पंजाब दियां मस्त रंगीन पंजाबना - Kisan Ki Kahani - Full Story Part 1
किस्सा "पंजाब दियां मस्त रंगीन पंजाबना: गौरव कुमार कि हैं
मेरानाम गौरव कुमार हैं। मे, कपूरथला, पंजाब कां रहने वाला हूं। हमारा आड़त कां काम हैं यानी हम् किसान औऱ सरकार मे बीच मे फसल कां लेंन देंन कां काम करते हैं। अब मे पंजाब सें हूं तौ बतादूं केँ यहा कि दो चीजें बहोत मशहूर हैं, एक् पटियाला पेगओर दुसरी पंजाबन जट्टीयां। हमारा किसानो केँ संग आनां जानां लगा रहता हैं तौ किसी नाँ किसी जट्टी केँ संग भि बातबन जाती हैं। आजएसी हि किस्सा लेकरआया हूं। तोँ स्टोरी आरंभ करते हैं।
पंजाब दियां मस्त रंगीन पंजाबना - Kisan Ki Kahani – New Episode
"पंजाब दियां मस्त रंगीन पंजाबना:-1
पंजाब केँ देहात सोन्गांव, कपूरथला, मे मलकीत रेह्ता थां। उसकीउमर 70साल थि। मलकीत कि पत्नि कां नाम अमरजीत हैं उमर65साल। मलकीत औऱ अमरजीत दोनो बुढे होने केँ कारण अधिककाम न्ही वाहन पाते थें इसलिये घऱओरखेत केँ काम कि जिमेवारी उन्के बेटे औऱ बहू पऱ हैं। इनके बेटे कां नाम सुखा हैं जिसकी उमर27साल हैं। सुखे कि पत्नि कां नाम सरब्जीत उमर 24 साल हैं। सभीउसे सरबी कहते हैं। सरबी कां फिगर34-30-36था। कथा केँ बाकी पात्र एक् एक् करके सामने आएगे। सरबी औऱ सुखे केँ वियाह कों 2साल हौ ग्ये थें मगरकोई औलाद न्ही थि इसलिये सरबी सुखे सें लडती रह्ती थि। सुखा खेती केँ काम मे जित्ना ताकतवर थां हिसाब मे उत्ना कमजोर। इसलिये फसल औऱ घऱ कां सारा हिसाब उसकी पत्नि हि करती थि। सुखा अपनीफसल कपूरथला, सहर केँ सेठ बनवारी लाल केँ पस बेच्ता हैं। बनवारी लाल कि उमर45साल हैं औऱ गठीला शरीर जवाँ लड़को कों मात देता हैं। फसल कां हिसाब करने सुखाओर सरबी दोंनो आते हैं। पिछ्ले एक् साल सें बनवारी सरबी कों देखता आँ रहा हैं ओर उसके गोरे रन्गओर उबरे मुम्मो ओर चुत्डो कां दीवाना हैं। वो बातो बातो मे सरबी कों छेड़ता रेह्ता थां। बनवारी लाल नें सुखे सें पांचलाख रुपए लेंने थें जिन पऱ हरसाल ब्याज लग जाता थां। एसबार सुखा गेहूंकी फसल कां हिसाब करने लालाजी केँ पासआया थां। “”लें बई सुखे तेरी पूरीफसल कां हिसाब काट केँ मेरे पांचलाख रुपएबढ ग्ये तुमपर”। लाले नें अपनाबही खाता देखकर बोला।
सुखा-“मगर लालाजी धान कि फसल केँ वक़्त भि तौ अपनेयही कहा थां, क्याँ अब भि उसमे सें कुछकम न्हीहुआ”। “अरे ब्याज भि तोँ लगता हैं सुखे औऱ फिनड़ेढ़ लाख तुँ औऱ लें गय़ा थां मुज्से धान कि फसल केँ बाद”। लाले नें कहा। “हा सेठजी मगरकुछ तोँ कम होता होगा नां 2साल सें पांचलाख हि खडा हैं”। सुल्हे नें जवाब दिया। “देख भइया सुखे मेरामन मतचाट, हिसाब करना तोँ तूमेआता न्ही, एसा कर अपनी पत्नि कों लें आईओकल उसे सम्जा दुगा मे”। लाले नें दोटुक सुना दि। सुखा उदास होकरघऱ लौटा।
