सामूहिक चुदाई complete - adla badli chudai - Real Kahani Part 1
सामूहिक चुदाई
मेरानाम डॉली हैं, मेरे पति राज एक् इंजीनियरिंग कंपनी मे अच्छे पद पर्र हें।
हम् लोग वैसे तौ पश्चिमी उत्तर प्रदेश केँ रहने वाले हें, पर्र पिछले 15 सालों सें नई दिल्ली मे रहरहे हें।
राज 40 साल केँ हें, पऱ 35 सें अधिक नहि दिखते, 5’8″ हाइट हैं, हल्के सें मोटे हें, गोरे औऱ हसीन हें.।
मेरी उम्र 35 साल हैं, पऱ 30 साल कि दिखती हूं, 5’3″ हाइट हैं, बदन 36-27-36 हैं।
हम् दोनों यहा पर्र अपनेकुछ दोस्तों केँ संग बीवियों कों आपस मे अदल-बदल करके चुदाई करते हें।
इस बीवियों कि अदला-बदली करके चुदाई मे दो जोड़े अपने-अपने मित्र बदलकर एक्-दूसरे कों चोदते हें, एक् कि पत्नि दूसरे व्यक्ति केँ संग चुदती हैं औऱ उसका पति किसी औऱ कि पत्नि कों चोदता हैं।
हम् नहि जानते कि यहा पऱ हमारे अलावा औऱ कितने जोड़े ऐसे अपनी-अपनी बीवियों कों अदल-बदल कर चुदाई करते हें। मेरे ख्याल सें इसकेलिए मन तौ बहुतों कां होता हैं, औऱ अगर अवसर मिले तौ शायद इसका आनन्द भि उठाएँ।
हम् लोग फ़िलहाल अपने 4 नज़दीकी साथी-जोड़ों केँ संग बीवियों कि अदला-बदली करके चुदाई करते हें औऱ करवाते हें। अक्सर हममें सें दो-तीन जोड़े हि एक् संग होँ पाते हें, पऱ कभी-कभार किसी विशिष्ट अवसर पऱ, जब सबको वक़्त हौ, हम् पाँचों मिलते हें, अदला-बदली करके हि चुदाई करते हें।
हालाँकि हमारा उद्देश्य एक्-दूसरे केँ जिंदगी मित्र केँ संग चुदाई कां आनन्द उठाना होता हैं, पर्र इस मे हमारी प्रगाढ़ मित्रता, यानि कि दावतें, पिकनिक, पार्टियाँ औऱ दूसरे केँ मित्र केँ संग हँसी-मज़ाक औऱ सबके सामने एक्-दूसरे केँ कपड़ों केँ ऊपर सें जौ मर्ज़ी आए, करकेमजा लेना भि शामिल हें।
इनकेसंग दूसरे केँ दोस्त केँ संग अकेले फिल्म देखने जानां, बाहर् खानां खानां औऱ फिनउसे अपनेसंग चुदाई केँ लिएघऱ लाना भि शामिल होता हैं।
जब मेरे पति किसी औऱ कि पत्नि केँ संगयही सभीकर रहेहों, तौ मेरे द्वारा किसी औऱ केँ संगयही सभी करना अपने आप् मे बहोत हि रोमांटिक हैं।
हम् 2-3 जोड़ियाँ कभी-कभी एक् संग दूसरे शहर घूमने जाते हें तोँ मे दूसरे केँ पति केँ संग हि अलग कमरे मे रहती हूं, जैसे कि उन दिनों केँ लिए हमारे पति वहीहों !
