शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
अगलेदिन जैसे हि पहरादे रहे सैनिक बेहोश पड़ेहुए मिले तौ सुल्तानपुर मे हड़कंप मच गय़ा औऱ राज दरबार लगाहुआ थां!
रजिया:" आखिरचल क्याँ रहा हैं जब्बार ? ऐसी ढीली सुरक्षा व्यवथा मैनेआज तक नहीं देखी!
जब्बार भरे दरबार मे जलील हौ रहा थां औऱ उसका मुंह गुस्से औऱ अपमान सें लालहुआ पड़ा थां औऱ बोला:" आप् फिक्र नं करें क्योंकि आज सें सारी सुरक्षा मे अपनेहाथ मे लूंगा औऱ कोई परिंदा भि पऱ नहींमर सकता!
रजिया:" मगर जोँ अभि तक हुआ हैं उसके पीछे किसी दुश्मन कां क्याँ मकसद होँ सकता हें वोँ पता करना हि होगासंग हि संग अभि तक कल्लू सुनार कां कुछ भि पता नहि चला हैं!
जब्बार:" कल्लू सुनार कों ढूंढने केँ लिए सैनिक कड़ी मेहनत कररहे हें! जरूरी वोँ कहीं छिपाहुआ होगा नहीं तौ अब तक मिल जाता!
रजिया:" ठीक हें मगर जब्बार आगे सें कोई शिकायत नहि आनी चाहिए सुरक्षा सें जुड़ी हुईँ! सैनिकों कों होश मे आते हि उनसेसभी कुछपता करो औऱ हमें बताओसभी कुछ!
जब्बार:" जैसा आपका हुक्म!
उसकेबाद सभा खत्म होँ गई औऱ सलमा चिंता मे पड़ गई कि जब्बार जैसे राक्षस केँ होतेहुए विक्रम राज्य मे केसेघुस पायेगा औऱ दोनो कां मिलना अब बिल्कुल भि आसान नहि होगा!
वहीं दूसरी तरफ उदयगढ़ मे सुभहअजय अपनी मम्मी मेनका केँ पलंग पर्र सोयाहुआ थां औऱ मेनका घऱ केँ कुछकाम देखरही थि! अजय कि आंख खुली औऱ देखा कि वोँ अपनी माता केँ कक्ष मे सोया हें तोँ उसकी आंखो केँ आगेरात हुइ घटनायाद आँ गई औऱ उसे यकीन नहीं हौ पारहा थां कि रात जोँ हुआ वोँ सपना थां याँ हकीकत! अजयउठा औऱ नहा धोकर रेडी हौ गय़ा औऱ मेनका केँ संग ब्रेकफास्ट करनेकर बादराज महल कि तरफबढ़ गय़ा! अजय औऱ मेनका दोनो नें हि एक् दूसरे केँ संग बिलकुल सामान्य बर्ताव किया मानोरात कुछहुआ हि नहि थां!
राजमहल पहुंच करअजय नें गायत्री देवी केँ पेरछुए तोँ गायत्री नें उसे आशीर्वाद दिया औऱ बोलीं:" विजयी भव ! परमेश्वर तुम्हे अपने कर्तव्य कों पूरा करने कि शक्ति प्रदान करे!
अजय:" जब तक आपका आशीर्वाद मेरेसंग हें मे अपने कर्तव्य कों पूरा करूंगा!
राजमाता:" मे तौ हमेशा आप् दोनो केँ संगहु अजय! अच्छा आज एक् काम करनानदी केँ किनारे जोँ मंदिर हें मुझे पूजा केँ लिए जानां होगा! आप् जाने कि तैयारी कीजिए!
अजय:" जोँ आज्ञा राजमाता! युवराज नहींदिख रहे हें?
गायत्री:" आजकल युवराज राज्य केँ कामों मे रुचिकम लेँ रहे हें औऱ देर तक सोते हें! हमे भि पता करके बताओजरा क्याँ किस्सा हैं आखिर इसके पीछे ?
अजय:" आप् चिंता न् करें राजमाता! मे युवराज सें बात करके आपकोबता दूंगा!
अजय राजमाता सें मिलने केँ बाद विक्रम अजय सें मिलने केँ लिए उसके कक्ष मे गय़ा तोँ देखा कि विक्रम 11 बजे भि सोयाहुआ हैं तोँ वोँ उसके कक्ष सें बाहर् आँ गय़ा औऱ सैनिकों सें मिलने केँ लिएचला गय़ा औऱ सुरक्षा व्यवस्था कां जायजा लिया औऱ लगभग एक् बजे वापिस आया तौ युवराज खानां खाकर बैठे हि थें कि अजय कों देखते हि बोले:"
" आओअजय थोडा भोजन ग्रहण करलो आप् भि!
अजय:" नहीं युवराज, मुझे अभि भूख नहीं हैं! आप् केसे होँ?
विक्रम:" मे तोँ अच्छा हुअजय! मगर क्याँ हुआ जोँ ऐसेपूछ रहे होँ आप्!
अजय:" नहींबस ऐसे हि आजकल आप् राजसभा मे नहींआते औऱ लेट तक सोते हें तोँ बस इसलिये पूछा आपसे कि कहींकोई बीमारी नें तोँ नहींघेर लिया आपको?
विक्रम उसकीबात सुनकर हल्का सां मुस्कुराया औऱ बोला:" बीमारी हान बीमारी हि तौ हें सच मे एक् बेहद हसीन बीमारी जिसकी वजह सें हम् रातभर नींद नहि आती !
अजय उसकीबात सुनकर हैरान हौ गय़ा औऱ बोला:"ऐसे पहेलियां नां बुझाए युवराज! हम् आपके जैसे समझदार नहीं हैं!
विक्रम:" बातऐसी हैं कि अजय हमने आपकेलिए भाभी ढूंढली!
अजय उसकीबात सुनकर मुस्कुरा उठा औऱ बोला:" अच्छा जी तोँ यहबात हैं हमारे युवराज किसी केँ प्यार जाल मे पड़गए हें
विक्रम:" हान साथी भइयाऐसा समझलो कि उसके बिनाकुछ अच्छा नहीं लगता!मन करता हैं कि वोँ हरसमय मेरी नजरो केँ सामने मेरी बांहों मे रहे!
अजय:" युवराज आप् तौ सच मे प्यार दीवाने हौ गए हें! आखिरकौन हैं वोँ जिसने युवराज कों अपना दीवाना बना लिया हैं!
विक्रम नें अपनेदिल पर्र हाथ रखकरअहह भरी औऱ बोला:
" वोँ तौ लाखो मे एक् हें हंसती हैं तौ फूल झड़ते हें औऱ बात करती हैं तौ दिलजीत लेती हैं! उसकी एक् मुस्कुराहट पऱ जिंदगी बलिदान करने कों जी चाहता हैं!
अजय:"ऐसा तौ केवल स्वप्न सें सुंदरी केँ लिए हि होता हैं युवराज!
विक्रम नें आंखेबंद करी औऱ उसकी आंखो केँ आगे सलमा कि तस्वीर नजरआई औऱ बोला:"
" सच मे अजय स्वप्न सुंदरी सें भि कहीं अधिक सुंदर औऱ हसीन!
