मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग - Mela Ki Chudai – New Episode
मेले केँ रंग सासू माँ, बहू औऱ ननदी केँ साथ-2
गतान्क सें आगे.
मैने सोचा कि अब हमारी खैर नहीं पीछे मुड़केर देखा तौ भाभी खड़े-खड़े अपनी बुर खुज़ला रही हैं.
मैनेकहा –क्यूं भाभी बुर चुदवाने कों खुज़ला रही होँ.
भाभी-हाँ ननदी रानीअब आपसे क्याँ च्छुपाना, मेरी बुर बड़ी खुज़ला रही हैं। मनकररहा कि कोई मुझेपटक कर छोड़दे.
मैनेकहा --पहले कहती तोँ किसी कों रोक लेती जोँ तुम्हे पूरीरात चोद्ता रहता.खैर कोईबात नहींकल साम तक रूको तुम्हारी बुर कां भोसड़ा बन जाएगा। उन पाँचों केँ इरादे हैं हमे चोदने केँ औऱ वोँ सला रमेश तौ ममीज़ी कों भि चोदना चाहता हैं.अब देखेंगे मामीजी कों किसतरह सें चोद्ते हैं येलोग.
अगली सुभहजब मे सोकरउठी तौ देखा कि सबलोग सोएहुए थें सिर्फ़ भाभी हि उठी हुई थि औऱ विश्वनथजी कां लन्ड जोँ कि नींद मे भि तनाहुआ थां औऱ भाभीगौर सें उनके लन्ड कों हि देखरही थि.
उनका लन्ड धोती केँ अंदरतन कर खड़ा थां, लगभग 10’’ लंबा औऱ 3’’ मोटा, एकद्ूम रोड कि तरह। भाभी नें इधर-उधर देखकर अपनेहाथ सें उनकी धोती कों लन्ड पर्र सें हटा दिया औऱ उनके नंगे लन्ड कों देखकर अपने होंटो पऱ जीभ फिराने लगी। मे भि बेशार्मो कि तरह जाकेर भाभी केँ पास खड़ी होँ गयीँ, औऱ धीरे-धीरे सें कहा"उईइ मा ".
भाभी मुझेदेख कर शर्मा गयीँ, औऱ घूमकर चली गयीँ,। मे भि भाभी केँ पीछेचली औऱ उनसेकहा देखो केसे बेहोश सोरहे हें.
भाभी-चुप रहो
मे – क्यूं भाभी, ज्यादा अच्छा लगरहा हैं
भाभी-चुप भि रहो नाँ.
मे- इसमेचुप रहने कि कौन सि बात हैं जाओ औऱ देखो औऱ पकड़कर मुह्न मे भि लें लो उनका खड़ा लन्ड, बड़ामजा आएगा.
भाभी- कुच्छ तौ लज्जा करोयू हि बकेजा रही हौ.
मे- तुम्हारी मर्ज़ी, वैसे उपेर सें धोती तौ तुमने हि हटाई हैं.
भाभी-अब चुप भि होँ जाओ, कोई सुन लेगा तौ क्याँ सोचेगा.
फिन हम् लोग रोज़ कि तरहकाम मे लगगये। लगभगदस बज़े विश्वनथजी कुच्छ समान लेकरआए औऱ हमारे मामाजी केँ हाथ मे समानथमा करकहा नाश्ते केँ लिएकहा। औऱ कहाआज हमारे चारों साथी आएँगे औऱ उनकी दावत करनी हैं दोस्त.इसलये ये समान लाया हूं भैया, मुझे तौ आता नहीं हैं कुच्छ बनाना इसलये तुम्ही लोगों कों बनाना पड़ेगा.औऱ हां दोस्त तुम् पीते तोँ हौ नां? विश्वनथजी नें ममाजी सें पूचछा.[ मीन्स दारू पीते हौ नाँ?]
मामाजी- नहीं मे तोँ नहीं पीटा हूं दोस्त
विश्वनथजी- अर्रे दोस्त कभी-कभी तोँ लेते होगे
मामाजी-हाँ कभी-कभार कि तोँ कोईबात नहीं
विश्वनथजी- फिनठीक हैं हमारे संग तौ लेना हि होगा.
मामाजी- ठीक हैं देखा जाएगा.
हम् लोगों नें समान वग़ैरह बनाकर तैय्यार कर लिया। 2 बज़े वोँ लोग आँ गये.मे तोँ उस फिराक मे लग गई, कि येलोग क्याँ बातें करते हैं.
मामाजी मामीजी औऱ भाभी ऊपेर केँ कमरे मे बैठे थें। मे उन चारों कि आवाज़ सुनकर नीचेउतर आई। वोँ पाँचो लोग बहेर कि तरफबने कमरे मे बैठे थें। मे बराबर वाले कमरे कि किवाडो केँ सहारे खड़ी होँ गई, औऱ उनकी बातें सुनने लगी.
