हुस्न की परियाँ - Husn Ki Pariyan - Complete Kahani Part 1
हुस्न की परियाँ - Husn Ki Pariyan – New Episode
001: नीलम कि पेंडेंट
ग्रीन पार्क हाई विद्यालय, मुजफ्फरपुर, बिहार
रोहनआज क्लास मे सोरहा थां। तभी उसकाहाथ टेबल केँ किनारे सें निकली एक् नुकीली स्टील कि परत सें जाकरलग गय़ा। जिससे उसकी हाथो सें खून कि एक् फव्वारा निकला। खून कां फव्वारा सीधा उसकी गर्दन मे लटके माणिक केँ पेंडेंट पर्र जालगी।
खून केँ लगते हि पेंडेंट एकाएक चमकने लगा। रोहनइस सभी सें अनजान अपनी नींद मे खोयाहुआ थां। तभी उसकेसर मे बहोत लोगो कि जीवन चलनेलगी। उसकेसर मे बहोत हि तेज दर्द होने लगता हैं। पहले तौ उसेलगा कि वो कोई सपनादेख रहा हैं। मगरजब उसकासर तेज दर्द करनेलगा तबउसे पताचल गय़ा कि वो जौ भि देखरहा हैं वो सभीसच हैं।
~आह्ह्ह्ह~
रोहन एकाएक अपनीसर पकड़कर चीखने लगता हैं। जिससे टीचर कां ध्यान उसकीतरफ चला जाता हैं। रोहन कों इतने दर्द मे देखकर क्लास मे अभि पढ़ारही मिस पूर्वी नें रोहन केँ बगल मे बैठे लड़के कों बोला, “संजय तुम् रोहन कों क्लिनिक मे लें जाओ। ”
संजय क्लास मे सबसे आवारा टाइप लड़का थां। उसकीबाल हमेशा रंग बिरंगे रहते थें। वहा हमेशा क्लास मे किसी न् किसी कों तंग करता रहता थां। मगर उसके पढ़ने मे भि बहोत हि तेज होने केँ कारणउसे कोई टीचर डांटते नहीं थें।
उसकेउलट रोहन बहोत मेहनती थां। मगर उसको बहोत हि कम मार्क्स आते थें। सब टीचर उससे थोडा नाराज रहते थें। खासकर क्लास टीचर। उसकी मार्क्स केँ कारण क्लास कां औसत मार्क्स भि कम हौ जाता थां। रोहन क्लास मे सबसे आखिरी मे आता थां। परिवार कि स्थिति खराब रहने सें उसे बहोत मेहनत करना पड़ता थां। रात कों काम करकेजब घऱ लौटता तोँ उसके जिस्म मे जान नहीं बचती थि कि वो पढ़सके।
संजय रोहन कों सहारे देकर विद्यालय केँ क्लिनिक मे लेँ जाया हैं। वही रोहन अभि भि अपनेहोश मे नहि थां। अभि वो अपनेसंग हुए घटना सें बहोत हि शॉक्ड होँ गय़ा थां। उसने करीब-करीब तीस सें चालीस आदमियों कि जीवनइन चंद लम्हों मे देखली होगी। सब कि जीवन मे दो चीजे कॉमन थि। पहलासब उसकीतरह माणिक कि पेंडेंट पहनते थें। जौ अभि उसकेगले मे लटकी हुई थि। औऱ दूसरी सब बहोत हि शक्तिशाली थें। सब अपने अपने क्षेत्र मे बहोत आगे तक निकल चुके थें। कोई डॉक्टर थां तोँ कोई रसोइया। कोईदवा बनाने मे माहिर थां तोँ कोई वास्तुशास्त्र मे माहिर।
लगभगदो मिनिट मे संजय रोहन कों लेकर क्लिनिक आया। वहा पर्र एक् बहोत हि जवान नर्स थि। उसकानाम कविता थां। दिखने मे बहोत हि सेक्सी थि। मगर उसके चेहरे पऱ बहोत सारी फुंसियों केँ दागलगे हुए थें। जिसके कारण उसकी अभि तक विवाह नहीं होँ पाई थि।
चलो इसकी स्टोरी बाद मे बताते हैं। अभि चलते हैं क्लिनिक मे जहा पर्र संजय रोहन कों लेकरआया थां। संजय कविता सें बोला, “सिस्टर, इसको देखो इसकासिर केसे इतनातेज दर्दकर रहा हैं। ”
कविता संजय कों अच्छे सें पहचानती थि। वो उसको बोलि, “अच्छा इसेये पऱ रखकर तुम् अपने क्लास मे जा सकते होँ। मे इसकादेख भालकर लूंगी। ”
