दिया औऱ सलमा कां सिर पूरीतरह सें नंगा हौ गय़ा औऱ उसके बालो मे सफेद चमेली केँ फूलो कां सुंदर महकदार गजरानजर आया औऱ विक्रम नें मदहोश होकरउसे जोर सें अपनी बांहों मे कस लिया तोँ सलमा उसकी बांहों मे सिसकउठी औऱ बोलि:" अह्ह्ह्ह थोडा प्रेम सें युवराज, मेरी हड्डियां तोड़ डालोगे क्याँ आज !
विक्रम नें अपने मुंह कों उसके गजरे केँ पास किया औऱ उसके गजरे सें उठती हुइ खुशबू सूंघकर मदमस्त होँ गय़ा औऱ प्रेम सें उसके कंधे थामकर बोला:"
" आपका गजरा बेहद आकर्षक औऱ खुशबूदार हैं सलमा! इससे उठती हुईँ खुशबू हमे मदहोश कररही हैं शहजादी!
सलमा अपने गजरे कि तारीफ सुनकर उससे दीवानी सि होकर लिपट गई औऱ धीरे-धीरे सें उसकेकान मे फुसफुसाई:"
" आपकेलिए हि पहना हें मेरे युवराज! मेरी खुशकिस्मती कि आपको पसन्द आया!
विक्रम नें अब अपने हाथो कों उसकीकमर मे लपेट लिया उसकीकमर मे उंगली गड़ाते हुए औऱ उसकेगाल चूमते हुए बोला:"
" धन्यवाद मेरी शहजादी! मगर लगता हें कि आप् हमसेकुछ नाराज हें!
सलमा उसकीबात सुनकर प्यास उठी औऱ उसका मुंहचूम कर बोलि:" ऐसा न् कहे युवराज! हमारी जान निकल जायेगी, क्याँ खता हौ गई मुझसे?
विक्रम नें उसके बुर्के पऱ हाथरख दिया औऱ बोला:" आप् अभि भि हमसे शर्माती हैं शहजादी! क्याँ आपको इतने कपड़े कि जरूरत हैं सच मे?
सलमा उसकीबात कां मतलब समझकर कांपउठी क्योंकि वोँ जान गई थि कि विक्रम उसके बुर्के कों उतारने कि बातकर रहा हैं तौ सलमा धीरे-धीरे सें उसकेकान मे बोलीं:"
" हम् अपना कजरा आपसे छिपाकर रखना चाहते थें, बस इसलिये पहना लिया थां!
सलमा कि बात सुनकर विक्रम नें उसके बुर्के कि सुकून पऱ हाथरख दिया औऱ उसके मुलायम होंठों पर्र अपनी उंगली फेरते हुए बोला:"
" आपका कजरा तोँ हमनेदेख हि लिया शहजादी! अगर आपकी इजाजत होँ तौ क्याँ हम् आपका बुर्का उतारदे ?
विक्रम कि बात सुनकर सलमा केँ जिस्म मे सिरहन सि दौड़ गई औऱ वोँ जोर सें विक्रम केँ गालचूम कर बोलि:" कुबूल हैं कुबूल हैं कुबूल हैं!!
उसकीइस अदा पर्र विक्रम मर मिटा औऱ उसने बिनादेर किए उसके बुर्के कि सुकून कों खोलकर उसे उतार दिया औऱ सलमा नें भि अपनेहाथ उठाकर उसका सहयोग लिया औऱ सलमाअब बिना बुर्के केँ मात्र एक् कसेहुए सूट सलवार मे उसके सामने खड़ी हुईँ थि औऱ विक्रम नें एक् नजर उसके शरीर पर्र डाली औऱ उसकीनजर सलमा कि गोलगोल ठोस चुचियों केँ उभार पर्र पड़ी जौ सूट सें झांकरही थि औऱ यह देखते हि विक्रम बोला:"
" आप् बिना बुर्के केँ अधिक हसीन लगती हैं शहजादी!
सलमा उसकीबात कां मतलब समझकर शर्मा गई औऱ बेड कि तरफचल पड़ी तोँ विक्रम नें आगे बढ़कर उसे पीछे सें अपनी बांहों मे भर लिया औऱ उसकी गर्दन कों चूमने लगा तौ शहजादी सलमा उसकेगरम तपते होंठ अपनी गर्दन पर्र महसूस करते हि पिघल गई औऱ मदहोशी सें सिसकी:"
" अह्ह्ह्ह्ह युवराज! छोड़ दीजिए नां हमे!ऐसे मत छेड़िए हमे!
सलमा कि सिसकी सुनकर विक्रम कों उसकी मदहोशी कां अंदाजा होँ गय़ा औऱ विक्रम नें अपने दोनो हाथो कों उसकी चुचियों पऱ रखा औऱ हल्के हल्के सहलाते हुए उसके गजरे कि गंध सूंघकर बोला:"
" ओह मेरी सलमा, आपके गजरे कि गंधहमे बहकारही हैं, खुदा नें आपकोबस मेरेलिए बनाया हें मेरी शहजादी!
इतना कहकर विक्रम नें उसकी चुचियों कों हल्का हल्का मसलना शुरुआत कर दिया औऱ सलमा केँ मुंह सें मस्ती भरीअहह निकलने लगी औऱ विक्रम नें जैसे हि उसकी गर्दन कों अपनीजीभ सें चूस लिया तौ सलमा केँ मुंह सें एक् जोरदार मस्ती भरीअहह निकल पड़ी औऱ वोँ पलटकर विक्रम सें कसकर लिपट गई तोँ विक्रम नें अपने होठों कों उसके कांपरहे होंठो पर्र टिका दिया औऱ चूसने लगा तोँ सलमा भि उसके होंठ चूसने लगी औऱ देखते हि देखते दोनो कि जीभ एक् बार सें टकरा पड़ी औऱ सलमा नें स्वयं कों विक्रम कि बांहों मे ढीला छोड़ दिया तौ विक्रम नें उसे अपनीगोद मे उठा लिया औऱ सलमा उसकी गर्दन मे बांहे डाले लिपटी हुई उसके होंठो कों चूसती रही! विक्रम नें उसेगोद मे लिएहुए बेड पर्र आँ गय़ा औऱ उसकेउपर चढकर उसके होंठो कों चूसने लगा सलमा विक्रम कों उपरउपर चढ़ा देखकर उत्तेजित होनेलगी औऱ अपनी टांगो कों पूराखोल दिया तौ विक्रम नें उसकी टांगो कों अपनी टांगो मे जोर सें कस लिया औऱ अपनीजीभ कों सलमा केँ मुंह मे घुसा दिया तौ सलमा नें उसकी लसलसी जीभ कों लपक लिया औऱ जोरजोर सें उसकीजीभ चूसने लगी!
सलमा केँ हाथअब विक्रम कि गांड़ पऱ जमगए थें औऱ मदहोशी मे सलमा उसकी गांड़ कों सहलारही थि! सलमा कि सांसे बुरीतरह सें उखड़ गई थि औऱ उसकी चूचियों केँ सख्ततने हुए निप्पल कपड़ो केँ उपर सें हि विक्रम कि छाती मे घुसने कां प्रयास कररहे थें! एक् किस केँ बाद दोनो केँ होंठअलग हुए तौ विक्रम नें उसकेसूट कों उठा दिया औऱ सलमा नें मदहोशी मे अपने दोनो हाथों कों उठा लिया औऱ विक्रम नें उसकेसूट कों उतारकर फेंक दिया औऱ सलमा कि मस्तानी चूचियां एक् सफेदरंग कि ब्रा मे विक्रम केँ सामने आँ गई औऱ विक्रम नें उसकी चुचियों कों देखा तौ सलमा लज्जा सें पानी पानी होँ गई औऱ विक्रम नें हाथआगे बढाया औऱ उसकी चुचियों कों ब्रा केँ उपर सें हि अपने हाथो मे भर लिया औऱ कसकसकर दबाने लगा तोँ सलमा केँ मुंह सें दर्दभरी अहह निकल पड़ी औऱ विक्रम कि आंखो मे देखते हुए अपने हाथो कों उसके हाथो पऱ टिका दिया औऱ विक्रम नें जोश मे आकर उसकी चुचियों कों रगड़ना शुरुआत कर दिया औऱ सलमा केँ मुंह सें दर्द औऱ मस्ती भरी सीत्कार निकलने लगी
" अअह्ह्ह्ह सीईईईईईई नहीईईईईई, अअह्ह्ह्ह धीरे-धीरे ईईईईई विक्रम दर्द होता हैंईईईईईईईईईई
सलमा कि सिसकियां सुनकर विक्रम पूरेजोश मे आँ गय़ा औऱ कसकसकर उसकी चूचियों कों मसलने लगा मानो उसकी छातियों कों सपाटकर देना चाहता हौ औऱ सलमा कि घमंडी चूचियां वोँ जितनी जोर सें दबाता वोँ उससे कहीं अधिकजोर सें उछलकर उसके हाथो मे फिन सें समा जाती!
