मैं मेरी सौतेली माँ और दीदी - दीदी - Complete Kahani Part 1
दोस्तों मेरानाम राज हैं। इस फोरम पऱ ये मेरी दूसरी स्टोरी हैं।
मेरी पहली स्टोरी कां नाम थां बारिश मे मम्मी केँ संग जंगल यात्रा। दोस्तों आप् लोगइस स्टोरी कों जरूर पढ़ना। ये किस्सा आपको बहोत मनपसंद आएगी। आज मे आप् लोगों केँ सामने एक् नई स्टोरी लेकरआया हूं। दोस्तों मे देखता हूं कि जौ कहानियां आजकल लिखी जाती हें उनमें वास्तविकता कम प्रतीत होती हैं। दोस्तों मे इस स्टोरी मे आपको वो सभी दूंगा जिससे आपकोलगे कि इस किस्सा मे वास्तविकता हैं। स्टोरी मे सच्चाई होगी। लोग आजकल बनावटी कथा लिखते हें जिसकी वजह सें पढ़ने वालों कों आनंद नहि आता। स्टोरी ऐसी होनी चाहिए जिसमें वालों कि सच्चाई हैं।
दोस्तों अब मे स्टोरी पऱ आनां चाहता हूं येकथा मे यानी कि राज मेरी मम्मी औऱ मेरी दिदी केँ चारों ओर घूमती हैं। दोस्तों जैसा कि मे टाइटल मे लिखा हैं मेरी मम्मी सौतेली हैं। इस वक़्त मेरे परिवार मे 4 लोग हें। मे मेरी बेहन औऱ मेरी सौतेली मम्मी औऱ मेरे पिताजी। दोस्तों मेरी माँ कि मृत्यु आज सें 4 साल पहले होँ गई थि। तब मेरी उम्र 14 साल थि औऱ मेरी दिदी कि उम्र 16 साल थि। दोस्तों उसकेबाद मेरे पिताजी बहुत परेशान रहनेलगे थें। घऱ वालों केँ दबाव मे 1 सालबाद उन्होंने दूसरी विवाह करली। हमारा घऱ पूरा डिस्टर्ब हौ गय़ा थां। माँ कि मृत्यु केँ बाद बापूघऱ पर्र बहोत हि कम रहते थें। वो अपने व्यापार मे हि व्यस्त रहते थें। मेरे बापू बहोत बड़े व्यापारी थें। उन्होंने अपने आप् कों काम मे बिजीकर लिया थां। मगर मेरे परिवार वालों नें उनकी दूसरी विवाह करा दि। फिरभी इस डिसीजन सें हम् दोनों भइया बेहनखुश नहि थें। हम् दोनों भइया बेहन नहि चाहते थें कि हमारी मम्मी कि स्थान कोई औऱ लेँ। दोस्तों विवाह होने केँ बाद हम् लोगघऱ मे बहुतडरे डरे रहनेलगे थें। हम् लोगों कों डर थां कि जौ माँ आएंगी वो कैसी होंगी। क्याँ वो हम् दोनों कों समझ पाएंगी।
दोस्तों मेरे बापू कि उम्रउस वक्त 40 साल हौ गई थि जब उनकी दूसरी विवाह हुइ थि। औऱ मेरीनई मम्मी कि उम्र 30 साल थि। दोस्तों मेरीनई मम्मी देखने मे बहोत ज़्यादा हसीन थि। उनकी हाइट काठी कों देखकर ऐसा लगता थां जैसेकोई अप्सरा स्वर्ग सें धरती पऱ उतरआई होँ। मगर विवाह केँ बाद भि बापू मेरी मां कों भूल नहि पाए थें। वो हमेशा गुमसुम रहते थें। औऱ कभी कबार दारू भि पी लेते थें।
