मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग - Mela Ki Chudai - Real Story Continue Part 1
मेले केँ रंग सासू, बहू औऱ ननदी केँ साथ
बातयूँ थि कि हमारे मामाजी कां घऱ हाज़ीपुर ज़िले मे थां.ज़िला सोनपुर
मे हरसाल, मानाहुआ मेला लगता हैं। हरसाल कि भाँति इससाल
भि मेला लगने वाला थां। मामाजी कां खतआया कि दिदी औऱ वीना बिटिया
कों भेजदो। हम् लोग मेला देखने जाएँगे। येलोग भि हमारे संग
मेलादेख आएँगे। पैर बापू नें कहा कि तुम्हारी दिदी [यानी कि मेरी माँ] कां आनां तौ मुश्किल हैं पर्र वीना कों तुम् आकेर लें जाओ, उसकी मेला घूमने कि
ख़्वाहिश भि हैं। तौ फिन मामाजी आए औऱ मुझे अपनेसंग लें गये.दो
दिन हम् मामाजी केँ घऱरहे औऱ फिनवहा सें मे यानी कि वीना, मेरी
मामीजी, मामाजी औऱ भाभी मीना[कज़िन'स वाइफ]आंड सेरवेंट रामू,
इत्यादि लोग मेले केँ लिएचल पड़े.
सनडे कों हम् सभी मेला देखने निकल पड़े। हमारा प्रोग्राम 8 दिन कां
थां। सोनपुर मेले मे पहुँच कर देखा कि वहा रहने कि स्थान नहीं
मिल रही थि। बहोत ज्यादा भीड़ थि। मामाजी कों यादआया कि उनके हि
गाओं केँ रहनेवेल एक् मित्र नें यहा पर्र घऱबना लिया हैं सो सोचा
कि चलो उनकेयहा चलकर देखाजाए। हम् मामाजी केँ यार यानी कि
विश्वनथजी केँ यहाचले गये। उन्होने जल्दी हमारे रहने कि
व्यवस्था अपनेघऱ केँ उपर केँ एक् कमरे मे कर दि। इस वक्त
विश्वनथजी केँ अलावा घऱ पऱ कोई नहीं थां। सभीलोग गाओं मे अपने
घऱ गयेहुए थें। उन्होने अपना रसोई भि खोल दिया, जिसमे खाने-
पीने केँ बर्तनो कि सुविधा थि.
वहा पहुँच करसभी लोगों नें खानां बनाया औऱ औऱ विश्वनथजी कों
भि बुलाकर खिलाया। खानां खाने केँ बाद हम् लोग आराम करनेगये.
जब हम् सभी बैठे बातें कररहे थें तौ मैने देखा कि
विश्वनथजी कि निगाहें बार-बार भाभी पऱ जा टिकती थि। औऱ जब भि
भाभी कि नज़र विश्वनथजी कि नज़र सें टकराती तोँ भाभी शर्मा
जाती थि औऱ अपनी नज़रें नीचीकर लेती थि। दोपहर लगभग 2
बजे हम् लोग मेला देखने निकले। जब हम् लोग मेले मे पहुँचे तोँ
देखा कि काफ़ी भीड़ थि औऱ बहोत धक्का-मुक्की होँ रही थि। मामाजी बोले
कि आपस मे एक् दूसरे कां हाथ पकड़कर चलो वरनाकोई इधर-उधर
हौ गय़ा तौ बड़ी मुश्किल होगी। मैने भाभी कां हाथ पकड़ा, मामाजी-मामीजी
औऱ रामूसंग थें.