कविता केँ कहने सें संजय रोहन कों वही पऱ रखकरवहा सें चला जाता हैं। कविता रोहन सें पूछती हैं कि उसे क्याँ हुआ हैं। मगर रोहनकोई जवाब नहीं देता वो अपनी दुनिया मे खोयाहुआ थां। वो अभि अभि अपनेमन मे आई जानकारी कों छांटरहा थां। इसीलिए उसने कविता पर्र ध्यान नहि दिया। अब उसकासर दर्द भि कम होँ गय़ा हैं।
रोहन जानकारियों कों छांटते हुएसोच रहा थां, “अरेवाउ बहोत अच्छी चीजहाथ लगी हैं। मैने सोचा नहि थां कि इतनी छोटी सि चीज इतना बड़ा रहस्य छुपाए हुए हैं। ”
तभी उसकी देखा कि उसके दिमाग़ मे एक् मंत्र हैं। उसने देखा थां कि उसके पहले जितने भि लोगो नें माणिक केँ पेंडेंट कों पहना थां सब उसकाजाप करते थें। “वाउ ताकतवर बनने कि विद्या! अब मुझे कमजोर रहना नहीं पड़ेगा। ”
वो मंत्र उसके दिमाग़ मे अच्छे तरीके सें बैठ गई थि। ऐसालग रहा थां कि अभि उसने जौ भि कुछ देखा हैं उसको वो कभीभूल भि नहीं सकता थां।
जब कविता देखी कि रोहन उसका जवाब नहींदे रहा तौ उसने रोहन केँ सर पऱ हाथरखा। रोहन अपनेसर पऱ किसी कां हाथ महसूस करके अपनी ध्यान सें बाहर् आया। जैसे हि उसने अपनीनजर ऊपर कि ओर उठाईउसे कविता कि पहाड़ जैसी छतिया दिखाई दि। उसकोदेख रोहन कि सांसे तेज हौ गई। उसकी पैंट मे भि हलचल होनेलगी। कविता दिखने मे बहोत हि सेक्सी थि। अगर उसके चेहरे कों छोड़ दियाजाए तौ वो बूढ़ों कां भि लन्ड खड़ा करवा सकती थि।
रोहन कि बढ़ती सांसों कों महसूस करके कविता रोहन कों देखती हैं। जब वो रोहन कि नजर कां पीछा करती हैं तोँ वो सभीकुछ समझ जाति हैं। अपनेमन मे हि बोलती हैं “आजकल केँ बच्चे भि नं। ”
कविता कों नं जाने क्यूं मजाक सूझा, वो रोहन सें पूछ बैठी, “कैसा हैं। ”
रोहन बिना सोचे समझे जवाब देता हैं, “बहोत हि बढ़िया। मैने आजतक इतने बड़े मम्मे नहीं देखे। ” रोहन अभि भि कविता केँ मम्मे कों हि देखरहा थां। उसनेसच हि बोला थां। कविता केँ मम्मे E कप साइज सें कम नहि होंगे।
कविता भि अभि एक् कुंवारी लड़की थि। उसको रोहन कि यूं तारीफ करना बहोत अच्छा लगा। वैसे भि उसकी तारीफ कोई करता नहीं थां। वो रोहन केँ सर पर्र टपली मरतेहुए बोलि, “चलअबहोश मे आजा। ”
कविता केँ तपली सें रोहन अपनेहोश मे आँ जाता हैं, तब उससे कविता पूछती हैं, “क्याँ हुआ हैं तुम को। वोँ संजय बोला कि तेरासिर दर्दकर रहा हैं। ”
रोहन हस्ते हुए जवाब दिया, “कविता दि, अब मेरासिर दर्दठीक होँ गय़ा हैं। बसहाथ थोडा कट गय़ा हैं। इस पऱ पट्टी लगादो। ”
रोहन अपनाहाथ दिखाते हुए कविता कों बताता हैं। कविता उसको पट्टी लगा देती हैं। अब रोहन बिलकुल ठीक थां। वो क्लिनिक सें बाहर् जातेहुए बोलता हैं, “वैसे कविता दि, आपके मम्मे बहोत खूबसूरत हैं। ” इतनाबोल वहावहा सें हस्ते हुए बाहर् चला जाता हैं।
इधर कविता उसके मजाक कों सुनकर शर्मा जाती हैं। फिन अपने आप् मे हंसकर अपनाकाम करने लगती हैं।
इधर रोहन क्लास मे जैसे हि जाने वाला होता हैं। वहा सें मिस पूर्वी बाहर् आती हुईँ दिखाई देती हैं। वो रोहन कों देखकर बोलती हैं, “चलो मेरेसंग आओ मेरी दफ़्तर मे। ”
रोहनअब कुछकर नहीं सकता थां। पूरे विद्यालय मे मिस पूर्वी अपने कड़े स्वभाव केँ लिए प्रसिद्ध थि। वो किसी कों भि नहीं बखस्ती थि। रोहन भि उनसे डरता थां। इसीलिए वो बिना किसी प्रश्न केँ उनके पीछे पीछेचल देता हैं। दोनो दफ़्तर मे पहुंच जाते हैं।
पूर्वी: अब तुम् केसे हौ?
