साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई complete - Desi kamuk kahani - Real Story Continue Part 1
साइन्स कि पढ़ाई याँ फिन चुदाई
दोस्तो यह स्टोरी पिंकी नें लिखी हैं मे इसे आपकेलिए पोस्ट कररहा हूं
दोस्तो, स्टोरी मे कुछ घटना-क्रम एकदम वास्तविक हैं औऱ कुछ आपके मनोरंजन केँ लिए अपनीकलम सें लिखरही हूं!
सर- डॉलीयह क्याँ हैं? इसबार भि फेल। आख़िर तुम् करती क्याँ हौ.? पढ़ाई मे तुम्हारा ध्यान क्यूं नहि लगता। जब विद्यालय-टेस्ट मे यहहाल हैं तौ बोर्ड केँ इम्तिहान मे क्याँ खाक लिखोगी?
यहसर हें चेतन वर्मा जिनकी उम्र 35 साल हैं औऱ यह साइन्स केँ टीचर हें.
थोड़े कड़क मिज़ाज केँ हें। इनका हाइट औऱ शरीर कि बनावट अच्छी हैं। औऱ एकदम स्लिम रहते हें।
डॉली- सॉरीसर प्लीज़। मुझे क्षमा करदो। अबकीबार अच्छे नम्बर लाऊँगी। प्लीज़ प्लीज़…
दोस्तो, ये हैं डॉली सिंह। अच्छे ख़ासे पैसे वालेघऱ कि एक् मदमस्त यौवन कि मालकिन। जिसकी उम्र 18 साल, हाइट 5’3″। छोटे सुनहरे बाल। गुलाब कि पंखुड़ी जैसे पतले गुलाबी होंठ.भरे हुए गोरेगाल। नुकीले 30″ केँ मम्मे। पतलीकमर औऱ 32″ कि मदमस्त गाण्ड।
विद्यालय मे कई लड़के डॉली पर्र अपनाजाल फेंकरहे हें कि काश एक् बार उसकी मचलती जवानी कां मजालूट सकें.
मगर वोँ तौ तितली कि तरह उड़ती फिरती थि।
कभी किसी केँ हाथ नां आई !
औऱ हाँ आपकोये भि बतादूँ कि गंदी बातों सें दूर-दूर तक उसका वास्ता नहि थां।
वोँ शरारती थि। मगर शरीफ़ भि थि।
उसको चुदाई वगैरह कां कोई ज्ञान नहि थां।
सर-नो। अबकीबार तुम्हारी बातों मे नहि आऊँगा। कल तुम् अपने मां-बापू कों यहा लेकरआओ। बसअब उनसे हि बात करूँगा कि आख़िर वोँ तुम् पऱ ध्यान क्यूं नहि देते।
डॉली-सर आप् मेरीबात तोँ सुनिए। बस साइन्स मे मेरे नम्बर कमआए हें औऱ बाकीसभी विषयों मे मेरे अच्छे नम्बर आए हें।
सर- जानता हूं इसीलिए तौ हरबार तुम्हारी बातों मे आँ जाता हूं। तुम् बहोत अच्छी लड़की होँ। सभी विषयों मे अच्छे नम्बर लाती हौ। मगर नाँ जाने विज्ञान मे तुम् पीछे क्यूं रह गई। आज तौ मुझेबता हि दो आख़िर बात क्याँ हैं?
डॉली- व.वोँ.सर आप् तौ जानते हि होँ। मे रट्टा नहि मारती। सारे विषयों कों समझकर याद करती हूं। विज्ञान कां पता हि नहि चलता क्याँ लिखा हैं… क्यूं होता हैं। बसइसी उलझन मे रहती हूं तोँ यहसभी हौ जाता हैं औऱ नम्बर कम आँ जाते हें।
सर- क्याँ। अरे तुम् क्याँ बोलरही हौ.? मेरीकुछ समझ नहि आँ रहाठीक सें बताओ मुझे।
डॉली- वोँ। वोँ। सर मानव अंगों केँ बारे मे मेरी सहेलियाँ पता नहि क्याँ-क्याँ बोलती रहती हें। बड़ा गंदा सां बोलती हें। म…म.मुझे अच्छा नहि लगता.बस इसलिये मे विज्ञान मे इतनी रूचि नहि लेती हूं।
डॉली कि बात सुनकर चेतनसर केँ होंठों पर्र हल्की सि मुस्कान आँ गई।
सर- अच्छा तोँ यहबात हैं। ऐसाकरो साम कों तुम् पुस्तक लेकर मेरेघऱ आनां.वहा बताना ठीक सें। अभि मेरा क्लास लेने कां समय होँ रहा हैं। देखो आँ जानां नहि तौ कल तुम्हारे बापू सें मुझे मिलना हि होगा।
डॉली तौ फँस गई थि। अब चेतनसाम कों उसका फायदा उठाएगा। आप् यहीसोच रहे हौ नाँ.
