बेटा है या.....घोड़(ALL IN ONE) - जरुर मचायेगें - Full Story Part 1
कजरी वोँ कजरी.अपनी बकरीया सम्भाल देख मेरी सारी सब्जीया खारही हैं.
यह आवाज़ सुनकर कजरी भागते हुएघऱ सें बाहर् नीकलती हैं, औऱ अपनी बकरीयों कों पकड़कर बांधती हैं।
अगर तुँ अपनी बकरीयां सम्भाल नहीं पाती तौ बकरीया पालती क्यूं हैं?
कजरी-- क्याँ करु दिदी.घऱ मे कोई कमाने वाला हैं नहीं, घऱ कां सारा खर्चा इन बकरीयों कि वजह सें हि चलता हैं।
अरे तौ एक् सांड जैसा बेटा पैदा कीया हैं.उसे क्यूं नहीं बोलती कि कुछकाम धंधाकरे। देख एक् मेरा लड़का हैं ठाकुर साहब केँ यहांकाम करता हैं.उसे भि क्यूं नहींलगा देती ठाकुर साहब केँ यहांकाम पर्र।
कजरी--बात तोँ ठीक हैं रज्जो दिदी, लेकीन मेरा लड़का तोँ दीनरात बस देहात मे मटरगस्ती करता रहता हैं.क्याँ बोलू मे उसे?
स्टोरी केँ पात्र--
कजरी (40)
कजरी एक् बहोत हि खुबसुरत स्त्री हैं.इतनी खुबसुरत हैं कि पुरा देहात उसके फीराक मे लगा रहता हैं। उसकी गरीबी उसकी सबसेबड़ी दुश्मन हैं.जीसका फायदा देहात केँ लाला.ठाकुर औऱ दुकानदार उठाने केँ फीराक मे लगे रहते हैं। लेकीन कजरीआज तक अपने आप् कों पवीत्र रखी थि.देहात भर मे उसके खुबसुरती केँ चर्चे चलते रहते हैं औऱ पता नहीं कीतने मर्द उसकेनाम सें मुठमार मारकर कमजोर दीलवाले बनगये हैं।
रीतेश(22)
कजरी केँ जीने कां सहारा यहीं जनाब हैं.लेकीन इन जनाब कों अपनी मम्मी कि परेशानीयो केँ बारे मे कोइ फिक्र नहीं.यह तौ बस अपने आवारा दोस्तो केँ संग दीनभर घुमते फीरते रहते हैं.अगर बाप होता तोँ थोड़ा बहोत डरलगा रहता लेकीन बाप तोँ नाँ जाने 3 साल पहलेघऱ छोड़कर पता नहीं कहां नीकलगये थें।
रज्जो(40)
रज्जो कजरी कि पड़ोसन हैं.यह मुहतरमां कि एक् हि तकलीफ़ हैं, औऱ वोँ हैं कजरी.इनको कजरी केँ खुबसुरती सें बहोत जलन होती हैं। हमेशा सज संवर केँ रहने केँ बाद भि कजरी कि खुबसुरती केँ आगे पानीकम गरमचाय वालाहाल हौ जाता हैं।
पप्पू(22)
पप्पू रज्जो कां लाडला.इनका सीर्फ नाम पप्पू नहीं बल्की यह स्वयं पप्पू हैं। क्यूकीं पप्पू कां चप्पू 2 मीनट हि चलता हैं.क्यूकीं इन्होने बचपन सें अपना चप्पू अपने हाथों कि सहायता सें कुछ ज़्यादा हि चला दीया थां।
सलोनी(24)
रज्जो कि छिनाल बेटी.इनकी चूत मे इतने चप्पू चले हें कि पुछों मत लेकीन इसबात कि भनक अभि तक रज्जो कों भि नहींचला हैं।
संगीता(42)
कजरी कि सबसे अच्छी सहेली.अगर कजरी कों खुबसुरती मे कोईअजू बाजू पहुंच सकता हैं तोँ यही मुतरमा हैं। अ
आंचल(20)
संगीता कि लाडली औऱ रितेश केँ दील कि धड़कन.इनको सचने संवरने कां बहोत शौक हैं.अगर यह देहात मे नीकलदे
तौ बेचारे लड़को केँ लन्ड औऱ धड़कन कि रफ्तार तेज होँ जाती हैं.
ठाकुर परम सींह(48)
ईनकाकाम दो नबंर कां धंधा करना, औऱ कीसीतरह कजरी कि जवानी कां रसपीसके
स्टोरी मे औऱ भि कीरेदार जीसका जीक्र हम् आगे करते चलेंगे.हम् औऱ आप् मीलकर
तौ चलीये कथा शुरु करते हैं.औऱ मज़े लेते हैं.लेकीन पहले आप् भाईयो कां क्याँ राय हैं वोँ तौ जान लूं.फीर मचांयेगे.
bhay well come starting ekdam dhansu kee he bhay thakur k khandan kee orato aur ladkiyo kaa bi jikar karo aur apne hiro say pilvana bhay yeh khali maira sujhav he baki aapki marji
भइया बेटे केँ होतेहुए अगर माँ कही औऱ चली जाये तोँ धीक्कार हैं बेटा होने पऱ.पऱफीर भि स्टोरी केँ अनुसार चलते हैं औऱ देखते हैं कि क्याँ होगा?
