परिवार हो तो ऐसा हो - Parivaar Ki Chudai – New Episode
दिदी मेरे लन्ड कों मात्र 5 इन्च हि मुह मे लेँ पारही थि वोँ भि मुस्किल सें जारहा थां औऱ मुह सें लार टपकने लगी मेने दिदी सें कहा कि पुरा लण्डलो नाँ मुह मे तौ दिदी नें कोशिस कि औऱ थोडा औऱ मुहखोल 2 इंच औऱ लें पायी जौ अब 7 इंच अपनेमुह मे छोटे भइया केँ लण्ड कों लेँ रही थि पर्र मुझे पूरा उतारना थां इसलिये मैंने दिदी सें कहा कि
दिदी एक् कामकरो आप् पूरा लेँ सकती होँ औऱ मैंने दिदी कां नाक पकड़ा जिसे स्वास लेनाबंद हौ गय़ा जिस कारण मुंह पूराखुल गय़ा औऱ
मैंने एक् धक्का लगाया औऱ पूरा 10 औऱ 4 इंचगले मे उतर गय़ा औऱ दिदी कि आंखें बाहर् कि तरह हौ गई औऱ आंखों सें आंसू टपकने लगे पर्र मैंने अपनी रफ्तार बनाए रखें औऱ कमर हिला हिलाकर अपना लण्ड ठोकेजा रहा थां
दिदी कि स्वास उखड़रही थि पर्र मैंने अपना लन्ड सटासाट लन्ड घुसेड़ रहा थां 10 मिनट केँ लन्ड चूसआई केँ बाद दिदी थक चुके थें
अगरअब लन्ड उनकेगले केँ अंदर तक उतरकर बाहर् आँ रहा थां औऱ उन्हें अब अच्छा लगनेलगा औऱ वो पूरा कां पूरा अंदर बाहर् करनेलगी जिससे मेरा आनंद दुगना हौ गय़ा
मैंने ज़्यादा देर नां करतेहुए उन्हें लिटाया औऱ अपनेथूक सें नहलाकर लन्ड केँ सुपाडे कों दिदी कि बुर केँ फांको केँ बीच मे रगड़ने लगा
जिससे दिदी छटपटा रही थि मगर मैंने आगे बढ़कर उनकी मोटे सूचियों कों हाथों सें दबाना शुरुआत किया औऱ दिदी कों किस करनेलगा
औऱ इसी उलझन मे मैंने एक् झटका मारा औऱ टोपा लन्ड कां सुपाड़ा अंदरघुस गय़ा जिससे दिदी कि चीख निकल गई मगर मैंने मुंह उनका अपने मुंह सें बंदकर रखा थां इसलिये सिख अंदर हि दब गई पर्र थोड़ी देरऐसे हि उनकेऊपर लेटारहा
मगर दिदी अपने हाथों सें मुझे हटाने कि कोशिश कररही थि मगर मैंने उनकेगले मे किस करना चालू हि रखा जिससे 5 मिनटऐसे हि रखने पऱ उनका दर्दकम हुआउसी टाइम मैंने एक् औऱ जोर कां झटका मारा औऱ 5 इंच लन्ड अंदर बुर कों चीरता हुआ अपना मार्ग बनाता हुआ अंदर घुसता चला गय़ा जिससे दिदी सटपटाने लगी औऱ रोनेलगी औऱ हाथ पांव मारने लगे पऱ मे भि कहां मानने वाला थां मैंने दूसरा भि झटकाउसी समय मारा औऱ दिदी कि सांसे उखड़ने लगी
औऱ मेने सोचा भि नहि थां वोँ हूआ
दिदी बेहोश हौ गई मगर मेने सोचायही अच्छा रस्ता हैं मेरे लन्ड केँ बराबर रस्ता बनाने कां औऱ मेनेइसी अव्श्था मे
यार,अगर होँ सके तोँ लड़कों केँ लौडों जितना तोँ भागदे दो. इतने छोटेभाग देते होँ तीनचार दिन मे, कुछ खुशी नहि आता.इस बात कों बुरे मे मत लेना।
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औऱ अबआगे
मैंने दिदी कों बेहोश हुईँ अवस्था मे हि उनकी रसभरी भोसड़ी मे पूरा कां पूरा 10 इंच कां लन्ड उतार दिया औऱ अंदर बाहर् जोरदार धक्कम धक्का करनेलगा
जिससे येहुआ कि वो बेहोशी कि हालत मे भि सटपटाने लगी
मगर मैंने अपने धक्को कि स्पीड शालू हि रखीक
औऱ 30 सेकंड मे हि 40 45 शॉर्ट दिदी कि भोसड़ी मे मारदिए
जिससे कि अब संकरी भौसड़ी खुलकर पुरा भोसडा बन चुका थां
अब मे थोड़ी देर रुकारहा औऱ दिदी केँ मोटे मोटे बोबे कों मचलने लगा औऱ 10 मिनट केँ बाद दिदी कों होशआया तौ रोनेलगी औऱ मुझे धक्का देकर उतारने लगी तोँ मैंने सीधा उनके होठों कों अपने होठों सें मिला लिया औऱ मेरीजीभ कों दिदी कि मुंह मे घुसा दि उसकेबाद हम् दोनों एक् दूसरे कि जीभ कों काटरहे थें औऱ हमारा थूक तौ एक् दूसरे केँ मुंह मे आसानी सें मिलजुल कर अंदर बाहर् होँ रहा थां औऱ थूक हमारे मुंह सें बाहर् आँ हि आँ रहा थां दिदी कि सांसे अकड़ गई औऱ वो एकदम सें दूर होँ गए औऱ मेरे सें गले लिपटकर भइया तुमने मुझेमार हि दियाआज तोँ किसी रंडी कि तरह चोदा हैं बेहनचोद तूने भोसड़ी केँ कुत्ते रामी सालेकोई अपनीसगी बड़ी बेहन कों कोईइस कदर रंडी कि तरह चोदता हैं क्याँ भला तुमने तोँ मुझे एक् रंडी समझकर हि चोदा हैं क्याँ मे तुम्हारी रंडी हूं
