एक हज़ारों में मेरी बहना है - Hindi Sex Story – New Episode
UPDATE-9
बाथरूम सें बाहर् आया तौ मैंने देखा कि पायल दिदी आईने मे देखकर मेकअप कररही थि। दीदीने आसमानी रंग कि तलम साडी पहेनली थि।
"अरे, दिदी। तुमने वापस साडी पहेनली?" मैंने दिदी सें पूछा।
"फिन क्याँ करू, राहुल? मेरेपास एक् हि ड्रेस थां जोँ गिला हौ गय़ा। तोँ मुझे वापस साडी पहेननी पड़ी, " आईने मे सें मेरीतरफ देखकर पायल दिदी नें कहा, "लेकीन तुम् फिेक्र मतकरो, भले मैने साडी पहेनली हैं फिन भि मै तुम्हारी मित्र कि तरह हि रहूँगी। "
"ओह, दि। मुझेइस मे कोई ऐतराज नहीं हैं। साड़ी तोँ तुम्हे अच्छी हि दिखती हैं उलटामै यह कहुगा केँ ड्रेस सें ज़्यादा तूम साड़ी मे अच्छी दिखती होँ। "
"वोँ तौ मै लगुंगी राहुल, अब क्याँ मेरी उम्र ड्रेस पहनने जैसीरही क्याँ?"
"ऐसा क्योकह रही होँ, दि? तुम्हे ड्रेस भि अच्छा दिखता हैं सच कहूं तौ तुम्हे बीचबीच मे ड्रेस पहनना चाहिए। "
"अब वोँ मुनकीन नहीं हैं, भइया क्योंकी तुम्हारे जिज़ू कों मेरा ड्रेस पहेनना पसन्द नहीं हैं बहुत महिने होँ गये मैने ड्रेस पहना हि नहीं थां। लेकीन ठीक हैं, मुझे उससेकोई ऐतराज नहीं हैं। मुझे भि साडी पहनना अच्छा लगता हैं "
"औऱ मुझे भि! पायल दिदी कों पिछे सें निहारते मैनेमन हि मन मे कहा।
मै उसके पिछेऐसे खडा थां जिससे उसे आईने सें नजर नहीं आँ रहा थां केँ मै कहां देखरहा हूं। हमेशा कि तरह उसने साडी अच्छी तरह लपेट केँ पहनी हुइ थि जिससे उसकी फिगरउभर केँ दिखरही थि। मेकअप करने केँ लिये वोँ थोडा झुक गयीँ, थि औऱ उसकेभरे हुये चुतड उभरकर आये थें। आदत सें मजबूर मैने उसके चुतड कों गौर सें देखा औऱ मुझे उसके चुतडपर उसने अंदर पहनी हुइ पँटीज कि लाईननजर आई औऱ मैखुश हुवा। लड़कीयां औऱ औरतों केँ चुतड कों निहार कर उन्होने अंदर पहनी हुई पँटीज कि लाईन ढूंढना यह मेरा पसंदीदा खेल थां औऱ उससे मुझे एक् अलग हि खुशी मिलती थि। औऱ वोँ चुतडअगर मेरे बेहन केँ होँ तोँ फिनमै कुछ अधिक हि खूश होता हूं। भुके भेडीये कि तरहमै दिदी केँ चुतड कों पिछे सें देखरहा थां।
हम् लोग तयार होँ गये औऱ फिन एक् रेस्टॉरेंट मे खानां खानेगये। खाने केँ बाद बाकी जौ सुंदर स्पॉट रहगये थें उन्हे देख्ना हमने चालू किया। ज़्यादा तरजगह शांत स्थान केँ थें। हम् दोनो भइया-बहेन वहां प्रेमी जोडी कि तरह घुमे। फ़िरते टाइमकभी कभी पायल दिदी मासूमीयत सें मेराहात पकड लेती थि। किसी स्थान चढने, उतरने केँ लियेउसे मैहाथ देकरमदत करता थां औऱ बाद मे वोँ मेराहाथ पकड केँ रखती थि।
