रंडी खाना completee - Behan Ki Chudai - Full Story Part 1
रंडी खानां
माता पिता केँ देहान्रत केँ बाद पुरेघऱ कि जिम्मेदारी मेरे कंधो पर्र आँ पड़ी थि, मे शहर मे रहता थां जबकि मेरे परिवार केँ अन्यलोग पास केँ गाव मे गाव मे ऐसे तोँ पूरा परिवार थां पर्र बटवारे कि वजह सें कोई अपना कहने कों नाँ थां मे सालो सें बहार रहकर हि पढाई कि थि औऱ फिनयही नौकरी भि करनेलगा, मेरे कॉलेज कि एक् लड़की काजल सें मेरा अफेयर थां सोचा थां कि थोडा सेटल होने केँ बाद मम्मी कों सभीबता दूंगा पऱ अचानक हुएइस वाकये सें मे स्तब्ध रह गय़ा, मेरे परिवार मे मेरी दोनों छोटी बहनों कि जिम्मेदारी अब मेरेऊपर थि, मैंने उन्हें अपनेपास शहर लें आया औऱ उनकी पड़ी कि वयवस्था भि यहीकर दि, निशा मेरी छोटी बेहन थि जौ अभि मे थि औऱ बड़ी शरारती थि औऱ दूसरी पूर्वी अभि विद्यालय सें निकली थि औऱ उसेयहा केँ कॉलेज मे दाखिला करा दिया थां, कुछ दिनों केँ बाद मैंने काजल सें विवाह भि करली, ताकि हम् दो कमाने वाले हौ जाए विवाह हमने कोर्ट मे कि थि जिसमे बस मेरी दोनों बहने औऱ काजल केँ पिताजी, भइया वरुण, औऱ भइया कां मित्र सुशांत आये थें, काजल कि मम्मी भि गुजर चुकी थि, काजल औऱ मे अलगअलग होटल्स मे मेनेजर थें.मैंने अपने बड़ेकाम निपटा दिए औऱ टेंशन फ्री होँ गय़ा मैंने अपनी बहनों सें कहरखा थां कि जोँ लड़का तुम्हे मनपसंद आये उससे तुम्हारी विवाह करा दूंगा, मेरी बहनेगाव मे रहने केँ कारन बहोत हि शर्मीली थि मगर मुझे क्याँ पता थां कि शहर कि हवा मे क्याँ चमत्कार होता हैं,
स्टोरी तब सें शुरुआत होती हैं जब मे अपने होटल केँ काम सें एक् दूसरे होटल मे गय़ा थां, हमारे शहर मे कुल 5 बड़े होटल्स थें जिसमे हमेशा बहोत जादा प्रतियोगिता होती थि, मैंने औऱ काजल नें अपनी विवाह कि बात तक इसलिये छुपाई थि कि कही हमेंजॉब सें इसलिये नाँ निकल दियाजाय कि हम् दोनों प्रतियोगी होटल्स मे काम करते हैं, मेरे होटल केँ मालिक कपूर साहब थें औऱ काजल केँ होटल केँ मालिक खान साहब दोनों मे कट्टर दुश्मनी थि, दोनों बहोत रसूखदार लोग थें औऱ हरचीज मे प्रतियोगी थें, यहसभी तबसे शुरुआत हुआ थां जबसे कपूर साहब कि बेटी नें खान केँ बेटे सें विवाह करलीसभी बढ़िया थां पर्र खान कां लड़का अजीम बड़ा आइयाश किस्म कां थां सो दोनों कां तलाक हौ गय़ा औऱ दोनों नामी घराने एक् दूसरे केँ दुश्मन.मे मेहता एंडसंस केँ होटल मे पंहुचा मुझे मेहता साहब केँ साहबजादे रवि सें मिलाना थां, मे रवि केँ केबिन मे पंहुचा हि थां कि वो केँ मेनेजर किशन नें मुझेरोक लिया.
