मेरी चालू बीवी completee - Indian sex story – New Episode
भाग 16
एक् ऐसा एहसास थां कि कोई उसको नंगी अवस्था मे ऐसे चुदाई करतेदेख रहा हैं…वाउ… दोस्तो… इसतरह केँ सेक्स नें यहा हमारे जिंदगी मे अचानक हि एक् नया मोड़ला दिया थां…सलोनी केँ बुर केँ पानी नें मेरे लण्ड कों औऱ भि जोश मे ला दिया थां…मगर आश्चय ये थां कि झड़ने केँ बाद भि सलोनी केँ जोश मे रत्ती भर भि कमी नहि आई थि…अब हम् खिड़की केँ बहुत निकट थें…अब हम् कुछ नहि बोलरहे थें क्योंकि हमारी आवाज़ वोँ सुन सकता थां…सलोनी मेरी किसी हरकत कां कोई विरोध नहि कररही थि…मैंने उसको खिड़की कि पास वाली स्लैब कों पर्र बैठा दिया…पर्र वोँ अचानक उतर गई… सलोनी- नीचे ठंडालग रहा हैं जान…मे- तोँ क्याँ हुआजान, आओ अभि खूबगरम कर दूंगा…मैंने उसको खिड़की कि ओर घुमाकर नीचेबैठ गय़ा औऱ उसके मखमली चूतड़ कों अपनी लम्बी जीभ सें चाटने लगा.अब सलोनी पूरी नंगी खिड़की कि ओर मुँह करके खड़ी थि… वोँ खिड़की केँ इतने निकट थि कि उसका एक् एक् अंग बाहर् वाले व्यक्ति कों दिखरहा होगा…मगर सलोनी कों इससभी केँ एहसास नें औऱ भि कामुक बना दिया थां… वोँ किसीबात कों मना नहि कररही थि.मेरी जीभ जैसे हि उसकी बुर वालेभाग पर्र पहुँची… वहा कि चिकनाई औऱ गर्माहट देख मे समझ गय़ा कि सलोनी बहोत रोमांचित हैं…मैंने पिछले 3 सालों मे एक् बार भि उसकेइस भाग मे इतनारस महसूस नहि किया थां…मैंने सोच लिया कि आज अपनीये चुदाई मे यहीं किचन मे हि पूरी करूँगा… औऱ बाहर् वाले अजनबी कां कोई ख्याल नहि करूँगा… चाहे वोँ पूरा देखे… याँ कुछ हौ…मे पीछे सें सलोनी केँ चूतड़ों कों चाटता हुआ उसके दोनों भागों कों हाथ सें खोल सलोनी कि गुलाबी दरार पर्र अपनीजीभ फिराते हुए उसके सुरमई छेद कों अपनीजीभ कि नोक सें कुरेदने लगा.‘आअह्ह्ह्हा… आआआआआ ह्ह्ह्ह्हा… आआआ…’ सलोनी नें जोर सें आहली… उसका मुँह पूरीतरह खिड़की कि तरफ थां.हम् खिड़की सें सिर्फ कुछ इन्च कि दूरी पऱ हि थें.सलोनी नें एक् हाथ स्लैब पऱ रखा थां औऱ दूसरे हाथ सें अपने बूब्ज़ कों मसलरही थि…मे अपनीजीभ कों उसकी बुर कि ओर लें जातेहुए मात्र येसोच रहा थां कि उस बेचारे कां क्याँ हाल हौ रहा होगा…उसको सलोनी कि मम्मों वोँ भि उसके द्वारा स्वयं मसलती हुइ नं जाने कैसीलग रही होंगी…औऱ इस वक़्त तौ उसको सलोनी कि बुर भि साफ़ दिखाई देरही होगी… वोँ भि मचलती हुइ… क्योंकि सलोनी लगातार अपनीकमर घुमारही थि…तभी मैंने अपनीजीभ उसकीरस सें भरी हुइ बुर मे घुसेड़ दि…सलोनी- आआआऔऊऊऊऊऊऊह… क्याँ करते होँ डॉलिंग.