बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai – New Episode
एक् हवस कि जानी पहचानी सि छवि उनके चहरे पऱ उभरने लगी थि उत्तेजना औऱ उत्तुसूकता कि लहर उसके चहरे पऱ दिखने लगी थि उनके अग्रेसिव औऱ उतावले पन मे अब कामया कों आनंदआने लगा थां एक् मधुर सि हँसी कि आवाज़ औऱ उत्तेजना भरी सिसकी उस कमरे मे गूँजउठी थि कामया केँ मचलने औऱ इधर-उधर होने कि वजह सें, अब गुरुजन कों उसे एक् स्थान खड़े रहकर संभालना थोडा सां मुश्किल सां हौ उठा थां पऱ तीन जनों कों अब बाकी केँ तीन गुरुजन कां संग भि मिल गय़ा थां हरकोई कामया कों खड़ा करके उसकेहर हिस्से कों चूमते हुए मसलते हुएउसे बेड पऱ सें दूररखे हुए थें कामया हँसती हुइ हर गुरुजन कां संगदे रही थि एक् नजरउस कमरे मे होँ रहे रूपसा औऱ मंदिरा केँ खेल पऱ भि थि औऱ अपने आस-पास खड़ेहुए गुरुजन केँ लिंगो केँ स्पर्श कां भि एहसास उसे थां होंठों कां स्पर्श हरअंग कों नया जिंदगी देरहा थां औऱ जीब कां स्पर्श उसे गीलाकरता हुआ एक् अजीब सां एहसास उसके अंदरजगा रहा थां
कामया जिसतरह सें अपनेबदन कों मोड़कर उन गुरुओं कों उत्तेजित औऱ स्पर्श करने कि पूरी आँ जादीदे रही थि उससेलग रहा थां कि कामया कों अबरोक पाना कठिन थां कामया अपने हाथों मे नहि पता किसका लिंगलिए हुए थि पर्र हाँ… अच्छे सें एक्-एक् करतेहुए हर लिंग कों अपने हाथों मे लेकर अच्छे सें सजधजकर करतीजा रही थि इतने मे अचानक हि उसके मुँह सें आवाज़ निकली
कामया- उूउऊफ गुरुजी क्याँ करते होँ अच्छे सें चाटो नाँ बहोत मज़ा आँ रहा हैं म्म्म्ममममममममममममममह
करतेहुए कामया कि एक् जाँघ कों उसनेबेड पर्र रख दिया थां औऱ गुरुजी केँ सिर केँ बालों कों कसकर पकड़कर अपनी योनि पर्र खींच लिया थां कामया केँ होंठों सें सिसकी निकलते हि पास खड़ेहुए एम नें उसके होंठों कों अपने कब्ज़े मे कर लियापास खड़ेहुए एच नें भि उसके गालों कों चाटते हुए उसकी चूचियां मसलने लगा थां क्राइ औऱ एस जौ कि अभि नीचे कि ओर थें उसकी एक् एक् टाँगों कों एक्-एक् करके अपने हिस्से मे लिएहुए उसकोचाट रहे थें औऱ चूमरहे थें जाई पीछे सें उसकीपीठ कों चाट-ता हुआ नीचे सें ऊपर औऱ ऊपर सें नीचे कि ओर होँ रहा थां सब केँ हाथ कामया कि पीठ औऱ पेट सें लेकर चुचों तक आते थें औऱ उसेमजा केँ सागर मे गोते खिलाने मे कोई कोताही नहि कररहे थें
कामया- आआआआआआअह्ह करतेरहो रोको नहि प्लीज ईईईईईईई आआआआआआआआआआह्ह बहोत मज़ा आरहा हैं
एम- ऊऊऊओदेवी जीयही स्वर्ग हैं मे आज सें आपका गुलाम हुआ
क्राइ- मे भि देवीजी उूउउम्म्म्ममममममम
