सिफली अमल ( काला जादू ) completee - Baji Ki Chudai - Real Story Continue Part 1
सिफली अमल ( काला चमत्कार )
यह किस्सा पूरी तरीके सें काल्पनिक हैं इस स्टोरी कां किसी केँ संगकोई संबंध नहींइस स्टोरी कों रियल समझने कि भूल नाँ करे.यह सिर्फ़ एंजाय्मेंट केँ लिए लिखी गयीँ, हैं बस एंजाय करे इन्सेस्ट हेटर्स प्ल्स इफ़यू हेट इन्सेस्ट प्ल्स डॉन'ट विज़िट आप् अपना कीमती समय बर्बाद करेंगे यहकथा किसी घटना कां दावा नहीं करतीइस किस्सा केँ कुछ एलिमेंट्स बहोत शॉकिंग हैं बट हॉरर इंट्रेस्टेड रीडर्स दिल कों मज़बूत कर लेना
कथा मे लिखाहर पात्र सिर्फ़ मनोरंजन केँ लिए लिखा हैं इसकाकोई असल ज़िंदगी सें मतलब नहीं.इस किस्सा मे लिखेकुछ चीज़ें रीडर्स कों शॉक भि कर सकते हैं इसलिये बड़े अहेतियात औऱ सावधानी सें पढ़ें औऱ यह नाँ सोचे कि यहसभी रियल हैं.सिफली अमल सिर्फ़ गुनाह कां काम हैं ऐजअ राइटर आइआम टेल्लिंग माइऑल रीडर्स जस्ट एंजाय दिस कहानी डॉन'ट बिलीव ऑनइट
दुनिया मे अगर मे किसी कों सच्चे दिल सें किसी कों चाहता थां तोँ वोँ थि मेरी इकलौती बाजी शीबा.हम् दोनो केँ बीच बचपन सें हि भइया बहन सें ज्यादा घनिष्ट प्रेम थां.औऱ यहीवजह थि कि हम् दोनो एक् दूसरे सें एक् सेकेंड केँ लिए भि अलग नहीं होँ पाते.बचपन मे हि संगसंग खेले औऱ संग बड़ेहुए जबकि मेरी बाजी कि उमर मुझसे करीबन २साल बड़ी थि.बाजी मेरा हमेशा ख्याल रखती माँ औऱ पिताजी जब नहीं होतेतब वही मुझे संभालती खानां देती.हमारे इस प्रेम कि चर्चा बापू औऱ मां भि करते थें मगर उन्हें नहींपता कि हम् दोनो केँ बीच एक् नाता औऱ जल्द हि कायम होने वाला हैं
धीरे-धीरे धीरे-धीरे बाजी तकरीबन २३साल कि होँ चुकी थि जबकि मे अपने 21 केँ बीच मे हि थां.हम् लोग मां बापू कि आब्सेंट मे हि घऱ मे बनी बुखारी कि छत केँ नीचे कच्ची ईंट वाली बाथरूम मे एक् संगनहा लेते थें मेरी बाजी कि बुर पर्र काफ़ी घनेबाल उगेहुए थें जबकि मेरे लन्ड पऱ भि जंगलउगा हुआ थां.मेरा लन्ड उससमय खड़ा हौ जाता थां औऱ बाजी कि गान्ड कों देखकर हिलोरे मारने लग जाता.बाजी नें कहा कि यहसभी नॉर्मल हैं क्यूंकी वोँ जानती थि कि नाँ उनमें शरम औऱ हया कां कोई परदा थां औऱ नां हि मेरे अंदर.धीरे-धीरे धीरे-धीरे गाँव मे रहकर हम् अपनेघऱ कों अच्छा संभाल लेते थें बापू भि पूरी मेहनत करते औऱ शहर मे हि कमाने कों चले जातेवहा उनको अच्छा ख़ासा वेतन मिलता थां
