मेरी मां और परिवार की चुदाई कहानी (incest + adultery) - Parivaar Ki Chudai - Episode 1
यह स्टोरी काल्पनिक हैं जिसका किसी भि जीवित याँ मृत आदमी सें कोई संबंध नहि हैं इस किस्सा मे पारिवारिक रिश्तों मे वासना कों दर्शाया गय़ा हैं इसलिये अगर किसी कों ऐसी कहानियां पसन्द नहि हैं वोँ नं पढ़े।
तोँ यहकथा शुरुआत होती हैं चंदनपुर देहात सें, यह देहात घने जंगलों सें घिराहुआ हैं यह देहात उत्तर भारत मे स्थित हैं इस देहात केँ अधिकतर लोग खेती औऱ जानवरों पऱ निर्भर हैं औऱ कुछ चुनिंदा लोग व्यापार भि करते हें यह देहात नं तोँ अधिक पिछड़ा हैं औऱ नं हि बिलकुल मॉडर्न हैं इस देहात केँ अपने नियम औऱ कानून हें।
अब चंदनपुर केँ मुख्य परिवार केँ बारे मे जान लेते हें।
बलवान, २१साल कां जवान लड़का, चंदनपुर कां एक् मेहनती नौजवान हैं, बलवान कां चेहरा मासूम हैं मगर उसका शरीर तगड़ा, चौड़े कंधे, मजबूत बाजू, औऱ मर्दाना सीना। बलवान अपने बापू कि डेयरी फॉर्म पऱ काम करता हैं गायों कों चारा देता हैं, दूध निकालता हैं औऱ अपनी दिदी केँ संग डेयरी फॉर्म कि देखभाल करता हैं।
लीलावती, ४३साल कि, बलवान कि मम्मी, चंदनपुर कि सबसे हसीन महिला हैं उसका शरीर गदराया हुआ हैं औऱ चेहरा ऐसा कि उम्र कां अंदाज़ा लगाना मुश्किल हैं, लीला कि मुस्कान मे मासूमियत हैं मगर उसकी आँखों मे एक् ऐसीआग हैं जोँ किसी कि भि उसका दीवाना बना सकती हैं।
आलोकनाथ, ४६साल केँ, बलवान केँ पिता, चंदनपुर केँ सबसे अनुभवी किसान हें उनका जिस्म तगड़ा हैं वोँ खेतों कां काम देखते हें, गायों कि देखभाल करते हें औऱ गाँव कि पंचायत मे बैठकर फैसले सुनाते हें उनकी आवाज़ मे दम हैं, गाँव मे उनकी इज्जत हैं औऱ उन्हें हल्का–फुल्का मजाक करने कि आदत हैं।
नंदिनी, २४साल कि, बलवान कि दिदी, डेयरी फॉर्म कि मुख्य कर्ता-धर्ता, उसका शरीर हसीन हैं औऱ चेहरा ऐसा कि गाँव केँ लड़के उस पऱ फिदा हें वोँ चंदनपुर कि पढ़ी–लिखी लड़की हैं उसनेशहर केँ कॉलेज सें पढ़ाई कि हैं नंदिनी कि मुस्कान मे एक् रहस्य हैं जौ कोईसमझ नहि पाता।
मेरी मां और परिवार की चुदाई कहानी (incest + adultery) - Parivaar Ki Chudai – New Episode
अध्याय १
चंदनपुर कि साम धीरे धीरे गहराती जारही थि। गाँव कि गलियाँ अब खाली होँ चुकीथीं, सूरज खेतों केँ पीछेडूब चुका थां, औऱ हवा मे ठंडकफैल रही थि औऱ घरों सें चूल्हों कां धुआँ उठताहुआ दिखरहा थां। चंदनपुर मे दिन कि मेहनत केँ बादलोग अपने घरों मे लौटआते थें अलोकनाथ औऱ लीलावती कां घऱ अभि भि गर्माहट सें भरा थां उनकारूम, घऱ केँ पीछे कि तरफ, छोटामगर आरामदायक थां। दीवारों पऱ पुरानी तस्वीरें लटकी हुई थीं उनकी विवाह कि, बच्चों केँ जन्म कि औऱ परिवार कि खुशियों कि। कमरे मे एक् बड़ा सां बिस्तर थां, जिस