विक्रम कां लन्ड अपनी पूरी सख्ती मे खड़ा हौ गय़ा थां औऱ सलमा कि जांघो मे ठोकरमार रहा थां जिससे सलमा पूरीतरह सें उत्तेजित हुइ जारही थि औऱ सलमा स्वयं हि अपनी गांड़ उठाउठा कर लन्ड पर्र रगड़ने लगी तौ विक्रम नें उसकी ब्रा केँ कप हटाकर उसकी चुचियों कों आजादकर दिया तौ सलमा केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी औऱ विक्रम नें उसकी दोनो नंगी चूचियों कों अब पूरीतरह सें अपनी चौड़ी हथेली मे भर लिया तोँ सलमा कों यकीन हौ गय़ा कि उसकी चूचियां विक्रम केँ लिए हि खुदा सें बनाई हैं तोँ सलमा अपनी गर्दन उचकाकर उसके होंठो कों चूसने लगी जिससे उसकी चूचियां उभरकर विक्रम केँ हाथो मे आँ गई औऱ विक्रम नें कसकर उसकी नंगी चुचियों कों रगड़ना शुरुआत कर दिया तौ सलमा सें उत्तेजना बर्दाश्त नहि हुईँ औऱ उसका शरीरबेड पऱ पड़े पड़े उछलने लगा तोँ विक्रम नें उसे अपने नीचेकस लिया औऱ उसके होंठो कों चूसने हुए उसकी चुचियों कि अकड़कम करने कि कोशिश करनेलगा औऱ सलमा उत्तेजना सें कभी उससेजोर सें लिपटती तौ कभी अपने हाथो सें बेडशीट कों कसकर दबोच लेती! दोनो कों सांस लेने मे दिक्कत हुइ तौ विक्रम नें उसके होंठो कों आजाद करतेहुए उसकी एक् मम्मों कों मुंह मे भर लिया औऱ सलमा केँ पेट कों सहलाते हुए नीचे कि तरफ बढ़ने लगा औऱ उसकी सलवार कां नाड़ा पकड़ लिया तोँ सलमा केँ जिस्म मे सिरहन सि दौड़ गई औऱ वोँ बेड पऱ हि जोर सें उछल पड़ी वोँ उसकीआधे सें ज़्यादा मम्मों विक्रम केँ मुंह सें समा गई औऱ विक्रम नें उसेजोर सें चूस लिया औऱ एक् झटके केँ संग उसकी सलवार कां नाड़ा खुल गय़ा तोँ सलमा केँ मुंह सें मस्ती भरी सीत्कार निकल पड़ी
" अह्ह्ह्ह यह क्याँ कर दियाआआ यूईईईईईईईई अम्म्मीईईईईईई ! अरे उफफ्फफ्फ, अअह्ह्ह्ह्ह युवराज मे मर जाऊंगीगिईईईई
विक्रम नें उसके मुंह कों चूम लिया औऱ सलमा कि दोनो चुचियों कों मस्ती सें सहलाते हुए सिसकउठा:"
" अह्ह्ह्ह् मेरी शहजादीईईईईईई, कुछ नहीं होगाआआआआआ, अअह्ह्ह्ह कैसालग रहा हैं मेरीजान सलमाआआआआआआ
इतना कहकर विक्रम नें उसकी सलवार कों नीचे सरकाना शुरुआत कर दिया औऱ सलमा मदहोश सि पड़ी हुइ अपनी सलवार उतरने देरही थि औऱ विक्रम नें उसकी टांगो कों उसकी सलवार सें आजादकर दिया तौ सलमा बावली सि होकर उससे कसकर लिपट गई औऱ पलंग भि अपने शरीर कों पटकते हुएजोर जोर सें सिसकियां भरनेलगी तौ विक्रम नें सलमा कों अपने नीचेकस लिया औऱ उसके बालो मे लगेहुए गजरे कों खोल दिया औऱ सलमा कि काले बादल जैसी जुल्फे लहराउठी औऱ विक्रम कों सलमा औऱ अधिक कामुक नजरआई औऱ उसने उसके होठों कों चूसते हुए अपने कपड़ो कों भि उतार दिया औऱ अब विक्रम अब अंडर वियर मे सलमा केँ उपर चढ़ाहुआ थां औऱ उसका भारी भरकम शक्तिशाली लन्ड सलमा कि भीगी हुई पेंटी सें छूरहा थां जिससे सलमा पागल सि हुइ जारही थि औऱ उसने अपने टांगो कों विक्रम कि टांगो मे कस लिया औऱ जोरजोर सें उसकीकमर कों अपनी बुर पर्र दबाने लगी! सलमा पूरीतरह सें बेकाबू हौ गई थि औऱ उसकी बुर पूरीतरह सें चिकनी होकर उसकी पैंटी कों पूरा गीलाकर चुकी थि जिस पऱ विक्रम कां लन्ड टकराने सें फचफच कि आवाज़ आँ रही औऱ सलमा विक्रम कि आंखो मे देखते हुए अपनी गांड़ कों पूरी ताकत सें उठाउठा करपटक रही थि औऱ विक्रम गजरे कि गंध सें पागल सां हौ गय़ा औऱ गजरे कों सलमा कि आंखो केँ सामने किया औऱ उसकी बुर पर्र लन्ड केँ जोरदार धक्के मारते हुए मदहोशी सें सिसकउठा:"
" मेरी शहजादी कां महकता गजरा, हाय राम सलमा आपके गजरे नें मुझे बेहाल कर दिया हैं मेरीजान!
इतना कहकर विक्रम नें गजरे कों चूम लिया तौ सलमा नें भि गजरे कों चूम लिया औऱ अपनी गांड़ उठाकर उसके धक्कों कां जवाब देती हुईँ सिसकउठी
" अअह्ह्ह्ह्ह् युवराज! मेरे सरताज आपकीजान सलमा कां गजरा !
विक्रम नें जोश मे आकर गजरे मे सें एक् फूल कि पत्ती कों तोड़ दिया औऱ अपनीजीभ पर्र रखकर सलमा केँ मुंह मे घुसा दिया तोँ सलमा पागलों केँ जैसे उसकीजीभ चूसने लगी औऱ पूरी ताकत सें अपनी बुर कों उसके लन्ड पर्र उछालने लगी क्योंकि उसकी बुर मे उसे अदभुत सिरहन कां एहसास होना शुरुआत होँ गय़ा थां औऱ दोनो कि एक् दूसरे केँ होंठो कों चूसते हुए एक् दूसरे केँ धक्को कां शक्तिशाली जवाबदे रहे
सलमा कि गोलगोल गुम्बद जैसीठोस चूचियां अब विक्रम पूरी सख्ती सें मसलरहा थां, रगड़रहा थां कसकसकर दबारहा थां औऱ विक्रम नें जोर कां धक्का लगाया तौ सलमा कि पेंटी उसकी बुर पऱ सें हट गई औऱ उसकी पूरी चिकनी एक् दम नंगी होकर लन्ड केँ सामने आँ गई औऱ जैसे हि सलमा नें जोर सें अपनी गांड़ कों उछाला तोँ पतले सें अंडर वियर मे लन्ड नें उसकी बुर पर्र जबरदस्त टक्कर मारी औऱ सलमा कि बुर औऱ मुंह सें एक् संग मस्ती फूट पड़ी
" अह्ह्ह्ह मेरे युवराजजजज ईईईईईई सीईईईईईईई यूईईईईईई हयय्यय क्याँ कर दिया मुझे ईईईईईईई
सलमा नें मस्ती सें बेकाबू होकर गजरे कों अपने दांतों सें काटने लगी औऱ अपनी पूरी ताकत सें अपनी गांड़ उठाकर उठाकर लन्ड केँ धक्के अपनी नंगी बुर पऱ खानेलगी औऱ विक्रम नें भि उसकी चूचियां कों छोड़कर उसकी गर्दन मे हाथ कों लपेट लिया औऱ कस कसकर धक्के लगाने लगा! दोनो हि एक् दूसरे कि आंखो मे देखते हुए गजरे कों खारहे थें मसलरहे थें औऱ अब दोनो कि गति इतनी ज़्यादा बढ़ गई थि कि मजबूत बेड भि चूंचूं करके चरमरा रहा थां मानो उसकेउपर दो शक्तिशाली पहलवान कुश्ती कररहे हौ! विक्रम केँ लन्ड मे तनावहर लम्हा बढ़ता जारहा थां औऱ उसके धक्के भि हर लम्हा तेज होतेजा रहे थें औऱ सलमा भि उसके धक्के कां ताकत सें जवाब देती हुई गजरे केँ फूलो कों मसलती हुईँ उसकी आंखो मे देखती हुईँ उसे उकसारही थि! कक्ष मे तूफान सां आयाहुआ थां औऱ दोनो कि मादक सिसकियां गूंजरही थि जौ हरसमय तेज औऱ ज़्यादा तेज होतीजा रहीं थि औऱ सलमा कि बुर मे इतनी अधिक सनसनाहट बढ़ गई थि कि उसने बेकाबू होकर विक्रम कां हाथ अपनी बुर पऱ रख दिया औऱ विक्रम नें जैसे हि उसकी नाजुक मखमली रेशम बुर केँ होंठो कों छुआ तौ सलमा केँ मुंह सें एक् जोरदार अहह निकल पड़ी औऱ सलमा नें पूरी ताकत सें अपनी जांघो कों कसतेहुए विक्रम केँ लन्ड कों अपनी बुर पर्र दबोच सां लिया औऱ सलमा कि बुर नें एक् जोरदार झटके केँ संग अपनारस छोड़ने लगी तौ विक्रम कां लन्ड भि जवाबदे गय़ा औऱ उसने अपनी पूरी ताकत लगाते हुए लन्ड कों उसकी जांघो कि पकड़ सें बाहर् निकाला औऱ एक् जोरदार धक्के केँ संग उसकी जांघो मे घुसा दिया औऱ सलमा कि बुर केँ होंठो पऱ तगड़ी टक्कर पड़ी तौ सलमा पहलीबार दर्द सें कराहउठी
" अअह्ह्ह्ह अम्मी ईईईईईआई मार डाला युवराज!!!
विक्रम उसका मुंह चूमते हुए अपने वीर्य कि पिचकारी मारने लगा! दोनो एक् दूसरे कों पूरी ताकत सें कस लिया औऱ एक् दूसरे सें लिपटकर झड़ने लगे! दोनो बेताबी सें एक् दूसरे कों चूमरहे थें चाटरहे थें औऱ विक्रम केँ नीचेदबी हुई सलमा लंबी लंबी सांसे लेती हुईँ झड़रही थि जिससे उसकी बुर कां गाढ़ा चिकना रस विक्रम केँ लन्ड केँ आसपास फैल गय़ा थां औऱ विक्रम केँ लन्ड सें निकलकर वीर्य सलमा कि बुर केँ रस सें मिलरहा थां!
लगभग एक् मिनट तक दोनो कां स्खलन चलतारहा औऱ अंत मे दोनो केँ बदन जैसे हि शांतहुए तोँ दोनो आंखेबंद करके एक् दूसरे सें लिपटे हुए अपनी सांसों कों संभालने कि कोशिश करनेलगे! लगभग पांच मिनट केँ बाद दोनो सामान्य हुए औऱ सलमा नें लज्जा सें उसकी छाती मे अपना मुंह छुपा लिया तोँ विक्रम उसकीपीठ सहलाते हुए बोला:"
" इतनासभी होने केँ बाद भि शर्माना तोँ क्याँ शर्माना!
