माँ को पटाया बेटे ने - Maa Beta Ka Rishta – New Episode
रात कों मैंने फिन सें उनकी बुर कों चाटचाट केँ झाड़ दिया औऱ उनके बुर पे लन्ड रगड़ते हुवेमुठ मारा।
सुभहवही अम्मी कां शरीरदबा देता, ऐसा लगभगचार दिनचला।
रात कों मे अम्मी कि बुर मे लन्ड घुसाना चाहता थां पऱ डर केँ मारे नहि घुसाता। (क्यूकी लन्ड मोटा होने केँ वज़ह सें अम्मी उठ सकती थि)। अब जिस्म दबाते वक्त मे उनकी बुर सहलाता औऱ उनकी गांड भि बहोत देर तक दबाता। मां कोई भि किसीतरह कां इतराज नहि करती थि। मे समझ सकता थां कि अम्मी पूरा आनंद लेँ रही हैं। पऱ बातआगे नहि बढ़रही थि।
लगभग 5 दिन तक कुछ नहि करसका, क्योंकि रात कों हम् दोनों थक जाते थें। दिन मे उनका जिस्म नहि दबापता थां, इसवज़ह सें अम्मी भि परेशान थि वोँ तोँ चाहती थि कि मे उनकेसंग कुछ करूं पर्र मे रात कों भि कुछकर नहि सका, इसकी उनकी बुर मे आगलग गई, वोँ बहोत गुस्से सें बात करनेलगी। मे समझ गय़ा यह उनकी बुर कि वज़ह अम्मी गुस्से सें हैं।
मगर आखिर एक् दिन खानां खाने केँ बाद अम्मी नें कहा बेटा जल्द मेरा शरीरदबा दे। मुझेपता थां मेरे हाथों सें उनको जिस्म दबाया तौ वोँ मजे लेती हैं।
मैंने सोच लिया थां अब केसे भि एक् कदमआगे बढ़ाना पड़ेगा, अम्मी कों चोदना हि पड़ेगा। क्याँ मे अम्मी कों लुभाऊंगा? क्याँ मे अम्मी कों सिड्यूस कर पाऊँगा ताकि मुझे सेक्स मिलसके?
मेरी आंखे हमेशा अम्मी पर्र टिकी रहती थि, उनकी सेक्सी गांड कों निहारता रहता थां मे। अम्मी भि सभी समझती थि आखिर वोँ कोई छोटी औऱ नादान बच्ची तौ थि नहि। दिल मे तौ वोँ भि त्यार थि पर्र हमारा मां बेटे कां नाताआड़े आँ रहा थां। हालाँकि दिल मे हम् दोनों उस तौ तोड़कर आगेबढ़ जाने कों त्यार थें।
किसी भि समय मौका मिलते हि मे अपनाहाथ अम्मी कि गांड पर्र रगड़ देता थां कभी-कभी, याँ नाटक करता जैसायह अनजाने मे हुआ। अम्मी भि कोई नाराजगी नहि दिखती थि अब।
जिसदिन अम्मी नें मुझे उनकी बुर मे ऊँगली करतेहुए पकड़ा थां उसीदिन सें वोँ मुझेअलग नजरों सें देखती हैं, उनको आँखों मे नशा, कामवासना दिखती थि मुझे। अब अम्मी मुझे बेटे सें ज्यादा एक् मर्द कि तरह देखने लगी थि।
तोँ इतनेदिन उनकी बुर नां झड़ने सें वोँ हताशा मे रहनेलगी, अब उन्हें आगे सें मुझे मसाज केँ लिएपूछ लिया। अब मे अपना प्लान बनारहा थां कि केसे भि अम्मी कों चोदना पड़ेगा याँ अपनी वर्जिनिटी तोड़नी पड़ेगी। उधर अम्मी भि कुछऐसा हि सोचरही थि शायद। एक् दिनसाम कों अम्मी नें मुझसे कहा।
अम्मी: बेटा मेरे जिस्म मे बहोत दर्द हौ रहा हैं। तूँ मुझे मसाजदे सकता हैं क्याँ?