दोस्तों ये स्टोरी मे तबलिख रहा हूं जब मे 18 साल कां होँ गय़ा हूं। दोस्तों अब बापू कि नई विवाह केँ 4 साल हौ गए थें। सभीकुछ धीरे धीरेसही चलरहा थां। हम् भइया बहनों कि नई मम्मी सें पटरी खानेलगी थि औऱ पिताजी भि अब पहले सें थोडा सुधरगए थें। अब पिताजी औऱ मां कों देखकर ऐसालग रहा थां कि दोनों मे अच्छा कंबीनेशन बन गय़ा हैं। औऱ दोनों एक् दूसरे कों प्रेम करनेलगे हें। अब मे 18 कां औऱ मेरी दिदी 20 कि हौ गई थि। मे जिम जानेलगा थां जिससे मेरी बॉडी बिल्कुल स्लिम हौ गई थि। मेरी दिदी भि बिल्कुल फिट थि।
ये मे हूं
मेरा जिस्म एकदम गठीला बनाहुआ थां। फिरभी अभि तक मेरीकोई गर्लफ्रेंड नहि बनी थि।
ये हैं मेरी बेहन
हम् दोनों कि लंबाई औऱ फिगर बहुत अच्छे थें। हम् दोनों कों देखकर लोगयही कहते थें कि ये दोनों किसी सेलिब्रिटी सें कम नहि हैं। दोस्तों अब आपकोमिल जाते हें इसकथा कि रियल एक्ट्रेस सें
दोस्तों मेरी सौतेली मा भि किसी एक्ट्रेस सें कम नहि थि। अब उनकी उम्र 34 साल कि थि। मगर वो अपने कों बहुत मेंटेन किया हुइ थि। दोस्तों मेरेमन मे अपनी सौतेली मम्मी कों लेकरकभी भि कोईगलत ख्याल नहि आया थां। मगरआगे जाकरकुछ परिस्थितियां बदल गई। आपको आरामसे मे सभीकुछ बताऊंगा।
हम् चारों लोगों मे खूब सारा प्रेम थां। हम् लोग अपना अतीत करीबभूल गए थें। हमारी नई मम्मी नें हमको बहुत प्रेम दिया थां। दोस्तों मेरे बापू भि अब 44 साल कि होँ गए थें। अब थोड़े थकेथके सें रहते थें। मे औऱ मेरी बेहन दोनों ग्रेजुएशन कररहे थें। सुभह हम् लोग 8:00 बजेघऱ सें निकल जाते थें औऱ दोपहर मे 2:00 बजे तक वापस आँ जाते थें। मेरी मम्मी नें खाने-पीने मे कभीकोई शिकायत नहि होने दि। मेरा औऱ मेरी दिदी कां उनसे अटैचमेंट बहुतबढ़ गय़ा औऱ पिताजी भि इससे बहुतखुश रहते थें। दोस्तों सभीकुछ बहोत अच्छा चलरहा थां। 1 दिन कि बात हैं मेरी तबीयत खराब थि औऱ मे कॉलेज नहि गय़ा मगर मेरी दिदी कॉलेज गई थि। पिताजी दफ़्तर गए थें। इसलिये घऱ पर्र मे औऱ मेरी मम्मी दोनों अकेले थें। फिरभी नाँ कभी मेरे औऱ नाँ मेरी मम्मी केँ मन मे कोईगलत विचार एक् दूसरे केँ लिएआया होगा। एक् बात हमेशा मेरेमन मे रहती थि कि ये मेरीसगी मम्मी नहि हैं। मेरी मम्मी बहोत हि हसीन थि इसलिये कभी-कभी मे उनकीतरफ आकर्षित होँ जाता थां। उनके चेहरे पर्र हमेशा मुस्कान रहती थि। अचानक उसदिन घऱ पर्र कुछऐसा हुआ कि मे ये सोचने पऱ मजबूर होँ गय़ा कि ये वास्तव मे मेरी सौतेली मम्मी हैं क्योंकि अपनी माँ केँ बारे मे कभी थोडा सां भि गलत विचार मेरेमन मे नहि आँ सकता थां। दोस्तों मेरी तबीयत खराब थि उसके बावजूद मे हमेशा जिम करता थां औऱ अपनेबदन कों स्लिम बनाने केँ लिए कोशिश किया करता थां। उसदिन मे अपनेरूम मे कसरतकर रहा थां। मे मात्र अंडरवियर औऱ बनियान मे थां तभी अचानक मम्मी तबीयत पूछने केँ लिए अंदर आँ जाती हैं। दोस्तों मे जोँ अंडरवियर पहना थां वो फ्रैंची अंडरवियर थां। औऱ उसमें हम् अपने प्राइवेट पार्ट कों छुपा नहि सकते क्योंकि फ्रेंच प्राइवेट पार्ट केँ ऊपरकस जाता हैं। औऱ दोस्तों मेरा प्राइवेट पार्ट कुछ हैं भि सामान्य सें अधिक बड़ा औऱ मोटा औऱ उस वक़्त थोडा इरेक्शन भि थां। मेरी माँ कमरे केँ अंदर घुसती हैं औऱ उनकीनजर पहले मेरे चेहरे पर्र पड़ती हैं उसकेबाद वो सीधे उनकीनजर मेरे प्राइवेट पार्ट पऱ जाती हैं।