मेलादेख रहे थें कि अचानक किसी नें पीछे सें गांद मे उंगली
कर दि। मे एकदम बिदक पड़ी, कि उसी वक्त सामने सें क़िस्सी नें मेरी
मम्मों दबा दि। कुच्छ आगे बढ़ने पऱ कोई मेरी बुर मे उंगली कर
निकल भागा। मेरा जिस्म सनसना रहा थां। तभीकोई मेरी दोनो
चूचियाँ पकड़कर कान मे फुसफुसाया - 'हाई मेरीजान' कहकर
हू आगेबढ़ गय़ा। हम् कुच्छ आगे बड़े तौ वोही व्यक्ति फिन आक़र
मेरी थाइस मे हाथडाल मेरी बुर कों अपनेहाथ केँ पूरे पंजे सें
दबाकर मसल दिया। मुझे लड़की होने कि गुदगुदी कां अहसास होने
लगा थां। भीड़ मे वोँ मेरे पीछे-पीछे संग-संग चल
रहा थां, औऱ कभी-कभी मेरी गांद मे उंगली घुसाने कि कोशिश कर
रहा थां, औऱ मेरे छूतदों कों तौ उसने जैसे बाप कां मालसमझ कर
दबोचरखा थां। अबकी धक्का-मुक्की मे भाभी कां हाथ छ्छूट गय़ा
औऱ भाभीआगे औऱ मे पीछेरह गई,। भीड़ काफ़ी थि औऱ मे
भाभी कि तरफगौर करके देखने लगी। वोँ पीछे वाला व्यक्ति
भाभी कि टाँगों मे हाथडाल कर भाभी कि बुर सहलारहा थां.
भाभी मज़े सें बुर सहल्वाति आगेबढ़ रही थि। भीड़ मे किसे
फ़ुर्सत थि कि नीचे देखे कि कौन क्याँ कररहा हैं। मुझेलगा कि
भाभी भि मस्ती मे आँ रही हैं। क्योकि वोँ अपने पीछे वाले व्यक्ति
सें कुच्छ भि नहींकह रही थि। जब मे उनके बराबर मे आई औऱ
उनकाहाथ पकड़कर चलनेलगी तोँ उनके मुह्न सें हाई कि सि आवाज़ निकल
कर मेरे कनों मे गूँजी। मे कोई बच्ची तौ थि नहीं, सभी
समझरही थि। मेरातन भि छेड़-छाड़ पाने सें गुदगुदा रहा थां.
तभी किसी नें मेरी गांद मे उंगली कर दि। ज़रा कुच्छ आगे बढ़े तौ
मेरी दोनो बगलों मे हाथडाल कर मेरी चूचियों कों कसकर पकड़
कर अपनीतरफ खींच लिया.इस तरह मेरी चूचियों कों पकड़कर
खींचा कि देखने वाला समझे कि मुझे भीड़-भाड़ सें बचाया हैं.
साम कां वक्त होँ रहा थां औऱ भीड़ बढ़ती हि जारही थि। इतनी
देर मे वोँ पीछे सें एक् रेला सां आया जिसमे मामाजी मामीजी औऱ रामू
पीछेरह गये औऱ हम् लोगआगे बढ़ते चलेगये। कुच्छ देरबाद
जब पीछेमूड कर देखा तौ मामाजी मामीजी औऱ रामू कां कहींपता हि
नहीं थां। अब हम् लोग घबरागये कि मामाजी मामीजी कहां गये। हम् लोग
उन्हे ढूँढरहे थें कि वोँ लोग कहां रहगये औऱ आपस मे बात
कर रहे थें कि तभीदो व्यक्ति जौ काफ़ी देर सें हमे ताड़रहे थें औऱ
हमारी बातें सुनरहे थें वोँ हमारे पासआए औऱ बोले तुम् दोनो
यहा खड़ी हौ औऱ तुम्हारे सासू माँ ससुरजी तुम्हें वहाखोज रहे हें.
भाभी नें पूचछा, कहां हैं वोँ? तोँ उन्होने कहा कि चलो हमारे
संग हम् तुम्हे उनसे मिलवा देते हैं। {भाभी कां थोडा घूँघट थां.