मे : ठीक हैं अम्मी, अपने कपड़े उतारदो, मे गर्मतेल लेकेआता हूं (मे बहोत खुश थां )
अम्मी : कपड़े उतारदो कां मतलब क्याँ हैं? (वोँ मेरीइस दो अर्थी बात पर्र मुस्कुरा रही थि)
मे : अम्मी! मेरा मतलब थां नाइटी उतारदो। वोँ तेल लगने सें गन्दी नं होँ जाये (मे भि मुस्कुरा रहा थां। हम् दोनों हि अपनीदो अर्थी बात कों समझरहे थें पर्र नादान होने कां नाटक भि कररहे थें )
अम्मी चुपरही पर्र उसनेचुप चाप अपनी नाइटी उतरकर एक् साइड मे रख दि। मे रसोई सें तेल लेकेआया, अम्मी पेट केँ बाल लेती हुइ थि। उनका साया (पेटीकोट) उनके घुटनों केँ ऊपर थें, उनका गोरा शरीर देखके मेरा लन्ड खड़ा हौ गय़ा।
मे पहले जैसा हि उनकेपीठ कों मसाजकर रहा थां उनकी गांड केँ ऊपरबैठ केँ। अब मुझेडर थां कि मेरा खड़ा लन्ड कहीं उनकी चूतड़ याँ गांड मे नं फंस जाये। क्योंकि मैंने अंडरवियर नहि पहना थां औऱ उधर अम्मी नें भि पैंटी ब्रा नहि पहनी थि घऱ मे।
मुझेऐसा लगा अम्मी भि मज़ा लेँ रही थि क्योंकि अम्मी नें कोई प्रतिक्रिया नहि दि थि।
मे अम्मी केँ जोड़ी याँ जाँघों कों मसाज किया, याँ इसबार मे थोड़ा सां होंसला किया औऱ उनके गांड पे हाथरखा।
अम्मी: बेटा क्याँ कररहा हैं? (हल्की आवाज़ मे)
मे : (अभि भि उनकी गांडदबा रहा थां) अम्मी आपका जिस्म दर्ददे रहा हैं, बस मे तौ मालिश कररहा हूं, इससे आपको सहायता मिलेगी।
अम्मी खामोश होँ गई याँ इसे मुझे अपना ग्रीन सिग्नल मिला, अब मे अपनी अम्मी कि गांड अच्छी सें मसलरहा थां। मे उनकी गांड कों देख नहि पारहा थां पर्र उनकीनरम गांड कों महसूस जरूरकर रहा थां।
अब मे उन्हें पीठ केँ बल लेटने कहा। अम्मी चुपचाप पीठ केँ बललेट गई,। अब मे उनकी जाँघों कों मसलरहा थां। अम्मी कि आँखेबंद थि, चेहरे पर्र अलग किसम कि ख़ुशी दिखरही थि। मे जानबुझ केँ अम्मी कि मखमली बुर कों बारबार छूरहा थां, अम्मी हल्की सि हल्की चीखली मेरे छूने सें।
इससे मेरी हिम्मत बढ़ गई, अब मे सीधे उनकी बुर कों सहलाने लगा, उनकी बुर केँ होंठों कों अपनी उंगलियों सें अलगकर रहा थां।
मुझेपता हैं कि अम्मी सेक्स केँ लिए बेताब हैं, मगर हमारे रिश्ते कां लिहाज कररही हैं। अम्मी चुपचाप लेतीरही, वोँ याँ तौ नींद मे होने कां नाटककर रही थि याँ फिनऐसा दिखावा कररही थि कि जैसेकुछ भि असामान्य न् होँ रहा होँ। इस सें मेरा भि होंसला बढ़ गय़ा औऱ मे अम्मी कि बुर कों जोर सें मसलने लगा। अम्मी भि चुपचाप आनंद लेती लेतीरही।
मैंने अम्मी कों फिन सें उल्टा हौ जाने कों कहा औऱ अम्मी जल्दी पेट केँ बललेट गयीँ,। अबफिन सें उनकी गांड मेरे सामने थि।
अम्मी इस उलटेपोज़ मे मालिश करवाने मे ज़्यादा खुश थि क्योंकि इसतरह सें उनको अपना मुँह नीचेकर सकने कि सुविधा थि औऱ उन्हें मेरीतरफ देखने मे लज्जा आती थि।
मैंने थोड़ाआगे बढ़ने कां सोच औऱ बोला।
मे : अम्मी इसतरह सें मुझे मालिश करने मे ऐसी दिक्कत होँ रही हैं औऱ इस पे मसाज करना थोड़ा मुश्किल हें। (मैंने गांड शब्द कां इस्तेमाल नहि किया), क्याँ मे साया ढीलाकर दूं?
अम्मी: हम्म। ( बेचारी ऐसा तोँ कह नहि सकती थि कि बेटा अहमद जल्द सें मेरा सायाखोल दो तौ बस हम्मकहा )
मे साया कां नाडाखोल दिया, अब उनका साया ढीला होँ चुका थां। मे अपनाहाथ ऊपर सें घुसा केँ उनके गोरे गांड पे हाथ फेरने लगाइसे उनका साया नीचे होँ गय़ा याँ उनकी गोरी गांड मुझे दिखने लगी।
अम्मी भि आनंद लेँ रही थि, उन्हें पता नहि चलाकब मे उनका साया उनकी गांड केँ नीचेला रखा। मुझे अम्मी कि बुर भि दिखने लगी, नां सफ़ेद नाँ काला, उसपे बहोत झांटे थि।
मुझेपता थां अम्मी आज ज़्यादा कुछ नहि बोलेगी, अब मे उन्हें बहोत गर्मकर चुका हूं। मैंने अपनाहाथ बढ़ा केँ उनकी बुर पर्र रखा याँ आरामसे सहलाने लगा।
अम्मी: तूँ मेरीबात कभी मानता क्यूं नहि? (हल्की आवाज़ मे)
मे : मे हमेशा मानता हूं। अब क्याँ किया मैंने?
अम्मी: (सिसकी लेती हुई) कलकुछ बोलि थि तेरी.
मे : (नाटक करनेलगा) मे भूल गय़ा, फिन सें कहो।
अम्मी: (मे उनकी बुर सहलारहा थां ) आआह बेटा। कुछ नहि.
