मेरी भुलक्कड़ चाची completee Desi sex story Mere childhood me, meri chachi Komal ke saath hue kuch haadsaon ko dekh kar main sex ke prati aakarshit hua. Chachi ki umar 28 saal thi, unka figure gora, kadd 5.2 inch, boobs bade, kamre moti thi. Unhone mujhe sex ka matlab bataya, jab meri umar 12 saal ki thi. Yeh kahani meri chachi ki hai, jo abhi Delhi me rehti hai, chacha SEBI me job par hain.
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मेरी भुलक्कड़ चाची
दोस्तो हर व्यक्ति केँ बचपन मे कभी नाँ कभीकोई ऐसा वक्तआता हैं जब वोँ सेक्स कों समझने लगता हैं। ठीकउसी तरह मे बचपन मे, चाची केँ संगहुए कुछ हादसों कों देखकर मे भि सेक्स केँ प्रति आकर्षित हुआ.
यह एक् रियल किस्सा हैं मेरी सग़ी चाची कि, जौ अभि देल्ही मे रहती हैं, चाचा सेबी मे नौकरी पऱ हैं। थोड़ी चाची केँ बारे मे आप् लोगो कों बतादू, मेरी चाची कां नाम कोमल हैं, अभि चाची कि उमर 40 साल। हैं पर्र उस वक्त उनकीउमर 28 य्र। थि, दिखने मे एक् दम नॉर्थ इंडियन घरेलू महिला कि तरह हैं, रंग गोरा, हाइट 5.2 इंच। अधिक लंबी नहीं हैं, सरीर सें थोड़ी हेल्ती हैं, चेहरा एक् दमगोल, बूब्स थोड़े बड़े, कमर थोड़ी मोटी, उनकीखास बातयह हैं कि वोँ बहोत ज्यादा भोली हैं औऱ थोड़ी भुलक्कड़ हैं, इसीलये चाचा हमेशा उन्हे डाँटते रहते हैं, उनकेदो बेटे हैं औऱ देल्ही मे पढ़ते हैं बड़ा बेटा विकाश 15साल कां औऱ छोटा राजीव 10साल कां हैं। चाची हमेशा सारी पहनती हैं औऱ घऱ मे छोटीबहू होने केँ कारण, सर पर्र हमेशा पल्लू रखती हैं औऱ सारा जिस्म हमेशा सारी सें ढका रहता हैं। अब थोडा चाचा पे नज़र डालीजाए मेरा पापा (फादर) केँ 3 भइया औऱ एक् सिस्टर हैं। पापा सबसे बड़े, प्रकाश चाचा मझले हैं, इनकेबाद एक् छोटे चाचा प्यार औऱ फूफी कमल। मेरी पूरी फॅमिली मे प्रकाश चाचा पढ़ने मे सबसे अधिकतेज औऱ किताबी कीड़े हैं (बुक वर्म), पढ़ाई कि वजह सें आँखो पे मोटा चस्मा आँ गय़ा हैं मेरी उनकेसंग बहोत बनती हैं, क्यूंकी बचपन सें उन्होने मुझे बहोत खिलाया हैं मे बचपन मे उनकेसंग हि सोता थां औऱ उन्हे छोटे बाबूजी कहकर बुलाता थां.
अब कहानी पऱ आता हूं, किसतरह अंजाने मे चाची नें मुझे सेक्स कां मतलबबता दिया.यह बातउन दिनो कि जब मेरीउमर 12साल। कि थि, हम् सभी प्यार चाचा कि विवाह मे अपने गाओंगये थें वान्हा पऱ हमारा पुस्तेनि घऱ हैं, जौ 2 फ्लोर कां हैं, ग्राउंड फ्लोर मे 5 कमरे हैं, रसोई, स्टोर रूम, छोटे चाचा कां रूम, दादाजी दाई औऱ गेस्ट रूम हैं, गेस्ट रूम केँ बीच एक् डोर हैं जौ दालान मे खुलता हैं, दालान जान्हा खेती केँ समान, गाये औऱ भैंसे (काउ & बफेलो) रखे जाते हैं.