मेरे प्यारे दोस्तों देशबदल रहा हैं। सोच बदलो। स्वयं देखलो।
साम कों 6 बजे डॉली चेतनसर केँ घऱ पहुँच जाती हैं।
सर-अरे आओआओ। डॉली बैठो.अरे अनु ज़रायहा आनां। देखो डॉलीआई हैं, मैंने बताया थां नां तुमको…
ललिता- जी अभि आई।
दोस्तो, ये हैं ललिता वर्मा। ये चेतनसर कि पत्नि हैं, दिखने मे बड़ी हसीन हैं, इसका फिगर 34″ 32″36″ हैं।
इनकी विवाह कों 3 साल होँ गए हें।
दोनों बेहदखुश रहते हें।
अरे दोस्त आप् ललिता कों भूलगए। हाँ भइयायह वही ललिता गुप्ता औऱ चेतन हें। जोँ पहलेलवर थें, अब इनकी विवाह होँ गई हैं औऱ ललिता गुप्ता सें वर्मा बन गई हैं। चलोअब आगे कां हाल देखते हें।
ललिता- हाय डॉली कैसी हौ?
डॉली- मे एकदमठीक हूं मैम!
सर- डॉली, यह हैं मेरी पत्नि ललिता। सुभह तुमने अपनी प्राब्लम मुझे बताई थि नां। मैंने अनु कों सभी बताया हैं। अब मे नहि यह हि तुम्हारी सहायता करेंगी। चलो तुम् दोनों बातें करो मे थोड़ी देर मे बाहर् जाकरआता हूं ओके.।
डॉली-ओके सर थैंक्स।
ललिता- हाँ तोँ डॉली.अब बताओ तुम्हारी प्राब्लम क्याँ हैं औऱ देखो किसी भि तरह कि झिझकमत रखना.सभी ठीक सें बताओओके.
डॉली-ओके मैम बताती हूं।
ललिता- अरेयह मैम-मैम क्याँ लगारखा हैं मुझे दिदी भि बोल सकती हौ। अब बताओ तुम्हारी सहेलियाँ क्याँ बोलती हें?
डॉली- व.ववो दिदी… मैंने उनसे एक् बार पूछायह योनि औऱ लिंग किसे कहते हें तब उन्होंने मेरा बड़ा मज़ाक उड़ाया औऱ मेरेयहा हाथलगा करकहा। इसे योनि कहते हें औऱ इसकी ठुकाई करने वाले डंडे कों लिंग कहते हें।
डॉली नें अपनाहाथ बुर पर्र रखतेहुए येबात बोलि तौ ललिता कि हँसी निकल गई।
डॉली- दिदी आप् भि नां मेरा मज़ाक उड़ारही हौ। जाओ मे आपसेबात नहि करती। इसी लिए मे किसी सें इस बारे मे बात नहि करती हूं।
ललिता- अरे तुँ तोँ बुरामान गई। देख मेरा इरादा तेरा मजाक उड़ाने कां नहि थां। बसयहसोच कर हँसी आँ गई कि तुम् किस दुनिया सें आई होँ जोँ इतनी भोली हौ। अब सुनो मे जौ पूछू उसकासही जबाव देना औऱ जौ बोलूँ उसको ध्यान सें सुनना।
डॉली-ठीक हैं दिदी आप् बोलो।
ललिता- सबसे पहलेये बता कि तेरी उम्र क्याँ हैं। औऱ तुम्हारे घऱ मे कौन-कौन हैं। तुम् सोती किसके संग हौ?
