शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
आज शनिवार थां औऱ सलमा केँ मन मे सुभह सें हि लड्डू फूटरहे थें क्योंकि वोँ जानती थि कि आज उसका प्रेमी विक्रम उससे मिलने केँ लिए जरूर आएगा औऱ उसनेसाम कों लगभगआठ बजे सीमा सें कहा:"
" सीमा मेरेलिए एक् चमेली कां गजरा लेती आनां!
सीमाउसे छेड़ते हुए बोलीं:" क्यूं आजफिन सें युवराज विक्रम सें मिलना हें क्याँ शहजादी?
सलमा उसकीबात सुनकर लजा गई औऱ बोलि:" ऐसाकुछ नहि हैं सीमा, बस ऐसे हि मनकररहा हैं आज गजरा पहनने कां मेरा!
सीमा उसकीतरफ कामुक अंदाज मे स्माइल करतेहुए बोलीं:"
" हान जानती हूं क्यूं मनकररहा हैं आपका औऱ पिछली बार आपका गजरा मसलाहुआ मिला थां मुझे आपकेबेड केँ नीचे मानो फूलो कां सारारस कोई निचोड़ करपी गय़ा हौ!
सलमा उसकीबात सुनकर लज्जा सें पानी पानी हौ गई औऱ उसका मुंह नीचेझुक गय़ा तोँ सीमा उसका मुंहउपर उठाकर उसकी आंखो मे देखते हुए बोलि :
" शर्माती क्यूं होँ शहजादी! फूल तौ मसले जाने केँ लिए हि होते हें
इतना कहकर सीमा नें सलमा कि चुचियों कि तरफ इशारा किया तौ सलमा कां दिलजोर सें धड़कउठा औऱ बोलीं:"
" जाभाग जा यहां सें !! बेशर्म कहीं कि !
सीमा उसकीबात सुनकर हंस पड़ी औऱ जातेहुए बोलीं:
" अबसचबात भि आपको कड़वी लगती हैं तोँ इसमें मेरी क्याँ गलती!मगर देख्ना विक्रम नें आपके फूलो कों मसलमसल कर इनकारस नं निकाल दिया तौ कहना आप्!
इतना कहकर सीमाउसे स्माइल देती हुइ बाहर् निकल गई औऱ सलमा नहाने केँ लिएचली गई! सीमा थोड़ी देर हि एक् गजरा लेकर आँ गई औऱ बोलि:"
" लो शहजादी लें आई आपकेलिए गजरा!मगर इसबार बेचारे कों बेड केँ नीचेमत फेंका देनाजोश जोश मे आप्!
सलमा उसकीबात सुनकर लजा गई औऱ बोलीं:" मैने नहीं फेंका थां, मे भला क्यूं नीचे फेंकने लगी
सीमा उसकीबात सुनकर हंस पड़ी औऱ बोलि:" अच्छा जी आपने नहीं फेंका थां तौ किसने फेंका थां गजरा!
सलमा कों अपनी गलती कां एहसास हुआमगर अबकुछ नहि हौ सकता थां औऱ बोलीं:"
" किसी नें नहि फेंका थां अपने आप् हि गिर गय़ा होगा!
सीमा शहजादी केँ पीछेआई औऱ उसे कसकर पकड़कर बोलि:"
" औऱ कितना झूठ बोलोगी शहजादी! मैने विक्रम कों आपके कक्ष मे देखा थां परदे केँ पीछे छिपेहुए ! समझी आप्!
उसकीबात सुनकर सलमा लज्जा सें पानी पानी होँ गई औऱ धीरे-धीरे सें बोलि:" ख्वाब मे देखा होगा सीमा!
चलो जल्द सें गजरा लगाओ!
सीमासमझ गई कि सलमा उससे लज्जा केँ मारे बताना नहीं चाहती हैं तोँ सीमा नें उसे छेड़ना ठीक नहि समझा औऱ गजरा उसके बालो मे लगा दिया औऱ थोड़ी देरबाद सलमा नें खानां खाया औऱ उसकेबाद लगभगदस बजे सीमाचली गई तोँ सलमा बेचैनी सें स्वयं कों आईने मे निहारती हुइ देखने लगी!
वहीं दूसरी तरफअजय नें बड़ा सां शीशाघऱ मे लगा दिया औऱ बोला:" माँ हमे दोनो कों राजमहल बुलाया हें! हौ सकता हैं कि कुछ जरूरी काम होँ!
दोनो बेटे राजमहल गए औऱ राजमाता बोलि:"
" अजय बेटे आप् विक्रम केँ संग मिलकर हथियारों कां मुयावना करलो एक् बार औऱ दूसरे कुछ जरूरी हथियार भि आपको लेने होंगे आज पड़ोसी राज्य सें!
अजय:" जौ आज्ञा राजमाता, मे आज हि युवराज केँ संगयह सभीकाम कर दूंगा!
इतना कहकरअजय विक्रम केँ संग निकल गय़ा! दोनो घोड़ों पर्र बैठेहुए जारहे थें औऱ विक्रम जानता थां कि अगर वोँ पड़ोसी राज्य गय़ा तोँ पूरीरात वहीलग जायेगी औऱ सलमा सें मिल नहीं पायेगा तोँ उसने एक् एक्सक्यूज़ बनाया औऱ बोला:"
" अरेअजय मे तौ भूल हि गय़ा कि पड़ोसी राज्य तौ आजरात अपनी आजादी केँ जश्न मे डूबा होगा!हमे कल जानां पड़ेगा!
अजय:"ऐसा हें तोँ फिनहमे राज्य वापिस जानां चाहिए क्योंकि जाने कां कोई फायदा नहि होगा!
उसकेबाद दोनो वापिस राज्य कि तरफलौट पड़े औऱ दूसरी तरफ मेनका थोड़ी देरबाद हि अपनेघऱ आँ गई औऱ आज खुशी केँ मारे उसकेपेर जमीन पर्र नहींपद रहे थें क्योंकि बड़ी मुश्किल सें उसेआज यह सुनहरा मौका मिला थां! अजय केँ घऱ पर्र नहि होने सें वोँ पूरीतरह सें आजाद थि औऱ वोँ अच्छे सें नहाई औऱ उसकेबाद साड़ी औऱ चूड़ियां लेकर नीचे कक्ष कि औऱ चल पड़ी!
वहीं दूसरी तरफ राज्य मे घुसकर अजय अपनेघऱ कि तरफचल पड़ा औऱ मौका मिलते हि विक्रम नें अपना घोड़ा सुल्तानपुर कि तरफ दौड़ा दिया औऱ घोड़े कों बाहर् हि छिपाकर गेट पर्र आया औऱ बोला:"
" हमे अंदरआने कि इजाजत दीजिए! मुझे अपनेयार रहीम सें मिलने जानां हैं!
सैनिक:" ओए भिखारी तुम् फिन आँ गए! जब्बार कां साफ हुक्म हैं कि किसी कों भि अंदर नहींआने दिया जाएगा समझे!जाओ अपनेघऱ वापसभाग जाओ!
विक्रम नें अपनीजेब सें एक् हीरे कि अंगूठी निकाली औऱ बोला:"
" आप् यहरख लीजिए औऱ मुझे जाने दीजिए!
सैनिक बादतेज थां उसने विक्रम केँ हाथ सें अंगूठी लेँ ली औऱ एक् झटके केँ संग खिड़की कों बंद करतेहुए बोला:"
" भागजाओ यहां सें औऱ कभीमत आनां नहीं तोँ मारदिए जाओगे समझे!
खिड़की केँ बंद होते हि विक्रम निराशा मे डूब गय़ा औऱ वापिस अपने राज्य कि तरफलौट चला क्योंकि वोँ जानता थां कि अब उसका अंदर जानां संभव नहि हैं! सलमा उसका प्रतीक्षा कररही होगीमगर वोँ चाहकर भि कुछ नहि कर सकता थां!
दूसरी तरफअजय रात केँ लगभग 11 बजे अपनेघऱ पहुंच गय़ा औऱ धड़कते दिल केँ संग उसने अपनी माँ केँ कक्ष मे धीरे-धीरे सें झांका तौ उसकी उम्मीद केँ मुताबिक वोँ उसे नहीं मिली औऱ अजय कि सांसे तेज होँ गई औऱ धीरे-धीरे सें नीचे कक्ष तक कि तरफचल पड़ा क्योंकि वोँ जानता थां कि उसकी माँ नीचे शीशे मे स्वयं कों निहार रही होगी!
