फूफी फ़रहीन complete - कामुक - Real Kahani Part 1
फूफी फ़रहीन
उसदिन मे औऱ फूफी फ़रहीन घऱ मे अकेले थें क्योंके डैड अपने बैंक केँ हेड ऑफीस कराची गएहुए थें जबके हमारी नौकरानी 3 दिन कि छुट्टी पर्र थि। दरअसल उससे छुट्टी देना भि मेरी हि कारिस्तानी थि क्योंके जौ कुछ मे करना चाहता थां उस केँ लियेघऱ कां खाली होना बहोत ज़रूरी थां। मेराकोई भइया बेहन नहीं हैं जिस कि वजह सें मे अक्सर-ओ-बैस्तर घऱ मे तन्हा हि होता थां। मेरी अम्मी तब हि इंतिक़ाल कर गई थींजब मे 3 साल कां थां। डैड नें दूसरी विवाह नहीं कि औऱ हम् दोनो अकेले हि रहते थें। वोँ एक् गैर-मुल्की बैंक मे एक् आला ओहदे पर्र फॅया'इज़ थें औऱ ज़ियादा तार अपनेकाम मे मसरूफ़ रहते थें.
मेरी चारों फुफियों मे फूफी फ़रहीन कां नंबर दूसरा थां यानी वोँ फूफी नीलोफर सें तीनसाल छोटीथीं औऱ 40 बरस कि थीं। वोँ लाहोर मे रहतीथीं औऱ 2/3 महीने केँ बाद पिंडी हमारे घऱकुछ दिन ठहरने केँ लियेआया करतीथीं। दूसरी फुफियों केँ मुक़ाबले मे उनका हमारे हाँसभी सें ज़ियादा आनां जानां थां। अब कि बारडैड नें स्वयं हि उन्हे लाहोर सें पिंडी बुलवा लिया थां। मेरी बाक़ी फुफियों कि तरह फूफी फ़रहीन कि तबीयत भि ज़रा गुस्से वाली हि थि औऱ जब उनकामन खराब होता तोँ मर्दों कि तरह बड़ी गलीज़ गालियाँ दिया करतीथीं। उनकी गालियाँ सारे खानदान मे मशहूर थीं.
अम्मी केँ नाँ होने कि वजह सें फूफी फ़रहीन मुझ सें बहोत शफक़त सें पेशआया करतीथीं मगर मेरी नियत उनके बारे मे बहोत बचपन सें हि खराब थि। मै उनकेसंग अपनीइस क़ुरबत कां फायदा उठाकर उन्हे चोदना चाहता थां। वोँ खानदान कि उन औरतों मे सें थींजिन कों मे बालिग़ होने सें भि पहले सें मनपसंद करता थां। मुझेउस वक्त सेक्स कां ईलम नहीं थां मगरयह अवश्य मालूम थां केँ फूफी फ़रहीन कों देखकर मेरा लन्ड खड़ा हौ जाया करता थां औऱ मे उनके बूब्ज़ औऱ चूतड़ों कों छुपछुप कर देखा करता थां। फिनजब मे बालिग़ हुआ तोँ फूफी फ़रहीन औऱ खानदान कि दूसरी औरतों केँ बारे मे अपने जिन्सी जज़्बात कां एहसास हुआ.
आज उनकोआये हुए पहलादिन थां औऱ मेरी शदीद खाहिश थि केँ किसीतरह फूफी फ़रहीन कि चूत मारलूं। उनकेआने केँ बाद मेरा लन्ड बारबार बिला-वजा खड़ा हौ जाता थां। मोक़ा भि बेहतरीन थां क्योंके अगले 3/4 दिन उन्होने मेरेसंग घऱ मे बिल्कुल अकेले हि होना थां। अगर मे इस दफ़ा उन्हे चोदने मे नाकाम रहता तोँ शायदऐसा सुनेहरा मोक़ा मुझेफिन कभी नसीब नाँ होता.
फूफी फ़रहीन कां शुमार सुंदर औरतों मे कियाजा सकता थां। उनके 2 बच्चे थें दो दोनो कॉलेज मे पढ़ते थें। मगरअब भि वोँ जिस्मानी तौर पऱ इंतिहा भरपूर स्त्री थीं। लंबी चौड़ी दूध कि तरह सफ़ेद औऱ निहायत हि सहेत्मंद। उनके मम्मे कुछ ज़रूरत सें ज़ियादा हि मोटे थें जिन कों वोँ हमेशा बड़े बड़ेरंग बरंगी ब्रा मे बाँधकर रखतीथीं। मैंने कभी भि उनके मम्मे ब्रा केँ बगैर नहीं देखे थें यहा तक केँ वोँ रात कों भि ब्रापहन कर हि सोतीथीं। शायदइस वजह सें भि फूफी फ़रहीन केँ मम्मे इतने मोटे औऱ बड़े थें.
उनकी गांड़ भि बहोत मोटी औऱ चौड़ी थि औऱ जब वोँ चलतीं तौ उनके इंतिहा मज़बूत औऱ वज़नी चूतड़ एक् दूसरे केँ संग रगड़ खाते रहते। वोँ चाहे जौ मर्ज़ी कपड़े पहन लें मगर उनके चूतड़ों कां हिलना नहीं छुपता थां। अपने सेहतमंद शरीर कि वजह सें उनकीकमर पतली तौ नहीं थि मगर मोटे मोटे चूतड़ों औऱ काफ़ी ज़ियादा उभरेहुए स्तन केँ मुक़ाबले मे छोटी नज़रआती थि। सोने पर्र सुहागा यह केँ उनकापेट बाहर् निकला हुआ नहीं थां औऱ दो बच्चों कि पैदा’इश् केँ बाद भि साइड सें नज़र नहींआता थां। पेट नाँ होने सें उनकी गांड़ औऱ मम्मे औऱ भि नुमायाँ होँ गए थें। उनकेबाल बहोत लंबे औऱ घने थें जौ अब भि उनके मोटे मोटे चूतड़ों सें कुछऊपर तक आते थें.
रात केँ खाने केँ बाद मे अपने कमरे मे आँ गय़ा औऱ फूफी फ़रहीन अपने कमरे मे सोनेचली गईं। वोँ इसबात सें बे-खबर थीं केँ मैंने खाने केँ वक्त उनकेकोक मे नींद कि गोलीपीस कर मिला दि थि ताके वोँ गहरी नींदसो ज़ाइन। यह मेरे प्लान केँ लिये बहोत ज़रूरी थां। उन्हे कोककुछ कडुवा भि लगा थां मगर बाहरहाल वोँ उससेपी गई थीं। रात तक़रीबन दोबजे मे खामोशी सें उनके कमरे मे दाखिल हुआ। मुझे अंदाज़ा हौ गय़ा केँ वोँ गहरी नींदसोई हुइ हें। मेरेपास छोटी सि एक् टॉर्च थि जोँ मैंने जलाकर फूफी फ़रहीन केँ बेड पऱ डाली.
वोँ करवट लियेसो रहीथीं औऱ उनके लंबेबाल तकिये पर्र बिखरे थें। उनके खुलेहुए गिरेबान सें उनके मोटे मम्मे औऱ सफ़ेद ब्रा कां कुछ हिस्सा दिखाई देरहा थां। लगता थां जैसे उनके सेहतमंद मम्मे ब्रा औऱ क़मीज़ फाड़कर बाहर् निकालने हि वाले हें। मुझ सें रहा नहीं गय़ा औऱ मैंने आहिस्ता सें उनके एक् मम्मे कों क़मीज़ केँ ऊपर सें हि हाथलगा कर दबाया। ब्रा कि वजह सें मेराहाथ उनके बूब्ज़ तक तोँ नहीं पुहँच पायामगर मुझेयह अवश्य महसूस हुआ केँ ब्रा केँ नीचे बहोत मोटे औऱ बड़े बड़े मम्मे मोजूद हें। मैंने उनकी क़मीज़ केँ गिरेबान मे उंगली डालकर उससे ज़रा नीचे किया तौ देखा केँ ब्रा केँ अंदर उनका एक् मम्मा दूसरे मम्मे केँ उपरपडा हुआ थां। टॉर्च कि सफ़ेद रोशनी मे उनके गोरे बूब्ज़ पऱ नीली नीलीरगै साफ़ नज़र आँ रहीथीं.