डॉली- दिदी मे 18 कि हूं। मे बापू-माँ कि इकलौती बेटी हूं। हमारा घऱ काफ़ी बड़ा हैं। मे लगभग 6 साल सें अलग कमरे मे सोती हूं। नहि तौ पहले माँ केँ कमरे मे हि सोती थि।
ललिता- अच्छा येबात हैं। तुम् सेक्स केँ बारे मे क्याँ जानती होँ। किसी सें कुछ सुना होगा… वोँ बताओ।
डॉली-यह सेक्स क्याँ होता हैं दिदी। मुझे नहि पता.हाँ मेरी सहेलियाँ अक्सर बातें करती हें। बस उनसे मैंने सुना थां कि लड़कों कां पोपट होता हैं। औऱ लड़की कां पिंजरा। मगर मेरेकभी कुछसमझ नहि आया।
ललिता- ओहयहबात हैं। तेरी सहेलियाँ कोडवर्ड मे बातें करती हें औऱ तुम् सच मे बहोत भोली हौ। अच्छा यह बताओ क्याँ कभी किसी नें तुम्हारे सीने पर्र हाथरखा हैं याँ इनकोछुआ याँ दबाया हैं.? तुमने किसी लड़के कों पेशाब करते देखा हैं?
डॉली-छी छी। दिदी आप् भि नां। मे क्यूं किसी कों पेशाब करते देखूँगी औऱ आज तक किसी नें मुझे नहि छुआ हैं।
ललिता- अच्छा यहबात हैं। तभी तुम् ऐसी होँ। अब अपने अंगों केँ नाम बताओ। मे भि तौ देखूँ तुम् क्याँ जानती हौ।
ललिता नें डॉली केँ गुप्तांगों केँ नाम उससे पूछे।
डॉली- दिदी यह सीना हैं। यह फुननी हैं औऱ यह पिछवाड़ा बस।
ललिता- अरे भोली बहना.अब सुनयह सीना कों बूब्ज़। चूचे याँ कच्ची लड़की केँ अमरूद भि बोलते हें औऱ इसको बुर याँ चूत बोलते हें समझी औऱ यह पिछवाड़ा नहि। एस याँ गाण्ड हैं। जिसको मटका-मटका कर तुम् चलती होँ औऱ लड़कों केँ लौड़े खड़े हौ जाते हें।
ललिता बोलने केँ संग डॉली केँ अंगों पऱ हाथ घुमा-घुमा कर मज़े लेँ रही थि। डॉली कों बड़ा अजीबलग रहा थां मगर उसकोमजा भि आँ रहा थां।
डॉली- उफ़फ्फ़ अहह दिदी यह लौड़ा क्याँ होता हैं?
ललिता- अरे पगली दुनिया कि सबसे अच्छी चीज़ केँ बारे मे नहि जानती.? लड़कों कि फुननी कों लौड़ा बोलते हैं जौ बुर केँ लिएबना हैं। बड़ा हि चैन मिलता हैं लौड़े सें।
डॉली- दिदी शपथ सें। मुझेइन सभी बातों केँ बारे मे कुछ भि पता नहि थां। थैंक्स आपने मुझे बताया। मगर मेरी एक् बात नहि समझ आँ रहीइन सभी बातों कां मेरे इम्तिहान मे फेल होने सें क्याँ सम्बन्ध?
ललिता- अरे डॉली। तूँ सभी विषयों मे अच्छी हैं क्योंकि तुम कोउन सबकीसमझ हैं। मगर विज्ञान मे तूँ अनजान हैं क्योंकि तुम्हारी तरफकुछ पता नहि। यह बुर। लौड़ा औऱ चुदाई सभी विज्ञान कां हि तोँ हिस्सा हें। अबदेख मे केसे तेरी सेक्स कां ज्ञान देती हूं औऱ देख्ना अबकीबार केसे तेरे नम्बर अच्छे आते हें। बस तुँ मेरीबात मानती रहना, जैसा मे कहूँ वैसा करती रहना।
डॉली-ओके दिदी। मे आपकीसभी बात मानूँगी। बस मेरे नम्बर अच्छे आने चाहिए।
ललिता नें आधा घंटा तक डॉली कों लड़की औऱ लड़के केँ बारे मे बताया औऱ उसको जाते टाइम एक् सेक्स कि किस्सा वाली पुस्तक भि दि।
डॉली- दिदी यह क्याँ हैं?
