बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai – New Episode
नहाने धोने केँ बाद कामया एकदमतरो ताजा सजधजकर सजधजकर थि बहोत खूबसुरात लगरही थि वोँ जिस्म तनकरउठा हुआ थां सबअंग बिल्कुल तराशे हुएलग रहे थें कपड़ों पऱ तोँ अब उसने ध्यान देना बिल्कुल बंदकर दिया थां अब वोँ ध्यान देती थि तोँ सिर्फ़ अपने अंगो केँ निखार पऱ स्नान, मालिश उबटान केँ चलतेआज उसकाबदन एकदम निखार उठा थां दिन मे दो-दोबार मालिश केँ संग उबटान औऱ फिन सबसे बड़े निखार कि बात तौ थि सेक्स
हां वोँ भि एक् इंपार्टेंट फक्टर थां दिनरात जोँ सेक्स कां खेल नहाने सें लेकर सोने तक उसने खेला थां हरअंग मे एक् ऐसीभूख जागउठी थि कि,, हमेशा किसी नां किसी केँ संगसट कर बैठने कि याँ अपने जिस्म पऱ किसी केँ हाथों केँ स्पर्श कां एहसास उसे रहनेलगा थां खेर कामया रेडी थि औऱ यहीसोच रही थि कि गुरुजी कबयाद करेगे पऱ गुरुजी कां जबकोई संदेश उसे नहि मिला तौ दासी कों बुलाकर पूछ हि लिया
कामया- गुरुजी कहां हैं
दासी-जी वोँ कुछधरम गुरुलोग आएहुए हैं उनसे चर्चा कररहे हैं
कामया- धरम गुरु …
दासी-जी 5 लोग हैं अलगअलग धरम केँ असल मे गुरुजी कां समान भि तौ पैक हौ रहा हैं नां उनके जाने कां वक्त होँ गय़ा हैं अब तोँ आप् हि इस अश्राम कि कामयानी देवी बनकरराज करेंगी
क्यूं रानी साहिबा कुछकाम हैं आपका मेसेज पहुन्चाऊ उन तक
कामया- नहि रहनेदो जब वोँ लोगचले जाएँ तोँ बताना गुरुजी सें मिलना हैं मुझे
दासी-जी
कहतेहुए दासीचली गई थि कामया अपने कमरे मे बैठी गुरुजी केँ अगलेकदम औऱ अपने बारे मे सोचने लगी कामया कों नहि मालूम थां कि आगे उसकेलिए गुरुजी नें क्याँ सोचरखा हैं हाँ एक् बात औऱ कल याँ परसो तौ शायद गुरुजी देश छोड़कर चले जाएँगे फिन अरेहाँ… ये तोँ वोँ भूल हि गई थि जैसे हि उसकेमन मे येबात आई वोँ थोडा सां व्याकुल होँ उठी थि अपनेघऱ वालेयाद आनेलगे थें उसे एक् अकेलेपन कां एहसास उसकेमन मे घऱकर गय़ा थां
कामया अपने जिंदगी केँ कुछ पहलूयाद करते-करते कहाखो गई थि उसेपता भि नहि चला पर्र कुछदेर मे जब एक् दासी नें उसे आवाज़ दि तौ
दासी- रानी साहिबा गुरुजी नें आपकोयाद किया हैं
झट सें उठ खड़ी हुईँ थि कामया जल्द सें बिना अपने आपको देखेहुए कामया करीब-करीब दौड़ती हुइ गुरुजी केँ कमरे मे पहुँच गई थि
गुरुजी नें जैसे हि कामया कों देखा
गुरुजी- आओसखी आओ कैसी होँ
कामया - जीबस आशीर्वाद हैं आपका गुरुजी
गुरुजी- कुछ परेशान लगरही हौ सखीकुछ बात हैं
कामया- जी वोँ बस थोडा सां अकेलापन सां लगरहा थां आप् भि जाने वाले हैं बस इसलिये थोडा सां मन विचलित थां
कहतेहुआ कामया गुरुजी केँ आगोश मे अपने आप् हि जाकरलेट गई थि अपने आपको थोडा सां सेफ महसूस करनेलगी थि वोँ गुरुजी नें भि कामया कों अपने सें सटाकर लिटा लिया थां कामया केँ कपड़ों केँ अंदर सें गुरुजी उसके मांसल अंगो कों अपने हाथों सें सहलाते हुए बोले
गुरुजी- ये तोँ संसार कां नियम हैं सखी इंसान केँ जिंदगी मे परिवर्तन आते हि रहते हैं नयेलोग जुड़ेंगे पुराने लोग जाएँगे किस किसका ध्यान रखोगी हाँ… मेरा तुम्हारा संबंध कभी नहि टूटेगा मे भले हि यहां सें चला जाऊँगा पऱ तुम् हमेशा हि मेरेमन मे राज करोगी तुम् जब चाहो मेरेपास आँ सकती होँ
कामया थोडा सां औऱ गुरुजी सें सटकरलेट गई थि गुरुजी केँ हाथ उसकी चुचियों कों धीरे धीरेमसल रही थि पर्र पता नहि क्यूं उसे सेक्स कि गर्मी अपने अंदर महसूस नहि हौ रही थि वोँ वैसे हि सिथिल पड़ीरही गुरुजी उसे हल्के हाथों सें सहलाते हुए
गुरुजी- कलकुछ लोग आएँगे धरम गुरु हैं इसदेश केँ सारा पॉलिटिक्स उनके इशारे पऱ चलता हैं तुमसे मिलना चाहते हैं मिलॉगी।
