पेलो मुझे मेरे राजा भैया - Maa Beta Pyaar – New Episode
मेरी बेहन चूतडउठा उठाकर मेरी उन्गली सें चुदवाने लगी औऱ संग मेरीमुठ मारने लगी थि। अबमुझ सें नहींरहा जारहा थां। अगरकुछ देर औऱ ऐसा हि चलता रहता तौ मेर लंड झड हि जाता.मै नेहा कि चुची कों ज़ोर सें चुसकर अपने सें अलगकर दिया.
"नेहा, मेरी बहना, अब मै तूझे चोदे बिना नहींरह सकता। तेरा भइयाआज पहलीबार किसी लडकी कों चोदरहा हैं औऱ वोँ भि अपनीसगि बेहन कों! तुझ जैसी बेहन कों चोदना यह मेरी खुशकिस्मत हैं। मै चाहता हू कि मेरी बेहनमुझ सें ऐसी हि प्रेम सें चुदवाती रहे। मुझेबस एक् बर अपनी प्यारी बेहन कि चुम्मी लेने दो.प्लीज.मेरी प्यारी बहना."
मैने नेहा कि कुर्ती तौ पहले हि उतारी थि, उसका स्कर्ट भि खीन्च कर निकाल दिया औऱ अपनी लुन्गी निकलकर फेन्क दि। मैने नेहा कों चित लिटा दिया औऱ उसके पैरो कों अच्छी तरह फैला दिया। नेहा व्याकुल हौ उठी थि।
"भैया लेँ लो एक् चुम्मी जलदे औऱ मेरी नीचेवाली प्यास बुझाओ." औऱ उसने अपनेहोठ चुमी देनेकी मुद्रा मे करलिए। मगर मेरा प्लान अलग थां, मै नीचेझुक गय़ा औऱ नेहा कि बुर कि गुलाबी पन्खुडियोपे अपनेहोठ रख दिये। नेहा कसमसायी औऱ उसने मेरासिर अपनी बुर पे कस केँ जकड लिया.मै अपनी बेहन कि बुर कों चाटने लगा। मेरा लंड मेरी बेहन केँ मुख केँ सामने थां। मेरी बेहन नें झट सें मेरे लंड कों खीचकर अपनेमुह मे लें लिया औऱ अपने हाथो सें मेरे अन्डकोश सहलाने लगी। हम् भइया बेहन६९ कि पोजिशन मे थें मै बुर चाटने मे औऱ नेहामेर लंड चुसने मे लग गयीँ,। मेरी ज़ुबान पऱ नेहा केँ बुर रस कि बौछार हौ रही थि। वोँ बहोत गर्म हि चुकी थि औऱ मेरे सुपाडे कों लॉलीपॉप कि तरहचुस रही थि। मैने भि अपनी बेहन कि गोरी जान्घो कों फैलारखा थां औऱ उसकी मख्खन जैसी बुर कों चाटरहा थां। कभीकभी नेहा मेरे अन्डकोश चाट लेती तौ मेरा शरीर काम्प जाता.फिन उसने अचानक मेरी गान्ड मे एक् उन्गली घुसेड दि तौ मेरा पूरा जिस्म ऐठ गय़ा.
मैसमझ गय़ा कि अब औऱ देर करनाठीक नहीं होगा। हम् एक् दूसरे सें अलगहुए औऱ मै अपनी बेहन कों चित लिटा दिया औऱ उसके मखमली चूतडो केँ नीचे एक् तकिया रख दियाजिस कारन मेरी प्यारी बहना कि बुर उपरउभर गई,। नेहा कि आन्खे मेरे लंड कों भूखी नज़रो सें देखरही थि। मै भि हवसभरी नज़र सें अपनी बेहन केँ नन्गे खूबसूरती कों निहार रहा थां औऱ फ़िरमै उसके नन्गे शरीर पऱ झुका। मैने अपने लंड कां सुपाडा उसकी कुवारी बुर पऱ रगडना शुरुकर दिया। बुर किसीआग केँ शोले कि तरहतप रही थि। मै नीचे सें उपर तक लंड कों रगडरहा थां कि वोँ चीखपडी,
"भैया, क्यू तडपारहे होँ? अब मेरी बुर कों ठन्डी करो नं? इस कि आग शान्त करदो मेरे भैया! अपनी बेहन कों इतना उत्तेजित कररहे हौ, अबचोद भि डालो, प्लीऽऽऽऽऽऽऽझ !"
जान्घो कों खोलकर मै लंड क सुपाडा अपनी बेहन कि बुर केँ मुख पऱ रखा औऱ एक् जोरदार धक्का मार दिया। नेहा कां भि ये पहला मौका थां तौ उसकेमुह सें एक् लम्बी चीख निकल गयीँ,.
"आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह.उउउउउइइइइइइइ.माऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ" मै थोडा डर गय़ा औऱ उसे पूछा.