कोई सांस रोकनेवाला, बहोतही प्यारा सीन देखते टाइम वोँ मुझेजोर सें चिपक केँ खडी रहती थि। कभी वोँ मेरे पिछेखडी रहती थि तौ कभीमै उसके पिछेउसे चिपक केँ खडा रहता थां। दिदी जब मुझे चिपक केँ खडी रहती थि तब उसकी गदराई छाती मेरे शरीर पऱ दबती थि। किसी स्पाँट पऱ अगर रेलींग हैं तौ मैउस पर्र हाथ रखकरखडा रहता औऱ दिदी आकर मुझसे चिपक केँ खडी रहती थि। उससेकभी कभी मेराहात उसकी टांगो केँ बीच मे दब जाता थां। मैठिक सें कह नहीं सकता लेकीन शायद मेरेहाथ कों उसकी नाभि केँ नीचे कि स्थान कां स्पर्श महसुस होता थां। जबमै उसके पिछेउसे सट केँ खडा रहता थां तब उसकेभरे हुये चुतड पर्र मेरा लन्ड दब जाता थां औऱ उससे मेरा लन्ड थोडासा कडक हौ जाता थां। उसे वोँ महसूस होता होगा लेकीन कभी वोँ बाजू मे हटी नहीं। उलटाजब मेरा लन्ड अधिक हि कडक होता थां तबमै स्वयं बाजू हटता थां यह सोचकर केँ उसे वोँ ज़्यादा महसूस नाँ हौ।
पायल दिदी केँ लियेयह सभी अनजाने मे होँ रहा थां जब वोँ सांस रोककर, अपने आप् कों भुल केँ कोई अच्छा स्पाँट देखती थि तभी। दिदी केँ लिएयह वन्सइन अ लाईफ़ वक्त मोमेंट थां तौ वोँ उन पलों कां खुशी लेने मे हि ग़ुम थि।
मेरी बेहनसही मायनो मे शिमला केँ निसर्ग कां मज़ा लें रही थि औऱ मै उसकासगा भइयासही मानो मे अपनीसगी बेहन केँ जवान अंगो केँ स्पर्श कां मज़ा लेँ रहा थां।
सनसेट स्पॉट पऱ रंगो कि होली खेलते खेलते पहाडों केँ पिछे लूप्त होते ढलते सूरज कां हमने दर्शन कर लिया। बाद मे हमे होटल एरीया मे आतेआते बहुत अंधेरा हौ गय़ा। बहुतदेर घुमने सें हम् दोनो अच्छे खासेथक गये थें इसलिये हमनेतय किया केँ डिनर करकें हि हम् होटलरूम मे वापस जायेंगे। मैने जेंटलमैन बनकर दिदी कों ऑर्डर करने केँ लिएकहा। खानां खातेसमय मैउसे कुछ सेमी नॉनव्हेज़ जोक्स सुनाकर उसका मनोरंजन कररहा थां। वोँ दिल सें मेरे जोक्स कों दाददे रही थि। मैने मेरी बेहन कों इतनाखूश औऱ खुलकर बातें करते मैनेकभी देखा नहीं थां।
हम् दोनोरूम केँ अंदरआये औऱ मैने दरवाजा बंद करकेलॉक लगाया। पायल दिदी जाकरबेड पर्र बैठ गयीँ, औऱ साडी केँ पल्लू सें अपने चेहरे कां पसीना पोछने लगी। फिन 'मैथक गई, घुम केँ' ऐसा कहतेहुए वोँ पिछेबेड पर्र आँखबंद करकेसो गई। मै दिदी भि केँ नजदीक बेड पऱ बैठ गय़ा। पायल दिदी पंख पसारे जैसे अपनेहाथ फैलाकर पडी हुईँ थि। पसीना पोंछने केँ लिये निकाला हुवा अपना पल्लू उसके फैले हुयेहाथ मे हि थां जिससे उसकी छाती खुली पड़ी थि। मैने उसके चेहरे कों देखा, उसके चेहरे पऱ थकान थि औऱ आंखेबंद करके वोँ चुपचाप पड़ी थि।