'अबे क्याँ कररहा हैं, रवि साहब अभि बिजी हैं, 'हम् सब होटल केँ मैनेजरों कों अच्छी तरह पहचानते थें, औऱ हमारी दोस्ती भि ठीकठाक हि थि,
'अबे मुझेरवि नें स्वयं बुलाया थां, कुछकाम थां उन्हें, '
'बुलाया होगा मेरे भइया पर्र समझाकर सालारवि अभि यहा कि hour केँ संगलगा हुआ हैं, अपनी ठरक मिटने देउसे फिनमिल लेना, 'hour कां नाम सुनते हि मेरेमुह मे पानी आँ गय़ा, नाम थां शबनम क्याँ माल थि
' सालारवि बड़ाखुश भाग्य हैं दोस्त, '
'साले तेरेपास उतने पैसे होंगे नाँ तोँ तुँ भि खुशकिस्मत हौ जायेगा, साली कों पैसे चाहिए औऱ रवि कों उसकी जवानी, बेचारा उसका पति जितना उसनेउसे नहि चोदा होगा उतना तौ रवि नें इसेचोद लिया हैं, 'किशन हँसाने लगा, मैंने अपनासर धीरे-धीरे सें उसके केबिन केँ दरवाजे सें लगाने कि कोशिस कि वो सें शबनम कि आँहो कि आवाजे मुझे साफ़ सुनाई देरही थि,,
'साला क्याँ चोदरहा हैं बे कितना चिल्ला रही हैं, '
'अरेकुछ नहि साली रांड हैं, उसेखुस करने केँ लिए चिल्लाती हैं, '
'साले तुम्हे केसेपता, 'मैंने आँखे बड़ीकर उससे पूछा,
'अबे मैंने भि ली हैं उसकीजब रवि हॉलिडे पर्र थां, 'किशन नें अपने दांत निकलदिए, मे आश्चर्य सें उसे देखने लगा,
'भइया मेरी भि कुछ सेटिंग करादे नां मे भि उसकी लें लू, सालीकमल कि लगती हैं बे, 'मैंने अपनी आँखों मे हवासभर करकहा,
'करा दूंगा पऱ तेरी मेरी सेटिंग उसखान केँ होटल वाली मेनेजर सें करना पड़ेगा क्याँ नाम हैं उसकाहां काजल साली चलती हैं तोँ लगता हैं कि पकड़ केँ पेल हि दू, 'काजल कां नाम सुनकर मेरेदिल कि धड़कन हि बड गयीँ, /
'साले वोँ खान केँ होटल कि हैं तुम्हें तोँ पता हैं नां, अपना कैसा हैं वहा सें औऱ काजल शादीशुदा लड़की हैं बे औऱ बहोत संस्कारी भि हैं, '
'हा जनताहु साले उसके संस्कार, मुझे तोँ लगता हैं वोँ खान कां लवंडा उसेफुल पेलता होगा उसके होटल कि माल कों वोँ केसे छोड़ देगा, औऱ उसके पति कां तौ अतापता भि नहि हैं, सुनाहु किसी दुसरे स्थान रहता हैं, औऱ तूँ साले हमें चुतिया नां बनासंग संग गार्डन जाता हैं नां उसके वोँ भि अपने बहनों केँ संग, साले तूँ उसे चोदे औऱ हामे बोले संस्कारी, 'मेरा चहरालाल पड़ने लग गय़ा मुझेसमझ नहि आँ रहा थां कि इसे क्याँ कहू, औऱ इसने जौ आजिम केँ बारे मे कहा उससे मेरादिल हि दहल गय़ा थां मुझे इतना तोँ पता थां कि अजीम बहोत हि कमीना लड़का हैं,
'अबे वोँ मेरे बहनों कि यार हैं इसलिये, चल छोड़इस मादरचोद कां कामकब पूरा होगा, '
'होँ जायेगा, अभि तौ चालूहुआ हैं चल बहुत पीते हैं, 'मे बुझेमन सें उसकेसंग चलनेलगा,.