कामया केँ कानों मे आवाजें बहोत दूर सें आती हुइ प्रतीत होँ रही थि भारी सांसों केँ बीच मे उसे बहोत सि आवाजें सुनाई देरही थि उत्तेजना भरी औऱ सेक्स मे डूबी हुई कामया स्थिर खड़ी नहि हौ पारही थि जाँघो केँ बीच मे गुरुजी कों पकड़े हुए कामया एक् झटके सें उनकेऊपर गिर गई थि गुरुजी केँ चहरे केँ ऊपर अपनी योनि कों उनके होंठों सें अलग नहि करने दिया थां उसने कामया केँ अंदर एक् ज्वार जनम लें चुका थां अबउसे कुछ औऱ चाहिए थां बहोत कुछ बहोत सें मर्द थें उसकेपास बहोत सें हाथ थें उसकेबदन पऱ अबउसे चाहत थि तौ बस अपने आपको भरने कि एक्-एक् करहर लिंग उसके अंदरचला जाएबस उसे शांति मिल जाएगी कौन पहलेकौन बाद मे पता नहीं पऱ जल्द बहोत जल्द वोँ बहोत उत्तेजित हौ चुकी थि औऱ अब किसी शेरनी कि तरह आग्रेसिवे होनेलगी थि
बेड पर्र गिरते हि वोँ गुरुजी केँ चेहरे पर्र अपनी योनि कों अड्जस्ट करनेलगी थि औऱ पूराजोर लगाकर गुरुजी केँ होंठों केँ अंदर अपनी योनि कों करनेलगी थि पीछे खड़ेहुए गुरुजन नें भि कोईदेर नहि कि औऱ उसके गिरते हि सब नें जहां स्थान मिलीवही पऱ अपना कब्जा जमा लिया थां हरकोई कामया कों चूमने चाटने मे लगा थां औऱ कामया उुउऊह्ह आआअह्ह करती हुइ नीचेजमे गुरुजी केँ होंठो पऱ अपनी योनि कों रगड़ने मे लगी थि इतने मे कामया केँ हाथ क्राइ पऱ जमगये थें औऱ उसे खींचते हुए अपने नितंबों तक लेँ गई थि क्राइ कों पता थां कि क्याँ करना हैं औऱ वोँ वहा अपने चेहरे कों घिसते हुए कामया केँ नितंबों कों चूमने चाटने लगा थां ऊपरसब अपनेकाम मे जुटे थें कि कामया अचानक हि थोडा सां नीचे कि ओर होँ गई थि करीब-करीब लेट सि गई थि अपने गुदा दरवाज़ा कों क्राइ केँ लिए खोलकर। क्राइ नें भि अपनीजीब कों उसके गुदा दरवाज़ा तक लेँ जाने मे कोईदेर नहि कि अब कामया कि योनि पर्र गुरुजी थें औऱ गुदा दरवाज़ा पऱ क्राइ थां एस औऱ एच एक् तरफ सें औऱ एम औऱ जाई एक् तरफ थें
थोडा सां आगेहुआ थां एच औऱ अपने आपको कामया केँ चेहरे कों पकड़कर सामने एडजस्ट कर लिया थां मुख सें सिसकी भरती हुईँ कामया नें एक् बार अपने सामने एक् सख़्त औऱ बिल्कुल खड़ेहुए लिंग कीओर देखा थां उत्तेजना केँ चलते उसकेमुख सें आवाजें निकलती हुईँ कामया कि लपलपाति हुईँ जीब नें एक् बार उसके लिंग कों छुआ थां औऱ धीरे-धीरे सें अपने होंठों केँ अंदरकर लिया थां उसकी देखा देखीजाई भि आगे हौ गय़ा थां औऱ अपने लिंग कों सीधा खड़ाकिए अपनी बारी कां प्रतीक्षा करनेलगा थां कामया कि योनि सें धीरे-धीरे धीरे-धीरे पानी छूटने लगा थां औऱ नीचे लेटेहुए गुरुजी कों अब तकलीफ़ होनेलगी थि उनका चेहरा पूरा गीला हौ चुका थां पर्र कामया उन्हें जाने देने कां कोई मार्ग नहि देरही थि अपने सामने झूलते हुए एक् औऱ लिंग कों देखकर कामया नें हाथ बढ़ाकर उसे भि थाम लिया थां औऱ अपने होंठों पऱ घिसने लगी थि अंदर एक् लिंग तौ थां हि पर्र चेहरे पर्र उस लिंग कों घिसने मे कामया कों बड़ा आनंद आँ रहा थां सांसें फूल चुकी थि औऱ कभी भि कामया झड सकती थि उसे किसी कि चिंता नहि थि उसे तोँ बस अपनी चिंता थि वोँ अब अपनी योनि कों औऱ भि अधिक गुरुजी केँ होंठों पऱ जोर सें लगाकर घिसती जारही थि औऱ एक् भरपूर चीख उसकेमुख सें निकली थि औऱ हाथो मे औऱ होंठों केँ बीच मे लिएहुए लिंगो कों करीब-करीब काट हि लेती पर्र बहोत ज़्यादा जोर सें उन्हे जकड़ लिया थां