बेटा है या.....घोड़(ALL IN ONE) - जरुर मचायेगें – New Episode
- बेटा हैं याँ घोड़ा
रोजरोज यह सुखी रोटी.औऱ बकरी कां दुध खाकरथक चुका हूं मे॥
कजरी--अरे बेटा.यही सुखी रोटी औऱ बकरी कां दुध खाकर पहलवान बन गय़ा हैं.देख जरा स्वयं कों पुरे देहात भर मे कीसी कां भि बदन तेरे जैसा नहीं हैं।
रितेश.(गुस्से मे)-- तौ इसका मतलब मे यही सुखी रोटी खाउं?
कजरी-- क्रोध मत हौ मेरे लाल.आज खा लेँ कलकुछ इंतजाम करुगीं, औऱ तुम को तौ अपनी हालतपता हि हैं बेटा।
रीतेश(गुस्से मे)-- जब हालात ठीक नहीं थें तौ पैदा क्यूं कीया.यह सुखी रोटी खीलाने केँ लीये.नहीं खानां हैं मुझेयह तूँ हि खा।
' इतनाकह कर रितेश खाने कि थाली गुस्से मे अपनी मम्मी कि तरफ करता हैं औऱ घऱ सें बाहर् कि ओर जाने लगता हैं।
कजरी-- अरे.बेटा सुना तोँ.रुक जा थोड़ा हि खा लें। लेकीन तब तक रितेश घऱ सें बाहर् जा चुका थां।
कजरी वहीं बैठी रितेश कों बाहर् जाते देखती रहती हैं.उसकी आंखो मे आंशु आँ चुके थें.वोँ अपनी कीस्मत कों कोसरही थि.लेकीन कीसी नें सचकहा हैं नां जौ तकदीर मे लीखा हैं भलाउसे कौन मीटा पायेफीर कीस्मत कों कोसकर क्याँ फायदा।
कजरी वोँ.कजरी.कहां हैं तूँ।
कजरी केँ कानो मे जैसे हि यह आवाज़ पहुचीं वोँ किचनघऱ सें बाहर् आती हैं।
कजरी--अरे संगीता तूँ आँ बैठ।
संगीता-- तूँ तोँ मेरीख़बर लेने सें रही तौ सोचा मे हि तेरीखबर लें आती हूं॥
कजरी--अरे संगीता अब क्याँ बताऊ तूझे तौ सभीपता हि हैं.घऱ कां काम औऱ सभी चीजे करते करते वक्त कां पता हि नहीं चलता.
संगीता-- अच्छा अब रहने दे.चल जल्द रेडी होँ जा।
कजरी-- क्यूं कहां जानां हैं?
संगीता-- अरेआज ठाकुर साहब कां प्रधानी कां प्रचार हैं.औऱ उसमे शामील होने वालो कों एक् हजार रुपये मीलरहे हैं.तोँ देहात कि औरतेजा रही थि तौ सोचा मे औऱ तुम् भि चलते हैं अपना भि काम होँ जायेगा।
कजरी--बात तौ तूँ ठीककह रही हैं.लेकीन मेरा बेटा?
संगीता-- तेरा बेटा क्याँ?
कजरी--अगर कहीं मेरे बेटे नें देहात मे घुमते हुएदेख लीया तौ मेरीखैर नहीं।
संगीता-- अरे क्याँ खैर नहींलगा रखी हैं.एक् तोँ तूँ इधरउधर सें ला केँ तूँ उसको खीलाती हैं.स्वयं तोँ कुछ करता नहीं औऱ तेरेउपर रौब जमाता हैं।
कजरी--ऐसा मतबोल संगीता वोँ जीदंगी हैं मेरी.उसके लीये तोँ सभीकुछ कुर्बान।
संगीता-- हां तोँ वोँ बच्चा थोड़ी हैं उसे भि तोँ सोचना चाहीये.तुँ चलमै देखती हूं कि क्याँ बोलेगा वोँ तूझेफीर मे उसे जवाब दूंगी।
कजरी--ठीक हैं रुक चलती हूं॥
कजरीघऱ केँ अंदर जाती हैं औऱ एक् लाल साड़ी अपने बक्से मे नीकालती हैं.।
कजरी अपनी पहनी हुईँ साड़ी अपने शरीर पर्र सें नीकाल देती हैं.वोँ अब सीर्फ ब्लाउज औऱ पेटीकोट मे थि.उसका कसाहुआ दुधीया गोरा जिस्म औऱ ब्लाउज मे कसी हुइ गोलगोल बड़ी चुचीयां जौ शायद ब्लाउज फाड़कर बाहर् आने कों उतावली होँ रही थि.कजरी कि पतली गोरीकमर तौ सुराही दार एक् बारकोई देख लें तौ उसकेकमर कों हाथो सें रगड़ने कों जीमचल जाये.औऱ गांड तोँ उफ.क्याँ बनावट थि उपर वाले कि.एकदमकसी हुई बाहर् कि तरफ नीकली हुईँ कयामत ढ़ारही थि.यहसभी नज़ारा देखकर संगीता कि नज़रे हि नहींहट रही थि।
कजरी--ऐसे क्याँ देखरही हैं तूँ?
संगीता-- देखरही हूं कि ईश्वर नें तूझेसच मे फुरसत सें बनाया हैं.कीतनी खुबसुरत हैं तूँ कजरी।
कजरी--अरे अब क्याँ करुगीं यह खुबसुरती लें केँ पती तोँ रहे नहीं तौ फीरइस खुबसुरती कां क्याँ मतलब?
