राबिया का बेहेनचोद भाई - jawani ki dahleez - Complete Kahani All Parts
राबिया कां बेहेनचोद भइया--1
यू तोँ मैने जवानी कि दहलीज़ पऱ पहलाकदम उमर केँ चौदह्वे पराव मे हि रख दिया थां। मेरी छातियों केँ उभर छोटे छोटे नींबू केँ आकर केँ निकलआए थें। घऱ मे अभि भि फ्रॉक औऱ चड्डी पहनकर घूमती थि। अम्मी अब्बू केँ अलावा एक् बड़ा भइया थां, जौ उमर मे मुझसे दोसाल बड़ा थां। यानी वोँ भि सोलह कां हौ चुका थां औऱ मूछों कि हल्की हल्की रेखाएँ उसके चेहरे पऱ आँ चुकी थि। मूछों कि हल्की रेखाओ केँ संग उसके नीचे कि मुच्छे भि आँ चुकी होगीऐसा मेरा अंदाज़ हैं। मेरी भइया केँ जैसी मुच्छे तोँ नहींआई थि मगर बगलो मे औऱ नीचे कि सहेली केँ उपर हल्के हल्के रोए उगने शुरुआत हौ गये थें। 15 साल कि हुई औऱ नींबू कां आकर छोटेसेब केँ जैसा होँ गय़ा, तब अम्मी नें मुझे नक़ाब पहना दिया यानी बाहर् जाने पर्र हर वक़्त मुझे बुर्क़ा पहनकर घूमना परता थां। घऱ मे लड़के नहि आते, सिर्फ़ रिश्तेदारों केँ सिवा। भाय्या केँ मित्र भि अगरआए तोँ ड्रॉयिंग रूम सें हि चले जाते। फ्रॉक अबकम हि पहनती थि। बाहर् निकालने पऱ सलवार कमीज़ केँ अलावा बुर्क़ा पहन नाँ परता थां। घऱ मे अभि भि कभीकभी फ्रॉक औऱ चड्डी पहन लेती थि। जवानी कि दहलीज़ पे कदम रखते हि, अपनी चूचियों औऱ नीचे कि सहेली यानी कि बुर मे एक् अजीब सां खिचाओ महसूस करनेलगी थि। जब सोलह कि हुई तोँ ये खिचाव एक् हल्की टीस औऱ मीठी खुजली मे बदल गई थि। बाथरूम मे पेशाब करने केँ बादजब पानीदल कर अपनी लालपरी कों धोती तौ मान करताकुछ देर तक यूँही रगर्ति रहूं। गोरी बुवर कां उपरी हिस्सा झांटों सें बिल्कुल धक गय़ा थां। नहाते वक़्त जब कपड़े उतारकर अपनी चूचियों औऱ बुर पर्र साबुन लगती तौ बसमजा हि आजाता, हाथ मे साबुन लेकर बुर मे दलकर थोड़ी देर तक अंदर बाहर् करती औऱ दूसरे हाथ सें चूचियों कों रगर्ति.आहह-आहह।। स्वयं कों बातरूम मे लगे बड़े आईने मे देखकर बस मस्त होँ जाती.बड़ा मजाआता थां.लगता थां बस अपनी बुर औऱ चूचियों सें खेलती रहूं.घऱ मे खाली वक्त मे लड़को केँ बारे मे सोचते सोचते कईबार मेरी चूत पासीज जाती औऱ मे बाथरूम मे जाकर अपनी गर्मी कम करने केँ लिए उनलीयों सें अपनी लालपरी कि उपर वाली चोंच कों मसालती थि औऱ नीचे वालेछेद मे उंगली घुसने कि कोशिश करती थि। शुरुआत थोड़ी परेशानी सें हुई मगरबाद मे बड़ामजा आनेलगा थां। रात मे अपनेखाट पर्र अपनी उंगलियों सें करती थि औऱ कईबार इतनी गर्म होँ जाती कि दिन मे टीन-टीन दफ़ा बाथरूम मे पेशाब करने केँ बहाने अपनी बुर कि घुंडी रगड़ने चली जाती थि। आप् सोचरहे होंगे मे इतनी छ्होटी उमर मे इतनी गर्म केसे होँ गई.मेरे अंदर लन्ड केँ लिए इतना दीवानापन। क्यूं कर आँ गय़ा हैं। तोँ जनाबयह सभी मेरेघऱ केँ महॉल कां असर हैं। वैसे अभि तौ मेरारूम अम्मी अब्बू केँ बगल वाला हैं। मगरजब मे छ्होटी थि मे अपने अम्मी अब्बू केँ संग हि सोती थि। मुझेयाद आता हैं.मेरी उमरउस समय 7 साल कि होगी.मे अम्मी केँ कमरे मे हि सोती थि.अम्मी औऱ अब्बू बड़े बिस्तर पर्र संग सोते मे बगल मे सिंगल बेड पर्र सोती.कमरे मे नाइट बल्ब जलता रहता थां.कभी- कभी रातों कों जब मेरीआँख खुलती तौ अम्मी औऱ अब्बू दोनो कों नंगे एक् दूसरे केँ संग लिपटा छिपटि कररहे होते। कभी अम्मी अब्बू केँ उपरकभी अब्बा अम्मी केँ उपर चड़े होते.कभी अब्बू कों अम्मी केँ जाँघों केँ बीच पति.याँ अम्मी कों अब्बू केँ पेट पर्र बैठेहुए पाती.कभी अब्बू कों अम्मी केँ उपरचढ़ कर धक्के मरतेहुए देखती.दोनो कि तेज़ साँसों कि आवाज़ औऱ फिन अम्मी कि सिसकारियाँ.उउउ.सस्स्स्स्स्सिईईई.मेरे सरताज.औऱ ज़ोर सि.सीईईईई। कभी-कभी तोँ अम्मी इतनी बेकाबू होँ जाती कि ज़ोर ज़ोर सें अब्बू कों गलियाँ देती.भड़वे औऱ ज़ोर सें मार.आिइ.तेरी अम्मी कों छोड़ू.रंडी कि औलाद.मोटी गाँड कां ज़ोर लगा.रसीली गाँड मे ताक़त नहीं.चीखतीं।.