मेरी चालू बीवी completee - Indian sex story – New Episode
एपसोड 13
सलोनी- चलअब जल्द सें घऱचल…देर होँ रही हैं.…
…
पारस- भाभी प्लीज क्षमा करदो न्… अच्छा अबकभी ऐसी गलती नहि करूँगा…प्रोमिस…
सलोनी- अच्छा ठीक हैं… पऱ कुछ वक़्त दूररह… मेरामूड बहोत ख़राब हैं…
पारस-ओके मेरी प्यारी भाभी… पुचचच चच……
पारस- भाभी, मे अभि आता हूं… जराकुछ सामान लेना हैं बाजार सें… भूल गय़ा थां……
…
…
बहुतदेर बाद…टेलीफोन कि घण्टी कि आवाज़ … ट्रिन ट्रिन… ट्रिन ट्रिन
सलोनी- हेल्लो…मेरी क़िस्मत अच्छी थि कि सलोनी नें फ़ोन स्पीकर पर्र कर लिया थां.उसकी सहेली थि
नमिता- हेलो मेरीजान, कहां होँ आजकल?
सलोनी- यहीं हूं दोस्त ! तुँ सुना। कहां मस्ती माररही हैं…?
नमिता- वाउ, मस्ती स्वयं कररही हैं औऱ मेरे कों बोलरही हैं…
सलोनी- ओह लगता हैं साहिल भइया नहि हें आजकल जौ मुझसे लड़ने लगी…?
नमिता- उनको छोड़… तुँ यहबता… आज बाजार मे किसके संगमटक रही थि, बिल्कुल छम्मक छल्लो कि तरह.?
सलोनी- अरे वोँ तौ इनका छोटा भइया हैं। मे तेरीतरह नहि हूं जोँ किसी केँ भि संगयूँ हि घूमने लगूँ…
नमिता- हाँहाँ… मे तोँ ऐसी वैसी हूं… औऱ तूँ केसेघूम रही थि वोँ सभी देखा मैंने… मेरी आवाज़ भि नहि सुनी। औऱ अपने चूतड़ मटकाती हुईँ निकल गई…
सलोनी- अरे दोस्त… मैंने सही मे नहि देखा, कहां थि तुँ…?
नमिता- उसी बाजार मे जहाँ तुँ बिना कच्छी केँ अपने नंगे चूतड़ सबको दिखारही थि… सलोनी- अरे दोस्त… वोँ जरा वैसे हि हे…हे…जरा मस्ती कां मूड थां तौ… औऱ तुँ क्याँ कररही थि वहा…?
नमिता- मे तौ साहिल केँ संग शॉपिंग करने गई थि…
सलोनी- क्या बात है !! तोँ क्याँ
साहिल भइया नें भि कुछ देखा.
नमिता- कुछ…अरे सभीकुछ देखा… उन्होंने हि तोँ मुझे बताया… कि येआज सलोनी कों क्याँ होँ गय़ा हैं… उन्होंने तोँ तेरेउस भइया कों तेरे नंगे चूतड़ों पऱ हाथ सें सहलाते भि देखा…तभी तौ मे तुझसे कहरही हूं…
सलोनी- ओमायगॉड, क्याँ कहरही हैं तूँ…?नमिता- बिल्कुल वही जोँ हुआ…अब सचसचबता… क्याँ बात हैं?
सलोनी- दोस्त, साहिल भइया कहीं इनसे तौ कुछ नहि कहेंगे?
नमिता- अरे नहि दोस्त वोँ ऐसे नहि हें… मगर तुँ मुझेबता… यहसभी क्याँ हैं… औऱ क्याँ क्याँ हुआ…?
सलोनी- अरेकुछ नहि दोस्त, बस थोड़ी मस्ती कां मन थां.… इसलिये बस औऱ कुछ नहि दोस्त…
नमिता- हम्म्म… वोँ तौ दिख हि रहा थां। तुँ बताती हैं याँ मे कोई जासूस छोड़ूँ तेरे पीचे…?
सलोनी- जा कुतिया… कर लें जोँ तेरे सें होता हैं… साली धमकी देती हैं? ब्लैकमेल करती हैं मम्मी कि … … …?
