Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा Completee (2019)
khuni rishton mein chudai ka nasha
Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा completee desi chudai mom son Lund aur choot ki deewani duniya mein, hum sabhi apne khwahishein aur nasha ke liye tarse. Raj Sharma ki iss kahani mein, janiye ki kaise lund aur choot ke beech ki jang mein, hum sabhi apne parivaar, doston aur samaaj ke beech ulajh jaate hain. Choot ki pyaas aur lund ki bhukh, in dono ke beech ki ladai mein, hum sabhi apne aap ko kho dete hain.
Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा completee - desi chudai mom son - Full Story Part 1
खूनी रिश्तों मे चुदाई कां नशा
दोस्तो मे यानी आपकायार राज शर्मा एक् औऱ मस्तकथा शुरुआत करनेजा रहा हूं जौ आपको अवश्य पसन्द आएगी। दोस्तो जीवन कां एक् हि धर्म औऱ एक् हि मत हैं बुर औऱ लन्ड। दोस्तो अब आप् कहेंगे कि यह केसे होँ सकता हैं तौ दोस्तो इसके जवाब मे मे सिर्फ़ इतना हि कहूँगा कि इंसान हौ याँ जानवर सब एक् हि चीज़ पर्र अपनीजान देते हें वोँ हें लन्ड औऱ बुर। दोस्तो बुर कां धर्म एक् हि हैं लन्ड कों निकालना औऱ निगलना। औऱ लन्ड कां भि धर्म एक् हि हैं घुसना निकलना.
दोस्तो अब आप् सोचरहे होंगे कि क्याँ राज शर्मा पागल होँ गय़ा हैं जौ इसतरह कि अनर्गल बातें कररहा हैं तोँ इसके जवाब मे सिर्फ़ इतना हि कहूँगा कि जोँ बुर लन्ड कों पैदा करती हैं फिनउसी लन्ड कों अपने अंदर लेने केँ लिए क्यूं बेचैन रहती हैं औऱ लन्ड जिस बुर मे सें निकलता हैं उसी बुर मे जाने केँ किए क्यूं बेकरार रहता हैं क्याँ इसका जवाब हैं किसी केँ पासऐसा क्यूं होता हैं तोँ मेरा मानना यह हैं कि अगर सेक्स नाँ होता तौ शायद परिवार नां होता औऱ परिवार नाँ होता तौ शहर याँ गाँव याँ यह संसार हि नहीं होता। दोस्तो इंसान चाहे कितनी ऊँचाइयों कों छू लें मगर सेक्स कि ज़रूरत कों ख़तम नहींकर सकता। दोस्तो इसीलिए मे कहता हूं कि इस संसार मे बुर लन्ड केँ सिवाय कुछ औऱ हैं हि नहींइस दुनियाँ मे जहाँ भि देखोबस लन्ड हें बुर हें
दुनिया कां हर इंसान दो हिस्सों मे बटाहुआ होता हैं। एक् हिस्सा तोँ वोँ होता हैं जिसेसभी लोग जानते हें, देखते हें औऱ उसकी अच्छाई औऱ बूराई कों समझते औऱ पहचानते हें औऱ उस इंसान केँ बारे मे आपनी ज़ाति राय रखते हें। मगर इंसान कां दूसरा हिस्सा जौ पहले हिस्से सें बिल्कुल आलग हि होता हैं, उस हिस्से कि गहराई मे वोँ खूद भि पूरा नहींउतर सकता तौ दूसरा केसेउतर सकेगा। ये दूसरा हिस्सा हर इंसान कां काला यानी नेगेटिव हिस्सा होता हैं औऱ इस हिस्से कि हरबात कों पूरी दुनिया सें छुपाकर रखता हैं। इस हिस्से मे इंसान कि वोँ तमाम काली, गंदी औऱ वासना सें भरपूर शौक औऱ ख्वाहिशे छुपी हुईँ होती हें जिसे इंसान सोचसोच कर हि मजा लेता हैं, कम लोगों मे हिम्मत औऱ हौसला होता हैं कि वोँ आपनीइन गंदी ख्वाहिशो कों अपने अंदर सें निकाल कर प्रॅक्टिकली कर सकें।