ललिता- यह असली विज्ञान हैं। रात कों अपने कमरे मे कुण्डी लगाकर सारे कपड़े निकाल करइस पुस्तक कों पढ़ना। औऱ कलसाम कों आँ जानां। बाकीसभी कल समझा दूँगी।
डॉली- सारे कपड़े निकाल कर। नहि दिदी मुझे लज्जा आँ रही हैं।
ललिता- अरे पगली मे किसी केँ सामने नंगी होने कों नहि बोलरही हूं। अकेले मे यह करना हैं औऱ नहाते वक़्त क्याँ कपड़े पहनकर नहाती होँ जोँ इतना शर्मा रही हौ.? पास नहि होना हैं क्याँ.?
डॉली- सॉरी दिदी। जैसा आपनेकहा, वैसाकर लूँगी।
डॉलीवहा सें अपनेघऱ चली जाती हैं।
रात कों 10 बजे खानां खाकर डॉली अपने कमरे मे चली जाती हैं।
उसने हल्के हरेरंग कि नाईटी पहनी हुईँ थि.
वोँ शीशे केँ सामने खड़ी होकर अपने आपको देखने लगती हैं।
उसके दिमाग़ मे ललिता कि कही बातें घूमरही थीं।
डॉली नें अपनी नाईटी निकाल कररख दि अब वोँ ब्रा-पैन्टी मे थि.
उसके चूचे ब्रा सें बाहर् निकलने कों मचलरहे थें।
सफ़ेद शरीर शीशे केँ सामने थां। जिसे देखकर शीशा भि शर्मा रहा थां।
पैन्टी पर्र बुर कि स्थान गीली होँ रही थि। शायद डॉलीकुछ ज्यादा हि ललिता कि बातें सोचरही थि।
साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई complete - Desi kamuk kahani – New Episode
दोस्तो, इस बेदाग शरीर पऱ काली ब्रा-पैन्टी भि क्याँ सितमढा रही थि।
इस वक्तकोई यह नजारा देख लें तोँ उसका लौड़ा पानी छोड़दे।
डॉली- ओह्ह। दिदी अपनेसच हि कहा थां कि अपने नंगे शरीर कों शीशे मे देखो.मजा आएगा।
शपथ सें वाकयी मे। मेरे पूरेबदन मे आगलगरही हैं। बड़ामजा आँ रहा हैं।
डॉली नें कमर पऱ हाथ लें जाकर ब्रा कां हुकखोल दिया औऱ अपने मचलते चूचे आज़ाद करदिए।
सुई कि नोक जैसे नुकीले चूचे आज़ाद होँ गए दोस्तों डॉली केँ निप्पल हल्के भूरेरंग केँ। एकदम खड़े हौ रहे थें।
अगरकोई गुब्बारा इस वक़्त उसकी निप्पल कों छूजाए तौ उसकीनोक सें फूटजाए।
अब डॉली कां हाथ अपनी पैन्टी पर्र गय़ा वोँ आरामसे उसको जाँघों सें नीचे खिसकने लगी औऱ उसकी बुर नें अपना दीदार करवा दिया।
उफ़फ्फ़ क्याँ। बताऊँ आपको। सुनहरी झाँटों सें घिरी उसकी गुलाबी बुर। जौ किसी बरफी कि तरह नॉकदार औऱ फूली हुईँ थि।
आज़ाद हौ गई दोस्तो, उसकी बुर सें रस निकलरहा थां। जिसके कारण उसकी फाँकें चमकरही थीं औऱ हल्की-हल्की एक् मादक
खुशबू आनेलगी।
डॉली नें अपने चूचों पऱ हाथ घुमाया औऱ धीरे धीरे अपनी बुर तक लें गई।
उसकी आँखें बंदथीं औऱ चेहरे केँ भाव बदलने लगे थें।
इससेसाफ पताचल रहा थां कि उसको कितना मजा आँ रहा होगा। थोड़ी देर डॉली वैसे हि अपने आपको निहारती रही औऱ उसकेबाद गंदी किस्सा कि पुस्तक लेकरबैड पर्र पेट केँ बललेट गई औऱ स्टोरी पढ़ने लगी।
वोँ स्टोरी दो बहनों कि थि कि केसे बड़ी बेहन अपने बॉय-फ्रेंड सें चुदवाती हैं औऱ अपनी छोटी बेहन केँ संग समलैंगिक सम्बन्ध बनाती हैं.