मैंने एक् औऱ काम किया…पता नहि आजइस सालेमन मे आईडिया भि कहां सें आँ रहे थें…मैंने सलोनी केँ दाएंपेर कों उठा अपनीगोद मे रख लिया… जिससे उसके दोनों पैरों मे अच्छा खासागैप बन गय़ा… उसकी बुर पीछे सें तोँ खुल गई… जिससे मेरीजीभ आसानी सें उसको छेड़ने लगी…मगर मे सोचरहा थां कि सामने सें उसकी बुर कितनी खिली हुई दिखरही होगी…कमाल तौ ये थां कि सलोनी कों पता थां कि वोँ अजनबी व्यक्ति ठीक उसके सामने खड़ा हैं… पऱ वोँ बिना किसी रूकावट केँ बुर चटवाते हुए सिसकारियाँ भररही थि…लगभग दस मिनट तक उसकी बुर कां सारारस चाटने केँ बाद मैंने फिन सें उठकर उसको चूमा औऱ उसका मुँह नीचे अपने लण्ड कि ओरकर दिया…बस एक् बार सलोनी नें अपनी आँखों केँ इशारे सें मना सां करतेहुए खिड़की ओर देखा…परन्तु जैसे हि मैंने उसकोफिन सें नीचे झुकाया, वोँ अपने घुटनों पऱ बैठ गई औऱ मेरे लण्ड कों अपने हाथों सें पकड़ अपनी गीलीजीभ बाहर् निकाल चाटने लगी…औऱ फ़िरकुछ हि देर मे लण्ड कों मुँह मे पूरा लेकर चूसने लगी.मे- अह्ह्ह्हा… आआआ…आआअ… ऊऊओ…आनंद लेतेहुए मैंने उसकीओर देखा तौ वोँ तिरछी नजरों सें खिड़की कि ओरदेख रही थि….!एक् तौ बला कि सुंदर, पूरा नंगाबदन वोँ भि सेक्सी तरीके सें लण्ड चूसते हुए… तिरछी नजर सें किसी अजनबी कों ढूंढते हुए वोँ क्याँ मस्तानी दिखरही थि…मैंने भि उसका अनुसरण करतेहुए उधर बिना किसी प्रतिक्रिया केँ खिड़की सें बाहर् कों देखा…अर्रर… अई… ईईईए…ये क्याँ… वोँ महाशय तोँ बिल्कुल खिड़की सें निकट खड़े थें… वोँ अब खिड़की सें बाहर् जाती रोशनी कि जद मे थें… तौ आसानी सें दिखगए… जरूर सलोनी कों भि नजर आँ गए होंगे… मगर उसने अपना कार्य लण्ड चुसाई मे कोई रुकावट नहि डाली…बल्कि मेरे लण्ड कों अपने हि थूक सें औऱ भि गीला किया औऱ भि मस्ती सें चूसने लगी… सेक्स उसकेसर चढ़कर बोलरहा थां…मे खड़ा थां तौ मुझेउस व्यक्ति कां निचला भाग हि दिखरहा थां… उसने अपना पजामा नीचे खिसकाया हुआ थां औऱ हाथ सें लण्ड कों मसलरहा थां याँ फिनमुठ माररहा थां.माँ गॉड…आज एक् अजनबी व्यक्ति मेरे सामने मेरी हि नंगी पत्नि कों देखमुठ माररहा हैं… औऱ उसकोदेख मेरे लण्ड भि लावा उगलने जैसा होँ गय़ा…मैंने जल्द सें उसके मुँह सें अपना लण्ड बाहर् खींच लिया औऱ अब चुदाई केँ बारे मे सोचने लगा कि केसे चोदूँ सलोनी कों कि हम् दोनों कों भि आनंदआये औऱ उसको भि, जोँ बेचारा बाहर् हाथ सें लगा हैं…हमारी ये चुदाई
शायद सबसे अधिक रोमांचित कर वाली औऱ मेरीअब तक कि सबसे बढ़िया चुदाई होने वाली थि.छुपकर औऱ छुपाकर नाँ जाने केसे-केसे चुदाई कि थि मगरइस तरह कि अपने हि घऱ पऱ अपनी हि सेक्सी पत्नि कों किचन मे पूरी नंगी करके एक् अजनबी मर्द केँ सामने लाइवशो करतेहुए इसतरह चोदना मुझे बहोत हि उत्तेजित कररहा थां…मैंने जल्द न् झरने केँ कारण गप्प कि आवाज़ केँ संग अपना लण्ड उसके मुँह सें निकाल लिया…सलोनी बड़े हि सेक्सी निगाहों सें मुझे देखती हुइ खड़ी होँ गई.उसके बाएंहाथ मे मेरा लण्ड अभि भि खेलरहा थां…उसने मेरे कों ऐसे देखा कि अब क्याँ…?
