सिसकारियां,,,,, - Hindi Sex Story – New Episode
अपने बेटे कों रिझाने मे ज्योति कों मज़ाआने लगा थां मगरआज जौ पहलीबार अपने बेटे केँ बदन सौष्ठव कों देखी थि वो पूरीतरह सें अपने बेटे केँ जिस्म कि बनावट सें उसकेगढन सें मंत्र मुग्ध होँ गई थि। अपने बेटे कों बहोत दिनों सें उसने बिना कपड़ों केँ देखी नहि थि। छत पऱ बिना शर्ट पैंट केँ देखने केँ बादउसे एहसास होनेलगा थां कि वाकई मे उसका बेटा पूरीतरह सें मर्दबन चुका हैं इसकी चौड़ी छाती मोटी मजबूत जांघें बार-बार उसकी आंखों केँ सामने नाचरही थि,,,, आहिस्ता उसे एहसास होनेलगा थां कि वो अपने बेटे केँ प्रति आकर्षित होतीजा रही हैं। क्योंकि अब वो अपने बेटे कों लेकर कल्पना करनेलग गई थि औऱ कल्पना भि कोई साधारण रूप सें नहि बल्कि मर्द औऱ महिला केँ बीच केँ संबंध वाला,,,, जिसका एहसास बार-बार उसे पानी पानीकर देता थां। कभी कां बार-बार अपनेमन कों मनाने कि भि कोशिश करती थि मगरऐसा वो कर नहि पाती थि। क्योंकि धीरे धीरेउसे इसमें आनंदआने लगा थां जब-जब अपने बेटे केँ बारे मे सोचती याँ कल्पना करती तौ वो पूरीतरह सें मदहोश हौ जाती, उत्तेजित होँ जाती औऱ ये मदहोशी उत्तेजना उसे अच्छी लगनेलगी थि।
वादे केँ मुताबिक अपनी बेटी केँ लिएउसे साइकिल खरीदकर लाना थां,,,,, औऱ साइकिल खरीदने केँ लिए वो अपने बेटे कों लेकर केँ बाजार पहुंच गई,,, वैसे तोँ संग मे रीमा कों आनां थां मगर वो दफ़्तर गई हुईँ थि इसलिये वो रीमा कों संग मे नहि लापाई,,, मगरफिन भि अपने बेटे कों संग मे लाने कि वजह सें उसकेमन मे अलग हि विचार घूमरहे थें। साइकिल पर्र पीछे बैठकर जाने कि खुशी उसके चेहरे पर्र साफ दिखाई देरही थि औऱ उसकी कल्पना मे वो डूबी हुइ थि,, ज्योति अपने बेटे कों लेकर केँ साइकिल कि दुकान पर्र पहुंच चुकी थि,,,, साइकिल रोहित नहि पसन्द किया थां क्योंकि वो जानता थां कि लड़कियां कैसी साइकिल चलाती हें,,, रोहित अच्छी सि साइकिल मनपसंद करके दुकानदार कों बता दिया थां दुकानदार अपने मजदूर सें उसे बाहर् निकलवा करकुछ अलग सें उसमें जोँ लगाना थां उसेलगा दिया ज्योति साइकिल कों देखकर बहोत खुश हौ रही थि औऱ वो अपने बेटे सें बोलि।
ये तेरी दिदी केँ लिएठीक रहेगी नाँ,,,
बिल्कुल मां कभी तौ मैंने ये पसन्द कियाहुं,,,,, औऱ ये मजबूत भि हैं।
इस पर्र मे बैठ तोँ जाऊंगी नां ठीक सें,,,, (अपने बेटे कि तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोलि तौ उसका बेटा भि हंसते हुए बोला)
बिल्कुल बैठजाओ कि अभि मे चलाकर लें चलूंगा तोँ स्वयं हि बैठकर देख लेना,,,,,,।
(साइकिल कों लेकर केँ मम्मी बेटे दोनों आपस मे बातें कररहे थें मगर दुकानदार ज्योति कों हि देखरहा थां पर्र इसबात कां एहसास ज्योति कों भि अच्छी तरह सें होँ रहा थां,,,, ज्योति जानती थि कि जिसतरह सें वो खड़ी होकर साइकिल कों देखरही थि ठीक उसके पीछे हि दुकानदार काउंटर पऱ बैठाहुआ थां कुर्सी पर्र बैठा बैठा वो ज्योति कि परी भरकम गोल-गोल गांडकोई देखरहा थां इसबात कां एहसास ज्योति कों अच्छी तरह सें थां इसलिये छोटी थि अपनी गांड कों कुछ अधिक हि बाहर् निकाल कर खड़ी थि औऱ जब चलती थि तोँ अपनी गांड कों कुछ अधिक हि मटकाती थि क्योंकि मर्दों कों अपनीतरफ आकर्षित करने मे उसे आनंदआने लगा थां,,,,, औऱ बार-बार साइकिल देखने केँ बहाने वो झुक भि जाती थि जिसकी वजह सें उसकी बड़ी-बड़ी गांड औऱ भि ज़्यादा उभरी हुई औऱ बड़ी लगने लगती थि जिसे देखकर दुकानदार केँ मुंह मे पानी आँ रहा थां वो ताड़देख कर ज्योति कि गांड कों देखरहा थां औऱ ज्योति भि एकदम सें नजर पीछे करके दुकानदार कों देखकर मुस्कुरा देरही थि दुकानदार उसकी मुस्कुराहट देखकर एकदम चारों खानेचित हौ गय़ा थां। )
मां मेरेलिए भि लेँ लेना नाँ,,,, (ज्योति दुकानदार कों पूरीतरह सें रिझाने मे व्यस्त थि तभी रोहित कि आवाज़ उसके कानों मे पड़ी तोँ वो रोहित कि तरफ देखने लगी,,, औऱ मुस्कुराते हुए बोलि,,, )
तेरेलिए भि लें लूंगी चिंता मतकर,,,,,,।
(इतना सुनकर रोहित फिन सें साइकिल देखने मे व्यस्त होँ गय़ा जिसके नट बोल्ट कों वो साइकिल कां कारीगर कसरहा थां,,,,, दूसरी तरफ कारीगर कां मालिक साइकिल कि मालकिन कि जवानी देखने मे व्यस्त हौ चुका थां उसे बहोत आनंद आँ रहा थां वो बार-बार ज्योति कि बड़ी-बड़ी गांड देखकर अपने खड़े लन्ड कों व्यवस्थित करने कि कोशिश कररहा थां औऱ उसेदबा भि देरहा थां,,,,, कुछदेर तक ये सिलसिला ऐसा हि चलारहा तोँ ज्योति अपने बेटे सें बोलि,,,, )
तूँ साइकिल कां बाकी कां कामठीक करवा लें मे बिल बनवा लेती हूं,,,,,,।
ठीक हैं माँ,,,, (औऱ इतना कहकर रोहित फिन सें साइकिल देखने मे व्यस्त हौ गय़ा औऱ ज्योति मुस्कुराते हुए दुकानदार केँ पासआगे बढ़ने लगी,,, ये देखकर दुकानदार कि आंखें चमकने लगी उसकेदिल कि धड़कन बढ़ने लगी क्योंकि जोँ नजरहुआ देखरहा थां उसे देखकर उसका लन्ड पूरीतरह सें उसकी औकात मे आकर खड़ा हौ चुका थां क्योंकि मौका देखकर ज्योति नें अपने ब्लाउज केँ ऊपर वालाबटन खोल दि थि जिससे उसकी भारी भरकम चुचियों कां आधे सें ज़्यादा भाग दिखाई देरहा थां औऱ चूचियों केँ बीच कि गहरी लकीर देखकर दुकानदार केँ मुंह मे पानी आँ रहा थां।,,, ज्योति जैसे हि काउंटर केँ पास पहुंची वो एकदम सें अपनी स्थान सें उठकर खड़ा होँ गय़ा औऱ कुर्सी कों ज्योति कि तरफआगे बढ़ाने लगामगर उसके खड़े होते हि,,, ज्योति कि नजर उसके पेंट मे बने तंबू पऱ गई तौ मन हि मन मुस्कुराने लगी क्योंकि उसकी जवानी कां जलवा पूरीतरह सें दुकानदार पऱ चल चुका थां जिसकी वजह सें उसका लन्ड खड़ा होँ चुका थां इसबात कां एहसास दुकानदार कों भि थां मगर वो ज्योति केँ सामने अपनेपेट मे बने तंबू कों छुपाने कि कोशिश बिल्कुल भि नहि कररहा थां बल्कि वो तोँ अपने पेंट मे बने तंबू कों ज्योति कों दिखाना चाहता थां औऱ इसीवजह सें वो अपनी स्थान सें ऊपर खड़ा हौ गय़ा थां। कुर्सी कों ज्योति कि तरफआगे बढ़ाकर वो धीरे-धीरे सें अपनी स्थान पऱ बैठ गय़ा औऱ ज्योति उस कुर्सी पर्र बैठ गई,,,, औऱ मुस्कुराते हुए दुकानदार सें बोलि,,, )
अब आप् अपनाबिल बनाईए कितना हुआ,,,,,।
(ज्योति कि बातें सुनकर अपने होठों पऱ मादक मुस्कान लातेहुए औऱ ज्योति कि चूचियों कि तरफ देखते हुए वो बोला,,, )
अब मैडमजी आपसे क्याँ मोलभाव करना जैसाठीक लगे वैसादे दो,,,, आप् जैसे कस्टमर कभी-कभार हि आते हें,,,,,।
मगर मे कभी कभार नहि आऊंगी,,, अगर आपकी मेहरबानी रही तोँ हमेशा आती रहुंगी,,,,।
अरे बिल्कुल बिल्कुल मैडमजी ये आपकी दुकान हैं जब चाहेतब आए,,,,।
जी मुझे अभि अगले महीने मे भि एक् साइकिल खरीदनी हैं अपने बेटे केँ लिए,,,, (ऐसा कहते हौ गए ज्योति अपनी साड़ी कों हल्का सां अपनी छाती सें हटा दि जिसकी वजह सें उसकी चूचियों केँ बीच कि गहराई वाली लकीर एकदमसाफ दिखाई देनेलगी जिसेदेख कर वो दुकानदार एकदम बावला होनेलगा,,,, )
लें जाइए मैडम आपकी हि दुकान हैं जब चाहेतब लेँ जाइए मे तौ कहता हूं अभि इसी वक़्त दो लेँ जाइए,,,,।
नहि नहि अभि तोँ एक् हि लेँ जा पाऊंगी दूसरी चलाएगा कौन मुझे तोँ चलाना आता नहि हैं,,,, (अपनी मादकअदा बिखेरते हुए ज्योति उसे दुकानदार सें बोलि तोँ दुकानदार एकदम मस्त होँ गय़ा औऱ बोला,,, )
मे सिखा दूंगा आप् खरीद तोँ लीजिए दोदिन मे आप् एकदमतेज साइकिल भगाने लग जाएंगे,,,,।
बहोत मजाक किया हैं आप्,,,,, आपकाये हंसमुख स्वभाव बहोत अच्छा लगता हैं। इसलिये तोँ आपकी दुकान पर्र जौ कस्टमर आता होगा दोबारा यहीआता होगा,,,,।