पायल दिदी कि बंद आंखो कां फायदा लेकरमै वासनाभरी निगाह सें उसे निहारने लगा। छातीपर पल्लू नां होने सें दिदी कि टाईट ब्लाउज मे ठूंसकर भरी हुई बड़ी छातीसाफ नजर आँ रही थि। पसीने सें उसका ब्लाउज भीग गय़ा थां जिससे उसने अंदर पहनी हुई काली ब्रेसीयर औऱ उभारों कि गोलाई नजर आँ रही थि। वोँ जोर सें सांस लेँ रही थि औऱ सांसो कि लय पऱ उसके छाती केँ उठानउपर निचे होँ रहे थें। ब्लाउज औऱ कमर केँ बींच उसका सपाट चिकना पेटदिख रहा थां। जोर सें सांस लेने कि वजह सें उसकापेट भि ताल सें उप्पर निचे होँ रहा थां। उसकीकमर पर्र थोडी चरबीचढ़ गयीँ, थि जोँ पहले नहीं थि। लेकीन उससे वोँ औऱ भि सेक्सी दिखरही थि। उसकीगोल गोल नाभीआज मुझेकुछ अधिक हि गहरीनजर आँ रही थि।
दिदी कों उस सेक्सी पोझ मे पड़ी देखकर मैकाम वासना सें व्याकूल हौ गय़ा। मेरा लन्ड टाईट हौ गय़ा थां। ऐसालग रहा थां टर्र सें उसका क्लाऊज फाड दूं.उसकी ब्रेसीयर तोडदूं। औऱ उसकी चुचिया नंगी करकेउसे कस केँ दबादूं उसकीगोल नाभी मे जीभडाल केँ उसेजी भर केँ चाटू लेकीन मुझे मालूम थां मैऐसा नहींकर सकता थां।
पायल दिदी बहुतदेर वैसे पड़ी थि औऱ शायद थकान कि वजह सें उसकीआंख लग गयीँ, थि। मै भि बाजू मे लेटकर दिदी कि सुंदरता निहारने लगा।
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एक हज़ारों में मेरी बहना है - Hindi Sex Story – New Episode
UPDATE-10
पायलदिदी बहुतदेर वैसे पड़ी थि औऱ शायद थकान कि वजह सें उसकीआंख लग गयीँ, थि। मै उसके बाजू मे लेटाहुआ थां तोँ मेरा चेहरा दिदी कि बगल केँ नजदीक आया। मुझे दिदी केँ बगल केँ पसीने कि महक महसूस हुईँ।
मेरी बेहन केँ पसीने कि महक मुझे बचपन सें हि बेहद मनपसंद हैं औऱ वोँ अगर उसकीबगल सें आँ रही हौ तोँ उससे मुझे वासना कां एक् अलग हि नशा चढ़ता हैं। दिदी केँ बदन कि महक किसी इत्र सें कम नहीं थि। कस्तुरी कि सुगंध केँ पीछे एक् हिरन जितना पागल होँ जाता हैं उससेकई गुना मे दिदी केँ पसीने कि गंध केँ लिए पागल थां। मेरेदिल नें चाहा केँ उसकी पसीने सें भरीबगल चाटलूं लेकीन वैसाकर केँ मै मुसीबत मे नहीं पडना चाहता थां इसलिये मैने दिदी कों उठाने केँ बारे मे सोचा।
उसे स्पर्श नाँ हौ इसबात कां ख़याल रखकरमै हौ सके उतना दिदी केँ नजदीक सरक गय़ा। मे एक् हाथ पऱ मेरावजन देकर थोडा उप्पर उठ गय़ा औऱ दुसरे हाथ सें मैने पायलदिदी कि छाती केँ नीचेछुआ औऱ उसे मे उठाने लगा।
"दिदी। दिदी! उठो अभि। "
"अं.? क्याँ। ?" पायलदिदी बौखलाकर उठ गई,।
"मैनेकहा, उठ भि जावअब, रानी साहीबा। " मैने हंसकर उसेकहा।
