एक हज़ारों में मेरी बहना है - Hindi Sex Story - Complete Kahani Part 1
नमस्ते दोस्तो मे एक् नई किस्सा शुरुआत करनेजा रहा हूं.…जोकि मेरे औऱ मेरीबड़ी बेहन केँ बारे मे हैं.ये किस्सा मात्र औऱ मात्र भइया बेहन केँ बीच सेक्सुअल रिलेशन पऱ आधारित होगी। अन्य किरदार इसमे जुड़ने कि कुछ भि संभावना नहीं हैं।
(दोस्तों येकथा लेखक 'सागर' कि रचना सें प्रेरित हैं जौ उन्होंने मराठी मे लिखी हैं)
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★ INDEX ★
vah bhay GAJAB kaa LIKHTE hu EK EK UPDATE mai AB AAGE KYA HOGA yeh jan NE kee BETABI LAGI REHTI SHANDAAR thaa bhay FABULOUS INTEZAAR RAHE GA AGLE UPDATE kaa
एक हज़ारों में मेरी बहना है - Hindi Sex Story – New Episode
UPDATE-1
नौवीं कक्षा मे आते हि मेरेमन मे लड़कियों केँ प्रति यौन आकर्षण होनेलगा। मे हर वक्त लड़कियों औऱ सेक्स केँ बारे मे सोचने लगा। मैंने वोँ सब चीजें करना शुरुआत कर दिया जौ एक् नौंवी-दसवीं कां लड़कायौन जिज्ञासा पूरी करने केँ लिए करता हैं।
लड़कियों औऱ महिलाओं कों छुप-छुप कर देख्ना, उनके गुप्त अंगों कों देखने कि कोशिश करना, उनके कपड़ों सें उनके अंडरगारमेंट्स केँ रंग औऱ पैटर्न कां अंदाजा लगाना, छुपकर एडल्ट मूवीज़ देख्ना, ब्लू-फिल्में देख्ना, सेक्स कहानियाँ पढ़ना आदि।
आरामसे मेरे संपर्क औऱ दृष्टि मे रहने वाली लड़कियों औऱ औरतों केँ प्रति मेरेमन मे वासना विकसित होनेलगी। मे विद्यालय मे अपने सें बड़ी उम्र कि लड़कियों, हसीन टीचरों, मार्ग सें गुजरती लड़किया, हमारे पड़ोस मे रहने वाली औऱ हमारे रिश्ते मे कुछ औरतों कों वासना भरी नजरों सें देखता थां।
एक् बार मैंने अपनी बड़ी बेहन कों ब्रा औऱ पैंटी मे कपड़े बदलते हुए देखा औऱ मैंने जौ देखा उसकामुझ पर्र ग़हरा प्रभाव पड़ा औऱ मे बहोत उत्तेजित होँ गय़ा। पहले तोँ मुझे लज्जा आई कि मे अपनी हि बेहन कों वासना भरी नजरों सें देखरहा हूं.