मे अंदर हसनेलगा, जैसे मैंने सभीकुछ हासिल करली होँ। अब मेरी अम्मी कि गांड याँ बुर कि खातिर अच्छे सें कि, वोँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे सिसकियाँ लेती रहती थि। मे अनके बुर कों अधिक नहि छूरहा थां, क्योंकि अगर वोँ उठ केँ चली गई तौ फिन प्लान फ्लॉप होँ जाएगा।
मे : अम्मी रोज़ तुम्हारा ब्लाउज ख़राब हौ जाता हैं, प्रॉब्लम नहि होती क्याँ उसे धोने मे ?
अम्मी: तौ अब क्याँ ब्लाउज़ भि निकालोगे?
मे : अच्छा होंगा अगर आप् अपने ब्लाउज भि निकाल दो.इसतरह मालिश धीरे-धीरे होगा औऱ धोने कां भि टेंशन नहि, ब्लाउज निकाल दो
(मासूम बनतेहुए)
अम्मी : तुँ फालतू बातें बंद करके अपनाहाथ चला, तुँ मुझेऐसे नहि देख सकता।
मे : बचपन मे कईबार तोँ देखा मैंने, अभि भि तौ बेटा हि हुआ तुम्हारा।
अम्मी: मगर बेटा तुँ बड़ा होँ गय़ा हैं।
मे : मगर अम्मी केँ नज़रो मे तौ बेटा हमेशा छोटा हि होता हैं नाँ?
अम्मी: बेटे लगता हैं कि तुम्हारी तरफ बातों मे कोईहरा नहि सकता.रुक… वोँ जैसी हि रुक बोलीं मे ख़ुशी सें जैसे आसमान पे चला गय़ा, मुझेपता थां अब मे जन्नत जाने वाला हूं। वोँ अपने ब्लाउज कां हुक निकलरही थि, मुझेपता थां कि वोँ ब्रा नहि पहनी हैं। वोँ ब्लाउज खोलकर साइड मे रख दि, उनकेगोल मटोलदूध देखके मेरा लन्ड फटजारहा थां, मेरी अम्मी मेरे हालात कों देखली औऱ मात्र एक् स्माइल दि। वोँ भि अपने मम्मे दिखने सें शर्मा रही थि पऱ उन्होंने भि अपने मम्मे छुपाने कि कोई कोशिश नहि कि।
अम्मी: अब तुँ बड़ा होँ गय़ा हैं, मेरी बाते सुननी चाहिए तुम्हे (यह बोलके वोँ लेट गई)
मे : अम्मी मे छोटा हूं अभि भि।
अम्मी कां साया अभि भि ढीला थां, ब्लाउज़ खोलते वक्त उन्हें सायासही कर लिया थां (शयद अभि भि उन्हें लज्जा आँ रही थि) मगर नाडा खुला हि थां। मे अम्मी केँ दूध देखते हुए उनकेहाथ, कंधे, पेट पऱ अच्छे सें मालिश किया।
मे : अम्मी यहां मालिश करदू(दूध कों दिखाते हुए)
अम्मी : यहां कि मालिश कोई जरूरी नहि हैं। क्योंकि यहां पऱ कोई दर्द नहि हैं।
मे उनकी नां कों हा मानते हुए अपनाहाथ चुपचाप उनकेदूध पऱ रखदिए, वोँ थोड़ी देर मेरे आंखों मे देखने लगी, फिन अपनी आंखें बंदकर दि। मुझेअब हरा सिग्नल मिल चुका थां, मे उनके चूचियों कों हल्का दबा केँ मालिश कररहा थां, लगभग एक् मिनटबाद अम्मी केँ निपल्स खड़े हौ गए।
अब मे उनके निपल्स दबाने लगा, अम्मी अपने होठों कों काटरही थि याँ सिस्कारिया लें रही थि। ऐसे लगभग 20 मिनट करने केँ बादअब मैंने उनके जांघों कों मालिश करनेलगा, अब मैंने भि कंट्रोल खो दिया थां।
मैंने अम्मी केँ साया कों उनकी बुर केँ नीचे खिसका दिया, अब उनका बुर साफ नज़र आँ रहा थां, मे उनके बुर केँ ऊपर सें मालिश कररहा थां।
फिन मैंने धीरे-धीरे सें उनकी बुर पऱ उंगली फेरा याँ धीरे धीरे उनकी बुर सहलाने लगा, उनकी आंखें बंदथीं। मे उनकी बुर केँ गुलाबी पंखों कों अलग किया, ओह क्याँ नजारा थां। उनको बहुतदेर हल्का सां मसलने केँ बाद अम्मी कि बुर गिली हौ चुकी थि।
अब मुझे एक् आइडिया सूझा (मे अम्मी कों याँ बेबस करना चाहता थां, उनके अंदर याँ कामवासना लाना चाहता थां ताकि अम्मी मेरा लन्ड लेने कों तड़पउठे। अभि अगर वोँ झड़ जाती तोँ शायदफिन कल सें यहसभी नाँ होता) मे अबसोच लियाउस रात कों भि अम्मी कि बुर नहि चाटूँगा,
माँ को पटाया बेटे ने - Maa Beta Ka Rishta – New Episode
जब अम्मी नें देखा कि मे उनकी बुर कों चाट नहि रहा तोँ वोँ थोड़ा सां हैरान होँ रही थि। वोँ भि चाहती थि कि मे आगे बढूं पऱ मे अपनी अम्मी कों तड़पारहा थां ताकि उनकी कामवासना औऱ तेज हौ जाये औऱ मुझे उनको चोदने कां मौकामिल सके.