नमिता- प्लीज बता नां दोस्त… क्याँ क्याँ हुआ… औऱ वोँ हैंडसम कौन थां…?
सलोनी- बताया तौ दोस्त… मेरा देवर जी हैं॥…औऱ बस थोडा मस्ती कां मूड थां तोँ ऐसे हि बाहर् निकललिए बस औऱ कुछ नहि हुआ… औऱ तेरी मस्ती लेनी हैं तौ तुँ भि बिना चड्डी केँ जानां, देख्ना बहोत आनंद आएगा.
नमिता- अरे वोँ तोँ सही हैं। तूँ बता नं क्याँ हुआ मेरीजान। कितनों नें उंगली कि तेरी मे… बता नं दोस्त.?
सलोनी- नहि दोस्त… ऐसाकुछ नहि हुआ…बस जैसे तूने देखा…ऐसे हि किसी नं किसी देखा होगा…बस… औऱ तोँ कुछ नहि हुआ…
नमिता- अच्छा औऱ तुम्हारे देवर जी, वोँ कहां तक पहुँचे.?
सलोनी- कहीं तक नहि दोस्त… बसऐसे हि थोड़ी बहोत मस्ती बस… औऱ क्याँ मे……
…
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सॉरी दोस्तो, रिकॉर्डिंग नें धोखादे दिया… लगता हैं यहा तक बैटरी थि…उसके बाद बैटरी समाप्त !मगर इतनाकुछ सुनकर मुझेये तोँ लग गय़ा थां कि सलोनी कों अब रोकना मुश्किल हैं.मे कुछदेर तक बससोच हि रहा थां कि अबआगे क्याँ औऱ केसे करना चाहिए…
दोस्तो, आप् भि अपना मशवरा दें कि आप् ऐसी परिस्थिति मे क्याँ करते…?आपके सुझाव केँ इन्तजार मे…
आपका साथी…सलील
मस्ती हि मस्ती मस्तीभरीे..............दोस्त।
बढ़िया एपसोड केँ लिए बहोत बहोत शुक्रिया अगले एपसोड कां इंतजार रहेगा
Excellent kahani , waiting for next update
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भाग 14
सॉरी दोस्तो, रिकॉर्डिंग नें धोखादे दिया… लगता हैं यहा तक बैटरी थि…उसके बाद बैटरी समाप्त !मगर इतनाकुछ सुनकर मुझेये तौ लग गय़ा थां कि सलोनी कों अब रोकना मुश्किल हैं.मे कुछदेर तक बससोच हि रहा थां कि अबआगे क्याँ औऱ केसे करना चाहिए…बहोत वक़्त तक अनाप-शनाप सोचने केँ बाद मैंने सभी विचारों कों बाहर् निकाल फैंका…फिन सोचा कि दोस्त मैंने सलोनी कों अब तक दिया हि क्याँ हैं…ये घऱ… ऐश्वर्य याँ कुछ जरूरी सामान… क्याँ यहसभी हि काफ़ी थां…?आखिर उसकी भि अपनी ज़िंदगी हैं… औऱ सेक्स तोँ बदन कि प्राथमिक जरूरत हैं… मगर मैंने इसओरकभी ध्यान हि नहि दियापर अब मुझेइस औऱ ध्यान देना होगा…मैंने एक् हि लम्हा मे सभीसोच लिया कि मे अब सलोनी कां पूरा ध्यान रखूँगा…वोँ जोँ भि चाहती हैं, जैसा भि चाहती हैं, मे उसमें उसकासंग दूँगा… आखिर मे उससे बहोत प्रेम करता हूं.अब अगर उसनेयह सभी किया तोँ मे नहि समझता कि इसमें उसकीकोई गलती हैं… अगर उसकोयह सभी अच्छा लगता हैं तौ उसको मिलना चाहिए…औऱ मे भि कौन सां दूध कां धुला हूं? अपनी क्लासमेट सें लेकर… सेक्रेटरी सें लेकर… साली तक… अनगिनत पड़ोसनों, कालगर्लों तक… नं जाने कितनी चूतों कों मार चुका हूं.फिन अगर सलोनी मजे लेँ रही हैं तोँ ये उसका जायजहक़ हैं.अब ये सोचना थां कि केसे मे उसको अपने विश्वास मे लूँ.ये सभी सोचते हुए मे घऱ पहुँच गय़ा.…
अबघऱ पहुँच कर मैंने घण्टी बजाई… घर्र्न्न… घर्र्न्न…
सलोनी- कौन हैं…?