औऱ दालान कि देखभाल केँ लिए हमारा नौकर भूरा थां जिसकी उमर तकरीबन 40 साल होगीउस समय औऱ वोँ वन्हि दालान मे रहता थां., सिफ खानां खाने हि घऱ मे आता थां। भूरा एक् दमहटा कटा ताकतवर मर्द थां, हम् जैसे 3, 4 बच्चो कों तोँ वोँ एक् हाथ मे हि उठा लेता थां पऱ वोँ थोडा मंद बुधि कां थां, बचपन मे उसकेमा बाप गुजरगये थें, दादा नें उसे अपनेपास रख लिया, वोँ घऱ केँ सभीकाम कर देता थां औऱ दादाजी जी कि बहोत सेवा करता थां.
सेकेंड फ्लोर पे हमारा रूम, चाची कां औऱ चाचा कां स्टडी रूम थां औऱ दो कमरे हमेशा बंद रहते थें जिसमे कोई रहता नहींहा, जब हमारी कमल फूफी याँ कोई रिलेटिव आते थें उसी मे रुकते थें औऱ उपरछत (टेरेस) थि, जान्हा सें दालान औऱ गाओंसाफ दिखता थां। सालदो साल मे एक् बार हम् गाओं जाते थें, दादाजी दादीमा हमेदेख कर काफ़ी खुस होते थें, हमे भि वान्हा काफ़ी अछा लगता थां, दिनभर गाओं, खेत मे घूमना औऱ नदी मे नहाते औऱ मस्ती करते औऱ वैसे भि वान्हा पर्र किसी भि तरह कि कोईरोक टोक नहीं थि.
मेरी भुलक्कड़ चाची completee - Desi sex story – New Episode
घऱ मे विवाह कां महॉल थां सभी काफ़ी खुश थें, बहोत सारे रिलेटिव औऱ मेहमान आएहुए थें, हमारी फूफी (कमल) औऱ फूफाजी (राजेश) (माइ फादर्स सिस्टर & हर हज़्बेंड) भि आएहुए थें, यहसभी विवाह एक् 4, 5 दिन पहले हि आगाये थें, घऱ मे पेर रखने कि स्थान नहीं थि, हम् सभी बच्चो कों रात कों छत (टेरेस) पर्र सोना पड़ता थां। गाओं मे रात बहोत जल्द होँ जाती थि, रात होते हि हम् सभी दालान मे घुस जाते औऱ खूब होँ हल्ला करते.हां औऱ एक् ख़ास्स बात आप् लोगो कों बतादू उस वक्त हमारे गाओं मे बिजली नहीं थि, गाओं मे सभी लालटेन औऱ दिया हि इस्तेमाल करते थें। हम् रात मे अक्सर छुपा छुपी (हाइड & सीक) खेलते.
दोपहर कां वक्त थां, आजरात प्यार चाचा कां तिलकआने वाला थां (इसरसम मे लड़की केँ घऱ वाले दहेज कां समान लेँ करआते हैं औऱ लड़के कों तिलक लगाते हैं)। तिलक मे आने वाले लोगो केँ रुकने कां बंदोबस्त दालान मे हि किया गय़ा थां। सभीलोग काफ़ी बिज़ी थें, मे भि तिलक मे आने वाले लोगो केँ लिएचेर औऱ बेड कां बंदोबस्त कररहा थां, मेरेसंग गाओं केँ कुछ लड़के औऱ भूरा भि थां। फूफाजी वन्हि पऱ मिठाई वाले केँ संग बैठे थें औऱ कुछ बातेकर रहे थें, तभी मैने देखा गाओं केँ लड़के जोँ हमारी सहायता कररहे थें बारबार छत कि तरफदेख रहे थें औऱ कुछ कानाफुसी कररहे थें, मैने भि छत कि तरफ देखा, देखा तौ चाची छत पर्र नीचेझुक करकुछ सूखारही थि चाची नें सारी कों घुटनो तक उठा केँ कमर सें बँधी हुइ थि औऱ नीचे झुकने सें उनकी गोरी गोरी जंघे (थाइस) औऱ चूतर कां निचला हिस्सा काफ़ी साफदिख रहा थां। चाची तौ अपनेकम मे बिज़ी थि, भूरा भि तिरछी नज़र सें ऊपरदेख रहा थां औऱ अपने पॅंट पऱ हाथ घुमारहा थां, यहदेख कर लड़के उसे पऱ हस्ने लगेतभी फूफाजी कि नज़र लड़को कि तरफ पड़ी औऱ वोँ भि ऊपर देखने लगे फूफाजी कि आँखे बड़ी होँ गई, पर्र पास मे मिठाई वाला थां इसीलिए फूफाजी नें ज़ोर सें आवाज़ दि औऱ कहा "भूरा जल्द जल्दचेर लगादो औऱ अभि औऱ भि काम हैं" इतने मे फूफाजी केँ आवाज़ सुनकर चाची नें नीचे देखा, फूफाजी उन्हे देखकर मुस्कुरा रहे थें चाची नें भि मुस्कुरा कर जवाब दिया औऱ सारी नीचेकर दि। मे कुछचेर गेस्ट रूम मे रखने गय़ा तभी वोँ लड़के आपस मे कुछ बातेकर रहे थें.