जी बिल्कुल ऐसा हि हैं,,,,, तभी तोँ देखरही हूं तुम्हारी दुकान बहोत सुंदर लगरही हैं हरतरह कि साइकिलें मिल जाएगी यहां पर्र,,,,।
बिल्कुल मैडमजी मे तोँ कहता हूं आपके मोहल्ले मे अगर किसी कों भि साइकिल चाहिए तोँ आप् उसे मेरी दुकान पऱ लेकरआई औऱ आपको मे स्वयं डिस्काउंट दूंगा।
क्याँ सच मे,,,, (ज्योति एकदम सें मुस्कुराते हुएउसे दुकानदार कि तरफ देखें तोँ उसके लाल-लाल होठ कों देखकर दुकानदार केँ लन्ड कि अकड़ बढ़ने लगी औऱ वो बोला)
बिल्कुल मैडमसच प्रतिशत सच आपके द्वारा लाया गय़ा ग्राहक हमारे लिए तौ ईश्वर सें काम नहि होगा औऱ वैसे भि हम् तोँ चाहते हें कि आप् हमारी दुकान पऱ बार-बार आए चाहे किसी बहाने सें,,,,,।
अगरऐसी बात हैं तौ जरूरऐसा हि होगाअब तौ मोहल्ले मे मे जिसे भि साइकिल कि जरूरत होगी सीधा आपकी दुकान पर्र लेकर आऊंगी ताकि हमें भि तौ डिस्काउंट मिलसके औऱ इसी बहाने आपसे मुलाकात भि हौ जाएगी,,,,।
(ज्योति कि इसबात कों सुनकर दुकानदार तोँ एकदमखुश हौ गय़ा उसेऐसा लगरहा थां कि जैसे चिड़िया जाल मे फंस गई हैं,,,,,,,, तभी ज्योति नें कुछऐसा बोल दि जिसे सुनकर दुकानदार कां मुंह खुला कां खुलारह गय़ा औऱ उसके लन्ड कि हालत एकदम सें खराब होँ गई उसेसमय भर केँ लिएलगा कि उसके लन्ड सें पानी निकल जाएगा क्योंकि आज तक किसीगैर स्त्री नें उसेइस तरह सें खुलकर येबात पूछी नहि थि ज्योति एकदम सें उसकी आंखों मे आंखें डालकर बोलि। )
क्याँ मे तुम्हारा बाथरूम उसेकर सकती हूं बड़े जोरों कि पेशाब लगी हैं,,,,।
(इतना सुनकर तौ दुकानदार कि हालत एकदम सें खराब होँ गई थि वो कभी ख्वाब मे भि सोच नहि सकता थां कि कोईगैर महिला उसेइस तरह सें पेशाब केँ बारे मे पूछेगी क्योंकि आज तक उसकेसंग ऐसाहुआ नहि थां बल्कि उसकी स्वयं कि स्त्री कभी उससेये नहि कही थि कि मुझे बड़े जोरों कि पेशाब लगी हैं मे अभि आता हूं औऱ ये शब्द सुनने केँ लिए तोँ जैसे उसकेकान तरसगए थें,,, इसीलिए तोँ ज्योति केँ मुंह सें पेशाब करने वालीबात सुनकर उसका मुंह खुला कां खुलारह गय़ा थां वो एक् तक ज्योति कों हि देखरहा थां ज्योति समझ गई थि कि उसकेमन मे क्याँ चलरहा हैं वो जानती थि कि इसतरह केँ शब्दों कों सुनकर अक्सर मर्द कल्पना करने लगते हें कि आखिर कार्य हसीन स्त्री जब पेशाब कररही होगी तौ केसे दिखाई देती होगी औऱ यहीबात दुकानदार केँ मन मे भि चलरही थि ज्योति पर्र सोचना बिल्कुल ठीक थां क्योंकि अगले हि समय दुकानदार पूरीतरह सें कल्पना करनेलगा थां कि अगर सामने बैठी हसीन महिला बाथरूम मे बैठकर पेशाब कररही होगी तोँ कैसी दिखाई देती होगी।
वो तोँ कुछसमय केँ लिए कल्पना मे हि खो गय़ा थां जैसेलग रहा थां कि उसकी आंखों केँ सामने हि सभीकुछ हौ रहा हौ वो कल्पना मे देखरहा थां कि ज्योति बाथरूम मे प्रवेश करती हैं औऱ धीरे-धीरे सें अपनी साड़ी कों कमर तक उठती हैं उसकी नंगी मोटी चिकनी जांघें देखकर किसी कि भि हालत खराब हौ जाए,,,, वो इसतरह कि कल्पना करतेहुए आगे सोचता हैं कि केसे एक् हसीन महिला अपनी चड्डी कों दोनों हाथों सें पकड़कर उसे नीचे कि तरफ सरकाती हैं औऱ घुटनों तक लाकर पेशाब करने केँ लिएबैठ जाती हैं औऱ उसकी चूत सें पेशाब कि धारकिस तरह सें बाहर् निकलती हैं येसभी सोचकर सच मे उसे महसूस हौ रहा थां कि उसके लन्ड सें पानी निकल जाएगा,,,, ज्योति जानती थि कि वो ख्यालों मे खो चुका हैं इसलिये उसके सामने अपनी चुटकी बजाते हुए उसका ध्यान भंग करतेहुए मुस्कुरा कर बोलीं,,, )
अरे कहां खोगए जल्दकहो मुझसे रहा नहींजा रहा हैं,,,,।
( चुटकी कि आवाज़ औऱ ज्योति कि बात सुनकर एकदम सें दुकानदार होश मे आया औऱ हडबढ़ाते हुए बोला,,, )
जी जी,,,, जी,,,,, बिल्कुल ये बाथरूम भि आपका हैं शौक सें उपयोग, करिए,,,,।
(दुकानदार कि बात सुनकर ज्योति अपनी स्थान सें मुस्कुराते हुए उठकर खड़ी हौ गई औऱ पीछे कि तरफ देखकर अपने बेटे कों देखने लगी हैं जौ अभि भि साइकिल मे हि खोयाहुआ थां औऱ मुस्कुराते हुए वहां काउंटर केँ पीछेबने बाथरूम कि तरफ जानेलगी जौ कि दुकानदार सें दोकदम कि हि दूरी पर्र थि,,,,,, औऱ अगले हि लम्हा मुस्कुराते हुए ज्योति बाथरूम मे प्रवेश कर चुकी थि बाथरूम मे प्रवेश करते वक़्त दुकानदार ज्योति कों हि प्यासी नजरों सें देखरहा थां उसका मदहोश कर देने वाला पिछवाड़ा उसकी उत्तेजना कां कारणबना हुआ थां औऱ जैसे हि वहां बाथरूम केँ अंदर प्रवेश कि वैसे हि दुकानदार एक् गहरी सांस लिया औऱ इधर-उधर देखने लगा कि कहींकोई देख तोँ नहि रहा हैं औऱ जबउसे विश्वास हौ गय़ा कि उसकीतरफ कोई नहि देखरहा हैं तौ वो धीरे-धीरे सें पेन नीचे गिराया औऱ फिनपेन उठाने केँ बहाने वो एकदम सें छुप गय़ा औऱ बाथरूम केँ अंदर कि तरफ देखने लगा क्योंकि बाथरूम कां दरवाजा लकड़ी कां थां औऱ नीचे कां लकड़ी कि पूरी पाटी निकली हुइ थि जिसमें सें बाथरूम केँ अंदर धीरे-धीरे देखाजा सकता थां,,,, औऱ ज्योति नें बाथरूम केँ उस टूटेहुए पाटी कों देखकर हि पेशाब लगने कि बातकही थि क्योंकि उसे पूरा यकीन थां कि जिसतरह केँ हालात बनेहुए हें अगर वो बाथरूम मे कहीं तोँ दुकानदार उसे देखने कि कोशिश जरूर करेगा। औऱ उसकाये सोचना बिल्कुल सही साबित हुआ थां।
पेन उठाने केँ बहाने वो दुकानदार जैसे हि टूटी हुईँ जश्न केँ अंदर कि तरफ झांका तौ बाथरूम केँ निचले स्तर कां नजारा एकदमसाफ दिखाई देरहा थां,,, वो एकदम सें मदहोश हौ गय़ा जब उसकीनजर ज्योति कि गुलाबी चूत पऱ पड़ी जोँ कि एकदम चिकनी थि कचोरी कि तरह फुली हुइ,,,, दुकानदार कभी ड्रीम्स मे नहि सोचा थां कि इतनी हसीन महिला कि चूत देखने कों उसे मिलेगा, वो तोँ मदहोश हुआजा रहा थां,,,,, उस टूटेहुए पाटी मे सें उसे मात्र ज्योति कि पायल वाला हिस्सा औऱ उसकी गुलाबी बर केँ संग-संग निचले स्तर पऱ घुमावदार उसकी गांड दिखाई देरही थि जोँ कि आगे सें दिखाई देरही पीछे सें देख पाना शायदइस टाइम उसके नसीब मे नहि थां,,,, मगर जोँ दुकानदार देख्ना चाहता थां वो उसेसाफ दिखाई देरहा थां वो तौ पूरीतरह सें पागल होँ गय़ा थां। अगले हि समय ज्योति पेशाब करना शुरुआत कि औऱ उसकी चूत सें पेशाब कि धार निकलना शुरुआत हौ गय़ा जौ कि इतनीतेज थि कि टूटेहुए पाटी मे सें बाहर् कि तरफ उसके छिंटे पड़रहे थें,,,, जिस दुकानदार कि मदहोशी औऱ अधिकबढ़ गई औऱ उसमें सें निकलरही सिटी कि आवाज़ उसके कानों मे इसकदर घुलरही थि कि मानो जैसे उसके कानों मे कोईशहद घोलरहा हौ,,,,, दुकानदार कि परछाई सें ज्योति समझ गई थि कि वो दुकानदार उसे हि देखरहा हैं औऱ मन हि मन मुस्कुरा रही थि उसकी उत्तेजना कों औऱ अधिक बढ़ाने केँ लिए ज्योति अपनी हथेली कों अपनी चूत पऱ रखकर दोनों उंगलियों केँ बीच मे अपना गुलाबी छेद रखकर पेशाब कररही थि,,,,, जिसे देखकर दुकानदार समझ गय़ा थां कि स्त्री कितनी चालू हैं औऱ उसे विश्वास होँ गय़ा थां कि अगर वो थोडा मेहनत करेगा तोँ वो जरूर उसकी झोली मे आँ जाएगी यही सपनेहुआ अपनेमन मे बसा लिया थां।
थोड़ी देरबाद ज्योति बाथरूम मे सें बाहर् आँ गई,,,, ज्योति कां हसीन चेहरे कों देखकर दुकानदार एकदम मदहोश औऱ उत्तेजित हौ गय़ा थां,,,,, दुकानदार कां मन तौ कररहा थां कि इसी वक्त साइकिल केँ गोदाम केँ अंदर लें जाकर केँ उसकी चुदाई करदेमगर ऐसा करना अभि उचित नहि थां क्योंकि वो जानता नहि थां कि ये पूरीतरह सें उसकीजाल मे आँ चुकी हैं कि नहि मगरफिन भि दुकानदार कोईकसर बाकी नहि रखना चाहता थां उसे अपनीजाल मे फंसाने केँ लिए। इसलिये वो भि थोड़ी छूट लेतेहुए मुस्कुरा कर ज्योति सें बोला।