संगीता-- सही कहां तूने.हम् दोनो कि कीस्मत तौ फूटी हैं.अच्छा तेरामन नहीं करता कजरी कि तेरेयह खुबसुरत जीस्म कों कोईमसल मसलकर रखदे.।
कजरी-- अच्छा अबबसकर तूँ अब चल.मे सजधजकर होँ गयीँ, हूं॥
संगीता-- हांचल देहात केँ तेरे सारे आशीक तोँ आजमर हि जायेगें.।
कहकर दोनो हंसने लगती हैं.औऱ घऱ सें बाहर् नीकल पड़ते हैं।
ठाकुर परम सींह केँ घऱ केँ सामने भारी संख्या मे भीड़लगी थि.ठाकुर केँ गाड़ीयो मे पोस्टर लगेहुए थें.उनका चुनाव चीन्ह थां बिस्तर, कुछ लोगो केँ हाथों मे झंडे भि थें.।
देहात कि कयी सारी औरते एक् तरफखड़ी थि.उन औरतो मे रज्जो एकदमसज धजकरखड़ी थि औऱ कुछ औरतो सें बातकर रही थि.कितभी उनमे सें एक् स्त्री बोलीं.क्या बात है राम देखो कजरी आँ रही हैं कीतनी हसीनलग रही हैं।
यह सुनते हि सारी औरतों कि नज़र कजरी पऱ पड़ती हैं।
हां.सच मे कीतनी सुदंर हैं कजरी देखो नाँ सारे मर्दो कि नज़र सीर्फ कजरी पर्र हि हैं.काश ईश्वर नें मुझे इतना सुँदर बनाया होता तौ जींदगी केँ मजेखुब लुटती ॥
उस स्त्री कि बात सुनकर रज्जो बोलीं॥
रज्जो-- हां लेकीन यह महारानी तौ अपने आप् कों पता नहीं क्याँ समझती हैं.कीसी कों घास हि नहीं डालती।
रज्जो अंदर हि अँदरखुब जलरही थि.॥
संगीता-- देख कजरीसभी हरामजादे मर्दो कि नज़रतुझ पऱ हि हैं.केसे खा जाने वाली नज़रो सें देखरहे हैं तूझे।
कजरी--छोड़ जानेदे तूँ.चल सीधा प्रचार करेगें औऱ घऱ चलेंगे.॥
औऱ फीर दोनो ठाकुर केँ दरवाज़ा पर्र आँ जाते हैं।
ठाकुर अपने दोस्तो केँ संग हवेली केँ अंदर बैठा थां.तभी उसे कीसी नें आवाज़ दि।
ठाकुर साहब.ठाकुर साहब.। ठाकुर नें पीछेमुड़ कर देखा.
ठाकुर-- अरे दीवान क्यू चील्ला रहा हैं.।
दिवान-- वोँ.वोँ कजरीआयी हैं।
इतना सुनना थां कि 48 साल कां ठाकुर कीसी 20 साल केँ जवान लौडें कि तरह बाहर् भागते हुए नीकला.।
वहां बैठे ठाकुर केँ साथीसभी हैरान रहगये कि आखीरयह कजरीकौन हैं जीसके बारे मे सुनते हि ठाकुर कीसी कुत्ते कि तरह भागते हुए गय़ा.यही उत्सुकता ठाकुर केँ दोस्तो कों भि बाहर् लेँ केँ चला।
ठाकुर-- अरे कजरी.तुम्, आज मेरेघऱ कां मार्ग केसेयाद आँ गय़ा?
कजरी तौ एकदम सें डर गयीँ, थि.क्यूकीं ठाकुर उससे सीधा जोँ बात करनेलगा थां.औऱ देहात केँ सबलोग कि नज़रउन पर्र हि थि.वोँ सोचने लगी कि देहात वालेकही कुछ उल्टा सीधा नां सोच लें.औऱ कुछगलत बात देहात मे फैल गयीँ, तौ मेरा बेटा क्याँ सोचेगा.
ठाकुर-- क्याँ हुआ कजरी क्याँ सोचने लगी?
कजरी जैसे नीदं सें जागी॥
कजरी-- क.कुछ नहीं ठाकुर साहब। वोँ.वोँ मैने सोचा कि मे भि प्रचार मे हीस्सा लूं तोँ चलीआयी।
ठाकुर केँ खुशी कां ठीकाना नाँ थां.वोँ यकीन नहींकर रहा थां कि कजरी स्वयं चलकर उसकेघऱ आयी हैं.
ठाकुर-- बहोत अच्छा कीया.कजरी।
दिवान-- ठाकुर साहब रैली नीकालने कां समय हौ गय़ा हैं.चलीये आप् गाड़ी मे बैठ जाईये.।
ठाकुर-- हां.हां चलो कजरी तुम् भि गाड़ी मे हि मेरेसंग बैठजाओ।
कजरी-- अरे.नहीं ठाकुर साहब.देहात कि औरतो केँ संग हि प्रचार कर लूगीं.औऱ वैसे भि मुझे बहोत अजीब लगेगा अगर मे अकेली आपकेसंग गाड़ी मे बैठुगीं तौ।
ठाकुर-- हां.तौ संगीता कों भि बीठालो गाड़ी मे क्यू संगीता तुम् भि बैठजाओ।
संगीता-- ठीक हैं ठाकुर साहब.जैसा आप् कहे।
कजरी-- लेकीन संगीता?
ठाकुर-- लेकीन वेकीन कुछ नहीं.मेरा प्रचार करनेआयी हौ तोँ मेरेसंग हि करना होगा।
कजरी औऱ संगीता कों अच्छा तोँ नहींलग रहा थां लेकीन फीर भि कुछबोल नहींपाई औऱ जीप मे बैठ गई,.।
दिवान नें ठाकुर कों इशारा करके एक् कोने मे बुलाया.ठाकुर दीवान केँ तरफचल दीया।
ठाकुर-- अब क्याँ हुआ दीवान.?