पऱ सूती चादर बिछी हुई थि, औऱ पास मे एक् छोटी सि मेज पऱ लालटेन जलरही थि, जौ कमरे मे हल्की-हल्की रोशनी फैलारही थि। बाहर् दूर जंगल सें आतीहवा कि सनसनाहट मगर अंदर कां माहौल पूरीतरह अलग थां, कमरे कि हवा मे एक् मादक खुशबू थि जौ लीलावती केँ बदन सें आँ रही थि बिस्तर केँ नीचे पुरानी लकड़ी कि आलमारी थि जिसमें परिवार कि यादें भरी हुई थीं औऱ खिड़की सें हल्की हवा आँ रही थि, जौ पर्दों कों हिलारही थि।
अलोकनाथ औऱ लीलावती बिस्तर पर्र लेटेहुए थें। उनकी विवाह कों 25 साल होँ चुके थें, मगरआज भि उनका प्रेम वैसा हि थां जैसे पहलेदिन कां, दोनों कां प्रेम वक्त केँ संग औऱ गहरा हौ गय़ा थां शुरुआत केँ सालों कि मासूमियत सें शुरुआत होकरअब एक् गहरीसमझ औऱ आपसी लगाव मे बदल गय़ा थां।
अलोकनाथ, 46 साल कां तगड़ा किसान, अपनी पत्नि लीलावती कों अपनी मजबूत बाहों मे कसकर पकड़े हुए थां। उसकी छाती नंगी थि, औऱ उसकी धोती नीचेसरक गई थि जिससे उसका मजबूत, तनावपूर्ण लिंगदिख रहा थां उसकी बाजूएँ, जोँ दिनभर खेतों मे काम करने सें कड़ी हौ गई थीं, लीलावती कि कमर पऱ लिपटी हुईँ थीं। उसका चेहरा, जौ दिनभर कि थकान सें भरा थां अब प्रेम कि गर्माहट सें चमकरहा थां उसकी आँखें, जौ आमतौर पऱ गाँव कि पंचायत मे सख्त रहतीथीं, अब लीलावती केँ चेहरे पऱ टिकी हुइ थीं औऱ उसकी साँसें तेज़ हौ रहीथीं। उसकी मूंछ औऱ दाढ़ी मे हल्की सफेदी थि मगर उसकी त्वचा अभि भि जवान थि, औऱ उसकेबदन कि महक पसीने औऱ मिट्टी कि मिली हुईँ लीलावती कों हमेशा आकर्षित करती थि। अलोकनाथ कां बदन उसके उम्र सें बहुत ज़्यादा ताकतवर थां औऱ उसकी छाती पऱ हल्के बालउसे औऱ भि मर्दाना बनाते थें।
लीलावती, 43 साल कि, अलोकनाथ कि पत्नि, अर्धनग्न अवस्था मे थि उसकी साड़ी कां पल्लू सरक चुका थां औऱ ब्लाउज केँ बटनखुल गए थें जिससे उसके मोटे मोटे चूचे उजागर हौ रहे थें उसकी मोटी गांड बिस्तर कि चादर पऱ दबी हुइ थि औऱ उसकीकमर अलोकनाथ कि बाहों मे कसी हुई थि उसका सांवला रंग कमरे कि हल्की रोशनी मे चमकरहा थां, औऱ उसके लंबे कालेबाल बिस्तर पर्र बिखरे हुए थें उसकी आँखें बंदथीं औऱ उसके होंठ अलोकनाथ केँ होंठों सें मिलेहुए थें लीलावती कां शरीर बेहद गदराया हुआ थां उसकी भारी छाती जौ अलोकनाथ केँ स्पर्श सें उभररही थि औऱ उसकी जांघें जौ अलोकनाथ कि जांघों सें रगड़खा रहीथीं उसकी त्वचा नर्म थि औऱ उसके जिस्म सें आने वाली सुगंध कमरे मे फैली हुई थि। लीलावती कि साँसें तेज़थीं औऱ उसकी उंगलियाँ अलोकनाथ कि पीठ पऱ फिसलरही थीं जैसे वोँ हर स्पर्श कों महसूस कररही होँ।
