एक हज़ारों में मेरी बहना है - Hindi Sex Story – New Episode
UPDATE-3
जैसे-जैसे मे बड़ा औऱ समझदार होता गय़ा, दिदी मेरेसंग ज्यादा खुलकर बाते औऱ बर्ताव करनेलगी। हम् किसी भि विषय पऱ वैसे हि बातें औऱ चर्चा करते थें जैसे मित्र करते हें। आमतौर पर्र भइया-बेहन अपनी निजी जीवन केँ बारे मे बात नहि करतेमगर धीरे धीरे हम् इस बारे मे बात करनेलगे।
मैंने दिदी कों उसके प्रति अपनी सच्ची भावनाओं याँ अपने प्यार संबंध औऱ यौन जिंदगी केँ बारे मे कभी नहि बताया। मे दिखावा करता थां कि मुझे सेक्स केँ बारे मे सिर्फ सुनी-सुनाई औऱ किताबी जानकारी हैं।
मगर दिदी कि बातों सें मुझेपता चल गय़ा कि उनका वैवाहिक जिंदगी बहोत सुखी नहि थां। जीजू कि बढ़ती उम्र केँ संग उनका कामजीवन भि बहोत खुशहाल नहि थां। विवाह केँ बाद शुरुआती दौर मे जीजू नें उन्हें बहोत प्रेम दिया। उसी दौरान वो गर्भवती होँ गई औऱ एक् बेटे कों जन्म दिया थां।
मगरबाद मे दिदी बच्चे केँ संग व्यस्त हौ गईं औऱ जीजू अपने बिजनेस मे लगगए। इससे उनकेबीच एक् खाई पैदा होँ गई जिसे मिटाने कां कोई मार्ग दिदी कों दिख नहि रहा थां। हालाँकि दिदी अपनीतरफ सें पूरा प्रयास करती थि कि उनकी ज़िंदगी मे फिरसे वो विवाह केँ बाद वालेसमय लौटआए। दिदी रोज जीजू केँ आने सें पहले सँजती-सँवरती थि, उन्हें रिझाने कि कोशिश करती थि। मगर जीजू चालीस केँ होँ चले थें, उनकी सेक्स मे बिल्कुल भि रुचि नहि बची थि।
एक्-दूसरे केँ प्रति समझौता औऱ कर्तव्य निभाना हि उनका जिंदगी बनताजा रहा थां। धीरे धीरे उन्हें उसतरह केँ जिंदगी कि आदत होँ गई। ऊपरऊपर सें तोँ, दिदी कां एक् आदर्श औऱ खुशहाल परिवार थां। मगर अंदर हि अंदर मुझे एहसास हुआ कि दिदी अपने वैवाहिक जिंदगी सें बहोत खुश नहि थि।
पायल दिदी केँ प्रति मेरी भावनाएँ जोँ भि हों, आख़िरकार मे उसका भइया हि थां। मुझे दिदी कि मानसिक अवस्था पऱ बुरा लगता थां औऱ उस पऱ दयाआती थि। मे हमेशा दिदी कों सांत्वना देता थां औऱ उसे मोटिवेट करता थां।
मे दिदी कों तरह-तरह केँ चुटकुले सुनाता रहता। मे हमेशा उसे मुस्कुराने औऱ उसकेमूड कों खुश रखने कि कोशिश करता। जब भि वो अपने मायके आती याँ मे उसकेघऱ जाता तौ मे उसे बाहर् घुमाने लें जाता थां।
हम् कभी शॉपिंग करने, कभी मूवी देखने तोँ कभी घूमने जाते थें। अक्सर मे उसे किसी अच्छे रेस्तरां मे लेँ जाता। मे वोँ सबकाम कररहा थां जौ पायल दिदी कों मनपसंद थें औऱ उन्हें ख़ुशी देते थें। दुःख कि बातयह थि कि यहसबकाम जीजू कों करने चाहिए थें।