फूफी फ़रहीन मेरे सामने कभी दुपट्टा नहीं लिया करतीथीं औऱ इस लिये मैंने कम-आज़-कम क़मीज़ केँ ऊपर सें उनके मम्मे हज़ारों दफ़ा देखे थें। मगरआज पहली दफ़ा मुझे उनके बूब्ज़ कां कुछ हिस्सा नंगा नज़रआया थां। होश उड़ा देने वाला मंज़र थां। मैंने अपने मंसूबे केँ मुताबिक़ एल्फी कि ट्यूब निकाली औऱ बड़ी आहिस्तगी सें उनके बांया मम्मे केँ बिल्कुल नीचे ब्रा केँ संग क़मीज़ पऱ 6/7 कतरे टपका दिये.फिन मैंने इसीतरह उनके लेफ्ट चूतड़ सें क़मीज़ कां दामन हटाया औऱ उस केँ ऊपर भि 9/10 कतरे एल्फी डाल दि। एल्फी चीजें जोड़ने केँ कामआती हैं औऱ फॉरन हि सख़्त होँ जाती हैं। मै चाहता थां केँ एल्फी खुश्क होँ कर फूफी फ़रहीन केँ जिस्म सें उनकी क़मीज़ औऱ शलवार कों चिपका दे औऱ चूँके जिसम केँ ऊपर सें इससे हटाना आसान नहीं होताइस लिये उनका परेशां होना यक़ीनी थां। मैउसी तरह खामोशी सें अपने कमरे मे वापस आँ गय़ा.
मे जानता थां केँ फूफी फ़रहीन ज़रा जल्द घबरा जाने वाली स्त्री थीं औऱ बहोत मुमकिन थां केँ वोँ कपड़ों कों अपने जिस्म सें चिपका देखकर मुझ सें अवश्य बात करतीं क्योंके औऱ तोँ घऱ मे कोई थां हि नहीं। वोँ स्वयं कभी भि एल्फी कों अपने शरीर सें साफ़ नहींकर सकतीथीं। ऐसी सूरत मे इंकान यही थां केँ मुझे उनके शरीर कों बहोत क़रीब सें देखने औऱ उससेहाथ लगाने कां मोक़ा मिल जाता.फिन अगर हालात थोड़े सें भि साज़गार होते तौ मे उनकी चूत मारने कि कोशिश भि कर सकता थां। यही बातें सोचते सोचते मेरीआँख लग गई.
सुभह 9 बजे केँ क़रीब मुझे फूफी फ़रहीन कि आवाज़ सुनाई दि.
“अमजद देखोयह किया होँ गय़ा हैं?” वोँ मुझे उठाते हुएकह रहीथीं.
पहले तौ मुझे नींद कि वजह सें उनकीबात समझ नहींआई मगरफिन अचानक अपनीरात वाली हरकतयाद आँ गई.
“कियाहुआ फूफी फ़रहीन?” मैंने अंजान बनतेहुए पूछा.
“मेरी क़मीज़ औऱ शलवार जिसम सें चिपकगए हें। मैंने हटाने कि कोशिश कि तोँ दर्द होनेलगा। ज़ोर सें खैंचने पऱ ज़ख़्मी हि नां हौ जाओ’ओं। ज़रा देखोयह किया हैं?” उन्होने ज़रा परैशानी सें कहा.
मे फॉरनउतर कर उनके क़रीब आँ गय़ा औऱ जहाँ एल्फी लगी थि वहा नज़रें जमादीं। फूफी फ़रहीन केँ बांया मम्मे केँ नीचे एल्फी नें खुसक हौ कर 3/4 इंच कां दाग सां बना दिया थां औऱ उनकी क़मीज़ उनके जिस्म केँ संग बड़ी सख्ती सें चिपकी हुई थि। इसीवजह सें उनकी क़मीज़ एक् तरफ सें थोड़ी सि ऊपर भि उठी हुई थि। उनके ब्रा कां निचला हिस्सा भि उनके जिस्म केँ संग चिपक गय़ा थां। मैंने एल्फी वाली स्थान पऱ उंगली फेरी तौ वोँ बहोत खुरड्र औऱ सख़्त महसूस हुईँ। मैंने पीछे आँ कर उनके चूतड़ों कों देखा तौ वहाइस सें भि बड़ी स्थान पर्र एल्फी खुसक हौ चुकी थि औऱ उनकी शलवार उनके मोटे चूतड़ केँ संग चिपककर टखने सें कुछऊपर उठ गई थि.
“फूफी फ़रहीन आप् केँ जिसम केँ संगकोई छिपकने वाली चीज़लग गई हैं। बहोत सख़्त हैं खैंचने सें खून निकल सकता हैं। मगर आप् फ़िकरमंद नाँ हूं सोचते हें केँ किया करें.” मैंने उनके मोटे औऱ उभरेहुए स्तन कि तरफ देखते हुएकहा.
“मगरयह हैं किया औऱ अब केसेहटे गी?” उन्होने पूछा। फूफी फ़रहीन परेशां थीं औऱ उनकीसमझ मे नहीं आँ रहा थां केँ किया करें.
“आप् यहा बैठाइं मे इस पऱ पानीलगा कर देखता हूं शायद उतारजाए.” मैंने तजवीज़ दि.
“हनयहठीक हैं तुम् रूको मे पानी लें करआती हूं.” उन्होने जवाब दिया.
फिन वोँ घूमकर पानी लेने शायद डिन्निंग रूम कि तरफचली गईं। मैंने उनके हिलते हुए चौड़े चूतड़ देखे औऱ मेरे मुँह मे पानीभर आया। उनके चूतरों मे चलते वक्त अजीब सि लरज़िश आँ जाती थि। मै सोचने लगा केँ फूफी फ़रहीन केँ मोटे चूतड़ कितने सफ़ेद औऱ मजेदार हूं गे औऱ अगर उनकी गांड़ मारीजाए तौ किस क़िसम कां पागलकर देने वालामजा आयेगा। मुझे ख़याल आया केँ उनके शौहर फ़ूपा सलीम जौ बहोत दुबले पतले सें व्यक्ति थें भला इतनी हटती कटती औऱ सेहतमंद स्त्री कों केसे चोदते हूं गे। फूफी फ़रहीन तौ तब हि ठंडी होँ सकतीथीं जबकोई मज़बूत औऱ जवान लन्ड उनकी मोटी बुर कां भुर्कस निकालता.
वोँ थोड़ी देरबाद एक् जग मे पानी लें आईं औऱ टेबल पऱ रख दिया.
“फूफी फ़रहीन हमें एहतियात करनी चाहिये अगरकुछ गलत होँ गय़ा तौ आप् ज़ख़्मी होँ सकती हें औऱ फिन जिसम पऱ दाग भि हमेशा केँ लियेरह जाएगा.” मैंने कहा। मुझे मालूम थां केँ अपने आप् सें फूफी फ़रहीन कों कितनी मुहाबत थि औऱ अपने गोरे जिस्म पऱ दाग तोँ उन्हे किसी सूरत मे भि क़बूल नहीं थां। उन्हे डराना ज़रूरी थां ताके मे जौ कुछ करना चाहता थां कर सकूँ औऱ वोँ मुझे नाँ रोकैयन
फूफी फ़रहीन complete - कामुक – New Episode
फूफी फ़रहीन -2
उन्हे डराना ज़रूरी थां ताके मे जोँ कुछ करना चाहता थां कर सकूँ औऱ वोँ मुझे नां रोकैयन.