विश्वनथजी- दावत तोँ तुम् लोगों कि करारहा हूं अबआगे क्याँ प्रोगराम हैं?
पहला- दोस्त यह तुम्हारा मित्र दारू-वारू पीएगा कि नहीं?
विश्वनथजी- वोँ तोँ मनाकर रहा थां पैर मैनेउसे पीने केँ लिएमना लिया हैं
दूसरा- फिन क्याँ बात हैं समझोकाम बन गय़ा। तुम् लोगऐसा करना कि पहलेसभी लोगसंग बैठकर पीएँगे फिन उसके ग्लास मे कुच्छ ज्यादा डाल देंगे। जब वोँ नशे मे आँ जाएगा तब किसीतरह पटाकर उसकी पत्नि कों भि पीला देंगे औऱ फिननशे मे लेकरउन सालियों कों पटक-पटक कर चोदेन्गे,
प्लान केँ मुताबिक उन्होने हमारे मामाजी कों आवाज़ लगाई.
हमारे मामाजी नीचेउतर आए औऱ बोले राम-राम भैया.
मामाजी भि उसी पंचायत मे बैठगये अबउन लोगों कि गुपशुप होनेलगी। थोड़ी देरबाद आवाज़ आई कि मीनाबहू ग्लास औऱ पानी देना.
जब भाभी पानी औऱ ग्लास लेकरवहा गई, तौ मैने देखा कि विश्वनथजी कि आँखे भाभी कि चूचियों पऱ हि लगी हुई थि। उन्होने सब ग्लासस मे दारू औऱ पानी डाला पर्र मैने देखा कि ममाजी केँ ग्लास मे पानीकम औऱ दारू अधिक थि। उन्होने पानी औऱ मँगाया तौ भाभी नें लोटा मुझे देतेहुए पानी लाने कों कहा.जब मे पानी लेने रसोई मे गई, तौ महेश जल्दी हि मेरे पीछे-पीछे रसोई मे आया औऱ मेरी दोनो स्तन कों कसकर दबाते हुए बोला- इतनीदेर मे पानीलाई हैं चूत्मरानि, ज़रा जल्द-जल्द लाओ। मेरी सिसकी निकल गयीँ,
विश्वनथजी नें ममाजी सें पूच्छ वोँ तुम्हारा नौकेर कहां गय़ा.
मामाजी-वोँ नौकेर कों यहा उसके गाओं वालेमिल गये थें सो उन्ही केँ संग गय़ा हैं जब तक हम् वापस जाएँगे तब तक मे वोँ आँ जाएगा.
फिनजब तक हम् लोगों नें खानां लगाया तब तक मे उन्होने दो बॉटल खालीकर दि थि। मैने देखा कि मामाजी कुच्छ अधिकनशे मे हैं, मे समझ गई, कि उन्होने जानबुझ कर मामाजी कों अधिक शराब पिलाई हैं। हम् लोग खानां लगा हि चुके थें। ममीज़ी सब्ज़ी लेकरवहा गयीँ, मे भि पीछे-पीछे नमकीन लेकर पहुँची तोँ देख कि रमेश नें ममीज़ी कां हाथथाम कर उन्हे दारू कां ग्लास पकड़ना चाहा। ममीज़ी नें दारू पीने सें मनाकर दिया। मे येदेख कर दरवाज़े पऱ हि रुक गई,। जब ममीज़ी नें दारू पीने सें मना किया तौ रमेश ममाजी सें बोला-अरे दोस्त बोलो नां अपनी घरवाली सें वोँ तोँ हमारी बे-इज़्ज़ती कररही हैं.
मामाजी नें मामीजी सें कहा–रजो पीलो नाँ क्यूं इन्सल्ट करारही होँ.
ममीज़ी- मे नहीं पीती
रमेश- भाय्या ये तौ नहींपी रही हैं, अगर आप् कहें तोँ मे पीलादूँ.
मामाजी- अगर नहींपी रही हैं तौ साली कों पकड़कर पिलादो.
ममाजी कां इतना कहना थां कि रमेश नें वहीं ममीज़ी कि बगल मे हाथडाल कर दोसोरे हाथ सें दारूभरे ग्लास कों ममीज़ी केँ मुह्न सें लगा दिया औऱ ममीज़ी कों ज़बरदस्ती दारू पीनी पड़ी। मैने देखा कि उसका जौ हाथबगल मे थां उसी सें वोँ ममीज़ी कि चूचियाँ भि दबारहा थां.औऱ जब वोँ इतनी बेफिक्री सें ममीज़ी केँ बॉब्बे दबारहा थां तौ बाकीसब कि नज़रें[ एक्सेप्ट ऑफ कोर्स ममाजी] उसकेहाथ सें दब्ते हुए ममीज़ी केँ बोब्बों पऱ हि थि। यहा तक कि उनमे सें एक् नें तौ गंदे इशारे करतेहुए वहीं पर्र अपना लन्ड पॅंट केँ उपेर सें हि मसलना शुरुआत कर दिया थां। ममीज़ी केँ मुह्न सें ग्लास खाली करके मामीजी कों छ्चोड़ दिया.फिन जब ममीज़ी रसोई मे आई तौ मैनेजान बुझकर मेरेहाथ मे जौ समान थां वोँ ममीज़ी कों पकड़ा दिया.