एक् दिनजब मे दफ़्तर सें घऱआया तोँ मम्मी नें बताया कि पायल दिदी कां मोबाइल आया थां, वो दिवाली पऱ हमारे घऱ आनां चाहती हैं मगर हमेशा कि तरह, जीजू केँ पास दिदी कों बिज़नेस सें फुर्सत लेकर लाने कां टाइम नहि थां।
मम्मी पूछरही थि कि क्याँ मेरेपास जाकर पायल दिदी कों लाने कां वक़्त हैं। मे दिदी कों लाने केँ लिए उनकेघऱ जाने केँ विचार सें हि उत्साहित हुआ।
मुझेयाद आया कि जब मे चार महीने पहले उसकेघऱ गय़ा थां तोँ मैंने क्याँ किया थां -
जीजू पूरेदिन अपनी बिजनेस मे व्यस्त होते औऱ मेरा भानजा पूरी दोपहर किंडरगार्टन मे जाता थां। इसलिये बहुत वक़्त तक दिदी औऱ मे घऱ मे अकेले हि रहते थें, जिससे मुझे दिदी कों बिना किसी रोक-टोक केँ देखने कां मौकामिल जाता।
काम करते वक़्त वो अपनी साड़ी औऱ ब्लाउज कों लेकर थोड़ी लापरवाह होँ जाती थि जिससे मुझे उसके मोटी मोटी चुचियों कि गहराई कां अच्छा अंदाज़ा हौ जाता थां। जब वो अपनी साड़ी उठाकर झाड़ू-पोंछा करती याँ बर्तन धोते वक्तबैठ जाती तोँ मुझे उसकापेट औऱ जांघें देखने कों मिलती।
जबलंच समाप्त होँ जाता औऱ जीजूचले जाते तौ मे हॉल मे बैठकर टेलीविज़न देखता। फिन पायल दिदी साराकाम समाप्त करके मेरेपास सोफे पऱ बैठ जाती। हम् टेलीविज़न देखते हुए बातें करते थें। दिदी कों दोपहर कों रोज़ थोड़ीदेर सोने कि आदत थि, इसलिये वोँ थोड़ी देरबाद वहीं सोफ़े पर्र लेट जाती औऱ सो जाती.
जब वो गहरी नींद मे सोती तोँ मे बिनाडरे उसे लगभग सें देखता थां। यदि संभव होँ तौ, मे सावधानी सें उसकी साड़ी कि परत कों उसकी छाती केँ ऊपर सें सरकाता औऱ उसकी सांसों कि लय केँ संग उसकी छाती केँ उभारों कि गति कों देखता।
संग हि मे उसकेपेट, गोल नाभि औऱ पेडू कों भि तीखी नजरों सें देखता थां। कभी-कभी मे उसकी साड़ी उठाने कि कोशिश करता। मगर इसकेलिए मुझे बहोत सावधान रहना पड़ता औऱ मे मात्र उसकी साड़ी कों उसके घुटनों तक हि ऊपरउठा पाता।
पायल दिदी आमतौर पऱ सुभह जल्द नहि नहाती थीं। सुभह केँ सारेकाम निपटाने औऱ जीजू केँ दफ़्तर चले जाने केँ बाद वो आठ सें नौबजे केँ बीच आहिस्ता नहाती थि। मेरा भांजा तब सोता रहता औऱ दसबजे केँ बीचउठ जाता थां। मे भि उसकेसंग सोने कां नाटक करता।
नहाने जाने सें पहले वो घऱ कां द्वार (दरवाज़ा) बंदकर लेती थि। जिस कमरे मे मे सोरहा थां वो रूम बाथरूम सें सटाहुआ थां। मे दिदी हरकतों कां अनुमान लगाता थां औऱ जैसे हि वो बाथरूम कां द्वार (दरवाज़ा) बंद करती थि, मे उठकर बाहर् आँ जाता थां।