दिवान-- ठाकुर साहब.राजकरन कि रैली नीकलपड़ी हैं.आपने जैसाकहा थां मैनेसभी देहात वालो कों रुपया देकर बुला लीया हैं.मुझे लगता हैं कि उसके चुनाव प्रचार मे सीर्फ राजकरन कां परीवार हि होगा।
ठाकुर(हंसते हुए)-- हा.हा.हा, अबइस राजकरन कों अपनी औकात कां पता चलेगा.यह दलीत नीचे जाती वाला साला ठाकुर परम सींह सें टक्कर लेँ रहा हैं मादरचोद। देखते हैं क्याँ करेगा ?
दोस्त रितेश लगता हैं चुनाव मे बापूखड़े होकर गलतीकर गये.
रितेश-- तुँ ऐसा क्यूबोल रहा हैं अजय?
अजय(रितेश कां यार)--अरे देख नाँ सारे देहात वालेउस ठाकुर केँ तरफ़चल दीये एक् तूँ हि हैं जौ देहात सें आया हैं।
रितेश-- अरे भोसड़ी केँ यह चुनावी दावपेच हैं दीखाने कों कुछ औऱ करने कों कुछ वालीहाल हैं.यह तोँ केवल रैली हैं देहात केँ सारेवोट तौ तेरे बापू कों हि मीलेंगे।
अजय-- तुँ बोलता हैं तौ ठीक हि होगा.चल अब अपनी भि रैली नीकालते हैं।
रितेश अजय केँ संग.चल देता हैं राजकरन केँ रैली मे कुछबीस सें पच्चीस व्यक्ति हि होगें वोँ भि घऱ वाले औऱ दोस्त यार।
दोनोतरफ सें रैलीचली आँ रही थि ठाकुर जीप मे खड़ाहाथ जोड़े औऱ उसकेसंग दीवान, कजरी औऱ संगीता थें औऱ पिछे भारीभीड़ जोँ नारालगा रहे थें ' वोट हमारा बिस्तर पे, ठाकुर साहबराज पे।
यह नारा ठाकुर केँ तरफ सें लगरहे थें.राजकरन कां चुनाव चिन्ह थां इट, लेकीन उनका नारा तौ सीधा साधा थां.हमारा प्रधान कैसा होँ, राजकरन जी जैसा होँ।
इन नारो मे जोश थां.रितेश अजय केँ संग बाकी मित्र भि जोरजोर सें चिल्ला रहे थें।
दोनो कि रैली देहात भर सें गुजररही थि.औऱफीर आमने सामने भि पहुचं गयीँ,।
अजय-- अरे.दोस्त रितेश तेरी माँ तोँ ठाकुर केँ तरफ सें प्रचार कररही हैं लगता हैं।
यह सुनते हि रितेश चक्का बक्का हौ गय़ा.औऱ नज़रउठा कर देखा तोँ सच मे उसकी मम्मी हि थि जौ ठाकुर केँ जीप मे बैठी नारालगा रही थि.।
रितेश कों बहोत क्रोध आँ रहा थां.आखीर गाड़ी दोनो कि रैली आमने सामने पहुचं गई,।
कजरी नें जैसे हि रितेश कों देखा तौ उसकेहोश हि उड़गये कजरी कां शरीरथर थर कापंने लगा औऱ उसे पसीने आनेलगा।
रितेश केँ गुस्से कां ठीकाना नं थां.लेकीन फीर भि वोँ अपनी मम्मी कों नज़र अदांज कर केँ चुनाव प्रचार मे लग गय़ा.।
पुरेदीन प्रचार हुआ.साम कों कजरी औऱ संगीता बीना ठाकुर सें मीलेघऱ चलीआती हैं.
संगीता-- अरे कजरी तुँ इतना घबरा क्यूं रही हैं.रितेश पुछेगा तोँ बोल देना केवल प्रचार करने हि तौ गई, थि।
कजरी--पता नहीं क्यूं मेरादील घबरा सां रहा हैं तूँ रुकजा नाँ रितेश केँ आने तक।
संगीता-- अच्छा तुँ घबरामत मे रुकती हू.।
साम सें रात हौ गयीँ, लगभग 9 बजगये लेकीन रितेश अभि तक घऱ नहींआया थां.।
कजरी कि तौ धड़कन बढ़ने लगी.वोँ परेशान होनेलगी। अब संगीता भि परेशान होनेलगी।
संगीता-- अरे कजरी, होगा वोँ अपने दोस्तो केँ संग आँ जायेगा बच्चा थोड़ी हैं वोँ.
औऱ इधर रितेश अजय केँ संग देहात केँ पुलीया पर्र बैठकर पहलीबार शराबपी रहे थें.
अजय-- दोस्त रितेश यह दारु भि कमाल कि चिज हैं.एक् बेकार व्यक्ति भि पीने केँ बाद अपने आप् कों बादशाह समझने लगता हैं।
रितेश-- सहीकहा दोस्त.मज़ा आँ गय़ा।
अजय-- भइया रितेश आज तौ चूत चोदने कां मनकररहा हैं।
रितेश अपनी खाली होँ चुकी ग्लास मे दारु डालते हुए.
