मेरी रंडी बहन उसकी ननद और बीबी की चुदाई - शानदार - Full Story Part 1
मै शादीशुदा हूं, उम्र 34 सालहे, पत्नि जूही 32 भि भरपूर सुख देती हैं। मेरी एक् छोटी बेहन नेहाहे हे जौ मुझसे आयु मे 4 साल छोटीहे विवाह भि होँ चुकीहे उसके परिवार मे पति नितिन केँ आलावा छोटी ननदी अदिति हे जौ 12वी क्लास मे पढ़तीहे
मेरी औऱ नेहा कि विवाह सें पहले हम् दोनों भइया बेहन मे अच्छी बनती थि हम् दोनों मे मजाक भि, भि खूब होता थां, बड़े भइया होने केँ बाद भि नेहा कि जवानी कों ताड़ता रहता थां नेहा बेहद हसीन औऱ आकर्षक फिगर कि मालकिन थि, वोँ हमेशा हि पतली दुबली रही, उसकी चुँचियाँ भि छोटी छोटीथीं, मगर एक् बारजब उसने जवानी कि दहलीज पऱ कदमरखा, तौ उसकी गाँड़ पर्र गजब कां उभार आँ गय़ा, उसकी टाँगें लम्बी औऱ सुडौल होँ गयीं
मे अक्सर उसके बूब्स औऱ चूतड़ों कों ताड़ता रहता थां, उसकी पेंटी कों देखदेख मूठ भि मारता, रहता थां। कभी खुशी सें जब वोँ मेरेगले लगती औऱ उसके बूब्स मेरे सीने सें टकराते तौ मेरा लोडातन जाता
इंसान कि फितरत होती हैं कि उसे जितना भि मिलता हैं थोडा हि लगता हैं औऱ सेक्स केँ मामले मे तोँ मर्दों कि भूखकभी भि शांत नहि होती हैं।
मे भि कोई अपवाद नहि हूं, अच्छी ख़ासी हसीन पत्नि केँ होते हुये भि मैंने इधरउधर बहोत मुँह मारने कि कोशिश कि मगर मुझेकभी सफलता नहि मिली।
वैसे तौ मे अपने रिश्तेदारों केँ घऱ बहोत हि कम जाता हूं, क्योंकि वहा जाकर मुझे अपनी हि रिश्तेदारी मे नईनई चूतें, अलग साइज़ कि मोटी गाँड औऱ बोबे दिखते हें तोँ मेरा लन्ड मचलने लगता हैं।
मगर पिछले दिनों मेरी बेहन नेहाघऱ आयी तौ उसकेसंग उसकी ननदी अदिति भि थि, नितिन 10 -12 दिन केँ लिए बाहर् गयेहुए थें तौ नेहा अपनी ननदी कों लेकर हमारे घऱचली आयी
कोई 18 साल कि पतली दुबली सि लड़की, साधारण सां चेहरा मोहरा, हाइट मुश्किल सें 5 फीट 1 याँ 2 इंच। उसने कालेरंग कि टाईटटी शर्ट औऱ नीचे सें जीन्स कि मिनी स्कर्ट पहनरखी थि।
औऱ मिडल क्लास फ़ैमिली कि लड़कीअब मिनी स्कर्ट मे अपनी टाँगें तौ दिखा नहि सकती तौ टाँगों कों ढकने केँ लिए उसने स्कर्ट केँ नीचे सें एक् काली स्लेक्स पहनरखी थि।
अब अपनीतरफ सें तोँ उसनेसभी ढककर अपना मिनी स्कर्ट पहनने कां शौक पूरा किया थां, मगर मेरे जैसे बंदे नें तोँ इसी मे बहोत कुछदेख लिया।
स्किन टाईट स्लेक्स होने केँ कारण मुझेपता चल गय़ा कि उसकी टाँगें औऱ जांघें कितनी मोटी हें।
टाईटटी शर्ट नें बता दिया केँ उसकापेट कितना सपाट हैं औऱ बूब्स कां साइज़ क्याँ हैं।
औऱ जब मुझे नमस्कार कहकर वोँ वापिस गई, तौ उसकी मस्तानी चाल नें उसके चूतड़ों कां साइज़ औऱ मटक दिखा दि। जब वोँ जारही थि तौ मैंयही सोचरहा थां कि अगर इसके स्कर्ट केँ नीचेयह काली स्लेक्स न् पहनी होती तोँ इसकी नंगी टाँगें कितनी सुंदर लगती, औऱ अगर स्कर्ट हि नं पहनी होती काली स्लेक्स मे सें इसके छोटे छोटे चूतड़, हिलते हुये मटकते हुये कितने प्यारे लगते।
खैर मैंने उसे देखा भि बहोत अरसेबाद थां, शायद 5-6 सालबाद। इस दौरान वोँ ज्यादा लंबी याँ तगड़ी तौ नहि हुइ, मगर उसके कूल्हों औऱ बूब्स कां साइज़ अवश्य बढ़ गय़ा थां। मगर लगतीअब भि वोँ छोटी सि हि थि, क्योंकि दुबला शरीर औऱ छोटा हाइट उसको छोटा हि दिखारहा थां।
मे भि सोचरहा थां, कॉलेज मे पढ़ती हैं, बॉय फ्रेंड होगा इसका याँ नहि? अगर होगा तौ इसनेकुछ किया होगा याँ नहि? चुदी हुइ तौ नहि लगती हैं, पहलीबार लगाअगर मुझसे चुदजाए तोँ मजा आँ जाए ज़िंदगी कां।
मगरये तोँ संभव नहि थां, वोँ अपनी उम्र कां लड़का छोड़कर मुझ जैसे सें क्यूं चुदने आएगीभला।
मगरइन दिनों मैंने उसके जौ कपड़े पहने देखे, कभी जीन्स-टी शर्ट, कभी कोई कैप्री याँ बरमूडा, जिसमें सें मैंने उसकी घुटने सें नीचे कि नंगी टाँगें देखी, टाँगें भि पूरीतरह सें वेक्स कि हुई थि।
इसी सें मैंने अंदाज़ा लगाया कि अगर इसने टाँगें वेक्स करी हें तोँ बगल औऱ बुर केँ बाल भि अवश्य साफकिए होंगे।
बल्कि एक् दिन वोँ बड़ी ढीली स्लीवलेस टी शर्टपहन कर अपने कपड़े प्रैस कररही थि, तोँ मैंने चोरी सें देखा, केँ उसकी बगलों मे एक् भि बाल नहि थां, बिल्कुल चिकनी बाहें औऱ साफ बगलें।
यही नहि, टी शर्ट केँ गले केँ अंदर सें मैंने पहलीबार उसके आज़ाद झूलते बूब्स भि देखे, बूब्स बढ़िया थें कुतिया केँ…एक् दिन वोँ सोफ़े पर्र सोरही थि, उसकी चादर नीचे गिरी हुईँ थि,
उसकी फ़्रॉक ऊपरचढ़ गई, थि, उसकी जवान जाँघें पूरी नंगी हौ रही थि, औऱ पैंटी उसकेगोल गोल चूतरों कों छुपाने मे असफल थि।
मे एकटकउसे देखता रहा, फिन उसकी आँखें उसकेगोल अर्ध विकसित छातियों पऱ पड़ी,
जोँ फ़्रॉक मे फँसीहुए थें, औऱ छोटी सि घुंडियों कों भि देखरहा थां।
मेरा लन्ड लोअर मेंतन गय़ा।
मैंने सोचा कि अगर मे उसेचोद नहि सकता तोँ नंगी तोँ देख्ना हि देख्ना हैं।
इसी विचार केँ चलते मैंने अपनेघऱ केँ दोनों बाथरूम केँ दरवाजों मे जौ कुंडियाँ लगी थि, उनमें इस हिसाब सें सुराख कर दिये कि देखने कों लगे केँ यह पेंच कसने केँ लिए सुराख किया होगा, बस पेच लगाना रह गय़ा।
मेने कोशिश कि अदिति जब भि बाथरूम जाये तोँ मे उसे नंगा नहाते देखु परन्तु 2 दिन सफलता नहि मिली एक् दिनजब मे मॉर्निंग वाक करकेआया तोँ रूम केँ बाथरूम सें किसी केँ नहाते हुए गुनगुनाने कि आवाज़ आयी, मे बाहर् आया तौ मेने जूही औऱ नेहा कों बात करते देखा मे समझ मे समझ गय़ा अंदर अदिति हे मेनेरूम कों बंद किया औऱ मे चुपके सें बाथरूम केँ दरवाजे केँ पास गय़ा औऱ मैंने सुराख सें अपनीआँख लगाकर अंदर देखा।
शायद अदिति सुराख सें दूर थि, नहि दिखी।
मे थोड़ी देर औऱ आहट लेकर देखता रहा।
लगभग 2 मिनटबाद अदिति सामने आई, मगर उसकीपीठ मेरीतरफ थि, गोरीपीठ पानी सें भीगी हुइ। पीठ केँ नीचेदो गोल एकदमगोल चूतड़।
सच मे कुँवारे जिस्म केँ नज़ारे नें तौ मेरेतन शरीर मे आगलगा दि, मैंने अपना लन्ड अपनेहाथ मे पकड़ लिया औऱ मन हि मन बुदबुदाया- अदिति मेरीजान, पीठ नहि, पीठ नहि, मुझे तेरे बोबे औऱ तेरी बुर देखनी हैं, इधर कों घूम मेरीजान, औऱ अपने कुँवारे शरीर कां जलवा दिखा।
मगर वोँ तब नहि घूमी।
जब उसने अपनी टाँगों पऱ तौलिया फेरातब उसने मेरीतरफ घूमकर अपनी एक् टांग बाल्टी पे रखी औऱ अपनी टाँगों कां पानी सुखाया।
‘उफ़्फ़…’ क्याँ गजब कां नज़ारा थां।
जितने उसके कपड़ों केँ ऊपर सें दिखते थें, उसके बोबे तौ उससे भि बड़े थें, गोल औऱ खड़े, छोटे छोटे भूरेरंग केँ निप्पल।
नीचे सपाट पतला सें पेट, कटावदार कमर, औऱ कमर केँ नीचे बिल्कुल साफ, हल्के सें बालों वाली छोटी सि बुर, जिसे मे सारी उम्रचाट सकता थां।
छोटी सि बुर कि छोटी सि दरार, मगर बहोत हि चिकनी मगरदो मांसल जांघें।
सच उसकी जांघों कों मैंने चाटचाट कर अपनेथूक सें भिगो देता।
औऱ वोँ थि भि कितनी दूर मुझसे मात्र 6 सें 7 फीट, मगर बीच मे एक् बंद दरवाजा, जोँ शायद मेरेलिए तोँ कभी नहि खुले।
इतना खूबसूरत, कोमल औऱ नाज़ुक बदन मैंने आज तक नहि देखा थां।
निकर केँ अंदर हि मे अपने लन्ड कों सहलाने लगा।
अपने शरीर कों पोंछने केँ बाद उसने ब्रा पहनीगोल, कोमल, नाज़ुक स्तनों कों उसने सफ़ेद रंग कि ब्रा मे छुपा दिया, फिन नीचे एक् नीलेरंग कि कच्छी पहनी, उसकेबाद एक् ढीली सि टी शर्ट औऱ लोअर पहना।
उसके बाहर् आने सें पहले हि मे, उठा औऱ आँ कर अपने कमरे मे बैठकर लैपटाप पे कुछकाम करनेलगा।
थोड़ी देर मे अदिति बाहर् निकली उसने मुझे देखा तोँ चौंक गयीँ,
हैरत सें मुझे देखते हुए वोँ चली गई।
मे उसे जाते देखता रहा, मगर मुझे तोँ वोँ केवल सफ़ेद ब्रा औऱ नीली कच्छी मे अपने चूतड़ बलखाती चली जातीदिख रही थि।
तभीमन मे कुछआया औऱ मे झट सें बाथरूम मे घुस गय़ा।
मैंने देखा कि बाथरूम मे अदिति केँ कपड़े टंगे हुये थें।, मैंने दरवाजा अच्छी तरह सें बंद किया औऱ उसके कपड़े अपने हाथों मे लिए, उसकी ब्रा केँ कप मैंने अंदर सें चाट गय़ा ‘उफ़्फ़…’ इस स्थान पर्र अदिति केँ नाज़ुक नाज़ुक बूब्स लगते होंगे, यहा पे उसके छोटे छोटे निपल घिसते होंगे।
फिन पेंटी उठाई, उसको सूंघा, उसमें सें शायद पेशाब कि हल्की सि बूआई‘अहह, ये अदिति कि कुँवारी बुर सें लगती होगी, ये जब वोँ पेशाब करके उठती होगी तोँ उसकी बुर मे सें टपकने वाली आखरी बूंदें इस चड्डी मे लगती होंगी!’