"सॉरी, राहुल! मेरीआँख लग गई, थि" पायल दिदी नें अधखुली आंखो सें हंसकर जवाब दिया।
"अरे दिदी। उस मे सॉरी क्याँ कहना?मै समझ सकता हूं। इतना घुमने केँ बाद तूम थक गई, होगी। "
दिदी नें मुझे प्रेम भरी नजरों सें देखकर कहा, "आज मे बहुतखुश हुं राहुल.शिमला जैसी खुबसूरत स्थान देखने कि मेरीमन हि मन ख्वाइश थि जौ आज पुरी होँ गई,। औऱ यहसभी तुम्हारी वजह सें हुवा, भइया! थैंकयू सोमच। "
"दिदी। इस मे थैंक्स कहने कि क्याँ जरूरत? तुम्हे खुश देखने केँ लिये मे कुछ भि कर सकता हूं। औऱ बेहन कि खुशी कां ख्याल रखना तोँ हर भइया कां फ़र्ज होता हें। "
"ओह राहुल.तुम् बेहन कां कितना ख्याल करते होँ! मुझे तुम् पऱ नाज़ हैं, भइया!"ऐसा कहकर पायलदिदी नें मुझे अपने उप्पर खिंच लिया औऱ अपनी बाहों मे भरकरकहा, "तुमने मुझे बहुत बहुत खुशीयां दि हैं राहुल! औऱ मे भि तुम्हारे लियेकुछ भि करने कों तयार हूं, तौ फिन बताओ मुझे.मे क्याँ करू जिससे तुम्हें भि उतनी हि खुशी मिले जितनी मुझे मिली हैं!"
"तुम्हें कुछ भि करने कि जरूरत नहीं हैं दि। " मैने अपना चेहरा उपर किया औऱ पायलदिदी केँ नजर सें नजर मिलाकर कहा, "तुम् खुश हौ तोँ मे खुश हूं दि, तुम्हारे चेहरे कि खुशी देखकर हि तोँ मैखुश रहताहुं। तुम् हमेशा खुशरहो यहीमै चाहता हूं दि। "
"ओह राहुल!। मेरे प्यारे भइया.मेरा बच्चा " ऐसा कहकर दिदी नें मुझेजोर सें अपनी बाहों मे भींचा औऱ मेरे चेहरे कों स्थान स्थान चूमने लगी। दिदी केँ कोमल होंठो केँ एहसास सें मे हवा मे उड़नेलगा। जब दिदी थोड़ीदेर बाद मेरे चेहरे कों जीभर चूमकर रुकी तौ हम् दोनों एक् दूसरे कि आँखों मे देखने लगे। दिदी केँ आँखो मे मे अपने प्रति स्नेह कों देख सकता थां।
मेरामन हुआ कि अभि दिदी केँ अधरों कों अपनी गिरफ्त मे लूँ औऱ उन नाज़ुक गुलाब कि पंखुड़ियों सें सारारस निचोड़ लूँ। मगर मैंने अपने होंठो कों आगेबढ़ा कर दिदी केँ माथे कों चुमा औऱ फिरसे दिदी कि ओर देखने लगा।
मेरेमन मे ज़रूर हि दिदी केँ लिए कामवासना थि, मे खुली आँखो सें दिदी केँ साथ कामक्रीडा करने केँ ड्रीम्स देखता थां। लेकीन मे कभी भि दिदी केँ साथ उसकी इजाजत केँ बिनाकुछ करके उसें हर्ट नहि करना चाहता थां। दिदी कि खुशी मेरेलिए सबसे बढकर थि।
अचानक मुझे अहसास हुवा केँ मै पायलदीदी कि बाहों मे तकरीबन उसके जिस्म पऱ लेट गय़ा हूं, मेरासर उसकीभरी हुइ छाती केँ दोनो उभारों केँ बीच थां औऱ मेरा दायाहाथ उसकीकमर पर्र थां। मुझे उसकीठोस फिन भि उतनी हि रसीले छाती कां स्पर्श महसूस हौ रहा थां। मेरी जांघो कां भाग औऱ मेरा लन्ड उसके घुटने केँ उपरी टांगो पऱ सटा हुवा थां।
