काला साया – रात का सूपर हीरो(Completed) - Raat Ka Super Hero - Full Story Part 1
{UPDATE-01}
ऊन दीनों बंगाल मे सावन कां तगड़ा मौसम शुरुआत हुआ थां….फाटक केँ नज़दीक हॉएँ सें इस छोटेशहर इतर मे बाढ़ कां प्रकोप तरफ गय़ा थां…औऱ रोज़ मुसलसल बारिश चलरही थि….फसल गाँव केँ घऱसभी तूफान सें याँ फिन बाढ़ मे तबाह हौ जाते…कुछ लोगइस तूफान सें बचने केँ लिए टाउन मे चलतेआते औऱ फिनसभी सामान्या हौ जाने केँ बाद वापिस अपने गाँवलौट आते…ऊन दीनों बाँध टूटने कां अलर्ट होँ गय़ा थां…औऱ इसवजह सें गाँवसभी खाली करवादिए गये थें…मगर शहर सें बाज़ार कां मार्ग सुनसान जंगल औऱ वीरान छोढ़े गये बस्तियो सें होकर गुजरता थां इसशहर मे रातगये स्त्री बूढ़ी वृढ कों भि बदमाश लोग उठाकर रेप करके ऊन्हें जंगलों मे मरने केँ लिएफैक देते थें….कोई भि महिला अकेले ज़्यादा सुरक्षित नहि होती थि…स्त्री पे होँ रहेयौन सोशण कां मामला बढ़ता जारहा थां….पर्र पुलिस ऊन बदमाशो कां कुछपता नहि लगापाई थि
आधीरात कां वक़्त हौ चुका थां औऱ ऊस सुनसान कीचड़ बारे रास्ते पे वोँ स्त्री फिसल फिसल केँ तेजी सें चलरही थि 30 साल कि उमरकसा हुआ शरीर छाती पेंट औऱ गान्ड बाहर् निकले हुए थें….अपनी मैली गीली सारी कों अपने चेहरे केँ लगे पसीने सें पोंछते पोंछते वोँ बाज़ार सें शहर केँ रास्ते कि ओरजारही थि उसेडर भि लगरहा हां कि इतनी सुनसान मार्ग पे वोँ अकेले चलरही मार्ग भि बहुत फिसलन भराऐसे मे कोई साँप औऱ उससे भि कई ज़्ीडा वीरान बस्ती केँ भूतों कि मुसीबत गाँव मे यहबात फैली हुई थि कि वीरान इन बस्तियो मे आत्मा वास करती हैं ऐसे मे ऊस देहाती महिला कंचन कां डरना लाज़मी थां…कंचन विवाह शुदा महिला थि औऱ वोँ घरो मे काम किया करती थि…उसे शहर सें अपने बच्चों केँ लिएकुछ दवाइयाँ लानी थि पति शराबी उससे तोँ कोई उम्मीद नहि थि इसलिये वोँ स्वयं पे यह ज़िंमेरदारी उठाकर अकेले हिम्मत करकेशहर चली गई, मगर मुसलसल बारिश मे वोँ ऐसी फँसी कि रात बहुत गहरी हौ गई, औऱ मार्ग औऱ भि खराब औऱ सुनसान अपनेमन मे अल्लाह अल्लाह कां नाम लेकर वोँ आगेबार रही थि इतने मे उसेदो बाइक सवारआते दिखे
वोँ सहेमी डरीबस आंखें झुकाए आगे बढ़ती रहीमगर वोँ लोग उसके लगभगआने लगे…वोँ दौड़ भि नहि सकती थि…फिसलने कां डर थां….औऱ ऊपर सें ऊन बदमाशो केँ हँसी कों सुनकर उसे पक्का लग चुका थां कि आज तोँ वोँ गयीँ, काम सें आज उसका भि बाकी औरतों कि तरह गान्ड औऱ चुत मे लन्ड डाल डालकर यहलोग उसका बलात्कार करेंगे औऱ अपना पानी छोढ़ने केँ बादउसे भि लावारिस लाश बनकरचोद देंगे अचानक एक् बाइक सवार उसके लगभगआकर बाइक उसके सामने रोक देता हैं
कंचन – आर…रही क्याँ बदत्तमीज़ी हैं छोढ़ूओ जाननने दम तुम् मुझहहे जानते नहि आहह-आहह छोड्धूओ
बाइक सवार – अधिक चिल्लाई तौ मुँह मे लन्ड डाल दूँगा क्याँ रे?हाथ पकड़रे इसका साली कों वहीऊस खेत केँ भीतर लेँ जाकर चोदते हैं
कंचन – अहह ईश्वर केँ लिएचोद दो मेरेदो छोटे छोटे बच्चे हैं…अल्लाह सें डर
बाइक सवार – चुप साली (इतना कहकर वोँ लोग कंचन कों ज़ब्रन हाथपाओ सें पकड़कर रास्ते सें नीचे केँ ढलान मे लेँ जानेलगे)