रोहन: मे अबठीक हू। पता नहीं क्यूं मेरासिर दर्द करनेलगा थां।
पूर्वी: ठीक हैं कोईबात नहीं। मे तुम्हे इसलिये यहा बुलाई हू। क्योंकि अब मैट्रिक कि फाइनल परीक्षा कों सिर्फ दो महीने रहगए हैं। इसीलिए तुम्हे अच्छे सें तैयारी करनी पड़ेगी।
रोहन:जी मिस।
पूर्वी: जी कहने सें काम नहीं चलेगा। आज सें तुम्हे परीक्षा कि तैयारी शुरुआत करनी पड़ेगी। कल सें रोज तुम् रोज पढ़ाई करने केँ लिए क्लास ख़त्म होने केँ बाद मेरी फ्लैट पऱ आया करोगे। मे तुमको एक् घंटेअलग सें ट्यूशन पढ़ाऊंगी।
रोहनये सुनकर भौचक्का रह गय़ा। विद्यालय मे नं जाने कितने लड़के मिस पूर्वी केँ घऱ जाने केलिए मरते होंगे। मगर उसकोये मौका बिना मांगे मिलरहा थां। वो मन हि मन बहोत खुश हौ रहा थां। मगर उसकोसाम मे बाजार भि जानां होता हैं।
रोहन:मिस मे साम कों नहीं आँ सकता। आपको तोँ पता हि हैं। मे सुभह आँ जाऊंगा।
पूर्वी: अच्छा ठीक हैं अभि क्लास मे जाओ। कल सुभह पांचबजे मेरे फ्लैट पे आँ जानां।
रोहन पूर्वी केँ केविन सें बाहर् निकलकर सीधे क्लास मे चला जाता हैं। उसका क्लास X(d) थां। जिसमे करीब-करीब सब वैसे बच्चे थें जिनके नंबर अच्छे नहींआते थें औऱ खेलकूद मे माहिर थें याँ जिन्होंने नई इंट्री ली हुईँ थि। खैर रोहन सें संजय केँ अलावा कोईबात नहीं करता थां। औऱ संजयआज क्लास बंककर चुका थां।
रोहन अपनी पुस्तक खोलकर बैठ जाता हैं। उसकीनजर तोँ पुस्तक कों देखरही थि पऱ वो अभि अपनीमन मे आई जानकारियों कों अलगकर रहा थां। उसमे उसने बहोत सारी कलाओं केँ बारे मे देखा थां। वो अपनी जरूरत केँ आधार पर्र इनसब यादों कों अलगअलग तरीके सें बाटने लगा।
कुछ हि देर मे विद्यालय सें छुट्टी होँ गई। वो घऱ कि ओर जानेलगा। आज उसकामूड पहले सें मुकाबले बहुत अच्छा थां। घऱ पहुंचकर उसने देखा कि आज वो अपनी बेहन सें पहलेघऱ पहुंच गय़ा हैं।
वो जल्द सें साम कि तैयारी करनेलगा। रोहनरोज अपनी बेहन रूही केँ संग बैरिया बाजार जाता थां। साम कों बाजार मे बहोत सें लोग घूमने आते थें। रोहन औऱ रूही, फूड औऱ स्पाइसी फूड्स बेचते थें। उन्होंने बाजार मे एक् छोटी सि दुकान किराए पऱ लिया थां।
इस दुकान सें उनकातीन लोगो कां परिवार अपना गुजारा कर लेते थें। उनकेसंग उनकी छोटी बेहन नेहा रहती थि। दरअसल तीनों सगे भइया बेहन नहीं थें। रोहन औऱ रूही एक् हि अनाथाश्रम मे पले बढ़े थें।
वही नेहा केँ जन्म केँ वक़्त उसकी माँ कों कॉम्प्लिकेशन हौ गए थें। औऱ वो दूसरा बच्चा कंसीव नहींकर सकती थि। उससमय उन्होंने एक् बच्चा गोद लेने केँ लिए अनाथालय गए थें। जबवेवहा पहुंचे तोँ उन्होंने रोहन कों चुना थां। मगर रोहन रूही कों छोड़कर जानां नहीं चाहता थां। इसीलिए उन्होंने दोनो कों गोद लेँ लिया थां।
तीनसाल पहले हि दोनो पति पत्नि कां कर एक्सीडेंट मे मौत हौ गई थि। औऱ उनका छोटा सां कारोबार ख़त्म होँ गय़ा थां। तब सें हि रोहन औऱ रूहीघऱ कि जिम्मेदारी संभालने लगे थें। रोजवे विद्यालय केँ बाद सीधाघऱ आकर मार्केट चले जाते थें। वही नेहा अपनी एक् साथी केँ घऱ पढ़ने चली जाती थि। जबवे मार्केट सें लौटते तौ नेहा कों भि वेसंग लेँ आते।
रोहन औऱ रूही कां घऱ संभालने केँ बादवे लोग अपना एडमिशन ग्रीन पार्क विद्यालय मे करवा लिया थां। जोँ एक् शरकरी विद्यालय थां। वही नेहा अपनी पुरानी डीएवी विद्यालय मे पढ़ती थि। दोनो कां काम ज्यादा बढ़ गय़ा थां। काम कि वजह सें रोहन औऱ रूही अच्छे सें पढ़ाई नहींकर पाते थें। दोनो केँ मार्क्स कामआने लगे थें।
नेहा कों उन दोनो नें कोईकमी नहि होने दि थि। खैर रोहन अभि सामान सहीकर हि रहा थां कि रूही भि अपनी सहेलियों केँ संगघऱ लौटआई। वो आकर रोहन कि सहायता करनेलगी। दोनो सामान लादकर बाजार कि ओरचले गए।
वे दोनो एक् दुकान केँ सामने जाकर रुके। वहा बड़े बड़े अक्षरों मे लिखाहुआ थां “स्पाइसी बाइट्स”। ये उनका हि दुकान थां। जबवे बाजार मे आए तौ लगभगआधा घंटासमय बचाहुआ थां अभि बगल केँ यूनिवर्सिटी कि छुट्टी होने मे।
वे दोनो मिलकर तैयारी करनेलगे। सबसे पहले उन्हें समोसे केँ लिएआलू रेडी करना थां। रूहीजब मसाला मिलने वाली थि, तभी रोहन नें उसेरोक दिया।
अभि अभि रोहन केँ मन मे मसाला मिलने कां एक् तरीका यादआया थां। जिससे समोसा औऱ लजीज हौ जाता। उसनेउसी तरीके सें थोड़े सें आलू मे मसाला मिलाया। औऱ फिन रूही कों चखने केलिए दिया।