मे दबे पाँव दरवाज़े केँ पास जाता औऱ अंदर कि आवाज़ सुनने कि कोशिश करता। दिदी कि चुड़ियों कि खनखन सें मे अंदाजा लगाता कि दिदी क्याँ करती हें।
दिदी पहले तोँ अपनी आवश्यकता केँ अनुसार गरम पानी कों ठंडे पानी मे मिलाकर नहाने कां पानी रेडी करती थि। अपनी साड़ी उतारने केँ बाद वोँ अपने बाकीबचे कपड़े उतारकर नहाने लग जाती।
नहाने केँ बाद वो अपना गीलाबदन तौलिये सें पोछ लेती थि। फिन वोँ पेटिकोट छाती सें बांधकर उसके नीचे दूसरी ब्रा औऱ पैंटी पहनकर बाहर् आती थि। वो अपने बेडरूम मे जाकर ब्लाउज केँ संग साड़ी पहनती थीं।
दरवाज़े केँ बाहर् सें कुछ नहि दिखता थां मगर पानी कि आवाज़ औऱ दिदी कि चूड़ियों कि खनखन हि मुझे उत्तेजित करने औऱ मेरी कामेच्छा जगाने केँ लिए बहुत थि।
दिदी साड़ी पहनकर मुझे उठाने आती। मे आहिस्ता अँगड़ाई लेकर उठने कां नाटक करता औऱ अपनेखड़े लंड कों दिदी कि नजरो सें छुपाकर बाथरूम मे घुस जाता। जब मुझेवहा दिदी कि इस्तेमाल कि हुइ ब्रा औऱ पैंटी लटकाई दिखती तोँ मेरा हथियार झटके मारने लगता।
मे उसकी ब्रा-पैंटी उठाकर उसे सूँघने औऱ चाटने लगता। दिदी केँ अंडरगारमेंट्स अपने लन्ड पर्र रगड़ता औऱ उसी मे अपनामाल छोड़ देता। फिन मे दिदी कि ब्रा पैंटी साफ करके पहले जैसीरख देता ताकि दिदी कों मुझ पऱ शक न् होँ।
मुझे वोँ सारी बातें याद आँ गईं औऱ मे दिदी कों लेकरआने केँ लिए सजधजकर हौ गय़ा। अगर मेरेपास वक्त नहि भि होता तोँ भि मे टाइम निकाल लेता।
पहलेकुछ एपसोड मैंने लिखरखे हें इसीलिए जल्ददे रहा हूं बाकीरोज 2 अपडेट्स देने कां मेरा प्रयास रहेगा.
एक हज़ारों में मेरी बहना है - Hindi Sex Story – New Episode
UPDATE-4
मैंने अपने दफ़्तर मे छुट्टी कि अर्जी डाल दि। औऱ अगलेदिन सुभह चंडीगढ़ जाने वालीबस मे बैठ गय़ा। मे दोपहर तक दिदी केँ घऱ पहुंच गय़ा। मैंने जानबूझकर दिदी कों नहि बताया कि मे आँ रहा हूं, क्योंकि मे उसे सरप्राइज देना चाहता थां।
जब मैंने बेल बजाई तौ दीदीने द्वार (दरवाज़ा) खोला औऱ जब मुझे देखा तोँ वो सचमुच सरप्राइज होगई औऱ खुशी सें उछल पड़ी। दिदी नें आगेबढ़ कर मुझेगले लगा लिया। मैंने भि इसका पूरा फायदा उठाते हुएउसे कसकरगले लगा लिया जिससे उसकीठोस चुचिया मेरी छाती पर्र दब गई। फिन वोँ मुझेघऱ केँ अंदर लेँ गई, औऱ सोफे पऱ बैठा दिया।
मुझे बैठने केँ लिए कहकर दिदी अंदरगईं औऱ मेरेलिए पानी लेकरआईं। उस दौरान मैंने दिदी पऱ ध्यान दिया औऱ देखा कि वो दोपहर कि झपकी लें रही थि इसलिये उसकी साड़ी औऱ केश अस्त-व्यस्त थें। मुझे आराम करने कों कहकर वोँ अन्दर चली गयीँ, औऱ फ्रेश होकर बाहर् आँ गई,.