ममीज़ी नें वोँ समान टेबल पर्र लगा दिया.फिन रमेश नें ममीज़ी केँ मना करनेपैर भि दूसरा ग्लास ममीज़ी कों पीला दिया। ममीज़ी मना करती हि रह गई, पर्र रमेश दारू पीलाकर हि माना.औऱ इसबार भि वोहीकथा दोहराई गई, यानी कि एक् हाथ दारू पीलारहा थां औऱ दूसरा हाथ मम्मे दबारहा थां औऱ सभीलोग इस नज़ारे कों देखकर गर्म होँ रहे थें। मामाजी कि शायद किसी कों परवाह हि नहीं थि क्योंकि वोँ तोँ वैसे भि एक् दमनशे मे तुन्न होँ चुके थें.
अब ग्लास रखकर रमेश नें ममीज़ी केँ चूतदों पऱ हाथ फिराया औऱ दूसरे हाथ सें उनकी बुर कों पकड़कर दबा दिया। ममीज़ी सिसकी लेकररह गयीँ,.
ममीज़ी कों हल्की चीख लेतेदेख कर मेरी भि बुर मे सुरसुरी होनेलगी। हम् लोग ऊपेरचले गये.फिन नीचे सें पानी कि आवाज़ आई। ममीज़ी पानी लेकेर नीचे गयीँ,.तब तक रमेश रसोई मे आँ पहुंचा थां। ममीज़ी जौ पानी देकर लौटी तोँ रमेश नें ममीज़ी कां हाथ पकड़कर पास केँ दूसरे कमरे मे लेँ जानेलगा। ममीज़ी नें कहा, अर्रे यह क्याँ कररहे तौ बोला, चलो मेरी रानीउस कमरेचल करमजा उठाते हें। ममीज़ी स्वयं नशे मे थि इसलिये कमज़ोर पड़ गयीँ, औऱ नाँ-नां करती हि रह गई, पर्र रमेश उन्हे खींचकर उस कमरे मे लें गय़ा.मेरी नज़र तोँ उन दोनो पऱ हि थि इसलिये जैसे हि वोँ कमरे मे घुसे मे जल्दी दौड़ते हुए उनके पीछे जाकेर उस कमरे केँ बहेरछुप कर देखने लगी कि आगे क्याँ होता हैं.
रमेश नें ममीज़ी कों पकड़कर बिस्तर पर्र डाल दिया औऱ उनके पेटिकोट मे हाथडाल कर उनकी बुर मे उंगली करनेलगा.
ममीज़ी- हैं ये क्याँ कररहे होँ। छ्चोड़ो मुझे नहीं तौ मे चिल्लाउंगी.
रमेश- मेरा क्याँ जाएगा, चिल्लओ ज़ोर सें, बदनामी तौ तुम्हारी हि होगी। नहीं तौ चुपचाप जौ मे करता हूं वोँ करवाती रहो.
ममीज़ी : पऱ तुम् करना क्याँ चाहते हौ.
रमेश " चुपरहो, तुम्हे क्याँ मालूम नहीं हैं कि मे क्याँ करनेजा रहा हूं। साली अभि तुम को चोदून्गा। चिल्लाई तौ तेरेसब रिश्तेदार यहाआके तुझेही नंगी देखेंगे औऱ सोचेंग कि तूँ हि हमेयहा अपनी बुर मरवाने बुलाई हौ".
डर केँ मारे ममीज़ी चुपचाप पड़ी रहीं औऱ रमेश नें अपने सारे कपड़े उतारकर अपने खड़े लन्ड कां ऐसा ज़ोर कां ठप मारा कि उसकाआधा लन्ड ममीज़ी कि बुर मे घुस गय़ा.
ममीज़ी- उईईईमा मे मरी.
ममीज़ी नशे मे होतेहुए भि सिसकियाँ लेँ रही थि। तभी रमेश नें दूसरा ठप भि मारा कि उसका पूरा लन्ड अंदरघुस गय़ा.
