बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai – New Episode
कामया नीचे लेटेहुए अपने आपको व्यवस्थित करती हुईँ धीरे-धीरे सें गुरुजी कों एक् साइड किया औऱ उठकर फ्रेश मुद्रा मे एक् बार रूपसा औऱ मंदिरा कि औऱ देख जौ कि अब भि उन गुरुओं केँ गोद मे आटखेलिया कररही थि उसे हँसी कि आवाज़ अब भि उस कमरे मे गूँजरही थि
कामया- रूपसा मंदिरा चलोआओ
एक् हुकुम जैसी उसकी आवाज़ उस कमरे मे गूँजउठी थि थोड़ी सि शांति छा गई थि पर्र फिन
कामया- आप् लोग कों खाने कि टेबल पर्र मिलती हूं चलो आँ जाओ तुम् दोनों
कहती हुइ कामया उठकर अपने पेटीकोट कों झड़ती हुईँ खड़ी हुई थि पेटीकोट ब्लाउस अस्त व्यस्त थें पऱ कसेहुए थें अपनी स्थान पऱ साड़ी उठा-ती हूं कामया खड़ी हुइ औऱ साइड बाहर् कि ओरचल दि थि पीछे-पीछे वोँ दोनों भि करीब-करीब दौड़ती हुई कामया केँ पीछे हौ ली थि
कामया नें साड़ी नहि पहनी थि बल्कि सिर्फ़ कंधे पर्र रखती हुई कमरे सें बाहर् निकलआई थि बला कि चाल थि उसकी एक् कान्फिडेन्स थां एक् लचक थि एक् मटकती हुइ चाल कि मालकिन थि वोँ पीछेरही रूपसा औऱ मंदिरा भि उसकीचल कों देखकर एक् बारजल उठी थि कमरे मे पहुँचकर रूपसा औऱ मंदिरा भि जल्द सें अपने कपड़े ठीक करनेलगी थि पर्र
कामया नें अपने सारे कपड़े उतारदिए औऱ दासियों कों आवाज़ दि
कामया- चलो मुझेकुछ औऱ दो पहनने कों ये नहि औऱ कहती हुई बाथरूम मे घुस गई थि पीछे-पीछे दासिया भि दौड़ी थि अपनी रानी कों रेडी करने कों जब कामया बाहर् आई तौ टेबल पर्र बहोत सें कपड़े पड़ेहुए थें उन मे सें कामया नें घाघरा चोली चुना थां लाल पीले औऱ नीलेरंग कि मिक्स्ड चोली थि जोँ कि सिर्फ़ डोरी सें बँधाहुआ औऱ घाघरा घुटनों सें थोडा नीचेआता थां बिना ब्रा केँ कामया नें वोँ पहना थां पैंटी याँ कहिए थॉंग पहना थां औऱ फिन सें एक् कयामत सि सजकर रेडी थि कामया कों देखकर वहां खड़ाहर कोईबस देखता हि रह गय़ा थां रूप कि रानी तोँ वोँ थि हि पर्र एक्-एक् करके जौ ड्रेस वोँ चुनती थि वोँ कमाल कां लगता थां उसपर रूपसा औऱ मंदिरा तौ अपनीइस मालकिन कि फॅन थि हि औऱ अब तौ सारी दुनियां भि उसकीफॅन होँ जाएगी
कामया जबसजकर सजधजकर हुइ तौ एक् कयामत सें कम नहि लगरही थि जिस्म केँ संग-संग अब उसकी आखें होंठ औऱ हरअंग कुछ कहता थां चलने सें जोँ लचक पैदा होती थि एक्-एक् अद्भुत अनुभव थां देखने वाले केँ सीने कों चीरकर रखदेऐसी बात थि उसमें हरअंग सें सेक्स झलकता थां हरअंग एक् निमंत्रण देता थां हरअंग सामने वाले कों अपनीओर खींचता थां