अजय नें घऱ केँ सभी खिड़की दरवाजे अच्छे सें बंदकिए औऱ सावधानी सें नीचे पहुंच गय़ा औऱ उसकी आंखे खुली कि खुलीरह गई क्योंकि उसकी मम्मी मेनका आज साक्षात मेनका हि नजर आँ रही थि औऱ अजय कों आज यकीन हौ रहा थां कि उसकी माँ कां नाम मेनका सच हि रखा हैं! मेनका लालरंग कि साड़ी मे बेहद सुंदर लगरही थीं औऱ सबसे बड़ीबात उसने साड़ी कों विशेष अंदाज मे बांधा हुआ थां जिससे उसकीकमर पूरी नंगी हि थि बस ब्लाउस कि पतली सि तनिया उसेनाम सिर्फ केँ लिएढके हुए थि औऱ मेनका पूरीतरह सें मदहोश होकर
अपने खुले बालो केँ संग शीशे मे देखते हुए नाचती स्वयं कों अश्लील इशारे कररही थि!
अजय नें पहलीबार किसी महिला कां ऐसा कामुक अंदाज देखा थां औऱ यकीन हौ गय़ा कि उसकी मम्मी केँ अंदर तूफान मचलरहा हैं औऱ यहसभी सोचकर अजय केँ लन्ड मे तनाव आनां शुरुआत होँ गय़ा औऱ वोँ सावधानी सें अपनी माँ कों देखने लगा जौ पूरीतरह सें पागल होकरनच रही थि औऱ अपनी गांड़ कों बेहद कामुक अंदाज मे मटकारही थि! जोरजोर सें नाचती हुईँ मेनका कमर कों हिलाते हुएअजय पऱ कहर बरपारही थि औऱ उसके दोनोहाथ उसके चेहरे केँ सामने आँ गए औऱ वोँ अपनी कांच कि चूड़ियां एक् दूसरे सें टकराने लगी औऱ खनखनखन कि मधुर आवाज़ कमरे मे गूंजउठी! अजय चूड़ियों कि खनक सुनकर मस्ती सें बेहाल होँ गय़ा औऱ मेनका मस्त होकरफिन सें नाचने लगी!
उसकेबाद मेनका केँ पेरथक गए तोँ मेनका नें मदहोशी सें अपनी चुचियों कि तरफ देखा जौ आधी ब्लाउस सें झांकरही थि औऱ मदहोश होकर शीशे केँ बिलकुल सामने पहुंच गई औऱ अपने होंठो कों शीशे सें चिपका दिया औऱ अपनेजीभ निकालकर चूसने कां प्रयास करनेलगी औऱ उसकीजीभ सें रस बहकर शीशे पऱ फैल गय़ा
मेनका धीरे-धीरे सें बेड पर्र चढ़ गई औऱ अजय नें देखा कि बेड पर्र गुलाब केँ फूल भि पड़ेहुए थें जौ मस्ती मे आकर मेनका नें हि बिछाए थें औऱ मेनका नें मदहोशी सें अपनी आंखेबंद करली औऱ अपनी टांगो कों एक् दूसरे सें रगड़ने लगी औऱ उसके मुंह पर्र कामुक भावउभर आए थें औऱ अजय कां बुराहाल हौ गय़ा थां औऱ उसका लन्ड पूरी सख्ती सें खड़ा हौ गय़ा थां!
मेनका कि सांसे बेहदतेज गति सें चलने केँ कारण उसकी चूचियां उछलउछल पड़रही थि औऱ अजय कि नजरे उसकी चुचियों पऱ गड़ी हुइ थि ! मेनका लंबी लंबी सांसे लेती हुइ पलंग पऱ अपने शरीर कों पटकरही थि औऱ उसके दोनोहाथ उसकी चूचियों पर्र आँ गई औऱ मेनका नें अपनी साड़ी कां पल्लू एक् तरफ सरका दिया औऱ उसकीगोल गोल चूचियां ब्लाउस मे खिलउठी तोँ मेनका नें उन्हें अपने हाथो मे भर लिया औऱ सहलाने लगी! मेनका केँ मुंह सें अब हल्की हल्की मधुर सिसकियां निकलरही थि औऱ उसकी जांघो केँ बीच उसकी बुर मे रसभर गय़ा थां! मेनका अपने ब्लाउस कि तनियो कों जोरजोर सें पकड़कर खींचते हुए अपनी चुचियों कों आजाद करने कि कोशिश कररही थि जिससे उसकीआधे सें ज़्यादा चूचियां बाहर् निकलरही थि औऱ उसकी चुचियों केँ निप्पल भि पूरीतरह सें तनकर बाहर् आने कों मचलरहे थें औऱ मेनका कि उत्तेजना अब अपनेचरम पर्र थि!
अजय अपनी माता कि चुचियों कों देखकर आपे सें बाहर् होँ रहा थां औऱ उसकामन कररहा थां कि अभि जाकर अपनी मम्मी कि सारी बेचैनी शांतकर देमगर वोँ आज अपनीमा कां खुशी खराब नहीं करना चाहता थां इसलिये खड़ाहुआ अपनी माता कि कामुक हरकते देखरहा थां औऱ मेनका अब अपनी चुचियों कों मसलती हुईँ अपने शरीर कों पलंग पऱ पटकरही थि औऱ कुछ भि करकेआज अपने अंदर उठतेहुए इस तूफान कों शांतकर देना चाहती थीं! मेनका केँ हाथ उसकी चूचियों कों छोड़कर उसकेपेट पऱ आँ गए औऱ सहलाते हुए नीचे उसकी बुर कि तरफबढ़ गए मेनका केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी
मेनका नें मदहोश होकर शीशे मे स्वयं कों देखा औऱ उसकीजीभ एक् बारफिन सें बाहर् निकल गई औऱ सूखे होंठो कों गीला करनेलगी! अजय कां लन्ड एक् झटके केँ संगउछल पड़ा औऱ अजय नें हाथ सें जोर सें सहला दिया औऱ पर्दा हिल गय़ा औऱ तभी उसकी नज़र हिलते हुए परदे पऱ पड़ी औऱ अजय कों देखते जी मेनका कों मानो लकवा सां मार गय़ा औऱ लज्जा केँ मारे पलंग पऱ उल्टी लेटकर लंबी लंबी सांसे लेनेलगी! अजय कों अपनी गलती कां एहसास हुआमगर अबकुछ नहि हौ सकता थां तौ वोँ दबेपैर अपने खड़े लन्ड केँ संगउपर कि तरफचल पड़ा! मेनका नें उसके जाते हि राहत कि सांसली औऱ अपनी साड़ी कों ठीक करकेउपर कि तरफबढ़ गई मगर उसकेकदम कांपरहे थें क्योंकि वोँ जानती थि कि जरूरअजय गैलरी मे उसका प्रतीक्षा कररहा होगा औऱ उसनेकल कि तरह मेराहाथ पकड़ लिया तोँ क्याँ होगायह सोचकर न् चाहते भि चूचियां अकड़ गई, निप्पल सख्त होकरतन गए औऱ बुर केँ होंठो सें मधुररस बहचला! मेनका केँ नीचे वाले होंठ बिलकुल गीले जूसी होँ गए थें जबकि उपर वालेसूख गए थें औऱ मदहोशी सें चूर मेनका उपर कि तरफचल पड़ी! जैसे हि वोँ गैलरी मे पहुंची तोँ उसे बिलकुल अंधेरा नजरआया औऱ मेनका जैसे हि आगे बढ़ी तौ अजय नें उसकाहाथ पकड़ लिया तोँ मेनका कांपउठी औऱ पूरे शरीर मे सनसनाहट सि दौड़ गई औऱ अपनाहाथ छुड़ाने कि कोशिश करनेलगा मगरअजय नें कसकर उसकाहाथ पकड़े रखा औऱ एक् झटके केँ संग अपनीतरफ खींचा तोँ दोनो कि छातियां एक् दूसरे सें टकरा गई औऱ अजय उसके कंधो पर्र हाथ रखकर बोला:"
" माफ़ कीजिए माता! मेरीवजह सें आप् पूरामजा नहीं लेँ पाई!
जलती मचलती हुई मेनका उसके मर्दाने स्पर्श सें पिघल सि गई औऱ धीरे-धीरे सें बोलि:" मेराहाथ छोड़ दीजिए पुत्र! मुझे जाने दीजिए!
मेनका कि तेज रफ्तार सें चलती हि सांसों केँ संग उसकी बड़ी बड़ी चूचियां अजय केँ सीने मे घुसीजा रही थि अजय कां लन्ड उसकी जांघो मे घुसाहुआ थां जिससे मेनका पूरीतरह सें उतावलापन रही थि औऱ अजय नें उसके चेहरे कों अपने हाथो मे भर लिया औऱ उसके कांपते होंठो पऱ अपनी उंगली फेरते हुए धीरे-धीरे सें मदहोशी सें बोला:"
" माता आप् बेहद आकर्षक औऱ खुशबूदार हौ!