ऐसा थां कुछ
दोस्तों ये देखकर मेरी माँ कां रिएक्शन थोडा अजीब थां औऱ उनका मुंह थोडा सां खुल गय़ा थां ऐसालग रहा थां शायद उन्होंने कोईअलग चीजदेख ली हौ जोँ अपने जिंदगी मे नां देखी हौ।
कुछऐसा थां उनका रिएक्शन। मगर अचानक उन्होंने बात कों संभाल लिया। औऱ मुझेइस बात कां एहसास नहि होने दिया कि उन्होंने कुछ देखा हैं औऱ वो मेरीतरफ देखकर पूछने लगी बेटा तबीयत कैसी हैं मे तुम्हारे लिएगरम चायबना करलारही हूं। मे भि थोडा सरप्राइज थां क्योंकि एक् बात तोँ तय थि कि मा नें मेरा नीचे कां पार्ट अंडरवियर केँ अंदर सें देख लिया थां। इतना समझदार तौ मे भि थां। मगर मैंने इसचीज कों ज़्यादा माइंड नहि किया मैंने जल्दी मम्मी सें कहाठीक हैं माँ आप् गरमचाय बनाइए मे अभि आँ रहा हूं। मेरेमन मे ऐसाकुछ अभि भि नहि आया थां। औऱ मुझे मालूम थां कि मेरी माँ केँ अंदर भि ऐसाकुछ नहि आएगा क्योंकि मे उनका बेटा हि थां सगा नहि तौ क्याँ हुआ वो सगे सें अधिक हम् दोनों कों प्रेम करती थि। नां जल्दी वहांरूम सें चल बाहर् चली आँ गई औऱ गरमचाय बनाने लगी। मे भि कपड़े पहनने केँ बाद बाहर् आँ गय़ा औऱ जोर सें चिल्लाया मनगरम चाय दीजिए। फिरभी सभीकुछ नॉर्मल थां ऐसाकुछ लग नहि रहा थां कि घऱ मे कुछअलग हुआ हैं। मम्मी पहले जैसे हि मुझसे बातचीत औऱ हंसी मजाककर रही थि। गरमचाय पीने केँ बाद मे बाहर् चला गय़ा। साम कों मे घऱआया तौ सभीलोग घऱ पर्र थें। हम् लोगों नें रात कां खानां खाया औऱ अपने-अपने खाट पर्र सोनेचले गए। रात कों 12:00 बजे अचानक मेरी नींदखुल गई औऱ नहि मे दिन वाली घटना केँ बारे मे सोचने लगा कि मम्मी मेरे बारे मे क्याँ सोचरही होंगी। अचानक उनके बारे मे सोचते सोचते लंड खड़ा हौ गय़ा। दोस्तों मेरे दिमाग़ मे उनकेलिए अभि भि कोईगलत विचार नहि आया थां मगरउसे घटना कि वजह सें मेरा लंड खड़ा होँ गय़ा थां। मगर मुझेइस बात पऱ बहोत हि पश्चाताप हुआ कि ये मे क्याँ कररहा हूं वो मेरीसगी माँ नहि तौ क्याँ हुआसब सें भि अधिक हैं वो पिछले चार-पांच साल सें हम् भइया बहनों कों अपना प्रेम देरही हैं तोँ क्याँ मे उनके प्रेम कां ये सिला दूंगा कि उनकेनाम पऱ मे अपनाल** खड़ा करूं नहि नहि ये मुझे नहि हौ सकता। मगर दोस्तों उसदिन केँ बाद सें मेरेमन मे अलग-अलग विचार आनेलगे थें। विचार आने कां एक् कारण भि थां कि मेरी औऱ मेरी मम्मी कि एज मे 14 