कथा जारी रहेगी.
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एपसोड 17
मैंने बाएंहाथ सें उसकी बुर कों दो उंगलियों सें बड़े प्रेम सें सहलाते हुए चोदने कां इशारा दिया…उसने मेरे लण्ड कों अपने रसीले हाथ सें आगे सें पीछे तक पूरे लण्ड पऱ फिराते हुए, अपनी बड़ी-बड़ी झील जैसी आँखों कों नचाया जैसेपूछ रही होँ कि
‘कहां औऱ केसे…?’
मैंने उसके होंठो पर्र एक् जोरदार चुम्मा लेतेहुए उसेकहा- जानआज एक् नया रोमांच करते हें क्यूं नाँ यहीं रसोई मे हि चुदाई करें…?
सलोनी- नहि जानू, चलो नां बेडरूम मे चलते हें, वहीं चोदना आप् अपनी जानू कों…मैंने फिन सें उसके होंठों कों अपने होंठों मे दबा लिया… वोँ लगातार मेरे लण्ड कों सहलाकर अपनी चुदाई कां इन्तजार कररही थि…मे-अरे नहि जान, यहीं चोदेंगे हम् आज तौ अपनी सलोनी कि नन्ही सि चूत कों…सलोनी- अच्छा ठीक हैं, फिन खिड़की बंदकर दो…यहा रोशनी हैं तौ कोई बाहर् सें देख सक्ता हैं नाँ…तभी हम् दोनों कों लगा जौ खिड़की केँ बहोत पास खड़ा थां… वोँ थोडा खिसककर पीछे कों होँ गय़ा.मुझे सलोनी केँ चेहरे पऱ एक् सेक्सी मुस्कराहट नजर आई…अब मैंने उसको स्लैब कि ओर इशारा किया…वा… सलोनी नें स्वयं चुदाई कां तरीका ढूंढ लिया थां। वैसे भि ये उसका पसन्दीदा तरीका थां…वोँ बिल्कुल खिड़की केँ पास हि स्लैब पर्र दोनों हाथ टिकाकर अपने सेक्सी चूतड़ों कों उठाकर झुककर खड़ी हौ होँ गई…उसका पिछला हिस्सा चीख-चीख करकहरहा थां कि आओ इनमें सें किसी भि छेद मे अपना लण्डडाल दो…बस मैंने कुछ नहि सोचा…औऱ उसकी पतलीकमर पऱ दोनों हाथ टिकाकर उसे दबाते हुए अपनातना हुआ लण्ड उसके पीछे सें चिपका दिया…औऱ मे खिड़की केँ बाहर् उस आदमी कों ढूंढ़ने कि कोशिश करनेलगा जौ शायद एक् साइड मे हि खड़ा थां…तभी सलोनी स्वयं हि अपने सीधेहाथ कों नीचे अपनी जांघो केँ बीच लें गई… औऱ थोडा सां झुककर मेरे लण्ड कों पकड़ अपने बुर केँ छेद केँ मुहाने पर्र रख अपनी उंगली केँ नाखून सें लण्ड कों दबाया…जोँ मेरेलिए धक्का लगाने कां संकेत थां… तभी मुझे वोँ जनाब भि दिख गए…वोँ बहोत मजे सें बिल्कुल कोने मे खड़े खिड़की कि जाली सें पूरा आनंद लें रहे थें… उसकीनजर मेरीओर नहि थि, वोँ सीधे सलोनी कि बुर कों बदस्तूर देखरहे थें…बस यही वोँ वक़्त थां जब मैंने अपनीकमर कों एक् झटका दिया…‘हाआप्प्प्प्प…’ कि आवाज़ केँ संग मेरे लण्ड कां सुपारा बुर मे चला गय़ा…सलोनी नें हल्की सि आह केँ संग अपने चूतड़ औऱ भि ज़्यादा पीछे कों उभार दिए…मैंने इसबार थोडा औऱ तेज धक्का लगाया औऱ पूरा लण्ड उसकी बुर मे समां गय़ा…सलोनी- अहा!