अजय:" अच्छा फिन हमें आखिर बताए तौ सही कि वोँ हैं कौन?
विक्रम नें अजय कां हाथ पकड़ लिया औऱ उसकी आंखो मे देखते हुए बोला:" सुल्तानपुर कि शहजादी सलमा!
अजय कां मुंह हैरानी सें खुला औऱ खुला कां खुला हि रह गय़ा औऱ उसे अपने कानो पर्र यकीन नहि हौ रहा थां कि वोँ सचसुन रहा हैं औऱ बोला:"
" क्याँ युवराज सुल्तानपुर कि शहजादी सलमा? मे सचसुन पारहा हूं नाँ ?
विक्रम केँ चेहरे पर्र मुस्कान आँ गई औऱ बोला:"सही सहीसुन रहे होँ आप् अजय! हम् औऱ सलमा एक् दूसरे सें बेपनाह इश्क करते हें!
अजय:"मगर युवराज वोँ तौ हमारे राज्य केँ दुश्मन हैं आप् उनसे केसे नाता जोड़ सकते हौ जबकि आप् जानते हौ कि वोँ आपके पिता केँ कातिल परिवार सें हें!
विक्रम:" सलमा सें हमारी कैसी दुश्मनी उसके तौ एक् मासूम सां प्रेम भरादिल हें अजय!फिन उसने भि तौ अपना पिता खोया हैं उस लड़ाई मे औऱ वोँ हमे दुश्मन समझती थि मगर बड़ी मुश्किल सें हम् उसकी गलतफहमी दूरकर पाए हें! डरअसल हमे तोँ लगता हें कि इस सारे फसाद कि जड़कोई औऱ हि हें!
अजय ध्यान सें उसकी बाते सुनता रहा औऱ विक्रम नें उसे जब्बार कि बात बताई तौ अजयसमझ गय़ा कि सलमा बेकसूर हें औऱ सच मे उसे युवराज कि जरूरत हैं तौ बोला:"
" मगर युवराज आप् उनसे मिलने केँ लिए सुल्तानपुर जाने कि भूलमत करना! कहीं वोँ आपको फंसा न् दे याँ फिन आप् किसी खतरे मे नां पड़जाए!
विक्रम:" हम् तौ कल पूरीरात सुल्तानपुर मे हि थें शहजादी केँ पासअजय! वोँ हमें एक् खरोच नहींआने देगी क्योंकि उसकेलिए अबसभी कुछ हम् हि हें! अच्छा सुनोआज शहजादी साम कों नदी पऱ हमसे मिलने केँ लिए आएंगी! आप् हमारे संग चलना! आप् मिल लेना अपनी भाभी सें!
अजय चौंककर बोला:"मगर युवराज आज तोँ साम कों राजमाता पूजा केँ लिए जायेंगी नदी पऱ!
युवराज:" कोईबात नहींयह तौ औऱ खुशी कि बात हें! वोँ भि अपनी होनेबहु सें मिल लेंगी!
अजय:" नहीं युवराज यह इतना आसान नहि हें! आप् अभि किसी कों मत बताना औऱ एक् वादाकरो कि मुझे बिना बताए आप् अब सुल्तानपुर नहीं जायेंगे!
विक्रम:" आप् हमारी चिंता न् करेअजय! हम् बिना सुरक्षा केँ कहीं नहीं जाते हैं!
अजय:"बात वोँ नहीं हैं युवराज! हमे आप् पऱ भरोसा हैं मगर हमारी भि आपकेलिए कुछ जिम्मेदारी हें! आज केँ बाद आप् जब भि सुल्तानपुर जायेंगे तौ हम् आपकेसंग मे जाएंगे!
विक्रम:" अच्छा ठीक हें जैसे तुम्हे ठीकलगे! अच्छा सुनो उसकी एक् सहेली हें सीमा बेचारी बड़ी अच्छी लड़की हें औऱ उसने मेरी औऱ सलमा कि बड़ी सहायता करी हें औऱ मैने तोँ उसे बेहनबना लिया हें! सलामकह रही थि कि वोँ तुम्हारे बारे मे बात करती हें!
विक्रम कि बात सुनकर अजय कां दिल धड़कउठा क्योंकि आखिरकार वोँ भि एक् जवान मर्द थां औऱ उसकी भि ख़्वाहिश थि कि उसकीकोई प्रेमिका हौ तोँ अजय बोला:" आपने जिसे बेहन बनाया हें यकीनन वोँ अच्छी हि होगी औऱ आप् अपनी बेहन केँ दिल कि बातहमे बतारहे हें तोँ मतलब आप् हम् पर्र बेहद यकीन करते हें! आप् भरोसा रखिए युवराज मे आपकेइस भरोसे पऱ खरा उतरूंगा! अच्छा मे अबसाम कि तैयारी करता हूं!
साम कों लगभग पांचबजे अजय राजमाता कों लेकरनदी केँ किनारे पहुंच गय़ा औऱ राजमाता मंदिर मे पूजा करनेलगी तौ अजय बाहर् आँ गय़ा औऱ सामने सें उसे एक् बेहदसजी हुइ बग्गी गुजरती नजरआई औऱ समझ गय़ा कि यह जरूर शहजादी सलमा कि बग्गी होगी तोँ क्याँ इसमें सीमा भि आई होगी औऱ वोँ सलमा कों भि देख्ना चाहता थां कि आखिरऐसा हें रूप सौंदर्य हें उसका जिसने युवराज कों अपनेऊपर मोहित कर लिया हें!
एक् बड़े पेड़ केँ नीचे जाकर बग्गी रुक गई औऱ हिजाब लगाए एक् बेहद सुंदर शहजादी बाहर् निकली औऱ उसनेवही पेड़ केँ नीचे तंबू लगाने कां आदेश सैनिकों कों दिया औऱ थोड़ी हि देर मे वहा तंबूलग गय़ा औऱ सैनिक थोड़ी दूर जाकर पहरा देनेलगे औऱ तभीअजय कों पेड़ कि टहनियां हिलती हुइ नजरआई औऱ उसकी आंखे हैरानी सें फैल गई जब उसने युवराज विक्रम कों पेड़ सें उतरकर तंबू केँ अंदर उतरते हुए देखा!अजय सावधान होँ गय़ा कि कहींकोई खतरा तोँ नहीं हैं मगर सैनिक अपनीमौज मस्ती मे लगेहुए थें औऱ उन्हें ख्वाब मे भि अंदाजा नहि थां कि कोई पेड़ सें भि आँ सकता हें!
लगभग पांच मिनट केँ बादहरे रंग कां सूट सलवार पहनेहुए एक् खूबसूरत लड़की तंबू सें बाहर् आई औऱ इधरउधर देखते हुएनदी कि तरफचल पड़ी!अजय सावधानी सें उसे हि देखरहा थां कि यह लड़कीकौन हैं कहींयही सीमा तोँ नहीं हैं यह सोचते हुए उसकादिल तेजी सें धड़कउठा उठा औऱ वोँ लड़कीहाथ मे पानी कां कैनलिए नदी केँ किनारे आई! सैनिक अबउसे नहींदेख सकते थें औऱ अजय कों देखते हि उसने पहचान लिया औऱ बोलीं:"
" आप् अजय सिंह हें नं जौ उदयगढ़ केँ सेनापति हें!
