मामा भांजी के चुदाई के कारनामे - Sex Story – New Episode
लेखिका:-रिशुकुमारी
आदरणीय पाठको, ये मेरी पहली सच्ची सेक्सी स्टोरी हैं। अभि मेरी उम्र 21 साल हैं, मे देखने मे बहुत आकर्षक हूं। वैसे तौ मे सांवली औऱ दुबली हूं पर्र चेहरा आकर्षक हैं। मेरीकमर पतली हैं, पऱ चूतड़ चौड़े हें। औऱ चूचियाँ आम केँ जैसी नुकीली हें।
मेरीये सेक्सी कहानी सन 2015 कि हैं। उस वक़्त विद्यालय मे पढ़ती थि। ऐसे तोँ मे राजशर्मा स्टोरीज़.कॉम 2014 सें पढ़ती आँ रही हूं। मुझेआर एसएस केँ बारे मे मेरी एक् सहेली सें पताचला थां क्यूंकि उसने अपने भइया केँ फोन पऱ आरएसएस साइट खुली हुईँ देखली थि, तोँ वोँ भि पढ़ने लगी थि। इसलिये मुझे भि चुदाई कि जानकारी टाइम सें पहले होँ गई थि। जब मे विद्यालय कि बड़ी कक्षा मे गई, तौ मेरे एक् दूर केँ रिश्ते केँ मामाजी जिनका नाम चिंटू थां, मुझे टयूशन पढ़ाने आते थें। वोँ हम् लोगों केँ घऱ केँ पास हि रहते थें। वोँ स्वयं भि कम्पटीशन कि तैयारी कररहे थें, संग हि वोँ टयूशन भि पढ़ाते थें।
वैसे तोँ वोँ भि सांवले थें, मगर लंबे औऱ आकर्षक थें। उनका चौड़ा सीना होने केँ वजह सें मुझे वोँ बहोत हि हैंडसम दिखते थें। उनकाघऱ पास मे हि होने कि वजह सें वोँ मुझे पढ़ाने सबसेअंत मे रात कों 8 बजेआते थें। उस वक़्त चिंटू मामाजी एक् लोवर औऱ टी-शर्ट पहनकर आते थें।
मुझे मामाजी अपनी हि साइड मे बैठाकर पढ़ाते थें। पढ़ते वक्त मे भि घऱ मे हल्के औऱ ढीले कपड़े पहनती थि ताकि मेरी नींबू जैसी चूचियाँ मामाजी कों दिख जाएं क्योंकि मे मामाजी कों बहोत पसन्द करती थि।
मामाजी मुझे स्टडी रूम मे पढ़ाते थें इसलिये वहा जल्दकोई घऱ केँ सदस्य नहि आता थां। मेरेघऱ मे मात्र 4 सदस्य रहते हें। माँ-बापू, छोटा भइया औऱ मे।
एक् दिन कि बात हैं। वोँ मुझे पढ़ारहे थें औऱ मे झुकी हुई पुस्तक कों देखरही थि। अचानक सें मैंने सर उठाया तोँ मैंने देखा मामाजी मेरी चूचियाँ देखरहे थें। हम् दोनों कि नज़रें टकराईं तौ मामाजी घबरागए औऱ मे भि शर्मा गई।
अब मेरामन मचलने लगा, मे मुस्कुरा दि तौ मामाजी जी भि मुस्कुरा दिए।
एक् तरह सें हम् दोनों नें एक्-दूसरे कि चाहत कों समझ लिया थां।
उसकेबाद ये सिलसिला चलतारहा। मे भि मामाजी कों छेड़ने लगी औऱ मामाजी भि निडर होकरमजा लेनेलगे थें। कभी-कभी तौ वोँ मुझे साइड सें अपने बाजू सें मेरी चूचियाँ कों छेड़ देते थें। मे भि यही चाहती थि औऱ मुझेमजा भि मिल जाता थां।
बोर्ड केँ एग्जाम केँ वजह सें मुझे कहीं किसी समारोह मे जाने सें मना किया गय़ा थां। मेरे माँ-पिताजी मेरे मामाजी कों बहोत हि मानते थें औऱ उन पऱ बहोत भरोसा भि करते थें, चाहे वोँ दूर केँ रिश्ते मे हि क्यूं नाँ आतेहों, उन्हें सभीकुछ बताते थें।
कुछ हि दिनबाद मेरी मौसी कि बेटी केँ विवाह थि तौ मेरी माँ-बापू औऱ भइया कों 2 दिन केँ लिए मौसी केँ घऱ जानां थां। पिताजी नें मामाजी कों हि मेरी देख-रेख कि ज़िम्मेवारी दि औऱ बोले- तुम् मेरे हि घऱ केँ बाहर् वाले कमरे मे दोदिन सो जानां।
