नीतू भाभी का कामशास्त्र - कामशास्त्र - Real Kahani Part 1
नीतू भाभी कां कामशास्त्र
नीतू भाभी अपने ख्यालों मे कुच्छ डूबी हुइ मेरीतरफ चुपचाप देखती रही। औऱ फिन आहिस्ते सें बोलि, "जानते होँ, मुझे तुमको येसभी सीखाना अच्छा लगता हैं। पता नहींये बातठीक हैं कि नहीं। पऱ मुझे बहोत अच्छा लगता हैं। तुमको भि अच्छा लगरहा हैं नाँ? तुम् भि कुच्छ कुच्छ सोचते रहते होँ?"
"जी……"
"अवश्य सोचते होगे….हैं नां?"
वोँ अपने अंगूठे औऱ दो उंगलियों सें मेरे लन्ड केँ सूपदे कों कभी पकड़कर दबाती, कभी मसालती, कभी सूपदे केँ टोपी केँ अंदर अपने नाख़ून सें चारोतरफ धीरे-धीरे सें खरोचती.
"ये बहोत ज़रूरी होता हैं कि आपस मे इन बातों केँ बारें मे खुलापन होँ…." वोँ अपनीहाथ मे मेरे खड़े लन्ड कों देखरही थि। उनकी आवाज़ कुच्छ धीमी हौ रही थि, औऱ ऐसालग रहा थां कि वोँ अपनी ख्यालों मे डूब गई, हें। "मे सोचरही थि कि तुमको ठीकतरह सें मजा लेना सिखाउ….ठीक तरह सें…….कुच्छ सोचना नहीं….कोई औऱ ख्याल नहीं होँ दिमाग़ मे….मज़े करतेसमय सिर्फ़ मज़े करना……."
वोँ उंगलियाँ सें मेरे सूपदे कों बहोत हि प्रेम सें दबारही थि, औऱ बीचबीच मे आहिस्ते सें सूपदे केँ छेद मे नाख़ून सें छेड़रही थि। नीतू भाभी नें औऱ रातों कि तरहआज रात भि कमरे मे एक् छ्होटे कटोरे मे कुच्छ गर्म सरसो कां तेलरख लिया थां। उनकी उंगलियाँ सरसो केँ तेल मे डुबोई हुई थि.
"समझरहे हौ, कि मे क्याँ कहरही हूं?"
"जी."
"मज़े करते वक़्त, औऱ कोई ख्याल नहीं होना चाहिए….कुच्छ सोचना नहीं चाहिए….सिर्फ़ मजा लेना औऱ मजा देना…बस….सिर्फ़ मज़े कां ख्याल!…" वोँ मेरे मेरे लन्ड कों एक् नज़र सें देखरही थि औऱ सूपड़ा केँ चारोतरफ अपनी उंगली कों घुमारही थि। बाहर् चाँदनी रात थि, औऱ खिड़की सें चाँदनी कि रोशनी आँ रही थि। नीतू भाभी केँ बालखुल गये थें औऱ उनकी आँचलकब कां गिर चुका थां। मेरे जैसे लड़के कों उनकेबाल, उनका खूबसूरत चेहरा, उनकीआधी खुली हुईँ ब्लाउस सें निकलती हुईँ चुचियाँ औऱ उनका इकहरा शरीर हि पागल बनाने केँ लिए काफ़ी थां, पर्र वोँ तोँ अपनीहाथ सें मेरे लन्ड कों इसतरह प्रेम सें तरहतरह सें दबारही थि, नाख़ून सें खरॉचरही थि मे नशे मे मस्त हौ रहा थां। चाँदनी कि उस रोशनी मे मेरा सरोसो केँ तेल मे मालिस किया लन्ड चमकरहा थां, औऱ नीतू भाभी कि गेंहूआ रंग कि मुथि औऱ उंगलियों मे सें मेरा लौदाबीच बीच मे झाँकता, औऱ फिनछुप जाता.