मगरउसे इसतरह अर्धनग्न अवस्था मे देखकर मेरे जिस्म मे जिसतरह कि काम तरंगें दौड़रही थीं, मैंने पहलेकभी महसूस नहि कि थि। पहले तोँ मेरेमन मे ग्लानि केँ भावआते थें मगर गुज़रते टाइम केँ संग मैंने अपनी बेहन कों अलग नज़र सें देख्ना शुरुआत कर दिया।
एक् बार मुझे सेक्स कहानियों कि एक् अश्लील हिंदी पुस्तक पढ़ने कों मिली.उस पुस्तक मे कुछ कहानियाँ करीबी रिश्तेदारों केँ बीच सेक्स केँ बारे मे थीं। संग हि इसमें भइया-बेहन कि सेक्स कहानियाँ भि थीं जिन्हें पढ़ते हुए मे अपनी बेहन पायल केँ बारे मे सोचरहा थां औऱ बहोत उत्तेजित औऱ उत्साहित थां।
इसतरह कि कहानियाँ पढ़ने केँ बाद, मुझे थोड़ी राहत महसूस होती थि कि इसतरह कां सेक्स दुनिया मे मौजूद हैं औऱ मे अकेला नहि हूं जोँ अपनी हि बेहन केँ प्रति वासना रखता हूं।
मेरी बेहन पायल दिदी मुझसे 8 साल बड़ी थि। इकलौता छोटा भइया होने केँ कारण पायल दिदी मुझे बहोत प्रेम करती थि। अक्सर वो मुझे प्रेम सें गले लगाती, मेरेगाल चूमती। दिदी मेरा मां कि तरह ख्याल रखती थि, जैसे मे उसका अपना बच्चा थां।
हम् संगसंग खेलते थें, हंसते थें, मौज-मस्ती करते थें। हम् दोंनो एक् दूसरे केँ बहोत लगभग थें। हालाँकि हम् भइया-बेहन हें, फिन भि हम् ऐसा बर्ताव करते थें कि मानो हम् साथीहों।
पायल दिदी एक् सामान्य मध्यमवर्गीय लड़की कि तरह थि मगर उनका चेहरा आकर्षक थां। दिदी कां फिगरउस वक्त सेक्सबॉम्ब तोँ नहि थां मगर सुडौल औऱ सही स्थान भराहुआ थां। उसकी चुचिया औऱ नितंब सही स्थान पऱ उभरेहुए थें। उसका फिगरदेख मे पागल होँ जाता थां औऱ मुझेहर दिन हस्तमैथुन करना पड़ता थां।
घऱ मे रहतेहुए मुझे हमेशा बिना दिदी कि जानकारी केँ उसे वासना भरी नजरों सें देखने कां मौका मिलता थां। दिदी केँ संग मेरे चंचल औऱ प्यारभरे रिश्ते केँ कारण मुझे हमेशा उसके रसीले रसीले चुचियों कों छूने कां अवसर मिलता थां।
हम् जहां भि खड़े होते वो मेरेपास आकर खड़ी होती। उसके नितंब औऱ चुचियों केँ छूने सें मुझे उत्तेजना होती। पायल दिदी केँ प्रति मेरायौन आकर्षण वक़्त केँ संग बढ़ता हि गय़ा।
दिदी केँ लिए मे उसका शरारती छोटा भइया थां। वो शुरुआत सें हि जब मेरे सामने कपड़े बदलती थि। दिदी मेरेसंग एक् बच्चे कि तरह बर्ताव करती थि। मैंने भि उस पऱ कभी अधिक ध्यान नहि दिया।
मगर जैसे-जैसे मुझमें उसके प्रति वासना जागृत हुइ, वो मेरी बड़ी बेहन केँ बजाय मेरेलिए कामदेवी बन गई। अबजब वो मेरे सामने अपने कपड़े बदलती तोँ मे छुपकर उस पर्र वासना भरीनजर डालता औऱ उसके अर्धनग्न अंगों कि एक् झलक पाने कि कोशिश करता।
जब वो मेरे सामने कपड़े बदलरही होती थि तौ मे उससेकुछ बात करता ताकि मे उसकीतरफ देख सकूं औऱ उसके ब्रा मे ढके चुचियों कां अवलोकन कर सकूं। कभी-कभी वो मुझसे अपनी ड्रेस केँ पीछे कि ज़िप लगाने केँ लिए कहती थि औऱ कभी-कभी वो मुझसे अपने ब्लाउज केँ बटन लगवाती थि, जिसके माध्यम सें मे उसकीआधी नंगीपीठ पर्र उसकी ब्रा कि पट्टियों कों देख सकता थां।
कभीकभी सलवार याँ स्कर्ट पहनते टाइम मुझे दिदी कि पैंटी दिख जाती थि। कभी-कभी उसके पैंटी सें ढकेहुए नितंब दिख जाते थें। उसनेकभी इसबात पर्र ध्यान नहि दिया कि उसका छोटा भइयाउसे वासना भरी नजरों सें देखरहा थां।
जब भि मे घऱ पऱ दिदी कि ब्रा औऱ पैंटी देखता तोँ बहोत उत्तेजित होँ जाता थां। ये सोचकर कि यहवे कपड़े थें जिनके पीछे मेरी दिदी केँ मोटे मम्मों औऱ नितंब छिपेहुए थें, मे पागल होँ जाता। कभी-कभी मुझे लगता थां कि अगर मे ब्रा याँ पैंटी होता तोँ चौबीसों घंटे दिदी कि चुचियों याँ बुर सें चिपका रहता।
जब भि मुझे मौका मिलता, मे पायल दिदी कि ब्रा औऱ पैंटी उठा लेता औऱ उसमें मुठमार लेता। मे उसकी पैंटी कों अपने लन्ड पर्र रगड़ता थां औऱ ब्रा कों मुँह पऱ रखकर उसकेकप कों चूसता थां.