उसकीबात सुनकर सलमा केँ चेहरे पर्र मुस्कान आँ गई औऱ कुछ नहि बोलीं बसऐसे हि उससे लिपटी रही! दोनोऐसे हि लेटेहुए बाते करतेरहे औऱ मीठे मीठे ख्वाब संजोते रहे!
लगभग पांचबजे सीमा केँ सलमा केँ कक्ष पऱ दस्तक तौ सलमा औऱ विक्रम दोनो कों दिन केँ निकलने कां एहसास हुआ औऱ सलमा बोलीं:"
" कबरात गुजार गई पता हि नहि चला! लगता हें सीमा आँ गई हैं, अब आप् केसे जाओगे?
विक्रम:" आप् फिक्र न् करें, मे मौका देखकर निकल जाऊंगा!
सलमा अपने कपड़े ठीक करतेहुए बोलि:" ठीक हें मुझे कक्ष कां दरवाजा खोलना पड़ेगा! आप् पर्दे केँ पीछेछिप जाए!
विक्रम उठा औऱ परदे केँ पीछेछिप गय़ा औऱ सलमा नें दरवाजा खोला तौ सीमा अंदर आँ गई औऱ बोलि:" शहजादी एक् बेहदअहम खबर हें कि रात सें कल्लू सुनार नहींमिल रहा हैं, उनकी पत्नि नें रात हि सूचना दि थि!
सलमा उसकीबात सुनकर जान बूझकर चौंकउठी औऱ बोलीं:"
" अच्छा क्यूं कहां चला गय़ा वोँ? जरूर किसी उल्टे सीधेकाम मे गय़ा होगा!
सीमा:"यह तौ नहींपता कि कहां गय़ा हें मगरकुछ न् कुछ तोँ जरूरहुआ हें! मुझे तौ लगता हैं कि यह जब्बार नें हि किया होगा कि कहीं वोँ अपना मुंह नं खोलदे औऱ वोँ फंसजाए!
सलमा:" अच्छा तुम्हें क्यूं लगा कि यह जब्बार नें किया होगा ?
सीमा:" क्योंकि सारे उल्टे सीधेकाम वही तोँ करता हें! चलो मे तोँ कहती हूं कि मर हि गय़ा हौ वोँ कल्लू सुनार हरामजादा!
सलमा:"मर हि गय़ा होगामगर मुझे नहीं लगता कि उसे जब्बार नें मारा होगा क्योंकि जब्बार अपने आदमियों कों कभी नहीं मारता!
सीमा: आप् देख्ना आज बहुतशोर होगा राज्य कि सुनवाई केँ दौरान! एक् तोँ पहले हि युवराज विक्रम केँ भागने वाला मामला फंसाहुआ हें औऱ अबयह दूसरा मामला औऱ हौ गय़ा हैं!
सलमा:" अच्छा यहबात भि हें! पानीगरम होँ गय़ा हैं क्याँ ?
सीमा:"हान पानी तौ गरम हौ गय़ा हैं शहजादी! आप् जाइएनहा लीजिए!
सलमा जानेलगी औऱ सीमा कों अपनेसंग केँ जाने केँ लिएकोई एक्सक्यूज़ सोच हि रही थि कि सीमा कि नजर नीचे फर्श पर्र पड़ेहुए सलमा केँ गजरे पर्र पड़ी तौ सीमा कों बड़ी हैरानी हुई औऱ बोलि:"
" शहजादी आपका गजरा फर्श पर्र केसेगिर पड़ा?
सीमा कि बात सुनकर सलमाडर औऱ लज्जा केँ मारे कांपउठी! उसेऐसा लगा मानो वोँ चोरी करती हुइ रंगे हाथों पकड़ी गई हौ औऱ उसका मुंह लज्जा सें लाल सुर्ख होँ गय़ा औऱ फिन स्वयं कों संभालते हुए बोलीं:"
" पता नहि केसे गिरा, नींद मे शायदगिर गय़ा होगा!चल आँ मेरेसंग चल बाथरूम!
सीमा उसकी हालत देखकर समझ गई कि दाल मे कुछ तौ जरूर काला हें औऱ बोलीं:
" बाते बनाना तौ कोई आपसे सीखे, मतलबअब गजरे केँ भि हाथ पांवलग गए हें जौ कहीं भि गिर जाएगा! देखो तोँ आपकेबेड पऱ कितने अधिक सलवटे आई हुई हैं!
सलमा कां दिलफिन सें उसकीबात सुनकर धड़कउठा औऱ जानती थि कि सीमा मुंहफट हैं औऱ कुछ भि बोल सकती हैं औऱ विक्रम सभीकुछ सुन हि रहा हैं तोँ सलमा बोलीं:"
" तुम्हारी तरफ केसे समझाऊं कि नींद मे गिर गय़ा होगा!चल अब मेरेसंग!
सलमा नें उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ बाहर् कि तरफ खींचने कि कोशिश करनेलगी तोँ सीमा उसकेसंग चलती हुइ इधरउधर नजर डालते हुए बोलि:"
" कब तक सच छुपाओगी शहजादी! बोल क्यूं नहि देती कि विक्रम आए थें आपसे मिलने केँ लिएरात ?
उसकीबात सुनकर सलमा कां मुंह लज्जा सें लाल होँ गय़ा औऱ सबसे बड़ीबात सीमा कि इधरउधर दौड़ती नजर सें वोँ घबरा गई क्योंकि अगर सीमा नें विक्रम कों देख लिया तौ सीमा उसका जीना मुहाल कर देगीयह वोँ अच्छे सें समझरही थीं ! दूसरी तरफ विक्रम केँ होंठो पऱ भि उसकीबात सुनकर मुस्कान आँ गई औऱ स्वयं कों पर्दे केँ पीछे अच्छे सें छिपा लियामगर पर्दा हिल गय़ा औऱ सीमा कि नजरे पड़ी वोँ उसे नीचे सें विक्रम केँ जूतेनजर आए औऱ सीमा कां शक यकीन मे बदल गय़ा औऱ सलमा उसकाहाथ पकड़कर बाहर् खींचती हुई बोलि:"
" कितनी बार कहूं कि कोई नहींआया थां! चल मुझेदेर हौ रही हैं
सीमाअब उसेजान बूझकर छेड़ती हुइ बोलीं:"
" फिन आप् इतनी क्यूं शर्मा रही हौ औऱ आपकी गर्दन देखो केसेलाल होँ गई हैं!
सलमा कि नजरे अपनी गर्दन पऱ पड़ी जोँ सच मे हल्की सि लाल हौ गई थि औऱ सलमालगा कि आज वोँ बुरीफंस गई हैं तौ बोलि:
" ऐसे हि नींद मे होँ गई हैं! चल आँ मुझेदेर होँ रही हैं!
इतना कहकर वोँ पूरी ताकत सें जबरदस्ती सीमा कों बाहर् खींचने लगी क्योंकि लज्जा सें पानी पानी होँ गई थि विक्रम केँ सामने सीमा कि ऐसी बातेसुन कर औऱ सबसे बड़ीबात कि आगेपता नहि क्याँ बोल देगीयह उसकी सबसे बड़ी दुविधा थि! सीमा बाहर् जाने सें स्वयं कों रोकती हुई बोलि:"
" पलंग कि हालत देखकर तौ लगरहा थां कि रात मे युवराज नें आपकी अच्छे सें खबरली होगीमगर आपकीयह जबरदस्ती देखकर तोँ लगरहा हैं कि कुछकसर बाकीबच.
सीमाकुछ बोलती उससे पहले हि सलमा नें उसके मुंह पऱ हाथरख दिया औऱ बोलि:"
" हद होती हैं बेशर्मी कि सीमा, कुछ भि बोलेजा रही होँ! आओचलो मेरेसंग!
सीमा नें एक् झटके सें उससे अपनाहाथ छुड़ा लिया औऱ बेड केँ पासआते हुए बोलीं:"
" आप् जाओ औऱ नहाकर आँ जाओ! मे यहीं बैठीहु!
सलमा उसके पीछे तेजी सें अंदरआई औऱ बोलि:" क्यूं परेशान कररही हैं मुझे सीमा!आओ नां मुझे सहायता चाहिए तुम्हारी नहाने मे कुछआज!
सीमा:"रोज तौ आप् स्वयं हि नहाती होँ तोँ मे क्याँ करूंगी आपकेसंग जाकर!
सलमा:" मे तेरेआगे हाथ जोड़ती हूं चल नाँ तुम्हारी तरफ मेरीशपथ!
उसकीबात सुनकर सीमा खड़ी होँ गईं औऱ बोलीं:" आप् इतनाकह रहीहु तौ चलतीहु मगर आपको मेरेसंग नहीं बल्कि युवराज केँ संग नहाने कि जरूरत हें!
सलमा नें उसकाहाथ पकड़ा औऱ तेजी सें अपनेसंग बाहर् लें गई औऱ वहीं विक्रम भि उसकी बाते सुनकर अंदर हि अंदर मुस्कुरा उठा कि यह सीमासच मे शहजादी कों बेहद ज़्यादा तंग करती हें! सलमा बहाने केँ बाद अपने कक्ष मे आँ गई औऱ दरवाजा बंदकर लिया तोँ विक्रम नें उसे पीछे सें अपनी बांहों मे भर लिया औऱ बोला:
" शहजादी अकेले अकेले नहाकर आँ गई होँ आप्! लगता हें आप् सीमा कि बात नहीं मानती हैं!
सलमा उसकीबात सुनकर हंस पड़ी औऱ बोलि:" सीमा बहोत ज़्यादा शैतान हैं! मुझे हि पता हैं बस मुझे कितना छेड़ती हैं आपकानाम लेकर ! अच्छा यह बताओ अगलीबार कब मिलने आओगी मुझसे?
विक्रम नें अपने हाथो हाथो कों उसकी चुचियों पऱ रख दिया औऱ सहलाते हुए बोला:"जब आप् बोलो मेरी शहजादी बस चादरऐसी बिछाना जिसमे सलवटे कम पड़े सलमा!
उसकीबात सुनकर सलमा शर्मा गई औऱ बोलीं:" छोड़ूंगी नहींइस सीमा कि बच्ची कों आज मे, देख्ना आपके जाने केँ बाद उसकी अच्छे सें खबर लूंगी!