इतना कहकर उसने अपने दोनो हाथों कों उसकी नंगीकमर मे लपेट दिया औऱ उसकी चिकनी नंगीकमर कों सहलाने लगा तौ मेनका केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी औऱ उसकी बांहों मे कसमसाती हुइ एक् झटके केँ संग छूटने कि कोशिश करती हुईँ पलट गई औऱ अजय नें उसेजोर सें कस लिया तौ मेनका कों उसकी मर्दाना ताकत कां एहसास हुआ औऱ अजय कां लन्ड अब उसकी गांड़ पऱ आँ लगा तोँ मेनका पिघल सि औऱ धीरे-धीरे सें फुसफुसाई:
" अह्ह्हा पुत्र, जाने दीजिए मुझे!रात बहोत होँ गई हैं!
अजय नें अपने दोनो हाथों कों उसके सीने पर्र बांधते हुए अपने होंठो सें उसके एक् गाल कों मुंह मे भर लिया औऱ चूसने लगा तौ मेनका कि बुर रस बाहर् टपक पड़ा औऱ वोँ स्वयं कों उसकी बांहों मे ढीला छोड़ते हुए सिसकी:"
" अअह्ह्ह्हह पुत्र, कोईदेख लेगामत करोओह यहसभी!
मेनका कां बदन उसके शब्दो कां संग नहींदे रहा थां औऱ अजययह बखूबी समझ गय़ा थां औऱ अजय नें अपने होंठो कों उसकी गर्दन पर्र रख दिया औऱ उसकी चुचियों कों ब्लाउस सें हि हल्की सि सहलाते हुए बोला:"
" कोई नहीं देखेगा मेरी हसीन माता! आह आपकी सांसे इतनीतेज क्यूं चलरही हैं माता!!
इतना कहकरअजय नें अपने लन्ड कां दबाव उसकी गांड़ पऱ दिया तोँ मेनका थोडा सां आगे कों हुई जिससे उसकी चूचियां अजय केँ हाथो मे औऱ अधिकसमा गई औऱ उसने हल्का सां मसल दिया तौ मेनका दर्द औऱ मस्ती सें कराहकर बोलीं:"
" अह्ह्ह् मुझे नहींपता पुत्र क्यूं इतनी ज़्यादा तेजचल रही हैं! अह्ह्ह्ह्ह मुझे जाने दीजिए नां प्लीज आप्!
इतना कहकर मेनका आगे जाने कों हुइ तोँ उसकी टांगे खुल गई औऱ अजय कां लन्ड उसकी दोनो टांगो केँ बीचघुस गय़ा औऱ मेनका मस्ती सें सिसकउठी औऱ उसकी बुर मे चिंगारी सि जलउठी औऱ अजय नें अब उसकी दोनो चूचियों कों थोडा जोर सें सहलाना शुरुआत कर दिया औऱ मेनका कां धैर्य जवाबदे गय़ा औऱ उसने अपनेबदन कों पूरीतरह सें अजय कि बांहों मे छोड़ दिया औऱ उसकी बांहों मे झूल सि गई तौ अजय नें उसकी जांघो केँ बीच लन्ड कों रगड़ना शुरुकर दिया औऱ मेनका उसके लन्ड कि सख्ती महसूस करके l पागल सि हौ गई औऱ अपने पैरो कों अजय केँ पैरो सें रगड़ने लगी तौ अजय नें जोर सें उसकी गर्दन कों चूम लिया औऱ उसकी दोनो चूचियों कों अब सख्ती सें मसलने लगा औऱ दोनो मम्मी बेटेअब खुलकर एक् दूसरे केँ मजेलूट रहे थें! मेनका कि बुर पानी पानी हुईँ जारही थि औऱ लन्ड कि रगड़उसे बहकाए जारही थि औऱ मेनका झड़ने केँ लगभग आँ गई तौ उसकी सांसे बुलेट ट्रेन कि गति सें चलनेलगी औऱ उसकी चूचियां जोरजोर सें उछल पड़ी औऱ एक् मम्मों ब्लाउस सें बाहर् निकल गई तौ अजय नें उसे अपनी चौड़ी हथेली मे कस लियाजोर सें मसल दिया तौ मेनका मीठे मीठे दर्द सें दोहरी होतीचली गई औऱ मेनका कां रहासहा धैर्य भि जवाबदे दिया! मेनका नें अजय केँ हाथ कों अपने ब्लाउस मे घुसा दिया औऱ अजय नें उसकी दूसरी मम्मों कों भि पकड़कर बाहर् निकाल लिया औऱ दोनो कों एक् संगमसल दिया तोँ मेनका जोरजोर सें सिसकउठी:"
" अअह्ह्ह्ह पुत्र! मेरावीर पुत्र!
अजय नें बदन मे भि उत्तेजना चरम पऱ थि औऱ मेनका कि सिसकियां आग मे घी कां कामकर रही थि जिससे उसके लन्ड मे उबाल आनां शुरुआत हौ गय़ा औऱ मेनका केँ टांगो केँ बीच लन्ड सटासट घुसने लगा औऱ दोनो नें अपने हाथो हाथो कों अजय केँ हाथो पर्र टिका दिया औऱ दबाने लगी तौ अजय नें इशारा समझकर उसकी चुचियों कों पूरी सख्ती सें मसलना शुरुआत कर दिया औऱ मेनका भि अब अपनी बुर कों पूरी ताकत सें लन्ड पर्र रगड़रही थि औऱ अजय उसकी गर्दन चाटते हुएउसे पूरीतरह सें बेकाबू किएहुए थां! अजय केँ लन्ड मे उबाल आँ गय़ा औऱ उसके धक्के पऱ मेनका सां बदन थिरकउठा औऱ मेनका कि बुर मे बिजली सि दौड़ गई औऱ एक् तेज झटके केँ संग मेनका लन्ड कों अपनी जांघो मे कसने औऱ उसकी बुर सें रस कि धारबह चली औऱ मुंह सें मादक सिसकियां निकल पड़ी
" आह्ह्ह्ह्ह् पुत्र! अह्ह्हा क्याँ कर दिया मुझे! अह्ह्ह्ह्ह मेरेवीर पुत्र!
इतना कहकर वोँ अपनी गर्दन उचकाकर अजय कां मुंह चूमते लगी औऱ अजय नें अपने लन्ड कों ताकत सें बाहर् खींचा औऱ पूरी ताकत सें मेनका कि टांगो केँ बीच घुसा दिया औऱ मेनका दर्द सें कराहउठी औऱ अजय केँ लन्ड नें उसकी बुर केँ मुंह पऱ अपने वीर्य कि पिचकारी मारनी शुरुआत कर दि औऱ जोर सें उसकी चूचियां मसल डाली औऱ सिसकउठा
" अह्ह्ह्ह्ह मेनका!!!! मेरी मेनका आह्ह्ह्ह मेरी माता !
दोनो एक् दूसरे सें लिपटे हुएरस छोड़ते रहे औऱ जैसे हि दोनो कां स्खलन ख़त्म हुआ तोँ मेनका बेजान सि होकर गिरने लगी तोँ अजय नें उसे अपनी बाहों मे भर लिया औऱ उसके कक्ष कि तरफबढ़ गय़ा औऱ मेनका कों उसनेबेड पर्र लिटा दिया तौ मेनका नें उसे अपनेऊपर खींच लिया औऱ अजय मेनका केँ बदन पऱ पूरीतरह सें छा गय़ा औऱ मेनका धीरे-धीरे सें उसकेकान मे फुसफुसायी
" अह्ह्ह्हह अजय मेरे पुत्र! मे आज बहोत खुश हूं! मुझे आप् मिलगए सभीमिल गय़ा!
अजय मेनका कि बातेसुन करसमझ गय़ा कि मेनका उसे प्रेमी स्वीकार कर चुकी हैं तोँ उसके माथे कों चूमकर बोला:"
" ओह्ह्ह मेनका मेरी माता!
उसकेबाद दोनो नें एक् दूसरे कों अपनी बांहों मे कस लिया औऱ अजय उसकेउपर सें उतरकर अपने कक्ष मे जानेलगा तोँ मेनका नें उसकाहाथ पकड़कर खींच लिया औऱ बोलीं:"
" आज सें आप् मेरे कक्ष मे हि सोया करेंगे अजय पुत्र!