"मेरी रानी, बहोत दर्द होँ रहाहू तोँ रुकजाऊ" मगर नेहाने प्यारसे मुझे औऱ कसकेपकड लिया औऱ गर्दन सें इशारा करके चालू रखने केँ लिएकहा। उसकाये प्रेम देखकर मै औऱ उत्तेजित हुआ औऱ लंड थोडा बाहर् निकालकर एक् जोरका धक्का लगाया। इस धक्केसे नेहा कि बुर कि गुलाबी फ़ान्को कों चीरता हुआ लंड मेरी बेहन कि बुर मे घुसता चला गय़ा। मुझे मेह्सूस हुआ कि मेरा लंड किसीआग कि भटटी मे घुस गय़ा हौ। मखमल सें भि ज़्यादा रसीले बुर कि दीवारो नें मेरे लंड कों जकड लिया औऱ मुझे जन्नत कां मजा मिलने लगा। मेरी प्यारी बेहन कराहउठी,
"भैया प्रेम सें चोदो अपनी बहना कों! बहोत मस्त हैं आपकाये हथियार.मेरे राजा भैया.पेलते जाओ.औऱ अन्दर.हा बस्स यूही.आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह। भैया बहोत मस्त हैं आपकायह लंड!"
नेहा केँ मुह सें ऐसी बाते सुनकर मेरी वासना औऱ बढरही थि। बुर सें बहने वालेरस नें लंड कां मार्ग आसानबना दिया थां औऱ थोडीदेर मे हि मेरा पूरा८ इन्च कां लंड मेरी बेहन कि चूत मे घुस चुका थां.
मै अपनामुख झुकाकर नेहा कि चुची पऱ रख दिया औऱ चाटने लगा। मेरा लंड मस्ती मे बुर केँ अन्दर बहर होँ रहा थां औऱ मै अपनीकमर हिला हिलाकर अपनीसगी बेहन कों बडे प्यारसे चोदरह थां,
"नेहा, मेरी रानी बहना, मै ऐसा अनन्द पहलेकभी नहीं मेह्सूस क्याँ! सच बहना, तुँ मेरी पत्नी हैं आज सें। तुम्हारी तरफचोद कर मेरी भाग्य खुल गई, हैं। देख तेरेराज भैया कां लंड तेरी बुर कि गहरायी मे समा चुका हैं। आज सें मैतेर भैया नहीं सैय्या हू ! तेरी अपनी पत्नी बनाकर सारीउमर चोदून्गा, यह तेरेराज भैया कां वादा हैं तुमसे!"
नेहा चुदायी केँ अनन्द मे इतनीखो चुकी थि कि कुछबोल नहींपा रही थि। उसनेबस मेरामुह अपनीतरफ खीन्च लिया औऱ मुझे प्यारसे किस करनेलगी। अब तोँ मै स्वर्ग मे थां, मेरा लंड नेहा कि बुर कि फचाफच चुदाई कररहा थां, मेरेहाथ उसकीकडी चुचियोको मसलकर कुचलरहे थें औऱ मेरेहोठ उसकेमुह मे घुसे थें। मैने नेहा कां मुह भि इतनी जोरसे चूमा कि उसकेहोठ बिलकुल लाललाल हौ गए.मगर वोँ भि मस्ती केँ मूड मे थि। मेरी बेहनअब अपने चूतडउठा कर चुदवा रही थि। मैने हाथो कों उसके मम्मोसे हटाकर उसके चूतडो कों कसकेथाम लिया औऱ जमकर अपनेबदन सें चिपका लिया।
"ओह्ह्ह्ह्ह्ह भैया.आआ.चोदो जोर सें! पेलो मुझे मेरे राजा भैया.आआ.बहोत आनन्द देरह हैं आपका लंड मेरी बुर कों, मेरे सैय्या.आआ.चोद डालोआज अपनी बेहन कों.बना लो मुझे अपनी पत्नी, अपनी रानी, मै तुम्हारी हू आजसे.जौ चाहेकर लोमगर ऐसे चोदते रहो.आआआआआ.!!!" वोँ हान्फ़ रही थि। हमारे शरीर पसिना पसिना हौ चुके थें औऱ हम् पागलो कि तरह चोदेजा रहे थें। चुदाई अपनी उन्चाई तक पहुन्च चुकी थि। मेरा झडने कां टाइम नज़दीक आँ रहा थां। मेरे अन्डकोश सें रसउपर उठरहा थां। उधर नेहाजिस रफ़्तार सें गान्ड उछालरही थि, मुझेलगा कि वोँ भि झडने वाली हैं.
"भैया.आआ, जोर सें.मै गई,.मेरी बुर गयीँ,.मै.मै.मैझडी मेरे भैया। चोदलो अपनी बेहन कों जोर सें.पेलो भैया.अपना रस गिरादो मेरी बुर मे.मुझे अपने बच्चे कि माबना दो मेरे भैया.अपनी पत्नी कों माबन दो.ऊऊ.मै गयीँ,.ओह्ह्ह.राज भैया.आआआआआ.मेरे पति.मेरे सैय्या.मेरे.मेरे.मै.!!!" औऱ यू चिल्लाते वोँ निढाल होँ गई.