औऱ मे उसकी उसकी चड्डी कों भि सूंघते सूंघते चाट गय़ा।
जहाँ पर्र उसकी छोटी छोटी चूतड़ियाँ लगती होंगी उस स्थान सें भि चड्डी चाटी।
मगर फिन भि मेरामन नहि भरा तौ मैंने अपना लोअर नीचे किया औऱ अपना लन्ड निकाल कर उसकी चड्डी औऱ ब्रा पे घिसाया औऱ ये फीलिंग लेने कि कोशिश कि कि मे अदिति केँ बूब्स पे औऱ बुर पे अपना लन्ड घिसारहा रहा हूं।
मगर मेरेपास समय ज्यादा नहि थां। जूही कभी भि आँ सकती थि
उसकेबाद मे बाहर् ब्रेकफास्ट करने आँ गय़ा
अगलेदिन सुभह अदिति जूही औऱ नेहा केँ संग बाज़ार चली गई, उन्हें मंदिर भि जानां थां, मे घऱ पर्र हि थां।
उनके जाते हि मे बाथरूम मे गय़ा, मगर बाथरूम मे अदिति कां कोई कपड़ा नहि थां। मैंने अदिति कां बैग देखा, उसने अपनेसभी कपड़े उस मे हि रखे थें।
मैंने बड़ी एहतियात सें उसके कपड़ों कि जांच कि, साइड कि एक् जेब मे मैंने उसके ब्रा पेंटी देखे, 3 ब्रा, दो सफ़ेद, एक् पिंक।
पिंक ब्रा केँ स्ट्रप भि प्लास्टिक केँ थें।
मैंने उसके ब्रा औऱ पेंटी निकाल केँ बेड पे रखे औऱ स्वयं भि नंगा हौ करबेड पे लेट गय़ा। कभी मे अदिति कि ब्रा कों चूमता, कभी उसकी पेंटी कों, कभी उसके ब्रा पेंटी कों अपने लन्ड औऱ आँड पे घिसता!
जबइससभी सें भि मन नहि भरा तौ तौ आखिर मे ऐसे हि अदिति केँ ब्रा पेंटी कों चूमते चाटते मैंने अपनेहाथ सें मुट्ठ मारी औऱ अपने वीर्य कि कुछ बूंदें मैंने अदिति कि ब्रा पेंटी मे लगा दि, ताकिजब वोँ यह ब्रा पेंटी पहने तौ मेरा वीर्य उसकी बुर औऱ बोबों पर्र लगजाए।
मगरअब मेरामन इससभी सें नहि भररहा थां, मे तौ औऱ चाहता थां तोँ मैंने एक् स्कीम बनाई औऱ बाहर् घूमने कां प्रोग्राम बनाया। हम् सभी एक् अपनेशहर केँ पासबड़े मंदिर कों देखने गए, जहाँ बहोत चलना पड़ता थां। चलाचला केँ मैंने सभी कों थका दिया। साम कों जबघऱ वापिस आए तोँ सबकी हालत खस्ता थि।
खानां भि मे बाहर् सें लाया, खानां खाकर हम् सोनेचले गए औऱ सोने सें पहले मैंने सभी कों एक् एक् गिलास गर्मदूध पिलाया।
दूध मे मैंने कुछ अपनीतरफ सें मिला दिया थां, एक् तोँ थकावट औऱ दूसरा मेरा बनाया मसालेदार दूध, पीने केँ थोड़ीदेर बाद हि सभी लुढ़कगए।
मगर मैंने इंतज़ार करना बेहतर समझा, लगभग 12 बजे तक मे टेलीविज़न देखता रहा, 12 बजेउठ कर मे नेहा केँ बेडरूम मे गय़ा, जहाँ मेरी बेहन औऱ अदिति दोनों बेड पे सोरही थि।
नाईट लैम्प जलरहा थां, मे जाकर अदिति केँ पासबैठ गय़ा, वोँ सीधी लेटी हुईँ थि, मैंने सबसे पहलेउसे जीभरकर देखा, कितनी मासूम, कितनी प्यारी।
फिन मैंने उसकेसिर पे हाथ फेरा औऱ अपनाहाथ उसकेगाल तक लाया।
बहोत हि कोमलगाल थां।
गाल सें मे अपनाहाथ फिरता हुआ नीचे लेँ गय़ा। गले सें होतेहुए, उसके बोबों तक पहुंचा, अपने दोनों हाथों सें उसके दोनों बोबे पकड़े औऱ धीरे-धीरे सें दबा केँ देखे, वोँ वैसे हि सोतीरही।
मे दबाव बढ़ता गय़ा।
जब मैंने कुछ ज़्यादा हि ज़ोर सें उसके बोबेदबा दिये, याँ यूं बोलो केँ निचोड़ हि डालेतब जाकर वोँ हिली।
मतलब वोँ बिल्कुल बेसुध पड़ी थि।
इसीतरह मैंने अपनी बेहन केँ भि बोबेदबा करउसे चेक किया, वोँ भि गहरे गोतेलगा रही थि नींद मे।
मे उठकर गय़ा औऱ दरवाजा अंदर सें लॉक करकेआया, फिन मैंने बड़ी लाईट जलाई, सारारूम रोशनी सें भर गय़ा। अब सबसे पहले मैंने अपने कपड़े उतारे औऱ अपनी बेहन औऱ अदिति केँ बीच जाकरलेट गय़ा औऱ अदिति कि तरफ मुँहकर केँ लेटा। बिल्कुल अदिति केँ संगसट कर, अपना लन्ड मैंने अदिति कि कमर केँ साईड सें लगा दिया। फिन सबसे पहले उसका मुँह अपनीतरफ घुमाया औऱ उसके चेहरे कों चूमा।
‘जानती होँ अदिति, जब भि मे तुम्हें देखता हूं, मेरेमन मे बहोत ख्याल आता हैं, तुमसे प्रेम करने कां, तुम्हें चूमने कां, तुम्हें चाटने कां, सच कहूँ, तोँ तुमसे सेक्स करने कां। तुम्हारा ये 18 साल कां जिस्म मेरेतन मन मे आगलगा देता हैं। मेरी जानेमन आज एक् मौका मुझे मिला हैं, जिसमे मैंने तुम्हें प्रेम तौ कर सकता हूं, पऱ चोद नहि सकता। ’
‘औऱ आज मे तुम्हारे इस सेक्सी जिस्म कि हर गोलाई, हर गहराई औऱ हर एक् कटाव कों देखूंगा औऱ प्रेम करूंगा, औऱ तुमसे ये उम्मीद करता हूं कि तुम् इसीतरह शांत लेटीरह कर मेरासंग दोगी, लव यू माँ स्वीटहार्ट!’कह कर मैंने अदिति केँ होंठों कों चूमा।
मगर उसके होंठ चूमना मुझे थोड़ा मुश्किल लगा तौ मैंने उसकेऊपर हि आँ गय़ा औऱ थोड़ा थोड़ा करके अपनावज़न उस पऱ डाल दिया। जब मे उसकेऊपर लेट गय़ा तौ लगा जैसेउसे थोड़ी दिक्कत होँ रही हैं, सांस लेने मे, मे समझ गय़ा कि मेरावज़न ज़्यादा हैं, तोँ मैंने केवल उसकेऊपर अपने शरीर कों रखा, मग अपना सारावज़न मैंने अपनी घुटनों औऱ कोहनियों पे लेँ लिया।
उसके नर्म नर्म बोबे मेरे सीने सें लगरहे थें औऱ मेरातना हुआकडक लन्ड उसकी सलवार केँ ऊपर सें हि उसकी कुँवारी बुर कों छूरहा थां।
मैंने अदिति कां मुँह सीधा किया औऱ उसके होंठ अपने होंठों मे लें लिए, धीरे-धीरे सें उनको चूसा औऱ अपनीजीभ सें चाटा।
‘वाउ, क्याँ मज़ा हैं, एक् कुँवारी लड़की केँ संग चुपके चुपके चूमा चाटी करने मे!’ मैंने मन मे सोचा।
अपनीजीभ मैंने उसकेबंद होंठों मे घुमाई औऱ उसके मुँह केँ अंदर डालने कि कोशिश कि मगर उसका मुँहबंद थां, मे मात्र उसके दाँत औऱ जबड़े हि चाट गय़ा।
थोड़ीदेर उसके मुँह, गाल, नाक, गले औऱ औऱ सारे चेहरे कों मैंने बड़े प्रेम सें चूमा।
मे उसेचूम चाटकर प्रेम कररहा थां, उसकीहर एक् अदा औऱ बात कों याद करके मे उसे प्रेम कररहा थां।
जब चेहरे सें प्रेम कर लिया तौ मैंने उसके बोबों कि तरफ मुँह किया, मे थोड़ा नीचे कों खिसका, मैंने देखा मेरा लन्ड पूरीअकड़ मे थां। मैंने उठकर पहले अदिति कि कमीज़ कों ऊपर कों उठाया। बेशक कमीज़ थोड़ी टाईट थि, मगर मैंने ऊपरउठा हि दि औऱ गले तक उठा दि। नीचे उसने पिंक ब्रा पहना थां, वही ब्रा जिसमें मैंने सुभह अपने वीर्य कि कुछ बूंदें गिराई थि।
मैंने पहले उसकी ब्रा कों हि हरतरफ सें चूमा, चाटा, अपने हल्के हाथों सें दबाकर देखा। वाउ, कितने सॉफ्ट बोबे थें, बेहद रसीले जैसे मखमल केँ बने हौ। फिन मैंने फोन मे वीडियो कैमरा चालू करके एक् स्थान रख दिया ताकिसाफ वीडियो बने। उसके बाद
दोनों बोबों कों इकट्ठा करके मैंने अदिति कां क्लीवेज बनाया औऱ उसमें अपनीजीभ डाल केँ चाटा।
चाट चाट केँ मैंने उसके क्लीवेज कों अपनेथूक सें गीलाकर दिया।
फिन मैंने नीचेहाथ डाल केँ उसके ब्रा कां हुक खोला, हुक खोलकर उसके ब्रा कों हटाया।
‘अरे…वाउ…’ कितने शानदार बोबे थें उसके, ज़्यादा बड़े तोँ नहि थें मगर थें बिल्कुल गोल, कटोरों जैसे।
औऱ निप्पल हल्के भूरे सें गुलाबी सें, मैंने उसकी छोटी छोटी डोडियाँ अपने मुँह मे लेकर चूसी। बेहद हल्का नमकीन सां स्वाद मेरे मुँह मे आया।
पता नहि उसके जिस्म कां नमक थां याँ फिन मेरे हि वीर्य कां… पर्र बड़ा मज़ेदार लगा।
उसके पूरे बूब्स कों मैंने बड़ी अच्छी तरह सें चाटा, जैसे एक् भि सेंटीमीटर मेरीजीभ केँ चाटने सें बच न् जाए।
बोबे चाटने केँ बाद मे नीचेपेट आँ गय़ा, पेट कों चाटा, कमर केँ आसपास भि अपनीजीभ फिराई, तोँ अदिति कसमसाई, मतलब सोते हुये भि उसे गुदगुदी कां एहसास हुआ थां।
मैंने औऱ देर नं करते हुये, उसकी सलवार कां नाड़ाखोल दिया।
नाड़ाखोल केँ मैंने उसकी सारी कि सारी सलवार हि उतार दि औऱ साइड नें रख दि। उसने पेंटी नहि पहनी थि, तोँ सलवार केँ उतरते हि वोँ बिल्कुल नंगी होँ गई, छोटी सि बुर मेरे सामने थि, गोल चिकनी जांघों केँ बीच मे रखी, मैंने उसके घुटनों सें लेकर उसकी जांघों तक अपने हाथों सें सहलाया औऱ फिन मुँह झुकाकर उसकी बुर कों चूमा।
उसकी बुर पे हल्के बाल थें, जैसे पिछले हफ्ते हि शेव कि हौ, औऱ इतने छोटे बालों सें मुझेकोई प्रोब्लम नहि थि।