मे कुछ जवाब देता इससे पहले हि दिदी बोल पड़ी
भइया तुम् डरोमत मे तुम्हारी आज सें घरेलू रंडी हूं औऱ हमेशा तुम्हारे लन्ड केँ नीचे रहूंगी जबजी चाहे मेरी भोसड़ी अरे सॉरीअब तौ ये कहां भोसड़ी रही हैं अब तोँ बम भोसड़ा बन चुका हैं जौ किसी कां भि लंड आसानी सें अंदर बाहर् लेँ सकती हैं
औऱ जब दिदी नें उठकर देखा तौ छत पऱ खून बिखरा पड़ाहुआ थां औऱ उनके दोनों भइया बहनों कि रसमलाई जोँ संतुष्ट होने पर्र गिर चुकी थि वो आपस मे गुल मिलाहुआ थां
तब दिदी नें उठकर वो अपने ब्रा औऱ पेंटी सें साफ किया औऱ मैंने दिदी कों अपने हाथों मे उठाया औऱ उनको उनकेरूम मे लेँ जाकर सुला दिया औऱ मेरे कों नींद कोसों दूर थें कि मैंने आज अपना एक् काम तोँ पूराकर हि दिया दिदी कों अपनीं रखेलबना चुकाहू अबमा कि मोटी गांड मे लण्ड कों फ़साना हैं किसीतरह ये चोचते हुए नीन्द केँ आगोस मे चला गय़ा।
हेलो फ्रेंड्स देरी केँ लिए माफी चाहता हूं औऱ आजरात तक एपसोड आँ जाएगा
मां कि गदराई गांड औऱ फूलाहुआ महा भोसडा जौ मेरे विशाल लोडे सें औऱ बडाकर दूँगा ।
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सुभह हौ रही थि औऱ मम्मी किचन मे सबकेलिए ब्रेकफास्ट सजधजकर कररही थि
मे जल्द जल्द उठकर दिदी केँ रुम मे उनको देखने केँ लिएचला गय़ा
मैंने अंदर झांककर देखा तौ दिदी अभि तक अपनी टांगे मोटी मोटी चौडे कि हुएसो रही थि
तभी मे किचन मे गय़ा औऱ वहा कां नजारा कुछइस तरह थां
माँ ऊपर सें अपने एडीओ केँ बल खड़ी होकरकुछ सामान उताररही थि औऱ मम्मी नें रात कां छोटा सां लह्न्गा पहनरखा थां जोँ उन्के घुटने केँ ऊपर तक थां
मगर सामान उठाने केँ लिए उच्छी हुई तौ गांड पूरीफुल कर बाहर् कि तरफ निकल गयीँ, जैसे पुकार रहीं होँ कि कोईआओ औऱ मेरीइन गुब्बारों कों कंट्रोल मे करो,,,
औऱ मोटी तंदुरस्त गदरआई हुईँ टांगे पूरी चिकनी गोरी नंगीदिख रही थि जिससे मेरा लौड़ा फनफना गय़ा।
वो नजारा देखकर मेरे चडड़े मे तंबूबन गय़ा थां औऱ मेरा लोडा पुरेताव मे झटकेमार रहा थां वोँ नजारा देखकर।
मे देर नं करतेहुए सीधा मम्मी केँ पास गय़ा औऱ पीछे सें चिपक गय़ा
जिससे मेरा लौड़ा माँ केँ लहंगे कों उँसा करताहुआ उनकी नंगी भोसड़ी कों जालगा जिससे कि माँ अचानक चौक गई औऱ हल्की सि अहह केँ संग अपनेबदन कों ढीला छोड़ दिया औऱ बोलीं कि बदमाश तूँ आज इतना जल्द केसेउठ गय़ा
तब मे बोला कि मे अपनी प्यारी माँ कि सेवा करने केँ लिएआज जल्दउठा हूं
तब माँ बोलीं कि मुझेपता हैं सुभह-सुभह उठकर मम्मी कि कौन सि सेवा करनेआया हैं इसबात सें मे थोडा झिज्क गय़ा औऱ शर्मा गय़ा मगर माँ कि चेहरे पे हल्की सि खुशी औऱ मुस्कुराहट थि
तभी मैंने उत्तर दिया कि मे आज सें रोज आपकी सेवा करने केँ लिए जल्दउठ जाया करूंगा औऱ अगर आप् बोलो तोँ रात कों सोते वक्त भि आपकी सेवा करुंगा अगर आपकी इजाजत होँ तोँ
तभी मां हस्ते हुए बोलती हैं कि नाँ बाबा नां ऐसी सेवा मेरे कों नहि चाहिए
मेरे कों थोडा कॉन्फिडेंस बडरहा थां इसबात सें कि मम्मी मुझेकुछ नहि बोलि कि मेरा लौड़ा उनकी भोसड़ी पऱ जालगा फिन भि मुझे वो कुछ नहि बोलि।
माँ अब थेप्ले बनारही थि तभी मे पिछे सें जाकरफिन सें मम्मी कों पकड़ लिया औऱ उनके गर्दन केँ पास सें होतेहुए आगे देखते हुए बोला मां आप् कितने अच्छे थेप्ले बनाती होँ मगर मेरा लोडा अभि मां केँ गांड केँ ऊपर धावाबोल रहा थां जिसका मम्मी केँ ऊपरअसर होँ रहा थां मगरकुछ बोल नहि रही थि।
तभी पिताजी कि आवाज़ आई
कि अरे भइया जल्द सें ब्रेकफास्ट लाओ औऱ मे इसी आवाज़ केँ संगबार चला गय़ा औऱ बापू केँ पासबैठ गय़ा।