"ये मेरी एक् ख्वाहिश हैं……सच पूच्छो तौ मजा तौ सब इंसान कर हि लेते हें…पर्र ज़्यादातर लोगों कों बस थोरीदेर केँ लिए प्यास बुझती हें….नां मर्द पूरीतरह सें खुश होते हें औऱ नाँ औरतें….जानते हौ नाँ….ज़्यादातर औरतें प्यासी हि रह जाती हें….औऱ चिर्चिरि मिज़ाज़ कि होँ जाती हें….औऱ वहीहाल मर्दों कां भि!" भाभी नें इसबार मेरे सूपदे सें लेकर लौदे केँ बिल्कुल जड़ तक दबा दिया। वोँ मेरे गांद केँ उपर अपनी उंगली भि फेररही थि अब। मैने पूचछा, "नीतू भाभी, औऱ क्याँ ख्वाहिशें हें?"
"अभि नहीं बताउन्गि!….अभि बस इतना हि!"
वोँ मेरे लन्ड कों बहोत हि नाज़ुक सां सहलारही थि अब.फिन धीरे-धीरे सें हंस दि। कुच्छ शरमाते हुए, फिन बोलि। "ख्याल तोँ बहोत हें, पऱ क्याँ करूँ, थोरीशरम भि तौ आती हैं!" मे भाभी कि चुचियों कों ब्लाउस केँ अंदर हि हाथ डालकर आहिस्ते सें दबारहा थां। वोँ चुप हौ गई,। फिन आँखें मूंदकर एक् गहरी साँस लेकर बोलीं, " तुम्हारे हाथों मे तौ चमत्कार हैं….अहह…आहह-आहह ….तुमको इतनीकम उमर मे हि औरतों केँ शरीर कां पूरापता हैं….तुम्हारे हाथ तौ सारे जिस्म मे सिहरन ला देते हें….हाअन्न्न्न!"
अब मैने नीतू भाभी कि सारी कों उतारने लगा। ब्लाउस केँ हुक्स खुलेहुए थें औऱ ब्रा भि उतर चुका थां। उनकी चुचि केँ घुंडी कों मे मसलरहा थां, औऱ भाभी नें अपने पेटिकोट केँ नाडे कों खोल दिया। नीतू भाभीफिन खरी होँ गई, पर्र मुझसे कहा कि मे उसीतरह बैड केँ किनारे लेटा रहूं। अपनी पेटिकोट निकालकर भाभीआई औऱ मेरे टाँगों केँ दोनोतरफ अपने पैरों कों फैलाकर मेरेउपर आँ गई,। मेरे सख़्त लन्ड कों उन्होने फिनगौर सें देखा औऱ उसको अपनी हाथों मे पकड़े रखा.फिन अपनी चूतड़ कुच्छ उपर उठाकर उन्होने सूपदे कों अपनी बुर कि पत्तियों मे फँसा दिया, मानो उनकी बुर केँ पंखुरियाँ मेरे सूपदे कों प्रेम सें, हल्के सें चूमरही होँ!
मे नें अपनाकमर थोडा उठाया, "एम्म."
"अच्छा लगरहा हैं?"
"जी……….….हां"
"आहिस्ते सें? ……इसतरह?"
"म्म्म, जी."
उनकी नज़र मेरे चेहरे पर्र थि। मेरे चेहरे कों गौर सें देखरही थि कि मुझे कैसालग रहा हैं उनका मेरे सूपदे कों अपनी चूत कि पट्टियों पऱ रगड़ना। हल्का हल्का रगड़ना, औऱ कभीकभी चूत केँ झाँत मे ज़ोर्से रगड़ना। बोलि, "जब मेरेहाथ
मे तुम्हारा लन्ड सख़्त होने लगता हैं नाँ, तोँ मुझे बहोत मजाआता हैं…। मुरझाया हुआ लन्ड जब बड़ा होने लगता हैं….बड़ा होता जाता हैं….बड़ा औऱ गर्म!" वोँ अब अपने घुटनों केँ बलबैठ गई, औऱ मुझसे कहा, " लो, तुम् मेरी बुर केँ दाने कों प्रेम करो….जब तक मे तुम्हारे इस लौदे कों एक् गर्म लोहे कां हथौरा बना देती हूं!"