मैंने उसके घुटने मोड़े औऱ उसकी टाँगें कमर सें ऊपर कों मोड़ दि औऱ उसके पाँव मैंने अपने कंधों पे रखलिए।
मेरे लन्ड कां टोपा उसकी कुँवारी बुर कों छूरहा थां।
मेरादिल दिया अभि अपना लन्ड उसकी बुर मे डालदूँ। मगरये मौकासही नहि थां, मैंने मात्र अपना लन्ड अपनेहाथ मे पकड़ा औऱ उसकी बुर केँ होंठों पे घिसाया।
घिसाते घिसाते लन्ड कां टोपा उसकी बुर केँ सुराख पे लगा, मैंने कहा- जानती होँ अदिति, ये जोँ सुराख हैं न्, इस सुराख मे एक् दिन तुम्हें मेराये लन्ड लेना हैं। आज केवल अपनी बुर सें मेरेइस लन्ड कों चूमलो ताकिजब ये तुम्हारी बुर मे घुसे तौ तुम्हें दर्द न् हौ।
मेरा बहोत दिलकर रहा थां लन्ड कों उसकी बुर मे डालने कां मगर मे चाहकर भि ऐसा नहि कर सकता थां।
फिन मैंने कुछ औऱ सोचा औऱ नीचेझुक कर अपना मुँह अदिति कि बुर सें लगा दिया औऱ अपनीजीभ उसकी बुर केँ ऊपर औऱ होंठों केँ अंदर सें चाटी।
क्याँ मज़ेदार स्वाद थां उसकी बुर कां… औऱ कितनी प्यारी सि महक आँ रही थि।
मैंने कितनी देर उसकी बुर चाटी, उसकेबाद अपनीजीभ सें उसकीगोल गाँड औऱ रसीली गाँड कां छेद भि चाटकर देखा।
मेरी प्यास बढ़तीजा रही थि, मुझेअब किसी कों चोदना थां, मगरकिस कों चोदता।
मैंने अपना लन्ड अदिति केँ पूरे जिस्म पे फिराया, उसके पाँव कि उँगलियों सें लेकर उसके माथे तक मैंने उसके जिस्म कां हर एक् कोनाचाट लिया, मगर मेरेमन कि प्यास नहि बुझरही थि।
मैंने एक् बारफिन सें अपना लन्ड अदिति कि बुर पे रखा औऱ थोड़ा सां अंदर कों धकेला, मगर वोँ अंदर नहि जारहा थां।
‘हे ईश्वर, अब मे क्याँ करूँ?’ मैंने सोचा।
मेरी तौ हालत खराब होतीजा रही थि। जब औऱ कुछ नहि सूझा तौ मैंने अदिति कि दोनों टाँगे जोड़ीं औऱ ठीक उसकी बुर केँ ऊपर अपना लन्ड रखा औऱ ढेर साराथूक लगाकर उसकी जांघों कों हि धीरे-धीरे धीरे-धीरे चोदना शुरुआत कर दिया। जांघों मे लन्ड कि पकड़ठीक सें बन औऱ चूतका सां हि आभास होनेलगा।
मे बारथूक लगाता रहा औऱ उसकी जांघों मे हि चुदाई करतारहा। लगभग 7-8 मिनट कि चुदाई केँ बाद मे स्खलित होँ गय़ा, मेरा सारा वीर्य अदिति केँ पेट औऱ कमर पर्र फैल गय़ा।
पानीछुट गय़ा तोँ मुझे भि तसल्ली होँ गई।
फिन मैंने अपने हि कच्छे केँ संगसंग अदिति कां पेट औऱ कमर वगैरह साफ कि। उसकेबाद उसे सलवार पहनाई, उसकी ब्रा कां हुक लगाया, शर्ट नीचे केँ औऱ उसे पहले कि तरहठीक ठाक किया।
उसकेबाद अपने कमरे मे जाकरलेट गय़ा, थोड़ीदेर मे नींद आँ गई, मे सो गय़ा।
मेरी रंडी बहन उसकी ननद और बीबी की चुदाई - शानदार – New Episode
[२]
उसकेबाद अदिति केँ संग 2 दिन तक फिन मौका नहि मिला।
जब भि वोँ मेरे सामने आती, मे यही सोचता कि इन होंठों कों मैंने चूसा हैं, इन बोबों कों पिया हैं, जब जीन्स याँ स्लेक्स मे उसकीगोल गोल जांघें याँ चूतड़ देखता तोँ सोचता कि इनमें मैंने मेरा लन्ड फिराया हैं।
तीसरे दिन जूही औऱ नेहा नें मुझे दफ़्तर फ़ोन किया कि वोँ किसी फ्रेंड्स कि जश्न मे जारही हे अदिति घऱ पऱ अकेली हे आप् जल्दचले जानां
मे तोँ ख़ुशी केँ मारे पागल हौ गय़ा औऱ जल्दघऱ भगा, घऱ पहुँचा तौ
वोँ अपने कपडे प्रेस कररही थि
प्रेस उसने मेरेबेड कि साइड वाले स्विच मे हि लगाई थि।
जब वोँ प्रेस कररही थि तब अचानक मेरी नज़र उसकीटी शर्ट केँ अंदर गई। नीचे सें उसने ढीली सि अंडर शर्टपहन रखी थि औऱ टी शर्ट केँ गले मे सें मैंने देखा, तौ छोटे छोटे बड़े प्यारे प्यारे सें मलाई केँ पेड़े झूलरहे हें।
सच मे मुझे उसके चूचे मलाई केँ पेड़ों जैसे हि लगे। मन मे विचार आया कि अगरयह पेड़े खाने कों मिल जाएँ तौ ज़िंदगी कां मकसद पूरा हौ जाए। अचानक अदिति नें मुझसे कहा भैया उसदिन रात कों आप् मेरे क्याँ कररहे थें, कोनसी रात ?मेरी तोँ सिट्टी पिट्टी गम होँ गई,, वोँ कहनेलगी भैया अब मे जवान होँ गई, हू मेरे अंगो कों टच करोगे तोँ क्याँ मुझेपता नहि चलेगा, फिनअगर भाभीजाग जाती तौ क्याँ होता, मेनेकहा सॉरी अदिति मे बहक गय़ा थां, उसनेकहा बहक तोँ मे भि जातीहु पऱ क्याँ करू
थोडा सां सकुचाते हुये मैंने कह हि दिया- तौ कुछकर लियाकरो!
वोँ झट सें बोलि- क्याँ करूँ, हाथ सें करना मुझे मनपसंद नहि, बॉयफ्रेंड कोई हैं नहि, तोँ किस सें करूँफिन?
ये तौ बड़ीसाफ बातकर दि उसने…
मैंने कहा-बॉय फ्रेंड बनालो!
‘नहि…’ वोँ बोलि- बॉय फ्रेंड नहि बनाना, मुझे तोँ कोई तजुर्बेकार इंसान, एक् ऐसा मित्र जिसपे मे यकीनकर सकूँ, वोँ चाहिए, जौ मुझेइस सभी केँ बारे मे सभीकुछ बतासके औऱ मेराकोई गलत फायदा भि नाँ उठाए।
मुझेलगा केँ इसका इशारा मेरीतरफ हि हैं तोँ मैंने कह दिया-ऐसा यार तोँ फिन मे हि हौ सकता हूं।
मेरे चेहरे कि मुस्कान देखकर वोँ भि मुस्कुरा दि।
‘मगर पहले मे सभीकुछ जानना चाहती हूं, उसकेबाद हि मे कुछ करने केँ बारे मे सोचूँगी। ’
मेरे तौ दिल कि धड़कन बढ़ गई- तोँ क्याँ जानना चाहोगी?
मैंने एक् टीचर कि तरह पूछा। उसकेबाद उसने सेक्स केँ बारे मे मुझसे बहोत सें प्रश्न किए, औऱ मैंने भि उसकेहर प्रश्न कां जवाब दिया, बात करते करते लफ्जों केँ बंधन खुलते गए औऱ हम् लिंग सें लन्ड, योनि सें बुर औऱ बूब्स सें चूचे जैसे शब्द भि इस्तेमाल करनेलगे।
उसको बताते बताते मेरा अपना लन्ड मेरे पाजामे मे पूरीतरह सें तन गय़ा। उसने भि देखा, मैंने भि उसेबता दिया- देखोये हैं सेक्स कां असर, तुमसे बात करते करते मेरा भि टाईट हौ गय़ा, क्याँ तुम्हें भि कुछ होँ रहा हैं?
पता तोँ मुझे भि थां कि उसकी बुर भि पानी छोड़रही होगी।
वोँ भि बोलि- हाँ, मे भि गीला गीला महसूस कररही हूं।
अबजब इतनीबात खुल गई, तोँ मैंने उससे पूछा- अदिति क्याँ तुम् मेरा लन्ड देख्ना चाहोगी?
वोँ चुप सि हौ गई, मगर थोड़ी देर सोचने केँ बाद उसनेहाँ मे सर हिलाया।
मैंने कहा- देखो तुम्हें स्वयं हि मेरा पाजामा उतार केँ इसे बाहर् निकालना पड़ेगा।
मैंने कहा औऱ उठकर खड़ा हौ गय़ा।
अदिति नें पहले मेरीतरफ देखा, फिन मेरे पाजामे सें तने हुये मेरे लन्ड कों, औऱ फिन अपने दोनों हाथों सें मेरे इलास्टिक वाला पाजामा औऱ मेरी चड्डी दोनों उसने एक् हि बार मे नीचे सरका दि।
मेरा 8 इंच कां मोटा, काला लन्ड उसके सामने प्रकट हुआ, वोँ आँखें फाड़ केँ इसे देखने लगी।
नें कहा- केवल देखो नहि, इसे अपनेहाथ मे पकड़ो।
उसने एक् हाथ मे पकड़ा, मैंने कहा- दोनों हाथों सें पकड़ो औऱ मजबूती सें, ज़ोर सें पकड़ो!
उसने दोनों हाथों सें ज़ोर सें मेरा लन्ड पकड़ा तोँ मैंने अपनीकमर आगे कों कि औऱ अपने लन्ड कां टोपा बाहर् निकाल दिया।
‘अहह’ मेरेमुख सें निकला- ऐसे हि पकड़े रहो।
मैंने कहा औऱ मे उसके हाथों मे हि अपने लन्ड कों आगे पीछे करनेलगा, मुझेइसी मे चुदाई कां मजा आँ रहा थां।
मैंने पूछा- अदिति, तुमने ब्लू फिल्मों मे देखा होगा, लड़कियाँ केसे लन्ड चूसती हें, तुम् चूसोगी?
वोँ कुछ नहि बोलीं, तौ मैंने अपनीकमर कों धकेलते हुये अपने लन्ड कों उसके मुँह सें लगाया मगर उसने अपना मुँह घूमा लिया।
मैंने अपनी टाँगें हिला हिलाकर अपना पाजामा औऱ चड्डी बिल्कुल उतार दिये औऱ पास मे हि दीवान पे लेट गय़ा- इधर आँ जाओ अदिति
मैंने कहा तौ वोँ आकर मेरे घुटनों केँ पासबैठ गई औऱ उसने बिनाकहे फिन सें मेरा लन्ड पकड़ लिया।
‘इसे हिलाओ अदिति, ज़ोर ज़ोर सें आगे पीछे हिलाओ!’ मैंने कहा, वोँ हिलाने लगी।
उसके चेहरे पे कोईभाव नहि थें, देखने सें लगारहा थां कि वोँ पूरीगरम हैं औऱ इस वक्तअगर मे उसे चोदने कों कहूँ तौ होँ सकता हैं वोँ मुझे चोदने दे।
मैंने कहा- अदिति, मे तुम्हें चोदना चाहता हूं, मेरीजान, अपनी जीन्स उतारो औऱ मेरा लन्ड अपनी बुर मे लेँ लो, प्लीज़ दोस्त!