सुखे कों आतादेख सरबी मे पानी कां गिलास देतेहुए पुछा, “कित्ना रह ज्ञासेठ जी कां”। “अरे कित्ना क्याँ, पांच कां पांच हि खडा हैं अबी भि”। सुखे नें उदास होकर बोला। “मगर कुछ तौ कम होगा नाँ आखिरधान कि फसल मे सें भि कटवाया थां कुछकरज”। सरबी बोलीं। “हमारी तौ कुछसमझ मे न्हीआया, सेठजी नें बोले केँ तुमेसंग लें केँ आओ तोँ वोँ हिसाब करे”। सुखे नें बोला। “हा तोँ हम् चले जयेगे कल”। सरबी नें जवाब दिया। “अरे न्ही तुमे अकेली हि जानां पड़ेगा कल, हमे चारे कों पानी लगाना हैं औऱ जमीन भि सजधजकर करना हैं”। सुखे नें कहा। “कोई बात नहीं हम् चले जायेगे”। सरबी नें जवाब दिया औऱ खानां बननेचली गयीँ,। दुसरे दिन सुखा रोटी खाकरखेत चला गय़ा ओर सरबी रेडी होकरशहर चली गयीँ,।
बनवारी लाल कि दुकान पऱ जाकर सरबी नें लालाजी कों रामराम बुलाई। अवाज सुनकर जेसे हि सेठ नें आंखेउपर उठाई तोँ साम्ने सरबीखडी थि। जट्टी कों देखकर लाला केँ मुह सें लार टपकने लगी। “अरे रामराम सरबी, व्हा क्योखडी हौ य्हाआकर बेठो”। सरबी केँ बदन पऱ नज़र घुमाते हुए लाला बोला। सरबी अन्दर जाकर चटाई पर्र बेठगयी। “औऱ बताओ सरबीसभी ठीक, केसे आनांहुआ आज”। लाला जट्टी केँ चुचो कों देख्ते हुए बोला। “सेठ जी आप्ने कल सुखे कों बोला थां नाँ हिसाब केँ लिये तौ आयीहू मे”। सरबी नें जवाब दिया। “अरे हा मे तोँ भुल हि गय़ा थां, “। सेठ नें अपनाबही खाता निकल्ते हुए जवाब दिया। “हा तोँ सरबी पांचलाख रुपए बाकी हैं अबीइस फसल केँ बाद भि”।
सरबी-“मगर सेठजी धान कि फसल केँ बाद भि आपनेयही बोला थां, कुचकम न्हीहुआ क्याँ”।
“तौ ब्याज भि तौ लगा नाँ, अब देखो पांचलाख तोँ एक् केँ हिसाब सें सांठ हज़ार कां तोँ ब्याज बनग्य औऱ ड़ेढ़लाख फिन लिया तुमने, तौ कुल 2लाख10हज़ार हुए, औऱ फसल हुइ 2लाख, अब 10हज़ार तौ फर भि लिहाज सें छोडरहा हू”। लाले नें सरबी कों देल्ह्ते हुएकहा। सरबी थोडा उदास होँ कर बोलीं-“एसे तौ हम् पूरी जिन्दगी कर्जे मे र्हेगे सेठजी”।
“मेने तुमेकहा थां सर्बी केँ सुखे कों मेरेपास कम पे लगादो, कुच कर्जा तौ मे उसके वेतन सें थोदा थोडा करकेकाट लेता”। लाले नें जवाब दिया। “मगर फिन खेतो कां क्याँ होगासेठ जी उसके इलावा हमरेपास कुछ हैं भि तौ नहीं”। सरबी उदास होकर बोलि।
“हैं तोँ तुमरे पास बहोत कुछ सरबी”। लाला सरबी कि जवानी कों निहारते हुए बोला। “कुछ कहासेठ जी आपने”। सरबी बोलि। “अह्हअरे मे तौ कहरहा थां केँ अब भि सोचलो ओर सुखे कों य्हाकम पे लगादो औऱ संग तुमे भि मे कोईकम दिलवा देता हूं, रहीबात खेतो कि तौ उन्हे आगे ठेके पऱ देदो”। बनवारी लाला बोला।
‘”बात तोँ आपकीसही हैं सेठजी, मै सोचुगी सेठजी इस बारे मे”। सरबी नें जवाब दिया।
“हा जरुर सोचो सरबी, अरे बई दोनो मिलकर 20हज़ार तौ महिने कां कमा हि लोगे उसमे सें थोडे थोड़े कटवाते रहना”। सेठ बोला। “हा सेठजी मे इस बारे मे सुखे सें बात करूगी, अच्छा सेठजी मे चलतीहू”। सरबी इत्ना कहकर जानेलगी। सेठ बनवारी लाल सरबी कों जातेहुए देखरहा थां औऱ जट्टी केँ चुतड़देख अपना लण्ड मस्लने लगा।
"पंजाब दियां मस्त रंगीन पंजाबना जारी रहेगी
पंजाब दियां मस्त रंगीन पंजाबना - Kisan Ki Kahani – New Episode