थोडीदेर हम् दोनो भइया-बेहन वैसे हि चिपक केँ पड़ेरहे। दिदी मेरी बाहों मे सुरक्षित महसूस कररही थि औऱ मे उसके गदराये जिस्म कां स्पर्श महसुस कररहा थां। दिदी केँ मन मे ममता थि, प्रेम थां। मेरेमन मे भि दिदी केँ लिए प्रेम थां मगर फ़र्क केवल इतना थां, मे दिदी कों अपनी प्रेमिका कि तरहदेख रहा थां औऱ दिदी मुझे एक् भइया कि तरहदेख रही थि।
मेरा लन्ड अधिक हि कड़क होतेजा रहा थां औऱ वोँ दिदी कि टांगो कों छूनेलगा। उसकीसमझ मे ये नं आये इसलिये मुझे दिदी सें मज़बूरन दूर होनापडा।
"कमऑन, दि। उठो अभि.हम् पहले फ्रेश हौ जाते हें फिन धीरे-धीरे सो जाते हैं। " ऐसा कहतेमै बेड सें उठ गय़ा। मैंने बैग मे सें मेरारात कों पहनने कां डेस निकाला। फिनकमर पर्र टॉवेल लपेटकर मैने मेरी जीन्स निकाल दि औऱ टि-शर्ट भि निकालकर बाजू केँ चेअर पऱ डाल दिये। फिन मे बाथरूम मे नहाने केँ लिये गय़ा। बहुत वक़्त लेकर मैनेजी
भर केँ शाँवर केँ निचे स्नान लिया औऱ मेरा पुरा जिस्म अच्छी तरह सें साफ किया। खास कर केँ मेरा लन्ड औऱ जांघो कां भाग मैने अच्छी तरह सें घिस केँ साफ कियाइस पागल खयाल सें कि मेरी बेहन मेरेसंग फोरप्ले करेगी। मुझे मालूम थां वैसेकुछ होनेवाला नहीं थां लेकीन फिन भि मन मे एक् उम्मीद थि।
जबमै बाथरूम सें बाहर् आयातब मैने देखा केँ पायल दि पुरे बदनपर बेडशीट ओढ केँ चेअर पऱ बैठी थि। वैसेबैठ केँ वोँ मेरीतरफ देखरही थि औऱ शरारती अंदाज मे हंसरही थि। मुझे थोडा अजीबसा लगा केँ वोँ ऐसी क्यो बैठी हैं औऱ मेरीतरफ देख केँ ऐसे क्योहंस रही हैं।
"क्याँ हुवा, दिदी? तुम्हे थंडलग रही हैं क्याँ?" मैने परेशान होकर उससे पुछा।
"नं.ह." दिदी नें बडेलाड सें जवाब दिया।
"तौ फिन तूम ऐसी शरीर पऱ बेडशीट ओढकर क्यो बैठी हौ?" मैने आश्वर्य सें पुछा।
"क्योंकी.क्योंकी। "ऐसा कहतेहुए दिदी उठखडी हुइ औऱ अपने शरीर सें बेडशीट पिछे ढकेल केँ स्वयं कों मेरे सामने पेश करते बोलि, "क्योंकी इसलिये, राहुल."
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दोस्तों मे काम मे फंसाहुआ हूं तौ वक्तटू वक्तभाग नहींदे पारहा, मगर मे टाइम निकालकर किस्सा जरूर कम्पलीट करूंगा। तब तक एपसोड पर्र like औऱ comment कीजिए।
yeh story alag h. Similar type k h lekin same nahee h. Sir Heisenberg waiting for next update. Bade nazuk mod pr end kare the ap ne story
एक हज़ारों में मेरी बहना है - Hindi Sex Story – New Episode
UPDATE-11
RECAP.