हमने अपनीइस जीवन कि शुरुआत केसे कि, अब मे ये बताना चाहूँगी।
मुझे लम्बे अरसे सें येशक थां कि राज दूसरी औरतों कों चोदने कां बहोत इच्छुक थां, पऱ कोई 5-6 साल पहले उसने कहना शुरुआत किया कि डॉली, उमर बहोत छोटी होती हैं औऱ हमेंये भि अनुभव करना चाहिए कि दूसरों केँ संग चुदाई करने मे कैसामजा आता हैं क्योंकि हम् दोनों नें शादी केँ पहले किसी सें चुदाई नहि कि थि।
वोँ किसी दूसरी औरत केँ संग चुदाई कां लुत्फ़ उठाना चाहता थां औऱ मुझे भि उत्साहित करता थां कि मे भि किसी दूसरे मर्द केँ संग चुदाई कां आनन्द उठाऊँ।
इन बातों केँ दौर सें हमारी चुदाई मे आनन्द औऱ बढ़ गय़ा थां।
जब दोस्तों कों अपनेघऱ मे बुलाते तोँ राज किचन मे मुझसे आकर बताता कि आजउसे किस साथी कि पत्नि कों चोदने कां मनकररहा हैं। वो मुझसे भि पूछता कि आज मेरामन किस साथी सें चुदवाने कों कररहा हैं।
यहसभी बातें करके हमें बड़ामजा आनेलगा औऱ हम् सबके जाने केँ बादउस साथी औऱ उसकी बीबी कां नाम लेकर एक्-दूसरे कों चोदने लगते थें।
कुछ दिनों तक बैड मे चोदते वक़्त इस बारे मे बातें करते-करते मेरी भि हिम्मत बढ़ती गई औऱ मे दूसरे जोड़े केँ संग काल्पनिक अदला-बदली चुदाई केँ लिए सजधजकर हौ गई। फिन हमने ढूंढना शुरुआत किया औऱ हमारी नज़रजय औऱ ललिता पऱ पड़ी जोँ हमारे हि पड़ोस मे कुछ हि दूरी पऱ रहते थें।
इनकुछ सालों मे हमारी उनसे दोस्ती काफ़ी गहरी होँ गई हैं। यह दोनों भि करीब-करीब हमारी हि उमर केँ थें। जय 38 साल कां थां औऱ ललिता 32 कि, ललिता कां बदन बहोत खूबसूरत (32-26-38) थां। वोँ काफ़ी पतली थि औऱ नयन-नक्स तीखे थें।
हम् दोनों उनके स्वभाव औऱ सुंदरता सें काफ़ी प्रभावित हुए थें।
अपनी चुदाई केँ टाइमअब हम् जय औऱ ललिता केँ बारे मे सोचने लगे औऱ उनकेसंग चुदाई कि कल्पना करनेलगे।
जब भि राज मुझे चोदता थां तौ मुझसे यही कहता कि मेरी बुर कितनी रसीली औऱ हसीन हैं औऱ मे बड़ी आसानी सें जय कों अपनेसंग चुदाई करने केँ लिएपटा सकती हूं।
फिन मैंने भि राज सें कहा कि उसका लन्ड इतना अच्छा हैं कि ललिता भि उसके लन्ड कां स्वाद लेने केँ लिए आसानी सें आतुर हौ जाएगी।
वोँ मुझसे पूछता कि आज मुझे किसके लन्ड सें चुदवाना हैं, उसके याँ जय केँ…! मे भि राज सें पूछती कि आजउसे किसकी बुर चोदने कां मनकररहा हैं, मेरी याँ ललिता कि…!
राज नें महसूस किया कि मुझेइन बातों सें बहोत मजाआता हैं औऱ मे खूब उत्तेजित होकरराज सें चुदवाने लगी थि।
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एक् दिन तौ राज चुदाई केँ दौरान मुझसे पूछने लगा- डॉली, बताओ तौ सही, अभि तुम्हारी बुर केँ अन्दर किसका लन्ड घुसा हैं?
मे भि बिना ज्यादा हिचक केँ बोलीं- राज, इस वक़्त तौ मेरी बुर जय केँ लन्ड कां मजा लेँ रही हैं।
जल्द हि मैंने भि राज सें पूछा-राज, तुम्हारा लन्ड किसकी बुर मे हैं?
तोँ राज बड़े मज़े सें बोला- ललिता कि ललिता मे हैं।
राज नें कुछकहा नहि पऱ ये अवश्य महसूस किया कि जब मे जय केँ संग चुदाई कि कल्पना करती हूं, तोँ मेरा चुदाई मे उत्साह औऱ बढ़ जाता हैं औऱ मे राज सें खूब ज़ोर सें चुदवाती हूं।
फिन एक् दिन मैंने उससेकहा- तुम् मुझे चोदते वक्तये कल्पना करते होँ कि तुम् ललिता कों चोदरहे होँ, तौ क्यूं नहि चोदते टाइम मुझे ललिता कहकर हि पुकारो?