कामया- … चुपरही
गुरुजी- मिललो अच्छा रहेगा कल केँ बादयही लोग तुम्हारी हर संभव सहायता करेंगे इस लोगों केँ पास सबकुछ हैं औऱ जौ नहि हैं वोँ उन्हें यहां सें मिलता हैं इसलिये तुम्हें उनको अपनेसंग रखना हैं औऱ उन्हें अपनेवश मे करना जरूरी हैं
कामया सटकर गुरुजी केँ संग लेटी हुईँ थि आखेंबंद थि औऱ शायद सोने कि कोशिश कररही थि गुरुजी नें भि उसे सहलाते हुए अपनीआग कों शांत नां करने कि कोशिश कि हल्के हाथों सें सहलाते भररहे औऱ कामया कबसो गई पता नहि
सुभहजब उठी तोँ गुरुजी बेड पऱ नहि थें पऱ एक् सुखद सां अनुभव वोँ कररही थि बदन एकदम तरोताजा थां एक् उमंग थि उसके अंदरखुश भि बहोत थि क्यूं नहि मालूम अंगड़ाई लेकरजब वोँ उठी तोँ कुछ दासिया उसे नहाने धोने कों लें गई सुभह कां स्नान लेते हि वोँ एक् बारफिन सें उत्तेजित थि इतने हाथों कि उसेअब आदतपड़ गई थि बदन हमेशा हि सनसनाता रहता थां नहाने केँ बाद तोँ बहोत औऱ नां जाने वोँ क्याँ क्याँ होता थां कि अंदर जाते हि वोँ सेक्स केँ लालायित हौ उठ-ती थि एक् अजीब सि सनसनाहट उसकेबदन मे दौड़ जाती थि रहरहकर अपने अंगो कों मड़ोड़ने कि ख़्वाहिश औऱ अंगड़ाई लेने कि ख़्वाहिश होती थि हरअंग मे नशा सां छा जाता थां मदहोशी कां आलमये होता थां कि आखें अधखुली सि किसी मर्द कों तलाशने लगती थि उस शारीरिक सुख केँ लिए जिसके बिनाये संसार अधूरा थां
कामया कां जिंदगी सेक्स कि भेटचढ़ चुका थां जौ एक् जिग्याशा औऱ अनुभूति उसके अंदर जिंदा थि वोँ थि बस अपने जिस्म कां सुख औऱ कुछ नहि अपने जिंदगी मे आए बहोत सें मर्द औऱ फिन उनसेपाए हुएसुख उसके अंदर जिंदा थें औऱ हरकोई उसे उसकीओर धकेलते थें कामया अपने जिंदगी केँ अतीत कों अपने आप् मे समेटे बहोत सि बातें सोचरही थि कल केँ बाद वोँ इस अश्राम कि मालकिन होगी गुरुजी भि चले जाएँगे ये सबकुछ उसका होगाकोई टोकने वाला नहि होगा अपने परिवार केँ संग वोँ यहां रहेगी बहोत सि बातें सोचते हुए कामया नहाने धोने केँ बाद एक् बारफिन सें तरोताज़ा होकर गुरुजी केँ पास पहुंचा दि गई थि
कामया कों गुरुजी नें बहोत सि बातें समझाई थि उसकेलिए ऊपर कां फ्लोर रिजर्व थां वहा उसके अलावा कुछ दासियों केँ सिवा किसी कों भि आने कि इजाजत नहि थि उसके परिवार कों तौ बिल्कुल भि नहि बहोत सि मान्यताए गुरुजी नें उसे बताई थि पैसे कहां औऱ केसेरखे जाते हैं कौनकौन उसके ख़ास होंगे औऱ कौनकौन क्याँ-क्याँ करता हैं कामया सबकुछ बड़े ध्यान सें सुनरही थि एक्-एक् करउसे सारे कमरो सें परिचित करा दिया गय़ा बहोत सि बातें जौ अब तक नहि जानती थि वोँ सभी भि उसे बताया थां गुरुजी नें दोपहर तक कामया थक गई थि गुरुजी नें उसे अग्या दि कि खानां खाकरसो जाएसाम कों धरम गुरुओं केँ संग एक् मीटिंग हैं उसे भि आनां हैं अच्छे सें रेडी होकरआए वोँ।
कामया होंठों मे मुश्कान लिए अपने कमरे मे चलीआई थि साम कों नहाने धोने केँ बाद कामया फिन सें रेडी होने मे लग गई थि आज कि रात केँ लिए दासिया जब कपड़े लेकरआई तौ थोडा सां चोकी थि वोँ ये कपड़े उसके अपनेलग रहे थें दासी कि ओर देखा तोँ थोडा सां मुस्कुराई थि वोँ
दासी- गुरुजी कां कहना हैं कि अब सें आप् इसतरह केँ कपड़े पहनेंगी सिलेहुए जैसे गुरुजी पहनते हैं आपकी दीक्षा खतम हुई औऱ कल सें आप् इस अश्राम कि मालकिन हैं अब आपकेलिए कोई नियम नहि हैं आप् हि नियम हैं जौ कहेंगी वही होगा हिहीही
हँसती हुई दासी नें कामया केँ सामने उसकी बहोत सें साड़ियाँ औऱ ड्रेस फैला दि थि उस दासी नें रूपसा औऱ मंदिरा भि वही खड़ी थि बड़े हि उत्सुकता सें कामया केँ ड्रेस कों अपने हाथों मे लिएदेख रही थि पूरा अश्राम सजने सँवरने मे लगा थां बस कमरे केँ अंदर हि शांति थि औऱ सभी स्थान हलचलमची हुइ थि