आख़िर मे उसका बॉय-फ्रेंड उसकी सहायता सें उसकी छोटी बेहन कि सील तोड़ता हैं।
कथा पढ़ते-पढ़ते नां चाहते हुए भि डॉली कां हाथ बुर पे जारहा थां औऱ वोँ कभी सीधी.कभी उल्टी हौ कर पुस्तक पढ़रही थि औऱ बुर कों रगड़रही थि।
लगभगआधा घंटा तक वोँ पुस्तक पढ़ती रही औऱ बुर कों रगड़ती रही।
दोस्तो, डॉली तौ चुदाई सें अंजान थि। मगरयह निगोड़ी जवानी औऱ बहकती बुर तोँ सभीकुछ जानती थि.
हाथ केँ स्पर्श सें बुर एकदमगरम हौ गई औऱ डॉली कामवासना कि दुनिया मे पहुँच गई।
अब उसकी बुर किसी भि लम्हा लावाउगल सकती थि। उसकोयह सभी नहि पता थां। बसउसे तोँ असीम आनन्द कि प्राप्ति हौ रही थि।
वोँ ज़ोर-ज़ोर सें बुर कों मसलने लगी औऱ बड़बड़ाने लगी।
डॉली-अहह। अहह। दिदी उफ़फ्फ़ आपनेयह कैसीकथा कि पुस्तक दे दि आहह-आहह। मेरी फुननी तौ। नहि। नहि… अबइसे बुर हि कहूँगी। आआ.अहह मेरी बुर तोँ जलनेलगी हैं आहह-आहह। हाथ हटाने कों दिल हि नहि कररहा। उफफफ्फ़ उउउ आआहह.
डॉली अपनेचरम पऱ आँ गई। तब उसने पूरी रफ्तार सें बुर कों मसला औऱ नतीजा आप् सभी जानते हि होँ। पहलीबार डॉली कि बुर नें वासना कों महसूस करके पानी छोड़ा।
दोस्तो, कुछ नाँ जानने वाली डॉली नें रातभर मे पूरी पुस्तक पढ़ डाली औऱ 3 बार बिना लौड़े केँ अपनी बुर सें पानी निकाला औऱ थक-हार कर नंगी हि सो गई।
सुभह डॉली काफ़ी देर तक सोतीरही उसकी माँ नें उसे जगाया। तब वोँ जागीआज वोँ बड़ा हल्का महसूस कररही थि औऱ उसके चेहरे कि ख़ुशी साफबता रही थि कि रात केँ कार्यक्रम सें उसको बड़ाचैन मिला हैं।
नहा-धो कर वोँ विद्यालय चली गई। रोज कि तरहआज भि कुछ लड़के गेट पर्र उसकेआने कां प्रतीक्षा कररहे थें ताकि उसकी बलखाती गाण्ड औऱ उभरेहुए चूचों केँ दीदार होँ सकें।
रोज तौ डॉली नज़रें झुकाकर चुपचाप चली जाती थि। मगरआज उसने सबसे नज़रें मिलाकर एक् हल्की मुस्कान सबको दि औऱ गाण्ड कों हिलाती हुइ अपनी क्लास कि तरफ़चली गई।
रिंकू- उफ़फ्फ़ जालिम। आजयह क्याँ सितमढा गई मुझपे। सालाआज सूरज कहां सें निकला थां। मेरीजान नें आज नज़रें मिलाईं भि औऱ हँसी भि।
खेमराज- हाँ दोस्त क्याँ क़ातिल अदा केँ संग मुस्कुराई थि। मेरा तोँ दिल करता हैं। अभि उसकेपास जाकर कहूँ। आँ सेक्स कि देवी। अपनेइन मखमली होंठों सें छूकर मेरे लौड़े कों धन्यकर दो।
रिंकू- अबे सालेचुप। मे तोँ यह कहूँगा कि आँ स्वर्ग कि अप्सरा। एक् बार मेरे लौड़े कों अपनी बुर औऱ गाण्ड मे लेकर मेरा जिंदगी सफलकर दो।
मॅडी-चुप भि करो सालों। हवस केँ पुजारियों। वोँ आज हँसी। इसका मतलब हम् मे कोई तोँ हैं। जिससे वोँ फंसी.अब पता लगाना होगा कि वोँ सेक्स बॉम्ब किसके लौड़े पर्र फटेगा।
तीनों खिलखिला कर हँसने लगते हें।
दोस्तों इन केँ बारे मे आपको बताने कि जरूरत नहि.