येबात सुनकर मुझे भि गुदगुदी सि होनेलगी। जब मां-पिताजी कों जाने कों 5 दिन हि बचे थें, अचानक सें मामाजी नें मुझे साइंस कां प्रजनन कां विषय पढ़ाने लगे। पहले तौ मुझे इसके बारे मे कुछपता नहि थां, मगर आहिस्ता मुझे रूचिआने लगी औऱ मे जानबूझ कर अनजान बननेलगी, मे मामाजी जी सें कुछ भि नहि समझने कि नाटक करनेलगी।
घऱ वालों केँ जाने सें 2 दिन पहले मामाजी कुछ वीडियो लेकरआए औऱ मुझसे बोले- मेरेफोन मे कुछ वीडियो हें, उसेदेख कर तुम्हें यह चैप्टर समझ आँ जाएगा। मामाजी नें सारे वीडियो मेरेफोन मे सेंडकर दिए औऱ समझाने केँ लिए एक् वीडियो चलाया।
उस वीडियो मे दो जानवर सेक्स कररहे थें। उसकेबाद केँ वीडियो चलते हि मैंने आँखबंद करलीं औऱ चेहरे कों अपनेहाथ सें ढक लिया।
मामाजी नें ज़बरदस्ती मेरेहाथ हटादिए औऱ चुदाई देखने कि ज़िद करनेलगे।
मे देखने लगी। मैंने देखा कि एक् कमसिन लड़की एक् बड़ी उम्र केँ व्यक्ति सें सेक्स कररही थि। पहले तौ वोँ लड़की व्यक्ति कि लन्ड चूसरही थि। फिन मामाजी नें वीडियो कों आगे बढ़ा दिया। तौ देखा कि वोँ लड़की 12 सें 15 cm लम्बे लन्ड कों आसानी सें बुर मे लेँ रही हैं।
फिन मामाजी नें वीडियो बंदकर दिया, अचानक सें मेरी नज़र मामाजी केँ लोवर पऱ गई। मैंने देखा लोवर केँ अन्दर सें मामाजी कां लन्ड तन गय़ा हैं। औऱ उनका लन्ड बाहर् निकलने कों बेताब लगरहा थां।
मामाजी बोले- मे जारहा हूं, आज कि पढ़ाई ख़त्म। कलआकर पढ़ा दूँगा।
मैंने भि मज़ाक मे बोल दिया- आप् बाहर् केसे जाएँगे?
मामाजी नें पूछा- क्यूं?
तौ मे बोल दिया- आपका तौ कुछ खड़ा हैं।
मामाजी शर्मा गए औऱ समझ भि गए कि मे भि कुछ चाहती हूं। देररात पढ़ाई करने केँ बाद मे स्टडी रूम मे हि सो जाती थि। उसरात मे ठीक सें सो नहि पाई।
पहले तोँ मामाजी कां दिएहुए सारे वीडियो देखे। चुदाई केँ वीडियो देखते हि देखते मेरीचुत गीली होँ गई थि। फिन मैंने मामाजी कां खड़ा लन्ड याद करके सारीरात बिताई।
मजेदार कहानियाँ हें मजा आँ गय़ा तुसी ग्रेट होँ सलिल भइया
मामा भांजी के चुदाई के कारनामे - Sex Story – New Episode
फिन वोँ दिन आँ गय़ा। जबसब मौसी कि बेटी केँ विवाह मे चलेगए। दिन मे मे घऱ मे अकेली थि, मुझेऐसा लगरहा थां कि आजरात कुछ तोँ अलग सि होगी इसलिये मैंने भि जल्द सें खानां बना लिया औऱ 8 बजने कि इंतजार करनेलगी।
फिन अचानक सें डोरबेल बजी, मैंने दरवाजा खोला तौ देखा मामाजी हाफ़ पेंट औऱ टी-शर्ट मे आए हें। उनका पेंट तोँ आधी जाँघ तक कां हि थां।
मामाजी मुझे पढ़ाने लगे, पढ़ाई समाप्त होने केँ बाद हम् लोगों नें खानां खाया। अब मैंने भि कपड़े बदलकर शॉर्ट्स औऱ टॉपपहन लिया। हम् दोनों टेलीविज़न देखने लगे। दोनों एक् हि बेड पे बैठकर टेलीविज़न देखरहे थें।
मामाजी कों टेलीविज़न देख्ना पसन्द नहि थां इसलिये उन्होंने मेरे पांव केँ तरफसर कर लिया ताकि उन्हें टेलीविज़न नाँ दिखे। संग हि मुझे भि उनकेफोन कां स्क्रीन नां दिखे। वोँ फोन पऱ हेडफोन लगा केँ कुछ देखने लगे।
मेरासर मामाजी केँ पांव कि तरफ थां औऱ उनकेपेर मेरेसर कि तरफ थें। मामाजी फोन मे बिज़ी होँ गए औऱ मे भि टेलीविज़न देखते-देखते सोने कां नाटक करनेलगी। मगर मे थोड़ी सि आँखखोल करसभी कुछदेख रही थि। मामाजी कों पता नहि चलरहा थां कि मे जागी हूं औऱ सभीकुछ देखरही हूं।