मैंने कहा तोँ उसनेमना कर दिया।
मैंने फिनकहा- अगर सेक्स नहि कर सकता तौ क्याँ मे तुम्हारी बुर चाट तौ सकता हूं, मुझे बुर चाटना बहोत पसन्द हैं, प्लीज़ बेबी, अपनी बुर मेरे मुँह पे रखदो, मे उसेचाट कर हि संतुष्ट होँ जाऊँगा!
वोँ उठी उसने अपनी जीन्स औऱ पेंटी नीचे कों सरकाई, मगर पूरी नहि उतारी, मैंने देखी झांट केँ छोटे सें गुच्छे मे उसकी कुँवारी बुर कि लकीर…
मैंने अदिति कि बुर कां जायजा लिया, उसकी बुर कां चीराखूब लम्बा थां औऱ बुर केँ होंठ भि खूबभरे भरे सें गद्देदार थें। उसकी पुष्ट कदली जांघों केँ बीच उसकी बुर कां नजारा बेहद शानदार थां। बुर कां भि अपना निराला सौन्दर्य, निराला वैभव औऱ शान होती हैं। जिससे हम् जन्म लेते हें जिसके पीछे सारीउमर भागते हें। जिसके आनन्द केँ सामने सभीसुख फीके हें उसकारूप भि आनंददायक तौ होना हि चाहिए.
मैंने मुग्ध होकर उसकी बुर कों चूम लिया.फिन मैंने धीरे-धीरे सें उसकी बुर कां चीरा दोनों ओर उंगलियां रख केँ खोल दिया; भीतर जैसे जूसी तरबूज कां गहरालाल गूदाभरा हुआ थां; उसकी बुर कां दानामटर केँ आकर कां फूलाहुआ सां थां औऱ भीतरी होंठ मुश्किल सें तीन अंगुल लम्बे रहे होंगे। मैंने उसकेलघु भगोष्ठ भि खोलदिए औऱ उन्हें चूम लिया। अदिति कि बुर केँ भीतरी कपाटबड़े अदभुत लगे मुझे; भीतरी भगोष्ठों केँ किनारों पऱ गहरी काली रेखा सि थि जैसे किसी गुलाबी नाव केँ किनारों पऱ काजललगा दिया हौ याँ जैसे हम् आंख मे अपनी निचली पलक पर्र काजल लगाते हें तौ आंखों कि शोभा औऱ बढ़ जाती हैं; ठीकउसी अंदाज मे अदिति कि बुर शोभायमान होँ रही थि.
वोँ मेरेऊपर लेट गई, मैंने अपनासर उसके घुटनों तक उतरी जीन्स मे फंसा लिया औऱ उसकी बुर कों चूमा औऱ फिन पूरा मुँहखोल कर अपने मुँह मे लेँ लिया, औऱ बसफिन जब मैंने अपनीजीभ उसकी बुर मे घुमई तोँ वोँ तौ उचक गई।
‘क्याँ हुआ?’ मैंने पूछा।
‘बहोत गुदगुदी होती हैं!’ वोँ बोलीं।
‘कोईबात नहि, इसी मे मजा आएगा!’ मैंने कहा औऱ उसने अपनी बुर फिन सें मेरे चेहरे पे रख दि औऱ मैंने फिन सें चाटने लगा।
उसकी बुर सच मे गीली हुइ पड़ी थि। उसकी कुँवारी बुर कां पानी चाटते हुये मे सोचरहा थां ‘क्याँ बात हैं दोस्त, एक् कुँवारी लड़की मुझे मिली हैं, इसको तौ चोदकर ज़िंदगी कां मजा आँ जाएगा। ’
खैर पहले वोँ मेरेऊपर लेटी मेरे लन्ड सें खेलती रही, मगर जैसे जैसे मे उसकी बुर चाटरहा थां, उसका भि उन्माद बढ़रहा थां औऱ फिन तोँ वोँ मेरे लन्ड कों बड़ी मजबूती सें पकड़कर मेरा हस्तमैथुन करनेलगी।
मुझे बहोत मजा आँ रहा थां, मैंने अपनी एक् बाजू सें उसे अपने सें चिपका रखा थां। जितना मे अपनीजीभ सें उसकी बुर कां दाना सहलाता, उसकी बुर केँ अंदर तक जीभडाल कर चाटता, वोँ उतना हि तड़पती, औऱ फिनइसी उन्माद मे उसने बिनाकहे हि मेरा लन्ड अपने मुँह मे लें लिया औऱ चूसने लगी।
ये सुख तौ मुझे बरसों बाद मिला थां, वोँ चूसती गई औऱ मे चाटता रहा, औऱ फिन मेरे तौ फव्वारे छूटगए, लन्ड सें वीर्य कि पिचकारियाँ निकल पड़ी औऱ उसके मुँह केँ अंदर बाहर्, आजू बाजूसभी भिगो दिया।
उसने मुँह सें मेरा लन्ड निकाला औऱ थूथू करके थूकने लगी।
मगर मैंने उसकीकमर कों नहि छोड़ा औऱ उसकी बुर कों चाटता रहा।
कोई 2-3 मिनट औऱ चाटा औऱ फिन वोँ तड़पने लगी-अहह, भैया, खाओजाओ, खाओजाओ इसे, अहह…। मर जाऊँगी मे सच मे, प्लीज़ भैया, औऱ चाटो!
वोँ बोलती गई, अपनी बुर कों मेरे चेहरे पे रगड़ती रही औऱ फिन मेरे वीर्य सें भीगे हुये लन्ड अपने मुँह सें लेकरचूस गई।
बड़ी मुश्किल सें मैंने उसे तड़पती हुइ कों संभाला।
खूब उछली, पटक पटक केँ उसने अपनी बुर मेरे मुँह पे मारी, उसकी बुर सें सफ़ेद पानी केँ टुपके मैंने टपकते हुये देखे, मे वोँ भि चाट गय़ा, फिन वोँ शांत हौ कर मेरेऊपर हि लेटीरही, मगर मेरा लन्ड अब भि उसनेहाथ मे पकड़ा हुआ थां।
कोई 5-6 मिनटबाद वोँ उठी, अपने कपड़े पहने औऱ कहनेलगी भाभीआने वाली होगी औऱ जानेलगी तौ मैंने उसे रोका-अरे दोस्त ऐसेमत जाओ, मेरे कपड़े भि तौ पहनादो। वोँ मुस्कुराई, फिन पहले तोँ बाथरूम सें पानीला कर उसने मेरी जांघें औऱ लन्ड कों अच्छे सें साफ किया, मेरे कपड़े पहनाए, खाटठीक किया औऱ सभीसेट करने केँ बाद जानेलगी तौ मैंने पूछा-रात कों मिलोगी ?
‘अवश्य…’ उसनेकहा औऱ चली गई।
औऱ अब मे रात कां इंतजार करनेलगा औऱ सोचने लगा, अगर आयीआई तोँ क्याँ उसकेसंग सेक्स करके देखूँ, अगर वोँ मान गई तोँ क्याँ वोँ मुझे चोदने देगी। फिन जूही औऱ नेहा कों मे केसेसेट करूमगर उसदिन तक़दीर मुझ पऱ मेहरबान थि जूही कां मेरेपास फ़ोनआया कि दोस्त हमारी फ्रेंड हमेंआने नहि देरही इसलिये हम् रातयही रुकरहे हे तुम् अदिति कां ध्यान रख लेना मेने अदिति कों यह खुशखबरी सुनाई औऱ उसे बांहो मे भरकर चूमने लगा
‘अरे क्याँ बताऊँ दोस्त, तुम्हारे जाने केँ बाद तोँ मे तुम्हारे हि ख्यालों मे खोयारहा!’ मैंने कहा।
‘क्यूं, ऐसा क्यूं?’ उसने पूछा।
मैंने कहा- दोस्त यह इश्क़ होता हि ऐसा हैं!
मैंने कहा तोँ वोँ मुस्कुरा केँ बोलि- क्याँ आपको मुझसे इश्क़ होँ गय़ा हैं?
मैंने कहा-हाँ, मुझे तुम् बहोत प्यारी लगती हौ, कई रातो सें मे तुम्हारे बारे मे सोचता रहा, आई लवयू अदिति !
‘अरे आप् तौ दीवाने होँ गए भैया !’ वोँ बोलीं।
मैंने कहा-हाँ, मे तुम्हारा दीवाना हूं, औऱ आज मे तुमसे सेक्स करना चाहता हूं।
मैंने उसेसाफ साफबोल दिया।
वोँ बोलि- भैया, सेक्स तौ मे भि करना चाहती हूं, पऱ डर लगता हैं, दर्द होगा।
मैंने कहा- मेरा तजुरबा किसदिन काम आएगा, थोडा दर्द तोँ होगा, मगर इसमेमजा भि भरपूर हैं, कहो करोगी?
वोँ बोलीं- ट्राई करके देखते हें, अगर दर्दहुआ तोँ रहने देंगे!
मैंने कहा-हाँ, अगर दर्दहुआ तौ रोज़ थोड़ी थोड़ी प्रेक्टिस करते रहेंगे औऱ एक् दिनसभी कुछ बिल्कुल सेट हौ जाएगा। मैंने बिना एक् समय गंवाये अदिति कों अपनी बाहों मे भर लिया, मुझेऐसा लगा जैसे मैंने किसी रेशम कि सुगन्धित गठरी कों अपनी बाहों मे समेट लिया होँ!