"क्याँ हुवा, दिदी? तुम्हे थंडलग रही हैं क्याँ?" मैने परेशान होकर उससे पुछा।
"नं.ह." दिदी नें बडेलाड सें जवाब दिया।
"तौ फिन तूम ऐसी जिस्म पऱ बेडशीट ओढकर क्यो बैठी हौ?" मैने आश्वर्य सें पुछा।
"क्योंकी.क्योंकी। "ऐसा कहतेहुए दिदी उठखडी हुई औऱ अपने शरीर सें बेडशीट पिछे ढकेल केँ स्वयं कों मेरे सामने पेश करते बोलि, "क्योंकी इसलिये, राहुल."
NEXT.
जब मैने दिदी कों देखा तोँ मैदंग रह गय़ा। पायलदिदी नें मेरी जीन्स औऱ टि-शर्ट पहनी हुईँ थि।
"केसेलग रही हूं मे, राहुल?" दोनोहाथ कमरपर रख केँ, अपनी उभरी हुईँ छातीतान केँ खड़ी होकर दिदी नें मुझसे पुछा, "अब मे मॉडर्न लगरही हूं कि नहीं, कहो?"
पायल दिदी गोल-गोल घुम केँ मुझे दिखारही थि कि वोँ कैसीलग रही हैं।
इस मे कोई गुंजाईश नहीं थि कि वोँ बहुतअलग औऱ खासदिख रही थि क्योंकी आज तक मैनेउसे मात्र सलवार सूट औऱ साड़ी पहनेहुए देखा थां। उसने जीन्स औऱ टि-शर्ट कभी पहने हि नहीं थें। दिदी नें पिताजी केँ सख्त होने कि वजह सें कॉलेज केँ दिनो मे भि कभी जीन्स औऱ टीशर्ट्स नहीं पहनी थि। इसीलिए ये पहलीबार थां कि मे पायलदीदी कों इन कपडो मे देखरहा थां। दिदी जीन्स औऱ टीशर्ट मे बहुत प्यारी लगरही थि।
मेरा टि-शर्ट पतला स्लिम थां औऱ दिदी कां बदनभरा हुआ इसलिये उसे मेरा टि-शर्ट छोटापड़ रहा थां। अब शरीरका तौ ठीक हैं लेकीन छाती कां क्याँ? मेरी छाती औऱ दिदी कि छाती मे जमीन-आसमान कां फरक थां। मेरा टि-शर्ट उसकेबदन पर्र कसकर चिपक गय़ा थां। दीदीने पहनी हुईँ काली ब्रेसीयर उस व्हाइट कलर केँ टि-शर्ट मे सें साफसाफ नजर आँ रही थि औऱ ऐसालग रहा थां कि दिदी नें केवल ब्रेसीयर हि पहनी हैं। टि-शर्ट कि लंबाई दिदी कि चुचियों कि वजह सें कमपड़रही थि इसीलिए वोँ बड़े मुश्कील सें उसने पहने जीन्स केँ बेल्ट तक आँ रहा थां। दिदी नें अगरहाथ उपर किया होता तौ उसका रसीले औऱ सफ़ेद पेटनजर आता।
जब मैने उसकीकमर केँ निचे देखा तौ मुझे हंसी आँ गई। दिदी औऱ मेरीकमर मे फरक होने कि वजह सें मेरी जीन्स उसकीकमर पर्र आँ नहींरही थि। जीन्स केँ बटन कि स्थान पऱ तकरीबन दोढाई इंच कां गँपपड गय़ा थां औऱ इसीलिए दिदी बटन नहींलगा सकी। लेकीन जीन्स नीचे नां खिसके इसीलिए दीदीने बेल्ट लगाया थां। बटन कि स्थान गैप होने कि वजह सें वोँ झिप भि आधी हि लगासकी।
इसवजह सें अधखुली झिप केँ उपर औऱ बेल्ट केँ निचे एक् त्रिकोन बन गय़ा थां जोँ खुला थां। औऱ उस खुले त्रिकोन केँ उपर केँ भाग मे दिदी कि गोरी गोरी त्वचा औऱ निचे केँ आधेभाग मे उसकी व्हाइट रंग कि पैन्टी थोड़ी दिखाई देरही थि।