इधर हम् औऱ माँ भि ख़ुदग़र्ज़ थि हम् पर्र अधिक ध्यान नहीं देती थि.हम् कबघऱ सें निकलते हैं कहां जाते हैं? इस्पे भि प्रश्न नहीं करती थि.औऱयही वजह थि कि यह आज़ादी हमारे रिलेशन्षिप कों बहोत आगे बढ़ाने वाली थि औऱ जल्द हि हम् दोनो केँ बीच वोँ हुआ जोँ शायद लोगो कि नज़रों मे एक् गुनाह होँ पर्र हम् दोनो केँ लिए एक् दूसरे कि ज़रूरत जिस्मानी तालुक़ात.नाँ बाजी अपनी बुर कि गर्मी कों शांतकर पाती औऱ नां मे अपने लन्ड कि हवस कों काबूकर पाता.हम् दोनो एक् दूसरे कों किस करते बुर पे लन्ड रगड़ते औऱ उनकी गान्ड केँ छेद पे लन्ड मलके थोडा सां घुसा देनायही सभी हमारे अकेले पन कां खेलबन गय़ा थां.औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे यहखेल चुदाई मे तब्दील हौ गय़ा बाजी कि सहेलिया गाओं कि अक्सर गंदी गंदी चीज़ों औऱ लौन्डो कि हि बात करती थि.औऱइधर मेराकोई साथी नहीं थां काम केँ बाद सीधे विद्यालय औऱ वहा भि पढ़ाई मे हि मन लगता थां फिन बाकी वक्त याँ तौ साइबर केफे जौ थां छोटा सां वहा जाके ब्लू फिल्म देख्ना औऱ तरहतरह कि अप्सराओं केँ नाम कि मूठ मारना यहीआदत थि औऱ बाद मे तोँ बाजीहवस पूरीकर हि देती थि.ब्लू फिल्म औऱ सेक्स रिलेटेड चीज़ों कों जानते जानते मे पूरापका आमबन गय़ा थां गाँव सें सटे टाउन सें जाके सस्ते मे कॉंडम मिल जाता थां केमिस्ट सें लेके.औऱ फिन बाजी कों चुपके चुपके जंगल याँ फिनखेत मे लेँ जाकेचोद देता
बहोत मजाआता थां.औऱ शायदआज भि वहीमजा मिलने वाला थां। पढ़के घऱ लौटा हि थां.कि मां नें आवाज़ दि
मां : अर्रे बेटा शीबा अकेले खेत पऱ चली गयीँ, सब्ज़िया तोड़कर लाने तूँ भि जाके सहायता करदे
मे : ठीक हैं माँ (मैने कपड़ों कों बदला औऱ पाजामा औऱ शर्ट मे हि खेतों कि तरफ रवाना हौ गय़ा बापूउस वक्तशहर मे थें)
जल्द हि कच्चे रास्ते सें बस्ती सें निकलते हुए खेतों मे पहुचा.तोँ शीबा बाजी अपने मुँह पे वॉटरपंप सें पानीमार रही हैं.मे उसके लगभग गय़ा औऱ ठीक उसके पीछे खड़ा होके अपना लन्ड उसकी गान्ड केँ बीचफसि सलवार केँ भीतर लगाया औऱ झुककर उसकी चुचियों कों दबाने लगा."उफ़फ्फ़ हाीइ म्म्ममममम तूँ नहिी सुधरेगा".मेरी बाजी अपनी फीके चेहरे सें मेरीओर देखा औऱ हँसने लगी हम् दोनो भइया बहन खेत मे पॅकडम पकडायि खेलने लगेफिन मैने बाजी कों अपनी गिरफ़्त मे खींच लिया औऱ उनके होंठो सें होंठलगा केँ पागलों कि तरह चूसने लगा.बाजी भि अपनी गीली ज़ुबान मेरे मुँह मे डाल केँ चलाने लगी हम् दोनो एक् दूसरे कों पागलो कि तरहकिस करते रहे."उम्म आहह-आहह सस्सचल उस साइड अभि इतनी कड़कधूप मे कोई आएगा नहीं".बाजी नें कान मे फुसफुसाया
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फिन क्याँ? हम् भइया बहन बड़े बड़े गन्ने केँ खेतो केँ भीतरगये औऱ एक् खाली स्थान पे सुखीघास पे मैने बाजी कों बैठाया औऱ उनकी सलवार कां नाडा खोला.अपना पाजामा नीचे किया औऱ उनकी जंपर कों भि उपरकर दिया औऱ ब्रा सें हि चुचियों कों बाहर् निकाल केँ उसके मोटे ब्राउन निपल्स कों चूसने लगा.बाजी असल मे गोरी बहोत हें औऱ उनके निपल्स बहोत मोटे हैं चुचियाँ भि काफ़ी थुल्लि थुल्लि सि निकली हुई हैं औऱ आँख भूरी सि हें.