“पता नहींयह हैं कियाबला औऱ कहां सें मुझे चिमत गई हैं?” वोँ घबर्राहट मे अपने माथे पर्र हाथमार कर बोलीं। जिसम पऱ दाघों वालीबात नें उन्हे औऱ भि परेशां कर दिया थां.
“मैरा ख़याल हैं केँ यह किसी कीर्रे नें किया हैं। आप् उस स्थान हाथ नां लगा’यान कहींहाथ पर्र भि नाँ लगजाए.” मैंने कहा.
“मैंने तोँ आज तक ऐसाकोई कीररा नहीं देखा। कीरे जिस्म पऱ फिन जांयें तोँ खारिश अवश्य होती हैं मगर मुझे तोँ कोई खारिश नहीं हौ रही.” उन्होने कहा औऱ फॉरन अपनेहाथ पीछेकर लिये.
अब मुझे अपनाकाम शुरुआत करना थां। मैंने दिल बड़ाकर केँ कहा:
“फूफी फ़रहीन मुझेइस चीज़ कों ख़तम करने केँ लिये आप् कि क़मीज़ केँ अंदरहाथ डालना पड़ेगा.”
“तुम् मेरे बच्चों कि तरह होँ तुम् सें मुझेकोई शरम नहीं.बस किसीतरह इस मुसीबत सें मेरीजान छुड़ाव” उन्होने जल्द सें कहा.उस वक्त उनकी जेहनी हालतऐसी नहीं थि केँ वोँ शरम केँ बारे मे सोकछतीं.
मैंने फ़रश पऱ बैठकर फूफी फ़रहीन कि क़मीज़ ऊपर उठाई औऱ अपनाहाथ अंदरकर केँ उनकेपेट कि तरफ लेँ गय़ा। क़मीज़ टाइट थि इस लिये मेराहाथ उनकेनरम गर्मपेट पर्र लगा। मैंने उनकेपेट कि गर्मी महसूस कि औऱ मेरा लन्ड अकड़ने लगा। उनके मम्मे मोटे होने कि वजह सें इतने बाहर् निकले हुए थें केँ नीचे सें मुझे उनका चेहरा नज़र नहीं आँ रहा थां क्योंके मम्मे सामने थें। मैंने ख़यालों हि ख़यालों मे उनकी चूत केँ अंदर अपना लन्ड घुसते हुए देखा औऱ कोशिश कि केँ उनकी क़मीज़ शरीर सें अलग होँ जाएमगर ज़ाहिर हैं ऐसा नहींहुआ। फिन मे उनके चूतड़ों कि तरफ आँ गय़ा औऱ उस स्थान पऱ उंगली फेरी जहाँ एल्फी लगी थि.
“फूफी फ़रहीन आप् केँ कपड़े सख्ती सें जिसम केँ संग चिपके हुए हें क़ैंची सें काटकर हि अलग करना पड़ेगा फिन शायदकोई हाल निकले.” मैंने मायूसी कां इज़हार करतेहुए कहा.
“ठीक हैं यहीकर लो.” उन्होने बे-सबरी कां इज़हार किया.
मे भागकर दूसरे कमरे सें क़ैंची लाया औऱ फूफी फ़रहीन कि क़मीज़ केँ दामन कों एहतियात सें काटकर सीधा उनके बूब्ज़ कि तरफ लें गय़ा। फिन मैंने जल्द सें उनकी क़मीज़ मुख्तलीफ़ जगहों सें काटकर उनके जिसम सें पूरीतरह अलगकर दि औऱ उस कां सिरफ़ एक् छोटा सां तुकर्रा हि उनके बूब्ज़ केँ नीचे चिपका रह गय़ा। अब उनके ब्रा केँ अंदर क़ैद मम्मे मुझे नज़रआने लगे। फूफी फ़रहीन केँ मम्मे बे-इंतिहा मोटे थें औऱ इतने बड़े साइज़ कां ब्रा भि उन्हे पूरीतरह छुपाने मे नाकाम थां। कमरे मे लगी हुई तीन ट्यूब लाइट्स कि रोशनी मे उनके गोरे मम्मे जैसेचमक रहे थें। दोनो स्तन कि गोलाइयाँ बिल्कुल एक् जैसी लगतीथीं औऱ वोँ जैसे ब्रा सें उबलेपड़ रहे थें.
मैंने फूफी फ़रहीन कि तरफ देखा तोँ उनके चेहरे पऱ कोईऐसा ता’असुर नहीं थां केँ मेरे सामने अपनी क़मीज़ उतारने सें उन्हे कोई परैशानी होँ रही थि। औऱ होती भि क्यूं मे उनका सागा भतीजा थां औऱ वोँ यहसोच भि नहीं सकतीथीं केँ मे अपनी फूफी कि चूत लेना चाहता थां। इस सें पहले मैंने उनकेसंग ऐसीकोई हरकत कि भि नहीं थि जिस सें उन्हे मुझ पर्र शक़ होता.
फूफी फ़रहीन केँ ब्रा कां निचला हिस्सा भि एल्फी केँ संग जिसम सें चिपका हुआ थां। मैंने हिम्मत कर केँ उनके भारी भर्कूं बांया मम्मे कों हाथ मे पकड़ा औऱ हल्का सां खैंचा। जहाँ एल्फी लगी हुई थि मे वोँ स्थान देखता रहा औऱ उनका मम्मा मुसलसल मेरेहाथ मे हि रहाजिस कों मैंने थोडा दबाकर पकडेरखा। मुझेऐसा लगरहा थां जैसे उनका मम्मा अभि ब्रा सें बाहर् आँ जाएगा.
फूफी फ़रहीन केँ मम्मे नां सिर्फ़ बहोत बड़े थें बल्के अच्छे झासे सख़्त भि थें। फ़ूपा सलीम कों शायद वोँ अपने स्तन कों चूसने नहीं देतीथीं क्योंके जहाँ तक उनके मम्मे मुझे ब्रा मे सें नंगे नज़र आँ रहे थें बिल्कुल बे-दाग थें.
"फूफी फ़रहीन मुझे आप् कां ब्रा भि काटना पड़ेगा क्योंके यह भि क़मीज़ कि तरह जिसम सें अलग नहीं होँ रहा.” मैंने फूफी फ़रहीन कां मोटा मम्मा हाथ मे पकडे पकडेकहा.
“हन तुम् रूको मे इस कां हुक खोलती हूं फिन एहतियात सें काटना ताके क़ैंची कि नोकैयन मुझे ज़ख़्मी नाँ करें.” मैंने फॉरन उनका मम्मा छोड़ दिया। उन्होने हाथ पीछेकर केँ अपने ब्रा कां हुकखोल कर उससे उतार दिया जौ ढीला होँ कर उनके हाथों मे आँ गय़ा। उनके स्तन पऱ सें ब्रा कां दबावहटा तोँ वोँ काफ़ी हद तक नंगे होँ गएमगर अभि तक मुझे उनके निप्पल नज़र नहीं आँ रहे थें। मैंने फूफी फ़रहीन केँ बांया मम्मे कों दोबारा हाथ मे पकड़ा औऱ उस केँ ऊपर सें ब्रा कों काट दिया। उनके एक् मोटे ताज़े मम्मे कों अपनेहाथ मे महसूस कर केँ मेरे जिसम मे आग सि लग गई औऱ मेरा लन्ड तनकर लोहाबन गय़ा.