मे कब सें तरसरहा थां इसकली कां रस पीने कों! मैंने उसका संतरे कि फांक जैसा निचला होंठ अपने होंठों मे लेँ लिया औऱ रस पीनेलगा।
ऐसी कोमल सुकुमारी कामिनी कां आलिंगन इसके पूर्व मैंने कभी नहि किया थां।
देर तक उसके होंठ चूसने केँ बाद मे उसकेफूल सें गालों पऱ अपने गीले होंठों कि छाप छापनी शुरुआत कर दि औऱ फिन उसकेकान कि लौ कों चूसने लगा।
लड़कियों केँ कान कि लौ बहोत संवेदनशील होती हैं औऱ अगरकान छिदे नं हों तोँ उनका चुम्बन लड़की कों बहोत जल्द कामातुर कर देता हैं।
अदिति केँ कान भि छिदे नहि थें तौ मेरे चूसने कां असरउस पऱ जल्द हि होँ गय़ा औऱ उसने अपनेहाथ अपने बूब्स पऱ सें हटाकर मेरीपीठ पर्र रखलिए औऱ अपने नाख़ून गड़ाने लगी।
अब उसकेरुई केँ गोले सें सॉफ्ट मम्मे मेरी कठोर छाती केँ नीचेपिस रहे थें औऱ मे उसकी हथेलियों कों अपनी हथेलियों मे फंसाए उसका पूरा चेहरा स्थान स्थान सें चूमचाट रहा थां।
मे उसकेगले कों चूमता हुआ उसके स्तनों तक आँ पहुंचा औऱ उसका बायाँ बूब्ज़ मैंने अपनी मुट्ठी मे भर लिया औऱ दायें मम्मों कों अपने मुंह मे भर केँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे काटते हुए चूसने लगा।
अदिति केँ शरीर मे हल्की सिहरन सि होनेलगी थि औऱ वोँ अपनेतन कि उमंगों कों अपनेवश मे रखने कां पूरा प्रयास कररही थि। अब उसके उरोजों मे कसावआने लगा थां औऱ उसके निप्पल भि फूलगए थें, किशमिश सें अंगूर बन चुके थें।
अब मैंने उसका बायाँ मम्मों चूसना मसलना शुरुआत किया औऱ दायें वाले कों मुट्ठी मे भर केँ गूंथने लगा। अदिति केँ मुख सें धीमी धीमी कामुक कराहें आने लगींथीं औऱ वोँ जल्द जल्द मेरीपीठ सहलाने लगी थि, संग हि मुझे लगता कि वोँ अपनीकमर कों बारबार ऊपर कि तरफउठा कर अपनी चड्डी कों मुझसे टच करवारही थि।
मेरा लण्ड तौ कब कां पूरीतरह सें भीमकाय रूपधर चुका थां, मेरा लण्डरेस केँ घोड़े कि तरह लम्बी औऱ हसीन पारी खेलने कों सजधजकर थां। मेरे लण्ड नें अभि अपनीपिच कां मुआयना तौ नहि किया थां परन्तु मुझे यकीन थां कि अदिति कि स्थान कोई मर्दखोर, लण्डखोर रण्डी भि होती तोँ वोँ भि पनाह मांग जाती।
उसके स्तनों कां स्वाद औऱ मजाजी भर केँ लेने केँ बाद मे अदिति केँ जिस्म केँ नीचे कि ओरबढ़ चला, उसके समतल सुतवां पेट कों चाटते हुए उसकी नाभि केँ कूप मे मैंने अपनीजीभ घुसा दि औऱ उसगोल गोल घुमाने लगा…
अदिति कि साँसें बेतरतीब होतीजा रहींथीं औऱ अब वोँ अपनी एड़ियाँ भि पलंग पऱ रगड़ने लगी थि।
पेट औऱ नाभि कों चाटचूम कर मैंने उसकी पैंटी कों जानबूझ कर नहि छेड़ा औऱ उसके पैरों केँ पासबैठ कर उसकेपेर कि उँगलियों कों दोनों हाथों सें दबाने औऱ मुंह मे लेकर चुभलाने लगा।
अदिति नें मुझे गहरी नज़र सें देखा। शायद उसकी आँखों वोँ सवाल थां कि मैंने उसकी जाँघों केँ मध्यभाग कों क्यूं यों हि बिनाकुछ किये छोड़ दिया थां।
अब वोँ बेचारी क्याँ जाने कि मे उसेकिस मंजिल कि तरफ लेँ जारहा थां…
उसके पैरों कि उँगलियों कों मुंह मे लेँ केँ धीमे धीमे दांतों सें काटने कुतरने लगा औऱ उसके तलवे चाटना शुरुआत किये। वोँ भि बेचारी भरपूर जवान छोरी थि, कब तक सब्र करती, मेरे तलवे चाटना शुरुआत करते हि उसने अपनाआपा खो दिया औऱ उठकरबैठ गई।
‘बस भि करो … मतकरो ऐसे प्लीज। बहोत गुदगुदी सि हौ रही हैं सभी स्थान!’ वोँ बोलि औऱ उसने अपने पांव सिकोड़ लिए औऱ बैठ गई।
मगर मैंने उसकीबात अनसुनी करके उसकी टाँगें फिन सें खींचलीं औऱ उसकी पिंडलियाँ काटने, चाटने लगा। वोँ मुझे पैरों सें परे धकेलने लगीमगर मैंने इसबार उसकी जाँघों कों चूमना चाटना शुरुआत कर दिया।
क्याँ बताऊँ अदिति कां पूरा जिस्म किसी मुलायम फल, किसी मिठाई केँ डिब्बे कि तरह थां जिसमें तरहतरह केँ स्वाद भरे पड़े थें… अदिति कि गुदाज़, केले केँ तने जैसी सुडौल साटन कि तरह चिकनी मरमरी जाँघों कों चूमने चाटने कां वोँ मजा मे आजीवन नहि भूल सकता। मेरीनाक बारबार उसकी पैंटी केँ निचले तिकोने छोर तक जाती औऱ मे जानबूझ कर अपनीनाक कि नोक कों वहा पर्र छुआ देता औऱ वापसलौट आता।
उधर अदिति कां हाल बेहाल हौ रहा थां, उसकी चड्डी केँ ऊपरनमी कि दरारअब साफ़ साफ़दिख रही थि। उसकी बुर कि दरार केँ निचले हिस्से पऱ जहाँ जन्नत कां प्रवेश दरवाज़ा होता हैं, वहा पर्र उसकी पैंटी कुछ अधिक हि गीली चिपचिपी सि होँ रही थि।
अब मेरा सब्र भि मेरेहाथ सें निकलने लगा थां औऱ मे उसकी रिसती बुर देखने कों उतावला बेकरार होँ उठा थां, मैंने झट सें उसके दोनों मम्मे अपनी मुट्ठियों मे जकड़लिए औऱ उसकी बुर कों पैंटी केँ ऊपर सें हि चाटने लगा औऱ समूची बुर मुंह मे भरकर धीरे-धीरे धीरे-धीरे झिंझोड़ने लगा।
मैंने अदिति केँ चूचुकों कों चुटकियों सें मसलते हुए उसकी बुर कों चड्डी केँ ऊपर सें हि चबाना जारीरखा।
एक् दो मिनटबाद हि वोँ बेकाबू होँ गई औऱ अपने पांव सें मेरेसिर पर्र दबाव देकर मुझे हटाने कि पूरी कोशिश करनेलगी मगरसफल नहि हुईँ औऱ अपने दोनों पांव मेरे कंधों पऱ रखदिए संग हि अपनी जाँघों सें मेरासिर भींचने लगी।
मे समझ गय़ा कि उसे क्याँ हौ रहा थां औऱ मे उसी क्षण उसकेऊपर सें हट गय़ा।
उसने अविश्वास सें मेरीतरफ देखा औऱ फिन अपनी पैंटी कों मुट्ठी मे भरकर अपनी बुर स्वयं हि मसलने लगीमगर मैंने उसके दोनों हाथ पकड़कर हटा दिये, उसकीकमर दोतीन बारहवा मे उछली औऱ फिन वोँ अपनी बेबसी केँ कारण अपने होंठ स्वयं चबाने लगी।
।
मैंने अदिति केँ हाथ छोड़दिए औऱ उसकी कच्छी पकड़कर नीचे खिसकाने लगा।
उसने भि झट सें अपनीकमर उठाकर मेराकाम आसानकर दिया।
जैसे हि उसकी कच्छी उसके शरीर सें अलग हुईँ उसनेझट सें लजाकर अपनी बुर हथेलियों सें ढकलीमगर मैंने उसकेहाथ हटादिए औऱ उसकी अनचुदी बुर निहारने लगा।
अदिति कि बुर उन सबसे निराली थि। अपनी भारतीय लड़कियों कि बुर गहरे सांवले रंग कि याँ काली होती हैं चाहे लड़की कितनी भि गोरी चिट्टी क्यूं नं हौ। मगर अदिति कि बुर एकदमफक गोरी गुलाबी मक्खन जैसी थि, बिल्कुल किसी बेबीसिटर पोर्न स्टार केँ जैसी!
सुभह हि उसकी झांटें शेवकर लीथीं इस कारण उसकी जाँघों औऱ बुर केँ लिप्स कि स्किन औऱ रंग एक् सां हि थां… गोरा गुलाबीपन लिएहुए!
उसकी बुर कां आकार भि बहोत छोटा सां थां, देखने मे बहोत मासूम भोली सि बुर, किसी अवयस्क बच्ची कि तरह। कचौरी जैसी फूली हुइ उसकी बुर बहोत हि मोहकलग रही थि, बुर केँ उपरी भगोष्ठ आपस मे चिपके हुए थें औऱ उसकी दरार एक् पतली रेखा कि तरह थि जैसे किसी नें ब्लेड सें चीरालगा दिया हौ!
उसकी बुर सें रस केँ स्राव केँ कारण पूरा तिकोना भीगा भीगा सां थां।
मे उस पऱ झुक गय़ा औऱ उसके भगोष्ठ चाटने लगा, उसकेरस कां हल्का नमकीन स्वाद भा गय़ा मुझे!ये स्वाद जूही कि बुर केँ स्वाद सें भिन्न थां औऱ बेहतर भि!
कुछदेर बुर ऊपर सें चाटने कां आनन्द लेने केँ बाद मैंने उसकी बुर धीरे-धीरे सें अपने दोनों हाथों सें खोल दि।
बुर केँ भीतर जैसे तरबूज केँ जैसालाल रसीला गूदाभरा हुआ थां जिसे मे बरबस हि चाटने लगा।
अदिति अबबैड पर्र अपनी एड़ियाँ रगड़रही थि औऱ बारबार अपनीकमर उचकाकर अपनी बुर मेरे मुंह मे ठेलदे रही थि।
‘…भैया करो न् अब!’ अदिति इतनीदेर केँ फोरप्ले केँ बाद मुझसे बोलि। कर तौ रहा हूं अदिति … चाटरहा हूं न्… बस अभि तुम्हें पूरामजा मिल जायेगा। ’ मैंने कहा।
मेरा जवाब सुनकर उसने अपनी बुर जोर सें मेरे मुंह पऱ दे मारी जैसेउसे मेरा जवाब पसंद नं आया हौ।
अदिति सेक्सी बिल्ली हैं इसलिये मे उसे पूरा कामोत्तेजित करकेइस मुकाम तक लाना चाहता थां कि वोँ अपना नारी सुलभशील, संकोच, सरम, लज्जा, हयासभी तजकर एक् चुदासी नवयौवना कि तरह लण्ड लेने केँ लिएमचल जाये।
यही सोचकर मैंने अपनीजीभ उसकी बुर केँ सबसे संवेदनशील स्थान उस नन्ही सि कलिका पऱ रख दि जिसे भगांकुर कहते हें।
ऐसा करते हि मानो उसके शरीर मे भूचाल आँ गय़ा…
‘… अब आँ भि जाओ… मेरे होँ जाओ…अहह आःहः… पूरेसमा जाओ मुझमें!’अदिति बड़े कामुक स्वर मे बोलि।
‘हां…बेबी, मेरीजीभ समाई हुईँ हैं न्… बस अभि तूँ झड़ जायेगी। ’ मैंने कहा औऱ उसका लहसुन अपने होठों सें दबा केँ चूसने लगा।
‘ओनो… ऐसे नहि… फकमीनाऊ…’ वोँ बोलि औऱ मेरेसिर केँ बाल खींचने लगी।
‘याँ बेबी…एम फकिंग यू नाँ…’ मैंने शरारत सें कहा।
फिन वोँ एकदम सें उठकरबैठ गई औऱ मुझसे लिपटकर मेरा लण्ड पकड़ लिया- I urgently need this tool inside mai… अब जल्द सें इसे मेरी मे घुसादो!
वोँ सिसकार केँ बोलीं।
‘अदिति ये बहोत बड़ा हैं तुम्हारे हिसाब सें… अभि तुम् झेल नहि सकोगी इसे… you are to young for that!’ मैंने उसे समझाते हुएकहा।
‘उफ्फ्फ… thats none of your business, … I can and will handle yours… you just fuck mai right now pls… I beg your cock inside my cunt!’ वोँ थोडा झुंझला कर करीब दांत पीसती हुईँ सि बोलीं।
‘बेबी, फट जायेगी तुम्हारी बुर… अभि भि वक़्त हैं, एक् बारफिन सें सोचलो। ’ मैंने उसे औऱ सताया।
‘अरे तोँ फट जानेदो नाँ… आपको उससे क्याँ, मे जब स्वयं कहरही हूं तोँ?’ इसबार वोँ रोने केँ सें अंदाज़ मे बोलीं।
‘अच्छा ठीक हैं… मुझे क्याँ, लो लण्ड कों मुंह मे लें केँ अच्छे सें गीलाकरो इसेचूस चूस केँ!’ मैंने कहा।
तौ अदिति नें झट सें लण्ड मुंह मे भर लिया औऱ पूरी तन्मयता केँ संग जल्द जल्द चूसते हुए लण्ड कों अपनीलार सें गीला करनेलगी, फिन जल्द सें बाहर् निकाल दिया-लो भैया … अब फुर्ती सें आँ जाओ मुझमें!