आप् स्वयं जानगए होंगे कि यह डॉली केँ संग हि विद्यालय मे पढ़ते हें। बाकी कि जानकारी जब इनकाखास रोल आएगातब दे दूँगी।
फिलहाल किस्सा पऱ ध्यान दो।
डॉली कां दिन एकदम सामान्य गय़ा। चेतनसर नें भि उससेकुछ बात नहि कि।
वोँ आज बहोत खुश थि।
हाँइसी बीच वोँ तीनों मनचले जरूर उससेबात करने कों मचलते रहे।
मगर डॉली नें उनकोभाव नहि दिया, साम कों उसी वक्त डॉली पढ़ने केँ बहाने ललिता केँ घऱ कि ओर निकल गई।
डॉली नें आज गुलाबी सें रंग कि एक् चुस्त जींस औऱ नीली टी-शर्ट पहनी हुइ थि।
उसकोदेख कर रास्ते मे नां जाने कितनों कि ‘अहह’ निकली होगी औऱ क्याँ पता कौन-कौन आज उसकेनाम सें अपना लौड़ा शान्त करेगा।
ललिता- अरेआओ आओ। डॉली बैठोआज तौ बहोत खिली-खिली लगरही होँ।
डॉली- क्याँ दिदी आप् भि नां…
ललिता- मैंने कल क्याँ समझाया थां। तुझेही लज्जा कों बाजू मे रखकर मुझसे बात कियाकरो। ओके.चल, अबबता कल क्याँ-क्याँ किया औऱ किस्सा कैसीलगी?
डॉली इधर-उधर नज़रें घुमाने लगी।
ललिता- अरे इधर-उधर क्याँ देखरही हैं.? बता नाँ…
डॉली- वोँ सर कहीं दिखाई नहि देरहे?
ललिता- क्यूं कल कां सारा किस्सा चेतन कों बताएगी क्याँ। वोँ बाहर् गए हें। चलअबबता…
डॉली कां चेहरा लज्जा सें लाल होँ गय़ा मगरफिन भि उसने हिम्मत करकेरात कि सारीबात ललिता कों बता दि।
ललिता- अरे वाहह। क्याँ बात हैं पहलीबार मे हि तूने हैट्रिक मार दि। चल अच्छा किया.अब बता तुम्हे क्याँ समझ नहि आया?
डॉली- दिदी कहानी तोँ मस्त थि। मगर उसमें बहोत सि बातें मेरेऊपर सें निकलगईं। जैसेआज तौ तेरीसील तोड़ दूँगा। अबयहसील क्याँ होती हैं औऱ हाँ। एक् स्थान लिखा थां आज तेरे जूसी चूचों कां सारारस पी जाऊँगा। दिदी यह चूचे तोँ समझ आँ गए.मगर इनमें रस कहां होता हैं?
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ललिता केँ चेहरे पर्र एक् कामुक मुस्कान आँ गई।
ललिता- अरे मेरी मासूम बहना.सील कां नहि पता.अब सुन तेरी बुर मे अन्दर एक् पतली झिल्ली हैं। उसेसील कहते हें… जब पहलीबार लौड़ा बुर मे जाता हैं नां। तब लौड़े केँ वार सें वोँ झिल्ली टूट जाती हैं। उसी कों सील तोड़ना कहते हें।
डॉली- ओह्ह। अच्छा औऱ रस?
ललिता- तूँ सुन तोँ सही दोस्त। देखजब लड़का स्तन कों चूसता हैं। यानी निप्पल कों चूसता हैं तब उसमें सें आताकुछ नहि मगर उसको औऱ लड़की कों मजा बहोत आता हैं। बस लड़काउसी कों रस कहता हैं।
डॉली- अच्छा यहबात हैं। मगरसच कहूँअब भि यहबात मेरीसमझ केँ बाहर् हैं।
ललिता- मेरीजान ऐसे तौ तुँ कभीकुछ नहि सीख पाएगी। देख इसका आसान तरीका यही हैं कि मे तुम्हें प्रेक्टिकल करके समझाऊँ तभी तूँ कुछसमझ पाएगी।
डॉली-हाँ दिदी यहसही रहेगा।
ललिता- तोँ चल कमरे मे चलकर अपने सारे कपड़े निकाल। मे भि नंगी हौ जाती हूं, तभीमजा आएगा।
डॉली-छी। नहि दिदी। मुझे बहोत लज्जा आँ रही हैं… मे आपके सामने बिना कपड़ों केँ केसे आऊँगी?