ममीज़ी उईईईईईईइइम्म्म्मममा अरे जालिम क्याँ कर केर्रहा हैं थोडा धीरे-धीरे सें कर कहती हि रह गई, औऱ वोँ एंजिन केँ पिस्टन कि तरह ममीज़ी कि बुर [जोँ कि पहले हि भोसड़ा बनी हुइ थि} उसके चीथड़े उड़ाने लगा। इतने मे मैने विश्वनथजी कों ऊपेर कि तरफ जाते देखा। मे भि उनके पीछे ऊपेर गयीँ, औऱ बहेर सें देखा कि भाभी जोँ कि अपना पेटिकोट उठाकर अपनी बुर मे उंगली कररही तौ उसकाहाथ पकड़कर विश्वनथज नें कहा 'हैं मेरीजान हम् काहे केँ लिए हें, क्यूं अपनी उंगली सें कामचला रही, क्याँ हमारे लन्ड कों मौका नहीं दोगि.
अपनी चोरी पकड़े जाने पऱ भाभी कि नज़रें झुक गयीँ, थि औऱ वोँ चुपचाप खड़ीरह गई,.
विषवनथजी नें भाभी कों अपने सीने सें लगाकर उनके होंटो कों चूसना शुरुआत कर दिया.संग हि संग वोँ उनकी चूचियों कों भि दबारहे थें.भाभी भि अब उनकेवश मे होँ चुकी थि.उन्होने अपन धोतीहटा कर अपना लन्ड भाभी केँ हाथो मे पकड़ा दिया भाभी उनके लन्ड कों, जोँ कि बाँस कि तरह खड़ा होँ चुका थां, सहलाने लगी.
उन्होने भाभी कि चूचियाँ छ्चोड़ कर उनके सारे कपड़े उतारदिए, औऱ भाभी कों वहीं पऱ लेटा दिया औऱ उनके चूतड़ केँ नीचे तकिया लगाकर अपना लन्ड उनकी बुर केँ मुहाने पर्र रखकर एक् जोरदार धक्का मारा.
पर्र कुच्छ विश्वनथजी कां लन्ड बहोत बड़ा थां औऱ कुकछ भाभी कि बुर बहोत सिकुड़ी थि इसलिये उनका लन्ड अंदर जाने केँ बज़ाय वहींरुक कररह गय़ा.इस पर्र विश्वनथजी बोले लगता हैं कि तेरे व्यक्ति कां लन्ड साला बच्चों कि लुल्ली जितना हैं तभी तौ तेरी बुर इतनी टाइट हैं कि लगता हैं जैसेबिन चुदी बुर मे घुसाया हैं लन्ड" औऱ फिन इधेर उधेरदेख कर वहीं कोने मे रखीघी कि कटोरी देखकर खुश हौ गये औऱ बोले "लगता हैं साली चट्मरेनी नें पूरी तय्यारि कररखी थि औऱ इसीलिए यहा पऱ घी कि कटोरी भि रखी हुइ हैं जिस सें कि चुद्वने मे कोई परेशानी नाँ हौ" इतनाकह कर उन्होने जल्दी हि पासरखी घी कि कटोरी सें कुच्छ घी निकाला औऱ अपने लन्ड पर्र घी चुपदकर जल्दी फिन सें लन्ड कों बुर पर्र रखकर धक्का मारा.इस बार लन्ड तोँ अंदरघुस गय़ा पऱ भाभी केँ मुँह सें जोरो कि चीख निकल पड़ी ' आहह-आहह मैईज़ञ मरी, हाई जालिम तेरा लन्ड हैं याँ बाँस कां खुट्टा'
इसकेबाद विश्वनथजी फॉर्म मे आँ गये औऱ औऱ ताबड़तोड़ धक्के मारने लगे। भाभी ' हाई राजामर गयीँ,, उईईइमा, थोडा धीमेकरो नाँ केरती हि रह गयीँ, औऱ वोँ धक्केपे धक्के मारेजा रहे थें। रूम मे हचपच हचपच कि ऐसी आवाज़ आँ रही थि मानो 110 किमी कि रफ़्तार सें कारचल रही हौ। कुच्छ देर केँ बाद भाभी कों भि मजाआने लगा औऱ वोँ कहनेलगी ' हाई राजा औऱ ज़ोर सें मारो मेरी बुर, हाई बड़ामजा आँ रहा हैं, आअहहााआ बसऐसे हि करतेरहो आहहााअ औक्ककककककचह औऱ ज़ोर सें पेलो मेरे राजा, फाड़दो मेरी चूत कों आअहहााआ, पऱ ये क्याँ मेरी चूचियों सें क्याँ दुश्मनी हैं, इन्हे उखाड़ देने कां इरादा हैं क्याँ, हैं ज़रा प्रेम सें दबओ मेरी चूचियों कों।
मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग - Mela Ki Chudai – New Episode
मैने देखा कि विश्वनथजी मेरी भाभी कि चून्चियो कों बड़ी हि बेदर्दी सें किसी हॉर्न कि तरह दबाते हुए घचघाच पेलेजा रहे थें.