उसी घूँघट केँ अंदाज़े पर्र उन्होने कहा थां जौ क़िसच बैठा} हम्
उन दोनो केँ आगे चलनेलगे। संग चलते-चलते उन्होने भि हमे छ्चोड़ा नहीं बल्कि भीड़ होने कां फायेदा उठाकर कभीकोई मेरी गांदपैर हाथ फिरा देता तौ कभी दूसरा भाभी कि कमर सहलाते हुएहाथ ऊपेर तक लेँ जकेर उसकी चूचिओ कों छू लेता थां। एक् दोबार जबउस दूसरे वाले व्यक्ति नें भाभी कि चूचियों कों ज़ोर सें भींच दिया तोँ नां चाहते हुए भि भाभी केँ मुँह सें अहह सि निकल गई, औऱ फिन जल्दी हि संभलकेर मेरीतरफ देखते हुए बोलीं कि इस मेले मे तौ जान कि आफ़त हौ गयीँ, हैं, भीड़ इतनी ज़्यादह होँ गई, हैं कि चलना भि मुश्किल हौ गय़ा हैं.
मुझेसभी समझ मे आँ रहा थां कि साली कों मजा तौ बहोत आरहा हैं पऱ मुझे दिखाने केँ लिएसती सावित्री बनरही हैं। पर्र अपने कों क्याँ गम, मे भि तौ मज़े लें हि रही थि औऱ येबात शायद भाभी नें भि नोटीस करली थि तभी तौ वोँ ज़रा अधिक बेफिकर होँ कर मज़ेलूट रही थि। वोँ कहते हैं नां कि हमाम मे सब नंगे होते हें। मैने भि नाटक सें एक् बड़ी हि बेबसी भरी मुस्कान भाभीतरफ उच्छाल दि.इसतरह हम् कब मेला छ्चोड़ करआगे निकलगये पता हि नहींचला।
मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग - Mela Ki Chudai – New Episode
काफ़ी आगे जाने केँ बाद भाभी
बोलि ' वीना हम् कहां आँ गये, मेला तोँ काफ़ी पीछेरह गय़ा। ये
सुनसान सि स्थान आतीजा रही हैं, तुम्हारे मामाजी मामीजी कहां हैं?'
तभी वोँ व्यक्ति बोला कि वोँ लोग हमारे घऱ हैं, तुम्हारा नाम वीना
हैं नां, औऱ वोँ तुम्हारे मामाजी मामीजी हैं, वोँ हमेकह रहे थें कि
वीना औऱ वोँ कहां रहगये। हमनेकहा कि तुम् लोगघऱ पर्र बैठो
हम् उन्हें ढूँढकर लाते हें। तुम् हमको नहीं जानती हौ पर्र हम्
तुम्हे जानते हें। येबात करतेहुए हम् लोग औऱ आगेबढ़ गये थें.
वहा पर्र एक् वाहन खड़ी थि। वोँ लोग बोले कि चलो इसमेबैठ जाओ,
हम् तुम्हे तुम्हारे मामाजी मामीजी केँ पास लेँ चलते हें। हमने देखा कि
गाड़ी मे दो व्यक्ति औऱ भि बैठेहुए थें[ औऱ मुझेबाद मे ये
बात यादआई कि वोँ दोनो व्यक्ति वही थें जोँ भीड़ मे मेरी औऱ
भाभी कि गंद मे उंगली कररहे थें औऱ हमारी चूचियाँ दबा
रहे थें}। जब हमने जाने सें इनकार किया तोँ उन्होने कहा कि घबराओ
नहीं देखो हम् तुम्हे तुम्हारे मामाजी-मामीजी केँ पास हि लेँ चलरहे हैं औऱ
देखो उन्होने नें हि हमेसभी कुच्छ बताकर तुम्हारी खबर लेने केँ
लिएहमे भेजा हैं अब घबराओ मत औऱ वाहन मे बैठजाओ तोँ जल्द