काफ़ी दिनों तक रोज़ हम् लोगइस काल्पनिक दुनिया मे एक्-दूसरे कों जय औऱ ललिता केँ नाम सें चोदते रहे। मे उसेजय पुकारती औऱ वोँ मुझे ललिता।
फिन करीब-करीब आज सें 5 साल पहले, एक् दिन अचानक अंजाने मे हि, जय औऱ ललिता केँ संगये कल्पना हक़ीकत मे बदल गई।
एक् दिनजय औऱ ललिता नें हमेंरात कों डिनर पर्र बुलाया।
हम् उनकेघऱ गए औऱ वहाराज औऱ जय नें संगबैठ कर थोड़ी व्हिस्की पी। मैंने औऱ ललिता नें भि थोड़ी सि ली।
तभी एकाएक जय ब्लू-फ़िल्मों केँ बारे मे बात करनेलगा, चूँकि उसे भि पता थां कि हम् दोनों ऐसी पिक्चर अक्सर देखा करते हें।
जय नें राज सें पूछा- क्याँ तुमने कभीकोई इंडियन ब्लू-फिल्म देखी हैं? ऐसी फिल्म देखने मे बड़ामजा आता हैं।
राज नें जय कों बताया- अबऐसी फ़िल्में अब आरामसे सब स्थान पऱ मिलने लगी हें औऱ हमनेकुछ देखी भि हें। यह अधिक मज़ेदार होती हें क्यूंकि साड़ी औऱ पेटीकोट उठाकर भारतीय औरतों कों अलग-अलग लोगों सें अपनी ललिता चुदवाते देखने मे अलग हि आनन्द आता हैं। जब भारतीय औरतें अपनी हसीन सां मुँहखोल कर किसी कां लन्ड चूसती हें तौ अपना लन्ड तोँ खड़ा होँ जाता हैं।
राज नें जय कों बताया- हमारी गाड़ी मे एक् वीडियो सीडी पड़ी हैं जोँ हम् वापस लौटने वाले थें।
उसनेकहा- अगर तुम् चाहो तौ उसे वापस करने केँ पहलेदेख सकते हौ !
क्योंकि ललिता नें भि कभी भारतीय ब्लू-फिल्म नहि देखी थि, जय नें उसे सुझाव दिया कि वे दोनों उसे अपने बेडरूम मे देख लेंगे औऱ हमारी वापसी पर्र लौटा देंगे।
राज नें उन्हें उत्साहित करतेहुए कहा- हम् दोनों तब तक कोई दूसरी हिन्दी फिल्म वही ड्राइंग-रूम मे देखेंगे।
पर्र जय नें कहा-ये तोँ बदतमीज़ी होगी औऱ चूँकि हम् सभी व्यस्क हें, हम् सभी कों ब्लू-फिल्म कां आनन्द एक् संग उठाना चाहिए। हालाँकि राज औऱ मुझे इसमें कोई इतराज़ नहि थां, पऱ ललिता कुछ शंका मे लगरही थि।
उसकेबाद ललिता केँ संग मे किचन मे गई औऱ उसे हिम्मत दि कि नज़दीकी दोस्तों केँ संगऐसी फिल्म देखने मे कोई हर्ज़ नहि हैं।
हम् किचन सें कुछ औऱ ड्रिंक्स लेकरआए।
कुछ वक़्त बाद ललिता नें हल्के सें कह हि दिया कि उसे फिल्म देखने मे कोई ऐतराज़ नहि हैं।
राज बाहर् जाकर वाहन सें सीडी निकाल लाया जिसका नाम ‘बॉम्बे-फैंटेसी’ थां।
हम् सभी उनके बेडरूम मे चलेगए। मे औऱ राज सोफे पऱ बैठगए औऱ जय औऱ ललिता अपनेखाट पर्र।
जय नें लाइटबंद करके फिल्म चालूकर दि। हम् लोगों नें यह फिल्म देखी हुइ थि, जिसमें दो मर्द औऱ दो महिला केँ एक् हि पलंग पऱ चुदाई कि कथा थि।
हम् शान्ति सें सोफे पऱ बैठकर जय औऱ ललिता केँ भाव पढ़़ने कि कोशिश कररहे थें।
कमरे मे टेलीविज़न कि रोशनी केँ अलावा अंधेरा थां।
कुछदेर मे हमेंलगा कि जय औऱ ललिता गरम होँ रहे थें औऱ उन्होंने अपने आप् कों कम्बल सें ढक लिया थां। ऐसालग रहा थां कि जैसेजय, ललिता केँ संग चुदाई सें पूर्व कि हरकतों मे मशगूल होँ गय़ा थां।
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येदेख करराज भि गरम हौ गय़ा औऱ मुझे चूमने लगा, मेरी चूचियों सें खेलने लगा।
अब जय औऱ ललिता अपने आप् मे इतने व्यस्त थें कि उनका ध्यान हमारी ओर नहि थां।
येजान मैंने भि राज केँ लन्ड कों हाथों मे लेकर दबाना शुरुआत कर दिया। राज नें भि अपनाहाथ मेरी ललिता पर्र रख दिया औऱ हम् भि जय औऱ ललिता केँ बीचचल रहे संभावित खेल मे शामिल हौ गए।
अचानक राज नें देखा कि जय औऱ ललिता केँ ऊपर सें कम्बल एक् ओरसरक गय़ा थां औऱ उसकी नज़रजय केँ नंगे चूतड़ों पऱ पड़ी।
ललिता कि साड़ी उतर चुकी थि औऱ जय ललिता केँ ऊपर चढ़ाहुआ थां, वे दोनों पूरीतरह चुदाई मे लगगए थें, जय अपना 8″ कां खड़ा लन्ड ललिता कि बुर मे घुसेड़ चुका थां औऱ अपने हाथों सें ललिता कि चूचियों कों मसलरहा थां।
येदेख करराज नें कहा-चलो तुम् भि मेरी ललिता बनजाओ !