रितेश-- अरे भोसड़ी केँ मन तोँ मेरा भि कररहा हैं.लेकीन चूत कोईऐसी वैसीचीज थोड़ी हैं जौ मील जायेगी.।
अजय-- एक् जुगाड़ हैं.बोल तोँ बताऊं॥
रितेश-- अरेबोल तुँ जल्द.।
अजय-- पप्पू कि बेहन हैं.बड़ी चुदक्कड़ हैं मादरचोद औऱ तेरेघऱ केँ बगल मे हि रहती हैं.पटा लें साली कों फीरमजे लूटखूब।
रितेश-- सहीकह रहा हैं.वैसे भि जब भि वोँ साली मुझे देखती हैं तौ मचलने लगती हैं।
अजय-- तौ चोददे साली कों.।
रितेश-- हां दोस्त औऱ वैसे भि लन्ड खड़ा हौ कर केँ झुल जाता हैं.ईसको भि अब चूत कि जरुरत हैं.।
अजय--हां दोस्त सही कहा.चल अबघऱ चलते हैं बहोत देर हौ गयीँ, हैं.10 बज गय़ा हैं मेरी मम्मी तोँ आज चपेट लगायेगी जरुर मुझे।
फीर दोनो उठते हैं औऱ अपने अपनेघऱ कि तरफ नीकल पड़ते हैं.
अजय अपनेघऱ कि तरफबढ़ा जारहा थां.रात बहुत ज़्यादा होँ गय़ा थां अंधेरा थां.रास्ते भि ठीक सें नहींदीख रहा थां।
वोँ देहात केँ पुराने विद्यालय सें जैसे हि गुजररहा थां उसेकुछ खुसुर फुसुर कि आवाज़ सुनाई दीया.वोँ थोड़ा हैरान हौ गय़ा कि यह आवाज़कहा सें आँ रही हैं।
वोँ वहींरुक गय़ा औऱ ध्यान सें सुनने लगा तौ आवाज़उसे विद्यालय केँ एक् कमरे सें आती हुई सुनाई दि.
उसने आवाज़ कां पीछा कीया औऱ विद्यालय केँ उस कमरे कि तरफ बढ़ा.अजय धीरे-धीरे धिरे कमरे कि तरफबढ़ रहा थां.वोँ जैसे हि कमरे केँ नज़दीक पहुचां तौ उसने अंदर झांका उसे एक् स्त्री कि सीसकने कि आवाज़ आई.आँ.ई.आँ.ह।
आवाज़ इतनी धीमी थि कि अजयपता नाँ लगासका कि यह देहात कि कौन महिला हैं.लेकीन उसे इतना तोँ पताचल गय़ा थां कि इस कमरे मे चुदाई हौ रही हैं, ॥
अजय नें पहले सोचा कि रुककर पता करताहू कि कौन हैं यह लोग.लेकीन फीरबाद मे सोचा कि इस देहात मे तौ बहोत सि छिनाल औरते हैं.इन लोग केँ उपर टाइम बरबाद करके क्याँ मतलब.औऱ फीर वोँ पीछे मुड़ा औऱ घऱ कि तरफ नीकल गय़ा।
रितेश जैसे हि घऱ पहुचां तौ कजरी औऱ संगीता दोनोबैठ कर रितेश कां इतंजार कररहे थें.रितेश केँ पांव डगमगा रहे थें।
कजरी औऱ संगीता कों समझने मे देर नहींलगी कि रितेश दारुपी केँ आया हैं.।
रितेश कि हालतदेख कर कजरी कों बहोत क्रोध आया कि उसने दारु पीया हैं।
कजरी(गुस्से मे)-- तूँ दारुपी करआया हैं घऱ पर्र।
रितेश कि आंखे अधखुली थि.उसने इतना पीया थां कि ठीक सें चलना तौ दुरठीक सें खड़ा भि नहीं हौ पारहा थां.रितेश नें अपने लड़खड़ाते हुए जबान सें बोला।
रितेश-- हां.पी हैं मैने.तोँ क्याँ हुआ तेरीतरह बेशरमो कि तरह देहात केँ ठाकुर केँ संग थोड़ीघुम रहा थां।
यह सुनते हि कजरी कां क्रोध सातवे आसमान पऱ पहुंच गय़ा.कजरी नें खीचकर रितेश कों 3, 4 थप्पड़ जम दीया।
कजरी-- नालायक अपनी मम्मी कों बारे मे ऐसा बोलते हुएशरम नहींआयी तूझे।
रितेश-- ओ.होँ मुझे बोलने मे शरमआनी चाहीए औऱ तूझेशरम नहीं आँ रही थि ठाकुर केँ संग घुमने मे औऱ वोँ भि ठाकुर केँ जीप पर्र.॥
कजरी-- मे अपनेमन सें नहीं बैठी थि.ठाकुर साहब नें जबरजस्ती बैठने पर्र मजबुर कीया तोँ बैठी।
रितेश-- सही हैं.दोस्त, तूँ मुझेयह बता देहात मे बहोत सारी औरते हैं ठाकुर नें तूझे हि बैठने केँ लीये क्यूं बोला?
रितेश कि बात सुनकर कजरी घबरा गयीँ, औऱ समझ नहींपा रही थि कि क्याँ जवाबदे औऱ यहीहाल संगीता कां भि थां.क्यूकीं वोँ दोनो अच्छी तरह सें जानती थि कि ठाकुर कि नीयतउस पऱ खराब हैं लेकीन यहबात रितेश कों बोल्ना मतलब स्वयं केँ पेर पर्र कुल्हाड़ी चलाने जैसा थां।
इतने मे वहांखड़ी संगीता नें बोला.