मैने उनकी बुर कों खोलकर उनके अंदर केँ दाने कों सहलाने लगा, उसपर उंगली कों फेरने लगा। उनसे पूचछा, "इसतरह?"
उन्होने आँख मूंदली, जैसे कि बिल्कुल मशगूल होकर किसी चीज़ कां ज़ायज़ा लेँ रहीहों। जैसे कुच्छ मापरही हों। " हां….इसी तरह…… आहिस्ता…….आहिस्ता….हाअन्न्न्न"
वोँ मेरेउपर हि घुटनों केँ बल बैठी रहीं औऱ मेरे लौदे कों औऱ भि गर्म करती रहीं, औऱ जैसे मे उनके बुर मे अपनी उंगली घुमारहा थां मे नें अपने गर्दन कों आगे बढ़ाकर उनकी चुचि कों अपने मुँह मे लेनेलगा। उनकी हसीन,
गोल-गोल कश्मीरी सेब जैसी चुचियाँ मेरेमॅन कों लुभारही थि। जैसे मैने चुचि केँ घुंडी कों मुँह मे लेकर चूसा, वोँ सिहर गयीँ, औऱ बोलीं, "बस….इसी तरह सें.मुँह मे लेकर आहिस्ते सें चूसो ….हां….अभि ज़ोर्से नहीं….हान्न्न्न….इसी तरह…….अभि बस चूसो."
अब उनकी साँसें बढ़ने लगी। जल्द हि उन्होने कहा, "अब लो….", औऱ अपने घुटनों केँ बल उठकर उन्होने नीचे मेरे लौदे केँ तरफगौर किया औऱ उसको बिल्कुल सीधाखरा किया। अपने साँस कों रोकते हुए औऱ मेरे लौदे कों अपने मुथि मे उसीतरह सें पकरेहुए अब उन्होने अपनी गीली बुर पऱ उपर सें नीचे, फिन नीचेउपर रगड़कर मेरीतरफ प्रेम सें देखा। मेरी तोँ हालत खराब हौ रही थि; अब रुकना बेहद मुश्क़िल होँ रहा थां। मेरे मुँह सें हल्की चीख निकलने लगी.
"अच्छा लगरहा हैं?", उन्होने पूचछा.
"म्म्म्मम….जी"
"मुझे भि मजा आँ रहा हैं……म्म्म्मममम…………आहह-आहह…." नीचे देखते
हुए वोँ बोलीं, "जानते हौ…….उमर केँ हिसाब सें तुम्हारा लौदा काफ़ी बड़ा हैं…… बहोत कम मर्दों कां इतना तगड़ा लौदा होता हैं…… मुझे तोँ ताज्जुब होता हैं कि तुम् कितने सख़्त औऱ गर्म हौ जाते हौ! आहह-आहह …। ह्म्म्म्मम"
वोँ मेरे सूपदे केँ टिप कों अपनी चूत केँ अंदर लेकर मेरे कंधों पर्र अपनी हथेली रख दि। " अब तुम् धीरे-धीरे मजालो, जबतक मे तुम्हारे लौदे कों अपनी बुर मे लेती हूं। आहिस्ता….मजा लो……कोई जल्दिबाज़ी नहीं…जब लगे कि झरने लगॉगे….तोँ उस सें पहलेबता देना….ठीक?"
"जी….ठीक!"
नीतू भाभी का कामशास्त्र - कामशास्त्र – New Episode
वोँ मेरे चेहरे कों बिल्कुल ध्यान सें देखती रही औऱ बहोत सावधानी सें आधे लन्ड कों बुर केँ अंदर लेकररुक गई,। औऱ कमर कों सीधा किया.फिन पूचछा, "ठीक होँ?"