पेशाब कर ली,,,, (इतना कहने मे तौ दुकानदार केँ पसीने छूटगए थें क्योंकि वो एक् गैर महिला कों ये प्रश्न पूछरहा थां जौ कि सामाजिक रूप सें बिल्कुल भि उचित नहि थां अगरइस बारे मे किसी कों पताचल जाए तौ दुकानदार केँ बदनामी होँ जाए कि वो महिला सें इसतरह सें बदसलूकी करता हैं मगर ज्योति मुस्कुरा कर जवाब दि)
जी होँ गय़ा,,, अच्छा हैं कि अपने बाथरूम बनवारखा हैं वरना हम् जैसे कस्टमर केँ लिए तौ मुश्किल होँ जाए।
जी हम् जानते हें इसलिये तोँ आप् जैसे कस्टमर केँ लिए बाथरूम बनवाकर रखना पड़ता हैं।
ठीक हैं चलिए तौ फिनबिल बनाईए,,,,, वैसे कितना होता हैं,,,,,।
होता तोँ साढ़े चार हजार हैं,,,,,।
अरे मे तौ सिर्फ तीन हि हजार लेकरआई हूं,,,, तब तौ लगता हैं ये सौदा नहि होँ पाएगा हमेंकोई औऱ दुकान देखनी पड़ेगी,,,,,,, (अपने बेटे कि तरफ देखते हुए जौ कि अभि भि साइकिल कों सही करवारहा थां) मेरे बेटे कां दिलटूट जाएगा चलोकोई बात नहि आपको केसे घाटा होनेदे सकते हें,,,,, हम् कोई औऱ दुकान देख लेते हें।
(ज्योति कि बात सुनकर दुकानदार परेशान होँ गय़ा,,, वो अच्छी तरह सें जानता थां कि ऐसे कस्टमर बार-बार नहि मिलते,,, औऱ उसकाइस तरह सें चले जाने कां मतलब थां कि आगे सें वो इस सुंदर स्त्री कों मिल नहि पता औऱ जिसतरह कां उसने अपनेमन मे सपनेसजा रखा हैं वो सपने भि कभी पूरा नहि हौ सकता इसलिये वो एकदम सें बोला,,, )
अरे मैडमजी परेशान क्यूं होती हैं ये तोँ दूसरों केँ लिए हैं आपकेलिए थोड़ी नाँ हैं आप् तोँ वैसे भि हमारे लिए कस्टमर लेकर आएंगे तोँ वैसे हि हमारा धंधा अच्छा चलेगा आपकेलिए तोँ जोँ आप् लेकरआई हैं वहींदे दीजिए,,,,।
(इतना सुनकर ज्योति मन हि मन एकदमखुश होँ गई मगरफिन भीवह अपनी खुशी अपने चेहरे पर्र जाहिर होने नहि थि औऱ दुःखी चेहरा लेकर उससे बोलि। )
मगर आपको तौ नुकसान हौ जाएगा,,,।
अरे मैडमजी ये जोँ ऊपर कां मे रुपया बोला हूं वो हमारा फायदा हि हैं नुकसान कुछ भि नहि हैं ये तौ आप् अपनी हैं इसलिये आपको उचित कीमत मे देरहा हूं,,,,।
ओहहहये बातहै,,,, तब तोँ तेरा कि मे आपकी दुकान पऱ बहोत सारे ग्राहक लेकर आऊंगी,,,।
यही तोँ हम् चाहते हें मैडमजी,,,,।
(थोड़ी हि देर मे दुकानदार कों पैसे देकर ज्योति बिल बनवाली थि औऱ अपनी जवानी कां जलवा दिखाकर ₹1500 कम भि करवाली थि,,, जिसकी खुशी उसकेमन मे उसे औऱ उत्साहित कररही थि,,,,,, )
सिसकारियां,,,,, - Hindi Sex Story – New Episode
दुकानदार तोँ एकदम मदहोशी मे डूबाहुआ थां क्योंकि आज ज्योति नें जोँ उसे जवानी कां जलवा दिखाई थि किसीगैर महिला नें आज तक उसे नहि दिखापाई थि,,,, याँ यूंकह लो कि दुकानदार कि भाग्य मे हि नहि थां इतनी सुंदर महिला कि रसीली चूत केँ दर्शन करने कां मगर ज्योति कि मदहोशी उसकी उत्तेजना उसे विवसकर दि थि कि गैर मर्द कों वो अपनी चूत केँ दर्शन कराएमगर इसका फायदा भि उसेहुआ थां साइकिल पर्र भारीछूट मिल चुकी थि औऱ वो भि ₹1500 कां औऱ येरकम बहोत होती हैं,,, ज्योति केँ लिए तोँ येरकम वाकई मे बहोत बड़ी थि जैसे तैसे करके वहां अपनीबचत मे सें अपनी बेटी कों साइकिल दिलाई थि औऱ उसमें भि उसे ₹1500 कां मुनाफा हौ चुका थां जिसमें उसकाकुछ अधिक गय़ा नहि थां बस थोडा सां बेशर्म बनना पड़ा थां औऱ इस बेशर्मी मे उसे भि बहोत मज़ाआया थां बार-बार उसकी चूत गीली हौ जारही थि,,,,।
कुछ दूरी तक मम्मी बेटेआपस मे बात करतेहुए आगे बढ़ते रहे,,,,, ज्योति साइकिल पऱ बैठकर जानां चाहती थि,,, इसलिये वो अपने बेटे सें बोलि,,,।
क्याँ हुआचला नहि पाएगा क्याँ,,, ?
क्यूं नहि चला पाऊंगा मुझे साइकिल चलाना आता हैं,,,।
मुझे बैठाकर चला लेगा,, ! (अपने बेटे कि तरफ देखते हुए आश्चर्य सें वो बोलि,,,, )
क्यूं नहि चला पाऊंगा तुम्हारा वजन क्याँ ज़्यादा हैं मे आहिस्ता चला लूंगा,,,।
तौ चल क्यूं नहि रहा हैं पैदल हि लेकरचल रहा हैं,,,,।
अरे मुझे क्याँ मालूम मुझे तोँ लगा कि तुम्हें अभि कुछ सामान लेना होगा।
मुझेकुछ लेना नहि हैं जल्द सें मुझे बैठा मे भि देखु साइकिल पर्र बैठकर कैसा लगता हैं,,,,।
अरे बहोत आनंद आएगा रुको मे अभि बैठाता हूं,,,, (इतना कहने केँ संग हि रोहित फुटपाथ केँ किनारे पहुंच गय़ा औऱ स्वयं साइकिल पर्र बैठ गय़ा वो इसबात कों जानता थां कि उसकी मम्मी उछलकर साइकिल पर्र बैठ नहि सकती इसलिये फुटपाथ केँ किनारे पऱ लेकर गय़ा थां ताकि फुटपाथ पऱ खड़ी होकर वो धीरे-धीरे साइकिल केँ पीछेबैठ सके,,,, साइकिल पर्र धीरे-धीरे बैठने केँ बाद रोहित अपनी माँ कि तरफ देखते हुए बोला)
अबबैठ जाओ,,,,, मगर साड़ी सहीकर लेनाऐसा नाँ होँ कि साड़ी कां पल्लू साइकिल केँ पहिए मे फसजाए औऱ फजेती होजाए,,,।
नहि नहि ऐसा बिल्कुल भि नहि होने दूंगी,,,, (इतना कहने केँ संग हि ज्योति अपनी साड़ी केँ पल्लू कों सही करनेलगी,,, औऱ ऐसा करते टाइम वो साड़ी केँ पल्लू कों अपने दोनों चूचियों केँ बीच लातेहुए उसे अपनीकमर मे खोंसली,,, मगर उसकेऐसा करने पर्र उसके दोनों चुचियों कां उभार दोनों गोलियां थोड़ी अलग हौ गई मगरउभर कर दिखाई देनेलगी जिस पऱ लम्हा भर केँ लिए रोहित कि नजर गई थि औऱ वो नजर कों दूसरी तरफ घुमा दिया थां,,, मगर रोहित किया हरकत ज्योति नें देखली थि औऱ मन हि मन मुस्कुरा रही थि वो जानबूझकर अपने बेटे कां ध्यान फिन सें अपनी चूचियों पऱ लाने केँ इरादे सें बोलीं। )
अबदेख तोँ सही हैं नाँ दिक्कत तोँ नहि आएगी नाँ,,,।
(अपनी माँ कि बात सुनकर रोहित फिन सें अपनी माँ कि तरफ देखने लगा औऱ फिन सें अचानक सें उसकीनजर अपनी मम्मी कि दोनों गोलाईयों पर्र चली गई औऱ वो शर्मिंदा हौ गय़ा औऱ अपनीनजर कों फिन सें दूसरी तरफ घूमाते हुए बोला,,, )
हां अबठीक हैं अबबैठ जाओ,,,,,,।
(अपने बेटे कि बात सुनकर ज्योति मुस्कुराने लगी औऱ पीछेसीट पऱ बैठ गई,,, औऱ अपने बेटे सें बोलि,,, )
अबचल,,,,।
ठीक सें पकड़ लेना,,,, तुम्हें साइकिल पर्र बैठने कि आदत नहि हैं,,,,, आहिस्ता बैठना अगरकोई दिक्कत होँ तोँ मुझे जल्दी बोल देना,,,,।
ठीक हैं मगर यहां पकडने जैसाकुछ हैं हि नहि,,, (इतना कहने केँ संग हि वो अपनेमन मे सोचने लगी कि पकडने लायक तौ तेरा लन्ड हैं उसे हि साइकिल केँ हैंडल कि तरह पकड़लु क्याँ,,, मगर वो अपने मुंह सें ऐसाबोल नहि पाई तौ रोहित स्वयं हि बोल पड़ा,,, )
एक् हाथ सें जिस पर्र बैठी हौ वो सीट पकड़लो,,,, तब तुम्हें भि सहारा रहेगा,,,।
ठीक हैं,,,, (अपने बेटे केँ कहे अनुसार वो जिससीट पर्र बैठी थि उसे एक् हाथ सें पकड़ली मगर दूसरे हाथ कों कहां रखेंउसे समझ मे नहि आँ रहा थां तौ,,,, वो दूसरे हाथ कों अपने बेटे केँ कमर पर्र रख दि ऐसा वो जानबूझकर कि थि,,,, जिसका एहसास रोहित कों हुआ थां मगर वो लज्जा केँ मारेकुछ बोल नहि पाया थां क्योंकि उसे लगता थां कि अगर अभि कहीं उसकी माँ अपने आप् कों संभाल नहि पाई औऱ गिर गई तौ उसे हि दोस देगी कि वो कमर पऱ हाथ रखकर सहारा ली थि तोँ उसने हि रखने नहि दिया,,,, रोहित सजधजकर थां आगे बढ़ाने केँ लिएमगर फिन भि एक् बार तसल्ली कर लेना चाहता थां इसलिये अपनी मम्मी सें बोला,, )
अब चलु नां,,,,