अजय उसकीबात सुनकर हैरान हुआ कि आखिरयह लड़की मुझे केसे जानती हैं औऱ बोला:
" मे अजय हि हुमगर माफ़ चाहता हूं आपको पहचान नहीं पाया!
सीमा:" मे शहजादी कि सहेली सीमाहु! शहजादी औऱ युवराज विक्रम नें आपको अंदर बुलाया हें
अजय नें उसे बेहदगौर सें देखा औऱ अजय कों वोँ बेहद प्यारी औऱ दिलकश लगी औऱ अजय बोला:" आप् हमे जानती हें इसकेलिए आपका हार्दिक शुक्रिया! मगर इतने सैनिकों केँ होतेहुए हम् अंदर केसेजा पाएंगे?
सीमा:" आप् उसकी चिंता नं करे! हमारे पास एक् उपाय हें!
इतना कहकर सीमा नें बुर्का निकाला औऱ अजय कि तरफ बढ़ा दि तोँ अजय हैरान होतेहुए बोला:" तौ क्याँ हम् अब बुर्का भि पहनना पड़ेगा?
सीमा उसकीबात सुनकर मुस्कुरा पड़ी औऱ बोलि:" बस केवल तंबू तक जाने केँ लिए!
अजय नें सावधानी सें बुर्का पहन लिया औऱ चलनेलगा औऱ जल्द हि तंबू मे पहुंच गय़ा तोँ उसे बुर्के मे देखते हि विक्रम औऱ सलमा दोनो एक् संग मुस्करा उठे औऱ विक्रम बोला:"
" कमाल केँ हसीनलग रहे होँ अजय आप् बुर्के मे! यह हें आपकी भाभी शहजादी सलमा!
अजय भि हंस दिया औऱ उसने ध्यान सें सलमा कों देखा औऱ पाया कि सलमासच मे बेहद सुंदर हें बिलकुल किसी स्वर्ग कि अप्सरा केँ जैसी!सच मे सलमा औऱ विक्रम दोनो कि जोड़ी बेहद सुंदर हें! अजय नें दोनोहाथ जोड़दिए औऱ बोला:"
" भाभीजी सलाम! आप् सच मे बेहद सुंदर हें औऱ युवराज आपकेलिए दीवाने हें!
अजय कि बात सुनकर सलमा शर्मा गई तोँ सीमा बोलीं:"
" हमारी शहजादी लाखो मे एक् हें औऱ आपके युवराज सें बहोत प्रेम करती हैं!
अजय:"हान वोँ तौ हैं! भाभी आप् कोई चिंता मत करना, आपकायह देवरु आप् दोनो केँ प्यार कों जरूर पूरा करेगा!
सीमा उसकीबात सुनकर मुस्कुरा उठी औऱ बोलीं:" शहजादी केँ बहादुर देवरु जीदो प्रेमी मिले हें तौ उन्हें बहोत सारी बाते करनी होगी तौ उन्हे अकेला छोड़दो!
अजय हड़बड़ा सां गय़ा औऱ बाहर् निकलते हुए बोला:"
" ओह मे तौ यहबात भूल हि गय़ा थां अच्छा मे चलताहु!
अजय जैसे हि बाहर् गय़ा तोँ विक्रम नें आगे बढ़कर सलमा कों सीमा केँ सामने हि अपनी बांहों मे भर लिया तौ सलमा लज्जा सें पानी पानी होँ गई औऱ कसमसा कर छूटने कि कोशिश करनेलगी तोँ उसकी हालत देखकर सीमा केँ होंठो पऱ मुस्कान आँ गई औऱ बोलि:"
" अरे इतनी बेताबी भि ठीक नहि हैं युवराज! मैने तौ आपकोबात करने केँ लिए अकेला छोड़ने केँ लिएकहा थां औऱ आप् तोँ कुछ औऱ हि करनेलगे होँ! लगता हें मुझे लज्जा करनी पड़ेगी!
इतना कहकर सीमा बाहर् कि तरफचल पड़ी औऱ विक्रम नें सलमा केँ गालों कों चूम लिया तौ पुच्छ कि किस कि आवाज़ सुनकर सीमा कां मन आनंदित हौ गय़ा औऱ अपने होंठो पर्र मुस्कान लिए बाहर् निकल गई औऱ जैसे हि बाहर् निकली तोँ कक्ष केँ बाहर् हि उसेअजय मिल गय़ा औऱ अजयउसे स्माइल करतेहुए देखकर बोला:"
" ऐसा क्याँ मिल गय़ा जौ इतनी हंसती हुई आँ रही हौ अंदर सें?
सीमा उसकीबात सुनकर ऐसेचुप होँ गई मानो सांप सूंघ गय़ा हौ औऱ अंदर सें अभि तक पुच्छ पुच्छ कि आवाजे आँ रही क्योंकि अभि सलमा भि विक्रम केँ चुंबन कां जवाब पूरेजोश सें देरही थि औऱ कपड़े सें बनेइस तंबू मे आवाज़ बाहर् तक जारही होगी इसका उन्हे अंदाजा नहीं थां!
सीमा लज्जा सें अपनी गर्दन झुकाकर खड़ी हौ गई क्योंकि अजय कों सामने पाकर उसकी धड़कने तेज हौ गई थि औऱ मुंह लज्जा सें लाल होँ गय़ा थां औऱ ऊपर सें सलमा औऱ विक्रम केँ किस कि मधुर आवाज़ उसे अंदर हि अंदर बेचैन कररही थि!
अजय औऱ सीमा दोनो बिलकुल शांत खड़ेहुए थें बसअजय सीमा केँ लज्जा सें झुकेहुए चेहरे कों देखरहा थां औऱ सीमा लज्जा केँ मारे स्वयं मे हि सिमटी हुई जारही थि औऱ अंदरकुछ नहीं बोलीं तौ अजय हिम्मत करके उसके थोडा लगभग आँ गय़ा औऱ बोला:"
" आपने बताया नहीं सीमा कि शहजादी औऱ विक्रम क्याँ बातेकर रहे हें अंदर !
सीमा नें अपने दोनो हाथो कि अंगुलियों कों एक् दूसरे मे फंसा लिया औऱ लज्जा सें पानी पानी हुइ जमीन ताकने लगीतभी अंदर सें सलमा कि मस्ती भरीअहह सुनाई पड़ी
" आह्ह्ह्ह्ह युवराज थोडा आहिस्ता मेरे प्रियतम!
सीमा सलमा कि मधुर सिसकी सुनकर बेचैन हौ उठी औऱ उसकी सांसे अब तेजी सें चलरही थि जिससे उसकी चूचियां हिलरही थि औऱ अजयअब उसकेठीक सामने आँ गय़ा औऱ हिम्मत करके उसकाहाथ पकड़कर कर धीरे-धीरे सें बोला:"
" बताओ नां सीमा क्याँ बातेकर रहे हें शहजादी औऱ युवराज अंदर दोनो बिलकुल अकेले!