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बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai – New Episode
झड़ने केँ बाद कामया शांत नहि हुइ थि उसके गुदा दरवाज़ा पर्र हमला अभि जारी थां वोँ औऱ भि कामुक होँ उठी थि नीचे लेटेहुए गुरुजी सांसें लेने कों उसके चुगल सें जैसे हि आजादहुए क्राइ नें मोर्चा संभाल लिया थां औऱ धीरे-धीरे सें अपनेलंग कों उसकी योनि मे धक्के सें डाल दिया थां हर धक्का योनि केँ अंदर तक जाता थां औऱ बाहर् आते हि फिन सें वही क्रिया। कामया केँ होंठों सें लिंग फिसलता हुआ बाहर् निकल जाता थां औऱ गाल कों छूतेहुए गले तक आँ जाता थां पर्र कामया कों कोई चिंता नहि थि वापस होते हि फिन सें अपने होंठों केँ अंदरकर लेती थि औऱ मुस्कुराती हुइ अपने पीछे सें होँ रहे आक्रमण कां खुशी लेने मे लगी थि पास मे आएहुए एम औऱ एस कि तरफ भि उसे ध्यान देना थां उसनेहाथ कों बढ़ाकर एक् लिंग कों औऱ अपने कब्ज़े मे किया थां औऱ हल्के सें आगे पीछे होते मे अपनीजीब सें चाटने लगी थि
क्राइ भि ज़्यादा देर तक नहि रुक पाया थां औऱ धीरे-धीरे सें अपने लिंग कि एक् तेजधार कामया कि योनि केँ अंदर डालकर पास मे गिर गय़ा थां कामया नें पलटकर खालीहुए जगह कि ओर देखा थां औऱ एक् इशारा मंद सि मुकुराहट केँ संगएस औऱ क्राइ कि ओर किया थां एस औऱ क्राइ जल्द सें अपनी स्थान लेने कों उत्तावाले होँ उठे थें कामया मुस्कुराती हुईँ वैसे हि घोड़ी बनीरही औऱ अपनी योनि औऱ गुदा दरवाज़ा कों उँचा करकेउन दोनों कों आमंत्रण देने मे थि कि गुरुजी नें अचानक हि पीछे सें अपनी स्थान संभाल ली थि क्राइ औऱ एस खड़े हि रहगये थें औऱ गुरुजी कां लिंगझट सें उसके गुदा दरवाज़ा कि अंदर हौ गय़ा थां कामया एक् हल्की सि आहह-आहह भरकर औऱ पीछे कि ओर होँ गई थि एस नें कुछ सोचा थां औऱ आगेबढ़ कर कामया केँ नीचे अपनी स्थान बनाली थि एस अधिक उत्तावाला थां औऱ कामया भि वैसे हि उतावली थि अपनी बाँहे उसनेझट सें एस केँ गले मे डाल दि थि औऱ उसे नीचे सें अपनीओर खींचते हुए अपनी योनि केँ अंदर जाने कों उकसाने लगी थि एस जल्द मे थां उसका लिंगजिस तरह सें तनाहुआ थां उससे लगता थां कि उसकी उत्सुकता औऱ उत्तेजना जल्द कि किनारा कर लेगी कामया कि मचलती हुई काया कां हरअंग उसके हाथों कां खिलोना बनने कों सजधजकर थां एस केँ संग-संग गुरुजी भि अब जल्द मे थें औऱ दोनों केँ स्थान संभालते हि कामया एक् हल्की सि हल्की चीख भरती हुइ अपने पीछे केँ भाग कों औऱ ऊँचा करनेलगी थि उसकीकमर कि चाल इतनी मदमस्त थि कि गुरुजी औऱ एस कों कोई मेहनत नहि करनीपड़ रही थि कामया अपने आप् हि अपनीकमर कों इसतरह सें चलारही थि कि एस औऱ गुरुजी अपनी रफ़्तार कों धीमी करतेजा रहे थें