दिदी उठकर लंगड़ाते हुए चलकर आँ रही थि औऱ अपनेपेर फैला फैलाकर चलरही थि तभी पिताजी नें पूछा कि मेरी प्यारी बिटिया कों क्याँ हौ गय़ा तभी
दिदी नें जवाब दिया कि पिताजी सुभह-सुभह नहाते टाइमपैर फिसल गय़ा जिससे थोडीमोच आँ गयीँ,।
बापूमन मे सोचने लगे कि बेटा मे तुम्हारा बापू हूं औऱ लडकीपेर फैलाकर कब चलती हें जब उसकी ताबड़तोड़ ठुकाई हुइ हौ औऱ उसके बुर कां भोसडा बना दीया हौ तब हि कोई लडकीऐसा लंगड़ा लंगड़ा केँ चलती हें
तब तक मम्मी आँ गई औऱ नास्ता परोस दीयासब कों मगर अभिषेक नहींआया तभी उन्के प्रेम यानी कि माया दिदी नें बोला मम्मी अभिषेक कहा हैं औऱ अभि तक उठा नहीं क्याँ
तब मम्मी बोलीं मे जाकरजका केँ आती हूं औऱ चली गई भइया केँ रूम मे थोडा दरवाजा खोल केँ देखा तोँ पूरी चौंक हि गई मम्मी तौ
क्योकी अभिषेक तौ पुरा नंगा औऱ उसका लोडा पुराताव मे खडा थां मां अंदर गई औऱ उसके अपने बेते कां हथियार देखने लगी थोड़ी देर उसके लोड़े कों देखती रही औऱ फीर बाहर् आकर दरवाजा कों नौक करनेलगी कि बेटा जल्द सें उठजाओ ब्रेकफास्ट रेडी हें औऱ ब्रेकफास्ट नीचेआकर करलो औऱ वापस आँ गई
इधर पिताजी तैयारी बैठे थें कि कब देवीका आए औऱ कब मे उसे अपनी बेटी केँ बारे मे बताऊं
जब बापू माँ कों नीचेआते हुए देखा तौ उसे अपने कमरे मे बुलाने कां इशारा किया औऱ मम्मी उनके पीछे-पीछे उनके कमरे मे चली गई तौ
बापू नें सारीबात बताई कि देवीजान हमारी बड़ी बेटी ऐसे लंगड़ा लंगड़ा केँ चलरही हैं मुझे तौ कुछ गड़बड़ लगरही हैं जब मे दफ़्तर सें आँ जाऊं तोँ तुम् इस बारे मे पतालगा लेना औऱ हांहां मुझे पक्का यकीन हैं कि तुम् येकाम कर दोगी
देवीका जिसतरह सें हमारी बडी बेटी अपने पांव फैला फैलाकर चलरही थि ये बिल्कुल वैसा हि हें जिसतरह किसी कमसिन कली कों किसी नें फूलबना दिया होँ औऱ हमारी बेटी कों पक्का किसी नें कलरात हि अपने नीचे अपने मजबूत लोड़े सें बेदर्दी सें रौंदा हैं जिसतरह वोँ अपने चेहरे पऱ दर्द कों छुपाएं हमारे बीच बैठी थि मुझे नहि लगता वो लौड़ा कोईआम हौ सकता हैं जरूर वोँ हल्ल्बी अलग हि लौड़ा होगा
तभी माँ बोलती हैं कि हे ईश्वर इस लड़की नें किसके संग अपनीचुत कां भोसडा बनवा दिया।
तौ पिताजी बोले कि जरूर किसी कों रात मे इसने हमारे घऱ बुलाया होगा तौ
मम्मी बोलि कि पागल होँ गए हौ क्याँ मैनगेट कि चाबी तोँ दरवाजा बन्द करने केँ बाद हमारे पास हि रहती हैं
औऱ मे आपकोइस बारे मे एक् औऱ बात बताना चाहती हूं कि
जब मे अभिषेक कों उठाने गई उसकेरुम मे तौ पूरा नंगा होकरसो रहा थां औऱ उसका लौड़ा जौ आपसे भि 1 इंचबडा औऱ पूराताव मे खड़ा थां
मे तोँ उसे 5 मिनट देखती हि रही तोँ
पिताजी बोले कि तभी मे सोचूं तुमने इतना वक़्त क्यूं लगा दिया अपने बेटे कों उठाने मे तौ
मां बोलि कि मे क्याँ करती मेरे बेटे कां हथियार हि कुछऐसा हैं कि मुझे देखने पऱ थोड़ी देर मजबूर हि कर दिया
तब बापू बोले कि हौ तोँ इसका मतलब वो बेहन केँ संग मम्मी भि उस लोड़े कि दीवानी होँ रही हैं तौ माँ थोडा शर्मा गई औऱ बापू नें उनके नीचे भोसड़ी मे हाथडाल दिया औऱ देखा तौ बापू मुस्कुराते हुए बोले कि अरे
देवी तुम्हारी भोसड़ी तोँ अपने बेटे केँ हथियार कों देखकर पूरी गीली औऱ बहोत पानी छोड़रही हैं
मगर मम्मी आपनेमन मे सोचने लगे कि ये भोसड़ी तोँ मेरे छोटे बेटे केँ लोड़े अपने भोसड़ी पर्र महसूस करने पऱ वो बिछारी इतनारो रही हैं उसके लोड़े केँ लिए।
तभी देवी मां नें पिताजी केँ पेंटऊपर सें हाथ रगड़ा तौ पुराखडा होकर झटकेमार रहा थां तौ मम्मी बोलीं कि आपका लोडा भि आपकी जवान तगडा लण्डखा चुकी बेटी कां सोचकर आज ज़्यादा हि फन्फ्ना रहा हैं क्याँ बात हें यह अपनी बेटी कि चूत मे तोँ घुसना नहीं चाहता क्याँ।
औऱ मां हंस दि तौ लज्जा केँ मारे मुस्कुरा दिये।
औऱ मम्मी बोलि अब आप् जाईये रात मे आपकेलिए कुछखास पेशकस होगी आपको लोडे कों खुशकर दूंगी जाईये अब।