कामया केँ रेडी होते हि रूपसा औऱ मंदिरा भि उसकेसंग खाने केँ रूम कि ओर बढ़े थें उन्होंने भि चेंजकर लिया थां ल़हेंगा औऱ लाचा पहना थां एक् दूसरे कों मात देने कि मुद्रा मे थें तीनों पऱ कामया तोँ कामया हि थि एक् कान्फिडेन्स थां एक् विस्वास थां औऱ एक् अहम थां उसके चहरे पर्र वोँ अबइस आश्राम कि मालकिन थि औऱ येसभी उसकेदास दासिया सुप्रीमो वाला कान्फिडेन्स अगर किसी केँ अंदर आँ जाए तोँ बनीबात हैं कि उसके चहरे पर्र वोँ बात दिखती हैं वहीबात चलते वक़्त कामया केँ चहरे पऱ दिखरही थि
खाने केँ कमरेजब वोँ पहुँचे तोँ गुरुजी केँ संगसब लोग मौजूद थें अपने अपने चेयर पऱ बैठेहुए कामया कां हि वेटकर रहे थें कमरे मे जाते हि
कामया- सारीआई अमलेट
औऱ एक् मादक मुस्कुराहट बेखेरती हुई गुरुजी केँ पास जाकर खड़ी होँ गई थि गुरुजी जोँ कि चेयर पऱ बैठेहुए कामया कों हि देखरहे थें अपनी बाँहे फैलाकर उसे अपनी आगोश मे लेँ लिया थां अपनी बाँहे फैलाकर उसकीकमर केँ चारो औरओर घेरा बनाते हुएउसे अपनेपास खींचते हुए उसकीकमर पऱ एक् लंबा सां चुंबन जड़ दिया थां
गुरुजी- आओसखी बहोत सुंदर लगरही हौ औऱ क्याँ बना दिया हैं तुमने रूपसा औऱ मंदिरा कों
कामया- हिहीही ये तौ कुछ भि नहि हुआ गुरुजी अभि आप् देख्ना मेरे संग-संग हमेशा अब इन्ही दोनों कों रहना हैं जोँ आपने रेडी किया हैं बसउसे थोडा सां सँवार रही हूं
कहती हुईँ कामया थोडा सां झटके सें अपनेपेट कों गुरजी केँ हाथों पर्र फिन सें सटा दिया थां सामने बैठेहुए धरम गुरुलोग एक् लालायत नज़रों सें कामया औऱ संगआई रूपसा औऱ मंदिरा कि ओरदेख रहे थें कामया थोडा सां मचलते हुएआगे बढ़ी थि औऱ अपने हाथों सें एक्-एक् करउन गुरु लोगों केँ सिर कों सहलाती हुई आगे बढ़ती हुइ अपने चेयर पर्र बैठ गई थि बैठना क्याँ अपनेबदन कां हर हिस्सा दिखाने कि होड़ मे लगी थि कामया कि चोली थि तोँ टाइट औऱ उसमें सें बाहर् निकलते हुए उसके चुचे एक् गजब कां नजारा पेशकर रहे थें
कामया बैठकर खाने मे जुट गई थि पऱ धरम गुरुओं कि नजर उसके जिस्म कों भेदने मे लगी थि कामया जानती थि मंदमंद मुस्कुराती हुईँ खातीरही औऱ उनधरम गुरुओं कों अपनी औऱ आकर्षित करतीरही जानती थि कि खाने केँ बाद क्याँ होगा वोँ भि सजधजकर थि
कामया- तुम् दोनों भि खालो रूपसा मंदिरा औऱ जल्दआओ रात अभि बाकी हैं
रूपसा - जी हिहिहीः
करती हुईँ खाने कों चली गई थि कमरे मे बस एक् महिला औऱ 6 हवस केँ पुजारी रहगये थें