हम् बातें करनेलगे औऱ मे उसे पिछले दिनों मैने क्याँ-क्याँ कियायह बताने लगा। जब हम् बातकर रहे थें तोँ वो मेरे सामने खड़ी होँ गई औऱ अपनी साड़ी कों खोलकर दोबारा ठीक सें पहनने लगी। हालाँकि मे उससेबात कररहा थां, मगर मेरा पूरा ध्यान उसकी अदाओं मे हि खोयाहुआ थां।
दिदी मुझे हमेशा कि तरह अपने बच्चे जैसा हि ट्रीट कररही थि मगर उन्हें इसबात कि भनक तक नहीं थि कि मे किसहद तक दिदी केँ लिए पागल हूं।
जब पायल दिदी नें अपनी साड़ी खोली तोँ सबसे पहले मेरा ध्यान उसकी चुचियों पर्र गय़ा, जौ उसकी ब्लाउज कों फाड़कर बाहर् आने कों उतारू थि। याँ तौ उसका ब्लाउज टाइट थां याँ उसकी चुचिया बड़ी हुइ थि।
क्योंकि ब्लाउज उसके चुचियों पऱ इतनाकसा हुआ थां कि दोनों बटनों केँ बीच मे गैप थां जिससे उसकी काली ब्रा औऱ गोरे गोरे चुचियों कि गोलाई थोड़ी-थोड़ी दिखरही थि। उसकीगोल नाभि मुझे औऱ भि गहरी किसी कुँवे समानलग रही थि। उसने जोँ पेटिकोट पहनाहुआ थां वो उसके सुडौल कूल्हों पऱ कसाहुआ थां। जिससे दिदी किसी अजंता कि मूर्ति समान सेक्सी दिखरही थि।
पायल दिदी नें साड़ी केँ पल्लू कों अपने कंधों पर्र लेतेहुए साड़ी कि प्लेटस कों ठीक किया औऱ अपनी साड़ी पहनली। फिन उसने कंघीली औऱ अपने बालों मे फेरने लगी। हम् अभि भि बातें कररहे थें औऱ बीच-बीच मे वोँ मुझसे कुछपूछ रही थि औऱ मे उसे जवाबदे रहा थां।
दिदी सामने लगे शीशे मे देखकर अपने बालों मे कंघीकर रही थि, जिससे मुझेउसे बगल सें देखने कां मौका मिला। ओह् मायगॉड ! हरबार जब वो अपनाहाथ उठाती थि औऱ अपने बालों मे कंघी घुमाती थि, तोँ उसकी उभरी हुई गोलगोल चुचिया हिलने लग जाती थि। अपनी सेक्सी बेहन कि हरकतें देखकर मेरा लन्ड टाइट होँ गय़ा!
बाद मे साम कों मे पायल दिदी केँ आसपास घूमरहा थां औऱ उससेबात कररहा थां जब वो अपनेकाम कररही थि। मैंने उसे अपने भांजे केँ बारे मे पूछा कि वो किंडरगार्टन सें कब आएगा तौ दिदी नें बताया कि उसका किंडरगार्टन दिवाली कि छुट्टियों केँ कारणबंद हैं औऱ कल हि उसकी ननंदआई थि औऱ उसे दो-तीन हफ्तों केँ लिए अपनेघऱ लें गई हैं।
मैंने दिदी पूछा कि वो कुछ हफ्तों तक दिदी सें केसेदूर रहेगा तौ उसनेकहा कि उसे अपनी फूफी केँ बच्चों केँ साथ खेलने मे आनंदआता हैं, यहा तोँ उसकेसंग खेलने केँ लिएकोई नहीं हैं। इसीलिए उनकेसंग जाने कि वो जिद करनेलगा तौ दिदी कि ननंदउसे कुछ दिनों केँ लिए अपनेपास लेँ गई।
इसलिये पायल दिदी नें मां कों मोबाइल किया औऱ कहा कि वो दिवाली पऱ आनां चाहती हैं क्योंकि वो पूरेदिन घऱ मे अकेले रहने सें बोर हौ जाएगी। मैंने दिदी सें पूछा कि जब वो मेरठ जाएगी तौ जीजू केँ खाने कां क्याँ होगा तोँ उसनेकहा कि उनकीकोई चिंता नहि हैं, वे बाहर् होटल मे खानां खाएंगे।
दरअसल, जीजुने हि उसेघऱ जाने कां सुझाव दिया थां औऱ दिदी भि इसकेलिए सजधजकर थि। मैंने उससेकहा कि मे अपने भांजे सें मिलना चाहता हूं तोँ दिदी नें कहा कि कल हम् उसके ननंद केँ घऱ जायेंगे।
रात कों जीजूघऱ आये औऱ वो भि मुझे देखकर खुशहुए। हमनेइधर उधर कि बातें कीं, उन्होंने मेरेकाम केँ बारे मे पूछा, मम्मी-बापू केँ बारे मे पूछा। उन्होंने मुझेदो दिन उनकेपास रहने कां सुज़ाव दिया औऱ फिन दिदी कों आठदिन केँ लिए हमारे घऱ लें जाने कों कहा। मे भि मान गय़ा।
अगलेदिन दोपहर कों पायल दिदी औऱ मे, उसकी ननंद केँ घऱ जाने केँ लिए सजधजकर होनेलगे। हमेशा कि तरह, दिदी नें बिना किसी झिझक केँ मेरे सामने अपने कपड़े बदले औऱ मैंने हमेशा कि तरह उसके अर्धनग्न बदन कि झलक चुपके सें देखली।
बहोत दिनों केँ बाद मैंने अपनी बेहन कों ब्रेसियर पऱ देखा। उफ़! उसके विशाल मम्मों बहोत बड़ेलग रहे थें! तभी मेरा लन्ड खड़ा होनेलगा औऱ मेरेमन मे एक् बेतहाशा ख्याल आया कि अभि जाकर दिदी कि ब्रा फाड़दे औऱ उसके धड़कते हुए सीने पऱ किसीताज केँ तरहसजे हुए स्तनों कों दबादे! मगर इतनी हिम्मत नहि थि मेरी गांड मे!