जब मे दिदी कि इस्तेमाल कि हुई पैंटी कों मुँह मे लेकर चूसता तौ कामेच्छा सें पागल हौ जाता। उसकी खुशबू मेरेलिए किसी भि महंगे इत्र सें बढ़कर थि। पैंटी कां उसकी बुर कों ढकने वाला हिस्सा जौ उसकी बुर केँ रस सें भीगाहुआ रहता थां उसका स्वाद मेरेलिए अमृत सें कम न् थां। उसकी पैंटी कों अपने सख्त लन्ड पर्र रगड़ते हुए, मे कल्पना करता कि मे दिदी कि बुर सहलारहा हूं औऱ मे उसकी पैंटी पर्र हि वीर्यपात कर देता, जिससे उसकी पैंटी कईबार गीली हौ जाती।
पायल दिदी केँ गुप्त अंगो कों छूने केँ मजा सें मे पागल हौ जाता थां औऱ उन्हें छूने कां कोई भि मौका नहि छोड़ता थां।
जब हमारा घऱ छोटा थां तोँ हम् सभी एक् संगहॉल मे सोते थें औऱ मे दिदी केँ बगल मे सोता थां।
आधीरात केँ बाद, जब सभीलोग गहरी नींद मे सोरहे होते, मे पायल दिदी केँ लगभगचला जाता थां। बाद मे, हर संभव सावधानी बरतते हुए, मे उसकेगले लग जाता औऱ उसकेबदन कों सहलाता।
मे उसकी मोटी मोटी चुचियोंको धीरे-धीरे सें छूता थां। वोँ अहसास मेरेलिए आग मे घी डालने कां काम करता। मे उनके नितंब पऱ जीभर केँ हाथ फेरता थां। मे कभी उसकी जाँघों कों छूता थां तौ कभी उसके कपड़ों केँ ऊपर सें उसकी बुर कों छूता थां।
सौभाग्य सें, मेरे माँ-बाप कों मेरी अपनीसगी बड़ी बेहन केँ प्रति कामेच्छा केँ बारे मे कभीकोई अंदाज़ा नहि हुआ। उनके बारे मे क्याँ, पायल दिदी कों भि कभीपता नहि चला कि उनके प्रति मेरी सच्ची भावनाएँ क्याँ हें। मे इसबात कां बहोत ध्यान रखता थां कि किसी कों भि मेरी दिदी केँ प्रति आकर्षण कां पता न् चलें।
हालाँकि मेरेमन मे पायल दिदी केँ लिएयौन भावनाएँ थीं औऱ मे दिदी केँ संग संभोग करने केँ सपना देखता थां, मगर मे जानता थां कि वास्तविकता मे ये संभव नहि थां। अपनी बेहन केँ संग फ़्लर्ट करना याँ उसकेसंग सेक्स करना मात्र एक् सपना हैं जिसका सच होना नामुमकिन हैं।
एक हज़ारों में मेरी बहना है - Hindi Sex Story – New Episode
UPDATE-2
जब पायल दिदी 24 साल कि हुइ, तौ मेरे माँ-बाप नें उसकी विवाह केँ लिए रिश्ते देख्ना शुरुआत कर दिया। बापू कि जान-पहचान कां एक् नाता दिदी केँ लिएआया। वेलोग चंडीगढ़ केँ रहने वाले थें। माँ-बाप जीवित नहि थें, एक् बड़ी बेहन थि जिसकी विवाह होँ गई थि औऱ वो जालन्धर मे रहती थि।
लड़के कां अपना खुदका घऱ थां। अपना बिज़नेस थां जिसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत कि थि। इसीलिए मेरे माता पिता कों ये नाता अच्छा लगा। पायल दिदी नें बिना किसी आपत्ति केँ वो नाता स्वीकार कर लिया। मगर मे इस रिश्ते सें सहमत नहि थां। दिदी केँ प्रति मेरेयौन आकर्षण कों अलग भि करदे, तब भि मुझे यकीन नहि हुआ कि दिदी नें इस रिश्ते कों सहमति दे दि हैं। इसकेदो कारण थें।
