Holi sexi stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - Holi sex story - Latest Update 1
Holi sexi kahaniyan-होली कि सेक्सी कहानियाँ
होली पे चुदाई --1
हाई फ्रेंड्स मे राज शर्मा आपकोफिन सें एक् घरेलू किस्सा सुनाने जारहा
हूं। ये मेरी फ्रेंड सुनीता कि किस्सा हैं। वो आपको बताने जारही
हैं कि केसे उसने अपनी सहेली औऱ उसके बड़े भइया केँ संग चुदवाया.
इस होली पऱ मां बापू बाहर् जारहे थें। रीलेशन मे एक् डेत होँ
गई, थि। मम्मी नें पड़ोस कि आंटी कों मेरा ध्यान रखने कों कह दिया
थां। आंटी नें कहा थां कि आप् लोग जाइए सुनीता कां हम् लोग ध्यान
रखेंगे। मां नें हमे समझाया औऱ फिनचली गयीँ,। पड़ोस कि आंटी कि
एक् लड़की थि मीना जोँ मेरीउमर कि हि थि। वो मेरी बहोत फास्ट फ्रेंड
थि। वो बोलि कि जब तक तुम्हारे मां पिताजी नहींआते तुम् खानां
हमारे घऱ हि खानां.
मे खानां औऱ टाइमवही बिताती पर्र रात मे सोती मीना केँ संग
अपनेघऱ पऱ हि थि। दोदिन होँ गये औऱ होली आँ गयीँ,। सुभह होते हि
मीना नें अपनेघऱ चलने कों कहा तोँ मे रंग सें बचने कि लिए बहाने
करनेलगी। मीना बोलि, "मे जानती हूं तुम् रंग सें बचना चाहती हौ.
नहींआई तोँ मे स्वयं आँ जाउन्गी." "शपथ सें आउन्गि."
मे जान गई, कि वो रंग लगाए बगैर नहीं मानेगी। मैने सोचा कि
घऱ पऱ हि रहूंगी जब आएगी तुँ चली जाउन्गि। होली केँ लिए पुराने
कपड़े निकाल लिए थें। पुराने कपड़े छ्होटे थें। स्कर्ट औऱ शर्टपहन
लिया। शर्ट छ्होटी थि इसलिये बहोत कसी थि जिससे दोनो चूचियों
मुश्किल सें सम्हल रही थि। बाहर् होली कां शोरगुल मचरहा थां.
चड्डी भि पुरानी थि औऱ कसी थि। कसे कपड़े पहनने मे जोँ मजा
आँ रहा थां वो कभी शलवार समीज़ मे नहींआया। चलने मे कसे
कपड़े चूचियों औऱ बुर सें रगड़कर मजादे रहे थें इसलिये मे
इधरउधर चलफिन रही थि.
मे अभि मीना केँ घऱ जाने कों सोच हि रही थि कि मीना दरवाज़े कों
ज़ोर ज़ोर सें खटखटाते हुवे चिल्लाई, "अरी सुनीता कि बच्ची जल्द सें
द्वार (दरवाज़ा) खोल." मैने जल्द सें द्वार (दरवाज़ा) खोला तौ मीना केँ पीछे हि
उसका बड़ा भइया रमेश भि अंदरघुस आया। उसकी हथेली मे रंग
थां। अंदरआते हि रमेश नें कहा, "आज होली हैं बचोगी नहीं,
लगाउन्गा अवश्य."
मीना बचने केँ लिए मेरे पीछेआई औऱ बोलि, "देखो भैया ये
ठीक नहीं हैं." मेरीसमझ मे नहींआया कि क्याँ करूँ। रमेश
मेरेआगे आया तौ ऐसालगा कि मीना केँ बजाय मेरे हि नाँ लगादे। मे
डरी तोँ वो हथेली रगड़ता बोला, "बिना लगाए जाउन्गा नहीं
मीना.""हाए राम भैया तुमको लड़कियों सें रंग खेलते शरम नहीं
आती." "होली हैं बुरा नां मानो। लड़कियों कों लगाने मे हि तौ मजा
हैं। तुम् हटोआगे सें सुनीता नहीं तोँ तुमको भि लगा दूँगा." मे डर
सें किनारे थि। तभी रमेश नें मीना कों बाँहों मे भरा औऱ हथेली
कों उसकेगाल पर्र लगारंग लगाने लगा। मीना पूरीतरह रमेश कि
पकड़ मे थि। वो बोलि, "हाए भैया अब छ्चोड़ो नां." "अभि कहां
मेरीजान अभि तौ असली स्थान लगाना बाकी हि हैं." औऱ वो पीछे सें
चिपक मीना कि दोनो चूचियों कों मसल उसकी गांद कों अपने लन्ड पर्र
दबाने लगा.