मेरा लंड भि पिचकारी छोडने कों थां। मै अपनी बेहन कों अपनी बाहो मे जकडकर जोरजोर सें चोदना जारीरखा। मुझे अपने नीचे अपनी बेहन केँ बजाए अपनी बिवीदिख रही थि। वासना कि चमक सें भरी मेरी
नेहा मुझे मेरी पत्नी दिखरही थि जोँ मुझ सें प्रेम सें चुदवा रही थि। तभी मेरे लंड क बान्ध टूटपडा औऱ रसक फ़ुवारा नेहा कि बुर मे गिरने लगा। बुर भि झडरही थि। लंड रसअब बुर रस मे मिक्स हौ रहा थां। तूफ़ानी धक्के अब धीरे-धीरे होनेलगे औऱ पूरीतरह सें शान्त हौ कर हम् पति-पत्नी कि तरह अलिन्गन्बद्ध हौ करलेट कर नन्गे सोगए.
अपनी बेहन नेहा कों मैउसरात तीनबार चोदा। दोनोथक चुके थें। हम् भइया बेहन चुदायी मे इतने व्यस्त थें कि रातकब बीत गई, पता हि न् चला। अगलादिन सन्डे थइस लियेकोई प्रॉब्लेम नहीं थां। हम् दोपहर तक सोतेरहे। २बजेजब मेरी आन्ख खुली तोँ नेहानहा कर बाथरूमसे निकलरही थि औऱ उसनेबदन पऱ तौलिया लपेटा हुआ थां। जब वोँ मेरेपास आयी तोँ मै तौलिया खीचकर उसको नन्गा कर दिया,
"क्याँ कररहे होँ भैया? दिल नहींभरा अभि तक? मेरी बुर कां कचुमर निकाल दिया हैं तुम्हारे लंड नें! अबकुछ खा लें?" नेहा हसतेहुए बोलि। उसकेहोठ लाल औऱ सूजेहुए लगरहे थें, उसकी चुचियोपे मेरे नाखूनोके निशान थें, चलते वक्*त भि वोँ थोडी लन्गडाकर चलरही थि। मैने देखा हमारे खाट कि चादर पर्र कुछखून केँ धब्बे भि थें। मुझेकल रात कि चुदाई यादआई औऱ नेहा कों कितना दर्दहुआ होगायह सोचकर शर्मिन्दा हुआ।
मैने नेहा कों अपनीगोद मे बिठाकर कहा
"सॉरी नेहा, मेरी रानी.मैने कलरात तुम्हे बहोत परेशान किया बहोत दर्द होता होगा तुम्हे." मगर मेरीबात बीच मे काटकर नेहा बोलि
"ऐसे नं बोलो भैया, ये दर्द बहोत मीठा हैं.आपके प्यारकी निशानी हैं यहदाग, मै तोँ इन्हे गहने मानती हू.अब चिन्ता छोडो, भूख लगी होगी, नहा धोलो औऱ कुछखा लो, मैकही भागी नहींजा रहीहू, जीभर केँ कर लेना जोँ करना हैं"
मै बाथरूम मे जानेलगा औऱ उसको चूमते हुए बोला, "कभी अपनी पत्नी, औऱ वोँ भि इतनी प्यारीसी पत्नी सें भि जी भरता हैं क्याँ? नेहा मेरी रानी बहना, आज सें तुम् मेरे सामने नन्गी रहो, जब जीकरे मै तुम्हे चोदून्गा, बोल चलेगा नां तुझेही"
नेहा मेरे होठोको चूमते हुए बोलि" मै तौ कबकी तुम्हारी हौ चुकी मेरे राजा भैया, जब मर्जी हौ, मै तुम्हारे लिए सजधजकर हू"
मैनहा कर नन्गा हि बाहर् निकला औऱ देखा तोँ नेहा मोबाइल पर्र मा सें बातकर रही थि। मैझुक कर उसकी चुची चूसने लगा तौ नेहा कों बात करना मुश्किल होनेलगा, मै एक् हाथ सें उसकी दूसरी चुचीमसल रहा थां औऱ दूसरे हाथ सें उसकी बुर मे उन्गली कररहा थां। नेहा नें झूठमूठ मुझे आखोसे डाटा, मगर मैने शरारत बन्द नहीं कि। फिन वोँ अपनी आवाज़ सें उत्तेजना छुपाने केँ लिये बोलीं, " मा, लो आप् भैया सें बातकर लो" औऱ मेरेहाथ मे मोबाइल थमा दिया.मा बोलरही थि,
" केसे हौ बेटा? अपनी बेहन केँ लियेकोइ लडका मिला क्याँ? अबहमे नेहा कि विवाह जल्द सें जल्दकर देनी चाहिये" मै केसे बोलता? मेरामुह तोँ अपनी बेहन कि चुची सें भराहुआ थां.
मगरमै चुची सें मुहउठा कर मोबाइल लिया औऱ नेहा कां हाथ अपने लंड पर्र रखतेहुए बोल
"मा घबराने कि कोईबात नहीं हैं। एक् लडका मैने देखा हैं जिसे नेहा भि शायद पसंद करेगी। वोँ भि उसको चाहता हैं। मगर आप् एक् बारउसे देख लेना.ऐसा करो नाँ मा, आपहीयहा आँ करदेख लो। उम्मीद हैं आपकोयह नाता पसंद आयेगा."