बालों कों पकड़कर खींचती। औऱ दोनो एक् दूसरे केँ संगगली गलोज़ करतेहुए चुदाई मे मसरूफ़ रहते। जबकि मे थोड़ी सि डरी सहमी सि उनकायह खेल देखती रहती। औऱ सोचती कि दिन मे दोनो एक् दम शरीफ औऱ इज़्ज़तदार बनकर घूमते हैं। फिनरात मे दोनो कों क्याँ हौ जाता हैं। सहेलियों नें समझदारी बढ़ने मे सहायता कि औऱ.इस मस्तखेल केँ बारे मे मेरी जानकारी बढ़ने लगी। मेरी नीचे कि सहेली मे भि हल्की गुदगुदी होने लगी.अब मे अम्मी अब्बू कां खेल देखने केँ लिए अपनी नींद हराम करनेलगी। शायदउन दोनोशक़ होँ गय़ा याँ उन्हे लगा कि मे जवान होँ रही हूं.उन लोगो नें मेरारूम अलगकर दिया.हालाँकि मैनेइस पर्र अपनी नाराज़गी जताईमगर अम्मी नें मेरे अरमानो कों बेरहमी कुचल दिया औऱ अपनेबगल वाले कमरे मे मेराखाट लगवा दिया। मैने इसकेलिए उसेदिल सें बाद-दुआ दि। जा रंडी तुम्हें 15 दिन तक लन्ड नसीब नहीं होगा। मेराकाम अब अम्मी-अब्बू कि सिसकारियों कों रात मे दीवार सें कानलगा करसुन नां हौ गय़ा थां.अक्सर रातों कों उनके कमरे सें प्लांग केँ चरमरने कि आवाज़। अम्मी कि तेज़ सिसकारियाँ.औऱ अब्बू कि.ऊओन्ंह।.ऊओं। कि आवाज़ें.ऐसा लगता थां कि जवानी कि मस्ती लूटीजा रही हैं.कि आवाज़ो कों कानलगा कर सुनती थि औऱ अपने जाँघो केँ बीच कि लालमूनिया कों भीचती हुईँ.अपने नींबुओ कों हल्के हाथो सें मसालती हुई सोचती। अम्मी कों ज़यादा मजाआता होगा, शाई कि चूचियाँ फूटबाल सें थोड़ी सि हि छ्होटी होगी। मेरी अम्मी बाला कि सुंदर थि। अल्लाह नें उन्हे गजब कां खूबसूरती आता फरमाया थां। गोरी चित्ति मक्खन केँ जैसारंग थां। लंबी भि थि औऱ मशाल्लाह क्याँ मोटी मोटी जांघें औऱ चुटटर थें। रसीली गाँड मटकाकर चलती तौ सभी गान्डुओन कि छाती पऱ साँपलॉट जाता होगाऐसा मेरेदिल मे आता हैं। रिश्तेदारो मे सब कहते थें कि मे अपनी अम्मी केँ उपर गई हूं.मुझे इसबात पर्र बरा फख्रा महसूस होता.मे अपने आप् कों उन्ही केँ जैसा सज़ा सॉवॅर कर रखना चाहती थि। मे अपनी अम्मी कों छुपछुप कर देखती थि। पता नहीं क्याँ थां, मगर मुझे अम्मी कि हरकतों कि जासूसी करने मे एक् अलग हि मजाआता थां औऱ इस बहाने सें मुझे जिस्मानी ताल्लुक़ात बनाने केँ सारे तरीके मालूम होँ गये थें। समय केँ संग-संग मुझेये अंदाज़ा हौ गय़ा कि अम्मी - अब्बू कां खेल क्याँ थां.जवानी कि प्यास क्याँ होती हैं.औऱ इस प्यास कों केसे बुझाया जाता हैं। मर्द - स्त्री अपनीबदन कि भूक मिटाने केँ लिएघऱ कि इज़्ज़त कां भि शिकार कर लेते हैं.अम्मी कि जासूसी करते करते मुझेयह बातपता चली.अम्मी नें अपने भइया कों हि अपना शिकार बना लिया थां.मुझे इसबात सें बरा ताजुउब हुआ औऱ मैने मेरी एक् सहेली आयशा सें पुछा कि क्याँ वाक़ई ऐसा होता हैं.याँ फिन मेरी अम्मी हि एक् अलबेली रंडी हैं.उसने बताया कि ऐसा होता हैं औऱ.वोँ स्वयं अपनी अम्मी केँ संग भइया औऱ उसके दोस्तूँ कि चुदाई कां मजा लेती हैं। उसकी भाग्य पर्र मुझे बड़ाजलन हुआ। मे इतनीखुश भाग्य नहि थि.खूबसूरती औऱ जवानी खुदा नें तोँ दि थि.मगरइस हसीन जवानी कां मजा लूटने वालाअब तक नहि मिला थां.मेरी जवानी ज़ंज़ीरों मे जकड़ दि गई हैं.अम्मी कां कड़ा पहरा थां मेरी जवानी पऱ.स्वयं तौ उसने अपने भइया तक कों नहि छोड़ा थां.मगर मुझ पऱ इतनी बंदिश केँ अगर चूचियों पऱ सें दुपट्टा सरकजाए तोँ फ़ौरन डांट लगती.राबिया अब तुँ बच्ची नहि.ढंग सें रहा कर.जवानी मे अपने भइया सें भि लिहाज़ करना चाहिए.कभी- कभी तौ मुझे चिढ़ आँ जाता.मन करताकह डू.साली भोंसड़ी। रंडी। स्वयं तौ नां जाने कितनी लन्ड निगल चुकी हैं.
अपने भइया तक कों नहि छोड़ा.औऱ मेरी बुर पर्र पहरे लगती हैं.स्वयं तौ अपने शौहर सें मज़े लेते वक़्त कहती हैं खुदा नें जवानी दि हैं इसीलिए कि इसका भरपूर मजा लूटना चाहिए औऱ मुझ पर्र पाबंदी लगती हैं.मगर मे ऐसाकह नहींपाई कभी.घऱ कि इसी बंदिश भरे माहौल मे अपनी उफनती गर्म जवानी कों सहेजे जीरही थि.घुटन भि होती थि.दिल करता थां.इन ज़ंज़ीरो कों तोड़ डू.अपने नक़ाब कों नोच डालु.