nayee story केँ liye dhanywad
congratulations bro
रंडी खाना completee - Behan Ki Chudai – New Episode
कपूर साहबआज बहोत गुस्से मे थें औऱ मे सर झुकाए खड़ा थां,
'क्याँ कररहे हौ हौ तुम्, एक् इतना बड़ा प्रोजेक्ट हाथ सें चला गय़ा, आखिररवि क्यूं नहि माना तुमने तोँ उससेबात कि थि नां,
'सर मे क्याँ कर सकता हु, उन्होंने ऑफ़र किया थां कि उन्हें लड़की चाहिए तभी वोँ बात कों बढाएंगे औऱ मे कहा सें लड़की लाता, पता नहि खान साहब नें कहा सें लड़की कां जुगाड़ कर दिया.'कपूर साहब नें मुझेखा जाने वालीनजर सें देखा
'अबे मादरचोद मुझे क्यूं नहि बोला वोँ सालाखान अपनी मेनेजर कों भेज दिया होगा.साले तेरी स्थान मे भि कोई लड़की हि रख लेता हु.'मेफिन काजल केँ बारे मे सोचकर अपसेट होँ गय़ा
'सरऐसा नहि हैं, ;तभी कमरे मे कपूर साहब हि बेटी रश्मि आई
'बापू आप् इसे क्यूं डांटरहे हैं, मे इससेबात करतीहु, तुम् बाहर् चलो,, 'मेरी तोँ फटी पड़ी थि मे अपने कों सम्हालता हुआ उसके पीछेचला गय़ा वोँ उसरूम मे पहुची जौ उसकेलिए रखा गय़ा थां,
'हम्म्म्म तोँ क्याँ नाम हैं तुम्हारा, '
'मेडमदेव '
'हम्म्म मेनेजर साहब, अब सें पिताजी कि बात मानने कि जरुरत नहि हि समझे, औऱ वोँ काजल क्याँ लगती हैं तुम्हारी, 'काजल कां नाम सुनकर मेरीफट केँ चार हौ गई,,
'नहि मेमकुछ नहि 'रश्मि नें मुझे बड़े प्रेम सें देखा मे नजर झुके खड़ा थां,
'साले मे बापू नहि हु, औऱ यहमत समझना कि कि अजीम सें मेरी विवाह इसलिये टूटी क्योकि वोँ ऐयाश थां, असल मे मे भि उतनी हि ऐयाशहु पर्र बस मे लड़कीहु नाँ कोईचीज खुलके नहि कर सकती, अब बता क्याँ सम्बन्ध हैं तेरा औऱ काजल कां, 'मुझेसमझ हि नहि आँ रहा थां कि मे क्याँ बोलू,
'सुन बेदेव मुझे नहि पता कि तुम् दोनों केँ बीच क्याँ हैं पर्र मे अब तेरी मालकिन हु औऱ मुझेउन खान लोगो केँ होटल कि वाट लगानी हि तूँ समझजा, बोल क्याँ प्लान हैं तेरेपास कि सभीठीक होँ जाये, 'मे फिनकुछ नहि बोलपा रहा थां, वोँ मुझे गुस्से सें देखि,
'अच्छा सुन, अब सें अगरकोई कस्टमर तुम्हे बोले कि रात कां जुगाड़ हैं क्याँ तौ क्याँ बोलोगे, '
मे थोडा डराहुआ थां
'मेडम दारू याँ लड़की'मेम केँ होठो पर्र मुस्कान आँ गई,
'साले दोनों केँ बारे मे पूछरही हु, '
'मेडम दारू तोँ मिल जाएगी पऱ लड़कीकहा सें,.'मे बोलते बोलते हुएरुक गय़ा,
'साले तेरे जैसे मेनेजर केँ कारन हि यह होटल घाटे मे जारहा हैं, दोनों मे हां बोल्ना औऱ मुझे बताना समझा, 'मे थोड़ी देर आश्चर्य सें उन्हें देखाफिन हां मे सर हिलाया,
'औऱ तेरा जौ भि हैं, आजिम कि उस रांड काजल केँ संगउसे युसकर समझा थोड़ी नां तेरी पत्नि हैं तेरे बहनों कि मित्र बस हैं नाँ'अब तोँ सच मे मेरीफट गयीँ, मेरे आँखों सें आंसूआने कों थें पर्र मैंने बड़े मुस्किल सें उन्हें सम्हाला औऱ हां मे सर हिलाया यह तोँ मैंने किशन कों बताया थां उसनेकब इन्हें बता दिया पर्र सबसे प्रश्न यह थां कि क्याँ सच मे काजलऐसी हैं?????