अब मैंने सलोनी कि ओर देखा, साधारणतया वोँ बहोत तेजआह लेती हैं… मगरआज मात्र अहा.?ऐसा नहि कि दर्द केँ कारण वोँ ऐसा करती होँ… बल्कि उसको बेडरूम मे चुदाई केँ वक़्त सेक्सी आवाजें निकलने अच्छा लगता थां…औऱ वोँ ये भि अच्छी तरह जानती थि कि इसतरह कि आवाजों सें उसका दोस्त अधिक उत्तेजित होँ औऱ भि तेज धक्के लगाकर चुदाई करता हैं…मगर आज हल्की आवाज़ कां कारण वोँ व्यक्ति थां.मैंने देखा सलोनी बिनापलक झपकाए उसकोदेख रही हैं जोँ ऐसालग रहा थां कि बिल्कुल हमारे सामने बैठा हौ…वोँ खिड़की केँ कोने मे जाली सें चिपका थां… औऱ कमबख्त कि नजर पूरीतरह सलोनी कि बुर पऱ हि थि…उसने उसकी बुर मे मेरे लण्ड कों घुसते हुए पूरा साफ़ देखा होगा…पऱ मेरीनजर तौ सलोनी पऱ थि। नं जाने वोँ क्याँ सोचरही थि… उसकीनजर उस आदमी पर्र हि थि…मगर वोँ अपनाकोई अंग छुपाने कि कोई कोशिश नहि कररही थि… बल्कि औऱ भि ज़्यादा दिखारही थि…नां जानेये उसकी कैसी उत्तेजना थि…जोँ उसेयह सभी करने कों प्रेरित कररही थि.अब मैंने लयबद्ध तरीके सें उसकीकमर कों पकड़ धक्के लगाने शुरुआत कर दिए…‘आहह-आहह… हआआ… ओहूऊओ… ओह…अहा… ह्ह्ह्ह… ओह्ह… ह्ह्ह्ह…’हम् दोनों हि आवाज़ केँ संग चुदाई कररहे थें…औऱ वोँ अजनबी हमारे हर धक्के कां मज़ा लेँ रहा थां, मुझे पूरा यकीन थां कि वोँ जिस स्थान थां, उसको मेरा लण्ड बुर मे अंदर बाहर् जाता साफ़दिख रहा होगा…ये सोचकर मेरे धक्कों मे औऱ भि अधिकगति आँ गई औऱ सलोनी कि सिसकारियों मे भि…अहहआ… आआह…ओह… हय… ह्हह्ह… आअह… ह्ह्ह… आआअ…ऊओ… ओह्ह… ह्ह्ह…हम् पर्र तोँ इन आवाजों कां पूराअसर होँ रहा थां… पता नहि उस पऱ हौ रहा थां याँ नहि…5 मिनटबाद सलोनी नें स्वयं आसन बदलने कों कहा औऱ घूमकर स्लैब पऱ बैठ गई… उसने बड़े स्टाइल सें अपने दोनों पेर फ़ैला कर अपनी बुर कां मुँह मेरे लण्ड केँ स्वागत केँ लिएखोल दिया…मैंने उसकीरस टपकाती बुर कों हाथ सें सहला एक् बारजीभ सें चाटा…औऱ इसबार सामने सें उसकी बुर मे अपना लण्ड एक् हि झटके मे डाल दिया…आआआअह… ह्ह्ह्हाआआ आआ…ओहो… हौ… हौ… ह्हह्ह… अह्हा… हां…मगर इसतरह मुझेलगा कि उस बेचारे कों अब सिर्फ एक् साइड हि दिखरही थि…मैंने सलोनी कि दोनों टांगों केँ नीचेहाथ डाल उसको अपनीगोद मे लेँ लिया…हाँ… इससभी मे मैंने लण्ड एक् इंच भि बाहर् नहि आने दिया… औऱ अब सलोनी मेरीगोद मे लण्ड पऱ बैठी थि.