सें तुम्हारे मामाजी- मामीजी सें तुम्हें मिलादे। कोई चारा नां देख हम् लोग
कार मे बैठगये। उन लोगों नें वाहन मे भाभी कों आगे कि सीट
पऱ दो आदमियों केँ बीच बैठाया औऱ मुझे भि पीछे कि सीट पऱ
बीच मे बिठाकर वोँ दोनों मुशटंडे मेरी अगल-बगल मे बैठ
गये। वाहन थोड़ी दूरचली कि उनमे सें एक् व्यक्ति कां हाथ मेरी मम्मों
कों पकड़कर दबाने लगा, औऱ दूसरा मेरी मम्मों कों ब्लाउस केँ ऊपेर
सें हि चूमने लगा। मैने उन्हे हटाने कि कोशिश करतेहुए कहा ' हटो
ये क्याँ बदतमीज़ी हैं.' तौ एक् नें कहा'ये बदतमीज़ी नहीं हैं मेरी
जान, तुम्हे तुम्हारे मामाजी सें मिलाने लें जारहे हें तौ पहले हमारे
मामाओ सें मिलोफिन अपने मामाजी सें। जब मैनेआगे कि तरफ देखा तोँ
पाया कि भाभी कि ब्लाउस औऱ ब्रा खुली हैं औऱ एक् व्यक्ति भाभी कि
दोनो चूचियाँ पकड़े हैं औऱ दूसरा भाभी दोनो टाँगे फैलाकर
सारी औऱ पेटिकोट कमर तक उठाकर उनकी बुर मे उंगली डालकर
अंदर बहेरकर रहा हैं भाभीइन दोनो कि पकड़ सें निकलने कि कोशिश
कररही हैं पऱ निकल नहींपा रही हैं। उनके लीडर नें कहा कि '
देखो मेरीजान, हम् तुम्हे चोदने केँ लिएलाए हें औऱ चोदे बिना
छ्चोड़ेंगे नहीं, तुम् दोनो राज़ी सें चुदओगि तौ तुम्हे भि मजा आएगा
औऱ हमे भि, फिन तुम्हे तुम्हारे घऱ पहुंचा देंगे। अगर तुम्
नखरा करोगी तोँ तुम्हे ज़बरदस्ती चोद केँ जान सें मारकर कहींडाल
देंगे। औऱ मेरी भाभी सें कहा कि' तुम् तोँ चुदाई कां मजा लेती हि
रही होँ, इतनामजा किसी औऱ चीज़ मे नहीं हैं, इसलिये चुपचाप स्वयं
भि मजाकरो औऱ हमे भि करनेदो.
इतनासुन कर औऱ जान केँ भय सें भाभी औऱ मे दोनो हि शांतपड़
गये। भाभी कों शांत होतेदेख कर वोँ जौ भाभी कि टांग पकड़े
बैठा थां वोँ भाभी कि बुर चाटने लगा, औऱ दूसरा कस-कसकर
भाभी कि चूचियाँ मसलरहा थां। भाभी सि-सि करनेलगी.
भाभी कों शांत होतेदेख मे भि शांत हौ गई, औऱ चुपचाप उन्हे
मजा देनेलग गयीँ, [?] मेरी भि बुर औऱ मम्मों दोनो पऱ हि एक् संग
आक्रमण हौ रहा थां। मे भि सीस्या रही थि.तभी मुझे जोरों कां
दर्दहुआ औऱ मैनेकहा ' हाईयह तुम् क्याँ कररहे होँ?'
क्यूं मजा नहीं आँ रहा हैं क्याँ मेरीजान? ऐसा कहतेहुए उसने मेरी
चूचियों कि घूंड़ी[निपल} कों छ्चोड़ मेरी पूरी मम्मों कों भोंपु
कि तरह दबाने लग गय़ा। मे एकदम सें गन्गना करहाथ पावं सिकोड
ली। दूसरा वालाअब मेरे नितंबो[बट्स} कों सहलाते हुए मेरीगंद केँ
छेद पर्र उंगली फिरारहा थां.
'चीज़े तौ बड़ी उम्दा हैं दोस्त', टाँग पकड़कर मौज करने वाले नें
कहा.