जब अम्मी नें देखा कि मे उनकी बुर कों केवलदेख रहा हूं औऱ ऊँगली वगैरा नहि डालरहा तोँ वोँ बोलि
"क्याँ देखरहे होँ बेटा मालिश करो नां" अम्मी नें मुझे अपनेबदन कि तरफ घूरता हुआ देखकर कहा। मे अपनी मां कि बात सुनकर जल्द सें बोतल मे सें तेल निकालकर अपनी अम्मी कि नंगी जांघों पऱ लगाकर मालिश करनेलगा।
"आह्ह्ह्ह बेटा ओह तुम्हारे हाथों सें तोँ 'बहोत बुहत मज़ा आँ रहा हैं अपने हाथों सें ऊपर तक मालिश करो" अम्मी नें अपने बेटे केँ हाथों कों अपनी जांघों पर्र महसूस करके मज़े केँ मारे ज़ोर सें सिसकते हुएकहा। असल मे वोँ चाहती थि कि मे उनकी बुर कि मालिश जोरजोर सें करूँ.
अपनी अम्मी कि जांघों कि मालिश करतेहुए मेरा लन्ड अंडरवियर मे पूरीतरह तनकर झटके मारना शुरुआत कर दिया थां। मैंने अपनेहाथ कों अपनी अम्मी कि जाँघ केँ ऊपर तक रगडते हुए उसकी मालिश करनेलगा, अपनी अम्मी केँ जांघों कि मालिश करतेहुए मेराहाथ बारबार अपनी अम्मी कि बुर कों छुरहा थां अम्मी कि हालत भि खराब होनेलगी। अपने बेटे केँ हाथ कों अपनी बुर पर्र महसूस करके उसकी बुर पानी टपकाने लगी। मेरा लन्ड अंडरवियर मे आन्दोलन मचाने लगा थां।
"ओहहहहह बेटा ये तुम्हारा अंडरवियर इतना फूलाहुआ क्यूं हैं" अम्मी नें अपनी जांघों कों मज़े सें अपने बेटे सें मालिश कराते हुएकहा। शायद उन्होंने सोच लिया थां कि उनको भि कुछ करना पड़ेगा ताकिबात कुछआगे तोँ बढे।
"वोँ अम्मी पता नहि क्यूं मेराये आपकेबदन कों छूते हि उठकरखडा हौ गय़ा हैं" मैंने बड़ी बेशरमी सें अपनी अम्मी कों जवाब देतेहुए कहा।
"आआह्ह्ह्ह हाँ बेटे तुम्हारा क़सूर नहि हैं तुम् अब जवान हौ चुके होँ। अपनी अम्मी कि नंगी जाँघ कि मालिश करतेहुए तोँ तुम्हारा ये तोँ उठेगा हि" अम्मी नें अपने बेटे कि बात सुनने केँ बाद सिसकते हुएकहा।
"अम्मी प्लीज एक् बार मेरे जिस्म कि भि मालिश करदो जैसे मे आपके शरीर कि कररहा हूं" अहमद नें अपनी अम्मी कि बात सुनने केँ बादकहा।
"क्याँ कहा बेटे अपनी अम्मी सें अपने जिस्म ड कि मालिश कराना चाहते होँ" अम्मी नें हैंरान होतेहुए कहा।
"हा अम्मी मे आपकेनरम हाथों सें अपनेबदन कि मालिश कराना चाह्ता हू" मैंने इसबार अपनी अम्मी कि नंगी बुर केँ ऊपर अपनेहाथ कों रखतेहुए कहा।
"आआह्ह्ह्हह हहहहह बेटे पहले तुम् अपनी जादुई हाथों सें हमारे पूरे जिस्म कां दर्द तोँ मिटाओ" अम्मी नें अपने बेटे कां हाथ अपनी बुर पर्र पड़ते हि सिसकते हुएकहा।
"हा अम्मी मे आपके सारेबदन कि मालिश करता हूं फिन आप् मेरे शरीर कि मालिश करना" मैंने अपनी अम्मी कि बात सुनकर खुश होतेहुए कहा।
"बेटेमै उलटी होकरलेट जाती हूं। तुम् मेरीपीठ कि मालिश करो" अम्मी नें अपने बेटे कि तरफ देखते हुएकहा औऱ स्वयं उल्टा होकरलेट गई।
अब मेरे सामने अम्मी कि पीठअब बिलकुल नंगी थि। मैंने बोतल मे सें तेल निकालकर अपनी अम्मी केँ चिकने पीठ कि मालिश करनी शुरुआत कर दिया।
ओहहह बेटा हाँऐसे हि ज़ोरलगा कर मालिश करो। बहोत आनंद आँ रहा हैं" अम्मी अपनीपीठ पर्र अपने बेटे कां मर्दाना हाथ लगते हि ज़ोर सें चिल्लाते हुए बोलि। मैंने अपनी अम्मी कि बात सुनकर उसकीपीठ कि मालिश बुहत ज़ोरलगा कर करनेलगा, मेराहाथ अपनी अम्मी कि पीठ कि मालिश करतेहुए बुहत गर्म हौ चुका थां।
मेरा लन्ड भि पूरीतरह अकडकर झटकेमार रहा थां।
"बेटेअब थोडा नीचे भि मालिश करो" अम्मी कुछदेर तक अपने बेटे केँ हाथों सें अपनीपीठ कि मालिश कराने केँ बाद बोलि, वोँ अपनी गांड याँ चूतड़ पर्र अपने बेटे कां हाथ महसूस करना चाहती थि.
