बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai - Real Kahani Part 1
बड़ेघऱ कि बहू
कामया बहू सें कामयानी देवी
LEKHAK-laddo1
***** *****पात्र (किरदार) परिचय-
01। ससुरजी– कामया केँ ससुरजी
02। सासूमाँ- कामया कि सासू
03। कामेश- कामया कां पति
04। कामया- मध्यम वर्गीय परिवार कि लड़की
05। भीमा- खानां बनाने वाला नौकर
06। भोला- कामेश कां ड्राइवर;
07। लक्खा- पापाजी औऱ मम्मीजी कां ड्राइवर;
08। गुरूजी- आश्रम केँ सरदार
09। रूपसा- गुरूजी कि दासी
10। मंदिरा- गुरूजी कि दासी
11। मनसा- गुरूजी कि दासी
ये कथा एक् बड़े हि मध्यमवर्गीय परिवार कि लड़की कि हैं नाम हैं कामया। कामया एक् बहोत हि सुंदर औऱ पढ़ी लिखी लड़की हैं। पिताजी उसके प्रोफेसर थें औऱ मां बैंक कि कर्मचारी। विवाह भि कामया कि एक् बहोत बड़ेघऱ मे हुइ थि जौ कि उसशहर केँ बड़े ज़्वेलर थें। बड़ाघऱ… घऱ मे सिर्फ़ 4 लोग थें, कामया केँ ससुरजी, सासू मां, कामेश औऱ कामया बस।
बाकी नौकर भीमा जौ कि खानां बनाता थां औऱ घऱ कां काम करता थां, औऱ घऱ मे हि ऊपरछत पर्र बनेहुए कमरे मे रहता थां। ड्राइवर लक्खा, पापाजी औऱ मम्मीजी कां पुरानां ड्राइवर थां। जौ कि बाहर् मंदिर केँ पास एक् कमरे मे, जोससुरजी नें बनाकर दिया थां, रहता थां।
कामेश केँ पास दूसरा ड्राइवर थां भोले, जौ कि बाहर् हि रहता थां। रोज सुभह भोले औऱ लक्खा आते थें औऱ व्हीकल साफ करके बाहर् खड़े होँ जाते थें, घऱ कां छोटा-मोटा काम भि करते थें। कभी भि पापाजी औऱ मम्मीजी याँ फिन कामेश कों नाँ नहि किया थां। गेट पऱ एक् चौकीदार थां जोँ कि कंपाउंड मे हि रहता थां आउटहाउस मे, उसकी पत्नि घऱ मे झाड़ू पोंछा औऱ घऱ कां काम जल्द हि खतम करके दुकान पऱ चली जाती थि, साफ-सफाई करने।
पापाजी औऱ मम्मीजी सुभह जल्दउठ जाते थें औऱ अपने पूजापाठ मे लग जाते थें। नहा धोकरकोई 11:00 बजे पापाजी दुकान केलिये निकल जाते थें औऱ मम्मीजी दिनभर मंदिर केँ काम मे लगी रहती थि। (घऱ पऱ हि एक् मंदिर बनारखा थां उन्होंने, जोँ कि पापाजी औऱ मम्मीजी केँ कमरे केँ पास हि थां)। मम्मीजी जोड़ो मे दर्द रहता थां इसलिये अधिकचल फिन नहि पाती थि, इसलिये हमेशा पूजापाठ मे मस्त रहती थि। घऱ केँ काम कि कोई चिंता थि नहि क्योंकी भीमासभी संभाल लेता थां।
भीमाको यहांकाम करतेहुए करीब 30 साल होँ गये थें। कामेश उनके सामने हि जन्मा थां इसलिये कोई दिक्कत नहि थि। पुराने नौकर थें तभीसभी बेफिक्र थें। वैसे हि लक्खा थां, बात निकालने सें पहले हि काम होँ जाता थां।
सुभह सें हि घऱ कां महौल बिल्कुल व्यवस्थित होता थां। हरकोई अपनेकाम मे लगा रहता थां। फ्री होती थि तौ बस कामया। कोईकाम नहि थां बस पति केँ पीछे-पीछे घूमती रहती थि औऱ कुछ नां कुछ डिमांड करती रहती थि, जोँ कि साम सें पहले हि पूरी होँ जाती थि।