ललिता- अरे दोस्त तूँ तोँ ऐसे शर्मा रही हैं जैसे मे कोई लड़का होऊँ? दोस्त। मे भि तोँ नंगी हौ रही हूं नाँ। औऱ तेरेपास ऐसा क्याँ हैं जोँ मेरेपास नहि हैं। अबचल।
बेचारी डॉली क्याँ बोलती। चल दि उसके पीछे-पीछे।
कमरे मे जाकर ललिता नें कहा- तूँ दो मिनट यहींबैठ मे अभि आई।
डॉली- दिदी सर तौ नहि आँ जाएँगे नाँ औऱ प्लीज़ उनसेकुछ मत बताना। वर्ना विद्यालय मे उनके सामने जाने कि मेरी हिम्मत नां होगी।
ललिता- अरे तूँ पागल हैं क्याँ। ऐसी बातें किसी कों बताई नहि जाती औऱ चेतन तोँ बहोत सीधा व्यक्ति हैं। तभी तौ तुमको मेरेपास लें आया ताकि मे तुम्हे ठीक सें समझा सकूँ.अब चल तुँ बैठ। मे अभि आई।
दोस्तो, स्टोरी कों रोकने केँ लिए माफी चाहती हूं मगर एक् बात आपको बताना जरूरी हैं कि उसदिन चेतन नें ललिता सें क्याँ कहा थां डॉली केँ बारे मे?
अब तक आपकोलग रहा होगा चेतन कों कुछपता नहि इस बारे मे। आप् वोँ जानलो फिनकथा मे एक् नया ट्विस्ट आँ जाएगा।
उसदिन विद्यालय सें जब चेतनघऱ आया।
ललिता- अरेआओ मेरे पतिदेव क्याँ बात हैं बड़ेथके हुएलग रहे होँ।
चेतन- नहि। ऐसीकोई बात नहि हैं। तुमसे एक् बात करनी हैं बैठोयहा।
ललिता वहीं सोफे पऱ बैठ जाती हैं औऱ चेतन उसको डॉली केँ संग हुई पूरीबात बता देता हैं।
ललिता- हेराम इतनी भि क्याँ नादान हैं वोँ लड़की… जौ यहसभी नहि जानती? औऱ तुमने साम कों उसेयहा क्यूं बुलाया? क्याँ इरादा हैं मुझ सें मनभर गय़ा क्याँ। जौ उस कमसिन कली कों समझाने केँ बहाने भोगना चाहते होँ?
चेतन-अनु तुम् भि नाँ। बस बिना मतलब कि बकवास करने लगती हौ। मेराऐसा कोई इरादा नहि हैं। बस वोँ आएतबउसे तुम् समझा देना औऱ कुछ नहि…
ललिता- ओह्ह.यह बात हैं… अच्छा मानलो अगर वोँ तुमसे चुदवाना चाहे तोँ क्याँ तुम् अपना लौड़ा उसकी बुर मे डालोगे?
ललिता कि बात सुनकर चेतन कां जिस्म ठंडापड़ गय़ा औऱ डॉली कों चोदने कि बात सें हि उसका लौड़ा पैन्ट मे तन गय़ा जिसे ललिता नें देख लिया।
चेतन- क्याँ बकवास कररही हौ तुम्.? मे ऐसाकुछ नहि करूँगा।
ललिता- ओए होये। मेरा राजा.यह नखरेकुछ नहि करोगे तोँ यह लन्ड महाराज क्यूं फुंफकार रहा हैं हाँ?