माखुश हौ कर बोलीं, " यह तौ बहोत अच्छी बात हैं बेटा, मै जानती थि कि तुम् अपनी बेहन कां ख्याल रखोगे। ठीक हैं मै भि वहाआने कां बन्दोबस्त करने मे जुट जातीहू " औऱ मा नें मोबाइल रख दिया।
मैमन हि मनखुश होँ रहा थां। मगर नेहा नें चिन्ता जताते हुएकहा
"भैया, यह क्याँ कहरहे हौ? कौन सां लडका देखा हैं तुमने मेरे लिये?मा सें झूठ क्यूबोल रहे थें?"
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मैने नेहा कि चुची मसलते हुए उसकी एक् चुम्मी लेँ औऱ कहा" मेरी प्यारी बेहन केँ लियेयह राजकैस रहेगा? माकहरही थि कि भइया कों हि बेहन कि खुशी कां ख्याल रखना पडेगा। अबबसमा कों मना लेँ तोँ बातठीक होँ जयेगी!"
फिन एक् दिनमा गाव सें हमारे यहा आँ गई। हम् दोनोउसे लेने स्टेशन गये थें। मा विधवा केँ लिबास मे हि थि मगर सफ़ेद साडी मे भि खिलरही थि। पापा केँ गुजरने केँ बाद मानो उसका एक् बोझ हलकाहुआ थां, उसका खूबसूरती औऱ चमकउठा थां। मैनेमा कि पांवछू लिएतब मा नें प्रेम सें गले लगया, उसके सीने केँ उभार मेरे सीने सें टकरागये। मैनेजान बूझकर मा कों आलिन्गन मे लेकर उसके मासल शरीर पऱ हाथ फ़ेरा औऱ उसे जल्द नहीं छोडा। मेरा लंड तोँ उस वक़्त हि खडा होँ गय़ा औऱ मा केँ पेट पर्र चुभने लग। शायदअब मेरे लंड कों घऱ कि बुर खाने कि आदत हौ चुकी थि। जबमैमा केँ गलेलग रहा थां तौ नेहा मुझे अजीब नज़रो सें ताड़रही थि। मुझेलगा जैसे उसकी नज़र मे इर्षा कि झलक थि। औऱ होती भि क्यू नहीं। आखिर वोँ मुझे अपना पति समझरही थि। मगर मेरी बेहन/पत्नी नहीं जानती थि कि उसका अपना पति अपनीमा सें सम्बन्ध बनाने कि कोशिश कररहा थां तोँ उसे अपना पति मा केँ संग बान्ट कर खानां होगा। मेरी अपनी बेहन केँ संग विवाह कां मार्ग मै अपनीमा कि बुर सें होँ कर निकालने वाला थां। मेरे शैतानी मन मे एक् प्लान बनरहा थां।
हम् सभीघऱ आये, बडे खुश थें, इधरउधर कि बात करतेरहे। नेहा किसी उलझन मे लगरही थि। जबमा नहाने गयीँ, तोँ वोँ बोलीं, "भैया, अबमा कों क्याँ जवाब दोगे? लडकाकहा हैं? अगर उसनेपूछ लिया तोँ?" मैने अपनी बेहन कों बाहो मे भर केँ एक् किस लिया औऱ उसकी चुची मसलने लगा। नेहा भि गर्म हौ कर मेरासंग देनेलगी। मैन्से उसे मौका देखकर मेरेदिल कि बातकह डाली
"नेहा, मेरी रानी, मै मा कों भि बैड मे लेना चाहता हू, जबमै मा कों चोद लून्गा तौ वोँ नाँ करने कि हालत मे नहीं रहेगी। वोँ भि तौ एक् प्यासी स्त्री हैं, औऱ फ़िर हम् तीनोयहा पे मज़े सें रहेगे".
नेहा कां शुरु मे अपने कानोपे विश्वास हि नहीं होँ रहा थां कि मै अपनीमा कों पटाकर चोदने कि फिराक मे हू.जब मैनेउसे दुबारा समझाया तोँ वोँ नकली क्रोध करतेहुए बोलीं
"क्याँ कहरहे होँ भैया, यानी मेरीमा मेरी सौतन होगी, औऱ हम् तीनो." इसके पहले कि वोँ औऱ कुछ बोले मैने उसकेहोठ अपने होठोसे बन्दकिए औऱ वोँ केमिस्ट सें लाईदवा उसकेहाथ मे थमाकर बोला
" तुम् बसयहदवा मा कों पिला देना.मा अबनहा केँ आएगी तोँ उसेगरम चाय-ब्रेकफास्ट परोसना औऱ उसकेगरम चाय मे यह मिला देना.यह दवाकोई भि महिला कि बुर मे आगलगा देती हैं, तोँ मा मुझे धुत्कारेगी नहीं। उसको भि एक् मर्द कि जरूरत तौ होगी, इस दवा सें वोँ ख़्वाहिश भडकेगी, जिसेमै बुझाकर तुम्हें अपनी पत्नी बनाने कि मन्ज़ुरी लेँ लून्गा!!