कंचन कों तौ लगनेलगा जैसेआज उसेइन शैतानो केँ हाथ सें कोई नहि बच्चा पाएगा….अभि वोँ लोग ढलान सें नीचे उतरे हि थें…कि कंचन एक् कों धक्का मारा औऱ फिसलते हुएदो बारगिर पड़ीफिन वोँ पूरी ताक़त सें अपने मोटापे कां फायदा उठाकर एक् बदमाश केँ सीने पे लातजमा देती हैं वोँ वहीगिर परता हैं.कंचन पूरी ताक़त लगाकर उठके जैसे हि मार्ग पे दौड़ने वाली होती हैं उसका गुंडे फिन मार्ग चैक लेते हैं इसबार उसेवही मार्ग पे गिराके ऊसपे सवार होने लगते हैं…
मगरतभी एक् जोरदार रोशनी ऊन लोगों केँ चेहरे पे जश्न हैं….बाइक सवार हड़बड़ाकर उठ खड़े होँ जाते हैं…”अययएए कौन हैं आबे? किसने हेडलाइट ऑन किया”….सभी बाइक सवार भौक्लाए ऊस हेडलाइट केँ सामने खड़े अक्स कों घूर्रने लगते हैं….वोँ अक्स धीरे-धीरे धीरे-धीरे काली परछाई बनकर उनके सामने खड़ा होँ जाते हैं वोँ लोग बारेगौर सें उसका चेहरा पहचानने कि कोशिश करते हैं मगर उसके चेहरे पे एक् कृष जैसा मास्क होता हैं औऱ पूरे चेहरे पे कालारंग लगा होता हैं…सिर्फ़ उसके होंठ औऱ उसके गुस्से भारी निगाहों कों हि वोँ लोगदेख सकते हैं
एक् बदमाश चाकूफहत सें निकल लेता हैं.एक् उसे हिदायत देता हैं शायद उसकेपास हत्यार हौ “क्याँ रे?कौन हैं आबे तुँ?”….वोँ सायाकोई जवाब नहि देताबस ऊस्की एक् भारी आवाज़ बादल केँ गारज़ते हि निकलती हैं “काला साया”……वोँ लोग एकदम सें चुप्पी सांधके सहम उठते हैं यह काला सायावही थां जिसने एक् करप्ट ऑफिसर कों इतना मारा कि ऊस्की दोनों टाँगें हि तोड़ दि थि…बदमाश लोग सावधान होँ गये औऱ फिन कंचन कों वही छोढ़के उसके लगभगआने लगे
ऊन लोगों नें अभि उसे घैरना हि चाहा थां.कि इतने मे उसकेबाए कमर सें निकलती एक् फुर्रत सें हत्यार उनके जिस्मो कों छू गय़ा दो बदमाश वही चट्टक चटक कि आवाज़क एसंग चीखके गिर परे….काला साया केँ हाथ मे एक् नानचाकू थां….ऊसने जल्दी दूसरे गुंडे एगले मे उसे लपटा औऱ उसके ठुड्डी पे एक् लात मारा वोँ सीधे पीछे केँ जंगली धंस मे जा गिरा…दूसरा बदमाश तीनों केँ अचानक पीटने केँ बाद सामने आया ऊसने चाकू ऊसपे चलना चाहा पर्र ऊससाए सें आरपार जैसे चाकू होता उसका बचाव इतनातेज थां ऊसने क़ास्सके ऊस गुंडे कां हाथ पकड़ा औऱ उसकेहाथ हि कों तोड़ डाला…औऱ फिन उसके चेहरे पे इतने घुसों कि बौछार कि वोँ औऱ उठ नां पाया
चारों केँ चारों बाइक सवार बुरी तरीके सें मरखाए परेहुए थें…मगर काला साया नें एक् एक् करकेऊन सब केँ गर्दन कों मोड़ माड़ोध केँ तोड़ डालाअब वहां सिर्फ़ लाशें थि औऱ बदल कि खौफनाक गारज़ान….काला साया जल्दी कंचन केँ लगभगआया जोँ सुबकते हुएरो रही थि जब ऊसने अपनी नज़रऊपर उठाई तोँ वोँ सहेंटे हुए मुस्करा उठी “काला साया आप् बाबू आपने हमारी जान बच्चा ली अल्लाह कां शुक्र हैं कि आप् जैसा फरिश्ता उन्होंने भेज दिया”….काला साया मुस्कुराकर कंचन कों उठाने लगता हैं
बारिश तेज होँ जाती हैं…काला सायापास मे परे एक् दवाई कि शीशी जोँ कंचन केँ हाथ सें चुत गयीँ, थि ऊस पॉलयथीन कों कंचन कों देता हैं…”चलो बारिश तेज हौ चुकी हैं तुम्हें तुम्हारे घऱ तक चोद दम”….कंचन ऊन लाशों कों देखकर खौफ सें भर जाती हैं
कंचन – बाबूयह लोगमर गये क्याँ?