एक् वजहयह थि कि लड़के कि उम्र। लड़का उनसे काफ़ी बड़ा थां, उसकी उम्रतब 31 साल थि। मुझे संदेह थां कि वो मेरी बेहन कों कितना खुशरख पाएगा।
एक् चिंता ये भि थि कि उनकी उम्र मे भारी अंतर केँ कारण क्याँ उनके विचार मेल खाएंगे। सिर्फ मेरे मातापिता कि पसन्द औऱ लड़के केँ पास अपनाघऱ औऱ व्यवसाय थां इसीलिए पायल दिदी नें उसे पसन्द कियाऐसा मुझे लगता थां।
दूसरा औऱ महत्त्वपूर्ण कारणये थां कि दिदी मेरी दृष्टि सें दूर रहेगी। अगरउसे कोई मेरठ कां लड़का मनपसंद होता तोँ वो मेरठ मे हि रहती औऱ मे उससेहर वक्तमिल औऱ देख पाता। मगर मे कुछ नहि कर सकता थां। मेरेहाथ मे कुछ भि नहि थां।
जल्द हि दिदी कि विवाह हौ गई औऱ वो अपने ससुराल वालों केँ संग चंडीगढ़ चली गई। दरअसल मे दिदी कि विवाह सें खुश नहि थां मगर मुझेपता थां कि एक् नं एक् दिनऐसा होना हि हैं। विवाह केँ बाद वो अपने ससुराल जाने वाली थि। मुझे उसके बगैर रहना हि होगा।
दिदी कि बिदाई केँ वक़्त हम् दोनों एक् दूसरे कों कसकेगले लगाकर खूब रोये। उस वक़्त मुझमें वासना कां अवशेष केवल नहीं थां। थां तौ बस पायल दिदी सें हमेशा केँ लिए बिछड़ने कां दुःख। दिदी मेरा पहला प्रेम थि उसकी जुदाई सहन करना मेरेलिए बहोत मुश्किल भरारहा।
बाद मे मैंने पायल दिदी केँ सेक्सी जिस्म कों याद करके औऱ हमारी अलमारी सें उसकीकुछ पुरानी ब्रा औऱ पैंटी कां उपयोग करके हस्तमैथुन करके अपनीयौन भावनाओं कों संतुष्ट करना शुरुआत कर दिया। वो त्योहारों याँ खास दिनों मे हमारे घऱआती थि औऱ चार-आठ दिनों तक रहती थि.
जब भि वो घऱआती तोँ मे जितना होँ सके उसके आसपास घूमता रहता। मे उससे लगातार बातें करता थां, उसे हँसाता थां, मज़ाक उड़ाता थां। दिदी सें मे बचपन कि बाते करता थां, इसतरह मे उसके लगभग रहता औऱ उसे प्यारभरी नजरों सें देखता थां औऱ मुस्कुराते हुए उसकेबदन केँ स्पर्श कां मजा लेता थां
विवाह केँ बाद पायल दिदी औऱ भि सुंदर, सुडौल औऱ सेक्सी दिखने लगीं। मे अभि भि उसकी पुरानी ब्रा पैंटी सें मुठमार रहा थां इसलिये अबजब मैंने उसकी ब्रा औऱ पैंटी चेक कि तौ देखा कि नंबरबदल गय़ा हैं। मतलबसाफ थां कि विवाह केँ बाद उसका जिस्म भर गय़ा थां।
अगर दिदी बहुत दिनों तक नहि आतीं तौ मे उनसे मिलने चला जाता थां। मे जब भि जाता थां तौ आमतौर पऱ उनकेघऱ पर्र दो-चार दिन याँ एक् हफ्ते केँ लिए रुकता थां। उसका पति पूरेदिन बिज़ी रहता थां। वो दोपहर मे खानां खाने केँ लिए एक् घंटे केँ लिएघऱ आता थां औऱ रात कों दसबजे घऱआता थां.