साल कां डिफरेंस थां जोँ कि बहोत ज़्यादा नहि थां। मे नाँ चाहकर भि वहीसभी सोचरहा थां औऱ वहीसभी बार-बार मेरे दिमाग़ मे आँ रहा थां आँ रहा थां। दोस्तों एक् बार तुम्हें इतना तक सोच गय़ा कि काश माँ मेरेखाट पर्र मेरेसंग हूं। मगरइस सभी केँ बाद मे बहोत पछताया कि वो मेरी माँ हैं मे ऐसा नहि कर सकता मे उनके बारे मे कुछ भि गलत नहि सोच सकता।। मगर दोस्तों जब क़िस्मत मे जोँ लिखा होता हैं वो होकर हि रहता हैं।
शायद क़िस्मत कों कुछ औऱ हि मंजूर थां औऱ शायद क़िस्मत मे माँ कां प्रेम लिखा थां मगर बहोत मेहनत केँ बाद।
ये सभी मे आपको अगले एपसोड मे बताऊंगा।
बहोत हि बढिया औऱ मस्त प्रारंभ हें मज़ा आँ गय़ा अगले धमाकेदार औऱ चुदाईदार भाग कि प्रतिक्षा रहेगी जल्द सें दिजिएगा
मैं मेरी सौतेली माँ और दीदी - दीदी – New Episode
तौ दोस्तों अब चलते हें अगलीभाग कि ओर।
दोस्तों एक् कहावत हैं कि नसीब ईश्वर लिखता हैं। कब किसकी जीवन मे क्याँ हौ जाएये केवलऊपर वाले कों हि पता होता हैं। मेरी भाग्य मे ऊपर वाले नें कुछअलग लिखा थां। मेरे विचार उसे दिशा मे चलनेलगे थें जिस दिशा मे मैंने कभी ख्वाब मे भि नहि सोचा थां। मैंने ख्वाब मे भि नहि सोचा थां कि अपनी सौतेली मम्मी केँ बारे मे कभी मेरेमन मे ऐसाकुछ आएगा। 4 साल होँ गए थें उनके अपने बच्चे नहि थें। शायद हम् दोनों भइया बेहन कि वजह सें उन्होंने अपने बच्चे नहि किया। मेरेमन मे रहरहे थें ये सारेचला रहे थें कि कोई लड़का क्याँ अपनी मम्मी केँ बारे मे ऐसाकुछ सोच सकता हैं भले हि मेरीसदी मा नं होलेकिन थि तौ मेरे बापू कि हि पत्नि। दोस्तों उसेदिन केँ बाद सें मेरे ख्याल मेरी माँ केँ लिए थोडा बदलगए थें। कभी न् कभी उनके फिगर कि ओरनजर जरूरचली जाती थि। दोस्तों एक् तोँ वो बहोत हि हसीन थि औऱ दूसरा कारणये थां कि उनकी औऱ मेरी उम्र मे ज़्यादा अंतर नहि थां औऱ तीसरा कारण उनका फिगर थां जोँ कि अच्छी अच्छी हीरोइन कों भि मात देता थां। दोस्तो करीब-करीब 2 महीने तक फिनसभी कुछ वैसे हि चलतारहा। मेरे बापू अभि भि कभी-कभी दारू पीकरघऱ आते थें। कुछ भि होँ मगर वो पूरी तरीके सें माँ कों भूल नहि पाए थें। दोस्तों 2 महीने केँ बाद कि एक् दिन कि बातह। दोस्तों मेरी दिदी भि बड़ी थि इसलिये कभी कबारवाउ मेरेलिए खानां बना देती थि सुभह विद्यालय जानां होता थां तोँ कभी-कभी वो स्वयं मेरा औऱ अपना ब्रेकफास्ट बना लेती थि। दोस्तों एक् दिन कि बात हैं माँ कि कुछ तबीयत खराब थि। उसदिन किसी कारणवश मे भि कॉलेज नहि गय़ा। पिताजी सुभह दफ़्तर निकल जाते थें दिदी भि अपनेलिए खानां बनाकर निकल गई। मे नहि गय़ा मगरये बात मम्मी कों नहि पता थि। मे अपनेघऱ पऱ अपने कमरे मे हि कुछकाम कररहा थां। मा