काला साया – हाँ मैंने इन हरामजादो कों मर दिया
कंचन – बहोत ठीक किया अपने बाबू थूकती हूं इनपेइन नमर्दो पे जिन्होंने हम् औरतों कां जीना हरामकर रखा थां (कंचन नें पास जाकर उनके चेहरों पे थूक डाला देखकर साफ थां जैसे वोँ नां तौ काला साया सें डररही थि औऱ नां हि उसेडर थां कि काला साया नें ऊँकाखून कर डाला)
काला साया – इनकी लाशें यहीचोद दो पुलिस शिनाख्त करके इन्हें लेँ जाएगी तुम् बसयही कहना कि मैंने तुम्हारी जान बचाई वैसे तुम् इन लफडो मे नहि परोगी
कंचन – आप् फिक्र नां करो साहेब मे किसी कों कुछ नहि बताऊंगी औऱ मे जानती हूं जबसे आप् इसशहर मे आए हौ तबसे हमारा खौफ कितना कमहुआ हैं
काला साया – अच्छा चलो वरना यहां पानीभर जाएगा यह तूफानी बारिश नहि रुकेगी मे तुम्हें शहर तक चोद देता हूं
काला साया – रात का सूपर हीरो(Completed) - Raat Ka Super Hero – New Episode
{UPDATE-02}
इतना कहकर कंचन अपने गीले सारी सें खिकध कों झधतेहुए बाइक मे काला साया केँ संग सवार हौ जाती हैं….बाइक बहुत तेजी सें कक़ची मार्ग औऱ बगल केँ खेत जंगलों सें होतेहुए चलने लगता हैं….अचानक काला साया कि बाइक फिसल जाती हैं औऱ उसेबीच मे हि बाइक रोकनी पढ़ती हैं “अफ हौ लगता हैं यह मार्ग बंद होँ चुकी हैं यहां दलदल कां भि खतरा हौ सकता हैं”…काला साया कि बात सुनकर कंचन घबरा जाती हैं कि अब वोँ घऱ केसे जाएगी? उसके बच्चों कि दवाई ख़त्म हौ गई, थि…कंचन नें जब काला साया कों अपना कारण बताया तौ वोँ भि सोच मे डूब गय़ा कि करे तोँ करे क्याँ? एक् तोँ यह नाँ थमने वाली बारिश ऊपर सें बढ़ता तूफान…”देखो कंचनयह मौसम शायद सुभह 4 बजे तक चल सकता हैं तब्टलाक़ तुम्हें कहीआज तोँ तहेरना हि पड़ेगा वरनाऐसी हालत मे अपने बस्ती जाओगी केसे?”….कंचन भि कही हड़त्ाक मायूस होकर कालासाए कि बात पे हामी भरनेलगी
“यहलो तुम् अपनेघऱ पे मोबाइल कर दो”……काला साया नें जल्दी फोन कंचन कों पकड़ाया…कंचन नें अपनेघऱ पे मोबाइल करा औऱ मालूम किया कि उसके बच्चे केसे हैं? ऊसने अपने एक् सहेली कों मोबाइल करके अपनाहाल बताया ऊस्क इपदोस वाली थि ऊसने कंचन कों समझाया कि वोँ कहीं तहेरजाए आज कि रात कहीं कांट लेँ…कंचन कों भि यहीठीक लगा टाइम केँ हाथों वोँ मज़बूर हौ गई, मगरउसे काला साया पऱ पूरा भरोसा थां काला साया नें इससे पहले भि उसे एक् बार बचाया थां उसके पति केँ ज़ुल्मो सें औऱ तबसे वोँ काला साया कों अपना गार्डियन मानती थि…