मे बाजी केँ होंठो कों पागलो कि तरह चूमते हुए उनके निपल्स कों चूसने लगा.बाजी कां एक् हाथ मेरे लन्ड पे सख्ती सें आगे पीछेचल रहा थां.मेरा बंबू बहोत मोटा होँ गय़ा थां.मैने बाजी कि ज़ुल्फो कों हटा केँ उनकेगले कों चूमा औऱ एक् प्रेमी कि तरह उन्हें लिटा केँ उनके होंठो कों फिन चूसने लगा."इसको भि चूस".बाजी नें दूसरी चुचि कों मेरे मुँह सें सटाते हुएकहा
मैनेउस चुचि कों भि ज़ोर ज़ोर सें मसला औऱ उसेखूब चूसा.बारी बारी सें दोनो चुचियों कों चूसने केँ बाद बाजी कों हान्फ्ते पाया.औऱ फिन उनकी गोरी टाँगो कों थोडा फैलाया औऱ उसमें सें महकती नमकीन छोड़ती रसभरी बुर मे मुँहलगा केँ खूब रगड़ा.ओह कितनी लज़्ज़तदार बुर हैं मेरी बाजी कि हाय बाजी कां पेट काँपरहा थां उसकी नाभि पे मेरी उंगली चलरही थि बाजी केँ दोनोहाथ सख्ती सें मेरेसर पे टिकाहुआ थां औऱ वोँ मुझे जितना हौ सके मेरे मुँह कों अपने भीतर बुर मे दबारही थि मे उनकी बुर केँ दाने कों चुसते हुए उनकी फांको मे ज़ुबान घुसाए लगभग बहोत देर तक चूस्ता रहा "आहह-आहह सस्स ओउर्र ज़ोरर्र स आहह-आहह आअहह आईईइ".बाजी चिल्लाती रही औऱ मेरेहाथ ज़बरदस्ती उनकी चुचियों कों मसल्ते रहेफिन मैने उनकी लबालब बुर सें मुँह हटाया औऱ फिन बाजी कों किस किया बाजी नें मेरा पूरासंग दिया हम् दोनोऐसे हि कुछदेर घास पे लेटेरहे फिन उन्होने मुझे खड़ा किया "देखता रहकोई आँ नाँ जाए".बाजी मेरा लन्ड खूब बारीक़ी सें चुस्ती रही उफ़फ्फ़ क्याँ मजा थां? उसने पहले मेरे मोटे सुपाडे कों मुँह मे लेके चूसाफिन अंडकोष पे ज़बान फिराई फिन पूरे लन्ड कों मुँह मे लेके चूसा.ओउू अओउू करती उनकीगले सें घुटि आवाज़ उफ़फ्फ़
मेरी टाँगें काँपे जारही थि कि अबरस छोड़ा कि तब.मैने बाजी केँ मुँह मे हि धक्के मारने शुरुआत किए औऱ उनके गर्म मुँह मे लन्ड चुस्वाता रहा.वोँ बड़े हि प्रेम सें मेरे लन्ड कों चूसरही थि अपने भूरी निगाहों सें मुझेदेख रही थि मेरी गान्ड केँ छेद पे अंगुल कररही थि.ओह इतनामजा हाए रे.बाजी कों फ़ौरन मैने अपने लन्ड सें अलग किया उनके मुँह सें थूक कि लार सीधे लन्ड सें चिपकी हुइ थि फिन लन्ड कों पोन्छा हाथो सें हि औऱ फिनढेर साराथूक बाजी कि गान्ड पे लगाया.बाजी मना करती थि कि उनकी ज्यादा बुर नां मारु वरनाआगे चलकेअगर उनका शादीहुआ तौ बातखुल जाएगी कि वोँ चुदि हुई हैं औऱ आप् तौ जानते होँ हमारे यहा गान्ड मारने सें लोगो कों बड़ा परहेज़ हैं यहसभी कहानियो मे सुना हैं.मगर मुझे मेरी बाजी कि गान्ड बेश कीमती प्यारी थि
मैने बाजी कि गान्ड कों उचकाया "बाजी एक् बारमार लेनेदो नाँ अपनी बुर".बाजी कां पूरा मुँहलाल थां पऱ उन्होने मना किया पर्र अधिक नहीं."तुँ कॉंडम लाया हैं नां".