Incest खूनी रिश्तों में चुदाई का नशा completee - desi chudai mom son – New Episode
बहोत हि कुछ लोगो मे हौसला तोँ होता हैं मगर हालात औऱ मौके कि वजह सें उसे पूरा नहींकर सकते हें। ऐसी बहोत सि अंदर कि ख्वाहिशो मे एक् ख्वाहिश सेक्स सें भि जुड़ी हुई हैं। सेक्स केँ बारे मे हर इंसान कां अपना हि अलग तरीक़ा औऱ पसन्द होती हैं, कोई किसी तरीक़े सें मजा महसूस करता हैं कोई किसी तरीक़े सें। सेक्स केँ शौक़ कि कोई इंतिहा नहीं होती हैं। बहूत सें इंसान ऐसे भि होते हें जिन्हे सेक्स आपनेखून केँ उन रिश्तो केँ संग करने कां सोचकर याँ उनकेसंग करके याँ उन्हें शामिल करने सें मिलता हैं जिसकी दुनिया कां कोई भि मोआश्रा औऱ मज़हब इजाज़त नहीं देता हैं, यानी इन्सेस्ट
मेरी ज़िंदगी कि किस्सा भि इन्सेस्ट सें भि जुड़ी हूई हैं। मेरे भि दो चेहरे हैं एक् वोँ चेहरा जोँ दुनिया केँ सामने हैं जिसकी बड़ी इज़्ज़त हैं लोग मेरी शराफ़त पऱ पूरा यक़ीन रखते हें। मगर मेरा दूसरा चेहरा जोँ गलाजत औऱ गंदगी सें भरपूर हैं उसेकोई नहीं जानता। मे बाज़ाहिर बहोत शरीफ औऱ नेक इंसान हूं मगार हक़ीक़त ये नहीं हैं बल्कि मे बहोत कि कमीना, बेगैरत औऱ बहोत बूरा इंसान हूं। प्रश्न ये हैं कि जब मे खूद हि इसेठीक नहीं कहता तौ मैनेये सभी किया हि क्यूं औऱ अभि तक क्यूं कररहा हूं। मे क्याँ करूँये मेरे अंदर कां कमीना पन औऱ बेगैरती हैं औऱ मेरे अंदर सेक्स कां छुपाहुआ जनून हैं जौ लज़्ज़त औऱ मज़े लेने केलिए मुझे करने पर्र मजबूर कर देता हैं। मुझेअब सिर्फ़ सीधे साधे तरीक़े केँ सेक्स औऱ चुदाई मे बिल्कुल हि मजा नहींआता हैं औऱ नाही मेरा लन्ड ठीक सें खड़ा होता हैं। आप् लोग मेरी ज़िंदगी कि कथा पढ़ेंगे तौ मालूम होगा.
। एक् बड़ी अजीबबात ये भि हैं कि अगर हमारी मां, बहेन, पत्नि याँ बेटी कों कोई मर्द ग़लत नज़रों सें देख भि लेँ, याँ वोँ खूद चोरी छुपे किसी मर्द सें ताल्लुक़ रख लें औऱ हमे मालूम हौ जाए तोँ हम् खून ख़राबे पर्र उतरआते हें, दूसरी तरफकुछ लोग अपने सामने इन्ही रिश्तो कों खूदचोद कर औऱ दूसरों सें चुदवा करमजा माहसूस करते हें, मे भि एक् ऐसा हि इंसान हूं, मेरे सेक्स कां जनून अपनी इंतिहा कों पहुंचा हुआ हैं औऱ मैने अपनी लज़्ज़त औऱ मज़े लेने केँ लिए अपनेखून केँ रिश्तो कों चोदा औऱ उन्हे किनकिन लोगो सें केसे केसे चुदवाया ये आप् कों मेरी स्टोरी पढ़कर हि मालूम होगा। मेरीये कथा बिल्कुल सच्ची किस्सा हैं सिर्फ़ इतना हैं कि इसमे लिखेहुए मुकलमे (डाइयलोग) मैने किस्सा कों दिलचस्प औऱ मज़ेदार बनाने केँ लिए लिखा हैं। क्षमा कीजिएगा मैने पहलेकभी कुछ नहीं लिखा इसलिये होँ सकता हैं कि बहोत सि फज़ूल औऱ लंबी बातें लिख दि हौ। बहरेहाल मेरी ज़िंदगी कि किस्सा पढ़िए औऱ होसके तौ अपने विचार लिखकर सहयोग करें.