औऱ बापूचले गय।
घऱ पऱ अबचार लोग थें दो भइया दोनों बेहन औऱ मम्मी छोटी दिदी माया अभि अपने फ्रेंड केँ घऱ जाने कि लिए बोलीं कि माँ मे मे अपने फ्रेंड उर्मिला केँ घऱजारही हूं तौ साम तक हि वापस आऊंगी औऱ ये कहकर वो चली गई गेट पर्र जाकर देखा तौ उर्मिला उसे लेनेआई थि activa पऱ
मे अब माँ सें बोला कि मे फुटबॉल खेलने मैदान मे जारहा हूं सो दोपहर तक हि आऊंगा औऱ एक् बात औऱ मे फूटबाल मे फॉरवर्ड मे खेलता हूं कियोकी मेरा स्तैमिना बहुत अच्छा हैं
जब भइया नीचे उठकरआया तुँ माँ सें बोला कि मे कुछ दिनों केँ लिए अपने सेंड केँ संग रसिया घूमने जानां चाहता हूं अगर आप् हांकहो तोँ मे चला जाता हूं
तुम् माँ मे कुछदेर सोचकर बोल कि बेटा तुम्हें कब जानां हैं अपनी पैकिंग करलो मे तुम्हारे बापू सें बातकर लूंगी औऱ भइया अपने पैकिंग मे लग गय़ा औऱ केसे रसिया केँ लिए निकल गय़ा।
घऱ पऱ सिर्फ माँ औऱ बड़ी दिदी हि थि तौ मम्मी नें मैनगेट लॉक करके अंदरआयी
औऱ दिदी कों आवाज़ दि
बेटा जराइधर आनां तौ औऱ वो थोड़ी दूर जाकर खुल्ले मे बैठ गई
जब दिदी माँ केँ पास आँ रही थि तोँ अपनेपेर थोड़े नहि ज़्यादा हि फैला फैलाकर चलरही थि जिसका सीधा ज्ञान माँ कां उसके सॉरी टांगों सें चला गय़ा
औऱ मम्मी कों समझने मे यहांदेर नहि लगी कि इसने जरूररात मे कोई लंबा मोटा तगड़ा लन्ड अपनी चिकनी कुंवारी बुर मे लेकरकली सें फूलबन गई हैं औऱ अपने बुर कों भोसड़ा बना दिया हैं
जब दिदी माँ केँ पासआई तौ
माँ मे कुछ बातें नाँ बनाते हुए सीधा हि बोल दिया कि बेटा मुंह काला किसके संग किया हैं कोई बाहर् वाला थां याँ वो खुश क़िस्मत घरवाला हि थां
तब दिदी शर्मा गई औऱ बोलि कि माँ मे आपकोकिस मुंह सें बताऊं
तब माँ बोलीं कि बेटा उसमुह सें बताओजिस मुह सें अपने भइया कां मोटा तगड़ा तंदुरस्त लन्ड रातभर लिया हौ
तब दिदी शर्मा कर अपनासर नीसे झुका लिया।
तब मम्मी बोलीं वो कौनसा खुशनसीब मेरा बेटा हैं
जौ मेरीपरी जैसीफूल सि गदरआई तग्डी तंदुरस्त बेटी कों औऱ अपनी बेहन कों रातभर अपने तगडे लन्ड सें रौंदा हैं
तब दिदी बोलीं कि मम्मी वोँ अभिषेक नहि सिद्धार्थ मेरा छोटा भइया औऱ आपका छोटा बेटा हैं तब मम्मी बोलि कि क्याँ वाकई मे मेरे छोटे बेटे कां हथियार इतना बड़ा हैं जोँ मेरी इतनी तगड़ी औऱ भरेबदन कि बेटी कों भि इतने लंबे-लंबे पांव फैलाने तक मजबूर कर दिया
तब दिदी बोलीं मम्मी छोटे कां लौड़ा पूरा 10 इंच लंबा औऱ चारइंच मोटा हैं जोँ पहलीबार उसने मेरी बुर मे डालातब मे 15 मिनट केँ लिए बेहोश हि हौ गई थि सच्ची मे मम्मी भइया कां लौड़ा इतना बड़ा हैं कि आपनेचार बच्चों कों जन्म दिया हैं मगर वोँ आपकोआज भि पेर फैला फैलाकर चलने पऱ मजबूर कर देगा
जब उसका मोटा तगड़ा लंबा लौड़ा आपकी खेलीखाई भोसड़ी मे भि गुसेगा।
तोँ मां थोड़ी शर्मा गई औऱ बोलि कि क्याँ वाकई मे इतना तगड़ा हैं जौ मेरी जैसी तगड़ी स्त्री कों भि संतुष्ट कर सकता हैं तब
दिदी हंसते हुए बोलीं कि माँ संतुष्ट कि बात आप् छोड़दो बल्कि वोँ तौ आपको पूरीरात भर सोने नहि देगा औऱ रातभर इतनी चोदेगा कि आप् सुभह उठने लायक हि नहि रहोगी
तब माँ कि भोसड़ी नें अपनारस बहोत सारा अपनी पेन्टि मे छोड़ दिया औऱ आअह्ह केंसंग
तब दिदी बोलीं कि मगर आप् बोलो तौ मे छोटे कों आपकेलिए तेयार करदू क्याँ
तब माँ बोलीं कि नाँ मे इसे स्वयं तेयार करूंगी कि इसमें उसकी मम्मी हूं औऱ माँ कां फर्ज होता हैं कि बेटे कों स्वयं तेयार करें
इसलिये आज सें मे अपने बेटे कों स्वयं केँ लिए उसके लोड़े केँ नीचेआने केँ लिए रेडी करूंगी
मगरहां बेटा तुम्हें एक् बात बताना भूल गई