तब पीछे सें सुरेश नें आकेर मेरेबगल मे हाथडाल कर मेरी चूचियाँ दबाते हुए बोला, अरी छिनाल तुम् यहा इनकी चुदाई देखकर मज़े लेँ रही औऱ मे अपना लन्ड हाथ मे लिए तुम्हे सारेघऱ मे ढूँढरहा थां। इधेर मेरी भि बुर भाभी औऱ ममीज़ी कि चुदाई देखकर पनिया रही थि। मुझे सुरेश बगल वाले कमरे मे उठा लें गय़ा औऱ मेरे सारे कपड़े खींचकर मुझे एकद्ूम नानीमा कर दिया, औऱ स्वयं भि नंगा हौ गय़ा। फिन मुझेबेड पर्र लेटाकर मेरी दोनों चूचिया सहलाने लगा, औऱ कभी मेरे निपल कों मुँह मे लेकर चूसने लगता.इन सबसे मेरी बुर मे चीटिया सि रेंगने लगी, औऱ चूत कि पूतिया [क्लाइटॉरिस] फड़फड़ने लगी। उसने मेराहाथ पकड़कर अपने खड़े लन्ड पर्र रखा औऱ मे उसके लन्ड कों सहलाने लगी। मे जैसे-जैसे उसके लन्ड कों सहलारही थि वैसे हि वोँ एक् आइरनरोड कि तरह कड़क होताजा रहा थां। मुझसे बर्दाश्त नहीं होँ रहा थां औऱ मे उसके लन्ड कों पकड़कर अपनी बुर सें भिड़ा रही थि कि किसीतरह सें यह जालिम मुझे चोदे, औऱ वोँ थां कि मेरी बुर कों उंगली सें हि कुरेद रहा थां.
शरम छ्चोड़ कर मे बोलीं हाईईइ राजाअब बर्दाश्त नहीं होँ रहा हैं, जल्द सें करो नां। मेरे मुँह सें कराह निकलरही थि। अंत मे मे स्वयं हि उसकाहाथ अपनी चूत सें हटाकर उसके लन्ड पऱ अपनी बुर भिड़ा कर उसके ऊपेरचढ़ गई, औऱ अपनी बुर केँ घस्से उसके लन्ड पर्र देनेलगी। उसके दोनोहाथ मेरे मम्मो कों कसकरदबा रहे थें औऱ संग मे निपल भि छेड़रहे थें.अब मे उसके ऊपेर थि औऱ वोँ मेरे नीचे। वोँ नीचे उचक-उचक कर मेरी चूत मे अपने लन्ड कां धक्का देरहा थां औऱ मे ऊपेर सें दबा-दबा कर उसका लन्ड सटाकरही थि.
कभीकभी तौ मेरी चूचियों कों पकड़कर इतनी ज़ोर सें खींचता कि मेरा मुँह उसके मुँह तक पहुँच जाता औऱ वोँ मेरे होन्ट कों अपने मुँह मे लेकर चूसने लगता। मे जन्नत मे नाचरही थि औऱ मेरीछूट मे खुजलाहट बढ़ती हि जारही थि। मे दबादबा करचुद रही थि औऱ बोलरही थि, हैं मेरे चोदु सेयियैयेयाया औऱ जोरो सें चोदो मेरी फुददी, भरदो अपनेमदन रस सें मेरी फुददी, आआआअह्ह्ह्ह्ह्हाआआ बड़ामजा आँ रहाहै, बसइसी तरह सें लगेरहो, हाआआईईईइ कितना अच्छा चोदरहे होँ, बस थोडा सां औऱ, मे बस झड़ने हि वालीहू औऱ थोडा धक्का मारो मेरे सरताज। अह्हाआआ लो मे गई,, मेरा पानी निकला.
औऱ इसतरह मेरी बुर नें पानी छ्चोड़ दिया। मुझे इतनी जल्द झड़ते देख, सुरेश खूब भड़क गय़ा औऱ, " साली छूटमरनी, मुझसे पहले हि पानी छ्चोड़ दिया, अब मेरा पानी कहां जाएगा.
सुरेश - अब तेरी पिलपीली बुर मे क्याँ रखा हैं, क्याँ मजा आएगा भैरी बुर मे पानी निकलने कां अब तौ तेरीगंद मे पेलुँगा। औऱ उसने जल्दी अपने लन्ड कों मेरी चूत सें बहेर खींचा औऱ मुझे नीचे गिराकर कुत्ति बनाया औऱ मेरेउपर चढ़कर मेरीगंद कों पकड़कर अपना लन्ड गंद केँ छेद पऱ रखकर ज़ोर कां ठप मारा। चूत केँ रस मे भीगे होने केँ कारण उसके लन्ड कां टोपाफट सें मेरीगंद मे घुस गय़ा औऱ मे एकदम सें चीख पड़ी। उउउउउउउईईईईईईइ माआआमर गयीँ,, हैं निकालो अपना लन्ड मेरीगंद फटरही हैं हहााआ
तब उसने दूसरी ठप मेरीगंद पऱ मारी औऱ उसकाआधे सें ज्यादा लन्ड मेरीगंद मे घुस गय़ा। औऱ मे चिल्ला उठी ' आरीईराम, थोडा तौ रहमखाओ, मेरीगंद फटीजा रही हएरए जालिम थोडा धीरे-धीरे सें, आरीईए बदमाश अपना लन्ड निकाल लेँ मेरीगंद सें नहीं तौ मे मर जाऊंगी आज हि,
सुरेश- अररी च्छुप्प, साली च्चिनाल, नखरामत कर नहीं तोँ यहीं पऱ चाकू सें तेरी बुर फाड़ दूँगा, फिन ज़िंदगी भरगंद हि मरवाते रहना, थोड़ी देरबाद स्वयं हि कहेगी कि हैं मजा आँ रहा हैं, औऱ मारो मेरीगंद.