कामेश औऱ कामया कि सेक्स लाइफ भि मस्तचल रही थि, कोई शिकायत नहि थि दोनों कों। जमकर घूमते फिरते थें औऱ खाते पीते थें औऱ रात कों सेक्स। सबकुछ बिल्कुल मन केँ हिसाब सें, नां कोई रोकने वाला, नां कोई टोकने वाला।
पापाजी कों सिर्फ़ दुकान सें मतलब थां, मम्मीजी कों पूजापाठ सें।
कामेश कों अपने बिज़नेस कों औऱ बढ़ाने कीधुनथी। छोटी सि दुकान सें कामेश नें अपनी दुकान कों बहोत बड़ाबना लिया थां। पढ़ा-लिखा ज़्यादा नहि थां पर्र सोने चाँदी केँ उत्तरदाइत्वों कों वोँ अच्छे सें देख लेता थां औऱ प्राफिट भि कमा लेता थां। अब तोँ उसने रत्नों कां काम भि शुरुआत कर दिया थां। हीरा, रूबी, मोती औऱ बहोत सें।
घऱभर मे एक् बात सबको मालूम थि कि कामया केँ आने केँ बाद सें हि उनके बिज़नेस मे चाँदी हौ गई थि, इसलिये सब कामया कों बहोत इज़्ज़त देते थें। पर्र कामया दिनभर घऱ मे बोर होँ जाती थि, नां किचेन मे काम औऱ नां हि कोई औऱ जिम्मेदारी। जबमनहुआ तौ शापिंग चली जाती थि। कभी किसी मित्र केँ पास, तौ कभी बापू माँ सें मिलने, तौ कभीकुछ, तौ कभीकुछ। इसीतरह कामया कि विवाह केँ 10 महीने गुजर गये। कामेश औऱ पापाजी जीकुछ पहले सें ज़्यादा बिजी होँ गये थें।
पापाजी हमेशा हि ये कहते थें कि कामया तुम्हारे आते हि हमारे दिनफिन गये हें। तुम्हें कोई भि दिक्कत हौ तौ हमें बताना, क्योंकी घऱ कि लक्ष्मी कों कोई दिक्कत नहि होना चाहिए। सब हँसते औऱ खुश होते। कामया भि बहोत खुश होती औऱ फूली नहि समाती।
घऱ केँ नौकर तौ उससे आखें मिलाकर बात भि नहि करते थें।
अगर वोँ कुछ कहती तोबस-“जी बहू रानी…” कहकरचल देते औऱ काम होँ जाता।
मगर कामया केँ जिंदगी मे कुछ खालीपन थां जौ वोँ स्वयं भि नहि समझ पाती थि कि क्याँ?सबकुछ होतेहुए भि उसकी आखेंकुछ तलाशती रहतीथीं। क्याँ?पता नहि?पऱ हाँकुछ तौ थां जोँ वोँ ढूँढ़ती थि। कईबार अकेले मे कामया बिलकुल खाली बैठी शून्य कों निहारती रहती, पऱ ढूँढ़ कुछ नां पाती। आखिर एक् दिन उसके जिंदगी मे वोँ घटना भि हौ गई। (जिस पर्र येकथा लिखीजा रही हैं। )
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thanks friend ................waiting
Bandhu iss srijan ko shighrta सें aage badhayen. bhut hi kamuk srijan h
बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai – New Episode
उसदिन घऱ पऱ हमेशा कि तरहघऱ मे कामया मम्मीजी औऱ भीमा थें। कामवाली झाड़ू पोंछा करके निकल गई थि। मम्मीजी पूजाघऱ मे थि कामया ऊपर सें नीचेउतर रही थि। शायदउसे किचेन कि ओर जानां थां, भीमा सें कुछ कहने केलिये। मगर सीढ़ी उतरते हुए उसकापेर अंतिम सीढ़ी मे लचक खाकर मुड़ गय़ा। दर्द केँ मारे कामया कि हालत खराब हौ गई।
वोँ वहीं नीचे, अंतिम सीढ़ी मे बैठ गई औऱ जोर सें भीमा कों आवाज़ लगाई- “भीमाचाचा, जल्दआओ…”
भीमा- दौड़ता हुआआया औऱ कामया कों जमीन पर्र बैठा देखकर पूछा- क्याँ हुआबहू रानी?
