Thriller आख़िरी सबूत - खतरनाक खेल - Complete Kahani All Parts
Thriller kahani आख़िरी सबूत
1
अगर अर्न्स्ट सिमेल कों पता होता कि वोँ फ़रसामार कां दूसरा शिकार बनने वाला हैं, तोँ उसने ब्लूशिप पर्र एक्-दो पैग औऱ चढ़ालिए होते।
बहरहाल, उसनेबार मे कॉफ़ी केँ संग ब्रांडी औऱ बर्फ़ केँ संग व्हिस्की ली थि, संग हि दूर कोने मे मौजूद ब्लीच-ब्लांड स्त्री सें निगाहें चार करने कि भि कोशिश करतारहा, मगर बेदिली सें। बजाहिर, वोँ कैनिंग फ़ैक्टरी कि कोईनई कर्मचारी थि। उसनेउसे पहलेकभी नहि देखा थां, जबकि उसेशहर मे मौजूद हसीनाओं कां अच्छा ख़ासा अंदाज़ा थां।
उसके दाएंडी जरनल कां रिपोर्टर हरमैन शाल्क थां जोँ कैलिनिन्ग्राद जैसी किसी स्थान पऱ सस्ते वीकएंड केँ लिएउसे पटाने कि कोशिश कररहा थां, औऱ फिनजब उसकी पिछली साम कि तफ़्तीश कां वक्तआया, तोँ ऐसालगा कि इस ज़िंदगी मे सिमेल सें बात करने वाला आख़री व्यक्ति शायद शाल्क हि रहा होगा।
मतलब, यह मानते हुए कि उसकाकाम तमाम करने सें पहले फ़रसामार नें उसेकोई मेसेज नहि दिया थां। जिसकी बहोत संभावना नहि थि, क्योंकि पिछले केस कि तरह, इस बार भि वार पीछे सें औऱ थोडा नीचे सें तिरछा पड़ा थां, इसलिये इसकी संभावना कम हि थि कि थोड़ी-बहोत बातचीत हुइ होगी।
“अहह, तोँ!" अपने गिलास कि आख़री बूंद खाली करने केँ बाद सिमेल नें कहा थां। मुझे बुढ़िया केँ पास वापस जानां चाहिए। "
यानी, अगर शाल्क कों ठीक सें याद थां। जोँ भि होँ, उसनेउसे इससेबाज रखने कि कोशिश कि थि। उसनेकहा थां कि अभि मुश्किल सें ग्यारह बजे हें औऱ कि रात अभि जवान हैं। मगर सिमेल दृढ़ थां।
यहसही शब्द थां। दृढ़। वोँ बार स्टूल सें उतरा। उसने अपना चश्मा दुरुस्त किया औऱ हमेशा कि तरह अपने गंजेसिर पऱ बालों कि उस दयनीय सि कूची पऱ हाथ फेरा-जैसे उससेकोई बेवकूफ बन जाएगा-कुछेक शब्द बड़बड़ाया औऱ चल पड़ा। शाल्क नें आखरीबार उसकीपीठ कि सफेद आकृति कों देखा थां जब वोँ दरवाज़े मे थोडा ठिठका थां औऱ शायदइस सोच मे हिचकिचा रहा थां कि किधरजाए।
अब सोचने पर्र यहबात अजीब सि लगती थि। सिमेल कों अपनेघऱ कां मार्ग तोँ पता थां।
मगर हौ सकता हैं वोँ वहांकुछ सैकंड खड़े रहकर अपने फेफड़ों कों रात कि ताज़ा हवा देना चाहता हौ। यह एक् गरमदिन रहा थां; गर्मियां अभि गई नहि थीं औऱ शामों मे एक् सौम्यता सि पैदा होँ गई थि जिसेकई महीनों केँ गर्मियों केँ सूरज नें औऱ भि समृद्ध कर दिया थां। समृद्ध औऱ परिष्कृत।
किसी नें कहा थां, जैसे बड़े-बड़े घूटों मे पीने केँ लिएबनी हों। यह रातें।
वास्तव मे, दूसरी ओर केँ सफ़र केँ लिए भि यहरात बुरी नहि थि, अगर किसी कों ऐसा सोचने कि इजाज़त होँ। डी जरनल मे शाल्क कां कॉलममूल रूप सें खेल औऱ थोड़े सें लोक-साहित्य सें संबंधित थां, मगर सिमेल सें मिलने वाला आख़री व्यक्ति होने केँ नाते, उसे इस प्रॉपर्टी डेवलपर केँ लिए मृत्युलेख लिखना थां, जिसे अचानक हमारे बीच सें छीन लिया गय़ा थां। जिसे हमारे समाज कां एक् स्तंभ कहाजा सकता थां जोँ कईसाल तक विदेश (प्रभावी टैक्स प्रबंध कि समानसोच वाले अन्य नागरिकों केँ संग कोस्टा डेलसोल मे, मगरयह उस बारे मे बात करने कां मौका नहि थां) मे रहने केँ बाद अभि अपनेवतन वापस लौटा थां, औऱ जौ अपने पीछे एक् पत्नि औऱ दो बड़े बच्चे छोड़कर गय़ा थां, पचाससाल कां हौ गय़ा थां मगर अभि भि ज़िंदगी केँ पूरे शबाब पर्र थां |
साम कि गंध ज़िंदगी सें भरपूर लगरही थि; वोँ हिचकिचाते हुए दरवाजे पऱ ठिठका।
क्याँ फिशरमैन्स स्क्वेयर औऱ फिनआगे बंदरगाह तक टहलने कां आइडिया अच्छा रहेगा?