मे- खोल नां… मे हूं.दरवाजा खुलते हि…
सलोनी- क्याँ हुआ? बड़ीदेर लगा दि… कहां रुकगए थें।
पारस कां मोबाइल आया कि वोँ तौ 2 घंटे पहले हि निकल गय़ा। वोँ औऱ मे दोनों कॉलआई कररहे थें पर्र आपका मोबाइल हि नहि लगरहा थां… कहां थें.? कहींकुछ हुआ तोँ नहि… कितना घबरारही थि मे… कुछहुआ तौ नहि… क्याँ तुम् भि… एक् कॉलआई भि नहि कर सकते थें…ओह मायगॉड, मुझेयाद आया… मे अपना मोबाइल कॉलआई ऑफ किया थां… जब रिकॉर्डिंग सुनरहा थां… औऱ यहायह सभी कितने परेशान हौ गए बेचारे…
मे- ओह…जरा ठहर मेरीजान… ऐसाकुछ नहि हुआ…बस कोईमिल गय़ा थां… औऱ मेरा मोबाइल गिरने सें ऑफ होँ गय़ा थां… मुझेपता हि नहि चला…
सलोनी मेरे सीने सें लग गई… मैंने कसकरउसे अपनी बाँहों मे जकड़ लिया… मुझे उसके कमसिन जिस्म कां अहसास होनेलगा। जोँ पिछले 1-2 साल सें मैंने खो दिया थां.वाक़यी सलोनी एक् बहोत हसीन औऱ काम-रति सम्पन्ना औरत हैं।.!उसकाअंग अंगरस सें भरा हैं… उसकेउठे हुए नुकीले बूब्ज़, मम्मों मेरे सीने मे चुभरहे थें.उनके निप्पल तक कि चुभन कां अहसास मुझे होँ रहा थां… मुझेपता थां कि उसने ब्रा नहि पहनी थि…क्योंकि उसकी गहरीलाल रंग कि ब्रा, कच्छी हमारे बेड केँ कोने मे लैंप केँ पास रखीं थि.सलोनी अमूमन तोँ घऱ पऱ ब्रा कच्छी पहनती हि नहि थि। औऱ अगर पहनी होँ तोँ रात कों सोने सें पहले वोँ उनको उतार वहींरख देती थि.वोँ हमेशा मेरे सामने हि येसभी करती थि, मगर उसके प्रति मेरी रुचि बिल्कुल समाप्त सि होँ गई थि इसलिये मे कोई ध्यान नहि देता थां.मगर आज कि सारी घटनाओ नें मेरा नजरिया हि बदल दिया थां। मुझे सलोनी संसार कि सबसे प्यारी औरतलग रही थि.यकीन मानना… मेरा लण्डउस रिकॉर्डिंग कों सुनने केँ बाद सें खड़ा थां औऱ बहोत दिनों बादआज सलोनी केँ बदन कि गर्मी महसूस कर उसकोछू रहा थां.इसका एहसास सलोनी कों भि होँ रहा होगा…मे अपनाहाथ उसकीपीठ सें झूलते हुए उसके गदराये चूतड़ों तक लेँ गय़ा.शपथ सें इतने सेक्सी चूतड़ किसी केँ नहि होँ सकते…ऐसा मखमली अहसास जैसे मक्खन एक् पर्वत कों चूतड़ कां आकारदे दिया गय़ा हौ…सलोनी नें सफ़ेद मिडी जैसा गाउन पहना थां, जौ उसके चूतड़ों सें थोडा हि नीचे होगा… मेराहाथ सरलता सें उसके गाउन केँ अंदर उसके नग्न नितम्बों (चूतड़ों) केँ ऊपर पहुँच गय़ा थां.मे उस मखमली एहसास सें सराबोर होँ गय़ा थां… सलोनी औऱ कसकर मेरे सें लिपट गई…उसकी इसअदा नें मेरेदिल मे उसके प्रति औऱ भि प्रेम भर दिया…ये सच हैं कि वोँ कभी मुझे किसीबात केँ लिएमना नहि करती थि.आज नां जाने उसने कितनी मस्ती कि होगी, औऱ कईबार सेक्स भि किया हि होगा… चाहती तौ इस टाइम वोँ गहरी नींदसो रही होती…उसका बदनइस वक़्त तृप्त होना चाहिए, पऱ मेरेलिए वोँ फिन सजधजकर थि… वोँ कुछमना नहि कररही थि.बल्कि मेरे बाहों मे सिमटी आहेंभर रही थि… उसको मेरी जरूरत कां हर लम्हा ख्याल रहता थां…मैंने अपनेहाथ कों उसके चूतड़ों केँ चारों ओर सहलाकर, उसके दोनों उभारों कों अपनी मुट्ठी मे भरने केँ बाद अपनीदो उंगलियों सें उसकी दरार कों प्रेम सें सहलाया फिन अपनी उँगलियों कों उसके गुदाद्वार यानि चूतड़ों केँ छेद पर्र लें गय़ा जोँ एक् गर्मभाप छोड़रहा थां…फिन वहा सें मेरी उँगलियों नें उसकी मखमली बुर तक कां सफ़र बड़ी रंगीनी केँ संगतय किया…
