नीम्बू का अचार - gao ki chudai – New Episode
भाभी अपने हाथों सें मेरेसर कों सहलारही थि औऱ थोड़ी देरबाद उन्होंने मेरा मुंह अपने बूब्स पऱ रख दिया। अब मे भाभी केँ बड़े बड़े औऱ नर्म बूब्स कों चूसरहा थां, कभी एक् तोँ कभी दूसरा, उनके निप्पल चूसरहा थां औऱ उन्हें हल्के सें काट भि कररहा थां।
जब मे उन्हें बाइट करता तोँ भाभी ज़ोर सें आहह-आहह कि आवाज़ निकालती। लगभग 10 मिनट तक भाभी केँ बूब्स चूसने केँ बाद मे भाभी केँ होंठों कों चूसने लगा, भाभी भि चुम्बन मे मेरासंग देरही थि, वोँ भि मेरे होठों कों औऱ जीभ कों चूसरही थि।
फिन मैंने भाभी सें कहा- भाभी, आपकेआम तौ मैंने चूसलिए, अब मेरा केला भि चूसो नाँ!
औऱ इतना कहकर मैंने अपना लण्ड निकाल दिया जिससे मेरा सख्त 7 इंच कां लन्ड आज़ाद होकरहवा मे लहराने लगा। उसे देखकर भाभी हल्के सें मुस्कुरा दि। मैंने भाभी कां हाथ पकड़कर अपने लन्ड पऱ रख दिया औऱ कहा- भाभी, इसे भि चूसो नाँ!
तोँ भाभी नें हल्के सें मुस्कुराते हुए नाँ मे सर हिलाया, शायद उन्होंने कभीकोई लन्ड चूसा नहि थां इसलिये मेरा लन्ड चूसने मे शरमारही थि। वोँ अपने हाथों सें हि मेरे लन्ड कों सहलाने लगी औऱ मेरे लन्ड कों मसलने लगी। थोड़ी देरबाद मैंने भाभी सें कहा-ठीक हैं, मेरा केलामत चूसो, मगर मुझे तोँ तुम्हारा पपीता चाटने दो।
येसुन कर भाभीफिन सें मुस्कुरा दि मगरइस बारमना नहि किया औऱ फिन मैंने नीचेझुक कर भाभी कि पैंटी भि निकाल दि।
वाउ! क्याँ बुर थि भाभी कि! सांवली-सलोनी बिल्कुल भाभी जैसी, उनकी बुर केँ बाल ज्यादा घने नहि थें, बहोत हल्के थें, इतने कि उन्हें कभीशेव करने कि ज़रूरत नहि पड़ती होगी।
औऱ फिन मैंने भाभी कां एक् पांव ज़मीन केँ लेवेल सें थोडा ऊपर दूसरे पत्थर पर्र रखा जिससे उनकी बुर पूरीतरह सें मेरे सामने आँ गई। अब मैंने अपने होंठ भाभी कि बुर केँ उभरेहुए होंठों पर्र रखदिए औऱ उन्हें चाटने लगा। मेरेऐसा करते हि भाभी केँ बदन मे मानो करेंट सां फैल गय़ा हौ, वोँ ज़ोर सें आवाज़ निकालने लगी, मे अपनीजीभ भाभी कि बुर केँ दाने पऱ रगड़रहा थां ऐसा करने सें भाभी औऱ मस्त होकर सीत्कारने लगी- हम्म आआहह आहह-आहह!