उसनेकहा औऱ प्यासी निगाहों सें मुझे आमंत्रित किया।
फिन मैंने उसके घुटने ऊपर कि तरफ मोड़दिए औऱ एक् तकिया उसकीकमर केँ नीचेरख दिया, अब उसकी बुर पूरीखिल कर मेरे सामने थि।
‘अपनी बुर खोलोअदिति !’ मैंने कहा।
उसने अपने दोनों हाथ अपनी बुर केँ ऊपररखे औऱ फिन अँगुलियों सें अपनी बुर केँ भगोष्ठ खोलदिए। ऐसा करने केँ संग हि उसका चेहरा लाज सें लालपड़ गय़ा औऱ उसने अपनी आँखें मूँदकर मुंह दूसरी तरफकर लिया।
मैंने झुककर उसकी खुली हुईँ बुर केँ भीतर चाटा औऱ अच्छे सें गीलाकर दिया औऱ फिन अपना सुपारा उसकेछेद मे दबाकर फंसा दिया औऱ धक्का देने कि पोजीशन मे बैठ गय़ा।
जबकोई लड़की अपनी बुर अपने हाथों सें खोलकर इसतरह सें लेटकर चोदने कां न्यौता देती हैं तबये उसके समर्पण कि पराकाष्ठा होती हैं, अपनीलाज लज्जा त्याग कर हि वोँ ऐसाकर पाती हैं…। किसी कामलोलुप नारी केँ निर्लज्ज होने कि सीमा हैं यह, इसकेआगे कोई लड़की औऱ कर भि क्याँ सकती हैं?
‘अदिति, you ready?’ मैंने पूछा।
‘हाँ भैया !’ वोँ बोलि।
अदिति अपनी टाँगें ऊपर उठाये हुए अपने हाथों सें अपनी बुर केँ पट पूरीतरह खोलेहुए मेरे लण्ड केँ प्रतीक्षा मे थि।
‘hold it अदिति … here I come!’ मैंने कहा।
औऱ लण्ड कों पूरी ताकत सें उसकी बुर मे भोंक दिया, मेरा सुपाड़ा उसकी बुर केँ कसाव कों ढीला करताहुआ गहराई तक धंस गय़ा औऱ मेरी झांटें उसकी बुर सें जा टकराईं।
‘अहह.ऊई माँ… हायराम। क्याँ करूं… भाभी… लगता हैं चीर दि मेरी तुम्हारे भइया नें!’ वोँ प्यास कर बोलीं औऱ मुझे अपने पैरों सें दूर धकेलने लगी।
मगर मैंने उसकी दोनों टाँगें कसकर पकड़ केँ अपनीतरफ खींचलिए जिससे उसकी बुर अच्छे सें मेरे लण्ड केँ निशाने पऱ आँ गई।
मैंने अपने लण्ड कों जरा सां पीछे लिया औऱ फिन सें एक् पॉवरफुल शॉटदे मारा, इस बाररही सहीकसर भि पूरी होँ गई औऱ मेरा लण्ड उसकी बुर मे जाम होँ गय़ा। भैया छोड़दो मुझे… निकाल लो अपना… मुझे क्षमा करो। मे नहि सह पाऊँगी। ’अदिति दर्द सें बिलखते हुए बोलि।
‘I warned you baby too keep your cunt off my cock… didn’t I? समझाया थां नं तुम्हारी तरफ?’ मैंने उसेयाद दिलाया।
‘हाँ, मेरी गलती, पऱ अब क्याँ करूं… आपकायह सहन हि नहि करपारही मे… बहोत हिम्मत जुटा रहीं हूं फिन भि… अआः मेरा लण्ड बांस केँ लट्ठ कि तरह अदिति कि बुर मे गड़ाहुआ थां जिसके झड़ने कि अभि दूरदूर तक सम्भावना नहि थि।
मुझे अदिति कों होँ रहे दर्द कि भि फ़िक्र थि इसलिये मैंने अपने लण्ड कों एक् झटके मे बाहर् खींच लिया।
जैसे हि उसकी बुर सें वेक्यूम रिलीज हुआ तोँ ‘पक्क’ जैसी आवाजअदिति कि बुर सें निकल गई जैसे कोल्ड ड्रिंक कां ढक्कन ओपन करने सें आती हैं।
फिन वोँ जल्दी अपनी टांगों कों सिकोड़ कर औंधीलेट गई एवं गहरी गहरी साँसें भरनेलगी औऱ उसके मुंह सें राहतभरी कराहें आने लगीं जैसे लण्ड बाहर् निकल जाने सें उसे भारी राहतमिल गई हौ।
मे अब उसकेऊपर लेट गय़ा औऱ यहावहा चूमते हुए दुलारने पुचकारने लगा।
आखिर अभि बेचारी कि उमर हि क्याँ थि! वोँ ठीक हैं कि अपनी बुर कि सनसनी सें परेशान होकर उसमें ऊँगली याँ पेन पेन्सिल घुसेड़ कर तृप्त होँ लेती थि परन्तु वोँ ऐसीकोई खेलीखाई लड़की भि नहि थि जोँ पहले सें चुदाई करवाती रही हौ।
लड़कीजब स्वयं अपनी मर्जी सें अपनी बुर मे कोईचीज घुसाती हैं औऱ मूव करती हैं तौ उस पऱ उसका स्वयं कां कंट्रोल होता हैं… कितना घुसाना हैं, किस पॉइंट पऱ कितना प्रेस करना हैं, किस एंगल सें मूव करना हैं… यहसभी वोँ अपने हिसाब सें मैनेज कर लेती हैं। मगरजब कोई व्यक्ति लण्ड उसकी बुर मे पेलता हैं तोँ लड़की कों मात्र अनुभव करना होता हैं लण्ड केँ मूवमेंट पऱ उसकाकोई बस नहि रहता… चोदने वाला जैसे चाहे अपने लण्ड कों ड्राइव करे, ये कमानउसी केँ हाथ रहती हैं।
मैंने तीनचार मिनट अदिति कों आराम दिया, उस दौरान मे उसके नितम्ब चूमता रहा, उन्हें काटता रहा, उसकीपीठ सहलाते हुए उसकी गर्दन पर्र चुम्बन करतारहा औऱ नीचेहाथ डालकर उसके मम्मे मुट्ठी मे भर केँ जोरजोर सें दबाता मसलता रहा।
अब वोँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे आहें कराहें भरनेलगी थि औऱ बारबार अपने नितम्ब ऊपर कि तरफउठा लेती। मैंने अपना लण्ड उसकी जांघों केँ बीच फंसा दिया औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसे भीतर बाहर् करनेलगा।
वत्सला कों शायदयह अच्छा लगा औऱ उसने अपनी टाँगें औऱ चौड़ी करलीं जिससे मुझे औऱ थोडा अधिकरूम मिल गय़ा, अब मेरा लण्ड उसकी बुर पऱ घिसरहा थां।
मैंने अपना सुपारा दोतीन बार अदिति कि बुर सें घिसकर उसकी चिकनाई सें चिकना किया औऱ छेद पऱ लगाकर धकेल दिया भीतर औऱ आहिस्ता आहिस्ता चोदने लगाउसे… संग हि उसके कूल्हों पऱ थपेड़े लगाते हुएउसे चोदने लगा।
मेरे चांटों सें उसके गोरे गुलाबी चूतड़ों पऱ लाललाल निशान पड़गए।
वोँ चुपचाप शांत लेटी हुई कुनमुना रही थि; शायदअब वोँ अपनी बुर चुदाई कां मजा उठाने लगी थि। मैंने भि अपने धक्कों कि रफ़्तार तेज़कर दि उसने भि अपनी गांडउठा उठाकर लण्ड कों जवाब देना शुरुआत कर दिया। मे समझ गय़ा कि अबये मस्ता गई हैं औऱ इसेहचक केँ चोदना चाहिये।
यहीसोच कर मैंने अपना लण्ड उसकी बुर सें बाहर् निकाल लिया।
‘क्याँ हुआ…करो नं?’ उसने अपनी गर्दन मोड़कर मुझे देखा औऱ बोलीं।
‘अब दर्द तौ नहि हैं नं तेरी बुर मे?’
‘हौ रहाअब भि। मगर होनेदो, आप् तोँ आँ जाओफिन सें!’
‘ठीक हैं तौ फिनअब तूँ घोड़ी बनजा…ऐसे मे ठीक सें नहि जारहा पूरा!’ मैंने उसेकहा।
तब अदिति झट सें उठकर अपनें हाथों औऱ घुटनों केँ बल खड़ी हौ गई, मैंने सटाक सें लण्ड कों फिन सें उसकी बुर मे पेल दिया औऱ नीचेहाथ डालकर उसके सख्त मम्मे थामलिए औऱ उसकी बुर मारने लगा।
वोँ भि अपनी गांड कों पीछे धकेल धकेल केँ जवाब देनेलगी इसबार लण्डठीक सें सटासट होँ रहा थां उसकी बुर मे… जैसे जैसे मे स्पीड बढ़ाता, अदिति भि ताल मे ताल मिलाती हुइ अपनीकमर कों पीछेआगे करनेलगी।
‘भैया … you fucking mai so nice… fuck mai harder now!’ वोँ बोलीं औऱ जल्द जल्द अपनी बुर कों मेरे लण्ड पर्र मारने लगी।
मैंने अब उसकेसिर केँ बाल चोटी कि तरह लपेटकर जोर सें खींचलिए जिससे उसका मुंहऊपर उठ गय़ा औऱ अपने बायें हाथ मे उसकी चोटी लपेटकर दायें हाथ सें उसकीपीठ औऱ कूल्हों पर्र चांटे मारता हुआउसे बेरहमी सें चोदने लगा।
वोँ भि अपनी गांड कों ऊपर नीचेकभी आगे पीछे करती हुई अपनी चुदाई कों एन्जॉय कररही थि, अदिति कां असलीरंग अब सामने आनेलगा थां…
‘हां … ऐसे हि। चीर फाड़ डालोइसे… बहोत सताती हैं यह मुझे!’ओ। अहह। मादरचोद। जम केँ चोद.उफ। आज फाड़दे मेरी बुर। वोँ दांत पीसती हुई बोलीं।
उसकी बुर अब बहोत गीली होकरफच फच आवाजें करनेलगी थि औऱ वोँ अपने मुंह सें ‘हूं हूं’ कि आवाज़ करतेहुए पूरीदम सें मेरासंग निभाये जारही थि।
मे समझ गय़ा कि अबये यौवना झड़कर हि दम लेगी, इसलिये मैंने धक्के लगाना बंदकर दियामगर वोँ अपनी हि धुन मे आगे पीछे होती हुईँ मेरा लण्ड निगलती उगलती रही।
मे मन्त्रमुग्ध सां उसकेगोल मटोल कूल्हों कि चालदेख रहा थां, वोँ अपनीकमर चलाये चलीजा रही थि; जैसे हि वोँ आगे कों होती मेरा लण्ड बाहर् निकलआता जैसे हि वोँ पीछे कों आती तोँ गप्प सें लण्ड कों निगल जाती।
मे थोडा सां औऱ पीछे कों होँ गय़ा जिससे बारबार मेरा लण्ड उसकी बुर सें बाहर् निकल जाता तौ उसने झुंझला कर अपनाहाथ पीछेला कर अपनी बुर केँ छेद पर्र सेट किया औऱ फिन सें कमर चलाने, चूतड़ मटकाने लगी।
इस बार वोँ पूरा खयालरख रही थि कि लण्ड बाहर् नं निकलने पाये औऱ वोँ परफेक्टली इसतरह आगे पीछे होनेलगी कि लण्ड सुपारे कि टिप तक बाहर् निकले औऱ फिन सें वापिस घुस जाये।
मे समझरहा थां कि अब अदिति जल्द हि झड़ जायेगी औऱ मे इस पारी कों थोडा औऱ लम्बा खींचना चाहता थां इसलिये मे उससेअलग हट गय़ा औऱ वहींलेट गय़ा।
अदिति नें मुझे गुस्से सें देखा जैसेउसे मेराअलग हटना पसंद नं आया होँ, वोँ जल्दी मेरेऊपर चढ़ गई औऱ लण्ड कों अपनी बुर केँ छेद पऱ स्लिम करके एक् हि बार मे पूरा घुसा लें गई औऱ दनादन ऊपर नीचे होनेलगी।
