Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
ब्लाउज़ अभि भि उसके जिश्म पर्र हि थां औऱ नेहा बिल्कुल बुत कि तरह खड़ी थि। उसको बिल्कुल मन नहि थां करने कों, क्योंकी वोँ दो-दो सें चुदवाकर आई हुईँ थि। नेहा पेटीकोट औऱ अनहक ब्लाउज़ मे खड़ी थि औऱ तभी प्रवींद्र नें शावरखोल किया।
नेहाठीक शावर केँ नीचे थि औऱ पानी उसकेसर सें होकर उसके जिश्म कों भिगोने लगा। उसके लंबे काले बालों सें पानी उतरते हुए उसकेगले सें गुजरते हुये उसकी चूचियों केँ अंदर जातेहुए पेट कि तरफ सें होकर पानी उसकी बुर औऱ जांघों सें गुजरता गय़ा औऱ प्रवींद्र नेहा कों छोड़कर एक् कदम पीछे खड़े होकर पानी कां खेल देखने लगा। सोचा पानी भि नेहा केँ अंग-अंग कों तराशरही हैं। नेहा भि अपनासर ऊपर उठाकर पानी कां लुत्फ़ लेनेलगी अपनेतन कों औऱ भिगोते हए। फिन प्रवींद्र नें नेहा कि भीगीकमर पर्र हाथ फेरा औऱ उसके नजदीक गय़ा।
उससमय तक नेहा थोड़ी बहत उत्तेजित होनेलगी थि भीगकर। मगर उसको औऱ कुछ चाहिए थां गर्म होने केँ लिए। तोँ प्रवींद्र नेहा केँ सामने घुटनों पऱ गय़ा औऱ उसने धीरे-धीरे सें उसकी पेटीकोट कों उठाना शुरुआत किया जिसका वजनबढ़ गय़ा थां भीगने कि वजह सें। प्रवींद्र उसकोबहत धीरे धीरे उठता गय़ा ऊपर नेहा केँ चेहरे मे देखते हुए। उसके चेहरे पऱ पानीअब भि बहरहा थां शावर सें गिरकर। नेहाकभी कभार अपने दोनों हाथों कों चेहरे पर्र फेररही थि बालों कों पीछे करतेहए। पेटीकोट ऊपर उठता गय़ा औऱ आरामसे नेहा कि सुंदर जांघे नजरआने लगीजिस पर्र भि पानीउतर रहा थें।
उससमय उसकी जांघे इतनी हसीन औऱ आकर्षक लगरही थीं कि प्रवींद्र कों लगा कि उसका लण्ड पैंट कों फाड़कर बाहर् निकल आएगा। औऱ जब पेटीकोट नेहा कि कमर तक उठा दिया प्रवींद्र नें तोँ नेहा कि भीगी हुईँ पैंटी कों देखकर उससेरहा नहि गय़ा। तब भि वहा सें पानी गुजररहा थां। नेहा नें अपनी दोनों जांघों कों एक् केँ ऊपर एक् किया थोडा कसमसाते हए। प्रवींद्र नें अपना मुँह पैंटी सें लगाया औऱ वहा सें बहते पानी कों पिया। फिन अपनीजीभ कों पैंटी पऱ दबाते हुए बुर केँ छेद मे धंसाया। लगता थां कि वोँ अपनीजीभ सें एक् छेद करनाचाह रहा थां पैंटी पऱ, जिसतरह सें जीभ कों गड़ारहा थां वहा।