एक् अनंतसुख औऱ उत्तेजना केँ सागर मे गोते लगाते हुए वोँ अपनेचरम केँ शिखर कि ओर बढ़ने लगे थें पास मे एच औऱ जाई भि थें औऱ क्राइ खड़ाहुआ अपनेसमय कां प्रतीक्षा कररहा थां पऱ जैसे हि उसने कामया कि उत्तजना भरीचीख सुनी वोँ दौड़कर आगे उसके मुँह कि ओर आँ गय़ा थां उसका लिंगआगे कि ओर खड़ा औऱ तनाहुआ थां कामया उन दोनों केँ बीच मे पिसती हुइ अपनेआगे झूलते उस लिंग कों अनदेखा नां करपाई थि आगेबढ़ करउसे भि अपने होंठों केँ अंदरकर लिया थां
पास मे बैठेहुए एच औऱ जाई नें भि कामया केँ हाथों कों घसीटकर अपने-अपने लिंग पर्र रख दिया थां अबसब एंगेज थें सब अपनीतरह कां सुख औऱ खुशीपा रहे थें कोई अधिक तोँ कोईकम हाँ पर्र कामया देवीसब पर्र मेहेरबान थि एक् अनोखा खेल औऱ सेक्स औऱ उत्तेजना कि चरम सीमा शायदयही थि एक् महिला छः मर्दो कों किसतरह सें खुशकर रही थि येबसउसी कमरे मे हि संभव थां औऱ शायद कामया देवी केँ लिए हि संभव थां
कामया- म्म्म्ममममममममममममममममह ईईईईईईईीीइसस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स करो उउउंम्म करो औऱ करो अपनी देवी कों भोग लगाओ जल्द औऱ जल्दीीईईईईईईईईईईई करूऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ
बोलती औऱ बंद होती आवाज़ उस कमरे मे चारो औऱ गूँजरही थि संग केँ बेड पर्र रूपसा औऱ मंदिरा कि आवाजें भि आँ रही थि पता नहि क्याँ-क्याँ पऱ हाँ… उत्तेजना सें भरी औऱ उन मर्दो कों ललकार्ने कि आवाज़ साफ थि हर महिला उस कमरे मे एक् शेरनी सें कम नहि थि औऱ मर्द उनके आहार केँ रूप मे हि थें।
गुरुजी- लो देवीइस बार तोँ तुम् कमाल कि लगरही हौ इस आश्रम कों जरूर तुम् हि उधर करोगी मेरी ख़्वाहिश पूरी हुईँ
क्राइ बस हमेंयही चाहिए देवीजी औऱ बसयही औऱ कुछ नहि बाकी हम् आपके गुलाम हैं
कामया- रोको नहि बस करतेरहो बहोत मज़ा आँ रहा हैं प्लीज़ उूउउम्म्म्मममममम
लिंग केँ अंदर जाते हि कामया कां मुँह तक जाता थां पऱ कोईबात नहि फिन अंदर थां वोँ हाथों मे लिएहुए लिंग कों करीब-करीब निचोड़ते जारही थि कामया केँ पास मे जाई औऱ एच किसीतरह सें अपने हाथों सें अपने लन्ड कों छुड़ाना चाहते थें पर्र कोई फ़ायदा नहि पतली पतली उंगलियों मे उनके लिंग कों इसतरह सें कसाहुआ थां कि अगर कामया हि चाहे तौ हि छूट सकता थां इतने मे कामया कों लगा थां कि नीचे सें सरकुछ ज़्यादा हि उत्तावाला हौ उठा थां
बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai – New Episode