काला साया अपने चेहरे पे मुकोता लिएशहर कां गश्त लगता थां…औऱ बढ़ते वारदटो कों रोकता थां…मगर आज वोँ भि इस मुसलाधार बारिश मे फ़ासस चुका थां…अचानक उसेदूर कि वोँ वीरान बस्ती दिखी…काला साया कों एक् सुझाव मिला.”कंचन आजरात हमकोयही काटनी पड़ेगी तुम् परेशान मत हौ मे तुम्हारे संग हूं”….इतना कहकर काला साया बाइक कों घस्सीटते हुएऊस वीरान बस्ती केँ पास आया…”हम् दूरदूर तक कोई नहि औऱ ऐसी बरसाती रात मे होगा भि कौन?चलो जल्द सें अंदर चलते हैं”……काला साया कि बात सुनकर एकपल केँ लिए कंचनसहम उठीउसे वही आत्माओं वालीबात पे डर थां पर्र वोँ जानती थि काला सायाजब संग हैं तौ उसे वोँ कुछ होने तोँ नहि देगा
वोँ बिनाकुछ कहें काला साया केँ संगऊस सबसेउचे वाले झोपरे मे घुस गई, …बरसात बहुततेज होँ गई, औऱ बरसात कां पानी बहुत अधिकतेज होँ गय़ा….एक् कुटिया मे बाइक घुसाके काला साया कंचन केँ साथ उक्चे वाले झोंपड़े मे घुस गय़ा….अंदर आते हि लोहे कां एक् दरवाजा जौ बेहद पुरानां थां उससे काला साया नें कुटिया कों बंदकर डाला…कंचन ठंड सें कनपने लगी
काला साया नें लाइटर जलाया औऱ उससे इकहट्टा करी बड़ी मुश्किल सें सुखी घससो पे आग लगाईअब पूरे कमरे चकाचोँद रोशनी थि एक् छेद सें बाहर् केँ बिजली कि रोशनी बीचबीच मे पार जाती…इस बार कंचन नें बड़ी हि गौर सें काला साया कों देखा जौ अपने चेहरे कों हार्वक़्त एक् मुकोते सें धक्कें रहता हैं औऱ उसके पूरे चेहरे पे कालिक जैसाकुछ लगा हैं बस उसके गुलाबी होंठदिख सकते थें बाकी उसके शरीर पे एक् लंबा सां ब्लैक कोट औऱ एक् क़ास्सी जीन्स जिसकी चाँदी वाले काँटे बने लोहे कां बेल्ट चमकरहा हैं…काला साया कहरा होकरपास सें एक् बंदूक निकलकर पास रखता हैं औऱ फिन एक् लंबा8इंच कां चाकू
कंचन थोड़ी सहमउठी फिन ऊसने बारे हि गौर सें ऊस बंदूक कि ओर देखा इतने मे काला साया नें कंचन कि चुप्पी तोड़ी “अरे तुम् तौ पूरीभीग गयीँ, होँ लो मेराकोट ढकलो इतना कहकर काला साया अपने जिस्म सें कोट उतार देता हैं उसके शरीर पे सिर्फ़ एक् काली बनियान होती हैं…”आपको ठंडलग जाएँगी”…कंचन नें अपनेबाल झधतेहुए कहा…”मेरे अंदर इतने बदले कि आग हैं कि मुझे हरपल गर्म महसूस होता हैं”….कंचन मुस्कुराकर उसके हौसले कि तारीफ करती हैं
कंचनइस बार अपने गीले सारी औऱ आधे गीले ब्लाउज औऱ पेटीकोट कों पल्लू सें साफ करने लगती हैं….अचानक काला साया कि निगाह उसके छातियो केँ काटव पे बर्थडे पार्टी हैं ऊस्की गोल गहरी नाभी केँ नीचे सें निकले पेंट पऱ कितने स्ट्रेच मार्क्स थें जोँ शाया उसके बच्चा पैदा होनेके बादउसे परे होंगे….कंचन मुस्कराए काला साया कां कोटपहन लेती हैं….काला साया कां लन्ड अकड़ने लगता हैं जिसे कंचनदेख लेती हैं वोँ इसबात कों भाँपके मन हि मन मुस्कराने लगती हैं वोँ जानती हैं काला सायाकभी भि अपने ज्यादती जीवन केँ बार्िएन मे नहि बताता