फिन मैने कॉंडम निकाला.दो कॉंडम लन्ड पे चढ़ाए इस मामले मे अब बहोत अहतियात बरतते थें.फिन बाजी नें स्वयं हि मेरे लन्ड पे कॉंडम चढ़ाया "अबठीक हैं धीरे-धीरे लगा देती हूं".उन्होने मुझे खड़ा करके मेरे लन्ड पे कॉंडम लगाया औऱ बोला जल्द धक्के मारकोई आँ जाएगा.मैने बाजी कि बुर पे धीरे-धीरे सें लन्ड कों टिकाया औऱ उसके ल्यूब्रिकेशन सें लन्ड अंदर धंसता रहा बाजी इतनीदेर मे काँपती रही.फिन मैने उनकी बुर मे एक् करारा धक्का दे मारा.बाजी पस्त होँ गयीँ, उनकी तौ आदत थि पऱ उन्हें सख़्त दर्द होता थां
वोँ चिल्लाति रही आहें भरती रही.अगर उस वक्तकोई 40 कदम भि दूर खड़ा हौ तौ सुन लेँ.मैने बाजी केँ मुँह पे हाथरख कर धक्के मारने शुरुआत किए.बाजी लेटी उम्म्म उम्म कि आवाज़ निकालके कराहती रही.फिन कुछदेर मे हि बाजी कि बुर पूरीखुल गई, औऱ वोँ रस छोड़ने लगी.मे बाजी केँ हाथो कों सख्ती सें पकड़े उनकी गान्ड मे ताक़त लगाए धक्को पे धक्के मारता रहा.फिन कुछदेर तक धक्को कि रफ़्तार तेज़ कि फिन धीमी कॉंडम इसबीच बाहर् आँ जाता.फिन बाजीउसे सेट करती औऱ फिन शुरुआत होता चुदाई कां सिलसिला.
बाजी कि बुर बीचबीच मे एकदम काँपउठ रही थि.औऱ वोँ सिसकते हुएबस मेरे गान्ड पे हाथचला रही थि.बाजी कां मदमस्त शरीर मुझे पागलकर रहा थां मे सख्ती सें उनके चुचियों कों भीचरहा थां दबारहा थां.औऱ कुछ हि देर मे बाजी नें मुझेरोक दिया औऱ मेरी लन्ड कों अपनी बुर केँ मुहाने सें निकाला औऱ ढेर सारा पानी छोड़ दिया उनकी सलवार थोड़ी गीली होँ गयीँ, फिन अहेतियात बरतते हुए मे उन्हें फिन धक्के पे धक्के लगाते हुए चोदता रहा.फिन बाजी नें बोला कि अब उनसे नहीं होगा वोँ थक चुकी हैं
मैने उन्हें उठाया क्यूंकी अब मेरा भि निकलने कों हि थां.औऱ उनको घोड़ी बनाया औऱ पीछे खड़ा होके उनके गान्ड कि छेद पे थोडा सां थूक लगाया बाकी तौ बुर कां रसलगे गीले कॉंडम औऱ लन्ड कि करामात थि घुसने कि.फछक्क सें लन्ड थोडा अंदर घुसा.बाजी काँपउठी औऱ फिन मेरे लन्ड कों खानेलगी जब देखा कि गान्ड नें मार्ग बना लिया तोँ उसे बाहर् खींचा तौ बाजी नें हल्की पाद छोड़ा.