लिंग केँ अंदर जाते हि कामया कां मुँह तक जाता थां पऱ कोईबात नहि फिन अंदर थां वोँ हाथों मे लिएहुए लिंग कों करीब-करीब निचोड़ते जारही थि कामया केँ पास मे जाई औऱ एच किसीतरह सें अपने हाथों सें अपने लन्ड कों छुड़ाना चाहते थें पऱ कोई फ़ायदा नहि पतली पतली उंगलियों मे उनके लिंग कों इसतरह सें कसाहुआ थां कि अगर कामया हि चाहे तौ हि छूट सकता थां इतने मे कामया कों लगा थां कि नीचे सें सरकुछ ज़्यादा हि उत्तावाला होँ उठा थां
कामया- क्याँ हुआएस बहोत धीरे-धीरे होँ गये
कहती हुईँ कामया नें झट नें अपने होंठों कों उसकेसंग जोड़ लिया थां औऱ एक् जबरदस्त झटका अपनी योनि कां उसके लिंग पऱ किया थां एस नहि संभाल पाया थां उस धक्के कों औऱ अंदरकही बहोत दूर उसके लिंग नें उसकासंग छोड़ दिया थां कामया कि कमर कां झटका इतना जबर्जस्त थां कि गुरुजी कां लिंग भि उसके पीछे सें निकल गय़ा थां
पर्र एस ठंडा हौ गय़ा थां
एस - आआआआआह्ह बस देवीअब नहीं आपकोखुश करना मेरेबस कि बात नहि आप् देवी हैं सेक्स कि देवी हमारी देवीसब कि देवी हैं आपके सामने हम् कुछ नहि आआआआआआआअह्ह औऱ किसीमरे हुए जानवर कि तरहएस केँ होंठों सें मंदमंद आवाजें निकलती रही औऱ कामया एक् कुटिल सि हंसी लेकर एकदम सें पलटगयो थि औऱ बेड पर्र अधलेटी सि गुरुजी कि ओर मदमस्त आखों सें देखती रही औऱ धीरे-धीरे सें अपनी जाँघो कों खोलकर अपनी योनि कों सीधे उनकीओर करती हुई,,
कामया- आओ गुरुजी अपनीसखी कां भोग लगाओ औऱ खूब लगाओ देखोअब आपकी बारी हैं हिहिहिहीही
करती हुईँ कामया नें अपनी बाँहे फैला दि थि गुरुजी शायदकुछ डरगये थें पऱ आगे बढ़े थें कामया नें झट सें उन्हे पकड़ लिया थां औऱ अपनीकमर उनके चारोओर घेरली थि अपने होंठों कों उनके होंठों सें जोड़कर उसकेमुख केँ अंदर हि कहा थां
कामया- आओ गुरुजी इतना मज़ाफिन नहि आएगाकर लो जोँ करना हैं कल सें आप् भि नहि हौ यहां सबकुछ मेरा हैं आओ औऱ खुशकरो अपनी देवी कों
गुरुजी आगे बढ़े थें पर्र जिसतरह सें उनका लिंग कामया केँ अंदर गय़ा थां औऱ कामया नें जिसतरह सें उसका स्वागत किया थां वोँ एक् अनोखा अंदाज थां
गुरुजी नें इतनी महिला भोगी थि कि उन्हें भि उनकी गिनती याद नहि थि पर्र जिसतरह सें कामया नें एक् हि झटके मे उनका लिंग अंदर लिया थां औऱ फिनहर धक्का अपनीओर लगाती जारही थि वोँ एक् कमाल थां गुरुजी कुछ भि नहि करपाए थें औऱ करीबचार पाँच धक्के मे हि ढेर होँ गये थें कामया कि उत्तेजक हँसी उनके कानों कों भेद गई थीऔरउस मुरझाए हुए लिंग कों अपने अंदररखे हुए हि अपनीकमर कों उछालने मे लगी थि हँसी कि आवाज़ उस कमरे मे एक् हिस्टीरिया केँ मरीज जैसीफैल गई थि
गुरुजी किसी निरीह प्राणी कि तरह सें उसकीओर देखरहे थें
कामया ऽ क्याँ हुआ गुरुजी नहि संभाल पाएचलो हटो अभि भि मेरेपास औऱ भि गुरुजन हैं आप् भि नाँ गुरुजी
कामया- आयो क्राइ तुम् आओ जल्दकरो अभि रात बहोत बाकी हैं