कामया- पर्र गुरुजी नें हमें तौ कुछ नहि कहा …
रूपसा- आपको इससे क्याँ रानी साहिबा आपको तोँ बसयेसभी अब पहनना हैं अगरमन नहीं तौ नहि तोँ आपकोवही कपड़े हम् पहना देते हैं
कामया- नहि नहि, ये हि अच्छे हैं बोलोकौन सि साड़ी पहनु
मंदिरा- ये वाली
एक् ब्लैक औऱ रेड कॉंबिनेशन पर्र स्टार्स सें चकमक करती हुई साड़ी उसके हाथों मे थि महीन सि औऱ पारदर्शी साड़ी कामया थोडा सां मुस्कुराती हुइ मंदिरा केँ पास पहुँच गई थि उसकेसिर पर्र हाथ फेरते हुए खड़ी होँ गई थि
मंदिरा - आपकेपास बहोत अच्छी साड़ियाँ हैं रानी साहिबा
कामया- तुम्हें पहननी हैं …
मंदिरा- नहि नहि बाप रे …
कामया- क्यूं क्याँ हुआ मे हूं नाँ तौ डर कैसा औऱ कल सें तोँ जोँ मे कहूँगी वोही नाँ
रूपसा औऱ मंदिरा कि आखेंचमक उठी थि एक् नईआशा उनकी आखों मे जागउठी थि
दोनों मिलकर कामया निहारने लगी थि कामया अब जाकर मिरर केँ सामने बैठ गई थि औऱ अपनेरूप कों सवारने कों सजधजकर थि एक् अजीब सि उत्तेजना उसके अंदरजाग उठी थि शायद अपने कपड़े वापस पाकर एक् नशा सां छानेलगा थां उसकेहर अंग मे एक् तरंग सां उठरही थि उसकेहर अंग मे
Waiting
mastram wrote: ↑22 Jun 2017 19:45Waiting Update कल milega mitr
बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai – New Episode
कामया उन कपड़ों कों देखकर एक् बार अपने पुरानी जीवन मे डूब गई थि वही उत्तेजना औऱ वही सजना सवरना उसेयाद आँ गय़ा थां बहुत दिनों सें उसने अपने आपको संवारा नहि थां औऱ नहि कोई मेकप हि किया थां आश्राम कि जीवन मे उसे जोँ दिया थां वोँ उसने किया थां औऱ जोँ कुछ भि पहनाया गय़ा थां वोँ उसने पहना थां पऱ आजइसतरह केँ कपड़े देखकर वोँ एक् बारफिन सें लालायित होँ उठी थि बड़े हि चुनकर खरीदे थें उसने वोँ सारी औऱ मचिंग ब्लाउस सूट वग़ैरह आजजब उसकेघऱ कां पूरा समान यहां शिफ्ट होँ रहा थां तौ शायद उसके कपड़े भि मां जी नें याँ घऱ केँ किसी नें उसे भेजे थें
कामया उन कपड़ों मे अपने आपको ढालने कों रेडी थि रूपसा औऱ मंदिरा भि उन कपड़ों कों उठाकर अपने हाथों सें छूतेहुए उन कपड़ों कों एक्-एक् करदेख रही थि कामया नें उसकेपास जाकरकहा
कामया- तुम्हें पहनने हैं ये कपड़े …
रूपसा- अरेनहीं नहि रानी साहिबा ये आपकेलिए हैं हम् तौ ऐसे हि ठीक हैं
कामया- क्यूं क्याँ हुआ तुम् चाहो तौ पहन सकती होँ ये कपड़े जौ चाहे लेलो
मंदिरा- नहि रानी साहिबा हमें इजाज़त नहि हैं
कामया- हाँ… पऱ कल सें तोँ मे इस आश्राम कि मालकिन हूं चाहू तोँ मे कुछ चेंजस तोँ ला सकती हूं औऱ अगर मे कहूँ तौ तुम् लोगये कपड़े पहन सकती हौ क्यूं
रूपसा औऱ मंदिरा केँ चहरे पर्र एक् चमक आँ गई थि हाँये तौ ठीकबात हैं अगर कामयणी देवी कहेंगी तौ नियमबदल सकते हैं हाँये ठीक हैं एक् उम्मीद कि लहर दौड़ गई थि उनकेमन मे कामया केँ सामने एक् सारी उसकेसंग मचिंग ब्लाउस निकलकर उन्होंने सामने रख दिया थां कामया एक् मुश्कान बिखेरती हुइ उसकेपास सें हट गई थि चलोअब जल्द सें सजधजकर हौ जाओ औऱ मुझे भि सजधजकर करो गुरुजी नें बुलाया हैं वोँ धरम गुरुजी केँ संग मीटिंग मे हैं
सब दासिया जल्द सें कामया कों सजधजकर करने मे जुट गई थि ब्लैक लिंगरी केँ संग बड़े हि सफाई सें उसने ब्लाउस पहना थां लोकट ब्लाउस जोँ कि अब थोडा सां कसाहुआ लगता थां छोटा हौ गय़ा थां बहोत हि टाइट स्लिम होँ रहा थां हुक भि बड़े मुश्किल सें लगे थें मालिश औऱ उबटान औऱ कुछ दिनों सें अपनेबदन कों फ्रीरखा हुआ थां इसकारण ये कपड़े उसेतंग सें लगरहे थें नाभि केँ नीचे सारी पहनते समय उसने एक् बार अपनी नाभि कों भि देखा थां बहोत हि गहरी हौ चली थि औऱ कुछमास भर गय़ा थां उसके जिस्म मे कुछ ज़्यादा हि कपड़े मे कसे अपनेबदन कों बाहर् निकलने सें नहि रोकपाई थि उसने