हांअब लेँ चल,,,,,,, (अपनी माँ कि बात सुनते हि रोहित पैडल पर्र दबाव बनाकर साइकिल कों आगे बढ़ने लगा देखते हि देखते साइकिल आहिस्ता चलनेलगी औऱ ज्योति कों खुशीआने लगाउसे मज़ाआने लगा पहलीबार वो साइकिल पऱ बैठरही थि औऱ वो भि अपने बेटे केँ संग औऱ वो जिसतरह सें धीरे-धीरे चलारहा थां ज्योति कों औऱ भि अधिक आनंद आँ रहा थां उसे बिल्कुल भि डर नहि लगरहा थां इसलिये वो अपने बेटे सें बोलि,,, )
वाउरे तूँ तौ बहोत अच्छी साइकिल चलाता हैं,,,, मुझे बिल्कुल भि डर नहि लगरहा हैं,,,।
चलाने वालासही होना चाहिए,,,, औऱ मे अच्छी तरह सें साइकिल चला सकता हूं,,,,,।
तेरी बेहन देखेगी तोँ खुशहो जाएगी,,,।
तुम् सचकहरही होँ मां वैसे भि दफ़्तर जाते वक्तबस मे ओटो मे धक्के खाने सें तौ अच्छा हैं कि अपनी साइकिल उठाए औऱ चलदिए,,,, मुझे भि कभीकम पड़ेगा तोँ मे भि साइकिल लेँ जा सकता हूं,,,,।
इसीलिए तोँ ली हूं,,,, मुझे भि कभी बाजार जानां होगा तौ साइकिल पर्र बैठकर चली जाऊंगी,,,,।
अपने आप् चलाकर,,,, (एकदम सें हंसते हुए रोहित बोला तौ उसकीपीठ पऱ ठोकते हुए ज्योति बोलीं)
चलाना आता तौ मे तुम्हें संग मे क्यूं लें जाती तूँ हि मुझे लेँ चलेगा बैठाकर,,,
ठीक हैं,,,, (इतना कहने केँ संग हि रोहित नें एकदम सें ब्रेक मारा तौ ज्योति भि अपने आप् कों ठीक सें सामान नहि पाई औऱ आगे कि तरफ अपने बेटे कि पीठ सें सात गई मगरऐसा करने मे उसकी एक् मम्मों उसके बेटे कि पीठ सें दब गई जिसका एहसास रोहित कों भि बहोत अच्छी तरह सें हुआ थां,,, वैसे तौ उसकेलिए ये शर्मनाक बात थि मगर न् जाने क्यूं उसके शरीर मे एकदम सें हलचल सि होनेलगी,,,, लम्हा भर कां ये स्पर्श ये दबाव उसके तन-बाद मे अजीब सि सुरसुराहट पैदाकर दिया थां जिसका एहसास रोहित कों बहोत अच्छे तरीके सें हुआ थां,,,,, मगर अगले हि पऱ ज्योति कि मम्मों उसकीपीठ सें फिन सें थोड़ी सि दूरीबना ली थि औऱ येसभी अपने आप् हि हुआ थां,,,, ज्योति भि अंदर हि अंदरखुश होँ रही थि,,, फिन भि अपने बेटे सें बोलि,,, )
संभाल कर,,,,।
संभाला हि तोँ हूं,,,, एकदम सें आगेकार आँ गई थि,,,,।
ठीक हैं धीरे-धीरे चलाना वैसे तौ तूँ अच्छा हि चलरहा हैं,,,।
मगरअब थोडा संभलकर बैठना अब मार्ग थोडा खराब हैं छोटे-छोटे गड्ढे हें,,,,।
ठीक हैं मे पकड़कर बैठी हूं,,,।
(औऱ रोहित केँ कहे अनुसार वाकई मे मार्ग पऱ छोटे-छोटे गड्ढे बनेहुए थें जिसमें सें साइकिल कां पहिया गुजरता थां तौ, साइकिल थोडा उछल पड़ती थि जिससे ज्योति कों बैठने मे थोड़ी तकलीफ हौ रही थि एक् बारजब अचानक साइकिल कां पहिया गड्ढे मे सें गुजरा तौ ज्योति कां हाथ जोँ उसने अपने बेटे केँ कमर पर्र रखी थि वो एकदम सें नीचे फिसलकर रोहित केँ पेट केँ आगे वालेभाग पर्र आँ गय़ा जहां पर्र उसका लन्ड थां,,,,, येसभी अचानक औऱ अनजाने मे हुआ थां,,,, मगर ज्योति कों अपनी हथेली मे अपने बेटे कां लन्ड महसूस होँ रहा थां जोँ कि अभि तनाव मे बिल्कुल भि नहि थां मगरफिन भि उसका अच्छा खासाभाग हथेली मे महसूस होँ रहा थां जिसकी वजह सें ज्योति केँ तनबदन मे अजीब सि हलचल होनेलगी,,,,, रोहित एकदम सें लज्जा सें पानी पानी होँ गय़ा उसेऐसा थां कि अभि उसकी मम्मी वहां सें हाथ हटाएगी मगरऐसा नहि हुआ धीरे धीरे साइकिल आगे बढ़ती रही,, छोटे-छोटे गड्ढे सें गुजरते हुए साइकिल आगेबढ़ रही थि औऱ छोटी अपने आप् कों संभालने केँ बहाने सें अपनी हथेली कों उसके तंबू वालेभाग पऱ रखी हुई थि जोँ कि अब धीरे धीरे तनाव कि स्थिति मे आँ रहा थां वो फूलरहा थां,,,, औऱ ज्योति थि कि एकदमसहज बनेहुए अपने बेटे सें बातें भि कररही थि ताकि उसके बेटे कों बिल्कुल भि शक नां होगी उसकी हथेली वो जानबूझकर उसके पेंट केँ आगे वालेभाग पर्र रखी हुइ हैं उसेऐसा हि लगे कि येसभी अनजाने मे हुआ हैं,,,, इसलिये वो अपने बेटे सें बोलि,,, )
बरसों सें इस मार्ग सें गुजरती हूं मगरआज तक ये मार्ग वैसे कि वैसी हैं,,, एक् बार भि इसे बनाया नहि गय़ा स्थान-स्थान पऱ गड्ढे कितनी मुश्किलें होती हैं आने जाने मे,,।
तुम् ठीककह रही हौ माँ यहां सें आने मे मुझे भि बहोत दिक्कत होती हैं पैदल चलते वक़्त तोँ ठीक हैं मगरअगर ओटो पऱ बैठकर आओ तौ ऐसी उछलती हैं कि पेट दर्द करने लगता हैं।
औऱ हां बारिश केँ दिनों मे तोँ यहां सें गुजरा समझलो अपनेहाथ पेर तुड़वाने केँ लिए आमंत्रण देना हौ जाता हैं क्योंकि कुछ तौ दिखता नहि हैं कबपेर गड्ढे मे चलाजाए पता हि नहि चलता,,,, इसलिये मे तोँ कभी बारिश मे अगर पानीभरा रहता हैं तौ यहां सें आती हि नहि दूसरी तरफ सें घूमकर आती हूं,,,,,।
मगर दूसरी तरफ सें तोँ बहुत लंबापड़ जाता होगा,,, (रोहित केँ पास अपनी मम्मी सें बातचीत करने किसी कां कोई औऱ मार्ग नहि थां क्योंकि वो खामोश रहकर अपनी मम्मी कों ये नहि जताना चाहता थां कि उसकी मम्मी कां हाथगलत स्थान पऱ पड़ गय़ा हैं वैसे तोँ वो पूरीतरह सें लज्जा सें पानी पानी होँ जारहा थां मगर वो अपनी माँ कों इस दिशा मे निर्देश भि नहि कर सकता थां क्योंकि ऐसा करने पर्र उसेफिन सें शर्मनाक स्थिति कां सामना करनापड़ जाता,,, उसे मालूम थां कि थोड़ी हि देरबाद वो इस शर्मनाक स्थिति सें बाहर् आँ जाएगा मगरतब तक उसके लन्ड कां तनाव बढ़ता जारहा थां उसेकुछ समझ मे नहि आँ रहा थां अपनी मम्मी कि हथेली कां स्पर्श पाकर उसकेबाद मे उत्तेजना कि लहरउठ रही थि उसका लन्ड अपनी औकात मे आँ रहा थां जिसका एहसास ज्योति कों बहोत अच्छे तरीके सें होँ रहा थां वो अंदर हि अंदर बहोत खुश हौ रही थि मन तौ उसकाकर रहा थां कि इसी वक़्त अपने बेटे केँ लन्ड कों पेंट केँ ऊपर सें अपनी हथेली मे दबोच लेँ,,, मगरइस वक़्त ऐसा करना हैं उसे भि उचित नहि लगरहा थां फिरभी इस दौरान बार-बार उसकी मम्मों भि उसके बेटे कि पीठ सें दबजारही थि शर्टजा रही थि जिसका अलग हि एहसास माँ बेटे दोनों कों मदहोश किएहुए थां क्योंकि ज्योति कि चूत पानी छोड़रही थि। अपने बेटे कि बात कां जवाब देतेहुए ज्योति बोलीं,,, )
तौ इसमें क्याँ होँ गय़ा 5 10 मिनट कां हि अंतर रहता हैं औऱ यही अंतरकम करने केँ लिएइस मार्ग सें आओ तौ बारिश मे अपनेहाथ पेर भि तुड़वा लो,,,,।
बात तौ तुम् सहीकह रही हौ,,,,, चलो बारिश मे अगर पानीभर जाएगा तौ मे भि दूसरी तरफ सें हि आऊंगा,,,,।
(थोड़ी देर मे दोनों मम्मी बेटे अपनेघऱ पऱ पहुंच चुके थें,,,, तब तक रीमा भि घऱ पऱ आँ चुकी थि औऱ अपनेलिए लाई हुई साइकिल देखकर वो बहोत खुश हौ गई,,,,, ज्योति केँ जेठ कि लड़की कामिनी भि वहीं आँ गई औऱ वो भि अपनी बड़ी दिदी केँ लिए साइकिल देखकर खुश होतेहुए बोलि,,,, )
अरेवाउ चाची अब तौ अच्छा रहेगा रीमा दिदी साइकिल पऱ बैठकर दफ़्तर जाएंगी बस औऱ ऑटो कां झंझट हि ख़त्म हौ गय़ा,,,, चलोइस बात पर्र तोँ मुंह मीठा करना बनता हि हैं,,।
चलकोई बात नहि साम कों आँ जानां खीर पूरी सब्जी बनेगी मुंह मीठाकर लेना,,,,,।
(घऱ पर्र पहुंचने केँ बाद रोहित वहां पर्र रुका हि नहि थां क्योंकि उसके लन्ड कि स्थिति उसे वहां रुकने कि स्थिति मे नहि छोड़ा थां क्योंकि पेट मे तंबूबना हुआ थां,,,,, वो जानता थां ईस अवस्था मे अगरकोई देख लेगा तौ क्याँ समझेगा,,,, इसलिये बस सीधा बाथरूम मे चला गय़ा थां औऱ पेशाब करनेलगा थां औऱ जब स्थिति शांत हुईँ तौ वो बाहर् आँ गय़ा थां,,,,।
साम कों खाने पर्र कामिनी भि आई थि औऱ खानां खाने केँ बाद एक् कटोरी मे खीर लेकर गई थि अपनी माँ औऱ अपने बापू केँ लिए,,,,, खीर अपनी मां कों देखकर वो अपने कमरे मे पढ़ने केँ लिएचली गई थि जब वो दोनों खानां खाने बैठे तोँ खीर देखकर कामिनी केँ बापू बोले,,,, )
वाउ आजखीर बनी हैं,,,,।