अजय नें जैसे हि उसकाहाथ पकड़ा तोँ सीमा कां पूरा जिस्म कांपउठा औऱ लड़खड़ाती हुईँ मदहोश आवाज़ मे धीरे-धीरे सें बोलीं:"
" मुझे नहींपता अजय! मेराहाथ छोड़ दीजिए नां आप्! यूं किसी कों तंग करना अच्छी बात नहि होतीअजय!
अजय उसकीबात सुनकर धीरे-धीरे सें बोला:" सीमा आप् हमे किसी मे समझती हें क्याँ ? हमे तौ युवराज नें बताया थां कि सलमा कों आपनेकहा थां कि आप् हमे मनपसंद करती हें!
सीमा उसकीबात सुनकर लज्जा सें लाल होँ गई औऱ कुछ बोलती उससे पहले हि अंदर सें सलमा कि मस्ती भरी सीत्कार निकल गई क्योंकि विक्रम नें हाथ नीचे बढ़ाकर उसकी गांड़ कों बिलकुल नंगी पकड़ लिया गय़ा थां
" अह्ह्ह्ह सीईईईईआई ईईईईईइ यूईईईईईइ मेरे युवराज! आह्ह्ह्ह्ह मार डालोगे क्याँ अपनी शहजादी कों आज!
सीमा नें सलमा कि मादक सिसकियां सुनकर एक् बारअजय कि तरफ देखा औऱ अपनाहाथ उसकेहाथ मे ढीला छोड़ दिया तौ अजय नें उसेहाथ सें अपनीतरफ खींचा तौ सीमा किसी नाजुक डोर कि तरह खींची चलीआई औऱ अजय नें उसे अपनी बांहों मे भरकर उसका मुंहचूम लिया औऱ धीरे-धीरे सें उसकेकान मे बोला:"
" मे आपसे बेहद प्यार करता हूं सीमा!
सीमा भि उससे कसकर लिपट गई औऱ अपनी बांहों कां हार उसकेगले मे पहना दिया तौ अजय नें उसके चेहरे कों ऊपर उठाते हुए अपने होंठो कों उसके होंठो पऱ रख दिया औऱ सीमा केँ होंठो कों चूसने लगा तौ सीमा भि पिघल गई औऱ देखते हि देखते दोनो एक् दूसरे केँ होंठो कों चूसने लगे!
विक्रम औऱ सलमा कि मधुर सिसकियां उन्हे औऱ जोश दिलारही थि! लगभगदो मिनट तक दोनो कां किसचला औऱ उसकेबाद जैसे हि दोनो सांस लेने केँ लिए रुके औऱ एक् दूसरे कि आंखो मे देखा तौ दोनो एक् संग मुस्कुरा दिए औऱ सीमा लज्जा सें लाल होँ गई!
अजय नें फिन सें उसके होंठो कों चूसना शुरुआत कर दिया औऱ सीमा कि गांड़ कों मसलने लगा तोँ सीमा मस्ती सें उससे लिपटी जारही थि! अजय नें उसके होंठो कों अच्छे सें चूसा औऱ बोला:"
" सीमा मुझे जानां होगा क्योंकि राजमाता नें पूजाकर ली होगी औऱ वैसे भि एक् अकेली हें तौ कहींकोई दिक्कत नं हौ जाए!
सीमा नें उसकागाल चूम लिया औऱ बोलीं:" फिनकब मिलोगे अजय मुझसे ?
अजय नें उसके मुंह कों चूम लिया औऱ बोला:" बहोत जल्द सीमा! युवराज शहजादी सें मिलने केँ लिएजब भि आयेंगे तोँ मे संग मे जरूर आऊंगा!
सीमा नें उसकी आंखो मे देखा औऱ बोलीं:" मे आपका प्रतीक्षा करूंगी युवराज!
अजय उसकेबाद जोर सें हि बाहर् सें बोला:"
" युवराज मुझे जानां होगा क्योंकि राजमाता कि पूजा ख़त्म होने वाली हें! अगर आपकी आज्ञा हौ तौ मे चलाजाऊ क्याँ ?
सलमा कों अपनी बांहों मे समेटे हुए विक्रम उसके गुलाबी गालचूम कर बोला:
" आप् चलेजाए अजय! मे भि निकलने हि वालाहु क्योंकि अंधेरा होनालगा हें!
उसकेबाद अजय नें फिन सें बुर्का पहना औऱ सीमा केँ संग बाहर् निकल गय़ा औऱ नदी केँ किनारे जाकर देखा कि राजमाता कि पूजा समाप्त होँ गई थि औऱ उसे देखते हि बोलि:"
" अच्छा हुआ आप् आँ गए! हम् आपकी हि इंतजार कररहे थें!
अजय:" मे तौ बस बाहर् हि आपका प्रतीक्षा कररहा थां! अभि मेरेलिए क्याँ आदेश हें राजमाता ?
गायत्री:" अंधेरा होना शुरुआत हौ गय़ा हें तोँ अब हमेंमहल कि तरफ प्रस्थान करना चाहिए!
उसकेबाद अजय नें अपनी बग्गी कों निकाला औऱ राजमाता कों लेकरमहल कि तरफचल पड़ा औऱ सीमाउसे दूर तक जातेहुए देखती रही! वहीं दूसरी तरफ सलमा विक्रम सें बोलि:"
" युवराज अब आप् चले जायेंगे औऱ मेरादिल दुःखी रहेगा क्योंकि अबपता नहींकब अगली मुलाकात होगी!
विक्रम चादर पऱ बैठाहुआ थां औऱ सलमा उसकीगोद मे बैठी हुई थीं औऱ विक्रम धीरे-धीरे सें उसकी गर्दन चूमते हुए बोला:"
" आप् फिक्र नं करे शहजादी! हम् जल्द हि फिन सें मिलेंगे!
सलमा उससे लिपटती हुई दुःखी मन सें बोलीं:"
" इतना आसान नहीं होगा क्योंकि आज सुभह राज्य मे बहोत शोरहुआ जब बेहोश पड़ेहुए सैनिक मिले! जब्बार आज सें स्वयं पहरे पऱ रहेगा! आप् कोई खतरामोल मत लेना!
विक्रम:" आप् फिक्र नं करो शहाजदी! आपसे मिलने केँ लिए मे कोई नं कोई तरीका ढूंढ हि लूंगा क्योंकि आपकी हुस्न मुझे मजबूर कर देगी आपकेपास आने केँ लिए मेरी शहजादी!
इतना कहकर उसने सलमा कों जोर सें कस लिया तोँ सलमा कसमसाते हुए बोलीं:"
" मिलने सें अधिक आप् सुरक्षित रहो वोँ मेरेलिए ज़्यादा जरूरी हें! बसइसबात कि फिक्र रहती हें कि आप् केसे होंगे! कम सें कम मिला नं जाएमगर आपकीखबर तौ मिलती रहेहमे!