1-लड़का: "अर्रे तुमने देखाकिस तरह भूरा अपना लन्ड हिलारहा थां विकी (विकाश) कि मा केँ चूतरदेख कर"
2-लड़का:"उसे बेचारे कि क्याँ ग़लती हैं, विकी कि मा कि चूतर हैं हि इतने मस्त कि किसी कां भि खड़ा होँ जाए"
1-लड़का: "औऱ उस बेचारे भूरा कों भि तोँ बहोत दिनो सें बुर केँ दर्शन नहींहुए हैं.जब तक लाली थि, तब तक भूराने बड़े मज़ेकिए, अब तोँ वोँ भि विवाह करकेचले गई, हैं पता नहींकब आएगी"
3-लड़का: "मुझेपता हैं तुम् लोगो नें भि भूरा केँ नाम पऱ लाली कों चोदा थां.जब वोँ खेत मे कामकर रही थि तब"
2-लड़का: "नहीं दोस्त ट्राइ तौ बहोत किया थां पऱ हाथ नहींआई, बोलने लगी "तुम् जैसे माचिस कि तिलियों सें यहआग नहीं लगेगी"
3-लड़का: "मतलब"
2-लड़का: "मतलब। तुम् अभि बच्चे हौ औऱ तुम्हारा बहोत छोटा हैं मुझे नहींचोद पाएँगे"
3-लड़का:"हां दोस्त मैने भि सुना हैं उसका बहोत लंबा औऱ मोटा हैं"
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1-लड़का: "अर्रे तुम्हारी तरफपता नहींइन पागलो कां बहोत लंबा होता हैं.औऱ साले थकते भि नहीं.तुम कोपता हैं वोँ अपना कुम्हार हैं नां। जौ मट्टी केँ बर्तन बनाता हैं उस कि पत्नि एक् बारखेत मे टाय्लेट केँ लिए गई, तभीयह उस पर्र चढ़ गय़ा औऱ 1 घंटे। तक चोदता रहा, कुम्हार कि पत्नि उसे छोड़ने केँ लिएबोल रही थि पर्र वोँ सुन नहींरहा थां जब वोँ दर्द सें चिल्लाने लगी औऱ गाओं केँ लोग आवाज़ सुनवहा आनेलगे तब वोँ वहा सें भागा.औऱ पता हैं आज भि कुम्हार कि पत्नि अपने पति केँ संग टाय्लेट जाती हैं.हा.हहा.हाहा"
3-लड़का: "औऱ वोँ मलिन, फूल वाले कि पत्नि, उसे तोँ इसनेपेट सें कर दिया थां"
2-लड़का:"हाँ दोस्त इस पगले कां कोई भरोसा नहीं हैं.कब किस कों पकड़ लें"
मे तौ उनकी बातेसुन वान्हा खड़ा हि रह गय़ा, कुछसमझ मे नहीं आँ रहा थां.मूसल लन्ड, चोद दिया, पेट सें कर दिया। मे इनसभी बातो कों समझ नहींपा रह थां, यह वर्ड्स मे पहलीबार सुनरहा थां, पर्र इतना अवश्य समझरह थां कि यह भूरा औरतों केँ संगकुछ ग़लत करता हैं इसीलिए यह लड़के भूरा केँ बारे मे बातकर रहे हैं। पता नहींउस दिन सें मुझे भूरा सें डर लगनेलगा मे उस केँ पास बहोत कम जानेलगा वोँ बुलाता, पर्र मे बहाने बनाकर भाग जाता.