तुम्हारे पिताजी तुम्हारी याद मे तेरी बल्काती औऱ उभरी हुइ भरी गांड कों देखकर तेरे बारे मे मुझेबोल रहे थें औऱ तेरी बोबो केँ तौ बहोत दीवाने हें औऱ तेरी वोँ अपने लोड़े केँ नीचे रगडना चाहते हें। तब दिदी शर्मा कर क्याँ मां आप् भि औऱ भाग गई।
दोपहर होने कों आई थि औऱ सिद्धार्थ अभि घऱआने हि वाला हि थां तोँ दिदी अपनेऊपर वालेरूम मे चली गई औऱ माँ काम मे लग गई।
उधर पिताजी दफ़्तर मे बैठकर यहीसोच रहे थें कि
ऐसाकौन खुश भाग्य खुशनसीब हैं जौ मेरी प्यारी बेटी तगड़ी घोड़ी कों अपने लोड़े केँ नीचेरात भर अपने भारी भरकम लोड़े सें रौंदा हैं अच्छे सें ठुकाई कि हैं
मेरी बड़ी बेटी तोँ मेरा प्रेम हैं औऱ उसे मे अब हासिल करके हि रहूंगा औऱ अपने लोड़े केँ नीचे जरुर रगड़ लूंगा औऱ अपनी पत्नि बनाना चाहता हूं मेरी बड़ी बेटी कों,
यहांबात मुझेआज हि घऱ जाकर देवी सें करनी पड़ेगी औऱ काम मे लगगए।
घऱ पर्र मे आँ गय़ा अंदर जाकर देखा तौ माँ रसोई मे पोछालगा रही थि औऱ उसकी गांड पूरीखुल करउभर चुकी थि जिसे मेरे अंदरखून गरम होनेलगा औऱ मेरा लन्ड कि नसों मे उभार होनेलगा
मैंने देर नं करतेहुए सीधा माँ केँ ऊपर पीछे सें पकड लिया औऱ जिसहाथ सें माँ पोचालगा रही थि मैंने येहाथ उसीहाथ केँ ऊपररख दिया औऱ एक् हाथकमर मे डाल दिया मैंने लोवरपहन रखा थां तोँ मेरा लोडा पुराखडा होकर मां कि गांड मे घुसने केँ लिए इधर-उधर भटकरहा थां
मेरे लोड़े कों ऐसे रगड़ने पर्र मम्मी कों अहसास हौ गय़ा थां मगरकुछ बोलीं हि नहि मेरा हौंसला बढा औऱ मेनेकमर वालेहाथ कों छोड़ी मटकती भरी हुई गांड पर्र रख दिया औऱ उनकेबदन कि खुशबू लेनेलगा
तब मम्मी बोलीं कि जा जाकरबैठ मे खानां लगाती हूं औऱ मे एक् किस माँ केँ गाल औऱ गर्दन पऱ करकेचला गय़ा।
औऱ इधर माँ सोचने लगे कि मेरा बेटा तोँ मुझे भि अपने तगडे लंबे मोटे लोड़े केँ नीचे रगड़ना चाहता हैं औऱ मे भि मेरे बेटे केँ नीचेआने केँ लिए
अब तौ उतावलापन रही होँ जिसतरह सें बड़ी बेटी कों अपने नीचे रौंदा हैं मुझे भि इसीतरह चोदेगा।
औऱ अपने नीचे भोसड़ी मे हाथडाल कर सहलाया तौ वो पानी सें यानी कि मम्मी केँ मीठेरस सें गीली होँ चुकी थि
औऱ मम्मी किचन कां काम समाप्त करके मुझे औऱ दिदी कों खानां परोसा औऱ हम् तीनों नें मिलकर खानां खा लिया औऱ अपने अपने कमरे मे जाकर आराम करनेलगे।
प्रतीक्षा कीजिए अब अगलेभाग कां औऱ रात होने कां क्योंकि देवीका नें पति कों रात कां कुछखास बोला थां औऱ पिताजी भि देवी कां सें कुछ अपनीबडी घोड़ी मतलब बेटी केँ बारे मे कुछबात कहने वाला थां। सुभह होँ रही थि औऱ माँ किचन मे सबकेलिए ब्रेकफास्ट रेडीकर रही थि
मे जल्द जल्द उठकर दिदी केँ रुम मे उनको देखने केँ लिएचला गय़ा
मैंने अंदर झांककर देखा तोँ दिदी अभि तक अपनी टांगे मोटी मोटी चौडे कि हुएसो रही थि
तभी मे किचन मे गय़ा औऱ वहा कां नजारा कुछइस तरह थां
मम्मी ऊपर सें अपने एडीओ केँ बल खड़ी होकरकुछ सामान उताररही थि औऱ मम्मी नें रात कां छोटा सां लह्न्गा पहनरखा थां जौ उन्के घुटने केँ ऊपर तक थां
मगर सामान उठाने केँ लिए उच्छी हुईँ तौ गांड पूरीफुल कर बाहर् कि तरफ निकल गई, जैसे पुकार रहीं हौ कि कोईआओ औऱ मेरीइन गुब्बारों कों कंट्रोल मे करो,,,
औऱ मोटी तंदुरस्त गदरआई हुइ टांगे पूरी चिकनी गोरी नंगीदिख रही थि जिससे मेरा लौड़ा फनफना गय़ा।
वो नजारा देखकर मेरे चडड़े मे तंबूबन गय़ा थां औऱ मेरा लोडा पुरेताव मे झटकेमार रहा थां वोँ नजारा देखकर।
मे देर नं करतेहुए सीधा मम्मी केँ पास गय़ा औऱ पीछे सें चिपक गय़ा
जिससे मेरा लौड़ा मम्मी केँ लहंगे कों उँसा करताहुआ उनकी नंगी भोसड़ी कों जालगा जिससे कि माँ अचानक चौक गई औऱ हल्की सि अहह केँ संग अपने जिस्म कों ढीला छोड़ दिया औऱ बोलि कि बदमाश तुँ आज इतना जल्द केसेउठ गय़ा
तब मे बोला कि मे अपनी प्यारी माँ कि सेवा करने केँ लिएआज जल्दउठा हूं