अपने सुंदर गदराए मांसल चूतरों कों जीन्स मे कस कर.अपनी छाती केँ कबूतरो कों टी - शर्ट मे डालकर उसके चोंच कों बरछा (भाला ) बनाकर लड़कों कों घायलकरू। लड़कों कों ललचाओ। औऱ उनकी घूरती निगाहों केँ सामने सें भारी गाँड लचकती हुइ गुज़रु.पऱ अम्मी सालीघऱ सें निकालने हि नहीं देती थि.कभी मार्केट जानां भि होता थां.तोँ नक़ाब पहनाकर अपनेसंग लें जाती थि। एक् बार एक् सहेली केँ घऱ उसकी सालगिरह केँ दिन जानां थां.मैने खूब सज-धजकर जीन्स औऱ टी - शर्ट पहनाफिन उसकेउपर सें नक़ाब डालकर उसकेघऱ चली गई.वहा जश्न मे अम्मी कि कोई सहेली आई थि उसनेदेख लिया.अम्मी कों मेरे जीन्स पहन नें कां पताचला तौ मुझे बहोत डांटा.इतनी घुटन हुईँ कि क्याँ बताए.
एक् बार अब्बू कही बाहर् चलेगये.15 दिनों कि अब्बू कि गैर मौजूदगी नें शायद अम्मी कि जवानी कों तड़पने कों मजबूर कर दिया थां.जब वोँ नहाने केँ लिए गुसलखाने मे घुसी तोँ मैने दरवाजे केँ छोटेछेद केँ पास अपनी आँखो कों लगा दिया औऱ अम्मी कि जासूसी करने मे मे वैसे एक्सपर्ट हौ चुकी थि। साली नें अपनी सारी उतरीफिन ब्लाउज केँ उपर सें हि अपने कों आईने मे निहारते हुए दोनो हांथों कों अपनी चूचियों पर्र रखकर आरामसे मसलने लगी.मेरे दिल कि धरकनतेज हौ गई.इतने लन्ड खा चूकने केँ बाद भि यहहाल.15 दिन मे हि खुजली होने लगी.यहा मे 17 साल कि होँ गई औऱ अभि तक.
खैर अम्मी नें चूचियों पर्र अपना दबाओ बढ़ाना शुरुआत कर दिया.सस्सिईईईईई।.अम्मी अपनी होंठों पऱ दाँत गाडते हुएआह ली.फिन ब्लाउस केँ बटन एक्-एक् कर खोलने लगी.अम्मी कि दो बड़ी- बड़ी हसीन चूंचीयाँ काले ब्रसियर मे फाँसी बाहर् नेकालने कों बेताब होँ गयीँ,। अम्मी नें एक् झटके सें दोनो चूचियों कों आज़ाद कर दिया.फिन पेटिकोट केँ रस्से (नारे) कों भि खोलकर पेटिकोट नीचे गिरा दिया। आईएनए मे अपने नंगे खूबसूरती कों निहार रही थि.बड़ी-बड़ी गोरी सुडोल चूंचीयाँ। अरे !! मेरी चूंची कब इतनी बड़ी होगी.साली नें भइया औऱ अब्बू सें मसलवा मसलवा कर इतना बड़ाकर लिया हैं.गठीला शरीर.हि कितनी मोटी जांघें हैं.चिकनी.वैसे जांघें तोँ मेरी भि मोटी चिकनी औऱ गोरी गोरी थि.तभी मेरी नज़रइस नंगे खूबसूरती कों.देखते हुए बुर पर्र गयीँ,.हि अल्लाह! कितनी हसीन बुर थि अम्मी कि.बिल्कुल चिकनी.झांटों कां नामोनिशान तक नहि थां उनकी चूत पर्र.
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राबिया कां बेहेनचोद भइया--2
। थोड़ी सि झांट छोड़रखी थि अपनी बुर केँ उपरी हिस्से मे पेडू केँ नीचे.शायद रंडी नें डिज़ाइन बनाया हुआ थां.अपने भइया कों ललचाने केँ लिए.अब्बू तोँ कुत्ता थां.अपना पेटिकोट भि सूँघा देती तोँ सालादुम हिलता चलाआता उसकेपास। हि क्याँ गोरी बुर थि.वैसे बुर तोँ मेरी भि गोरी थि मगर अम्मी कि बुर थोड़ी फूली हुइ थि.मोटे मोटे लन्ड खाखाकर अपनी बुर कों फूला लिया थां बुर मरानी नें.उनके नंगे हसीन शरीर कों देखकर मेरी बुर मे भि जलन होने लगी.मे अपनी सलवार कों चूतड़ सें खिसका कर अपनी नंगी बुर कों सहलाने लगी.औऱ संग हि अम्मी केँ मस्ताने खेल कां नज़ारा भि देखती रही.बड़ी मस्त महिला लगरही थि इससमय मेरी अम्मी.थोड़ी देर तक अपने नंगे शरीर पर्र हाथ फेरती रही.
दोनो चूचियों कों अपने हांथों सें मसालते हुए दूसरा हाथ अपनी बुर पऱ लेँ गयीँ,.बुर कि होंठों कों सहलाने लगी.औऱ फिन सहलाते-सहलाते अपनी उँगलियों कों बुर मे घुसेड़ दिया.पहले तोँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उँगलियों कों चूत केँ अंदर बहेर करतीरही फिन उसकी रफ़्तार तेज़ होगआई.संग हि संगआमी अपनी भारी गाँड कों भि हिचकोले देरही थि.बड़ा मस्त नज़ारा थां.अम्मी थोड़ी देर तक अपने शरीर सें येखेल खेलती रहीफिन शावेर ओन किया औऱ अपनेबदन कों भिगोकर साबुन लगाने लगी.खूब अच्छी तरह सें उसने अपनेपुर नंगे शरीर पर्र साबुन लगाया.अपनी दोनो चूचियों पर्र.अपनी चिकनी बुर पर्र.तोँ खूबझाग निकलकर उसने साबुन रग्रा.फिन अम्मी नें अपनी बुर मे उंगलीयूं कों घुसेड़ा.एक्.दो.तीन। औऱ फिन पाँचों उंगलियाँ.बुर केँ अंदरदल दि.धीरे-धीरे धीरे-धीरे अंदर बाहर् करतेहुए.