खाने केँ बाद एक् बारफिन वहीखेल कि तैयारी थि सब मे रात केँ खाने केँ बाद पूरामहल शांत सां होँ गय़ा थां सबसेऊपर केँ माले मे येखेल खेला जानां थां जौ कि कामया कां निजी कक्ष होगा कामया केँ कुछ चहेते औऱ खास लोगों कों हि एंट्री होगी यहां बाकी किसी कों भि नहि आने दिया जाएगा इस फ्लोर पऱ उसकेघऱ वाले कों भि नहि यहां कामयानी देवी अपनेदस दसियो केँ संग रहेंगी जोँ प्राइवेट होगाबस वहीये रंग जमना थां
एक् बड़े सें कमरे मे धरम गुरुलोग औऱ गुरुजी भि संग बैठेहुए हुक्का कां सेवेन कररहे थें शायदकोई नशा भि थां धुँआ औऱ एक् अजीब सि महकउस कमरे मे फेल गई थि पर्र कामया कों कोईफरक नहि पड़ता थां एक् उत्तेजित औऱ मोहक माहॉल सां लगा थां उसे कामया अपने दोनों दासियों केँ संगउस कमरे मे एक् मटकती सि चाललिए दाखिल हुइ थि होंठों पऱ मादक मुश्कान औऱ आखों मे निमंत्रण लिएआज कि रात कों स्वपनीले रंगों मे उतारने कों रेडी थि वोँ कमर कि लचकऐसी थि कि देखने वाले देखते रहगये थें आखों कि गहराई इतनी थि कि दिल कों चीरकर रखदे औऱ होंठों कि लालिमा इतनी थि कि
कोई भि मर्द अपने कों रोकसके मुश्किल थां लहराती हुईँ कामया रूम केँ बीचो बीचो मे रखेहुए उसगोल बेड कि ओर बढ़ी थि रूपसा औऱ मंदिरा भि उसकेसंग थि कामया बेड केँ पास पहुँचकर नीचे झुकी थि औऱ एक् स्विच कों ओन किया थां बहोत हि धीरे-धीरे सें वोँ बेड घूमने लगा थां पाँचो धरम गुरु औऱ गुरुजी कां पूरा ध्यान कामया कि ओर हि थां रूपसा औऱ मंदिरा मूडकर उनकीओर हि देखरही थि जैसेकह रही हौ आओ औऱ देवी कां भोग लगाओ
बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai – New Episode
हल्का सां कामया उसबेड पऱ चढ़ गई थि औऱ एक् घुटनों कों मोड़कर धीरे-धीरे सें पीठ केँ बललेट गई थि अपने हाथों कों अपने आस-पास फैलाकर घूमते हुएबॅड पऱ कामया लेटेहुए अपने जिस्म कां दर्शन करारही थि उन गुरुओं कों घुटना मुड़ा होने कि वजह सें जाँघो केँ अंदर तक कां कुछ हिस्सा दिखरहा थां पऱ बाकी अंधेरा थां कामया जानबूझ कर अपनी एक् केँ बाद एक् जाँघो कों मोड़कर उन्हें उत्तेजित करने कि कोशिश कररही थि याँ उत्साहित करने कि कोशिश कररही थि रूपसा औऱ मंदिरा खड़ी हुइ गुरुजी कों ओरचल दि थि बेड पर्र पड़ी हुईँ कामया अब भि वैसी हि थि तब तक रूपसा औऱ मंदिरा गुरुजी लोगों तक पहुँच गई थि औऱ हाथों औऱ आखों सें इशारे सें बेड कि ओर चलने कां इशारा कररही थि जब तक वोँ गुरुलोग बेड केँ पास पहुँचे तौ कामया एकदम स्थिर थि नां कोई हलचल औऱ नां कोई घराहट बस प्रतीक्षा थां अपने जिस्म केँ खुश होने कां अपने जिस्म केँ हरअंग कों मसलने देने कां अपनीहर सेक्स कि ख़्वाहिश पूरीकर लेने कां मुस्कुराती हुई कामया नें अपने सीने पर्र पड़ी हुईँ चुननी कों एक् ओर उछाल दिया औऱ मुस्कुराती हुई उस घूमते हुएबेड पर्र सें अपनी बाँहे ऊपरकर दि कि आओ औऱ इस जिस्म सें खेलो औऱ खुश होँ जाओ याँ खुशकर दो
