भोलीभाली पतिव्रता रुचि चूद गई सहेलियों के बहकावे में - pati ke bina - Full Story Part 1
यहकथा हैं रुचि कि जोँ 24 साल कि बेहद सुंदर शादीशुदा स्त्री हैं जिसकी विवाह कों महजदो सालहुए हें, जोँ अपने पति सें बहोत प्रेम करती हैं, उसका पति दुबला पतला औऱ काला हैं मगर रुचि कों उसकेरंग रूप सें कोई शिकायत नहि हैं, वोँ अपनी जीवन सें खुश क्याँ बेहदखुश हैं, यहलोग अभि इसशहर मे ट्रांसफर होकरकुछ हि दिन पहलेआए हें। औऱ अभि रुचि कि नईनईचार सहेलियां बनी हें साधना, लतिका, हेमांगी औऱ राधिका, धीरे-धीरे धीरे-धीरे प्रगाड़ता बढ़रही हैं आपस मे। वे चारों आपस मे एक् दूसरे कों नहि जानती हें।
आगे कि कथा तुरंत हि, कॉमेंट करें औऱ बताएं कैसीलग रही हैं यह शुरुआत।
बहोत बहोत शुक्रिया आपके हौसले अफजाई कां,,, कोशिश पूरी करूंगा कि पाठकों कां दिलजीत सकूं,,,
Why you are not givin Why you are not giving mine, in my kahani you are posting your ad lekin not giving your review for my kahani, iss it not strange,
भोलीभाली पतिव्रता रुचि चूद गई सहेलियों के बहकावे में - pati ke bina – New Episode
EPISODE 1
अब हम् रुचि कां बैकग्राउंड देख लेते हें, रुचि एक् संस्कारी परिवार सें आती हैं उसके पापा औऱ मम्मी दोनों सुशिक्षित औऱ कोमल स्वभाव केँ हें पापा सरकारी जॉब मे उच्च पदस्थ हें औऱ मम्मी ग्रेजुएट होकर हाउस वाइफ हें, नाम कि अभि कोई दरकार नहि हैं इसलिये नहि लिखरहा हूं, माँ कि उम्र 44 हैं औऱ बेहद सुंदर हें बाकी इससे आप् उसकी हुस्न कां अंदाजा लगा सकते होँ कि बाहर् सें कोई अजनबी उनकेघऱ आए तौ समझता हैं कि किसी फिल्मी हीरोइन केँ घऱ आँ गय़ा हैं, अधिक हुस्न कि डिटेल्स शायद नहि होनी चाहिए।
रुचि कां एक् बड़ा भइया भि हैं जिसकी भि विवाह होँ चुकी हैं औऱ वोँ मेट्रो सिटी मे MNC मे नौकरी करता हैं उसकी उम्र 26 हैं औऱ उसकी वाइफ 23 कि होकरऐसी हैं कि जैसी रुचि कि सुंदर माँ कि बहु कों होना चाहिए। अभि फिलहाल इन पात्रों कि कथा मे जरूरत नहि हैं इसलिये ज़्यादा चर्चा न् करतेहुए रुचि पर्र फोकस करते हें।
रुचि नें मास्टर्स किया हैं, पढ़ने लिखने मे अव्वल औऱ हुस्न तौ मम्मी सें विरासत मे मिली हैं औऱ वोँ माँ सें इक्कीस हि हैं शक्लो सूरत मे। विवाह जिससे हुईँ हैं वोँ हैं शरद बहोत इंटेलिजेंट औऱ वेल mannered, बहोत अच्छी पोस्ट हैं, बस दिखने मे एवरेज सें थोडा कम हैं, जोड़ी बेमेल सि लगती हैं मगर लाइफ सिक्योरिटी केँ चलतेयह संगमहुआ हैं, रुचिखुश हैं, जिस्म कि जरूरतों सें आर्थिक रूप सें, कुल मिलाकर जीवन सें संतुष्ट। एक् बात जोँ आपको जाननी जरूरी हैं वोँ यह कि रुचि नें कॉलेज केँ दिनों मे एक् बेहद हसीन अपनी हि टक्कर केँ जीवनसाथी कां सपने देखा थां, मगर सपने तोँ सपने हि होते हें पूरेहुए नहि हुए औऱ रुचि केँ नहि हुए, मगर अभि शरद कों लेकर रुचि केँ मन मे कोई मलाल नहि हैं।