हि.अल्लाह।.क्याँ बताऊँ बुर मरानी कितनी गर्म हौ गई थि.मुँह सें गुगु कि आवाज़ निकलते हुए बुर मे उंगलियाँ पेलरही थि.थोड़ी देर तक अम्मी यूँही अपने चूत कि चुदाई करती रही.चूतरों कां हिचकोला तेज़ होता गय़ा.आहह-आहह.ऊओ।.औऱ फिन अम्मी कां शरीर एक् झटके केँ संग शांत हौ गय़ा.अम्मी मदहोशी कि आलम मे फर्श पऱ झरने केँ नीचेलेट गई,.थोड़ी देर शांत नंगे पड़ी रहने केँ बादउठ कर नहाना शुरुआत किया.खेल ख़तम होँ चक्का थां.मेरी चूत नें भि पानी छोड़ दिया थां.मे शलवार थामे अपने कमरे मे आई.थोड़ी देर तक बुर कों सहलाती रही। एक् उंगली घुसेरी.बुर केँ अंदर थोड़ी देर तक उंगली घुसती गई,.फिन रुक गई,.मे अक्सर अपनी चूत एक् उंगली सें हि चोदा करती थि.पऱ अम्मी कों देखकर जोश मे आँ गई.चूत फैलाकर दो उंगली घुसने कि कोशिश कि.थोडा दबाव डाला तोँ दर्दहुआ। मे नें डरकर छोड़ दिया.हि निगोरी मेरी बुर कब चौड़ी होगी.मुझे बड़ा अफ़सोस हुआ.क्याँ मेरी बुर फाड़ने वालाकोई पैदा नहींहुआ.
समय गुज़रता गय़ा.शरीर कि भूक भि बढ़ती गयीँ,.मगर हैं रे क़िस्मत.17 साल कि होँ चुकी थि मगरकोई लन्ड नहीं नसीब हौ सका थां जोँ मेरी कुँवारी बुर केँ सील कों तोड़कर मुझे लड़की सें स्त्री बना देता.कोई रगड़कर मसलकर मजा देने वाला भि मुझे नहीं मिला थां.मेरी विवाह भि नहि हौ रही थि। अम्मी औऱ अब्बू मेरेलिए लड़के कि खोज मे थें.उनका ख्याल थां कि 18 कि होते-होते वोँ मेरेलिए लड़का खोज़ लेंगे.पर्र 18 कि होने मे तौ पूरासाल बाकी थां.तब तक केसे अपनी उफनती जवानी कों संभालू.बुर केँ कीड़े जब रातो कों मचलने लगते तौ जी करता किसी भि राह चलते कां लन्ड अपनी बुर मे लेँ लूँ.पर्र फिनदिल नहीं मानता.इतने नाज़-नखरो सें संभाली हुईँ.गोरी चित्ति अनचुदी चूत किसीऐरे गैरे कों देनाठीक नहीं होगा.इसलिये अपनेदिल कों समझती.
मगर बढ़ती उमर केँ संग बुर कि आग नें मुझे पागलकर दिया थां औऱ चुदाई कि आग मुझेइस तरह सताने लगी थि कि.मेरे ख्वाबो ख़यालो मे सिर्फ़ लन्ड हि घूमता रहता थां.अरे रे भाग्य.मेरी बहोत सारी सहेलियों नें उपर-उपर सें सहलाने चुसवाने.चूसने कां मजा लें लिया थां औऱ जब वोँ अपने किससे बताती तौ मुझे अपनी भाग्य पऱ बहोत तरस आता.घऱ कि पाबंदियों नें मुझेकही कां नहीं छ्चोड़ा थां.उपर-उपर सें हि किसी सें अपनी चूचियों कों मसलवा लेतीऐसा भि मेरे नसीब मे नहीं थां.जबकि मेरीकई सहेलियों नें तौ बुर कि कुटाई तक करवाली थि.
शुमैला नें तोँ अपने दोनो भाइयों कों फसा लिया थां.उसकी हर रात.सुहागरात होती थि औऱ अपने दोनो भाइयों केँ बीच सोती थि.वोँ बतारही कि एक् अपना लन्ड उसकी बुर सें सटा देता थां औऱ दूसरा उसकी भारी गाँड सें तबजाकर उसे नींदआती थि.पऱ हैं रे मेरी क़िस्मत एक् भइया भि थां तौ दूरदूर हि रहता थां औऱ अब तोँ शहर छोड़कर बाहर् MBA करने केँ लिए एक् बड़ेशहर मे चला गय़ा थां.
मैनेअब बारहवी कि पढ़ाई पूरीकर ली थि। वैसे तौ हम् जिसशहर मे रहते हैं वाहा भि कई कॉलेज औऱ इन्स्टिट्यूशन थें जहा मे आगे कि पढ़ाई कर सकती थि मगरजब सें मेरी सहेली रेहाना जोँ कि मुझ सें उमर मे बड़ी हैं। जिसकी विवाह उसीशहर मे हुइ थि जिसमे भइया पढ़ने गये थें.केँ बारे मे औऱ वाहा केँ आज़ादी औऱ खुलेपन केँ महॉल केँ बारे मे बताया तौ.मेरे अंदर भि वहा जाने औऱ अपनी पढ़ाई कों आगे बढाने कि दिली तम्मना होँ गई थि.
इसे शायद मेरी खुसकिस्मती कहे याँ फिन अल्लाह कि मर्ज़ी, मेरा भइया 6 महीने पहले हि वही केँ एक् मशहूर कॉलेज मे MBA कि पढ़ाई करने केँ लिए दाखिला लिया थां। पैसे कि तकलीफ़ तौ नहीं थि मगर अम्मी अब्बू राज़ी हौ जाते तोँ मेराकाम बन जाता। औऱ मे खुलीहवा मे साँस लेने कां अपना सपने पूराकर लेती.जौ कि इस छोटे सें शहर मे नामुमकिन थां.