सलमा कि बात सुनकर विक्रम नें थोडा कसकर उसकी चुचियों कों मसल दिया औऱ बोला:"
" खबर तोँ आपकी मे अच्छे सें लूंगा मेरी शहजादी ताकि सीमा कि शिकायत दूर होँ सके कि मे आपकी अच्छे सें खबर नहि लेता
चुचियों कों जोर सें मसले जाने सें सलमाजोर सें सिसकउठी औऱ दर्द सें कराहती हुइ बोलीं:"
" अह्ह्ह्ह्ह दर्द होता हें मेरे प्रियतम! ऐसा हें तोँ मे अगलीबार आपसे मिलूंगी हि नहि!
विक्रम नें सलमा कां मुंह अपनीतरफ घुमा लिया औऱ उसकी आंखो मे देखते हुए बोला:"
" अच्छा जीयह हि बात मेरी आंखों मे देखकर बोलो एक् बार कि मिलूंगी नहीं!
विक्रम कि बात सुनकर लज्जा सें सलमा कि आंखेझुक गई औऱ वोँ उससे कसकर लिपट गई मगर बोलि कुछ नहि तौ विक्रम उसकीकमर सहलाते हुए बोला:"
" बताओ नाँ शहजादी मिलेगी नं मुझसे ?
सलमा नें उसकी छाती कों चूम लिया औऱ अपनी गर्दन कों इकरार मे हिला दिया तौ विक्रम नें सलमा कि गांड़ कों अपनी हथेलियों मे भरकरजोर सें मसल सिसक दिया औऱ उसकी गर्दन पर्र अपनीजीभ फेरते हुए बोला:"
" सोचलो एक् बारफिन सें शहजादी सलमा क्योंकि फिनबाद मे मुझेदोष मत देना आप् कि मे ज़्यादा छेड़छाड़ करताहु!
गांड़ मसले जाने सें सलमाजोर सें चिहुंक उठी औऱ फिन सें उसकी छाती कों चूम लिया! विक्रम उसकी गांड़ कों सख्ती सें मसलते हुएकहा:"
" हयय्य मेरी शहजादी! आपकी गांड़ कितनी सख्त औऱ गद्देदार जबरदस्त हैं! बताओ नाँ कब मिलोगी आप्?
सलमा अपनी गांड़ मसले जाने सें उत्तेजित होनेलगी थि औऱ उसके मुंह सें अहह निकल पड़ी:"
" आआआह्हह्ह विक्रम मिलूंगी शनिवार कि रात मिलूंगी!
विक्रम नें उसका मुंहचूम लिया औऱ बोला:" मेरेसंग नहाओगी नां सलमा?
सलमा उसकीबात सुनकर लज्जा सें लाल होँ गई औऱ उसके होंठ चूसने लगीं! दोनो कि किसदो मिनट तक चली औऱ उसकेबाद विक्रम मौका देखकर धीरे-धीरे निकल गय़ा औऱ उदयगढ़ कि तरफलौट पड़ा!
लालच औऱ हवस कां मारा इंसान कितना गालीच होता हैं इसका सटीक उद्धरण हैं जब्बार।
अद्भुत, अकल्पनीय औऱ सोच सें परेकला हैं आपकी, एक् सें अच्छे एक् चरित्र मगर मुझे मेनका सबसे ज़्यादा अच्छी लगी|
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
अगलेदिन सुल्तानपुर कां राजदरबार लगाहुआ थां औऱ बेगम रजिया सुनवाई कररही थीं औऱ मुद्दा राज्य कि सुरक्षा कों लेकर थां क्योंकि पिछले कुछ दिनों सें दो घटनाघट गई थीं औऱ उसी केँ बारे मे बात हौ रही थि
रजिया:" दोदिन पहलेकोई राजमहल मे सलमा केँ कक्ष तक पहुंच गय़ा औऱ शहजादी नें उसे गिरफ्तार करवा दियामगर उसकेबाद भि वोँ बचकरभाग निकला औऱ कल सें कल्लू सुनार नहींमिल रहा हैं! आखिरयह सभीचल क्याँ रहा हैं जब्बार ?
रजिया कि बात सुनकर सलमामन हि मन मुस्कुरा रही थि क्योंकि वोँ जानती थि कि आज पूरीसभा मे जब्बार कि अच्छे सें बेइज्जती होने वाली हें मगर जब्बार अपनीसीट सें खड़ाहुआ औऱ बोला:"यह जोँ भि हुआ हैं बेहदगलत हें मगर एक् बात ध्यान देने वाली हैं कि यह दोनो घटनाए शहजादी सलमा सें हि हि जुड़ी हुईँ हें! इसका मतलबसाफ हें कि जोँ कोई भि साजिश कररहा हैं उसके निशाने पर्र शहजादी हौ सकती हें इसलिये सबसे पहले तौ हमे शहजादी कि सुरक्षा बढ़ानी होगी ताकि उन्हें वोँ सुरक्षित रहे!
सलमा नें उसकीबात सुनकर ताड़कर उसे देखा क्योंकि सलमा जानती थीं कि सुरक्षा बढ़ने सें वोँ कैद सि होकररह जायेगी औऱ अपनी मर्जी सें कहीं नहींजा सकेगी! जब्बार कि बात कां सब मे समर्थन किया औऱ रजिया बोलीं:" ठीक हें सलमा कि जान राज्य केँ लिए बेहद महत्वपूर्ण हें औऱ उसकी सुरक्षा बढ़ाई जाएगी मगर जौ हुआ हें उसकेलिए कौन जिम्मेदार हैं?
जब्बार:" जोँ व्यक्ति उसदिन कैद सें निकलकर भागा वोँ जरूर राजमहल केँ अंदर पहले भि आया होगा याँ फिनऐसा होँ सकता हें कि कोई उससे मिलाहुआ होँ क्योंकि एक् अजनबी व्यक्ति इसतरह सें बचकर तोँ नहींभाग सकता!
जब्बार कि बात पूरीतरह सें सही थि आई औऱ रजिया बोलीं:"
" ठीक हें जब्बार उसकी पहचान कि जाएगी औऱ उसे कड़ी सें कड़ीसजा मिलेगी! मगर कल्लू सुनार कहां हैं?
जब्बार:" कल्लू सुनार कि खोज मे रात सें हि सैनिक लगेहुए हें औऱ जल्द हि उसकी जानकारी सामने आँ जायेगी! संग हि संगआज सें राज्य मे बाहरी आदमियों कां आनां पूरीतरह सें बंद होना चाहिए क्योंकि ऐसी भि संभावना हें कि बाहर् सें कोईआया होँ औऱ उसने हि कल्लू कों गायब किया हौ किसी दुश्मनी केँ चलते!
रजिया:" बाहर् सें अगरकोई आता तौ उसे जरूर पहरी पकड़ लेते!यह जरूरी राज्य केँ हि किसी व्यक्ति कां काम हें!
जब्बार:" आप् चिंता न् करेजब तक मे सच्चाई कां पता नहि कर लूंगा सुकून सें नहि बैठने वाला!संग हि संगआज सें बाहरी आदमियों कां राज्य मे प्रवेश पूरीतरह सें बंद रहेगा!
रजिया:" ठीक हें जब्बार मगरइस बारकोई चूक नहीं होनी चाहिए!
जब्बार:" आप् निश्चित रहे, मे अपनीतरफ सें आपकोकोई मौका शिकायत कां नहीं दूंगा!
इसकेबाद राज्य कि कार्यवाही समाप्त हुईँ औऱ सलमा कों कां फूल सां चेहरा दुःखी हौ गय़ा थां क्योंकि उसकी सुरक्षा मे व्यक्ति बढ़ने सें उसकी आजादी छिनने वाली थि औऱ दूसरी बातरात मे बाहरी लोगो केँ नां आने सें विक्रम उससे मिलने केसे आएगायह उसकी सबसे बड़ी समस्या थि!
वही दूसरी तरफ उदयगढ़ मे भि दरबार लगाहुआ थां औऱ राजमाता गायत्री देवी भि बड़ी मुश्किल मे थि क्योंकि पिछले कुछ दिनों सें राज्य केँ दूर केँ एक् देहात सें विवाह शुदा औरते औऱ लड़कियां गायब हुईँ थि औऱ उनकाकुछ पता नहि चलरहा थां तोँ राजमाता बोलीं:"
" सेनापति अजय औऱ विक्रम दोनोजाओ औऱ पताकरो कि किसकी मौतआई हें जौ उसने उदयगढ़ कि इज्जत पर्र हाथ डालने कि कोशिश करी हें!
अजय:" मेरा सौभाग्य राजमाता जौ आपने मुझे इसकेलिए चुना! मे आज हि रवाना होँ जाऊंगा औऱ दोषियों कों उनके अंजाम तक आया दूंगा!
विक्रम:" बिलकुल अजय औऱ मै भि इसमें आपको पूरा सहयोग दूंगा!
राजमाता:" मुझे आप् दोनो पऱ पूरा भरोसा हें औऱ आपकेलिए तोँ यह एक् तरह सें इम्तिहान हें क्योंकि सेनापति बनने केँ बाद आपको आपकी बहादुरी दिखाने कां पहला मौका मिला हें!
अजय:" आप् फिक्र न् करे राजमाता, मे हरहाल मे दोषियों कों कड़ी सें कड़ीसजा दूंगा!
उसकेबाद सभा ख़त्म होँ गई औऱ अजय औऱ विक्रम दोनोसफर कि तैयारी करनेलगी औऱ साम कों लगभगआठ बजे उन्हे निकलना थां तोँ अजय अपनी मम्मी मेनका सें बोला:"
" मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए माता क्योंकि पहलीबार मुझे राजमाता नें कोईकाम दिया हें औऱ आपके पुत्र कि यह पहली परीक्षा हें!
मेनका :" मेरा आशिर्वाद आपकेहाथ हैं पुत्र! जाओ औऱ दोषियों कों उनके अंजाम तक आयादो!
मे तुम्हारे लिएकुछ बना देतीहु!