आज मे बहोत हि बेचैन सां अपनेघऱ मे गय़ा, वो देखा तोँ मेरी दोनों बहाने पड़ने मे लगी थि काजल अभि तक नहि आई थि, मैंने काजल कों फ़ोन किया
'कहा होँ जान, 'मैंने उत्सुकता सें पूछा,
'अभि तौ मे (उसकी आवाज़ नार्मल नहि थि )वोँ अजीमसर केँ संगहु, सुनो नां मीटिंग हैं औऱ लेट हौ सकता हैं औऱ पूर्वी कों बोल देना कि खानां बनादे ओके बाय, 'कहकर उसनेफोन काट दिया मेरेमन कि बेचैनी औऱ बढ़ गयीँ, थि मैंने पूर्वी कों खानां बनाने कों बोल अपनेरूम मे चला गय़ा मैंने उन्हें बोला कि मेरेसर मे दर्द हैं औऱ मे सोनेजा रहाहु, खानां बना केँ खा केँ सो जानां औऱ उठाकर खा लूँगा याँ जब काजल आएगीखा लूँगा,
मे अपने कमरे मे जाकरऐसे हि लेटासोच रहा थां कि मेरेरूम मे निश आँ गयीँ, मैंने उसेदेख थोडा क्रोध दिखाया,
'मैंने कहा थां नाँ कि सर मे दर्द हैं, क्याँ हुआ आराम करनेदे मुझेचल जा, 'वोँ बिनाकुछ बोले मेरे पलंग केँ पास आँ गयीँ, औऱ उसके हाथो मे एक् तेल थां मेरे सिरहाने बैठ केँ मेरासर दबाने लगी औऱ तेल लगाने लगी, उसके हाथो केँ कोमल अहसास औऱ उसके प्रेम भरे स्पर्श नें मुझे बहोत शुकून दिया मैंने उसेसर उठाकर देखा तौ वोँ मुझेदेख मुस्कुरा रही थि, मैंने उसकेगोद मे अपनासर रख लिया औऱ अपने हाथो कों उसकेकमर सें बांध लिया, वोँ मेरेसर कों सहलाती औऱ मालिश करतीरही.थोड़ी देर मे हि मेरी आँखेलग गई, औऱ जब मे उठा तौ देखा कि रात केँ 11 बज चुके थें मुझे लेटे 2 घंटे होँ चुके थें काजल शायद अभि भि नहि आई थि औऱ मे अब भि निशा केँ गोद मे हि सोया थां, मेरे हलचल होने सें उसकी भि नींद टूटी वोँ मेरे बालो कों प्रेम सें सहलाई.
'अब कैसालग रहा हैं भईया, '
'मेरी प्यारी बेहन नें मालिश कि हैं अच्छा हि लगेगा नां, इधर आँ.'वोँ मेरेऊपर झुक गयीँ, औऱ मैंने उसके गालो कों चूम लिया मे वहा सें उठा उसका प्रेम देखकर मेरादिल हल्का होँ गय़ा थां, मैंने उसे खानां बनाने कों कहा औऱ संग हि खाकरसो गय़ा.काजल कों काल किया पर्र उसने नहि उठाया, यह हमारे काम मे अकसर होता थां कि हमेंरात मे भि काम करना पड़ता थां औऱ ऐसा पहलीबार नहि होँ रहा थां पऱ आज मे दुखी थां, पता नहि क्यूं पऱ मे दुखी थां मुझे काजल कां यु मेरा मोबाइल नाँ उठाना औऱ रातभर बहार रहना अच्छा नहि लगरहा थां,.