बदबू काफ़ी महेकदार थि पर्र मस्त थि मैने एक् औऱ करारा धक्का मारा औऱ अब गान्ड केँ भीतर लन्ड डालने लगाफिन बाहर् खींचता फिन घुसाता इसबीच मेरी रफ़्तार बहोत तेज़ होँ चुकी थि बाजी मुझे झडने केँ लिए पूरी गालियाँ औऱ गंदी गंदी बातें कहरही थि "ज़ोरर सें चोदडाल निकाल लेँ अपना लन्ड रस्स बाहर् निकाल दे".कुछ हि देर मे मे ऐसा काँपउठा कि मे औऱ रुक नाँ पाया धड़ाधड़ धक्के लगाता रहारस छोड़ता रहा औऱ रस सीधे कॉंडम मे भरती रही.बाजी कि उछलती चुचियो कों हाथो सें नीचे सें दबा भि रहा थां फिनकुछ देरबाद मेरादिल जब पूराहट गय़ा सेक्स सें तौ लन्ड कों बाहर् खीचा
मित्रो स्टोरी जारी हैं......... आपके सपोर्ट कि ज़रूरत हैं
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लन्ड सें कॉंडम फैंका जिसने आधे सें अधिक लन्ड कों पूरारस सें भीगा दिया थां.फिन मैने ज़ेब सें रुमाल निकाला लन्ड कों सॉफ कियाफिन बाजी कि बुर केँ अंदर तक उंगली सें सॉफ करके पोन्छा औऱ उनकी चौड़ी गान्ड केँ होल कों भि सॉफ किया.बाजी काफ़ी खुश थि औऱ थक चुकी थि "अब होँ गय़ा चलें".बाजी नें मुस्कुरा कर मेरेगाल कों चूमा मैने बाजी केँ गीले होंठो कों चूमते हुए बोलाचलो।
हम् दोनो झाड़ियो सें बाहर् आए औऱ अपने कपड़ों कों ठीक करतेहुए पास रखके सब्ज़ियो कों इकट्ठा कियाउसे बोरी मे डालके अपने कंधे पे उठा लिया औऱ बाजी केँ संगघऱ लौटआया मां कां यूषुयल डाइलॉग इतनीदेर केसे हौ गई, ?.बाजी नें बात संभाल ली मां नें भि कोई ख़ास प्रश्न नहीं कियाफिन मे कमरे मे आके नहाने चला गय़ा.फिन बाजी साराकाम काज करके नहाने चली गयीँ,
दिन हि ऐसे हि कटनेलगे हम् भइया बहन केँ बीच जोँ अटूट नाता थां वोँ कभी टूटने वाला तोँ नहीं थां.औऱ इसीवजह सें मे बाजी सें दूर नहींरह पाता थां.पिताजी नें ज़ोर देना शुरुआत किया कि आगे कि पढ़ाई करने केँ लिए तौ शहर जानां हि होगा.आइडिया मुझे भि भाया क्याँ पता? बाजी कों मे यहा लेँ आउ औऱ शहर केँ खुले वातावरण औऱ आज़ादी मे मज़े लेँ सकूँयहा नां कोई रोकेगा नाँ कोई टोकेगा पर्र बात आसान नहीं थि.बाजी सें 5 साल केँ लिएदूर हौ गय़ा औऱ यहाआके ग्रॅजुयेशन ख़तम करके मैने स्वयं कों काफ़ी काबिल बना लियाढंग कि नौकरी हासिल करली औऱ यहीशहर मे मन लगनेलगा गाओं जाने कां दिल तौ थां पऱ काम कि वजह सें हफ्ते मे हि जा पाता थां औऱ इन हफ़्तो मे बाजी सें कोई भि नाता नहीं जोड़पा रहा थां मे अकेले मे मुझे खालीहाथ लौटना पड़ता.