साड़ी पहनने मे उसने बहोत वक्त लिया थां बहोत हि तरीके सें औऱ सलीके सें एक्-एक् प्लेट जमाई थि नाभि केँ नीचे बहोत नीचे पहनी थि उसने साड़ी नजाने क्यूं उसेआज येसभी करते वक्त एक् अजीब सि उत्तेजना होँ रही थि दिल धड़करहा थां बहोत जोर-शोर सें एक् अजीब सि खुशी उसके अंदरउठ रही थि
एक् अंजानी खुशी केँ चलते वोँ थोडा-थोड़ामुस्कुरा भि उठ-ती थि पास खड़ी दासिया उसकीओर देखती हुईँ उसकी खुशी मे शामिल थि रूपसा औऱ मंदिरा भि अपने आपको सवारने मे लगी थि पर्र कामया कि बातकुछ औऱ थि ब्लाउस औऱ पेटीकोट पहनते हि एक् बार उसने अपने आपको मिरर मे देखा थां लाजवाब लगरही थि सबकुछ कसाहुआ थां ईवन पेटीकोट भि शेपलिए हुए थां उसके जिस्म कां घुटनों केँ थोडा सां नीचे तक थां वोँ पेटीकोट लंबा नहि थां पूरी साड़ी उसकेबदन पर्र लगते हि एक् अजीब सि सनसनाहट दौड़ गई थि उसकेबदन मे
दासिया कि ओर देखते हुए थोडा सां मुस्कुरा उठी थि वोँ पलटकर मंदिरा औऱ रूपसा कि ओर देखा थां वोँ लोग भि अपने आपको सवारने मे लगी थि
कमरे मे एक् अजीब सां महाल थां दासिया औऱ सबकोई अपने हाथों मे आएहुए हुश्न कों सजाने लगे थें औऱ वोँ भि बड़े तरीके सें पूरा आश्रम तोँ वैसे हि सजाधजा थां हरकोई अपनीतरह सें सजाने मे लगे थें पर्र इस कमरे केँ अंदर कां माहौल कुछअलग हि थां सबकुछ सजासजा औऱ उत्तेजना सें भराहुआ कामया कि उत्तेजना तौ देखते हि बनती थि औऱ उससे अधिक रूपसा औऱ मंदिरा कि तोँ अलग हि बात थि शायद हि उन्होंने कभी सोचा होगा कि इसतरह केँ कपड़े भि वोँ पहन सकती हैं कुछ अधिक हि उत्सुक थि वोँ दोनों बड़े उत्तावाले ढंग सें एक्-एक् प्लेट्स कों जमाते हुए वोँ साड़ी कों पहनरही थि कमर केँ नीचे नाभि केँ नीचे शायद साड़ी पहनते समय अपने जिस्म कों दिखाने कि कोशिश ज़्यादा थि उन्हें बदन कां हरअंग साड़ी औऱ ब्लाउससे बाहर् कि ओरदिख रहा थां बल्कि कहिए दिखाने कि अधिक कोशिश थि रूप औऱ रंग कि मिसाल थि वोँ दोनों औऱ कामया तोँ थि हि खूबसुरात चलिएसमझ मे तोँ आँ हि गय़ा होगा कि किसतरह सें सजधजकर हौ रही थि सब
इसीतरह सजधजकर होकर तीनों गुरुजी केँ कमरे कि ओरचल दि थि कामया जानती थि कि आज वोँ बला कि सुंदर लगरही हैं उत्तेजना औऱ एक् नये अनुभव कि औऱ चल दि थि कामया अपने दोनों साइड मे रूपसा औऱ मंदिरा कों लिएहुए पीछेकुछ औऱ दासिया भि चलरही थि गुरुजी केँ कमरे कि ओर
कमरे मे पहुँचकर वोँ सब एक् माडेल कि तरहडोर केँ पास खड़ी होँ गई थि बीच मे कामया औऱ आजू बाजू मंदिरा औऱ रूपसा अंदर बैठे लोगों कि नजर जैसे हि डोर पऱ पड़ी एकदम सें सन्नाटा छा गय़ा थां उसरूम मे एक् मादक हँसी औऱ कटु मुश्कान लिए कामया औऱ रूपसा मंदिरा नें एक् बारबरी बारी सें सब लोगों कि ओर देखा थां जैसे निमंत्रण थां उसकीओर आने कां औऱ देखने कां अंदर बैठे पाँचो धरम गुरु कि तोँ सांसें रुक सि गई थि इनपरम सुंदरियो कों देखकर पर्र गुरुजी नार्मल थें
गुरुजी- अरेआओ सखीआओ आज तौ कमाल कि लगरही होँ औऱ तुम् लोग भि रूपसा औऱ मंदिरा आज सें पहले तोँ भइया हमने तुम् लोगों कों साड़ी मे नहि देखाआओ
गुरुजी उठकर खड़े होँ गये थें कामया औऱ दोनों केँ स्वागत केँ लिएधरम गुरुओं कि तौ जैसे सांसें हि रुक गई थि अपने सामने इनरूप कि देवियो कों देखकर तालुओं मे जबान चिपक गई थि औऱ एकटक उनको देखते हुए खड़ेभर होँ पाए थें