इतना कहकर मेनका किचन मे चली गई औऱ अजय अपनी जाने कि तैयारी करनेलगा! मेनका अंदर हि अंदर बेहदखुश थि क्योंकि वोँ जानती थि कि अजय केँ जाने केँ बाद वोँ पूरीतरह सें आजाद होगी क्योंकि उसके अलावा दूसरा कोई भि नीचे कक्ष मे कभी नहि जा सकता औऱ वोँ आहिस्ता साड़ी औऱ रंगीन कपड़े पहनकर स्वयं कों जीभरकर निहारेगी ! यहसभी सोचसोच कर उसके शरीर मे उत्तेजना आँ रही थि औऱ जैसे हि खानां रेडीहुआ तौ उसनेअजय कों दिया औऱ दोनो माँ बेटे नें संग मे खानां खाया औऱ उसकेबाद अजय बोला:"
" अच्छा माता मुझे आप् अब जाने कि इजाजत दीजिए! युवराज मेरीराह देखरहे होंगे!
मेनका नें उसका माथाचूम लिया औऱ अजय राजमहल कि तरफबढ़ गय़ा औऱ विक्रम केँ संगकुछ सैनिकों कों लेकर अपने गंतव्य कि तरफकूच कर गय़ा! वहीं दूसरी तरफ मेनका आज खुशी सें फूली नहींसमा रही थि क्योंकि आज वोँ बिलकुल आजाद थि औऱ कों चाहेकर सकतीं थि!
उसके जिस्म मे अजीब सि गुदगुदी हौ गई थि औऱ वोँ नहाने केँ लिए बाथरूम मे घुस गई औऱ थोड़ी देरबाद हि वोँ चांद कि तरहचमक रही थि औऱ अपनी अलमारी सें रंगीन साडिया निकालने लगीतभी घऱ केँ मुख्य दरवाजे पऱ दस्तक हुईँ औऱ मेनका केँ हाथरुक गए!
दो दासिया अंदर आँ गई औऱ बोलि:" आपको राजमाता गायत्री देवी नें राजमहल बुलाया हें!
मेनका कां दिलटूट सां गय़ा क्योंकि आज सुनहरा अवसर उसकेहाथ सें निकलरहा थां मगरराज हुक्म केँ चलते मजबूर थि तोँ बोलीं:"
" ठीक हें आप् थोड़ी देर रुको मे आपकेसंग चलतीहु!
इतना कहकर वोँ फिन सें सफेद कपड़े पहनकर रेडी हौ गई औऱ राजमहल कि तरफचल पड़ी! राजमहल जाकर वोँ गायत्री देवी केँ पास पहुंच गई औऱ बोलि:"
" क्याँ हुआ राजमाता ? आपने इतनीरात मुझे बुलाया ?
गायत्री:" सभीठीक हि हें! बस मेरा युवरूज केँ बिनमन नहींलग रहा थां तोँ सोचा तुम्हे अपनेपास बुलालू क्योंकि एक् माँ कि हालत दूसरी मम्मी हि बेहतर समझ सकती हैं, मे सहीकह रहीहु नाँ!
मेनका:" बिलकुल राजमाता! आपने एकदम सत्यकहा!
उसकेबाद बातचीत कां दौर शुरुआत होँ गय़ा औऱ दोनो एक् दूसरे सें देररात तक बात करती करतीसो गई! वहीं दूसरी तरफ विक्रम औऱ अजय अपनी मंजिल रघुपुर पहुंच गए थें औऱ सरपंच सें मिले तोँ सरपंच बोला:"
" युवराज पहलेइस तरह कि कोई दिक्कत नं थि मगर पिछले एक् सप्ताह सें औरते अचनाक गायब होँ गई हैं जोँ बहुत ढूंढने केँ बाद भि नहींमिल रही हैं! आप् हि अबकोई सहायता कर सकते हैं! औरतों औऱ लड़कियों नें घऱ सें बाहर् निकलना बंदकर दिया हैं डर केँ मारे युवराज!
विक्रम:" आप् फिक्र नहि करे, सभी ठीक हौ जाएगा!
विक्रम औऱ अजय दोनो नें सही सें स्थिति कां जायजा लिया औऱ उसकेबाद दोनो सैनिकों केँ संग उन्हे ढूंढने केँ लिएचल पड़े औऱ रात केँ दोबजे तक जंगल औऱ आसपास केँ कबीले कि छानबीन करतेरहे मगरकुछ हासिल नहि हुआ तौ दोनो नें रात्रि विश्राम कि योजना बनाई औऱ उसकेबाद एक् तंबू मे दोनो लेटेहुए थें औऱ विक्रम शहजादी केँ बारे मे सोचरहा थां कि उसकी भाग्य कितनी अच्छी हें जोँ उसे सलमा जैसी प्रेमिका मिली हें! तभी अचानक बाहर् सें कुछ आवाजे आई औऱ देखा कि कुछलोग हिरणों कां शिकार कररहे थें औऱ यह देखकर अजय औऱ विक्रम दोनो सावधान होँ गए क्योंकि उन्हे देखने सें साफ अंदाजा हौ गय़ा थां कि यहलोग पिंडारी हें औऱ पिंडारी लोग अपनी क्रूरता औऱ बहादुरी केँ लिए बदनाम थें!
विक्रम नें अजय कि तरफ देखा औऱ अजय नें अपनी जादुई तलवार उठाई औऱ उसकेबाद दोनो सावधानी सें आगेबढ़ गए औऱ देखा कि तीन पिंडारी थें जिन्होंने हिरण कां शिकार किया थां औऱ उसे कच्चा हि अपने नुकीले दांतो सें खानेलगे! विक्रम नें मौके कां फायदा उठाते हुए अपना धनुषबाण चलाया औऱ दो पिंडारियो कों मौत केँ घाट उतार दिया औऱ बचाहुआ एक् तलवार लेकर पागलों कि तरहइधर उधर देखने लगा औऱ बोला:"
" हिम्मत हें तोँ बाहर् आओ औऱ मुकाबला करो!
उसकीबात सुनकर अजय तलवार लेकर उसके सामने पहुंच गय़ा औऱ देखते हि देखते एक् भयंकर युद्ध छिड़ गय़ा औऱ पिंडारी गजब कि बहादुरी सें अजय कां सामना कररहा थां औऱ विक्रम आहिस्ता युद्ध कों देखरहा थां औऱ आखिरकार अजय नें उसकेहाथ पर्र वार किया औऱ उसकी तलवार हाथ सहित नीचेगिर पड़ी औऱ वोँ दर्द केँ कराहउठा तौ अजय नें आगे बढ़कर तलवार कों उसकी गर्दन पर्र टिका दिया औऱ बोला:"
" तुम्हारी उदयगढ़ मे घुसने कि हिम्मत केसे हुईँ?
पिंडारी:" हमसे गलती हौ गई, मुझेमाफ करदो आप्!
विक्रम:" क्याँ औरतों औऱ लड़कियों कों तुमने उठाया हें ?
पिंडारी चुपरहा तोँ अजय नें तलवार कि नोक कों उसकी गर्दन मे चुभो दिया तौ खून कि बूंदे चमकउठी औऱ वोँ दर्द सें बेचैनी कर बोला:"
" आह्ह्ह्ह्ह गलती हौ गई मुझे छोड़दो! आज केँ बादऐसा नहीं होगा!
अजय:" औरते औऱ लड़कियां कहां हें यह बताओ तोँ हम् तुम्हे छोड़ देंगे!
पिंडारी:" वोँ सभी यहां सें चार किमीदूर एक् जंगली कबीले मे हें औऱ सुभह उन्हे पिंडारगढ़ लें जाया जाएगा!
अजय:" मुझे वहां लेकरचलो तौ जीवन ईनाम मे मिलेगी तेरी!
पिंडारी मान गय़ा क्योंकि वोँ जानता थां कि वहां लगभग 20 केँ पासपास पिंडारी थें जौ इन दोनो कों आहिस्ता मार देंगे औऱ उसकीजान बच जायेगी!
पिंडारी उन्हें अपनेहाथ लेकरचल पड़ा औऱ जैसे हि दोनो काबिल पहुंचे तौ अजय नें पिंडारी कि गर्दन एक् झटके केँ संग उड़ा दि औऱ उसकेबाद दोनो केँ सावधानी सें एक् एक् करके पिंडरियो कों मौत केँ घाट उतारना शुरुआत कर दिया औऱ देखते हौ लगभगदस पिंडारी मारेगए औऱ अब उन्हें औरतेनजर आँ रही थि औऱ लगभग 10 पिंडारी वहीं पहरादे रहे थें! अजय औऱ विक्रम नें बिनादेर किए सीधाउन पर्र धावाबोल दिया औऱ एक् भयंकर युद्ध छिड़ गय़ा औऱ तलवारे हवा मे लहराने लगी! पिंडारी बेहद चुस्ती औऱ बहादुरी सें लड़रहे थें मगर उनका सामना एक् तरफ युवराज विक्रम सें थां जौ बेहद जोशीला औऱ ताकतवर होने केँ संगतेज दिमाग़ भि थां औऱ दूसरी तरफअजय जिससे हाथ मे जादुई तलवार थि तौ पिंडारियो कि लाशे गिरने लगी औऱ देखते हि देखते लगभगआठ पिंडारी मौत केँ घाट उतारदिए गए औऱ बाकी दोनो घायल होकर तड़परहे थें औऱ जान कि भीख मांगरहे थें
" हमेमत मारो नहीं तौ पूरे उदयगढ़ कों तबाहकर दिया जाएगा!
उनकीबात सुनकर विक्रम कि आंखो मे खूनउतर आया औऱ उसने तलवार कां भरपूर वार उसकी गर्दन पऱ किया औऱ दूसरा पिंडारी डर सें कांपता हुआ उसके पैरो मे गिर पड़ा औऱ बोला"
" मुझेमाफ करदो! मुझेमत मारो!
अजय:" तुम् औरतों औऱ लड़कियों कों क्यूं उठारहे थें?
पिंडारी:" सरदार कां हुक्म थां क्योंकि पिंडारी बिना औरते केँ जिंदा नहींरह सकते! मुझे जाने दीजिए!
अजय नें उसकी गर्दन कों भि उड़ा दिया औऱ उसकेबाद सब औरतों औऱ लड़कियों कों संग मे लेकर सरदार केँ हवाले किया औऱ संगआए सब सैनिकों कों देहात कि सुरक्षा मे छोड़कर अगलेदिन साम कों वापिस राजमहल कि तरफलौट पड़े!