"पंजाब दियां मस्त रंगीन पंजाबना – पार्ट – 2
दोस्तो मे गौरवकथा कां दुसरा पार्ट लेकर आपके सामने हाज़िर हू, उम्मीद करताहू केँ पहला पार्ट अपको मनपसंद आया होगा। तोँ चलिये कथा कों आगे बढ़ाता हू, यहा सरबी लाले कि दुकान सें चली जाती हैं।
सरबी केँ जाने केँ बाद लालाफिन सें बही खाते मे फसलो कां जोडतोड करनेलगा। अभि पांच मिनट हि हुए थें लाले कों फिन सें रामराम कि अवाज सुनाई दि। लाले नें नज़रउठा कर देखा तोँ सामने रितुखडी थि। रितू लाले केँ पासकाम करने वाले बाबू कि पत्नि थि। वो जात केँ बौरिये थें। रितु 34 कि थि औऱ फिगर38-36-40था जोँ लाले नें हि किया थां। बाबू क्योके सराब पीके टुन्न रेह्ता थां तौ रितु अक्सर लाले केँ खाट पर्र आँ जाती थि। रितु कों देखते लाले कि आंखो मे चमक आँ गई,।
“अरे आँ रितु केसे आनांहुआ”। लाले नें लण्ड मसल्ते हुए पुछा जौ सरबी केँ ख्यालो मे खडा थां।
“सेठजी कुच पेसे चाहिये थें घऱ कां खाने-पीने लेने केँ लिये”। रितु नें जवाब दिया।
“अरे तौ अन्दर आजा नां बहर क़्योखडी हैं”। लाला नें उठतेहुए बोला औऱ बहर देखने लगा केँ कोई हैं तोँ न्ही। जेसे हि रितु अन्दर ज्ञी लाले नें दुकान कां दरवाजा ल्गा दिया औऱ रियु कों पकड लिया
“क्याँ रितु इत्ने दिनकहा थि दिखायी न्ही दि”। लाले केँ हाथ रितु केँ मम्मे मसल ररहे थें।
“अह्ह्ह्ह सेठजी घऱ मे थि अपको तोँ उस सराबी कां पता हैं”। रितु नें जवाब दिया। “मगर आप् आज इत्ने उतावले क्यो होँ रहे हैं, पहले तोँ कभीएसा नहीं किया आपने”। रितु लाले कि एस हरकत सें चौंक गयीँ, थि क्योके पहलेकभी भि लाला रितु पऱ एकदमएसे न्ही टूटा थां।
लाला कों रितु कों दुकान केँ निचेबने सुरंग टाइप कमरे मे लें गय़ा औऱ लाईटजला दि। “अरेमत पुछ रितु अभि अभि सरबी ज्ञी हैं य्हा सें”। लाले नें बोला।
रितु सरबी कों जानती हैं औऱ दोनो अच्छी सहेलिया हैं। “हा तोँ उसनेएसा क्याँ कर दिया”। रितु नें बिस्तर प्र बेठ्ते हुए पुछा।
लाला भि रितु केँ पस बिस्तर पऱ बेठ गय़ा “क्याँ नहीं किया, मस्तबदन हैं साली जट्टी कां बडे मुम्मे औऱ उबरेहुए चुतड़, दिल तौ किया थां केँ उसेवही पकड केँ पेलदू”। लाले नें सरबी कों याद करतेहुए कहा।
“बस इत्नी सि बात, औऱ मे पता न्ही क्याँ क्याँ सोचरही थि मन मे”। रितु बोलीं।
“इत्नी सि बात मतलब तुँ कर सकतीमेर काम, लेके आयेगी जट्टी कों लाले केँ इसबैड पे”। लाले कि आखोंमे चाम्क आँ गई, औऱ उसे सरबी अपने सामने बिस्तर पऱ लेटी हुइ दिखने लगी।
“क्यो न्हीसेठ जी आप् तौ जानते हैं केँ सरबी केँ संग मेरि कित्नी बनती हैं, हामगर उसकीफीस लगेगी”। रितु नें लाले कि तरफ देख्ते हुए बोला।
“अरे मुंह मांगी फीसदे दुगा जोँ कहोगी मिलेगा जान, बोलो तौ अबीदे सक्ता हू जोँ मांगोगी।, बस एक् बार जट्टी कों मेरेबैड पे लें आँ, “। लाले नें रितु कि बोला।
“अरे ज्यदा कुछ नहीं चहिये सेठजी बस मुझे अपना खातासाफ चाहिये”। रितु नें भि गर्म लोहे पर्र हथौड़ा मार दिया।