अब मैंने अपने होंठों सें भाभी कि बुर केँ लबों कों फैलाया औऱ अपनीजीभ भाभी कि बुर केँ अंदरडाल कर चाटने लगा।
मुझे भाभी कि बुर चाटने मे औऱ भाभी कों चटवाने मे बहोत मजा आँ रहा थां, भाभी अपने हाथों सें मेरेसर कों अपनी बुर मे दबारही थि औऱ मस्त-मस्त आवाज़ें निकाल रही थि औऱ करीब-करीब 10 मिनट भाभी कि फ़ुद्दी चाटने केँ बाद उन्होंने अपना पानी छोड़ दिया।
अब मे खड़ा हौ गय़ा।
फिन भाभी नें कहा- भैया, चलो, बहोत देर हौ गई हैं। हमें अभि नींबू भि तोड़ने हें।
तोँ मैंने भाभी कों अपने सें चिपका कर उनके होंठों कों चूम लिया औऱ कहा- भाभी प्लीज, चोदने भि दो नाँ! बहोत मनकररहा हैं।
औऱ भाभी कों फिन सें चूमने लगा औऱ उनके बूब्स दबाने लगा।
फिन दो मिनटकुछ सोचने केँ बाद भाभी नें फिन सें वहीबात कही-ठीक हैं भैया, मगरये सभी किसी कों पता नहि लगना चाहिए।
मैंने कहा-हाँ, बिल्कुल पता नहि चलेगा।
औऱ फिन हम् दोनो एक् दूसरे कों चूमने चाटने भींचने लगे, औऱ एक् दूसरे केँ शरीर कों सहलारहे थें।
वहापास हि एक् बड़ी सि चट्टान थि जौ झरने केँ पानी मे आधी डूबी हुईँ थि औऱ उसकीसतह समतल थि। मैंने भाभी कों उस चट्टान पऱ चढ़ाया औऱ स्वयं भि उस पर्र चढ़ गय़ा, मैंने भाभी कों वहा लेटने कों कहा, भाभीलेट गई औऱ मे भाभी केँ ऊपर आँ गय़ा।
मैंने भाभी केँ लबफिन सें चूमने शुरुआत किए औऱ फिन उनकागला चूमने लगा। उसकेबाद मैंने भाभी केँ हाथऊपर करदिए औऱ उनकी बगलें औऱ चूचियाँ चाटने लगा। अहह! बहोत मजा आँ रहा थां भाभी कि चिकनी औऱ नर्म त्वचा कों चाटने मे!
अब मे भाभी केँ जिस्म कों चूमते हुए उनकी नाभि कि तरफबढ़ रहा थां।
उसकेबाद मे भाभी कि बुर पर्र आकररुक गय़ा औऱ उसे चाटने लगा। फिन मैंने भाभी केँ पैरों कों थोडा फैला दिया औऱ उनकी जांघों केँ बीच मे बैठकर अपने हाथों सें भाभी कि मोटी मोटी गदराई हुइ जांघों कों रगड़ने लगा।
क्याँ मस्त जंघाएँ थि भाभी कि! ऐसी जांघें मैंने पहलेकभी नहि देखी थि।
कुछदेर भाभी कि जांघों कों रगड़ने औऱ चाटने केँ बाद मैंने भाभी कि बुर कों अपने हाथों सें फैलाया औऱ अपने बेचारे लन्ड कों जौ इतनीदेर सें भाभी कि बुर मे घुसने कां इंतजार कररहा थां, उसे भाभी कि बुर केँ छेद पर्र रख दिया। भाभी कि चिकनी बुर तौ पहले सें हि गीली थि, मैंने हल्के सें एक् धक्का मारा औऱ मेरा पूरा लन्ड भाभी कि बुर मे समा गय़ा।
लन्ड केँ बुर मे घुसते हि भाभी ज़ोर सें चीखी- आअहहमर गई मे!
अब मैंने भाभी कों अपनी बाहों मे लेँ लिया औऱ उन्हें चूमा औऱ हम् दोनों थोडा आरामदायक अवस्था मे हुए। हम् मिशनरी पोज़िशन मे थें। मैंने धीरे-धीरे धीरे-धीरे लन्ड कों बुर केँ अंदर बाहर् करना शुरुआत किया, भाभी कि बुर कि रग़ड़ सें जोँ मजामिल रहा थां वोँ सच मे बहोत अदभुत थां, मे उसेइधर शब्दों मे नहि बता सकता!
नीम्बू का अचार - gao ki chudai – New Episode
मे अपने चूतड़ आगे पीछेकर रहा थां औऱ भाभी भि अपने चूतड़ उछालकर मेरे लन्ड कों अपनी बुर कि गहराई मे पहुँचने मे मेरी सहायता कररही थि। पहाड़ केँ ऊपर सें गिरने वाले झरने कि फुहारें हमारे जिस्म पऱ पड़रही थि, पानी कि उन ठंडी फुहारों नें भाभी जैसी मस्तमाल महिला कि चुदाई कां मजा दोगुना कर दिया थां।
मे भाभी कों पूरी स्पीड मे चोदरहा थां औऱ भाभीकभी मेरे बालों कों तौ कभी मेरीपीठ कों सहलाकर मुझे औऱ उत्तेजित कररही थि। कुछदेर ऐसे हि चोदने केँ बाद मैंने भाभी सें कहा- भाभी, मुझे आपका पीछे वालाछेद भि चोदना हैं!
तोँ भाभीकुछ समझ नहि पाई औऱ बोलीं- पीछे वालाछेद? मतलब?
तोँ मैंने कहा- भाभी, मुझे आपकी गान्ड भि मारनी हैं।
तौ भाभी हैरान रह गई औऱ कहनेलगी- वोँ केसे करते हें?