विक्रम उसकीबात सुनकर मुस्कुरा दिया औऱ उसके होंठ चूमते हुए बोला:"
" मुझे भि आपकी चिंता होती हें शहजादी औऱ उसकेलिए मैने एक् उपाय ढूंढ लिया हैं! रुकिए आपको दिखाता हु!
विक्रम नें तंबू कि छत पर्र सें एक् पिंजरा उतारा औऱ उसमे एक् बेहद हसीन ताकतवर बाज थां जिसे देखकर शहजादी खुश हौ गई औऱ विक्रम नें पिंजरा खोल दिया तोँ वोँ बाज अपनेपंख फड़फड़ाते हुए बाहर् आँ गय़ा औऱ विक्रम बोला:"
" यह लीजिए शहजादी इसकानाम जांबाज हें औऱ मुझे आपका मेसेज देने केँ संगसंग आपकी हिफाजत भि करेगा क्योंकि यह पालतू होने केँ संगसंग शिकारी भि हें!
सलमा नें बाज कों इशारा किया तौ बाज उसकेहाथ पर्र आँ बैठा औऱ अपने पंखों कों फड़फड़ाने लगा तौ सलमाखुश होँ गई!
सलमा विक्रम सें कसकर लिपट गई औऱ उसका मुंह चूमते हुए बोलि:" सच मे आपने मेरादिल एक् बारफिन सें जीत लिया युवराज! अब मे जब चाहे आपको मेसेज भेज सकतीहू!
विक्रम:" बिलकुल शहजादी इसलिये हि तौ मैनेइसे ईरान सें आपकेलिए मंगवाया हें! औऱ हांआज सें पवन भि आपकेसंग हि जायेगा! आपको बाहर् भि मैदान मे घूमता हुआ मिला जायेगा!
सलमा नें विक्रम कों वही गद्दे पर्र गिरा दिया औऱ उसके होंठो चूसते हुए बोलि:" सच मे आपके प्रेम केँ बिना मे बहोत अधूरी थि युवराज! मुझसे विवाह कर लीजिए नां आप्!
विक्रम नें उसे अपनी बांहों मे भर लिया औऱ बोला:" बिलकुल मेरीजान आपको अपनी महारानी बनाऊंगा मे! बसअब राजमाता कों मनालू एक् बार औऱ आप् भि अपनी अम्मी सें मौका देखकर बात कीजिए!
सलमा उसकीबात सुनकर खुश हुई औऱ बोलि:" अम्मी तोँ मान हि जायेगी मगर जब्बार दिक्कत पैदा करेगा!
विक्रम:" जब्बार कों मे देख लूंगा बस आप् अम्मी सें बात कीजिए! औऱ आपके भइया कों भि जब्बार सें दूर रखिए!
सलमा:" मे तोँ कोशिश कर चुकी हें मगर वोँ समझता हि नहि हैं! पता नहीं क्याँ चमत्कार कर दिया हैं जब्बार नें उसकेउपर!
विक्रम:" आप् फिक्र नं करो! मे पता करताहु औऱ शहजादे कों जब्बार सें दूरकर दूंगा!
सलमा:"ऐसा हौ जाए तोँ बहोत अच्छा होगा युवराज क्योंकि सुल्तानपुर कों उसका असली महाराज मिल जाएगा!
विक्रम:" आप् चिंता नं करे! मैने आपकोवचन दिया हें तोँ पूरा करूंगा मेरीजान! अच्छा अब अंधेरा पूरा होँ गय़ा हैं तौ आप् जाने कि तैयारी कीजिए!
सलमा उससे कसकर लिपट गई औऱ बोलि:" मन तौ नहीं करता हें युवराज मगर जानां तोँ पड़ेगा!
दोनो नें एक् दूसरे कों सिद्दत सें चूम लिया औऱ उसकेबाद विक्रम वापिस तंबू कि छत सें बाहर् निकलआया औऱ सलमा सीमा केँ संग अपने राज्य वापिस लौट पड़ी!
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
शमा बेहोशी सें जागी तौ उसका जिस्म दर्द सें टूटाजा रहा थां क्योंकि पिंडाला नें उसे बड़ी बेरहमी सें चोदा थां औऱ उसके पुरे शरीर मे सुइयां सि चुभरही थि क्योंकि उसे इतनी बेदर्दी सें रगड़ा, मसला गय़ा थां मानो दुनिया मे अंतिम स्त्री बची हुइ हौ! शमा नें अपनी जांघो कों थोडा सां फैलाने कि कोशिश करी तौ उसके मुंह सें दर्दभरी अहह निकल पड़ी क्योंकि उसकी जांघो सें खून निकलआया थां औऱ बुर तौ मानो फटकर किसी भैंस कि बुर जैसी हौ गई थि! अपनी दुर्दशा देखकर शमा कि आंखो मे आंसू आँ गए औऱ बड़ी मुश्किल सें खड़ी होने कि कोशिश करनेलगी तोँ उसके पांव जवाबदे गए औऱ गिर पड़ी!
चारोतरफ अंधेरा थां औऱ शमा कों अपने बचने कि यही एक् उम्मीद जगी औऱ बड़ी मुश्किल सें दर्द सहती हुई खड़ी होँ गई औऱ हल्के अंधेरे मे आसपास देखते हुए बाहर् निकलने कां कोई मार्ग तलाशने लगीमगर सभीतरह उसे पहरादे रहे पिंडारी हि नजर आँ रहे थें तोँ शमा उदास हौ गई औऱ महल मे नीचे कि तरफ आँ गई औऱ देखा कि एक् बेहद पतला सां मार्ग गय़ा थां जिस पर्र लगभग 50 पिंडारी पहरादे रहे थें औऱ शमा हैरान हौ गई कि आखिर यहांऐसा क्याँ कीमती खज़ाना छुपाहुआ हें जोँ इतने व्यक्ति कों निगरानी केँ लिएरखा गय़ा हैं तौ उसनेपता करने कां निर्णय लिया!शमा कों यकीन थां कि अंदर जरूर पिण्डाला सोया होगा औऱ वोँ मारकर अपने दर्द औऱ बेइज्जती कां बदला लेना चाहती थि! हालाकि वोँ जानती थि कि उसकेबाद उसीमौत तय होगीमगर अभि कौन सां वोँ। जिंदा हें यह सोचकर उसने होंठो पर्र जहरीली मुस्कान आँ गई!