एक् दिन हादसे मे मेरे माँ औऱ पिताजी चल बसे.सदमे नें हम् लोगो कों घैर लिया थां बाजी अकेली पड़ चुकी थि.गाँव छोड़ने केँ सिवाय औऱ कोई चारा नहीं थां वहा सिर्फ़ ग़रीबी हि थि.बाजी कों मैने संभाला औऱ उन्हें मानकर अपनेसंग शहर लेँ आया
गाँव कों हमने छोड़ दिया जोँ कुछ भि थां उसेबेच बाचके बॅंक मे फिक्स कर दिया.पैसो कि कोईकमी नहीं थि नाँ हि बाजी केँ कोई अधिक खर्चे थें वोँ आम बनके रहती थि.बाजी नें निक़ाह केँ लिएकोई नाता नहीं सोचा थां औऱ नाँ मे किसी सें चर्चा करपारहा थां.पूरे दिन ऑफीस उसकेबाद घऱ पे सिर्फ़ हम् दोनो भइया बहन थें अब हम् दोनो केँ अंदर एक् दूसरे केँ लिए बहोत इश्कजाग गई, थि बाजी मुझे सोते वक्त अपनी चुचियों पे सर रखकर सुलाती कभी मेरे बालों सें खेलती बाजी औऱ हम् चादर लपेटे एक् दूसरे केँ संग हमबिस्तर होकर सोते थें.मगर भाग्य नां जाने क्याँ खेलखेल रही थि
एक् दिन ऑफीस मे थां मोबाइल आया कि शहर केँ बीचोबीच भारी ट्रॅफिक मे बाज़ार सें सटेरोड पे एक् लड़की कां आक्सिडेंट हुआ हैं औऱ वोँ कोई औऱ नहीं थि मेरी बाजी शीबा थि.मेरे पाओ सें जैसे ज़मीन खिसक गई, आनन फानन हॉस्पिटल पहुचा.डॉक्टर कोशिशें कररहा थां औऱ मैने उनसे मिन्नत माँगी काफ़ी पैसे खर्चहुए मगर बाजी कों बचाया नां जासका ऑपरेशन फेलहुआ औऱ डॉक्टर नें मुझसे सिर्फ़ नज़रें झुकाए मांफ माँगी
मेरा सबकुछ छिन गय़ा थां.मेरी प्यारी बाजी मुझसे हमेशा हमेशा केँ लिएदूर हौ गई, थि पहले बापू औऱ माँ औऱ अब मेरी बाजीउस समय मैने अपने आप् कों केसे संभाला थां आस पड़ोस केँ लोगो नें मुझे केसे संभाला थां कुछयाद नहीं? मेरी बाजी कि लाश कों जल्द हि गाढ दिया गय़ा अबघऱ मे सिर्फ़ खामोशियाँ थि औऱ दर्द थां जोँ आँसू बनके मेरे आँखो सें निकलता.ज़िंदगी इतनी अधूरी सि लगनेलगी थि कोई नां यार थां नाँ कोई परिवार मे बहोत अकेला थां.रोज़ नमाज़ मे खुदा सें दुआ करता कि मेरी बाजी कों वापिस भेजदो चाहे इसमें मेरीजान भि क्यू नां लेँ लो मुझे उसकेपास रहना हैं वरना मे मर जाउन्गा मगरभला खुदा कहां सें मरे इंसान कों वापिस भेज पाता.