नेहा कि आखेफटी कि फटीरह गई। मगर उसके अन्दर भि मेरी जितनी हि वासना जगी हुइ थि इसलिये वोँ यहकाम करने केँ लिए राजी होँ गई।
कुछदेर बादमा नहा केँ बाहर् आई। नेहा नें प्लान केँ मुताबिक उसेगरम चाय-ब्रेकफास्ट दिया जिसमे वोँ दवा मिलाई थि। फिनमा औऱ नेहा अन्दर केँ कमरे मे गए औऱ बाते करनेलगे। मै दरवाजे पे खडा होकरकान लगाए उनकी बातेसुन रहा थां। मापूछ रही थि
"नेहा, क्याँ तुमने वोँ लडका देखा हैं जिसका जिक्र राजकर रहा थां? कैसा हैं वोँ, तुम्हे पसंद हैं क्याँ, क्याँ उसे तुम् मनपसंद होँ?" मा नें अबदवा ली थि तौ उसकाअसर कुछ टाइम मे शुरु होनेवाला हि थां, तोँ नेहा नें भि बेझिझक बता दिया.
"मा असल मे मैराज भैया सें हि बहोत प्रेम करतीहू, तौ हम् दोनो नें सोचा कि क्यू हम् दोनो एक् दूसरे सें विवाह कर लें" नेहा कि बात सुनकर मा कों जैसे झटकालगा
"नेहा.यह तूँ क्याँ बोलरही हैं, पागल तौ नहीं हुई हैं। रुकोमै अभि राज कों बुलाती हू, राज.राज." मा नें मुझे बुलाते हि मै कमरे मे दाखिल हौ गय़ा। उनकी बाते तोँ मैने पहले हि सुनली थि, सो मैने अन्दर जातेही नेहा कों अपनी बाहो मे भर लियाऔए उसकोकिस करनेलगा, संग हि उसकी चुचिया मसलने लगा.मा तोँ बेहोश होते होतेबची।
"राज, यह क्याँ हौ रह हैं? अपनी बेहन केँ संगयह करतेहुए शरम नहींआयी? अपनी बेहन केँ संगयह सभी.नेहा तुम् भि?.हे ईश्वर!!" मा नफ़रत सें बोलीं। मेराहाथ नेहा केँ पजामी केँ अन्दर उसकी बुर पर्र थां औऱ वोँ मेरा लंड सहलारही थि। मा नें नहाकर एक् गाऊन पहना थां उसका शरीर नहाने केँ पानी सें भीगाहुआ थां औऱ वोँ गाऊनउसे चिपककर बैठा थां, जिसकी वजह सें मा कां सुगठित बदनसाफ झलकरहा थां। मेरा लंड मा केँ भीगे शरीर कों देखकर लोहा होँ चुका थां। मैनेआगे बढकरमा कों बाहो मे लेँ लिया औऱ कहा" नेहा औऱ मेरी विवाह तौ होने वाली हैं। आपकोमै अपने दमाद केँ रूप मे क्यू पसंद नहीं ? दिखने मे ठीकहू, कमाता हू, कोई बुरीआदत नहीं, आपको औऱ नेहा कों बहोत प्रेम करताहू औऱ नेहा भि मुझे बहोत प्रेम करती हैं। सच, मामै अपनी बेहन कों पत्नी बनाकर बहोत खुश रखून्गा औऱ आपको भि." यह कहतेहुए मेरेहाथ अबमा कि चुची तक पहुन्च गये थें। उसकापेट कां चिकना बदन मेरेहाथ लगा तौ मैमा कों भीच लिया औऱ उसकी गर्दन पऱ किस करनेलग। माकुछ समझ नहींपाई। उसपर दवाई कां असर होनेलगा थां औऱ उसे मर्दाना स्पर्श नें उतेजित कर दिया थां, शुरु मे तोँ वोँ नाँ नुकुर कररही थि।
"उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़.नां.बेटा.यह क्याँ.नाँ बेत.यह नहीं होँ सकता.हम् एक् परिवार हैं.मै तेरीमा औऱ नेहा तेरी बेहन.नहीं बेटा यहपाप हैं!!"