इतनी जल्दघऱ जाने कां भि क्याँ फायदा? बेडरूम कि मीठी सि गंध औऱ ग्रीट कां भारीबदन उसकेमन मे कौंधा, औऱ उसने टहलने केँ लिएबढ़ जाने कां फैसला कर लिया। बस एक् छोटी सि टहल केँ लिए। भले हि औऱ कुछ हासिल नं हौ, मगररात कि गुनगुनी हवा हि अपने आपमें बहुत होगी।
वोँ लांगवेज तक चला गय़ा औऱ फिन बंजेसकर्क कि ओर मुड़ गय़ा। उसी टाइम, हत्यारे नें लाइजनर पार्क मे नींबू केँ पेड़ों कि छाया सें निकलकर उसका पीछा करना शुरुआत कर दिया। खामोशी सें औऱ सावधानी सें, एक् सुरक्षित दूरी बनाकर रखतेहुए औऱ अपनेरबर केँ तलवों सें बिना आवाज़ किए। आज कि रात उसकी तीसरी कोशिश थि, मगरफिन भि, बेसब्री कां कोई चिह्न नहि थां। वोँ जानता थां उसे क्याँ करना हैं औऱ उसकेमन मे जल्दबाजी कां नामो-निशान तक नहि थां।
सिमेल हॉयस्ट्राट पऱ चलतारहा औऱ फिन बंदरगाह कि ओर उतरने लगा। फिशरमैन्स स्क्वेयर पऱ वोँ थोडा धीमाहुआ औऱ रास्ते पऱ जड़े निर्जन पत्थरों पर्र धीरे धीरे चलताहुआ कवर्ड मार्केट कि ओरबढ़ गय़ा। दो महिलाएं डूम्स एली केँ नुक्कड़ पऱ बातों मे मसरूफ थीं, मगर उसनेउन पऱ कोई ध्यान नहि दिया। शायद वोँ उनके मुकाम केँ बारे मे ठीक सें नहि जानता थां, याँ शायद उसकेमन मे कुछ औऱ चलरहा थां।
याँ बस उसकी ख़्वाहिश हि नहि थि। जब वोँ घाट पर्र आया, तौ सिगरेट पीने केँ लिएकुछ मिनट कों रुका औऱ गोदी मे नावों कों डोलते हुए देखने लगा। हत्यारे नें भि मौका देखकर चौक केँ दूसरी ओर गोदाम कि छाया मे सिगरेट सुलगा ली। वोँ सिगरेट कों अपने हाथों कि कटोरी मे अच्छी तरह छिपाए रहा ताकि उसके शोले कि वजह सें वोँ दिखाई नं देजाए औऱ इस पूरे टाइम मे उसने अपनीनजर शिकार सें एक् सैकंड कों भि नहि हटाई।
जब सिमेल नें अपनी सिगरेट कों पानी मे फेंका औऱ जंगल कि ओर बढ़ा, तोँ हत्यारा जान गय़ा कि आज कि रात हि वोँ रात हैं।
बेशक यहां एस्प्लेनेड औऱ शहर केँ उस भाग-रिकेन-केँ बीच मात्र तीनसौ गज मे पेड़ थें जहां सिमेल रहता थां, औऱ रास्ते मे बहोत सि लाइटें थीं;मगर सारी हि लाइटें काम नहि कररही थीं औऱ तीनसौ गज एक् बहोत लंबी दूरी साबित होँ सकती थि। जोँ भि हौ, जब सिमेल नें अपने पीछे एक् आहिस्ता सें कदम कि आवाज़ सुनी, तौ वोँ जंगल केँ अंदर बमुश्किल पचासगज गय़ा होगा औऱ चारों ओरघना अंधेरा थां।
गरम औऱ उम्मीदों सें भरपूर, मगर जैसा कि कहा गय़ा, घना।
उसे शायदडर महसूस करने कां भि वक्त नहि मिला थां। औऱ अगर मिला भि थां, तौ बस आखरी सैकंड केँ अंश मे। रेजर जैसी तीखीधार पीछे सें घुसी, दूसरी औऱ चौथी वर्टिबरा केँ बीच औऱ तीसरी वर्टिबरा केँ पार रीढ़ कि हड्डी, ग्रासनली औऱ कैरोटिड धमनी कों काटती हुई निकल गई। वारअगर आधाइंच औऱ गहरा होता तौ शायद उसकेसिर कों बदन सें पूरीतरह अलगकर गय़ा होता।
जौ शायद दर्शनीय होता, मगर उससे नतीजे पर्र शायद हि कोई फर्क पड़ता।
किसी भि कल्पनीय मानदंड केँ अनुरूप, अर्न्स्ट सिमेल जमीन पर्र गिरने सें पहले हि मर चुका होगा। उसका चेहरा पूरी ताकत सें बहुत चलते-फिरते कंकरीले रास्ते पर्र गिरा जिससे उसका चश्मा टूटा औऱ अनगिनत गौणघाव दे गय़ा। खून उसकेगले सें, ऊपर सें औऱ नीचे सें, बहरहा थां, औऱ जब हत्यारे नें सावधानीपूर्वक उसे झाड़ियों मे घसीटा, तब भि वोँ एक् हल्की सि घरघराहट सुन सकता थां। वोँ वहां खामोशी सें बैठारहा जबकि इस दौरान चार-पांच नौजवान वहां सें गुजरे, फिन उसनेघास मे अपने हथियार कों पोंछा औऱ बंदरगाह कि दिशा मे वापसचल दिया।
Thriller आख़िरी सबूत - खतरनाक खेल – New Episode
2
दूर-दूर तक रेत हि रेत थि।
दूर तक पसरी, हमेशा कि तरह हि। फीके सें आसमान केँ नीचे शांत, धूसर समुद्र। पानी केँ बगल मे ठोस, नम रेत कि एक् पट्टी जिस पऱ वोँ स्थिर गति बनाएरख सकता थां। संग मे चलता एक् अधिक सूखा, धूसर-सफेद मैदान, जहां तटीयघास औऱ हवा सें त्रस्त झाड़ियां फैली हुईँ थीं। खारी दलदलों केँ अंदर पक्षी अलसाए सें बड़े-बड़े दायरों मे उड़ते हुएहवा कों अपनी दुःखी चीखों सें भररहे थें।
वान वीटरेन नें अपनी घड़ी देखी औऱ रुक गय़ा। वोँ एक् लम्हे कों ठिठका। दूर धुंध मे वोँ सग्रेजविन केँ चर्च केँ शिखर कों पहचान रहा थां, मगर वोँ बहुतदूर थां। अगर वोँ चलतारहे, तोँ चौक केँ कैफे मे एक् बीयर लेकर बैठने मे उसे यकीनन एक् घंटा लगने वाला थां।
यह कोशिश किए जाने लायक थां, मगरअब जबकि वोँ रुक गय़ा थां, तौ उसकेलिए स्वयं कों राजीकर पाना मुश्किल होँ रहा थां। तीनबज रहे थें। वोँ दोपहर का खाना केँ बाद निकला थां-याँ ब्रंच केँ बाद; जोँ इस पऱ निर्भर करता हैं कि इसके बारे मे आपका क्याँ नजरिया हैं। जौ भि होँ, एक् बजे, एक् औऱ ऐसीरात केँ बादजब वोँ लेट तोँ जल्द गय़ा थां मगरभोर होने तक सो नहि पाया थां। जब सवेरे कि सफेदी रेंगती हुइ बढ़ती आँ रही थि, तोँ अपने ढीले सें डबलबेड पऱ करवटें बदलते हुए उसकेलिए यहसमझ पाना मुश्किल हौ रहा थां कि उसकी चिंताओं औऱ बेचैनी कां मूल कारण क्याँ हैं। बहोत मुश्किल थां।
वोँ तीन हफ़्ते सें छुट्टी पर्र थां, जौ उसके स्टैंडर्ड सें बहुत लंबा टाइम तोँ थां मगर असाधारण नहि थां औऱ जैसे-जैसे दिन गुजरते गए, कम सें कम पिछले हफ्ते मे, उसके रोजाना केँ रुटीन मे थोडा सां विलंब होता गय़ा। बसचार दिन केँ बाद वोँ फिन अपने दफ़्तर कों लौट जाएगा औऱ उसे पूरा अहसास थां कि जब वोँ दफ़्तर कों लौटेगा, तोँ उसकीचाल मे बहोत उछाह नहि होगा। फिर भी उसने आराम केँ अलावा कुछखास नहि किया थां। बीच पऱ लेटा पढ़ता रहा थां। सग्रेजविन मे कैफे मे बैठारहा थां, याँ नजदीक हि हैलेन्सरॉट मे। इस अंतहीन रेत पऱ इधर सें उधर टहलता रहा थां |
एरिच केँ संग यहां पहला हफ़्ता एक् गलतीरहा थां। दोनों कों पहले हि दिन इसका अहसास हौ गय़ा थां, मगरइस व्यवस्था कों आसानी सें बदला नहि जा सकता थां। एरिच कों पेरोल पऱ इस शर्त केँ संग बाहर् आने दिया गय़ा थां कि वोँ अपने पिता केँ संगतट केँ इस सुदूर टुकड़े पर्र हि रहेगा। उसकीसजा केँ अभि दस महीने बाकी थें, औऱ पिछली बारजब वोँ पेरोल पऱ बाहर् आया थां तोँ नतीजा बहोत अच्छा नहि रहा थां।
उसने समुद्र कि ओर देखा। समुद्र उतना हि शांत औऱ अथाह थां जितना पिछले पूरे सप्ताह मे रहा थां। जैसेकोई भि चीजकोई प्रभाव डाल हि नहि सकती थि, हवा भि नहि। तट पर्र आकर प्राकृतिक मौत मरती लहरें ऐसी लगतीथीं जैसे बिना जिंदगी औऱ आशा केँ लंबी दूरियां तय करकेआई हों।
यह मेरा समुद्र नहि हैं, वान वीटरेन नें मन हि मन सोचा।
जुलाई मे, जब उसकी छुट्टी केँ दिन नजदीक आँ रहे थें, तोँ उसे एरिच केँ संग केँ इन दिनों कां बेचैनी सें प्रतीक्षा थां। औऱ जबयहदिन आँ गए, तौ वोँ इनके ख़त्म होने केँ लिए बेचैन थां, ताकि वोँ शांति सें रहसके औऱ अब, तन्हाई केँ एक् दर्जन दिन औऱ रात केँ बादउसे वापसकाम पर्र पहुंचने सें ज़्यादा किसीचीज कि ख़्वाहिश नहि थि।
याँ बात इतनी हि सीधी थि? याँ शायदयह एक् सुविधाजनक तरीका थां। यह बताने कां कि क्याँ हौ रहा थां - वोँ सोचने लगा। थां कि क्याँ कोईऐसा बिंदु आता हैं जिसके आगे हम् किसीचीज केँ आने कां नहि, बल्कि जौ गुजर गय़ा हैं उससेबच निकलने कां प्रतीक्षा करते हें? बच निकलने कां। सभीकुछ बंद करकेआगे बढ़ जानां चाहते हें, मगरफिन सें शुरुआत करने कां प्रतीक्षा नहि करते। एक् ऐसेसफर कि तरह जिसका आनंद प्रारंभिक बिंदु सें तयकरली गई दूरी केँ अनुपात मे कम होता जाता हैं, जिसकी मिठास लक्ष्य केँ नजदीक आने केँ संग-संग कड़वाहट मे बदलती जाती होँ।