"हाए भैया." चूचियों दबाने पऱ मीना बोलि तौ रमेश मेरीओर
देख अपनी बेहन कि दोनो चूचियों कों दबाता बोला, "बुरा नाँ मानो होली
हैं." मीना कि मसलीजा रही चूचियों कों देख मे अपने आप् कसमसा
उठी। चूचियों कों अपने भइया केँ हाथ मे दे मीना कि उछलकूद कम
होँ गयीँ, थि। रमेश उसकी दोनो चूचियों कों कसकर दबाते हुवे उसकी
गांद कों अपनी रानो पऱ उठताजा रहा थां.
"हाए भैया फ्रॉक फट जाएगी." "फटत जानेदो। नयीला दूँगा." औऱ
अपनी बेहन केँ दोनो अमरूद दबाने लगा.इस तरह कि होलीदेख मुझे
अजीबलगा। मे समझ गयीँ, कि रमेशरंग लगाने केँ बहाने मीना कि
चूचियों कां मजा लें रहा हैं। "हाएअब छ्होरो नाँ." मीना नें मेरीओर
देखते कहा तोँ मुझे मीना मे एक् बदलाव लगा.तभी रमेश उसकीगोल
गोल चूचियों कों दबाते हुवे बोला."हाए इससाल होली कां मजा आँ
रहा हैं। हाए मीनाअब तौ पूरारंग लगाकर हि छोड़ूँगा." औऱ पूरी
चूचियों कों मुट्ठी मे दबा बेताबी सें दबाने लगा। मैने देखा कि
रमेश कां चेहरा लाल हौ गय़ा थां। अब मीना विरोध नहींकर रही थि
औऱ वो मेरे सामने हि अपनी बेहन कों रंग लगाने केँ बहाने उसकी
चूचियाँ दबारहा थां। इससीन कों देख मेरेमन मे अजीब सि
उलझन हुई। मेरी औऱ मीना कि चूचियों मे थोडा सां फ़र्क थां। मेरी
मीना सें ज़रा छ्होटी थि। सहेली कि दबाईजा रही चूचियों कों देख
मेरी चूचियाँ भि गुदगुदाने लगी औऱ लगा कि रमेश मेरी भि रंग
लगाने केँ बहाने दबाएगा। मीना कों वो अपने शरीर सें कसकर चिपकाए
थां। [/color]
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"हाए छोड़ो भैया सहेली क्याँ सोचेगी." मीना चूचियों कों फ्रॉक केँ
उपर सें दब्वाती मेरीओर देख बोलीं तोँ रमेशउसी तरह करते हुवे
मेरीओर देखता बोला, "सहेली क्याँ कहेगी। उसकेपास भि तौ हें.
कहेगी तोँ उसको भि रंगलगा दूँगा." मेरी हालतये सभीदेख खराब
हौ गई, थि। मैने सोचा कि कही रमेश अपनी बेहन कों रंग लगाने केँ
बहाने यही चोदने नाँ लगे.समझ मे नहीं आँ रहा थां कि क्याँ
करूँ। मुझेलगा कि वो अपनी बेहन कों चोदने कों तैय्यार हैं। मीना
केँ हावभाव औऱ खामोश रहने सें ऐसालग रहा थां कि उसे भि मजा
मिल रहा हैं। मे जानती थि कि चूचियाँ दबवाने औऱ बुर चुदवाने
सें लड़कियों कों मजाआता हैं। मुझे दोनो भइया बेहन कां खेल देखने
मे अच्छा लगा। मेरे अंदर भि वासना जागी.
तभी मीना नें नखरे दिखाते हुवेकहा, "हाए भैया फाड़ दोगे
क्याँ?" "क़ायदे सें लगवाएगी तोँ नहीं फाड़ुँगा। मेरीजान बस एक् बार
दिखादो." औऱ रमेश नें दोनो चूचियों कों दबाते हुवे उसके चूतड़
कों अपनीरान पर्र उभारा। "अच्छा बाबाठीक हैं। छोड़ो,
लगवाउंगी." "इतना तडपारही होँ जैसे सिर्फ मुझे हि आएगा होली कां
मजा.आज तोँ बिना देखे नहीं रहूँगा चाहे तुम् मेरी शिकायत करदो."
फिन मीना मेरीओर देख बोलीं, "द्वार (दरवाज़ा) बंदकर दो सुनीता मानेगा नहीं."