काला सायाबार बार कंचन केँ मोटे पिछवाड़े कों पेटीकोट केँ बाहर् सें हि देख सकता हैं कि वोँ कितनी बड़ी हैं वोँ बीचबीच मे अपने लन्ड कों दबा देता हैं जीन्स केँ ऊपर सें पर्र उसकाउभर खंभक्त कम होँ हि नहि रहा….अचानक बदल बड़ी ज़ोर सें गारज़ता हैं कंचनफिन धीरे-धीरे धीरे-धीरे काला साया सें बात करने लगती हैं कि वोँ उसे तौ कम सें कमअपन चेहरा दिखा सकता हैं वोँ कौन हैं?…काला साया मुस्कुराकर मनाकर देता हैं कि वोँ यहबात सबसे छुपाके रखता हैं.उसके दिल मे लगी जौ आग हैं वोँ इसशहर जुड़ी हुईँ हैं…औऱ वोँ सिर्फ़ काला साया एक् परिवार सें बदला लेने केँ लिएबना हैं….यह सभी सुनकर कंचन बारे हि दिलचस्पी सें ऊस्की बात सुनती हैं अचानक…कंचन ठंड सें बहोत अधिक तिठुरने लगती हैं.काला सायायह बात जानके उसेआग केँ पास बैठने बोलता हैं.कंचन धीरे-धीरे धीरे-धीरे आग केँ पासबैठ जाती हैं
काला साया – थोड़ी गरमहत मिलेगी तुम्हें अबठीक लगरहा हैं
कंचन – बहोत ज़्यादा ठंडालग रहा हैं ऊन खंभक्तो कि वजह सें पूरे सारी पे कीचड़ लग गय़ा आजअगर आप् नां आते साहेब तौ
काला साया – अब तुम्हें डरने कि जरूरत नहि कंचन वोँ लोगअब कोई नुकसान पहुंचने केँ लायक नहि रहेंगे औऱ तुम् फिक्र मतकरो मे हूं नाँ
काला साया धीरे-धीरे धीरे-धीरे कंचन सें बात करनेलगा अपनेमन कों समझाने लगा जोँ निगाहें ऊस्की कंचन केँ शरीर पे वाहन सि हुई थि….”तुम् इतनी हसीन होँ फिन भि तुम्हारा नामर्द पति तुम्हें केसेचोद रखा हैं”….मेरी बात सुनकर उसकेगाल गुलाबी हौ गये“खैर जीवन मे पहलीबार किसी नें मेरी हुस्न कि तारीफ कि औऱ वोँ भि आपके मुँह सें साहेब”….कंचन बेहदखुश हुईँ वोँ अपनेघऱ औऱ अपनी विवाह केँ बार्िएन मे बताने लगी.मगर काला साया तोँ बारबार उसके भारी चुचियों कों देखने लगा…कंचन इसको भाँपने लगी वोँ घबरा भि रही थि पऱ ओस्से पता थां कि काला साया उसकेसंग कोईगलत काम नहि करेगा
कंचन – साहेब अब आप् विवाह कर हि लो
काला साया – मुझ जैसे खतरनाक व्यक्ति सें कौन विवाह करेगी जौ हरपल ख़तरो सें खेलता हैं हाहाहा
कंचन – आप् जैसा मर्दअगर मेरा पति होता मे सबसे खुशनसीब होती
काला साया – अच्छा ग वैसे कंचन तुमेहीं ग्रहस्ति सें बाहर् भि दोस्ती करनी चाहिए ताकि तुम्हारा मन बहले तुम् भि किसी सें तालुक़ात रखकर जीवन केँ मजेलो
कंचन – हम् जैसी गरीब स्त्री सें कौन प्रेम करेगा सहाएब जौ पति केँ जुल्म कि मारी हैं…सिवाय दुख दर्द तक़लीफ़ केँ मिलता हि क्याँ हैं? एक् आप् हि हौ जोँ हमें समझते होँ औऱ मेरे बच्चे
काला साया – फिन भि तुम् इतनी जवान होँ तुम्हें सोचना चाहिए
कंचन – क्याँ करे हमारा मोहल्ले मे किसी कों पताचला तोँ गुनाह कि बात करने लगेंगे औऱ शायद मेरी बदनामी होँ जाए
Thanxx for your support bro I agree with you lekin ab too maine english mai likh diye agle update. Ab baar -2 language change achi nahii lagti.