दोनों एक्-दूसरे कों चूमरहे थें, उनकी साँसें मिलरही थीं औऱ कमरे मे एक् गरम, अंतरंग माहौल थां। अलोकनाथ नें लीलावती केँ होंठों पर्र अपने होंठ दबाए, औऱ उसकी गर्दन पर्र चूमते हुए नीचे कि तरफ बढ़ा उसकी उंगलियाँ लीलावती कि कमर पऱ फिसलरही थीं औऱ वोँ उसके जिस्म कि हर वक्र कों महसूस कररहा थां। लीलावती कि कराह निकली, "आजफिन सें वोँ पुरानां प्रेम महसूस हौ रहा हैं। 25 साल हौ गएमगर ऐसा लगता हैं जैसेकल कि बात हैं। " उसकी आवाज़ मे एक् मिठास थि औऱ उसकी आँखों मे प्रेम कि चमक थि। अलोकनाथ नें मुस्कुराकर कहा, "लीला, तुँ मेरीजान हैं। इन 25 सालों मे हमने कितनी मुश्किलें देखीं खेतों कां सूखा, डेयरी फॉर्म कि परेशानियाँ, बच्चों कि परवरिश मगर हमारा प्रेम कभीकम नहि हुआ। तुँ मेरी ताकत हैं" लीलावती नें उसकी छाती पर्र हाथ फेरा, औऱ उसके निप्पल्स कों सहलाया। "स्स्स आपकीयह मजबूत छाती, यह बाजूएँ मुझे हमेशा सुरक्षित महसूस कराती हें। याद हैं, विवाह केँ पहलेदिन जब आप् मुझेरात मे ऐसे हि बाहों मे लिए थें?" अलोकनाथ नें हँसते हुएकहा, "हाँ लीला, वोँ रातयाद हैं तब हम् जवान थें, औऱ अब भि हें। टाइम नें हमें औऱ लगभगला दिया हैं। "
दोनों कि बातें पुरानी यादों मे खोगईं। लीलावती नें अलोकनाथ कि गर्दन पर्र चूम लिया, औऱ उसकी उंगलियाँ उसकीपीठ पर्र खरोंच मारने लगीं। अलोकनाथ कि साँसें तेज़ होँ गईं, औऱ वोँ लीलावती कि साड़ी कि गांठ खोलने लगा। "लीला, तुँ कितनी हसीन हैं, तेरीयह कमर मुझे पागलकर देती हैं। " लीलावती नें अपनी आँखें बंदकर लीं, औऱ उसकी सिसकी कमरे मे गूँजने लगी। "आप् मुझे चूमो औऱ ज़्यादा लगभगआओ। " अलोकनाथ नें उसकी साड़ी पूरीतरह उतार दि औऱ उसका नंगा जिस्म उसके सामने थां उसके मोटे मोटे चूचे, मोटी गांड़ सभी अलोकनाथ कों ललचारहे थें। वोँ उसकी छाती पऱ चूमने लगा औऱ उसके निप्पल्स कों मुँह मे लेँ लिया। लीलावती कि हल्की चीख औऱ तेज़ होँ गई, "अहह, धीरे-धीरे सें। कितना मज़ा आँ रहा हैं। " उसकी उंगलियाँ अलोकनाथ केँ बालों मे फँसी हुई थीं, औऱ वोँ उसकेसिर कों अपनी छाती पर्र दबारही थि। अलोकनाथ कि जीभ उसके निप्पल्स पर्र घूमरही थि, औऱ उसकाहाथ उसकी योनि कि तरफबढ़ रहा थां। "लीला, तूँ गीली हौ गई हैं, " वोँ बोला, औऱ उसकी उंगली उसकी योनि मे डाल दि। लीलावती कि अहह निकली, "अहह औऱ अंदर डालो"
अलोकनाथ नें अपनी धोती उतार दि, औऱ उसका तनावपूर्ण लिंग बाहर् आँ गय़ा उसका लिंग मोटा औऱ लंबा थां, औऱ वोँ लीलावती कि जांघों पर्र रगड़ने लगा। लीलावती नें उसे पकड़ लिया, औऱ सहलाने लगी। "आपका कितना सख्त हैं जल्द सें मुझेयह अंदर चाहिए। " अलोकनाथ नें लीलावती कि टांगें फैलाईं, औऱ अपना लिंग उसकी योनि मे घुसेड़ दिया। लीलावती कि चीख निकली, "अहह, जोर सें चोदो मेरे राजा" दोनों कि साँसें तेज़ हौ गईं, औऱ अलोकनाथ नें धक्के लगाने शुरुआत किए। बिस्तर कि चरमराहट कमरे मे गूँजरही थि, औऱ उनकी सिसकारियाँ मिलकर एक् म्यूज़िक बनारही