धीरे-धीरे धीरे-धीरे ज़िंदगी कों चलाने केँ लिए स्वयं कों बिज़ी करने केँ लिएकाम तोँ करना हि थां.मगर हरबार मेरा प्रश्न सिर्फ़ मेरी बहन कों वापिस पाने कां होता.कोई मुझे पागल कहताकोई मुझे तुम् डिप्रेस होँ कहकेटाल देता डाँट देताकोई कहता डॉक्टर केँ पास जाओ.मगर मुझे एक् क्रोध थां एक् जुनून चढ़ गय़ा थां कि मे अपनी बाजी कों इस दुनिया मे वापिस लाउन्गा.एक् दिन इंटरनेट पे एक् आर्टिकल देखा.जानने मे आयाकोई सिफली आमाली थां जिसके पासहर मुस्किल कां हल हैं.मे जौ मार्ग इकतियार कररहा थां शायदयह मुझे अपनी क़ौम सें बाहर् लें जारहा थां मैने नां अपनी क़ौम कि परवाह कि नाँ हि परवाह कि क्याँ ग़लत थां क्याँ सही?
उस आमाली सें मिलने कां प्लान बना लिया.ऐसे कयि आमाली होते हैं जौ पैसे केँ लिए लोगो कों लूट लेते हैं.पऱ मुझे अंजाम कि फिकर नहीं थि.आमाली कों अपना मसला बताया जोँ आग केँ सामने ध्यान कररहा थां उसने मेरा परिचय नहीं लियाउसे सबकुछ पहले सें पता थां.मे बस उससे कितनी मिन्नते कररहा थां यह मे हि जानता थां औऱ वोँ.वोँ उठा औऱ काफ़ी गंभीर सोच सें इधरउधर टहलने लगा
"नां क़ौम इसकी इज़ाज़त देता हैं नाँ हि हमारा खुदा.हम् ऐसे रास्ते कों कभी इकतियार कर लेते हैं जिसमें सिवाय गुनाह औऱ सज़ा केँ कुछ नहीं मिलता".उसकी जलती आँखो मे मेरेलिए उसका जवाब थां.मगर मेरी आँखो मे सिर्फ़ प्रश्न मुझे मेरी बाजी वापिस चाहिए थि चाहे केसे भि?.मेरे जुनून मेरे पागलपन कों देखकर उसे नां जाने क्यूलगा कि शायद मे कामयाब हौ सकता हूं पऱ इसकीकोई गारंटी नहीं थि क्यूंकी यहअमल नाँ तोँ किसी नें पहले किया थां औऱ नाँ हि कोई करने कि ज़ुर्रत कर सकता थां.इस अमल मे मरे इंसान कों वापिस लायाजा सकता थां मे चुपचाप सुनता रहा उनकी बात.मगर वोँ इंसान इंसान नहीं इंसान केँ शरीर मे एक् जीता जागता शैतान बन जाएगा एक् पिसाच.जिसे इंग्लीश मे बोलते हैं वेमपाइर
बिजलिया जैसे मेरे माथे मे गूँज़ रही थि.क्याँ यह मुमकिन थां? मे इतना पढ़ा लिखाकभी इनसभी बातों पे यकीन तोँ क्याँ कभी मानता तक नहीं थां.उसने मुझे मुस्कुरा कर अपनेपास रखी वोँ पुस्तक दि.उसमें यह साराअमल करने कां तरीका लिखा थां शर्तें थि.मगर उसने सख़्त हिदायत दि कि नां इसकी खुदाउसे इज़ाज़त देगा नाँ मुझे जोँ भि कररहा हू अपनेबल बूते पे हि करना होगा वरना अंजाम मौत सें भि बत्तर
मेरे अंदर इतना जुनून थां कि मे कुछ भि करने कों तय्यार थां वोँ अमल थां.एक् मरेहुए इंसान मे उसकीरूह कों वापिस डालना जौ इंसान नहीं बल्कि एक् पिसाच बन जाएगी जौ लोगो कों दिखेगी मगर वोँ मरी हुई होके भि एक् नयाजनम पाएगी पिसाच कां जौ सालोसाल जीती रहेगी.औऱ कभी नहीं मरेगी.पिसाचिनी लिलिता नाम कि एक् पिसाचनी सें मुझे गुहार लगानी थि औऱ इसअमल मे उसकीहर शरतो कों मानने केँ बाद हि मुझे मेरी बाजी वापिस मिल सकती थि मगरअमल कों पाने सें पहले मुझेकुछ औऱ भि चीज़ें लानी थि जौ अमल मे कामआए
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