सजधजकर होकर हम् जीजू कि गाड़ीसे उनकी बेहन केँ घऱगये औऱ वहा मे अपने भांजे सें मिला। मेरा भांजा अपनी मां कों देखकर खुशहुआ। हम् मामाजी-भांजे बहुतदेर संग मे खेलें। जब मैंने उससे पूछा कि क्याँ वो अपने नानाजी-नानीमा सें मिलने चलेगा, तौ उसनेमना कर दिया।
वो वहां रहना चाहता थां, तोँ हम् वहा सें निकले। फिन हम् जीजू कि शॉप पऱ गए। हम् वहां एक् घंटे रुके औऱ फिनघऱ आँ गये।
घऱ आने केँ बाद, दिदी केँ कपड़े बदलने कां कार्यक्रम फिन सें शुरुआत हुआ औऱ एक् अच्छे दर्शक कि भाती, मैंने फिन सें उसका लुफ़्त उठाया। इस दौरान, मे हवसभरी निगाहों सें मन हि मन दीदीके कपड़े उताररहा थां औऱ उसे चूमने केँ ख्वाब देखरहा थां। मे जानता थां कि ये संभव नहि हैं मगरये मेरी विकृति थि, मेरा सपना थां, मेरा वक्तपास थां औऱ मेरा हस्तमैथुन कां जरिया भि यही थां।
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एक हज़ारों में मेरी बहना है - Hindi Sex Story – New Episode
UPDATE-5
अगलेदिन दोपहर कों मे हॉल मे बैठा टेलीविज़न देखरहा थां। दिदी मेरेपास बैठीकुछ कपड़े सिलरही थि। हम् लोग टेलीविज़न देखरहे थें औऱ बीच-बीच मे बातें भि कररहे थें। मे रिमोट सें एक् केँ बाद एक् चैनलबदल रहा थां क्योंकि दोपहर कां कोई भि प्रोग्राम मुझे दिलचस्प नहि लगरहा थां।
अंततः मे एक् लोकप्रिय चैनल पर्र रुका। उस चैनल पऱ विज्ञापन चलरहे थें। मैंने रिमोट एक् तरफ रखतेहुए स्वयं सें कहा, 'विज्ञापन समाप्त होने केँ बादइस चैनल पर्र जोँ भि प्रोग्राम होगा, उसे देखूंगा। '
विज्ञापन खत्महुए औऱ प्रोग्राम शुरुआत हुआ। उस प्रोग्राम मे वे भारत केँ कुछ मशहूर ठंडीहवा वाली जगहों केँ बारे मे जानकारी देरहे थें। पहले उन्होंने ठंडीहवा वालेजगह उटी (तमिलनाडु) केँ बारे मे बताया, फिन शिमला केँ बारे मे बताने लगे।
जानकारी देते टाइम वो शिमला कि हरी-भरी पहाड़ियों, झरनों औऱ प्रकृति सें भरपूर अन्य सुंदर जगहों कि वीडियो क्लिप दिखारहे थें। इसमें दिखाया गय़ा कि केसे विद्यालय ट्रिप, दफ़्तर ग्रुप, कपल्स औऱ संग हि नवविवाहित जोड़े सब शिमला जाते हें औऱ मौज-मस्ती करते हें।
“कितना हसीन हैं नाँ शिमला!” पायल दिदी नें टेलीविज़न कि ओर देखते हुएकहा।
"हाँ! बहोत अच्छा हैं! मे वहाकई बार गय़ा हूं!” मैंने उत्तर दिया।
"सच मे!! राहुल, किसके संगगए थें तुम्?” दिदी नें उत्साहित होकर पूछा।
“एक् बार अपने कॉलेज ग्रुप केँ संग औऱ दूसरी बार अपने दोस्तों केँ संग। ”
"राहुल क्याँ तुम् जानते होँ?" पायल दिदी नें धीमी आवाज़ मे कहा, "मेरीसब सहेलिया शिमला जाती रहती हैं। जब भि वो वापसआकर मुझे उनकी मौजमस्ती सुनाती हैं तोँ मुझे भि शिमला देखने कि चाहत होती हैं, मे भि इस सुंदर स्थान कों देख्ना चाहती हूं। "
"क्याँ कहती हौ दिदी?" ''तुमने अभि तक शिमला नहि देखा?'' मैंने आश्चर्य सें पूछा।
“नहि राजा! मेरीऐसी क़िस्मत कहां हैं!”