औऱ वोही लम्हा थां जब नेहा कि आग भड़की औऱ उसकोअब सभीकुछ करने कि जरूरत पड़ गई। नेहा नें प्रवींद्र केँ सर कों अपनी बुर पर्र दबाते हुए उसकेसर केँ बालों कों अपनी मुट्ठी मे भरकर नोंचा, जबकी प्रवींद्र अपने दाँत सें उसकी पैंटी उतारने पऱ लग गय़ा। औऱ कुछदेर मे दोनों नंगेपाए गये, शावर कां पानी दोनों कों बिल्कुल भिगा चुका थां, दोनों केँ तन पऱ पानीबह रहा थां, दोनों एक् दूसरे कों बाहों मे भरेहुए थें किस करतेहुए औऱ पानी कों निगलते हुए क्योंकी किस करते टाइम शावर कां पानी दोनों मे मुँह मे आँ रहा थां। नेहा नें अपने जिश्म पर्र मलने केँ लिए उसको अपना शैम्पू दिया, औऱ थोडा सां अपनी हथेली मे भि लिया प्रवींद्र केँ जिश्म पर्र लगाने केँ लिए।
फिन दोनों एक् दूसरे केँ तन पर्र शैम्पू मलनेलगे। प्रवींद्र नेहा कि बुर तक गय़ा औऱ बुर कों अच्छी तरह सें शैम्पू सें धोया। उस वक़्त नेहा कां जिश्म एक् साँप कि तरहऐंठ रहा थां खड़े पोजीशन मे हि। फिन प्रवींद्र नें उसकी बुर कों चूसना शुरुआत किया, उसकीकमर मे बाहें लपेटकर औऱ अपनी हथेली कों नेहा कि गाण्ड पऱ दबाते हए। उसके उंगलियां उसकी गाण्ड केँ भरेहए गोश्त पर्र धंसरही थीं। एक् गहरी चसाई केँ बाद, जिसने नेहा कों बिल्कुल गर्मकर दिया औऱ उसकी बुर कां पानी शावर केँ बहते पानी मे घुलरहा थां। तब वक़्त थां कि नेहा अपने देवरु कों नहलाए।
नेहा अपने घुटनों केँ बलबैठ गई औऱ प्रवींद्र केँ खड़े लण्ड पऱ शैम्पू कों मला औऱ धीरे धीरे नेहा कि उंगलियां फिसलती गई अपने देवरु केँ लण्ड पर्र। नेहा नें उस पोजीशन मे उसका लण्ड धोया बिल्कुल जैसेमूठ माररही थि उसको। आहिस्ता नेहा कि हथेली नें रफ़्तार पकड़ी औऱ प्रवींद्र थरथराने लगा औऱ कमर हिलाते हुए अपने लण्ड कों अपनी भाभी केँ हाथ मे जैसे उसकीहाथ कों चोदरहा थां। औऱ आखिर मे झड़ने कां समयहआ क्योंकी तब तक दोनों कों उसकी सख्त जरूरत पढ़ गई थि। प्रवींद्र खड़ाहुआ औऱ नेहा कों बिल्कुल उस पोजीशन मे लिया जैसेउस टाइम लिया थां जब नेहा पत्थर पऱ कपड़े धोरही थि। उसने नेहा कि एक् टांग कों अपनेहाथ मे थामा औऱ उसको अपने लगभग खींचा।
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नेहा बाथरूम कि दीवार केँ ठंडे मार्बल पऱ पीठकिए खड़ी थि, औऱ प्रवींद्र नें अपने लण्ड कों उसकी बुर मे घुसाया जिससे नेहा नें एक् तड़पती आवाज़ दि औऱ अपनी दूसरे टांग कि उंगलियों पर्र खड़ी होँ गई उसको औऱ ज़्यादा पोजीशन देतेहुए अंदर घुसाने केँ लिए।
प्रवींद्र अपने आपको खोता गय़ा एक् केँ बाद एक् जबरदस्त धक्का देतेहुए अपनी भाभी कि बुर मे। उसका मुंहउस समय नेहा केँ भीगेहुए गले कों चाटरहा थां, औऱ जल्द हि गर्दन झुकाकर उसकी चूचियों कों चूसने लगा,
धक्कों केँ रफ़्तार बढ़ाते हुए। नेहा सिसकती गई अपने जिश्म कों उसके जिश्म सें रगड़ते हुए औऱ अपनी चूचियों कों उसके छाती पर्र दबाते हुए।