एक् गजब कां नजारा थां घुटनों तक उसकी घाघरा उठ गय़ा थां बल्कि कहिए जाँघो तक पहुँच गय़ा थां पेटसाफ औऱ चमकदार सीने पर्र कसाहुआ ब्लाउस औऱ उसके अंदर सें बाहर् कि ओरदिख रहे मस्तगोल गोल चूचियां एक् गजब कां उत्साह पैदा करने केँ लिए बहुत थें एक्-एक् करसब गुरुओं नें अपने हाथों कों आगे बढ़ाकर कामया केँ हाथों कों पकड़ने कि कोशिश कि पर्र घूमते हुएबेड पर्र वोँ लेटी हुई उनके सामने सें निकल गई थि बस एक् स्पर्श सां हि होँ पाया थां मुस्कुराती हुइ कामया लेटी हुइ एक्-एक् कर सामने सें गुजरते हुएउन गुरु लोगों कि आखों मे उत्तेनजा औऱ भूख कों साफदेख सकती थि
अपने हाथो सें छूती हुइ कामया एक् बार उनके सामने घूम गई थि, पऱ कोई भि उसेरोक नहि पाया घूमते हुएबेड पर्र लेटी कामया कि बाँहे अब थोडा सां औऱ ऊपर कि ओरउठी थि जैसेकह रही होँ आओ रुके क्यूं होँ
सबसे पहले गुरुजी आगे बढ़े थें औऱ झट सें बेड पर्र चढ़ने लगे थें पऱ घूमते हुएबेड पर्र स्थिर नहि रहसके औऱ रुकगये थें सामने सें घूमते हुए कामया कि अध खुली जाँघो कों देखकर हि शांत हौ गये थें फिन सें उसके चहरे कों अपनेपास आने कि राह देखते हुए अपने हाथों कों बढ़ाकर उन्होंने भि अपनी उत्तेजना कों दिखा हि दिया थां अपनीसखी कि गोरी गोरी जाँघो कों स्पर्श करने कि चाह कों वोँ रोक नहि पाए थें कोमल औऱ बेदाग गोरी गोरी जाँघो कां एक् हल्का सां स्पर्श भरपाए थें पास खड़ेहुए बाकी केँ गुरुओं कां भि यहीहाल थां एक्-एक् करके कामया कों किस करने कि कोशिश करते औऱ अपने हाथों सें उसके घूमते हुएबदन कों छूने कि ललक उसके चहरे पऱ साफ देखीजा सकती थि कामया कि एक् मोहक औऱ मादक हँसीउस कमरे मे गूँजउठी थि जबकोई थोडा सां साहस करकेकोई नईबात याँ कोईआगे कि ओर बढ़ता थां सबसे पहलेबेड पऱ चढ़ने वालों मे थें एस
खुलेबाल औऱ दाढ़ी कों लिए वोँ झट सें बेड पर्र चढ़गये थें औऱ कामया केँ पेट केँ पासबैठ गये थें औऱ नीचेझुक कर उसकी गहरी नाभि पर्र अपने होंठरख दिए थें मचलउठी थि कामया औऱ हँसी केँ संगसंग एक् लंबी सि अंगड़ाई ली थि औऱ घूम गई थि बाकी केँ लोग भि एस कि देखा देखीझट सें बेड पऱ चढ़गये थें अब तोँ जैसे, खेल कां चालू होनातय थां पर्र कामया कोईऐसी वैसी खिलाड़ी नहि थि आज एक् कान्फिडेन्स औऱ एक् उत्साह थां उसके अंदर एक् गजब कां आत्मविश्वास थां उसके अंदर अपने चारोओर दाढ़ी औऱ खुले बालों केँ इंसानी जानवरों कों देखकर एक् बार तोँ लगा थां कि भूतों केँ घऱ मे फस गई हैं कामया पऱ उसके मचलने कां औऱ अंगड़ाई लेने केँ तरीके सें औऱ जिस तरीके सें अलट पलटकर अपने जिस्म केँ दर्शन देरही थि कामया उससे तोँ लगता थां कि गुरु लोगों सें अधिक कामया कों उनकी जरूरत हैं