कों लगासब कॉलेज चलेगए हें। मे अपने कमरे मे काम करने मे व्यस्त थां। माँ कि आदत थि वो बहुतदेर मे नहाती थि। मुझेकुछ जरूरी काम थां इसलिये मे कमरे सें बाहर् निकला भि नहि। कुछदेर बाद मुझेकुछ खटपट कि आवाज़ आई। मे मे धीरे-धीरे सें उठकर कमरे केँ बाहर् आया औऱ बाहर् कां नजारा देखकर सन्नरह गय़ा। मैंने देखा कि माँ बाथरूम सें निकली औऱ वहां अपनेबदन पर्र एक् भि कपड़े नहि पहने थि औऱ अपनेरूम कि ओरजारही थि। मेरामन एकदमघूम गय़ा मे मम्मी कां मात्र पीछे कां हिस्सा देख पाया। दोस्तों ऐसालग रहा थां कि कितनी फुर्सत सें बनाया होगाऊपर वाले नें मेरी मम्मी कों मैंने पहलीबार किसी स्त्री कों इसरूप मे देखा थां। मैंने आगे तौ कुछ नहि देखामगर पीछे कां जोँ नजारा थां वो अच्छे-अच्छे कों अवाककर देता। थोड़ी दूर तक जाने केँ बाद वो रुक गई औऱ उनके कंधे पर्र जौ तोलिया पड़ी थि उससे अपनाबदन पोछने लगी। दोस्तों वैसे तोँ आज तक मैंने कभी किसी नंगी महिला कों नहि देखा थां। औऱ देखा तौ वो भि अपनेघऱ मे सौतेली मम्मी कों। जोँ मुझे औऱ मेरी बेहन कों बहोत ज़्यादा मानती औऱ प्रेम करती थि। दोस्तों उस नजारे कां वर्णन मे आपके सामने नहि कर पाऊंगा। दोस्तों ये नजारा इतना हसीन थां कि अगरकोई सगा बेटा भि होता तोँ वो भि बहक जाता। वो अभि भि एहसास नहि करपारही थि कि कोईघऱ मे औऱ हैं औऱ येसभी देखरहा हैं। दोस्तों मे क्याँ बताऊं मेरा लन्ड 90 डिग्री केँ एंगल पऱ आँ चुका थां। सिर्फ आपको एक् फोटो दिखा सकता हूं उस नजारे कि।
दोस्तों दोस्तों वो पतलीकमर औऱ उभरेहुए चूतड़ देखकर मेरी नसें एकदमतन गई थि। उस स्थिति कां वर्णन क्याँ करूं मे आपकी सामने ऐसालग रहा थां कि मेरी जीवन कां सबसे हसीन लम्हा थां। उनकेकसी हुइ जांघें देखकर ऐसालग रहा थां थां कि मानोकोई स्वर्ग सें अप्सरा उतरआई हौ। दोस्तों माँ आहिस्ता कोई गाना गुनगुना रही थि वो निश्चित थि कि घऱ मे कोई नहि हैं। मगर मेरी खराब भाग्य कि मे आगे कां हिस्सा नहि देख पाया। औऱ वो अपनाबदन पोछकर अपने कमरे मे चली गई। वो तोँ मेरेमन मे अब माँ केँ लिए ख्याल बदलना स्वाभाविक थां। मेरा लंड ऐसालग रहा थां कि अगर मम्मी अभि रेडी हौ जाएं तौ अभि वो उनकी बुर* फाड़ देगा। दोस्तो बिल्कुल ऐसा थां उस वक्त मेरा लंड
दोस्तों आप् स्वयं देखकर अंदाजा लगा सकते हें कि मेरा लंड इस वक़्त किसदशा सें गुजररहा थां। अंडरवियर केँ अंदर याँ एकदम शैतान बन गय़ा थां। सारा नजारा समाप्त हौ गय़ा थां औऱ मे वापस अपने कमरे मे आँ गय़ा। मगरअब मुझेडर थां कि मम्मी नें मुझसे अगर जवाब मांग लिया कि तुम् विद्यालय क्यूं नहि गए तौ मे क्याँ कहूंगा औऱ कहीं उनकोशक हौ गय़ा कि मे उनको चोरी चुपके देखा तौ नहि हैं तोँ मे क्याँ जवाब दूंगा उनको। मैंने भि चुपचाप नहा धोकर कपड़े पहनलिए। औऱ मजाक मजाक मे खूबजोर सें चिल्लाया माँ मेरीगरम चाय कहां हैं। इतना सुनते हि मन दौड़ती हुइ दरवाजे तक आई औऱ बहोत हि सरप्राइज होकर मेरीतरफ देखने लगी औऱ पूछने लगी कि आज तुम् विद्यालय नहि गए थें आजघऱ पऱ हि थें तुम् पऱ मुझे बताया भि नहि। उनकी आंखों मे सवाल चिन्ह बना थां। मैंने बात बनाते हुए कहां नां आज मुझेकाम थां औऱ मे बहुतदेर केँ बाद अभि सोकरउठा हूं। मैंने दिदी कों बता दिया थां कि वो आपकोबता दें कि मे आज कॉलेज नहि जाऊंगा शायद वो बताना भूल गई होगी। मम्मी केँ चेहरे पऱ चिंता केँ भावझलक रहे थें ऐसालग रहा थां कि उनके बेटे नें आज उनकी चोरी पकड़ली। मगर इसमें पूरीकिस बात कि हर महिला घऱ मे ऐसे हि रहती हैं अकेले मे। फिरभी मैंने बता दिया थां कि मे अभि सोकरउठा हूं इसलिये मे थोड़ी निश्चिंत हौ गई थि शायद मे सहीबोल रहा हूं। माँ नें कहाठीक हैं बेटा अभि मे गरमचाय बनाती हूं मगर वो बोलने मे कुछ हिचकिचा रही थि। मम्मी नें पूछा खाने मे क्याँ खाओगे मैंने कहाकुछ भि बना लूंगा। उन्होंने कहाठीक हैं। उन्होंने खानां बनाया औऱ हम् दोनों नें एक् संग खानां खाया थोडा बहोत हम् लोगबात कररहे थें इसकेबाद माँ अपने कमरे मे चली गई औऱ मे अपने कमरे मे। मे फिनसो गय़ा औऱ साम कों उठातब तक देखा दिदी औऱ बापू आँ चुके थें। सभीकुछ सामान्य चलरहा थां। दोस्तों आज कां दिन मेरेलिए बहोत हि अधिकयाद कररहा क्योंकि मैंने आज तक किसी महिला कि गांड नहि देखी थि औऱ देखी भि वो भि अपनी मम्मी कि। दोस्तों रात कां टाइम थां अचानक मम्मी केँ परिवार सें दोलोग आँ गए उनकोरात भर रुकना थां। दोनों नें खानां खायाअब इस मंथनचल रहा थां कि उनको कहां सुलाया जाए। बापू औऱ माँ कां रूम फिक्स थां बचा मेरा औऱ दिदी कां। अंत मे ये डिसाइड हुआ कि वो लोग मेरे कमरे मे सो जाएंगे मे औऱ दिदी एक् कमरे मे सो जाएंगे। दोस्तों एक् तौ वैसे भि आज माँ कां भूत मेरेसर सें नहि उतरा थां औऱ आज दिदी कां लेटना मेरेपास हौ गय़ा ऐसालग रहा थां कि ईश्वर मुझ पर्र मेहरबान हैं। फिरभी दिदी औऱ मुझ मे बहोत पटती थि मगर वो कभी-कभी सख्त होँ जाती थि जब उनको लगता थां कि मे कुछगलत कररहा हूं। दोस्तों मेरेमन मे ऐसी खुमारी चलरही थि कि यहीलग रहा थां कि किसी कि भि बुर मिलजाए मे उसे छोड़ने वाला नहि हूं। क्योंकि मे जवान कि कुछदेर दूर सें गुजररहा थां जिसदौर मे अच्छा औऱ बुराकुछ भि समझ नहि आता।। जोश आने केँ बादबस इतनासमझ आता थां कि सामने वाली लड़की हैं औऱ मे लड़का।
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मैं मेरी सौतेली माँ और दीदी - दीदी – New Episode