औऱ कहते केँ संग हि उसने तीसरा ठप मारा कि उसका लन्ड पूरा कां पूरासमा गय़ा मेरीगंद मे। मेरी आँखों सें आँसू निकलरहे थें औऱ मे दर्द कों सह नहींपा रही थि। मे दर्द केँ मारे बिलबिला रही थि। मे अपनीगंद कों इधर-उधर झटकामार रही थि किसीतरह उसका हल्लाबी लन्ड मेरीगंद सें निकल जाए.मगर उसने मुझे इतनाकस केँ दबारखा थां कि लाख कोशिशों केँ बावज़ूद भि उसका लन्ड मेरीगंद सें निकल नहीं पाया.
अब उसने अपना लन्ड अंदर-बाहर् करना हुरू किया। वोँ बहोत आहिस्ता धक्का माररह थां, औऱ कुच्छ हि मिनूटों मे मेरीगंद भि उसका लन्ड धीरे-धीरे अंदर करनेलगी। आरामसे उसकी स्पीड बहती हि जारही थि, औऱ अबवो थपथाप किसी पिस्टन कि तरह मेरीगंद मे अपना लन्ड पेलरहा थां.मुझे भि सुखमिल रहा थां, औऱ अब मे भि बोलने लगी, हैं आज़ाज़ा आँ रहा हैं, औऱ ज़ोर सें मारो, औऱ मारो औऱ बनादो मेरीगंद कां भुर्ता, औऱ दबओ मेरे मम्मा, औऱ ज़ोर दिखाओ अपने लन्ड कां औऱ फाड़ओ मेरीगंद। अब दिखो अपने लन्ड कि ताक़त.
सुरेश- हाईईईई जानीअब गय़ा, अब औऱ नहींरुक सकता, लें साली रंडी, गंदमारानी, लें मेरे लन्ड कां पानी अपनीगंद मे लेँ। कहतेहुए उसके लन्ड नें मेरीगंद मे अपने वीर्य कि उल्टी कर दि.वोँ चूचियाँ दबाए मेरीकमर सें इसतरह चिपक गय़ा थां मानो मीलों दौड़कर आया होँ। थोड़ी देरबाद उसका मुरझाया हुआ लन्ड मेरी गांद मे सें निकल गय़ा औऱ वोँ मेरी चूचियाँ दबाते हुएउठ खड़ाहुआ, औऱ मुझे सीधा करके अपने सीने सें सटाकर मेरे होंटो कि पप्पी लेनेलगा। तभी महेश आकेर बोला ‘ आबे किसी औऱ कां नंबर आएगा आँ नहीं, याँ सारा टाइम तूँ हि इसे चोद्ता रहेगा.
महेश- नहीं दोस्त तूँ हि इसे संभाल अब मे चला.
ये कहकर सुरेश नें मुझे महेश कि तरफ धकेला औऱ बहेरचला गय़ा.
महेश नें जल्दी मुझे अपनी बाहों मे समा लिया औऱ मेरेगाल चूमने लगा। औऱ एक् गाल मुँह मे भरकर दाँत गाड़ने लगा., जिससे मुझे दर्द होनेलगा औऱ मे सीस्या उठी.
वोँ मेरी दोनो चूचियों कों कसकर भोंपु कि तरह दबाने लगा.कहा मेरीजान मजा आँ रहा हैं कि नहीं.
औऱ मुझे खींचकर बिस्तर पर्र लेटा दिया औऱ अपने सारे कपड़े उतारकर मेरेपास आया, औऱ वहीं ज़मीन पऱ पड़ाहुआ मेरी पेटिकोट उठाकर मेरी बुर् पोंचछते हुएकभी मेरे गालो पर्र काटने लगा औऱ मेरी चूचियाँ जोरो सें दबा देता.जैसे-जैसे वोँ मेरे स्तन कि पंपिंग कररहा थां, वैसे हि उसका लन्ड खड़ा होँ रहा थां मानोकोई उसमेहवा भररहा हौ।
मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग - Mela Ki Chudai – New Episode
उसने मेराहाथ पकड़कर अपने लन्ड पऱ रखा औऱ मुझे अपने लन्ड सहलाने कां इशारा किया.मैने अपनाहाथ उसके लन्ड सें हटा लिया तोँ उसने पूचछा ' मेरीजान अच्छा नहींलगा रहा हैं क्याँ?'