मीना कि आवाज़ भारी हौ रही थि। चेहरा भि तमतमा रहा थां। रमेश
नें देखने कि बातकर मेरे जिस्म मे सनसनी दौड़ा दि थि। मेरी
बुर भि चुनचुनाने लगी थि। तभी रमेश उसकी चूचियों कों
सहलाकर बोला, "बंद करदोआज अपनी सहेली केँ संग मेरी होलीमन
जानेदो." रमेश कि बात नें मेरे जिस्म केँ रोए गंगना दिए। मैने
धीरे-धीरे सें द्वार (दरवाज़ा) बंदकर दिया। जैसे हि द्वार (दरवाज़ा) बंद किया, रमेश
उसको छोड़ आँगन मे चला गय़ा। उसके जाते हि अपनी सिकुड़ी हुईँ
फ्रॉक ठीक करती मीना मेरेपास आँ बोलि, "सुनीता किसी सें बताना
नहीं। भैया मानेगे नहीं। देखा मेरी चूचियों कों केसे ज़ोर ज़ोर सें
दबारहे थें." उसका जिस्म गर्म थां। मे गुदगुदाते मंन सें
बोलीं, "हाए मीना तुँ चुदवायेगि क्याँ?" मीना मेरी चूचियों कों दबाती
मेरे शरीर मे करेंट दौड़ा बोलि, "बिना चोदे मानेगा नहीं। कहना
नहीं किसी सें." "पऱ वो तौ तुम्हारा बड़ा भइया हैं.?" "तौ क्याँ हुवा। हम्
दोनो एक् दूसरे सें बहोत प्रेम करते हें." "ठीक हैं नहीं
कहूँगी." "हाए सुनीता तुम् कितनी अच्छी सहेली हौ." औऱ मीना मेरी दोनो
चूचियों कों छ्चोड़ मुस्कराती हुइ अंगड़ाई लेनेलगी.
हर साँस केँ संग मेरी चूचियों औऱ बुर कां वोल्टेज इनक्रीस हौ
रहा थां। रमेश अभि तक आँगन मे हि थां। मीना कि दबाई गई,
चूचियाँ मेरी चूचियों सें अधिक तेज़ी सें हाँफरही थि। उसकी
फ्रॉक बहोत टाइट थि इसलिये दोनो निपल उभरे थें। अब मेरीकसी
चड्डी औऱ मजादे रही थि। मे होली कि इस रंगीन बहार केँ बारे
मे सोच हि रही थि कि मीना मुस्करती हुई बोलीं, "सुनीता तुम्हारी
वजह सें आज हमको बहोत मजा आएगा." "बुलालो नाँ अपने भैया
कों." "पेशाब करने गय़ा होगा। देखा थां मेरी चूचियों कों मीस्थे हि
भैया कां फंफना गय़ा थां। हाए भैया कां बहोत तगड़ा हैं। पूरे 8
इंच लंबा लन्ड हैं भैया कां." मस्ती सें भरी मीना नें हाथ सें अपने
भइया केँ लन्ड कां साइज़ बनाया तूँ मुझे औऱ भि मजाआया। अब खुला थां
कि सहेली अपने भइया सें चुदवाने कों बेचैन हैं.
"हाए मीना मुझे तोँ नाम सें डर लगता हैं। केसे चोद्ते हें." अब
मेरे जिस्म मे भि चीटियाँ चलरही थि। "बड़ामजा आता हैं.
डरने कि कोईबात नहींफिन अब तौ हम् लोग जवान होँ गये हें। तुँ कहे
तोँ भैया सें तेरेलिए बात करूँ। मौका अच्छा हैं। घऱ खाली हि
हैं। तुम्हारे घऱ मे हि भैया सें मजा लिया जाएगा। जानती हैं लड़को
सें अधिकमजा लड़कियों कों आता हैं। हाए मे तोँ डब्वाते हि मस्त हौ
गयीँ, थि." मीनाऐसी बाते करने मे ज़रा भि नहीं शर्मा रही थि.
उसके मुँह सें चुदाई कि बातसुन मेरी बुर दुप्दुपने लगी। मेरामंन
भि मीना केँ संग उसके भइया सें मजा लेने कों करनेलगा। मीना कि बात
सही थि कि घऱ खाली हैं किसी कों पता नहीं चलेगा। मे मीना कों
दिल कि बात बताने मे शर्मा रही थि। तभी मीना नें अपनी दोनो
चूचियों कों अपनेहाथ सें दबाते हुवेकहा, "अपनेहाथ सें दबाने
मे ज़रा भि मजा नहींआता। तुम् दबाओ तौ देखें."