रूहीजब उसका स्वाद टेस्ट कि, तौ उसे औऱ दिनों सें बहोत अच्छा लगा।
रूही: भइया। मसाला तोँ बहोत अच्छे सें बना हैं। क्याँ क्याँ मिलाया तूने।
रोहन: दि, पता नहीं केसे मेरे दिमाग़ मे ये आइडिया आया जिससे हम् औऱ अच्छा समोसा बना सकते हैं।
रूही: अच्छा! (कुछ सोचते हुए) औऱ इसमें क्याँ क्याँ मिलाया।
रोहन:बस जोँ रोज मिलते थें। मगरबस मैने मिलने केँ वक्त कों बदल दिया। जौ हम् पहले मिलते थें उसे मैंने बाद मे मिलाया।
रूही: अच्छा मेरे कों भि बताओ तोँ।
रोहन: अच्छा इधर आँ।
रोहन रूही कों मसाले कों मिलने केँ क्रम कों बताने लगा। कुछ हि देर मे दोनो नें मिलकर समोसे कां आलू रेडीकर लिया थां। उसकेबाद दोनो नें टमाटर कि चटनीबना ली।
इसी बीचआधा घंटाबीत चुका थां। आज कां पहला ग्राहक भि आँ गय़ा थां। यहलोग कॉलेज मे पढ़ने वाले बच्चे थें। रूही ग्राहक कों देखकर अंदरचली गई। वो रसोई संभालती थि। वही रोहन बाहर् कां देखता थां।
लड़का:चलो रोहन बाबू!आज क्याँ बनाया हैं। खुशबू बड़ी अच्छी आँ रही हैं।
रोहन: औऱ भैया समोसा हि बनाहुआ हैं।
लड़का: अच्छा चल भइयादो लादे।
रोहन: (दुकान केँ सामने रखे कुर्शियो कि ओर इशारा करतेहुए) भैया एक् मिनट बैठो अभि लाया।
रोहन इतना कहकर अंदरचला गय़ा। वहा उसने प्लेट मे दो समोसे रखे जिसको अभि अभि रूहीछान कररखी थि। उसनेउसे लाकर लड़के कों दे दिया। लड़का समोसा खातेहुए बोला।
लड़का:अरे रोहन भइयाआज तोँ समोसा कुछअलग लगरहा हैं कौन सां चमत्कार डाले होँ तुम्।
रोहन: भैया हमनेकोई चमत्कार नहीं कियाबस रोज जैसा हि बनाया हैं।
लड़का जल्द हि समोसे ख़त्म कर लेता हैं।
लड़का:चल बता कितने रुपएहुए!
रोहन: बारह रुपए भैया।
लड़काबीस कां नोट निकाल कर देता हैं। औऱ रोहनउसे छुट्टे देकर विदाकर देता हैं। उसके जाने केँ बाद दूसरी ग्राहक औऱ तीसरी ग्राहक भि आए। सबआज समोसे केँ स्वाद कि तारीफ भि किएजा रहे थें। धीरे-धीरे धीरे-धीरे साम हौ गई। आज कां पूरा सामान ख़त्म हौ गय़ा थां। बाजार भि ख़त्म होने कों थां।
रोहन: दि, कल क्याँ बनाना हैं।
रूही: भइया, अब हम् रोजकोई दो चीजे हि बनाएंगे। कल हमलोग फ्रेंच फ्राई औऱ समोसा बनाएंगे।
रोहन: अच्छा दि तोँ तुम् यहसभी साफकरो मे तब तक बाजार सें सामान खरीदकर लाता हूं।
रूही:ठीक हैं! अच्छे सें जानां।
रोहनवहा सें चला गय़ा। वो सीधा बाजार आया। उसनेआलू, आटा, मसाले, तेल औऱ भि बाकीकई सारी चीजे खरीदी। तभीउसे एक् नुस्खा यादआया। जिसको पीने केँ बादलोग अपने आप् कों तरोताजा महसूस करते हैं। उसने उसकी पूरीचीज खरीदली।
रोहन जल्द हि लौटआया। तबतक रूही भि पूरे कमरे कों साफकर चुकी थि। उन्होंने जोँ दुकान रेंट पऱ लिया थां उसमे एक् दो कमरे औऱ एक् बाथरूम थां। एक् कमरे कों दोनो नें रसोईबना दिया थां औऱ दूसरे कमरे मे वे स्टोर रूम केँ रूप मे यूज करते थें। बाहर् थोडा सां स्थान थां जिसमे दोनो नें कुछ कुर्सी औऱ टेबलरख दिए थें। वही उन्होंने छाव केलिए आगे प्लास्टिक तंग दि थि।
जबसभी कुछसही होँ गय़ा तौ रोहन औऱ रूही बारी बारी सें नहाकर सजधजकर होँ गए। उन्होंने अपनी बैटरी रिक्सा सें घऱ वापस आँ गए। नेहा नें पहले हि बोल दिया थां कि वो आज अपने फ्रेंड केँ घऱ पर्र नहीं जायेगी। वो सीधाघऱ कों जायेगी।
रोहन रिक्सा चलारहा थां वही रूही पीछे बैठी हुइ थि।
रूही: भइयाआज कितनी कमाई हुईँ हैं।
रोहन: दि कुल मिलाकर आज कि कमाई तेईस हजार कि हुईँ हैं। आज कमाल कां समोसा बना थां।
रूही: अठारह हजार मूलधन निकलकर हमारे पास पांच हजारबचे।
रोहन:हा दि। औऱ मैंने फिनकल केलिए बीस हजार कि सामान खरीदली हैं। मुझे लगता हैं कल भि ज्यादा बिक्री होगी।
रूही:हा। भइया तुमने समोसे कि आलू बनाने वाला नुक्सा कहा सें सीखा।
रोहन जौ रूही सें कुछ नहीं छुपाता वो सीधे सीधेआज सुभह हुइ बात केँ बारे मे बता देता हैं।
रोहन: दि आज सुभह मे क्लास मे सोयाहुआ थां, तौ मेराहाथ बेंच केँ नुकीले किल मे लगकरकर गय़ा थां। उसकेबाद मेराखून वोँ नीलम वाली पेंडेंट पर्र गिरा जिसके बादपता नहीं क्याँ हुआ, एकाएक सिर मे तेज दर्द होनेलगा। औऱ मेरेमन मे फिल्म चलनेलगा। तुम् सोच नहीं सकती मे कितना डर गय़ा थां।
रूही: क्याँ हुआ थां।
रोहन: दि, मेरेसर मे मूवीचल रही थि। जैसेदस लोगो कि जीवन कों मैंने पांच मिनट मे हि फास्ट फॉरवर्ड मे देख लिया होँ। उसकेबाद मेरासर ठीक होँ गय़ा।
रूही: क्याँ बकवास कररहे होँ?