फूफी फ़रहीन केँ रवये कि वजह सें मेरादिल बढ़ गय़ा थां। ब्रा केँ काटने केँ बाद मैंने फॉरन उनके दांयें मम्मे केँ ऊपर सें उससे हटाया औऱ उस मम्मे कों भि नंगाकर दिया.अब मैंने उनके सेहतमंद नंगे बूब्ज़ पऱ नज़र डाली तोँ मेरेहोश अरगए.इस मे कोईशक नहीं केँ उनके मम्मे मेरे तसववर सें भि ज़ियादा ज़बरदस्त थें। उनके बूब्ज़ केँ निप्पल मोटे औऱ लंबे थें औऱ निप्पल केँ आसपास कां हल्का ब्राउन हिस्सा बहोत बड़ा थां। मम्मे इतने बड़े औऱ वज़नी होने केँ बावजूद लटकेहुए नहीं थें बल्के तनेतने लगते थें.
मे जानता थां केँ खुश्क एल्फी कों माल्टे केँ छिलके कि तरह जिसम सें बड़ी आसानी सें उतारा जा सकता हैं। मैंने आहिस्ता सें फूफी फ़रहीन केँ मम्मे केँ नीचेलगी हुईँ खुश्क एल्फी उतारली.
“यह हैं किया?” उन्होने पूछा.
“पता नहीं फूफी फ़रहीन मगर बहरहाल उतार तोँ गय़ा हैं.” मैंने जवाब दिया.मै उन्हे किया बताता केँ उनके शरीर सें चिपकी हुईँ चीज़ किया थि.
“अमजद मेरा सीना तोँ छोड़ो किया पकडे हि रहोगे.” फूफी फ़रहीन नें अचानक कहामगर उनके लहजे मे सख्ती याँ नागावारी नहीं थि। मैइस दोरान यहभूल गय़ा थां केँ फूफी फ़रहीन कां एक् मम्मा अभि तक मेरेहाथ मे हैं.
मैंने उन कां मम्मा फॉरन छोड़ दिया.
उन्होने एक् हाथ अपने स्तन पर्र रखा औऱ दूसरे हाथ कि उंगली बांया मम्मे केँ नीचे फेरी.
“हन लगता हैं यह चीज़ शरीर सें उतार गई हैं औऱ कोई निशान भि नहीं चौड़ा क्योंके खुर्द्रा-पन ख़तम होँ गय़ा हैं.” उन्होने इतमीनान कां साँस लेतेहुए कहा.
“चलेंअब पीछे भि ऐसा हि करते हें.” मैंने कहा। “किया शलवार उतारों?” उन्होने पूछा.
“हन फूफी फ़रहीन तब हि तोँ मे उससेकाट सकूँगा.” मैंने जवाब दिया। उन्होने अपनी शलवार कां नाड़ा खोल दिया औऱ उनकी शलवार नीचे गिरीमगर एक् साइड सें चूतड़ों केँ संग चिपकी रही। मैंने पीछेजा कर उससेकाट कर उनके शरीर सें अलगकर दिया.
फूफी फ़रहीन केँ गोल चूतड़ बड़े मोटे औऱ चौड़े थें। मैंने पहले हि कि तरह फूफी फ़रहीन केँ बांया चूतड़ केँ ऊपर कां हिस्सा एल्फी सें साफ़कर दिया। मेराहाथ उनके चूतड़ केँ संग मुसलसल लगतारहा। उनके सफ़ेद उभरेहुए चूतड़ पर्र जहाँ एल्फी लगी थि हल्के लालरंग कां निशान पड़ गय़ा थां। मैंने कोशिश कि मगर उनकी गांड़ कां सुराख मोटे मोटे तवाना चूतड़ों केँ अंदर थां इस लिये मुझे नज़र नहीं आँ सका.
फूफी फ़रहीन कि मोटी ताज़ी गांड़ मारने कि खाहिश पता नहींकब सें मेरेदिल मे थि औऱ आज वोँ अपने नंगे चूतड़ों केँ संग मेरे सामने खड़ीथीं। मेरादिल कररहा थां केँ मे उनके मोटे औऱ भारी चूतड़ों पऱ हाथ फायरून औऱ उन्हे दबाऊं मगर मैंने स्वयं पर्र क़ाबू रखा.फिन मे उनकेआगे आँ गय़ा औऱ उनकी नंगी बुर कि तरफ देखा। उनकी बुर कसी हुईँ थि औऱ उस पऱ छोटे छोटे सियाह बाल थें। फूफी फ़रहीन कां रंग बहोत गोरा थां औऱ बुर औऱ नाफ़ केँ दरमियाँ केँ हिस्से कि सफआयदी सियाह बालों केँ अंदर सें भि झलकरही थि। वोँ नंगी खड़ीथीं औऱ मुझे अपने सामने देखकर थोडा सां सटपटा गईं.
“अमजद बेटा अबजाकर मेरे कमरे सें कपड़े लें आओ मे नंगी खड़ी हूं.” उन्होने अपनी बुर औऱ स्तन केँ सामने अपनीकटी हुई शलवार कां परदा करतेहुए कहा.
मैंने सोचा केँ अब मज़ीद देर करनागलत होगा.मै अंदाज़ा लगाने कि कोशिश कररहा थां केँ अगर मे उन पर्र हाथ डालता तोँ फूफी फ़रहीन कियाकर सकतीथीं। मुझे यक़ीन थां केँ वोँ अपनेसंग होने वाली किसी हरकत केँ बारे मे किसी कों नां बता सकतीं। शायदहर स्त्री यही करती। फ़ूपा सलीम कों तोँ वोँ वैसे भि किसी क़ाबिल नहीं समझती थींइस लिये मुझे उनकाखौफ तौ बिल्कुल भि नहीं थां.
“फूफी फ़रहीन आप् कां जिस्म बहोत शानदार हैं.” मैंने उनकीतरफ देखते हुएकहा औऱ उनके क़रीब जाकर उनके कंधों पऱ अपने दोनोहाथ रख दिये। वोँ हैरान रहगईं मगर एक् लम्हे केँ हजारवें हिस्से मे जानगईं केँ मे किया चाहता हूं.
“अमजद तुम् पागल तौ नहीं होँ गए। किया करना चाहते हौ?” उन्होने ज़रा तेज़ आवाज़ मे कहा औऱ थोडा सां पीछेहट कर अपनी शलवार औऱ ज़ियादा अपने शरीर केँ सामने करली.
मैंने अपना एक् हाथ नीचेकर केँ उनकी शलवार हटाई औऱ दूसरा हाथ उनकीहरी भरी चूत केँ ऊपररख दिया। वोँ मेरेहाथ पर्र हाथ रखतेहुए कुछ औऱ पीछे हटींमगर मैंने उनकी शलवार उन सें छ्चीन कर फैंक दि औऱ उन्हे गले सें लगाकर उनके मुँह केँ बोसे लेनेलगा। मैंने उनके वज़नी मम्मे पकड़ लिये औऱ उन्हे आते कि तरह गूंधने लगा। फूफी फ़रहीन दोहरी हौ गईं औऱ उनके मुँह सें गुस्से मे तेज़ घुरहट सि निकली। वोँ अपने आप् कों चुर्रने कि कोशिश कररही थीं। मगर मैंने उनका एक् मम्मा मज़बूती सें पकड़ लिया औऱ अपनाहाथ उनकी गर्दन मे डालकर उनके चेहरे कों ऊपरकर केँ चटाख चटाख चूमने लगा.