दोस्तों मे इतना बिगड़ा हुआ नहि थां मगर कभी-कभी वक़्त ऐसाआता हैं कि इंसान नाँ चाहते हुए भि बिगड़ जाता हैं। रात कों 10:00 रहे थें मे दिदी केँ रूम मे सोनेचला गय़ा। मेरी दिदी चश्मा लगाए स्टडी कररही थि। वो बेड पर्र उल्टी लेटी हुई थि। मतलब उनका उभराहुआ हिस्सा मेरे सामने थां। उन्होंने मेरीनजर कि तरफ देखा औऱ पूछा आँ गय़ा चलसोजा। मैंने पूछा क्याँ कररही होँ दिदी उन्होंने कहा दिखाई नहि दिया स्टडी कररही हैं तुँ लेटजा मे अभि थोड़ी देर मे लेट जाऊंगी। दोस्तों मेरेऊपर खुमारी सवार थि आज मुझेहर स्त्री हसीनलग रही थि। हर महिला मुझे अप्सरा लगरही थि। एक् तोँ सुभह मैंने मां कि गांड देखी औऱ अबरात कों दिदी केँ पास लेटना हुआ। ऐसा लगरहा थां कि मेरी 10 उंगलियां घी मे हैं। दोस्तों मेरी दिदी कुछइस तरहपढ़ रही थि।
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वो छोटी सि शॉर्ट्स पहनकर पढ़ाई कररही थि। दोस्तों ये नजारा औऱ अधिककाम भावना कों भड़काने वाला थां। मे गय़ा औऱ बेड केँ किनारे एक् तरफलेट गय़ा। दोस्तों थोड़ी देरबाद मे सो गय़ा औऱ करीब 1:00 बजे केँ आसपास उठा। मैंने देखा कि दिदी भि गहरी नींद मे सोरही हैं। दोस्तों मेरे अंदर कि काम भावना बढ़ती जारही थि। दिदी औऱ मेरेबीच कां फासला केवलआधे मीटर कां थां। दोस्तों दिदी कां चूतड़ मेरीतरफ थां औऱ चेहरा दूसरी तरफ थां। मेरा लंड अपनी असली पोजीशन मे आँ गय़ा थां मगरसमझ नहि आँ रहा थां मे क्याँ करूं। अगर मैंने दिदी कों जराबीच हुआ तोँ शायद वो जागजाए औऱ अगरजाग गई तौ मेरा क्याँ होगा इसका ईश्वर हि मालिक हैं। येसभी सोचकर मे डररहा थां मगर इसके बावजूद दिदी कि तरफ खिसकने लगा। मेरा लंड औऱ दिदी कि गांड एकदम नजदीक थि करीब 1 इंच कि दूरी थि मगर मेरी हिम्मत नहि पड़रही थि कि मे अपना लंड दिदी कि कि गांड मे सेट करूँ। खानां कि मेरी हिम्मत नहि पड़रही थि कि मे इससेआगे बढूं। मैंने हिम्मत करके नां एक् हाथ दिदी केँ कंधे पर्र रखा औऱ थोड़ी देर तक वैसे हि रखारहा। इसकेबाद मेरी हिम्मत थोड़ी औऱ बढ़ गई तौ मेराहाथ कों मैंने दिदी केँ बूब्स केँ ऊपररख दिया। फिर भी मैंने अधिक प्रेशर नहि दिया। मे नहि चाहता थां वो जग जाएं। जब मैंने देखा दिदी कि तरफ सें कोई हरकत नहि हौ रही थि तौ मैंने अपनीकमर कों थोडा आगे बढ़ाया औऱ मेरे थोडा आगे बढ़ते हि मेरा लंड दिदी केँ शॉर्ट्स मे जा घुसा। मे पसीना पसीना होँ गय़ा औऱ येसोच हि रहा थां कि अगर दिदी जग गई तोँ क्याँ होगा। अचानक दिदी नें करवटबदल लीफिर भी वो अभि भि सोरही थि। मैंने जल्दी अपना लंड अपनी अंडरवियर नें किया औऱ चुपचाप आंखबंद करली।
अब मे कोई खतरा नहि लेना चाहता थां। औऱ चुपचाप सो गय़ा।
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