मैंनेअपना हाथ नीचे करतेहुए अपनी अम्मी कि चूतड़ों केँ थोडा ऊपर मालिश करनेलगा। मेराहाथ बारबार वहां पऱ मालिश करतेहुए अम्मी कि बुर सें टकरारहा थां।
"आआह्ह्ह्ह बेटे थोडा औऱ नीचेकरो नाँ" अम्मी अपने बेटे केँ हाथ कों अपने चूतडों केँ इतना क़रीब महसूस करके ज़ोर सें सिसकते हुए बोलि।
मे गौर सें अपनी अम्मी कि तरफ देखने लगा। मेरी साँसें अपनी अम्मी कों घूरते हुए बुहत ज़ोर सें चलरही थि, मुझे अपनी अम्मी केँ चूतड़ केँ बीच गांड कां भूराछेद बुहत अच्छा लगरहा थां औऱ मुझे अपनी अम्मी कि बुर कि झांटें भि पीछे सें नज़र आँ रही थि।
"बेटे मालिश करो नं क्याँ देखरहे हौ" अम्मी नें कुछदेर तक चुप होकर बैठने केँ बादकहा। मैंने अपनी अम्मी कि बात सुनते हि अपनेहाथ मे तेल कों लगाकर अपनी अम्मी केँ मोटे मोटे चूतडों कि मालिश करनेलगा, अपनी अम्मी केँ चूतडों कि मालिश करतेहुए जानबूझकर उसकी गांड केँ छेद कों अपनी उँगलियों सें टटोलरहा थां।
"ओहहहहह बेटे बुहत मज़ा आँ रहा हैं ऐसे हि करतेरहो" अम्मी अपने बेटे कि उँगलियों कों अपनी गांड केँ छेद पऱ लगते हि गर्म होकर ज़ोर सें सिसककर बोलि। मे कुछदेर तक यों हि अपनी अम्मी केँ चूतडों कि मालिश करतेहुए अब अपनेहाथ कों पीछे सें उसकी बुर तक मालिश करनेलगा।
"ओहहहह इसशहहह बेटा बुहत अच्छे सें कररहे हौ ऐसे हि हा" अम्मी अपने बेटे केँ हाथ कों अपनी बुर पर्र महसूस करके ज़ोर सें सिसकते हुए बोलि।
मे अब अपनाहाथ पूरीतरह अपनी अम्मी कि बुर औऱ उसकी गांड पर्र फिराने लगा।
मेरेऐसा करने सें अम्मी ज़ोर सें सिसकरही थि औऱ उसकी बुर सें उत्तेजना केँ मारे बुहत अधिक पानी निकलरहा थां। मुझे अपनेहाथ पर्र अपनी अम्मी कां रस भि लगताहुआ महसूस हौ रहा थां।
"बेटेबस अब ज़रा मेरेपेट कि मालिश करो" अम्मी कों अचानक क्याँ सूझा जोँ उसने अपने बेटे कों रोकते हुएकहा।
मैंने अपनी अम्मी कि बात सुनकर अपनेहाथ कों अपनी अम्मी केँ चूतडो सें हटा लिया। अम्मी अपने बेटे केँ हाथों केँ रुकते हि फ़ौरन सीधा होँ गई,, मेरा लन्ड अपनी अम्मी केँ सीधा होते हि उसकी गोरी नंगी चुचियों कों देखकर उत्तेजना केँ मारे उसके अंडरवियर कों फाडने लगा।
"बेटे तुम् तोँ मेरी चुचियों कों ऐसेदेख रहे होँ जैसेकभी किसी कि चुचियां देखी हि नं होँ। तुमको 2 साल तक इनकादूध पिलाकर बड़ा किया हैं। अब देख्ना छोड़ो औऱ मालिश करो" अम्मी नें अपने बेटे कों अपनी चुचियों कि तरफ घूरता हुआ देखकर कहा। (अब कामवासना केँ जोर सें अम्मी भि खुलकर चूचीआं शब्दबोल रही थि। शायद उसने भि सोच लिया थां कि जबबात गांड औऱ बुर कों मसलने तक पहुँच हि चुकी हैं तोँ उसे भि तौ आगे बढ़ना चाहिए ताकि दोनों मां बेटे कि मन कि ख़्वाहिश पूरी हौ सके ).