थीं। लीलावती कि आँखें बंदथीं, औऱ वोँ अलोकनाथ कि पीठ पर्र नाखून गड़ारही थि, अलोकनाथ कि गति बढ़ी, औऱ वोँ लीलावती कि छाती कों चूमते हुए बोला, "लीला, तूँ मेरी जीवन हैं। " कमरे मे पसीने कि गंधफैल गई थि, औऱ दोनों कां जिस्म एक्-दूसरे सें चिपका हुआ थां। अलोकनाथ कि बाजूएँ लीलावती कि कमर पऱ कसी हुइ थीं, औऱ उसकी जांघें उसकी जांघों सें रगड़खा रहीथीं। लीलावती कि सिसकारियाँ औऱ तेज़ हौ गईं, "अहह, मे आने वाली हूं। औऱ जोर सें। रुकना मत" अलोकनाथ नें अपनी रफ्तार औऱ बढ़ाई, औऱ दोनों कां जिस्म काँपने लगा।
चुदाई केँ बीच मे, जब दोनों कां उत्साह चरम पर्र थां, अलोकनाथ नें लीलावती केँ कान मे फुसफुसाया। "लीला, सुनो मेरी एक् ख्वाहिश हैं, मे तुम्हारी तरफदो लन्ड कां सुख देना चाहता हूं। " लीलावती, जोँ अभि गर्मी मे डूबी थि, नें हँसते हुएकहा, "आप् पागल हौ गए होँ? यह क्याँ बातकर रहे हौ?" अलोकनाथ नें अपनीगति जारी रखतेहुए कहा, "नहि लीला, मे सचकहरहा हूं। मे चाहता हूं कि किसी औऱ मर्द केँ संग तेरी दोहरी चुदाई करूँ। तुम्हे वोँ सुखदूँ जौ तुँ कभी नहि महसूस कि। " लीलावती कि आँखें बड़ी हौ गईं, औऱ वोँ थोडा पीछेहटी मगर अलोकनाथ कि गति सें वोँ रुक नहि पाई। "आपको क्याँ हौ गय़ा हैं? ऐसी बातें क्यूं कररहे हौ?" अलोकनाथ नें उसके चेहरे कों अपने हाथों मे लिया, "लीला, विवाह कों 25 साल होँ गए, हम् हमेशा एक् हि तरह सें जीतेआए हें। अबकुछ नया करना चाहिए, जिंदगी मे थोडा रोमांच लाना चाहिए। "
लीलावती नें सिर हिलाया मगर उनकी अंतरंगता जारी थि। "मगर हम् रोलप्ले मे तोँ सभीकुछ करते हें वोँ कल्पनाएँ उसमें तौ आनंदआता हैं मगर असलियत मे ऐसा जोखिम उठाना ठीक नहि हैं। " अलोकनाथ नें पूछा, "जोखिम कैसा?" लीलावती नें सोचते हुएकहा, "इसबात कि क्याँ गारंटी हैं कि कल कों कोई हमें ब्लैकमेल नहि करेगा? याँ गाँव मे किसी कों बता दिया तौ? हमारी इज्जत मिट्टी मे मिल जाएगी? औऱ हमारे बच्चे नंदिनी औऱ बलवान अगर उन्हें पताचल गय़ा तौ क्याँ होगा? वोँ हमेंकभी माफ नहि करेंगे, हमारा घऱटूट जाएगा। " अलोकनाथ नें उसकीबात सुनी, औऱ थोडा सोचा, मगर उसकीगति धीमी नहि हुई। "लीला, तूँ ठीकबोल रही हैं मगरअगर सभीकुछ गुप्त तरीके सें होँ तौ क्याँ तुँ रेडी हैं?" लीलावती नें थोडा सोचा औऱ फिन बोलि, "मुझे लगता कि फिलहाल मे किसी औऱ मर्द केँ लिए रेडी नहि हूं, मुझे थोडा वक्त दीजिए"
