माँ को पटाया बेटे ने - Maa Beta Ka Rishta - Full Story Part 1
दोस्तो, मेरानाम अहमद हैं। मे आंटियों कों अधिक पसन्द करता हूं, औऱ यहकथा मेरे औऱ मेरी अम्मी केँ बीच कि हैं।
मेरी अम्मी कां नाम शबाना हैं औऱ उनकी गांड बहोत बड़ी औऱ चौड़ी हैं। जिसेदेख केँ किसी कां भि लन्ड खड़ा होँ जाये, उनकी मम्मों मीडियम साइज़ कि हैं औऱ गोल मटोल हैं।
मेरेघऱ मे चारलोग हें मे, अम्मी, बेहन औऱ अब्बा। हम् लोग देहात मे रहते हें, शहर मे हमारी दुकान हैं, अब्बा दुकान केँ लिए सुभह 9 बजेचले जाते हें। वोँ सुभह 6 बजेउठे हमारे खेत कां चक्कर काटकर आते हें, बेहन विद्यालय मे हें, अम्मी घऱ मे हि रहती हें।
कथा शुरुआत होती हैं जब मे 10वीं कक्षा मे थां औऱ मुझे एक् नयाफोन मिला, इंटरनेट कनेक्शन केँ संग। मैंने छठी कक्षा सें हि अपने दोस्तों केँ संग पोर्न देख्ना शुरुआत कर दिया थां।
जब मेरा पर्सनल फोन मिला तोँ मुझे एक् दिन अनाचार केँ बारे मे पताचला। मे सारादिन पोर्न देखता थां अम्मी- बेटा, भइया-बेहन, मुझेसभी मे मज़ाआता थां। मगर मैंने कोईगलत कदम नहि उठाया।
जब मे 11वींबार आयातब सें मे सेक्स कहानियां भि पढ़ना शुरुआत कर दिया, हमेशा माँ-बेटा वाली कहानियां पढ़ता थां। घऱ मे एक् हि कूलर होने केँ वज़ह सें हम् सभी कों एक् हि बेडरूम मे सोना पढ़ता थां।
आधीरात कों पता नहि मेरे अंदर क्याँ घुस गय़ा, मे बहोत हॉर्नी होँ गय़ा थां, मेरी बेहनपास मे सोई थि। अँधेरा होने सें कुछ दिखाई नहि देरहा थां, मैंने अपनाहाथ उसेदूध पऱ रख दिया औऱ धीरे धीरे मसलने लगा। उसकेनरम दूध मुझे पागल कियेजा रहा थां।
मैंने ऐसे हि 20 मिनट तक दूध दबाया उसके, मैंने अपना दूसरा हाथ उसकी बुर केँ तरफ बढ़ाया। उसके कपड़ो केँ ऊपर सें हि उसकी बुर कों सहलाने लगा।
शगुफ्ता नें अचानक करवटली तौ मे डर गय़ा, अपनाहाथ उसकेऊपर सें हटा लिया। मगर मेरा लन्ड बात नहि मानरहा थां, मैंने अपनाहाथ उसको गांड पे रखा औऱ सहलाने लगा। अहा क्याँ आनंद हैं, मगर अपने लन्ड पऱ कंट्रोल नहि कर पाया औऱ अपनाफोन लेके बाथरूम कि तरफबढ़ गय़ा।
ऐसे हि लगभग 15 दिनों तक चला, एक् रात मे बाथरूम जाने केँ लिए फ्लैश लाइट जलाई, मे जैसे हि उठा।
मैंने देखा मेरी अम्मी कि नाइटी औऱ साया (पेटीकोट) उनके जाँघों तक हैं। मेरी अम्मी कि बुर साफ़ दिखाई देरही थि, बुर पऱ झाँटे भि थि। मैंने उनकी गांड पर्र हाथरखा औऱ सहलाया, मगर अम्मी गहरी नींद मे सोती हैं।
तोँ मैंने अम्मी कि बुर कों भि सहलाया, मे डर गय़ा। मे सीधे बाथरूम गय़ा औऱ आज मेरी अम्मी कि बुर कों याद करतेहुए उनकेनाम कि मुठ मारके आया।