कामया आगे कि ओर बढ़ी थि गुरुजी केँ संगलग कर खड़ी हौ गई थि वहीअदा वही नजाकत वही अंगड़ाई लेतेहुए रूपसा औऱ मंदिरा भि गुरुजी केँ पासआके खड़ी हौ गई थि थोडा सां दूर गुरुजी नें अपने आगोश मे कामया कों समा लिया थां औऱ धीरे-धीरे सें अपनेगले लगाकर उसके नितंबों कों औऱ पीठ पर्र हाथ फेरते हुए
गुरुजी- कयामत लगरही होँ सखीआज तौ औऱ इन दोनों कों भि क्याँ बना दिया हैं तुमने मेरा निर्णय सही थां तुम् हि इस अश्राम कि असल मालकिन हौ आओ तुम्हें इन लोगों सें मिलवाऊ औऱ गुरुजी नें कामया कि कमर कों कसकर जकड़ लिया थां औऱ आरामसे उसकीकमर कों सहलाते हुएउन धरम गुरुओं कि ओर बढ़े थें गुरुलोग एकटकसखी कि ओरदेख रहे थें आखेंफटी कि फटीरह गई थि उनकी गुरुजी केँ संग सटने कि वजह सें कामया केँ सीने सें साड़ी हट गई औऱ बस एक् ओपचारिकता भररह गई थि औऱ कंधे पर्र पड़ाहुआ पल्लू अंतिम सांसें भररहा थां उसका अस्तित्व खतम थां क्योंकी ब्लाउज केँ अंदर सें उसकी चुचियों कि शेप औऱ ब्रा कि रंगत साफ-साफ दिखने लगी थि कामया कि सांसों केँ संगसंग उसके सीने कां उठना औऱ बैठना उनधरम गुरुओं कि हालत खराबकर रहा थां गुरुजी केँ हाथों कां अनुसरण करने सें तोँ औऱ भि गुरुजी केँ हाथजिस तरह सें कामया कि कोमल औऱ रसीले कमर पर्र घूमरहे थें वोँ एक् अजीबतरह कि उत्तेजना भररहा थां उन गुरु लोगों केँ अंदर
गुरुजी- आइए आपलोगों कों हमारी सखी सें मिलवाए यहीकल सें हमारी इस आश्रम कि सर्वे सर्वा होंगी औऱ अब आप् लोगों कीदेख भाल औऱ जरूरतो कां ध्यान रखेंगी ये हैं कामयानी देवी
औऱ कहतेहुए गुरुजी नें अपने हाथों जौ कि उसकीकमर केँ चारोओर घेराबना हुआ थां धीरे-धीरे सें उठकर कामया कि चूचियां पर्र आँ गई थें औऱ उन गुरु लोगों केँ सामने हि कामया कि चूचियां धीरे-धीरे सें मसल दि थि उन्होंने कामया नें एक् मुश्कान बिखेरते हुएउन गुरु लोगों कि ओर देखा थां गुरुजी आगे बढ़े थें
एक्- (एमनाम रखते हैं )- वाउ गुरुजी आपने तौ कमालकर दियाये कहां सें लाए हैं आप् वाउ क्याँ उत्तराधिकारी चुना हैं आपने
दो-(एचनाम रखते उनका )- गजबकर दिया गुरुजी आपने
औऱ कहतेहुए वोँ दोनों आगे बढ़े थें औऱ आगेबढ़ कर कामया देवी केँ हाथों कों अपने हाथों मे लेकर थोडा सां दबाते रहे औऱ एक् ललचाई हुईँ नजर सें गुरुजी केँ हाथों कों देखने लगे थें जौ कि कामया केँ चुचियों पऱ थें
कामया मुस्कुराती हुई बोलि
कामया- जी बैठिए गुरुलोग आपका स्वागत हैं इस अश्राम मे
कहतेहुए कामया कि नजर उनपर एक् बारघूम गई थि बड़ी हि कातिल नजर सें जौ कामया नें उन्हें देखा थां वोँ उन लोगों केँ दिल कों भेद गई थि
एम औऱ एच नें आगेबढ़ कर एक् बार कामया कों छूने कि कोशिश भि कि थि पऱ गुरुजी नें आगेबढ़ करएस औऱ क्राइ औऱ जाई केँ पास खींच लिया थां कामया कों। कामया गुरुजी केँ संग खिचते हुएउन बाकी केँ लोगों सें मिलने लगी थि उनका भि यहीहाल थां पीछे सें कामया कों अपने नितंबों मे एक् याँ दोहाथ महसूस हुए थें शायद
Kamini wrote: ↑26 Jun 2017 16:14 Very good. Ab kamya hi malkin hongi ashram कि जब sanya bhaye kotwal too अब dar kahe kaa Shuqriya
बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai – New Episode
एम औऱ एच थें वोँ अपने कों रोक नहि पाए थें उसे छूने सें बड़े हि नजाकत औऱ धीरे-धीरे सें हाथ फेरा थां उन्होंने एक् एहसास भर लें पाए थें कामया कि कोमलता कां एक् बड़ा हि सुखद औऱ सुख दाईं एहसास कामया औऱ उन लोगों केँ अंदरसमा गय़ा थां कामया गुरुजी कि आगोश मे हि उन लोगों सें मिलकर गुरुजी केँ पाससट करबैठ गई थि मंदिरा औऱ रूपसा भि उनकेपास खड़ी होकर सामने बैठेउन गुरुओं कों अपने हुश्न कां जलवा बिखेर रही थि औऱ उन गुरुओं कि हालत देखने लायक थि एक् हवस सें भरी हुइ दृष्टि उन महिलाओं पर्र डाली किसीतरह सें अपने आपको संभाले हुए बैठे थें लगता थां कि अगरजरा भि मौका मिले तौ चीर फाड़कर रखदे अभि इन तीनों कों