अलोकनाथ नें मुस्कुराकर कहा, "मुझे भि थोडा वक्त लगेगा ऐसे किसी मर्द कों तलाश करने मे जिससे नं तौ ब्लैकमेल कां डर होँ, न् हि बदनामी कि चिंता हौ औऱ सभीकुछ गुप्त रहे। " लीलावती नें कहा, "मगर वोँ मुझे भि मनपसंद आनां चाहिए" अलोकनाथ नें लीलावती कों छेड़ते हुएकहा, "तुँ तोँ दो लंड सें चुदवाने केँ ख्वाब भि देखने लगी" लीलावती गुस्से सें बोलीं, "अरे!कुछ भि, मेरा मतलब थां कि वोँ जैसा भि होँ मगर धोखेबाज नहि होना चाहिए अगरकुछ ऊंच–नीच हौ गई तोँ?" अलोकनाथ नें हँसते हुएकहा, "लीला, तुँ इतनामत सोच, तुँ बस स्वयं कों सजधजकर रखना" लीलावती शर्मा गई औऱ बोलि "मे कोशिश करूंगी मगर आप् पीछेहट गए तौ" आलोकनाथ नें लीलावती केँ गाल चूमते हुएकहा "मेरा तोँ सपना हैं लीला, तुँ सोचअगर एक् लंड तेरी बुर मे हौ औऱ दूसरा लंड तेरी गान्ड मे तौ तुम्हारी तरफ कितना मज़ा आएगा?" लीलावती कुछ नहि बोलीं औऱ दोनों फिन सें एक्-दूसरे मे डूबगए, उनकी साँसें तेज़ हुईं औऱ वोँ चरम तक पहुँच गएफिन थककर एक्-दूसरे सें लिपटकर सोगए।
maa kee cht mai kisi bahar wale kaa lund ghuswqna sali raaand kee damsar chudayi karwana maa k liye too bahar wala loda best hotha he
मेरी मां और परिवार की चुदाई कहानी (incest + adultery) - Parivaar Ki Chudai – New Episode
अध्याय २
चंदनपुर कि दोपहर गर्मी सें तपरही थि औऱ गंगा केँ किनारे कां तालाब एक् शांतमगर मादक माहौल मे डूबा थां। तालाब कां पानी सूरज कि किरणों मे चमकरहा थां औऱ हवा मे मछलियों कि हल्की-सि महक केँ संग मिट्टी कि सोंधी खुशबू मिलरही थि। आसपास केँ पेड़ों कि छाँव मे पक्षियों कि चहचहाहट थि औऱ तालाब केँ किनारे झाड़ियाँ हवा मे सरसरा रहीथीं औऱ पानी कि सतह पऱ छोटी-छोटी लहरें उठरही थीं। तालाब कां पानी इतनासाफ थां कि नीचे तैरती मछलियाँ दिखरही थीं औऱ किनारे पर्र कुछ कंकड़-पत्थर बिखरे हुए थें। यहीं, तालाब केँ एक् किनारे, एक् बड़े पत्थर पर्र बलवान औऱ उसका सबसे पसंदीदा साथी राहुल बैठे मछलियाँ पकड़रहे थें। उनके हाथों मे पुरानी डोर औऱ काँटे थें औऱ एक् टोकरी मे कुछ छोटी-मोटी मछलियाँ प्यास रहीथीं।
बलवान, 21 साल कां तगड़ा जवान, काली टी-शर्ट औऱ पजामा मे थां उसका जिस्म पसीने सें तर थां, औऱ टी-शर्ट उसकी चौड़ी छाती औऱ मांसल बाजुओं सें चिपकी हुई थि जिससे उसकी मांसपेशियाँ साफउभर रहीथीं उसकी आँखों मे एक् शरारती चमक थि औऱ उसके होंठों पऱ हल्की मुस्कान थि। राहुल, 21 साल कां, पतलामगर फुर्तीला, सफेद शर्ट औऱ पजामा मे थां उसका चेहरा हँसमुख थां औऱ उसकी आँखें बार-बार तालाब केँ पानी कि तरफजा रहीथीं, दोनों यार गपशप मे डूबे थें, औऱ उनकी हँसी तालाब केँ शांत माहौल मे गूँजरही थि।
बलवान औऱ राहुल कि दोस्ती गहरी थि, साम कों मछली पकड़ने तालाब पर्र आनां उनका रिवाज थां। राहुल कि मम्मी सुधा, 43 साल कि विधवा, गाँव कि सबसे आकर्षक औरतों मे सें थि वोँ घऱ संभालती थि राहुल अपनी मम्मी सुधा केँ संग अपने नानाजी प्यारेलाल औऱ मामाजी बृजेश केँ संग रहता थां। आज राहुल कां दिल कहीं औऱ थां, वोँ बार-बार इधर-उधर देखरहा थां जैसे किसी कां इंतजार कररहा होँ। बलवान नें पूछा, "क्याँ बात हैं, राहुल? तूँ इतना बेचैन क्यूं हैं?" राहुल नें हँसकर टाल दिया, "कुछ नहि, बस थोडा थक गय़ा हूं। " मगर उसकी आँखों मे एक् शरारत थि।