मे यह हरकत अपनी12वीं क्लास तक कर चुकी हैं, कभी-कभी अम्मी कि बुर देखने कों मिल जाती थि तौ कभी मात्र बेहन केँ दूधदबा लेता थां। एक् रात मे शगुफ्ता कां दूध संभलरहा थां कि उसने मेराहाथ पकड़ लिया। मेरा तोँ गांडफट गय़ा, मगर मैंने सोने कां नाटक किया औऱ अपनाहाथ वैसे हि रहने दिया। अगलेदिन शगुफ्ता नें अम्मी कों बता दिया तौ अम्मी नें मुझे क्रोध किया "कि यह बुरीआदत हैं" अब अम्मी मेरेपास सो गई, मेरा बचपन कि आदत मे उनकेऊपर हाथ जोड़े सोता थां। तौ मैंने वैसे हि किया, अम्मी कुछ नहि बोलि। मे अम्मी कि बुर सहलाने केँ लिएमरा जारहा थां। आधीरात कों मैंने देखा कि उनकी नाइटी औऱ साया उनको घुटनो तक हैं, मैंने अपनेहाथ सें साया कों उठाया औऱ उनकी गांड पऱ रख दिया। अम्मी कि बुर मे बहोत बाल थें, फिन भि मैंने उनकी बुर कों सहलाया। मैंने सोच लिया कि केसे भि अम्मी कों चोदना पड़ेगा।
अम्मी गहरी नींद मे सोती थि तोँ मैंने उनकी बुर सहलाना शुरुआत कर दिया, इधर मैंने अपना निक्कर कों नीचेकर दिया औऱ मे अपने दुसरे हाथ सें अपनीमुठ माररहा थां, फ़्लशलाइट बंदकर दिया मैंने।
अब अँधेरे मे, अम्मी जब हिलती तोँ मे सहलाना छोड़ देता थां, फिन थोड़ी देरबाद शुरुआत कर देता थां। मे अब झड़ने वाला थां, अम्मी भि गांड हिलारही थि नींद मे, उनको भि मज़ा आँ रहा थां, मे उनकी बुर सहलाते हुएझड़ गय़ा।
मैंने अम्मी कि नाइटी सही कि, फिन अपने आप् कों साफ किया औऱ सो गय़ा। मे सुभह कॉलेज जाने केँ लिए रेडीहुआ औऱ बाथरूम मे नहाने गय़ा, वाहा मैंने शगुफ्ता कि पैंटी देखी। पैंटी देखते हि लन्ड खड़ा होँ गय़ा, मैंने पैंटी उठाई औऱ अपनेनाक पऱ लगाके सूंघने लगा।
वाउ क्याँ खुशबू थि उसकी बुर कि, फिन मैंने उसकी बुर वाली स्थान पर्र अपना लन्ड लगाया औऱ मुठ मरनेलगा। मे कंट्रोल नहि कर पाया औऱ पैंटी मे हि झड़ गय़ा। मे बहोत डर गय़ा, औऱ दोषी महसूस करनेलगा, मैंने उसकी पेंटी वही पे रख दिया।
मगर अगलीबार सें मैंने रोजाना उसकी पैंटी पे मुठ मरनेलगा, औऱ बाहर् झड़ गय़ा ताकिउसे शक न् होँ। अब डेली मे यहीं करनेलगा, रात कों अम्मी कि बुर सहलते हुवे मुँह मारना, औऱ सुभह बेहन कि पैंटी मे।
मे रोजाना अलग-अलग कहानियां पढ़ता थां, तोँ मेरे दिमाग़ मे अजीब ख्याल आनेलगे। मे यह सोचने लगा कि, “क्याँ मेरी अम्मी अब्बा केँ संगखुश हें? क्याँ अब्बा रोज़ सेक्स करते हें अम्मी सें? हां अम्मी किसी औऱ सें चुदवा रही हैं?” "क्याँ किसी केँ संग चक्कर तौ नहि?"
मगरअब मैंने यह सोचने लगा कि मुझे केसेपता चलेगा, "अम्मी बुर मे लन्ड लेना चाहती हैं याँ नहि?", "वोँ अकेली महसूस करती हैं याँ नहि?"