दूसरी तरफ पिंडारियो कां सरदार पिंडाला सेक्स सें व्याकुल थां औऱ उसे किसी भि कीमत पऱ स्त्री याँ लकड़ी चाहिए थि मगरउसे सबसे ज़्यादा दुख अपने आदमियों कि मौत कां थां औऱ उसने फैसला किया कि वोँ अपनेसब आदमियों कि मौत केँ बदला लेगा औऱ अपने आदमियों केँ संग युद्ध कि तैयारी करनेलगा मगर जैसे हि यहखबर जब्बार तक पहुंची तौ जब्बार पिंडरागढ़ पहुंच गय़ा औऱ पिंडाला केँ सामने सिर झुकाकर बोला:"
" महाराज मैने सुना हैं कि अजय कों उसके पुरखो कि जादुई तलवार मिली हुई हें जिसकी वजह सें आपके इतने व्यक्ति मारेगए हें! अभि युद्ध करनासही नहि होगा!
पिंडाला:" तौ क्याँ हम् मात्र एक् तलवार कि वजह सें चुप हौ जाए! नहीं जब्बार नहि, हम् उदयगढ़ मे खून कि नदिया बहा देंगे आज!
जब्बार:" मुझे आपकी ताकत पऱ पूरा भरोसा हैं मगर आप् जीतकर भि नुकसान मे रहोगे क्योंकि आपकेआधे सें ज़्यादा सैनिक मारे जायेंगे मगरअगर किसीतरह अजय केँ हाथ मे तलवार न् रहे तोँ हम् आहिस्ता जीत जायेंगे जैसे हमने उसके बाप कों मारा थां ठीक वैसे हि कुछ सोचना पड़ेगा, !
पिंडाला कों उसकीबात सहीलगी औऱ बोला:"ठीक हें मगर मुझे किसी भि कीमत एक् स्त्री चाहिए मेरे शरीर कि आग मुझे पागलकर रही हैं!
जब्बार उसकीबात सुनकर मुस्कुराया औऱ बोला:"
" आप् चिंता नं करेंसाम तक एक् नहीं बल्कि दो सुंदर खूबसूरत औरत आपकेपास पहुंच जायेगी!
उसकीबात सुनकर पिंडाला जोर सें हंस पड़ा औऱ बोला :"
" जब्बार सुना हैं तेरी पत्नि शमा नें सलीम कों अपना दीवाना बनारखा हैं पिछले कुछ सालों सें! सुना हें वोँ मुंह मे लेकर चूसती भि हैं, हमे तौ आज तक ऐसीकोई नहीं मिली !
शमा कां नाम सुनते हि जब्बार केँ बदन कां खूनजाम सां हौ गय़ा औऱ डरतेहुए बोला:"
" ऐसागजब नाँ कीजिए महराज, वोँ मेरी पत्नि हें!
सरदार:" सालेजब वोँ सलीम कां लन्ड चूसती हैं तब तेरी पत्नि नहीं होती हैं क्याँ ? मेराचूस लेगी तोँ क्याँ उसके मुंह मे कीड़े पड़ जायेंगे ? दो घंटे केँ अंदर मुझेशमा चाहिए! नहीं तौ तुम् जानते होँ कि मे क्याँ कर सकता हूं जब्बार!
जब्बार कुछ नहि बोला औऱ सिर झुकाकर वापिस आँ गय़ा औऱ दुःखी मन सें अपने राज्य कि तरफ वापसलौट पड़ा! वोँ अच्छे सें जानता थां कि शमा कों पिंडाला केँ पास भेजने कां मतलब थां शमा कि बरबादी औऱ उसकी दर्दनाक मौत! पिंडाला सेक्स करतेहुए भूखा भेड़िया बन जाता थां औऱ उसने बहोत सारी औरतों कों जोश औऱ उत्तेजना केँ कारणमार दिया थां!
जब्बार केँ पास दूसरा कोई उपाय नहि थां तौ राज्य वापिस आया औऱ शमा कों बोला:"
" आप् जल्द सें सजधजकर होँ जाओ हम् एक् समारोह मे जायेंगे!
शमा खुशी सें भर गई औऱ जल्द जल्द सजधजकर होनेलगी औऱ जब्बार उसे देखकर सोचरहा थां कि काशइसे पता होता कि मे इसे कहां लें जारहा हूं तौ कभी सजधजकर नहि होती!शमा कों संग लेकर जब्बार अपनी बग्गी पर्र निकल गय़ा औऱ पिंडारगढ कि तरफबढ़ गय़ा!
बिलकुल सत्यकहा आपने! जब्बार कां चरित्र इसकथा कां सबसे घटिया चरित्र होगा!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
शमा खुशी सें चहकती हुइ बग्गी मे जारही थि औऱ उसे बेहदचैन मिलरहा थां क्योंकि एक् लंबे अरसे केँ बाद जब्बार उसे बाहर् घुमाने लेँ जारहा थां! लगभग एक् घंटे केँ बाद बग्गी जंगल सें गुजरकर पिंडारियो केँ इलाके मे दाखिल हौ गई तोँ शमा कां माथा ठनका कि यह जब्बार आखिरजा कहां रहा हें तौ बोलीं:"
" आखिर हम् जा कहां रहे हें? राज्य तौ हमसे बहोत पीछेछूट गय़ा हैं औऱ यह तौ खूंखार पिंडारियो कां इलाका लगता हें मुझे जब्बार!
जब्बार:" बस थोड़ी हि देर मे हम् पहुंचने वाले हें! डरोमत मे हु नाँ तोँ कोई दिक्कत नहीं होगी!
शमा कों उसकीबात सुनकर थोडा चैन मिलामगर उसकेदिल मे एक् डर सां बैठ गय़ा थां क्योंकि हवस केँ भूखे पिंडारी उसे घूरेजा रहे थें औऱ अजीब अजीब सि आवाजें निकाल रहे थें जिससे शमा कि हालत खराब हौ गई थि औऱ वोँ कांपरही थि! चलते चलते एक् बड़े सें महल केँ सामने बग्गी रुक गई औऱ देखते हि देखते बग्गी कों पिंडारियो नें चारोतरफ सें घेर लिया तौ शमा केँ मुंह सें डर केँ मारे चींख निकल पड़ी औऱ वोँ जब्बार सें लिपट गई औऱ बोलि:" यह कहना बग्गी कों रोक दिया जब्बार ? यहलोग हमे जिंदा खा जाएंगे!
पिंडारियो केँ बदन सें उठती हुईँ बदबूशमा सें सहन नहीं हुई तौ उसने मुंह कों पकड़े सें बांध लिया औऱ जब्बार कों झिंझोड़ते हुए बोलीं:" आप् कुछ बोलते क्यूं नहि होँ ? आखिरयह सभी क्याँ हौ रहा हैं यहां?
जब्बार नें उसेचुप रहने कां इशारा किया औऱ उसकाहाथ पकड़कर बग्गी सें उतरा औऱ शमा कों चारोतरफ सें लोगो नें घेर लिया थां औऱ डरती हुईँ शमा जब्बार केँ संगमहल केँ अंदर दाखिल होँ गई औऱ बदबू सें उसकासिर फटाजा रहा थां मगर किसीतरह स्वयं कों संभाले हुए थि! जब्बार चलतेहुए एक् आलीशान कक्ष कि तरफबढ़ गय़ा औऱ शमाबद हवास सि उसकेसंग खिंची चलीजा रही थि औऱ दोनोअब पिंडाला केँ सामने खड़ेहुए थें औऱ शमा कों देखते हि वोँ उसकी हुस्न पर्र झूमउठा औऱ बोला"
" वाउ जब्बार वाउ, असली खज़ाना तोँ तूने अपनेघऱ मे छिपारखा थां! आनंद आँ जायेगा इसकेसंग तौ पूराआज!
पिंडाला लगभगआठ फीट कां चौड़ी डील कां राक्षस सां दिखने वाला गंदा औऱ गलीच इंसान थां जिसे देखकर शमा कों चक्कर सें आनेलगे थें औऱ उसकीबात सुनकर शमासमझ गई कि जब्बार नें उसे धोखा दिया हैं वोँ बेहोश होतीचली गई!
लगभग एक् घंटे केँ बादउसे होशआया तौ उसकी आंखेफटी कि फटीरह गई क्योंकि वोँ बिलकुल नंगीबेड पर्र बंधी पड़ी हुइ थि औऱ चाहकर हिल भि नहि सकती थि बस मात्र अपनी गर्दन उठाकर इधरउधर देख सकती थि औऱ उसने देखा कि सामने पिंडाला बिलकुल नंगाहुए अपना राक्षसी लन्ड हिला थां जिसे देखकर शमा केँ मुंह सें चींख निकल पड़ी औऱ जोरजोर सें चिल्लाने लगी
" जब्बार कहां होँ तुम्? बचाओ मुझे जब्बार ! तुम् मुझे धोखा नहींदे सकते!
पिंडाला खड़ाहुआ औऱ उसका लन्ड उसके घुटनो तक आँ गय़ा औऱ चलतेहुए उसकी जांघो केँ बीच आँ गय़ा औऱ बोला:"
" जब्बार तुम्हे मेरी रखैल बनाकर चला गय़ा! आज केँ बाद तुम् मरतेदम तक पिंडाला केँ नीचे पड़ी रहोगी!