'एकदम प्योर् देहाती माल हैं' दूसरे नें कहा
मे थोडा हिली तोँ दूसरा वाला मेरी चूचियों कों कसकर दबाते हुए
मेरेमूह सें हाथहटा कर ज़बरदस्ती मेरे होंटो पऱ अपने होन्ट रख
कर ज़ोर सें चुंबन लिया कि मे कसमसा उठी.फिन मेरे गालों कों
मूह मे भरकर इतनी ज़ोर सें दन्तो सें काटा कि मे बूरीतरह सें
छॅट्पाटा उठी.ऐसा लगरहा थि कि मेरी मस्त जवानी पाकर दोनो
बूरी तरहा सें पागला गये थें। मे बूरीतरह छॅट्पाटा रही थि
तभी दूसरे नें मेरी बुर मे उंगली करतेहुए कहा कि ' बड़ी
जालिम जवानी हैं, खूबमजा आएगा। बोलो मेरी बुलबुल क्याँ नाम हैं
तुम्हारा?
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तभी दूसरे वाले नें कहा अर्रे बूढू इसकानाम वीना हैं। उन दोनो
मे सें एक् मेरे नितंबों मे उंगली करे बैठा थां, औऱ दूसरा मेरी
चूचियों औऱ गालों कां सत्यानाश कररहा थां औऱ मे डरी-सहमी
सें हिरनी कि भाँति उन दोनो कि हरकतों कों सहनकर रही थि। वैसे
झूठ नहीं बोलूँगी क्योंकि मजा तौ मुझे भि आँ रहा थां पर्र उस वक्त
डर भि अधिकलग रहा थां। मे दोहरे दबाव मे अधमरी थि। एक्
तरफ़ शरारत कि सनसनी औऱ दूसरी तरफ इनके चंगुल मे फँसने
कां भय-.वोँ मस्त आँखो सें मेरे चेहरे कों निहार रहे थें औऱ एक् संग
मेरी दोनो गदराई चूचियों कों दबाते कहा चुपचाप हम् लोगों कों
मजा नहीं डोगी तौ हम् तुम् दोनो कों जान सें मार देंगे.तेरी जवानी तोँ
मस्त हैं। बोल अपनी मर्ज़ी सें मजा देगी कि नहीं?
कुच्छ भि हौ मे सयानी तौ थि हि, उनकीइन रंगीन हरकतों कां असर
तोँ मुझ पऱ भि होँ रहा थां.फिन मैने भाभी कि तरफ देखा,। आगे
वाले दोनो आदमियों मे सें एक् मेरी भाभी केँ गाल पर्र चूमी- बॅट्क
भररहा थां औऱ जोँ ड्राइवर थां वोँ उनकी बुर मे उंगली कररहा
थां। उन दोनो नें मेरी भाभी कि एक् एक् थाइ अपनी थाइस केँ नीचेदबा
रखी थि औऱ साडी औऱ पेटिकोट कमर तक उठाया हुआ थां। औऱ
भाभी दोनो हाथों मे एक्-एक् लन्ड पकड़ केँ सहलारही थि। उन दोनो
केँ खड़े मोटे-मोटे लंडो कों देखकर मे डर गयीँ, कि अब क्याँ होगा.
तभी उनमे सें एक् नें भाभी सें पूचछा' बोलो रानीमजा आँ रहा हैं नाँ?
औऱ मैने देखा कि भाभीमजा करतेहुए नखरे केँ संग बोलीं 'उन्हहाँ'
तब उसनेकहा ' पहले तौ नखराकर रही थि, पर्र अब तोँ मजा आँ
रहा हैं नां, जैसा हम् कहेंगे वैसा करोगी तौकसम ईश्वर कि
पूरामजा लेकर तुम्हे तुम्हारे घऱ पहुंचा देंगे। तुम्हारे घऱ किसी
कों पता भि नहीं लगेगा कि तुम् कहां सें आँ रही हौ। औऱ नखरा
करोगी तौ समय भि खराब होगा औऱ तुम्हारी हालत भि औऱ घऱ भि
नहीं पहून्च पाओगि। जोँ मजा राज़ी-खुशी मे हैं वोँ ज़बरदस्ती
मे नहीं.