हरअंग कुछकह रहा थां हरअंग उन बंधन सें बाहर् आने कि कोशिश करता थां पेट पऱ आँ चुकाएस अपनीजीब कों लगता थां कि उसकी नाभि कि गहराई तक उतार देना चाहता थां औऱ बाकी केँ लोग भि उसकेऊपर झुकेहुए थें एक्-एक् कर अपने हिस्से मे आए उसके जिस्म केँ उस हिस्से कों अपनीजीब औऱ होंठो सें गीलाकरने मे लगे थें मचलती हुईँ कामया इधर सें उधर होँ रही थि किसी नें भि उसे रोका नहि थां बस हिस्से मे आएबदन केँ उसअंग कों प्रेम कररहे थें चाटरहे थें उसमें सें शहद चूसने कि कोशिश कररहे थें मचलने सें अपने होंठों कों अलग होते हि वोँ थोडा सां आगे बढ़ते औऱ फिन सें अपने होंठों कों उसके जिस्म केँ उस हिस्से पऱ रख देते अपने हाथों कों उसकेबदन पर्र घूमने सें भि नहि रोके थें वोँ लोगहर हिस्से कों छू लेने कि कोशिश कररहे थें उन लोगों मे घूमते हुएबेड सें बाहर् खड़ी हुईँ रूपसा औऱ मंदिरा भि कुछकम नहि थि एक्-एक् करके सामने सें गुजररहे गुरुलोगों केँ कपड़े कों खींचती थि वोँ औऱ उतारने कि कोशिस मे लगी थि बहुतहद तक वोँ सफल भि थि कामया उन्हें दिख नहि रही थि पऱ उत्तेजित आवाजें उनके कानों मे गूँजरही थि उत्तेजित आवाजें नां सिर्फ़ कामया कि बल्कि उन गुरु लोगों कि भि थि
चूमने कि आवाज़ चाटने कि आवाज़ औऱ फिन तेज-तेज सांसें लेने कि आवाज़ उस कमरे मे गूंजने लगी थि घूमते हुएबेड कां हर हिस्सा अबभरा हुआ लगता थां बीच मे मचलते हुए कामया कां जिस्म थां औऱ तड़पते हुए गुरुजन
कामया कि चोली केँ अंदर एक् संग दो-दोहाथ घुसेहुए थें जाँघो कों पूराकवर लिया गय़ा थां चार याँ छःहाथ थें पता नहि पऱ दो याँ कभी एक् चहरा झुकाहुआ दिखता थां मचलती हुईँ कामया कबपलट गई पता हि नहि चला अपने हाथों कों घसीटकर अलग करतेहुए अपने सामने आएइसनये तरफ कि हिस्से पऱ फिन सें टूट पड़े थें गुरुजन
कामया- हिहहिहीही उूुुुुुुुुुुउउम्म्म्मममममममममममममम आआआआआआह्ह ईईईईईईईईईईईईईईईई धीरीईईईई
उूुुुुुुुुुुुउउफफफफफफफफ्फ़
बाकी सिर्फ़ सांसों कि आवाज़ थि उस कमरे मे एक् संग बहोत सि साँसे भागने सें याँ हाँफने सेजो भारी हुइ साँसे गर्म औऱ उत्तेजित सांसों कि आवाज़ बीचबीच मे कामया औऱ कहीकही रूपसा औऱ मंदिरा कि मिली जुली हँसी कि आवाज़ उूउउफफ्फ़ आप् सोच सकते हैं कि क्याँ नजारा होगा
कामया ईईीीइसस्स्स्स्स्सस्स उतारदो नां चोली कों हिहिहीः आआआआआह्ह