"जी."
"बिल्कुल ठीक?… हनन्न…। ……बिल्कुल?"
"हन्णन्न्……बहोत मजा आँ रहा हैं, पऱ अभि झरूँगा नहीं."
"फिन ठीक हैं!" वोँ गहरी साँस लेकर औऱ आँखें मूंदकर अपनी बुर कों नीचे मेरे लन्ड पऱ दबाकर लेनेलगी, बहोत धीरे-धीरे धीरे-धीरे, एक् बार मे आधेइंच सें ज्यादा नहीं….औऱ धीरे-धीरे सें बोलि, "आहिस्ते सें….आहिस्ते……महसूस करो कि अंदर कैसा लगता
हैं…। क्याँ होता हैं!…। जैसे मे तुम्हारे लौदे कों अंदर लेती हूं……तोँ महसूस करो कि वोँ मेरी बुर मे किसतरह घिसरहा हें….चूत उसकोकिस तरह सें लेती हैं…." वोँ गहरे साँस लेकर अपने होंठों पर्र जीभ चलाकर होंठों कों गीला किया.
"गौर करो….अब मे तुम्हारे पूरेलॉड कों किसतरह बुर मे लेँ रही हूं, किसतरह तुम्हारा लौदा मेरी बुर कों पूरीतरह सें खोलरहा हैं….बिल्कुल अंदर तक……देखी कितनी गहराई मे हैं…… म्म्म्मममम…। …… अब मुझे थोरे आहिस्ता
महसूस करने दो….म्म्म्मममममम." मेरा लौदा उनकी बुर केँ बिल्कुल अंदर थां, हमारी झाँतें बिल्कुल मिल गयीँ, थि, उनकी बुर मेरे लॉडा केँ जड़ पर्र बैठी थि। "म्म्म्मममम, " वोँ बोलि, " …… झरोगे तोँ नहीं?"
मैने अपनी साँस रोकेहुए सर हिला दिया। धीरे-धीरे सें बोला, "नहीं."
"बहोत अच्छा, " औऱ वोँ फिन अपना ध्यान बुर मे लन्ड पऱ लगाने लगी। "अपने आप् कों ठीक सें रोकना, जिस सें हम् दोनो पूरामजा लें सकें.ठीक?" वोँ अपनी चूत कों औऱ नीचेलाई, लगभगआधा इंच, फिन थोराउपर उठाकर, मानो मेरे लॉडा केँ
किसी ख़ास पार्ट कां ज़ायक़ा लेँ रहीहों। मुझेलगा कि नीतू भाभी बिल्कुल सहीकह रही थि: इससमय कोई औऱ ख्याल नहीं आनां चाहिए.
अबफिन सें पूरेलॉड कों लेने केँ बाद उन्होने कहा, `हाआंन्नणणन्!" फिन एक् समय साँस लेने केँ बाद मेरी आँखों मे देखते हुए उन्होने पूचछा, "मजा आँ रहा हैं?"
"म्म्म्मम…ह" मैने अपनेसर कों थोरा पीछेकर केँ ज़ोर्से साँस छोड़ा औऱ नीतू भाभी कों जवाब तोँ देना चाहता थां, पऱ मुँह सें सिर्फ़ आवाज़ निकली, "व्ह"
" अब एक् मिनिट रूको, बस इसीतरह……", औऱ भाभी नें गहरी साँस लेकर अपने चेहरे पऱ सें अपनेबाल कों हटाकर एक् लूज जूड़ा बना लिया, फिन कहा, "औऱ बस चूत मे पड़ेहुए लन्ड कां मजा लेना सीखो! महसूस करो कि चूत केँ अंदर लन्ड किसतरह सें थिरकता हैं, ……किसतरह चूत लौदे कों चूमती हैं, किसतरह चूत औऱ लोड्ा एक् दूसरे केँ संग खेलते हें." वोँ अब मेरेउपर पीठ सीधी करकेबैठ गयीँ,, औऱ फिनकहा, " अपनेउपर काबू रखने कि कोशिश करना….ठीक?……तुम् झरना चाहो तौ झार सकते हौ ….पऱ कोशिश करना कि जितनी देर तक अपने आप् कों रोकसको, रोकना……। ठीक? जीतने देर तक अपने लौदा कों इसीतरह अंदर रखोगे, उतना हि मजा आएगा ……तुमको भि……औऱ मुझे भि ……म्म्म्ममममममम……। जानते होँ नाँ …….