इसशहर मे आए इन्हें कोईदो महीने हौ गए हैं, एक् इंडिपेंडेंट बंगलो किराए सें शहर कि बेस्ट लोकेशन मे लिया हैं, सराउंडिंग भि वैसा हि हैं सब संभ्रांत परिवार यहां रहते हैं कोई cheap family यहां नहि रहती हैं। रुचि कि पहचान धीरे-धीरे धीरे-धीरे बढ़रही हैं मगर उसने अपना दायरा इनचार सहेलियों तक हि रखने कां मनबना लिया हैं, सब चारों बहोत अच्छी बहोत खूबसूरत जहीन औऱ कोमल स्वभाव कि हें। एक् खासबात जौ हैं वोँ हैं कि इन चारों कि जोड़ियां बहोत हि डेशिंग हैं इनके सबके हसबैंड्स फिल्मी हीरो कि तरह हि स्मार्ट औऱ चतुर हैं मगर धूर्त औऱ चालक नहि, सब अच्छे स्वभाव केँ औऱ अपनी पत्नियों सें बेहद प्यार करने वाले, अभि तक किसी नें किसी दूसरी स्त्री सें संबंध नहि बनाया हैं क्योंकि उन्ही स्वयं कि बीबी हि इतनी हसीन हैं कि कोई औऱ कि तरफ देखने कां मन हि नहि हुआकभी।
अब आखरीबात,,, रुचिइन चारों सें इक्कीस नहि बल्कि अस्सी हैं हुस्न केँ मामले मे।
Bye till next narration,,
भोलीभाली पतिव्रता रुचि चूद गई सहेलियों के बहकावे में - pati ke bina – New Episode
EPISODE - 2
रुचि कि दिनचर्या मे कुछखास काम नहि होते थें। उसके यहांदो सर्वेंट थें एक् स्त्री एक् मर्द, सारेकाम दोनों करते थें, रुचि कों कोईकाम नहि करना पड़ता थां, यहां तक कि यदि पानी भि पीना होँ तौ नौकरहाथ मे लाकर देते थें। उसका पति शरद सुभह9बजे दफ़्तर कों निकल जाता औऱ रात 8 बजे तक आता थां, रुचि सारेदिन फ्री रहती थि। रुचि केँ लिए एक् गाड़ी अलग सें शरद नें देरखी थि जिससे वोँ जहां चाहे आँ जा सकती थि। रुचि नें दिन कां वक्त अपनी सहेलियों साधना हेमांगी लतिका औऱ राधिका केँ संग गुजरना शुरुआत कर दिया थां, हरदिन वोँ किसी एक् सहेली केँ घऱ जाती औऱ कभी दूसरी केँ घऱ। इसतरह मिलते मिलते छह महीने गुजरगए औऱ सभी रुचि कि पक्की सें भि पक्की सहेलियां बन चुकी थि। वे चारों भि अमीर थि औऱ सबतरह सें संपन्न, इसतरह उनकी प्रगाढ़ता बढ़ने लगी। अभि तक रुचि कां किसी भि सहेली केँ पति सें आमना सामना नहि हुआ थां, बस उसने उनके फोटोघऱ मे लगे देखे थें।
अबआगे
आज रुचि साधना केँ यहांआई हुई हैं, अक्सर वोँ दिन कां खानां यहींखा लिया करती हैं, आज भि दोनों सें संग मे खानां खाया औऱ बैठे बैठे बातें कररहे थें तभी साधना कि doorbell बजी, सर्वेंट नें दरवाजा खोलातभी साधना कां पति अमित अंदरआया, जिसेदेख साधना उठ खड़ी हुई औऱ बोलि अरे आप्,,,,, आज केसे ?? अमित बोलाहां दोस्त दफ़्तर केँ एक् पेनड्राइव यहीकल लाया थां सुभह लेँ जानां भूल गय़ा तोँ आनां पड़ा, तब तक रुचि भि खड़ी हौ गई थि अब अमित कि नजर रुचि पऱ पड़ी, रुचि हमेशा हि टिपटॉप रहती हैं स्टाइलिश साड़ियां स्पेशल ब्लाउज करीने सें सजेबाल औऱ टाइट नाभी केँ नीचे बांधी हुईँ साड़ी, जब वोँ खड़ी हुईँ पूरी अप्सरा लगरही थि औऱ वोँ साधना सें कई गुना हसीन थि, वैसे साधना भि कम हसीन नहि थि मगर रुचि तौ कयामत थि। अमित नें उसको देखा औऱ उसकेदिल कि एक् धड़कन मिस हौ गई औऱ वोँ एकटक रुचि कों देखता रह गय़ा वोँ उसके चेहरे मे हि कों गय़ा, उसनेआज तक इतनी हसीन स्त्री अपनी जीवन मे नहि देखी थि, फिन धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसने रुचि केँ पूरेबदन कां मुआयना किया, सफेद शफ्फाक रंग संगमरमरी सुतवा नाक पतली गर्दन औऱ उन्नत वक्ष स्थल साधना सें दुगने तोँ नहि मगरकम भि नहि, कठोरकसे ब्लाउज मे छूटने कों तड़पते हुए बॉब्स, ब्लाउज औऱ साड़ी केँ बीच सपाट चिकना चमकदार सफेदपेट, जिसे देखकर अमित बेहोश होते होतेबचा, रुचि कि गहरीगोल गोल नाभीसाफ दिखाई देरही थि, अमित कां बुराहाल थां, रुचिकुछ पूछने कों साधना कि तरफ मुड़ी औऱ अमित कि नजरदो बाहर् कों निकले हुए एकदमगोल सुडोल नितंबों पऱ पड़ी, क्याँ हि कठोर थें, अमित क्याँ करे क्याँ न् करे, मन कि उथल पुथल कों किसीतरह समेटे हुए वोँ घऱ केँ अंदर कि औऱ बढ़ने लगा।
तभी साधना बोलीं सुनिए, अमित ठिठका पीछे पलटा औऱ बोलाहां क्याँ, साधना बोलि इनसे मिलिए मेरी सहेली रुचियह अक्सर आती रहती हैं यहां औऱ हम् दिन कां वक़्त संग हि बिताते हें आप् दिन मे घऱ नहि रहते नाँ, इसलिये आज तक मिलना नहि हुआ, फिन रुचि सें बोलि, रुचियह मेरे पति अमित हें, रुचि नें शर्माते हुए दोनों हाथ जोड़लिए औऱ अमित कि आंखों मे देखते हुए बोलि नमस्कार,,, औऱ शर्माते हुए अपनी नजरें नीचीकर ली, अमित बोलाओह ओ, हमारे घऱ बहारआती रही औऱ हम् उससे मरहूम हि रहे, आपने हमेंआज तक कभी बताया हि नहि साधना कि आपकी इतनी सुंदर कोई सहेली भि हैं, वोँ तौ मे भाग्य सें आज आँ गय़ा वरना हमेंपता हि नहीं चलता कि एक् हीरा हमारे यहां अपनीछटा रोज बिखेर रहा हैं।
रुचि अपनी तारीफ सुनकर मन मे बहोत खुश हुई उसकेगाल लाल होँ गएमगर परोक्ष रूप सें नजरों कों ऊपरउठा कर अमित कि आंखों मे देखती हुईँ बोलीं - कुछ भि!!! कुछ भि बोलते हें आप्, औऱ धीरे-धीरे सें साधना कां हाथजोर सें पकड़ लिया। अमित कों लगा शायद वोँ कुछ ज़्यादा हि बोल गय़ा हैं, उसने भीतर जाने मे हि भलाई समझी, वोँ सहम गय़ा थां कहीं रुचि अन्यथा न् लें इन बातों कों, उसका मकसद थोडा हंसी मजाक कां सां थां। वोँ चला गय़ा, साधना नें रुचि सें कहा तुम् यहीं बैठो मे देख लेती हूं अमित कों, तुम् बुरामत मानना उनकीआदत हैं मजाक करने कि, रुचि बोलीं नहि मे क्यूं बुरा मानू मेरी अच्छी सहेली केँ पति भि अच्छे हि होंगे इतना विश्वास हैं मुझे तुम् उनको देखो, मे ठीक हूं। साधना अंदरचली गई।
अब रुचि नें जोर कि सांसली स्वयं कों संयत किया औऱ जौ हुआ उसको सोचने लगी। जब अमित अंदरआया रुचि नें उसको देखा बलिष्ठ जिस्म एवरेज लंबाई हसीन चेहरा बहुतकुछ वरुणधवन सें मिलता जुलता वही हाइट काठी, पर्पल सूट पहनाहुआ पिंक शर्त औऱ गहरी बैंगनी टाई, चमचमाते जूते, किसी हीरो सें कम नहि लगरहा थां, उसका भि दिल धड़कना भूल गय़ा थां, अचानक उसे कॉलेज केँ दिनयाद आँ गए, क्याँ इसे हि तोँ नहि देखा थां मैने अपने सपने मे अपने जीवनसाथी केँ रूप मे, वोँ अमित कों देखकर मंत्रमुग्ध हौ गई थि। उसकादिल अभि भि अजीब सि धड़कन मे धड़करहा थां।