कामया- “उउउफफ्फ़…”औऱ कामया अपनी एड़ी पकड़कर भीमा कि ओर देखने लगी।
भीमा जल्द सें कामया केँ पास जमीन पर्र हि बैठ गय़ा औऱ नीचेझुक कर वोँ कामया कि एड़ी कों देखने लगा।
कामया- “अरेदेख क्याँ रहे हौ? कुछकरो, बहोत दर्द होँ रहा हैं…”
भीमा-पेर मुड़ गय़ा क्याँ?
कामया- “अरेहाँ… नां… प्लीज चाचा, बहोत दर्द होँ रहा हैं…”
भीमा जौ कि कामया केँ पेर केँ पास बैठा थां कुछकर पातातब तक कामया नें भीमा कां हाथ पकड़कर हिला दिया, औरकहा- क्याँ सोचरहे हौ, कुछकरो कि कामेश कों बुलाऊँ?
भीमा- “नहि नहि, मे कुछ करता हूं, रुकिये। आप् उठिए औऱ वहां चेयर पर्र बैठिये औऱ साइड होकर खड़ा होँ गय़ा।
कामया- “क्याँ चाचा… थोडा सपोर्ट तौ दो…”
भीमा थोडा सां आगे बढ़ा औऱ कामया केँ बाजू कों पकड़कर उठाया औऱ थोडा सां सहारा देकर डाइनिंग चेयर तक लें जानेलगा। कामया कां दर्दअब भि वैसा हि थां। मगर बड़ी मुश्किल सें वोँ भीमा कां सहारा लिए चेयर तक पहुँची औऱ धम्म सें चेयर पऱ बैठ गई। उसके पैरों कां दर्दअब भि वैसा हि थां। वोँ चाहकर भि दर्द कों सहन नहि करपारही थि, औऱ बड़ी हि दयनीय नजरों सें भीमा कि ओरदेख रही थि।
भीमा भि कुछ करने कि स्थिति मे नहि थां। जिसने आज तक कामया कों नजरें उठाकर नहि देखा थां, वोँ आज कामया कि बाहें पकड़कर चेयर तक लाया थां। कितना नरम थां कामया कां जिस्म, कितना रसीले औऱ कितना चिकना। भीमा नें आज तक इतना रसीले, चिकनी औऱ नरमचीज नहि छुआ थां। भीमा अपने मे गुम थां कि उसे कामया कि आवाज़ सुनाई दि।
कामया- “क्याँ चाचा, क्याँ सोचरहे हौ?”औऱ कामया नें अपनी साड़ी कों थोडा सां ऊपरकर दिया औऱ भीमा कि ओर देखते हुए अपने एड़ी कि ओर देखने लगी।
भीमाअब भि कामया केँ पास नीचे जमीन पऱ बैठाहुआ कामया कि चिकनी टांगों कि ओरदेख रहा थां। इतनी गोरी हैं बहू रानी औऱ कितनी रसीले। भीमा अपने कों रोक नाँ पाया, उसने अपने हाथों कों बढ़ाकर कामया केँ पैरों कों पकड़ हि लिया औऱ अपने हाथों सें उसकी एड़ी कों आरामसे दबाने लगा। औऱ हल्के हाथों सें उसकी एड़ी केँ ऊपर तक लेँ जाता, औऱ फिन नीचे कि ओर लें आता थां। औऱ जोर लगाकर एड़ी कों ठीक करने कि कोशिश करनेलगा।