तब माँ बोलीं कि मुझेपता हैं सुभह-सुभह उठकर मम्मी कि कौन सि सेवा करनेआया हैं इसबात सें मे थोडा झिज्क गय़ा औऱ शर्मा गय़ा मगर मम्मी कि चेहरे पे हल्की सि खुशी औऱ मुस्कुराहट थि
तभी मैंने उत्तर दिया कि मे आज सें रोज आपकी सेवा करने केँ लिए जल्दउठ जाया करूंगा औऱ अगर आप् बोलो तोँ रात कों सोते वक़्त भि आपकी सेवा करुंगा अगर आपकी इजाजत हौ तोँ
तभी मम्मी हस्ते हुए बोलती हैं कि नां बाबा नाँ ऐसी सेवा मेरे कों नहि चाहिए
मेरे कों थोडा कॉन्फिडेंस बडरहा थां इसबात सें कि मम्मी मुझेकुछ नहि बोलि कि मेरा लौड़ा उनकी भोसड़ी पर्र जालगा फिन भि मुझे वो कुछ नहि बोलीं।
मम्मी अब थेप्ले बनारही थि तभी मे पिछे सें जाकरफिन सें मम्मी कों पकड़ लिया औऱ उनके गर्दन केँ पास सें होतेहुए आगे देखते हुए बोला मम्मी आप् कितने अच्छे थेप्ले बनाती होँ मगर मेरा लोडा अभि मम्मी केँ गांड केँ ऊपर धावाबोल रहा थां जिसका मां केँ ऊपरअसर हौ रहा थां मगरकुछ बोल नहि रही थि।
तभी बापू कि आवाज़ आई
कि अरे भइया जल्द सें ब्रेकफास्ट लाओ औऱ मे इसी आवाज़ केँ संगबार चला गय़ा औऱ पिताजी केँ पासबैठ गय़ा।
दिदी उठकर लंगड़ाते हुए चलकर आँ रही थि औऱ अपनेपेर फैला फैलाकर चलरही थि तभी बापू नें पूछा कि मेरी प्यारी बिटिया कों क्याँ होँ गय़ा तभी
दिदी नें जवाब दिया कि पिताजी सुभह-सुभह नहाते टाइमपैर फिसल गय़ा जिससे थोडीमोच आँ गई,।
बापूमन मे सोचने लगे कि बेटा मे तुम्हारा पिताजी हूं औऱ लडकी पांव फैलाकर कब चलती हें जब उसकी ताबड़तोड़ ठुकाई हुईँ होँ औऱ उसके बुर कां भोसडा बना दीया हौ तब हि कोई लडकीऐसा लंगड़ा लंगड़ा केँ चलती हें
तब तक मम्मी आँ गई औऱ नास्ता परोस दीयासब कों मगर अभिषेक नहींआया तभी उन्के प्रेम यानी कि माया दिदी नें बोला मम्मी अभिषेक कहा हैं औऱ अभि तक उठा नहीं क्याँ
तब मम्मी बोलीं मे जाकरजका केँ आती हूं औऱ चली गई भइया केँ रूम मे थोडा दरवाजा खोल केँ देखा तोँ पूरी चौंक हि गई मां तोँ
क्योकी अभिषेक तोँ पुरा नंगा औऱ उसका लोडा पुराताव मे खडा थां मम्मी अंदर गई औऱ उसके अपने बेते कां हथियार देखने लगी थोड़ी देर उसके लोड़े कों देखती रही औऱ फीर बाहर् आकर दरवाजा कों नौक करनेलगी कि बेटा जल्द सें उठजाओ ब्रेकफास्ट रेडी हें औऱ ब्रेकफास्ट नीचेआकर करलो औऱ वापस आँ गई
इधर पिताजी तैयारी बैठे थें कि कब देवीका आए औऱ कब मे उसे अपनी बेटी केँ बारे मे बताऊं
जब पिताजी मम्मी कों नीचेआते हुए देखा तौ उसे अपने कमरे मे बुलाने कां इशारा किया औऱ मम्मी उनके पीछे-पीछे उनके कमरे मे चली गई तौ
पिताजी नें सारीबात बताई कि देवीजान हमारी बड़ी बेटी ऐसे लंगड़ा लंगड़ा केँ चलरही हैं मुझे तोँ कुछ गड़बड़ लगरही हैं जब मे दफ़्तर सें आँ जाऊं तोँ तुम् इस बारे मे पतालगा लेना औऱ हांहां मुझे पक्का यकीन हैं कि तुम् येकाम कर दोगी
देवीका जिसतरह सें हमारी बडी बेटी अपनेपेर फैला फैलाकर चलरही थि ये बिल्कुल वैसा हि हें जिसतरह किसी कमसिन कली कों किसी नें फूलबना दिया हौ औऱ हमारी बेटी कों पक्का किसी नें कलरात हि अपने नीचे अपने मजबूत लोड़े सें बेदर्दी सें रौंदा हैं जिसतरह वोँ अपने चेहरे पर्र दर्द कों छुपाएं हमारे बीच बैठी थि मुझे नहि लगता वो लौड़ा कोईआम होँ सकता हैं जरूर वोँ हल्ल्बी अलग हि लौड़ा होगा
तभी माँ बोलती हैं कि हे ईश्वर इस लड़की नें किसके संग अपनीचुत कां भोसडा बनवा दिया।
तोँ बापू बोले कि जरूर किसी कों रात मे इसने हमारे घऱ बुलाया होगा तौ
मम्मी बोलीं कि पागल होँ गए होँ क्याँ मैनगेट कि चाबी तोँ दरवाजा बन्द करने केँ बाद हमारे पास हि रहती हैं
औऱ मे आपकोइस बारे मे एक् औऱ बात बताना चाहती हूं कि
जब मे अभिषेक कों उठाने गई उसकेरुम मे तोँ पूरा नंगा होकरसो रहा थां औऱ उसका लौड़ा जोँ आपसे भि 1 इंचबडा औऱ पूराताव मे खड़ा थां
मे तोँ उसे 5 मिनट देखती हि रही तोँ