रोहन: दि मे सचकहरहा हु। पहले मुझे भि लगा कि यहसभी बकवास हैं। मगर मैंने बाद मे महसूस किया कि जौ भि चीज मैने देखा हैं वोँ सभीसही हैं। जैसे मैंने अभि समोसे वाले मसाले सजधजकर किए थें। ये मैने एक् कुक कि जीवन सें सीखी। वो बहोत हि मशहूर थां।
रूही: औऱ क्याँ क्याँ सीखा?
रूहीअब रोहन कि ओर दिलचस्पी सें देखरही थि। उसे भि जानना थां कि उसके भइया नें क्याँ क्याँ हासिल किया हैं।
रोहन: दिदी बहोत कुछमगर सभी अभि सही सें याद नहीं हैं। जब मे सभीकुछ ठीककर लूंगा तब आपको बताऊंगा। मैनेबस अभि एक् कुक कि जीवन कों हि अच्छे सें सहेजा हैं। औऱ थोडा बहोत एक् वैध कि जीवन संजोई हैं।
रूही: अच्छा औऱ क्याँ क्याँ देखा।
रोहन: दि कुक एक् बहोत हि अमीर परिवार सें थां। पहले तोँ उसकी जीवनआसन थि। मगर पत्नि केँ धोखा देने सें वो मार्ग पर्र आँ गय़ा। एक् दिन उसकी एक्सीडेंट हौ गई औऱ फिनइस नीलम कि पेंडेंट कि सहायता सें बच गय़ा। उसकेबाद उसने खानां बनाना शुरुआत किया। औऱ एक् मशहूर कुकबना। वो अकबर केँ शासनकाल मे उसका रसोइया भि थां। मगर वो बहोत हि बेकार इंसान थां।
रूही:ऐसा क्यूं?
रोहन: अपने बीबी सें धोखा खानेबाद वो किसी भि स्त्री याँ लड़की पऱ भरोसा नहीं करता थां। नं जाने उसकेबाद उसने कितने लड़कियों औऱ औरतों कि जीवन उसने बरबाद कि थि।
रूही:ओह!
रोहन: औऱ एक् बात बताऊं?
रूही: क्याँ?
रोहन: वो बहोत हि बड़ा कामिना थां। वो लड़कियों कि चुदाई तौ करता हि थां पर्र उसकेबाद उनकोमार भि डालता थां।
रूही:अहह! सच मे कमिना थां। अच्छा औऱ तुमको कुछहुआ क्याँ? कुछ बदलाव? कुछ हानि?
रोहन: नहीं दि।
रूही:चलो तबसही हैं!
रोहन: दि एक् बात बतानी थि। कल सें सुभहजग जानां। हमलोग दौड़ने जायेंगे।
रूही: अच्छा आखिरओ क्यूं?
रोहन: दि, उस रसोइए नें एक् मेडिसिनल खानां रेडी किया थां। जिसको कोई एक्सरसाइज करने केँ बाद लेने सें जिस्म मजबूत होता हैं।
रूही:ओह तोँ ठीक हैं। कल सें नेहा कों भि लें चलेंगे।
रोहन:हां।
रोहन औऱ रूहीऐसे हि बात करतेहुए चलेजा रहे थें। उनकाघऱ एक् पुरानी बस्ती मे थां। वहा पर्र सिर्फ एक् बेडरूम, एक् रसोई औऱ एक् बाथरूम थां। औऱ एक् छोटा सां हॉल भि थां।
उन्होंने देखा कि उनकेघऱ मे कोई लाइट नहींजल रही हैं।
---The End---
हुस्न की परियाँ - Husn Ki Pariyan – New Episode
002: बर्थडे औऱ ख्वाब
रोहन औऱ रूहीबात करतेहुए पहुंच गए। उन्होंने देखा कि वहाकोई नहीं हैं।
उन्होंने देखा कि उनकेघऱ मे कोई लाइट नहींजल रही हैं। उनको बहोत हि डर लगनेलगा।
खैर अभि इस इलाके मे बिजली कि सुविधा नहीं हैं। तौ यहलोग मोमबत्ती औऱ लालटेन हि जलते थें।
रोहन: क्याँ हुआ नेहा तोँ घऱ हि आने वाली थि नाँ?
रूही:हा उसकेपास चाभी भि थि घऱ कि। पता नहींकहा हैं?
रोहन: पहलेघऱ चलकर हि देखते हैं। कहीकुछ हुआ तोँ नहींउसे?