फूफी फ़रहीन बेड केँ क़रीब खड़ीथीं औऱ जबमुझ सें बचने केँ लिये पीछे कि तरफगईं तोँ बेड सें लगकर अपना तवाज़ून बार-क़रार नां रख सकीं औऱ बेड पर्र बैठगईं। उनकी मज़बूत पिंदलियान मेरे सामने थीं। मैंने झुककर घुटनो केँ नीचे सें उनकी टांगें उठादीं औऱ उनकी मोटी बुर मे मुहनदे कर उससे चाटने कि कोशिश करनेलगा। वोँ बेड पऱ कमर केँ बल गिरीं मगर अपनी मज़बूत टाँगों सें मुझे बड़ी बे-दरदी सें पीछे ढकैलती रहीं। मेरा मुँह उनकी चूत केँ बिल्कुल ऊपर थां औऱ वोँ मुझे स्वयं सें दूर हटाने कि कोशिश कररही थीं.
“कुत्ते केँ बचे, मादरचोद, हरामी यह कियाकर रहे हौ किया तुम् अपनी मां कों भि चोदते.” वोँ मुझे गालियाँ देने लगीं.
“फूफी फ़रहीन अगर मेरी मां आप् जैसी शानदार महिला होती तोँ उससे भि अवश्य चोदता.” मैंने दोनो हाथों सें उनकी टाँगें पकड़कर ज़बरदस्ती खोलीं औऱ उनकी चूत पऱ मुँहरख दिया.
“कमीने अपनी फूफी कों भि कोई चोदता हैं किया? तुम्हारी मां कि बुर.” वोँ गुस्से मे चीखीं। घऱ खाली थां इस मुझे उनकी तेज़ आवाज़ कां कोईखौफ नहीं थां.
मे खामोशी सें उनकी बुर चाटने मे मसरूफ़ रहा.
उन्होने मुँह सें तेज़ आवाजें निकालते हुएकई दफ़ा मुझे अपनी बुर केँ ऊपर सें हटाने कि कोशिश कि मगर मे उनकी मोटी रानों कों पकड़ केँ उनकी बुर केँ ऊपर तेज़ी सें ज़बान फेरता रहा। उन्होने अपनी दोनो टांगें बंद करनी चाहीं मगर उनकेबीच मे मेरासर थां। मै उनकी बुर कां ज़ा’ऐइक़ा चखकर बयखुद हौ गय़ा थां औऱ पागलों कि तरह उनकी बुर कों ऊपर नीचे औऱ साइड्स सें चाटरहा थां.
फूफी फ़रहीन नें कुछदेर मे हि पानी चॉर्रणा शुरुआत कर दिया थां औऱ वोँ कमज़ोर पड़ती जारही थीं। उनकी ज़ोर-आज़माई कम हुई तौ मे उनकेऊपर चढ़ गय़ा औऱ उनके बड़े बड़े बूब्ज़ कों दोनो हाथों मे लें कर चूसने लगा। उन्होने मेरीकमर पर्र दोतीन मुक्के मारेमगर फिन गोयाहार मानली औऱ मुझे रोकने कि कोशिश तारककर दि। वोँ अबमुझ सें आँखें नहीं मिलारही थीं। मैंने बेड पर्र हि झटपाट अपने कपड़े उतारे औऱ दोबारा अपनी अलिफ नंगी फूफी केँ ऊपर सवार हौ गय़ा। मेरा खड़ाहुआ लन्ड उनकी बुर केँ ऊपर आँ गय़ा औऱ मैंने बड़ी बे-रहमी सें उनके स्तन केँ निप्पल चूसने शुरुआत कर दिये। उनके जिस्म कों झटके सें लगरहे थां औऱ साफ़पता चलरहा थां केँ मम्मे चुसवाना उन्हे बहोत ज़ियादा लुत्फ़ देरहा हैं। मैंने उनका एक् मम्मा मुँह मे लें कर अपना लन्ड उनकी पानी सें भरी हुइ बुर केँ ऊपर रगड़ा। फूफी फ़रहीन केँ शरीर नें एक् झटका खाया औऱ उन्होने कहा:
”कुत्ते केँ बच्चे, तुम्हारी मां मे लूआर्रा जाए क्यूं मुझे पागलकर रहे हौ मैंने तौ कई सालों सें बुर नहीं दि। उउउफफफफफ्फ़….तुम्हारी मां पे कुत्ते छर्र्हैं, तुम्हारी मम्मी मे खोते कां लूँ डालूं.” उन्होने हमेशा मुझ सें बड़े प्रेम सें बात कि थि औऱ कभी दांता तक नहीं थां मगरइस समय वोँ मुझे बड़ी गंदी गालियाँ देरही थीं.
मुझेउसी लम्हे यह एहसास हुआ केँ गालियाँ उन्हे औऱ भि गर्मकर रहीथीं औऱ इसी लिये वोँ गालियाँ दे भि रहीथीं। बाज़ औरतों कों बुर मरवाते हुए गालियाँ दें तौ उन्हे बहोत अच्छा लगता हैं औऱ वोँ मज़ीद गर्म होती हें। फूफी फ़रहीन कि तौ वैसे भि गालियाँ देने कि आदत थि। वोँ भि शायदऐसी हि महिला थीं जिन्हे गालियाँ औऱ गंदी बातें गर्म करती हें क्योंके उस वक्त उनकी गालियों मे मुझे नफ़रत औऱ गुस्से कां अंसार शामिल नहींलग रहा थां। मैंने सोचा केँ मुझे भि उन्हे गालियाँ देनी चाहिया’आन.
मैंने उनके मम्मे केँ निप्पल केँ इर्द गिर्द ब्राउन हिस्से कों चाटा औऱ फिन उनके होंठचूम करकहा:
”फूफी फ़रहीन आप् कां मोटा फुदा मारूं। आप् कां फुदा छोड़ों। आज मुझे अपनी फुदादे कर आप् खुश होँ जांयें गी। आप् कि गांड़ मे लन्ड दूँ। आप् केँ मोटे औऱ ताक़तवर फुद्दे कों चोदना फ़ूपा सलीम केँ बस कि बात नहीं हैं। आप् जैसी मोटी ताज़ी गश्ती कों जिस कां इतना मोटा फुदा होँ एक् जवान लन्ड चाहिये.”
मुझे हैरत हुईँ केँ फूफी फ़रहीन कों गालियाँ देने सें मेरे जज़्बात भि बारँगाखहता होँ रहे थें.
मैरा अंदाज़ा सही निकला। मेरे मुँह सें ऐसी बातें सुनकर फूफी फ़रहीन बे-क़ाबू होँ गईं। “तुम् बहोत हि खनज़ीर केँ बच्चे होँ, कंज़र, तुम्हारी मां मे खोते कां लूँडून” कहकर पहलीबार उन्होने अपना मुँह मेरे मुँह मे दे दिया। मैंने थोड़ी देर उनकी ज़बान अपने मुँह मे रखकर चूसी औऱ फिनउठ करइसतरह उनकेऊपर लेट गय़ा केँ मेरा लन्ड उनके मुँह कि तरफ थां औऱ मुँह उनकी बुर कि तरफ.
अब मैंने उनकी बुर कों दोबारा चाटना शुरुआत कर दिया। वोँ मचलने लगीं औऱ उनके मुँह सें ऊँची ऊँची आवाजें निकालने लगीं। मेरा लन्ड बिल्कुल उनके मुँह केँ पास उनके गालों सें टकरारहा थां। “फ़रहीन कंजड़ी, तेरा भोसड़ा मारूं, तारे फुद्दे मे लन्ड डून, चल मेरा लन्ड चूस। कुतिया तेरी बुर केँ बड़ेखाब देखे हें मे नें, तेरी बेहन कि मोटी बुर लूं.आज कुतिया कि तरह अपने भतीजे सें बुर मरवा लेँ औऱ मज़ेकर.” मैंने उन्हे मज़ीद गंदी गालियाँ दीं तौ उनके शोक़् कि आग औऱ ज़ियादा भर्रक आती। “तुम्हारी मां कि बुर मे लूँ मारूं, किसी रंडी कि औलाद, गश्ती केँ बच्चे.” उन्होने भि जवाबन मुझे गालियाँ दीं.मै उनकी बुर चाटने केँ दोरान उनके मुँह केँ संग अपने लन्ड कों लगाता रहा.फिन कुछकहे बगैर हि उन्होने मेरा लन्ड अपने मुँह मे लेँ लिया औऱ उससे तेज़ तेज़ चूसने लगीं। मेरे टट्टे उनकीनाक औऱ गालों पर्र लगरहे थें औऱ लन्ड मुँह केँ अंदर थां। उनकाथूक मुझे अपने लन्ड पर्र महसूस हौ रहा थां.
कुछदेर फूफी फ़रहीन कि बुर चाटने औऱ उन सें अपना लन्ड चुसवाने केँ बाद मे सीधा होँ कर उनकेऊपर लेट गय़ा औऱ उनकी टांगें खोलकर अपना लन्ड उनकी मोटी ताज़ी बुर केँ अंदरडाल दिया.
फूफी फ़रहीन कि बुर अब भि ज़ियादा नहीं खुली थि औऱ मुझे महसूस हुआ जैसे मेरा लन्ड उनकी बुर कों चीरता हुआ अंदरजा रहा हौ। उन्होने ज़ोर कि आवाज़ निकाली। "उफ़फ्फ़……। अमजद हरामी कि नेज़ल मत छोड़ो मुझे मे तुम्हारा लौड़ा बर्दाश्त नहींकर सकती। किसी कुतिया रंडी केँ बच्चे, ऊऊओ एयाया मे छ्छूटने वाली हूं.” मुहजहे कुछ हैरानी हुईँ केँ वोँ इतनी जल्द खलास हौ रहीथीं। शायद उन्होने बहोत अरसेबाद अपनी बुर मे लन्ड लिया थां औऱ इस लिये उनकी क़ुवत-ए-बर्दाश्त काफ़ी कम हौ गई थि। वोँ मेरे घस्सों कि वजह सें बेड पर्र आगे पीछेहिल रहीथीं। वोँ ज़ियादा देर तक अपनी बुर केँ अंदर मेरे लन्ड कों संभाल नां सकीं औऱ आठडूस ज़बरदस्त घस्सों केँ बाद हि खलास होँ गईं.“हन, हाँ अमजदइधर हि झटके मारो….इधर हि…….इधर हि, इधर हि अपना लौड़ा रखो.” वोँ भारी आवाज़ मे कहेजा रहीथीं। मै उनकी चूत मे घस्से मारता रहा औऱ वोँ लेतीं अपने चूतड़ों कों ऊपर नीचे हिलाती रहीं.
तक़रीबन तीनचार मिनिट केँ बाद वोँ एक् दफ़ाफिन खलास होने केँ क़रीब होँ गईं औऱ उनकी बुर नें पहले सें भि ज़ियादा पानी छोड़ दिया.मगर मे यह नहींजान पाया केँ वोँ पूरीतरह खलास हुई हें याँ नहीं। भरहाल मैंने अपनाहाथ उनके चूतड़ों केँ नीचे किया औऱ उनकी गांड़ केँ सुराख पर्र उंगली फेरने लगा.इस पर्र वोँ जैसे बिफर सि गईं औऱ खुल खुलाकर अपनी बुर मरवाने लगीं.अब वोँ यहभूल चुकीथीं केँ वोँ मेरी सग़ी फूफी हें। भतीजे केँ जवान लन्ड नें फूफी कि बुर कों अच्छा मजा दिया थां। मेरा लन्ड अबजड़ तक फूफी फ़रहीन कि चूत मे जारहा थां। उनके मम्मे मेरी मुठियों मे थें औऱ मे उन्हे कसकसकर भींचरहा थां। वोँ अपनी मोटी भारी भरकम गांड़ उठाउठा कर मेरे घस्सों कां पूरा पूरा मुक़ाबला करती रहीं औऱ मेरे लन्ड कों एक् दफ़ाफिन पूरीतरह सें अपनी बुर मे लेने लगीं.
फिन मे उनकेऊपर सें हट गय़ा औऱ उन्हे अपने लन्ड पऱ बैठने कों कहा। वोँ अपने क़ावी औऱ जानदार जिसम कों मेरेऊपर लेँ आईं औऱ मेरा लन्ड हाथ मे पकड़कर अपनी चूत केँ अंदरडाल लिया। मैंने उनके बूब्ज़ सें खेलता रहा औऱ उनका भरपूर शरीर मेरे लन्ड पर्र ऊपर नीचे होतारहा। मेरी सग़ी फूफी मेरे लन्ड पर्र बैठकर बुर मरवारही थीं औऱ मे खुशी औऱ हैरत केँ मिले जुले एहसास केँ संग उनके गोरे जिस्म कों देखरहा थां। मुझे यक़ीन नहीं थां केँ मे कभी फूफी फ़रहीन कों चोद सकूँगा मगर खुश-क़िस्मती सें वोँ दिन आँ हि गय़ा थां। अचानक उनकी चूत मेरे लन्ड केँ गिर्द कस गई औऱ वोँ मेरे मुँह पऱ झुकगईं। उनके लंबेबाल मेरे कंधों कों गुदगुदाने लगे। मैंने उनके होठों पऱ प्रेम किया तोँ उन्होने तेज़ सिसकी ली औऱ फिन तेज़ी सें खलास होने लगीं.
फूफी फ़रहीन केँ मोटे मोटे चूतड़ों पऱ सें मे अपनी आँखें हटा नहींपा रहा थां। नां-जाने मेरेदिल मे कियाआया केँ मे उनके भारी चूतड़ों पर्र अच्छा ख़ासा ज़ोरदार ठप्पर दे मारा। कमरे मे धाप कि तेज़ आवाज़ गूँजी औऱ फूफी फ़रहीन नें भि आईंउसी समय एक् तेज़चीख मारी। उनके दोनो सफ़ेद सफ़ेद चूतड़ों केँ दरमियाँ मेरेहाथ कि उंगलियों कां लाल निशान पड़ गय़ा। कुछदेर उनके चूतड़ों कों मसलने केँ बाद मैंने उन्हे चारों हाथों पैरों पर्र कुतिया बनाकर पीछे सें उनकी मोटी बुर मे अपना लन्ड डाल दिया। “ज़लील केँ बच्चे, कंज़र तूँ नें मुझे वाक़ई कुतिया बना दिया हैं। उूउउफफफ्फ़…। कुत्ते, बहनचोद, रंडी केँ बच्चे मार दिया मुझे हरामी। तेरा लन्ड बहोत मोटा हैं, बहोत मोटा हैं तेरा लन्ड.” लज़्ज़त केँ उन लम्हो मे फूफी फ़रहीन केँ मुँह सें बे-तकान गालियाँ निकलरही थीं। रिश्ते नाते, इज़्ज़त एहतीराम, प्रेम इश्कसभी ख़तम हौ चुके थें। सिरफ़ लन्ड औऱ बुर कां खेलरह गय़ा थां। मुझे भि मजा आँ रहा थां क्योंके मेरे लिये भि यह एक् बिल्कुल नया तजर्बा थां। मै उनकी बुर मारता रहा.
उनकी गांड़ कां गांड कां सुराख मेरे सामने थां जिस पऱ मे उंगली फेरता जारहा थां। हर घस्से केँ संगजुब मेरा लन्ड उनकी बुर केँ अंदर जाता तोँ उनकेदूध कि तरह गोरे औऱ मोटे चूतड़ मेरी रानों सें टकराते। कुछ हि देर मे मे फूफी फ़रहीन कि बुर केँ अंदर खलास हौ गय़ा औऱ मेरे लन्ड सें मनी कि पिचकारियाँ निकलकर उनकी गर्म चूत केँ अंदरचली गईं। वोँ बेड पर्र तक कर धायर हौ गईं.यों अपनी हसीन फूफी कों चोदने कां मेरा बरसों कां अरमान पूरा हौ गय़ा.