फिन नेहा कि तड़पती आवाज़ सुनाई देनेलगी औऱ कुछऐसे आई- “हम्म्म। आआहह। इस्स्स्स। आईलोव यू बेबी.हाँ तेज औऱ तेजकरो। हाँअब करो। हम्म." औऱ नेहाझड़ गई, प्रवींद्र कों बहोत ज़्यादा जोर सें अपनी बाहों मे जकड़ते हुए।
फिन प्रवींद्र नें अपने लण्ड कों बुर केँ बाहर् निकाला औऱ नेहा कों घुमाकर देवार सें चिपकाया। ठंडी संगेमरमर कि दीवार पर्र नेहा कि चूचियां दबगईं औऱ प्रवींद्र नें नेहा कि गाण्ड केँ बीच मे अपने लण्ड कों रगड़ा, थोडा सां शैम्पू लगाया अपने लण्ड पर्र औऱ नेहा कि गाण्ड पऱ औऱ पीछे सें अपनी बाहों मे नेहा केँ भीगे जिश्म कों जकड़ा जोश मे थां, अपनी जवान भाभी केँ जवान ) जश्म कों बाथरूम केँ अंदर पाकर, फिन लण्ड कों थोडा उसकी गाण्ड केँ ऊपर रगड़ा प्रवींद्र नें औऱ तब उसकी गाण्ड केँ छेद पर्र लण्ड कों मसला औऱ झट सें छेद केँ अंदर लूंस दिया, जिससे नेहा कि चीख निकल गई। शैम्पू केँ होने कि वजह सें लण्ड आसानी सें घुस गय़ा थां गाण्ड मे।
फिन प्रवींद्र अपनी भाभी कि गाण्ड मारने लगा उसको दीवार सें चिपकाए हुए। नेहा कि साँस उखड़ी जारही थि जब तक उसका देवर जी उसकी गाण्ड मारता रहा। प्रवींद्र अपने पैरों केँ उंगलियों पऱ खड़ेहुए अपना लण्ड ठुसता गय़ा अपनी भाभी कि गाण्ड कि गहराई मे औऱ दिमाग़ केँ अंदर एक् दृश्य बनता गय़ा कि किसतरह सें उसके दोनों भइया उसकोचोद रहे थें औऱ वोँ मज़ा लेँ रही थि। नेहा केँ भाइयों कों सोचते हए नेहा कि गाण्ड माररहा थां प्रवींद्र। फिनमन मे उसनेशीक कों भि सोचा, शीक केँ मोटे लण्ड कि कल्पना किया कि किसतरह सें नेहाउस लंबे मूसल कों अपनी गाण्ड मे लेँ रही थि मजे सें।
वोँ सभी सोचते हुए प्रवींद्र झड़ने कों आया औऱ चिल्लाया- “आगघघ्ग। भाभी आआहह। इस्स्स्स। बहोत मज़ा
आया भाभीईई वाहह। इस्स्स्स.” औऱ लण्ड केँ पूरे वीर्य कों प्रवींद्र नें उसकी गाण्ड केँ अंदर छोड़ा, अपने मुँह सें नेहा कि गरदन पर्र उसी स्थान चूसते हए जहाँ सुनील नें निशान बनाया थां, ठीकउसी स्थान पर्र वोँ भि चूसता गय़ा उस निशान कों औऱ भि गहरा
दोनों हाँफरहे थें, औऱ नेहा नें इस्स्स्स। करतेहुए उसको धीरे-धीरे सें कहा- “उफफ्फ़। अब निकालो उसकोवहा सें."
मुश्कुराते हुए प्रवींद्र नें पूछा- “क्याँ निकालूं भाभी औऱ कहां सें?"
नेहा नें उसको हल्के सें झापड़ मारते हुएकहा- “अपने लण्ड कों निकालो मेरी गाण्ड मे सें, अब वोँ नरम होँ चुका हैं बदमाश कहीं कां, अपनी भाभी कि गाण्ड मारता हैं बेशर्म."