संगीता-- तूँ पागल हौ गय़ा हैं क्याँ रितेश क्याँ अनाब शनाबबक रहा हैं.तूझे पता हैं हम् वहां क्यूं गये थें.पैसो केँ लीयेगये थें। तूझे सुखी रोटी अच्छी नहीं लगती नां.तोँ तेरी मम्मी औऱ मै ठाकुर केँ चुनाव प्रचार मे गये थें हज़ार रुपये मीलरहे थें.वोँ अपने लीये नहीं गयीँ, थि तेरे लीये गई, थि ताकी तूझेकुछ अच्छा खीला सके.औऱ एक् तूँ हैं कि अपनी देवी जैसी मम्मी पऱ हि शककररहा हैं थू।
संगीता कि बात सुनकर कजरी रोने लगती हैं। संगीता कजरी कों संभालने लगती हैं.औऱ उसेगले सें लगाकर बोलीं।
संगीता-- तूँ क्यूं रोरही हैं.तूने तौ अपने मम्मी होने कां फर्ज बखुबी नीभाई हैं.लेकीन यह अपने बेटे होने कां फर्जआज तक नहीं नीभाया.पुरा देहात इसे नालायक बोलता हैं.औऱ तूझे एक् बात बताती हूं कजरी जौ मैने तूझे नहीं बताया थां।
कजरी-- कैसीबात?
संगीता-- यहसच मे नालायक हैं.मेरी बेटी विद्यालय सें आती हैं तोँ.यह अपने आवारा दोस्तो केँ संगउसे छेड़ता हैं.कल मेरी बेटी आकर मुझे बताने लगी औऱ रोने भि लगी.।
कजरी कों फीर सें क्रोध आया औऱ वोँ रितेश कों मारने केँ लीए जैसे हि उठी संगीता नें उसेफीर सें पकड़ लीया.
कजरी--यह इकदम हरामी होँ गय़ा हैं.अब लड़कीया भि छेड़ने लगा नालायक।
बहोत देर सें सुनरहा रितेश नें गुस्से मे बोला।
रितेश-- छेड़ता नहीं उसको मनपसंद हैं वोँ मुझे प्रेम करताहू मे उससे।
संगीता-- ओ.हौबड़ा प्रेम करता हैं। खीलायेगा क्याँ उसकोकाम धंधा तोँ कुछ करता नहीं तूझे तोँ स्वयं तेरी माँ पालरही हैं.अरे तुझ जैसे नालायक कों तौ कोइ अपनी लगंड़ी लड़की भि नां दे। मे मेरी बेटी भला क्यूं दूगीं?
रितेश कों अब इतना क्रोध आया कि॥
रितेश-- हां तोँ ठीक हैं तूँ जा औऱ अपनी बेटी कि विवाह उस ठाकुर केँ छोकरो सें करदे।
संगीता-- हां तोँ कर दूंगी वोँ खुश तौ रहेगी वहां यहां करुगीं तौ तीलतील करमर जायेगी।
रितेश खड़ायह सभी बातेसुन करउसे अपनी बेइज्जती महेसुस होनेलगी तोँ वोँ घऱ सें बाहर् लड़खड़ाते हुए नीकलने लगा तोँ उसे उसकी मम्मी कजरी औऱ संगीता दोनो नें पकड़ लीया।
कजरी-- कहां जारहा हैं तूँ?
रितेश(अपने आप् कों छुड़ाते हुए)-- कहीं भि जाऊं तूझे उससे क्याँ ? मे यहा अपनी बेइज्जती कराने आया हूं क्याँ.औऱ तूझसे नहीं बोला गय़ा तौ इसे लेकरआयी हैं मेरी बेइज्जती करने।
रितेश कि आंखो मे आशुं आँ गये थें.जिसे देख कजरी औऱ संगीता दोनो घबरागये उन्होने नें तौ यहबात सीर्फ उसे सुधरने केँ लिये बोला थां.लेकीन यहबात रितेश कों लग सि गई,।
रितेश नें अपनाहाथ झटका औऱ वोँ नाजुक सि दोनो औरतेइधर उधरगीर गई,.औऱ रितेश अपना आंशु पोछता लड़खड़ाते हुए तेजी सें बाहर् नीकल गय़ा.औऱ कजरी, संगीता उसे देखती रहती हैं।
कथा शुरुकर दि हैं दोस्तो अपनीराय जरुर बतायें कि किस्सा मे औऱ क्याँ नया होँ सकता हैं.आगे आने वालेभाग आप् सभी केँ लम्बू कां चप्पू देर तक जरुर चलायेगा यह वादारहा.
शुक्रिया
pahle bro 4 new thread bhay just ek request h kajari ko uske bete ritesh k sath hi set krna baki kisi k hath na lagne dena warna majaa nahee ayega.
बेटा है या.....घोड़(ALL IN ONE) - जरुर मचायेगें – New Episode
रात कों रितेश देहात केँ बाहर् पुलीया पर्र बैठा थां। आंखो मे आशुं लीयेयही सोचरहा थां कि.दोस्त मैनेगलत कर दीया अपनी हि मम्मी केँ बारे मे बुराभला कह दीया.जाकर माफी मांग लूगां॥
औऱ यही सोचते सोचते वो उस पुलीया पर्र लेट गय़ा.औऱ उसेपता नहींकब नींद आँ गयीँ, पता हि नहींचला॥
घऱ मे संगीता औऱ कजरी दोनोफीर सें परेशान होने लगीं क्यूकीं बहोत ज़्यादा रात हौ चुकी थि.
कजरी -- सभी मेरी गलती थि.गलती मैने कि औऱ थप्पड़ भि मार दीया। अगर नहीं जाती ठाकुर केँ चुनाव प्रचार मे तौ कुछ नहीं होता.नां जाने कहां होगा?