फूफी फ़रहीन कि बुर मार लेने केँ बादअब एक् औऱ बड़ाअहम मरहला दरपाश थां औऱ वोँ थां उनकी गांड़ लाना। उन्होने अगलेदो दिन हमारे घऱ हि रहना थां औऱ मुझेइसी दोरान उनकी गांड़ मारनी थि जौ बा-ज़ाहिर इतना आसानकाम नहीं थां। इससमय भि हालात कुछऐसे अच्छे नहीं थें। अगर अपनी सग़ी फूफी कों चोद लियाजाए तोँ टेंशन कां होना बिल्कुल क़ुदरती अमर हैं। फूफी फ़रहीन एहसास-ई-जुर्म कां शिकार थीं औऱ अपने भतीजे सें बुर मरवाने पऱ उन्हे बड़ी सख़्त नादामात महसूस होँ रही थि। इस कां साबोट यह थां केँ कल वाले वाक़ई’आय केँ बाद उन्होने नां मेरा सामना किया थां औऱ नां हि मुझ सें कोईबात कि थि। मुझे उन्हे इस जेहनी पेरैशानि औऱ एहसास-ए-जुर्म सें निजात दिलानी थि ताकेबात आगेचल सके औऱ मे उनकी गांड़ मार सकूँ.
फूफी फ़रहीन complete - कामुक – New Episode
फूफी फ़रहीन -3
दूसरे दिन बहोत सोच बिचार केँ बाद मे उनके कमरे मे गय़ा ताकेउन सें बातकर सकूँ औऱ हालात बेहतर होँ सकैं.जब मे उनके कमरे मे दाखिल हुआ तोँ वोँ बेडकवर ठीककर रहीथीं औऱ बड़ीसजी सज्जई, बनी सवरीलग रहीथीं। उनके रवये कों देखते हुएयह बात मुझेकुछ अजीब औऱ मंताक़ केँ खिलाफ लगी। उन्होने कालेरंग कि शलवार क़मीज़ पहनी हुइ थि जिस मे सें उनका गुलाबी याँ लालरंग कां ब्राझलक रहा थां। उनके मोटे औऱ सेहतमंद मम्मे देखकर जिनको मैंने एक् दिन पहले हि खूब चूसा औऱ चाटा थां मेरे लन्ड मे सनसनी सि होनेलगी। उनकेदूध कि तरह गोरे जिस्म पऱ काले कपड़े बहोत सजरहे थें। मैंने दिल हि दिल मे यह फ़ैसला किया केँ फूफी फ़रहीन कि बुर औऱ गांड़ आजफिन अवश्य मारूं गा.
"फूफी फ़रहीन आप् क्यूं परेशां हें?" मैंने बात शुरुआत कि.
"अमजद तुम् नें जोँ हरकत मेरेसंग कि किया वोँ परेशां करने वाली नहीं? मे तौ हैरान हूं केँ तुम् मेरे बारे मे ऐसा सोचते थें औऱ मे बे-वक़ूफ़ हमेशा सें बे-खबर थि। किया अपने बाप कि बेहन केँ संग ज़ीना करना मुनासिब हैं?" उन्होने बेड पऱ बैठते हुए थोड़े सें गुस्से सें कहा.
"फूफी फ़रहीन मे मानता हूं केँ मुझ सें बहोत बड़ा गुनाह सर्ज़ाद हुआ हैं। मगर मे किया करूँ मुझे वोही स्त्री अच्छी लगती हैं जोँ सेहतमंद हौ औऱ कम-उमर नां होँ। आप् मे वोँ सभीकुछ हैं जौ मे किसी स्त्री मे देख्ना चाहता हूं। हसीन चेहरा, सेहतमंद शरीर औऱ फिनसभी सें बड़ीबात यह केँ आप् मेरी सग़ी फूफी हें यानी मेरी अपनी हें। मै तोँ आप् कों मनपसंद करने पऱ मजबूर थां." मैंने अपनी सफाईपेश करतेहुए उनकी तारीफ भि कि.
"किया दुनिया भर केँ भतीजे अपनी फ़ुपिओं कों चोदते फिरते हें? कियायही ज़माने कां दस्तूर हैं? बाक़ी सारी औरतें मर गई हें किया?" उन्होने उसीतरह बहेस जारीरखी.
"फूफी फ़रहीन मुझे जोँ मजा अपनी सग़ी फूफी कों चोदने मे आया हैं वोँ किसी बाहर् कि महिला केँ संग नहींआता। यह मेरी कमज़ोरी हैं। मै बहोत बचपन सें हि इन्सेस्ट कां शोक़ीं हूं." मैंने उन्हे बताया.
"मगर मुझे अपने आप् सें जौ नफ़रत महसूस हौ रही हैं उस कां किया करूँ?" वोँ नाक सिकोड़ कर बोलीं.
मैंने सोचा केँ अगर फूफी फ़रहीन कों स्वयं सें इतनी हि नफ़रत महसूस हौ रही हैं तौ मेकप क्यूं कररखा हैं औऱ इतनीबनी सवरी क्यूं हें। वोँ अगर चाहतीं तौ नाराज़गी केँ इज़हार केँ तौर पऱ सुबा हि अपनेघऱ लाहोर वापसचली जातीं। मगर उन्होने ऐसा नहीं किया.यह सभी बातें इस हक़ीक़त कां सबूतथीं केँ जौ उनकी ज़बान पऱ थां वोँ दिल मे नहीं थां.
"किया आप् एक् भरपूर महिला नहीं हें फूफी फ़रहीन? किया आप् कों एक् मज़बूत औऱ ताक़तवर लन्ड कि ज़रूरत नहीं? मुझेईलम हैं केँ फ़ूपा सलीम आप् जैसी खुऊबसूरत औऱ तंदरुस्त स्त्री कि जिस्मानी ज़रूरियात पूरी नहींकर सकते। बाहर् किसी सें चुदवाने सें यह बेहतर नहीं हैं केँ आप् मुझे अपनी बुर देदें ताके किसी कों उंगली उठाने कां मोक़ा नाँ मिलसके। औऱ फिनयह भि सच बताएं केँ किया आप् कों मुझ सें चुदवा करमजा नहींआया?" मैंने बिल्कुल खुले अल्फ़ाज़ मे दलीलपेश कि.
"अपनी ज़िंदगी सें खुश नाँ होतेहुए भि मैंने कभी किसी मर्द सें ता’अलुक़ात कायम करने कां नहीं सोचा। औऱ तुम्हे तौ कोईहक़ हैं हि नहीं केँ तुम् मेरी खराब ज़िंदगी कां फायदा उठाकर मुझे चोदना शुरुआत करदो। तुम् मेरे भतीजे हौ तुम्हे तौ ऐसी बातें सोचानीं भि नहीं चाहिए." वोँ बोलीं.
उनकीबात बिल्कुल सही थि मगर मुझेकोई जवाब तोँ देना हि थां। "आप् किया समझती हें केँ आप् दुनिया कि वाहिद महिला हें जिस नें इन्सेस्ट कि हैं। फूफी फ़रहीन इस सोसाइटी मे छुप छुपाकर हरतरफ यही होँ रहा हैं। हम् इस सें परदा पोशी करें तौ औऱ बात हैं मगरऐसा करने सें हक़ीक़त बदल तौ नहींजाए गी औऱ नाँ हि इन्सेस्ट ख़तम होँ जाएगी। बाहर् केँ कई मुल्कों मे बालिग़ मर्द औऱ स्त्री कि इन्सेस्ट जुर्म नहीं हैं." मैंने कहा.