मे उसकोऐसे हि पकड़े हुए खिड़की कि ओरघूम गय़ा.सलोनी मेरे सें चिपकी थि औऱ उसकीपीठ खिड़की कि ओर थि…अब वोँ व्यक्ति आसानी सें बुर मे लण्ड कों आता जातादेख सकता थां…औऱ मैंने अपनीकमर हिलनी शुरुआत कि। इसबार सलोनी भि मेरासंग देरही थि वोँ भि मेरे लण्ड पर्र कूदने लगी…अह्हा… ओह… ह्ह्ह्ह… अहह…आए… ह्ह्ह… ओह…ओह… ह्ह्ह…दोनों तरफ सें धक्के हम् दोनों हि झेल नहि पाये औऱ सलोनी नें मुझे जकड़ लिया…मे समझ गय़ा कि उसकाखेल समाप्त हौ गय़ा मेरा भि निकलने हि वाला थां…
कथा जारी रहेगी.
साथी बहोत हि उम्दा. बहोत हि उत्तेजना सें भरपूर हैं... अगलेभाग कि इंतजार मे
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बहोत हि मस्त औऱ लाजवाब एपसोड हें मित्र
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एपसोड 18
सलोनी मेरे सें चिपकी थि औऱ उसकीपीठ खिड़की कि ओर थि…अब वोँ आदमी आसानी सें बुर मे लण्ड कों आता जातादेख सकता थां…औऱ मैंने अपनीकमर हिलनी शुरुआत कि। इसबार सलोनी भि मेरासंग देरही थि वोँ भि मेरे लण्ड पऱ कूदने लगी…अह्हा… ओह… ह्ह्ह्ह… अहह…आए… ह्ह्ह… ओह…ओह… ह्ह्ह…दोनों तरफ सें धक्के हम् दोनों हि झेल नहि पाये औऱ सलोनी नें मुझे जकड़ लिया…मे समझ गय़ा कि उसकाखेल समाप्त होँ गय़ा मेरा भि निकलने हि वाला थां…मैंने उसकोफिन सें स्लैब पऱ टिका दिया औऱ अपना लण्ड बाहर् निकाल कर सारामाल उसकेपेट औऱ मम्मों पर्र गिरा दिया…हमने अभि सांस भि नहि ली थि कि तभी बाहर् सें किसीऔरत कि आवाज़ आई-अजी सुनते हौ कहां हौ…??आवाज़ कां असर जल्दी हुआ… वोँ अजनबी जल्द सें सामने वाले फ्लैट कि ओर लपका औऱ संग हि…‘श्ह्ह्ह्ह… ह्ह्ह्ह्ह्ह…’ कररहा थां जैसेउस स्त्री कों चुपकरा रहा होँ…औऱ सलोनी पूरीतरह खिड़की सें चिपकी थि। उसकोउस व्यक्ति केँ बारे मे जानने कि कुछ ज़्यादा हि उत्सुकता थि.उसको इसबात कां भि ख्याल नहि थां कि हम् रोशनी मे हें औऱ बाहर् वाले कों अंदर कां सभीदिख रहा होगा.सलोनी किस अवस्था मे थि ये तोँ आप् सब कों पता हि हैं…तभी सलोनी केँ मुख सें आवाज़ निकली- अरेयह तोँ अरविन्द आंटी थीं…मे- क्याआ…??सलोनी- जरूरयह अरविन्द अंकल हि होंगे… मैंने पहले भि उनकोकई बारइस स्थान घूमते औऱ स्मोक करते देखा हैं…स्लोनी कों पूरीतरह यकीन थां…अरविन्द अंकल एक् रिटायर्ड अफसर थें, वोँ 3 साल पहले सेल्स इंस्पेक्टर सें रिटायर हुए थें, अंकल औऱ आंटी दोनों हि यहा रहते थें.