बच निकलो, उसने सोचा। अंत करदो इसका। दफ़्न करदोइसे।
इसी कों शिखर सें उतरना कहते हें। आगे हमेशा एक् औऱ समुद्र होता हैं।
उसने एक् अहहभरी औऱ अपना स्वेटर उतार लिया। उसे अपने कंधों पऱ बांधा औऱ पीछे लौटने लगा। अब वोँ हवा केँ खिलाफ चलरहा थां औऱ उसे अहसास हुआ कि वापसघऱ पहुंचने मे उसे अधिक टाइम लगेगा। अच्छा हि हैं कि इसतरह उसेइस सामकुछ अतिरिक्त घंटेमिल जाएंगे। घऱ कों दुरुस्त करना थां, फ्रिज खाली करना थां, टेलीफोन कां प्लग निकालना थां। वोँ कल सुभह जल्द निकल जानां चाहता थां। बिनाबात पड़े रहने कां कोई फायदा नहि थां।
उसने ठोकर मारकर एक् खाली पड़ी प्लास्टिक कि बोतल कों रेत पऱ उछाल दिया।
कल सें पतझड़ शुरुआत होँ जाएगा, उसने सोचा।
जब वोँ गेट पऱ आया तौ उसे टेलीफोन कि आवाज़ सुनाई देनेलगी। इस उम्मीद मे कि उसकेघऱ मे घुसने तक टेलीफोन बजनाबंद हौ जाएगा, आप् हि आप् वोँ औऱ धीरे-धीरे चलनेलगा, उसने अपनेकदम छोटेकर दिए, अपनी चाबियों सें खेलने लगा। पऱ कोई फायदा नहि। दुःखी खामोशी कों पूरे जिद्दीपन सें काटती हुई आवाज़ अब भि आँ हि रही थि। उसने रिसीवर उठा लिया।
"हैलो?"
"वान वीटरेन?"
"यह तोँ निर्भर करता हैं। "
"हाहा। हिलर हूं। कैसाचल रहा हैं?"
वान वीटरेन नें रिसीवर कों पटक देने कि ख़्वाहिश कों किसीतरह दबाया।
"बहोत अच्छा, धन्यवाद। बस मेराकुछ ऐसा ख्याल थां कि मेरी छुट्टी सोमवार सें पहले ख़त्म नहि हौ रही हैं। "
"बिल्कुल सही! मैंने सोचा कि तुम् शायदकुछ दिन औऱ लेना चाहो?"
वान वीटरेन कुछ नहि बोला।
"मुझे यकीन हैं कि अगर मौका मिले तौ तुम् कुछ टाइम औऱ तट पर्र रहना चाहोगे, हैं नां?"
"."
"शायद एक् हफ़्ता औऱ? हैलो?"
"अगर आप् मुद्दे पर्र आँ जाएं तौ बड़ी मेहरबानी होगी, सर, " वान वीटरेन बोला।
पुलिस चीफ कों खांसी कां दौरा सां पड़ गय़ा औऱ वान वीटरेन नें ठंडी सांसभरी।
"हां, दरअसल कालब्रिंजेन मे कुछहुआ हैं। वोँ उस कॉटेज सें बीस याँ तीसमील हैं जहां तुम् ठहरेहुए हौ; पता नहि तुम् उस स्थान सें परिचित हौ याँ नहि। बहरहाल, हमसे सहायता करने कों कहा गय़ा हैं। "
"मामला क्याँ हैं?"
"हत्या। दो हत्याएं। कोई पागल फरसे याँ ऐसी किसीचीज सें लोगों केँ सिर काटता घूमरहा हैं। आज केँ अखबार इससेभरे पड़े हें, मगर शायद तुमने--"
"मैंने तीन हफ्ते सें अखबार नहि देखा हैं, " वान वीटरेन नें कहा।
"आखरी-यानी दूसरी हत्या-कल हुई, बल्कि परसों। हमें उन्हें कुछ कुमुक भेजनी पड़ी हैं, औऱ मैंने सोचा कि चूंकि तुम् उसी इलाके मे होँ, तोँ."
"बहोत-बहोत धन्यवाद। "
"फिलहाल मे यह तुम् पर्र छोड़रहा हूं। अगले हफ्ते मे मुंस्टर याँ राइनहार्ट कों भेजूंगा। अगरतब तक तुम् इसे नहि सुलझा पाए तौ। "
"पुलिस चीफकौन हैं? मेरा मतलब, कालब्रिंजेन मे। "
हिलरफिन सें खांसा।
"उसकानाम बॉजेन हैं। मेरे ख़्याल सें तुम् उसे नहि जानते होगे। बहरहाल, उसके रिटायर होने मे कुल एक् महीना बाकी हैं औऱ इससमय अपने सामने यहकेस आँ जाने सें वोँ बहोत खुश नहि लगता हैं। "
"कितनी अजीबबात हैं, " वान वीटरेन नें कहा।
"तोँ मे मानरहा हूं कि तुम् कल सीधे वहीं जाओगे?" हिलरबात कों ख़त्म कररहा थां। इसतरह तुम्हें अनावश्यक रूप सें दोबार सफर नहि करना पड़ेगा। वैसे क्याँ पानी अभि भि इतनागरम हैं कि तैराजा सके?"
"मे सारे-सारे दिन छपाके हि तोँ मारता रहता हूं। "
"वाकई। वाकई। खैर, मे उन्हें मोबाइल करकेबता दूंगा कि तुम् कल दोपहर तक पहुंच रहे होँ। ठीक हैं?"