मे इनकार करतेहुए बोलीं' नहींये बात नहीं हैं पर्र हुमको लज्जा आँ रही हैं.' वोँ बोला ' बुर मरेनी, भोसदीवाली, दो दिनों सें बुर मरवारही हैं, औऱ अब कहती हैं कि लज्जा आँ रही हैं। मादार-चोद, चल अच्छे सें लन्ड सहला नहीं तोँ तेरी चूत मे चाकू घोंपकर मार डालूँगा.
मे डरकर उसके लन्ड कों सहलाने लगी। जैसे-जैसे लन्ड सहलारही थि मुझे आभास होनेलगा कि महेश कां लन्ड सुरेश केँ लन्ड सें लगभगआधा इंच मोटाअओर 2 इंच लंबा हैं। मैने भि सोच जोँ होगा देखा जाएगा। उसका लन्ड एक् लोहे केँ रोड कि तरह कड़ा होँ गय़ा थां.
अब वोँ खड़ा होकेर पास पड़ा तकिया उठाकर मेरे छूतदों केँ नीचे लगाया औऱ फिनढेर साराथूक [स्पिट] मेरी चूत केँ मुहाने पऱ लगाकर अपना लन्ड मेरी बुर केँ मुँहपैर रखकर ज़ोर कां धक्का मारा। उसकाआधे सें अधिक लन्ड मेरी चूत मे घुस गय़ा। मे सीस्या उठी। जबकि मे कुच्छ हि देर पहले सुरेश सें बुर औऱ गंद दोनों मरवा चुकी थि फिर्र भि मेरी चूत बिलबिला उठी.उसका लन्ड मेरी चूत मे बड़ा कसा-कसा जारहा थां। फिन दुबारा ठप मारा तौ पूरा लन्ड मेरी चूत मे समा गय़ा.
मे जोरो सें चिल्ला उठी ' हाईईईईईई मे दर्द सें मारी,। दर्द होँ रहा हैं, प्लीज़ थोडा धीरे-धीरे डालो, मेरी चूत फटीजा रही हैं
महेश - अर्रे चुप साली, तबीयत सें चुदवा नहींरही हैं औऱ हल्ला कररही हैं, मेरीफटी जारही हैं, जैसे कि पहलीबार चुदवा रही हैं.अभि- अभि चुदवा चुकी हैं चुटमारानी औऱ हल्ला कररही हैं जैसेकोई सीलबंद कुँवारी लड़की हौ.
अब वोँ मुझे पकड़कर आरामसे अपना लन्ड मेरी बुर केँ अंदर बहेर करने लगा.मेरी चूत भि पानी छ्चोड़ने लगी। चूत भीगी होने केँ कारण लन्ड चूत मे आहिस्ता अंदर बहेर जानेलगा, औऱ मुझे भि मजाआने लगा.
महेश नें मुझे पलटी देकर अपने ऊपेर किया औऱ नीचे सें मुझे चोदने लगा.जब वोँ नीचे सें उपरउचक कर अपने लन्ड कों मेरी चूत मे ठासता थां तौ मेरी दोनो चूचियाँ पकड़कर मुझे नीचे कि ओर खींचता थां जिस सें लन्ड पूरा बुर केँ अंदर तक जारहा थां। इसतरह सें वोँ चोदने लगा औऱ संग-संग मेरे मम्मे भि पंपिंग कररहा थां, औऱ कभी मेरे गालों पर्र बॅट्का भर लेता थां तौ कभी मेरे निपल अपने दाँतों सें काट ख़ाता थां.पर्र जब वोँ मेरे होंटो कों चूस्ता तौ मे बहाल होँ जाती थि औऱ मुझे भि खूबमजा आता थां.
मे मज़े मे बड़बड़ा रही थि - हैं मेरे रज़ाआआअ मजा आँ रहा हैं, औऱ ज़ोर सें चोदो औऱ बनादो मेरी बुर कां भोसड़ा.
औऱ संग हि मैने भि अपनीतरफ सें धक्के मारने शुरुआत कर दिया, औऱ जब उसका लन्ड पूरा मेरी चूत केँ अंदर होता थां तौ मे चूत कों औऱ कस लेती थि, जब लन्ड बहेरआता थां तौ चूत कों ढेला छ्चोड़ देती थि.वोँ कुच्छ रुक-रुक कर मुझेचोद रहा थां.
मे बोलि ' हाई राजा ज़रा जल्द-जल्द करो नाँ, औऱ मजा आएगा, इतना धीरे-धीरे क्यूं माररहे होँ मेरी बुर.