अम्मी आपकी चुचियों कों देखकर तौ लगता हैं इनमें अब भि बुहत सारादूध हैं" मैंने अपनी अम्मी केँ गोरे चिकने पेट पऱ तेल कि मालिश करतेहुए कहा।
"बेटेइन मे दूधतब होता हैं जब किसी स्त्री कों ताज़ा बच्चा हुआ होँ औऱ मेरे तोँ सारे बच्चे बड़े हैं" अम्मी नें अपने बेटे कि बात कां जवाब देतेहुए कहा।
"अम्मी मगर हम् नहि मानते हमें तौ इनमें अब भि दूधभरा हुआ महसूस हौ रहा हैं" इसबार अहमद नें जानबूझकर अपने हाथों सें अपनी अम्मी कि दोनों चुचियों कि भि मालिश करतेहुए कहा।
"ओहहहह बदमाश तुम् ऐसे नहि मानोगे। अगर तुम्हें इतबार नहि आता तौ तुम् इन्हें दबाकर देखोदूध होगा तोँ निकल आयेगा" अम्मी नें अपने बेटे कां हाथ अपनी चुचियों पऱ पडते हि सिसकते हुएकहा।
मैंने अपनी अम्मी कि बात सुनकर जल्द सें अपनी दोनों हाथों सें अपनी अम्मी कि चुचियों कों पकड़ लिया औऱ बुहत ज़ोर सें उन्हें दबाने लगा।
"ओहहहहह नहि हैं दूध हमें तकलीफ हौ रही हैं" अम्मी नें अपने बेटे केँ हाथों सें अपनी दोनों चुचियों पऱ दबाब पडते हि ज़ोर सें चिल्लाते हुए बोलीं।
"अम्मी नहि हम् पहले इन्हें चूसकर देखेंगे अगरफिन भि दूध नहि निकला तौ फिन हम् हारमान जाएंगे" अहमद नें अपनी अम्मी कि दोनों चुचियों कों छोड़ते हुएकहा।
"बेते तुम् तौ बुहत ज़िद्दी हौ आँ जाओ मेरी चुचियों कों चूसकर तसल्ली करके देखो" अम्मी नें अपने बेटे केँ सामने हार मानते हुएकहा।
मैंने अपनी अम्मी कि बात सुनकर जल्द सें नीचे झुककर अपनी अम्मी कि एक् चूचि कों अपनेमूह मे लें लिया औऱ उसे बुहत ज़ोर सें चूसने लगा।
"आजहहह बेटे धीरे-धीरे दर्द होँ रहा हैं" अम्मी अपने बेटे केँ मुँह मे अपनी चूचि केँ जाते हि ज़ोर सें चिल्लाते हुए बोलि, मैंने अपनी अम्मी कि बात कि तरफकोई धयानदिए बगैर उसकी दोनों चुचियों कों बारी बारी पूरा अपने मुँह मे भरकर चूसने लगा।
"ओहहहह आआह्ह्ह बेटे नहि हैं दूध क्यूं जिदकर रहे हौ" अम्मी नें फिन सें ज़ोर सें सिसकते हुएकहा।
"हाँ अम्मी आप् सचकहरही थि इन मे दूध नहि हैं। मगर अम्मी आपकी चुचियों कां स्वाद तौ दूध सें अधिक मीठा हैं" अहमद नें अपनी अम्मी कि चुचियों कों छोडकर उसकी तारीफ करतेहुए कहा।
माँ को पटाया बेटे ने - Maa Beta Ka Rishta – New Episode
"बेटेअब मेरी तारीफ छोड़ो औऱ स्वयं सीधे होकरलेट जाओ।
तुम्हारा ये अंडरवियर तोँ आगे सें फूलता हि जारहा हैं।
तुम् भि क्याँ याद करोगे। अभि मे तुम्हारे इस फूलने कों भि ठीककर देती हूं औऱ तुम्हारी मालिश कर देतीहू" अम्मी नें बेड सें उठतेहुए कहा।
अहमद अपनी अम्मी कि बात सुनकर सीधालेट गय़ा।
"ओहहह बेटे तुम्हारा लन्ड भि बुहत सूंदर औऱ तगडा हैं"
अम्मी नें अपने बेटे केँ लेटते हि उसके अंडरवियर कों अपने हाथों सें उसकेबदन सें अलगकर दिया।
(अब अम्मी तोँ इतनी कामुक होँ चुकी थि कि उनके मुँह सें लण्ड शब्द निकल गय़ा। पऱ उन्होंने ऐसाशो नहि किया कि उनसेकुछ गलत बोलै गय़ा हौ। मैंने भि सोचा कि अम्मी तोँ बहोत हि कामुक हौ चुकी हैं। लगता हैं आजकाम बन हि जायेगा। इसलिये मे भि चुपरहा औऱ अम्मी नें मेरे अंडरवियर तौ उतारकर मुझे नंगाकर दिया औऱ मेरा टाइट औऱ सख्त लण्ड आसमान कि तरफसर उठाये खड़ा थां। )
अम्मी नें अपनेहाथ मे तेल लगाते हुए अपने बेटे केँ लन्ड कों पकड लिया औऱ उसे अपनेनरम नरम हाथों सें तेल कि मालिश करनेलगी।
"आजहहह अम्मी बुहतमजा आँ रहा हैं। आपकेहाथ बुहतनरम हैं" अहमद नें अपनी अम्मी केँ हाथों कों अपने लन्ड पऱ जाते हि ज़ोर सें सिसकते हुएकहा।
अम्मी अपने हाथों सें वैसे हि कुछदेर तक अपने बेटे केँ लन्ड कि मालिश करने केँ बाद अपनाहाथ वहा सें हटाली।
"वाउ बेटेअब तौ तुम्हारा लन्ड बिलकुल तनकरचमक रहा हैं" अम्मी नें अपने बेटे केँ लन्ड कि तरफ देखते हुएकहा।
अब तौ मैंने सोचा कि अब तोँ हद हि होँ गई, हैं। अबइस सें आगे औऱ अम्मी मेरे कों क्याँ इशारा कर सकती हैं.