साम कों मे पोर्न देखरहा थां, मेरा जिस्म गर्म होँ चुका थां औऱ लन्ड खड़ा। मैंने एक् कदमआगे बढ़ाने कि सोची, मैंने पोर्न केँ हिसाब सें अम्मी कों अपना खड़ा लन्ड दिखाने कां सोचा।
रसोई सें बेडरूम साफ दिखायी देता थां, मे नहाके सीधा बेडरूम मे गय़ा, दरवाजा खुला छोड़ दिया। मैंने अपना तौलिया हटा दिया, पूरा नंगा 8 इंच कां लन्ड लेके। मैंने अपनी पुस्तक जोर सें नीचे फेंक दि ताकि अम्मी कों सुनायी दे।
अम्मी: बेटा! क्याँ हुआ? (वोँ अपनेकाम मे बिजी थि) मैंने उनकाकोई जवाब नहि दिया तौ वोँ मुड़के बेडरूम कि तरफ देखी। मे अपने शीशे सें देखरहा थां कि वोँ अपने नजरे मेरे खड़े लन्ड पे बैठा केँ रखी औऱ एक् मूर्ति कि तरह खड़ी होँ गई।
कुछ 30 सेकंड लन्ड दिखाने केँ बाद मैंने कपड़े पहन लिया। तब सें मैंने अपनीआदत बनाली थि अम्मी कों लन्ड दिखाने कां, अब मुझेकोई आवाज़ नहि देना पड़ता, जैसे मे नहाके बेडरूम मे चला जाता अम्मी मुझे देख्ना शुरुआत कर देती। अम्मी मेरे लन्ड कों कामुक नज़रो सें देखती थि.
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घऱ मे मे केवल लोअर पहनता थां उसे नीचे चड्ढी नहि पहनता थां, इसे मेरा लन्ड साफ देखती थि अम्मी कों। मे ऐसे हि उनके सामने घुमता थां, अम्मी भि कुछ नहि बोलती बस, मेरे लन्ड कों निहारते रहती।
एक् साम मे कॉलेज सें जल्दएके पोर्न देखरहा थां हेडफोन लगा केँ। मैंने इतनाखो दिया थां कि मुझेपता नहि चला अम्मी मेरेपास आँ गई, औऱ मुझे थप्पड़ मरनेलगी मेरे हाथो पे।
अम्मी: क्याँ कररहा हैं तुँ? यहसभी शुरुआत कर दिया तूने?
मे : (मेरामन खराब हौ गय़ा अम्मी कों देखके) अम्मी गलती होँ गई माफ करदो (मे रोतेहुए बातकर रहा थां)
माँ: मे तेरे अब्बा कों बताऊंगी (मेरेहाथ सें मेराफोन लें लिया)।
मे : अम्मी प्लीज़ अब्बा कों मत बताओ, वोँ घऱ सें निकल देंगे मुझे। तुम् जोँ बोलोगे मे वोँ करुंगा बस अब्बा कों मत बताना।
मे उनसेभीख मांगरहा थां कि अब्बा कों मत बताओमगर मेरीकोई बात सुनने केँ मूड मे नहि थि। डिनर केँ वक्त पर्र अपनी नज़र अपनी प्लेट पर्र रखें। मैंने एक् बार पानी लेने केँ लिएहाथ उम्र बढ़ाई तोँ देखा अम्मी गुस्से सें मुझेदेख रही हैं, मैंने अपनासिर फिन सें नीचेकर लिया। अगलेदिन मुझेसमझ आँ गय़ा कि अम्मी नें अब्बा कों नहि बताया।
दो हफ्ते ऐसे हि चला गय़ा, मे अपनी अम्मी सें बात करनाबंद कर दिया थां डर कि वज़ह सें। मे केवल पढाईकर रहा थां, नां हि मुठ मारीतब सें। कुछ चाहिए होता तोँ मे शगुफ्ता सें मांग लेता थां।
मेरी अम्मी सभीदेख रही थि, अब वो डर गई हैं कि मे उससेबात करनाबंद कर दूंगी। क्यूकी मे अम्मी सें बहोत लगभग थां, हंसी-मजाक करता रहता थां, उससे अधिकसमय मे हि बिताता थां। एक् साम मे कॉलेज सें आया, अम्मी नें मुझे बुलाया औऱ मेराफोन वापसदे दिया।
अम्मी: बेटा क्याँ हुआ तुझेही? तूनेकब सें यह शुरुआत किया? तुँ बस अपनी पढाई पे ध्यान दे।
(मैंने कुछ भि नहि बोला)
माँ: (मेराफोन दे दिया मुझे) तुम को मस्ती करनी चाहिए, पर्र यहसभी सें पढ़ाई मे ध्यान नहि लगता।
मे : यहसभी भि मस्ती हैं अम्मी (उस वक़्त पता नहि मेरे अंदर क्याँ घुस गय़ा)
(मगर वोँ मुझे क्रोध नहि करी)
अम्मी: कब सें शुरुआत कियायह देख्ना?