आरामसे साजना ……हौले हौले साजना …। हम् भि पीछे हें तुम्हारे…….!
मेरी तोँ मस्ती सें जान निकलरही थि। मे नें गहरी साँसली, औऱ फिन कुच्छ बोलने कि कोशिश करनेलगा, पऱ मुँह सें वाज़ निकली बस, "व्ह"
"कर सकोगे?……सिर्फ़ महसूस करो…। औऱ कुच्छ करने कि ज़रूरत नहीं हैं… सिर्फ़ मजालो! …….करोगे नाँ?"
"हान्णन्न्."
उन्होने अपनी आँखें फिन मूंदली औऱ एक् लंबी "आहह-आहह" भर केँ मेरे कंधों पर्र अपनी पकड़ कों थोडा ढीला छ्चोड़ दिया.
कुच्छ वक़्त तक हम् दोनोचुप रहे, मेरेउपर भाभी बिल्कुल खामोश औऱ रुकीरही। फिन मुझेसमझ मे आनेलगा कि वोँ मुझे क्याँ महसूस कराना चाहती थि। अब मुझे महसूस होनेलगा कि किसतरह मेरा लौदा उनकी चूत मे उसके गीलेपान सें बिल्कुल नाहया हुआ थां औऱ चूत केँ अंदर कि बनावट कों, चूत केँ अंदर केँ सब खूबियों कां ज़ायक़ा लें रहा थां। अब मे समझा कि चूत कि गहराइयों मे हर स्थान एक् जैसा नहीं होता, पऱ हर गहराई कां एक् अपनी हि खूबी हैं। येसभी महसूस करतेहुए मेरा लौदा औऱ भि सख़्त होताजा रहा थां, औऱ एक् बार ज़ोर्से थिरक
गय़ा। भाभी कि चूत नें भि जवाब मे मेरे लौदा कों जाकड़ लिया। नीतू भाभी बोलि, " इसीतरह रहो अभि…। आहिस्ता। ……….औऱ कुच्छ मतकरो… बस…इसी तरह."
मे नें वैसा हि किया। पऱ मेरे कोशिश केँ बावजूद मेरा लौदाबीच बीच मे थिरक जाता थां। भाभी केँ गीली चूत केँ जकड़ने सें मेरा लौदा मस्ती मे थां औऱ मुझे नहींलग रहा थां कि मे अपने लौदा कों पूरीतरह सें काबू मे रख पाउन्गा.
भाभी आँखें मूंदी हि हुइ थि, पऱ मुस्कुराते हुए पूच्ची, " क्यूं, नहीं रुका जाता क्याँ?"
मैने अपनासर हिलाते हुएकहा, "नहीं, पऱ मजा बहोत आँ रहा हैं…आहह-आहह."
"हान्न्न, मुझे भि, मेरे राजा। बहोत मज़ाअ आँ रहा हैं…ह"। औऱ मेरे कंधों कों पकड़े हुए हि उन्होने अपने चेहरे कों मेरेकान केँ पासरख दिया। वोँ फुसफुसकर बोलीं, "कितना मजाआता हैं …… इसीतरह सें चूत मे लौदा डालकर
……। सिर्फ़ महसूस करने मे….कुच्छ सोचोमत …….कोई औऱ क्याल नहीं ……सिर्फ़ चूत मे लॉडा…….सिर्फ़ लॉड कि सख्ती….लॉड कि गर्मी……औऱ चूत कि मखमली, रसभरी सकूदती हुईँ जाकरन! ….सिर्फ़ शरीर कां ख्याल रखो….औऱ कुच्छ भि नहीं…। आअहह."