मैंने भि उसके सख्त उरोज पकड़लिए औऱ उसके चूचकों कों मसलने लगा।
अब उसने मिसमिसा कर अपनी बुर मेरी झांटो पर्र रगड़ना शुरुआत कर दिया औऱ उत्तेजना सें कामुक आवाजें मुंह सें निकालने लगी, उसकी आँखों मे अजब सि वासना कि चमक थि औऱ वोँ बारबार अपने नाख़ून मेरे सीने मे गड़ा देती औऱ फिन सें मिसमिसा कर अपनी बुर मेरी झांटो पऱ रगड़ना शुरुआत कर दिया औऱ उत्तेजना सें कामुक आवाजें मुंह सें निकालने लगी,
अब पूरा कंट्रोल उसकेहाथ मे थां औऱ वोँ मेरे लण्ड कों अपने हिसाब सें लेँ रही थि।
मे तोँ बसइस स्थिति कों एन्जॉय कररहा थां कि एक् ताजा ताजा जवान हुई छोरी मेरेऊपर चढ़कर अपनी कामाग्नि कों शान्त करने कां जी तोड़ प्रयास कररही थि औऱ झड़ने केँ लिए बेचैन उसकी बुर मेरे लण्ड सें लोहा लेतेहुए कड़ा संघर्ष कररही थि।
अदिति अभि भि ताबड़ तोड़ झटके लगाएजा रही थि मेरेऊपर चढ़ी हुईँ… मगर मे अब उसकेऊपर चढ़कर उसे अपने हिसाब सें चोदना चाहता थां तोँ मैंने उसे अपनेऊपर सें हटाया औऱ लिटा केँ उसकी टाँगें अपने कंधों पऱ रखलीं औऱ उसके दोनों दूधकस केँ दबोचलिए औऱ एक् बार मे हि लण्ड कों उसकी बुर मे भोंक दिया।
बुर गीली रसीली होने केँ कारण लण्ड बिना किसी बाधा केँ घुसा औऱ उसकी बच्चेदानी सें जा टकराया…
‘अहहआः हां…ऐसे हि… I loved this shot… भैया !’ वोँ बोलि औऱ अपनीकमर उचकाकर मेरा स्वागत किया।
मे उसके मम्मे दबोचे हुएबार बार वैसे हि शॉट्स लगाने लगा, मेरेहर धक्के पर्र उसके मुंह सें आनंदभरी किलकारी निकलती औऱ वोँ प्रत्युत्तर देने केँ लिए अपनीकमर उठाती मगर उसकी टाँगें मेरे कंधों पऱ होने सें उसका दांवठीक सें नहि चलपारहा थां।
मैंने उसकी चिंता किये बगैर अपने हिसाब सें उसे चोदने लगा, लण्ड कों आड़ा तिरछा सीधा याँ नीचे कि तरफ करके उसकी बुर कों कुचलने लगा;ऐसा करने सें उसका शरीर ऐंठने लगा औऱ वोँ मुझे अपनेऊपर खींचने लगीमगर मे उसकेऊपर नहि झुका औऱ धक्के लगाता रहा।
‘औऱ तेजतेज धक्के मारो मुझे… गालीदे केँ चोदो मुझे… जैसे मेरी भाभी चुदवाती हैं भैया सें!’ वोँ अपनीकमर उछालते हुए तड़पकर बोलीं।
‘तुम्हारी भाभी कों गाली सुनते हुए चुदवाना पसंद हैं… कौन सि गाली देते हें तुम्हारे भैया ?’ मैंने धक्के लगाते हुए पूछा। मे उसकी भाभी यानि मेरी बेहन नेहा केँ बारे मे यहसभी पूंछरहा थां
‘कोई सि भि गन्दी गाली… भाभी कों बहोत जोश चढ़ता हैं गाली सें!’ वोँ बोलि। मेने कहा कोनसी गाली देतेहे वोँ बोलीं अधिकतर बेहन कि लौड़ी। हरामजादी, रंडी, मेने कहाअब तुँ नेहा बनजा औऱ मुझे वैसी हि गालिया दे जैसे वोँ तुम्हारे भइया कों देतीहे, मेने ‘तौ यह लेँ हरामजादी तेरी भाभी कों भि चोदूँगा ऐसे हि… साली पहली चुदाई मे हि छिनाल बन गई तुँ तोँ!’ मैंने अपना लण्ड बाहर् खींचा औऱ फिन सें भौंक दिया उसकी बुर मे!
‘तौ यह लें साली…कुतिया…तेरी भाभी कि बुर मारूं… खा मेरा लण्ड अपनीचूत मे!’ मे ताबड़तोड़ धक्के लगाते हुए बोला।
‘हां… फाड़डाल मेरी हरामन बुर कों बनादे इसका भोसड़ा। अब तेरी रण्डी हूं मे आज सें जब चाहेचोद लेना मुझे!उफ। हां.हां। चोदो मुझे.उफ.हाय फाड़दो अपनी बेहन कि ननदी कि बुर। ओह। हा.मादरचोद.हरामी। औऱ जोर सें। इ्र्र.ई। ओह’ वोँ मिसमिसा कर बोलीं। मेने कहासाली! एक् दम रंडी कि तरहमचल रही हैं कुतीया। सब्ररख अभि तेरी बुर फाड़ूंगा बेहन कि लौड़ी। हरामजादी। चोदरहा हू नं तुम्हे रंडी कि तरंह। कुतीया साली। क्या बात है। मे आने कों हूं रांड। झड़ने वाला हूं। उफ.
‘
‘हां…ऐसे हि। अहहआः अः… fuck mai baby… u drilling mai so nice; am loving ur shots baby… gimme more… yaaaa fuck mai like a whore uncle… मुझे रण्डी कि तरह बेरहमी सें चोद डालो… फाड़ डालोइस बुर कों आज… yaa… aaa… I will be ur keep from now on… all my life। good job baby… am cumming now…मुझे पूरा चाहिये… बेरहमी सें चोद … मेरी बुर मे ऊपर तक ठाँसदे… चीरदे मेरी बुर कों, इसका भोंसड़ा बनादे
दे मुझेये लौड़ा, पेल दे, पेल दे, पेल दे…भरदे मेरी बुर, भरदे…भर देइसे अपने लौड़े केँ पानी सें … बहोत अच्छा लगरहा हैं अब तौ… मेरा होने वाला हैं। पकड़लो मुझेजोर सें… यायाआय्या। उई भाभी ’ अदिति ऐसे हि हिस्टीरिया केँ मरीज कि तरह बोलती चलीजा रही थि।
औऱ फिन
‘ हटो जल्द सें… अब मेरा पानी निकलरहा बड़ेजोर सें!’ वोँ बड़ी व्यग्रता सें बोलीं।
मैंने जल्दी अपना लण्ड उसकी बुर सें बाहर् निकाल लिया। मेरे लण्ड निकालते हि उसकी बुर सें रस कां सोता सां फूट पड़ा, उसकीछूट इतनीतेज हुईँ जैसे फव्वारा चल पड़ा होँ याँ जैसे किसी पाइप लाइन सें पानीउछल उछल केँ लीक होता हैं।
उसी क्षण मैंने उसकी बुर केँ होंठ अपने हाथों सें खोलदिए औऱ देखा कि वोँ रस कि फुहार चुदाई करने वालेछेद सें हि निकलकर लगभगतीन इंचऊपर तक उछलरही थि। मैंने अपने लण्ड कों उन फुहारों मे नहला लिया.
वाउ… ऐसा आनन्द कां नज़ारा मैंने पहलेकभी नहि किया थां।
करीब-करीब एक् मिनट तक अदिति यूं हि झड़ती रही औऱ मे उसकीछूट मे अपना लण्ड भिगोता रहा।
जैसे हि उसका झरना बहनाबंद हुआ, मैंने लण्ड कों वापिस उसकी चूत मे पेल दिया औऱ फुर्ती सें उसे चोदने लगा क्योंकि अब मे भि झड़ जानां चाहता थां।
अदिति भि जल्द हि फिन सें तैश मे आँ गई औऱ मेरे धक्कों सें ताल मे ताल मिलाती हुइ किसी अनुभवी चुदक्कड़ लड़की कि तरह अपनीकमर उठाउठा कर मेरी आँखों मे आँखें डालकर अपनी बुर मुझे देनेलगी; मे भि पूरी तन्मयता औऱ मनोयोग सें उसकी लेतारहा।
जल्द हि वोँ अपने पूरे शवाब पे आँ गई औऱ उसकी बुर मेरे लण्ड सें भरपूर लोहा लेनेलगी, कुछदेर उछलने केँ बादफिन वोँ मुझसे आक्टोपस कि तरह लिपट गई औऱ अपने दांत मेरे कंधे मे गड़ादिए, मे भि उसकेसंग हि झड़ने लगा, मेरे लण्ड सें वीर्य कि पिचकारियाँ छूटछूट कर उसकी बुर मे समाने लगीं, उसकी बुर कि मांसपेशियाँ भि संकुचित हौ हौ कर मेरे लण्ड सें रस कि एक् एक् बूँद निचोड़ने लगी। मे तोँ जैसे जीतेजी जन्नत मे जा पहुंचा औऱ उसने अपने टाँगें मेरीकमर मे लॉककर दीं।
हम् दोनों पसीने पसीने होकर हांफरहे थें; जल्द हि उसकी पकड़ ढीलीपड़ गई औऱ उसकी बुर संकुचित हौ गई जिससे मेरा लण्ड बाहर् निकल गय़ा औऱ उसकी बुर सें मेरा वीर्य बह निकला।
मेरी रंडी बहन उसकी ननद और बीबी की चुदाई - शानदार – New Episode
मुझेअब थकावट लगनेलगी थि सो मे आँखें बंद करके सीधालेट गय़ा, अदिति भि मेरेबगल मे मेरीतरफ करवट लेकरलेट गई औऱ मुझेचूम लिया।
‘थैंक्स अं!’ वोँ मुझसे बोलि औऱ मेरागाल एक् बारफिन सें चूमकर मेरे सीने पर्र सिररख कर सोने कि कोशिश करनेलगी।
फिन मैंने उसकी आँखों मे देखा औऱ पूछा- तोँ फिन शुरुआत करें?
वोँ हंस दि।,
अदिति उठी औऱ उसने मेरा मुँहचूम लिया।
‘क्याँ हुआ?’ मैंने पूछा।
‘सच मे भैया, बहोत मजाआया। मुझे नहि पता थां कि सेक्स मे इतनामजा आता हैं!’ वोँ बोलीं।
‘मगर तुम्हें तोँ दर्द हौ रहा थां!’ मैंने पूछा।
‘हाँ होँ रहा थां, मगर थोड़ी देरबाद उस दर्द मे भि मजाआने लगा। ’ वोँ हंसकर बोलीं।
वोँ उठी औऱ बाथरूम मे चली गई, मे भि चला गय़ा, हम् दोनों नें स्वयं कों फ्रेश किया, कपड़े पहने, रूम सेट किया।
जब वोँ जानेलगी तौ मैंने पूछा-, अबकब?
वोँ बोलीं- अभि तौ मे यहीहु हूं, जब आप् चाहोतब!
वोँ मुस्कुराई औऱ दरवाजा खोलकर बाहर् चली गई।
महिला जब एक् बार किसी परपुरुष सें चुदजाए औऱ चरमसुख भोग लें तोँ दुबारा उसी पुरुष सें चुदवाने कि चाह उसकेमन मे हमेशा बनी रहती हैं, इशारा करनेभर कि देर हैं औऱ वोँ तुरन्त राजी होँ जायेगी ऐसा मेरा विश्वास थां।
औऱ लन्ड केँ मुंह सें जब एक् बार पराई बुर कां रसलगजाए तोँ वोँ उसी बुर मे बारबार डुबकी लगाना चाहता हैं। जब मेरी नींद खुली तौ मुझे अपने लन्ड पर्र कुछ चिपचिपा सां महसूस हुआ
मेने नीचे देखा तोँ मेरी आँखेफटी कि फटीरह गई,
अदिति मेरे लन्ड कों चूसरही थि मेने घड़ी देखी तौ सुभह केँ 7:30 बजरहे थें.