मे : (हल्के आवाज़ मे) एक् साल सें, पऱ पढ़ाई पर्र कोई समस्या नहि आई।
अम्मी: मैंने तेराफोन देखा, एक् जवान लड़का उसका अम्मी चाची केँ उमर कि स्त्री सें केसेकर सकती हैं? यह फालतू चीज़मत देखाकर.
मे : वोँ अम्मी औऱ बेटे (अम्मी यह सुनके पागल हौ गई)।
अम्मी: यह बकवास हैं, एक् अम्मी अपने बेटे केँ संगयह नहि कर सकती।
मे : वोँ अम्मी बेटे।
अम्मी: मे यकीन नहि करती.
मे अपनेफोन पर्र अम्मी बेटे वाला पोर्न औऱ कहानियाँ सर्च किया (हिन्दी वाले), फिन अम्मी कों दिखाने लगा। पहले तौ वोँ हिचकिचाई देखने सें, फिन लगभग एक् घंटा देनो नें मिलके पोर्न औऱ कहानियां पढ़ीं।
वोँ कभी अपनेहाथ कों अपनी बुर पर्र सहलाती हुई जैसे खुजली होँ, मुझेसमझ आँ गय़ा थां कि वोँ गर्म होँ चुकी हैं। फिन अम्मी उठके रसोई मे चली गई।
मैंने फिन सें अम्मी कों लन्ड दिखाने कां काम जारीरखा, अब सें वोँ मुझेअलग नजरों सें देखती हैं औऱ मेरे लन्ड कों गौर सें देखती हैं औऱ कभी अपनी बुर नाइटी केँ ऊपर सें सहलाती हैं।
मे मेरी अम्मी केँ गले लगता(गले लगाना) थां हमेशा, अब मेरा प्लान चेंज हौ गय़ा थोडा। मे अपना चड्ढी निकल केँ मात्र लोअर मे अम्मी कों पीछे सें गले लगाता ताकि मेरा लन्ड उसकी बुर मे फंसा, औऱ सामने सें गले मिले तौ उसकी बुर पे लगे।
संडे केँ दिन शगुफ्ता अपने साथी केँ वहा गई हुईँ थि, अब्बा दुकान पे औऱ मेरे बेडरूम मे लन्ड सहलाते हुएकथा पढ़रहा थां। मे घऱ मे देखा तौ अम्मी पड़ोस केँ आंटी सें बात करने गयीँ, थि, तौ मैंने बेडरूम मे आकर अपना लोअर निकाल करमुठ मरतेहुए किस्सा पढ़रहा थां।
कुछ 20 मिनटबाद मे झड़ गय़ा, मैंने अपनामाल साफ किया औऱ रसोई मे पानी पीने केँ लिएचल पड़ा।
मगर अम्मी खिड़की सें मुझेसभी देखरही थि। मेरी नज़रउन पे पड़ी, उनकी आँखों मे मात्र काम वासना नज़र आँ रही थि। जब अम्मी नें मुझेदेख लियातब वहां सें चली गई। मे डर भि रहा थां, मे अम्मी सें माफ़ी मांगने गय़ा, औऱ सोचरहा थां कि अम्मी अब्बा कों बता नाँ दे।
मे : अम्मी क्षमा करदो मुझे, पता नहि मुझे क्याँ हौ गय़ा थां। अगलीबार नहि करूंगा.
अम्मी: पिछली बार भि तूनेयही बोला थां।
मे : यह अंतिम बार थां बस.
अम्मी: (वोँ थोड़ी हंसी थि, मुझेसमझ नहि आया) तुँ फोन पऱ क्याँ देखरहा थां?
मे : कुछ नहि.
अम्मी: तूनेकहा थां जोँ मे बोलूंगी वोँ करेगा तुँ (क्रोध होके)।
मैंने अम्मी कों वोँ कथा दिखाई, अम्मी नें पूरीकथा पढ़ी।
अम्मी: बेटा यहगलत हैं, तुम्हे यहसभी पढ़ना नहि चाहिए।
मे : क्याँ ग़लत हैं अम्मी? पिछली बार मैंने आपको दिखाया थां। यहसभी करते हें आजकल।
अम्मी: तौ तुँ भि मेरे बारे मे यहीसभी सोचता हैं ?