नीतू भाभी का कामशास्त्र - कामशास्त्र – New Episode
भाभीरुक कर कुच्छ शुस्ता रही थि। कमरे मे टेबल क्लॉक कि चलने कि `टिकटिक' आवाज़ आँ रही थि। मे नें उसी`टिक टिक' पऱ अपना ध्यान लगाया। उनकी साँसों कि आवाज़ मेरेकान मे बहोत हि मीठेगीत कि तरहलग रही थि, बीचबीच मे भाभी
"आहह-आहह" कहतेहुए अपनी चूत सें मेरे लौदे कों जाकड़ लेती थि। कोई चारा नहीं थां। जैसे हि चूत कों भाभी स्क्वीज़ करती थि, मेरा लौदा थिरक जाता थां! कुच्छ देरबाद नीतू भाभी नें अपने जांघों कों मेरेउपर थोरा घिसकाया। अब उनके चूत कां दाना
मेरे लॉडा केँ जड़ सें घिसरहा थां। उनके मुँह सें एक् मज़े कि "ह्म्म्म" निकली औऱ उन्होने धीरे-धीरे सें दोतीन बार अपने दाने कों मेरे लन्ड केँ जड़ मे घिसने लगी। मेरेकान मे धीरे-धीरे सें बोलि, "ये बहोत मजादे रहा हैं….आहह-आहह" अब उनकी चूतड़
पहले कि तरह बिल्कुल बैठी नहींरही। वोँ अपनी चूतड़ कों आहिस्ते सें, बहोत ख़ास अंदाज़ मे घुमाने लगी। लौदा बुर कि पूरी गहराई मे, औऱ उनके बुर कां दाना मेरे लौदा केँ जड़ पऱ उगी झांतों सें रगड़रहा थां.
अब नीतू भाभी कुच्छ मस्ती मे आँ रही थि। उन्होने मुझसे मुस्कुरकर पूचछा, "अब कुच्छ ज्यादा मजा आँ रहा हैं? कुच्छ चुदाई कां मजा? आहह-आहह ….हाआंणन्न्?"
"जी!………। हाआन्न!!!"
"मुझे भि!"
अब उन्होने अपने चूतर कों थोरा उठाया, औऱ मुझसे कहा, " तुम् मत हिलना….इसी तरहरहो… इसीतरह ……मेरे बुर केँ अंदर …"
वोँ अपनी बुर कों आगेकर केँ घिसने लगी, उनकी चूत कां दाना मेरे झाँत मे रगड़रहा थां। कुच्छ देर तक वोँ इसीतरह, कुच्छ सावधानी बरतते हुए रगड़ती रही, पर्र बीचबीच मे, लगता थां कि उनको भि मस्ती बढ़ने लगती थि, औऱ वोँ ज़ोर्से
रगड़ना चाहती हें, पऱ फिन अपने आपकोरोक कर वोँ अपनी चूतड़ मेरी झंघों पऱ बैठा देती.