मैने अपनी ख्वाहिश अपनी अम्मी कों बता दि.उसका जवाब तौ मुझे पहले सें पता थां.कुतिया मुझेकही जाने नहीं देगी.मैने फिन ममुजान सें सिफारिश लगवाई.मामू मुझे बहोत प्रेम करते थें.शायद मे उन्ही केँ लन्ड कि पैदाइश थि.उन्होने अम्मी कों समझाया कि मुझे जाने दे.वैसे भि इसकी विवाह अभि हौ नहीं रही.पढ़ाई कर लेने मे कोई हर्ज़ नहीं हैं.फिन भइया भि वहीरह कर पढ़ाई कररहा हैं.मामू कि इसबात पर्र अम्मी मुस्कुराने लगी.मामू भि शायदसमझ गये औऱ मुस्कुराने लगे। औऱ मुझ सें कहाजाओ बेटे अपने कपड़े जमा लो.मे तुम्हारे भइया सें बात करता हूं.मे बाहर् जाकररुक गई औऱ कानलगा करसुन नें लगी.
अम्मी कहरही थि। हाए !! नहीं !! वहा भइया केँ संग अकेले रहेगी.कही कुछ.मामूइस पर्र अम्मी कि जाँघ पऱ हाथ मारते हुए बोले.आख़िर बच्चे तोँ हमाए हि हैं नां.अगर कुछ हौ गय़ा तोँ संभाल लेंगे फिन.बाद मे देखेंगे.मेरे पांवअब ज़मीन पर्र नहीं थें.अब मुझे खुलीहवा मे साँस लेने सें कोई नहींरोक सकता थां.दौड़ती हुईँ अपने कमरे मे आँ कर अपने कपड़ो कों जमाने लगी.अम्मी सें छुपाकर खरीदे हुए जीन्स औऱ T-शर्ट.स्कर्ट-ब्लाउस.लो-कट समीज़ सलवार.सब कों मैने अपनेबैग मे डाल लिया.उनके उपर अम्मी कि मनपसंद केँ दो-चार सलवार कमीज़ औऱ बुर्क़ा रख दिया.अम्मी साली कों उपर सें दिखा दूँगी.उसे क्याँ पता नीचे क्याँ मालभर रखा हैं मैने.फिन ख्याल आया कि खाली चुदवाने केँ लिए तोँ बड़ेशहर नहीं जानां हैं.
कुछ पढ़ाई कि बाते भि सोचली जाए.यह हाल थां मेरी बहकति जवानी कां पहले चुदाई केँ बारे मे सोचती फिन पढ़ाई केँ बारे मे.अल्लाह नें यह बुर लन्ड कां खेल हि क्यूं बनाया.औऱ बनाया भि तौ इतना मजेदार क्यूं बनाया.हैं। थोड़ी देरबाद अम्मी औऱ मामू मेरे कमरे मे आए औऱ दोनो समझाने लगे। कि शहर मे केसे रहना हैं। भइया कों उन्होने दो कमरो वाला फ्लॅट लेने केँ लिएकह दिया हैं.औऱ ऐसे तोँ पता नहीं वोँ कहा ख़ाता-पिता होगा.मेरे रहने सें उसके खानां बनाने कि दुस्वरियों कां भि ख़ात्मा होँ जाएगा.दोनो लड़ाई नहीं करेंगे.औऱ अपनी सहूलियत औऱ सलाहियत केँ संग एक् दूसरे कि सहायता करेंगे.दो दिनबाद कां ट्रेन कां टिकेट बुककर दिया गय़ा.भइया मुझे स्टेशन पऱ आकर रिसीव कर लेगाऐसा मामू नें बताया।
दोदिन बाद मे जब नक़ाब पहनकर ट्रेन मे बैठी तोँ लगा जैसेदिल पऱ परा सालो सें जमाबोझ उतार गय़ा.आज इतने दिनों केँ बाद मुझे मेरी आज़ादी मिलने वाली थि.अम्मी कि पाबंदियों सें कोसों दूर मे अपनी दुनिया बसाने जारही थि.ट्रेन खुलते हि सबसे पहले गुसलखाने जाकर अपने नक़ाब सें स्वयं कों आज़ादी दि अंदर मैने गुलाबी रंग कां सुंदर सां सलवार कमीज़ पहनरखा थां जौ थोडा सां लोकट थां.दिल मे आया कि ट्रेन मे बैठे बुढहो कों अपने कबूतरो कों दिखाकर थोडा लालचाऊं। मगर मैने उसकेउपर दुपट्टा डाल लिया। चुस्त सलवार कमीज़ मेरे जिस्मानी उतार चढ़ाव कों बखूबी बयानकर रहा थें.पर्र इसकी फिकर किसे थि मे तोँ यही चाहती थि.
बालो कां एक् लट मेरे चेहरे पऱ झूलरहा थां.जब अपने बर्थ पऱ जाकर बैठी तोँ लोगो कि घूरती नज़रे बतारही थि कि मे कितनी सुंदर हूं.सब दम साढ़े मेरी हुस्न कों अपनी आँखो सें चोदने कि कोशिश कररहे थें.शायद मन हि मनआहे भररहे थें.एक् बुड्ढे कि पेशानी पर्र पसीने कि बूंदे चमकरही थि.एसी कॉमपार्टमेंट मे बुढहे कों क्यूं पसीना आँ रहा थां.खैर जानेदे मे तौ अपनी मस्ती मे डूबी हुइ नई-नई मिली आज़ादी केँ लज़्ज़त बारे मज़े सें उठाती हुईँ.मस्तानी अल्ल्हड़ चाल सें चलती। कूल्हे मटकाती हुईँ आई औऱ.पूरी बर्थ पऱ पसारकर बैठ गई.हाथ मे मेरे सिड्नी शेल्डन कां नया नोवेल थां.एक् पांव कों उपरउठा करजब मैने अपनी सैंडल उतरी तौ सभीऐसे देखरहे थें.जैसे मेरी सैंडल चाट लेंगे याँ खा जाएँगे.
अपने गोरे नाज़ुक पैरो सें मैने सैंडल उतरी.पांव कि पतली उंगलिया जिसके नाख़ून गुलाबी रंग सें रंगे थें कों थोडा सां चटकाया.हाथो कों उपरउठा कर सीना फूलाकर साँस लिया जैसे कितनी तक गई हूं औऱ फिन नोवेल मे अपने आप् कों डूबा लिया.