अजय मेनका कि बांहों मे लेट गय़ा औऱ उससे कसकर लिपट गय़ा औऱ दोनो एक् दूसरे कि बांहों मे सोगए!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
मेनका वगैर किसी कोशिश केँ, वगैरकुछ सिडक्सन केँ पकेहुए फल कि तरहअजय केँ गोद मे आँ गिरी। इसका मतलब वो बहोत पहले सें हि अजय कों एक् अलग नजरिए सें देखने लगी थि। उसके अंदर शायद अपने दिवंगत पति कों ढूंढने लगी थि। याँ शायद उसकेसंग बहोत पहले सें टैबो रिलेशनशिप मे जानां चाहती थि।
इधर विक्रम केँ लिएये रातअजय कि तरह रोमांटिक न् रहा। जब्बार नें उसके अरमानो पऱ पानीफेर दिया।
पर्र जब्बार कि पत्नि शमा केँ संग बहोत बुरा होँ गय़ा। मगर इसकेलिए वोँ स्वयं हि दोषी हैं। गलतलोग कां संग देने वालागलत हि कहलाता हैं। वोँ स्वयं जब्बार कां संग देकर न् केवल अपना नुकसान करवारही हैं बल्कि अपनेवतन केँ संग गद्दारी भि कररही हैं।
बहोत हि बेहतरीन भाग यूनिक स्टार भइया।
आउटस्टैंडिंग एंड अमेजिंग एंड हाॅटभाग।
yeh aaine kaa kusoor nahii hain e dilbar Aitbaar khud say jyada apne mohbbat k Noor per. Karke khud ko aikshi mohabbte Jahan main. Kho baitha h khud kaa wajood dilbar k ishare per.
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
सलमा बेचैनी सें विक्रम कां प्रतीक्षा कररही थीं औऱ बेड पऱ पड़ी हुई करवटबदल रही थि मगर 11:30 तक भि विक्रम नहींआया थां उसकादिल टूट गय़ा क्योंकि वोँ जानती थि कि आजदिन मे जब्बार सुरक्षा बढ़ाने कि बातकर रहा थां तौ इसीलिए हि विक्रम नहीं आँ पाया औऱ अब आयेगा भि नहि यह सोचकर सलमा कि आंखो मे आंसू आँ गए औऱ वोँ अपनेखाट सें उठी औऱ कक्ष मे टहलने लगी! नींद उसकी आंखो सें कोसोदूर थि क्योंकि थोड़ी देर पहले हि वोँ मधुर मिलन केँ ख्वाब संजोए हुई थि औऱ सीमा कि छेड़छाड़ नें उसकेबदन कों महका दिया थां मगरअब क्याँ हि कर सकती थि!
दुःखी सलमा कि आंखेभर आई औऱ आंसूछलक पड़े तोँ सलमा नें अपने मुंह कों साफ किया औऱ खाट पऱ फिन सें लेट गई मगर नींद नहि आँ रही थि तोँ वोँ विक्रम केँ बारे मे हि सोचने लगी!
दूसरी तरफगेट नं खुलने सें उदास विक्रम दुःखी मन सें बैठ गय़ा औऱ सोचने लगा कि अंदर सलमा उसका प्रतीक्षा कररही होगी औऱ पता नहि उसका क्याँ हाल होगा तोँ यह सोचकर विक्रम बेचैन हौ गय़ा औऱ सोचने लगा कि मुझेकुछ नं कुछ उपाय करना हि होगा औऱ उसके दिमाग़ मे एक् विचार आया औऱ तेजी सें अपने घोड़े कों दौड़ाते मे महल कि तरफआया औऱ एक् मौलवी कां भेष बनाकर कुछ मिठाई लेकरचल पड़ा! विक्रम जैसे हि गेट पर्र पहुँचा तौ सैनिकों नें एक् मौलवी कों अपने सामने देखा तौ विक्रम बोला:"
" अस्सलाम वालेकुम केसे हौ आप् दोनो!
सैनिक हैरानी सें उसे देखते हुए बोले:" वालेकुम अस्सलाम मौलवी साहब, माफ कीजिए आपको पहचाना नहि!
विक्रम:" अरे कैसी बातेकर रहेहों मियां! हम् तौ रजिया बेगम केँ रिश्ते मे चाचा लगते हें उन्हे पताचला कि आपनेहमे गेट पऱ रोकरखा हैं तोँ आपकीखाल उतरवा लेंगी!
सैनिक:" माफ कीजिए मगर राज्य कि सुरक्षा केँ कारणरात कों कोई भि अंदर नहीं आँ सकताऐसा राज आदेश मिला हैं!
विक्रम थोडा शांत होने कां दिखावा करतेहुए बोला:"यह तौ अच्छी बात हैं! रात मे तोँ दुश्मन भि अंदरघुस सकता हैं!
सैनिक:" बस इसलिये तौ हम् मजबूर हू!
विक्रम:" कोईबात नहि मै आपकी मजबूरी समझरहा हूं! एक् काम करना आप् यह मिठाई उन तक आया देनायह सलीम कों बेहद पसन्द हैं!
सैनिक नें मिठाई कां डिब्बा लिया औऱ बोला:" बड़ी अच्छी खुशबू आँ रही हें कहां सें लाए हें आप् यह मिठाई ?
विक्रम:" यह ईरान कि शाही मिठाई हें जोँ केवलराज परिवार केँ लोगो कों हि नसीब होती हैं! आप् दोनो चाहो तौ खालो थोड़ी थोड़ी मगर किसी केँ सामने बोल्ना मत नहीं तौ मुसीबत आँ जायेगी!
दोनो सैनिकों नें मिठाई खाई औऱ बोले:" मिठाई तोँ बहोत अच्छी हें सच मे मजा आँ गय़ा!
विक्रम:" अच्छी तोँ होगी हि आखिर शाही मिठाई हें!
सैनिक:" सच मे शाही मिठाई पहलीबार खाई हैं तौ बेहद अच्छी लगी! मे कल सुभहयह मिठाई राजमहल तक आया दूंगा
विक्रम:" अल्लाह तुम् दोनो कों सलामत रखे! अच्छा मुझेकुछ एक् बात बतानी थि आपको!
विक्रम जान बूझकर सैनिकों कों कुछदेर केँ लिए बातो मे उलझारहा थां औऱ सैनिक उसकीचाल नहींसमझ पाए औऱ बोला:"
" क्याँ खबर हैं बताओ जल्द?
विक्रम:"मगर वादाकरो कि किसी कों बताओगे नहीं तुम्!
सैनिक;" वादा कियाअब बताओ क्याँ बात हैं जल्द सें ?
विक्रम:" ऐसे भि कौन वादा करता हैं, खुदाशपथ खाओ तोँ यकीनआए आखिर इतनीबात राज कि बात हैं!
सैनिक:" अच्छा ठीक हैं खुदाशपथ, बसअब बताए आप्!
विक्रम नें देखा कि दोनो सैनिक नशे मे झूमरहे थें औऱ खिड़की केँ लगभगआते हुए बोला:"
" वोँ बात हैं कि सलीम.
इससे पहले कि वोँ आगे बोलता सैनिक बेहोश होँ कर गिरने लगा औऱ विक्रम नें खिड़की सें हाथआगे बढ़ाकर उसेथाम लिया औऱ उसकीजेब सें चाबी निकाली औऱ सैनिक बेहोश होकर नीचेगिर पड़ा! विक्रम नें हाथआगे बढ़ाकर तालाखोल दिया औऱ गेट कों धीरे-धीरे धीरे-धीरे खोलने लगा औऱ गेट खुलते हि वोँ अंदरघुस गय़ा औऱ ताले कों वापिस लगाकर। चाभी कों सैनिक केँ पास फेंककर अंदर राज्य मे घुस गय़ा औऱ विक्रम अब बेहदखुश थां क्योंकि थोड़ी सि देर मे वोँ अपनी प्यारी सलमा सें मिलने वाला थां! सावधानी सें छुपाते छिपते हुए वोँ महल केँ पीछे तक पहुंच गय़ा औऱ इधरउधर देखते हुए वोँ गुफा केँ अंदरघुस गय़ा औऱ सावधानी सें चलतेहुए महल केँ अंदरघुस गय़ा! लगभग 12 बजगए थें औऱ विक्रम धीरे-धीरे धीरे-धीरे चलताहुआ शहजादी केँ कक्ष केँ सामने आया तोँ देखा कि कक्ष खुलाहुआ हैं अंदरघुस गय़ा मगर शहजादी उसे दिखाई नहीं दि तौ वोँ दुःखी हौ गय़ा औऱ पूरे कक्ष मे अच्छे सें देखामगर नहींउसे शहजादी नहीं मिली तौ विक्रम कां दिल दुःखी हौ गय़ा औऱ वोँ इधरउधर सलमा कों ढूढने लगा औऱ गैलरी सें निकलकर बाहर् आया तौ उसे सामने हि एक् शाही बगीचा नजरआया औऱ उसकेदिल मे उम्मीद जगी कि सलमा शायद बगीचे मे टहलरही होगी औऱ यह सोचते हुए वोँ धीरे-धीरे सें अंदरघुस आया औऱ देखा कि सुंदर फूलो कि महक सें बगीचा गंधरहा थां औऱ विक्रम आगे बढ़ता जारहा थां औऱ जैसे हि आगे मुड़ा तौ उसकी आंखे खुली कि खुलीरह क्योंकि क्योंकि सलमा एक् हसीनलाल रंग कि नाइटी मे सजी हुईँ बगीचे मे घूमती हुइ मधुरगीत गुनगुना रही थि!