कहती हुई कामया नें क्राइ कों खींच लिया थां वहीहाल क्राइ कां भि हुआ औऱ फिनएच औऱ फिनजाई
सबइसी तरह एक् केँ बाद, एक् ढेर होतेचले गये थें मादकता औऱ जंगली पन कि हँसीउस कमरे मे गूँजती रही सीकारियाँ औऱ आहह-आहह सें भरी हुईँ हँसीउस कमरे मे गूँजती रही
डर औऱ विफलता केँ औऱ संकट केँ बादलउन गुरुजनो केँ चहरे पर्र साफ देखने कों मिलरहे थें इतनी औरतों कों भोगा थां पर्र यह तौ कमाल कि थि सब कों ढेर करतेहुए कामया फिन सें एक् झटके सें उसबेड सें उठी थि औऱ आगे बढ़ती हुईँ एस कों घसीटकर सामने खड़ाकर लिया थां डर उसकी आखों मे साफ देखाजा सकता थां
कामया नें उसके लिंग कों कसकर पकड़ा थां औऱ अपनीजीब कों निकाल कर उसके होंठों कों चाटते हुए
कामया- क्याँ हुआएस बस क्याँ औऱ नहि लगाओगे भोग अपनी देवी कां बस
उसके चाटने कि आवाज़ तक उस कमरे मे सरसराती हुईँ गूँज गई थि घबराया दिखरहा थां एस। अपनी पूरीजान लगाकर उसने कामया कों भोगा थां पऱ ये स्त्री अब तक खड़ी हैं औऱ आगे उससे औऱ भि माँगरही हैं वोँ हार गय़ा थां
कामया हँसती हुइ आगे बढ़ी थि औऱ एक्-एक् करतेहुए उसनेसब कों किस किया थां औऱ, सब कों आगे बढ़ने कों कहा थां रात केँ कितने बजे थें पता नहि पर्र वोँ रूमअब भि जवान थां औऱ रात केँ संग-संग उस कमरे मे अभि बहोत कुछ बाकी थां सब गुरुजनो कों चूमते हुए कामया उनके लिंग कों अपनेनरम हाथों मे मसलते हुए मुस्कुराती हुई अंतिम मे गुजी केँ पास पहुँचि थि औऱ जीब निकाल करफिन एक् किस किया थां
कामया- गुरुजी आप् भि थकगये क्याँ गुरुजी आप् तोँ कम सें कम मेरासंग देतेये तौ ऐसे हि निकले आप् तौ बहोत बालिस्ट औऱ गुरुजी हैं मेरे आप् भि संग छोड़ दोगेये नहि सोचा थां कहती हुईँ कामया नें एक् बार उनकी आखों मे देखा थां एक् पराजय कि लकीर औऱ हार कि लहर उनकी आखों मे उसे दिखाई दि थि
कामया - जाओअब जाकर आरामकरो मुझे औऱ भि काम हैं कहती हुईँ कामया उसबेड कि ओरचल दि थि जहां, रूपसा औऱ मंदिरा उन स्टड्स केँ संग थि सब गुरुजन अपनीहार कों बर्दाश्त करके औऱ मानकर कि देविजी कों हराना उनकेबस कि बात नहि हैं सोचते हुएउस कमरे सें बाहर् कि ओर जानेलगे थें जाते जाते उनकीनजर कामया पर्र थि जौ कि मदमस्त अदा सें टेबल पऱ रखेहुए काढ़े कों पीरही थि औऱ आगेउस बेड कि ओरबढ़ गई थि
बाहर् जातेहुए गुरुजी औऱ बाकी केँ गुरुजन कि आँखों मे एक् पराजय कि लकीर थि औऱ कामया सें हारकर वोँ लोग बाहर् जारहे थें आज पहलीबार ऐसाहुआ थां सब नग्न आवस्था मे हि थें औऱ अपनी अपनी धोती कों हाथों मे लिए औऱ कुछ नें कमर मे सिर्फ़ बाँधभर लिया थां बाहर् निकलगये थें गुरुजी कि नजर एक् बारफिन सें अंदर कि ओरउठी थि