जब मामाजी कों लगा कि मे सो चुकी हूं। उन्हें पता थां कि मे बहोत गहरी नींद मे सोती हूं औऱ मुझे नींद मे कुछपता नहि चलता हैं।
अचानक सें मैंने देखा कि मामाजी थोड़ी-थोड़ी देर मे अपना लन्ड दबारहे हें, कुछदेर बाद वोँ अपना लन्ड मसलने लगे। ये देखकर मुझे भि गुदगुदी होनेलगी थि। देखते हि देखते मामाजी नें अपनाआधा लन्ड हाफ़ पेंट केँ नीचे सें निकाल दिया औऱ बार-बार मुझेदेख कर लन्ड कों सहलारहे थें। बीच-बीच मे वोँ अपने लन्ड पर्र थूक भि लगारहे थें।
मामाजी कां लन्ड एकदम काला सां औऱ लंबा सां करीब-करीब औऱ बहुत मोटा सां थां। इससमय उनका लन्ड बिल्कुल रॉड जैसादिख रहा थां।
येदेख कर मुझेऐसे लगरहा थां जैसे मेरी बुर मे हज़ारों चींटी काटरही हों। मगर मे चुदास बर्दाश्त करके लन्ड कों देखती रही। फिन मामाजी नें धीरे-धीरे सें मेरी चूचियों मे अपना पांवसटा दिया।
मे अन्दर हि अन्दर तड़पने लगी। पऱ मेरी मजबूरी थि। मे अपनीतरफ सें पहलेकुछ नहि कर सकती थें, धीरे धीरे मामाजी मेरी चूचियों कों पांव सें जोर सें मसलने लगे।
मैंने हिम्मत करके करवटबदल ली, तोँ कुछदेर केँ लिए मामाजी सहम सें गए। उन्हें लगा कि जैसे मुझेसभी पताचल गय़ा होँ।
मामाजी केँ लन्ड सें चुदने कि चाहतबढ़ गई थि मगर मे खुल नहि पारही थि।
मे भि चालाक थि, मे भि पहले हि अन्तर्वासना पे सभीकुछ पढ़ चुकी थि। मैंने करवट लेकर अपनी गांड मामाजी केँ चेहरे कि तरफकर दि औऱ अपनापेर भि मोड़कर गांड थोडा बाहर् कों निकाल दि।
मामाजी कों लगा कि मे फिन सें सो गई हूं। थोड़ी देरबाद मुझेलगा कि मामाजी मेरे शॉर्ट्स कों खींचरहे हें। मैंने जानबूझ कां ढीला शॉर्ट्स पहना थां ताकि आसानी सें खुलजाए।
धीरे-धीरे सें मामाजी नें मेरा शॉर्ट्स निकाल दिया। अब मे पेंटी मे थि औऱ चुपचाप सें करवट केँ बल लेटी थि।
फिन मामाजी नें भि अपना पेंट निकाल दिया औऱ मेरे पीछे आँ करलेट गए। थोड़ी देरबाद मुझे एहसास हुआ कि मेरी गांड मे पेंटी केँ ऊपर सें मामाजी लन्ड रगड़रहे हें।
मे इंतजार मे थि कि कब खुला लन्ड मामाजी मेरी पेंटी केँ अन्दर घुसादें। थोड़ी हि देरबाद मामाजी नें मेरी पेंटी कों थोडा पीछे खींचकर लन्ड दोनों चूतड़ों केँ बीच गांड केँ छेद मे सटा दिया औऱ थोड़ी देर केँ लिए शांत होँ गए। मामाजी केँ लन्ड कां स्पर्श पाकर मुझेलग रहा थां जैसे मेरी गांड केँ छेद पर्र किसी नें गर्मरॉड रख दि होँ।
मे बेचैन थि कि कब मामाजी लन्ड सें मेरी बुर सहलाएं, मेरी बुर पूरीतरह सें गीली होँ चुकी थि।
थोड़ी देर मे मामाजी नें गांड केँ पीछे सें मेरी पेंटी नीचीकर दि औऱ गांड केँ पीछे सें हि लन्ड सें मेरी बुर कों सहलाने लगे। कुछ देर मे जब उनका लन्ड मेरी बुर केँ पानी सें गीला होँ गय़ा, तौ उनको मालूम हौ गय़ा कि मे सोई नहि हूं।
मामाजी यहचैक करने केँ लिए मेरेटॉप केँ अन्दर हाथडाल कर मेरी चूचियां दबाने लगे, तोँ मुझसे बर्दाश्त नहि हुआ औऱ मे जोर-शोर सें गर्म साँसें लेनेलगी।
मामाजी नें पूछा- तूँ जागी हैं?