मे एक् मर्द हूं तौ मेरे कों हि शुरुआत करनी चाहिए। मैंने अल्लाह कों याद करके अंतिम चोटकर हि दि। मैंने अम्मी कि बुर पर्र अपनाहाथ रखकर अपनी एक् ऊँगली उनकी बुर केँ अंदर खिसका दि
औऱ उसे धीरे-धीरे धीरे-धीरे अंदर बाहर् करतेहुए प्रेम सें बोला )
"अम्मी मुझसे बर्दाशत नहि होता क्याँ मे इसे आपकी बुर मे डाल सकता हूं" मैंने अपनी अम्मी कि आँखों मे देखते हुएकहा।
अम्मी तोँ नं जानेकब सें मुझसे इन शब्दों केँ इन्तजार मे बैठी थि। वोँ मेरे इतना बोलते हि खुश हौ गई, औऱ मेरेतने हुए लण्ड कों प्रेम सें सहलाते हुए बोलीं।
"बेटे मे भि कब सें जलरही हूं। तुम् वैसे हि लेटेरहो। मे स्वयं तुम्हारे लन्ड कों अपनी बुर मे डालती हूं, पऱ पहले मुझे अपने प्यारे बेटे केँ प्यारे लण्ड कों थोड़ा प्रेम तोँ कर लेनेदो। "
अम्मी नें अपने बेटे कि बात सुनने केँ बाद उससेकहा औऱ अपने होंठ नीचे झुकाते हुए अपने बेटे केँ लन्ड कों चूम लिया।
"आजहहह अम्मी ऐसामत करो। मे ऐसे हि झरना नहि चाहता" अपनी अम्मी केँ नरम होंठ अपने लन्ड पर्र पड़ते हि मैंने ज़ोर सें सिसकते हुएकहा।
अम्मी नें अपने बेटे कि बात कों सुनते हि अपने होंठो कों उसके होंठो पऱ रख दिया औऱ अपने बेटे केँ संगकुछ देर तक फ्रेंच किस मे खो गयीँ,।
अम्मी नें वैसे हि अपने बेटे कों चूमते हुए अपनी टांगों कों फ़ैलाकर अपने बेटे केँ पेट पर्र बैठ गई,।
अहमद कां लन्ड अपनी अम्मी कि गांड कों टक्कर माररहा थां, अम्मी नें कुछदेर तक अपने बेटे केँ संग चूमा चाटी करने केँ बाद उसके होंठो सें अपने होंठो कों अलग करतेहुए नीचे होकर अपने बेटे कां लन्ड पकड लिया औऱ अपने चूतडो कों ऊपर उठाकर अपने बेटे केँ लन्ड कों अपनी बुर पर्र रगडने लगी।
"आह्ह्ह्ह अम्मी डालदो नां स्स्स्सह्ह्ह्ह" मे अपने लन्ड कों अपनी अम्मी कि गीली बुर पर्र रगडते हुआ देखकर ज़ोर सें सिसकता हुआ बोला। अम्मी नें अपने बेटे कि हालत देखकर अपने बेटे केँ लन्ड कों सीधा अपनी बुर केँ छेद पर्र टीका दिया औऱ अपने बेटे केँ आँखों मे देखने लगी।
अम्मी अपने बेटे कि बात सुनकर उसके लन्ड पऱ अपनावजन रखतेहुए बैठने लगी, अम्मी केँ वजन केँ संग नीचे ज़ोर लगाने सें उसके बेटे कां लन्ड सरकता हुआ उसकी बुर मे घूसने लगा।
अम्मी जैसे जैसे नीचेवजन डालकर बैठरही थि वैसे वैसे उसके बेटे कां लन्ड उसकी बुर मे घुसरहा थां, अम्मी कों अपने बेटे कां लन्ड अपनी गीली बुर मे घुसते हुए बुहतमजा देरहा थां।
"आह्ह्ह्ह अम्मी तुम्हारी बुर तौ बुहत गर्म औऱ टाइट हैं ओह्ह्ह्ह बुहतमजा आँ रहा हैं" मे भि अपने लन्ड कों अपनी अम्मी कि बुर मे घुसते हुए देखकर सिसककर बोला।
"आआह्ह्ह्हह बेटे तुम्हारा लन्ड भि कुछकम नहि मेरी बुर सें तीन बच्चे निकल चुके हें फिन भि तुम्हारे लन्ड नें इसको बुरीतरह सें फ़ैला रखा हैं" अम्मी नें भि उत्तेजना केँ मारे अपने बेटे सें कहा औऱ इसबार बुहत ज़ोर केँ संग अपने बेटे केँ लन्ड पर्र बैठ गई।