उधररूम मे जब साधना गई अमित कबर्ड मे कुछ टटोलरहा थां साधना नें अमित कि पीछे सें बांहों मे भर लिया औऱ बोलीं क्याँ दोस्त तुम् भि कभी भि शुरुआत हौ जाते होँ, यह तौ देख्ना चाहिए पहलीबार मिलरहे हौ थोडा तौ संयमित बातें कियाकरो कोई कैसा हैं उसे क्याँ पसन्द हैं क्याँ नहि, बस शुरुआत हौ गए, माना कि रुचि खूबसूरत हैं औऱ बहोत खूबसूरत हैं मगर क्याँ भोली भि होगी जरूरी हैं।
अमिततब तक पेनड्राइव खोज चुका थां उसको पेंट मे रखतेहुए पलटा औऱ साधना कों सामने सें आलिंगन मे लेतेहुए उसकेगाल पऱ एक् जोरदार चुम्बन देतेहुए बोला, दोस्त तूनेआज तक बताया नहि इतनी पटाखा तेरीकोई साथी भि हैं औऱ जोर सें हंसते हुए बोला jokes apart, वोँ बुरामान गई हैं शायद, मुझेऐसा नहि करना चाहिए थां, सॉरीजान,,, औऱ उसकोकस केँ सीने सें लगा लिया, तब साधना अमित केँ कान मे सरगोशी करतेहुए बोलीं नहि उसको बुरा नहि लगा हैं, मैनेपूछ लिया हैं, मगर बेबी तुम् ऐसामत कियाकरो जब तक लाइन क्लियर नं होँ।
अमित बोलाआज तक तोँ ऐसा मौकाकभी आया नहि कि तुमसे हसीनकोई मिली हौ, अगर मिली भि हौ तौ मुझेलगी नहि तुम् हि मेरे ख्वाबों कि रानी होँ, मगरआज दिलमचल गय़ा हैं, क्याँ तुम् लाइन क्लियर करवाओगी इस रुचि केँ संग मेरी। औऱ इतना कहकर वोँ साधना कों छोड़कर भागने लगा, उसे लगा साधना कों बुरा लगेगा औऱ वोँ उसे छोड़ेगी नहि, हुआ भि ऐसा हि साधना नें भागते हुए अमित केँ कोट कां सिराकस कर पकड़ लिया औऱ मजबूरन अमित कों रुकना पड़ा, साधना उसके सामने गई औऱ बड़ी बड़ी आंखों सें उसे डराने कि कोशिश करनेलगी, अमित बोला सॉरी दोस्त मे तौ ऐसे हि, मगरतब तक साधना कि जोर सें हंसीफूट पड़ी औऱ वोँ हंसते हुए बोलि मेरे प्यारे सजन कां पहलीबार किसी पऱ दिलआया हैं औऱ मे क्याँ नाराज होंगी उससे, जान, मे अभि रुचि कों इस एंगल सें मे जानती हूं, मगरयदि उसकाजरा भि तुम् मे इंट्रेस्ट होगा मे वादा करती हूं तुम्हारे लिए उसकी लाइन क्लियर करवाऊंगी, मगरअगर नहि इंट्रेस्ट हुआ तौ तुमको ऐसा सोचना छोड़ना होगा, हम् ऐसेलोग नहि हैं डियर, कि किसी कि मर्ज़ी केँ खिलाफ जाकर उसको प्रेशराइज्ड करें।
अमित बोला well said, darling, मैंने तौ जौ दिल मे थां तुमसे कह दिया, हुआ तोँ हुआ, नहि तौ हम् दोनों तौ हें हि मस्तियां करने कों, चलो मे अब जाता हूं पहले हि बड़ीदेर होँ चुकी हैं, साम कों मिलते हें। साधना बोलि मे रुचि केँ दिल कि थाह लेने कि कोशिश करती हूं फिनरात कों बताती हूं, तब तक दोनों डाइनिंग तक आँ गए थें अमित नें साधनसे फिन रुचि सें bye बोला औऱ बाहर् निकल गय़ा।
Bye mai to, till next narration,,,
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