बहुतदेर तक मे बिना किसी झिझक केँ मेरी प्यारी बेहन कों उपर सें निचे तक निहारता रहा। मेरी बेहन भि आगे-पिछे हौ कर स्वयं कों मुझे दिखारही थि।
"केवलदेख क्याँ रहे हौ राहुल। कुछकहो भि.कैसी लगरही हूं मै?" पायल दिदी नें बेसब्री सें पूँछा।
"बहुत प्यारी लगरही होँ, दि! लेकीन मेरी जीन्स छोटीपड गई तुम्हें.वरना उस त्रिकोन कां प्रदर्शन नहीं होता." उसके खुले त्रिकोन कि तरफ बीना किसी शर्म केँ ऊंगली दिखाकर मैनेकहा।
"नालायक, बेशरमी मतकरो राहुल.औऱ वहा पर्र देख्ना नहीं! मात्र मुझे इतनाबता दो कि मे केसे दिखती हूं?" ऐसा कहकर वोँ ड्रेसिंग टेबल केँ सामने गई औऱ स्वयं कों आईने मे निहारने लगी।
मैने ड्रीम्स मे तौ कईबार कल्पना कि थि केँ पायलदीदी नें टाईट जीन्स औऱ टि-शर्ट पहना हैं लेकीन आजमै पहलीबार उसे हकीकत मे इन कपडो मे देखरहा थां। अबमैउसे क्याँ बताऊ केँ वोँ कैसीदिख रही थि? मैनेमन हि मनकहा कि मेरे लन्ड कों पुछलो कि तूम कैसीदिख रही होँ, जोँ तुम्हे देखकर पागल हौ रहा हैं औऱ सैल्यूट माररहा हैं।
मे पायल दिदी केँ पिछे जाकेखडा हौ गय़ा औऱ फिन आईने मे उसकीतरफ देखकर कहा, "दि, तुम् बहुत हसीनलग रही हौ। "
"मात्र सुंदर? औऱ कुछ नहीं?" पायलदिदी नें तिरछी नजर सें आईने सें हि मुझे देखकर वापस प्रश्न लिया।
"औऱ तुम् बहुत क्यूट दिखरही होँ.औऱ ग्रेट दिखरही हौ! औऱ.औऱ."मै आगेबोल न् सका।
दीदीने मुझेचुप कराते हुएकहा "कह भि दो राहुल.मुझसे कैसा शर्माना!"
मैनेझट सें कहा, "तुम् सेक्सी भि दिखरही होँ, दि। उलटाइस ड्रेस मे तुम् किसी औऱ ड्रेस सें ज़्यादा सेक्सी दिखती हौ। "
"ओह, कमऑन राहुल! कभी तुम् कहते हौ मे साड़ी मे एकदम सेक्सी दिखती हूं तोँ कभी तुम् कहते होँ मे सलवार सूट मे एकदम सेक्सी दिखती हुं औऱ अब तुम् कहरहे हौ मैइस जीन्स औऱ टि-शर्ट मे एकदम सेक्सी दिखरही हुं। तुम् अच्छी तरह सें सोचकर तयकरो औऱ मुझे बताओ केँ मैकौन सें ड्रेस मे सेक्सी लगती हूं। " पायल दिदी नें शरारती ढंग सें हंसते हुये मजाक मे मुझसे पुछा।
उसके प्रश्न सें पहले तोँ मै बौखला गय़ा लेकीन उसे क्याँ जवाब देना हैं ये मुझे अच्छी तरह सें मालूम थां। मन हि मन मैने स्वयं सें येबात हजारो बारकही थि।
"सच बताऊ दिदी। सेक्सीनेस तुम्हारी साडी मे नहीं, तुम्हारे सूट मे नहि, तुम्हारे कोई भि ड्रेस मे नहीं हैं। अगर हैं तोँ