thanks all
रंडी खाना completee - Behan Ki Chudai – New Episode
मेरी आंखे खुली तोँ मैंने काजल कों अपनेपास पाया वोँ झीनी सि नाईटी मे मुझे दिखाई दि, उसके उजोर बड़े हि प्यारे लगरहे थें मैंने उसे सीधा लिटाया औऱ उसकी ख़ूबसूरती कों निहारने लगा, मैंने देखा कि वोँ आँखे मूंदे हुए बड़ी प्यारी लगरही थि, उसने अभि तक अपने माथे कि छोटी सि बिंदी नहि हटाई थि जौ उसकेगोर चहरे कों औऱ भि हसीन बनती थि, उसके होठो मे काटने कां निशान देख मेरीदिल कि धड़कन रुक सि गयीँ, मुझेकल कि सारी बातेयाद आनेलगी, मैंने उसकेउस जखम कों छुआ, मुझे हल्का सां खून कां जमाव महसूस हुआ, मैंने उसके प्यारे चहरे कों फिन सें देखा, क्याँ मेरी प्यारी काजलऐसा कुछकर सकती थि कि मे उसपरशक करसकू पऱ यहखून कां जमाव, औऱ साफ़पता चलरहा थां कि किसी नें उसे दांतों सें काटा हैं, मेरे प्रेम मे क्याँ कमीरह गई, थि कि मेरी प्यारी बीबी किसीगैर मर्द कां बैडगरम करेगी, मुझेअब भि यह यकीं नहि हुआ मैंने फिन सें काजल केँ उरोजो कों देखा जोँ कि बहारआने कों बेताब थें मैंने उसे आजाद हि कर दिया, उनके आजाद होने पर्र काजल केँ मुह सें एक् मदभरी सि अहह निकली,
'नहि नां जी क्याँ कररहे होँ, 'मैंने देखा काजल नींद मे हि थि पऱ उसकाजी कहना मुझेचैन दे गय़ा क्योकि वोँ मुझे हि जीकहा करती थि, मैंने उसके उजोरो कों निहारा तौ मुझेलाल घेरे दिखाई दिए जैसे कि किसी नें उसे बुरीतरह सें मसला हौ, काजल बहोत गोरी थि औऱ मैंने उसेकभी कभी मसला भि थां उसके वोँ निशान ऐसे हि थें जैसा मेरे मसलने पर्र उसके वक्षो पर्र पड़ते थें, मेरी आंखेनम होनेलगी मैंने फिन उसके मासूम सें चहरे कि ओर देखा, मुझे यकीं नां आया कि वोँ मुझे किसी भि सूरत मे धोखादे सकती हैं, मैंने उसके उजोरो कों मसलना शुरुआत किया,
'नहि नाँ जान प्लीज् नहि नाँ कोई आँ जायेगा, 'काजल अभि भि नींद मे थि मैंने अपने होठो कों उसके होठो केँ पास लें जाकर उसके होठो कों चूमने लगा वोँ अपने होठो कों मेरेलिए खोल दि मैंने अपने होठो कों उसके होठो मे घुसा दिया मुझे दारू कि बूआनी शुरुआत हौ गयीँ,, हमारे लिए दारू पीनाकोई बड़ीबात नहि थि, शायद काजल नें कल शराबपि होँ मैंने अपनेहाथ उआकी नाईटी केँ निचे सें उसकी प्यारी योनी केँ पास लें गय़ा मैंने पाया कि उसमेकुछ कड़ा सां अहशास हुआमनो वीर्य सुख गय़ा होँ मैंने अपनेदिल कों समझाया कि यह वीर्य नहि होगा मे उसके निचे गय़ा उसके कपडे कों ऊपर उठाया, उसके गोर जांघ मेरे सामने थें मे उसे चटनेलगा, काजल बहोत हि नशे मे थि पर्र वोँ मचलने लगी थि मे जन्घो कों चाटते हुए उसकी योनी तक आँ गय़ा, मैंने पाया कि वो कुछ कड़ा सां हैं मेरीलार पड़ते हि वोँ चिपचिपा होँ गय़ा मैंने उसेजीभ सें चखकर देखा, वोँ वीर्य हि थां मेरादिल बैठ गय़ा थां, मेरी आँखों मे आंसू थां पर्र मेरा लिंग वोँ तौ ताना थां अपनी हि धून मे मुझेलगा थां कि मे उसेउठा केँ उसेमार हि डालू पर्र मैंने ऐसा नहि किया मुझेउसे भोगना थां, जाने किसने उसेभोग होगायह वीर्य किसका थां मुझे नहि पता थां पऱ.