कामया उसबेड पर्र थि औऱ रूपसा औऱ मंदिरा केँ संगउन चार स्टड्स कों खींच घसीटकर अपनेऊपर लेने कि कोशिस मे थि उन स्टड्स कि भि हालत बुरी थि रूपसा औऱ मंदिरा उन्हे निचोड़ चुकी थि पर्र कामया कि उत्तेजक औऱ कामुख हँसी केँ संग-संग रूपसा औऱ मंदिरा कि भि हँसी कि आवाज़ उस कमरे मे गूँजरही थि गुरुजी कि अंतर आत्मा नें उन्हें झींझोड़ कररख दिया थां एक् झटके सें उन्होंने कमरे केँ दरवाजे कों बंदकर दिया थां औऱ बुझेमन सें अपने कमरे कि ओरचले गये थें सोचेरहे थें कि कहां सें कहां तक पहुँच गई थि कामया
उनकाकथन बिल्कुल सही थां ये औरात बहोत हि कामुक हैं उनका विचार बिल्कुल सही थां पर्र इतनी कामुक होगी इसका उन्हें भि पता नहि थां इस आश्रम मे बहोत सि महिलाए आई थि पर्र कामया बिल्कुल अलग थि खूबसूरत केँ संग-संग उसके जिस्म कि ख़्वाहिश भि कम नहि थि मर्दो केँ संगउसे खेलना आता थां उसे मर्दो कि जरूरत थि एक् नहि कईकई मर्दो कों वोँ एक् संगखुश कर सकती थि उन्होंने देखा थां वोँ महिला जोँ कि एक् नाजुक औऱ शरमाई सि होती थि कहां चली गई थि वोँ आज जौ कामया उनके आश्राम कि शान औऱ मालिकाना हक केँ संगकल इस आश्राम कि मालकिन होगी वोँ इतनी कामुक औऱ उत्तेजना सें भरी होगीये अंदाज़ा उन्हें नहि थां.
कामया अब पूरीतरह सें इस आश्राम केँ रंग मे रंग गई थि औऱ उनके द्वारा किएहुए एक्सपेरिमेंट्स पऱ भि वोँ खरी उतरी थि एक् कामुक औऱ सेक्स सिंबल बन चुकी थि वोँ गुरुजी कों आज भि याद थां जब कामेश केँ लिए कामया कां नाताआया थां तब परमेश्वर उनकेपास उसकी तस्वीर लेकरआया थां औऱ कुंडली औऱ कामया कि फोटो देखते हि वोँ जानगये थें औऱ कुंडली देखते हि वोँ अंदाज़ा लगा चुके थें कि ये लड़की एक् गजब कि सेक्स मेनिक हैं उसके अंदर कि महिला कों जगाने भर कि देरी हैं औऱ अपने लालच केँ आगे गुरुजी ढेर हौ गये थें उनकी ख़्वाहिश थि कि कामेश इस लड़की सें विवाह करे तोँ उन्हें भि औऱ स्त्री केँ समानइस लड़की कों भोगने कों मिलेगा औऱ आजइस लड़की नें तोँ कमाल हि कर दिया
गुरुजी जब तक अपने कमरे मे पहुँचे थें तब तक उनके दिमाग़ मे कामया हि छाइ हुइ थि उस कमरे मे क्याँ हुआ होगाये गुरुजी अच्छे सें जानते थें शायद हि वोँ स्टड्स अपनी रक्षा करपाए होंगे कामया नें छोड़ा नहि होगा अंतिम बूँद तक निचोड़ लिया होगाउन स्टड्स कां औऱ रूपसा औऱ मंदिरा भि तोँ थि वहीं। वोँ क्याँ कम हैं फुटबाल टीम भि कम पड़ेजाए उनकेलिए गुरुजी अपनीसोच मे खोएहुए बेड पऱ लेटगये थें
गुरुजी कि हर करवट पऱ वोँ अतीत मे खोगये थें हर पहलू उन्हें अपने पुराने दिन कि याद दिलारहे थें इस आश्राम कों बनाने मे उन्होने क्याँ जतन किया थां वोँ एक् अलग स्टोरी हैं वोँ मे बाद मे लिखूंगा पर्र इस किस्सा कां अंतयही हैं कि अब वोँ कामया केँ हाथों मे इस आश्रम कों सोपकर हमेशा केँ लिएजा रहे हैं सुभह सुभह उठ-ते हि वोँ इसकाम मे लग जाएँगे औऱ दोपहर तक सबकुछ उसके हाथों मे देकरइस देश केँ बाहर् चले जाएँगे.