पिताजी बोले कि तभी मे सोचूं तुमने इतना टाइम क्यूं लगा दिया अपने बेटे कों उठाने मे तोँ
मां बोलि कि मे क्याँ करती मेरे बेटे कां हथियार हि कुछऐसा हैं कि मुझे देखने पर्र थोड़ी देर मजबूर हि कर दिया
तब बापू बोले कि हौ तोँ इसका मतलब वो बेहन केँ संग मम्मी भि उस लोड़े कि दीवानी होँ रही हैं तौ मम्मी थोडा शर्मा गई औऱ पिताजी नें उनके नीचे भोसड़ी मे हाथडाल दिया औऱ देखा तौ बापू मुस्कुराते हुए बोले कि अरे
देवी तुम्हारी भोसड़ी तौ अपने बेटे केँ हथियार कों देखकर पूरी गीली औऱ बहोत पानी छोड़रही हैं
मगर माँ आपनेमन मे सोचने लगे कि ये भोसड़ी तौ मेरे छोटे बेटे केँ लोड़े अपने भोसड़ी पर्र महसूस करने पऱ वो बिछारी इतनारो रही हैं उसके लोड़े केँ लिए।
तभी देवी मां नें बापू केँ पेंटऊपर सें हाथ रगड़ा तोँ पुराखडा होकर झटकेमार रहा थां तौ मम्मी बोलीं कि आपका लोडा भि आपकी जवान तगडा लण्डखा चुकी बेटी कां सोचकर आज अधिक हि फन्फ्ना रहा हैं क्याँ बात हें यह अपनी बेटी कि चूत मे तौ घुसना नहीं चाहता क्याँ।
औऱ मम्मी हंस दि तौ लज्जा केँ मारे मुस्कुरा दिये।
औऱ मां बोलीं अब आप् जाईये रात मे आपकेलिए कुछखास पेशकस होगी आपको लोडे कों खुशकर दूंगी जाईये अब।
औऱ बापूचले गय।
घऱ पर्र अबचार लोग थें दो भइया दोनों बेहन औऱ मम्मी छोटी दिदी माया अभि अपने फ्रेंड केँ घऱ जाने कि लिए बोलीं कि माँ मे मे अपने फ्रेंड उर्मिला केँ घऱजारही हूं तोँ साम तक हि वापस आऊंगी औऱ ये कहकर वो चली गई गेट पऱ जाकर देखा तोँ उर्मिला उसे लेनेआई थि activa पऱ
मे अब माँ सें बोला कि मे फुटबॉल खेलने मैदान मे जारहा हूं सो दोपहर तक हि आऊंगा औऱ एक् बात औऱ मे फूटबाल मे फॉरवर्ड मे खेलता हूं कियोकी मेरा स्तैमिना बहुत अच्छा हैं
जब भइया नीचे उठकरआया तुँ माँ सें बोला कि मे कुछ दिनों केँ लिए अपने सेंड केँ संग रसिया घूमने जानां चाहता हूं अगर आप् हांकहो तौ मे चला जाता हूं
तुम् मम्मी मे कुछदेर सोचकर बोल कि बेटा तुम्हें कब जानां हैं अपनी पैकिंग करलो मे तुम्हारे बापू सें बातकर लूंगी औऱ भइया अपने पैकिंग मे लग गय़ा औऱ केसे रसिया केँ लिए निकल गय़ा।
घऱ पर्र मात्र माँ औऱ बड़ी दिदी हि थि तौ मम्मी नें मैनगेट लॉक करके अंदरआयी
औऱ दिदी कों आवाज़ दि
बेटा जराइधर आनां तौ औऱ वो थोड़ी दूर जाकर खुल्ले मे बैठ गई
जब दिदी मम्मी केँ पास आँ रही थि तौ अपने पांव थोड़े नहि ज़्यादा हि फैला फैलाकर चलरही थि जिसका सीधा ज्ञान मम्मी कां उसके सॉरी टांगों सें चला गय़ा
औऱ माँ कों समझने मे यहांदेर नहि लगी कि इसने जरूररात मे कोई लंबा मोटा तगड़ा लन्ड अपनी चिकनी कुंवारी बुर मे लेकरकली सें फूलबन गई हैं औऱ अपने बुर कों भोसड़ा बना दिया हैं
जब दिदी माँ केँ पासआई तोँ
माँ मे कुछ बातें नाँ बनाते हुए सीधा हि बोल दिया कि बेटा मुंह काला किसके संग किया हैं कोई बाहर् वाला थां याँ वो खुश क़िस्मत घरवाला हि थां
तब दिदी शर्मा गई औऱ बोलि कि मम्मी मे आपकोकिस मुंह सें बताऊं
तब मम्मी बोलि कि बेटा उसमुह सें बताओजिस मुह सें अपने भइया कां मोटा तगड़ा तंदुरस्त लन्ड रातभर लिया होँ
तब दिदी शर्मा कर अपनासर नीसे झुका लिया।
तब मम्मी बोलीं वो कौनसा खुशनसीब मेरा बेटा हैं
जोँ मेरीपरी जैसीफूल सि गदरआई तग्डी तंदुरस्त बेटी कों औऱ अपनी बेहन कों रातभर अपने तगडे लन्ड सें रौंदा हैं
तब दिदी बोलीं कि माँ वोँ अभिषेक नहि सिद्धार्थ मेरा छोटा भइया औऱ आपका छोटा बेटा हैं तब मम्मी बोलीं कि क्याँ वाकई मे मेरे छोटे बेटे कां हथियार इतना बड़ा हैं जौ मेरी इतनी तगड़ी औऱ भरे शरीर कि बेटी कों भि इतने लंबे-लंबे पांव फैलाने तक मजबूर कर दिया