सलोनी- आअहाआ… ह्ह्ह्हह…बस उसकेमुख सें मात्र आहें हि निकल रहीं थीं.क्याँ बताऊँ कितना नरम अहसास थां… मे गांड औऱ बुर केँ मुख कों
प्रेम सें ऐसे सहलारहा थां कि इन दोनों बेचारो छेदों नें कितनी चोटसही हें आज…मगर गांड कि गर्मी औऱ बुर केँ गीलेपन नें मुझेये बता दिया कि वोँ फिनचोट सहने केँ लिए सजधजकर हें…मैंने अपने मुंह सें हि सलोनी केँ कन्धों पऱ बंधे स्ट्रैप खोलदिए… उसका गाउन नीचेगिर गय़ा… वोँ अब पूर्ण नग्न-अवस्था मे मेरी बाहों मे थि…मैंने उसको थोडा पीछेकर उसके गदराये स्तन कों देखा…उन पऱ बहुत सारेलाल लाल निशान थें… जोँ शायदआज हमारे पारससाब बनाकर गए होंगे…मगर सलोनी कभीकुछ छिपाने कि कोशिश नहि करती थि इसीलिए मुझेउस पऱ कभीकोई शक़ नहि होता थां.तभी सलोनी बोलि- सुनो, आप् कपड़े बदललो… मे दूधगरम कर देती हूं…मे- हाँ मेरीजान, कितने दिन पारस केँ कारण हम् कुछ नहि कर पाये.आज बहोत मन होँ रहा हैं…सलोनी केँ मुख पऱ एक् सेक्सी मुस्कराहट थि… वोँ एक् नई नवेली दुल्हन कि तरह शरमारही थि… उसने किचन मे जातेहुए अपनी आँखों कों झुकाकर एक् संस्कारी महिला कि तरह स्वीकृति दि…उसकी इसअदा कों देखकर कोई ड्रीम्स मे भि विश्वास नहि कर सकता थां कि आज पूरेदिन उसनेकिस तरह अपनाअंग प्रदर्शन किया औऱ बुरीतरह सें अपने पति केँ रहते किसी परपुरुष सें चुदाई करवाई…यही होती हें नारी कि अदाएँ जिन्हें कोई नहि समझ सकता.समझदार पुरुष कों इन सबसे तालमेल बनाना हि होता हैं… वरना होता तोँ वही हैं जौ नारी चाहती हैं.अब याँ तौ आपकी ख़ुशी केँ संग याँ फिन आपका जिंदगी बर्बाद करने केँ बाद…फिलहाल मे कपड़े उतार हल्का सां शावर लें, एक् रेशमी लुंगी पहन, अपनेबदन कों डियो सें महकाकर खाट पर्र आँ बैठ गय़ा.मुझे ध्यान आया कि जब मैंने सलोनी कों छोड़ा थां तब वोँ पूरी नंगी थि.उसकी नाइटी अभि भि वहीं पड़ी थि… इसका मतलब वोँ किचन मे नंगी हि होगी.बस मे उठकर किचन कि ओर जाने लगा.ऐसा नहि हैं कि ऐसा पहले नहि होता थां, मगर मे कभीइस सभी रोमांच केँ बारे मे नहि सोचता थां.पहले भि नां जाने कितनी बात सलोनी घऱ मे नंगी हि औऱ काम करती रहती थि मगर मे उससेकोई रोमांस नहि करता थां औऱ नाँ मुझेकोई अजीब लगता थां। क्योंकि हम् दोनों यहा अकेले हि रहते थें तोँ उस आज़ादी कां फ़ायदा उठाते थें.मे भि अधिकतर पूरा नंगा हि सोता हूं औऱ घऱ पर्र बहुतकम कपड़े हि पहनता हूं.मे जब किचन मे गय़ा तौ…
कथा जारी रहेगी.