"मुझे मुंस्टर चाहिए, " वान वीटरेन नें कहा।
"मे देखता हूं क्याँ कर सकता हूं, " हिलर नें कहा।
वान वीटरेन नें रिसीवर रखा औऱ कुछदेर वहीं खड़ा टेलीफोन कों घूरता रहा औऱ फिन उसने प्लग निकाल दिया। अचानक उसेयाद आया कि वोँ खानां लेना तौ भूल हि गय़ा। धत!
उसे अभि यह क्यूं यादआया? उसे तौ भूख भि नहि लगी थि, शायद इसका ताल्लुक जरूर हिलर सें होगा। उसने फ्रिज सें एक् बीयर निकाली औऱ बरामदे मे जाकर एक् डैक चेयर पर्र बैठ गय़ा।
फरसा हत्यारा?
उसनेकैन खोली औऱ एक् लंबे सें गिलास मे बीयर पलटते हुए सोचने लगा कि क्याँ उसनेइस तरह कि हिंसा पहले भि कभी देखी हैं। वोँ तीस साल-इससे भि ज्यादा-सें एक् पुलिस अफसर थां मगर दिमाग़ कि पूरी तलाशी औऱ छानबीन केँ बाद भि, वोँ अपनी यादों कि मटमैली गहराइयों सें किसी फरसा हत्यारे कों नहि निकाल सका।
शायद टाइम आँ चुका हैं, उसने बीयर कि एक् चुस्की लेतेहुए सोचा।
Thriller आख़िरी सबूत - खतरनाक खेल – New Episode
3
"मिसेज सिमेल?"
स्थूलकाय स्त्री नें दरवाजा पूराखोल दिया।
"प्लीज अंदरआएं। "
बियाटे मोएर्क नें वही किया जोँ उससेकहा गय़ा थां औऱ उसने सहानुभूतिपूर्ण दिखने कि पूरी कोशिश कि। उसने अपना हल्का ओवरकोट मिसेज सिमेल कों पकड़ाया, जिन्होंने उसे पूरी औपचारिकता केँ संगहॉल मे एक् हैंगर पर्र टांग दिया। फिन वोँ अपनी मेहमान कों घऱ मे लेँ गईं। संग हि वोँ अपनीतंग काली ड्रेस कों भि, जिसने यकीनन कभी बेहतर दिन देखे होंगे, घबराहट मे खींचती जारही थीं। बड़े सें लिविंग रूम मे भारी-भरकम सोफों केँ बीचरखी स्मोक्ड-ग्लास कि टेबल पर्र कप कॉफ़ी पेश कि गई। मिसेज सिमेल एक् सोफे मे धंस गई थीं।
"मेरा ख़्याल हैं कि आप् पुलिस अफसर हें?"
बियाटे मोएर्क बैठ गई औऱ अपना ब्रीफकेस उसने सोफे पर्र अपनेपास हि रख लिया। वोँ इस प्रश्न कि आदी थि। बल्कि उसे इसकी उम्मीद थि। बजाहिर लोगों कों एक् वर्दीधारी पुलिसवाली कों स्वीकार करने मे दिक़्कत नहि होती थि, मगरइस तथ्य सें समझौता करना एक् अलगबात लगती थि कि वर्दी पहनना काम कां जरूरी भाग नहि हैं। ऐसा केसे हौ सकता थां कि एक् औरत फैशनेबल औऱ खूबसूरत कपड़े पहने औऱ फिन भि पुलिस कि ड्यूटी करे?
क्याँ अभि भि अहमबात यही हैं? कि औरतों सें पूछताछ करना अधिक मुश्किल हैं? मर्द अक्सर शर्माते हें, मगरखुल जाते हें। औरतें सीधे मुद्दे पर्र आँ जाती हें, मगरसंग हि खुलकर कुछ नहि बताती हें।
जोँ भि होँ, उसे विश्वास थां कि मिसेज सिमेल समस्या नहि होंगी। वोँ सोफे पऱ बैठी बुरीतरह हांफरही थीं। वोँ विशाल औऱ बेडौल थीं, उनकी आंखें सूजी हुइ थींमगर उनमें भोलापन थां।
"जीहां, मे एक् पुलिस इंस्पेक्टर हूं। मेरानाम बियाटे मोएर्क हैं। मुझे अफसोस हैं कि मुझे। जोँ कुछहुआ उसके इतने जल्दबाद हि आपको कष्ट देनापड़ रहा हैं। क्याँ आपकेसंग कोई औऱ रहता हैं?"
"मेरी बेहन, " मिसेज सिमेल नें कहा। "वोँ अभि स्टोर तक गई हैं। "
बियाटे मोएर्क नें सिर हिलाया औऱ अपने ब्रीफकेस सें एक् नोटबुक निकाली। मिसेज सिमेल नें कप कॉफ़ी पलटी।
“चीनी?"
"नहि, धन्यवाद। क्याँ आप् बता सकती हैं कि पिछले मंगलवार कि साम कों क्याँ हुआ थां?"
"मे पहले हि। मे इस बारे मे कल एक् औऱ पुलिस अफसर सें बातकर चुकी हूं। "
"हां, चीफ इंस्पेक्टर बॉजेन सें। मगरअगर आप् एक् बारफिन सें बता सकें तौ मे आभारी रहूंगी। "
"मे समझ नहि पारही कि क्यूं। मेरेपास कहने कों कुछखास नहि थां। "
"शायद आपने बताया थां कि आपके पति करीबआठ बजे बाहर् गए थें। "
मिसेज सिमेल केँ मुंह सें एक् सुबकी निकली, मगरफिन उन्होंने स्वयं कों संभाल लिया।
"हां। "
"वोँ किसलिए बाहर् गए थें?"
"उन्हें बिजनेस सें संबंधित एक् व्यक्ति सें मिलना थां। शायद ब्लूशिप मे। "
"क्याँ वोँ अक्सर वहां बिजनेस करते थें?"