प्रवींद्र नें हँसते हुए लण्ड कों बाहर् खींचा औऱ नेहा कों बाहों मे भरकरकिस करनेलगा, उसकी चूचियां प्रवींद्र कि छाती सें चिपक केँ फ्लैट हौ गईं। उस रात कों नेहा कों औऱ करने कि मूड नहि थि तौ वोँ अपने कमरे मे बंदरही, ससुरजी केँ यहा नहि गई। मगर ससुरजी उसरात कों करना चाहता थां। रात 1:30 बजे तक ससुरजी उसका इंतेजार करतारहा औऱ जब नेहानजर नहि आई तौ ससुरजी उसके कमरे मे गय़ा। नेहा गहरी नींद मे थि जब ससुरजी नें उसको हिलाकर जगाया। एक् झटके मे उसकी आँखें खुली औऱ बचकनी आवाज़ मे उसनेकहा कि उसकामन नहि हैं आज।
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मगर ससुरजी नें कहा कि उसका तौ बहोत हि मन हैं औऱ उससे इंतेजार नहि होँ रहा। फिन ससुरजी नें नेहा कों अपनीगोद मे उठाया एक् बच्ची कि तरह औऱ अपने कमरे मे लें गय़ा। नेहा जमुहाइ लें रही थि मुँह पऱ हाथरखे हुए, वोँ अपनी फ्लिमसी नाइटी मे थि बिना ब्रा केँ, उसकी पैंटी ड्रेस केँ ऊपर सें दिखरही थि। ससुरजी उसकोगोद मे लेकर चलतेहुए हि खड़ा होँ गय़ा औऱ उसको चोदने केँ लिए बेकरार थां। नेहा कों अपने पलंग पऱ ससुरजी नें लेटाया औऱ खूब चोदा उसको, जी भरके चोदा।
नेहा चिल्ला उठी, पिछले 24 घंटों मे 4 मर्दो सें चुदवाते हुएथक गई थि। दो भाइयों सें, फिन प्रवींद्र सें औऱ अब ससुरजी सें। फिन नेहा ससुरजी केँ संग हि सो गई अगली सुभह तक उसको बाहों मे जकड़कर।
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नेहा कां पति रवींद्र सुभह 6:00 बजेउठा, टायलेट गय़ा, बाथ लिया, ब्रश किया, मगर नेहा कों नहि ढूँढा हालांकी वोँ बेड पऱ कमरे मे नहि थि। उसकोपता थां कि नेहा उसके बाप केँ कमरे मे उसकेबेड पर्र सोई होगी। अब नेहा कि रवैया कैसी थि रवींद्र कि ओर?
नेहा उसकेसंग बहोत मीठी-मीठी बातें करती थि। उसको नेहाहर सुभहगरम चाय सर्व करती थि, जब भि उसको पानी कि जरूरत होती तोँ नेहा उससे पानी देती थि, सबकेसंग उसको भि डिनर सर्व करती थि, औऱ जब रवींद्र खेत सें वापसआता थां तोँ नेहा उसकेहाथ पांव दबाती थि औऱ रात कों जब तक रवींद्र सो नाँ जाए नेहा उससे बातें करती थि। तौ नेहा एक् पत्नि कां फर्ज़ निभाती थि रवींद्र केँ संग चुदाई केँ सिवा। नाताऐसा थां जैसे कि रवींद्र उसका भइया हैं याँ कोई करीबी रिश्तेदार जिससे कोई रिश्ता होँ।
रवींद्र दिल सें तोँ चाहता थां नेहा कों मगरकुछ कर नहि पाता थां। वोँ तोँ स्वयं शर्मिंदा थां उसकेलिए औऱ जबउसे पता चलता कि नेहाउस तरह सें उसके लगभग आँ रही हैं तौ वोँ कापने लगता थां औऱ उसके पशीने छटने लगते थें। इसलिये नेहा नें उसके औऱ लगभग जानां बंदकर दिया थां, बस पत्नि केँ बाकी केँ फर्ज़ निभाती थि। रवींद्र कों कभीकोई शिकायत कां मौका नहि मिला थां नेहा कि तरफ सें। हाँ उसको नेहा औऱ उसके पिता केँ रिश्ते केँ बारे मे पता थां क्योंकी उसी नें इजाजत दिया थां उसरात कों अपने पिता कों नेहा सें संभोग करने कि।