तभी तालाब केँ पास कि झाड़ियों सें एक् हल्की-सि सरसराहट सुनाई दि औऱ नंदिनी वहा सें निकली। नंदिनी, 24 साल कि, लाल सलवार-कमीज मे थि उसका सफ़ेद चेहरा चमकरहा थां औऱ उसकी आँखें उत्साह औऱ शरारत सें भरीथीं उसकी सलवार-कमीज उसके मादकबदन पर्र स्लिम थि औऱ उसकीकमर कि हल्की-सि झलकदिख रही थि उसकी छातियाँ सलवार मे कसी हुई थीं औऱ उसकीचाल मे एक् कामुक अदा थि।
बलवान नें नंदिनी कों देखा औऱ चौंक गय़ा, "दिदी! तूँ यहा क्याँ कररही हैं?" नंदिनी नें हँसते हुएकहा, "बलवान, मे बस थोडा घूमने आई थि। " तभी राहुल बोला "बलवान, मेराघऱ जाने कां वक्त होँ गय़ा हैं मे चलता हूं" बलवान नें सिर हिलाया, राहुल नें टोकरी सें कुछ मछलियां उठाकर अपनी पोटली मे रखीं औऱ वोँ तालाब केँ पास एक् बरगद केँ पेड़ कि छांव मे चला गय़ा जहाँ झाड़ियाँ घनीथीं औऱ कोईदेख नहि सकता थां, फिन बलवान नें भि टोकरी सें मछलियां निकालकर अपनी पोटली मे भरी औऱ बोला "दिदी, तूँ मेरेसंग चलेगी याँ थोड़ी देर औऱ रुकेगी?" नंदिनी केँ एक् तिरछी नजर झाड़ियों कि तरफ मारी औऱ बोलि "तूँ चल मे आती हूं थोड़ी देर मे" बलवान केँ जाने केँ बाद नंदिनी नें इधर-उधर देखा औऱ चुपके सें झाड़ियों केँ पीछेचली गई जहां राहुल उसका प्रतीक्षा कररहा थां "राहुल, तुँ तोँ बोलरहा थां कि मछली पकड़ने केँ बादघऱ जाएगा? फिनयहा रुका क्यूं?" उसकी आवाज़ मे शरारत थि औऱ उसकी आँखें राहुल पऱ टिकीथीं। राहुल नें उसकीकमर कि तरफ देखा औऱ बोला, "नंदिनी, तुँ बुलाए औऱ मे नं आऊँ? बलवान कों बहाने बनाकर छोड़ा क्योंकि मेरादिल तुझसे मिलने कों मचलरहा थां। " उसने नंदिनी कां हाथ पकड़ा, औऱ उसे अपनीतरफ खींच लिया। नंदिनी कि साँसें तेज़ होँ गईं औऱ उसका चेहरा लाल हौ गय़ा उसकी छातियाँ कमीज़ मे ऊपर-नीचे हौ रहीथीं औऱ उसकी सलवार सें उसके मादक शरीर कि आकृति उभररही थि।
"राहुल, तूँ बहोत बदमाश होँ गय़ा हैं, " नंदिनी नें हँसते हुएकहा मगर उसकी आँखों मे एक् गहरी चाहत थि। राहुल नें उसकीकमर पऱ हाथरखा औऱ उसे पेड़ कि जड़ कि तरफ लेँ गय़ा। "नंदिनी, तूँ इतनी सुंदर हैं, मे तुझसे नजर नहि हटा पाता, " राहुल नें फुसफुसाते हुएकहा, उसने नंदिनी कों अपनी बाहों मे खींच लिया औऱ उसकीकमर कों कसकर पकड़ लिया। नंदिनी कि साँसें औऱ तेज़ हौ गईं औऱ उसकी छातियाँ राहुल कि छाती सें टकरारही थीं औऱ राहुल कि उंगलियाँ उसकीकमर पर्र फिसलीं औऱ उसने उसकी त्वचा कों सहलाया। नंदिनी कि कराह निकली, "राहुल। कोईदेख लेगा। "