काला साया – रात का सूपर हीरो(Completed) - Raat Ka Super Hero – New Episode
{UPDATE-03}
अचानक कंचन कां ठंड बहोत अधिक बिगड़ने लगा औऱ वोँ खाषने लगीउसे बेहद तिठुरती ठंड लगने लगी…कंचन कां बुराहाल देखकर काला साया नें उसेपास हि केँ एक् टूटे खतिए पे लाइत्न्े कों कहा….कंचन कों ऊसने विश्वास दिया कि वोँ रातभर पहरा देगा औऱ जैसे हि बारिश थामेगी वोँ लोग वहां सें निकल जाएँगे….थोड़े देर मे कंचन काँपने लगी उसका पूरा जिस्म ठंडा पड़ने लगा…काला सायाइसे देखकर समझ चुका थां कि शायद कंचन कों जबरदस्त ठंडलगी हैं औऱ ऐसे मौसम मे बीमार होना मतलब साक्षात मौत…काला साया जनता थां उसकेपास कंचन कों बचाने कां एक् हि उपाय हैं बेरेहाल वोँ संकोच करतेहुए हिम्मत जुटाकर अपने जीन्स कि ज़िप औऱ बेल्ट उतारने लगा…फिन ऊसने धीरे-धीरे सें कंचन कों हिलाया पऱ कंचन नें कोई जवाब नहि दिया…वोँ ठंड मे बेशुड बस तिठुर रही थि उसके दाँत कटकता रहे थें….काला साया नें अब अधिकदेर नहि कि ऊसने धीरे-धीरे सें कंचन केँ ब्लाउज औऱ पेटीकोट कों किसीतरह खोल डाला
औऱ कुछ हि देर मे कामवाली कंचन उनके सामने एकदम नंगी थि उसके मोटी चुचियां उसके कड़े निपल्स कों देखकर काला साया बर्दाश्त नहि कर पाया औऱ उसकेऊपर धीरे-धीरे सें सवार हौ गय़ा दोनों पूरी तरीके सें एक् दूसरे सें चिपके बिलकुल नंगे थें…धीरे-धीरे सें कंचन कि पेटीकोट कां नाराखोल केँ काला साया नें टांगों तक उसे खींच दि अब मांसल मोटी जांघें औऱ झाँतें डरचुत काला साया केँ सामने थि…ऊसने फिन ब्लाउज सें बाहर् निकले ऊन तरबूज जैसे साइज केँ छातियो कों काश क़ास्सके दबाना शुरुआत कर दिया औऱ वैसे हि उसके जिस्म केँ ऊपर चढ़के ऊपर नीचे होनेलगा उसका सख्त लन्ड चुत पे रगड़ खानेलगा
“आहह-आहह आहह-आहह”….कस्मती कंचन कि बेशुड आहें मंडी आँखें देखकर काला सायासमझ चुका थां कि उसे भि शायद सेक्स चढ़रहा हैं हूं धीरे-धीरे धीरे-धीरे नीचे होनेलगा औऱ फिन ऊसने अपने घुटनों कों मोधके खतिए केँ किनारे बैठकर दो उंगली कंचन कि चुत मे डाल दिया.अंगुल करने सें हि कंचन कों कोई फर्क नहि पड़ामगर जब उंगली कि रफ्तार तेज हुई तोँ कंचन स्वयं हि आहें भरनेलगी
काला सायासमझ चुका थां अब कंचन कों आनंदआने लगा हैं ऊसने जल्दी अपनीजीभ कंचन केँ चुत पे लगा दि.ऊस्की ऐसी हालत थि कि हूं बिना झातेंदार कंचन कि मांसल जांघों कि बीच कि चुत कों चाँतें बिनारही नहि पारहा थां ऊसने उसके पसीने भरे बदबूदार चुत मे मुँहडाल हि दिया औऱ फिन बारे हि चाव सें उसकेचुत केँ फहाँको मे मुँह डाले उसकेछेद कों जुबान सें टटोलता रहाइस मुख मैथुन केँ असर जल्द हि कंचन पे हुआ औऱ हूं बहोत ज़ोर सें साँस छोढ़ने लगी वोँ कसमसाने लगी.उसका तिठुरता जिस्म थाम गय़ा औऱ वोँ अब लंबी लंबी आहें भरनेलगी