शमा नें आसपास ध्यान सें देखा तौ उसेपता चला कि यहां आँ अंदर जानां संभव हि नहि हैं तौ उसनेछत पऱ सें जाने कां फैसला किया औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे दर्द सें कराहकर छत पऱ पहुंच गई औऱ नीचे उतरने कां कोई मार्ग देखने लगीमगर कुछहाथ नहींलगा तौ वोँ उदास हौ गई! सहसाउसे यादआया कि उसे रस्सी सें बांधा गय़ा थां तौ जैसे तैसे करके रस्सी लेँ आई!शमा जानती थि कि यह उसकेलिए करीब-करीब असम्भव सां हें मगर जिसेमौत सें डर नं हौ उसे जीवन सें कोई प्रेम नहीं होता औऱ शमा रस्सी कों एक् पिलर सें बांधकर नीचेलटक गई तोँ दीवार सें जा टकराई औऱ जोर सें बेचैनी उठी औऱ आंखो सें आंसू निकल पड़ेमगर उसके मुंह सें अहह तक नहीं निकली! शमा नें रस्सी सें लटकेहुए हि बड़ी मुश्किल सें खिड़की कों धीरे-धीरे सें खोला औऱ हल्के अंधेरे मे उसेकोई अंदर नज़रआया तोँ शमा अपनी सारी ताकत समेटकर खिड़की सें अंदर उत्तर गई औऱ अपनेसंग लाईतेज धारदार छुरे कों बाहर् निकाल लिया औऱ जैसे हि वार करने वाली थि तोँ उसे एहसास हुआ कि पिंडाला तौ मोटा तगड़ा राक्षस जैसा हें औऱ यह व्यक्ति तौ देखने मे बेहद दुबला पतला औऱ कमजोर लगरहा थां मानो हाड़ मांस कां पुतला हौ बस!शमा रुक गई औऱ उसे लगभग सें देखने कि कोशिश करनेलगी तौ उसे एहसास होँ गय़ा कि यह व्यक्ति पिंडारी नहीं हें तौ उसने धीरे-धीरे सें देखा तौ उसे यकीन हौ गय़ा कि जरूर वोँ इस व्यक्ति कों जानती हें औऱ कहीं देखा हें मगरउसे समझ नहीं आँ रहा थां! शमा नें अपनेमन पऱ बहोत जोर डालामगर कुछयाद नहींआया तोँ उसने धीरे-धीरे सें व्यक्ति कों उठाया तौ डरतेहुए उठ गय़ा औऱ कुछ बोलता उससे पहले हि शमा नें अपनेहाथ सें उसका मुंहबंद कर दिया औऱ व्यक्ति एक् महिला कों अपनेपास पाकरचैन कि सांसली औऱ इशारे सें अपने मुंह सें हाथ हटाने केँ लिएकहा तौ शमा नें उसेचुप रहने कां इशारा करतेहुए मुंह सें हाथहटा दिया औऱ बोलीं:"
" आप् कौन हें औऱ यहां किसने आपनेकैद किया हें!
उस व्यक्ति नें शमा कों अपनी स्टोरी बताई औऱ शमा कि आंखेफटी कि फटीरह गई! उसे अपने कानो पर्र यकीन नहीं होँ रहा थां कि क्याँ वोँ सचसुन रही हें औऱ उसकी आंखेकोई सपना तौ नहि देखरही हें! शमा उसकाहाथ पकड़कर बोलीं:"
" आप् मेरा विश्वास कीजिए मे जरूर आपकोइस कैद सें आजाद करने मे सहायता करूंगी!
व्यक्ति:" मगरयह इतना आसान नहीं होगा क्योंकि यहांचाह कर भि कोई व्यक्ति नहीं आँ सकता क्योंकि आज तक यहांआने केँ बादकोई भि जिंदा वापिस नहीं गय़ा हें क्योंकि पिंडारी इंसान नहीं भूखे भेड़िए हैं!
शमा:" आप् मेरा यकीन कीजिए मे अपनीतरफ सें पूरा प्रयास करूंगी! बस आप् हिम्मत मत हारना अपनी!
व्यक्ति:" ठीक हें, अब आप् जाओ कहीं किसी नें देख लिया तोँ मुसीबत जा जायेगी!
शमा नें रस्सी पकड़ी औऱ उसके सहारे बाहर् निकलने लगीमगर निकल नहींपाई तौ उस व्यक्ति नें उसकी सहायता करी औऱ भले हि उसके बाजू कमजोर हौ गए थें मगर अभि भि ताकत बहुतबची हुइ थि!
शमा बड़ी मुश्किल सें अपनी स्थान पर्र वापिस पहुंच गई औऱ सोचने लगी कि यहां सें स्वयं केसे निकला जाए औऱ व्यक्ति कों केसे बचाया जाए!शमा जानती थि कि चाहकर भि वोँ यहां सें भाग नहीं सकती तौ इसकेलिए मुझे अपना मेसेज हि बाहर् भेजना होगामगर केसेयह प्रश्न उसकेमन मे घूमरहा थां औऱ फिनशमा नें एक् चाल चलने कां मन किया! हालाकि यह बेहद मुश्किल थां औऱ उसकीजान भि जा सकती थि मगर दूसरा कोई उपाय नहि थां!
दूसरी तरफआज साम कों अजय औऱ मेनका दोनो कों राजमाता नें महल बुलवा लिया क्योंकि आज राजमाता गायत्री देवी कां कां बर्थडे थां तोँ दोनो पूरीरात वहीमहल मे रहे औऱ अजय औऱ विक्रम दोनो एक् दूसरे सें अपनी अपनी प्रेमिका कों स्टोरी सुनाते रहे!
वहीं दूसरी तरफशमा सुभह सोकरउठी तौ बूढ़े पिंडारी उसे नहाने केँ लिए लेँ गय़ा तौ शमा उससे बोलीं:"
"बाबा आपकी इतनी उम्र होँ गई हें औऱ आप् अभि भि काम करते हौ ?
बूढ़ा नें उसेखा जाने वाली नजरो सें देखा औऱ बोला:" चुपचाप नहाओ औऱ मुझे मेराकाम करनेदो समझीकुछ!
शमा उसकेसंग चलती हुई तालाब तक गई औऱ नहाने केँ लिए उसमेउतर गई औऱ अपनी चुचियों कों उसके सामने हि मलमलकर साफ करनेलगी जिन पऱ पिंडाला केँ मुंह सें निकली हुई बदबूदार लारलगी हुईँ थि जिसके हटते हि उसकी चूचियां निखरकर सामने आँ गई! बुरीतरह सें मसले जाने सें लाल सुर्ख हौ चुकी उसकी चुचियों मे अलग हि रंगत आँ गई थि औऱ बूढ़ा उसे वासना भरी नजरो सें देखरहा थां तौ शमाउसे मुस्कान देती हुइ बोलि:" ऐसे क्याँ देखरही होँ कभी महिला नहीं देखी क्याँ ?
बूढ़ा:" देखी हैं मगर तेरे मस्तानी नहीं देखी!सच मे कमाल कि हु तुम्!
शमासमझ गई कि उसकातीर सही निशाने पऱ लगा हें तौ उसकीतरफ अपनी पूरी चूचियां उभारते हुए बोलीं:"
" क्यूं कभी किसी महिला कों नहीं भोगा क्याँ अच्छे सें ?
बूढ़े नें एक् ठंडीअहह भरी औऱ बोला:" मेरीऐसी क़िस्मत कहां! लूटी गई औरतों मे सें एक् दोबार बूढ़ी औऱ कमजोर स्त्री मिली थि तौ आनंद कहां आता मुझे!
शमा नें अपनी चुचियों केँ निप्पल कों कसकरमसल दिया औऱ मादक सिसकी लेती हुई बोलि:"
" औऱ अगरमिल जाएं तौ कोई मेरे जैसी?