भाभी - ठीक हैं हुमको जल्द सें कर केँ हमेघऱ भिजवा दो.
भाभी कि ऐसीबात सुनकर मे भि ढीलीपड़ गयीँ,। मैने भि कहा
कि हमे जल्द सें करो औऱ छ्चोड़ दो.
इतने मे हि वाहन एक् सुनसान स्थान पर्र पहुँच गई, औऱ उन लोगों नें
हमे वाहन सें उतारा औऱ गाड़ी सें एक् बड़ा सां ब्लंकेट निकाल कर थोड़ी
समतल सि स्थान पर्र बिच्छाया औऱ मुझे औऱ भाभी कों उस पर्र लिटा
दिया.अब एक् व्यक्ति मेरे लगभगआया औऱ उसने पहले मेरी ब्लाउस औऱ
फिन ब्रा औऱ फिन बाकी केँ सब कपड़े उतारकर मुझे पूरीतरह सें
नंगा किया औऱ मेरी चूचियों कों दबाने लगा। मे गनगना गई,
क्योंकि जिंदगी मे पहलीबार किसी पुरुष कां हाथ मेरी चूचियों पऱ
लगा थां। मे सीस्या रही थि। मेरी बुर मे कीड़े चलनेलगे थें.
मेरेसंग वाला व्यक्ति भि जोश मे भर गय़ा थां, औऱ पागलों केँ समान
मेरेबदन कों चूमचाट रहा थां.मेरी बुर भि मस्ती मे भर
रही थि। वोँ काफ़ी देर तक मेरी बुर कों निहार रहा थां। मेरी बुर
केँ ऊपेर भूरी-भूरी झांटेन उगआई थि। उसने मेरी पाव-रोटी जैसी
फूली हुई बुर पऱ हाथ फेरा तौ मस्ती मे भरउठा औऱ झूककर
मेरी बुर कों चूमने लगा, औऱ चूमते-चूमते मेरी बुर केँ टीट
{क्लाइटॉरिस} कों चाटने लगा.अब मेरी बर्दाश्त केँ बाहर् हौ रहा थां औऱ
मे ज़ोर सें चीत्कार रही थि। मुझेऐसी मस्ती आँ रही थि कि मे
कभी कल्पना भि नहीं कि थि.
वोँ जितना हि अपनी जीभ{टंग} मेरी कुँवारी बुर पर्र चलारहा
थां उतना हि उसकाजोश औऱ मेरामजा बढ़ता जारहा थां। मेरी बुर
मे जीभ घुसेड कर वोँ उसे चक्कर घिन्नी कि मानिंद घुमारहा थां,
औऱ मे भि अपने चूतड़ ऊपेर उचकाने लगी थि। मुझे बहोत मजा आँ
रहा थां। इस खुशी कि मैनेकभी ख्वाब मे भि नहीं कल्पना कि
थि। एक् अजीबतरह कि गुदगुदी होँ रही थि
फिन वोँ कपड़े खोलकर नंगा हौ गय़ा। उसका लन्ड भि खूब लंबा औऱ
मोटा थां लन्ड एकद्ूम टाइट होकेर साँप कि भाँति फुंफ़कार रहा थां.औऱ
मरी बुर उसका लन्ड खाने कों बेकरार हौ उठी.फिन उसने मेरे छूतदों
कों थोडा सां उठाकर अपने लन्ड कों मेरी बिलबिलती बुर मे कुच्छ इस
तरह सें चांपा कि मे तड़पउठी, चीखउठी औऱ चिल्ला
उठी 'हॅयियी मेरी बुर फटी, हाईईईईईई मे मारीईई अहहााआ
हाए बहोत दर्द होँ रहा हैं जालिम कुच्छ तोँ मेरी बुर कां ख्याल
करो। अर्रे निकालो अपनेइस जालिम लन्ड कों मेरी बुर मे सें
हाऐईईइन मे तौ मरीआज' औऱ मे दर्द केँ मारे हाथ-पैर पटक
रही थि पऱ उसकी पकड़ इतनी मज़बूत थि कि मे उसकी पकड़ सें छ्छूट
नाँ सकी। मेरी कुँवारी बुर कों ककड़ी कि तरह सें चीरता हुआ उसका
लन्ड नश्तर कि तरह चुभता गय़ा। आधे सें ज्यादा लन्ड मेरी बुर
मे घुस गय़ा थां। मे पीड़ा सें कराहरही थि तभी उसने इतनी ज़ोर
सें ठप मारा कि मेरी बुर कां द्वार (दरवाज़ा) ध्वस्त होकेर गिर गय़ा औऱ उसका
पूरा लन्ड मेरी बुर मे घुस गय़ा। मे दर्द सें बिलबिला रही थि
औऱ बुर सें खून निकलकर बहकर मेरी गांद तक पहुँच गय़ा.