मे मे तोँ बसअब पागल हि हौ गय़ा थां मैंने अपने कपडे उतार फेके औऱ उसकेऊपर चढ़ गय़ा मैंने यह परवाह नहि कि कि उसकी योनी मे गीलापन हैं याँ नहि मैंने अपनेथूक सें हि अपने लिंग कों भिगोया औऱ एक् जोरदार धक्का.
'अआह्ह्ह नहि नां क्याँ कररहे हौ, इतना तौ किये होँ नां अबबसकरो नाँ दर्द होँ रहा हैं घऱ भि जानां हैं, 'काजल कि बातो सें मे पूरीतरह टूट चूका थां मे अपने पुरेजोर सें उसेफिन सें धक्का लगाया काजल कि आँखेअब भि बंद थि औऱ उसने मुझे अपनीबहो केँ घेरे मे भर लिया
'आपका तोँ कभी ख़तम हि नहि होता हैं नाँ 'उसने बहोत हि नशीली आवाज़ मे कहा,
'चलोअब जल्दकरो नाँ प्लीज, सर भि करेंगे क्याँ, 'अब तोँ मे रो हि पड़ा मे चाहता थां कि मे वहा सें उठकरभाग जाऊ पर्र मैंने दूसरा मार्ग अपनाया मैंने एक् जोरदार झापड़ काजल कों मारा मेरे मारने सें वोँ तड़फ गई, औऱ होश मे आकर मुझे देखने लगी,
'यह क्याँ कररहो होँ जी, हटो नां, मुझेमार क्यूं रहे होँ, '
'मदरचोद चुपचाप पड़ीरह रातभर दूसरो सें चुद्वाकर आई हैं औऱ अपने पति सें नखरेकर रही हैं, '
'अआह्ह्ह आह्हह्हह्हह्हह अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् प्लीज् नाँ जान, छोड़दो नाँ रुकजाओ नां थोड़ी देरबस.थोड़ी देरबस जाआआन.'
मैंने बेहिसाब धक्के मारने शुरुआत करदिए, काजल दर्द सें तडफरही थि उसकी योनी अभि भि गीली नहि हुई थि वोँ दर्द सें छटपटा रही थि पर्र मैंने कोईरहम नहि कि मैंने उसके चहरे कों अपने हाथो सें दबा लिया.यह पहलीबार थां जब मैंने काजल सें जबरदस्ती कि थि पर्र मे क्याँ करता मेरादिल आजटूट चूका थां मेरी प्यारी पत्नि बेवफा थि, मेरी चाहतलुट चुकी थि वोँ भि नाँ जाने कितनो सें.मैंने अपने वीर्य कि धार सीधे काजल केँ योनी मे छोड़ दि, वोँ कुछसमझ पाती इससे पहले हि मे वहा सें उठकर अपने बाथरूम मे चला गय़ा, पर्र जब मे बैड सें उठा तोँ मैंने एक् परछाई दरवाजे कि पीछे देखि जोँ जल्दी भाग गई, मुझे अहसास थां कि वोँ मेरी बहने हि थि जोँ काजल केँ आवाज़ केँ कारन वो आँ गयीँ, थि,.
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