मगरमै नहीं रुका औऱ मा केँ सुडौल बदन कों स्पर्श करतारहा।
मैनेमा कों नितम्ब केँ नीचे सें पकडकर कसके दबाया औऱ चूमने लगा.मा केँ मासल चूतड मुझे बहोत मस्तलगे औऱ मै उनको रगडने लग.माअब भि तैय्यार नहीं थि"छोड मुझेराज, शरम नहींआती तुम्हारी तरफ अपनीमा केँ संगयह सभी करतेहुए? औऱ नेहा, तुम् भि केसेबहक गई" नेहा धीरे-धीरे सें बोलि" मासभी कुछपता हि नहींचला केसे हौ गय! भैया मुझे वाकई बहोत प्रेम करते हैं यहबात सच हैं।
नेहा नें मा केँ समीपजा कर उसके जिस्म सें गाऊनहटा दिया औऱ वोँ मा कों किस करनेलगी। मेरीइन दो प्यारी औरतोको समलिन्गी सम्बन्ध बनाते देख मेरा लंड बुरीतरह सें सख्त होँ गय़ा। मा पर्र अब दवाई शायदअसर करनेलगी थि, उसने नेहा कों बहोत अधिक नहीं रोका.कुछ हि टाइम मे मा केँ जिस्म कउपर वाला हिस्सा नन्गा हौ गय़ा, मा केँ बदन पर्र काले रन्ग कि ब्रा थि। मैचुप चापखडा थां, अब मैने मेरा पजामा उतार दिया औऱ मा क्को हिरसे बाहो मे भर लिया। मेराकडा लंड मा केँ नाभी केँ आसपास चुभरहा थां। मैनेमा कों उनके गालो पे चूमना शुरु किया औऱ मेरेहाथ उनकी ब्रा निकालने कि कोशिश कररहे थें। मा कि नजर मेरेखडे लंड पे गई औऱ वोँ शरमा गई। नेहाने मा कों पीछेसे पकड लिया थां औऱ वोँ उन्हे गालो पे किसकर रही थि। मैनेमा केँ ब्रा मे कसी चुचियोके उपर केँ हिस्से कों चूमना शुरु किया जिससे मा केँ मुह सें एक् मादक सिसकरी निकल गई। मुझे यकीन होँ गय़ा कि दवाकाम कररही हैं औऱ मा भि अभि मस्ती केँ मूड मे आँ रही हैं। मैने उसकेकमर मे हाथ डालकर उसकी चुचियोको चूमना जारीरखा, उसके चुचियोपे हलकेसे दात गडाए औऱ उन चुचियोके बीच वाली क्लीव्हेज कों चाटने लगा.अब मा कां विरोध कम होता दिखाई देरहा थां। पहले ’नाँ नाँ” कि रट लगाती माअब केवल ’स्स्स्स्स.ओह.उम्म्म्म.’ जैसी आवाजे निकाल रही थि। तभी शरारती नेहा नें पीछेसे मा केँ ब्रा कां हूक निकाल दिया जिससे उनकी ब्रा जिस्म सें अलग होँ गयीँ, औऱ मेराकाम औऱ भि आसान हौ गय़ा। मा कि चुचिया बडीबडी थि, निपल केँ आसपास भूरे रन्ग कां हिस्सा औऱ उसपरखडे निपल.मा गोरी थि तौ उसके चुचीपर नीलेकलर कि नसेसाफ दिखरही थि। नेहा कि चुची थोडी छोटीमगर सख्त थि, मा कि चुची थोडी ढीली थि मगर बहोत सुंदर दिखरही थि, अपनीसगी मा कि नन्गी चुची मेरे सामने थि इसबात सें हि मै उत्तेजित होँ गय़ा औऱ हाथउपर करकेमा कि चुची कसकेपकड ली औऱ अपनी मुठ्ठीमे उन्हे भर दबोचा। मा केँ मुह सें ’स्स्स्स्स्स्स्स.आआआआह्ह्ह्ह्ह.’ जैसी आवाजे निकलने लगी जोँ मेरी वासना औऱ भडकाने लगी। मुझेअब जल्दही मा कों चोदना थां,
पेलो मुझे मेरे राजा भैया - Maa Beta Pyaar – New Episode
मैनेउसे बेडपर ढकेल दिया औऱ उसपर लेटकर एक् चुची कों मुह मे लिया, मेरा दूसरा हाथ उसकी दूसरी चुचीरगड थां। अब मैने एक् हाथ उसकी काली पॅन्टी केँ उपररख करमा कि बुर कों सहलाने लग.मा कि बुर गर्म थि औऱ गीली भि हुइ थि, शायददवा औऱ अन्दर कि उत्तेजना सें ऐसाहुआ हौ। मुह सें वोँ इन्कार कररही थि
" बसकरो राज, मुझेछोड दो, तुम् दोनो जौ चाहेकरो मगर मुझेछोड दो, मुझे बक्षदो, यहसभी क्याँ कररहे हौ.क्याँ मेरेसंग भि गलतकाम करना चाहते हौ? "
मैहसकर बोल"मा तेरी बुर तोँ यहीकह रही हैं कि तुँ चुदने केँ लिये बे-करार हौ। जबमैयह काम मेरी बेहन केँ संगकर सकताहू तोँ आपकेसंग क्यू नहीं, सच बताओ, आप् कों मर्द कि जरूरत महसूस नहीं होती, देखो आपकी बुर कितना पानीछोड रही हैं" औऱ मैने मेरी एक् उन्गली मा कि बुर मे घुसा दि। मा कों जैसेशॉक लगा, ऐसे वोँ उछली। मैने नेहा कों इशारा किया, उसनेमा केँ हाथपकड रखे औऱ मैनेमा कि पॅन्टी उतारकर फेक दि। अबमा मेरे सामने बिलकुल बेबस नन्गी पडी थि। मा कां नग्नबदन देखकर मेरे शरीर मे सुरसुरी पैदा हुई। मैने थोडी शरारत करनेकी सोची.मै किचनसे एक् शहद कि बोतल लेँ आया औऱ ढेर साराशहद मा केँ शरीर पर्र लगाया। मा थोडी चिढकर बोलि
"राजयह क्याँ पागलपन हैं, क्याँ कररहे होँ" मैने जवाब नहीं दिया औऱ मा केँ नन्गे शरीर कों लगाशहद चाटने लगा।
मैनेमा कों पेर सें लेकरसिर तक चाट लिया.यहा तक कि मैनेशहद कि कुछ बून्दे मा कि बुर मे डाल दि औऱ बुर केँ अन्दर जीभ डालकर चाट लिया.मा कि मासल जान्घो कों किस करतेहुए मुझ पऱ नशासा चढरहा थां। मा कि बुर डबल रोटी कि तरह फूली हुई थि। उसकी बुर अब गर्म होतीजा रही थि। बुर पऱ छोटे छोटेबाल थए। शायदकुछ दिन पहले हि शेव कि थि बुर। मैनेमा केँ शरीर पऱ शहद कां अच्छा लेपकर दिया, खूब साराशहद उसकी बुर औऱ चुची पर्र लगाय.मा बिना पानी केँ मछली कि तरहतडप रही थि। नेहा नें मुझे चापट मारी औऱ बोलि, " भैया यह तुम्हारी मा हैं औऱ इसे सासू भि बनाना चाहते होँ। सच बताओ मेरे प्यारे भैया, जब चोदोगे तोँ इसकोमा कहोगे याँ सासू माँ?"