वोँ मेरे नंगे जिस्म पर्र लेट गय़ा औऱ मेरी एक् मम्मों कों मुँह मे
लेकर चूसने लगा। मे अपने छूतदो कों ऊपेर उच्छलने लगी, तभी
वोँ मेरी चूचियों कों छ्चोड़ दोनोहाथ ज़मीन पैरटेक कर लन्ड कों
बुर सें टोपा तक खींचकर इतनी ज़ोर सें ठप मारा कि पूरा लन्ड जड़
तक हमारी बुर मे समा गय़ा औऱ मेरा कलेज़ा थरथरा उठा.ये
प्रोसेस वोँ तब तक चलाता रहाजब तक मेरी बुर कां स्प्रिंग ढीला
नहींपड़ गय़ा। मुझे बाहों मे भरकर वोँ ज़ोर-ज़ोर सें ठपलगा
रहा थां। मे दर्द केँ मारे ओफफ्फ़ उफफफफफफ्फ़ कररही थि। कुच्छ देर
बाद मुझे भि जवानी कां मजाआने लगा औऱ मे भि अपने चूतड़
उच्छाल-उच्छाल कर गपगाप लन्ड अंदर करवाने लगी। औऱ कहरही
थि 'औऱ ज़ोर सें रज़्ज़ा औऱ ज़ोर सें पूरा पेलो, औऱ डालो अपना लन्ड'
वोँ व्यक्ति मेरी बुर पर्र घमसान धक्के मारेजा रहा थां। वोँ जब
उठकर मेरी बुर सें अपना लन्ड बाहर् खींचता थां तौ मे अपने
चूतड़ उचकाकर उसके लन्ड कों पूरी तारह सें अपनी बुर मे लेने कि
कोशिश करती.औऱ जब उसका लन्ड मेरी बछेदानि सें टकराता तौ मुझे
लगता मानो मे स्वर्ग मे उड़रही हूं। अब वोँ व्यक्ति ज़मीन सें दोनो
हाथ उठाकर मेरी दोनो चूचियों कों पकड़कर हमे घापघाप पेल
रहा थां। ये मेरे बर्दाश्त केँ बाहर् थां औऱ मे स्वयं हि अपना मुह्न
उठाकर उसके मुह्न केँ लगभग किया कि उसने मेरे मुह्न सें अपना मुह्न
भिड़ा कर अपनीजीभ मेरे मुह्न मे डालकर अंदर बाहर् करने
लगा.इधेर जीभ अंदर बहेर हौ रही औऱ नीचे बुर मे लन्ड अंदर
बहेर हौ रहा थां। इस दोहरे मज़े केँ कारण मे जल्दी हि स्खलित हौ
गयीँ, औऱ करीबउसी वक़्त उसके लन्ड नें इतनी फोर्स सें वीर्यापत किया
कि मे उसकी छाती चिपकउठी। उसने भि पूर्ण ताक़त केँ संग मुझे
अपनी छाति सें चिपका लिया।
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