उसकेबाद पिंडाला नें अपने लन्ड कों उसकी बुर पर्र रखा औऱ धक्का मार दिया तौ शमागला फाड़कर चींखउठी क्योंकि एक् हि बार मे संपूर्ण लन्ड घुस गय़ा औऱ उसके बुर केँ होंठ फटतेचले गए औऱ खून बाहर् आनेलगा! दर्द सें चिल्लाती हुईँ शमा बेहोश होतीचली गई औऱ पिंडाला नें बिना परवाह किए उसकी बुर कों फाड़ना शुरुआत कर दिया औऱ बेहोशी मे भि शमा चींखती रहीमगर पिण्डाला इंसान नहीं जानवर थां औऱ उसकी बुर मे लगारहा धक्के मारने! बुर सें खून निकलकर उसकी जांघो कों भिगो दिया थां औऱ पिण्डाला उसे चोदता रहा ! बीचबीच मे वोँ होश मे आती औऱ फिन सें बेहोश होँ जाती! आखिरकार लगभग एक् घंटे कि बुर फाड़ चुदाई केँ बाद पिंडाला नें उसकी बुर कों भर दिया औऱ शमा कों खोल दिया तोँ शमाहोश मे आँ गई औऱ खड़ी होने कि कोशिश करनेलगी मगरगिर पड़ी क्योंकि उसकी टांगो मे ताकत नहींबच गई थि औऱ पिंडाला उसकी जांघों पर्र फैलेखून कों अपनीजीभ सें चाटने लगा औऱ उसकेबाद शमा रोनेलगी तोँ उसनेशमा कों उठाकर एक् तालाब मे फेंक दिया औऱ स्वयं भि उसमेकूद गय़ा औऱ शमा कों पकड़ लिया औऱ शमाचाह कर स्वयं कों नहीं छुड़ा सकी औऱ पिंडाला नें उसकी टांग कों उठाते हुए लन्ड कों घुसा डाला औऱ दर्द सें प्यास करशमा चिल्ला पड़ीमगर इंसान होँ तोँ कोईदया आए वोँ तौ शैतान थां औऱ उसे चोदता रहा!शमा रोतीरही मगर पिण्डाला तब तक नहीं रुकाजब तक उसकी बुर कों अपनेमाल सें नहींभर दिया!
बेहोश शमा कों उसनेबैड पर्र पटक दिया औऱ खानां खानेचला गय़ा! उसके एक् बूढ़े सेवक नें शमा कों थोडा पानी पिया औऱ कुछ खाने कों दिया तौ शमा रोनेलगी औऱ बोलीं:"
" मुझेमार डालो, कम सें कमइस दर्द कों झेलने सें तोँ बच जाऊंगी!
बूढ़ा:" पिंडाला सें चुदना सौभाग्य कि बात होती हैं! तुम्हारी तरफ तोँ खुश होना चाहिए कि तुम्हे उसका लन्ड मिला !
शमा नें उसे गुस्से सें देखा औऱ बोलि:" कितने घटिया इंसान हौ तुम् सभी! एक् दिन तुम्हे तुम्हारे किए कि सजा जरूर मिलेगी!
बूढ़े नें शमा कों अच्छे सें साफ किया औऱ शमा कां शरीरचमक उठा औऱ अंदरआते हि पिण्डाला नें उसकी बुर कों चोदना शुरुकर दिया औऱ शमा दर्द सें मरने जैसी हालत मे पहुंच गई औऱ पूरीरात मे लगभग पांचबार उसे पिण्डाला नें चोदकर उसकी बुर कां कबाड़ा कर दिया!शमा मन हि मनमौत कि दुआ मांगरही थि मगर इतनी आसानी सें उसेमौत भि मिलने वाली नहीं थि!
दूसरी तरफअजय औऱ विक्रम चलतेहुए एक् बाजार सें गजरे तोँ विक्रम नें अजय कों रुकने कां इशारा किया औऱ दोनोरुक गए औऱ विक्रम बाजार मे घूमने लगा! बहुत सारी दुकानें लगी हुई थि औऱ विक्रम एक् दुकान सें ज्वेलरी खरीदने लगा तौ अजय नें सोचा कि वोँ राजमाता केँ लिए खरीदरहा होगा तोँ उसने भि अपनी माँ मेनका केँ लिएकुछ खरीदने कां सोचा औऱ फिन उसने लगभगचार दर्जन खूबसूरत कांच कि चूड़ियां खरीदली औऱ उसकेबाद बाजार मे घूमने लगा! विक्रम नें सलमा केँ लिएढेर सारा सामान लिया औऱ अजय केँ पास आँ गय़ा औऱ दोनो मित्र महल कि तरफचल पड़े!रात मे लगभगदस बजे दोनोमहल पहुंचे औऱ राजमाता कों सारी जानकारी दि तोँ राजमाता खुश हुईँ औऱ बोलि:"
" शाबाश मेरे बेटो!आज आप् दोनो नें उदयगढ़ कां नामसही मे रोशन किया हैं!
अजय राजमाता केँ मुंह सें अपनेलिए बेटा सुनकर गदगद होँ गय़ा औऱ मेनका भि मुस्कुरा उठी क्यूंकि यह उसकेलिए फख्र कि बात थि औऱ बोलीं:"
" सच मे आप् दोनो नें जिसतरह सें औरतों कि इज्जत बचाई हें वोँ कबीले तारीफ हें!
अजय औऱ विक्रम दोनो नें एक् दूसरे कि तरफ देखा औऱ ग्रह मिलाकर बोले:"
" आप् माताओं कां प्रेम औऱ आशीर्वाद चाहिए बस! किसी भि महिला केँ संगकोई अन्याय नहि होगा!
राजमाता:" हम् आपकेसंग हें बेटा, हमेशा! पिंडारियो कों मारना आसानकाम नहि हैं मगर तुम् दोनो नें किया हें मगर सावधान रहना क्योंकि पिंडारी जरूरी बड़ा हमला करेंगे! क्यूं मे सचकहरही हु नां बेहन मेनका ?
मेनका केँ लिए पहलीबार राजमाता नें बेहन शब्द कां इस्तेमाल किया थां औऱ यहसभी अजय कि बहादुरी केँ कारण हौ रहा थां तोँ मेनका बेहदखुश हुइ औऱ बोलि:"
" बिलकुल पिंडारी केँ हमले मे हम् दोनोभरी जवानी मे विधवा हुईँ थि औऱ आप् दोनो कों उसका बदला लेना होगातभी जाकरहमे चैन मिलेगा!
अजय:" मे आपकीशपथ खाता हूं माता कि आपकी मांग उजाड़ने वालो कों दुनिया उजाड़ दूंगा!
विक्रम:" आपके एक् आंसू केँ बदले 1000 आंसुओं कां हिसाब होगा राजमाता!
राजमाता:" भगवान आप् दोनो कों कामयाब करे! एक् कामकरो खानां बन गय़ा हैं तोँ आजसभी संग हि खाते हें!
मेनका उसकीबात सुनकर खुशी सें मन हि मनझूम उठी क्योंकि आज पहलीबार वोँ राज खानां खानेजा रही थि मगर दिखावे केँ लिए बोलि:"
" आप् हमे जाने कि इजाजत दीजिए! हम् दोनोघऱ हि खानां खायेंगे!
विक्रम:" नहींऐसा नहीं होगा आप् दोनो हमारे संग हि खानां खायेंगे बसबात समाप्त!
मेनका कुछ न् बोलीं औऱ उसकेबाद सबनेसंग मे खानां खाया औऱ मेनका सच मे अपने आपको बेहदखुश नसीब महसूस कररही थि! आजअजय कि इज्जत मेनका कि नजरो मे कई गुनाबढ़ गई थीं क्योंकि उसकी बहादुरी केँ कारण हि उसेआज कां दिन नसीबहुआ थां! खानां खाने केँ बाद राजमाता बोलि :"
" अजय आप् दोनोआज यही हमारे संग हि राजमहल मे सोजाओ! रात भि बहुत हौ गई हैं!
अजय नें मेनका कि तरफ देखा तोँ मेनका नें उसे इशारे सें मनाकर दिया तौ अजय बोला:"
" माफ़ चाहता हूं राजमाता मगर मे अपनेघऱ पऱ हि सोना मनपसंद करूंगा!
उसकेबाद दोनोमा बेटे अपनेघऱ कि तरफलौट पड़े औऱ घऱ पहुंच कर मेनका बोलि:"
" पुत्र आज तौ कमाल हौ गय़ा! सच मे पहलीबार मैने राजमाता केँ संग खानां खाया!
अजय:" सच मे राजमाता दिल कि बहोत अच्छी हें! परमेश्वर उन्हे खुशरखे!
मेनका:" हान बेटा औऱ पता हें आज उन्होंने मुझे बेहन कहके पुकारा हैं! सच मे आपकीवजह सें मुझे बेहद इज्जत मिली हैं पुत्र!
इतना कहकर उसनेअजय कां माथाचूम लिया औऱ बोलीं:"
" अच्छा अब आप् आरामकरो थकगए होंगे दिनदिन सें सोए नहीं हौ नां पुत्र!
अजय कों अचानक सें चूड़ियों कि यादआई औऱ बोला:"
" माता मे तोँ भूल हि गय़ा कि मे आपकेकुछ लेकरआया हु!
इतना कहकर वोँ उठा औऱ अलमारी सें कांच कि चूड़ियां निकाली जोँ बेहद सुर्ख लालरंग कि थि औऱ मेनका कों दिखाते हुए बोला:"
" माता देखो कितनी सुंदर चूड़ियां हें, जब आप् लालरंग कि साड़ी केँ संग पहनोगी तोँ बेहद हसीन लगोगी आप्!
उसकीबात सुनकर मेनका लज्जा सें लजा गई औऱ बोलि;"
" कुछ तोँ शर्मा कियाकरो, कुछ भि बोल देते होँ पुत्र आप्! इतनी भि खूबसूरत नहींहु मे !
अजय नें उसकाहाथ पकड़ लिया औऱ चूड़ियां उसकेहाथ सें लगाते हुए बोला:" देखो नाँ माता कितनी हसीन लगेगी आपके हाथो मे यहलाल रंग कि बिरंगी चूड़ियां! एक् बारपहन कर दिखाए नं
मेनका उसकीबात सुनकर मुस्कुरा उठी औऱ बोलीं:" अच्छा ठीक हैं रुको मे पहन लेती हूं!
इतना कहकर मेनका चूड़ियां पहनने लगी औऱ अजय भि उसकी सहायता करनेलगा औऱ देखते हि देखते मेनका केँ दोनोहाथ चुड़ियो सें भरगए औऱ बेहद हसीनलग रहे थें तौ अजय उसके हाथो कों पकड़कर बोला:"
" कैसीलगी आपकोयह चूड़ियां माता?
मेनका नें अपनी कलाइयों कों देखा जोँ बेहद सुंदर लगरही थि औऱ बोलीं:"
" बेहद सुंदर! अबखुश हौ नं आप् पुत्र!