"ओह, माय गॉड! आप् अभि तक वहां नहि गए? शिमला तौ चंडीगढ़ सें बहोत लगभग हैं औऱ जीजू आपकोकभी वहां नहि लें गए? क्याँ कहती होँ दिदी?”
"हाँ!मगर मे सचकहरही हूं.क्याँ तेरे जीजू केँ पास मेरेलिए वक़्त हैं?" दिदी नें जीजू पर्र चिढ़ते हुएकहा।
"ओह! दि ! यदि तुम् उनसे पूछोगी, तौ वेकाम सें छुट्टी लें सकते हें औऱ तुम्हें शिमला लें जा सकते हें।
“मैंने उनसेकई बार पूछा, ” दिदी नें परेशान होकरकहा, “मगरहर बार उन्होंने बिज़नेस कां हवाला देकरमना कर दिया। मे तुम्हें बतादूं, वे बिल्कुल भि रोमांटिक नहि हें। क्याँ तुम् जानते होँ हम् विवाह केँ बाद हनीमून पऱ भि नहि गए। उन्हें किसी रोमांटिक स्थान पर्र जानां पसन्द नहि हैं। वे कहते हें, ऐसी स्थान पऱ जानां टाइम औऱ पैसे कि बर्बादी हैं। ''
मुझे शुरुआत सें पता थां कि मेरे जीजू दिदी सें बहुतबड़े हैं, तौ उन्हें रोमांस मे कोई दिलचस्पी नहि होगी। औऱ इसके विपरीत मेरी दि कों घूमना बेहद पसन्द थां। मुझे दिदी केँ लिये बहोत बुरालगा। मैंने उसकेपास आकरकहा,
“दि, अगर तुम् बुरा नं मानो तोँ मे तुम्हें शिमला लें चलूँगा!”
“सचमुच राहुल?” दिदी नें उत्साहित होकरकहा, मगर अगले हि लम्हा वो उदास होँ गई, औऱ बोलि, “काश! तुम्हारे जीजू भि तुम्हारी तरह बोलते, अपने पार्टनर केँ संगऐसी रोमांटिक जगहों पर्र जाने मे मज़ाआता हैं, भाईके संग नहि। ''
"ऐसाकौन कहता हैं?" मैंने उससे पूछा, “दि, जब तक हम् एक्-दूसरे केँ संग मे कम्फर्टेबल हें औऱ इतनी हसीन स्थान कां खुशी लें रहे हें, तोँ भइया-बेहन होने सें क्याँ फर्क पड़ता हैं? औऱ हमारे बीच भइया-बेहन केँ रिश्ते सें अधिक दोस्ती कां नाता हैं। हम् बिल्कुल मित्र कि तरह हें, हैं नां मैडम?”
"हां मेरे भइया! मेरे प्यारे मित्र!" पायल दिदी नें खुशी सें कहा। फिन वोँ मुझे समझाते हुए बोलि- "भइया, फिन भि मे अपने पति केँ संग वहां जानां उचित समझती हूं, "
"तौ फिन मुझे नहि लगता कि तुम्हें कभी शिमला देखने कों मिलेगा दि, क्योंकि जीजू कों तोँ अपने बिज़नेस सें फुर्सत हि नहि मिलती। "
"हाँ!यह भि सही हैं, ठीक हैं, देखते हें कि क्याँ हम् कभी शिमला जा सकते हें। "
"क्याँ बात हैं दि! हम् अभि शिमला जा सकते हें। "
"अभि? तुम् पागलों कि तरहबात कररहे होँ। ” दिदी नें आश्चर्य सें पूछा।
“अभि मतलब परसों हम् मेरठजा रहे हें, तब हम् शिमला चलेंगे!” मैंने मुस्कुराते हुए उससेकहा.