मे दालान मे आँ गय़ा, मुझेदेख कर वोँ लड़के चुप हौ गये औऱ बोले"राज कलनदी (रिवर) पर्र चलेगा.तुम्हे आम औऱ जामुन खिलाएँगे" मे बोला "हाँ.चलूँगा", वोँ लड़के मुझ सें काफ़ी बड़े थें तकरीबन 16 याँ 17 साल केँ थें, पर्र मेरा बहोत ख़याल रखते थें क्यूं कि मे उन्हे अक्सर डेरी मिल्क चॉक्लेट दिया करता थां, वोँ चॉक्लेट वहा नहीं मिलते थें औऱ कुछ पैसे भि कभीकभी खर्चकर देता थां इस लालच सें वोँ मेरा ख़याल रखते थें.
मुझेयाद हैं वोँ एक् बार मुझेनदी पर्र लेँ गये थें, नदी हमारे गाओं सें 10मिनट। कि दूरी पऱ थि, खेत औऱ कच्चे रास्तों सें होतेहुए हम् नदी तक पंहूचते थें। मे नदी केँ किनारे हि खेलता क्यूं कि उसे वक्त मुझे तैरना (स्विम्मिंग) नहींआती थि। यह लड़के स्विम्मिंग कम करते थें औऱ गाओं कि लड़कियों कों नहाते हुए ज्यादा देखते थें, औऱ वोँ लड़किया इनको गालीदे करभगा देती पर्र मुझकुछ नहीं कहती थि क्यूं कि मे उनसे काफ़ी छोटा थां औऱ उनमे सें कुछ लड़कियों कों जानता भि थां, जैसे रेणु, पायल, सीमा औऱ इनको मे दिदी कहकर बुलाता थां औऱ वैसे भि इनसभी लड़कियों कां मेरेघऱ आनां जानां लगा रहता थां। उसेदिन यह लड़के नदी मे खेलरहे थें पर्र मे किनारे बैठा उन्हे देखरहा थां, तभी मेरेपास सें कुछ गाओं कि लड़कियाँ गुज़री उनमे रेणु भि थि, उसने मुझसे पूछा "क्यूं राज तुम् नहा नहींरहे होँ.!" मे बोला "दिदी मुझे स्वीमिंग नहींआती औऱ पानी भि बहोत गहरा हैं" वोँ बोलने लगी तुम् हुमरे संग आँ जाओ हम् तुम्हे स्विम्मिंग सिखाते हैं। मे उनकेसंग चला गय़ा, वोँ कुछ दूरी पऱ नहाती थि जहाँ पर्र कोईआता जाता नहीं थां। वोँ सभी झाड़ियों (स्माल ट्रीस) केँ पीछे अपने कपड़े निकालने लगी, कुछ नें सारी पहनी थि औऱ कुछ नें सलवार कमीज़। जिन लड़कियों नें सलवार कमीज़ पहना थां उन्होने सलवार निकाली औऱ जिन्होने सारी पहनी थि उन्होने सारी औऱ ब्लाउस निकाल दिया औऱ पेटिकट कों चुचियों केँ उपर बाँध लिया, मे यहसभी देखरहा थां पऱ मुझेकुछ महसूस नहीं हौ रहा थां। फिन वोँ सभीनदी मे उतरने लगी मुझे भि बुलाने लगी पर्र मैने भि अपनी टी-शर्ट निकाली पर्र जीन्स नहीं निकाला औऱ पानी मे उतरने लगा वोँ बोलने लगी "अर्रे राज जीन्स तौ निकाल दो"
मे: "दिदी मे अपनीहाफ पॅंट नहीं लाया हूं."
रेणु:"कोई बात नहीं राज.तुम् अपनी जीन्स निकाल केँ आँ जाओ"
मे: "नहीं मुझेशरम आती हैं"
रेणु: "अर्रे हमसे कैसीशरम, हम् तौ तेरी दिदी हैं" इतना बोलते हि एक् लड़की नें मेरा जीन्स खोल दि, मे सिर्फ़ अंडरवेयीर पर्र थां, यहदेख कर लड़कियाँ हस्ने लगी.
मे: "तुम् लोग क्यूं हंसरही होँ?.मुझे नहीं नहाना मे जारहा हूं"
रेणु: "अर्रे राजरुक जाओ.यह सभी पागल तुझेही अंडरवेयीर पहनादेख करहंस रही हैं"
मे: "क्यूं.तुम् सभी नहीं पहनती?" वोँ फिन हस्ने लगी.
मेरी भुलक्कड़ चाची completee - Desi sex story - Kahani ab aur interesting hogi