रूही औऱ रोहन दोनोगेट खोलकर अंदर घुसते हैं। अंदर बहोत हि अंधेरा थां। जैसे हि अंदर घुसते हैं। एकाएक मोंबतिया जलने लगती हैं। उन्होंने देखा कि नेहा केँ संग उसकी सहेली रिया, नीतू औऱ काजल भि आई हुइ हैं। संग हि संग रूही कि सहेली मीना, कुमुद औऱ प्रीति भि हैं। उन्होंने पूराहाल कों सजारखा हैं।
[एक् बातबता देताहु! रोहन रूही औऱ नेहा कां जन्म एक् हि दिनहुआ थां। ]
रोहन औऱ रूहीघऱ कि सजावट देखकर चौकगए तब उन्हे यादआया कि आज तौ इन तीनों कां जन्मदिन हैं। पिछले तीनसाल सें उन्होंने जन्मदिन भि अच्छे सें नहीं मनाया थां। उनकारोज कां काम उन्हे थकाकर रख देता थां। इसवजह सें कभी उन्होंने कोशिश हि नहीं कि।
आजघऱ कों ऐसेसजे देख उनकी आंखों सें आंसू आँ गए। नेहा दौड़कर रूही केँ पासआई। औऱ गलेलग कर बोलीं।
नेहा: हैप्पी बर्थडे दि।
रूही: हैप्पी बर्थडे माय प्रिंसेस।
रोहन भि दोनो कों गलेलगा लेता हैं।
रोहन: हैप्पी बर्थडे बोथऑफ माय एंजल्स!
रूही औऱ नेहा: हैप्पी बर्थडे भइया।
फिन सब एक् एक् कर केँ तीनो कों बर्थडे विश करते हैं।
रिया:चलो अबकेक काटो। मुझे तोँ केक देखकर मुंह मे पानी आँ रही हैं।
रिया कों बात सुनकर सब हसनेलगे औऱ माहौल खुशनुमा होँ गय़ा। पहले नेहाकेक कटकर रोहन औऱ रूही कों खिलाती हैं उसकेबाद रूही औऱ रोहनकेक काटते हैं।
रूही औऱ नेहासब कों केक खिलाते हैं। जबसभी कुछ समाप्त होँ गय़ा तोँ सब नें मिलकर हॉल कों साफकर दिया। रोहन खानां बनाने कां बोलकर किचेन मे चला जाता हैं।
वही रोहन केँ जाते हि अबवहा मात्र लड़किया हि बच जाती हैं। रिया अपनेसंग एलेक्सा लेकरआई हुईँ थि। उसनेउसे फोन सें कनेक्ट कर केँ गानालगा दिया। मोमबत्ती कि मद्धिम रोशनी मे हॉल एकदम किसी डीजे कि तरहलग रहा थां सब डांस करनेलगे।
रोहनइधर रसोई मे आकर देखता हैं। फिन सोचने लगता हैं क्याँ बनाए। उसे रसोई मे चावल औऱ आलू हि दिखरहे थें। उसने औऱ सभीकुछ खंगालना शुरुआत किया। उसने देखा कि इनसब समान सें पुलाव औऱ आलू कि सब्जी बन सकती हैं।
उसनेसब समान निकले औऱ पुलाव बनाना शुरुआत किया। अगर वहाकोई औऱ होता तौ रोहन कों तेजीदेख कर हैरान हौ जाता। क्योंकि रोहनइस वक्तकोई शेफ कि तरफकाम कररहा थां। एकदमतेज औऱ सटीक।
लगभग पैतालीस मिनट मे सभीकुछ बनकर तैयार हौ गय़ा थां।
इधरआधे घंटे तक डांस करने केँ बादजब सबकोई थक गय़ा तोँ रूही नें फिन सें हॉल कों साफ कियासंग सब नें सहायता कि। फिन उन्होंने टेबल औऱ कुर्सी लगा दिया थां।
वेलोग बैठकर गप्पे माररहे थें। वैसे भि ये पऱ बतादे कि नेहा कि सहेलियां रिया नीतू औऱ काजल मिडिल क्लास केँ परिवार सें आती हैं। वेलोग पास हि केँ मुहल्ले मे रहते थें। वहा अक्सर मिडल क्लास केँ परिवार केँ लोगरहा करते थें। वही पऱ मीना कुमुद औऱ प्रीति उन्ही कि बस्ती मे रहती हैं।
रोहन रूही कों आवाज़ देता हैं।
रोहन: दि आँ जाओ खानां लेकरचलो।
रूही रोहन कि आवाज़ सुनकर मीना औऱ कुमुद केँ संगसंग रसोई मे आँ जाती हैं। वो रूही केँ घऱ सें बहोत अच्छे तरीके सें जानती थि। वेलोग एक् हि मुहल्ले मे रहते थें। आनां जानां लगा रहता थां।
चारो मिलकर खानां औऱ प्लेट लेँ आए। खाने कि खुशबू सूंघकर तोँ सब केँ मुंह मे पानीआने लगे थें। खानां रखते हि उन्होंने अपनाहाथ चलाना शुरुआत कर दिया। सब स्वयं सें निकलकर खाने पऱ टूट पड़े। रोहन नें खानां थोडा ज़्यादा हि बनाया थां। उन्होंने पूरेबीस मिनट मे पूरा खानां चटकर दिया।
उसकेबाद सबहाथ मुंह धोकर आकारफिन बैठगए। इसबार रोहन भि उनकेसंग थां।
रोहन: अच्छा अब तोँ सबका दसवी कां एग्जाम आने वाला हैं। तोँ सबनेआगे कां क्याँ सोचा हैं?