सुभह सुभहजब ट्रेन स्टेशन पऱ पहुचने वाली थि तोँ मे जल्द सें उठी औऱ गुसलखाने मे अपने आप् कों थोडा सां फ्रेश किया आँखो पऱ पानी केँ छींटे मारे.थोडा सां मेक-उप किया.काजल लगाया.फिन वापसआकर अपनेबैग कों बाहर् निकलकर संभालने लगी। ट्रेन रुकी खिड़की सें बाहर् भइया नज़र आँ गय़ा।
राबिया का बेहेनचोद भाई - jawani ki dahleez – New Episode
राबिया कां बेहेनचोद भइया--3
। दरवाजे केँ पास भीड़कम होने पर्र मे अपना समानउठा कर इठलाती हुईँ दुपट्टा संभालते.दरवाजे केँ पास आई.सामने भइया खड़ा थां मगर वोँ आगे नहीं बढ़ाफिन अचानक चौंककर आगे आया.मेरे हाथ सें बैग लेँ लिया.मे धीरे-धीरे सें इठलाती हुई नीचे उतरी औऱ भइया कों सलाम किया.औऱ मुस्कुराते हुए कहा.हि भइया आप् तोँ मुझे अंजानो कि तरह सें देखरहे थें.इतनी जल्द अपनी बेहन कों भूल गये.भइया नें मुस्कुराते हुए कहा.अर्रे नहींघऱ मे तौ तूँ ऐसे हि घरेलू कपड़ों मे रहती हैं.एक् दम बदली हुइ लगरही हौ.मे थोडा शरमाई फिनअदा केँ संग बोलीं.आप् भि तौ भइया बदले बदले सें लगरहे होँ.बड़े शहर केँ स्टाइल …। सारे मज़े लेँ लिए क्याँ.भइया इस पऱ थोडा झेप गय़ा औऱ दाँत दिखाते हुए बोला.अर्रे यहसभी करना पड़ता हैं.
मे भि हस्ती हुइ बोलि.हा बड़ाशहर बड़ा कॉलेज.फिन अगर स्टाइल सें नां रहे तोँ सभी मेरे भइया कों जाहिल समझेंगे.भइया भि हँसने लगा। स्टेशन सें बाहर् आकर हमने टॅक्सी पकड़ी औऱ फ्लॅट केँ तरफचल दिए। फ्लॅट छ्होटा सां थां एक् मास्टर बेडरूम एक् रसोई एक् ड्रॉयिंग रूमकम डाइनिंग हॉल थां उसी मे एक् तरफबेड लगाहुआ थां। भइया नें दिखाते हुए कहा.यही हमारा घऱ हैं.तूँ अपना समान बेडरूम मे डाल दे.अब सें वोँ तेरारूम हौ गय़ा.मे यहा बाहर् वालेबेड पऱ सो जाऊँगा.तुम्हे पूरी प्राइवसी रहेगी.मैने मन हि मन मे कहा प्राइवसी कि किसको फ़िकर हैं.तुम् भि इसी कमरे मे आँ जाओ पब्लिक प्रॉपर्टी बनादो.
फिन अपने रण्डीपना पऱ स्वयं हि हसी आँ गई.मे भि केसे केसे ख्याल रखती हूं.थोड़ी देरबाद भइया कॉलेज केँ लिए निकल गय़ा.मे घऱ केँ काम मे मसरूफ़ हौ गई.अकेला लड़काघऱ कों जंगलबना देता हैं.खैर मैने पूरेघऱ कि सॉफ सफाईकर दि.सारा समान अपने ठिकाने पर्र जमा दिया.खानां बनाकर भइया कां इंतेज़ार करने लगी.देर रात वोँ घऱआया औऱ उसने मुझे अपने कॉलेज केँ कंप्यूटर साइन्स कि डिग्री कोर्सस कां अप्लिकेशन फार्म दिखाए.बोले लेँ इसेभर लेना.कल तेरा अड्मिशन हौ जाएगा.औऱ कल सें हि क्लास भि शुरुआत होँ जाएगी.मैने कहा.इतनी जल्द भइया.मे तोँ सोचरही थि अड्मिशन केँ कुछदिन बाद क्लास शुरुआत होगी.
भइयाइस पऱ हँसते हुए बोले.अर्रे अड्मिशन्स तौ क्लोज़ हौ गये थें.मैने प्रोफेसर सें बातकर ज़बरदस्ती अड्मिशन कराया हैं तेरा.मैने उठकर भइया कों गलेलगा लिया.ओह थॅंकयो भइया.भइया नें हँसते हुए कहा.मुझे भि खानां बनाने वाली कि ज़रूरत थि.अड्मिशन तौ मे केसे भि करवा लेता.हम् दोनो हँसने लगे.मैने उसकी छाती पर्र प्रेम सें एक् मुक्का मारा औऱ कहा.जाओ मे नहीं बोलती तुमसे.मे कोई खानां बनाने आई हूं.फिन भइया नें प्यारा सें मेरा माथाचूम लिया औऱ बोले.हि बन्नो मेरी गुड़िया.तेरा अगरदिल नहीं हैं तोँ मतबना खानां.मेरी गुड़िया सिर्फ़ आराम करेगी.भइया केँ इस प्रेम भरे चुंबन सें पूरे शरीर मे सनसनी दौर गई.मुझे नहींपता थां कि उसने क्याँ सोचकर मेरा माथा चूमा थां.मे तोँ मर्द केँ शरीर कि प्यासी थि.हाथ लगते हि लहरा गई.मगर भइया नें फिन छोड़ दिया.आसमान सें ज़मीन पऱ आँ गई.