औऱ फिन एक् केँ बाद एक् उंगलियां उसकी चोली केँ पीछे बँधी हुई डोरी कों खोलने मे जुट गई थि एक्-एक् करतेहुए हर डोरी कों उसकेलूप सें बाहर् निकाल रहे थें पऱ कामया केँ जिस्म मे स्थिरता नहि थि बल्कि मचलने सें हरबार उनके हाथों मे आई डोरीछूट जाया करती थि हँसती हुईँ कामया इधर-उधर होती हुइ कभी किसी केँ घुटनों पऱ अपना चहरारख देती तोँ कभी किसी केँ होंठों कों अपने होंठों पऱ रखने देती अपनी जाँघो पऱ घूमते हुए हाथों कां ध्यान रखा थां उसने अपनेबदन कों मोड़कर हरअंग कों छूने देना चाहती थि वोँ कामया कां जिस्म उसबेड पर्र मचलरहा थां एक् केँ बाद एक् हाथ उसके जिस्म पऱ फिसलकर हट जाया करते थें औऱ एक् खिलखिलाती हुइ हँसीउस कमरे मे गूँज जाया करती थि कामया कि चोली तौ पीछे सें खुल चुकी थि पऱ अब तक कंधे पर्र हि टिकी हुई थि पीठ केँ खाली होते हि कई होंठ एक् संग उसके गोटी औऱ कोमल औऱ चिकनी पीठ कां रस पीने कों झुके थें औऱ कामया एक् बारफिन खिलखिलाती हुईँ हँसती हुई मचलउठी थि
बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai – New Episode
कामया कि हरकतउन गुरु जनों कों पागलकर देने कों बहुत थि अपने हाथों कों इधर-उधर घुमाते हुए वोँ लोग कामया केँ हरअंग कों छूकर औऱ मसलकर देखरहे थें पीछे खड़ेहुए घूमते हुएबेड केँ बाहर् रूपसा औऱ मंदिरा अब तक उन गुरुजन कि धोतीअंग रखा औऱ सबकुछ घसीटकर उतर चुके थें करीब नंगे सें वोँ गुरुजन कामया देवी केँ ऊपर झुकेहुए अपने जिंदगी कां मजा लें रहे थें कामया कां घाघरा उसकेपेट तक आँ गय़ा थां औऱ नीचे पहनेहुए तोंग केँ बीच मे फँसेहुए उसके गुप्त अंगो कों थोडा बहोत हि छुपापा रहा थां
कामया केँ पलटने सें एक् बारफिन ऊपर बैठे गुरुजन नें अपनाहाथ उसकी चोली केँ अंदर घुसा दिया थां
कामया नें अपनी बाँहे ऊपर करतेहुए
कामया- इसे उतारदो अच्छा नहि लगता किसी नें देर नहि कि एक् हि झटके सें उतर गई थि उसकी चोली अपनीकमर कों उँचा करतेहुए
कामया इसे भि आआआआअह्ह प्लेआस्ीईईईईईईईई
कहती पऱ बीच मे हि उसकी चुचियों पर्र दो जनों केँ कब्जा कर लिया थां औऱ अपने होंठों कों उसके निपल्स पऱ रखते हि उसकेमुख सें निकला थां नीचे केँ लोगों नें भि देर नहि कि औऱ जल्द हि कामया सिर्फ़ तोग मे बेड पऱ मचलती हुईँ सि लेटी थि