जब मुझसे रहा नहीं गय़ा तौ मे स्वयं हि उपेर सें अपनीकमर केँ धक्के उसके लन्ड पऱ मारने लगी
इतनीदेर मे देखा कि दूसरे रूम सें विश्वनथजी नंगे हि [ मेरी प्यारी भाभी कि बुर, जिसे भोसड़ा कहना ज्याद ठीक होगा, चोद कर } हमारे रूम मे घुसे औऱ मुझे चूड्ता हुआ देखाकर बोले ' यहा बुर मरारही, सालीनंद रानी, इसकी भाभी कों तोँ पेलकर आँ रहा हूं चलोइस सें भि लन्ड चुस्वा लूँ, क्याँ याद रखेगी कि एक् संग दो-दो लन्ड मिले थें इसे.'
औऱ इतनाकह कर जल्दी मेरेपास आकर खड़ेहुए औऱ अपना लन्ड, जौ कि तब पूरीतरह सें खड़ा नहीं थां, मेरे मुँह मे घुसा दिया। मैने भि पूरा मुँहखोल कर उसके लन्ड कों अंदर किया औऱ फिन धक्को कि ताल पर्र हि उसे चूसने लगे। विश्वनथजी संग-संग मे मेरी चूचियाँ भि मसलरहे थें। कुच्छ हि देर मे उनका लन्ड भि पूरा खड़ा होँ गय़ा औऱ मुझे अपनेहलक मे फँसता हुआ सां महसूस होनेलगा। पर्र मैने उनका लन्ड छ्चोड़ा नहीं औऱ बराबर चूस्ति हि रही.ये पहलीबार थां कि मेरी चूत औऱ मुँह मे एक् संग दो-दो लन्ड थें औऱ मे इसका पूरामजा लेना चाहती थि, औऱ मुझेमजा भि बहोत आँ रहा थां इस दोहरी चुदाई औऱ चूसा मे.
कुच्छ हि देर मे महेश केँ लन्ड नें पानी छ्चोड़ दिया औऱ उसके कुच्छ हि पलोंबाद विश्वनथजी केँ लन्ड नें भि मेरे मुँह मे पानी कि धार छ्चोड़ दि। जब मैने उनके लन्ड कों मुँह सें निकलना चाहा तोँ उन्होने कसकर मेरे चेहरे कों अपने लन्ड पर्र दबेरखा औऱ जब तक मे पूरा स्पर्म पी नहीं गई, उन्होने मुझे छ्चोड़ा नहीं। इसकेबाद वोँ भि निढाल सें वहीं पऱ पड़गये.
चुदाई औऱ चूसा कां ये प्रोग्राम रातभर इसीतरह चलतारहा औऱ नां जाने मे औऱ भाभी औऱ ममीज़ी कितनी बारचुद होंगी उस रात.अंत मे तक हारकर हम् सबयूँ हि नंगे हि सोगये.
सुभह मेरीआँख खुली तौ देखा कि मे नंगी हि पड़ी हुइ हूं। मे जल्द सें उठी औऱ कपड़े पहनकर बाहर् रसोई कि तरफ गई, तोँ देखा कि भाभी भि नंगी हि पड़ी हुईँ हें। मुझे मस्ती सूझी औऱ मे लगभग हि पड़ा बेलनउठा करउस पर्र थोडा सां आयिललगा कर उनकी चूत मे घोंप दिया। बेलन कां उनकी बुर मे घुसना थां कि वोँ आआआअहह्ा करतेहुए उठ बैठी, औऱ बोलीं ' ये क्याँ कररही होँ'.
मे बोलीं ' मे क्याँ कररही हूं, तुम् बुर खोले पड़ी थि मे सोची तुम् चुदासि होँ, औऱ चोदने वाले तोँ कब केँ चले गये, इसलिया तुम्हारी चूत मे बेलनलगा दिया.
भाभी' तुम्हे तोँ बसयही सूझता रहता हैं'.
मैने उनकी चूत सें बेलन खींचकर कहा'चलो जल्दउठो, वरना मामाजी मामीजी आँ जाएँगे तोँ क्याँ कहेंगे। रात तौ खूबमजा लिया, कुकच्छ मुझे भि तोँ बताओ क्याँ किया?
भाभी-बाद मे बताऊंगी कि क्याँ किया'कह कर कपड़े पहनने लगी तौ मे ममीज़ी कों उठाने चली गयीँ,.
मामीजी भि मस्त बुर खोले पड़ी थि.मैने उनकी चूचियों पर्र हाथरख कर उन्हे हिलाया औऱ उठाया औऱ कहा ' मामीजी ये तुम् केसे पड़ी होँ कोई देखेगा तोँ क्याँ सोचेगा.'
वोँ जल्द सें उठी औऱ कपड़े पहनने लगी, फिन मेरेसंग हि बाहर् निकल गयीँ,।
मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग - Mela Ki Chudai - Next part miss mat karna
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