अजय:"हान माता खुशहु मगर आप् जब इनकेसंग लालरंग कि साड़ी पहनेगी तब देख्ना कितनी सुंदर जचेगी यह आप् पऱ!
मेनका उसकीबात सुनकर अंदर हि अंदर रोमांच सें भर गई औऱ बोलि:" अच्छा जी, चलो अब आप् आरामकर लोरात बहुत हौ गई हैं!
अजय अपने कक्ष मे आँ गय़ा औऱ रात धीरे-धीरे धीरे-धीरे गहराने लगी औऱ दूसरी तरफ मेनका कल सें हि बेचैन थि जबसे उसनेलाल रंग कि साड़ी कों देखा थां क्योंकि लालरंग कि साड़ी उसकी पसंदीदा हुआ करती थि औऱ वोँ यह देखने केँ लिएमरी जारही थि लालरंग कि साड़ी केँ संगयह लालरंग कि चूड़ियां कैसी लगेगी! मगरकल राजमाता केँ द्वारा बुलाए जाने केँ कारण वोँ साड़ी नहींपहन सकी थि मगरआज इसकेपास अच्छा मौका थां मगरबस एक् हि दिक्कत थि कि उसेअजय कां डर थां!
मगर मेनका कां दिलइसे तसल्ली देरहा थां कि अजय तोँ दोरात सें सोया नहीं हें तोँ आज तौ बेड पऱ गिरते हि नींद केँ आगोश मे चला जायेगा औऱ यहसभी सोचते हि उसके होंठ मुस्कुरा पड़े औऱ मेनका रात पूरीतरह सें गहराने कां प्रतीक्षा करनेलगी! लगभग एक् घंटेबाद वोँ धीरे-धीरे सें अपने कक्ष केँ परदे हटाकर बाहर् आई औऱ अजय केँ कक्ष मे झांका तौ उसेअजय केँ जोरदार खर्राटे सुनाई पड़े औऱ मेनका केँ होंठो कों मुस्कान आँ गई औऱ उसकेकदम अपने कमरे कि तरफबढ़ गए औऱ कांपते हाथों सें उसने धड़कते दिल केँ संग साड़ी निकाली औऱ नीचे कि तरफचल पड़ी! मेनका धीरे-धीरे धीरे-धीरे नीचे कक्ष मे पहुंच गई औऱ शीशे मे देखते हुए साड़ी कों पहन लिया औऱ उसकी आंखो मे चमकउभर आई!लाल होँ कि चूड़ियों सें मिलती हुइ उसकी साड़ी उसके जिस्म पऱ बेहद आकर्षक लगरही थि औऱ मेनका स्वयं पर्र हि आकर्षित हुईँ जारही थि!
मेनका बारबार स्वयं कों कभी दांए सें तोँ कभी बांए सें पलटपलट करदेख रहीं थि औऱ उसकेतन जिस्म केँ अंदर अजीब सि गुदगुदी मची हुईँ थि औऱ उसके होंठो पऱ मुस्कान आँ गई औऱ उनसे खुशी सें झूमना शुरुआत कर दिया औऱ उसकी बड़ी बड़ीगोल मटोल चूचियां नजरआने लगी औऱ अजय छुपाहुआ यहसभी देखरहा थां औऱ सोचरहा थां कि उसकी माँ सच मे बेहद हसीन औऱ आकर्षक हें!
झूमती हुइ मेनका कों पर्दा हिलता हुआ महसूस हुआ औऱ वोँ समझ गई कि अजयउसे छुपकर देखरहा हैं तौ उसे बेहद लज्जा आई औऱ झूमना बंदकर दियामगर शीशे केँ सामने खड़ीरही औऱ स्वयं कों निहारती रही! पिछली बार केँ मुकाबले आजयह जानकर कि उसका बेटा उसेदेख रहा हैं वोँ बहुतहद तक सहज महसूस कररही थीं औऱ आखिर मे वोँ उपर कि तरफ जानेलगी तौ अजय तेजी सें उपरआया औऱ गैलरी मे खड़ा होँ गय़ा औऱ जैसे हि मेनका उसकेपास सें गुजरी तौ मेनका नें उसे पकड़कर अपनीतरफ खींच लिया औऱ उसका पकड़कर धीरे-धीरे सें बोलीं:"
" थोड़ी देर पहले तौ बड़ी नींद आँ रहीथीं औऱ अब यहां छुपे खड़ेहुए हौ पुत्र आप्!
अजयसमझ गय़ा कि उसकी चोरीआज फिन पकड़ी गई हैं तौ धीरे-धीरे सें बोला:"
" वोँ आंखखुल गई तौ सुसु करने केँ लिएआया थां!
अजय कां साफझूठ मेनका समझ गई औऱ बोलि:"
" मानना पड़ेगा आपको पुत्र, यह जानते हुए भि कि मे सच जानती हूं फिन भि आप् झूठ बोलने कि हिम्मत कर सकते होँ! मे जानती हूं कि आप् मुझे नीचेदेख रहे थें
अजय: वोँ गलती हौ गई मुझसे, माफ़ चाहता हूं! कान छोड़ दीजिए नाँ आप्
मेनका नें उसकाकान छोड़ दिया औऱ बोलि:" मगर आप् हमेऐसे छिपकर क्यूं देखते हौ पुत्र?
अजय:" माता बातयह हैं कि आप् रंगीन कपड़ो मे बेहद सुंदर औऱ आकर्षक लगती हैं औऱ मे चाहकर भि स्वयं कों रोक नहि पाता हूं!
मेनका उसकीबात सुनकर अपनी सुन्दरता पर्र अभिमानित हुई औऱ बोलि:" मगर आपकोयह ध्यान रखना होगा कि हम् आपकी माता हें औऱ आपकोहमे ऐसे देख्ना शोभा नहि देता हें पुत्र!
अजय नें उसकाहाथ पकड़ लिया तोँ उसकी चूड़ियों सें मधुर आवाज़ आई औऱ बोला:"
" माता मे सभी समझता हूं मगरचाह कर भि स्वयं कों रोक नहि पाता हूं ! देखिए आपकी चूड़ियां कितना मधुरखनक रही हैं!
मेनका नें उसकीबात सुनकर जान बूझकर अपनी चूड़ियों कों थोडा जोर सें खनका दिया औऱ बोलि:" मगरफिन भि आपको समझना चाहिए कि कोई देखेगा तोँ क्याँ सोचेगा?
मेनका कों एहसास हुआ हैं उसनेगलत बोल दिया हैं मगरतब तक तीर कमान सें निकल गय़ा थां औऱ अजय उसकेहाथ कि उंगलियों मे अपनी उंगलियों कों फांसते हुए बोला:"
" माता आप् निश्चित रहे किसी कों कभीपता नहि चलेगा! जिसतरह सें आपको स्वयं कों शीशे मे देख्ना अच्छा लगता हैं उसीतरह सें मुझे आपको देख्ना अच्छा लगता हैं माता!
अजय कि बात सुनकर मेनका बोलि:" मगर पुत्र आपको.
अजय नें उसकीबात कों बीच मे हि काट दिया औऱ बोला:"
" कलदिन मे मे आपकेलिए बड़ा शीशालगा दूंगा माता ताकि आप् स्वयं कों अच्छे सें देखसके!
मेनका केँ होंठो पऱ मुस्कान आँ गई मगर अंधेरे केँ कारणअजय नहीं पाया औऱ मेनका बोलीं:"
" औऱ आप् मुझेछिप करदेख सके इसलिये यहसभी कररहे होँ नां पुत्र! चलोरात बहोत होँ गई हैं अबसोजाओ!
इतना कहकर मेनका जानेलगी तोँ अजय नें उसे अपनीतरफ खींच लिया औऱ दोनो कि छातियां एक् दूसरे सें टकरा गई औऱ अजय बोला:"
" ज़्यादा नींद आँ रही हैं क्याँ आपको माता?
मेनका कां शरीर कांपउठा औऱ बोलि:" हान नींद आँ रही हैं मुझे जाने दीजिए नां पुत्र आप्!
अजय नें उसके एक् कंधे कों पकड़ लिया औऱ हल्का सां सहलाते हुए बोला:"
" सो जानां आप् माता मगरबस एक् बातबता दीजिए कि माता कल आप् जबनए बड़े शीशे केँ सामने लालरंग कि साड़ी केँ संगरंग कि चूड़ियां पहनोगी तौ मे आपकोदेख सकता हूं क्याँ ?
अजय कि बात सुनकर मेनका कां पूरा जिस्म कांपउठा औऱ उसे छेड़ते हुए बोलि:"
" नहीं मे स्वयं कों नहीं देखूंगी शीशे केँ सामने!
अजय नें दूसरा हाथ भि उसके कंधे पऱ टिका दिया औऱ दोनोअब एक् दूसरे केँ बिलकुल सामने खड़ेहुए थें औऱ मेनका कि सांसों कां हंगामा अजय कों साफ महसूस होँ रहा थां औऱ बोला:"
" मेरीशपथ खाओ आप् कि आप् स्वयं कों शीशे मे नहीं देखोगी
इतना कहकरअजय नें मेनका कां हाथ पकड़कर अपनेसिर पऱ रख दिया तोँ मेनका नें जल्दी अपनाहाथ पीछे खींच लिया औऱ धीरे-धीरे सें उसकेकान मे बोलीं:
" देखूंगी औऱ आप् भि देख लेना पुत्र मगर छुपकर नहीं तोँ मुझे बेहद लज्जा आयेगी!
इतना कहकर उसनेअजय केँ गाल कों चूम लिया औऱ अपनाहाथ छुड़ा कर अपने कक्ष मे घुस गई औऱ अजय नें अपनेगाल कों छुआ तोँ उसे अपनेगाल पऱ गीला गीलालगा औऱ उसकी उंगलियां उसकी मम्मी केँ मुंह कि लार सें चिकनी होँ गई तोँ उसे एहसास हुआ कि मेनका नें उसे केवल भावावेश मे नहीं बल्कि पूर्ण उत्तेजना केँ संग चूमा थां औऱ यह सोचते हि अजय खुशी सें झूमउठा औऱ औऱ अपने कक्ष मे आकर आराम करनेलगा!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा - Next part miss mat karna
Relavant source : click here