वोँ तुम्हारे अंदर हैं, तुम्हारे जिस्म मे हैं। इसलिये तुमने कोर्ई भि ड्रेस पहन लिया तौ तुम् सेक्सी दिखती होँ औऱ इसीवजह सें कभी मुझे तुम् साड़ी मे खूबसूरत लगती हौ तोँ कभी सलवार सूट मे औऱ अभि तुम् मुझेइस मॉडर्न आऊट स्लिम मे अच्छी लगरही हौ। " मैने एक् हि सांस मे येसभी कह डाला।
"ओह मेरा बच्चा! तूम इतनी अच्छी बातें करते हौ कि सुनने मे बहुत प्यारा लगता हैं। " ऐसा कहकर पायल दिदी नें मेरे दोनोहाथ पकड लिये, औऱ मुझे नजदीक खिंच लिया।
फिन मेरेहाथ उसने अपनेपेट पऱ लपेट लिये जौ बिल्कुल उसके छाती केँ उभारों केँ निचे थें औऱ उनको हलकासा स्पर्श कररहे थें। पायल दिदी कि उस प्यारभरी नजदिकीयों कां पुरा फायदा उठाते हुए मैनेउसे जोर सें अपनी बाहो मे भर लिया औऱ उसे पिछे सें चिपक गय़ा। मेरा चेहरा मैने उसके कंधोपर रखा थां जौ उसकेगाल कों हलके सें छूरहा थां। मैंने मेरा भाले कि तरहखड़ा हुआ लन्ड दिदी कों नां छुए इसलिये अपनी जांघ औऱ दिदी केँ चूतड़ों केँ बीच थोड़ागैप रखा थां। हम् ऐसे हि खड़ेरहे औऱ बातें करने लगेंफिन कुछदेर बाद दिदी बाथरूम मे चेंज करने केँ लिएगईं।
मे बेड पऱ लेट गय़ा, औऱ दिनभर दिदी केँ संग बिताए हसीनसमय याद करनेलगा। दिदी औऱ मे बचपन सें हि एक् दूसरे केँ बहुत क्लोज़ थें मगरआज कां दिनकुछ अलग थां। आज हम् एक् दूसरे सें बहुत अधिकखुल चुके थें।
जब दिदी फ्रेश होकर बाहर् आई तोँ उसने मैक्सी पहनी हुईँ थि जौ उसके पूरेबदन कों अच्छे सें छुपारही थि। दिदी मेरे बाजू मे आकरलेट गई औऱ हम् एक् दूसरे सें दिनभर कि गई मस्ती कि बातें करनेलगे।
दिदी कों मैंने अपनेफोन मे निकाले फ़ोटो दिखाने लगा। मुझसे थोड़ीदूर लेटी होने केँ कारनउसे फ़ोटो देखने मे परेशानि होनेलगी तब वो मेरीतरफ खिसकी औऱ मेरे बाजू पऱ सररखकर फ़ोटोज देखने लगी।
दिनभर थके होने कि वजह सें हम् दोनों ऐसे हि फ़ोटो देखते देखते सोगये। जब सुभह मेरीआँख खुली तोँ मैंने दिदी कों अपनी बाहों मे पाया। हम् दोनों पूरी दुनिया सें बेखबर एक् दूसरे कों लिपटकर सोरहे थें जैसेकोई मियाँ-पत्नि होँ! इससे बढ़िया दिन कि शुरुआत मेरेलिए औऱ क्याँ होँ सकती थि। मे वैसे हि लेटेहुए दिदी केँ सूंदर चेहरे कों निहारने लगा।
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एक हज़ारों में मेरी बहना है - Hindi Sex Story - Next part mein bada twist
अभि तक राहुल कों पायल केँ लिए अपने सच्चे प्रेम कां एहसास नहीं हैं वोँ तौ इसे अपनी कामवासना हि समझरहा हैं.आगे चलकर शायदउसे अपने प्रेम कां एहसास होँ.
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