भीमा एक् अच्छा मालिश करने वाला थां उसेपता थां कि मोच कां इलाज केसे होता हैं? वोँ ये भि जानता थां कि कामया कों कहां चोटलगी हैं, औऱ कहां दबाने सें ठीक होगा। पर्र वोँ तौ अपने हाथों मे बहू रानी कि खूबसूरत टांगों मे इतना खोयाहुआ थां कि उसेये तक पता नहि चला कि वोँ क्याँ कररहा थां? भीमा अपने आप् मे खोयाहुआ कामया केँ पैरों कि मालिश कररहा थां औऱ कभी-कभी जोर लगाकर कामया कि एड़ी मे लगीमोच कों ठीककर रहा थां।
कुछदेर मे हि कामया कों आराममिल गय़ा औऱ वोँ बिल्कुल दर्द मुक्त हौ गई। उसे जोँ शांती मिली, उसकीकोई मिशाल नहि थि। जोँ दर्द उसकीजान लेने कों थां अब बिल्कुल गायब थां।
इतने मे पूजाघऱ सें आवाज़ आई औऱ मां पूजा छोड़कर धीरे धीरे लंगड़ाती हुइ बाहर् आई औरपूछा- “क्याँ हुआबहू?”
कामया- मम्मीजी, कुछ नहि सीढ़ीउतरते हुएजरा एड़ी मे मोच आँ गई थि।
मम्मीजी- “अरे… कहीं ज़्यादा चोट तौ नहि आई?”तब तक मम्मीजीभी डाइनिंग रूम मे दाखिल होँ गई औऱ कामया कों देखा कि वोँ चेयर पर्र बैठी हैं औऱ भीमा उसकी एड़ी कों आरामसे दबाकर मालिश कररहा थां।
Congratulation bro
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मम्मीजी नें कामया सें कहा-“जरा देखकर चलाकर बहू। वैसे भीमा कों बहोत कुछआता हैं। दर्द कां एक्सपर्ट डाक्टर हैं मालीश भि बहोत अच्छी करता हैं। क्यूं भीमा?”
भीमा-जी मम्मी जीअबबहू रानीठीक हैं
कहतेहुए उसने कामया केँ एडी कों छोटेहुए धीरे-धीरे सें नीचेरख दिया औऱ चल गय़ा उसनेनजर उठाकर भि कामया कि औऱ नहि देखा
मगर भीमा केँ जिस्म मे एक् आजीबतरह कि हलचलमच गई थि। आजपता नहि उसकेमन उसके काबू मे नहि थां। कामेश औऱ कामया कि विवाह केँ इतनेदिन बादआज पता नहि भीमा जाने क्यूं कुछ बिचालित थां। बहू रानी केँ मोच केँ कारण जोँ भि उसनेआज किया उसकेमन मे एक् ग्लानि सि थि। क्यूं उसकामन बहू केँ टांगों कों देखकर इतना बिचलित होँ गय़ा थां उसे नहि मालूम मगरजब वोँ वापस किचेन मे आया तोँ उसकामन कुछ भि नहि करने कों होँ रहा थां। उसके जेहन मे बहू केँ एड़ी औऱ घुटने तक केँ टाँगें घूमरही थि कितना सफ़ेद रंग थां बहू कां। औऱ कितना सुडोल थां औऱ कितना नरम औऱ कोमल थां उसकाबदन।
सोचते हुए वोँ नां जाने क्याँ करताजा रहा थां। इतने मे किचेन कां इंटरकाम बजा
मम्मीजी- अरे भीमाजरा हल्दी औऱ दूधला देबहू कों कही दर्द नां बढ़जाए।
भीमा-जी। माजी। अभि लाया।