तौ मे शर्मा करहाँ बोलउठी।
अब मामाजी नें आव देखा नां ताव। मेरेऊपर चढ़कर ज़ोर-ज़ोर सें मेरे होंठ चूसने लगे। मामाजी ऐसेचूस रहे थें जैसे मेरे होंठखा जाएँगे। संग हि संग मामाजी मेरी बुर भि ज़ोर-ज़ोर सें सहलाने लगे।
मेरी बुर इतनी छोटी थि कि सिर्फ मामाजी कां एक् हि उंगली सें सहलापा रहे थें।
मे बार-बार मामाजी सें बोलरही थि- अह। औऱ जोर सें बुर मसलिए, बुर फाड़ दीजिए।
मामाजी रुकगए थें औऱ मेरे लन्ड देखने सें पहले हि उन्होंने लन्ड कों अंडरवियर मे छुपा लिया ताकि मे मोटा लन्ड देखकर डर नाँ जाऊं याँ फिन मामाजी जल्दीबाजी मे झड़ नाँ जाएं।
बहोत गर्म स्टोरी हैं..अगले भाग कां इंतजार रहेगा..
मामा भांजी के चुदाई के कारनामे - Sex Story – New Episode
मामाजी नें फिन मेराटॉप उतार दिया। अब मे सिर्फ पेंटी औऱ स्पोर्ट ब्रा मे थि। मेरी चूचियां छोटी-छोटी थीं। इसलिये मे स्पोर्ट ब्रा पहनती थि। कभी-कभी मेरी माँ नहाते समय मुझे बाथरूम बुलाती हें। तोँ मां नंगी हि दिख जाती हें।
मां कि चूचियां अभि भि छोटी-छोटी औऱ खड़ी-खड़ी दिखती हें औऱ माँ कि चुत तोँ मेरीचुत सें बहोत मोटी हैं। शायदउस मे मामाजी कां लन्ड आसानी सें घुस जाता।
मेरी स्पोर्ट ब्रा मे मेरी चूचियां नुकीली दिखरही थीं.यह मामाजी कों बर्दाश्त नहि हुआ। वोँ मेरी चूचियां ब्रा केँ ऊपर सें मसलने लगे। फिन मुझे ब्रा औऱ पेंटी उतारने कों बोले।
मैंने मनाकर दिया औऱ बोलीं- मुझे लज्जा आती हैं। पहले लाइटऑफ करो।
वोँ नहि माने औऱ ज़बरदस्ती मेरी ब्रा औऱ पेंटी कों उतार दिया। अब मामाजी मुझे लेटाकर मेरी चूचियां कों चूसने लगे। मेरी छोटी सें चूचियां मामाजी केँ मुँह मे समागईं। मामाजी जोर-शोर सें मेरी चूचियां चूसने लगे औऱ अपनीओर खींचने लगे। मुझेऐसा लगरहा थां कि मामाजी मेरे नीबू कच्चे हि खा जाएँगे। करीबदस मिनट तक मामाजी बारी-बारी सें दोनों चूचियां नोंचते रहे।
अब तक मेरी बुर फिन सें गरम पानी छोड़ने लगी थि। मामाजी नें मेरी गांड केँ नीचे तकिया रखकर मेरे दोनों पांव फैलादिए औऱ मेरी बुर कि गर्म मलाई चाटने लगे। मामाजी नें चुत चाट-चाट कर इसकी गर्मी कों ठंडाकर दिया। फिन मेरी बुर कां दाने कों अपने मुँह मे लेकर अन्दर कि तरफ खींचते हुए चूसने लगे। मेरी बुर मे छोटे-छोटे गोल्डन बाल थें। मामाजी जी मेरी झांटों कों अपने मुँह मे लेकर खींचने लगे। मे तड़पने लगी। उम्म्ह… आहह-आहह… हय…याह… मेरे मुँह सें सिसकारियाँ निकलने लगीं।
अब तक मेरी लज्जा-हया सभी समाप्त होँ चुकी थि। मे बोलउठी- आपने तोँ सभीकुछ कर लिया.अब आप् भि अपना दिखा दीजिए।
तोँ मामाजी हंसकर बोले- क्याँ दिखादूँ?