गुरुजन अपनीहवस कि पूर्ति केँ लिए कामया केँ बदन कों जहांमन करता थां वही छूकर औऱ चूमकर उसकेबदन कों गीलाकर रहे थें लेटी हुई कामया केँ हाथों मे एक् केँ बाद एक् करतेहुए दो लिंग आँ गये थें कामया नें अपनीरूम कों उँचा करतेहुए अपनी तोंग कों भि उतारने कां इशारा कर दिया थां अपने हाथों मे कसेहुए दो लिंग किसके थें पता नहि थां पर्र थें मसबूत औऱ टाइट एकदम सजधजकर एकदम गर्म एक् मीठा सां एहसास उसके अंदर तक उतर गय़ा थां एक् अंजानी खुशी केँ संग-संग एक् अजीब सि खुशी औऱ एक् अंतरात्मा कि संतुष्टि कि चाहत उसके अंदरअब औऱ तेजी सें जीवित हौ उठी थि कामया केँ हाथों मे आएहुए उन लिंगो कों वोँ खींचने लगी थि पास बैठेहुए गुरुजन नें शायदस औऱ एच थें वहा एक् बार उसकीओर देखा जौ कि उसके चुचियों पऱ झुकेहुए थें औऱ एक्-एक् कर एक्-एक् चुंबन लिया थां औऱ सरककर उसके चेहरे तक आँ गये थें उन्हें पता थां कि आगे क्याँ सँजोरखा हैं देवी नें दोनों लिंगो कों अपने चहरे केँ सामने लाकर एक् नजरभर केँ देखा थां उसने औऱ झट सें अपनीजीब निकाल कर हल्के सें उन्हें छुआ थां
एस- उूुुुुुउउम्म्म्ममममममममममममम चूसो देवी हम् बस रेडी हैं
एच- जल्दकरो देवी
कामया- हिहिहीः उउउम्म्म्मम छमछम उूउउम्म्म्म करती हुई उसकेलाल लाल होंठों केँ अंदर-बाहर् होनेलगे थें वोँ दोनों लिंग कामया केँ सिर केँ पास शायद गुरुजी हि थें जौ कि अपने हाथों कों बढ़ाकर उसके चुचों तक जाते थें अपनी आखों केँ सामने कामया कों इसथार सें लिंग कों चूसते देखकर उनसे भि रहा नां गय़ा अपने आपको थोडा सां उठाकर अपने लिंग कों भि उसके सामने लटका दिया थां कामया हँसती हुइ बिनाउसे पकड़े अपने होंठों कों खोलकर एक् केँ बाद एक् करतेहुए तीन लिंगो कों एक् केँ बाद एक् करतेहुए चुस्ती जारही थि पैरों केँ बीच मे गंगा जमुना बहरही थि वहां केँ हाल औऱ बुरे थें तीनों एक् केँ बाद एक् करके उसकी योनि केँ अंदर उंगलियों केँ संग-संग अपनीजीब कों भि डाल देते थें औऱ इतनाजोर सें चूसते थें कि कामया कि सिसकी निकल जाती
कामया आआआआआआआह्ह उम्म्म्मममममममम
करती हुईँ उन लिंगो पर्र अपने दाँत तक गढ़ा देती थि कामया कि सांसें अब नियंत्रण सें बाहर् थि एक् केँ बाद एक् अटेकइस तरह सें होँ रहे थें कि उसेरहा नहि जारहा थां
पऱ कोई भि उसके अंदरअब तक नहि उतरा थां कामया नें अपनी जाँघो कों पूराखोल दिया थां पर्र नीचे बैठेकर जाई औऱ एम शायद अपने होंठों सें हि उसेखुश करने कि जिद मे थें पऱ कामया अपनीकमर कों उठाकर उन्हें मूक निमंत्रण देरही थि पऱ कोई नहि समझा
कामया- उूुउउफफफ्फ़ जल्दकरो प्लेआस्ीईईईईईईई अंदरकरो प्लेआस्ीईईईईई