बढ़िया एपसोड..
दोस्तो आरएसएस केँ सब मेंबर्स कों मेरी तरफ़ सें दीपावली कि बहोत बहोत शुभकामनाएँ आप् सबकी जीवन मे हज़ारों दीपों कां उजाला हौ औऱ आप् सभी केँ सब मनोरथ पूर्ण हों
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एपसोड 15
पहले भि नाँ जाने कितनी बार सलोनी घऱ मे नंगी हि औऱ काम करती रहती थि मगर मे उससेकोई रोमांस नहि करता थां औऱ नां मुझेकोई अजीब लगता थां।
क्युकि हम् दोनों यहा अकेले हि रहते थें।
तौ उस आज़ादी कां फ़ायदा उठाते थें.
मे भि अधिकतर पूरा नंगा हि सोता हूं औऱ घऱ पऱ बहुतकम कपड़े हि पहनता हूं.
मे जब किचन मे गय़ा तौ सलोनी नीचे झुकी हुई कोई सामान निकाल रही थि.
औऱ आज वोँ नाँ जाने क्यूं इस टाइम दुनिया कि सबसे ज़्यादा सेक्सी स्त्री लगरही थि.
एक् पूरी नंगी, मस्त मस्त अंगों वाली नारीजब झुकी हौ तोँ पीछे सें उसके नंगे चूतड़ औऱ उसके दोनों भाग सें झांकती उसकी सबसे सुन्दर बुर !
क्याँ बताऊँ दोस्तो, कितना जबर्दस्त दृश्य थां.
मैंने अपनी लुंगी वहीं खोली औऱ पीछे सें उसको जकड़ लिया.
उसने बड़े आश्चर्य सें पीछे घूमकर देखा, क्योंकि ऐसी अवस्था मे शायदये सभी बहुत वक़्त बादहुआ थां.
विवाह केँ 6 महीने याँ एक् साल तक तौ मे ऐसासभी रोमांस करता भि थां मगरतब सलोनी घऱ पऱ इसतरह नंगी भि नहि रहती थि.
मगरजब वोँ इतना खुली रहनेलगी तोँ मे अपने बिज़नस मे व्यस्त हौ गय़ा.
इसीलिए उसने मुझेइस तरह देखामगर वोँ इतनी ज़्यादा प्यारी हैं कि उसनेकुछ नहि कहा.
बल्कि मेरे लण्ड पर्र अपने सेक्सी चूतड़ कों हिलाकर कहा- क्याँ हुआ?
आँ तौ रही हूं…मे- क्याँ कररही होँ मेरीजान? बहोत देरलगा दि.
सलोनी- बस आपकेलिए केसरदूध औऱ कुछ ड्राई फ्रूट तलरही थि.
मे- वाउजान… मज़ा आँ जायगा, क्याँ कुछ मीठा भि हैं घऱ पऱ…मैंने साइड खिड़की कों खोलते हुएकहा…
हमारी किचन कि एक् तरफ एक् छोटी खिड़की हैं जोँ बाहर् गैलरी मे खुलती हैं.