मे : (मे कुछ नहि बोला).
अम्मी: छी। तुँ मेरे बारे मे यहीसभी सोचरहा हैं।
मे : मे आपसे प्रेम करता हूं अम्मी।
अम्मी: मे भि करती हूं, पर्र ऐसे नहि। समाज केँ हिसाब सें यहगलत हैं बेटा।
(औऱ मैंने यहबोल दिया जिसे अम्मी कां मुझ पर्र देखने कां तरीका बदल गय़ा)।
मे : अम्मी अगर अम्मी बेटा यह करता हैं तौ किसी कों पता नहि चलता, समाज क्याँ बोलेगा फ़िर?
अम्मी: तेरा दिमाग़ ख़राब हैं क्याँ? तुझेही पता हैं तुँ क्याँ बोलरहा हैं?
मे : हा अम्मी, जिन महिलाओं कों पति सें सुख नहि मिलता, उनको बाहर् मुंह मरना पड़ता हैं। अगर महिला बाहर् जाएगी। तौ बाहर् वाला फैदा भि उठा सकता हैं, जौ बिल्कुल सुरक्षित नहि हैं। अम्मी अपने बेटे कों जवान बनाती हैं समयपोस केँ। तौ अम्मी कां तौ पूराहक बनता हैं नाँ बेटे पर्र। बेटे केँ संगकरे तौ दोनों खुश भि रहेंगे, औऱ जब चाहेतब.
(अम्मी नें रोक दिया मुझे)।
अम्मी: मे बहोत खुश हूं औऱ मे बाहर् मुँह नहि मारती, तुँ यहसभी बंदकर नहि सकती तोँ तेरे अब्बा कों बताऊँगी।
मैंने अम्मी कों लन्ड दिखाना बंद नहि किया, कभी-कभी मे जानबुझ करमुठ मारता थां, मुझेपता रहता कि अम्मी घऱ मे हैं फिन भि। अम्मी मुझेचिप चिपकर देखती थि, मुझेपता थां मैंने उनकी बुर कि आग कों भड़का दिया हैं।
एक् रविवार कों मे मुठमार चुका थां, मे जानता थां कि अम्मी मेरे लन्ड कों देखरही हैं। झाड़ने केँ बाद मे बाथरूम कि तरफ बढ़ा, कुछ दूर पहले सें मुझे अम्मी केँ गुनगुनाने कि आवाज़ आई।
जैसे हि मे दबेपाव नज़दीक गय़ा, मुझेपता चला अम्मी मेरानाम लेके अपनी बुर मे उंगली कररही थि आआहह… मम्म्ह्ह … चोद मुझे…चोद अपनी अम्मी कों।
यह बहोत बार सुना थां उसदिन केँ बाद सें, मुझेपता थां अम्मी सजधजकर हैं मेरा लन्ड अपनी बुर मे लेने केँ लिएबस थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।
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एक् दिन हमें अपने ननिहाल मे किसीकाम सें १५दिन केँ लिए जानां थां मगर अम्मी बीमार पड़ गई, तौ मैंने अब्बा कों बोला कि "आप् शगुफ्ता कों लेकेजाओ मे अम्मी कां ख्याल रखूंगा"। मे बहोत खुश थां क्यू कि मे अम्मी केँ संग 15 दिन अकेला रहने वाला थां।
मैंने सोच लिया थां कि इन१५ दिनों कां मे पूरा फायदा उठाने कि कोशिश करूँगा औऱ मम्मी केँ संग अपने सम्बन्ध कों कुछआगे तक जरूर लेँ जाऊंगा।
मैंने अम्मी कों हॉस्पिटल लेके गय़ा, दोदिन तक मैंने कुछ नहि किया, क्योंकि वोँ बीमार थि। उसकी अगलीरात कों जैसी हि अम्मी सो गई आधे घंटेबाद मे अपनाकाम करनेलगा।
मुझेपता थां अम्मी टैबलेट लेँ रही हैं उसे औऱ गहरी नींद आएगी। मे उनकी नाइटी औऱ सायाउठा कर उनकी बुर सहलाने लगा औऱ ब्लाउज केँ ऊपर सें हि उनकी चूचियां दबाने लगा।