रिया: रोहन भैया आप् क्याँ कहनाचाह रहे हौ?
रोहन: मतलब कि इंटर मे कौन सां कोर्स लेने वाले हौ तुमलोग। साइंस, आर्ट्स याँ कॉमर्स याँ औऱ कुछ।
रिया: भैया मे तौ आर्ट्स लूंगी। संग मे म्यूजिक। मुझे गिटार बजाना बहोत पसन्द हैं।
नीतू: मे तोँ साइंस लूंगी, वोँ भि बायोलॉजी। मुझे डॉक्टर बनना हैं।
मीना: मे तोँ कॉमर्स लूंगी। मुझे अकाउंटेंट बनना हैं।
कुमुद: मे भि साइंस लूंगी। आगे कां मैने सोचा नहि हैं।
सब:ओह।
काजल: मे आर्ट्स लूंगी। संग मे मुझे डांस भि मनपसंद हैं।
प्रीति: मुझेपता नहीं हैं। मगर मे साइंस हि लूंगी मैथ्स सें।
नेहा: मे तोँ हैकर बनना हैं। मे तौ साइंस हि लूंगी।
रूही: मुझे एमबीए करना हैं। मे साइंस सें हि पढूंगी।
रोहन: मे साइंस लूंगा, बायोलॉजी औऱ मैथ्स दोनो।
रोहन: अच्छा तोँ कौनकहा जानां चाहता हैं। वैसेकोई भि मुजफ्फरपुर मे रहकर तोँ पढ़ने कां नहींसोच रहा नं?
सब: नहीं!
ऐसे हि सबकुछ देर पढ़ाई कि बात करते रहते हैं। उसकेबाद मस्ती करने लगते हैं।
रोहन कों कुछयाद आता हैं। वो रिया सें पूछता हैं।
रोहन: रिया यहांकोई ऐसी पार्क हैं जौ सुभह मे ओपन रहती हैं लोगो केलिए। चार - पांचबजे सें।
मीना: रोहन तुम् करना क्याँ चाहते हौ?
रोहन:कल सें मे रूही औऱ रिया केँ संग दौड़ने जाऊंगा चार सें पांचबजे तक।
रिया: रोहन भैया हमारी कम्युनिटी केँ बगल मे एक् पार्क हैं वहारोज सुभह बहोत सारेलोग वहा जाते हैं।
काजल: क्याँ मे भि आँ सकती हूं?
रिया: आँ जानां! वैसे भि तेरेघऱ सें पास हि हैं।
बाकीसभी: तब तौ मे भि आऊंगी।
रूही:हा अगर हम् लोगरोज एक्सरसाइज करेंगे तौ फ्रेश रहेंगे।
रात केँ दसबज चुके थें। अबसभी कों घऱ जानां थां। रोहनसब कों लेकरघऱ निकल जाता हैं। इधर रूही औऱ नेहाघऱ कों साफ करने लगते हैं।
नेहा: दिदी! आप् एमबीए क्यूं करना चाहती हैं।
नेहा कों येबात बहोत खटकरही थि। रूही हमेशा सें एक् साइंस मे इंटरेस्ट थां। मगरअब वो एमबीए करना चाहती थि।
रूही: नेहा! मे बापू कि कंपनी फिन सें हासिल करना चाहती हू। हम् बारहवीं केलिए पटनाजा रहे हैं। उसकेबाद आगे कि पढ़ाई मुंबई मे करेंगे।
नेहा: दिदी बापू कि कंपनी तौ दिल्ली मे थि नाँ?
रूही नेहा कों गले लगाकर कहती हैं: माय लिटिल प्रिंसेस। अगर हम् बिनाकुछ बने दिल्ली पहुंचे तौ हमारे दुश्मन हमे कच्चा चबा जायेंगे।
नेहा:ओह अच्छा। दिदी क्याँ मे आपकेसंग अपने दुकान पऱ चल सकती हूं।
रूही: क्यूं क्याँ हुआ? रिया केँ घऱकुछ हुआ क्याँ?
रूही औऱ रोहन नहीं चाहती थि कि नेहा दुकान पऱ जाए। नेहा हमेशा सें उनकी नजरों मे एक् बच्ची केँ जैसी थि। वे नहीं चाहते थें कि समाज कि गंदगी उसको देखनी पड़े।
नेहा: दि, रिया केँ मां औऱ पिताजी केँ बीच बनती नहीं हैं। वे हमेशा एक् दूसरे सें झगड़ा करते रहते हैं। मे नहीं चाहती थि कि उनके झगड़े केँ बीच मे आऊं।
रूही:ओह! नीतू औऱ काजल केँ घऱ?
नेहा: दि नीतू केँ घऱ भि वही हैं। नीतू केँ पिताजी हमेशा शराब पीकरआते हैं औऱ उसकी माँ सें झगड़ा करते हैं।
रूही: औऱ काजल केँ घऱ? उसके माँ पिताजी तौ नहीं हैं नं?
नेहा: दि काजल केँ तौ माँ पिताजी नहीं हैं मगर उसका भइया बहोत बड़ा ठड़की हैं। बहोत हि गंदी नजरो सें देखता हैं।
रूही उसकीबात सुनकर सोच मे पऱ जाती हैं। ऐसे तोँ वो नेहा कों नहि लाना चाहती थि अपनेसंग दुकान पऱ मगरफिन उसनेमन बना लिया कि वो रिया कों कल सें संग हि लेँ जायेगी।
रूही: अच्छा बाबा। अब तुमने मनबना लिया हैं तौ मे तुम्हे लें चलूंगी। मगर तुम् जाकर करोगी क्याँ?