तोँ मैंने उनसे पूछा-कभी भैया नें आपके पीछे वालेछेद मे लन्ड नहि डाला?
तोँ उन्होंने कहा- नहीं!
मैंने कहा-ठीक हैं, मे आपको गांड मराने कां मजा देता हूं।
औऱ भाभी कों कुतिया कि तरह खड़े होने कों कहा। भाभी भि वैसे हि खड़ी होँ गई।
भाभी कि मस्त मोटी गांड मेरे सामने थि, मैंने अपने हाथों सें भाभी केँ बड़े बड़े पृष्ठ उभारों कों फैलाया, जिससे उनकी गांड कां छेद दिखने लगा। मैंने अपनी एक् उंगली भाभी कि गांड केँ छेद पऱ लगाई तौ भाभी नें अपनेछेद कों सिकोड़ लिया।
भाभी कि गांड बहोत कसी थि, मैंने अपनी उंगली छेद केँ अंदर डालने कि कोशिश कि तौ छेद केँ अंदर नहि जारही थि। मैंने सोचा कि जब एक् उंगली छेद मे नहि जारही हैं तोँ मेरा इतना मोटा लन्ड केसे अंदर जाएगा। फिन मे थोडा सां पानी अपनेहाथ मे भरकर लाया औऱ भाभी कि गांड मे डाला औऱ भाभी सें गांड कों ढीली करने कों कहा औऱ फिन मे धीरे धीरे अपनी उंगली भाभी कि गांड मे अंदर बाहर् करतारहा जिससे छेद ढीला होँ जाए।
कुछ देरबाद मैंने अपना लन्ड गाण्ड मे डालने कि कोशिश शुरुआत कि, तोँ भाभी ज़ोर सें चीखने लगी।
वोँ बोलीं- भैया, बहोत दर्द होँ रहा हैं, गांडमत मारो!
तोँ मैंने कहा- भाभी, अभि थोडा सां दर्द होगा, अंदर जाने केँ बादमजा आने लगेगा।
औऱ फिन मैंने फिन सें अपना लन्ड भाभी कि गांड मे धकेलना शुरुआत कर दिया औऱ कुछदेर केँ प्रयास केँ बाद मेरे लन्ड कि टोपी भाभी कि गांड मे घुस गई। फिन मैंने भाभी कों गांड ढीली करने कों कहा औऱ उनके चूतड़ों कों सहलाया औऱ एक् ज़ोर कां झटका मारा, उस झटके केँ संग हि मेरा पूरा लन्ड भाभी कि गांड फ़ाड़ता हुआ अंदरचला गय़ा औऱ भाभी दर्द सें चिल्ला उठी- आहह-आहह मर गई! आहह-आहह भैया बाहर् निकालो! बहोत दर्द हौ रहा हैं।
मगर मैंने कुछदेर वैसे हि रहा औऱ भाभी केँ चूतड़ों कों सहलाता रहा। लगभग 5 मिनट केँ बाद मैंने अपना लन्ड धीरे-धीरे धीरे-धीरे चलाना शुरुआत किया। अब भाभी कां दर्द समाप्त हौ चुका थां औऱ वोँ मेरे लन्ड कों मज़े सें अपनी गांड मे लेँ रही थि। भाभी केँ बड़े-बड़े हिप्स केँ बीच मे उनकी गांड केँ छेद पर्र अंदर बाहर् होता मेरा लन्ड, क्याँ जबरदस्त मजादे रहा थां।
कुछदेर बाद भाभी कों भि मजाआने लगा औऱ मे उनकी गाण्ड मे हि झड़ गय़ा।
अब हमें नींबू ढूंढने थें, हमेंअब अधिक मेहनत नहि करनी पड़ी औऱ वहीं झरने सें थोडा आगे हि नींबू केँ 3-4 पेड़मिल गये, हमने जल्द सें नींबू जमाकिए औऱ घऱ कि तरफ निकलगये। मे नानीमा जी केँ यहा 4-5 दिन औऱ रुकामगर परिवार होने कि वजह सें दोबारा चुदाई कां मौका नहि मिला।
फिन मे अपनी छुट्टियों केँ आख़िरी दिन अपनेसंग नींबू कां अचार औऱ भाभी कि चुदाई कि यादें लेकर वापस अपनेघऱ लौटआया। तोँ दोस्तो, ये थां मेरा चुदाई कां अनुभव!
आपको पढ़कर मजाआया याँ नहि, मुझे अवश्य बताएँ।
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