कामया कां कहना थां कि होड़लग गई थि नीचे कि औऱ एम सबसे पहले जौ कि बीच मे हि थां एक् झटके सें बीच मे आया पर्र उसके लिंग केँ घुसने सें पहले हि जाई नें उसे धकेलते हुए एक् तरफ किया औऱ जल्द सें कामया कि कमर कों पकड़ लिया औऱ उस पर्र लेट गय़ा थां कामया अपने हाथों मे पकड़े हुए लिंग कों अपने गालों मे घिसते हुए गुरुजी केँ हवा मे लटकेहुए लिंग कों चूसरही थि झटके सें अपनीकमर कों उछालकर अपने योनि कों उसके लिंग तक लें गई थि कामया केँ ऐसा करनेभर सें झट सें जाई कां लिंग उसकी योनि एक् अंदर हल्के सें प्रवेश कर गय़ा थां
कामया ऽ, उूुुुुुुुुुुुुुउउम्म्म्ममममममममममम आआआआआआआआआअह्ह औऱ जोर सें जल्दकरो औऱ तेज
ऊपर लेटेहुए जाई तोँ जैसे पागल हि होँ उठा थां इसतरह सें उत्तेजित आवाज़ मे शायद हि किसी नें उसे इतना बड़ा निमंत्रण दिया होगा वोँ जल्द मे थां संग मे बैठे लोगों कों वोँ भि भूल गय़ा थां उसेयाद थां तौ सिर्फ़ कामयानी देवी कां आग्रह
वोँ तेजी सें अपनीकमर चलाता जारहा थां औऱ कामया कों कसकर अपनी बाहों मे भरने कि कोशिश करताजा रहा थां पऱ कामया तौ सबकी थि वोँ एक् अकेले कि केसेबन सकती थि
वोँ अपने हाथों मे लिए लिंगो पर्र भि पूरा ध्यान देरही थि औऱ अपनी टाँगों कों उठाकर नीचे बैठेहुए गुरुजन कों भि खुश करने कि कोशिश कररही थि जोँ उनके हिस्से मे आई हुइ टांगों पर्र हि वोँ खुश थें औऱ अपने हाथों सें औऱ होंठों सें जितना होँ सकेउसे प्रेम कररहे थें
कामया- औऱ करो औऱ तेज़-तेज़ सें प्लेऐसीए आआआआअह्ह उूुुुउउम्म्म्ममम
लिंगो कों चूसती हुईँ कामया केँ होंठों सें बस इतना हि निकला थां
जितना तेजजाई चलरहा थां उससेकही अधिक तेजी सें कामया अपनीकमर उच्छाल रही थि कामया कां हर झटकाजाई केँ झटके सें ज़्यादा तेज औऱ अधिक जोरदार होता थां जाई कि तेज चलती साँसे इसबात कि गवाह थि कि वोँ ज़्यादा देर तक कामया कों खुश नहि कर पाएगा कामया आह भरती हुई अपने सामने आएहर लिंग कों पूरा सम्मान देरही थि
इतने मे शायद, जाई झड़ने वाला होगा एक् जोरदार तरीके सें उसने कामया कों अपनी बाहों मे जकड़ लिया थां औऱ उन लिंगो केँ बीच मे हि उसने कामया केँ होंठों तक पहुँचने कि कोशिश करतेहुए उसके होंठों कों कसकर अपनी होंठों मे कस लिया थां कामया नें भि थोड़ी देर केँ लिएउन लिंगो कों हटाया थां पऱ छोड़ा नहि थां ऊपर लटके लिंग कों भि थोडा सां पीछे हटते देखा थां पर्र जाई केँ सिर सें टकरारहा थां औऱ जाई अपनी बाहों मे भरेहुए कामया केँ होंठों कों चूस्ते हुएझड़ गय़ा थां
बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai - Kahani ab aur interesting hogi
superb update
Ankit wrote: ↑07 Jul 2017 17:42superb update Shuqriya mitr
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