नहि अपने वहां नहि बनी हैं ये तौ ज्योति केँ वहांबनी हैं कामिनी वहीं पर्र खानां खाकरआई हैं औऱ लेकरआई हैं,,,,।
क्यूं आजकुछ खासबात थि क्याँ,,,, (कटोरी मे सें खीर कों अपनी थाली मे गिराते हुए कामिनी केँ पिताजी बोले,,,, )
हां आज ज्योति नें रीमा केँ लिए साइकिल लेकरआए हें औऱ कामिनी मुंह मीठा करने केँ लिएबोल रही थि तोँ ज्योति खीरबना दि,,,,।
चलोये तोँ अच्छा हुआ रीमा साइकिल पर्र दफ़्तर आएगी जाएगी तौ वक्त भि बचेगा औऱ टाइम पर्र घऱ भि पहुंच जाएगी,,,, (एक् चम्मच खीर लेकर अपने मुंह मे डालते हुए कामिनी केँ पिताजी बोले औऱ खीर कां स्वाद इतना मज़ेदार थां कि एकदम सेबोल पड़े)
वाउमान गए,,,, ज्योति खीर भि अपनी हि तरह बनाती हैं एकदम मीठी औऱ लजीज,,,,,, मज़ा आँ गय़ा ये तोँ मे पूराखा जाऊंगा ऊममममम,,,,,।
इस उम्र मे भि अभि तक तुम्हारी दीवानगी समाप्त नहि हुईँ,,,,,।
क्याँ करूं कोमल,,,, ज्योति चीज हि ऐसी हैं,,,,।
तुम् सच मे,,,, बहोत बेकार होँ अपनी उम्र कां तोँ लिहाज करो,,,,,।
क्यूं क्याँ हुआ मेरी उम्र कों,,, क्याँ मेरा खड़ा नहि होता क्याँ मे तुम्हें संतुष्ट नहि कर पाता,,,,।
अरे वो सभी मे नहि कहरही हूं,,,, छोड़ो तुमसे तौ बात हि करना बेकार हैं,,,,।
(कोमल इतना कहकर खानां खानेलगी वो जानती थि कि आज कां नहि हैं ये बरसों सें चलता आँ रहा थां कोमलइस बात कों अच्छी तरह सें जानती थि कि उसके पति कां झुकाव हमेशा सें ज्योति कि तरफ अधिकरहा थां मगरइस बात कां गीला कोमल कों बिल्कुल भि नहि थां,,,, क्योंकि वो इसबात कों भि अच्छी तरह सें जानती थि कि उसके पति केँ मन मे ख्याली पुलाव हि पकता हैं ज्योति कों लेकर,,,, आज तक दोनों केँ बीचऐसा कुछ भि नहि हुआ थां जिससे कोमल कों तकलीफ होँ,,,,, औऱ ये मात्र उसके पति कि तरफ सें थां ज्योति कि तरफ सें बिल्कुल भि नहि थां ज्योति तौ हमेशा उसके पति केँ सामने घूंघट मे हि रहती थि,,,,, फिन भि खानां खातेहुए कोमल केँ पति शरारती अंदाज मे बोले,,, )
आज चलो कमरे मे पटककर तुम्हारी लूंगा,,,,।
अच्छा येबात हैं मे भि तोँ देखूं कितना दामबचा हैं तुम्हारे मे,,,, (कोमल भि मुस्कुराते हुए पानी कां गिलास उठाली औऱ इतना कहने केँ बाद पानी पीनेलगी,,,,,,,,
थोड़ी हि देरबाद थोड़ी बहोत घऱ कि साफ सफाई करने केँ बाद कोमल औऱ उसके पति दोनों कमरे केँ अंदर थें औऱ कोमल अपने पति केँ लन्ड पर्र चढ़ी हुईँ थि औऱ उठक बैठककर रही थि,,,,, कामिनी केँ पिताजी अपने दोनों हाथों सें कोमल कि बड़ी-बड़ी चूचियों कों दबाते हुए मदहोश हौ रहे थें औऱ बोले,,,,।
काश मेरी रानी तेरी स्थान ज्योति होती तौ आनंद हि आँ जातापटक कर उसकी चूत मे लन्ड डाल देता इतनी गोरी हैं उसकी चूत भि कितनी गोरी होगी एकदम मक्खन मलाई कि तरह,,,,,, (नीचे सें अपनीकमर कों उछालते हुए वो बोले,,, कोमल भि पूरीतरह सें जोश औऱ मदहोशी मे भरी हुइ थि वो भि तेज़-तेज़ सें अपनी गांड कों लन्ड पऱ पटकते हुए बोलि,, )
तौ जाओघुस जाओ उसके कमरे मे अकेली हि सोरही होगी शायद तुम्हें कमरे मे अकेला देखकर उसकी भि भावनाएं जागजाए औऱ तुम्हारे लिए अपनी टांगें खोलदे,,,,, (ऐसा कहतेहुए कोमल जोर-शोर सें अपनी गांड कों पटकरही थि उसे बहोत आनंद आँ रहा थां औऱ इस वक़्त वो अपने पति केँ कड़कपन कां एहसास अपनीबर केँ अंदरकर रही थि,,, )
जरूरऐसा हि होगा मुझे देखकर उसकी चूत पानी छोड़ने लगेगी वैसे भि बरसों गुजर गय़ा उसकी चूत मे पता नहि लन्ड गय़ा कि नहि,,,, मुझे नहि लगता ज्योति इतनेदिन सें शांत बैठी होगी,,,, साली इतनी मक्खन मलाई हैं जरूर किसी न् किसी कां तोँ लेती हि होगी औऱ वैसे भि उसे देखकर लन्ड खड़ा हौ जाता हैं,,,, कोई तौ होगा हि जोँ रोज उसकी चुदाई करता होगातभी तोँ आज भि इतनी जवानबनी हुईँ हैं,,,,।
पता नहि जाकर उससेपूछ लो क्याँ पता तुम्हारा कामबन जाए,,,,।
काम तोँ मेराबन हि जाए थोड़ी सि हिम्मत दिखाकर अगर मे उसके कमरे मे पहुंच गय़ा तौ रातभर उसकीऐसी चुदाई करूंगा कि सुभहठीक सें चल भि नहि पाएंगी,,,
(ऐसा कहतेहुए वो जोर-शोर सें अपनीकमर कों ऊपर कि तरह उछालरहा थां औऱ दोनों हाथों सें कोमल कि चूचियों कों पकड़कर मसलरहा थां दबारहा थां कोमल पूरीतरह सें मस्त हौ गई थि वो अच्छी तरह सें जानती थि कि जब भि चुदाई केँ वक्त ज्योति कां जिक्र होता थां तोँ उसके पति केँ अंदर नां जाने कैसी ताकत आँ जाती थि औऱ वो पूरा कि जान सें उसकी चुदाई करते थें जिससे उसे अद्भुत खुशी कि प्राप्ति होती थि इसलिये ऐसे वक्त पर्र जब भि उसके पति ज्योति कां जिक्र करते थें तौ वो कभी उन्हें रुकती नहींथी बल्कि वो भि शामिल होँ जाती थि औऱ दोनों अद्भुत मजा प्राप्त करते थें,,,, )
सिसकारियां,,,,, - Hindi Sex Story – New Episode
नई साइकिल पाकर रीना बहोत खुश थि, रोहित भि बहोत खुश थां क्योंकि वो जानता थां कि कभी-कभार उससे भि साइकिल चलाने कां मौकामिल जाएगा,,,, ज्योति तौ पहले सें हि खुश थि, मर्दों केँ सामने अपनी जवानी कां प्रदर्शन करने मे उसे धीरे धीरे आनंदआने लगा थां उसेये देख्ना अच्छा लगता थां कि उसकी जवानी देखकर मर्द कितनी जल्द पिघल जाते थें उनकी हालत कितनी खराब होँ जाती थि। औऱ इसेइस बात कां गर्व भि होता थां कि दो-दो जवान बच्चों कि माँ होने केँ बावजूद भि उसकी जवानी बरकरार थि। उसकीतरफ आकर्षित होने वाले मर्दों कि कमी बिल्कुल भि नहि थि अभि भि उसके अंगों मे वो आकर्षण थां कि वो अच्छे अच्छों कां पानी निकाल सकती थि,,, यहां तक कि अपनी जवानी कां जलवा अपने बेटे कों भि दिखाने सें वो बिल्कुल भि नहि कतराती थि,,, औऱ एक् तरह सां उसका स्वयं कां आकर्षण अपने बेटे कि तरफबढ़ रहा थां। औऱ इसबात सें रोहित पूरीतरह सें अनजान थां।
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ऐसे हि रात कां वक़्त खानां खाने केँ बाद रीमा अपने कमरे मे चली गई थि सोने केँ लिए रोहित अपने कमरे मे पढ़ाई कररहा थां उसकीरोज कि आदत थि रोजरात कों दूध पीकर हि सोता थां। खानां खाने केँ बादघऱ कि सफाई करतेहुए ज्योति रसोई कि भि सफाईकर रही थि उसे मालूम थां कि अभि रोहित कों दूध देना बाकी थां तभी नाँ जाने क्याँ उसकेमन मे सूझी औऱ वो अपने कमरे मे गई अपने कपड़े बदलकर एक् लोकट कुर्ता औऱ पैजामा पहनली,,, जिसमें उसकीआदत सें भि ज़्यादा चूचियां बाहर् कों झलकरही थि औऱ कुर्ता इतनाकसा हुआ थां कि उसकेहर एक् अंगसाफ नजर आँ रहे थें,,, अपने आप् कों आईने मे देखने केँ बाद वो अपने कमरे सें बाहर् आई औऱ रसोई मे चली गई, रोहित केँ लिए वो दूध कों एक् गिलास मे निकालने लगी,,, उसके होठों पऱ मादक मुस्कान थि,, औऱ उसकी आंखों मे वासना भि नजर आँ रही थि एक् बारजिस महिला मे वासना वासकर लेता हैं तब वो अपने अंदर कि लज्जा कों पूरीतरह सें त्याग देती हैं बेशर्म बन जाती हैं औऱ अपने कामुक हरकतों कों करने सें बिल्कुल भि नहि घबराती,,, अच्छे बुरे कि पहचान उसे नहि रहती वो किसके संग अश्लील हरकतकर रही हैं ये भि उसकोभान नहि रहताफिन भले हि चाहे सामने उसका बेटा हि क्यूं नाँ होँ औऱ यहीहाल इस वक़्त ज्योति कां भि हौ गय़ा थां। बाकी कां काम ख़त्म करके वो अपनेहाथ मे कि दूध कां गिलास लेकर रसोई सें बाहर् निकल गई औऱ सीधा अपने बेटे केँ रूम पर्र पहुंच गई जिसका दरवाजा हल्का सां खुलाहुआ थां औऱ अंदर ट्यूबलाइट कां उजाला साफ दिखाई देरहा थां इसका मतलबसाफ थां कि अभि वो जागरहा थां।