दिदी दिनभर घऱ पऱ अकेली रहती थि। मे जब भि उसकेपास जाता थां तोँ हमेशा उसके लगभग हि रहता। अगर मे उससेबात भि करता थां याँ किसीकाम मे उसकी सहायता करता थां तोँ मेरा मुख्य उद्देश्य उसकी साड़ी औऱ ब्लाउज सें उसके सुडौल जिस्म केँ उतार-चढ़ाव कां अंदाज़ा लगाना होता थां।
संग हि मे इधर-उधर आते-जाते उसकेबदन केँ स्पर्श कां भि खुशी लेता रहता थां। वो मेरी कामुक निगाहों औऱ कामुक स्पर्श कों कभी नहि जानपाई! उसनेकभी सोचा भि नहि थां कि उसका छोटा भइया उससेजान सें ज़्यादा मुहब्बत करता हैं! उसे अपनेबैड पऱ लिटाने केँ ख्वाब देखता हें।
दिदी विवाह केँ एक् सालबाद गर्भवती होँ गई। प्रसव केँ सातवें महीने मे वो हमारे घऱआई। नौवें महीने मे उसने एक् बेटे कों जन्म दिया। फिन दो महीने बाद वो दोबारा अपने ससुराल चली गई। फिनऐसे हि तीनचार सालबीत गये औऱ वोँ दोबारा गर्भवती नहि हुई। मुझे लगता हैं कि वो औऱ जीजू एक् बच्चे सें खुश थें औऱ उन्हें दूसरे बच्चे कि चाहत नहि थि।
इसी दौरान मैंने अपनी विद्यालय औऱ कॉलेज कि शिक्षा पूरी कि औऱ एक् निजी कंपनी मे काम करना शुरुआत कर दिया। मेरे कॉलेज केँ दिनों मे मेरीकुछ गर्लफ्रेंड थीं औऱ उनमें सें तीनों केँ संग अलग-अलग वक़्त पऱ रोमांटिक रिश्ते थें। मुझेउन मे सें एक् सें प्रेम होँ गय़ा औऱ मैंने उसकेसंग सेक्स कां खुशी भि लिया।
मगर फिन भि मे अपनी बेहन कि याद मे मुठमार रहा थां। मेरी गर्लफ्रैंड होने केँ बावजूद भि मेरेमन मे दिदी केँ प्रति यौन ख़्वाहिश औऱ वासना मे कोईकमी नहींआई। हमेशा मेरेमन केँ एक् कोने मे एक् उम्मीद छिपीरही कि एक् दिनकोई जादू होगा औऱ मुझे अपनी बेहन सें सेक्स करने कां मौका मिलेगा।
वक्त बीतता जारहा थां औऱ मे 22 वर्ष पूरेकर चुका थां। पायल दिदी भि कि उम्रबढ़ रही थि मगर इससे उनके दुबले-पतले बदन मे कोईखास फर्क नहि पड़ा। मुझेलगा कि वो वक़्त केँ संग औऱ ज़्यादा कामुक होतीजा रही हैं। कभी-कभी मुझे अपने जीजू सें ईर्ष्या होती थि कि वो कितने भाग्यशाली हैं कि उन्हें पायल दिदी जैसी सुंदर औऱ सेक्सी पत्नि मिली हैं। मगर सच्चाई कुछ औऱ हि थि।
एक हज़ारों में मेरी बहना है - Hindi Sex Story - Next part miss mat karna
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