औऱ भीमाफिन सें वास्तविकता मे लाटआया। औऱ दूध औऱ हल्दी मिलाकर वापस डाइनिंग रूम मे आया। मम्मीजी औऱ बहूवही बैठेहुए आपस मे बातें कररहे थें। भीमा केँ अंदरआते हि कामया नें नजर उठाकर भीमा कि ओर देखा पर्र भीमा तोँ नजर झुकाए हुए डाइनिंग टेबल पऱ दूध कां ग्लास रखकर वापस किचेन कि तरफचल दिया।
कामया- भीमा चाचा थैंक्स
भियामा- जी। अरे इसमें क्याँ मे तौ इसघऱ कां। नौकर हूं। थैंक्स क्यूं बहूजी
कामया- अरे आपको क्याँ बताऊ कितना दर्द हौ रहा थां। मगर आप् तोँ कमाल केँ होँ फट सें ठीककर दिया।
औऱ कहती हुईँ वोँ भीमा कि ओर बढ़ी औऱ अपनाहाथ बढ़ाकर भीमा कि ओर किया औऱ आखें उसकी। भीमा कि ओर हि थि। भीमाकुछ नहि समझ पाया पर्र हाथआगे करकेबहू क्याँ चाहती हैं
कामया- अरेहाथ मिलाकर थैंक्स करते हैं।
औऱ एक् मदहोश करने वाली हँसी पूरे डाइनिंग रूम मे गूँजउठी। मम्मी जी भि वही बैठी हुइ मुश्कुरा रही थि उनके चेहरे पर्र भि कोई सिकन नहि थि कि बहूउसे हाथ मिला नाँ चाहती थि। बड़े हि डरतेहुए उसने अपनाहाथ आगे किया औऱ धीरे-धीरे सें बहू कां हथेली कों थाम लिया। कामया नें भि झट सें भीमा चाचा केँ हथेली कों कसकर अपने दोनों हाथों सें जकड़ लिया औऱ मुश्कुराते हुएजोर सें हिलाने लगी औऱ थैंक्स कहा। भीमा जोँ कि अब तक किसी ख्वाब मे हि थां औऱ भि गहरे ख्वाब मे उतरते हुएउसे दूर बहोत दूर सें कुछ थैंक्स जैसा सुनाई दिया।
उसके हाथों मे अब भि कामया कि नाजुक हथेली थि जोँ कि उसे किसीरूई कि तरहलग रही थि औऱ उसकी पतली पतली उंगलियां जोँ कि उसके मोटे औऱ पत्थर जैसी हथेली सें रगड़खा रही थि उसे किसी स्वप्न्लोक मे लेँ जारही थि भीमा कि नज़र कामया कि हथेली सें ऊपरउठी तौ उसकीनजर कामया कि दाई चूचि पर्र टिक गई जोँ कि उसकी महीन लाइट ब्लूकलर कि साड़ी केँ बाहर् आँ गई थि औऱ डार्क ब्लूकलर केँ लोकट ब्लाउज सें बहोत सां हिस्सा बाहर् कि ओरदिख रहा थां कामया अब भि भीमा कां हाथ पकड़े हुए हँसते हुए भीमा कों थैंक्स कहकर मम्मीजी कि ओरदेख रही थि औऱ अपने दोनों नाजुक हथेली सें भीमा कि हथेली कों सहलारही थि।
कामया- अरे हमें तोँ पता हि नहि थां आप् तौ जादूगर निकले
भीमा अपनीनजर कामया केँ उभारों पर्र हि जमाएहुए। उसकी सुंदरता कों अपने अंदर उताररहा थां औऱ अपनी हि दुनियां मे सोचते हुएघूम रहा थां
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