वोँ बोलीं, "अब ज़रा, " औऱ उन्होनें अपनेगले कों सॉफ किया औऱ गहरी साँसली, " अब ज़रा अपने आप् कों काबू मे रखना!" औऱ उन्होने अपने दाने कों फिन रगड़ना शुरुआत किया, अपनी चूतड़ कों चक्की कि तरह घुमाते हुए, औऱ मेरे चेहरे पर्र मेरी हालत देखकर मेरीकान मे धीरे-धीरे सें बोलि, " झरना नहीं…। अपने आप् कों काबू मे रखो …….देखो कितना मजा आएगा अभि!" मैने उनसे हामीभर दि, औऱ वोँ बोलती रही, "देखो, मे कितनी गीली होँ रही हूं ….किसतरह मेरी चूत बिल्कुल रसिया गई, हैं…। ओहो….ह्म्म्म्मम… मेरे खातिर…। हान्न्न…… रुकेरहो… मे एक् बारझार जाउन्गि…। आअहह …। मेरे राजा … इसीतरह ……अब झरनेवाली हूं" औऱ उनकी आवाज़ बिल्कुल धीमी होती गयीँ,, पऱ उनकी चूतड़ मस्ती मे चकई कि तारह ज़ोर्से
चलनेलगी। चारतरफ घूमरही थि, फिनरुक कर एक् बार अच्छी तरह सें आगे, फिन उसीतरह सें पीछे कि तरफ, फिन गोल चक्कर। उनकेबर सें कुच्छ रस निकलकर हमारी झांतों मे बह गय़ा थां, पर्र चूत औऱ लन्ड केँ इस मिलन मे हम् दोनो बिल्कुल मगन थें। वोँ औऱ ज़ोर्से साँस लेनेलगी, औऱ जैसे उनका मस्ती मे हाँफना उसीतरह सें उनकेकमर कां नाचना: उनकी चूतड़ ज़ोर्से, औऱ जल्द जल्द चक्कर लगाती रही औऱ बर कां मुँह मेरे लौदे केँ जड़ पऱ रगड़ती रही। मुझेलग गय़ा कि नीतू भाभीअब झरने वाली हें, औऱ मे किसीतरह सें अपने आप् कों रोकेरहा, पूरी कोशिश कर केँ सिर्फ़ टेबल क्लॉक केँ "टिक-टिक'" पऱ ध्यान लगाएरखा। फिन उन्होने अपना चेहरा मेरेगाल पऱ रख दिया, उनकी साँस रुकी हुइ थि, उनकेहाथ मेरे कंधों पर्र ज़ोर्से पकड़े हुए थें, औऱ उनकी बुर लगा जैसे मेरे लौदे कों हाथ मे लेकर मुथि मे मसलरही होँ, उनकी बुर बारबार कभी मेरे सूपदे कों, कभीबीच लौदे कों दबारही थि। औऱ लौदे कों उपर सें नीचे तक बुर कां रस बिल्कुल भिगो दिया थां। उनका दाना मेरे लौदे कों औऱ ज़ोर्से रगड़ने लगा, औऱ मे नें अपने लौदे कों उचका दिया। मेरा लन्ड उचकाना भाभी कों शायद अच्छा लगा, औऱ वोँ औऱ सिसकी भरनेलगी, "आआहह…….हैं दैया…… हाआंणन्न् …। हैं …रे ……….दैयय्याअ ……….हमम्म्मम… ………हाआंन्नणणन्"; औऱ मुझेलगा कि वोँ कुच्छ देर तक इसीतरह सें झरतीरही। मेरेहाथ उनके चूतड़ कों सहलारहे थें.
वोँ ज़ोर्से साँस लेतेहुए, "ऊऊहह….हमम्म्म …। आअहहानं" करतेहुए रुक गई,। आँखें मूंदी हुइ थि, पऱ चेहरे पऱ खुशीझलक रही थि। मे नें उनके कंधों कों चूमा, चूमता रहा, औऱ उनके चुचियों कों आहिस्ते सें दबाता रहा, घुंडीयों कों मसलता रहा। नीतू भाभी इसितरह सें मेरेउपर लेटीरही। मेरा सख़्त लौदा अभि उनके रसभरी चूत मे लथपथ होकर आरामकर रहा थां.
फिन उन्होने कहा, "दैयय्याअ…। रे …दैयय्ाआ …… ह्म्म्म्ममम… ….वाउ, मेरे राजा…… आहह-आहह…। ….कितने दिनबाद मे इसतरह सें झारी हूं ….बहोत मजा दिया हैं तुमने……। बहोत खुशियाँ देते हौ तुम् औरतों कों इसतरह सें…। काशहर
मर्द तुम्हारे तरह होता!" वोँ अपनासर उठाकर मेरेतरफ अब देखी औऱ बोलि, " अबआओ, ….तुमको मजा करती हूं."
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