लालरंग कि छोटी सि नाइटी मे सलमा केँ दोनो कंधे बिलकुल नंगे होँ थें बसनाम केवल केँ लिए डोरिया बंधी हुईँ थि! उसके कालेघने बालहवा मे लहराकर उसके हसीनगोल मटोल चेहरे कों औऱ भि खूबसूरत बनारहे थें औऱ ऐसालग रहा थां मानो चांद बादलों केँ बीच सें झांकरहा होँ! सलमा कि मोटी मोटीगोल मटोल गुम्बद केँ आकार कि चूचियां आधी सें अधिक बाहर् झांकरही थि औऱ चलने केँ उछलउछल पड़रही थीं! सलमा इतनी आकर्षक भि हौ सकती हैं इसका अंदाजा विक्रम कों आजहुआ औऱ विक्रम खुशी केँ मारे फूला नहि समारहा थां क्योंकि एक् जीती जागती कयामत खूबसूरती कि मल्लिका सलमा केवल उससे प्रेम करती थि! सलमा मस्ती सें झूमती हुइ आगेबढ़ रही थि औऱ एक् फूल उसके चेहरे सें टकराया तौ सलमा नें उसे प्रेम सें देखा औऱ नजाकत केँ संग तोड़कर अपने दोनो हाथो मे लेकर मसलने लगी औऱ उसे सीमा कि बातयाद आँ गई कि आपकेफूल भि मसले जायेंगे तोँ उसने कामुक नजरो सें अपनी चुचियों कि तरफ देखा औऱ उसके होंठो पऱ मुस्कान आँ गई!
विक्रम उसकीइस अदा पऱ मस्ती सें झूमउठा औऱ सलमा चलती हुई फूलो कि खुशबू महसूस करती हुई इधरउधर झूमरही थि औऱ मटकती कमर केँ संग लचकती हुइ उसकी गांड़ विक्रम केँ दिल पर्र छुरियां चलारही थि औऱ चलते चलते सलमा एक् पुल पऱ चढ़ गई औऱ इधरउधर देखने लगी औऱ तभी उसकी नज़र विक्रम पर्र पड़ी तौ उसके होंठो पऱ मुस्कान आँ गई मगरउसे मानो अपनी आंखो पर्र यकीन नहीं होँ रहा थां औऱ उसने अपने बालो कों पीछे झटका औऱ फिन सें विक्रम कों देखा तोँ उसे यकीन आँ गय़ा कि सामने उसका महबूब उसका आशिक विक्रम हि हें तौ सलमा केँ होंठो पऱ मुस्कान आँ गई औऱ विक्रम कों मुस्कान देती हुइ एक् नजर स्वयं पऱ डाली तोँ शर्मा गई औऱ पीछे कि तरफभाग गई !
विक्रम मुस्कुराता उसे पीछे पीछेआगे बढ़ गय़ा औऱ सलमाअदा केँ संग बलखाती हुइ एक् एक् बड़ी सि झाड़ी केँ पीछेछिप गई औऱ विक्रम नें उसेदेख लिया औऱ उसके लगभग जाकर झाड़ी केँ दूसरी तरफ खड़ा होँ गय़ा औऱ सलमा झाड़ी केँ बीच सें देखती हुई उसेमंद मंद मुस्कान देरही थि औऱ विक्रम बोला:"
" माशा अल्लाह बेहद सुंदर लगरही होँ शहजादी इसलाल रंग कि नाइटी मे आप्!
सलमा केँ होठों पर्र उसकीबात सुनकर मुस्कान थिरकउठी औऱ शरमाते हुए बोलि:"
" हायराम मेरे रब्बा! ऐसा नं बोलो विक्रम हमेलाज आती हैं ऐसे कपड़ो मे आपके सामने!
विक्रम उसकी अदाएं देखकर उतावलापन उठा औऱ बोला:"
" कपड़ो कां क्याँ हें शहजादी केसे भि आखिर मे उतर हि जाते हें!
सलमा उसकीबात सुनकर लज्जा सें लाल होँ गई औऱ नजरे नीचे करते हुई बोलीं:"
" कुछ तौ लज्जा कीजिए आप् युवराज! पूरा बिगड़ गए होँ आप्!
विक्रम:" सभी आपकी हुस्न कि नतीजा हें शहजादी, जिसकी इतनी खूबसूरत महबूबा होगी तौ भि वोँ बेचैन होगा हि न् प्रेम करने केँ लिए!
सलमामंद मंद मुस्कुरा उठी औऱ बोलि:" इतनीदेर सें क्यूं आए आप् ? पता हें मे कितनी परेशान थि आपकेलिए ?
विक्रम नें उसे सारीबात बताई तोँ सलमा उसकीबात सुनकर हैरान होँ गई औऱ बोलीं:" हाय अल्लाह अबकलफिन सें सभा मे शोर होगा औऱ सुरक्षा फिन बढ़ा दि जायेगी तोँ हम् अगलीबार केसेमिल पाएंगे युवराज!!
सलमा इतना कहकर झाड़ी सें बाहर् आँ गई औऱ विक्रम कि बांहों मे समा गई तौ विक्रम नें भि उसे अपनी बांहों मे कस लिया औऱ दोनो एक् दूसरे कों चूमने लगे औऱ सहलाने लगे!
विक्रम उसका माथा चूमता हुआ बोला:"ओह मेरी शहजादी, कल कि छोड़ो नां बसअबयह प्रेम केँ लम्हे हें तोँ प्रेम करो!
सलमा उसकेगले मे अपनी बांहे डालकर पूरी ताकत सें लिपट गई औऱ उसकागाल चूम लिया तोँ विक्रम नें अपने होंठो कों उसके होंठो पर्र रख दिया औऱ दोनो बेताबी सें एक् दूसरे केँ होंठो कों चूसने लगे! विक्रम नें अपनीजीभ कों उसके मुंह मे घुसा दिया तौ सलमा नें मुंहखोल कर उसकीजीभ कों अपने मुंह मे भर लिया औऱ चूसने लगीं औऱ विक्रम नें दोनो हाथों कों उसकी गांड़ पर्र रखकर उसकी गांड़ कों मसलना शुरुआत कर दिया तौ सलमा बेकाबू उसकीजीभ कों चूसने लगी औऱ विक्रम नें एक् झटके केँ संग उसकी नाइट कों उपर चढ़ाकर उसकी बिलकुल कोरी नंगी गांड़ कों अपनी हथेलियों मे भर लिया तौ सलमा कों एक् तेज झटका सां लगा औऱ वोँ एक् झटके केँ संग उसकी पकड़ सें निकल गई औऱ एक् पेड़ केँ पीछे खड़ी होँ गई तोँ विक्रम तेजी सें आगे बढ़ा औऱ सलमा कों फिन सें अपनी बांहों मे कस लिया तौ सलमा कसमसा उठी औऱ बोलि
" आआआह्हह्ह्ह विक्रम छोड़ दीजिए हमे!हमे नीचेकुछ नहीं पहनाहुआ हैं!
विक्रम नें उसे पूरी ताकत सें कस लिया औऱ उसकी दोनो चूचियों कों हाथो मे भरकर सहलाने लगा औऱ जोरजोर सें मसलते हुए बोला:" अअह्ह्ह्हह मेरी शहजादी, क्याँ नहीं पहना हैं आप् नीचे!!
सलमा अपनी चुचियों कों दबाए जाने सें मस्ती सें झूमउठी औऱ मीठा मीठा दर्द उसकी चुचियों सें होताहुआ सीधे उसकी बुर पऱ असरकर रहा थां औऱ सलमा धीरे-धीरे सें उसकेगाल पऱ अपने दांतगडा कर बोलीं:"
" अह्ह्ह्ह मुझे नहींपता बेशर्म युवराज!! अह्ह्ह्ह् छोड़ दीजिए नां विक्रम मुझे!
विक्रम नें सलमा कि दोनो चुचियों कों अब नाइटी केँ उपर सें हि जोरजोर सें दबाना शुरुआत कर दिया औऱ उसकेकान कि लौ कों दांतो सें हल्के हल्के काटते हुए बोला
" बताओ नाँ मेरीजान शहजादी! क्याँ नहीं पहना नें मेरी सलमा नें नीचेआज!!