बूढ़े केँ चेहरे पऱ खुशी एक् लम्हा केँ लिएआई औऱ चली गई औऱ बोला:" मेरीऐसी भाग्य कहां जौ अबइस उम्र मे ऐसा आनंद नसीब होँ !
शमा थोडा सां उसके लगभगआई औऱ पानी मे हि अपनी एक् टांग कों उपरउठा उठाकर अपनी बुर कों उसे दिखाते हुएसाफ करनेलगी तौ बूढ़ा कां मुंह वासना सें लाल होँ गय़ा औऱ शमा कि बुर कों देखने लगा तोँ शमासमझ गई कि उसकातीर सही निशाने पर्र लगा हें बसइसे ठीक सें इस्तेमाल करने कि जरूरत हैं!
नहाने केँ बादशमा बाहर् आँ गई औऱ बूढ़े केँ अंदर कमरे कि तरफचल पड़ी! अभि लगभगछह हि बजे थें औऱ कोईदूर दूर तक नजर नहि आँ रहा थां तौ शमा नें बूढ़े कां हाथ पकड़ लिया तोँ बूढ़ा बोला:"
" किसी नें देख लिया तोँ मुझेमौत मिलेगी! ऐसामत करो!
शमा नें उसके लन्ड केँ उभार कों सहला दिया औऱ बोलीं:"
" इतना डरोगे तौ मस्ती केसे करोगे मेरेसंग !!!
शमा नें अपनी मंशासाफ जाहिर कर दि औऱ बूढ़े केँ संगसंग कमरे मे आँ गई औऱ बूढ़ा थोड़ी देर केँ लिए बाहर् गय़ा औऱ लगभग पांच मिनटबाद वापिस आया औऱ शमा कों गोद मे उठा लिया तौ शमा इठलाते हुए बोलीं:"
" कहां गए थें ?
बूढ़ा नें उसकी चुचियों कों जोर सें मसल दिया औऱ सच मे पहलीबार उसने इतनी सख्त औऱ तनी हुईँ चुचियों कों मसला थां तौ उसे बहोत मज़ाआया औऱ फिन सें उसकी चूचियां दबाकर बोला:"
" देखने गय़ा थां कि पिंडाला कहां हैं औऱ क्याँ कररही हैं!
शमा चूचियां मसले जाने सें दर्द सें प्यास उठीमगर उसके लन्ड कों सहलाती हुइ बोलीं:"
" फिन क्याँ देखा?
बूढ़ा नें उसकी चुचियों कों चूसना शुरुआत कर दिया औऱ उसकी बुर मसलते हुए बोला:"
" महल मे नहीं हैं कभी बाहर् गय़ा हुआ हैं वोँ! अभि नहींआने वाला!
शमा नें उसकी धोती कों खोलकर उसके लन्ड कों नंगाकर दिया तौ उसे हैरानी हुई क्यूंकि बूढ़े कां लन्ड अभि भि बहुत सख्त थां औऱ सलमाउसे रगड़ती हुइ बोलीं:"
" उफ़्फ़ आप् तौ अभि पूरे जवान हौ ! लगता हें मेरी फाड़ हि डालोगे! अच्छा एक् बात बताओअगर पिंडाला आँ गय़ा तोँ क्याँ होगा ?
बूढ़ा अबजोश मे आँ गय़ा औऱ उसने एक् उंगली कों उसकी बुर मे घुसा दिया औऱ बोला:"
" आह्ह्ह्ह कितनी सख्त होँ तुम्! पिंडाला अपनी गांड़ मराएअब तोँ मे तुझेही छोड़ने वाला नहींहु!
यही तोँ शमा चाहती थि कि बूढ़ा उसके इशारों पर्र नाचे औऱ वही होँ रहा थां तौ शमा उसकी टांगो केँ बीच मे बैठ गई औऱ तोँ बूढ़े कों कुछसमझ नहींआया औऱ शमा कि तरफ देखा तौ शमा नें उसके लन्ड पऱ अपनीजीभ फिराई तोँ बूढ़ा मस्ती सें कांपउठा
। शमा नें अपने मुंह कों पूरा खोलते हुए गोलाकार किया औऱ लन्ड केँ मोटे सुपाड़े कों अपने मुंह मे भर लिया तोँ बूढ़ा कि आंखेमजा सें बंद होँ गई! बूढ़े कों पता हि नहीं थां कि लन्ड कों ऐसे भि चूसा जाता हें तोँ बूढ़ा आज सातवे आसमान पर्र थां औऱ शमा नें उसके लन्ड कों अपने मुंह सें बाहर् निकाल दिया तौ बूढ़े नें उसकीतरफ देखा तोँ शमा खड़ी हौ गई औऱ बूढ़ा इसे नीचे लन्ड पऱ झुकाने लगा तोँ शमा अपनीचल चलतेहुए बोलीं:"
" सभीकुछ करूंगी मगर मेरा एक् काम कारण होगा!
बूढ़ा नें उसके मुंह कों अपने लन्ड पर्र टिका दिया औऱ बोला:"
" सभीकर दूंगा! बसफिन सें मुंह मे लें लो अपने!
शमासमझ गई कि बूढ़ा अब पागल हौ गय़ा हैं तोँ शमा नें उसके लन्ड कों मुंह मे भर लिया औऱ चूसने लगीं तौ बूढ़ा मजे सें पागल होँ गय़ा औऱ शमा केँ सिर कों लन्ड पऱ धकेलने लगा!शमा कों इतनाबाद लन्ड चूसने मे दिक्कत हौ रही थि मगर वोँ जानती थि कि उसेयह सभी करना हि पड़ेगा ! बूढ़ा मस्ती सें पागल होँ गय़ा तौ शमा नें अब लन्ड कों मुंह सें निकाल दिया औऱ घोड़ी बनकरबेड सें सट गई तोँ बूढ़ा उसकी उभरी हुईँ बुर देखकर पागल सां हौ गय़ा औऱ समझ नहींआया कि क्याँ करना हैं क्योंकि उसे तौ बस इतनापता थां कि स्त्री केँ उपर चढकर हि सेक्स किया जाता हें!
शमा नें उसे अपनीतरफ आने कां इशारा किया औऱ उसके लन्ड कों अपनी बुर केँ मुंह पऱ लगा दिया तोँ बूढ़ा समझ गय़ा कि उसे क्याँ करना हैं औऱ उसने धक्का लगाया तौ लन्ड आधा अंदरचला गय़ा औऱ शमा दर्द सें कराहउठी औऱ बूढ़े नें इतनीकसी हुईँ बुर मे लन्ड जाने सें मदहोश होकर पूरा तगड़ा धक्का लगाया औऱ लन्ड पूराघुस गय़ा औऱ शमाआगे केँ गिर पड़ीमगर फिन सें झुक गई औऱ बूढ़े नें धक्के मारने शुरुआत करदिए औऱ उसे इतना आनंदकभी नहि आया थां तौ शमा सें बोला:"
" आह्ह्ह्ह मेरी रानी, तूने तोँ मुझे जन्नत दिखा दि! अब तौ रोजमजे करूंगा ऐसे हि छुपछुप कर !