धीरे-धीरे सें दरवाजा खोलकर वो अंदर देखी तोँ उसका बेटा बैठकर पढ़रहा थां उसे पढ़ता हुआ देखकर उसके चेहरे पऱ प्रसन्नता केँ भावनजर आनेलगे इसबात सें नहि कि वो पढ़रहा हैं बल्कि इसबात सें कि अभि वो जागरहा थां जबकि आजउसे दूध देने मे थोडा देर होँ गई थि,,, अपने बेटे केँ कमरे मे प्रवेश करतेहुए वो बोलि।
अरे अभि तक जागरहा हैं मुझे तोँ लगासो गय़ा होगा,,,,।
नहि माँ आज जरूरी नोट्स पूरे करने थें इसलिये अभि तक जागरहा थां,,,, (अपनी माँ कि तरफ देखे बिना हि वो बोला,,,, )
लें अच्छा जल्द सें दूधपी लें आजदूध लाने मे देर हौ गई। (अपने बेटे केँ एकदम लगभग खड़ी होकर वो बोलीं औऱ अपनी माँ कि बात सुनकर रोहित दूध कां गिलास लेने केँ लिए जैसे हि ऊपर कि तरफ देखा तोँ सबसे पहलेउसे उसकी माँ कि बड़ी-बड़ी चूचियां दिखाई थि जौ कि केसेहुए कुर्ते मे कुछ ज़्यादा हि बड़ी दिखाई देरही थि कुछ सेकेंड केँ लिए रोहित अपनी माँ कि चूचियों कों देखा हि रही क्याँ क्योंकि उसे उम्मीद नहि थि कि उसकी माँ इस लिबास मे उसके सामने आँ जाएगी,,,,, अपने बेटे कि नजर कों ज्योति नें गौर कि थि औऱ वो मन हि मन मुस्कुरा रही थि खुश होँ रही थि क्योंकि वो जौ चाहती थि इस वक़्त वहीहुआ थां उसके बेटे कि नजर उसकी चूचियों पऱ आकररुक चुकी थि,,,,, धीरे-धीरे सें रोहित हाथआगे बढ़कर अपनी माँ केँ हाथ सें दूध कां गिलास लेँ लियामगर ये उसकेसंग अनजाने मे हि हुआ थां कि दूध कां गिलास अपनेहाथ मे लेने केँ बावजूद भि उसकीनजर उसकी चूचियों सें बिल्कुल भि नहि हटी थि,,, औऱ जैसेउसे इसबात कां एहसास होगा जल्दी लज्जा केँ मारे अपनीनजर कों नीचे झुका लिया औऱ दूध कां ग्लास टेबल पर्र हि रख दिया वो अपना ध्यान अपनी मम्मी केँ ऊपर सें हटाने केँ लिएफिन सें लिखना शुरुआत कर दियामगर उसकी माँ उसेजोर देतेहुए बोलि,,, )
ये क्याँ दूध कां गिलास पानीरख दिया जल्द सें इसेपी जा,,,,, मे दूध पिलाने केँ लिएआई हूं,,,, (टेबल पर्र हाथ रखकर अपनी छातियों कों उभारते हुए वो बोलि तौ एक् बारफिन सें उसकीनजर ऊपरउठ गई अपनी मम्मी कि चूचियों पर्र ऐसालग रहा थां कि जैसे ज्योति दो अर्थ वालीबात बोलरही थि,,,, औऱ उसके कहने कां मतलब भि दूसरा हि थां जौ कि रोहित समझ नहि पारहा थां,,,, अपनी माँ कि बात सुनकर वो बोला। )
तुम् जाओ मे अभि पी लूंगा,,,,।
नहि तोँ मेरे सामने भि अभि हल्का गरम हैं तोँ पीने मे भि अच्छा लगेगा ठंडा हौ जाएगा तोँ मज़ा नहि आएगाऐसे भि दूध पीने कां आनंदतभी आता हैं जबदूध गरम हौ,,,, (ज्योति फिन सें मुस्कुराते हुए अपने होठों पर्र मादक मुस्कान लातेहुए बोलीं,,,, इसबार रोहित अपनी माँ कों इनकार नहि कर पाया औऱ अपनाहाथ आगे बढ़ाकर दुध कां ग्लास लें लिया,,,, औऱ उसे पीना शुरुआत कर दिया। तभी ज्योति केँ मन मे कुछ औऱ चलरहा थां उसका जवाब ख़त्म नहि हुआ थां इसलिये वो एकदम सें दूसरी तरफघूम रही औऱ खुली हुई अलमारी कि तरफआगे बढ़ने लगी औऱ अपने बेटे कां ध्यान अपनीतरफ आकर्षित करने हेतु वो बोलि,,, )
क्याँ करता हैं रोहित तौ अलमारी कां दरवाजा खुलाहुआ हैं अभि चूहाघुस जाएगा तौ सारे कपड़े औऱ किताबें कुतर डालेगा,,,,।
(अपनी माँ कि बात सुनकर रोहित अपनी माँ कि तरफ देखने लगा तौ एकदम सें उसका दिमाग़ खराब होँ गय़ा उसकी आंखें फटी कि फटीरह गई क्योंकि उसकीनजर सीधे अपनी मम्मी कि बड़ी-बड़ी गांड पर्र पहुंच गई जौ कि कसेहुए पजामे मे एकदम बड़ी-बड़ी दिखाई देरही थि रोहित तौ उसे देखता हि रह गय़ा,,,, कसेहुए पजामे मे उसकी गांड कि फांक एकदमसाफ दिखाई देरही थि। जिसे देखकर रोहित केँ तन जिस्म मे अजीब सि हलचल होँ रही थि रोहित अपनी मम्मी केँ रूप कों देख्ना नहि चाहता थां मगर नं जाने कैसी कशिश थि कि वो अपनी नजरों कों हटा नहि पारहा थां,,,,, रोहित कों जल्दी उसदिन वालीबात याद आँ गई जब उसकी बेहन कों देखने केँ लिए लड़के वालेआने वाले थें औऱ वो अनजाने मे बिना दरवाजे पर्र दस्तक दि अपनी माँ केँ कमरे मे घुस गय़ा थां औऱ उसकी मम्मी इस टाइम अपने कपड़े पहनरही थि मगर वो अपनी गोलाकार नितंबों कों पेटीकोट सें ढंक भि नहि पाई थि तभी उसकीनजर उसकी नंगी गांड पर्र पहुंच चुकी थि उसेदिन वो अपनी माँ कि नंगी गांडदेख रहा थां मगरआज पजामे मे होने केँ बावजूद भि रोहित कों लगरहा थां कि मानव जैसे उसकी माँ कुछ नाँ पहनी हौ क्योंकि उसका पूरा भूगोल एकदमसाफ दिखरहा थां,,,,, ज्योति ये देखने केँ लिए कि उसके बेटे कि नजर उसकेऊपर हैं कि नहि वो जल्दी अलमारी कों ठीक सें बंद करतेहुए पीछेनजर घुमाकर देखी तौ वो एकदम सें मुस्कुरा दे क्योंकि उसका बेटा उसकीकमर केँ नीचे हि देखरहा थां औऱ ये देखकर वो अंदर हि अंदर एकदम सें मदहोश होँ गई थि। उसे एहसास होनेलगा थां कि आखिरकार मर्द तोँ मर्द हि होता हैं,,,।
रोहित केँ टांगों केँ बीच कि स्थिति कुछअलग हि बयांकर रही थि उसेये सभी अच्छा नहि लगरहा थां मगर उसके तन-जिस्म नें जैसे उसकासंग छोड़ दिया थां औऱ अपने आप् हि उसके लन्ड कि अकड़ बढ़ने लगी थि,,,,, ज्योति अपनाकाम कर चुकी थि जोँ दिखाने आई थि वो अपने बेटे कों दिखा चुकी थि औऱ उसे देखकर उसका बेटा मदहोश भि हौ गय़ा थां इसबात कां एहसास ज्योति कों हौ गय़ा थां औऱ वो अलमारी कां दरवाजा बंद करके अपने बेटे केँ पासआई औऱ बोलीं,,,,।
अधिकदेर तक मत पढ़ना जल्दसो जानां सुभह उठना भि पड़ता हैं,,,,।
ठीक हैं माँ,,,, (लज्जा केँ मारे अपनी मम्मी कि तरफ देखे बिना हि वो बोला औऱ दूध कां गिलास टेबल पर्र रख दिया जौ कि खाली होँ चुका थां,,,, ज्योति अपने बेटे केँ सर पर्र हाथ फेरते हुए मुस्कुरा कर उसके कमरे सें बाहर् निकल गई,,,,,,,,, अपनी माँ केँ जाने केँ बाद रोहित अपने आप् केँ बारे मे सोचने लगा कि येउसे क्याँ हौ रहा हैं,,,, उसे अपने आप् पर्र हि क्रोध आनेलगा क्योंकि उसेसाफ एहसास हुआ थां कि कसेहुए पजामे मे अपनी मम्मी कि बड़ी-बड़ी गांड देखकर हि उसके लन्ड कि हालत खराब हुईँ थि,,, मगर वो कर भि क्याँ सकता हैं दिमाग़ पर्र उसकाजोर बिल्कुल भि नहि थां औऱ फिन सें अपना ध्यान हटाने केँ लिए लिखने लगा,,,,, )
रविवार कां दिन थां,,,, पड़ोस मे किसी केँ घऱ लड़काहुआ थां औऱ गाने बजाने केँ लिए उसकेघऱ पऱ आमंत्रण आया थां,,,, रीमा बाहर् गई हुइ थि घऱ पऱ सिर्फ रोहित हि थां। प्रोग्राम साम केँ समय हि थां ज्योति अपने कमरे मे रेडी हौ रही थि औऱ वैसे भि सजधजकर होने केँ बाद वहां औऱ भि अधिक हसीन लगने लगती थि आईने मे वो अपने आप् कों देखरही थि आहिस्ता अपने शरीर सें कपड़े उताररही थि,, बड़े सें आईने केँ सामने पूरीतरह सें नंगी होने केँ बाद वो अपने आप् कों गौर सें आईने मे देखरही थि अपनी चूचियों कों देखरही थि अपने सुंदर खूबसूरती कों देखरही थि घूमकर वो नजर घुमाकर अपनी गोलाकार नितंबों कों देखरही थि जिस पऱ मर्दों कि नजर सबसे पहले पढ़ती थि औऱ जिसे देखकर उनका लन्ड अपने आप् हि खड़ा हौ जाता थां जिसमें उसका बेटा भि शामिल थां इसलिये अपने गोलाकार नितंबों पऱ गर्वकर रही थि औऱ मुस्कुरा रही थि। अलमारी वैसे वो अपनेलिए आसमानी रंग कि नईसदी निकली औऱ उसे पहनने लगी आसमानी रंग केँ मैचिंग कि वो ब्लाउज औऱ पेटीकोट भि निकाल करपहन रही थि सभीकुछ पहन लेने केँ बाद वो ब्लाउज कि डोरीबात नहि लगी तौ तभी उसकेमन मे कुछ चलनेलगा औऱ वो अपने कमरे सें हि अपने बेटे कों आवाज़ लगाते हुए बोलीं,,,,।
रोहित,,,, ओ,,,, रोहित,,,,,,, (रोहित कां रूमपास नहि थां इसलिये रोहित केँ कानों मे उसकी मम्मी कि आवाज़ पहुंच गई औऱ वो अपने कमरे सें हि बोला)
क्याँ हुआ,,,, ?