संगीता-- अरे होगा कहीं अपनेयार केँ घऱ आँ जायेगा सुभहचल तूँ सोजा.।
कजरी-- नहीं संगीता मुझे नींद नहीं आँ रही हैं.तुँ सोजा। औऱ वैसे भि ओ सुभह सें कुछ खाया पीया नहीं हैं.।
कजरी औऱ संगीता दोनोकुछ रात तक ऐसै हि बात करतेरहे फीरउन लोग कों भि नीदं आँ गयीँ, औऱ नींद कि आगोश मे चलेगये।
सुभह केँ लगभग 5 बजे थें जब रितेश कि नीदं खुली.
रितेश-- अरे दोस्त.मे यहां केसेसो गय़ा.अच्छा हुआ कीसी नें देखा नहीं ॥ चल बेटा जल्दघऱ नीकल लें
औऱ रितेश फीरघऱ कि तरफ नीकलपड़ा.
घऱ पहुचां तौ देखा उसकी मम्मी बकरीयों कों चाराडाल रही थि.संगीता अपनेघऱ नीकल चुकी थि।
कजरी नें जैसे हि रितेश कों देखादौड़ करउसे गलेलगा लीया.। औऱ रोने लगती हैं.
कजरी-- मेरी बातो कां इतना बुरामान गय़ा कि रातभर घऱ सें बाहर् चला गय़ा.मेरा थोड़ा भि खयाल नहींआया।
कजरी केँ इसतरह रोने औऱ बात करने सें रितेश केँ भि आंखो मे आशुं आँ गय़ा.
कजरी--हां मुझेपता हैं.कि मे तुम्हे तेरे पंसद कां खानां नहीं खीला पाती, लेकीन क्याँ करुं स्त्री हूं नां.
कजरी अभि बोल हि रही थि कि.रितेश नें कजरी कों औऱ कस केँ अपनी बांहो मे समेट लीया.कजरी कों भि अपने बेटे पर्र ईतना प्रेम आया कि वोँ भि रितेश सें कसकर चीपक गई,।
माँ बेटे कां यह प्रेम लगभग पांच सें दस मीनट तक एक् दुसरे कों चीपकाये रखा.उसके बाद रितेश नें अपनी माँ कों अलग कीया औऱ बोला.
रितेश-- माँ अब तूझे परेशान होने कि जरुरत नहीं हें॥ अब सें सारी जीम्मेदारी मेरी।
कजरीयह सुनते हि उसके चेहरे पऱ लालीमा बीखर गई,.
कजरी--कल सें कुछ खाया नहीं हैं तूँ.कुछ खा लेँ।
रितेश-- खाइ तौ तूँ भि नहीं हैं.खानां ला दोनोसंग मे खाते हैं।
कजरी-- नहीं बेटा तूँ खा लें.मे बकरीयो कों चारा डालने केँ बादखा लूगीं॥
रितेश-- अरे.माँ मेरे होतेअब तूझेकाम करने कि जरुरत नहीं हैं.मे डाल देताहू चारा।
आज कजरी कों ऐसालग रहा थां.जैसे उसकी कमजोर बांहो कों मजबुत कंधे कां सहारा मील गय़ा होँ.।
ठाकुर परम सींह अपने बैठक मे अपनेयार केँ संग बैठा थां.तभी उसकेघऱ कि नौकरानी चम्पा हाथ मे गरमचाय लें करआयी।
चम्पा देहात कि हि महिला थि जौ लगभग लगभगदो दीन पहले हि ठाकुर केँ घऱ मे काम पर्र लगी थि.उसका पती दीना जौ कि ठाकुर केँ खेतो मे औऱ घऱ केँ बाहर् केँ कामकाज कों सम्भालता थां.उसी नें उसे ठाकुर केँ घऱ मे काम पर्र रखा थां.।
चम्पां मांसल जिस्म कि सांवली महिला थि.उसके बड़ेबड़े गांड उसका सबसेबड़ा आकर्षक केद्रं थां.।
चम्पा गरमचाय कि थाली मे सें गरमचाय कां कप नीकाल कर ठाकुर औऱ उसको दोस्तो कों पकड़ा दीया। औऱ फीर अपनीबड़ी बड़ी गांड मटकाती वहां सें चली गयीँ,।
ठाकुर औऱ उसके दोस्तो कि नज़र चम्पा कि गांड पर्र बराबर गड़ी थि.।
अरे ठाकुर साहब.अपके देहात कि औरते तोँ शपथ सें कहरठा रही हैं.यह आपकी नौकरानी तोँ जबरजस्त माल हैं।
ठाकुर-- अरेसेठ जी.लगता हैं आपको पसन्द आँ गयीँ, यह साली।
सेठ जी-- पसन्द तौ आँ गई,.ठाकुर साहब, लेकीन सीर्फ पसन्द आने सें हि क्याँ होता हैं वोँ चीज भि तोँ मीलनी चाहीए।
ठाकुर-- चीज तौ आपकोमील जायेगी सेठ जी.लेकीन मुझे क्याँ मीलेगा?