चेतन नें पैन्ट मे लौड़े कों ठीक करतेहुए ललिता कि तरफ़देख कर देखा।
ललिता- अच्छा बाबा ग़लती हौ गई बस.मगर एक् बात कहूँअगर वोँ स्वयं चुदवाने कों राज़ी होँ जाए तौ मुझेकोई दिक्कत नहि दोस्त। मे तुमसे प्रेम करती हूं औऱ जानती हूं एक् कच्ची कली कों चोदने कां सपनाहर मर्द कां होता हैं। अब मुझसे क्याँ शर्माना।
चेतन- अच्छा ठीक हैं। सुनो। डॉली बहोत सुन्दर हैं। मानता हूं कि उसकोदेख करकोई भि उसको भोगने कि चाहत करेगा मगर तुम् तोँ जानती हौ मे कोईगली कां गुंडा नहि जौ छिछोरी हरकतें करूँगा। हाँअगर वोँ स्वयं सें राज़ी होँ औऱ तुम्हें कोई दिक्कत नाँ हौ तब मे उसे जरूर चोदना चाहूँगा।
चेतन कि बात सुनकर ललिता केँ होंठों पऱ एक् क़ातिल मुस्कान आँ गई।
ललिता- यह हुईँ नाँ बात.अब बस तुम् अपनीअनु कां कमाल देखो। केसे मे उस कच्ची कली कों लाइन पर्र लाती हूं ताकि वोँ आहिस्ता तुमसे चुदने कों राज़ी हौ जाए।
दोस्तो, ये थि उसदिन कि बात औऱ डॉली केँ सामने चेतन बाहर् जरूर गय़ा थां मगर दूसरे दरवाजे सें अन्दर आकर उनकी सारी बातें उसनेसुन लीथीं।
अबआज क्याँ हुआचलो आपकोबता देती हूं।
ललिता कमरे सें निकलकर दूसरे कमरे मे गई जहाँ चेतन पहले सें हि बैठा थां।
ललिता- कामबन गय़ा। अब सुनो मे उसकेसंग थोडा खेल लेती हूं… तुम् खिड़की सें उसके नंगे शरीर कों देखकर मजालो। ओके.अब मे जाती हूं वरना उसकोशक हौ जाएगा।
चेतन-ओके मेरीजान। जाओआज तुमको भि कच्ची बुर कां रस पीने कों मिल जाएगा हाहाहा हा।
ललिता- धीरे-धीरे हँसो। वोँ सुन लेगी.अब मे जाती हूं।
डॉली-ओह दिदी आप् कहां चली गई थीं।
ललिता- अरेकुछ नहि। अबचल। हौ जा नंगी। मस्ती कां वक़्त आँ गय़ा हैं।
डॉली- आप् भि निकालो। दोनों संग मे निकालते हें।
ललिता नें तौ नाईटी पहनी हुइ थि औऱ अन्दर कुछ नहि पहना थां झट सें निकाल करबगल मे रख दि।
डॉली-हा हाहा दिदी आप् भि नाँ अन्दर कुछ नहि पहना औऱ आपके बूब्ज़ कों तोँ देखो कितने बड़े हें।
ललिता- मेरीजान तेरी उम्र मे मेरे भि इतने हि थें। यह तौ चेतन नें दबा-दबा कर इतने बड़ेकर दिए।
डॉली- दिदी आप् भि नां कुछ भि बोल देती हौ। सर नें क्यूं दबाए। उम्र केँ संगबढ़ गए होंगे।
ललिता- अरे पगली तूँ उम्र कि बात करती हैं तुम् सें कम उम्र कि लड़की केँ स्तन कों तुझ सें बड़े मैंने देखे हें अब क्याँ कहेगी तूँ?
डॉली- सच्ची दिदी। मगरऐसा क्यूं?
ललिता- अरे पगली तेरेसर नें इनको दबा-दबा कर इनकारस चूसा हैं। वे कहते थें कि आम कां स्वाद आता हैं।
डॉली खिलखिला कर हँसने लगती हैं।
ललिता- अब हँसना बंदकर औऱ निकाल अपने कपड़े।
डॉली नें पहले अपनी टी-शर्ट निकाली तब सफेद ब्रा मे सें उसके नुकीले मम्मे ब्रा कों फाड़कर बाहर् आने कों बेताब दिखने लगे।
चेतन खिड़की पऱ खड़ायह नजारा देखरहा थां।
ललिता- अरेवाह दोस्त। क्याँ मस्त मम्मे हें। अब ज़रा इन्हें आज़ाद भि करदे।
डॉलीबस मुस्कुरा कररह गई औऱ उसने पैन्ट कां हुकखोल कर नीचे सरकाना शुरुआत किया.तब उसकी गोरी जांघें बेपरदा होँ गईं औऱ सफेद पैन्टी मे उसकी फूली हुई बुर दिखने लगी।
साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई complete - Desi kamuk kahani - Kahani ab aur interesting hogi
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