दोस्तो यह स्टोरी पाकिस्तान केँ एक् ऐसे परिवार कि स्टोरी हैं जिसमे एक् लड़के नें अपनी गंदी ख्वाहिशों कों पूरा करने केँ किए क्याँ क्याँ नहीं कियायह कथाइसी तरह कां ताना बाना हैं
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मेरानाम शहाब हैं जिस वक्त मे अपनी ज़िंदगी कि येकथा जौ सूनाने जारहा हूं इस वक्त मेरीऊमर 38 साल कि हौ गई हैं। मे शहर कराची, पाकिस्तान कां रहने वाला हूं। मे पैदाहुआ औऱ पला बढ़ा कराची हि मे औऱ इससमय मे अमरीका कि रियासत टेक्सस केँ शहर होस्टान मे पाँच (5) साल सें रहरहा हूं। मे 1963 मे पैदाहुआ, हम् “6” भइया बहन हें। आजकल मेरी एक् बहन नजमा कराची औऱ दूसरी बहन असमा कॅनडा मे अपने अपने शौहरो केँ संग रहती हें। हायाउस्टन मे हम् लोगो नें दो बड़े घर-मकान संगसंग लेकर इन्हें संग हि मिलाकर एक् कर दिया हैं इसलिये बाक़ी हम् तमाम भइयासभी हि हायाउस्टन मे अपने पत्नि औऱ बच्चो केँ संगइसी एक् हि घऱ मे संग रहते हें.
यूएसए आने सें दोसाल पहले मेरे वालिद औऱ वाल्दा दोनो हि कां इंतिक़ाल हौ गय़ा थां। मेरे वालिद बशीरुद्दीन कां कराची मे पेपर कां होल्सेल कां बिज़्नेस थां। हम् अगर बहोत अमीर नहीं थें तौ ग़रीब भि नहीं थें हममे मिडिल क्लास फॅमिली मे शुमार किया जासकता हैं। हम् [6] भइया बहनों मे पहले औऱ दूसरे नंबर पर्र भइया हें जोँ मुझ सें [3] साल औऱ [एक्] साल बड़ा हैं। फिन हम् जूड़वाँ भइया बहन यानी मे औऱ मेरी बहन नजमा जोँ मुझ सें सिर्फ़ [8] मिनिट छोटी हैं, उसकेबाद मुझ सें [5] साल छोटा भइया औऱ [7] साल छोटी बहन हैं। मेरे अब्बू नें मेट्रिक केँ फ़ौरन बाद हि दोनो बड़े भाइयो कों अपनेसंग काम पर्र लगा लिया औऱ उन्हें नाइट कॉलेज मे आगे पढ़ाई केँ लिए एडमिशन दिलवा दिया, इस तरह वोँ अब्बू केँ संग बिज़्नेस मे भि लगगये औऱ पढ़ाई भि नहीं छोड़ी। हमारे पूरे घराने कि हुस्न कि तारीफ़ हरकोई करता थां.
हम् सब कां रंग सफ़ेद औऱ गुलाबी हैं, नाक नक़्शा खड़ा औऱ बहोत पुर्कशिश (चार्मिंग) हैं सभी लंबेक़द केँ हें। खुसुसन मेरी मां जिन कां नाम रज़िया हैं उनके हुश्न औऱ जमाल कि मिसाल नहीं मिलती, वोँ फिल्मी हेरोइन मधुबाला कि हम्-शक्ल थीं, लोग कहते थें कि जूड़वाँ हम्-शक्लो मे भि थोडा बहोत फरक़ होता हैं मगर माँ औऱ मधुबाला मे एक् बाल बराबर भि फरक़ नहीं थां। मेरे अब्बू औऱ मां कि उम्र मे [20] साल कां फरक़ थां यानी मां पिताजी सें [20] साल छोटी थि। बापू पहले भि एक् विवाह कर चूके थें, उस पत्नि सें कोई औलाद नहीं थि, विवाह केँ 15 साल केँ बाद उनका इंतकाल होगया थां उसकेबाद सभी केँ ज़िद करने पऱ [5] सालबाद माँ सें विवाह कि थि। जब मे [16] साल कां थां तोँ मेरी मां 35 साल कि थि मगर वोँ 35 साल कि बजाए [22/23] साल कि कंवारी लड़की नज़रआती थि। उनकाक़द 5”-6”, गुलाबी रंग, लंबेबाल औऱ शरीर उनका 35-26-34 कां थां। जब वोँ बाहर् निकलती तौ रास्ते मे चलने वालेलोग दूरदूर तक उन्हे देखते हि रहते थें। शूरू मे हमारा घराना मज़हबी औऱ पर्दे कां पाबंद घराना थां जोँ बदलते ज़माने केँ मुताबिक़ समय केँ संगसंग चलताहुआ बदलता भि रहा.फिन जब मे [10] साल कां हुआ तौ उस टाइम हि सें हमारे घराने मे पर्दे कां रिवाज ख़तमहुआ औऱ नयेदौर कि थोड़ी बहोत आज़ादी आँ गई, पहलेघऱ पर्र किसी साथी कों बुलाकर जमघट लगाना मना थां
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