अंकल तौ 60 साल सें ऊपर केँ थें पऱ आंटी जिनको मे औऱ सलोनी भाभी हि कहकर बुलाते थें…शायद 40 कि हि थीं.अरविन्द अंकल कि वोँ दूसरी पत्नि थीं… पहली पत्नि शायद बीमारी केँ कारण स्वर्ग सिधार गई थि…उनकी दूसरी पत्नि जिनका नाम नलिनी हैं, बहोत हसीन थि, उन्होंने स्वयं कों बहोत मेन्टेन कररखा थां…मैंने औऱ सलोनी दोनों हि नें एक् बार अचानक उनको बिना कपड़ों केँ भि देख लिया थां… मगर वोँ किस्सा बाद मे !अरविन्द अंकल कि दो बेटियाँ हें, एक् कि विवाह तौ उन्होंने कनाडा कि हैं औऱ दूसरी अभि MBA कररही हैं…दोनों हि उनकी पहली पत्नि सें हें… औऱ बहोत हि मॉडर्न एवं हसीन…ये उनका थोडा सां परिचय थां… चलिए वर्तमान मे लौटते हें…मैंने सलोनी कों गोद मे उठाकर नीचे उतारा… वोँ मेरे सीने सें चिपकी हंसरही थि…मे भि हँसते हुए-…चलो दोस्त… आज तुम्हारी वजह सें अरविन्द अंकलकुछ तौ गरमहुए होंगे… औऱ नलिनी भाभी कि सुलगती जवानी पऱ कुछ तौ आराम मिलेगा…हाहाहा…
सलोनी- तुम् भि नाँ… मे तोँ येसोच रही हूं… कि कल मे उनका सामना केसे करूँगी…मे- क्याँ जान तुम् क्यूं शरमारही हौ… तुम् तोँ पहले कि तरह हि बिंदास रहना… उनकोपता हि नहि लगने देना कि हमने उनको देखा लिया थां…
सलोनी- हाँहाँ… आप् तोँ रहने हि दीजिये… आपको क्याँ पता… पहले हि उनकी निगाहें मुझे चुभती रहती हें… हमेशा मेरे कपड़ों केँ अन्दर तक देखते रहते हें… औऱ आज तोँ उन्होंने सभीकुछ देख लिया…अब तोँ जब भि दिखेंगे ऐसा लगेगा जैसे कपड़ों केँ अंदर हि देखरहे हों…मे- हम्म्म जान ! मुझे तोँ डर हैं कि कहींइधर उधरकुछ गलत नं करदें… ऐसे आदमियों कां क्याँ भरोसा… अबजरा ध्यान रखना…
सलोनी- अरे नहि, वोँ तोँ आप् रहनेदो… उतनी हिम्मत तोँ किसी कि नहि…बस मुझेजरा सि लज्जा हि आएगीजब भि उनके सामने जाऊँगी…
मे- छोड़ो भि दोस्त, अबकिस बात कि लज्जा? सभीकुछ तौ उन्होंने देख हि लिया हि… अब तौ तुम् उनको सताया करना दोस्त…
सलोनी- हाँयह भि ठीक हैं… मे तौ उनकी शर्मिंदी कां हि मजालूँगी…सलोनी नें कसकर मुझेचूम लिया, बोलीं- …अच्छा… आप् फ्रेश होँ लो… मे दूध औऱ ड्राई फ्रूट्स लाती हूं.
मे उसकी मम्मों कों मसलता हुआ-…यह तौ पहले सें गर्म हें जान, यही पिलादो…
सलोनी मेरे बालों कों नोचते हुए-.यह सभी तौ आपका हि हैं जानू… जितना चाहेपी लेना… पऱ अब आप् फ्रेश तोँ होँ लो…
मे उसकी बुर मे उंगली करतेहुए-.क्यूं तुमको नहि फ्रेश होना…?