बड़ी मुश्किल सें मेने अपनी आंहों पऱ काबू करतेहुए अदिति सें कहा : "आअहहह। अदिति कि बच्ची.उम्म्म्मममममम। यहयह। क्याँ कररी हैं.सुभह -2। नेहा आँ गई, तोँ.''
अदिति नें पूकक्च कि आवाज़ सें उसके लन्ड कों मुँह सें बाहर् निकाला औऱ बोलीं : " वोँ दोनों अभि सोरही हे
इतना कहतेहुए एक् कुटिल मुस्कान केँ संग उसनेफिन सें अपने जूसी होंठ मेरे लन्ड पऱ लगादिए औऱ उसे जोरों सें चूसने लगी.
अबमेरी हालत नहींरह गई, थि कुछ बोलने कि
क्योंकि सुभह केँ इरेक्शन औऱ अदिति केँ सैक्सी होंठों नें मेरे लन्ड कों जल्द झड़ने पर्र मजबूर कर दिया उसका मुँहकुछ ज्यादा हि तेज़ी सें चलरहा थां.
एक् मिनट भि नहींलगा मेरे कों झड़ने मे.
औऱ झड़ते हुए मे बड़ी हि बेदर्दी सें उसकी गर्दन औऱ बालों कों पकड़कर अपने लन्ड कों उसके मुँह मे ढूसरहा थां.
''आआआआआआआआआहह। नेहााआआआआआ। मेरी ज़ाआआअनन् उम्म्म्मममममममममममममम.''
मेने अदिति कि चोटीपकड़ कर उसके मुँह मे पूरा लोढ़ा घुसेड डाला.
इतनी बेदर्दी सें मे अपने लन्ड कों उसके मुँह मे रगड़रहा थां कि बेचारी कि आँखो मे आँसू आँ गये.
पऱ मजा भि दुगना मिलाउसे.
मेने उसके खुले मुंह मे अपने लन्ड कां सारा डिपोसिट डाउनलोड कर दिया
अदिति कों तोँ पसन्द आया मेरायह वहशिपन, इसे विस्तार सें महसूस करेगी रात कों,
फिन जल्द सें अपना मुँहसॉफ करके, शीशे मे देखकर अपनेबाल ठीक करके वोँ नीचेभाग गयीँ,.
रात कां खानां खाने केँ बाद मे बैड पर्र बैठा अदिति कां प्रतीक्षा कररहा थां। आज हमारी मेरेरूम मे सेक्स कि दूसरी रात थि। मे इसरात कों यादगार बनाना चाहता थां। अदिति आने मे विलंब कररही थि। मे अधीर होँ रहा थां। तभी मैंने अदिति कों आते देखा उसने एक् सुर्ख लालरंग कां फ्राक पहनी हुई थां। फ्राक बहोत हि सुंदर थां तथा हल्की पारदर्शी भि थां।। अदिति केँ लिएआज कां दिन बहोत विशेष थां उसनेये
फ्राक शायदइसी दिन केँ लिए खरीदी थां। खाट पर्र आने केँ बाद वो मुझे बेतहाशा चूमने लगी। हम् दोनों एक् दूसरे कों प्रेम करनेलगे। कुछ हि देर मे हमारे वस्त्र हमारा संग छोड़ते गए। हमने अपना प्रेम अपने पुराने अंदाज मे हीं शुरुआत किया.
अदिति मेरे लन्ड कों दोनों हाथों मे लेकर बहोत प्रेम सें उसे
सहलारही थि।। अचानक अदिति नें पास पड़ी हुई अपनीनई फ्राक कों उठाया औऱ मेरे चेहरे पऱ डाल दिया। उसने मुझे हिदायत दि “जब तक मे नाँ कहूं अपनी आंखें मत खोलिएगा”
मुंह पऱ उसकी फ्राक पड़े होने कि वजह सें मुझेकुछ दिखाई नहि पड़रहा थां मैंने अपनी आंखें बंदकर ली औरफ्राक सें उसके जिस्म कि खुसबू लेनेलगा। उसकी उंगलियां मेरे लन्ड केँ ऊपर अपना करतब दिखा रहींथीं। मैंने अदिति कों छूना चाहा पऱ वो पास नहि थि मेरे लहराते हुए हाथों कों देखकर समझ गई कि मे उसे छूना चाहता हूं। उसने उठकर अपने आपको व्यवस्थित किया.अब उसकीकमर मेरे दाहिने कंधे केँ पास थि। मे उसके नितंबों कों अपने दाहिने हाथ सें आसानी सें छुपारहा थां। मेरी उंगलियां स्वयं ब स्वयं उसकी बुर केँ होंठों केँ बीच मे घूमने लगी। उसकी बुर गीली होँ रही थि। गीले औऱ चिपचिपे होंठों मे उंगली फिराने कां सुख अप्रतिम होता हैं। अदिति कि उंगलियां मेरे लन्ड कों तरह-तरह सें छेड़ रहींथीं औऱ वो पूरेमन सें फुदकरहा थां.
अचानक मुझे अपने लन्ड पऱ किसीगरम चीज कां एहसास हुआ। मे समझ नहि पारहा थां कि ये क्याँ हैं? लन्ड केँ मुख पर्र गर्मी आहिस्ता बढ़ती जारही थि। ऐसालग रहा थां जैसे उसका संपर्क बुर सें होँ रहा हैं। परंतु बुर तौ मेरी उंगलियों केँ संगखेल रही थि। अचानक मुझे अपने लन्ड पऱ कोईचीज रेंगती हुई महसूस हुईँ। ये एक् अद्भुत अनुभव थां। मेरा लन्ड एक् अनजाने गुफा कि दहलीज पर्र खड़ा थां। अचानक ऐसा प्रतीत हुआ जैसे लन्ड
गुफा कि तरफजा रहा औऱ वो अनजानी चीज उससे रगड़खा रही हें। मुझे अदिति केँ दातों कि रगड़ अपने लिंग पर्र महसूस हुयी। मे समझ गय़ा कि अदिति नें मेरा मुखमैथुन करने कां मनबना लिया हैं। मे इसमजा सें अभिभूत होँ गय़ा। आज मेरी प्यारी अदिति नें मुझेनया सुख देनी कि ठानली थि.
अदिति अपनेमुख सें मेरे लिंग केँ चारों तरफ घेराबना ली थि औऱ होंठों कों गोल करके वो उसे एक् सुरंग कां आकारदे रही थि। वो अपना मुंह बार-बार आगे पीछे करती औऱ मेरा लिंग पूरीतरह मचलने लगता.
उसकी बुर भि लगातार प्यार रस बहाएजा रही थि। मुझे अपनी ब्लू फिल्मों कि शिक्षा याद आँ गई। औऱ मैंने अदिति केँ नितंबों कों पकड़कर अपनीओर खींचा। मैंने उसका एक् पांव अपने सीने केँ दूसरी तरफ लें आया।
अब अदिती केँ
नितम्ब मेरी गर्दन केँ दोनों ओर थें। मेरी आंखें बंद होने केँ कारण मे कुछदेख नहि पारहा थां पर्र महसूस कर सकता थां.
मैंने अदिति कि अनुमति सें कपड़ा हटा दिया। अदिति केँ गोरे-गोरे नितम्ब मेरे सामने थें। अद्भुत दृश्य थां। इतने कोमल औऱ बेदाग नितम्ब। एसालग रहा थां जैसेदो छोटे चन्द्रमा मेरे सामने जुड़ेहुए हों। नितंबो केँ बीच सें उसकी दरार स्पष्ट दिखाई पड़रही थि। दरार सें कुछ हि नीचे अदिति
कि बुर केँ होंठ दिखाई पड़रहे थें। रस मे भीगे होने केँ कारणऐसा प्रतीत होँ रहा थां जैसे किसीफल कों दो टुकड़ों मे काट दिया गय़ा हौ औऱ उससेफल कां रसरिस रिसकर बाहर् आँ रहा हौ.
मैंने अदिति कों अपनीतरफ खींचा अब मेरीजीभ आसानी सें बुर केँ होंठों कों छू सकती थि। मैंने बुर केँ होंठों मे अपनीजीभ फेरनी शुरुआत कर दि। अदिति उछलने लगी। अदिति नें अपनामुख वापस मेरे लन्ड पऱ रख दिया थां। अब हम् दोनों इस अप्रतिम सुख कों महसूस करपारहे थें। मेरा लन्ड स्खलित होने केँ लिए पूरीतरह रेडी थां.
इधर अदिति कि बुर भि व्याकुल थि। लगरहा थां कि वो कभी भि अप्रत्याशित तरीके सें अपने कंपन चालूकर देगी। हम् दोनों कां चरमसुख करीबसंग हि आने वाला थां.
अंततः बुर नें कांपना शुरुआत कर दिया। पर्र मैंने अपनामुख वहां सें हटाया नहि अपितु उसकीकमर पकड़कर अपनेऊपर औऱ तेजी सें खींच लिया। मेरीनाक भि अदिति केँ दरारों केँ बीच आँ गइ.जब तक अदिति केँ कंपन होतेरहे उसकी बुर मेरेमुह केँ अन्दर हि रही। कंपन होते टाइम हि अदिति नें अपनीजीभ औऱ मुख कां घर्षण रालंड पर्र पऱ तेजकर दिया औऱ लन्ड सें ये बर्दाश्त नां हुआ
औऱ उसमें अपना लावा उड़ेल दिया। अदिति इस अप्रत्याशित हमले केँ लिए रेडी नहि थि। वीर्य कि पहलीधार उसके मुंह मे हि गिरी। वोँ अपना मुंहहटा पातीतब तक वीर्य कि कईधार उसके गालों स्तनों पऱ आँ गयीँ,। वीर्य कां स्वाद अदिति नें पहले भि चखा थां पर्र एक् संग इतना सारा वीर्य यह उसकेलिए पहलीबार थां। वो इसे संभाल नहि पायी। उसने अपना मुंहखोल दिया.मुह मे एकत्रित लावा उसके होठों सें गिरता हुआ उसके गर्दन तक पहुंच गय़ा। उसने मेरीतरफ चेहरा किया.ये दृश्य देखकर मे मुझे ब्लू फिल्मों कि याद आँ गई। इतना कामुक कर देने वाला दृश्य थां। मेरी कोमल औऱ मासूम अदिति वीर्य सें भीगी हुई अपने होंठों सें वीर्य बहाती मेरेपास थि। मैंने उसे अपनी बाहों मे खींच लिया। उसके बूब्ज़ अब मेरे स्तनों सें टकराने लगे। उसकी बुर मेरे लन्ड केँ पास आँ चुकी थि। थका हुआलंड बुर केँ संसर्ग मे आकर एक् दूसरे कों चूमरहे थें। अदिति नें अपने होंठ मेरे होंठों पर्र रखदिए। अपने वीर्य कों उसके होठों सें चूसते हुए मे उसे प्रेम करनेलगा.
अदिति नें मुझेऊपर खींच लिया मे उसके होठों कों चूमने लगा। उसके मम्मों मेरे सीने सें टकरारहे थें। ऐसालग रहा थां जैसेदो रसीले गेंदें मेरे सीने केँ नीचेरखी हुइ थीं। लन्ड बिना मेरी आज्ञा केचूत मे विलुप्त हौ रहा थां.
लन्ड नें उछलना शुरुआत कर दिया
लन्ड कों अभि भि गहराइयों मे उतरने मे मेहनत करनीपड़ रही थि। यही दबाव तोँ लन्ड कों सबसे ज़्यादा प्रिय थां। मे आरामसे अपनी रफ्तार बढ़ाने लगाजब भि मे उसके चेहरे कों देखता मुझेउस पर्र बहोत प्रेम आता.
अदिति कों मे बचपन सें देखरहा थां
आज अदिति एक् अलगरूप मे दिखाई पड़रही थि। वो स्त्रीत्व केँ चरम पर्र थि। वो पूर्ण नारीबन चुकी थि
मेरी रंडी बहन उसकी ननद और बीबी की चुदाई - शानदार - Kahani ab aur interesting hogi
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