उस सुभह कों नेहा कि नींद टूटी तोँ वोँ सदमाखा गई, यह देखकर कि उजाला हौ गय़ा औऱ वोँ तब तक नींद मे थि औऱ वोँ भि अपने ससुरजी केँ बैड पऱ उसकेसंग। बिल्कुल नंगी थि। उसको हैरानी हुइ कि रातभर वोँ नंगी सोतीरही ससुरजी केँ संग। सभी थकान कि वजह सें हुआ थां उसने सोचा औऱ जल्द सें अपनी नाइटी उठाई औऱ भागती हुई अपने कमरे केँ तरफ बढ़ी। मगर रवींद्र किचेन मे गरमचाय पीरहा थां जौ उसने स्वयं बनाया थां, उसने नेहा कों देखकर भि अनदेखा किया। नेहा कों बहोत चिंता महसूस हुई ये देखकर कि उसके पति नें उसको, उसके ससुरजी केँ कमरे सें तकरीबन नंगी निकलते हुए देखा थां।
जब रवींद्र औऱ उसके पिता खेतचले गये तोँ हर सुभह कि तरह नेहा एक् कपगरम चाय लेकर प्रवींद्र केँ कमरे मे गई उसको उठाने केँ लिये। उसको उठाते वक्त नेहा उसकेसंग बहोत छेड़खानी करती थि हमेशा। ऐसा लगता थां एक् मम्मी अपने नटखट बच्चे कों जगारही हैं वैसेकुछ नजारा होता थां हर सुभह प्रवींद्र कों जगाते वक्त। अपनी नटखटी हरकतों सें नेहा कों तंग करने केँ बाद आखिर मे प्रवींद्र उठा औऱ नहाने जारहा थां तोँ नेहा सें फिन सें अंदर चलने कों कहा कि कल कि तरह मिलकर नहाएंगे। मगर नेहा नें हँसते हुए उससेकहा कि वोँ पहले हि नहा चुकी हैं।
इसदिन बारहबजे अचानक नेहा कां ससुरजी घऱ आँ गय़ा। वोँ उस वक्तकभी नहि आता थां। शुक्र हैं कि नेहा
औऱ प्रवींद्र कुछकर नहि रहे थें उस वक़्त। नेहा ससुरजी कों उस टाइमघऱ मे पाकर बहोत डर गई। ससुरजी नें प्रवींद्र कों बुलाया औऱ उससेकहा कि एक् इंजीनियर आयाहुआ हैं बांध बनाने केँ लिए औऱ उसको एक् असिस्टेंट कि जरूरत हैं औऱ उसने प्रवींद्र कां नामदे दिया हैं।
प्रवींद्र कों उस इंजीनियर सें मिलने जानां थां जल्दी अपने पिता केँ संग। प्रवींद्र कों घऱ पर्र रहने कि आदत होँ गई थि, एक् शहजादे कि जीवनजी रहा थां। औऱ उसकोकोई भि काम करने कां कोईमन नहि थां खासकर जबअब नेहा हैं उसकी ज़िंदगी मे उसकेसंग हर लम्हा घऱ मे थि। प्रवींद्र अपने पिता केँ चेहरे मे अजीब नजरों सें देखरहा थां, उसकी नजरें कहरही थीं कि वोँ नहि जानां चाहता कहींकोई काम करने। नेहा भि दुःखी हौ गई
औऱ उदासी केँ संग प्रवींद्र केँ चेहरे मे देखा तोँ उसको भि समझ मे आँ गय़ा कि अब जुदाई होगी दोनों केँ बीच।
जब बाप नें देखा कि प्रवींद्र कों काम करने कां कोईमन नहि हैं, जिसतरह सें वोँ उसको देखेजा रहा थां तौ उसनेकहा- “अबेकब तक मफ़्त कि रोटी तोडेगा त?खेत जानां तोँ त मनपसंद नहि करता.बडा आया पढ़ा लिखा क्याँ कर लियापढ़ लिखकर? कुछ करेगा याँ ऐसे हि घऱ मे बैठेगा तुँ? कुछ तोँ करनासीख। पैसों कि जरूरत तोँ नहि हैं मुझे औऱ नाँ तुझेही, मगर जीवन मे कुछ करना भि तोँ चाहिए। चलउस इंजीनियर केँ संगकुछ कामसीख लें कभी तेरेकाम आएगा."