गुरुजी- तौ धरम केँ ठेकेदारो ये हैं हमारी सखी जोँ कि कल सें आप् लोगों कि सेवा मे इसदेश कों अपना दर्शन देगी औऱ आज आप् लोगों केँ लिएये सिर्फ़ कामया हैं पऱ कल सें आप् लोगों कों यहीसब आदेश औऱ रास्ता दर्शन देगीबस आपलोग इनकासंग देते रहिए औऱ इस अश्राम कि उन्नति केँ लिए जोँ भि करेंगे वोँ इन्हें मान्य होगाहाँ औऱ एक् बातआज केँ बाद सें जौ भि आपकी ख़्वाहिश याँ फिन डिमँड होगी वोँ भि कामया देवी हि पूरा करेंगी औऱ आपलोगों कों इनसे हि मिलना होगा हम् तोँ भइयाकल सें परदेसी हौ जाएँगे हिहिहीः
कहतेहुए अपनेपास बैठी हुईँ कामया केँ बदन पऱ अपनाहाथ कों घुमा लिया थां उसकेपीठ औऱ फिन थोडा सां पास खींचते हुए उसकी छाती पऱ भि
क्राइ- गुरुजी वोँ तौ ठीक हैं पर्र हम् पर्र भि थोडा दया कीजिए प्लीज वीआर आल्सो इन लाइन
गुरुजी- हाहाहा क्यूं नहि क्राइ यू पीपलआर कोल्ड हियरफार हविंग फनआंड वीआलनो वाइवी आर हियरफार प्लीज वेट लेट्स हव डिनरदॅन वीआलकन टुगेदर हव औऱ मीटिंग वीआर हविंग आल नाइट डियरसो डान’तगेट उत्तेजित सेवइट फारदा लेटर हिहिहीः
एस-अरे सरजी बहोत होँ गय़ा अब तौ हमें भि थोडा सां मौका दीजिए क्यूं भइयालोग
बाकी केँ लोगों नें भि सर कां संग दिया थां औऱ एक् संगचल दिए थें हाँ…हाँ…
गुरुजी नें इशारे सें रूपसा औऱ मंदिरा कों आगे बढ़ने कों कहा औऱ मंदिरा औऱ रूपसा इठलाती हुइ उन लोगों केँ पास पहुँच गई थि औऱ जाकर उनके सामने खड़ी हौ गई थि एस औऱ क्रिस तौ संग बैठे थें एक् झटके सें रूपसा कों अपनेपास खींच लिया थां औऱ अपनेबीच मे बिठा लिया थां औऱ अपनेहाथ उसके जिस्म पर्र घुमाने लगे थें एक् मादक हँसीउस कमरे मे फैल गई थि
एम कां भि यहीहाल थां बसजाई थोडा सां अलगपड़ गय़ा थां वोँ भि कहां चुप रहने वाला थां वोँ भि दौड़कर मंदिरा पऱ टूट पड़ा थां नीचे हि बैठ गय़ा थां औऱ अपनेहाथ उसकी जाँघो औऱ पेट तक लें गय़ा थां लगता थां कि किसीतरह सें बस अपनीहवस कों शांतकर लेना चाहते थें औऱ कुछ नहि बाहर् कि दुनिया केँ ये चेहरे जोँ कि धरम औऱ नाटकीयता कां पाठ पढ़ाने वालों कि तरह केँ होंगे येकोई नहि जानता थां आजयेरूम शायद उनके नंगेपन कां एक् गवाहबन सकता थां
ये तौ तय थां कामया बैठी हुई गुरुजी केँ हाथों कां आनंद लें रही थि औऱ सामने हौ रहेखेल कों बड़ेमजे सें देखरही थि उसके अंदर कां शैतान अब आरामसे जागउठा थां हवस कां वोँ खेल कां हिस्सा बनने कों सजधजकर थि वोँ एक् अजीब सां एहसास उसके अंदर उठनेलगा थां गुरुजी केँ हाथों कां स्पर्श उसके अंदर एक् अजीब सि हलचलमचा रहा थां सामने मंदिरा औऱ रूपसा कि साड़ी तौ कब कि हवा होँ चुकी थि सिर्फ़ पेटीकोट औऱ ब्लाउसमें वोँ दोनों उनकीगोद मे बैठी हुई अपने होंठों कां रसपान करारही थि कोई उनकी जाँघो कों किसकर रहा थां तोँ कोई ब्लाउज केँ ऊपर सें उनकी चूचियां चूसरहा थां कोई अपने लिंग कों उनसे सटाने कि कोशिश मे थां तौ कोई, अपने हाथों मे जितना होँ सके उनकेरूप कों समेट लेना चाहता थां
कामया कि उत्तेजना बढ़ती जारही थि उसके सामने इसखेल कों वोँ औऱ नहि देखपाई थि औऱ एक् झटके सें उठ गई थि गुरुजी केँ हाथों सें फिसलकर गुरुजी कों कुछ कहती इससे पहले हि
कामया- चलिएअब खानां खा लेते हैं गुरुलोग आप् लोग तोँ अभि सें हि उत्तावाले हौ गये हैं अभि तौ पूरीरात बाकी हैं औऱ