"कभी-कभार। वोँ रियल एस्टेट मे हें। थें। "
"मगर हमें लगता हैं कि आपके पति ब्लूशिप मे अकेले थें। "
"वोँ नहि आँ सका होगा। "
"कौन?"
"उनका बिजनेस संपर्क। "
"नहि, शायद नहि। मगरजब यह शख़्स नहि आया, तोँ आपके पति घऱ नहि आए?"
"नहि। नहि, शायद उन्होंने सोचा होगा कि अब जबकि वोँ वहीं हें तोँ डिनर भि कर हि लें। "
"उन्होंने पहले नहि खाया थां?"
"नहि, डिनर नहि खाया थां। "
"आप् जानती हें वोँ कौन थां?"
"मे समझी नहि। "
"जिनसे वोँ मिलने वाले थें। "
"नहि। नहि, मे अपने पति केँ बिजनेस मे कभी हस्तक्षेप नहि करती हूं। "
"मे समझ सकती हूं। "
मिसेज सिमेल नें केकडिश कि ओर इशारा किया औऱ स्वयं एक् चॉकलेट बिस्कुट उठा लिया।
"आपकोकिस वक़्त उनकेघऱ आने कि उम्मीद थि?"
"करीब-करीब। शायद, कोई आधीरात कों। "
"आप् स्वयं किस वक़्त सोईथीं?"
"आप् यह क्यूं जानना चाहती हें?"
"माफ करना, मिसेज सिमेल, मगर आपके पति कि हत्या हुइ हैं। हमेंसब तरह केँ प्रश्न पूछने होंगे। अगर हम् ऐसा नहि करेंगे, तौ हम् उस आदमी कों कभी नहि ढूंढ़ सकेंगे जिसने यह किया हैं। "
"मेरे ख़्याल सें यहवही हैं। "
"वहीकौन?"
"जिसने जून मे एगर्स कों मारा थां। "
बियाटे मोएर्क नें सिर हिलाया।
"हां, साक्ष्य ऐसा दर्शाते तौ हें। मगरऐसा भि हौ सकता हैं कि उसी सें कोई प्रेरित हुआ होँ। "
"प्रेरित?”
"हां, कोई ऐसा जिसने वही तरीका अपनाया होँ। कुछ नहि पता, मिसेज सिमेल। "
मिसेज सिमेल नें थूक निगला, औऱ एक् औऱ बिस्कुट उठा लिया।
"आपके पति केँ कोई दुश्मन थें?"
मिसेज सिमेल नें इंकार मे सिर हिला दिया।
"मित्र औऱ परिचित बहोत थें?"
"हां."
"शायद बिजनेस सें संबंधित बहोत सें ऐसे संपर्क हों जिन्हें आप् बहोत अच्छी तरह नं जानती हों?"
"हां, बहोत। "
बियाटे मोएर्क खामोश हुई औऱ उसनेकप कॉफ़ी कां एक् घूंट लिया। कप कॉफ़ी बड़ी कमजोर सि थि। उसमें चीनी केँ दो ढेले औऱ मिलादिए जाते तौ कहना मुश्किल होँ जाता कि यह हैं क्याँ।
"मुझे आपसे कहना होगा कि मुझेकुछ ऐसे प्रश्न पूछने दें जौ आपको थोड़े धृष्ट सें लग सकते हें। उम्मीद करती हूं कि आप् समझती हें यह मामला कितना गंभीर हैं औऱ कि आप् इनके जवाब पूरी ईमानदारी सें देंगी। "
घबराहट मे मिसेज सिमेल नें अपनाकप तश्तरी सें रगड़ दिया।
"आप् अपनी विवाह केँ बारे मे क्याँ कहेंगी?"
"मतलब?"
"आपकी शादीशुदा जीवनकिस तरह कि थि? अगर मे गलत नहि हूं, तोँ आपकी विवाह कों तीससाल होँ चुके हें। "
"बत्तीस। "
"बत्तीस, हां। आपके बच्चे घऱ छोड़कर जा चुके हें। अभि भि आपका बहुत संपर्क थां?"
"आपका मतलब बच्चों सें?"
"नहि, आपके पति सें। "
"हां। मतलब, मुझे तौ ऐसा हि लगता हैं। "
"आपके सबसे करीबी मित्र कौन हें?"
"साथी? बोडेलसेन परिवार औऱ लेजने परिवार, औऱ हां, क्लिंगफोर्ट परिवार। औऱ जाहिर हैं, परिवार। मेरी बेहन औऱ उसका पति। अर्न्स्ट कां भइया औऱ बेहन। औऱ कहने कि जरूरत हि नहि कि हमारे बच्चे। आप् उनके बारे मे क्यूं जानना चाहती हें?"
"क्याँ आप् जानती हें कि आपके पति कां किसी औऱ स्त्री केँ संग संबंध थां?"
मिसेज सिमेल चबाते-चबाते रुककर ऐसे देखने लगीं जैसे वोँ प्रश्न कों समझ हि नहि पाईहों।
"किसी औऱ महिला केँ संग?"
"याँ कई औरतों केँ संग। मतलब, वोँ बेवफा रहेहों। "
"नहि." उन्होंने आहिस्ता सिर इंकार मे हिलाया। "वोँ कौन होँ सकती हैं? उन्हें कौन स्वीकार करता?"
बेशकयह चीजों कों देखने कां एक् नजरिया थां। बियाटे मोएर्क नें अपनी मुस्कुराहट कों दबाने केँ लिएकप कॉफ़ी कां घूंट लिया।
"पिछले कुछ वक्त मे किसीचीज पऱ आपका ध्यान गय़ा ? मेरा मतलब, आपके पति केँ व्यवहार मे कुछ असामान्य सां?"
"नहि। "
"याँ औऱ कुछऐसा जौ आपको ध्यान आता होँ?"