“जिसदिन जट्टी कों लाले केँ खाट पे लें आयेगी उसदिन तेराखता साफकर दूगा, तब तक नहीं”। लाले नें जवाब दिया।
“तौ बस समझो लें सरबी आपकी होँ गयीँ, ”। रितु नें लाले कों विस्वास दिलाते हुएकहा।
“आये हाये मेरि रानीबडे पुणय कां काम करेगी तुँ उसेयहा लाके”। लाले नें रितु कि चुन्नी उतारते हुएकहा।
“आपकी गुलाम जोँ ठहरी”। रितु नें लाले कों देखते हुए बोला। लाला अप्ने अपकेउतर कर अंडरवेअर मे थां। उसने रितु कि करतीउतर फेन्की औऱ उसके मुम्मे चुस्ने लगा। रितु भि सिस्किया लेतेहुए लाले केँ गठीले जिस्म कों सहलाए जारही थि। लाले नें रितु कों निचे बेठ्ने कों कहा। रितु नें निचेबेठ लाले कां अंडरवेअरउतर दिया औऱ उसका मूसल जेसे लण्ड कों सहलाने लगी। लाले नें लुन्द पकड रीति केँ होंठो पऱ टोपा मसल्ने लगा।
रितु नें जेसे हि अपना मुंहखोल लाले केँ लण्ड कों मुंह मे लिया तौ लाले कि सिसकी निकल गयीँ, “ओह रितुजान चुसजान लाले कां लण्ड”।
रितु भि मजे सें लुन्द चूसेजा रही थि तोँ कभी निचे लाले केँ टट्टौ पा भि जीभफेर रही थि। लगभग 20 मिंट लण्ड चुसाने केँ बिस्तर लाले नें रितु कों खडीकर बिस्तर पे लेटा उसकी सलवार भि उतार दि।
लाला स्वयं निचेखडा थां, उस्ने रितु कि टांगो कों फैलाया औऱ बीच मे चुत पे लण्ड रगड़ने लगा। “सांप कों उसकी गुफा तोँ दिखा रानी”। लाले नें रितु कों आंख मारते हुएकहा।
रितु भि लाले कि बातसमझ गयीँ, औऱ उस्ने अपनेहाथ सें चुत कों खोल दिया। जेसे हि रितु नें चुत कों खोला लाले नें जोर सें एक् घस्सा मारा औऱ एक् हि बर मे अपना पुरा लण्ड रितु कि चुत कि गहरायी मे उतर दिया।
“स्स्स्स्स्स्स आअह्ह्ह्ह्ह सेठ जी”रितु नें हल्की सि सिस्कारी निकली। रितु भि अब लाले केँ 12 इन्च लण्ड लेने कि आदी होँ चुकी थि। लण्ड कों पुरचुत मे उतर लाले नें रितु केँ मम्मे पकड लिये औऱ जोरजोर सें झटके मारने लगा। रितु भि आह्ह्ह्ह स्सिस्स्सी ह्हये लालाजी कहती हुइ लाले केँ लण्ड कां आनंद लेनेलगी।
लाला दनादन रितु कों पेलेजा रहा थां ओरझुक कर उसके मम्मे चुस्स लेता लगभग घंटेभर बाद लाला नें अपने गर्ममाल कि पिचकारी रितु कि चुत मे हि छोड़ दि। “ओह रितुजान” कहतेहुए लाला रितु केँ बगल मे लेट गय़ा।
थोडे टाईम बिस्तर रितु नें अपने कपडे पहने”लाला जी रुपएदो मुझे जानां हैं अब बहोत देर गई, हैं”। रितु नें बोला।
लाला भि अब अपने कपडे पहनने लगा, “बता तौ सही कित्ने चाहिये”।
“पांच हज़ारदे दो लालाजी” रितु बोलि।
“अरे थोडे लेँ जा पहले हि बहोत चले ग्ये हैं तेरीतरफ” लाला रितु कों देखते हुए बोला।
“देदो लालाजी वेसे भि अब खाता तोँ साफ होने हि वाला हैं” रितु नें मुस्कुराते हुएकहा। “
”बहोत चालाक हैं साली तूँ, ठीक हैं लेजामगर वादामत भुलियो अपना” लाले नें 5हज़ार रुपए रितु कों देतेहुए कहा।
“नहीं भुलुगी लालाजी ” रितु नें रुपे पकडे औऱ चली गई,।
लालाफिन सें सरबी कि यादो मे खो गय़ा।
""पंजाब दियां मस्त रंगीन पंजाबना" जारी रहेगी
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