इधर काला साया नें भि चुत मे उंगली करतेहुए उसके दाने औऱ चुत मे जबान लगाएरखी कंचना अब आंखें मुंडें सरइधर उधर मारने लगी “आहह-आहह उफ़फ्फ़ सस्स औरर्र ज़ोर सें हाीइ अल्ल्लह”……हूं कसमसाए जारही थि अब बहोत हि तेजतेज काला साया ऊस्की चुत मे जुबान डालने लगाअब धीरे-धीरे धीरे-धीरे चुत सें सफेदरस बाहर् आनेलगा जिसका नमकीन स्वादड चक्कर काला साया भधकने लगा…ऊसने जल्दी बिना डायरी किएफिन कंचन सें लिपट गय़ा औऱ ऊस्की फहुली रेशम झाँतें डर बालों केँ गुकचे मे लन्ड फहीराते हुएचुत केँ मुआने मे रखकर थोडा पुश किया…इस बार लन्ड अंदर धीरे-धीरे धीरे-धीरे सरकने लगा….साली कां पति उसेखूब चोदता हैं यहबात काला साया अच्छे सें भाप चुका थां…मगर लन्ड कि मोटाई दुगुनी थि इसलिये चुत कां दरवाज़ा केँ चीरने सें कंचन भि बीचबीच सेकेंड मे चीखने लगी….मगर अब रुकना किसके हाथ मे थां
अपना चेहरा कंचन केँ मुँह केँ ऊपर रखकर हूं नीचे जोरदार धक्के मारने लगा…अपने आप् हि कंचन कि चुत कां दरवाज़ा हाथ गय़ा औऱ ऊसने लन्ड कों समा लियाअब धक्के बहोत तेजतेज चलरहे थें ठप्प ठप्प करतेहुए दोनों केँ जाँघ एक् दूसरे सें लग्के आवाज़ कररहे थें अंडकोष चुत केँ मुआने पे तालियो कि तरहबज रहे थें.इतने मे काला साया नें फिनऊन दोनों छातियो कों खूब ज़ोर ज़ोर सें छूसा औऱ उसका रसपान करनेलगा इतनी मस्त कामुक स्त्री अपनी जीवन मे शायद काला साया नें कभी चोदा नहि थां.अब स्वयं पे स्वयं कंचन नें अपने टाँगें चौड़ी करलिट हि औऱ हवा मे आधा टाँग थां…औऱ मुट्ठी काससे अपनी पूरी मर्दानगी ताक़त सें काला साया ऊस्की चुत मारने लगादिन भर केँ घशट कि थकान कामवाली कि चुत मे समाप्त होनेजा रही थि
काला साया नें बिना डायरी किए औऱ तेज धक्के लगा डालें इसबार कंचनहोश मे आँ चुकी थि दोनों पसीने सें तरबतर होनेलगे आग कि लपटें घऱ कों औऱ गर्म करने लगी…लग हि नहि रहा थां कि अभि दोनों कपकपटि ठंड मे तिठुर रहे थें जबकि बाहर् बारिश तेज होँ चुका थां औऱ भारी तूफान चलरहा थां….इतने मे काला साया थकनेलगा औऱ ऊसने फच्छफछ कि आवाज़ कों संक एक् बार लन्ड कों चुत सें बाहर् खींचा…जैसे आत्म कार्ड मशीन सें बाहर् निकलता हैं ठीक ऊटने हि माखन कि तरह लन्ड चुत सें बाहर् निकलआया औऱ फिन फहूट फहूट केँ प्री-कम कि लहरें बहनेलगी इधर कंचन कि चुत भि पूरी गीली हौ चुकी थि उसकेरस हूं कबदोबार झड़ गयीँ, पता नाँ चला ऊस्की चीखें इसबात कि गवाह थि
कंचनअब भि हाँफरही थि मानो जैसे उसका सेक्स अभि समाप्त नहि हुआ थां…ऊसने क़ास्सके काला साया कों पकड़ लिये औऱ उसके चेहरे केँ इर्द गिर्द चूमने लगी…”आहह-आहह सें आहह-आहह एम्म”….काला साया नें क़ास्सके कंचन केँ होंठ चुस्सा डालें कंचन केँ हाथ काला साया केँ पीठ पे जैसे साँप कि तरह रैंगरहे थें…काला साया बारे हि फुर्सत सें उसकेगले कान औऱ गाल पर्र चुम्मा लेता गय़ा फिन उसके बालों पे हाथ फहरट एहुएउसे उल्टा लेटने लगा…कंचन कां जैसानशा टूट गय़ा मानो वैसे हि ऊस्की आँखें अधखुली दिखी कंचन कों जाने मे डायरी तोँ नहि लगी कि काला साया नें उसकेसंग क्याँ किया? पर्र अब करने कों औऱ बच्चा हि क्याँ थां? पहले काला साया रुका पर्र ऊसने मुस्कुराकर ऊस्की थोड़ी तारीफ कर दि औऱ बिना ऊस्की इजाज़त लिए उसके गान्ड मे लन्ड घिसता हुआ ऊस्की काली गान्ड केँ छेद मे लन्ड घुसाने लगा…खटिया कों दोनों ओर कंचन नें पकड़ लिया…मगर ठीक ऊटने हि मिनट मे काला साया अपनीथूक सें लन्ड कों गीला करके गान्ड कि दरार मे लन्ड डाल चुका थां…लन्ड धीरे-धीरे धीरे-धीरे जाने लगा…”आहह-आहह आहह-आहह आहिस्स्ट्टी सें आहह-आहह आहिस्ते काररो साहिब आहह-आहह”….