"नहि। ऐसा क्याँ होँ सकता हैं ?"
“पता नहि, मिसेज सिमेल, मगरअगर आप् पिछले कुछ हफ़्तों केँ बारे मे सोच सकें, तौ इससे बड़ी सहायता मिल सकती हैं। शायद आपकोकुछ याद आँ जाए। मसलन, क्याँ आप् इन गर्मियों मे बाहर् गई थीं?"
"बस जुलाई मे दो हफ़्ते कों। एक् पैकेज हॉलिडे पऱ, मगर.मगर हम् अलग-अलग जगहों पर्र गए थें। मे एक् साथी केँ संगकोस गई थि। अर्न्स्ट अपने एक् यार केँ संगगए थें। "
"कोस?"
"नहि, कोस नहि। "
"तोँ फिन कहां?"
"मुझेयाद नहि। "
"समझी। औऱ उसके अलावा आप् घऱ पऱ हि थें?"
"हां, अलावा ऐसे एकाधदिन केँ जब हम् वैनेसा-हमारी नाव-पऱ गए थें। हम् कभी-कभी नौकायन केँ लिए जाते हें औऱ रात कों वहीं कहींरुक जाते हें। "
बियाटे मोएर्क नें सिर हिलाया।
"मे समझ सकती हूं। मगर पिछले कुछ टाइम मे ऐसाकुछ नहि थां जिसे लेकर आपके पति परेशान रहेहों?"
"कोईनए साथी याँ परिचित नहि?"
"नहि."
"उन्होंने आपको किसी असामान्य चीज केँ बारे मे बताया याँ इशारा नहि दिया?"
"नहि। "
बियाटे मोएर्क नें एक् गहरी सांसली औऱ अपनापैन रख दिया। वोँ सोफे पऱ पीछेटिक गई।
"औऱ बिजनेस कैसाचल रहा थां?"
"ठीक थां, " मिसेज सिमेल नें थोडा चकित होतेहुए पूछा। "ठीक हि थां, शायद."
जैसे औऱ कुछ संभव हि नहि थां, बियाटे मोएर्क नें अपनी स्कर्ट सें कुछ टुकड़े झाड़ते हुए सोचा।
"आप् काम करती हें, मिसेज सिमेल?"
वोँ हिचकिचाने सि लगीं।
"मे कभी-कभी अपने पति केँ दफ़्तर मे उनकी सहायता करतीहुं। "
"क्याँ करने मे?"
"इधर-उधर कि चीजें। स्थान कों दुरुस्त करना। फूल औऱ सफाई, वगैरा."
"मे समझ गई। दफ़्तर ग्रोट प्लेन मे हैं नां?"
मिसेज सिमेल नें इकरार मे सिर हिलाया।
"आप् आखरीबार वहांकब गई थीं?"
"आखरीबार? मेरा ख़्याल हैं मई मे। "
बाप रे, आप् तौ बड़ी व्यस्त रहती हें! बियाटे मोएर्क नें सोचा।
उसनेघऱ मे भि चारों तरफ एक् नजर डाली थि, खासकर इसलिये कि बॉजेन नें उससेऐसा करने कों कहा थां। हांफती-कांपती मिसेज सिमेल उसेघऱ दिखारही थीं औऱ बियाटे मोएर्क कों उनकेलिए थोडा अफसोस होँ रहा थां कि उन्हें इतने बड़े-बड़े रूम कि देखभाल करनी पड़ती हैं। भले हि वहां उनकी सहायता केँ लिए एक् सफाई वाली मौजूद थि।
समझ पाना आसान नहि थां कि इससे क्याँ फायदा होगा, मगर कत्ल कि तफ़तीशों मे तौ ऐसा हि होता थां। मकसद होता थां हर संभव किस्म केँ तथ्य औऱ जानकारियां इकट्ठा करना-जितने अधिकहों उतना अच्छा-औऱ उन्हें किसी किस्म कां सुराग मिलने केँ टाइम केँ वक़्त केँ लिए फाइल करके रेडी रखना, क्योंकि उस टाइम एक् छोटी सि बारीकी भि पूरी पहेली। केस.राज, याँ आप् इसे जोँ भि कहना चाहें। कि चाबी हौ सकती हैं।
बियाटे मोएर्क छहसाल सें ज़्यादा सें – जब वोँ गोएरलिच मे प्रोबेशन पर्र थि - किसी हत्या केँ केस कां भाग नहि रही थि, औऱ तब भि वोँ एक् संदेशवाहक सें अधिककुछ नहि थीः दरवाजों पऱ दस्तक देना, मेसेज पहुंचाना, जमा देने वाली ठंडी कारों मे बैठकर कुछ होने कां प्रतीक्षा करना जौ कभी नहि होता थां।
मगरअब उनके सामने एक् फरसा हत्यारा थां। उसके, क्रोप्के केँ औऱ डिटेक्टिव चीफ इंस्पेक्टर बॉजेन केँ। जाहिर हैं यहसभी बड़ा अजीबलग रहा थां। शायद किसी बड़ीतोप कों उनकी सहायता केँ लिए भेजाजा रहा थां मगरमूल रूप सें यह उन्हीं कां केस थां। स्थानीय लोग उम्मीद करते थें कि वोँ इसेहल करेंगे।
इस पागल कों गिरफ़्तार करेंगे।
औऱ जब उसने क्रोप्के औऱ बॉजेन केँ बारे मे सोचा, तोँ उसेलगा कि कामयाबी केँ लिए बहोत कुछ स्वयं उस पर्र निर्भर करता हैं।
"आप् बेसमेंट भि देख्ना चाहेंगी?"