तब दिदी बोलीं माँ छोटे कां लौड़ा पूरा 10 इंच लंबा औऱ चारइंच मोटा हैं जौ पहलीबार उसने मेरी बुर मे डालातब मे 15 मिनट केँ लिए बेहोश हि हौ गई थि सच्ची मे माँ भइया कां लौड़ा इतना बड़ा हैं कि आपनेचार बच्चों कों जन्म दिया हैं मगर वोँ आपकोआज भि पांव फैला फैलाकर चलने पर्र मजबूर कर देगा
जब उसका मोटा तगड़ा लंबा लौड़ा आपकी खेलीखाई भोसड़ी मे भि गुसेगा।
तौ मम्मी थोड़ी शर्मा गई औऱ बोलि कि क्याँ वाकई मे इतना तगड़ा हैं जौ मेरी जैसी तगड़ी स्त्री कों भि संतुष्ट कर सकता हैं तब
दिदी हंसते हुए बोलीं कि मम्मी संतुष्ट कि बात आप् छोड़दो बल्कि वोँ तौ आपको पूरीरात भर सोने नहि देगा औऱ रातभर इतनी चोदेगा कि आप् सुभह उठने लायक हि नहि रहोगी
तब माँ कि भोसड़ी नें अपनारस बहोत सारा अपनी पेन्टि मे छोड़ दिया औऱ आअह्ह केंसंग
तब दिदी बोलि कि मगर आप् बोलो तोँ मे छोटे कों आपकेलिए तेयार करदू क्याँ
तब माँ बोलि कि नां मे इसे स्वयं तेयार करूंगी कि इसमें उसकी माँ हूं औऱ माँ कां फर्ज होता हैं कि बेटे कों स्वयं तेयार करें
इसलिये आज सें मे अपने बेटे कों स्वयं केँ लिए उसके लोड़े केँ नीचेआने केँ लिए रेडी करूंगी
मगरहां बेटा तुम्हें एक् बात बताना भूल गई
तुम्हारे बापू तुम्हारी याद मे तेरी बल्काती औऱ उभरी हुई भरी गांड कों देखकर तेरे बारे मे मुझेबोल रहे थें औऱ तेरी बोबो केँ तौ बहोत दीवाने हें औऱ तुम्हें वोँ अपने लोड़े केँ नीचे रगडना चाहते हें। तब दिदी शर्मा कर क्याँ मम्मी आप् भि औऱ भाग गई।
दोपहर होने कों आई थि औऱ सिद्धार्थ अभि घऱआने हि वाला हि थां तौ दिदी अपनेऊपर वालेरूम मे चली गई औऱ मम्मी काम मे लग गई।
उधर बापू दफ़्तर मे बैठकर यहीसोच रहे थें कि
ऐसाकौन खुश क़िस्मत खुशनसीब हैं जौ मेरी प्यारी बेटी तगड़ी घोड़ी कों अपने लोड़े केँ नीचेरात भर अपने भारी भरकम लोड़े सें रौंदा हैं अच्छे सें ठुकाई कि हैं
मेरी बड़ी बेटी तौ मेरा प्रेम हैं औऱ उसे मे अब हासिल करके हि रहूंगा औऱ अपने लोड़े केँ नीचे जरुर रगड़ लूंगा औऱ अपनी पत्नि बनाना चाहता हूं मेरी बड़ी बेटी कों,
यहांबात मुझेआज हि घऱ जाकर देवी सें करनी पड़ेगी औऱ काम मे लगगए।
घऱ पऱ मे आँ गय़ा अंदर जाकर देखा तोँ मम्मी रसोई मे पोछालगा रही थि औऱ उसकी गांड पूरीखुल करउभर चुकी थि जिसे मेरे अंदरखून गरम होनेलगा औऱ मेरा लन्ड कि नसों मे उभार होनेलगा
मैंने देर नं करतेहुए सीधा माँ केँ ऊपर पीछे सें पकड लिया औऱ जिसहाथ सें माँ पोचालगा रही थि मैंने येहाथ उसीहाथ केँ ऊपररख दिया औऱ एक् हाथकमर मे डाल दिया मैंने लोवरपहन रखा थां तौ मेरा लोडा पुराखडा होकर मां कि गांड मे घुसने केँ लिए इधर-उधर भटकरहा थां
मेरे लोड़े कों ऐसे रगड़ने पऱ मां कों अहसास होँ गय़ा थां मगरकुछ बोलीं हि नहि मेरा हौंसला बढा औऱ मेनेकमर वालेहाथ कों छोड़ी मटकती भरी हुईँ गांड पर्र रख दिया औऱ उनकेबदन कि खुशबू लेनेलगा
तब माँ बोलि कि जा जाकरबैठ मे खानां लगाती हूं औऱ मे एक् किस मम्मी केँ गाल औऱ गर्दन पर्र करकेचला गय़ा।
औऱ इधर मम्मी सोचने लगे कि मेरा बेटा तोँ मुझे भि अपने तगडे लंबे मोटे लोड़े केँ नीचे रगड़ना चाहता हैं औऱ मे भि मेरे बेटे केँ नीचेआने केँ लिए
अब तौ प्यास रही हौ जिसतरह सें बड़ी बेटी कों अपने नीचे रौंदा हैं मुझे भि इसीतरह चोदेगा।
औऱ अपने नीचे भोसड़ी मे हाथडाल कर सहलाया तोँ वो पानी सें यानी कि मम्मी केँ मीठेरस सें गीली हौ चुकी थि
औऱ माँ किचन कां काम समाप्त करके मुझे औऱ दिदी कों खानां परोसा औऱ हम् तीनों नें मिलकर खानां खा लिया औऱ अपने अपने कमरे मे जाकर आराम करनेलगे।
प्रतीक्षा कीजिए अब अगलेभाग कां औऱ रात होने कां क्योंकि देवीका नें पति कों रात कां कुछखास बोला थां औऱ बापू भि देवी कां सें कुछ अपनीबडी घोड़ी मतलब बेटी केँ बारे मे कुछबात कहने वाला थां।
परिवार हो तो ऐसा हो - Parivaar Ki Chudai - Continue reading next part
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