कहतेहुए उसने अपनीबात आधी हि छोड़ दि औऱ अपने सीने सें आचालहटा दिया औऱ अपनेरूप कि एक् झलकउन गुरु लोगों कों दिखाकर मुस्कुराती हुईँ खड़ीरही रूपसा औऱ मंदिरा कों छोड़ सबसे पहलेजाई उठा थां औऱ दौड़कर कामया सें चिपक गय़ा थां औऱ अपनी हथेली कों उसकीकमर पर्र रखतेहुए उसकी नर्मी औऱ कोमलता कों महसूस करनेलगा थां एक्-एक् करसब अपनेपास आईइस सुंदरता कि देवी कि ओर आग्रसर हौ गये थें औऱ कामया घेरकर उसके जिस्म पर्र अपने हाथों कों घुमाने लगे थें एक् उत्तेजित करने वाली हँसी केँ संग एक् लंबी सि अहहउस कमरे मे गूँज गई थि कामया नें भि आगेहाथ बढ़ाकर पहलेजाई फिन एक्-एक् करकेसब कों अपने सीने सें लगाया थां औऱ उनके होंठों पर्र अपने होंठों कां रखकर उन्हें वोँ अमृतपान कराया थां जिसकी जरूरत उनसे ज़्यादा उसे थि
कामया कों इसतरह सें करते देखकर गुरुजी भि एक् बार स्तब्ध रहगये थें पऱ एक् मुश्कान उनके चहरे पर्र भि दौड़ गई थि वोँ जानते थें कि कामया अब उनके हाथों कि कठपुतली नहि हैं वोँ अबइस अश्राम कि मालकिन हौ गई हैं औऱ वोँ भि अब उसके इशारे पऱ हि चलेंगे हाँ क्यूं नहि आज तक तोँ वोँ सब कों आपने इशारे मे छल्लते रहे हैं तौ आजइस खूबसूरत औरत केँ सामने झुकने मे क्याँ हर्ज हैं गुरुजी अपने सामने हौ रहेइस खेल कों देखरहे थें औऱ उठकरइस खेल मे शामिल होनेलगे थें खड़े होकर वोँ भि आगे बढ़े थें औऱ अपने सामने आएकौन थां नहि पता हटाकर अपनाहाथ कामया केँ पेट पऱ रखतेहुए उसे अपनीओर घुमा लिया थां उसके होंठों कों झट सें अपने होंठों मे समेट लिया थां औऱ कसकरउसे पकड़कर, एक् लंबा सां चुंबन उसके होंठों पऱ कर लिया थां हान्फते हुए कामया उनसेअलग हुइ थि तब तक उसे किसी औऱ नें अपनीओर खींच लिया थां पऱ कामया हँसती हुई इठलाती हुइ सब कों उनका हिस्सा देने मे व्यस्त थि कौन कहां हाथलगा रहा थां उसे नहि पता थां पर्र एक् संग इतने सारेहाथ औऱ हर एक् कां कुछअलग अंदाज। मजे हि मजे हौ गये थें कामया केँ तौ आखेंबंद किए कमाया उन लोगों कां लुफ्त लें हि रही थि कि अचानक हि उसके हाथों मे गर्म-गर्म लिंग कां स्पर्श होनेलगा थां आँखे खोलने कि जरूरत नहि थि हाँ पर्र झट सें हाथों मे आएहुए लिंग कों पकड़ जरूर लिया थां गर्म-गर्म औऱ कड़ा सां वोँ लिंगउसे अच्छा लगा थां
उसकी साड़ी कां कहीपता नहि थां नीचे भि शायदकोई बैठा थां एक् नहि दो थें याँ पता नहि वोँ नहि जानती थि पर्र हाँ…दो जोड़ी हाथ उसके पेटीकोट केँ अंदर जरूर घूमते हुए उसकी योनि औऱ जाँघो कों छूरहे थें फिन होंठों नें भि संग देना शुरुआत कर दिया थां पैंटी केँ अंदर तक उंगलियां घूमने लगी थि थोडा सां जाँघो कों खोला थां कामया नें होंठों पर्र टूटेहुए किस कों मना नहि किया थां पीठ कि ओर सें घूमेहुए हाथ उसकी चूचियां निचोड़ रहे थें कमर केँ नीचे सें एक् हलचल मचाने वाली उंगलियां औऱ हरकही हाथ औऱ गीलापन एक् अजीब सि उत्तेजना सें भरी हुइ कामया हाथों मे आएहुए लिंग कों कुचल देना चाहती थि कि अचानक हि उसके हाथों कों गीलाकरते हुए एक् लिंग मुरझाने लगा थां औऱ फिन दूसरे लिंग कि बारीआई थि फिन दोनों हाथों मे एक्-एक् औऱ नीचे कि ओर सें, एक् केँ बाद एक् करतेहुए जीब सें उसकी योनि कों चाट-ते हुए उसकी अंदर कि उत्तेजना कों बढ़ाने लगे थें कामया होंठों कों अलग करतेहुए अजीब सि चीत्कार करती हुईँ अपने हाथों मे आएहुए लिंग कों निचोड़ देना चाहती थि औऱ कर भि रही थि आगे पीछे करती हुई कामया अपनी जाँघो कों पूरा खोलकर उनकीजीब कों पूरा स्वाद देने कों कोशिश करतीजा रही थि औऱ अपनेहठो कों आगे पीछे करती हुइ उनके लिंग कों भि पूरा सम्मान देरही थि