लगभग 5 मिनट अम्मी कि बुर सहलाने केँ बाद मैंने देखा कि अम्मी नें अपनी टाँगे चौड़ी कर दि औऱ उनकी बुर गीली होँ गई, मुझेसमझ आँ गय़ा वोँ गर्म होँ चुकी हैं। अबये तोँ मुझेपता नहि थां कि अम्मी जागरही हैं याँ सोरही हैं पऱ मे अपनेकाम मे लगारहा।
मे उनके जोड़ी केँ बीच मे गय़ा अपना लोअर निकाल केँ (8 इंच 4.5 इंच चौड़ा) लन्ड हिलाने लगा औऱ उनकी बुर सहलाने लगा। मैंने अपना लन्ड उनकी बुर पर्र रखा औऱ रगड़ना शुरुआत कर दिया। दोस्तो यहकुछ अलग हि थां, मुझे बहोत मज़ाआया। मे ऐसी हि अम्मी कि बुर केँ ऊपर लन्ड रगड़ते हुवेझड़ गय़ा उनकी बुर पे।
मुझेअब पछतावा होनेलगा कि मैंने यह क्याँ किया, मगर तब तक मुझेयाद आयाजब मे बुर पे लन्ड रगड़रहा थां तौ वोँ आवाज़ निकाल रही थि… मम्म्ह्ह… आआहह। मेरा लन्ड फिन सें खड़ा हौ गय़ा, अब मे उनकी बुर साफकर दि, अब मे फिन सें उनकी बुर सहलाने लगा, अब मैंने मेरी एक् उंगली उनकी बुर मे घुसा दि.आआह कितनी टाइट औऱ गर्म हैं।
मे अबजोर सें अपनी उंगली अंदर बाहर् करने लगा.अम्मी कि आवाज़ थोड़ी तेज हौ गई, पर्र मैंने कोई परवा नहि किया।
थोड़ी देरबाद मे झुक गय़ा औऱ उनकी बुर चटनेलगा औऱ उंगली अंदरभर कररहा थां।
अम्मी चार्मसुख केँ वज़ह सें अपनी जाँघें मेरेसर पे दबाने लगीफिन थोड़ी देरबाद मेरे मुँह पे झड़ गई, मैंने उनकी बुर कां पानी पूरापी लिया। फिन थोड़ी देरबाद मे उनकी नाइटी ठीक करकेसो गय़ा।
अगली सुभह अम्मी खानां बनारही थि औऱ वोँ बहोत खुशलग रही थि, क्योंकि सालोबाद उनकी बुर नें झड़ा थां। हमने खानां खाया, फिन अम्मी नें जौ बोला उससे मे बहोत खुश हौ गय़ा।
अम्मी: बेटा मेरा शरीर दर्दकर रहा हैं (मुझेपता थां क्यूं)।
मे : अम्मी पेनकिलर लेलोठीक होँ जाएगी।
(मगर अम्मी नें मनाकर दिया)।
अम्मी : मे दवा लेँ रही हूं, फिन सें दूसरी दवा नहि लेँ सकती।
अम्मी: तुँ मेरा जिस्म क्यूं नहि दबा देता।
(मे बहोत खुश हौ गय़ा)।
मे : ठीक हैं अम्मी बेडरूम मे चलते हें?
अम्मी: तूँ जा मे तेल गर्म करकेला रही हूं।
अम्मी रसोई सें तेल लेके मुझे दि, औऱ उल्टी लेट गयीँ,।
मे : अम्मी तुम्हारी नाइटी गीली हौ जायेगी।
अम्मी: अब इसमें मे क्याँ कर सकती हूं। तेल तौ लगेगा हि हम् कुछ नहि कर सकते.
मे : तुमने साया पहचाना हैं नां? तुम् नाइटी निकाल दो.
अम्मी: तूँ बहोत अश्लील बाते करनेलगा हैं। अपनी हि मम्मी कों नाइटी खोलने कों कहरहा हैं। कुछ लज्जा हैं याँ नहि?
मे : मे आपकी सहायता करना चाहता हूं बस, बाद मे आपको धोना पड़ेगा।
अम्मी नें अपनी नाइटी उतार दि, उनकी ब्रा नहि पहनी थि, उनका निपल दिखाई देरहा थां। उनके गोरे जिस्म कों मे निहार रहा थां फिन अपनेहाथ मे तेल लगाया औऱ उनकेपीठ पऱ मलनेलगा। मैंने उनकीपीठ, कंधेहर स्थान कों अच्छे सें दबा दिया थां, मैंने देखा उनका ब्लाउज गीली हौ चुकी हैं तेल केँ वज़ह सें।
मे : अम्मी तुम्हारी ब्लाउज़ गीली हौ चुकी हैं।
अम्मी: तूँ ब्लाउज कों छोड़ मेरे जाँघे दबादे.