खानां खाने केँ बाद मे सोनेचली गई। ट्रेन कां सफ़र औऱ दिनभर काम करने केँ कारण थकान थि.जल्द हि आँखलग गई.सुभह आँख खुली तोँ जल्द जल्द तैय्यर होने लगी.कपड़े पहनते वक्त पेशोपस मे थि.नक़ाब पहनु याँ नहीं.फिन सोचाचलो भइया सें.पूछ लेती हूं.उसने कहा.यहा इसकीकोई पाबंदी नहीं हैं.कोई नहीं पहनता.फिन यहाकौन सि अम्मी कि सहेलियाँ तेरी जासूसी करने वाली हैं.जोँ मर्ज़ी आए वोँ पहन लेँ.फिन मैने सलवार कमीज़ पहन ली.काले रंग कि.जिसमे मेरा सफ़ेद खूबसूरती औऱ निखार गय़ा.भइया भि मुझेदेख कर मुस्कुरा दिए औऱ कहा.ताबीज़ बाँध लें नज़रलग जाएगी.बहोत प्यारी लगरही हैं.मे हँसते हुए उनके बाइक पर्र पीछेबैठ गई औऱ उसकीपीठ पर्र एक् मुक्का हल्के सें जमा दिया। कॉलेज मे अड्मिशन लेने केँ बाद क्लास शुरुआत होँ गये। बिज़ी रहने केँ कारण ज़यादा कुछ नोटीस करने कां मौका हि नहीं मिला.
फिन हम् लोगो कां यही रूटीन बन गय़ा कॉलेज जानां 3 बजे केँ आसपास घऱ वापस आनां.धीरे-धीरे धीरे-धीरे मे सेट्ल होँ गई.नईनई सहेलियाँ मिल गई.कों-एजुकेशन वाले कॉलेज मे लड़को कि नज़रो कि दहक भि मुझे महसूस होने लगी.पैसे वालो कां कॉलेज थां। अपनी निगहों कि तपिश सें जलाने वालो कि कमी नहीं थि.जायदातर कि नज़रे मेरी चूचियों औऱ चूतड़ों केँ उपर हि जमी रहती थि.क्लास नहीं होने पऱ.दोस्तो केँ संगगॅप सॅप करतेहुए समय गुजर जाता थां। कुच्छेक केँ बॉय फ्रेंड भि थें.मे भि एक् बॉय फ्रेंड बनाने कि ख्वाहिशमंद थि.
जब सें इस बड़ेशहर मे आई थि.बिज़ी होने केँ वज़ह सें.बुर औऱ लन्ड केँ बारे मे सोचने कां मौका हि नहीं मिला थां.घऱ पऱ तौ अम्मी अब्बू औऱ मामू कि हरकतों कि जासूसी करने कि वज़ह सें हरसमय दिल मे अपनी प्यारी सि बुर कों चुदवाने केँ ख़याल मे डूबी रहती थि.वही जिन्न एक् दफ़ाफिन मेरे अंदर कुलबुलाने लगा.जब सेट्ल हौ गई तौ फिन सें बुर मे कीड़ों नें रेंगना शुरुआत कर दिया.शहर कि आज़ादी नें सुलगते जज़्बातो कों हवा दि.किसी मर्द केँ बाहों मे समा जाने कि ज़रूरत बड़ी शिद्दत केँ संग महसूस होने लगी.कॉलेज केँ लड़को कों देख-देख कर शरीर कि आग औऱ ज़यादा भड़क जाती थि.
उनके अंडरवेर मे कसे लन्ड केँ बारे मे सोचसोच बुर पानी छोड़ने लगती.सपने मे एक् आध लड़को कां लन्ड भि अपनी नीचे कि सहेली मे पायबस्त करवा लिया.पर्र कहते हैं थूक चाटने सें प्यास नहीं भुजती.सपने मे पिलवाने सें चूत कि आग तोँ भुजने सें रही.कई दफ़ा रातो कों फ्रिड्ज मे सें बरफ कां टुकड़ा निकलकर नीचे कि गुलाबी छेद मे डाल लेती थि.मगर इस सें आग औऱ भड़क जाती थि.निगोरी चूत मे ऐसी खुजली मची थि कि बिना सख़्त लन्ड केँ अब शायद सकूँ नहीं मिलने वाला थां.
कॉलेज मे मेरी सबसे प्यारी सहेली फ़रज़ाना औऱ तबस्सुम थि.दोनो वैसे तोँ मेरे सें उमर मे दोसाल बड़ी थि मगर हम् तीनो मे खूब बनती थि.वोँ भि मेरी हि तरह मस्त.जवानी केँ गुरूर मे उपर सें नीचे तक सारॉबार थि.हम् तीनोआपस मे हरतरह कि बाते करते थें.मे उनको प्रेम सें फर्रू औऱ तब्बू कहकर बुलाती थि.हम् तीनोआपस मे लड़को केँ बारे मे बहोत सारी बाते करते थें.तब्बू बड़ाखुल कर बताती थि.उसे चुदाई औऱ चुदवाने केँ बारे मे बहोत कुछपता थां.मे भि जानती थि.अम्मी कि जासूसी करने कि वजह सें तजुर्बेकार होँ गई थि.मगर फ़रज़ाना जायदातर इन बातो केँ बीच मे चुप रहती.हमारी बातो पऱ हस्ती औऱ मजा लेती.मगर कभी स्वयं सें उसनेकोई गंदीबात नहीं कि.
मगर तब्बू कुछऐसी बाते बतलती जोँ वहीबता सकता हैं जिसने लन्ड लें लिया हौ.वैसे तोँ हमेपता थां कि उसकीदो तीन लड़को केँ संग दोस्ती हैं मगर.फिन आरामसे उसने स्वयं हि बता दिया कि केसे औऱ किसकिस केँ संग उसने चुदाई कां मजा लिया हैं.फिन क्याँ थां हम् हररोज उसकेसंग उसकी रंगीनियों कि नयेनये किससे सुनती थि। कुछ दिनों बाद अचानक सें तब्बासुम कां कॉलेज आनांबंद होँ गय़ा.किसी कों कुछपता नहीं थां.उसके घरवालो केँ संग हमारी कोईजान पहचान तौ थि नहीं.फिन एक् लड़की नें बताया कि.उसके अब्बा कां कही दूसरी स्थान ट्रान्स्फर होँ गय़ा हैं.