अरे पहलेइधर तौ आँ,,,,,,।
(अपनी मम्मी कि बात सुनकर वो पुस्तक कों एक् तरफरख दिया औऱ अपने कमरे सें निकाल कर अपनी मम्मी केँ कमरे मे पहुंच गय़ा वो देखा तौ उसकी मम्मी आदम कां दाहिने केँ सामने खड़ी होकर अपने आप् कों आईने मे निहार रही थि,, अपनी मम्मी कों देखकर इतना तोँ वो समझ गय़ा थां कि उसकी माँ प्रोग्राम मे जाने केँ लिए सजधजकर होँ रही थि औऱ तभी उसकीनजर अपनी माँ केँ ब्लाउज पऱ गई उसकीपीठ रोहित कि तरफ थि औऱ उनसेसाफ दिखाई देरहा थां कि उसकी माँ केँ ब्लाउज कि दोनों डोरियां लटकी हुईँ थि वो बंधी नहि थि,,,, फिन भि वो अपना ध्यान इस औऱ सें हटाकर अपनी माँ सें बोला,,, /)
क्याँ हुआ माँ,,,,, ?
अरेजरा मेरे ब्लाउज कि डोरी तौ बांधदे मेराहाथ हि नहि पहुंच रहा हैं औऱ रीमा भि नहि हैं घऱ पऱ नहि तौ वही बांध देती,,,,,।
मगर क्याँ मे बांध पाऊंगा,,,, ! (रोहित शंका जताते हुए बोला अभि भि वो दरवाजे पऱ हि खड़ा थां वो कमरे मे प्रवेश नहि किया थां,,, )
अरे तोँ इसमें कौन सि बड़ीबात हैं दो गिठान हीं तोँ मारना हैं एक् थोडा कस केँ बांधना हैं औऱ दूसरा हल्का,,,,,।
ठीक हैं,,,,
(अपने बेटे कि बात सुनकर ज्योति मन हि मन मुस्कुरा रही थि। रोहित अपनी माँ केँ ठीक पीछे पहुंच चुका थां अभि तक वो दरवाजे पर्र खड़ा थां इसलिये उसेठीक सें दिखाई नहि देरहा थां मगरठीक अपनी मम्मी केँ पीछे पहुंच जाने पर्र उसे अपनी मम्मी केँ आसमानी रंग कि ब्रा कि पट्टी भि दिखाई देनेलगी जिसे देखते हि उसके तन-शरीर मे हलचल होनेलगी। आईने मे ज्योति कों अपने बेटे केँ चेहरे केँ हाव-भाव एकदमसाफ दिखाई देरहे थें उसे अच्छी तरह सें समझ मे आँ रहा थां कि इस वक़्त उसके बेटे कि नजरकिस पऱ हैं औऱ वो अपने बेटे केँ मन कि भावनाओं कों अच्छी तरह सें समझरही थि,,,,,, अंदर हि अंदर वो खूब प्रसन्न होँ रही थि,,, अपने बेटे कि हालत देखकर उसे अच्छा लगरहा हैं वो फिन सें अपने बेटे कों बोलि,,, )
जल्द सें बांधसोच क्याँ रहा हैं,,,।
हांहां बांधरहा हूं,,,,,, (रोहित कि सांसऊपर नीचे होँ रही थि अपनाहाथ आगे बढ़कर अपनी माँ केँ ब्लाउज केँ डोरी कों दोनों हाथों सें पकड़ लिया औऱ उसे बांधने कि कोशिश करनेलगा उसका ध्यान अपनी माँ कि मांसल चिकनी पीठ पऱ हि टिकी हुई थि जौ कि आसमानी रंग कि ब्रा मे औऱ ज़्यादा सुंदर लगरही थि,,,, आरामसे अपनी मम्मी केँ ब्लाउज कि डोरी कों बंदरहा थां औऱ वो एक् गिठान लगा भि दिया थां मगरऐसा करतेहुए बार-बार उसकी उंगली उसकी मम्मी कि नंगीपीठ पर्र स्पर्श हौ जारही थि इसकीवजह सें रोहित कि टांगों केँ बीच कि स्थिति खराब हौ रही थि औऱ यही हालत ज्योति कां भि होँ रहा थां ज्योति केँ भि टांगों केँ बीच कि हालत खराब थि,,,, अपने बेटे कि उंगलियों कां स्पर्श उसे अच्छा लगरहा थां। एक् गिठान लगाने केँ बाद अपनी मम्मी सें बोला,,, )
एक् गिठान लग गय़ा हैं,,,,।
हां तोँ उसीतरह सें दूसरी कितन भि लगतेबस थोडा हल्का रखना औऱ तूने देखा हैं नाँ दूसरी गिठान लगाने पऱ दोनों तरफ कि डोरी कों थोडा गोलाकार बनाकर छोड़ देते हें ताकि देखने मे अच्छा लगे,,,।
हां हां मैंने देखा हूं,,,,।
हांठीक वैसे हि लगाना ताकि खोलने मे आरामरहे,,,,।
ठीक हैं,,,, (इतना कहने केँ संग हि रोहित कि नजर अपनी माँ केँ गोलाकार नितंबों पर्र पड़ी तोँ वो एकदम सें मदहोश होँ गय़ा क्योंकि जाने अनजाने मे हि उसकेपेट मे तंबूबन चुका थां औऱ उसकी तंबू सें उसकी मम्मी केँ नितंबों केँ बीच कि दूरी सिर्फ पांचछः अंगुल हि थां,,, रोहित कों इसबात कां डर थां कि कहीं उसके पेंट मे बनाहुआ तंबू उसकी मम्मी केँ नितंबों सें स्पर्श नाँ हौ जाए,,,,, जैसे तैसे करके वो अपने आप् कों बचाते हुए अपनी मम्मी केँ ब्लाउज कि डोरी कों बांध चुका थां औऱ ज्योति अपने आप् कों आईने मे देखने केँ बाद एकदम सें अपने बेटे केँ सामने मुंह करके खड़ी हौ गई औऱ बोलि,,, )
बता तोँ मे कैसीलग रही हूं,,,, ?