नेहा भि सोच मे पड़ जाती हैं उसे खानां बनाना तोँ आता नहीं थां। तौ वो करेगी क्याँ?
नेहा: दि मे आप् लोगो कां अकाउंट मैनेज कर लूंगी। वैसे भि मेरी जैसी खूबसूरत लड़की कों देखकर तोँ औऱ भि भीड़ इकट्ठी होगी नाँ?
नेहाये कहकरहंस देती हैं। रूही उसकीबात सुनकर मुस्कुरा देती हैं। रूही कों पता थां कि नेहा बहोत हि शरारती हैं। उसेये सभी सीखने कि भि जरूरत नहि पड़ती।
रूही:यह सभी तुमको किसने बताया।
नेहा: मेरी विद्यालय मे एक् कैंटीन हैं उसकी मैनेजर एक् लड़की हैं जोँ सबका ऑर्डर लेती हैं। मैने लडको केँ मुंह सें सुना हैं कि आधे सें ज़्यादा लड़के तोँ उस लड़की कों देखने जाते हैं। वो लड़की भि बहोत हि सेक्सी हैं।
रूही:ओह! अच्छा, तौ तुम् विद्यालय मे यहीसभी सीखने जाती होँ क्याँ?
रूही कि बात सुनकर नेहा एक् पोज मरतेहुए बोलती हैं।
नेहा:ओह! दि, आप् कौन सें जमाने मे जीरही हौ येसभी भि कोई सीखने वालीचीज हैं। ऐसीबात सिखाई नहीं जाती स्वयं आँ जाती हैं।
रूही:ओह अच्छा?
नेहा: बुरीबात बहोत जल्दसमझ मे आती हैं दिदी।
रूही: अच्छा मेरी मम्मी! औऱ कुछ भि कहना हैं तुम्हे? अगर तेरी इतना हि कहना होता तौ कहकरचली गई होती।
नेहा (शरमाते हुए):ओ दि! मे भइया सें बहोत प्रेम करती हूं।
नेहा कि शर्माना देख रूहीसमझ गई कि नेहा रोहन कों भइया बेहन सें भि ज़्यादा प्रेम करती हैं। रूही कों इसपरकोई आपत्ति नहि थि। वो भि रोहन सें भइया बेहन सें भि ज़्यादा प्रेम करती थि। ये भि जानती थि कि नेहा रोहन सें प्रेम करती हैं।
रूही(नासमझी मे): हा तौ! ओ तोँ मे भि करतीहु।
नेहा(पेर पटकते हुए): दि मे भइया बेहन वाला प्रेम नहीं। एक् लड़की लड़के वाला प्रेम करतीहु!
रूही:ओह!
रूही कों ऐसे बिनाकोई जवाब देतेदेख नेहा कों कुछसमझ नहि आता कि उसकी दि नाराज हैं याँ नहीं?
नेहा: दि आपनेकुछ बोला नहि!
दोनो नें अबतक बर्तन साफकर लिए थें औऱ घऱ कि सफाई भि होँ गई थि। रूही बेडरूम मे आकरबेड पऱ बैठ गई। वही नेहा उसकीगोद मे जाकरसो गई। रूही नेहा कां सिर सहलात हुए कहती हैं।
रूही: नेहा, मे तुमसे बिल्कुल भि नाराज नहींहू। सच कहूं तोँ मे भि भइया सें प्रेम करतीहु। मगर मुझेसमझ नहि आता कि रोहन हमारे बारे मे क्याँ सोचता हैं?
नेहा रूही कि बात सुनकर आवक भि थि औऱ खुश भि। क्योंकि अबउसे अपनी दि सें कोई प्रोब्लम नहीं थि। नेहाअब धीरे-धीरे रूही कि गोद मे लेटी हुई थि।
नेहा कों रूही कां यूंसर सहलाना भि अच्छा लगरहा थां। वो वैसे हि लेटी लेटी रूही कि कमर मे हाथडाल कर सोने लगती हैं। कुछदेर पहले डांस करने सें वो बहोत थक चुकी थि इसीलिए वो कुछदेर मे हि सो जाती हैं।
रोहन कों बाकीसभी लोगो कों छोड़कर आने मे लगभग पंद्रह मिनटलग जाते हैं। वो जबघऱ कों लौटा तौ उसने स्वयं कि चाभी सें घऱखोल कर अंदरआया। जब वो बेडरूम मे आया तोँ उसने देखा कि नेहा औऱ रूहीसो चुके हैं।
नेहा कां सिर रूही कि गोद मे हैं औऱ रूही उसके बालो मे हाथ फेरते हुएसो गई हैं। रोहन उनकोऐसे देखकर मुस्कुरा देता हैं। उसे बचपन कि बातयाद आँ जाती हैं जब मम्मी तीनों कों लेकरऐसे हि सो जाया करती थि। रोहन कों येसभी याद करतेहुए आंखो सें आंसूआने लगते हैं।
रोहन जल्द हि अपने अंशुओ कों छिपा लेता हैं। वो जाकर मुंहहाथ धोता हैं औऱ फिन कपड़े बदलकर सोने केँ लिए बेडरूम मे आँ जाता हैं।
वो आकर रूही औऱ नेहा कों सही सें सुलाता हैं। दोनो केँ माथे पऱ किसकर केँ बगल मे लेट जाता हैं।
WORD COUNT: 1998
THE END
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