उसनेहां मे सिर हिलाया औऱ मिसेज सिमेल हांफती-कांपती सीढ़ियां उतरने लगीं।
जून मे, जब पहली हत्या हुई थि, तब वोँ टैट्राबर्जेन मे एक्
कॉटेज मे जानोस केँ संग छुट्टी पऱ थि। अब वोँ उससे संबंध तोड़ चुकी थि, याँ कम सें कम, उससे फासला बनाएहुए थि। वोँ केस केँ पहलेकुछ दिनचूक गई थि, औऱ भले हि वोँ इसेकभी स्वीकार नहि करेगी, मगर वोँ इसे लेकर बहोत परेशान रही थि।
हेन्ज एगर्स। उसने इसके बारे मे सभीकुछ पढ़ा थां औऱ उसने स्वयं कों इसकाभाग बना लिया थां। उसने बाकी कि गर्मी भर पूछताछ औऱ छानबीन मे हिस्सा लिया, खाके बनाए औऱ पहेलियां बूझती रही। मगर वोँ सबसे पहलेयह मानने कों रेडी थि कि उन्हें बहोत कामयाबी नहि मिली थि। घंटों कि पूछताछ औऱ सोच-विचार केँ बाद, वोँ किसी पर्र हल्का सां संदेह तक नहि करसके थें। वोँ औऱ क्रोप्के दोनों अभि तक ओवरटाइम केँ इतने घंटेलगा चुके थें कि उन्हें एक् महीने कि अतिरिक्त छुट्टी मिलनी चाहिए थि औऱ वोँ शायद इसकी कीमत जरूर वसूलेगी, बशर्ते कि पहले वोँ कम्बख़्त फरसामार मिलजाए।
अखबारों मे उसेयही कहाजा रहाथाः फरसामार।
औऱ अब उसनेफिन सें हमला बोला थां।
उसकामन कहीं औऱ थां औऱ वोँ मिसेज सिमेल केँ पीछे-पीछे पूरेघऱ कां दौराकर रही थि। छह कमरे औऱ एक् किचन, अगर उसनेसही गिनती कि थि, दो लोगों केँ लिए। अब बस एक् बचा थां। औऱ बेसमेंट मे एक् पूलकक्ष औऱ एक् सॉना। बरामदा औऱ जंगल केँ सामने एक् बड़ाबाग। रियल एस्टेट? बॉजेन नें क्रोप्के कों सिमेल कि कंपनी कि खोजबीन करने कां काम सौंपा थां। वैसेयह बहोत बुरा आइडिया नहि थां। उन्हें जरूरकुछ नं कुछ मिलेगा।
मगर साला हेन्ज एगर्स औऱ अर्न्स्ट सिमेल मे कौन सि चीज समान होँ सकती थि?
कहने कि जरूरत नहि थि कि सिमेल कि लाश मिलने केँ बाद सें हि यह प्रश्न लगातार उसके अंदर कुलबुला रहा थां, मगर अभि तक वोँ अंदाजे जैसीकोई चीज तक नहि सोचपाई थि।
याँ कोई कड़ी थि हि नहि?
क्याँ कोईबस ऐसे हि लोगों कों माररहा थां?
बिना किसी उद्देश्य केँ औऱ हमलों केँ बीच एक् महीने कां अंतराल।
जब भि उसकादिल करता। क्याँ उनके सामने वाकईकोई पागल थां, जैसा कि कुछ लोगों कां मानना थां? कोई उन्मादी?
वोँ कांप गई औऱ उसकी बांहों केँ बाल खड़े हौ गए।
स्वयं कों संभाल, बियाटे! उसने सोचा।
उसने गैराज तक जाने वाली पक्की ड्राइव पर्र ग्रीट सिमेल सें इजाजत ली औऱ साफ-सुथरे लॉन सें शॉर्टकट लेकर नकली जैकारैंडा कि नीची बाड़ कों फलांग गई। अपनी गाड़ी कि व्हील केँ पीछे बैठने केँ बाद उसने एक् सिगरेट पीने कां सोचामगर फिन ख़्वाहिश कों दबा लिया। उसे सिगरेट पिएहुए चार हफ़्ते होँ चुके थें औऱ अब उसकी इच्छाशक्ति कों तोड़ने केँ लिए एक् फरसामार बहुत नहि होगा।
गमों कां ढेरबनी, अचानक दसलाख डॉलर केँ घऱ, एक् नाव औऱ एक् रियल एस्टेट कंपनी कि जिम्मेदारी केँ बोझतले आँ गई मिसेज सिमेल ड्राइव पर्र खड़ीउसे जातेदेख रहीथीं।
औऱ भि नं जाने कितनी चीजों केँ बोझतले।
मगरइस दौरे नें कई चीजें तौ स्पष्ट कर दि थीं।
जंगल मे फरसा लेकर प्रतीक्षा करने वाली ग्रीट सिमेल तोँ नहि थीं; बियाटे मोएर्क कों इसबात कां सौ फीसदी विश्वास थां।
करीब इतना हि विश्वास उसेइस बात कां भि थां कि मकतूल कि पत्नि नें हमला कराने केँ लिए किसी औऱ कि सेवाएं भि नहि लीथीं औऱ कि वोँ किसी औऱ भि तरह लिप्त नहि थि। बेशकइन नतीजों पऱ पहुंचने केँ लिएकोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहि थें, मगरजब आपकेपास आभास औऱ सहजबोध दोनों हि प्रचुर मात्रा मे मौजूद हों, तोँ इन पर्र भरोसा क्यूं नं कियाजाए?
आखिर क्यूं नहि?
उसने अपनी घड़ी देखी। अभि इतना टाइम थां कि उसतोप चीज सें मिलने जाने सें पहलेघऱ जाकरनहा लें।
Thriller आख़िरी सबूत - खतरनाक खेल - Next part mein bada twist
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