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मैने फ़ौरन उसकी दोनो चूचियों कों फ्रॉक केँ ऊपर सें पकड़कर
दबाया तौ मुझे बहोत मजाआया पर्र सहेली बुरा सां मुँह बनाती
बोलि, "छोड़ो सुनीता मजा लड़के सें दबवाने मे हि आता हैं। तुमने
डबवाया हैं किसी सें?" "नहीं मीना." मे उसकी चूचियों कों छ्चोड़ बोलि
तौ मीना मेरेगाल मसल बोलि, "तौ आज मेरेसंग मेरे भैया सें मजा
लेकरदेख नां। मेरीउमर कि हि होँ। तुम्हारी भि चुदवाने लायक होगी.
हाए सुनीता तुम्हारी तौ खूब गोरी गोरी मक्खन सि होगी। मेरी तौ
सावली हैं." मीना कि इसबात सें पूरे जिस्म मे करेंट दौड़ा। मीना
नें मेरेदिल कि बातकही थि। मे मीना सें हरतरह सें हसीन
थि। वो साधारण सि थि पर्र मे गोरी औऱ सुंदर.
मैने सोचा
जब रमेश अपनीइस बेहन कों चोदने कों तैय्यार हैं तौ मेरी जैसी
गदराई कुँवारी हसीन लौंडिया कों तौ वो बहोत प्रेम सें चोदेगा.
"हाए मीना मुझेडर लगरहा हैं." "पगली मौका अच्छा हें मेरा
भैया एक् नंबर कां लौंडियबाज़ हैं। भैया केँ संग हम् लोगो कों
खूबमजा आएगा। भैया कां लन्ड खूब तगड़ा हैं औऱ सबसे बड़ीबात
ये हैं कि आहिस्ता तुम्हारे घऱ मे मजा लेंगे." मीना कि बातसुन
फुदक्ति बुर कों चिकनी रानो केँ बीचदबा रज़ामंद हुइ तौ मीना
मेरी एक् मम्मों पकड़ दबाती बोलीं, "पहले तौ हमको हि चोदेगा। बोलो
तौ तुमको भि…." मे शरमाती सि होली कि मस्ती मे राज़ी हुइ तोँ वो
बाहर् रमेश केँ पास गई,। कुच्छ देरबाद वो रमेश केँ संग वापस
आई तौ उसका भइया रमेश मेरे उठानो कों देखता अपनी छ्होटी बेहन मीना
कि बगल मे हाथडाल उसकी चूचियों कों मीस्था बोला, "ठीक हैं
मीना हम् तुम्हारी सहेली कों भि मजा देंगे पऱ इसकी चूचियाँ तौ अभि
छ्होटी लगरही हें."
"कभी दबवाती नहीं हैं नाँ भैया इसीलिए." मीना प्रेम सें अपने भइया
सें चूचियों कों मीसवाते बोलीं। "ठीक हैं हम् सुनीता कों भि खुशकर
देंगे पर्र पहले तुम् प्रेम सें मेरेसंग होली मनाओ.अब ज़रा दिखाओ
तौ." रमेश मस्ती केँ मीना कि बुर पऱ आगे सें हाथलगा मस्त नज़रो
सें मेरीओर देखते बोला तौ मैने कुंवारेपन कि गर्मी सें बैचैन हौ
मीना कों कहते सुना, "दोस्त कितनी बार देखोगे। जैसी सबकी होती हैं
वैसे मेरी हैं। अब सहेली राज़ी हैं तौ धीरे-धीरे खेलो होली."
"हाए मीना क्याँ मस्त चूचियाँ हें तुम्हारी। ऐसी मम्मों पाजाए तोँ
बसदिन भर दबाते रहे." औऱ कसकर अपनी बेहन कि चूचियों कों
दबाने लगा। मीना औऱ उसके भइया कि इन हरकतों सें मेरे बहकेमंन पऱ
अजीब सां असर हौ रहा थां। अब तौ मंनकर रहा थां कि रमेश सें कहें
आओ मेरी भि दबाओ। मेरी मीना सें ज्यादा मजा देंगी इतनाताव कुंवारे
शरीर मे आज सें पहलेकभी नहींआया थां। बुर फ़न फ़नाकर
चड्डी मे उभरआई थि। जैसे जैसे वो मीना कि
जवानियों कों सहलाता जारहा थां वैसे वैसे मेरी बेचैनी बढ़ती जा
रही थि। दोस्तो आगे कि किस्सा अगले पार्ट मे आपकायार राज शर्मा
क्रमशः.
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