इतना कहकर विक्रम नें अपने खड़े लन्ड कों उसकी गांड़ कि गोलाईयों मे घुसा दिया तौ सलमा मस्ती सें भरउठी औऱ उसके बांहों मे मचलती हुइ बोलि:
" अह्ह्ह्ह्ह सीईईईईई पे.पे.पेंटी नहीं पहनी आपकी शहजादी नें मेरे युवराज!!
इतना कहकर सलमा पलटी औऱ कसकर विक्रम सें लिपट गई! अब विक्रम नें फिन सें सलमा कि गांड़ कों अपनी हथेलियों मे भर लिया औऱ जोरजोर सें उसकी गर्दन चूसते हुए मसलने लगा तौ सलमा केँ मुंह सें सिसकियां निकलने लगी औऱ विक्रम नें एक् बारफिन सें उसकी उसके होंठो कों अपने होंठो मे भर लिया औऱ सलमा केँ मुंह मे अपनीजीभ घुसाकर उसकीजीभ सें मिला दि औऱ दोनो कि जीभ एक् दूसरे सें टकराने लगी! विक्रम नें धीरे-धीरे सें उसकी नाइटी कों उसकीकमर तक उठा दिया औऱ सलमा कि नंगी गांड़ कों अपनी हथेलियों मे भरकर प्रेम सहलाने लगा औऱ सलमा नें जोश मे आकर उसकीजीभ कों चूसना शुरुआत कर दिया औऱ विक्रम धीरे-धीरे सलमा कि मजबूत मोटी चौड़ी उभरी हुइ गांड़ कि गोलाईयों केँ बीच अपनी उंगली चलाने लगा तोँ सलमा केँ शरीर मे उत्तेजना कि लहर दौड़ गई औऱ विक्रम केँ सीने मे अपनी चुचियों कों घुसाने लगी औऱ किस तोड़ते हुए सिसकी
" अह्ह्ह्ह मेरे युवराज आईईईईसी ईईईईईआई विक्रम! अह्ह्ह्ह्ह अरेमत कीजिए नां!
सलमा नें स्वयं कों उसकी बांहों मे ढीला छोड़ दिया तोँ विक्रम नें उसेगोद मे उठाकर वही एक् झाड़ी केँ पीछे लिटा लिया औऱ सलमा लंबी लंबी सांसे लेती हुई उसकीतरफ देखने लगी औऱ लज्जा केँ मारे दोनो हाथों सें अपना मुंहढक लिया औऱ विक्रम उसकेऊपर चढ़ गय़ा तोँ सलमा सिसकउठी
" अअह्ह्ह्हह मेरे युवराज मेरे सरताज! कोईदेख लेगा!
विक्रम उसकीबात कों समझते हुए उसकेऊपर सें उतर गय़ा औऱ सलमा खड़ी थि औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपने कक्ष कि तरफ चलनेलगी औऱ फिनरुक गई औऱ उसे छेड़ते हुए बोलि:"
" मे नहीं जाती अंदर! आप् मुझे परेशान करोगे!
विक्रम उसकीइस अदा पऱ मर मिटा औऱ धीरे-धीरे सें बोला:"
" मेरी शहजादी कों प्रेम करूंगा!
ढेर सारा प्रेम!
सलमा उसकी आंखो मे देखते हुए अपना सीमा उसकीतरफ तानकर बोलि:"
" मे खूब समझती हु आपका प्रेम युवराज! मेरीमसल मसलकर क्याँ हालतकर देते होँ बस मे हि जानती हु!
विक्रम नें एक् हाथ बढ़ाकर उसकी मम्मों कों मसल दिया औऱ बोला:"हाय राम मेरी शहजादी आपको मसलने मे बहोत मजाआता हें!
सलमा मस्ती औऱ दर्द सें कराहउठी औऱ नखरे दिखाती हुइ बोलीं:"हाय मे नहीं जाने वालीआज अंदर!
विक्रम नें उसे पीछे सें अपनी बांहों मे भर लिया औऱ बोला:" चलती हौ अपनी मर्जी सें याँ गोद मे उठाकर केँ जाऊ अपनी सलमा कों!
सलमा उसकी बांहों मे मचलती हुईँ कांपती हुईँ बोलीं:" क्या बात है युवराज छोड़ दीजिए नां कोईदेख लेगा तोँ मे फंस जाऊंगी!
विक्रम नें उसकी गांड़ केँ नीचेहाथ लगाकर उसेजोर सें पकड़ लिया औऱ उसकेकान मे धीरे-धीरे सें बोला:" बहोत नखरेकर रही थि आप् अंदर जाते हुए, अब देख्ना अंदर लेँ जाकर सारे नखरेउतर दूंगा आपके मेरी शहजादी!
सलमा उसकीबात सुनकर मुस्कुरा उठी औऱ कुछ नहीं बोलि! विक्रम गोद मे लिएहुए उसके कक्ष मे आँ गय़ा औऱ सलमा उसकीगोद सें उतरकर दरवाजे कि तरफ दौड़ी औऱ विक्रम हैरानी सें उसे देखता रहा औऱ सलमा नें दरवाजे कों बंदकर दिया औऱ आगेबढ़ कर विक्रम केँ गलेलग गई औऱ विक्रम नें उसे कसकर पकड़ लिया औऱ उसके होंठो कों चूसने लगा औऱ सलमा कि नाइटी कों उपर चढ़ाकर उसकी नंगी गांड़ कों अपनी हथेलियों मे भरकरमसल दिया तोँ सलमा कराहउठी औऱ बोलीं;
" आह्ह् क्याँ गजब करते हौ युवराज!
विक्रम नें उसकी गांड़ कि गोलाईयों कों जोरजोर सें मसलना शुरुआत कर दिया औऱ सलमा नें सिसकियां लेतेहुए उसके कंधे पऱ अपनासिर टिका दिया तोँ विक्रम नें अपनी उंगली कों उसकी गांड़ कि गोलाईयों मे घुसा दिया तोँ सलमा केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी
" अह्ह्ह्ह्ह युवराज मत कीजिए! म्म्म नहीं !! मुझे लज्जा आती हें!
विक्रम:" आज आपकी लज्जा दूरकर हि देता हूं शहजादी!
विक्रम नें एक् समय केँ लिएउसे स्वयं सें अलग किया औऱ अगले हि लम्हा जैसे कयामत हौ गई क्योंकि विक्रम नें एक् झटके केँ संग सलमा कि नाइटी कों पकड़कर उपर किया औऱ सलमा कों मादरजात नंगीकर दिया औऱ सलमा लज्जा दोनो कों सें अपना मुंह छुपाकर सिसकउठी
" आह्ह्ह्ह्ह यह क्याँ गजबकर दिया युवराज! हम् मर जायेंगे
युवराज विक्रम नें अपनी शर्ट औऱ पैंट कों भि उतार दिया केवल अंडर वियर मे आँ गय़ा औऱ उसकी चुचियों कों देखा औऱ फिन उसकी जांघो केँ बीचनजर दौड़ाई जहां सें उसकी गुलाबी बुर कां हल्का सां उभारनजर आँ रहा थां औऱ धीरे-धीरे सें उसकेकान मे बोला:"
" अरे मेरी शहजादी आपकी चूंचियां बड़ी सुंदर हें!
विक्रम कि बात सुनकर सलमा लज्जा सें मरीजा रही थि औऱ कसकर उससे लिपट गई औऱ बोलि:" कितने गंदे होँ आप् जाइए मे आपसेबात नहि करती!
विक्रम नें उसकी नंगी गांड़ कों फिन सें अपनी हथेलियों मे भर लिया औऱ जोर सें मसल दिया तोँ सलमा उससे कसकर लिपट गई औऱ विक्रम नें उसेगोद मे उठाकर बेड पऱ लिटा दिया औऱ स्वयं उसकेऊपर लेट गय़ा तोँ सलमा कों उसके नंगे होने कां एहसास हुआ औऱ सलमा मस्ती सें भर गई औऱ उसके होंठो कों चूसने लगीं तौ विक्रम नें उसकी चुचियों कों अपनी हथेलियों मे भर लिया औऱ कसकरमसल दिया तोँ मीठे मीठे दर्द सें सलमा सिसकउठी
" आह्ह्ह्ह्ह विक्रम धीरे-धीरे मेरे युवराज!!!
विक्रम नें उसकी चुचियों कों फिन सें जोर सें मसल दिया औऱ उसकेकान मे बोला:"
" जोर सें नहीं मसलूंगा तौ सीमा कों अच्छा नहि लगेगा! वोँ तौ चाहती हैं कि मे आपकोखूब अच्छे सें मसल डालू शहजादी!