रंगीन सहेली केँ जाने केँ बाददो बेरंग सहेलियों कि बीच क्याँ बाते होती.मज़े कि बाते धीरे-धीरे धीरे-धीरे कम हौ गई थि। मे एक् बार फर्रू सें पुछा कि उसकाकोई बाय्फ्रेंड हैं क्याँ.तब उसने मुँह बिचकाया औऱ कहा.बाय्फ्रेंड कां झंझट मे नहीं पालती.वोँ साले तोँ जी कां जंजाल होते हैं.मुझे बड़ा ताज्जुब हुआ.मैने उसकाहाथ पकड़कर कहा.हि क्याँ बातकर रही हैं फर्रू जान.तूने तौ मेरादिल तोड़ दिया.मे तोँ सोचरही थि काश मेरे भि दोतीन बॉय फ्रेंड होते तब्बू केँ जैसे.फ़रज़ाना नें मेरेगाल पर्र प्रेम भरीचपत लगतेहुए कहा.रंडी बनेगी क्याँ.मैने उसकीकमर मे चिकोटी काटली औऱ कहा.हैं मेरीजान। बातो मे तौ हम् रंडियों कों भि मॅटकर देगी.औऱ हम् दोनो हँसने लगे.
फिन फर्रू नें बताया कि वोँ इनसभी चक्करो मे नहीं पड़ती.औऱ मुझे शराफ़त औऱ खानदानी लड़की होने कां लेक्चर पीला दिया.मैने मन हि मनगली दि साली कुतिया.शरिफजदी बनती हैं.बुर मे ढक्कन लगाकर घूमती रह जाएगी हरामखोर। फिन बातो कां रुख़ दूसरी तरफ मुड़ गय़ा.
कुछदिन केँ बाद एक् दिन हम् इंटरनेट कि प्रॅक्टिकल कररहे थें.क्लास ख़तम होँ चुका थां पऱ मे औऱ मेरी एक् क्लास मेट शबनम वैसे हि बैठे बातेकर रहे थें.बात घूमफिन कर लड़को औऱ फिन बाय्फरेंड्स पर्र आई तौ.शबनम नें कहा.रुक मे तुम्हारी तरफकुछ दिखती हू.फिन उसने एक् वेबसाइट खोलीउस पर्र बहोत सारी गंदी गंदी.तस्वीरे थि.लड़के औऱ लड़कियों कि.फिन उसनेकुछ क्लिक किया औऱ फिन एक् वीडियो चालू हौ गय़ा.उसमे एक् लड़की एक् लड़के कां लन्ड चूसरही थि.मेरा तोँ लज्जा सें बुराहाल होँ रहा थां.दर लगरहा थां कहीकोई आँ नां जाए.पर्र धड़कते दिल सें मे वोँ वीडियो भि देखरही थि.लड़का लड़की क्याँ बातेकर रहे थें यह तौ नहीं पता.मगर लड़की कां चेहरा कुछ जानां पहचाना सां लगा.
आँखेनचा नचाकर खूब प्रेम सें लन्ड चूसरही थि.करीब-करीब दो मिनिट कां वीडियो थां.जब फिल्म ख़तम हौ गय़ा तौ शबनम नें पुछा क्यूं समझ मे आया.मे सन्नरह गई थि। बेशखता मेरे मुँह सें गलिया निकालने लगी.हि अल्लाह कामिनी.तब्बासुम इतनी बेशरम होगी मुझेपता नहीं थां.हरामजादी नें ऐसा क्यूं किया। अल्लाह शपथजिस दिनमिल गई कुतिया सें पुच्हूँगी अवश्य कि.अपनी तस्वीर क्यूं बनवाई.साली कों बदनामी कां दर नहीं लगा.इतनी गंदी वीडियो बनवाकर इंटरनेट पऱ डाल दि.किसी कों पताचल गय़ा कि मे ऐसी बेशरम कि सहेली थि.मे अभि औऱ कुछ बोलती इसके पहले हि शबनम नें मुझे रोकते हुए कहा.मेरी जान, उसने नहीं बनाईयह तस्वीर। उसके बाय्फ्रेंड नें बनाई.
हैं मारजवा! मुए नें ऐसे क्यूं किया। शबनम नें समझाया यह दुनिया बड़ी हरामी.यह जोँ बाय्फ्रेंड कां चक्कर हैं बड़ा ख़तरनाक हैं.अगर दिलो-जान सें मुहाबत करने वालामिल जाए तोँ ठीक.कमीना औऱ बेमूर्रोवत निकला तोँ फिन लड़की बर्बाद.तब्बासुम बेचारी ज़ज्बात औऱ शरीर कि आग कि रौ मे हरमियों केँ चक्कर मे पऱ गई.साले नें अपनेफोन सें तस्वीर बनाकर अपने दोस्तो केँ बीच बाँट दि.उन्ही मे सें किसी नें इंटरनेट पऱ डाल दिया.तभी तौ शहर छोड़कर जानां पड़ा बेचारी कों.मैने तोँ सपने मे भि नहीं सोचा थां कि लड़के इतने हरामी होते हैं कि जिसके संगमजा करे.उसी कों बर्बाद कर दे.लन्ड कां नशा एक् लम्हा मे हि उतार गय़ा.मैने सुना थां कि लड़के तोँ बुर केँ पिस्सू होते हैं.चूत केँ लिए गुलामी करने लगते हैं.पर्र अबसमझ मे आँ गय़ा कि मजा ख़तम होने केँ बाद साले हरामीपाने पऱ भि उतारआते हैं.
मैनेसभी कुछ फर्रू बतलाया तौ उसने मुँह बिचका कर कहा.मैने तौ पहले सें कहती थि यहसभी चक्कर बेकार हैं.कौन कब धोखादे जाए इसकाकोई भरोसा नहीं.फिन प्रेग्नेंट होँ जाने कां ख़तरा भि होता हैं.तौ यूँ कहिए कि बाय्फ्रेंड बनाने कां सरूर मेरेसिर सें उतार गय़ा.फर्रू कि तरहअब मे भि शरीफबन गई थि.एक् जमाना थां जब मे औऱ तब्बू मिल कर.लौंडों कों लन्ड कि लंबाई चौरई कां डिस्कशन करते थें.केसे सुपाड़े वाला लन्ड कितनी देर तक चोद सकता हैं.कुछ लड़को कां लन्ड टेढ़ा होता हैं.वोँ कितना मजा देता हैं.मोटे सुपाड़े वाला कितना मजा देता होगा।
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