नेहा कि बात सुनकर मा तौ इतनी शरमा गई कि पूछोमत। मै बेशरमीसे बोला
रुको डार्लिन्ग ! पहलेइस मीठीचीज कों खूब चखून्गा, फिन बताऊन्गा यह मेरीमा हैं याँ सासू माँ। औऱ फ़िरखूब चोदून्गा इसको!"
अब तोँ हम् दोनो भइया बेहनमा पर्र टूटपडे। मै उसकी चुचीचाट औऱ चूसरहा थां औऱ नेहा उसकेपेट औऱ नाभी मे लगाशहद चाटरही थि। मा"अहह" "ओह्ह" कि आवाज़े निकालती रही औऱ मै औऱ नेहा उसकोचूम चूमकर चाटते रहे.
मा कां शरीर कां स्वाद औऱ शहद कि मिठास दोनो बहोत नशीले लगरहे थें। फिन मैनेमा कि जान्घो कों चूमा चाटा, औऱ बुर पऱ जुबान फ़ेरी। मा कां चिल्लाना अबकमहुआ थां औऱ वोँ भि अब शायद उत्तेजित हौ चुकी थि। नेहाउस समयमा कि चुचीचुस रही थि
"ओ.ओ.अम्म्म्म्म्म्म.मेरी मा.मुझे क्याँ हौ रहा हैं.मेरे बच्चो अबबस करो.मै औऱ नहींसह सकती,.मुझे.मुझे.अब मुझे। शान्त करो। मेराबदन जलरह हैं.उफ़्फ़्फ़.यह मुझे क्याँ हौ रहा हैं.हे भग्वान.राज बेटा.अब औऱ मत तडपा.आँ जाओ मेरे अन्दर" मा कि मुह सें यह सुनने सें मुझे यकीन होँ गय़ा कि माअब स्वयं भि चुदवाने केँ मूड मे आँ गई हैं। मेरी खुशी कां ठिकाना नहीं थां, अब मेरी सेक्सी बेहन औऱ मेरी उतनीही सेक्सी मा मेरेसंग यौन सबन्ध रखने केँ लिए राजी हौ गई थि। मैनेमा कि बुर मे उन्गली डालकर उसे औऱ उत्तेजित करनेलगा। मैनेमा सें कहा
"मा यह बदलाव केसे आँ गय़ा.मै तौ बहोत खुश हू.सॉरी मुझे तुमपर जबरदस्ती करनीपडी मगरअब केवल प्यारसे चोदून्गा तुम्हे." औऱ मैनेमा कि चुची चूसना आरम्भ किया.मा मेरे बालो मे हाथ फेरते हुए बोलि
"राज तुँ हि अपनी बेहन कों सुखदे सकता हैं.मुझे किसी औऱ पर्र एतबार नहीं रहा.इसलिये मैचुप रही.मगर अब तुमने मेरे शरीर मे आगलगा दि हैं.अब जल्द सें कुछकर मेरे राजा.मेरे लाल."
मै मा कि सहमतिसे खुशहुआ। उसे औऱ छेडने केँ लिए बोला"कहो मा, क्याँ करू मै.तुम् जोँ कहोगी वही करून्गा" औऱ मैने मेरी उन्गली घचाघच उसके बुर मे पेलनी शुरुकर दि। मा नें मुझे कसके बाहोमे जकड लिया औऱ बोलि
"चल नालायक.अपनी मा केँ मुह सें गन्दी बात कहलवाना चाहता हैं.स्स्स्स्स्स्स्स्स.मुझे चोद अभि.मुझे चोदकर ज़र अपनी मर्दानगी कां सबूतदे दे मेरे लाल.तभी तौ मेरी बेटी सौप दून्गी तेरी.चोद लें अपनीमा कों भि.ऊऊ.आआह्ह्ह.मेर जिस्म जलरह हैं,.ऊऊओ.!!"