विक्रम कि बात सुनकर सलमाबहक गई औऱ अपनी चुचियों कों उभारती हुइ सिसकी
" आह्ह्ह्ह्ह विक्रम मसल डालो अपनी सलमा कों आजजी भरकर! सीमा कों पता चलना चाहिए कि युवराज नें शहजादी कां हाल बेहाल कर दिया हैं!
विक्रम कसकसकर उसकी चुचियों कों मसलरहा थां औऱ सलमा कि बुर सें रस बहना शुरुआत होँ गय़ा थां औऱ विक्रम नें उसकी एक् मम्मों कों मुंह मे भर लिया तोँ सलमा सिसकउठी औऱ अपनी टांगो कों खोलते हुए विक्रम कि गांड़ पर्र अपनेहाथ रखकर मसलने लगी! सलमा कि टांगे खुलते हि विक्रम कां लन्ड अंडर वियर केँ अंदर सें हि उसकी नंगी बुर सें छू गय़ा औऱ सलमा जैसे पागल सि होँ गई औऱ विक्रम कि गांड़ कों जोरजोर सें अपनी बुर पऱ दबाने लगी औऱ विक्रम नें जोश मे आकर उसकी मम्मों पर्र अपने दांतगडा दिए तौ सलमा दर्द औऱ मस्ती सें कराहउठी औऱ मम्मों उसके मुंह सें बाहर् निकल गई
" अह्ह्ह्ह्ह युवराज इतने जालिम नं बनो मेरे प्रियतम!
विक्रम नें अपनी गर्दन उचकाकर फिन सें उसकी मम्मों कि तरफ मुंह बढ़ाया तौ सलमा नें स्वयं हि अपनी चुचियों कों उसके मुंह पर्र रख दिया औऱ विक्रम फिन सें बेकाबू होकर बारी बारी उसकी दोनो चूचियों कों चूसने लगा औऱ सलमा नें मस्ती सें सिसक सिसककर अपनी दोनो टांगो कों पूरा खोलते हुए उसकीकमर पऱ लपेट दिया मानो चुदने केँ लिए अपनी सहमति देरही हौ औऱ विक्रम नें नीचेआते हुए उसकेपेट कों चूम लिया औऱ जैसे हि उसके होंठ नीचे कि तरफ बढ़े तौ सलमा कां समूचा वजूद कांपउठा औऱ जैसे हि विक्रम नें उसकी चुचियों कों मसलते हुए उसकी बुर कि तरफ अपने होंठ बढ़ाए तोँ सलमा सिसकी हुईँ एक् झटके केँ संगपलट गई औऱ विक्रम केँ उपर आँ गई औऱ उसके होंठो कों चूसने लगी तोँ विक्रम नें अपने दोनो हाथो कों उसकी गांड़ पर्र रख दिया औऱ सहलाने लगा औऱ उंगली सें उसकी गांड़ केँ छेद कों मसलरहा तौ सलमा कों एक् तेज झटकालगा औऱ उछलकर पेट केँ बल पलंग पर्र लेट गई औऱ लंबी लंबी सांसे लेती हुईँ विक्रम कों देखने लगी! विक्रम उसकी आंखो मे देखते हुएआगे बढ़ा औऱ जांघो केँ बीच बैठकर उसकीकमर कों चूमने लगा तौ सलमा कां बदन मस्ती सें उछलने लगा औऱ विक्रम उसकी उसकीकमर चूमते हुए बोला:
" अअह्ह्ह्हह मेरी शहजादी! आपकीकमर कितनी चिकनी औऱ सुंदर हें!
सलमा अपनीकमर पर्र उसकीगरम जीभ कां स्पर्श पाकरमचल उठी औऱ अपनी चुचियों कों बेडशीट पऱ रगड़ते हुए बोलि:"
" अह्ह्ह्ह्ह मेरे युवराज, आपकेलिए हें मेरीकमर! अअह्ह्ह्हह क्या बात है मेरे प्रियतम!
विक्रम उसकीकमर चूमते हुए नीचे कि तरफबढ़ गय़ा औऱ उसकी गांड़ केँ उभार पर्र अपनीजीभ कों फिराया तोँ सलमाजोर सें उछल पड़ी औऱ सिसकी
" ओह अअह्ह्ह्ह युवराज उफ्फ क्याँ गजब करते हौ! अअह्ह्ह्हह इतने गंदेमत बनो!
विक्रम नें उसके दोनो हाथो कों मोड़ते हुए कसकर पकड़ लिया औऱ उसकी जांघो पर्र बैठते हुए सलमा कों पूरीतरह सें अपने कब्जे मे लें लिया औऱ उसकी गांड़ केँ उभार कों जीभ सें सहला दिया तौ चाटने लगा तौ सलमा मस्ती सें सिसकउठी
" अअह्ह्ह्हह मत कीजिए विक्रम! अह्ह्ह्ह् यह जुल्म मत कीजिए मुझ पर्र!
विक्रम नें उसकी गांड़ केँ उभार कों जीभरकर चाटना शुरुकर दिया औऱ सलमा कि बुर रस सें भर गई थि जिससे सलमा अपनी चुचियों कों बेडशीट पर्र रगड़ते हुएजोर जोर सें सिसकरही थि औऱ विक्रम नें उसके हाथो कों अपने हाथो मे भरतेहुए उसकी चुचियों पऱ रख दिया औऱ मसलने लगा तौ सलमा बेकाबू होकर स्वयं हि अपनी चुचियों कों मसलने लगी औऱ विक्रम नें दोनो हाथों सें उसकी गांड़ केँ दोनोपटो कों फैला दिया तौ सलमा केँ मुंह सें अहह निकल पड़ी
" अह्ह्ह्ह युवराज! उफ्फमत करो खुदा केँ लिए! क्या बात है अम्मी बचे लें मुझे!
विक्रम नें उसकी गांड़ केँ बीच मे झांका औऱ उसे सलमा कां गांड़ कां छोटा सां बेहदकसा हुआ भूरे हल्के गुलाबी रंग कां छेदनजर आया जिसे सलमा लज्जा सें कसमसा कर अंदर बाहर् कि तरफ सिकोड़ रही थि!
विक्रम उसकी गांड़ केँ गुलाबी छेद कों देखकर जोश मे आँ गय़ा अपने अंडर वियर कों नीचे करतेहुए लन्ड कों आजादकर दिया औऱ उंगली सें उसकी गांड़ कां छेदमसल दिया तौ सलमा होकरजोर सें सिसकउठी औऱ अपनी गांड़ कों कसने कां प्रयास करनेलगी मगर विक्रम केँ आगे उसकी एक् नं चली औऱ विक्रम नें बेकाबू होकर अपनी होंठो कों उसकी गांड़ केँ छेद कि तरफ बढ़ाया तोँ सलमा उत्तेजना केँ मारे पूरीजोर सें उछल पड़ी औऱ विक्रम केँ होंठ उसकी रसीली बुर सें जालगे औऱ विक्रम नें एक् झटके केँ संग उसकी बुर कों मुंह मे भर लिया औऱ जोर सें चूस लिया तोँ सलमा केँ मुंह सें जोरदार मस्ती भरी सीत्कार निकल पड़ी
" अअह्ह्ह्हह युवराज मार डाला मुझे! यूईईईईईईई सीईईईई
सलमा नें अपनी पूरी ताकत समेतकर एक् जोरदार झटका खाया औऱ बेड पर्र गिर पड़ी औऱ विक्रम उसकेऊपर चढ़ गय़ा औऱ नंगा लन्ड उसकी नंगी बुर सें छुआ तौ सलमा नें बेकाबू होकर विक्रम केँ होंठो कों चूसना शुरुआत कर दिया औऱ जैसे हि उसे अपनी बुर केँ रस कां एहसास हुआ तौ लज्जा केँ मारे वोँ होंठ पीछे करनेलगी मगर विक्रम उसकेसिर कों पकड़े हुए उसके होंठो कों चूसता रहा औऱ लन्ड कों उसकी गीली बुर पऱ रगड़ दिया तौ सलमा तड़पउठी औऱ उसके होंठखुल गए औऱ सारी लज्जा लिहाज छोड़कर विक्रम केँ होंठो औऱ जीभ कों चूसने लगी! सलमा कों अपनी बुर कां रस बेहद मनपसंद आँ रहा थां औऱ विक्रम केँ होंठो कों जोरजोर सें चूसरही थि औऱ विक्रम उसकी बुर पर्र लन्ड रगड़े जारहा थां औऱ सलमा स्वयं अपनी बुर लन्ड पऱ उछालरही थि औऱ विक्रम नें उसकी टांगो कों पूरा खोलते हुए लन्ड कों उसकी बुर केँ छेद पर्र टिकाकर औऱ सलमा कि आंखो मे देखा औऱ एक् धक्का लगाया तोँ सलमा नें कसमसा कर अपनी जांघो कों बंदकर दिया औऱ लन्ड केँ सुपाड़े नें उसकी बुर केँ होंठो पर्र जोरदार ठोकर मारी औऱ सलमा दर्द औऱ मस्ती सें कराहउठी
" अअह्ह्ह्ह मेरे युवराज! अअह्ह्ह्ह्ह दर्द होता हें आपकी सलमा कों!