"आह्ह्ह्ह बेटे तुम्हारा लन्ड तोँ बुहत लम्बा औऱ मोटा हैं मुझे तुमहारा लन्ड तौ मेरी बुर केँ आखरी हिस्से तक महसूस हौ रहा हैं" अम्मी नें अपने बेटे कां लन्ड अपनी बुर मे पूरा घूसने केँ बाद सिसकते हुएकहा।
"आह्ह्ह्ह अम्मी मुझे भि तौ अपना लन्ड किसी गर्म भट्टी मे घुसाहुआ महसूस होँ रहा हैं" मे नें अपनी अम्मी कि चुचियों कों पकडकर सहलाते हुएकहा।
"हाँ बेटा शायद तुम् सचकहरहे हौ। मेंरी बुर कुछ दिनों सें चुदाई नं होने केँ सबब बुहत गर्म रहनेलगी हैं" अम्मी नें अब अपनी बुर कों थोडा ऊपर करतेहुए अपने बेटे केँ लन्ड पऱ उछलते हुएकहा। मे नें भि उत्तेजना मे अपनी अम्मी कों नीचे सें अपने लन्ड सें धक्के देना शुरुआत कर दिये, अम्मी कों अपने बेटे केँ लन्ड सें चुदते हुए इतनामजा आँ रहा थां कि वो अब बुहत ज़ोर सें सिसकते हुए अपने चूतडों कों पूरी तेज़ी केँ संगऊपर नीचे करतेहुए अपने बेटे केँ लन्ड कों अपनी बुर मे लें रही थि।
अम्मी कि साँसें अपने बेटे केँ लन्ड पऱ कूदते हुए बुहत ज़ोर सें चलरही थि उसकी बुर सें उत्तेजना केँ मारे जाने कितना पानी निकलरहा थां। जिसवजह सें अब उसके बेटे कां लन्ड उसकी बुर मे बुहत आसानी औऱ तेज़ी केँ संग अंदर बाहर् हौ रहा थां। अम्मी भि अपने बेटे केँ लन्ड कों अपनी बुर सें उसके टोपे तक निकालकर फिनधम केँ संग नीचेबैठ रही थि। ऐसा करतेहुए अम्मी कां अंगअंग काँपरहा थां औऱ वो उत्तेजना केँ मारे बुहत ज़ोर कि सिसकियाँ लेकर अपने बेटे केँ लन्ड पऱ ऊपर नीचे हौ रही थि।
"आह्ह्ह्ह बेटे मे झरने वाली हूं ओहहहह तुम्हारे लन्ड तौ मेरी बुर कों जवानबना चूका हैं" अम्मी ये कहतेहुए अपने बेटे केँ लन्ड पऱ ज़ोर सें ऊपर नीचे होनेलगी, उसका पूराबदन उत्तेजना केँ मारे कांपरहा थां। अम्मी जैसे हि अपने बेटे केँ लन्ड सें अपनी बुर कों ऊपर करकेफिन नीचे होने लगती। मे भि अपने चूतडों कों उठाकर उसकी बुर मे ज़ोर सें अपना लन्ड डाल देता। जिस वजह सें अम्मी केँ मुँह सें ज़ोर कि सिसकी निकल जाती।
आआह्ह्ह्ह बेटे मे आई ओह्ह्ह्हह इसशहहह" अम्मी कां बदन अचानक अकडने लगा औऱ वो बुहत ज़ोर सें अपने बेटे केँ लन्ड पऱ उछलते हुए झरनेलगी। अम्मी नें झरते वक़्त अपनी आँखें बंदकर ली औऱ निढाल होकर अपने बेटे केँ ऊपर लेटकर झरने कां मजा लेनेलगी, मे नें अपनी अम्मी कि कमर मे हाथ ड़ालते हुए नीचे सें अपने चूतडों कों उछालते हुए अपनी अम्मी कि बुर मे धक्के लगाने लगा।
"हाहहह बेटेसच मे तुम् नें आज अपनी अम्मी कों पूरीतरह सें संतुष्ट कर दिया हैं, तुम्हारा लन्ड जिस महिला कि बुर मे घुसेगा वो तुम्हारी गुलाम बन जाएगी"
अम्मी नें कुछदेर तक निढाल रहने केँ बाद अपने आँखें खोलकर अपने बेटे सें कहा औऱ अपने बेटे केँ होंठो पऱ अपने होंठ रखतेहुए उसके होंठो कों चूमने लगी।
माँ को पटाया बेटे ने - Maa Beta Ka Rishta - Kahani ab aur interesting hogi
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