वहा कॉलोनी केँ पीछे वाले रास्ते कि सीढ़ी हें तौ दिन मे हि वहा आनां जानां होता हैं.
औऱ वोँ भि बहोत कम !
गर्मी मे वोँ खिड़की खुली हि रहती हैं, पहले मे हि बंदकर देता थां कि सलोनी किचन मे कुछकम कपड़ों मे काम करती थि तोँ कोई देखे नाँ…मगर आज नां जानेकिस बात सें प्रेरित हौ मैंने हि वोँ खिड़की खोल दि थि.
औऱ वोँ भि तबजब मे औऱ सलोनी दोनों हि किचन मे पूरे नंगे थें…
दोनों केँ बदन पर्र एक् कपड़ा नहि थां.मे सलोनी सें रोमांस भि कररहा थां… ऐसे मे कोई हमकोदेख लेता तोँ शायद उसका पजामा गीला हौ जाता.मूत सें नहि बल्कि…हा हाहा…
मेरे खिड़की खोलने पऱ भि सलोनी नें कुछ नहि कहा, बल्कि हामीभरी…
सलोनी- अहा… कितनी गर्मी हौ गई हैं नां… अच्छा किया आपने… घुटनकुछ कम होगी…मैंने उसको अपनीओर करके उसकेलाल मुलायम लबों कों अपने होठों मे दबा लिया…सलोनी नें भि अपने होंठों कों खोलकर औऱ उचककर मेरे चुम्बन कां जबाब दिया…
सलोनी कि पीठ खिड़की कि ओर थि औऱ वोँ आँखें बंदकर मेरे चुम्बन मे व्यस्त थि…मेरे हाथ उसकी नग्न चिकनी पीठ सें फिसलते हुए उसके चूतड़ों तक पहुँच गए…तभी एक् लम्हा केँ लिए मेरीआँख खुली… वैसे तौ बाहर् पूरा अँधेरा थां… मगर मुझे एक् समय कों लगा कि जैसेकोई वहा खड़ा हैं !
क्योंकि मुझे सिगरेट कि चिंगारी जलतीनजर आई…??कौन हैं वोँ.??.सलोनी मेरी बाहों मे एक् बेल कि तरह लिपटी थि बिल्कुल नंगी, उसका सफ़ेद, संगमरमरी बदन किचन कि दूधिया रोशनी मे चमकरहा थां.
औऱ यहसभी हमारी किचन कि खिड़की सें कोई बावला देखरहा थां.
मुझे नहि पता कि वोँ कौन हैं,
हाँये निश्चित थां कि कोई तोँ हैं… मैंने दोतीन बार सिगरेट जलती, बुझती देखी.इस वक़्त उसने सिगरेट अपने हाथों केँ पीछे कि हुइ थि… औऱ वोँ साइड मे होकर… झुककर देखरहा थां.
सलोनी नें होने होंठअब मेरे गर्दन पऱ रगड़ते हुए मेरे कानों केँ निचले भाग पऱ पहुँचने कि कोशिश कि…
वाकई सेक्स केँ मामले मे वोँ जबरदस्त थि, उसकीइस कोशिश सें मेरा लण्ड पूरा खड़ा होकर उसकी बुर पर्र टकराने लगा.
बहोत गर्म औऱ मस्त अहसास थां… मेरा लण्ड अधिक बड़ा तौ नहि, परन्तु 6 सें 7 इंच लम्बा औऱ 3 इंच मोटा होगा।
खड़ा होने पऱ उसकीआगे कि खाल स्वयं ऊपर हौ जाती हैं औऱ मोटा सुपारा बाहर् आँ जाता थां, वोँ इस टाइम सलोनी कि कसी हुई प्यारी बुर कों छूरहा थां.
तभी मेरेमन नें सोचा कि क्याँ सलोनी कों इस व्यक्ति केँ बारे मे बताया जाये…मेरे दिल नें कहा-अरे… यही तौ मौका हैं उसकेदिल मे स्वयं कों सेक्स केँ मामले मे बड़ा दिखाने कां औऱ आगे खुलकर मस्ती करने कां…बस मैंने सलोनी कों औऱ कसकर अपनी बाहों मे जकड़ा औऱ अपना सीधाहाथ सें उसकासर औऱ बाएंहाथ सें चूतड़ सहलाते हुए मे बहोत धीरे-धीरे सें उसकेकान मे फुसफुसाया- जान… मुझेलग रहा हैं कि खिड़की सें कोई हमकोदेख रहा हैं.