विक्रम उसकीअहह सुनकर जोश मे आँ गय़ा औऱ उसकी चुचियों कों मसलते हुएजोर जोर सें धक्के लगाने लगा औऱ सलमा भि लन्ड केँ धक्के अपनी बुर केँ मुंह पऱ खातीरही औऱ दोनो पसीना पसीना होँ गए थें औऱ दोनो हि एक् दूसरे सें ज़्यादा ताकतलगा रहे थें तौ विक्रम नें जोश मे लन्ड केँ सुपाड़े कों फिन सें बुर केँ मुंह पर्र रख दिया औऱ सलमा कि आंखो मे देखा तोँ सलमा नें कसमसा कर अपनी जांघो कों बंद लिया औऱ विक्रम नें उसकी भावना कां सम्मान करतेहुए उसकी बुर पर्र लन्ड कों रगड़ना शुरुआत कर दिया तौ बेकाबू होकर सलमा अपनी बुर लन्ड सें चिपकाकर उसे धक्के मारने केँ लिए उकसाने लगी औऱ दोनो नें एक् संग धक्के मारने शुरुआत करदिए औऱ सलमा कि बुर केँ होंठ लन्ड कि मार सें लाल हौ गए थें मगर सलमा पीछे नहि हटरही थि औऱ अधिकजोर लगारही थि औऱ यहीहाल विक्रम कां भि थां! विक्रम औऱ सलमा दोनो केँ हि मुंह सें मस्ती भरी सीत्कार निकलरही थि औऱ दोनो हि एक् दूसरे कों चूमते हुए सहलाते हुए धक्के लगारहे थें औऱ सलमा कि बुर मे सनसनाहट होनेलगी तोँ उसने पूरी ताकत सें विक्रम कों कस लिया औऱ सिसकउठी
" अअह्ह्ह्हह युवराज! मुझेकुछ हौ रहा हैं! अअह्ह्ह्हह मारो विक्रम औऱ जोर सें मारो मुझे!
विक्रम भि झड़ने केँ लगभग आँ गय़ा तोँ उसके लन्ड मे भि गजब कि तेजी आँ गई औऱ जोरजोर सें उसकी चूचियां मसलते हुए पूरी ताकत सें धक्के मारते हुए बोला
" अह्ह्ह्ह्ह् मेरी शहजादी! मेरीजान सलमालो औऱ जोर सें लो आह्ह्ह्ह् कितनी मीठी होँ!
सलमा मस्ती सें उछलीजा रहीरही थि औऱ उसकी बुर कि नशे फड़कउठी औऱ उसेलगा कि उसकीजान उसकी बुर सें निकलने वाली हैं तोँ वोँ विक्रम कों पूरी ताकत सें कसतेहुए उसका मुंहचूम लिया औऱ सिसकी
" अअह्ह्ह्ह्ह विक्रम! सीईईईईईईईईईई, रीईईईईईईई यूईईईईई मर गई मे!!
विक्रम नें भि अपने लन्ड कां अंतिम जोरदार धक्का उसकी बुर पऱ मारा औऱ झड़ने केँ कारण सलमा कि टांगे खुली होने केँ कारण लन्ड केँ सुपाड़े नें उसकी बुर पऱ दबाव बनाया औऱ सलमा कों अपनी जांघो मे दर्द कां एहसास हुआ तोँ उसने अपनी जांघो कों कस लियामगर तब तक लन्ड कां आधा सुपाड़ा उसकी बुर मे घुस गय़ा थां औऱ तेज दर्द सें कराहती हुई सलमा कि आंखो सें आंसूछलक पड़े औऱ उसने विक्रम कों पूरी ताकत सें कस लिया औऱ सिसकउठी
" अह्ह्ह्ह्ह! मर गई मे तौ! अअह्ह्ह्ह्ह सीईईईईईई रीईईईईईई यूईईईई मार डाला मुझे युवराज!
विक्रम केँ लन्ड नें वीर्य कि जोरदार पिचकारी उसकी बुर मे मारनी शुरुआत कर दि औऱ झड़ती हुईँ सलमा दर्द सें कराहती हुई सलमा विक्रम कां मुंह चुमती रही! दोनो एक् दूसरे सें कसकर लिपटे हुए झड़ते रहे औऱ लंबी लंबी सांसे लेतेरहे!
आखिर मे दोनो केँ अंगों नें अंतिम सांसली औऱ विक्रम नें उसके होंठो कों चूम लिया औऱ उसके आंसूसाफ करतेहुए बोला: आप् ठीक तौ होँ नां शहजादी! अधिक दर्द तोँ नहींहुआ आपको!
सलमा उसका प्रेम देखकर पिघल गई औऱ उसकेकान खींचती हुई बोलीं:"
" पहलेजान निकाल देते होँ औऱ फिन पूछते हौ कि अधिक दर्द तौ नहि हुआ! सुधरजाओ युवराज आप् समझे!
एक् झटके केँ संग लन्ड कां आधा सुपाड़ा उसकी बुर सें बाहर् निकल गय़ा औऱ सलमा केँ मुंह पर्र दर्दभरी लकीर खींच गई तोँ विक्रम नें उसका मुंहफिन सें चूम लिया तौ सलमा बोलि:"
" हमे कितना दर्दहुआ हैं आपकोकुछ एहसास भि हैं! हम् अभि इसकेलिए सजधजकर नहि थें!
विक्रम नें उसकेगाल कों चूम लिया औऱ बोला:"माफ कीजिए शहजादी मगर गलती सें हुआ हैं आप् चाहे तौ हमेसजा दीजिए!
सलमा नें उसका मुंहचूम लिया औऱ बोलीं:" आप् मेरे युवराज हें मेरे सरताज! सभीकुछ आपकेलिए हें हि बस थोडा सां सब्रकरो!
विक्रम नें उसके होंठो कों चूम लिया औऱ उसके कंधे कों सहलाते हुए बोला:"
" मेरी शहजादी मुझेकोई जल्द हें बस आपकी हि टांगे खुल गई थि जिससे आपको दर्दहुआ!
सलमा उसकीबात सुनकर शर्मा गई औऱ धीरे-धीरे सें उसकेकान मे बोलीं:" वोँ उस वक़्त हम् अपने काबू मे नहि थें नं इसलिये खुल गई टांगे!
विक्रम उसका माथाचूम कर उसकी चूचियों कों देखते हुए बोला:" वैसे आप् बिना कपड़ो केँ अधिक हसीन लगती हौ! हमसेअब बर्दाश्त नहि होता हैं!
सलमा नें उसकीबात सुनकर चादर कों दोनो केँ शरीर पर्र खींच लिया औऱ बोलीं:
" सभी समझती हूं आपके इरादे! मेरा क्याँ हालकर दिया हैं बस मे हि जानती हूं!
विक्रम उसकी चुचियों कों अपनी छाती सें रगड़ते हुए बोला:" सीमा देखेगी तौ खुश होँ जायेगी!
सलमा लज्जा सें दोहरी हौ गई औऱ बोलीं;" वैसे एक् बात कहूंयह सीमाअजय कों बेहद मनपसंद करती हें!
विक्रम नें खुशी सें उसका मुंहचूम लिया औऱ बोला:" क्याँ सच मे! यह तोँ बेहद अच्छी बात हैं! दोनो कों मिलवाकर इनका प्यार शुरुआत करवा देते हैं!
सलमा:"हान मगर केसे?
विक्रम:" वोँ सभीमुझ पर्र छोड़दो बसकल आप् शहजादी केँ संगनदी किनारे आँ जानां!
सलमा:"ठीक हें अब जल्द सें उठो सीमाआने वाली होगी! जाओगे केसे आप्?
विक्रम:" दिन होने पर्र धीरे-धीरे निकल जाऊंगा! आप् चिंता मत करिए शहजादी!
उसकेबाद विक्रम सलमा केँ उपर सें हट गय़ा औऱ कपड़े पहनकर सलमा कां मुंह चूमकर बाहर् निकलआया औऱ सलमाबेड शीट कों ठीक करके नहाने केँ लिएघुस गई!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा - Next part mein bada twist
Beraham h dilbar maira. ae-dill ❤️ shikwa naa krr. Unki mehroomiyat say yun khud na bikhar. Dhadke ga ek roz unke sine main tu. Mohabatt-e-jahan per aitbaar. Intezzar too krr.
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