मे नीचे गय़ा औऱ जाँघे दबाने लगा, थोड़ी देरबाद मैंने अम्मी कां सायाऊपर किया औऱ उनके जांघों कों दबाने लगा, जांघों केँ अंदर कि तरफ मैंने बहोत देर तक दबाया, तेल भि बहोत लगा दिया थां। जैसे मेरा अपनाहाथ उनकी गांड तक लेके जाता थां वोँ आआहह कि आवाज़ निकलती थि, उनको भि मज़ाआने लगा थां।
मैंने अम्मी कां साया औऱ ऊपर किया, उनकी बुर नहि दिखरही थि, अब मे उनकी बुर केँ नीचे, जाँघों कों दबारहा थां। अम्मी कुछ नहि बोलरही थि, इसे मुझे औऱ हौसला मिला, अब मैंने उनकी गांड पर्र हाथरखा औऱ दबा दिया। वाउ कितने नरम थें.
अम्मी: क्याँ कररहा हैं?
मे : तुम् बोलीं थि नाँ केँ पूरे जिस्म पर्र दर्द हैं?
अम्मी: तूँ मुझेवहा नहि छू सकता। (मेराहाथ अभि भि उनकी गांड पर्र थां, अम्मी कभी पैंटी याँ ब्रा नहि पहनती थि)।
(अम्मी यह बोलते हुवे मुस्कुरा रही थि).
मे : अम्मी इसे तुम्हारी सहायता हौ जाएगी, दर्दचला जाएगा।
अम्मी: तुँ मेरेऊपर हिस्से कों दबादे बस.
अम्मी पलट केँ अपनीपीठ केँ बललेट गई। मैंने अम्मी केँ पेट पे तेल लगाया, उनकी जाँघों पे भि बहोत धीरे-धीरे औऱ देर तक दबाया पूरा आनंद लेके। मे उनकी बुर नहि देखपा रहा थां पर्र उनकी बुर कि गर्मी कां एहसास हौ रहा थां मुझे। अम्मी अपनीआँख बंदकर ली औऱ अपने निचले होंठ कों काटरही थि, वोँ फिन भि कभीकभी कराहरही थि जब मे उनकी बुर केँ बहोत लगभगचला जाता थां।
मे उनकी बुर केँ पासचला गय़ा, वोँ मुझे रोकने केँ हालात मे नहि थि।
अम्मी कि बुर उनके पानी सें गीली हौ चुकी थि, मैंने एक् कदमआगे बढ़ने कां सोचा औऱ मैंने अपनी एक् उंगली अम्मी कि बुर मे घुसा दि। वोँ अचानक मेराहाथ हटा केँ खड़ी होँ गई।
अम्मी: (क्रोध होके) अहमदये तुँ क्याँ कररहा थां?
मैंने तेरीकहा थां नं कि तूँ अपनी अम्मी कों वहा नहि छू सकता।
(लज्जा केँ मरे वोँ ये तोँ नहि बोल सकती थि कि तुमने मेरी बुर मे ऊँगली डाल दि हैं.)
मे : मुझेलगा आपकी सहायता होँ जायेगी।
(वोँ क्रोध होके रसोई मे चली गई) मे सीधे बाथरूम गय़ा औऱ वहीहाथ सें मुठ मारीजिस हाथ सें मे अम्मी कि बुर मे ऊँगली डाली थि नहाने केँ बाद मैंने फिन सें अपना खड़ा लन्ड दिखाया अम्मी कों, जैसे मे अब तोँ करीब-करीब हररोज हि दिखाता थां औऱ अम्मी प्रेम सें मेरा लण्ड देखती थि। खाने केँ वक्त अम्मी ऐसा दिखारही थि जैसेकुछ हुआ हि नाँ होँ। वोँ मुझसे बातकर रही थि। मैंने भि बहोत हँसी मजाक औऱ फ़्लर्ट किया उनकेसंग, वोँ बस हस्ती औऱ मुस्कुराती।
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