कंचन पेंट केँ बाल लेटी आंखों मे दर्द केँ भाव दिखाते हुए ज़ोर सें बोलीं ऊस्क इयवाज़ घूँट गई, औऱ फिन खतिए कों दोनों ओर सें पकड़कर काला साया उसकेऊपर चढ़के लन्ड कों अंदर बाहर् करने लगा…कंचन नें दाँतों पे दाँतरख दिया…बहुत जोरदार चुदाई चलरही थि…ठप्प ठप्प आवाज़ फिन हसुरू होँ गई, …बारिश सामान्या होँ गय़ा थां इसलिये दोनों कि चीखें पूरे वातावरण मे न्गूँज़ रही थि…काला साया बहुत जोरदार तरीके सें कंचन कि गान्ड मारने लगा कंचन कां एक् तंग अपनेतंग केँ ऊपर रखकर उल्टा उसेखूब ज़ोर सें चोदने लगा
कंचन बहुतदेर तक खतिए केँ ऊपर पीसती रही ऊस्की छातिया खतिए केँ बीच मे दब गयीँ, थि दोनों पसीने पसीने होने लगे…”आहह-आहह सहीब्बब बहोत दर्रद्द होँ रहा हैं धीरे-धीरे मारो आहह-आहह मुझे तक़लीफ़ हौ रहीहे आहह-आहह”….काला साया मौका चोदना नहि चाहता थां ऊसने धीरे-धीरे सें कंचन कों कुल्हा सें उचकाया औऱ उसके चेहरे कों नीचेकर दियाअब हूं पूरी कुतिया केँ भट्टी मुद्रा मे थि…औऱ पीछे किसी सांड़ कि तरह काला साया ऊस्की गान्ड मारता रहा…उसके छेद सें कभी बाहर् कभी अंदरकभी बाहर् कभी अंदर लन्ड आँ रहाताज आँ रहा थां…इन देसी औरतों मे झेलने कि ताक़त बहोत होती हैं…काला साया बहुत ज़्यादा पागल होनेलगा औऱ बहुत बेदर्दी सें ऊस्की गान्ड मारता रहा.उसके जल्दी बादजब उसेलगा कि हूं अबबस निकल जाएगा तोँ ऊसने लन्ड बाहर् खींच लिया कंचन केँ मुख पे रख दिया कंचन नें पहलेमना किया पर्र काला साया केँ मज़बूती सें चेहरे पे पकड़े होने सें ऊसने एक् दोबार मुँह मे लेकरचोद दिया…पर्र काला सायामना नहि ऊसने उसके मुँह मे लन्ड घुसा दिया कंचन कों मज़बूरन चूसना हि पड़ा…पहले तौ उसे अच्छा नहि लगा पर्र धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसके चाँदी कों पीछे खिसकाके उसके सुपाडे कां स्वाद लेने मे कंचन कि छूते केँ बारफिन पानीचोद गयीँ, हूं वैसे हि बैठी खड़े काला साया केँ लन्ड कों चुस्ती रही औऱ फिनकुछ हि देर मे काला साया नें उसके चेहरे कों पकड़कर लन्ड कां पानी उसके पूरे चेहरे पे चोद दिया
काला साया कसमसाते हुए काँपते हुए पष्टपार गय़ा…औऱ वही नंगी कंचन केँ संगबगल मे बैठ गाया उसकारस अब भि लन्ड सें उगलरहा थां…एकटक कंचन ख़स्ते हुए काला साया कां जिस्म औऱ फिन उसके लन्ड कों देखने लगी.पसीना पसीना होँ गय़ा थां काला सायामगर कंचन थोड़ी मायूस भि थि
काला साया – मुझे मांफ करना कंचन मैंने तुम्हारे संग सेक्स कियाअसल मे हालत हि कुछऐसे थें अगर मे ऐसा नहि करता तोँ मगर तुमविश्वास रखो तुम्हें जब सहायता चाहिए होंगी तब तुम् याद करना मे हाज़िर हौ जाऊंगा
कंचन – बुरा तौ लगरहा हैं एक् विवाह शुदा स्त्री हूं साहिब कभी पराए मर्द केँ संगऐसा कुछ नहि करा…पर्र आपकेसंग जोँ हुआ मे उसेभूल जाऊंगी आप् भि भूलजाओ साहेब आपको मेरीवजह सें
काला साया – क्याँ बात करती होँ कंचन? तुममें हूं नमकीन स्वाद हैं जोँ क्सिी औऱ मे नहि
काला साया – रात का सूपर हीरो(Completed) - Raat Ka Super Hero - Next part mein bada twist
भइया पहले न्यू किस्सा केँ लिए बहोत-बहोत बधाईकथा पढ़कर बहोत मज़ाआया भइयाऐसे हि लिखते रहिए आपका मित्र????????????
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