मा कामुकता मे नाँ जाने क्याँ क्याँ बकरही थि। कामुकता वाली दवाई कां असर भि उस पर्र पूरीतरह सें होँ चुका थां। मा नें हाथ बढाकर मेरे लंड कों पकडकर अपनी बुर पर्र रगडने लगी। मैनेउसे पलन्ग पऱ घोडीबना कर पीछे सें लंड घुसाने कि कोशिश कि। मा केँ चूतड इतने मादक थें कि एक् बार तौ मा कि गान्ड मे लंड पेलने कों मन ललचा गय़ा। मन कों सम्झा कर अपनीमा कि बुर मे मैने लंड पेल दिया। नेहा नीचे झुककर मा कि चुचीचुस रही थि औऱ मेरे लंड कों अन्दर डालने मे सहायता कररही थि। फच कि आवाज़ सें मेरा लंड अपनीमा कि बुर मे प्रवेश कर गय़ा। मा केँ मुख सें कामुक कराह निकल गयीँ,। मैमा कि कमर कों थामकर लंड पेलना शुरुकर दिया। इतनीउमर मे भि मेरीमा कि बुर बहोत टाईट थि।
"ओह्ह्ह्ह राज.चोद डाल मुझे.मै तोँ लंड क स्वाद हि भूल गई, थि.तेरे बापू केँ बाद तेरा लंड लें रही हैं मेरी बुर.उउउफ़्फ़्फ़्फ़ चोद बेटा.हम् दोनो मा-बेटी तेरे लिया हि हैं आज सें.चोद बेटा.चोद अपनीमा कों!!"
मै मज़े सें मा कों चोदने लग। नेहाउठ कर मेरे सामने आँ गयीँ, औऱ मेरे होठो कों चूमने लगी। मेरा लंड पुरामा कि बुर मे घुस चुका थां। नेहा मस्ती मे बोलि, " भैया अब तौ हम् दोनो कों चोद लिया हैं तुमने.हम् दोनो तुम्हारी अमानत हैं आजसे.चोद इसे.चोदो अपनीमा कों.मिटा दे उसकी प्यास.चोद लो भैया!"
मैअब तूफ़ानी गति सें मा कों चोदने लग.मा भि अपनी गान्ड पीछे ढकेलने लगी। वोँ एक् कुतिआ कि तरह हान्फ़ रही थि। नेहा नें एक् उन्गली मा कि गान्ड मे घुसा डाली.मा चिहुक उठी, " ओह्ह्ह.यह मत करो.मेरी गान्ड मत छेडो.मा कि बुर सें मन नहींभरा क्याँ तुम्हारा जौ गान्ड भि मारने लगे हौ बेटा.तेरी मा कि बुर पानीछोड रही हैं बेटा.जोर सें चोद!!"
मैइन बातोसे बहोत उत्तेजित हुआ थां औऱ मेरा लंड भि पानी छोडने कि स्थिती मे थां। मा कां शरीर अकडा तोँ मेरा लंड भि पानी छोडने लगा। मेरारस भि मा कि बुर मे गिरने लगा। नेहा नें मा कि बुर कों उन्गलियो सें छेडना जारी रखा.औऱ फिनमा कि चीख निकल गयीँ,, " ओ.मर गई,.झड गयीँ, मै.राज बेटा तेरीमा चुद गयीँ,.ईई!"
औऱ हम् तीनो पलंग पर्र लस्त हौ करगिर पडे। मेरा लंड सिकुडकर मा कि बुर सें बाहर् आँ गय़ा। मैने प्यारसे मा औऱ नेहा कों खूब चूमा औऱ उनके चुचियोपर प्यारसे हाथ फेरने लगा.मा कि आन्ख बहोत देरसे खुली।
"मा कैसालगा भैया कां लंड?" नेहा नें पूछा.मा नें मुझेकिस करतेहुए कहा, "अब तोँ मुझे भि इससे प्रेम होँ गय़ा हैं मेरे बेटे.इतना सुख मुझे सालोके बाद नसीबहुआ। कल हि मै तुम् दोनो कि विवाह करवा दून्गी.मगर मेरी एक् शर्त हैं"
"कैसी शर्त" नेहा औऱ मैने एक् संग पूछा।
"यही कि यह पति अकेले तुम्हारा नहीं, हम् दोनो कां होगा"
मै औऱ नेहाये बात सुनकर बहोत खुशहुए औऱ फिनमा कों चूमने लगे।
अगलेदिन मा नें मन्दिर मे जाकर हमारी विवाह करवा दि। मैनेमा केँ चरन स्पर्श किये तौ वोँ मुस्कुरा कर बोलीं,
"राज बेटा, तुम् पहलेपेर स्पर्श करोगे औऱ फ़िर इनकोउठा कर अपने कन्धो पऱ रख लोगे, मै जानती हू."
मैने हसकर जवाब दिया"कल रात जौ घोडीबन केँ मजे लेँ रही थि वोँ भूल गई क्याँ."
मा बोलीं" उस सवारी नें तोँ मुझेथका दिया हैं.आज बस अपनी पत्नी नेहा सें हि सुहागरात मना लेना!"
नेहा बोलीं" ऐसे केसे होँ सकता हैं, कल हि तौ आपने बोला कि यह पति दोनो कां होगा तौ सुहागरात मे आपको भि संग लेन्गे."
मै मुस्कुरा पडा औऱ अपनीमा औऱ बिविबनी बेहन कों लेकरघऱ आँ गय़ा
The End
पेलो मुझे मेरे राजा भैया - Maa Beta Pyaar - Continue reading next part
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