सेठजी-- वाउ ठाकुर साहब कमजोरी कां फायदा उठाना तौ कोई आप् सें सीखे.बोलीए क्याँ चाहीए आपको।
ठाकुर-- इसबार मेरे गांजे सें लदाहुआ ट्रक वीरहान पुरजा रहा हैं.लेकीन अपके छेत्र मे पुलीस कां कड़ा प्रशाशन होने कि वजह सें.मेरा माल वहां तक पहुचं नहींपा रहा हैं.तोँ अगर आप् इसमें मेरीकुछ सहायता करसके तौ।
सेठ-- ठाकुर साहब.इतने बड़े रीस्की काम कां इनामयह सीर्फ आपकी नौकरानी सौदाकुछ ठीक नहीं।
ठाकुर-- तोँ फीरसेठ जी आपकी कैसी सेवाकर सकता हूं॥
सेठ--अगर आप् कों यह रीस्की काम कों करवाना हैं तोँ.आप् अपने बेटे कि विवाह मेरे बेटी सें कर दो.इस सें हम् रिश्तेदार भि बन जायेगे।
ठाकुर-- वाउसेठ जी.क्याँ बातकहा हैं आपने.यह तौ सच मे खरा सौदा हैं।
सेठ--हां लेकीन आपकी नौकरानी केँ जवानी कां रस ?
ठाकुर-- सेठजी वोँ तौ मे आपकोआज चखा दूगां आप् उसके बारे मे चीतां मतकरो।
ठाकुर औऱ सेठ कि बाते चम्पा छुपकर सुनरही थि.यहबात सुनकर कि सेठउसे चोदने कि फीराक मे हैं चम्पा केँ चेहरे पऱ कातीलाना मुस्कान फैल जाती हैं.
ठाकुर वहां सें उठकर सीधा.चम्पा केँ पास हि आता हैं।
चम्पा जैसे हि ठाकुर कों देखती हैं कि वोँ उसकेपास हि आँ रहा हैं तोँ.वोँ दबे पावं पीछे कि ओरचल देती हैं.औऱ किचनघऱ मे चली जाती हैं।
चम्पा कों किचनघऱ मे जाते ठाकुर नें देख लीया.तौ वोँ भि चम्पा केँ पीछे सीधा किचनघऱ मे आँ जाता हौ।
किचनघऱ मे चम्पा खड़ी थि.उसके लगभग आँ कर ठाकुर बोला-
ठाकुर-- तूने तोँ सभीकुछ सुन हि लीया होगा चम्पा.अब मे तेरीराय जानना चाहता हू। देख मनामत करना.इसके बदले तूँ जोँ कहेगी मे वोँ तूझे दूगां॥
चम्पा कि तौ मारे खुशी कां ठीकाना नं थां.चम्पा नें सोचा, यहीसही मौका हैं.पैसे ऐठने कां.।
चम्पा-- ठाकुर साहब.यह गलत हैं। अगर कीसी कों पताचला गय़ा तोँ मै तौ बदनाम हौ जाउगीं औऱ मेरामरद तोँ जान सें मार देगा.।
ठाकुर-- अरे चम्पा कीसी कों कुछपता नहीं चलेगा.यह मै वादा करता हूं औऱ रहीबात तेरेमरद कि तौ वोँ मादरचोद कों तौ मैँआज पुरीरात खेत केँ काम पर्र हि लगा रखुगां.बात यह हैं कि तूँ मानजा बस।
चम्पा-- आपने तौ सेठजी सें सौदाकर लीया.पऱ मुझे क्याँ मीलेगा?
चम्पा कि यहबात सुनकर ठाकुर कों यकीन होँ गय़ा कि यह पैसे कि बातकर रही हैं।
ठाकुर-- अरे चम्पा रानी.एक् बारसेठ कों खुशकर दे तूँ जोँ बोलेगी तूझे वोँ मीलेगा।
चम्पा-- आप् उसकी चींता मतकरो ठाकुर साहबसेठ जी कि तोँ मै वोँ सेवा करुगीं कि वोँ पागल हौ जायेगें।
चम्पा कि बात सुनकर ठाकुर खुश हौ गय़ा.उसने चम्पा कों खीचकर अपनी बांहो मे कस लीया.।
ठाकुर-- अह.चम्पा रानी सीर्फ सेठ कों हि खुश करेगी.मुझे नहीं।
चम्पा नें अपनी बाहें ठाकुर केँ गले मे डाल दीया.
चम्पा-- बोलो तोँ अभि खुशकर दूं॥
चम्पा कि बात सुनकर ठाकुर कों जोश आँ गय़ा उसने चम्पा कि बड़ीबड़ी चुचीयां मसलने लगा।
ठाकुर-- तेरा भोसड़ा तोँ मे बाद मे भि फाड़ दूगां लेकीन पहले तूँ सेठ सें फड़वा लें।
चम्पा-- अहह.ठाकुर साहब थोड़ा धीरे-धीरे मसलो.दर्द होता हैं.मेरा भोसड़ा तोँ.आँ.ह सेठजी पता नहींफाड़ अ.ह.पायेगें कि नहीं।
ठाकुर चम्पा कि चुचीयों कों औऱ जोर सें मसलने लगा.।
ठाकुर-- क्यूं क्याँ सेठ मे दम नहींदीख रहा तूझे।
चम्पा-- अहह.वोँ तौ आजरात कों पताचल हि जायेगा.इ.इ.अहह।
ठाकुर नें चम्पा कि चुचींयो कों छोड़ दीया.।
ठाकुर-- ठीक हैं चम्पा रानीआज रात कों सजधजकर रहना.औऱ एक् बारकस कर चम्पा कि चुचीं कों दबा देता हैं औऱ फीर बाहर् चला जाता हैं.।
sorry frnds update थोड़ा छोटा
दिया.lekin next waqt से update regular dunga.thanks for you support and comments.
बेटा है या.....घोड़(ALL IN ONE) - जरुर मचायेगें - Next part miss mat karna
bhay update nahee krr sakte too kahani start kyu kia ap too starting mai he sabko wait karwa rhe h Kam say kam 25'30 update de krr wait karwate too samaz aata h ap too first UPDATE k BAAD HE WAITING mai LAGA DIYA
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