वोँ मेरे मुँह सें लन्ड शब्द सुनना चाहरहे थें। पऱ मे बोल नहि पारही थि। फिन भि मैंने हिम्मत करके लन्ड बोल दिया।
मामाजी बोले- स्वयं सें मेरे अंडरवियर सें लन्ड निकाल लो।
यहकह कर मामाजी जी नें मेराहाथ पकड़कर अंडरवियर पर्र रख दिया। मे अंडरवियर केँ ऊपर सें लन्ड कों दबाने लगी, मामाजी कां लन्ड गरम-गरम सां लगरहा थां। उनका लन्ड बाहर् निकलने केँ लिए मानो उफानमार रहा थां।
मैंने हिम्मत करके मामाजी कां अंडरवियर नीचे खींच दिया। अगले हि समय मामाजी कां विशाल सां मोटा लन्ड मेरी सामने फन फैलाए खड़ा थां। मे तौ डर गई कि यह मूसल मेरी बुर मे केसे घुसेगा।
मामाजी कां लन्ड करीबफूल कर 8″ लंबा औऱ कमकम सें खीरे जितना गोलाई लिएहुए थां। उनका लन्ड लोहे जैसा सख्त सीधा औऱ काला थां। लन्ड थोडा टेढ़ा, सुपारा गरम औऱ पिंक थां। मामाजी नें अपना लन्ड मेरीहाथ मे दे दिया औऱ आगे-पीछे करने केँ लिए बोले। मामाजी कां लन्ड इतना मोटा थां कि मेरेहाथ मे नहि आँ रहा थां।
फिन मामाजी नें मुझे लन्ड चूसने कों बोला, मैंने मनाकर दिया तोँ मामाजी नें ज़बरदस्ती मेरे मुँह मे लन्ड डाल दिया। मेरे मुँह मे मामाजी केँ लन्ड कां सिर्फ़ टोपा हि जापारहा थां। मे सिर्फ़ पिंक वाला हिस्सा हि चूसपा रही थि।
मामाजी केँ लन्ड पऱ थोडा सां पानी आँ गय़ा थां। पहले मुझे अजीब सां स्वाद लगा, फिन मामाजी कां लन्ड थोडा नमकीन औऱ खट्टा सां लगनेलगा। कुछ पलोंबाद हि मुझे मामाजी कां लन्ड चूसने मे मजाआने लगा। मे जोर-शोर सें लन्ड चूसने लगी।
अचानक सें मामाजी नें लन्ड कों मेरे मुँह सें खींच लिया औऱ बोले-अब मत चूसो नहि तौ तुम्हारे मुँह मे हि झड़ जाऊंगा।
मगर मे चाहती थि कि मामाजी मेरे मुँह मे हि झड़ जाएं ताकि लन्ड शांत होँ जाए। मे पहले हि अन्तर्वासना मे पढ़ चुकी थि बुर मे लन्ड घुसते समय बहोत दर्द होता थां औऱ मुझे पहले नहि पता थां कि मामाजी कां लन्ड इतना मोटा होगा। मे डर गई थि औऱ मे मामाजी सें चुदवाना नहि चाहती थि।
पर्र मामाजी कहां मानने वाले थें, उन्होंने मुझे मुँह केँ बल लेटा दिया औऱ वे अपना लन्ड मेरे दोनों चूतड़ों केँ बीच मे रखकर मेरेऊपर चढ़गए। मामाजी मेरेगले पऱ चूमने लगे औऱ धीरे धीरे अपने लन्ड कों आगे-पीछे करनेलगे। मामाजी कां लन्ड मेरे चूतड़ों केँ ऊपर रगड़ खानेलगा, मुझेमजा आनेलगा थां। थोड़ी देर मे मामाजी अपने लन्ड कों चूतड़ों केँ पीछे सें मेरीचुत मे सटाकर मेरेऊपर पोजीशन मे आँ गए औऱ लन्ड कों ऊपर-नीचे करनेलगे। मामाजी कां लन्ड मेरी बुर मे रगड़ खानेलगा। मेरी बुर फिन सें पानी सें भरनेलगी थि, मे मदहोश सि होनेलगी। मेरी मुँह सें सिसकारियाँ निकलने लगीं, गरम साँसें चलनेलगी थीं।
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