शमा नें अपनी बुर कों कसतेहुए लन्ड कों पूरीतरह सें जकड़ लिया औऱ बोलि:"
" यह तौ शुरुवात हैं इससे कहीं ज़्यादा आनंद आएगामगर पहले मेरा एक् काम करना होगा!
बूढ़ा लन्ड जकड़े जाने सें मस्ती सें सिसकउठा औऱ बोला:"
" करूंगा सभी करूंगा तुम् कहोबस मुझे क्याँ करना हें अह्ह्ह्हह ढीलीकरो नां अपनी!
शमा नें अपनी बुर कों थोडा ढीला छोड़ दिया तौ बूढ़ा धक्के लगाने लगा औऱ दर्द सें कराहकर शमा बोलीं:"
" सुल्तानपुर जानां होगा औऱ मेरे आशिक शहजादे सलीम तक उनकीयह अंगूठी पहुँचा देना!
बूढ़ा कि आंखे चौड़ी होँ गई कि यह क्याँ बकवास कररही हैं मगरमजे केँ चलते बोला:"
" चला जाऊंगा मगर मात्र एक् हि बार जाऊंगा औऱ यहां किसी कों पता नहीं चलना चाहिए!
बूढ़े कि बात सें खुश होकरशमा नें उसकी उंगली कों अपनी गांड़ केँ छेद पर्र रख दिया औऱ घुसाने कां इशारा किया तौ बूढ़े नें हैरान होतेहुए उंगली कों अंदर घुसा दिया तोँ शमा दर्द सें बेचैनी उठी औऱ बोलीं:"
" इसमें तेरा लन्ड घुसा लूंगी मे तेरे वापिस आने केँ बाद!
बूढ़ा गांड़ कि कसावट महसूस करकेजोश मे आँ गय़ा औऱ उसकी बुर मे तेजी सें धक्के मारने लगा औऱ थोड़ी देर केँ बाद दोनोझड़ गए औऱ बूढ़ा झड़ने केँ बाद निकल गय़ा!
धीरे-धीरे धीरे-धीरे साम होनेलगी औऱ पिंडाला आया औऱ भूखे भेड़िए कि तरहशमा पऱ टूटपडा! साम दर्द सें तड़परही थि मगर वोँ उसे बुरीतरह झिंझोड़ रहा थां औऱ पटकपटक करचोद रहा थां जिससे शमा कि दर्दभरी चींखें गूंजरही थि औऱ पिंडाला बोला:"
" साली अभि तक दर्द होता हें क्याँ! इतनामत चींख! परसो तुझेही पिंडारी पर्व पर्र सामूहिक चोदना हें! मे तेरी चुदाई करूंगा औऱ सारे पिंडारी देखेंगे!
शमा दर्द सें कराहती रहीमगर वोँ राक्षस उसे चोदता रहा औऱ अंत मे उसे चोदकर चला गय़ा तौ दर्द सें तड़पती हुइ शमा नें अपनी अंगूठी केँ संग छोटा सां पेपर भि चिपका कर बूढ़े कों दिया औऱ बूढ़ा अंधेरे कां फायदा उठाकर सुल्तानपुर कि तरफबढ़ गय़ा!
रात केँ लगभगदस 11 बजे वोँ सुल्तानपुर कि सीमा केँ आसपास पहुंच गय़ा औऱ दूसरी तरफ विक्रम भि वही सीमा कि याद मे नदी किनारे आयाहुआ थां औऱ पिंडारी कि बदबू कों सूंघते हि वोँ सावधान होँ गय़ा औऱ बूढ़ा जैसे हि पास सें गुजरा तोँ उसपास हमलाकर दिया औऱ देखते हि देखते बूढ़े औऱ विक्रम केँ बीच युद्ध छिड़ गय़ा औऱ बूढ़ा भि उसका तगड़ा मुकाबला कररहा थां मगर युवराज नें उसे अपने काबू मे कर लिया औऱ उसकी गर्दन कों उल्टी तरफ मोड़ते हुए बोला:"
" बोल इतनीरात कों यहांकर रहा थां बूढ़े ?
बूढ़ा दर्द सें कराहकर बोला:"
" अहह मुझेमत मारो मे तोँ बसयह अंगूठी देनेआया हु!
इतना कहकर उसने अंगूठी कों विक्रम कि तरफ बढ़ा दिया तोँ विक्रम नें उसकेसंग लगे पेपर कों भि खोल लिया औऱ पढ़ने लगा तौ उसकी आंखेफटी कि फटीरह गई क्योंकि उसे यकीन नहीं हौ रहा थां कि क्याँ वोँ सपनादेख रहा हैं याँ सच हें!
इतना जल्दअजय कां मिलन नहि होना चाहिए अपनी मां केँ संग अभि रोमांस हि रोमांस होँ तब आनंद औऱ आएगा मेरे खयाल सें.
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा – New Episode
ऐसा प्रतीत होता हैं कि शमा नें सलमा केँ पिता कों ढूंढ लिया हैं। शायद जब्बार औऱ पिंडाला नें किसीतरह कां षडयंत्र रचकर रजिया केँ पति कों बंदीबना लिया हौ औऱ ये अफवाह फैला दिया होँ कि राजा साहब कि मृत्यु जंग मे हौ गई हैं।
मगरशमा कि सहायता करना राजकुमार सलीम केँ बूते कां हैं हि नहीं। ये अच्छा हुआ कि शमा कां भेजाहुआ व्यक्ति विक्रम केँ हत्थे चढ़ गय़ा। देखते हैं विक्रम, शमा औऱ बंदी कैदी - जोँ कि सलमा कां पिता हौ सकता हैं - कों केसे उनके चंगुल सें सुरक्षित वापस लेँ आता हैं !
इधर सेनापति अजय कों भि सीमा केँ रूप मे एक् महबूबा मिल गई। मगरये समझ नहींआया कि जिसरात अजय अपने माँ मेनका केँ संग अंतरंग लम्हों मे थां, उसरात हि विक्रम भि सलमा केँ महल मे उसकेहरम मे मौजूद थां। जहां तक मुझेयाद हैं, विक्रम उसरात सलमा सें मिल नहीं पाया थां।
अजय केँ लिए एक् औऱ भि राहतभरा संकेत मेनका कि ओर सें प्राप्त हुआ। उस अंतरंग रात कों लेकर मेनका कां रवैया सकारात्मक हि दिखा।
बहोत हि बेहतरीन एपसोड यूनिक स्टार भइया।
आउटस्टैंडिंग एंड अमेजिंग एपसोड।
शहजादी सलमा - शहजादी सलमा - Continue reading next part
Janta ho Ajju bhay halanki un logo ko aakhirkar wapis apne state hi too jana h or jb woh loug waha pahunchenge tab sayad ayese hi sthithi say unhe samna krna hoga. Vikram or unki mummy thodi na unhe vahi pe aajiwan rahne k liye kahegi !
Relavant source : click here