सलोनी- हाँहाँ… बस आप् चलो, मे यह निपटाकर आती हूं…
मे- जरा ध्यान सें… कहीं अरविन्द अंकल नं आँ जाएँ… हा…हा…हा…
सलोनी- हाँ बहोत दम हैं नाँ उनमें… उनको तौ नलिनी भाभी नें हि निपटा दिया होगा… औऱ क्याँ पतावहा भि ढेर होँ गएहों… मे तौ बेचारी उनके बारे मे हि सोचरही हूं…अच्छा अब आप् जाओ नं बहोत रात हौ गई हैं…औऱ मे अपनी नंगी पत्नि कों किचन मे छोड़ बैडरूम मे आकार बाथरूम मे घुस गय़ा…वाकयी बहोत मजेदार रात थि… मेरेमन मे अबआगे केँ विचार चलरहे थें…इस जबरदस्त चुदाई केँ बादरात भर सलोनी मेरे सें चिपकी रही औऱ बैड पऱ नंगे चिपककर सोने कां आनंद हि अलग हैं.सुभह सलोनी जल्दउठ जाती हैं, वोँ सब घरेलू कार्य बहोत दिल सें करती हैं…वोँ जबउठी तौ आज पहलीबार मेरीआँख भि जल्दखुल गई… याँ यूँ कहिये कि मे बहोत सोचरहा थां कि केसेअब सभीकुछ किया जाये…सलोनी नें धीरे-धीरे सें उठकर मेरे चेहरे कि ओर देखाफिन मेरे होंठों कों चूम लिया…उसने बहोत प्रेम सें मेरे लण्ड कों सहलाया औऱ झुककर उस पर्र भि एक् गर्मागर्म चुम्बन दिया…उसके झुकने केँ कारण पीछे सें उसके मस्त नंगे चूतड़ औऱ चूतड़ केँ बीचझलक रही गुलाबी, चिकनी बुर देख मेरादिल भि वहा चूमने कां किया…पर्र मैंने अपने आप् पर्र काबू किया औऱ सोने कां बहाने किये लेटा रहा…मे बंद अधखुली आँखों सें सलोनी कों देखते हुए अपनी रणनीति केँ बारे मे सोचरहा थां… कि मस्ती भि रहे औऱ इज्जत भि बनी रहे…सलोनी मेरे सें खुल भि जाए… वोँ मेरे सामने मस्ती भि करे परन्तु उसकोऐसा भि नाँ लगे कि मे स्वयं चाहता हूं कि वोँ गैर मर्दों सें चुदवाये…पता नहि मेरेयह केसे विचार थें कि मेरादिल मेरी प्यारी पत्नि कों दूसरे मर्दों कि बाँहों मे देख्ना भि चाहता थां… उसकोसभी कुछ करते देख्ना चाहता थां…पर्र नाँ जाने क्यूं एक् गहराई मे एक् जलन भि हौ रही थि… कि नहि मेरी पत्नि कि नाजुक बुर औऱ गांड पऱ केवल मेराहक़ हैं…इस पऱ मे कोई औऱ लण्डसहन नहि कर सकता…मगर इन्सान कि ख़्वाहिश कां कोईअंत नहि होता औऱ वोँ उसको पूरी करने केँ लिएहर हद सें गुजर जाता हैं…सलोनी कों भि दूसरी डिशेस अच्छी लगनेलगी थीं। उसने भि दूसरे लण्डों कां स्वाद लें लिया थां…वोँ तोँ अब सुधर हि नहि सकती थि…अब तौ बसइस सबसे एक् तालमेल बनाना थां…
स्टोरी जारी रहेगी.
कमेन्ट जरूरकरे
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मस्तकथा हैं अगलेभाग कां इंतजार रहेगा
Superb............
मस्तीभरी हैं............ सलिल भइया
बहोत हि शानदार भाग हैं
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