प्रवींद्र नें धीमी आवाज़ मे कहा- “मेरामन नहि हैं जाने कों."
ससुरजी नें नेहा सें कहा-“बह इस निकम्मे सें बोलो कि गाँव मे आवारा कि तरह घूमना बंद करें औऱ अपने बाप कि कमाई खानां बंद करें, कहो इससे कि कुछ कमाएं, कुछ जिमेदार बनें, किसी कि जिम्मेदारी तौ उठाए। शर्माजी केँ यहालोग कतारलगा रहे हें उसके असिस्टेंट केँ काम केँ लिए। वोँ मेरा साथी हैं इसलिये रुकाहुआ हैं औऱ इसका इंतेजार कररहा हैं, कुछ समझाओ इसेबहू."
नेहा कां चेहरा लाल हौ गय़ा औऱ उसकीसमझ मे नहि आया कि क्याँ कहे?
प्रवींद्र अपने प्रोग्राम केँ बारे मे सोचने लगा, रूपचंद सें मीटिंग केँ बारे मे सोचने लगा, अब केसे वोँ सभी पूरा करेगा इससोच मे पड़ गय़ा वोँ। अब उसको नेहा कि आदत सि हौ गई थि औऱ उससेदूर नहि रहना चाहता थां। तकलीफ होँ रही थि उसकेदिल कों। घुटन सि होँ रही थि उसे। औऱ फिनजलन भि हौ रही थि उसे केँ कहींकोई औऱ नेहा कों नाँ चुरा लें उसकी गैर-हाजिरी मे। उसको बहोत फिकर औऱ गुस्सा होनेलगा, समझ मे नहि आँ रहा थां कि अपने पिता कों क्याँ जवाबदे?
उसके पिता नें जबरदस्ती उसको डाँटते हुए उसकेसंग चलने कों कहा। कोई चारा नहि थां, उसको जानां हि पड़ा। उसने नेहा कों उदासी भरे चेहरे सें देखा, लगता थां कि अबरो पड़ेगा। नेहा कों भि बहोत उदासी महसूस हुई मगर उसने केवल प्रवींद्र केँ चेहरे मे हमदर्दी भरी नजरों सें देखा। नेहाकुछ भि नहि करपाई क्योंकी प्रवींद्र कां बाप आर्डर देरहा थां औऱ उसकेहकम केँ खिलाफ जानां किसी केँ बस कि बात नहि थि।
जब वो दोनों चलेगये तोँ ठीक 5 मिनट केँ बाद डोरबेल बजी। नेहा किचेन मे दोपहर का खाना केँ बाद वाली प्लेटें धोरही थि। नेहा नें स्वयं सें कहा-“कौन हौ सकता हैं इस टाइम?कोई भि तोँ नहि आताकभी, प्रवींद्र वापसभाग आया क्याँ?" फिन उसने सोचा कि वो लोग वापसआए हें, शायदकुछ भूलगये लेने केँ लिए." औऱ वोँ दरवाजा खोलने कों गई।
औऱ जब नेहा नें सामने कां दरवाजा खोला तोँ हैरानी केँ संग बहोत खुश हुईँ अपने पिता कों बहोत सारे समान केँ संगघऱ केँ दरवाज़ा पर्र पाकर। जब सें नेहा कि विवाह हुईँ ये उसके पिता कि पहला विजिट थि। नेहा बेहदखुश हुई अपने बापू कों देखकर औऱ अपने आपको स्वयं उसकी बाहों मे समेट दिया उसने। उसके बापू नें नेहा कों बाहों मे भरके उसके गालों कों चूमा, फिन गले पऱ चूमा औऱ उसके चूतरों पर्र हथेली कों फेरा।
नेहा नें जोर सें खुशी केँ संगकहा- “पिताजी, आप् मात्र 5 मिनटलेट आए, मेरे ससुरजी औऱ देवर जी अभि-अभि घऱ सें निकले हें, दोनों यहीं थें 5 मिनट पहले। प्रवींद्र कों लेनेआया थां मेरा ससुरजी। वरना वोँ अभि यहीं होताहर रोजघऱ पऱ हि रहता हैं."
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