सुभह सें हि आश्रम मे गहमा गहमी थि हरकोई दौड़रहा थां हरकोई ववस्था मे लगाहुआ थां सब कि नजरइस आश्रम कि सुंदरता पऱ थि हरकही फूल औऱ तरहतरह केँ सामानो सें सजाया जारहा थां कोई भि खाली याँ बैठाहुआ नहि थां दोपहर केँ 12 बजते बजते अश्राम मे भीड़लग गई थि आज बहोत भीड़ थि इतने मे लंबे सें कॉरिडोर मे दूर सें बहोत सि दासिया हाथों मे फूल कि ट्रेलिए हुए उभरी थि पीछे-पीछे वोँ 5 गुरुजन उसके पीछे गुरुजी औऱ उसके पीछे कामयानी देवी उसके आस-पास रूपसा औऱ मंदिरा औऱ उसके पीछे वोँ 4 स्टड्स थें फूलों कि बारिश केँ संग-संग औऱ खुशबू सें नहाया हुआ वोँ दल आरामसे मैंनडोर कि ओर आँ रहा थां सब एक् संग
कामयानी देवी कि जय केँ नारे लगनेलगे थें गुरुजी कि जय सें सारा आश्राम गूँज गय़ा थां गोल्डन औऱ सिल्वर मिक्स एक् साड़ी मे कामया बड़ी हि तनकरचल रही थि मैंनडोर पऱ आते हि गुरुजी सामने सें हटगये थें औऱ कामयानी देवी कों संसार केँ सामने पेश किया थां कामयानी देवी नें एक् बार भीड़ कि ओर देखा थां औऱ मुस्कुराती हुईँ अपनेहाथ कों उठाकर सब कों आशीर्वाद दिया थां
सारा आकाश कामयानी देवी केँ नारे सें गूँजउठा थां
कामया कि नजर सामने खड़ेहुए अपने पति सासू ससुरजी औऱ अपने मां बाप पर्र पड़ी थि मुस्कुराती हुई कामया उनकीओर देखती रही.
हाँ वोँ उसघऱ कि बहू थि, औऱ आजइस अश्राम कि मालकिन थि वोँ भि उसके पति औऱ सासू माँ ससुरजी कों अपनेघऱ मे रखने वाली थि
सच मे वोँ एक् बड़ेघऱ कि बहू थि, औऱ एक् बड़ा सां घऱ औऱ जोड़ लिया थां उसने। दोस्तो यहकथा इसतरह यही ख़त्म हुइ
औऱ मेरा सफ़र भि यही ख़तमहुआ जौ मैने आपसे वादा किया थां उसे पूरा किया औऱ आप् साने भि इसमे मेरा पूरा सहयोग किया उसकेलिए आप् सभी कां आभार.
ख़त्म
बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai - Kahani ab aur interesting hogi
एक् औऱ अच्छी कथा पूर्ण करने केँ लिए धन्यवाद यार
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