औऱ येकहकर राज मेरे दोनों कबूतरों कों पकड़कर कस-कसकर मसलने लगा, पर्र मे शर, आँरही थि क्योंकि जय औऱ ललिता कि तरह हमारे पास हमारे नंगे शरीर कों ढकने केँ लिएकुछ नहि थां।
पर्र थोड़ी हि देर मे मे भि चुदाई कि चलती हुईँ फिल्म, अपनी मम्मों कि मसलाई औऱ जय औऱ ललिता कि खुली चुदाई सें काफ़ी गरम हौ गई औऱ राज सें मे भि अपनी बुर चुदवाने केँ लिए तड़पने लगी।
अब जय औऱ ललिता केँ ऊपर पड़ाहुआ कम्बल बसनाम केवल कों हि उनके नंगे बदनों कों ढकरहा थां। ललिता कि नंगी मम्मों औऱ उसकापेट औऱ नंगी जाँघें साफ-साफ दिखरही थीं।
जय इस वक्त ललिता केँ ऊपर चढ़ाहुआ थां औऱ अपनीकमर उठा-उठा कर जन्नत कि बुर मे अपना 8″ कां लन्ड पेलरहा थां औऱ ललिता भि अपनी पतलीकमर उठा-उठा करजय केँ हर धक्के कों अपनी बुर मे लें रही थि औऱ आहिस्ता बड़बड़ा रही थि जैसे ‘हाईईईईईईई, औऱ जूऊऊर सीईई चोदूऊऊ, बहुउऊुउउट मज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ा आआआआ र्हईईईई हाईईईई.!’
येदेख कर मेरी बुर गीली होँ गई औऱ मे भि राज सें वहीं सोफे पऱ चुदवाने कों राज़ी होँ गई।
मेरी रज़ामंदी पाकरराज मुझ पऱ टूट पड़ा औऱ मेरी दोनों चूचियों कों लेकर पागलों कि तरह उन्हें मसलने औऱ चूसने लगा।
मे भि अपनाहाथ आगे लेँ जाकरराज कां तनाहुआ लन्ड पकड़कर सहलाने लगी।
जब मे राज केँ लन्ड तोँ सहलारही थि तौ मुझेलगा कि आजराज कां लन्ड कुछ ज्यादा हि अकड़ा हुआ हैं।
राज नें तेज़ी सें अपने कपड़े उतारे औऱ मेरेऊपर आतेहुए मेरी भि साड़ी उतारने लगा।
कुछ हि देर मे हम् दोनों सोफे पर्र जय औऱ ललिता कि तरह नंगे होँ चुके थें।
टेलीविज़न कि धुंधली रोशनी मे भि इतना तोँ साफदिख रहा थां कि कम्बल अब पूरीतरह सें हट चुका थां औऱ जय खुलेखाट पर्र हमारे हि सामने हि ललिता कों जमकरचोद रहा थां।
ललिता भि अपने चारों तरफ सें बेख़बर हौ कर अपनीकमर उठा-उठा कर अपनी बुर चुदवा रही थि।
मेरे ख्याल सें जय औऱ ललिता कि खुल्लम-खुल्ला चुदाई देखकर मे भि अब बहोत गरम हौ चुकी थि औऱ राज सें बोलि- अब जल्द सें तुम् मुझे भि जय कि तरह चोदो, मे अपनी बुर कि खुजली सें मरीजा रही हूं।
मेरीबात ख़त्म होने सें पहले हि राज कां तनतनाया हुआ लौड़ा मेरी बुर मे एक् जोरदार धक्के केँ संग दाखिल होँ गय़ा।
राज अपने लन्ड सें इतने ज़ोर सें मेरी बुर मे धक्का मारा कि मेरी मुँह सें एक् ज़ोरदार चीख निकल गई।
मे तौ इतनी ज़ोर सें चीखी जैसे कि उसका लन्ड मेरी बुर केँ अन्दर पहलीबार गय़ा हौ !
एकाएक पूरा माहौल हि बदल गय़ा। मेरीचीख सें जय औऱ ललिता कों भि पतालग गय़ा थां कि हम् दोनों भि उसी कमरे मे हें औऱ अपनी चुदाई मे लग चुके हें।
ये हमारे जिंदगी केँ एक् नए अध्याय कि शुरुआत थि जिसने कि हमें अदला-बदली करके चुदाई केँ आनन्द कां मार्ग दिखाया।
सामूहिक चुदाई complete - adla badli chudai - Kahani ab aur interesting hogi
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