" मेरठ जाते वक़्त?" पायल दिदी नें सोचा, "ये केसे संभव हैं राहुल?"
"क्यूं नहि, दि?" मे उत्साहपूर्वक उससे कहनेलगा, “देखो! हम् अगली सुभह अपनेघऱ मेरठजा रहे हें, ठीक? तोँ हम् यहां सें थोडा जल्द निकलेंगे औऱ शिमला पहुंचेंगे औऱ वहां हम् पूरेदिन घूमेंगे फिन अगली सुभह हम् अपनेघऱ केँ लिए वहां सें रवाना होंगे।
“वोँ तोँ ठीक हैं, मगर हम् शिमला मे रात कों कहां रुकेंगे?” दि नें उत्सुकता सें पूछा।
“कहां रुकेंगे मतलब? होटल मे दि!” मैंने जल्दी उत्तर दिया.
"होटल मे?" पायल दि नें थोडा सोचा, "मगर मे तौ कहती हूं, हम् उसीरात मेरठ वापस क्यूं नहि जा सकते?"
“तुम् जा सकती होँ, दि, मगर इससे हमारा कोई फायदा नहि होगा, इससे हमारी सिर्फ भागदौड़ होगी। क्योंकि हम् पूरा शिमला घूमेंगे तोँ रात होँ जायेगी औऱ तुम् इसे पहलीबार देखरही होँ तौ, ज़्यादा वक्तबीत जाएगा। औऱ तौ औऱ चलते-चलते हम् थक जाएंगे फिन आराम कि भि जरूरत होगी इसलिये हमेंरात कों होटल मे हि रुकना चाहिए। ”
“तुम् ठीककह रहे हौ राहुल, ” दिदी करीब-करीब सहमत हौ गई मगर उसनेकहा, “तोँ फिनठीक हैं। मगरबात बसये हैं कि भइया केँ संग होटल मे एक् रात रुकना कुछ अजीबसा लगता हैं। "
“ओहकमऑन दि, हम् कोई अजनबी नहि हें। क्याँ हुआ क्योंकि हम् भइया-बेहन हें, हम् मित्र भि तोँ हें। वहा तुम्हें बिल्कुल भि अजीब महसूस नहि होगा, दि! देख्ना, तुम्हें वहां बहोत आनंद आएगा। ”
"हाँ! हाँ! मे ये जानती हूं, मेरे छोटे भइया!”यह कहतेहुए उसने मजाक मे मेरेगाल पऱ चुटकी काटली। मुझे उसकाइस तरह चुटकी काटना पसन्द नहि हैं।
“दि! तुम्हें पता हैं नां मुझे तुम्हारा इसतरह चुटकी काटना पसन्द नहि हैं, क्याँ मे अभि भि बच्चा हूं? अब मे अच्छी तरह बड़ा होँ गय़ा हूं। ”
“ओहहाँ हाँहाँ हाँ! क्याँ तुम् बड़े हौ गये होँ? तुम् मात्र शारीरिक रूप सें बड़ेहुए होँ, राहुल! मगर मेरेलिए तुम् हमेशा छोटे हि रहोगे, " उसने मुझसे कहा, "छोटा भइया, बिल्कुल मेरे बच्चे कि तरह!"
“ओह दि मे तुमसे बहोत प्रेम करता हूं। मे चाहता हूं कि तुम् हमेशा खुशरहो। मे इसकेलिए कुछ भि करने कों सजधजकर हूं। ” इतनाकह कर मैंने भि उसेगले लगा लिया.
"मे जानती हूं राहुल, मे भि तुमसे प्रेम करती हूं, तुम् मेरे भइया हौ इसका मुझे हमेशा गर्व रहेगा। "
अगरउस समय मे कुछ भि महसूस कर सकता थां तौ वो थि मेरे सीने पऱ दबी हुइ मेरी बड़ी बेहन कि कोमल स्तनों कि कठोरता। ऐसे हि कुछ वक़्त गलेलगे रहने केँ बाद हम् अलग हौ गए औऱ आगे कि प्लानिंग करनेलगे।
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