"मगर बेटा…." मुझे बेटा कहतेहुए उनके चेहरे कां रंग एक् लम्हे कों बदल गय़ा क्योंके मेरा लन्ड लेने केँ बादअब उनके ख़याल मे मेरा औऱ उनका नाता पहले वाला नहींरहा थां। औऱ किसीहद तक यह थां भि सही.जब मर्द औऱ महिला सेक्स कर लें तौ उनके दरमियाँ ता’अलुक़ात कि नौेयात किसी नां किसीहद तक तब्दील अवश्य होती हैं। तमाम पर्दे उठ जाते हें औऱ तमामभरम खुल जाते हें। मेरे औऱ फूफी फ़रहीन केँ संग भि ऐसा हि हुआ थां। अब वोँ सिरफ़ मेरी फूफी नहींरही थीं बल्के महबूबा भि बन गई थीं.
"फूफी फ़रहीन अप फज़ूल परेशां होँ रही हें। आप् अब भि मेरी फूफी हें औऱ हमेशा रहेंगी। इसीतरह मे भि आप् कां भतीजा हि रहूंगा। अगर मैंने आप् कि बुर मारी हैं तौ उस सें हमारे रिश्ते पर्र किसी क़िसम कां कोईअसर नहीं पड़ा। औऱ फिन वैसे भि जब एक् मर्द एक् स्त्री कि बुर लेता हैं तोँ दोनो मे इश्क बढ़ती हैं कम नहीं होती." मैंने उन्हे दिलासा दिया। वोँ मेरी बातें गौर सें सुनरही थीं.
"अच्छा बेटे मे तुम्हारी दलीलमान लेतीं हूं। इस केँ अलावा अब किया भि कियाजा सकता हैं?" वोँ बोलीं.
“अच्छा एक् बात तौ बताओ। तुम् कब सें सेक्स कररहे हौ?” उन्होने बात बदलते हुए पूछा.
मे इसबात कां जवाब देने मे ज़रा झिजक.
“लगता हैं तुम्हे सेक्स कां काफ़ी तजर्बा हैं.” उन्होने फिनकहा.
“फूफी फ़रहीन मुझे ज़ियादा तौ नहींमगर कुछ नां कुछ तजर्बा अवश्य हैं.” मैंने जवाब दिया.
“अगर इस मामले मे तुम्हारा तजर्बा कम हैं तौ डिसचार्ज होने मे इतनीदेर केसे लगाते हौ। मै ज़ियादा इन चीज़ों कों नहीं जानती मगर इतना तौ मुझे भि पता हैं केँ मर्द तजरबे औऱ प्रॅक्टीस सें हि सेक्स केँ दोरान अपनासमय बढ़ा सकता हैं.” उन्होने हंसकर कहा
“आप् ठीककह रही हें सेक्स जिस्मानी सें ज़ियादा जेहनी गेम हैं। अगर मर्द कों अपने ज़हन पर्र कंट्रोल होँ तोँ वोँ अपने जिसम कों भि कंट्रोल कर सकता हैं। उससे सेक्स केँ बारे मे काफ़ी सारा नालेज भि होना चाहिये। हम् जिन चीज़ों केँ बारे मे बिल्कुल नहीं जानते याँ थोडा जानते हें उन्हे गलत तरीक़े सें करते हें। सेक्स केँ संग भि यही होता हैं। फिन जौ मर्द ज़ियादा सेक्स करती हें उन्हे अपनेऊपर ज़ियादा कंट्रोल होता हैं औऱ वोँ अपनी मर्ज़ी सें डिसचार्ज हौ सकते हें.” मैंने कहा.“हन यह तोँ ठीक हैं.” वोँ बोलीं.
“मगरइस मे औऱ भि कई फॅक्टर्स हें। सेक्स करतेहुए मर्द कों कोई टेंशन याँ खौफ नहीं होना चाहिये। टेंशन मे तोँ कोई भि कामसही तौर सें नहीं कियाजा सकता। उससेयह खौफ भि नहीं होना चाहिये केँ वोँ महिला कों सॅटिस्फाइ नहींकर सकेगा। एक् मज़े कि बात आप् कों औऱ बताऊं। हमारे जिसम मे एक् ख़ास मसल्स होते हें जोँ केगेल मसल्स कहलाते हें। यह वोही मसल्स हें जौ मर्द पैशाब कों रोकने केँ लिये इस्तेमाल करते हें औऱ इन मसल्स हि कि वजह सें मनी लन्ड मे सें तेज़ पिकचकार्यों कि सूरत मे बाहर् निकलती हैं। अगर मर्दइन मसल्स कों दबादबा कर मज़बूत करतारहे तोँ वोँ अपने डिसचार्ज होने कों बहोत देर तक कर सकता हैं.” मैंने उन्हे बताया.
"पता नहीं तुम् नें इस क़िसम कि बातें औऱ हरकतें कहां सें सीखलीं." उन्होने अजीब सें अंदाज़ मे कहा। मैंने नहाज़ मुसूराने पऱ इक्तीफ़ा किया.
कुछ देर खामोशी रही औऱ फिन वोँ दोबारा ज़रा रिलॅक्स होतेहुए बोलीं:
“अच्छा यह बताओ केँ तुम् मेरेसंग यहसभी करतेहुए मुझे गालियाँ क्यूं देरहे थें.”
“पता नहीं फूफी फ़रहीन आप् कों चोदते हुए गालियाँ देने सें मेरे जज़्बात औऱ भर्राकते थें। इस कां मक़सद आप् कि बे-इज़्ज़ती करना नहीं थां.” मैंने हंसकर कहा। मैंने उन सें तौ नहींकहा मगर मे जानता थां केँ बुर देतेसमय गालियाँ उन्हे भि बहोत गर्म करतीथीं। उन्होने हि पहले मुझे गालियाँ दि थीं। मैंने तोँ सिरफ़ जवाब दिया थां मगरअब वोँ इसबात कां सारा मलबामुझ पर्र डालरही थीं.
“आप् सच कहीन किया गालियों सें आप् भि गर्म नहीं हुइ थीं.” मैंने प्रश्न किया.
“हन कुछकुछ.” उन्होने गोलमोल जवाब दिया औऱ हंस पड़ीं। फिन वोँ बेड सें उठकर खड़ी होँ गईं.
इसी कों मुनासिब मोक़ा जानते हुए मैंने आगेबढ़ कर फूफी फ़रहीन कों गले सें लगा लिया औऱ उनके मोटे औऱ चौड़े चूतरों कि गोलाइयों पर्र अपने दोनोहाथ फैरना शुरुआत कर दिये। उनके उभरे औऱ तनेहुए बूब्ज़ पर्र चढ़ाहुआ टाइट ब्रा मेरे सीने केँ अंदरघुस रहा थां औऱ मुझे उनके स्तन कां वज़न औऱ नर्मी महसूस हौ रही थि। उनके चेहरे औऱ जिसम सें साबुन, पर्फ्यूम, लिपस्टिक औऱ शॅमपू कि मिली जुली खुश्बू उठरही थि। मैंने स्लीपिंग सूट केँ पाजामे सें अपना सख़्त होताहुआ लन्ड बाहर् निकाल लिया औऱ अपनाहाथ उनकी क़मीज़ केँ नीचेकर केँ उनके चूतरों केँ बीच मे उनकी गांड़ केँ सुराख मे उंगली दि। उन्होने अपनेछेद पऱ मेरी उंगली औऱ बुर केँ संग मेरे लन्ड कों टकराता हुआ महसूस किया तोँ अपने जिस्म कों थोडा सां पीछेकर केँ मेरा लन्ड अपनेहाथ मे पकड़ लिया औऱ उससे सहलाने लगीं
फूफी फ़रहीन complete - कामुक - Aage kya hua? Next part padhiye
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