पीछे सें हाथों नें उसकी चूचियां निचोड़ना जौ शुरुआत कर दिया थां औऱ उसके कानों मे कुछ कहने कि भि आवाज़ आँ रही थि पऱ ध्यान नहि दिया थां उसने वोँ अवश्य उत्तेजना मे हि कहरहा थां वोँ जोँ भि थां पीछे क्याँ फरक पड़ता हैं पड़ता हैं तौ सिर्फ़ अपनीहवस कों शांत करने कि कोशिश बस थोडा सां औऱ उसके हाथों मे आएहुए लिंग भि आरामसे शांत हौ गये थें औऱ फिन उसकी चीत्कार उस कमरे मे गूंजने लगी थि नीचे बैठेहुए लोगअब धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसकी योनि कों चाटते हुएआगे बढ़ते कि अचानक हि एक् सक्सउठा औऱ कामया कों कसकर पकड़ लिया औऱ उसे खींचने लगा पर्र नीचे बैठेहुए सक्स नें नहि छोड़ा कामया खिंचते हुए नीचे कि ओरबैठ गई थि
वोँ सक्स अधिक बलवान थां होंठों पर्र ऐसेटूट हुआ थां कि अपनी उत्तेजना कों शांत नहींकर पारहा थां आखें खोला तोँ तौ एस थां दाढ़ी औऱ बालखुल गये थें पर्र थां पूरा सांड़ जोर इतना थां कि निचोड़ कररखदे पऱ जैसे हि कामया कि उंगलियां उसके लिंग पर्र कसी कि वोँ एकदम सें शांत हौ गय़ा थां एक् झटके सें उसके लिंग केँ अंदर सें उठताहुआ ज्वार उसके बाहर् आँ गय़ा थां कामया कुछ करती इससे पहले हि वोँ कामया सें लिपटकर झड़ने लगा थां नीचे बैठाहुआ सक्स भि तब तक अपनीहवस कों शांत करने कि कोशिश करनेलगा थां अब तक चारजने शांत हौ गये थें औऱ शायदकही होंगे पऱ कामया कि चीत्कार अबपूर जोश मे थि जैसे हि उस सक्स नें उसे छोड़ा थां कामया आतुर हौ उठी थि औऱ अपनी योनि कों फिन सें उसके होंठों पऱ रखने कों लालायित हौ उठी थि
मगर कामया कुछ कहती इससे पहले हि वोँ सक्स अपने लिंग कों झूलाए हुए उसके सामने खड़ा हौ गय़ा थां कामया नें भि कोईदेर नहि कि झट सें अपने होंठों केँ अंदरकर लिया थां उसके लिंग कों औऱ तेज़-तेज़ सें अपनीजीब सें उसे चूसने लगी थि तभी गुरुजी कों अपनीओर आते देखा थां उसने औऱ बिनाकुछ कहे हि कामया नें बैठे हि अपनी जाँघो कों खोल दिया थां खड़ेहुए गुरुजी कों अपनी योनि केँ दर्शन देतेहुए औऱ आखों सें उन्हें इशारा भि किया कि आओ औऱ मुझेसुख दो बिनाकुछ कहे सिर्फ़ मुख निमंत्रण मे हि गुरुजी कामया कि जाँघो कों खोलकर धीरे-धीरे सें उसके अंदरसमा गये थें एक् लंबी सि अहह भरती हुई कामया औऱ आगे बढ़ी थि औऱ एक् झटके सें अपनेमुख मे लिएहुए लिंग कों अपने दाँतों सें काट लिया थां औऱ हाथो कों कसकर आँडकोष पर्र दबाते हुए अपनीजीब कों इसतरह सें उसके लिंग मे फेरा थां कि वोँ औऱ नहि रुक पायाझट सें ढेर सारा वीर्य छोड़कर हाँफने लगा थां
कामया मुँह घुमाकर गुरुजी कि ओर देखने लगी थि गुरुजी जौ कि उत्तेजित तौ थें हि कामया कां खेल देखकर वोँ औऱ ज़्यादा उत्तेजित होँ गये थें कामया कि भि हां हि थि औऱ जैसे हि गुरुजी कां लिंग उसकी बुर केँ अंदर गय़ा थां एक् बार भि उसने अपने आपको रोकने कि कोशिस नहि कि थि औऱ पूरेजोर सें एक् हि झटके मे पूरा कां पूरा लिंग अंदरसमा लिया थां औऱ गुरुजी केँ हर धक्के कां जवाब भि देनेलगी थि हाथों मे मुख मे औऱ शायद ब्लाउज केँ ऊपर बालों मे हरकही वीर्य केँ कुछ निशान उसकेऊपर दिखरहे थें पर्र गुरुजी केँ संग-संग कामया भि कोईफरक नहि पड़ता थां वोँ तोँ बस अपनी अग्नि कों शांत करना चाहते थें औऱ उन्होंने वोँ किया भि एक् संगदो आवाज़ उस कमरे मे फेल गई थि आअह्ह
हाँफने कि आवाज़ एक् परम शांति कि आवाज़ औऱ एक् शांत सां वातावरण होँ गय़ा थां उस कमरे मे
बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai - Continue reading next part
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Kamini wrote: ↑03 Jul 2017 08:43 Mast update waiting next Shuqriya
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