राहुल नें नंदिनी कि आँखों मे देखा औऱ बोला, "नंदिनी, यहांकोई नहि आता" उसने नंदिनी केँ चेहरे कों अपने हाथों मे लिया औऱ उसके होंठों कि तरफ झुका। नंदिनी नें एक् लम्हा केँ लिए झिझका मगरफिन उसकी आँखें बंद होँ गईं। राहुल केँ होंठ नंदिनी केँ नर्म गुलाबी होंठों सें मिलगए, नंदिनी कि साँसें रुकगईं औऱ उसका जिस्म राहुल कि बाहों मे कांपने लगा, राहुल नें अपनीजीभ नंदिनी केँ होंठों पर्र फिराई औऱ उसकी मिठास कों चखा। नंदिनी नें भि जवाब दिया औऱ उसकीजीभ राहुल कि जीभ सें उलझ गई, दोनों केँ होंठ चिपके हुए थें औऱ उनकी साँसें एक्-दूसरे मे मिलरही थीं। चुंबन गहरा होता गय़ा औऱ राहुल कि उंगलियाँ नंदिनी कि कमर सें उसकीपीठ कि तरफ बढ़ीं, उसने नंदिनी कि सलवार कमीज़ केँ नीचे सें उसकी त्वचा कों छुआ औऱ उसकी गर्माहट महसूस कि।
नंदिनी कि चूचियां राहुल कि छाती सें दबरही थीं उसकी चूचियां कसी हुईँ थीं औऱ राहुल कि उंगलियाँ उसकी चूचियों कि तरफ बढ़ीं, उसने हल्के सें उसकी मम्मों कों दबाया औऱ नंदिनी कि कराह निकली, "राहुल। धीरे-धीरे." उसकी आवाज़ मे उत्तेजना थि औऱ उसका जिस्म गरम होँ रहा थां। राहुल नें नंदिनी केँ गले पऱ चूमा, औऱ उसकीजीभ उसकी गर्दन पऱ फिसली, नंदिनी कि साँसें तेज़ हौ गईं औऱ उसने राहुल कि शर्ट कों कसकर पकड़ लिया। "राहुल, यहगलत हैं। मगर इतना अच्छा लगरहा हैं, " नंदिनी नें फुसफुसाते हुएकहा। राहुल नें नंदिनी केँ होंठों पर्र फिन सें चूमा, औऱ इसबार चुंबन औऱ गहरा थां उनकी जीभें एक्-दूसरे सें उलझरही थीं औऱ दोनों केँ जिस्म एक्-दूसरे सें चिपके हुए थें। नंदिनी कि चूचियां राहुल कि छाती सें रगड़खा रहीथीं औऱ उसकी जांघें राहुल कि जांघों सें टकरारही थीं। राहुल कां लन्ड भि सख्त हौ गय़ा थां औऱ उसकी पैंट मे उभार आँ गय़ा थां, नंदिनी नें उसे महसूस किया औऱ उसकी साँसें औऱ तेज़ होँ गईं।
राहुल कि उंगलियाँ नंदिनी कि सलवार कि डोर कि तरफ बढ़ीं औऱ उसने हल्के सें उसकी मम्मों कों सहलाया। नंदिनी नें उसे रोका, "राहुल, बस.अब नहि." मगर उसकी आँखों मे चाहत थि औऱ उसने राहुल कों फिन सें चूमा। दोनों कां चुंबन औऱ गहरा होँ गय़ा औऱ उनकी साँसें एक्-दूसरे मे मिलरही थीं। बरगद केँ पेड़ कि छाँव मे, दोनों कां प्रेम एक् आग बनकर सुलगरहा थां। तभीदूर सें कुत्तों केँ भौंकने कि आवाज़ आई, नंदिनी नें राहुल कों धक्का देकर पीछे हटाया औऱ बोलीं, "राहुल, छोड़.अब मुझेघऱ जानेदे" उसकी साँसें अभि भि तेज़थीं औऱ उसका चेहरा लाल थां। राहुल नें मुस्कुराकर कहा, "नंदिनी, आईलवयू फिन मिलेंगे?" नंदिनी नें शरमाते हुएसिर हिलाया औऱ दोनों अलग-अलग रास्तों सें घऱ कि तरफचल पड़े।
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अगरयह आपकी पहलीकथा हैं तोँ इसलिये लिए हार्दिक शुभकामनाएं। वाकई कमाल कां परिदृश्य रचा हैं आपने.
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