अचानक सलोनी नें कसमसाकर मेरी बाहों सें निकलने कि कोशिश करनेलगी… उसकी हरकतों सें साफ़लगा कि वोँ अपने नग्नबदन कों छुपाना चाहरही हैं.मे फिन फुसफुसाते हुए- शांतरहो जान, मुझे देखने दो कि वोँ कौन हैं…
सलोनी- पर्र मे नंगी हूं…वोँ मुझसे भि धीमी आवाज़ मे मेरेकान मे बोलीं.
‘हाँ’ आश्चर्य रूप सें उसका जिस्म शांत हौ गय़ा थां अब उसमें स्वयं कों छुपाने कि जल्दबाजी नहि थि.
मैंने वैसे हि उसको चिपकाये हुए उसकोकहा- तोँ क्याँ हुआजान, उसने तौ हमकोदेख हि लिया हैं… अबजरा मे भि तौ देखूँ कि ये साला हैं कौन… तुम् ऐसाकरो वैसे हि प्रेम करतेहुए थोडा खिड़की केँ पास कों खिसको… वोँ शायद थोडा साइड मे हैं… औऱ ऐसे जाहिर करना कि हमकोकुछ नहि पता…
मुझेकुछ अंदेशा सां थां… मगर मेरी सारी आशाओं सें विपरीत सलोनी पहले सें भि अधिक कामुक तरीके सें मेरे सें लिपट गई…औऱ उसने मेरी गर्दन मे दांतों कों गड़ाते हुए अपनी बुर कों औऱ भि तेजी सें मेरे लण्ड पर्र लगड़ा औऱ खिसकते हुए अपनी पतली सेक्सी कमर घुमाते हुए बहोत धीरे-धीरे धीरे-धीरे… खिड़की कि ओर बढ़ने लगी…मे भि उसकेसंग लिपटा हुआआगे होँ रहा थां… उसकीइस अदा मे कुर्बान हौ गय़ा थां…
ओहमाय गॉड…ये क्याँ… मेरे लण्ड केँ टॉप नें सलोनी केँ बुर कां गीलापन तौ पहले हि पताचल रहा थां मगर एक् बार खिसकने मे…मेरा लण्ड उसकी बुर केँ गरमछेद सें टिक गय़ा…औऱ तभी उसके सुपाड़े पऱ सलोनी कि बुर कां ढेर सारा पानीगिर गय़ा…
ये क्याँ !
जौ मेरीजान कई धक्कों केँ बाद औऱ कभीकभी तौ मेरे झड़ने केँ बाद भि अशांत रहती थि.आज मेरे लण्ड कों घुसाये बिना… मात्र लण्ड केँ छुअन सें हि धराशायी हौ गई थि…ये उसकाआज कां पारस कां प्रेम… याँ मेराऐसा प्रेम करने कां तरीका तौ नहि हौ सकता…ये जरूर एक् ऐसा एहसास थां कि कोई उसको नंगी अवस्था मे ऐसे चुदाई करतेदेख रहा हैं…वाउ… दोस्तो… इसतरह केँ सेक्स नें यहा हमारे जिंदगी मे अचानक हि एक् नया मोड़ला दिया थां…सलोनी केँ बुर केँ पानी नें मेरे लण्ड कों औऱ भि जोश मे ला दिया थां…
मगर आश्चय ये थां कि झड़ने केँ बाद भि सलोनी केँ जोश मे रत्ती भर भि कमी नहि आई थि…अब हम् खिड़की केँ बहुत निकट थें…
किस्सा जारी रहेगी.
मेरी चालू बीवी completee - Indian sex story - Aage kya hua? Next part padhiye
बढ़िया एपसोड..
Excellent kahani , waiting for next update
बढ़िया उपडेट सलिल भइया अगलेभाग कां इंतजार रहेगा
बहोत बढ़ीया भाग हैं सलिल भइया
mast update
Superb.........
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