बहोत सुंदर,,,, (कुछदेर अपनी मम्मी कों ऊपर सें नीचे देखते हुए औऱ विचार करने केँ बाद वो बोला अपने बेटे कि बात सुनकर वो खुश होतेहुए बोलीं)
सचकहरहा हैं नाँ तूँ एकदम फिल्म कि हीरोइन कि तरह लगतीहुं नाँ,,,,।
(अपनी माँ कि बात सुनकर वो शर्मा गय़ा मगरफिन भि वो अपनी मम्मी कि मासूमियत देखकर बोला)
हां एकदम फिल्म कि हीरोइन कि तरह,,,,।
(अपने बेटे केँ मुंह सें अपनी हुस्न कि तारीफ सुनकर मे एकदम सें गदगद होँ गई औऱ खुश होकर एकदम सें वो अपने बेटे केँ गाल पर्र अपने होंठ रखकर चुंबन करली,,,, रोहित तौ कुछसमझ हि नहि पाया वो एकदम सें हैरान हौ गय़ा उसे अपनी मम्मी सें इसतरह कि उम्मीद नहि थि मगर वो ईस चुंबन सें पूरीतरह सें उत्तेजना सें गदगद होँ गय़ा थां उसकेतन जिस्म मे अजीब सि हलचल होनेलगी थि,,, ज्योति अपने बेटे केँ मन मे चलरही उथल-पुथल कों अच्छी तरह सें समझरही थि इसलिये अपने बेटे केँ सामने अधिकदेर तक खड़ी नहि रहना चाहती थि औऱ वो अपने बेटे सें बोलि,,, )
मे जारही हूं तूँ भि आँ जानां थोड़ी देर मे यहां बैठे-बैठे क्याँ करेगा,,,,,, वहां पऱ मिठाई औऱ समोसे भि मिल जाएंगे,,,,,, ठीक हैं अब मे चलतीहूं,,,, (इतना कहकर वो अपने कमरे सें बाहर् निकल गई मगर जाते-जाते वो अपने बेटे केँ पेट मे बने तंबू पर्र नजरमार चुकी थि जोँ कि पूरीतरह सें अपनी औकात मे खड़ा थां एकदम सें ज्योति मदहोश होँ गईथी। ज्योति जा चुकी थि औऱ अंकित कुछदेर केँ लिए अपनी माँ केँ कमरे मे उसके पलंग पऱ हि बैठकर सभीसो रहा थां वो अपनी मम्मी कि मासूमियत केँ बारे मे सोचरहा थां कि कितनी मासूम हैं उसकी माँ मगरवही खराब हैं जौ उसकी मासूमियत मे भि उसकीऐसी हालत हौ जारही हैं अपने खड़े लन्ड कि तरफ देखते हुए अपने आप् सें बोला,,,,, रोहित कों अपने आप् पर्र हि क्रोध आँ रहा थां,,,, कुछदेर अपनी मम्मी केँ कमरे मे बैठने केँ बाद वहां धीरे-धीरे सें उठाओ औऱ अपनी मम्मी केँ कमरे सें बाहर् निकाल केँ औऱ सीधा बाथरूम मे चला गय़ा फ्रेश होने केँ लिए,,,, वो पेशाब करनेलगा उसे अपने लन्ड कां वजन अपनेहाथ मे कुछ ज़्यादा हि महसूस हौ रहा थां,,,, हल्का सां ढीला होने केँ बावजूद भि वो पूरीतरह सें अभि भि मर्दाना ताकतलिए हुए थां अपनी स्थिति कों देखकर उसे अपने आप् पऱ बहोत क्रोध आँ रहा थां अपनेमन मे येसोच रहा थां कि अगर उसकी हालत कों उसकी माँ देख लेगी तोँ क्याँ सोचेगी।
अपनेमन कों शांत करने केँ लिए वो हाथ मुंहधो कर फ्रेश होँ गय़ा औऱ फिनघऱ सें बाहर् निकाल करघऱ कां दरवाजा बंद करने केँ बाद वो भि पड़ोस मे चल दियानाच गाना देखने केँ लिए क्योंकि उसके कानों मे ढोलक कि आवाज़ आँ रही थि दूर सें हि उसे दिखाई दिया कि ढेर सारी औरतें खड़ी थि औऱ उसकी उम्र केँ लड़के भि एक् तरफ कोने मे खड़े होकरये सभीदेख रहे थें औऱ रोहित भि उन लड़कों केँ पीछे जाकर खड़ा हौ गय़ा,,,, जब औरतों केँ बीच मे देखा तोँ वो दंगरह गय़ा औरतों केँ बीच मे कुछ औरतें नाचरही थि औऱ अनजाने मे हि रोहित कि नजर उनकी बड़ी-बड़ी गांड पर्र पहुंच जारही थि। ऐसा रोहित केँ संग पहलेकभी नहि हुआ थां वैसे पहले औरतों कों इसनजर सें कभी नहि देखा थां मगर न् जाने क्यूं अब उसकीनजर औरतों कि गांड पर्र हि चलीजा रही थि औऱ लाखमना करने केँ बावजूद भि येसभी देख्ना नां जाने क्यूं उसे अच्छा लगरहा थां,,,,,, वो धीरे-धीरे उन लड़कों केँ पीछे खड़ा होकरउन औरतों कां नाचदेख रहा थां कि तभीउन लड़कों मे सें एक् लड़का बोला,,,,।
दोस्त पीली वाली कि गांड तौ देख,,,, कितनी बड़ी-बड़ी हैं औऱ नाचते टाइम कितनी लहरारही हैं,,,,।
हां दोस्त तूँ तोँ सचकहरहा हैं मे भि यहीदेख रहा थां,,,।
तूँ सोजब नाश्ते वक्त इतनी लहरारही हैं तौ जब चुदवाती होगी तोँ गांड तोँ रबड़ कि तरह चलती होगी कितना आनंदआता होगा जौ इसकी लेता होगा,,,, (उसकीबात सुनकर उसका दूसरा दोस्त बोला)
दोस्त तूने तोँ ऐसीबात कहकर मेरा लन्ड खड़ाकर दिया मे तोँ कल्पना कररहा हूं कि पीली साड़ी हैं जाए तोँ उसकी गांड कैसी दिखती होगी,,,, (उन दोनों कि बात सुनकर उनका तीसरा मित्र बोल पड़ा)
पीली वाली कों छोड़बे,,,, काली साड़ी वाली कों देख उसने कितना छोटा ब्लाउज पहनी हैं औऱ उसकी मम्मों कितनी बड़ी हैं आधे सें भि अधिकदिख रही हैं अगर थोडा सां छाती कों उछालदे तोँ उसके ब्लाउज कां साराबटन खुलजाए,,,,।
(उसकीबात सुनकर उनका पहला वाला दोस्त बोला)
मे दावे केँ संगकह सकता हूं कि उसने ब्लाउज केँ अंदर ब्रा नहि पहनी हैं अगरशपथ सें तेरीकही बातसही हौ जाए तौ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों केँ दर्शन होँ जाए,,,, औऱ फिन 8-10 दिन कां जुगाड़ हौ जाएमुठ मारने केँ लिए,,,,।
(उसकीबात सुनकर उसका दूसरा मित्र बोला)
तूँ भोसड़ी वाला मात्र मुठ मारने केँ बारे मे हि सोच,,, ऐसा नहि कि अपनी माँ केँ ऊपरचढ़ जाए औऱ उसे भि मस्त करते औऱ स्वयं भि आनंद लेँ लेँ,,,।
अरे हरामजादे मे तौ चढ़ जाऊंमगर वो झेल नहि पाएगी मेरा मोटा औऱ लंबा हैं,,, मगर तेरी माँ झेल लेगी,,, तेरी मम्मी कि गांड बड़ी-बड़ी हैं उसे घोड़ी बनाकर चोदने मे अधिक आनंद आएगा,,, तूँ कहे तोँ आज कि रात आँ जाऊं तेरेघऱ औऱ जीभरकर मज़ा लें लु तेरी मम्मी सें,,,,।
तौ आज रोका किसने हैं मगर अपनी मम्मी केँ कमरे कि चाबी मुझेदे देना ताकि मे भि आजरात कों तेरी मम्मी कि चुदाई कर सकूं,,,, (ऐसा कहतेहुए वालों हंसने लगे रोहित तोँ हैरान थां येसभी सुनकर इस यकीन नहि हौ रहा थां कि येलोग अपनी माँ केँ बारे मे इतनी गंदी गंदी बातें कररहे थें मगरइन लोगों कि बातें सुनकर उसके लन्ड कि अकड़फिन सें बढ़ गई थि जौ कि बहुत मुश्किल सें शांतहुआ थां,,,,,, लड़कों कि बातों नें उसके तन-जिस्म मे अजीब सि हलचल पैदाकर दिया थां औऱ वो भि उन औरतों कों उनके हि नजरिए सें देखने लगा थां तभी उसने देखा कि कुछ औरतें उसकी माँ कां हाथ पकड़कर खींचरहे थें जोँ कि वहींपास मे बैठी हुईँ थि अपनी मम्मी कों देखकर रोहित कां दिल जोरो सें धड़कने लगाये सोचकर कि अगर वो नाचनआई तोँ ये लड़के उसके बारे मे भि गंदी बातें कहेंगे,,, मगर उसकी माँ जल्दी नाचने केँ लिए सजधजकर होँ गई औऱ जैसे हि उन औरतों केँ बीचआई उसे देखकर रोहित कों भि एहसास हौ रहा थां कि सबकेहोश उड़गए थें आसमानी रंग कि साड़ी मे उसकी माँ एकदमपरी लगरही थि औऱ वो नाचना शुरुआत कर दि।
दूसरों कि क्याँ कहें रोहित कि स्वयं कि नजर उसकी मम्मी कि बड़ी-बड़ी गांड पर्र टिक गई थि जोँ कि एकदम सें लहरारही थि मटकरही थि औऱ उसकी मम्मी अपनी गांड कों अधिक मटका मटकाकर नाच भि रही थि,,,,, तभीउन लड़कों नें जोँ बोलाउसे सुनकर तौ रोहित कि हालत एकदम सें खराब हौ गई उनमें सें एक् लड़का बोला,,,,।
वाउ,,,,, आइटम तौ अभि आई हैं बाप रेऐसा लगरहा हैं कि जैसेकोई फिल्म कि हीरोइन आंखों केँ सामने नाचरही हैं देख तौ हि साली कि गांड,, स्स्स साली नें साड़ी कों इतनेकस केँ बांधकर पहनी हैं कैसालग रहा हैं कि जैसे बिना कपड़ों केँ यहां चाहिए उसकी गांड कि लकीर तक दिखाई देरही हैं।
(उसकीबात सुनकर उसका दूसरा मित्र बोल पड़ा)
हां दोस्त तूँ सचकहरहा हैं देखते सही विवाह मे जौ पैंटी पहनी हैं उसकी भि लकीर दिखाई देरही हैं,,,, मेरा तौ मनकररहा हैं किसके संग मे भि नाचों औऱ उसकी मम्मों पकड़कर एकदम सें मज़ा लेँ लुं
(ये सभी सुनकर रोहित कों जहां एक् तरफ क्रोध आँ रहा थां वहीं दूसरी तरफ नाँ जाने क्यूं इसतरह कि बातें सुनकर उसकेतन शरीर मे अजीब सि हलचल हौ रही थि उन लड़कों केँ मुझे अपनी माँ केँ लिए गंदी बातें सुनकर उसे भि न् जाने क्यूं मजा आँ रहा थां इसबात सें वो भि हैरान थां तभी तीसरा बोला)
भइया मुझे रहनेजा रहा हैं मेरा तोँ मनकररहा हैं इसी टाइम लन्ड निकाल कर मुट्ठ मारलु इतना अच्छा हसीन नजारा तौ फिल्मों मे भि देखने कों नहि मिलता,,,,,।
हममममममम,,,,, साली जिसको भि देती होगीखुश कर देती होगी,,,,,, साली कि चूचियां देख खरबूजे जैसीगोल गोल हैं ब्लाउज कितना सुंदर पहनी हैं डोरी वाला इसको चोदने सें पहले इसके कपड़े निकालने मे मज़ाआता होगा,,,, ब्लाउज कि डोरी घसीटकर ब्लाउज कों निकालने कां आनंद हि कुछ औऱ हैं औऱ देखते सही अंदर इसलिये आसमानी रंग कि ब्रा भि पहनी हैं जिसकी पट्टी एकदमसाफ दिखाई देरही हैं,,,, (वो पेंट केँ ऊपर सें अपने लन्ड कों मसलता हुआ बोलाये सभी देखकर रोहित सें रहा नहि जारहा थां,,,,, उससे बर्दाश्त नहि होँ रहा थां इसलिये वो वहां सें वापस आँ गय़ा,,,,,,,,,,, तकरीबन 1 घंटेबाद उसकी माफी वहां सें वापसलौट आई क्योंकि कार्यक्रम ख़त्म हौ चुका थां मगर उसकेहाथ मे समोसे औऱ मिठाइयां थि वो समस्या औऱ मिठाई अपने बेटे कों देतेहुए बोलि)
तूँ आया नहि तुझसे कहीं थि कि आँ जानां वहांघऱ रहता तौ तेरी वहीं पर्र समोसे औऱ मिठाई खाने कों भि मिलता औऱ घऱ पऱ भि लें आने कों मिलता,,,।
मेरामन नहि कररहा थां,,,,।
अरे वहां पऱ बहोत मज़ाआया तूँ होता तौ देखता,,,।
(इतना कहकर वो अपने कमरे मे चली गई कपड़े बदलने केँ लिए क्योंकि खानां बनाने कां वक्त होँ चुका थां अपनी मम्मी कि बात सुनकर रोहित अपनेमन मे हि बोलाकाश केँ मे वहां नहि गय़ा होता। )
सिसकारियां,,,,, - Hindi Sex Story - Continue reading next part
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